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UP Startup Policy 2026: स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार का नया रोडमैप तैयार

योगी सरकार की यूपी स्टार्टअप नीति-2026 को छह प्रमुख स्तंभ देंगे रफ्तार  – एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और डीप-टेक पर जोर, फंडिंग, स्किल डेवलपमेंट, उद्योगों से जुड़ाव और वैश्विक पहचान पर फोकस – StartinUP ऑनलाइन पोर्टल बनेगा सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म, रजिस्ट्रेशन से प्रोत्साहन तक की प्रक्रिया होगी ऑनलाइन – समस्याओं के समाधान के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर और सोशल मीडिया की मिलेगी सुविधा  –  युवाओं के आइडिया को कारोबार में बदलेगी नई स्टार्टअप पॉलिसी, एक मंच पर आएंगे स्टार्टअप, निवेशक और इन्क्यूबेटर लखनऊ  योगी सरकार ने प्रदेश को स्टार्टअप का हब बनाने के लिए स्टार्टअप नीति-2026 लागू की है। इसमें नवाचार, तकनीक और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। नई नीति का उद्देश्य प्रदेश में ऐसा मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करना है, जहां युवाओं को नए विचारों को कारोबार में बदलने, वित्तीय सहायता प्राप्त करने, विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेने और अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के अवसर मिल सकें। इसके लिए बुनियादी ढांचे के विकास, वित्तीय सहायता, प्रतिभा विकास, उद्योगों से जुड़ाव, इकोसिस्टम के प्रचार और संस्थागत सहयोग को नीति के छह प्रमुख स्तंभों में शामिल किया गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग और डीप-टेक जैसी उभरती तकनीकों पर ध्यान देकर प्रदेश में नवाचार आधारित उद्यमों के विकास का रास्ता तैयार किया जा रहा है। छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित है नई स्टार्टअप पॉलिसी यूपी स्टार्टअप मिशन के सीईओ सुमित महाजन ने बताया कि योगी सरकार प्रदेश में युवाओं को नौकरी तलाशने वालों के साथ-साथ रोजगार देने वाले उद्यमियों के रूप में आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। स्टार्टअप नीति-26 के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रयास है कि प्रदेश के युवाओं, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और नए उद्यमियों को अपने विचारों को विकसित करने के लिए जरूरी संसाधन, मार्गदर्शन, तकनीकी सुविधाएं और बाजार से जुड़ने के अवसर एक ही व्यवस्था के तहत मिलें। इससे प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप नए उद्यमों को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-26 को छह प्रमुख स्तंभों के आधार पर तैयार किया गया है। इनमें बुनियादी ढांचे का विकास, वित्तीय सहायता, प्रतिभा विकास एवं क्षमता निर्माण, उद्योगों से जुड़ाव, इकोसिस्टम का प्रचार-प्रसार और इकोसिस्टम को मजबूत बनाना एवं सक्षम करना शामिल हैं।  इन छह प्रमुख स्तंभ पर काम करेगी नई स्टार्टअप पॉलिसी सीईओ ने बताया कि पहले स्तंभ में बुनियादी ढांचे के तहत स्टार्टअप के लिए भौतिक और डिजिटल सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर है। दूसरे स्तंभ में वित्तीय सहायता के माध्यम से सरकारी योजनाओं और निजी निवेशकों से पूंजी प्राप्त करने के अवसर बढ़ाए जाएंगे। तीसरे स्तंभ में प्रतिभा विकास एवं क्षमता निर्माण के तहत शिक्षा, कौशल विकास और प्रशिक्षण के माध्यम से नवाचार आधारित कार्यबल तैयार करने का लक्ष्य है। चौथे स्तंभ में उद्योगों से जुड़ाव के जरिए स्टार्टअप, उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और सरकार के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि नए उद्यमों को बाजार तक पहुंचने में मदद मिले। वहीं, पांचवे स्तंभ में इकोसिस्टम के प्रचार-प्रसार के लिए प्रदेश की स्टार्टअप क्षमता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने, साझेदारियां विकसित करने और लक्षित प्रचार गतिविधियों पर ध्यान दिया जाएगा। छठे स्तंभ में संस्थागत क्षमता, हितधारकों की भागीदारी और सहयोग तंत्र को मजबूत करना भी नीति का अहम हिस्सा है। StartinUP ऑनलाइन पोर्टल बनेगा सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म नई स्टार्टअप नीति के तहत StartinUP ऑनलाइन पोर्टल को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जाएगा। यह स्टार्टअप, निवेशकों, इन्क्यूबेटरों, मेंटर्स, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) और अन्य संबंधित पक्षों को एक मंच पर जोड़ने का काम करेगा। इसे योगी सरकार के स्टार्टअप कार्यक्रम की डिजिटल पहचान के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे नीति के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और कार्यों के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा मिल सके। पोर्टल पर स्टार्टअप से जुड़ी नीतियों, प्रोत्साहनों, संसाधनों, इन्क्यूबेशन सेंटरों, आगामी कार्यक्रमों और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें उद्यमियों को क्षमता निर्माण से जुड़े कार्यक्रमों और पाठ्यक्रमों का लाभ भी मिल सकेगा। इनमें उद्यमिता विकास, स्टार्टअप प्रबंधन, वित्तीय साक्षरता, नियामकीय अनुपालन, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर), तकनीक के व्यावसायीकरण और बाजार तक पहुंच जैसे विषय शामिल होंगे। इसके लिए विषय विशेषज्ञों और सहयोगी संस्थानों को पोर्टल से जोड़ा जाएगा। इस प्लेटफॉर्म पर स्टार्टअप, इन्क्यूबेटर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑनलाइन पंजीकरण कर सकेंगे। वे प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन और अपने दावों को संबंधित नोडल एजेंसी के समक्ष जमा कर सकेंगे।  स्टार्टअप से जुड़ी समस्याओं के लिए जारी किया जाएगा टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर नोडल एजेंसी की ओर से इनके मूल्यांकन और मंजूरी की प्रक्रिया संचालित की जाएगी। पोर्टल पर प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) भी उपलब्ध होगी, जिससे दैनिक गतिविधियों और नीति के क्रियान्वयन की निगरानी की जा सकेगी। इसके अलावा पोर्टल का एकीकरण केंद्र सरकार के डीपीआईआईटी, भास्कर और मार्ग जैसे स्टार्टअप इंडिया प्लेटफॉर्म से करने की व्यवस्था है। इसमें भविष्य में नई सुविधाओं और अन्य पोर्टलों के साथ एकीकरण की संभावनाओं को भी ध्यान में रखा गया है। स्टार्टअप से जुड़ी शिकायतों और सवालों के समाधान के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन तथा सोशल मीडिया आधारित सहायता की भी सुविधा मिलेगी। यह मंच स्टार्टअप, इन्क्यूबेटर, एक्सेलेरेटर, मेंटर्स, निवेशकों और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच नेटवर्किंग, साझेदारी और सहयोग को प्रोत्साहित करेगा।

दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, नई पार्टी ‘जननीति भारत’ लॉन्च; जनता के लिए बताए तीन वचन

लखनऊ  आईएएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखने वालीं दिव्या मित्तल ने आज सोशल मीडिया पर लाइव आकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। साथ ही अपनी नई पार्टी ‘जननीति भारत’ की घोषणा की। उन्होने कहा कि राजनीति आप पर राज करती है, लेकिन ये दल आपके राज के लिए बना है। पार्टी के तीन वचन बताते हुए कहा कि नई राजनीतिक पहल के तहत देश की नीतियों के केंद्र में आम लोगों को रखने पर जोर दिया गया है। नीतियां जनता की वास्तविक जरूरतों के आधार पर तय करने की बात कही गई है। किसानों और छोटे व्यापारियों की समस्याओं का समाधान उनके अनुभवों और सुझावों के आधार पर तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही विकास कार्यों और प्रशासनिक फैसलों में जाति, धर्म या पहचान के बजाय लोगों की वास्तविक आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। महिलाओं की सुरक्षा को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। स्थानीय स्तर पर होने वाले विकास कार्यों में जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है, ताकि लोगों की जरूरतों के अनुरूप योजनाएं बनाई जा सकें और उनके क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनी रहे। दिव्या मित्तल ने बनाई जननीति भारत पार्टी दिव्या मित्तल ने वीडियो संदेश में बताया कि राजनीति में आने की बात कहने के बाद उन्होंने लोगों को एक नंबर दिया था, जिस पर इतने संदेश आए कि व्हाट्सएप ने उसे रोक दिया। उन्होंने इसके लिए माफी मांगते हुए लोगों के समर्थन पर आभार जताया। दिव्या ने कहा कि वह उम्मीद का दीया लेकर निकली थीं, लेकिन लोगों के संदेशों ने उन्हें सूरज के सामने खड़े होने जैसा एहसास कराया। उन्होंने अपनी नई पार्टी बनाने का ऐलान करते हुए कहा कि देश में पार्टियों की कमी नहीं, बल्कि सबकी सुनवाई नहीं होने की समस्या है। गंगा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां हर बूंद बराबर है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी पार्टी का नाम ‘जननीति भारत’ रखा है इससे पहले रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की जनसत्ता दल की ओर से दिव्या मित्तल को पार्टी से जुड़ने का प्रस्ताव दिए जाने की भी चर्चा उठी थी। वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी एक सवाल के जवाब में दिव्या मित्तल को सपा में शामिल होने का ऑफर दिया था। और कहा थी कि वो भी अब उन्हें तय करना पड़ेगा कि हरा गमछा और लाल गमछा डाल लें। आपको बता दें आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद नौकरी छोड़ने के बाद राजनीति में आने का फैसला किया। वे मिर्जापुर और देवरिया जैसे जिलों में जिलाधिकारी के पद पर तैनात रह चुकी हैं। अपने कार्यकाल के दौरान दिव्या मित्तल की पहचान सख्त प्रशासनिक कार्यशैली और फैसलों को लेकर चर्चा में रहने वाली अधिकारी के रूप में बनी। हालांकि, उनकी तैनाती के दौरान जनप्रतिनिधियों के साथ मतभेदों की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। मिर्जापुर में विकास कार्यों को लेकर स्थानीय नेताओं के साथ उनके टकराव की बात कही जाती रही है। 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर नौकरी से त्यागपत्र देने की जानकारी दी थी। उन्होंने लिखा कि 13 वर्षों की अविस्मरणीय सेवा यात्रा को अपनी इच्छा से विराम दिया है। साधारण परिवेश में पली-बढ़ीं दिव्या ने आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से पढ़ाई के बाद लंदन में नौकरी की, लेकिन अपने देश के लिए कुछ करने की इच्छा उन्हें भारत वापस ले आई। उन्होंने आईएएस अधिकारी बनने को सौभाग्य बताया। दिव्या ने लिखा कि वह देश को कुछ देने आई थीं, लेकिन उन्हें लोगों से इतना प्यार, सम्मान और अपनापन मिला कि उनकी झोली भर गई। उन्होंने अपने कार्यकाल में साथ देने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगियों के प्रति भी आभार जताया था।  

सीएम योगी का राहुल गांधी पर निशाना, बोले- मसुरियादीन पासी भी गए थे जेल योगी आदित्यनाथ ने किया स्वतंत्रता सेनानी मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण ‘सिर्फ नेहरू ही नहीं, मसुरियादीन पासी ने भी जेल में बिताए दिन’, सीएम योगी का बयान

राहुल गांधी नोट कर लें, सिर्फ नेहरू ही नहीं, मसुरियादीन पासी भी गए थे जेलः मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संविधान सभा के सदस्य व पूर्व सांसद मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का किया अनावरण  सीएम ने कहा, अब मसुरियादीन जी के नाम पर होगा चौराहा, सम्मान किसी परिवार की बपौती नहीं प्रयागराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को तेलियरगंज चौराहे पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, ब्रिटिश जरायम पेशा कानून को समाप्त कराने वाले संविधान सभा के सदस्य एवं पूर्व सांसद महाशय मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण किया। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी नोट कर लें कि देश की आजादी के लिए केवल नेहरू जी ही नहीं, बल्कि मसुरियादीन जी भी जेल गए थे। इनकी आयु 66-67 वर्ष रही, जिसमें 9 वर्ष (1932-1944) वह आजादी की अलख जगाने के लिए जेल में रहे। रिहा होने पर भी वह जन-जागरण करते रहे थे।  अब मसुरियादीन जी के नाम पर होगा चौराहा सीएम ने महापौर से प्रस्ताव मांगा और कहा कि जहां मसुरियादीन जी की प्रतिमा लगी है, वह चौराहा उनके नाम पर बनेगा। प्रयागराज की किसी एक अच्छी संस्था का नाम भी महाशय मसुरियादीन के नाम पर किया जाएगा। वहां भी उनकी भव्य प्रतिमा लगेगी, क्योंकि महापुरुषों को सम्मान देकर ही समाज आगे बढ़ सकता है। भूत को सम्मान देकर वर्तमान संवर सकता है और वर्तमान के संवरने से ही भविष्य उज्ज्वल होगा। महाशय का सम्मान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान है, इसमें कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।  महापुरुषों को विस्मृत नहीं करती भाजपा सरकार सीएम योगी ने कहा कि 2 अक्टूबर 1911 को महाशय मसुरियादीन पासी का भी जन्म हुआ था। इतिहास के कालचक्र ने इन्हें विस्मृत कर दिया था, लेकिन विकास व विरासत पर विश्वास करने वाली भाजपा सरकार महापुरुषों को विस्मृत नहीं करती। हमने उनकी स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने के लिए प्रतिमा का अनावरण किया है।  पं. नेहरू व मसुरियादीन जी साथ चुनकर गए थे संसद  सीएम ने बताया कि मसुरियादीन जी 1946 में यूपी विधानसभा के सदस्य बने, फिर स्वतंत्र भारत में 1952 से 1972 तक चार बार चुनकर संसद गए। 1952 में जब एक सीट पर दो सांसद चुने जाते थे तो पं. नेहरू व मसुरियादीन जी एक साथ चुनकर गए थे। उन्होंने काले कानून के खिलाफ 1952 में ही आवाज उठाई थी। 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर में मुंह की खाने के बाद अंग्रेजों ने 1871 में जरायम पेशा कानून बनाकर पासी समेत तमाम जातियों को अपमानित किया था। बाबा साहेब व मसुरियादीन जी ने उस कानून के खिलाफ लड़ाई लड़ी और अंततः उसे समाप्त कर पासी, सोनकर, वंचित, दलित समाज को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़कर सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया।  पासी समाज के शौर्य व पराक्रम की गाथा  मुख्यमंत्री ने कहा कि पासी समाज के शौर्य व पराक्रम की गाथा को हर कोई जानता है। महाराजा बिजली पासी ने 12वीं सदी में लखनऊ व आसपास के क्षेत्र में 12 किले बनाए थे। विदेशी आक्रांताओं से लड़ने के लिए इसे रणनीति का हिस्सा बनाया था। वीर मक्का पासी आजादी की लड़ाई लड़ते वीरगति को प्राप्त हुए तो उनकी पत्नी वीरांगना ऊदा देवी ने मोर्चा संभालते हुए अंग्रेजों के छुक्के छुड़ाए। अंततः उनका भी बलिदान हो गया।  सम्मान किसी परिवार की बपौती नहीं  सीएम ने कहा कि हमारी सरकार ने लखनऊ स्थित महाराजा बिजली पासी के किले का पुनरुद्धार किया। डबल इंजन सरकार लखनऊ में वीरांगना ऊदा देवी के नाम पर पीएसी बटालियन गठित कर रही है। वहां भी उनकी अश्वारोही भव्य प्रतिमा लगाई जा रही है। सम्मान किसी परिवार की बपौती नहीं है। जिन्होंने दलितों, वंचितों की आवाज को आगे बढ़ाया और देश-समाज के लिए जीवन समर्पित किया, उन्हें सम्मान मिलना चाहिए।  इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नंदगोपाल गुप्ता ‘नंदी’, महापौर उमेश चंद्र ‘गणेश केसरवानी’, फूलपुर सांसद प्रवीण पटेल, विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी, पीयूष रंजन निषाद, वाचस्पति पासी, दीपक पटेल, गुरु प्रसाद मौर्या, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल, सुरेंद्र चौधरी, मसुरियादीन जी की पुत्री कमला कुमारी, पौत्र सचिन कुमार आदि मौजूद रहे।

वाराणसी में 76 दिवसीय वार्ड प्रवास अभियान के समापन एवं स्वच्छता मित्र सम्मान समारोह को मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित

माफिया की जगह सिर्फ मिट्टी, कब्जाई जमीन पर गरीबों की बनेंगी हवेलियां: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   वाराणसी में विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी के 76 दिवसीय वार्ड प्रवास अभियान के समापन एवं स्वच्छता मित्र सम्मान समारोह को मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित स्वच्छता कर्मियों का पैसा काटने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई, न्यूनतम 16 हजार रुपये मानदेय की व्यवस्था   परिवार को ही प्रदेश मानने वालों की दुर्गति तय, मुख्यमंत्री योगी का सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज   403 विधानसभा क्षेत्रों में जनप्रतिनिधि चलाएं ऐसा अभियान, जनता से संवाद कर समस्याओं का कराएं समाधान   2014 से पहले गंदगी, जाम और भू-माफिया से परेशान थी काशी, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुआ कायाकल्प   वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि माफिया की जगह सिर्फ मिट्टी में है। जिन जमीनों पर कभी माफिया का कब्जा था, वहां अब गरीबों की हवेलियां बनेंगी। प्रयागराज में माफिया के कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन पर गरीबों, वंचितों और दलितों के लिए बहुमंजिला आवासीय इमारतों के निर्माण का शुभारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'अब माफिया नहीं, माफिया की जगह मिट्टी में है, अब गरीबों के लिए बड़ी-बड़ी हवेलियां बनेंगी।' मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार गरीबों के हितों के संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। उन्होंने स्वच्छता कर्मियों के मानदेय में कटौती करने वालों को भी चेताया। कहा कि उत्तर प्रदेश में तय कर दिया गया है कि कोई भी व्यक्ति स्वच्छता कर्मियों का पैसा काटेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।   मुख्यमंत्री योगी गुरुवार को वाराणसी दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी के 76 दिवसीय वार्ड प्रवास अभियान के समापन एवं स्वच्छता मित्र सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अभियान के चौथे संस्करण की सराहना करते हुए इसे अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणादायक बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधि जनता के बीच रहकर उसकी समस्याओं का समाधान करें, सरकारी निर्माण कार्यों का संरक्षण सुनिश्चित करें और पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाएं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दस स्वच्छता कर्मियों को अंगवस्त्र पहनाकर और बैग भेंटकर सम्मानित किया।   परिवार को ही प्रदेश मानने वालों की दुर्गति तय मुख्यमंत्री योगी ने जनप्रतिनिधियों की सक्रियता का उल्लेख करते हुए परिवारवाद पर तंज कसा। उनका इशारा सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की तरफ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब जनप्रतिनिधि ही दोपहर 12 बजे सोकर उठेगा, नेतृत्व देने वाला भी 12 बजे सोकर उठेगा, अपने परिवार के बीच मस्त रहेगा और परिवार को ही समाज व प्रदेश मानने की भूल करेगा तो दुर्गति होनी ही है। उन्होंने कहा कि जो समाज, प्रदेश और देश को अपना परिवार मानते हैं, वही परिवर्तन ला सकते हैं। मुख्यमंत्री ने उन जनप्रतिनिधियों पर भी निशाना साधा, जो एक बार चुने जाने के बाद लखनऊ में पड़े रहते हैं और दोबारा अपने क्षेत्र में झांकने नहीं पहुंचते।   स्वच्छता कर्मियों का मानदेय काटा तो होगी कड़ी कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पहले स्वच्छता कर्मियों से काम लेने के बाद उनकी मजदूरी और मानदेय में कटौती कर दी जाती थी। कई बार पूरा पैसा भी नहीं दिया जाता था। अब ऐसी मनमानी नहीं चलेगी। सरकार ने मानदेय में कटौती पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स कॉरपोरेशन के माध्यम से कर्मियों को न्यूनतम 16 हजार रुपये मानदेय देने की व्यवस्था की गई है। उन्हें ईएसआई के तहत अस्पतालों में उपचार, सुरक्षा बीमा और पीएफ का लाभ भी मिलेगा। दुर्घटना में मृत्यु होने पर परिवार को आर्थिक सहायता मिल सकेगी। पीएफ की व्यवस्था से सेवानिवृत्ति के बाद कर्मियों के पास अपनी पूंजी होगी और उन्हें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।   स्वच्छता मित्र नींव के पत्थर, उन्हीं पर टिकी भव्य व्यवस्था मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि स्वच्छता कर्मी तब सड़कों और मोहल्लों की सफाई करते हैं, जब अधिकांश लोग सो रहे होते हैं। सर्दी, गर्मी, बरसात, आंधी और त्योहारों में भी वे पहले दूसरों के लिए स्वच्छ वातावरण तैयार करते हैं। प्रयागराज महाकुंभ में 66 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन के बावजूद स्वच्छता की प्रशंसा हुई। इसके पीछे स्वच्छता कर्मियों का परिश्रम था। उन्होंने कहा कि नींव का पत्थर दिखाई नहीं देता, लेकिन पूरी भव्य इमारत उसी पर खड़ी होती है। स्वच्छता कर्मियों का योगदान भी ऐसा ही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह नगर निगमों के कार्यक्रमों में स्वच्छता मित्रों का सम्मान कराने पर विशेष जोर देते हैं।   403 विधानसभा क्षेत्रों में चले ऐसा अभियान मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि डॉ. नीलकंठ तिवारी का 76 दिवसीय वार्ड प्रवास अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा है। प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर जनप्रतिनिधि इसी जागरूकता के साथ कार्य करें तो जनता के मन में नकारात्मकता पैदा नहीं होगी। लोकप्रिय जनप्रतिनिधि वही है, जिसकी पहुंच हर घर तक हो। शासन की योजनाएं उपलब्ध हैं, लेकिन कई पात्र लोगों को उनकी जानकारी तक नहीं होती। ऐसे में जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि शिविर लगवाकर वृद्धों, निराश्रित महिलाओं और जरूरतमंद परिवारों को पेंशन, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड और अन्य योजनाओं का लाभ दिलाएं। उन्होंने कहा कि समस्याओं का समाधान गाली-गलौज या मारपीट से नहीं, संवाद से निकलता है। प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर जनहित के काम कराए जा सकते हैं।   प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बदली काशी की तस्वीर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले काशी की गलियों में गंदगी, सड़कों पर जाम और बिजली का संकट आम बात थी। निराश्रित गोवंश सड़कों पर घूमते थे। भू-माफिया गरीबों और व्यापारियों की जमीन-मकान पर कब्जा कर भय का वातावरण बनाते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी का कायाकल्प हुआ है। अब यह अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए नई आभा के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विकास कार्य सरकार करा सकती है, लेकिन उनके संरक्षण की जिम्मेदारी जागरूक समाज की है। समय पर सफाई और मरम्मत से सार्वजनिक सुविधाओं की उपयोगिता बढ़ती है।   76 दिनों में 24 वार्डों तक पहुंचा अभियान विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने बताया कि लगातार चौथे वर्ष आयोजित वार्ड प्रवास अभियान में दक्षिणी विधानसभा के सभी 24 वार्ड शामिल किए गए। 19 जुलाई से दो अक्टूबर तक चले अभियान में प्रत्येक वार्ड में तीन से चार दिन प्रवास किया गया। … Read more

यूपी में पानी की 513 सैंपल जांच में फेल, 152 इकाइयों के लाइसेंस निलंबित; जानें नए नियम

लखनऊ  बोतलबंद पानी की गुणवत्ता में खामियों पर राज्य सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। अब मिनरल वाटर और बोतलबंद पेयजल की नई विनिर्माण इकाइयों को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) का प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) मिलने के बाद लाइसेंस जारी किया जाएगा। पहले से संचालित 968 इकाइयों को 31 मार्च 2027 तक प्रमाणन लेना होगा। तय समयसीमा में प्रमाणन नहीं लेने वाली इकाइयों का लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित कर उत्पादन बंद कराया जाएगा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने पिछले एक वर्ष में 811 इकाइयों के निरीक्षण और 660 नमूनों की जांच के बाद यह कदम उठाया है। जांच में 513 नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। इनमें 176 नमूने स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पाए गए। इस आधार पर 152 इकाइयों के लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित किए गए हैं, जबकि केंद्रीय लाइसेंस प्राप्त 55 इकाइयों के लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति केंद्र सरकार से की गई है। खनिजों की मात्रा सामान्य स्तर से मिली कम  एफएसडीए के संयुक्त आयुक्त हरिशंकर सिंह ने बताया कि असुरक्षित नमूनों में ई-कोलाई, कोलीफार्म बैक्टीरिया, यीस्ट और मोल्ड जैसे सूक्ष्मजीव पाए गए। वहीं, अधोमानक नमूनों में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिजों की मात्रा सामान्य स्तर से कम मिली। निरीक्षण के दौरान कुछ इकाइयों में आवश्यक फिल्टर, पराबैंगनी किरणों से शोधन (यूवी) और ओजोनीकरण की सुविधाओं का भी अभाव मिला। इन खामियों के आधार पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में आइएसआइ प्रमाणन की अनिवार्यता समाप्त किए जाने के बाद बीआइएस प्रमाणन की शर्त भी हटा दी गई थी। इसके बाद प्रदेश में बोतलबंद पानी की विनिर्माण इकाइयों की संख्या बढ़कर 968 हो गई। गुणवत्ता और शोधन व्यवस्था में कमियां सामने आने के बाद प्रमाणन को फिर अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डा. रोशन जैकब के अनुसार, बोतलबंद पेयजल की शुद्धता सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ी है। इसलिए सभी विनिर्माण इकाइयों में गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।  

मुख्यमंत्री ने मां स्कंदमाता को बताया वात्सल्य, ममता और पोषण की अधिष्ठात्री देवी

जब नारीशक्ति स्वस्थ-शिक्षित और समर्थ होती है, तभी राष्ट्र का वर्तमान सुरक्षित और भविष्य उज्ज्वल: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने मां स्कंदमाता को बताया वात्सल्य, ममता और पोषण की अधिष्ठात्री देवी  बेटियों की शिक्षा में निवेश उनके आत्मविश्वास और प्रदेश के भविष्य को सशक्त बनाने का जरिया: सीएम 2017 से पहले बेटियों को संबल देने के बजाय अपने राजनीतिक कुनबे को पोषित करने में व्यस्त थीं पूर्ववर्ती सरकारें: मुख्यमंत्री लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जगतजननी मां भगवती के स्कंदमाता स्वरूप को वात्सल्य, ममता और पोषण की अधिष्ठात्री देवी बताया। उन्होंने कहा कि मां स्कंदमाता की आराधना हमें यह पावन संदेश देती है कि जब नारीशक्ति स्वस्थ, शिक्षित और समर्थ होती है, तभी राष्ट्र का वर्तमान सुरक्षित और भविष्य उज्ज्वल होता है। 2017 से पहले सिर्फ उपेक्षा एवं भ्रष्टाचार सीएम ने 'एक्स' पर पोस्ट किया कि वर्ष 2017 से पहले बेटियों को संबल देने के बजाय पूर्ववर्ती सरकारें केवल अपने राजनीतिक कुनबे को पोषित करने में व्यस्त थीं। प्रदेश में माताओं का स्वास्थ्य और बेटियों की शिक्षा घोर उपेक्षा एवं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई थी। अस्पतालों की बदहाली, दवाओं का अभाव और संस्थागत प्रसव की लचर व्यवस्था के कारण मातृ-शिशु मृत्यु दर चिंताजनक स्थिति में थी।  डबल इंजन सरकार ने बनाया समग्र सुरक्षा एवं कल्याण चक्र मुख्यमंत्री ने लिखा कि विगत साढ़े 9 वर्षों में डबल इंजन सरकार ने इस स्थिति को बदला है। पहले सुविधाओं के अभाव में प्रदेश की लाखों बेटियां पढ़ाई छोड़ने को मजबूर थीं, लेकिन विगत 9.5 वर्षों में डबल इंजन सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा और सुरक्षित मातृत्व तक समग्र सुरक्षा एवं कल्याण चक्र तैयार किया है। बदले परिदृश्य पर कराया ध्यानाकर्षण मुख्यमंत्री ने 2017 के बाद बदले परिदृश्य पर भी ध्यानाकर्षण कराया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन कायाकल्प से प्राथमिक विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का सैचुरेशन 36 से बढ़कर 96 फीसदी से अधिक हो गया है। स्कूल ड्रॉपआउट रेट 20 से घटकर 3 प्रतिशत से भी कम रह गया है। अटल आवासीय विद्यालयों के माध्यम से श्रमिक व वंचित वर्ग की बेटियों को आधुनिक, विश्वस्तरीय आवासीय शिक्षा मिल रही है। कस्तूरबा बालिका विद्यालयों में कक्षा 12 तक पढ़ाई की सुविधा के विस्तार से बेटियों को अपनी शिक्षा पूरी करने के अवसर मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों की शिक्षा में निवेश, उनके आत्मविश्वास और प्रदेश के भविष्य को सशक्त बनाने का निवेश है।

भाजपा नेता के फार्म हाउस में लूट से हड़कंप, CM योगी ने लिया संज्ञान; एसओ पर गिरी गाज

कानपुर  उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में भाजपा पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश मंत्री रमेश यादव को उन्हीं के फार्म हाउस में बंधक बनाकर 32 लाख की लूट का मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गया है। उन्होंने खुद इस संबंध में पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल से पूरी जानकारी ली। इसके बाद जल्द वारदात का खुलासा करने के निर्देश दिए। उधर, लूटकांड की गाज सेन पश्चिम पारा थाना प्रभारी प्रदीप कुमार पर गिरी। पुलिस आयुक्त के आदेश पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। मामले के खुलासे में पुलिस की आठ टीमें लगी हैं। सेन पश्चिम पारा थाना क्षेत्र के नेवरी गांव में बिधनू के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष रमेश यादव को उन्हीं के फार्म हाउस में तमंचे और चाकू के बल पर बंधक बनाकर दो बदमाशों ने करीब 32 लाख रुपये की लूट की वारदात को अंजाम दिया था। फार्म हाउस के पीछे की दीवार फांदकर अंदर आए नकाबपोश लुटेरों ने हाथ-पैर बांधकर उनके मुंह पर टेप लगा दिया था। इसके बाद सोने की चेन-कड़ा और अंगूठी व रॉडो की घड़ी उतार ली थी। बेडरूम में ले जाकर अलमारी में रखे 12 लाख रुपये भी लूट लिए थे। अंत में रमेश यादव को बाथरूम में बंद कर पीछे की दीवार फांदकर फरार हो गए थे। पुलिस सात संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि मुख्यमंत्री को घटना की पूरी जानकारी दे दी गई है। लूट की इस दुस्साहसिक वारदात के बाद सेन पश्चिम थाना प्रभारी प्रदीप कुमार को निलंबित कर दिया गया है। जल्द ही इस घटना का खुलासा किया जाएगा। अपराधियों की खंगाल रहे कुंडली पुलिस बीटीएस टॉवर डंप करने के साथ ही आसपास के अपराधियों की कुंडली भी खंगाल रही है। पुलिस के मुताबिक ऐसे दो दर्जन से ज्यादा शातिरों की कुंडली खंगाली जा रही है। बीटीएस टॉवर डंप में 35 हजार से ज्यादा नंबर आए हैं। इनमें लगातार उसे क्षेत्र में सक्रिय रहने वाले बाहरी नंबरों की पड़ताल की जा रही है। एक दो दिन में सूची से संदिग्ध नंबर सामने आ जाएंगे। भाजपा नेता के साथ रहने वाले निजी सुरक्षा कर्मियों व उनके सेवादारों की भी कुंडली पुलिस खंगाल रही है। सवाल, ग्राम प्रधान ने क्यों दी तहरीर पुलिस लूटकांड की वारदात को लेकर सवालों में उलझी हुई हैं। सबसे पहला सवाल है कि वारदात भाजपा नेता रमेश यादव के साथ हुई है तो नेवरी ग्राम प्रधान राम नरेश यादव ने तहरीर क्यों दी। दूसरा सवाल है कि रात 11:37 पर नकाबपोश वारदात को अंजाम देकर भाग निकले। भाजपा नेता के हाथ, पांव बंधे थे जबकि मुंह में कपड़ा ठूस कर टेप लगा था। इसके बाद भी उन्होंने 11:42 बजे प्रधान को फोन कर दिया। महज पांच मिनट में उन्होंने अपने बंधन कैसे खोले और मुंह पर टेप लगा होने के बाद भी बात कैसे की। घटना के करीब सात मिनट में थाना प्रभारी भी पुलिस के साथ मौके पर पहुंच गए। सुरक्षा हटा लें अधिकारी वारदात के बाद भाजपा नेता ने पुलिस अधिकारियों से सुरक्षा की मांग की थी। इसमें उन्होंने एक दरोगा और चार पुलिसकर्मियों को सुरक्षा में तैनात करने को कहा था। इस बात के चर्चा में आने के बाद भाजपा नेता रमेश यादव ने कहा, उन्होंने कभी सुरक्षा नहीं मांगी। वारदात के बाद जो पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं, उन्हें भी हटाने को कहा है।

कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव से पूछा- 2024 का लोकसभा चुनाव ईमानदारी से हुआ था या नहीं?

अखिलेश बताएं, सपा जीते तो चुनाव निष्पक्ष और हारे तो बेईमानी कैसे : राजभर   कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव से पूछा- 2024 का लोकसभा चुनाव ईमानदारी से हुआ था या नहीं?  राजभर का तंज- 2024 में एक ही परिवार के पांच सांसद जीते, तब चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल क्यों नहीं उठाए?   2017, 2019 और 2022 में सपा हारी तो चुनाव गलत, 2024 में 37 सांसद जीत गए तो सब 'ऑल इज वेल' हो गया  2027 में साइकिल का टायर पंचर नहीं, फटेगा, अभी से हार के बहाने तलाश रहे अखिलेश : राजभर   लखनऊ उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाने को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर राजभर ने अखिलेश से पूछा कि 2024 का लोकसभा चुनाव ईमानदारी से हुआ था या नहीं? उन्होंने कहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव, 2019 के लोकसभा चुनाव और 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा को हार मिली, लेकिन 2024 में उसके 37 सांसद जीतकर दिल्ली पहुंच गए। ऐसे में चार में से तीन चुनाव गलत और एक चुनाव सही कैसे हो सकता है?   राजभर ने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा कि केंद्र में 2014 से अब तक भाजपा की ही सरकार है। फिर ऐसा कैसे हो सकता है कि जिन चुनावों में सपा हारी, वे गलत हो गए और जिस चुनाव में जीत मिली, वह सही हो गया? उन्होंने सवाल किया कि 2024 में समाजवादी पार्टी के 37 सांसद जीतकर दिल्ली कैसे पहुंच गए? इनमें पांच सांसद तो अखिलेश के अपने परिवार से थे। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि जब सपा को उसकी हैसियत से ज्यादा सीटें मिल गईं, तब सब 'ऑल इज वेल' हो गया।   कैबिनेट मंत्री ने अखिलेश यादव पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि या तो 2024 के चुनाव में उनके वोटर फर्जी थे या फिर वह आज सरेआम अफवाहबाजी कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसा कि एसी, पीसी और ट्विटर ने अखिलेश को बहका दिया है।   2027 में साइकिल का रिम-फ्रेम भी टेढ़ा होगा   राजभर ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि अब नवाबी के दिन हवा हो गए हैं। 2027 में सपा की साइकिल का टायर पंचर नहीं, बल्कि फटने जा रहा है। इस बार साइकिल का रिम और फ्रेम भी टेढ़ा होने वाला है।   उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव आगामी विधानसभा चुनाव में हार की आशंका से अभी से भूमिका बनाने और बहाने तलाशने में जुट गए हैं। राजभर ने कहा कि अखिलेश यह बात अच्छी तरह समझ चुके हैं, इसलिए पहले से बहाना खोजकर रख रहे हैं ताकि बाद में अपने समर्थकों के सामने जवाब देने से बच सकें। उन्होंने पोस्ट के अंत में तंज कसते हुए लिखा, 'कुछ आंसू बचाके रखिए। सत्ताइस में सपा साफ है अखिलेश जी।'

सीएम योगी ने किया अरविंद लिमिटेड की नई इकाई का निरीक्षण, 25 अक्टूबर को होगा लोकार्पण

अरविंद लिमिटेड की नई इकाई का मुख्यमंत्री योगी ने किया निरीक्षण, 25 अक्टूबर को पीएम मोदी के हाथों लोकार्पण है प्रस्तावित  सात एकड़ से अधिक भूमि पर स्थापित इकाई में 150 करोड़ रुपये का निवेश, एक हजार से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार वाराणसी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी दौरे के दौरान मिर्जामुराद स्थित अरविंद लिमिटेड की नई औद्योगिक इकाई का निरीक्षण किया। उन्होंने 25 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकार्पण कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने इकाई में चल रही व्यवस्थाओं को देखा और प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं से बातचीत कर उनके अनुभव भी जाने। मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर मिर्जामुराद क्षेत्र के खोचवां गांव स्थित जनता इंटर कॉलेज के मैदान में उतरा। यहां से वह अरविंद लिमिटेड की नई फैक्ट्री पहुंचे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने लोकार्पण कार्यक्रम की तैयारियों की जानकारी ली। 150 करोड़ रुपये का निवेश, एक हजार से अधिक रोजगार के अवसर मिर्जामुराद के रूपापुर चौराहे के पास खोचवां (भड़ेहरा) गांव में हाईवे किनारे सात एकड़ से अधिक भूमि पर अरविंद लिमिटेड की नई इकाई स्थापित की गई है। इस परियोजना की लागत लगभग ₹150 करोड़ है। इकाई के संचालन से एक हजार से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। फिलहाल कंपनी में काम करने वाली करीब 300 महिलाओं को इकाई में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इन महिलाओं से संवाद कर प्रशिक्षण और कामकाज से जुड़ी जानकारी ली। इस नई इकाई में स्पोर्ट्स वियर और अंडरगारमेंट का उत्पादन किया जाएगा। कंपनी भविष्य में निवेश के दूसरे चरण की भी योजना बना रही है। अरविंद लिमिटेड देश में लोकप्रिय ब्रांडों के लिए कपड़े तैयार करती है। इनमें जॉकी, यूएस पोलो, एरो सहित अन्य ब्रांडों के पैंट, शर्ट, टी-शर्ट और जींस जैसे परिधान शामिल हैं। इस इकाई का भूमिपूजन 25 अप्रैल 2024 को हुआ था। अब 25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसका लोकार्पण किया जाना प्रस्तावित है। इस परियोजना से वाराणसी और आसपास के क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे । निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, अरविंद मिल के पदाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

बाबा काल भैरव और काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी, लिया आशीर्वाद

बाबा काल भैरव और काशी विश्वनाथ के दरबार में मुख्यमंत्री योगी ने नवाया शीश विधि-विधान से किया दर्शन-पूजन, राष्ट्र की सुख-समृद्धि और लोक कल्याण की कामना की   एक सप्ताह में दूसरी बार काशी पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी  शक्ति की आराधना के पावन पर्व शारदीय नवरात्र में धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में बुधवार को मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने बाबा काल भैरव और श्री काशी विश्वनाथ के दरबार में शीश नवाया। एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार काशी पहुंचे मुख्यमंत्री ने दोनों मंदिरों में विधि-विधान से दर्शन-पूजन कर राष्ट्र की सुख-समृद्धि, शांति और लोक कल्याण की कामना की। इससे पहले मुख्यमंत्री ने 7 अक्टूबर को भी काशी पहुंचकर बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव के दरबार पहुंचे। यहां उन्होंने बाबा का विधिवत दर्शन-पूजन कर आरती की। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। मंदिर के गर्भगृह में उन्होंने बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक कर षोडशोपचार पूजन किया और बाबा काल भैरव और बाबा विश्वनाथ के चरणों में शीश नवाकर प्रदेश और देश की लोक कल्याण, सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। बाबा काल भैरव मंदिर में मौजूद बच्चों को प्यार से चॉकलेट दी और उनसे उनकी पढाई के बारे में बात की।  दर्शन-पूजन के दौरान मुख्यमंत्री के साथ वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, स्टाम्प मंत्री रविन्द्र जायसवाल, एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, विधायक सुनील पटेल सहित अन्य लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।