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Halala और Triple Talaq पर इलाहाबाद HC की बड़ी टिप्पणी, कहा- कानून की आड़ में शोषण की इजाजत नहीं

 प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निकाह, हलाला और तीन तलाक जैसी प्रथाओं पर तीखी टिप्पणी की है. अदालत ने कहा है कि इन प्रथाओं की आड़ में महिलाओं के यौन शोषण की अनुमति नहीं दी जा सकती है. कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसी प्रथाएं समाज का "काला पन्ना" हैं, जो संवैधानिक मूल्यों, समानता और मानवीय गरिमा के विरुद्ध हैं. न्यायालय ने कहा कि ऐसे कृत्य न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि समाज की सामूहिक अंतरात्मा को झकझोरने वाले हैं।  न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने पीड़िता के पूर्व पति, चाचा, मौलाना समेत अन्य आरोपियों की याचिकाएं खारिज कर दीं. हाईकोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत कानूनों की आड़ में अपराधों को संरक्षण नहीं दिया जा सकता. अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को नाबालिग के साथ सुनियोजित सामूहिक दुष्कर्म का मामला मानते हुए गहन जांच की आवश्यकता बताई।  कहां का है मामला ये मामला अमरोहा के सैदनागली थाना क्षेत्र का है, जहां पीड़िता ने कम उम्र में निकाह, तीन तलाक, हलाला और फिर से निकाह के नाम पर लगातार यौन शोषण के आरोप लगाए हैं. आरोपियों ने मुकदमा रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की थीं, जिन्हें कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अब तक सामने आए तथ्य बेहद गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया सभी आरोपियों की भूमिका कानून के खिलाफ दिखाई देती है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच के इस प्रारंभिक चरण में एफआईआर रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता और विवेचना जारी रहेगी।   

नागिन डांस बना शादी टूटने की वजह! कानपुर में दुल्हन ने किया इनकार, बाद में हुई मारपीट

 कानपुर शादी की खुशियां उस वक्त  बदल गईं, जब जयमाल से ठीक पहले दूल्हे की हरकतें देखकर दुल्हन ने शादी करने से साफ इनकार कर दिया. आरोप है कि दूल्हा शराब के नशे में इतना धुत था कि स्टेज पर पहुंचते ही संतुलन खो बैठा और लोगों के सामने नागिन डांस करने लगा. इसके बाद दुल्हन ने सभी के सामने कहा कि वह नशे की हालत में आए दूल्हे से शादी नहीं करेगी।  मामला कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के हल्कापुर गांव का है. यहां शोभन बेरी सवाई से बारात पहुंची थी. शादी की शुरुआती रस्में सामान्य ढंग से पूरी हुईं. तिलक के बाद बारात दरवाजे पर पहुंची और जयमाल की तैयारी शुरू हुई. इसी दौरान दूल्हे को स्टेज पर बुलाया गया, लेकिन वहां पहुंचते ही उसकी हालत बिगड़ गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दूल्हा स्टेज पर गिर पड़ा और नशे की हालत में अजीब हरकतें करने लगा. मौजूद लोगों का कहना है कि वह नागिन डांस भी करने लगा. यह दृश्य देखकर दोनों पक्षों के लोग हैरान रह गए. जब दुल्हन को दूल्हे की हालत का पता चला तो वह भी स्टेज पर पहुंची. दूल्हे की स्थिति देखने के बाद उसने बिना देर किए शादी से इनकार कर दिया. दुल्हन ने साफ शब्दों में कहा कि वह किसी नशे के आदी व्यक्ति के साथ अपना जीवन शुरू नहीं कर सकती।  दुल्हन की बात सुनते ही मारपीट  दुल्हन के फैसले के बाद माहौल अचानक गर्म हो गया. दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई. सूचना मिलने पर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराया.इसके बाद मामला थाने पहुंचा, जहां दिनभर पंचायत और समझौते की कोशिशें चलती रहीं. हालांकि दुल्हन अपने फैसले पर अडिग रही और उसने दोहराया कि वह नशे की हालत में आए दूल्हे से किसी भी कीमत पर शादी नहीं करेगी।  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस को घटना की सूचना मिली थी. प्रारंभिक जानकारी में दूल्हे के नशे में होने की बात सामने आई है. उन्होंने बताया कि लड़की पक्ष ने यह आरोप भी लगाया है कि लड़के वालों ने शादी के दौरान एक लाख रुपये अतिरिक्त दहेज की मांग की थी. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दोनों पक्षों के आरोपों की पड़ताल की जा रही है। 

आम की फसल से काफी मुनाफा कमा रहे किसान, देश में 26 फीसदी आम का उत्पादन करता है उत्तर प्रदेशः सीएम

गुणवत्ता, विश्वास व वैश्विक मानकों पर खरा उतरे यूपी का आमः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में किया आम महोत्सव-2026 का शुभारंभ, स्टॉल्स का अवलोकन किया और आम की 800 प्रजातियों के बारे में जानकारी ली आम की फसल से काफी मुनाफा कमा रहे किसान, देश में 26 फीसदी आम का उत्पादन करता है उत्तर प्रदेशः सीएम  सीएम ने की काकोरी ब्रांड की चर्चा, कहा- इसमें देश के प्रति समर्पण का भाव और किसानों की मेहनत की मिठास  उद्यान विभाग को आम की अधिक से अधिक किस्मों को जीआई टैग दिलाने के लिए आवेदन करने का निर्देश लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शुक्रवार को आम महोत्सव-2026 का शुभारंभ किया। उन्होंने स्टॉल्स का अवलोकन कर आम की 800 से अधिक प्रजातियों के बारे में भी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी तैयारी इस तरह होनी चाहिए कि यूपी के किसानों का आम गुणवत्ता, विश्वास व वैश्विक मानकों पर खरा उतर सके। हमारा लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित न रहे, बल्कि ब्रांडिंग, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग के साथ ही प्रोडक्ट की ट्रेसेबिलिटी व ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन पर भी ध्यान देना होगा। तभी यह एक्सपोर्ट के लिए स्वीकार्य होगा। एक बाग आय के कई मॉडल के रूप में फल उत्पादन, प्रोसेसिंग, टूरिज्म, ऑर्गेनिक उत्पाद, मधुमक्खी पालन, खाद्य उद्योग और एक्सपोर्ट के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाने का माध्यम बन सकता है।  माटी की खुशबू व मिठास से आकर्षित कर रहा आम  मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सरकार के स्तर पर प्लेटफॉर्म मिलता है, शोकेसिंग का अवसर प्राप्त होता है तो यूपी के आम की प्रजातियों का पता चलता है। यहां प्रदेश व देश के अलग-अलग राज्यों से आम की 800 वैरायटी प्रदर्शित हो रही हैं। वाराणसी-गोरखपुर का लंगड़ा, गोरखपुर का गौरजीत, बस्ती का आम्रपाली, मलिहाबाद लखनऊ का दशहरी, बागपत व सहारनपुर के रटौल समेत प्रदेश के अलग-अलग जनपदों व मंडलों में पैदा होने वाली आम की किस्में वहां की माटी की सुगंध व मिठास के जरिए इस महोत्सव में आए हर व्यक्ति को आकर्षित कर रही है और यही यूपी की ताकत है।  प्लेटफार्म पर साझा हों किसानों के अनुभव सीएम ने मंच पर सम्मानित होने वाले किसानों से उत्पादन के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने बताया कि एक दिन औद्यानिक फसल से जुड़े किसान से बातचीत हो रही थी। वह प्राकृतिक तरीके से बाग में कीड़ों को नष्ट करने के तरीके बता रहे थे। उनका कहना था कि वह खुद तो इसका उपयोग करते हैं, लेकिन उनके अनुभव को प्लेटफॉर्म न मिलने से अन्य किसानों को व्यापक लाभ नहीं मिल पाता। इसे देखते हुए किसानों को उनके अनुभव साझा करने के लिए अधिक से अधिक प्लेटफॉर्म दिलाने के प्रयास में तेजी लाई जाएगी।  आम की फसल से अच्छा मुनाफा कमा रहे किसान सीएम ने कहा कि किसान सामान्यत: एक एकड़ में आम की फसल से दो से तीन लाख रुपये मुनाफा कमा रहे हैं। इसमें वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग जोड़ेंगे, एक्सपोर्ट के लिए तैयार करेंगे मुनाफा और बढ़ जाता है। आम महोत्सव उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के किसानों के लिए भी शोकेसिंग का आधार है। वे अपने उत्पाद प्रस्तुत कर बायर्स-सेलर मीट के माध्यम से इसे वैश्विक पहचान दिला सकते हैं। मलिहाबाद के आम को जीआई टैग प्राप्त होने से उसे वैश्विक पहचान मिली है।  प्रदेश के हर हिस्से में पैदा होता है आम सीएम ने कहा कि 2017 से यह आयोजन अनवरत हो रहा है। पहले वर्ष महोत्सव में कम वैरायटी आई, लेकिन साल दर साल यह बढ़ता गया। इस साल आम की 800 वैरायटी आईं हैं। इसके साथ ड्रैगन फ्रूट व कमल की ब्रांडिंग भी देखने को मिली। यूपी के सभी 18 मंडलों, 75 जनपदों, 350 तहसीलों और 825 विकास खंडों में आम पैदा होता है। यहां 100 ग्राम से लेकर डेढ़-दो किलो तक वजन वाले आम दिखे। वैरायटी व स्वाद, अन्नदाता किसान व प्रदेश की ताकत को बढ़ाता है।  देश में 26 फीसदी आम का उत्पादन करता है उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के कुल आम उत्पादन में उत्तर प्रदेश 26 फीसदी हिस्सेदारी करता है। महोत्सव में 7 श्रेणियों के 56 वर्गों में 800 से अधिक वैरायटी हैं। सीएम ने आम महोत्सव में बायर्स-सेलर्स मीट की सराहना की। कहा कि यूपी में हम लोग ओडीओपी से जुड़े आयोजन करते हैं तो बायर्स-सेलर्स मीट अवश्य रखते हैं। इससे किसानों व उद्यमियों को अपने उत्पाद आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। औद्यानिक फसलों से जुड़े किसान, स्वयं सहायता समूह, पैक हाउस, एक्सपोर्ट, फूड प्रोसेसिंग, नर्सरी मालिक, बैंकर्स, इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने वाला मैकेनिज्म, मशीनरी व उपकरण आपूर्तिकर्ता, रिसर्च व डवलपमेंट से जुड़े वैज्ञानिक भी इस कार्यक्रम से जुड़े हैं। उद्यान विभाग ने यूपी में औद्यानिक फसलों के लिए ईकोसिस्टम बनाने का कार्य किया है। वोकल फॉर लोकल को प्रोत्साहित करते हैं ऐसे महोत्सव सीएम ने कहा कि दुनिया बदल रही है। तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में यूपी में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य प्रसंस्करण, महिला सशक्तीकरण, कृषि आधारित उद्योगों, पर्यटन, रोजगार व निर्यात संवर्धन की दृष्टि से यह बेहतरीन प्लेटफॉर्म है। ऐसे महोत्सव प्रधानमंत्री जी के वोकल फॉर लोकल को प्रोत्साहित करते हैं और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्रस्तुत करते हैं। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आगे बढ़ने को प्रेरित करती है। कई देशों में होता है यूपी के आम का निर्यात  सीएम ने कहा कि यूपी ने खुद को भारत की बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। यूपी के आम का निर्यात यूके, यूएई, कुवैत, मलेशिया, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, जापान, इटली, रूस, कतर आदि देशों में हो रहा है। एपीडा जैसी एजेंसियां विदेशों में खरीदार व एफपीओ के बीच सीधा संपर्क स्थापित करती हैं।  काकोरी ब्रांड में दिखता है देश के प्रति समर्पण  सीएम ने मलिहाबादी आम की चर्चा करते हुए कहा कि हमने इसे ‘काकोरी ब्रांड’ दिया है। काकोरी के अमर शहीदों ने देश की आजादी के लिए खुद का बलिदान दिया। उनकी स्मृति को जीवंत बनाए रखने के लिए हमने इसे यह नाम दिया। काकोरी ब्रांड में देश के प्रति समर्पण का भाव और किसानों की मेहनत की मिठास है।  जेवर एयरपोर्ट के पास बनेगा इंटीग्रेटेड टेस्टिंग एंड ट्रीटमेंट पार्क सीएम ने कहा कि सहारनपुर, वाराणसी, लखनऊ, अमरोहा में आम के आधुनिक पैक हाउस काम कर रहे हैं। इसके माध्यम से आम … Read more

एक पेड़ मां के नाम 3.0′ अभियान से हरित चेतना को मिलेगी नई उड़ान, जुलाई में स्कूलों में होगा महाअभियान

एक पेड़ मां के नाम 3.0' से हरित चेतना को मिलेगा नया विस्तार, जुलाई में विद्यालयों में पर्यावरण संरक्षण का महाअभियान  'इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ' के जुलाई कैलेंडर के तहत पूरे माह चलेंगी पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी गतिविधियां – पौधरोपण, प्रकृति भ्रमण, पोस्टर, स्लोगन, वाद-विवाद, लेखन और जागरूकता कार्यक्रमों से विद्यार्थियों में विकसित होंगे पर्यावरणीय संस्कार प्रत्येक विद्यार्थी बनेगा एक पौधे का संरक्षक, विद्यालयों से समाज तक पहुंचेगा हरित संदेश लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार विद्यालयों को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की प्रयोगशाला बनाने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रही है। इसी क्रम में 'इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ' के अन्तर्गत जुलाई माह का गतिविधि कैलेंडर जारी किया गया है। जुलाई माह का यह कैलेंडर विद्यालयों में हरित संस्कृति को मजबूत करने और मिशन लाइफ के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। कैलेंडर के अनुसार जुलाई मे पूरे महीने 'स्वस्थ जीवनशैली अपनाना' विषय पर आधारित गतिविधियां आयोजित होंगी, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों में प्रकृति संरक्षण, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और सतत जीवनशैली के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित करना है। कैलेंडर में अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की सहभागिता पर भी विशेष बल दिया गया है, ताकि पर्यावरण संरक्षण केवल विद्यालय तक सीमित न रहकर जनभागीदारी का अभियान बन सके। योगी सरकार का उद्देश्य बच्चों में ऐसे व्यावहारिक संस्कार विकसित करना है, जो उन्हें प्रकृति के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाए। 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' बनेगा प्रमुख अभियान जुलाई माह की सबसे प्रमुख गतिविधि 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' अभियान होगी। इसके अंतर्गत विद्यालय परिसर, सार्वजनिक स्थलों तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त स्थानों पर पौधरोपण कराया जाएगा। विद्यार्थियों को पौधों के वैज्ञानिक, सामाजिक और पर्यावरणीय महत्व से अवगत कराया जाएगा, ताकि वे केवल पौधे लगाएं ही नहीं, बल्कि उनके संरक्षण का संकल्प भी लें। हर छात्र निभाएगा पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक लगाए गए पौधे की देखभाल, सिंचाई, संरक्षण और नियमित निगरानी की जिम्मेदारी विद्यार्थियों को सौंपी जाएगी। इसके साथ ही विद्यालयों में इको क्लब्स के माध्यम से पौधों की प्रगति की समीक्षा तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सामुदायिक प्रयासों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। रचनात्मक गतिविधियों से बढ़ेगी जागरूकता जुलाई के दौरान पोस्टर, स्लोगन, कोलाज, स्वतंत्र लेखन, वाद-विवाद और अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। विद्यार्थियों को प्रकृति भ्रमण के माध्यम से स्थानीय जैव विविधता, पौधों और प्राकृतिक संसाधनों का प्रत्यक्ष अध्ययन कराया जाएगा। दूसरे शनिवार को विशेष पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया जाएगा।

UPTET 2026: AI निगरानी में पहले दिन की परीक्षा शांतिपूर्वक संपन्न, सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद

तीन दिवसीय यूपीटीईटी-2026 की पहले दिन की परीक्षा एआई निगरानी में शांतिपूर्वक संपन्न 02 जुलाई को दो पालियों में 955 केंद्रों पर 6.84 लाख अभ्यर्थी शामिल, 15 फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए 03 जुलाई को दो पालियां, 04 जुलाई को एक पाली में होगी परीक्षा, जारी रहेंगे कड़े इंतजाम   लखनऊ  शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET-2026) की लिखित परीक्षा तीन दिन 02, 03 व 04 जुलाई 2026 को आयोजित की जा रही है। गुरुवार को पहले दिन  प्रथम पाली पूर्वाह्न 09:30 बजे से 12:00 बजे तक तथा द्वितीय पाली अपरान्ह 02:30 बजे से 05:00 बजे तक प्रदेश के 60 जनपदों के 955 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा शांतिपूर्वक, पारदर्शी एवं नकलविहीन वातावरण में संपन्न हुई। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि  परीक्षा के दौरान आयोग में स्थापित एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से उनकी, सदस्यगण, सचिव, परीक्षा नियंत्रक एवं उपसचिव की उपस्थिति में सभी परीक्षा केंद्रों की सघन निगरानी की गई। ए.आई. कैमरों के माध्यम से परीक्षार्थियों की गतिविधियों पर सतत दृष्टि रखी गई। एआई की मदद से संदिग्धों की जाँच के पश्चात प्रथम पाली में 07 एवं द्वितीय पाली में 08 फर्जी परीक्षार्थी, जो दूसरे परीक्षार्थियों के स्थान पर परीक्षा दे रहे थे, पकड़े गए। इनके विरुद्ध विधिक कार्यवाही हेतु उन्हें स्थानीय पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त सभी केंद्रों पर परीक्षा सुचारु, शुचितापूर्ण एवं निर्विघ्न रूप से संपन्न हुई।  पहले दिन की दोनों पालियों में कुल 8,07,636 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 6,84,614 यानी 84.76% अभ्यर्थियों ने प्रतिभाग किया। महिला परीक्षार्थियों की उपस्थिति 84.69% तथा पुरुष परीक्षार्थियों की उपस्थिति 84.86% रही। परीक्षा के सफल संचालन में जिला एवं पुलिस प्रशासन का सक्रिय सहयोग मिला। डॉ. प्रशांत कुमार ने जानकारी दी कि तीन दिवसीय यूपीटीईटी-2026 के तहत कल  03 जुलाई को भी दो पालियों में तथा 04 जुलाई को एक पाली में परीक्षा आयोजित होगी।  उन्होंने कहा कि शेष दो दिनों की परीक्षाएं भी इसी प्रकार एआई निगरानी, शुचिता व सुरक्षा के उच्च मानकों के साथ संपन्न कराई जाएंगी। अभ्यर्थियों से अपील है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी सूचनाओं को ही प्रामाणिक मानें।

युवाओं को कौशल से जोड़ने के लिए योगी सरकार की बड़ी पहल

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के युवाओं को रोजगारपरक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कुशल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य कौशल विकास निधि (एसएसडीएफ) योजना के अंतर्गत अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण के दूसरे चरण का लक्ष्य आवंटन जारी कर दिया गया है।  प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्किल इंडिया’ विजन को साकार करते हुए उत्तर प्रदेश आज कौशल विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप युवाओं को टेक-सेवी बनाने के लिए हर बैच में 4 घंटे का 'एआई फॉर ऑल' और सॉफ्ट स्किल मॉड्यूल पढ़ाना अनिवार्य किया गया है। कोर्सेज की अधिकतम अवधि 900 घंटे तय की गई है और आवासीय सेंटर्स पर रोज कम से कम 8 घंटे की क्लास अनिवार्य होगी। पारदर्शिता के लिए पूरे सेंटर पर निर्धारित मानकों के अनुसार सीसीटीवी लगाना अनिवार्य किया गया है, जिससे मुख्यालय से सीधी निगरानी हो सके। साथ ही, युवाओं का सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए हर सेंटर पर रोज एक हिंदी और एक अंग्रेजी अखबार रखना होगा। नए सेंटर्स का उद्घाटन स्थानीय विधायक से कराना अनिवार्य होगा। संस्थाएं केवल एनसीवीईटी/एनक्यूआर पोर्टल पर लिस्टेड जॉब रोल ही चुन सकेंगी और डीपीएमयू द्वारा गहन जांच के बाद ही बैच को मंजूरी दी जाएगी।  योगी सरकार ने कौशल प्रशिक्षण को पूरी तरह पारदर्शी और परिणाममूलक बनाने के लिए इस बार लक्ष्य आवंटन की प्रक्रिया में ‘कौशल दर्पण’ एआई डैशबोर्ड का उपयोग किया है। जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (डीपीएमयू) से प्राप्त केंद्र कैपेसिटी सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर ही सभी 936 प्रदाताओं को लक्ष्य दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी प्रदाताओं को मिशन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आवंटित टारगेट पूरा करना और सभी बैचों का अप्रूवल लेना अनिवार्य होगा। आधुनिक उद्योगों की मांग को देखते हुए हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, आईटी-आईटीईएस, फूड प्रोसेसिंग, अपैरल और हैंडीक्राफ्ट्स जैसे न्यू-एज सेक्टर्स को विशेष प्राथमिकता दी गई है। न्यू-एज प्रशिक्षण प्रदाता अनिवार्य रूप से केवल फ्यूचरिस्टिक जॉब रोल में ही प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेंगे। मंत्री ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य मिलने का मतलब काम शुरू करना नहीं है। जब तक ट्रेनिंग प्रदाता मिशन के साथ लिखित एग्रीमेंट नहीं कर लेते और उसकी पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक डीपीएमयू बैच बनाने की अनुमति नहीं देगी। मिशन के पास बजट या जरूरत के हिसाब से टारगेट घटाने-बढ़ाने का अधिकार सुरक्षित है। यदि किसी संस्था ने समय पर क्लास शुरू नहीं की या ग्राउंड से कोई शिकायत मिली, तो योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बिना देर किए उनके खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।  मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि कुल 936 प्रशिक्षण प्रदाताओं को 1 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें 831 निजी, राजकीय व स्टार्ट-अप प्रशिक्षण प्रदाताओं को 91,425 युवाओं तथा 105 औद्योगिक/न्यू-एज प्रशिक्षण प्रदाताओं को 14,650 युवाओं का प्रशिक्षण लक्ष्य दिया गया है। इससे पहले अप्रैल में पहले चरण में 957 ट्रेनिंग प्रोवाइडर्स को 99 हजार से अधिक युवाओं के प्रशिक्षण का लक्ष्य आवंटित किया गया था, जिनका प्रशिक्षण वर्तमान में सुचारू रूप से संचालित हो रहा है। एसएसडीएफ योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को स्थानीय आवश्यकताओं और उद्योगों की मांग के अनुसार रोजगारपरक प्रशिक्षण देना है। ‘कौशल दर्पण’ डैशबोर्ड का उपयोग और एआई फॉर ऑल जैसे न्यू-एज व फ्यूचरिस्टिक मॉड्यूल्स को अनिवार्य करके हम उत्तर प्रदेश के युवाओं को भविष्य के वैश्विक बाजारों के लिए तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चयनित संस्थाओं को हर हाल में 01 अगस्त, 2026 से कक्षाएं शुरू करनी होंगी। इसके लिए 17-चरणों का कड़ा टाइम-टेबल जारी किया गया है, जिसमें सेंटर सिलेक्शन, सत्यापन, जागरूकता कैंप, बैच अप्रूवल से लेकर प्लेसमेंट तक की समय-सीमा तय है। कोर्स पूरा होने के बाद केवल 70% या अधिक उपस्थिति वाले छात्रों को ही रोजगार मेले में बैठने का मौका मिलेगा और रिजल्ट के 90 दिनों के भीतर प्लेसमेंट कराना होगा। नौकरी मिलने के बाद भी 365 दिनों तक ट्रैकिंग की जाएगी।

मानसिक मंदित संवासियों के भरण-पोषण के लिए अनुदान राशि 2,000 से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने के निर्देश

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मानसिक मंदित एवं निराश्रित दिव्यांगजनों के लिए संचालित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्रों एवं हाफ वे होम में रहने वाले संवासियों के भरण-पोषण हेतु प्रति संवासी अनुदान राशि 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह किए जाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आश्रय गृहों में रहने वाले मानसिक मंदित एवं निराश्रित दिव्यांगजन पूरी तरह संस्थागत देखभाल पर निर्भर होते हैं। उन्हें पौष्टिक भोजन, समुचित स्वास्थ्य देखभाल और गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। समय के साथ आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती लागत को देखते हुए संवासियों के भरण-पोषण की व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाया जाना आवश्यक है। गुरुवार को दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के सम्मान, सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन से जुड़े प्रत्येक प्रयास को सरकार सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक जनपद में नियमित रूप से दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण शिविर आयोजित किए जाएं तथा पात्र दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। श्रवण बाधित बच्चों का शीघ्र चिन्हांकन कर समयबद्ध कॉक्लियर इम्प्लांट तथा उपचार के बाद पुनर्वास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की योजनाओं का उद्देश्य दिव्यांगजनों को सम्मानजनक, सुरक्षित और आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराना है। सामाजिक, आर्थिक, चिकित्सकीय, भौतिक एवं शैक्षिक पुनर्वास से जुड़ी सभी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। विशेष विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रशिक्षित मानव संसाधन, आधुनिक सुविधाओं तथा शासकीय भवनों में बाधारहित वातावरण विकसित करने के कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विशेष विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकतानुसार शिक्षकों की समयबद्ध तैनाती की जाए। नियमित भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जाए तथा तब तक ऐसी प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए कि दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई किसी भी स्तर पर प्रभावित न हो। बैठक में बताया गया कि विभाग द्वारा दिव्यांग पेंशन योजना, कुष्ठावस्था पेंशन योजना, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना, शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना, दुकान निर्माण एवं संचालन योजना, निःशुल्क मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल योजना, कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम, बचपन डे-केयर सेंटर, विशेष विद्यालय, जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र तथा उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा सहित अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 12,23,295 दिव्यांगजन पेंशन योजना से लाभान्वित हुए, जबकि 34,420 पात्र दिव्यांगजनों को 43,689 विभिन्न प्रकार के सहायक उपकरण वितरित किए गए। इसी अवधि में 226 श्रवण बाधित बच्चों का कॉक्लियर इम्प्लांट कराया गया तथा चालू वित्तीय वर्ष में 68 जनपदों से 335 बच्चों का चिन्हांकन किया जा चुका है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 तक जहां 10 जनपदों में बचपन डे-केयर सेंटर संचालित थे, वहीं वर्तमान में 25 जनपदों में इनका संचालन किया जा रहा है तथा 28 अन्य जनपदों में स्थापना एवं संचालन की प्रक्रिया प्रगति पर है। इसी प्रकार वर्ष 2017 तक 16 विशेष विद्यालय संचालित थे, जिनकी संख्या बढ़कर अब 28 हो गई है। इन विद्यालयों में दिव्यांग बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, छात्रावास, भोजन, स्वास्थ्य परीक्षण, सहायक उपकरण एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उत्तर प्रदेश में बिजली दरें स्थिर और आपूर्ति रिकॉर्ड स्तर पर

लखनऊ  योगी सरकार ने प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए लगातार सातवें वर्ष भी बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं करने का फैसला लिया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी बिजली की दरें वही रहेंगी, जो पिछले सात वर्षों से लागू हैं। खास बात यह है कि इस अवधि में बिजली की दरों में एक पैसे की भी बढ़ोतरी नहीं की गई है, जिससे आम जनता, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को सीधा लाभ मिल रहा है। योगी सरकार के इस फैसले को बिजली उपभोक्ताओं के हित में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इससे आम नागरिकों को आर्थिक राहत मिली है। वहीं बिजली दरों को स्थिर रखने के साथ-साथ योगी सरकार ने विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में भी उल्लेखनीय सुधार किया है। प्रदेश में बिजली आपूर्ति लगातार बेहतर हुई है और शहरों से लेकर गांवों तक निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए व्यापक स्तर पर काम किया गया है। सरकार का लक्ष्य हर शहर, हर गांव, हर सड़क और हर गली तक 24×7 गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाना है। इस वर्ष गर्मी के मौसम में उत्तर प्रदेश ने बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड भी बनाया। राज्य में अधिकतम विद्युत आपूर्ति 32,673 मेगावाट तक पहुंच गई, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है। इस संबंध में ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने सोशल मीडिया (एक्स) पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी है। ऊर्जा मंत्री ने लिखा कि उत्तर प्रदेश में लगातार सातवें वर्ष भी बिजली की दरें नहीं बढ़ाई गईं। सभी उपभोक्ताओं के लिए 2026-27 में भी वही दरें रहेंगी जो सात वर्ष पहले थीं और यह तब जब विद्युत आपूर्ति भी अधिकतम है।

नवीन परिसर बनेगा आईएएस, पीसीएस समेत विभिन्न सेवाओं के अधिकारियों के प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र

लखनऊ उत्तर प्रदेश में सुशासन को और अधिक प्रभावी, जवाबदेह तथा भविष्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने की दिशा में योगी सरकार शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण संस्थागत उपलब्धि जोड़ने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 3 जुलाई को डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के अत्याधुनिक नवीन परिसर का लोकार्पण करेंगे।  लगभग ₹464 करोड़ से अधिक की लागत से 22.5 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित यह परिसर प्रदेश की सात दशक से अधिक पुरानी प्रशासनिक प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक अधोसंरचना, उन्नत तकनीक और वैश्विक प्रशिक्षण मानकों से जोड़ते हुए नई दिशा देगा। आईएएस, पीसीएस समेत विभिन्न सेवाओं के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण तथा नेतृत्व विकास का यह केंद्र भविष्य की प्रशासनिक चुनौतियों के अनुरूप उत्तर प्रदेश की शासन व्यवस्था को और अधिक सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 75 वर्षों की प्रशासनिक प्रशिक्षण व्यवस्था को मिलेगा आधुनिक स्वरूप उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक प्रशिक्षण व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 1951 में ऑफिसर्स ट्रेनिंग स्कूल (ओटीएस) से हुई थी। पिछले सात दशकों से अधिक समय में इस संस्थान ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस), न्यायिक सेवा, राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित ग्रुप 'ए' एवं ग्रुप 'बी' अधिकारियों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बदलते समय में शासन की चुनौतियों और प्रशासनिक दायित्वों के विस्तार को देखते हुए इस ऐतिहासिक संस्था को अत्याधुनिक प्रशिक्षण अवसंरचना से सशक्त किया गया है, ताकि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशासनिक नेतृत्व तैयार किया जा सके। प्रशिक्षण और प्रशासनिक उत्कृष्टता का केंद्र बनेगा नया परिसर नई प्रशिक्षण अधोसंरचना का उद्देश्य अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य-संस्कृति को अधिक दक्ष, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बनाना है। यहां आईएएस, पीसीएस, न्यायिक सेवा, राज्य सेवाओं तथा विभिन्न विभागों में चयनित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के फाउंडेशन, इंडक्शन और मिड-कैरियर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसके साथ ही नेतृत्व विकास, नीति क्रियान्वयन, डिजिटल गवर्नेंस, परियोजना प्रबंधन, नवाचार, आपदा प्रबंधन, वित्तीय प्रबंधन और जनसेवा जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे बदलती प्रशासनिक चुनौतियों के अनुरूप अधिकारियों की निर्णय क्षमता और कार्यकुशलता को नई मजबूती मिलेगी। प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी को मिलेगी नई ऊर्जा यह परिसर केवल एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं होगा, बल्कि प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी के सतत क्षमता निर्माण का प्रमुख केंद्र बनेगा। राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित अधिकारियों के अलावा विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के पुनर्प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन और विषय-विशेष प्रशिक्षण की भी यहां व्यापक व्यवस्था होगी। मिशन कर्मयोगी के तहत क्षमता निर्माण, सतत अधिगम और व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने वाले कार्यक्रमों को भी इससे नई गति मिलेगी। इससे शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित और उत्तरदायी प्रशासनिक तंत्र तैयार करने में सहायता मिलेगी। विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित होगा परिसर नवीन परिसर में एक साथ 300 आवासीय तथा 900 गैर-आवासीय, यानी कुल 1,200 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था विकसित की गई है। परिसर में 13 अत्याधुनिक प्रशिक्षण कक्ष, 300 सीटों का प्रेक्षागृह, दो बहुउद्देशीय हॉल, 300 क्षमता का छात्रावास, डिजिटल लर्निंग सेंटर, डिजिटल स्टूडियो, डिजिटल लैब, आधुनिक पुस्तकालय, कॉन्फ्रेंस रूम, बोर्ड रूम, शोध एवं अध्ययन सुविधाएं, क्रिकेट मैदान, बैडमिंटन कोर्ट तथा लॉन टेनिस कोर्ट जैसी अत्याधुनिक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की भी सुविधा होगी। सुशासन को मिलेगा स्थायी संस्थागत आधार उत्तर प्रदेश में बीते वर्षों में कानून-व्यवस्था, आधारभूत संरचना, डिजिटल सेवाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ प्रशासनिक व्यवस्था की भूमिका भी लगातार विस्तृत हुई है। ऐसे में आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था समय की आवश्यकता बन गई थी। नया परिसर अधिकारियों और कर्मचारियों को बदलती प्रशासनिक अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार करने के साथ नीति क्रियान्वयन, पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण को और अधिक सुदृढ़ करेगा। प्रशासनिक क्षमता निर्माण को संस्थागत मजबूती देने की दिशा में यह परियोजना उत्तर प्रदेश की सुशासन यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी का नया परिसर राज्य में प्रशासनिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता को नई दिशा देगा। आधुनिक संसाधनों और वैश्विक मानकों से युक्त यह संस्थान सुशासन, नवाचार और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्ध, दक्ष एवं संवेदनशील प्रशासनिक नेतृत्व तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एम. देवराज, महानिदेशक (डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी)

आदपुर–बेहटा संपर्क होगा मजबूत, पीलाखार नदी पर 181 मीटर पुल का शिलान्यास

बिलासपुर  बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए एक बहुत अच्छी खबर है. मिलक तहसील के अंतर्गत ग्राम आदपुर पर बहने वाली पीलाखार नदी पर करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से नया पुल बनाया जा रहा है. रविवार को उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने आदपुर गांव में बनने वाले इस पुल का भूमि पूजन और शिलान्यास किया है. इस पुल के बनने से आसपास के कई गांवों की राह आसान हो जाएगी और बरसात के दिनों में होने वाली आवागमन की परेशानी भी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी. आदपुर और बेहटा को जोड़ेगा पुल मिलक तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम आदपुर में पीलाखार नदी पर पुल बनाया जा रहा है. रविवार को कृषि राज्यमंत्री ने इसका शिलान्यास किया है. इस पुल को बनाने के लिए करीब 22 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं. पुल की लंबाई करीब 181 मीटर होगी. पुल के बनने से आदपुर, बेहटा समेत आसपास के कई गांवों के बीच संपर्क मजबूत होगा. इलाके के लोग लंबे समय से इस पुल के निर्माण की मांग कर रहे थे. शिक्षा और स्वास्थ्य तक पहुंचेगी राह राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने कहा कि यह पुल इलाके के विकास में अहम भूमिका निभाएगा. इसके बनने से व्यापार, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच बहुत आसान हो जाएगी. उन्होंने कहा कि प्रदेश की सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है. सड़कों और पुलों का निर्माण प्रदेश के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हैं.  तय समय पर पूरा होगा काम राज्यमंत्री ने पुल निर्माण के लिए संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि पुल निर्माण को गुणवत्तापूर्ण तरीके से तय समय पर पूरा किया जाना चाहिए, जिससे जनता को इसका शीघ्र लाभ मिल सके. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि विकास कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी.