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सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश बना वैश्विक शिक्षा का नया केंद्र, अंतरराष्ट्रीय छात्रों की पहली पसंद बन रहा लखनऊ विश्वविद्यालय

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश शिक्षा, निवेश और नवाचार के साथ-साथ अब वैश्विक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी नई पहचान स्थापित कर रहा है। राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, विश्वविद्यालयों के आधुनिकीकरण, सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की नीतियों का सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण लखनऊ विश्वविद्यालय है, जहां शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 77 देशों से रिकॉर्ड 3421 अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने प्रवेश के लिए आवेदन किया है। यह संख्या पिछले शैक्षणिक सत्र 2025-26 के 2083 आवेदनों की तुलना में 1338 अधिक है, अर्थात विश्वविद्यालय ने मात्र एक वर्ष में 64 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश अब केवल देश के छात्रों का ही नहीं, बल्कि दुनिया के विद्यार्थियों का भी भरोसेमंद शैक्षणिक गंतव्य बनता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार इस वर्ष 77 देशों के विद्यार्थियों ने विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन किया है। इनमें बांग्लादेश, नेपाल, नाइजीरिया, सूडान और तंजानिया से सर्वाधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त जर्मनी और पोलैंड जैसे यूरोपीय देशों से भी आवेदन प्राप्त होना विश्वविद्यालय की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण माना जा रहा है। पाठ्यक्रमवार आंकड़ों पर नजर डालें तो स्नातक (यूजी) कार्यक्रमों के लिए सर्वाधिक 2552 आवेदन प्राप्त हुए हैं। स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों के लिए 595 छात्रों ने आवेदन किया है, जबकि विभिन्न विषयों में पीएचडी के लिए 274 अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों ने आवेदन किया है। शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में बढ़ती रुचि विश्वविद्यालय की अकादमिक गुणवत्ता और अनुसंधान क्षमता को भी रेखांकित करती है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के विश्वविद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा, स्मार्ट कैंपस, उद्योग आधारित पाठ्यक्रम, शोध संस्कृति को प्रोत्साहन तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन ने उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों की वैश्विक छवि को मजबूत किया है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में विदेशी छात्र अब उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों को अपनी पहली पसंद बना रहे हैं। इस अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जय प्रकाश सैनी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आवेदनों में हुई यह अभूतपूर्व वृद्धि विश्वविद्यालय की अकादमिक उत्कृष्टता, रोजगारपरक पाठ्यक्रमों और छात्र-अनुकूल वातावरण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विकसित बहुविषयक पाठ्यक्रम, वैश्विक अनुसंधान के अवसर तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को दुनिया भर में सराहना मिल रही है। विश्वविद्यालय अपने सभी विदेशी विद्यार्थियों को सुरक्षित, समावेशी, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ ने प्रवेश प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। सभी आवेदनों का दस्तावेज सत्यापन, पात्रता परीक्षण तथा वीजा संबंधी औपचारिकताओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाएगा ताकि विदेशी विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

पीडब्ल्यूडी की समीक्षा में सीएम सख्त, लंबित परियोजनाओं में देरी पर होगी कार्रवाई

बरेली  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बरेली मंडल के जनप्रतिनिधियों के करीब 2200 प्रस्तावों पर समीक्षा करते हुए बड़ा फैसला लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की सभी स्वीकृत कार्य योजनाएं 15 जुलाई तक मंजूर कर दी जाएं और बजट जारी होते ही 15 अगस्त तक सड़क, पुल और अन्य परियोजनाओं का भूमि पूजन शुरू कराया जाए। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लंबित परियोजनाओं में देरी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। मंगलवार को सर्किट हाउस सभागार में आयोजित पीडब्ल्यूडी की मंडलीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने मंडल के सभी जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी स्वीकृत योजनाओं को 15 जुलाई तक अंतिम मंजूरी देकर बजट जारी कराया जाए, ताकि 15 अगस्त तक निर्माण कार्यों का भूमि पूजन कर विकास परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क, पुल और अन्य आधारभूत ढांचे के निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय सीमा के भीतर परियोजनाएं पूरी न करने वाले अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। 60 अत्याधुनिक स्वच्छता वाहनों को दिखाई हरी झंडी बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने नगर निगम की ओर से खरीदे गए 60 अत्याधुनिक स्वच्छता वाहनों को सर्किट हाउस परिसर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इनमें छह रोबोटिक मैनहोल सीवर क्लीनिंग मशीनें, दो स्किड लोडर, 50 सीएनजी ऑटो टिपर और दो बैकहो लोडर शामिल हैं। इन मशीनों के संचालन से शहर की सफाई व्यवस्था अधिक आधुनिक, सुरक्षित और प्रभावी होगी तथा सीवर सफाई में मानव श्रम पर निर्भरता कम होगी। चार श्रेणियों में होगा कूड़ा संग्रहण नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि नए सीएनजी ऑटो टिपरों के माध्यम से घर-घर से कूड़ा चार श्रेणियों—गीला, सूखा, स्पेशल केयर वेस्ट और सैनिटरी वेस्ट—में अलग-अलग एकत्र किया जाएगा। वहीं रोबोटिक मैनहोल मशीनें बिना किसी व्यक्ति को सीवर में उतारे 360 डिग्री सफाई करने में सक्षम हैं। स्किड लोडर और बैकहो लोडर का उपयोग नालों की सिल्ट हटाने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाने में किया जाएगा। बेल का पौधा रोपा, मोबाइल नेत्र चिकित्सा वैन का उद्घाटन कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सर्किट हाउस परिसर में बेल का पौधा रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके बाद उन्होंने 'दीप चैरिटेबल ट्रस्ट, बरेली' की मोबाइल नेत्र चिकित्सा सेवा वैन का उद्घाटन भी किया, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों को नेत्र चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

योगी सरकार सभी विकास खंडों में 1 से 15 जुलाई तक चलाएगी राज्यव्यापी विशेष नामांकन अभियान

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लक्ष्य को और गति देते हुए स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण के लिए ₹163.60 लाख की वित्तीय सीमा जारी कर दी है। नए शैक्षिक सत्र 2026-27 में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी विकास खंडों में 1 से 15 जुलाई तक विशेष अभियान संचालित किया जाएगा।  महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य विद्यालय से बाहर रह गए प्रत्येक बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना, ड्रॉपआउट बच्चों का पुनः नामांकन सुनिश्चित करना तथा नामांकन को व्यापक जनभागीदारी का स्वरूप देना है। निर्देशों के अनुसार सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, जिला समन्वयकों (समेकित शिक्षा) तथा खंड शिक्षा अधिकारियों को अभियान का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अभियान में ग्राम पंचायतों, नगर निकायों, विद्यालय प्रबंधन समितियों, स्वयं सहायता समूहों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे प्रत्येक पात्र बच्चे तक विद्यालय की पहुंच बनाई जा सके। प्रदेश में निपुण भारत मिशन, विद्यालय कायाकल्प, बालवाटिका, शिक्षक क्षमता संवर्धन और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे व्यापक शिक्षा सुधारों के बाद स्कूल चलो अभियान का दूसरा चरण इन प्रयासों को नई मजबूती देगा। ₹163.60 लाख की वित्तीय सीमा के साथ शुरू होने जा रहा यह राज्यव्यापी अभियान शिक्षा के सार्वभौमिक लक्ष्य को साकार करने और किसी भी बच्चे को विद्यालय से वंचित न रहने देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आउट ऑफ स्कूल बच्चों पर रहेगा विशेष फोकस अभियान के दौरान घर-घर संपर्क, ग्राम एवं वार्ड स्तर पर सर्वेक्षण तथा स्थानीय अभिलेखों के माध्यम से विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान की जाएगी। ऐसे बच्चों का प्राथमिकता के आधार पर नामांकन कराया जाएगा और उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अभिभावकों से सतत संवाद स्थापित किया जाएगा। विशेष रूप से कक्षा छोड़ चुके बच्चों को दोबारा विद्यालय से जोड़ने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएंगे। रैलियों से लेकर प्रवेशोत्सव तक चलेगा जनजागरूकता अभियान अभियान के अंतर्गत प्रभात फेरियां, नामांकन रैलियां, घर-घर संपर्क, अभिभावक बैठकें, ग्राम सभाएं, विद्यालय प्रवेशोत्सव, विशेष नामांकन शिविर तथा अन्य जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों का उद्देश्य शिक्षा के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाना तथा प्रत्येक परिवार को बच्चों के नियमित विद्यालयी नामांकन के लिए प्रेरित करना है। जागरूकता गतिविधियों पर खर्च होगी स्वीकृत धनराशि जारी वित्तीय सीमा के अंतर्गत जनपदों को रैलियों, प्रचार-प्रसार सामग्री, बैनर, पोस्टर, फ्लेक्स, सामुदायिक बैठकों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रवेशोत्सव तथा अन्य अनुमन्य गतिविधियों के संचालन के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। शासन ने निर्देश दिए हैं कि धनराशि का उपयोग निर्धारित मानकों के अनुरूप पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ किया जाए, ताकि अभियान का अधिकतम प्रभाव सुनिश्चित हो सके।

‘आम बहार- आपके द्वार’ का आयोजन करेगा वन विभाग

लखनऊ  योगी सरकार के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश वन विभाग पहली जुलाई से वन महोत्सव कराएगा। यह महोत्सव सात जुलाई तक चलेगा। इस दौरान विभाग की तरफ से 'आम बहार- आपके द्वार' का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान पौधरोपण के महत्व, पर्यावरण संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त परिवेश व जन जागरूकता पर भी विशेष जोर रहेगा।  मुख्य वन संरक्षक (प्रचार/प्रसार) अदिति शर्मा ने बताया कि 1 से 7 जुलाई तक पौधरोपण से संबंधित जन जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। अनवरत पड़ रही बेतहाशा गर्मी व विपरीत मौसम को देखते हुए योगी सरकार का पौधरोपण के महत्व, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, प्लास्टिक मुक्त परिवेश पर विशेष जोर है। 'आम बहार- आपके द्वार' का आयोजन करेगा वन विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फलदार वृक्षों की देशी प्रजातियों के रोपण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिये हैं। पौधरोपण महाभियान-2026 में वनावरण एवं वृक्षावरण के महत्व के प्रति जागरूक करते हुए फलदार प्रजातियों के रोपण हेतु जनसामान्य को प्रोत्साहित किए जाने पर जोर दिया है। इस क्रम में फलों के राजा "आम" के पौधों के वृहद वितरण के लिए 1 से 7 जुलाई (वन महोत्सव) में पूरे प्रदेश में "आम बहार, आपके द्वार" स्लोगन के माध्यम से आम भण्डारा का आयोजन होगा। इस अवधि में प्रत्येक विकास खण्ड में आम भण्डारा का आयोजन कर आम की देशी व अन्य प्रजाति के पौधों का वितरण कर जनसामान्य को उनके रोपण व रख-रखाव हेतु जागरूक किया जाएगा। 2026 में 35 करोड़ पौधरोपण कराएगी योगी सरकार  वन महोत्सव के अलावा योगी सरकार यूपी को हरा-भरा रखने के लिए इस वर्ष भी 35 करोड़ पौधरोपण करेगी। इसके लिए विभागों और मंडलों के लक्ष्य पहले ही निर्धारित किए जा चुके हैं। वर्षाकाल में पौधरोपण महाभियान की तिथि जल्द ही घोषित की जाएगी।

यूपीटीईटी-2026 के लिए व्यापक तैयारियां, 60 जनपदों के 955 परीक्षा केन्द्रों पर लगभग 20 लाख अभ्यर्थी होंगे शामिल

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2026 प्रदेश के लाखों युवाओं की आकांक्षाओं से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षा है। इसकी निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। परीक्षा का संचालन केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के प्रति सरकार की जवाबदेही का विषय है। प्रत्येक अभ्यर्थी को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तनावमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि परीक्षा में शामिल होने वाले किसी भी अभ्यर्थी को आवागमन, प्रवास, सुरक्षा अथवा अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री मंगलवार को आगामी 02, 03 एवं 04 जुलाई, 2026 को आयोजित होने वाली उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा-2026 की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा कर रहे थे।  इस दौरान, मुख्यमंत्री ने सेवारत शिक्षकों के हितों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को देखते हुए कार्यरत शिक्षकों को अपनी पात्रता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को सेवारत शिक्षकों के लिए पृथक शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि उन्हें अधिक अवसर मिल सकें और केवल अवसर के अभाव में किसी शिक्षक को कठिनाई का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रदेश के विभिन्न जनपदों के साथ अन्य राज्यों से भी आएंगे। ऐसे में रेलवे स्टेशन, बस अड्डों तथा प्रमुख यातायात केन्द्रों पर पर्याप्त सहायता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अभ्यर्थियों को परीक्षा केन्द्रों तक पहुंचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। परिवहन निगम, रेलवे तथा आवश्यकतानुसार निजी स्थानीय परिवहन संचालकों के साथ समन्वय स्थापित कर अतिरिक्त परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। परीक्षा के पूर्व एवं पश्चात संभावित भीड़ को देखते हुए प्रभावी यातायात प्रबंधन किया जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेष व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि बड़ी संख्या में युवाओं के आवागमन के दौरान खाद्य एवं पेय पदार्थों के मूल्य अनावश्यक रूप से न बढ़ाए जाएं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी परीक्षा केन्द्रों पर पेयजल, स्वच्छ शौचालय, छायादार प्रतीक्षास्थल, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, अग्निशमन व्यवस्था तथा आकस्मिक चिकित्सा सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहे। वर्तमान मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह सक्रिय रखा जाए। प्रत्येक जनपद में स्थापित कंट्रोल रूम प्रभावी ढंग से कार्य करें तथा किसी भी सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े सभी जिलाधिकारियों को मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि परीक्षा के सफल एवं त्रुटिरहित संचालन के लिए एक दिन पूर्व सभी व्यवस्थाओं का पूर्वाभ्यास अनिवार्य रूप से कर लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा की शुचिता सर्वोपरि है। परीक्षा ड्यूटी में केवल स्वच्छ छवि वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ही तैनाती की जाए। गोपनीय परीक्षा सामग्री के भंडारण, परिवहन तथा परीक्षा उपरांत आयोग तक उसके सुरक्षित प्रेषण की पूरी प्रक्रिया उच्चतम सुरक्षा मानकों के अनुरूप संपन्न कराई जाए। उन्होंने सोशल मीडिया तथा अन्य माध्यमों पर अफवाह, भ्रामक अथवा गलत सूचनाएं प्रसारित करने के प्रयासों पर कड़ी निगरानी रखने और ऐसे मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा-2026 का आयोजन प्रदेश के 60 जनपदों में स्थापित 955 परीक्षा केन्द्रों पर किया जाएगा। परीक्षा 02 से 04 जुलाई तक कुल पांच पालियों में आयोजित होगी। 02 जुलाई को दोनों पालियों में उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा होगी। 03 जुलाई को प्रथम पाली में उच्च प्राथमिक तथा द्वितीय पाली में प्राथमिक स्तर की परीक्षा आयोजित की जाएगी। 04 जुलाई को प्रथम पाली में प्राथमिक स्तर की परीक्षा संपन्न होगी। बैठक में बताया गया कि परीक्षा में कुल 19,94,661 अभ्यर्थी सम्मिलित होंगे। इनमें 17,67,180 अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश के हैं, जबकि 2,27,481 अभ्यर्थी अन्य राज्यों से परीक्षा देने आएंगे। परीक्षा में 1,85,791 सेवारत शिक्षक तथा 18,08,870 नए अभ्यर्थी सम्मिलित होंगे। प्राथमिक स्तर के लिए 3,88,179, उच्च प्राथमिक स्तर के लिए 8,16,436 तथा दोनों स्तरों के लिए 3,95,023 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। बैठक में यह भी बताया गया कि सर्वाधिक परीक्षा केन्द्र एवं अभ्यर्थियों वाले जनपदों में वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर नगर, मेरठ, मऊ, मुरादाबाद, आगरा तथा जौनपुर प्रमुख हैं। वाराणसी में 68 परीक्षा केन्द्रों पर 1,27,239 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। प्रयागराज में 53 परीक्षा केन्द्रों पर 76,634 तथा लखनऊ में 43 परीक्षा केन्द्रों पर 76,720 अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित होंगे। इन जनपदों में बाहरी जिलों एवं अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के आगमन को देखते हुए यातायात, सुरक्षा, चिकित्सीय सहायता तथा प्रवास संबंधी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

बोधि वृक्ष से 3डी गैलरी तक, बुद्ध दर्शन का मिलेगा अनूठा अनुभव, लाइट एंड साउंड शो होगा खास

लखनऊ/कुशीनगर  योगी सरकार में वैश्विक बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर उत्तर प्रदेश की पहचान को और मजबूत करने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना अब पूरी तरह तैयार हो चुकी है। कुशीनगर में उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) द्वारा गौतम बुद्ध संग्रहालय के नजदीक लगभग 11.32 करोड़ रुपये की लागत से विकसित बुद्ध थीम पार्क का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। यह पार्क जल्द ही आम जनता के लिए खोला जाएगा।  आधुनिक तकनीक, आध्यात्मिक अनुभव और बौद्ध विरासत के अद्भुत संगम के रूप में विकसित यह थीम पार्क देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को भगवान बुद्ध के जीवन, दर्शन और करुणा के संदेश से जोड़ने का नया माध्यम बनेगा। इंटरएक्टिव गैलरियों से मिलेगा आध्यात्मिक अनुभव बुद्ध थीम पार्क को केवल एक पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि बौद्ध ज्ञान और आध्यात्मिकता के जीवंत अनुभव केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यहां संवादात्मक शैली में कहानी कहने, हेरिटेज इंटरप्रिटेशन और आधुनिक प्रस्तुतीकरण तकनीकों के माध्यम से भगवान बुद्ध के जीवन की प्रमुख घटनाओं और उनकी शिक्षाओं को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। पार्क का उद्देश्य यहां आने वालों को केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मचिंतन और आंतरिक जागृति का अनुभव कराना भी है। बोधि वृक्ष और आठ तथागत स्तूप होंगे प्रमुख आकर्षण पार्क का सबसे प्रमुख आकर्षण बोधि वृक्ष होगा, जहां संवादात्मक शैली में भगवान बुद्ध के ज्ञान, करुणा और जीवन मूल्यों को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा तिब्बती शैली के स्तूप, प्रार्थना चक्र (प्रेयर व्हील्स), मूर्तिकला स्थापनाएं और विभिन्न अनुभवात्मक प्रदर्शनियां आगंतुकों (पर्यटकों व अन्य) को बौद्ध संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से परिचित कराएंगी। यहां स्थापित आठ तथागत स्तूप भगवान बुद्ध के आठ महान कार्यों का प्रतीक होंगे और बौद्ध दर्शन की गहराई को समझने का अवसर प्रदान करेंगे। 3डी झांकियां और डिजिटल तकनीक से जीवंत होगा बुद्ध जीवन पार्क में तैयार की गई 3D झांकियां और डिजिटल प्रदर्शनियां भगवान बुद्ध के जीवन की प्रमुख घटनाओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत करेंगी। विशेष रूप से विकसित ट्रेवलॉग इंस्टॉलेशन बुद्ध की पवित्र यात्रा को क्रमबद्ध रूप से दर्शाएगा। इसके साथ ही भूमिस्पर्श, ध्यान, अभय और धर्मचक्र सहित भगवान बुद्ध की आठ विशाल मुद्राएं स्थापित की गई हैं, जो उनके जीवन, उपदेशों और बौद्ध दर्शन के मूल सिद्धांतों का प्रतिनिधित्व करती हैं। 40 फीट बुद्ध वॉल पर होगा लाइट एंड साउंड शो पर्यटकों को एक यादगार अनुभव देने के लिए पार्क में अत्याधुनिक ऑडियो-विजुअल तकनीक का उपयोग किया गया है। यहां 40 फीट ऊंची फैसाड बुद्ध वॉल पर भव्य लाइट एंड साउंड शो का आयोजन होगा, जिसमें कला, तकनीक और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से भगवान बुद्ध के जीवन और उनके संदेशों को जीवंत किया जाएगा। भव्य प्रवेश द्वार और सांस्कृतिक आकर्षण भी होंगे विशेष पार्क का भव्य प्रवेश द्वार प्राचीन बौद्ध तोरणों से प्रेरित है। इस पर उत्कृष्ट नक्काशी और प्रतीकात्मक कलाकृतियों के माध्यम से शांति, ज्ञान और करुणा का संदेश प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा पार्क में बुद्ध जीवन दीर्घाएं, भगवान बुद्ध के जीवन प्रसंगों पर आधारित कलात्मक भित्ति चित्र, सांस्कृतिक थीम पर आधारित बच्चों का खेल क्षेत्र और स्मारिका केंद्र भी विकसित किया गया है, जहां बौद्ध हस्तशिल्प और स्थानीय कारीगरों के उत्पाद उपलब्ध होंगे। कुशीनगर की वैश्विक पहचान होगी और मजबूत यूपी के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि बुद्ध थीम पार्क का निर्माण पूरा होना कुशीनगर में बौद्ध पर्यटन को सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि यह परियोजना आध्यात्मिकता, कला, संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम है, जो देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भगवान बुद्ध के जीवन और विचारों से गहराई से जोड़ने का अवसर देगी।  उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट में लगभग 82 लाख पर्यटक पहुंचे, जिनमें 4.4 लाख से अधिक विदेशी यात्री शामिल थे। ऐसे में यह नया थीम पार्क कुशीनगर की वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगा और उत्तर प्रदेश को विश्वस्तरीय बौद्ध पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

जिले को देंगे ₹620 करोड़ से अधिक की 11 विकास परियोजनाओं की सौगात

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार 1 जुलाई को सहारनपुर से राज्यव्यापी 'स्कूल चलो अभियान' के दूसरे चरण का शुभारंभ करेंगे। नए शैक्षिक सत्र में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू हो रहे इस अभियान के साथ मुख्यमंत्री सहारनपुर जनपद की दो विधानसभाओं को ₹620 करोड़ से अधिक लागत की 11 विकास परियोजनाओं की सौगात भी देंगे। शिक्षा और विकास को साथ लेकर आगे बढ़ने की रणनीति के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में एक ओर विद्यालय से बाहर बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का संदेश दिया जाएगा, वहीं दूसरी ओर जनपद की आधारभूत संरचना को मजबूत करने वाली परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया जाएगा। सहारनपुर के इस्माइलपुर ग्राम में सीएम मॉडल  कंपोजिट विद्यालय में 'स्कूल चलो अभियान' के दूसरे चरण के शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बच्चों को नवीन शैक्षणिक सत्र की पाठ्य पुस्तकें, स्कूल बैग व स्टेशनरी का वितरण भी करेंगे। इस अवसर पर जनपद के सर्वश्रेठ प्रधानाध्यापकों का सम्मान भी किया जाएगा। इसके पश्चात मुख्यमंत्री महाराज सिंह डिग्री कॉलेज ग्राउंड जाएंगे, जहां वह सहारनपुर नगर विधानसभा क्षेत्र की ₹612 करोड़ से अधिक लागत की 8 विकास परियोजनाओं और सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्र की ₹7 करोड़ से अधिक लागत की 3 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण के अन्तर्गत विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान, उनका नामांकन, ड्रॉपआउट बच्चों की पुनर्वापसी, अभिभावकों को जागरूक करने और जनप्रतिनिधियों, विद्यालय प्रबंधन समितियों तथा स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर रहेगा। अभियान का उद्देश्य प्रत्येक पात्र बच्चे को विद्यालय से जोड़कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।

प्रदेश सरकार ने बीते 9 वर्ष में गन्ना किसानों को किया 3,23,572 करोड़ रुपये का भुगतान

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना किसानों के हितों की रक्षा और उनकी आर्थिक समृद्धि के क्षेत्र में नया कीर्तिमान बनाया है। प्रदेश सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 में गन्ना किसानों को 31,682 करोड़ रुपये का भुगतान किया। वहीं वर्ष 2017 से गन्ना किसानों को अब तक 3,23,572 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान किया है। देश का सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला उत्तर प्रदेश निरंतर प्रथम स्थान पर बना हुआ है।  गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग के अनुसार वर्ष 1995 से 2017 तक के 22 वर्ष में किसानों को कुल 2,13,519 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था, जबकि वर्तमान सरकार ने मात्र नौ वर्ष में ही इससे 1,10,053 करोड़ रुपये अधिक भुगतान करते हुए नया रिकॉर्ड बनाया है। वहीं वर्ष 2007 से 2017 (10 वर्ष) में कुल 1,47,346 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था, जबकि वर्ष 2017 से अब तक 3,23,572 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। मिलों ने 89.52 लाख टन चीनी का उत्पादन किया  प्रदेश में योगी सरकार की किसान हितैषी नीतियों का असर वर्तमान पेराई सत्र 2025-26 में भी दिखाई दे रहा है। इस सत्र में अब तक किसानों को 31,682 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जो कुल देय राशि का 91.64 प्रतिशत है। गन्ना उत्पादन और चीनी उद्योग के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की हैं। पेराई सत्र 2025-26 में प्रदेश की 121 संचालित चीनी मिलों ने 878.12 लाख टन गन्ने की पेराई कर 89.52 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है।  10 लाख लोगों को मिला रोजगार  मार्च 2017 से अब तक प्रदेश में 04 नई चीनी मिलों की स्थापना की गई है, जबकि 07 बंद चीनी मिलों का पुनर्संचालन किया गया है। इसके अलावा 42 निजी क्षेत्र, 01 निगम क्षेत्र और 01 सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलों में क्षमता विस्तार किया गया है। इन प्रयासों से 1,28,500 टीसीडी अतिरिक्त पेराई क्षमता का सृजन हुआ है। नई औद्योगिक इकाइयों और क्षमता विस्तार के परिणामस्वरूप लगभग 10 लाख लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है। गन्ना के क्षेत्रफल में भी हुई काफी वृद्धि  उत्तर प्रदेश में 2016-17 में प्रदेश का गन्ना क्षेत्रफल 20.54 लाख हेक्टेयर था, जो नौ वर्षों में 39.29 प्रतिशत बढ़कर 28.61 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसी अवधि में गन्ने की औसत उत्पादकता 72.38 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 83.25 टन प्रति हेक्टेयर हो गई है। उन्नत गन्ना प्रजातियों, वैज्ञानिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से प्रति हेक्टेयर 10.87 टन की वृद्धि दर्ज की गई है। गन्ना किसानों की संख्या में भी बड़ी वृद्धि  गन्ना किसानों की संख्या भी लगातार बढ़ी है। वर्ष 2016-17 में प्रदेश में लगभग 33 लाख गन्ना किसान थे, जिनकी संख्या वर्तमान में बढ़कर 48 लाख हो गई है यानी नौ वर्ष में 15 लाख किसानों की वृद्धि हुई है। बढ़ते क्षेत्रफल, बेहतर उत्पादकता, रिकॉर्ड भुगतान और किसानों की संख्या में वृद्धि यह दर्शाती है कि प्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों के कारण गन्ना किसानों की आय में वृद्धि हुई है। इन्हीं उपलब्धियों के बल पर उत्तर प्रदेश आज देश में गन्ना उत्पादन और गन्ना मूल्य भुगतान दोनों क्षेत्रों में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित हो चुका है।

UP Election 2027 की तैयारी तेज, दिल्ली से पहुंचेगा शीर्ष नेतृत्व, 3-4 जुलाई की बैठक पर सबकी नजर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है. प्रदेश की सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए हर राजनीतिक दल ने अपने तरकस से तीर निकालने शुरू कर दिए हैं. इसी सियासी हलचल के बीच बीजेपी ने अपनी तैयारियों को धार देने के लिए ‘मिशन मोड’ एक्टिव कर दिया है. इसी मिशन को धार देने के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 3 और 4 जुलाई को लखनऊ का दौरा करने वाले हैं. राजनीतिक गलियारों में इस दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव के बाद यह शीर्ष नेतृत्व का पहला बड़ा दौरा है. जानें इसके पीछे की कहानी।  नई टीम के साथ ‘चुनावी मंत्र’ भाजपा ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों को धार देने के लिए हाल ही में प्रदेश इकाई में व्यापक फेरबदल किया है. यूपी अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में नई टीम का गठन हो चुका है, जिसमें 19 उपाध्यक्ष, आठ महासचिव और 19 सचिवों को जिम्मेदारी सौंपी गई है. अब बारी इस टीम को ‘एक्टिव मोड’ में लाने की है. जानकारों का कहना है कि नितिन नवीन अपने इस दौरे के जरिए यह परखेंगे कि नई टीम जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी है और कार्यकर्ताओं के साथ उनका तालमेल कैसा है।  3-4 जुलाई: लखनऊ में क्यों है हलचल? नितिन नवीन का दो दिवसीय लखनऊ प्रवास केवल एक औपचारिक दौरा नहीं है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, उनका मुख्य फोकस आगामी विधानसभा चुनावों के लिए रोडमैप तैयार करना है. 3 और 4 जुलाई को वे राज्य के वरिष्ठ नेताओं, क्षेत्रीय प्रभारियों और संबद्ध संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ सिलसिलेवार बैठकें करेंगे. इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी उनकी मुलाकात की संभावना है. स्पष्ट है कि पार्टी संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना उनके एजेंडे में सबसे ऊपर है।  सीएम योगी संग होगी महाबैठक लखनऊ दौरे के दौरान नितिन नबीन सिर्फ संगठन के लोगों से ही नहीं मिलेंगे. सूत्रों का कहना है कि उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी होने वाली है. इस बैठक में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बिठाने और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर गंभीर चर्चा होगी।  संघ के पदाधिकारियों से होगी बातचीत बीजेपी के इस महामंथन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका भी बड़ी होने वाली है. मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, नितिन नबीन अपने दौरे में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात कर सकते हैं. चुनाव से पहले संघ का फीडबैक भाजपा के लिए हमेशा से बहुत मायने रखता आया है।  जमीनी कार्यकर्ताओं से लेंगे फीडबैक सिर्फ बड़े नेताओं से मुलाकात ही इस दौरे का मकसद नहीं है. नितिन नबीन क्षेत्रीय स्तर के संगठन मंत्रियों और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ भी बैठकें करेंगे. वह जानना चाहते हैं कि यूपी की जनता के बीच इस समय क्या माहौल है और विपक्ष के दांव काट ढूंढने के लिए क्या किया जाना चाहिए।  तैयार होगा जीत का महाप्लान इस पूरे दो दिवसीय दौरे का आखिरी मकसद साल 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए एक अचूक रोडमैप तैयार करना है. दिल्ली से आ रहे मुखिया यह तय करेंगे कि आने वाले महीनों में पार्टी को कौन से बड़े कार्यक्रम करने हैं। 

सीएम योगी ने यूपी को 3 महीने में दी 62 हजार करोड़ से अधिक की 5,551 परियोजनाओं की सौगात

लखनऊ  बीते 9 साल से निरंतर विकास की बुलंदियों को छू रहा उत्तर प्रदेश नित नए कीर्तिमान रच रहा है। यदि वित्तीय वर्ष 2026-27 की बात करें तो पहली तिमाही में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निरंतर जनपदों के दौरे कर विकास की सौगात दे रहे हैं। वे पूर्वांचल, पश्चिमांचल, बुंदेलखंड, मध्याचंल समेत प्रदेश के सभी जनपदों को विकास से जोड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अप्रैल, मई और जून के दौरान प्रदेशभर में आधारभूत ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यटन, खेल, शहरी विकास, ग्रामीण विकास और कनेक्टिविटी से जुड़ी 5,551 से अधिक विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं पर 62,282 करोड़ से अधिक रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जो प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाती है। सीएम योगी ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में विकास केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर तेजी से क्रियान्वित हो रहा है। यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने की तरफ तेजी से बढ़ रहा है।  हर क्षेत्र में विकास की समान गति इन तीन महीनों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में सड़क, पुल, मेडिकल कॉलेज, खेल अवसंरचना, औद्योगिक पार्क, नगर विकास, शिक्षा, पेयजल, पर्यटन और डिजिटल सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं की शुरुआत की गई। योगी सरकार ने केवल बड़े शहरों पर ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल, बुंदेलखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और तराई क्षेत्र के जिलों में भी विकास कार्यों को समान प्राथमिकता दी। गंगा एक्सप्रेसवे पर दौड़े विकास के पहिए, जेवर से हुई प्रगति की उड़ान इस अवधि की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले गंगा एक्सप्रेसवे व नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर का लोकार्पण रहा। मेरठ से प्रयागराज तक प्रदेश को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास, व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा। वहीं नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर से भी प्रगति की उड़ान हुई। एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले किसान पहली फ्लाइट में बैठकर लखनऊ पहुंचे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संवाद भी किया।  शिक्षा और तकनीक पर विशेष जोर योगी सरकार ने नई शिक्षा नीति के अनुरूप आधुनिक तकनीकी शिक्षा को भी प्राथमिकता दी। गोरखपुर में पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की शुरुआत की गई, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी और थ्री-डी प्रिंटिंग जैसे भविष्य की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुजफ्फरनगर में भी सेंटर ऑफ इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड ट्रेनिंग की स्थापना के माध्यम से युवाओं को नई तकनीकों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। स्वास्थ्य सेवाओं का हुआ विस्तार योगी सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए भी अनेक परियोजनाओं की शुरुआत की। ललितपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित स्वास्थ्य अवसंरचना से जुड़ी कई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया। विभिन्न जिलों में अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया गया। उद्योग और निवेश को नई ऊर्जा ललितपुर में 1,500 एकड़ में उत्तर प्रदेश का पहला फार्मा पार्क विकसित करने की घोषणा राज्य के औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं विभिन्न जिलों में औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक सुविधाओं और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के माध्यम से निवेश के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को मिला बढ़ावा प्रदेश सरकार पर्यटन विकास को भी प्राथमिकता दे रही। संतकबीर नगर में तामेश्वरनाथ धाम कॉरिडोर, बाबा बैजूनाथ धाम के विकास और बखिरा झील को इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई। महोबा को एडवेंचर टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई। इसके साथ ही प्रदेशभर में इको टूरिज्म को लेकर भी बड़े स्तर पर काम चल रहा है। खेल और शहरी सुविधाओं का विस्तार गोरखपुर में लगभग 393 करोड़ रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास किया गया, जिसमें 30 हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता होगी। वहीं नगर निगमों में आधुनिक सदन भवन, मल्टीलेवल पार्किंग, टू-लेन ब्रिज, ईको पार्क और अन्य शहरी सुविधाओं के विकास से नागरिक जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया गया। सामाजिक समरसता और जनकल्याण को भी प्राथमिकता लखीमपुर खीरी में बांग्लादेश से विस्थापित हिंदू परिवारों, पीलीभीत में हजारों बंगाली परिवारों को नागरिकता और भूमि अधिकार पत्र वितरित किए गए। इस तरह प्रदेश में कई अवसरों पर लोगों को नियुक्ति पत्र व अन्य सुविधाओं से जुड़े पत्र भी वितरित किए गए। वहीं श्रमिक कल्याण योजनाओं, कल्याण मंडपम और अन्य जनसुविधाओं के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया। विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव इसी तरह रामपुर, गोरखपुर, देवरिया, मऊ, उन्नाव, आजमगढ़, कुशीनगर, गोंडा, बलरामपुर, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़, हाथरस, फिरोजाबाद, ललितपुर और अन्य जिलों में सैकड़ों विकास परियोजनाओं का शुभारंभ हुआ। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में जिस गति से हजारों विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ, उससे स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में विकास अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर तेजी से क्रियान्वित हो रहा है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, पर्यटन, खेल और शहरी विकास जैसे लगभग सभी क्षेत्रों में एक साथ हो रहे निवेश प्रदेश को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं। एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के तहत सीएम योगी आदित्यनाथ स्वयं लोकार्पण और शिलान्यास से जुड़ी सभी परियोजनाओं को निगरानी करते आ रहे हैं। वहीं एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर, फार्मा पार्क और औद्योगिक क्लस्टर जैसी आधारभूत परियोजनाओं के साथ निवेश को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। कृषि, एमएसएमई, पर्यटन, डिजिटल अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दी जा रही है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने, रोजगार सृजन, कौशल विकास और बेहतर कानून-व्यवस्था के माध्यम से उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनाया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य तेज आर्थिक विकास के साथ प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करना है। सीएम योगी द्वारा अप्रैल, मई-जून में किए गए प्रमुख लोकार्पण व शिलान्यास अप्रैल-  5 अप्रैल: गोरखपुर-बंधु सिंह पार्क में बने मल्टीलेवल पार्किंग कॉम्प्लेक्स के साथ घंटाघर … Read more