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नीले ड्रम हत्याकांड में 14 अक्टूबर को फैसला, मुस्कान-साहिल को मिलेगी सजा; अभियोजन ने की थी फांसी की मांग

 मेरठ उत्तर प्रदेश के मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में आज गुरुवार को सजा सुनाई जानी है. मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को कोर्ट 30 सितंबर को दोषी करार दे चुकी है. अब दोनों की सजा पर फैसला होना है. इस मामले में अभियोजन पक्ष ने दोनों के लिए मौत की सजा की मांग की है।  इस मामले में 17 सितंबर को कोर्ट में अंतिम बहस पूरी हुई थी. अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर अपनी दलीलें रखीं. सौरभ के परिवार की ओर से मुकदमा लड़ रहे अधिवक्ता विजय बहादुर ने बताया कि सौरभ के परिवार की ओर से कुल 22 गवाह पेश किए गए. इनमें सौरभ का भाई बबलू, उनकी मां और दोस्त शामिल हैं।  इसके अलावा उन दुकानदारों की भी गवाही हुई, जिनसे तौर पर ड्रम, दवाइयां, चाकू, सीमेंट और रेत खरीदी गई थी. अभियोजन पक्ष ने हत्या से पहले की तैयारियों और वारदात के बाद आरोपियों के शिमला जाने से जुड़े साक्ष्य भी कोर्ट में रखे।  जेल में मुस्कान से मिलने नहीं आया परिवार  बातचीत में मेरठ जेल के अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि मुस्कान और साहिल को नशे की लत से बाहर निकालने में शुरुआत में काफी मुश्किलें आईं. इसमें 3 से 4 महीने लगे. उन्होंने बताया कि साहिल से पहले उसकी दादी मिलने आती थीं, बाद में उसका भाई भी मिलने आने लगा, लेकिन अब तक मुस्कान से मिलने परिवार का कोई सदस्य नहीं पहुंचा है।  जेल अधीक्षक का कहना है कि पिछले साल नवंबर में जेल में बेटी को जन्म देने के बाद मुस्कान धार्मिक हो गई है. वह अपनी करीब 6.5 साल की बेटी से मिलना चाहती है, लेकिन बेटी खुद अपनी मां से नहीं मिलना चाहती. मुस्कान को बताया गया है कि वह अपने परिवार को पत्र लिखकर बेटी से मुलाकात कराने की बात कह सकती है. जेल अधीक्षक ने यह भी बताया कि मुस्कान और साहिल दोनों मौजूदा स्थिति से वाकिफ हैं. आज जेल अधिकारियों के साथ उनकी नियमित मुलाकात भी हुई।  नीले ड्रम में मिला था सौरभ का शव दरअसल, सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ लौटे थे. 25 फरवरी को घर में मुस्कान का जन्मदिन मनाया गया. 28 फरवरी को बेटी पीहू का जन्मदिन था।  अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 3 मार्च 2025 को सौरभ को नींद की दवा देने के बाद उनकी हत्या कर दी गई. इसके बाद शव के टुकड़े कर उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपा दिया गया. 4 मार्च को मुस्कान बेटी को मायके छोड़कर साहिल के साथ शिमला चली गई. उसने सौरभ के फोन से मैसेज भेजकर परिवार को गुमराह किया।  17 मार्च को मामले का खुलासा हुआ. पुलिस ने घर में रखे नीले ड्रम से शव के टुकड़े बरामद किए. इसके बाद मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया।  मामले में हुईं 126 पेशियां  इस मामले में मार्च 2025 से सितंबर 2026 तक सुनवाई चली. अदालत में कुल 126 पेशियां हुईं और 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए. 30 सितंबर को अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया था. इसके बाद सजा तय करने के लिए समय लिया गया. अब आज आने वाले कोर्ट के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं। 

आजम खान के खिलाफ अजीमनगर थाने में केस दर्ज, जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़ा है मामला

रामपुर   उत्तर प्रदेश के रामपुर में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं. दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई है. यह एफआईआर रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज हुई है. मामले में बड़े पैमाने पर आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप लगाए गए हैं।  मिली जानकारी के मुताबिक, ईडी के लखनऊ कार्यालय में तैनात डिप्टी डायरेक्टर पीयूष एस. थ्रोट ने पुलिस को शिकायत दी. इसके आधार पर अजीमनगर थाने में FIR दर्ज की गई है. यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 66(2) के तहत की गई शिकायत से जुड़ी है।  जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी में कथित आर्थिक अनियमितताओं को लेकर जांच एजेंसी ने यह कदम उठाया है. हालांकि, एफआईआर दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि आरोप साबित हो गए हैं. मामले की जांच के बाद ही आरोपों से जुड़े तथ्यों की पुष्टि हो सकेगी।  भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी शामिल इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61, 316(5) और 318(4) के तहत भी FIR दर्ज की गई है. इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13(1) और 13(2) भी लगाई गई हैं. इन धाराओं के तहत दर्ज मामले में कथित वित्तीय गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की जांच की जा सकती है. फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में एफआईआर में लगाए गए आरोपों का पूरा ब्योरा सामने नहीं आया है।  जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े इस मामले में अब जांच के दौरान अहम दस्तावेजों और लेन-देन की पड़ताल की जा रही है. ईडी की शिकायत के आधार पर दर्ज FIR के बाद मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों की जांच पर निर्भर करेगी. आजम खान की ओर से इस एफआईआर पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  क्या है पूरा मामला? दरअसल, जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा यह मामला पैसों के लेन-देन में कथित गड़बड़ी का है. ईडी को शक है कि ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी को मिले पैसों के सोर्स और उनके इस्तेमाल में गड़बड़ी हुई है. जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि ट्रस्ट को पैसा कहां से मिला और उसे किन कामों में खर्च किया गया. इस मामले में सरकारी ठेकेदारों से जुड़े पैसों के लेन-देन की भी जांच की जा रही है. ईडी इससे पहले ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों से पूछताछ कर चुकी है।  13 अक्टूबर को ईडी ने रामपुर जेल में आजम खान से भी करीब आठ घंटे तक पूछताछ की थी. अब एजेंसी की शिकायत पर रामपुर के अजीमनगर थाने में आजम खान के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. हालांकि, अभी ये आरोप हैं और जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी। 

योगी सरकार का बिजली व्यवस्था सुधारने पर जोर, राजस्व वसूली और बिलिंग पर रहेगी सख्त निगरानी

योगी सरकार का बिजली व्यवस्था में लगातार सुधार पर जोर, राजस्व वसूली और सही बिलिंग की होगी सख्त निगरानी लाइन हानि कम करने और उपभोक्ता सेवाएं बेहतर बनाने के लिए वितरण निगमों को निर्देश गलत बिजली बिलों पर तय होगी जिम्मेदारी, डिस्कॉम प्रबंध निदेशक हर सप्ताह 7 से 10 बिलों की करेंगे रैंडम जांच लखनऊ,  योगी सरकार प्रदेश में विद्युत वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने, राजस्व संग्रह बढ़ाने और उपभोक्ताओं को पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं यूपीपीसीएल के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद ने वितरण निगमों की साप्ताहिक समीक्षा बैठक कर राजस्व प्राप्ति, लाइन हानि, बिलिंग व्यवस्था, स्मार्ट मीटर स्थापना, परिवर्तकों की क्षतिग्रस्तता और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक नितीश कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि सभी वितरण निगमों के प्रबंध निदेशक एवं संबंधित अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। अध्यक्ष ने कहा कि राजस्व वृद्धि, विद्युत हानियों में कमी और उपभोक्ता सेवाओं में सुधार के लिए प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय की जाए। राजस्व वृद्धि और लाइन हानि में कमी पर जोर वित्तीय वर्ष 2026-27 में राजस्व प्राप्ति और केवाईपी अभियान की समीक्षा करते हुए रणवीर प्रसाद ने राजस्व संग्रह में सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने पांच रुपये से कम थ्रू रेट वाले फीडरों की विशेष समीक्षा करने तथा सर्वाधिक लाइन हानि वाले 10 पोषकों को प्राथमिकता के आधार पर लेकर सुधारात्मक कार्रवाई करने को कहा। सहारनपुर में 1.71 रुपये थ्रू रेट पर असंतोष जताते हुए सुधार के निर्देश दिए, जबकि मुरादाबाद में राजस्व प्राप्ति कम होने पर संबंधित अधिकारियों से प्रभावी प्रयास करने को कहा। गलत बिलिंग पर तय होगी जिम्मेदारी यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने उपभोक्ताओं को सही और समयबद्ध बिजली बिल उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने गलत बिल तत्काल ठीक करने, बिलिंग संबंधी शिकायतों का निस्तारण करने और बिल संशोधन में अनियमितता रोकने के निर्देश दिए। सभी डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों को प्रत्येक सप्ताह सात से दस उपभोक्ताओं के बिलों की रैंडम जांच करने को कहा। लंबित बिल संशोधन मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाने और लापरवाही मिलने पर संबंधित कार्मिक की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश भी दिए। बकायेदारों पर कार्रवाई, परिवर्तकों की सुरक्षा पर ध्यान बकाया वसूली के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के बकायेदार उपभोक्ताओं के संबंध में ग्राम प्रधानों को पत्र भेजकर अवगत कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के गोला और नवाबगंज, गोंडा क्षेत्रों में बिलों की जांच तथा 10 बड़े बकायेदारों को चिह्नित कर नियमानुसार नोटिस और आवश्यक कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए हैं। बैठक में 100 केवीए से कम क्षमता वाले परिवर्तकों पर फ्यूज सेट लगाने का कार्य तेज करने तथा परिवर्तकों की क्षतिग्रस्तता कम करने के तकनीकी उपायों पर भी जोर दिया गया।  इसके अलावा बिजनेस प्लान 2024-25, 2025-26 और 2026-27 के स्वीकृत कार्यों की प्रगति, एमबी, ईआरपी क्लोजर और अंतिम भुगतान से जुड़े मामलों को समय से निस्तारित करने के निर्देश दिए गए। रणवीर प्रसाद ने कहा कि सही बिलिंग, शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, राजस्व वृद्धि और विद्युत हानियों में कमी वितरण निगमों की जिम्मेदारी है। इसके लिए नियमित निगरानी और निर्धारित समयसीमा में परिणाम सुनिश्चित किए जाएं।

राम नाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा’ का विमोचन करेंगे योगी आदित्यनाथ

पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द की आत्मकथा 'भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष' का विमोचन करेंगे सीएम योगी पूर्व राष्ट्रपति की गरिमामय उपस्थिति में लोक भवन सभागार में होगा रूपा पब्लिकेशंस इंडिया द्वारा प्रकाशित पुस्तक का विमोचन विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और दोनों डिप्टी सीएम भी रहेंगे मौजूद साधारण पृष्ठभूमि से सर्वोच्च संवैधानिक पद तक के संघर्ष, अनुभव व राष्ट्रपति भवन के अनछुए पहलुओं पर आधारित है पुस्तक लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार, 14 अक्टूबर को भारत के 14वें राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द की आत्मकथा 'भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष' का विमोचन करेंगे। पूर्व राष्ट्रपति की गरिमामय उपस्थिति में यह कार्यक्रम लोकभवन सभागार में आयोजित किया गया है। रूपा पब्लिकेशंस इंडिया द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक के विमोचन समारोह में विधानसभा अध्य्क्ष सतीश महाना, दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य एवं ब्रजेश पाठक समेत अन्य अतिथिगण उपस्थित रहेंगे। पुस्तक में कई अनछुए पहलुओं और निर्णयों का विवरण पूर्व राष्ट्रपति द्वारा लिखी गई पुस्तक में केवल उनके व्यक्तिगत जीवन ही नहीं, बल्कि राष्ट्रपति के रूप में 5 वर्षीय कार्यकाल के दौरान लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों, संवैधानिक शक्तियों, कोविड-19 संकट, केंद्र-राज्य संबंधों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से जुड़े कई अनसुने-अनदेखे अनुभवों का विवरण दर्ज है। साथ ही, इसमें देश की शासन व्यवस्था और सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर के रूप में उनके दायित्वों को भी गहराई से साझा किया गया है। यह पुस्तक न केवल एक पूर्व राष्ट्रपति की जीवनगाथा है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की शक्ति, संवैधानिक आदर्शों और सामाजिक-राजनीतिक परिवेश की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करती है।  संघर्ष से शिखर तक की प्रेरक यात्रा यह कार्यक्रम भारतीय गणतंत्र की उस मूल भावना का उत्सव है, जिसमें एक साधारण नागरिक अपने दृढ़ संकल्प, परिश्रम और सादगी के बल पर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है। उत्तर प्रदेश के एक साधारण ग्रामीण परिवेश (परौंख) से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक का पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द का सफर प्रेरणादायी है। श्री कोविन्द ने 25 जुलाई 2017 को भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। इससे पहले वह बिहार के राज्यपाल पद पर कार्यरत रहे। अप्रैल 1994 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए और मार्च 2006 तक लगातार दो कार्यकाल पूरे किए। इस दौरान उन्होंने कई संसदीय समितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वकील के तौर पर उन्होंने 1977 से 1979 तक दिल्ली उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के अधिवक्ता के रूप में कार्य किया। वह सर्वोच्च न्यायालय में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड भी बने। उनकी रुचि कानून, इतिहास, राजनीति और अध्यात्म में है।

योगी सरकार का बड़ा एक्शन, प्रयागराज में बाल चिकित्सालय निर्माण में लापरवाही पर कार्रवाई

जनकार्यों में हीला-हवाली पर योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई  प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय परिसर में निर्माणाधीन बाल चिकित्सालय के निर्माण का मामला समय से निर्माण कार्य पूर्ण न करने पर यूपी सिडको ने आरसीबी इन्फ्राकॉन्स का अनुबन्ध किया निरस्त आरसीबी इन्फ्राकॉन्स की 55 लाख बैंक गारंटी जब्त, अग्रिम भुगतान की वसूली का आदेश फर्म निदेशक के विरुद्ध दर्ज मुकदमों को छुपाकर पंजीकरण कराने पर 5 साल के लिए किया गया ब्लैक लिस्ट मुख्य अभियंता केजी दुबे से पंजीकरण/नवीनीकरण का कार्य हटाया गया, कई अन्य अभियंताओं पर भी विभागीय कार्रवाई डीसीयू पैटर्न पर चिकित्सालय निर्माण के कार्य को समय से पूर्ण कराने के निर्देश जारी मौजूदा मुख्य अभियंता (पूर्व) अरविन्द कुमार निर्मल को प्रयागराज में रहकर कार्य पूर्ण कराने के निर्देश लखनऊ  योगी सरकार ने प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय परिसर में बाल चिकित्सालय के निर्माण में हीला-हवाली पर बड़ी कार्रवाई की है। यूपी सिडको ने बाल चिकित्सालय का निर्माण कर रही फर्म आरसीबी इन्फ्राकान्स का अनुबंध निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई जन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से अति महत्वपूर्ण एवं जन उपयोगी निर्माण कार्य को अनुबन्ध की निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण न करने के कारण की गई। यूपी सिडको के प्रबंध निदेशक संजीव सिंह ने फर्म के पंजीकरण में कूटरचित अभिलेखों एवं फर्म निदेशक के विरूद्ध दर्ज मुकदमे का तथ्य छिपाने के आरोप में फर्म को 05 वर्ष के लिए ब्लैक लिस्ट भी कर दिया है। साथ ही चिकित्सालय के निर्माण में अत्यधिक विलम्ब एवं लापरवाही के लिए फर्म के द्वितीय चरण का अनुबन्ध निरस्त करते हुए सिक्योरिटी एवं परफॉर्मेंस गारंटी की धनराशि 55.00 लाख रुपये को भी जब्त कर लिया गया है। कार्य की महत्ता के दृष्टिगत बाल चिकित्सालय के अवशेष निर्माण कार्य को निगम द्वारा डीसीयू पैटर्न पर अविलंब पूर्ण कराने की कार्यवाही की जाएगी। इसके लिए मुख्य अभियन्ता (पूर्व) एके निर्मल को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। एमडी ने निर्देश दिया कि निगम अभियन्ताओं द्वारा फर्म को किये गये अग्रिम भुगतान की वसूली भी की जायेगी। उपरोक्त बाल चिकित्सालय के निर्माण कार्य में निगम के अभियन्ताओं द्वारा की गयी लापरवाही तथा बिना कार्य पूर्ण कराये फर्म के पक्ष में आंशिक रूप से धनराशि अवमुक्त करने के दोषी तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता  राजेश चौधरी, अधिशासी अभियन्ता मनीष कुमार श्रीवास्तव एवं सहायक अभियन्ता धर्म शंकर त्रिपाठी के विरूद्ध विभागीय कार्रवाई की जा रही है। एमडी संजीव सिंह ने बताया कि फर्म का फर्जी प्रपत्रों के आधार पर पंजीकरण करने एवं त्रुटिपूर्ण निविदा प्रक्रिया के लिए प्रथमदृष्टया दोषी पूर्व अधीक्षण अभियन्ता/मुख्य अभियन्ता (सेवानिवृत्त) पंकज चोपड़ा के विरूद्ध भी विधिक कार्रवाई की जाएगी। चिकित्सालय के निर्माण कार्य के लिए त्रुटिपूर्ण टेण्डर की कार्यवाही कर अनुबन्ध करने वाले तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता एवं मुख्य अभियन्ता (पूर्व) केजी दुबे के विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई की जा रही है। फर्मों के पंजीकरण एवं नवीनीकरण के समस्त कार्य मुख्य अभियन्ता, मुख्यालय केजी दुबे से तत्काल प्रभाव से हटा दिए गए हैं। इस प्रकरण के दृष्टिगत निगम में फर्जी अनुभव एवं अन्य प्रपत्रों के आधार पर पंजीकरण कराने वाली अन्य फर्मों को भी चिह्नित किए जाने के निर्देश दिये गये हैं। दोषी पाए जाने पर इन फर्मों को भी ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा। सरकार ने पूरे प्रदेश में चल रहे निर्माण कार्यों को समयबद्ध रूप में पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। जनसेवा से जुड़े कार्यों में हीला-हवाली पर फर्मों और अभियंताओं पर कार्रवाई की जाएगी।

योगी सरकार का बड़ा कदम, यूपी के 8 जिलों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी

योगी सरकार का खेती को लाभकारी बनाने पर जोर, 8 जिलों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी 12 से 18 साल से चकबंदी में फंसे गांवों को मिली राहत, लंबित मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान उत्तराधिकार और नामांतरण के लंबित मामलों के लिए 15 अक्टूबर से विशेष अभियान चकबंदी न्यायालयों में तीन साल से पुराने वादों का प्राथमिकता से होगा निस्तारण लापरवाही पर तय होगी जिम्मेदारी, अधिकारियों को निरीक्षण के निर्देश लखनऊ योगी सरकार ने खेती को लाभकारी बनाने, किसानों को चकबंदी संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने और भूमि विवादों के निस्तारण में तेजी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इससे कृषकों को सरकार द्वारा चलाई जा रही लाभार्थीपरक योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। प्रदेश के 8 जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी कर दी गई है, जबकि वर्षों से लंबित मामलों को निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक विशेष अभियान चलाकर निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों का निस्तारण किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने लंबे समय से लंबित चकबंदी के मामलों में तेजी लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। इसी क्रम में चार जनपदों के छह गांवों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-6(1) के तहत चकबंदी प्रक्रिया से अलग किया गया है। इनमें उन्नाव के अजगवां, पिडना, सादाबाद व बरेली का मगरासा गांव शामिल हैं। इन गांवों में पिछले 12 वर्षों से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही थी। इसके अलावा बुलंदशहर के बराल गांव में सात वर्ष और बांदा के काजीपुर (गिरवान) गांव में दो वर्ष से चकबंदी की प्रक्रिया लंबित थी। इन गांवों में ग्राम विकास योजना के तहत कार्य होने, नदी के कटान से प्रभावित होने, चकबंदी योग्य क्षेत्रफल 40 प्रतिशत से कम होने, औद्योगिक विकास क्षेत्र में शामिल होने, गुटबंदी और दलगत विवाद होने जैसे कारणों से प्रक्रिया आगे बढ़ाने में कठिनाइयां आ रही थीं। विशेष प्रयासों के बावजूद कार्य आगे नहीं बढ़ पाने के कारण इन्हें चकबंदी प्रक्रिया से अलग करने का निर्णय लिया गया। आठ जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी पूरी लंबे समय से लंबित मामलों को निस्तारित करते हुए आठ जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इनमें महराजगंज का बैसार गांव शामिल है, जहां 18 वर्षों से चकबंदी चल रही थी। बुलंदशहर के भीकमपुर और चित्रकूट के सिकरी सालिस गांव में 12 वर्षों से प्रक्रिया लंबित थी। इन तीनों गांवों में चकबंदी पूरी की गई। इसके अलावा बस्ती के औराडीहा व प्रतापगढ़ के देवलहा गांव में दो वर्षों से चल रही चकबंदी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई। इन गांवों में उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-52(1) के तहत प्रक्रिया समाप्त की गई। उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों के लिए विशेष अभियान चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने सभी बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को 15 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। अभियान के दौरान संबंधित धाराओं के तहत शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित करना होगा। अधिकारियों को निदेशालय को प्रमाणपत्र उपलब्ध कराना होगा कि निर्धारित समयसीमा से अधिक अवधि का कोई भी निर्विवाद उत्तराधिकार या नामांतरण का मामला जनपद में लंबित नहीं है। अभियान की अवधि के बाद भी तय समयसीमा से अधिक समय तक लंबित रहने वाले निर्विवाद उत्तराधिकार के मामलों में संबंधित चकबंदी अधिकारी और चकबंदीकर्ता की पहचान कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। तीन साल से पुराने वादों का प्राथमिकता पर निस्तारण चकबंदी न्यायालयों में तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित वादों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सभी उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और चकबंदी अधिकारियों को इस कार्य में तेजी लाने के लिए कहा गया है। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। इसके साथ ही अधिकारियों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी मैनुअल के प्रस्तर 541 के अनुसार अपने न्यायालयों, अधीनस्थ चकबंदी न्यायालयों, कार्यालयों और चकबंदी अभिलेखों के बस्तों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण संबंधी टिप्पणी 15 दिनों के भीतर उपलब्ध करानी होगी।

सपा का अभियान, हर दिन सामने लाएगी वोटर लिस्ट की गड़बड़ियां

लखनऊ आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की सियासत में मतदाता सूची को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर पहुंच गया है। सपा ने फैसला किया है कि चुनाव आयोग के विशेष अभियान के दौरान मतदाता सूची की एक खामी को हर दिन उजागर किया जाएगा। सोमवार से ही इस अभियान की शुरुआत कर दी गई है। इसके तहत सबसे पहले डुप्लीकेट मतदाता और नए मतदाताओं के नाम पर फर्जीवाड़ा पर फोकस किया जा रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी ने अब यह तय किया है कि वह हर दिन मतदाता सूची की एक नई विसंगति को सार्वजनिक करेगी, ताकि एक पारदर्शी, निष्पक्ष और त्रुटिरहित चुनावी प्रक्रिया को सुनिश्चित किया जा सके। हर दिन एक नए मामले या विसंगति को जनता और मीडिया के सामने लाकर सपा एक तरफ जहां सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर अपने कार्यकर्ताओं को भी इस मुहिम से सक्रिय करने में जुटी है। सपा का कहना है कि जब हाल ही में विशेष पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी हुई है, जिसमें अनुपस्थित, दूसरी जगह शिफ्ट हुए और मृत मतदाताओं को हटाया गया है। फॉर्म-6 भरवाकर नए मतदाता भी बनाए गए हैं तो अब एक माह के विशेष अभियान की कोई तुक नहीं समझ में आ रही है। वो भी तब, जब विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) भी होना है। एसआईआर के दौरान जिन मतदाताओं के शहर और गांव दोनों जगह की मतदाता सूची में नाम था, उनमें से तमाम मतदाताओं ने शहर से अपना वोट कटवा दिया है। जबकि, वे शहर में ही रहते हैं। ऐसे में सपा को आशंका है कि भाजपा फिर से इन मतदाताओं के नाम शहर में जुड़वा सकती है, ताकि उसका वोट बैंक प्रभावित न हो। इससे वोट की डबलिंग फिर से हो जाएगी और एसआईआर की प्रक्रिया पर खर्च किए करोड़ों रुपये का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। सपा के प्रदेश सचिव केके श्रीवास्तव कहते हैं कि इस अभियान के दौरान सत्तापक्ष बड़ी गड़बड़ कर सकता है। इसलिए हम आयोग के दफ्तर में लगातार जाकर भी अपनी बात रखेंगे। वोट की डबलिंग आसानी से पकड़ लेगा आयोग का सॉफ्टवेयर प्रदेश के अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी अखंड प्रताप सिंह कहते हैं कि चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर में डुप्लीकेसी और एक से अधिक प्रविष्टियों को स्वतः पकड़ने की मजबूत व्यवस्था है। यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य स्थान की मतदाता सूची में पहले से पंजीकृत मिलता है, तो सॉफ्टवेयर उसे मैच या संभावित डुप्लीकेट के रूप में चिह्नित कर देता है।

राकेश के साथ अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी भी होंगे भाजपाई

अमेठी अमेठी के गौरीगंज के सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह के भाजपा में शामिल होने से जिले के राजनीतिक समीकरण में खासा बदलाव आएगा। उनके साथ गोसाईगंज के विधायक अभय सिंह और कालपी के विधायक विनोद चतुर्वेदी भी भाजपा में शामिल होंगे। कार्यक्रम के लिए गौरीगंज-जगदीशपुर मार्ग स्थित विधायक के आवास मंगलम के बगल में तैयारियां की गई हैं। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इसे अमेठी की राजनीति में अहम माना जा रहा है। कार्यक्रम में भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री और पूर्व सांसद स्मृति इरानी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, राष्ट्रीय मंत्री भोला सिंह, पूजा पाल और प्रभारी मंत्री प्रतिभा शुक्ला समेत गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र के 500 से अधिक ग्राम प्रधान, पूर्व प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के वाहनों की पार्किंग के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है। राकेश प्रताप सिंह सपा के टिकट पर लगातार तीन बार गौरीगंज से विधायक चुने गए हैं। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद वह चर्चा में आए थे। उनके भाजपा में शामिल होने से जिले में सपा और भाजपा के राजनीतिक समीकरणों पर गहरा असर पड़ेगा। सुरक्षा और यातायात के लिए पुलिस बल तैनात कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के चाकचौबंद इंतजाम किए जा रहे हैं। पुलिस अधीक्षक सरवण टी के निर्देश पर पुलिस के साथ पीएसी की तैनाती की गई है। थाना प्रभारियों के साथ 50 उपनिरीक्षक, 200 कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल ड्यूटी पर लगाए गए हैं। किसी भी तरह की अव्यवस्था रोकने के लिए आयोजन स्थल की लगातार निगरानी रहेगी।

जनता दर्शन में उपमुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता के साथ सुनीं जनसमस्याएं

लखनऊ आमजन की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी प्रतिबद्धता के साथ उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मंगलवार को लखनऊ स्थित अपने आवास पर आयोजित जनता दर्शन में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे फरियादियों ने अपनी शिकायतें एवं परेशानियां उनके समक्ष रखीं। उपमुख्यमंत्री ने प्रत्येक फरियादी से संवाद कर उनकी समस्याओं को गंभीरता एवं संवेदनशीलता से सुना और उनके शीघ्र समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। जनता दर्शन में उपचार एवं आर्थिक सहायता, पुलिस कार्रवाई, राजस्व संबंधी मामलों, भूमि विवाद, पारिवारिक विवाद सहित विभिन्न विभागों से जुड़ी समस्याएं प्रमुखता से सामने आईं। उपमुख्यमंत्री ने एक-एक कर सभी फरियादियों की बात सुनी और संबंधित प्रकरणों की जानकारी प्राप्त की। कई मामलों में उन्होंने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों से दूरभाष पर वार्ता कर शिकायतों की स्थिति जानी तथा नियमानुसार त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ितों को राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनसमस्याओं के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही, उदासीनता अथवा अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा।

यू-डायस प्लस पोर्टल के स्टूडेंट मॉड्यूल के सेक्शन-4 में दर्ज किया जाएगा प्रत्येक बच्चे का विवरण

प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में संचालित बालवाटिकाओं और को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों का डेटा होगा अपडेट लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को व्यवस्थित और सुदृढ़ बनाने के क्रम में बालवाटिकाओं में नामांकित बच्चों का विद्यार्थीवार विवरण डिजिटल पोर्टल पर दर्ज करने की प्रक्रिया तेज की जा रही है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि परिषदीय प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में संचालित बालवाटिकाओं और को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित बच्चों का विवरण यू-डायस प्लस पोर्टल पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शत-प्रतिशत दर्ज कराया जाए। इसके लिए 15 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है। निर्देशों में डेटा एंट्री के दौरान सावधानी बरतने, विवरण का सत्यापन करने और विकासखंडवार प्रगति की नियमित समीक्षा करने पर विशेष जोर दिया गया है। पत्र में वरिष्ठ विशेषज्ञ (प्री-प्राइमरी), समग्र शिक्षा तथा मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों को भी डेटा की गुणवत्ता का नियमित अनुश्रवण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके माध्यम से बालवाटिकाओं में नामांकित बच्चों का विवरण व्यवस्थित रूप से दर्ज करने और निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा कराने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। स्टूडेंट मॉड्यूल में दर्ज होगा बच्चों का विवरण यू-डायस प्लस पोर्टल के स्टूडेंट मॉड्यूल के सेक्शन-4 ‘स्टूडेंट डिटेल्स’ में बालवाटिकाओं एवं सह-स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित बच्चों का विद्यार्थीवार विवरण दर्ज किया जाएगा। यह प्रक्रिया भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सांख्यिकी ब्यूरो के कार्यालय ज्ञापन के संदर्भ में आगे बढ़ाई जा रही है। डेटा एंट्री में शुद्धता पर विशेष जोर महानिदेशक ने निर्देश दिए हैं कि संबंधित बच्चों के विवरण का सत्यापन करते हुए पोर्टल पर शत-प्रतिशत डेटा दर्ज किया जाए। प्रविष्टि के दौरान विशेष सावधानी बरतने और त्रुटिरहित जानकारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है, ताकि पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़े विश्वसनीय एवं उपयोगी बने रहें। 15 दिनों में पूरा करना होगा कार्य सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि कार्य को प्राथमिकता देते हुए अपने स्तर से विकासखंडवार प्रगति की नियमित समीक्षा करें और 15 दिनों के भीतर शत-प्रतिशत डेटा एंट्री पूरी कराना सुनिश्चित करें। निर्देशों के अनुपालन के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों तथा संबंधित अधिकारियों के समन्वय पर भी जोर दिया गया है। बालवाटिका के बच्चों का व्यवस्थित डेटा प्रारंभिक शिक्षा की बेहतर योजना बनाने और बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को समझने में सहायक होगा। सरकार गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बालवाटिकाओं में नामांकित बच्चों का विद्यार्थीवार विवरण यू-डायस प्लस पोर्टल पर निर्धारित समय-सीमा में शत-प्रतिशत और त्रुटिरहित दर्ज कराया जाना सुनिश्चित किया जा रहा है। सभी जिलों को 15 दिनों में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा