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जालौन में भीषण एक्सीडेंट, 7 की मौत, 3 की हालत नाज़ुक

जालौन जालौन जनपद के कालपी कोतवाली क्षेत्र में सोमवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में मृतकों की संख्या सात हो गई है।, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायलों का इलाज जारी है। उरई से गंभीर हालत में कानपुर रेफर किए गए शिवानंद ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसा जोल्हुपुर मोड़ के पास हुआ, जहां अयोध्या से उरई लौट रही एक कार चालक को झपकी आने से अनियंत्रित होकर आगे चल रहे वाहन से जा भिड़ी। इस दर्दनाक हादसे से क्षेत्र में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं स्थानीय लोगों में भी शोक की लहर दौड़ गई है। मिली जानकारी के अनुसार, ललितपुर जनपद के महरौनी निवासी शशिकांत तिवारी अपने परिजनों के साथ अयोध्या दर्शन करने गए थे। दर्शन के बाद सभी लोग कार से वापस लौट रहे थे। सोमवार सुबह करीब 6 बजे जैसे ही उनकी कार कालपी क्षेत्र के जोल्हुपुर मोड़ के पास पहुंची, चालक को अचानक झपकी आ गई, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर सामने चल रहे वाहन से टकरा गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं शिवानंद की हालत नाजुक होने पर उन्हें कानपुर भेजा गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। हादसे में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हैं, उनका इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि हादसे के बाद घायलों को बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। कुछ घायल करीब एक घंटे तक कार के केबिन में फंसे रहे, जिन्हें स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से बाहर निकाला गया।   हादसे के बाद मची चीख-पुकार कार में कुल 10 लोग सवार थे, जिनमें शशिकांत तिवारी, कृष्णकांत, दीपक तिवारी, हरिमोहन तिवारी, भूषण तिवारी, अंशुल तिवारी, स्वामी प्रसाद तिवारी, मनोज और देशराज शामिल बताए जा रहे हैं। सभी एक ही परिवार के सदस्य बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही कालपी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। 10 मिनट तक मेडिकल कॉलेज के बाहर तड़पते रहे मरीज घायलों को लेकर एम्बुलेंस मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बाहर पहुंची, लेकिन मरीज को उतारने के लिए वहां पर कोई भी वार्ड बॉय नहीं नहीं था। हालत यह रही कि मरीज 10 मिनट तक एंबुलेंस में ही तड़पते रहे इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने किसी तरह मरीजों को बाहर निकाला और इमरजेंसी के अंदर पहुंचा जहां वह जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।  

मुख्यमंत्री ने विपरीत परिस्थितियों में आमजन को तत्काल मदद उपलब्ध कराने का दिया निर्देश

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह लखनऊ समेत प्रदेश के कई जनपदों में हुई आंधी-बारिश व विपरीत मौसम की स्थितियों को देखते आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों को लेकर प्रशासन को निर्देश दिए हैं। सीएम ने मौसम से प्रभावित जनपदों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि पूरी मशीनरी सक्रिय रहे, हर हाल में प्रयास करें कि विपरीत मौसम का न्यूनतम असर हो। जनहानि, पशुहानि, घायलों व आपदा प्रभावितों को 24 घंटे में मुआवजा दिलाना सुनिश्चित करें। इसमें किसी तरह की लापरवाही नहीं नहीं होनी चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि सरकार हर प्रतिकूल परिस्थिति में किसानों व समस्त प्रदेशवासियों के साथ निरंतर खड़ी है। प्रशासनिक अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विपरीत मौसम में कई जनपदों में सड़क दुर्घटनाएं हुईं। वहां राहत-बचाव कार्य तेज गति से हों। घायलों का निकटवर्ती अस्पतालों में त्वरित इलाज सुनिश्चित किया जाए। आंधी-बारिश की वजह से किसानों व आमजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पूरा प्रयास किया जाए कि प्रतिकूल मौसम का न्यूनतम प्रभाव हो।  मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे निरंतर फील्ड में रहें, वस्तुस्थिति का जायजा लें। फील्ड अधिकारी भी खराब मौसम से प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के बीच जाएं और उनसे सीधा संपर्क करें और राहत कार्यों के लिए समन्वय बनाएं। किसी भी विपरीत स्थिति या आवश्यकता पर सभी सूचनाएं समय पर एकत्र कर शासन को उपलब्ध कराएं, ताकि प्रभावितों को जल्द से जल्द राहत सुनिश्चित की जा सके।

निलंबन और पदोन्नति रोकने के आरोपों पर उबाल, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग तेज

लखनऊ बिजली विभाग में दलित अभियंताओं पर कार्रवाई से उबाल है। पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने साफ किया है कि अगर एकतरफा कार्रवाई पर दलित अभियंताओं को जल्द न्याय नहीं मिलता तो इस मसले पर आंदोलन होगा, जिसकी सारी जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन की होगी। एसोसिएशन की प्रांतीय कार्यकारिणी की आपात बैठक रविवार को फील्ड हॉस्टल में हुर्ह। संगठन ने उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने कहा कि अगर उच्च स्तरीय कमेटी से जांच करवाई जाए तो स्पष्ट हो जाएगा कि दलित अभियंताओं को निशाना बनाया जा रहा है। अभियंताओं पर कार्रवाई न केवल सेवा नियमों के विपरीत हैं बल्कि सामाजिक न्याय की मूल भावना के विपरीत भी। एसोसिएशन ने अभियंताओं पर निलंबन, पदोन्नति रोके जाने और अनुचित दंड के आरोप लगाए हैं। साथ ही यह भी कहा कि ज्यादातर मामलों में अभियंताओं को राहत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। बैठक में एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, उपाध्यक्ष नेकीराम, पीएम प्रभाकर अतिरिक्त महासचिव , अजय कुमार (ट्रांसको), अध्यक्ष सुशील कुमार वर्मा, अजय कुमार आदि उपस्थित रहे। इनपर अनुचित कार्रवाई का आरोप -नेकीराम (अधीक्षण अभियंता) को मात्र 6 दिन की तैनाती के भीतर प्रतिकूल प्रविष्टि देकर मुख्य अभियंता पद पर पदोन्नति रोक दी गई। -पूरन चंद (अधीक्षण अभियंता) व नरेश कुमार (अधिशासी अभियंता) को लगभग एक वर्ष से निलंबित रखा गया, वह भी घटिया ट्रांसफार्मर जलने के मामले में, जिससे उनकी पदोन्नति बाधित हुई। -अजय कुमार (अधीक्षण अभियंता) को फर्जी शिकायतों, जिनमें बामसेफ व पीडीए लोगों की मदद करने के आरोप में निलंबित किया गया। -निर्भय कुमार (अधिशासी अभियंता) को एक ही मामले में दोहरा दंड दिया गया। -हरिश्चंद्र वर्मा (मुख्य अभियंता, मध्यांचल) को पिछले 6 माह से गलत आरोपों के आधार पर निलंबित रखा गया, जिनकी पत्नी की लगातार डायलिसिस हो रही है। -मुकेश बाबू (अधीक्षण अभियंता) को हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी पदोन्नत नहीं किया गया। -सुनील कुमार, सुधाकर व एनपी सिंह के मामले भी लंबित हैं, जिससे पदोन्नति और टाइम स्केल बाधित। -पवन कुमार अधिशासी अभियंता लंबे समय से निलंबित

UP के 1.43 लाख शिक्षामित्रों के लिए खुशखबरी, बढ़े मानदेय के बाद सम्मान कार्यक्रम

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के 1:43 लाख शिक्षा मित्रों के लिए 5 मई का दिन बेहद खास होने जा रहा है। योगी सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि के बाद अब उनके सम्मान को भी प्राथमिकता देते हुए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इस पहल को प्रदेशव्यापी स्वरूप देते हुए आगामी 5 मई को गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्यस्तरीय भव्य कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। 18,000 रुपए प्रतिमाह मानदेय के साथ लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों को इस प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा, जिसके माध्यम से पूरे प्रदेश में स्पष्ट तौर पर यह संदेश देने की कोशिश की जाएगी कि शिक्षा व्यवस्था की नींव को मजबूत करने वाले शिक्षामित्रों को अब उचित पहचान और संबल मिल रहा है। योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रदेश के शिक्षा मित्रों को अप्रैल महीने से ही बढ़े हुए मानदेय का लाभ मिलना शुरू हो चुका है। अब 5 मई को गोरखपुर के बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह से मुख्यमंत्री इसका औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षा मित्रों के साथ संवाद भी करेंगे। पांच मई को सुबह 11 बजे होने वाले इस कार्यक्रम के समानांतर प्रदेश के सभी जनपदों में भी आयोजन कर इसे व्यापक रूप दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों के लिए लिया गया यह निर्णय अब पूरी तरह लागू हो चुका है। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी इस व्यवस्था के अंतर्गत बेसिक शिक्षा के 13,597 और समग्र शिक्षा के 1,29,332 शिक्षामित्रों को 18,000 रुपए प्रतिमाह की दर से भुगतान किया जा रहा है। योगी सरकार का कहना है कि इससे उनका आर्थिक सशक्तीकरण हुआ है। योगी सरकार का कहना है कि प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र में सुधार और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। पहले मानदेय में वृद्धि और अब उन्हें सम्मान देने के लिए की जा रही यह पहल शिक्षामित्रों के मनोबल को बढ़ाने के साथ-साथ विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को भी नई दिशा देगी। गोरखपुर में पांच मई को होने जा रहा यह आयोजन शिक्षा सुधार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। लाइव प्रसारण और व्यापक भागीदारी शिक्षा मित्रों के लिए गोरखपुर के आयोजित इसा कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन और मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर किया जाएगा, जिससे प्रदेश भर के शिक्षा मित्र इस अवसर के साक्षी बन सकें। साथ ही, सभी जनपदों में भी समानांतर रूप से आयोजन किए जाएंगे, जहां स्थानीय स्तर पर जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षा मित्रों की भागीदारी उल्लेखनीय होगी।

नई बिजली टैरिफ नीति से 35 लाख उपभोक्ताओं को फायदा, घरेलू दरों पर मिल सकती है राहत

लखनऊ अब घर में छोटी दुकान चलाने वालों को अलग से कॉमर्शियल बिजली कनेक्शन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नई बिजली टैरिफ नीति में इस तरह के उपभोक्ताओं के लिए नई श्रेणी का प्रावधान किया जा सकता है। इससे प्रदेश के लगभग 35 लाख बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। राज्य विद्युत नियामक आयोग इस दिशा में गंभीरता से विचार कर रहा है प्रदेश में करीब 3.5 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं। – इसमें से लगभग 2.94 करोड़ घरेलू कनेक्शनधारी हैं। इनमें बड़ी संख्या (करीब 35 लाख) ऐसे लोगों की है, जो अपने घरों में किराना, स्टेशनरी, सब्जी या अन्य छोटे व्यवसाय संचालित करते हैं। वर्तमान व्यवस्था के तहत, इन दुकानों के लिए अलग से कॉमर्शियल कनेक्शन लेना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर बिजली चोरी के आरोप में कार्रवाई होती है। प्रस्तावित नई टैरिफ नीति के तहत ऐसे छोटे दुकानदारों के लिए अलग श्रेणी निर्धारित की जा सकती है। उदाहरण के तौर पर जो उपभोक्ता 300 यूनिट तक बिजली खर्च करते हैं, उनसे घरेलू दरों पर ही शुल्क लिया जा सकता है। साथ ही नए कनेक्शन लेने वालों के लिए भी कुछ रियायत देने पर विचार किया जा रहा है। अभी घरेलू कनेक्शन पर बिजली की दर लगभग 4 से 5 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि कॉमर्शियल कनेक्शन के लिए यह दर करीब 8 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच जाती है। इसके अलावा न्यूनतम अधिभार शुल्क भी लगभग 500 रुपये होता है। यदि अलग कनेक्शन की अनिवार्यता समाप्त होती है, तो छोटे दुकानदार जो केवल बल्ब और पंखे जैसी सीमित बिजली उपकरणों का उपयोग करते हैं उन्हें घरेलू दरों पर ही बिजली मिल सकेगी। दरों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं बिजली दरों में बढ़ोतरी के फिलहाल आसार नहीं दिख रहे। पॉवर कॉर्पोरेशन ने 1.15 लाख करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता का प्रस्ताव दिया है, जबकि बिजली आपूर्ति की लागत 8.50 से 8.80 रुपये प्रति यूनिट आंकी गई है। हालांकि, उपभोक्ताओं के पक्ष में लगभग 51 हजार करोड़ रुपये का सरप्लस बताया जा रहा है। ऐसे में संभावना है कि जून माह में जारी होने वाली नई दरों में वृद्धि न की जाए।  

हाईटेक टाउनशिप में गड़बड़ी पर कार्रवाई तय, सुविधाओं की होगी सख्त जांच

लखनऊ  यूपी की योगी सरकार हाईटेक टाउनशिप योजनाओं में सुविधाओं के नाम पर खानापूर्ति करने वाले बिल्डरों के खिलाफ शिकंजा कसने जा रही है। टाउनशिप में सुविधाओं की जांच कराई जाएगी और देखा जाएगा कि आवंटियों को वादे के मुताबिक चीजें मिली हैं या नहीं। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि विस्तार या क्षेत्रफल कम करने वाले बिल्डरों ने अब तक कितना काम कराया है। संशोधित डीपीआर देने की क्या स्थिति है। इसमें खामियां मिलने पर सख्त कार्रवाई की तैयारी है। हाईटेक टाउनशिप योजना में विकास प्राधिकरणों द्वारा 13 बिल्डरों को निजी क्षेत्र में टाउनशिप विकसित करने का लाइसेंस दिया गया था। इनमें से सात परियोजनाएं ही शुरू हुईं और शेष शुरू नहीं हो पाईं। आवास विभाग रुकी हुई परियोजनाओं को शुरू करने के लिए हाईटेक टाउनशिप नीति में संशोधन किया और बिल्डरों को एक बार फिर से काम करने का मौका दिया। टाउनशिप में 1500 एकड़ तक क्षेत्रफल करने की सुविधा बिल्डरों को दी गई। परियोजना अवधि में समय विस्तार शुल्क देकर संशोधित डीपीआर स्वीकृत कराने और पांच साल तक काम करने का मौका दिया गया। बिल्डरों को रुकी हुई टाउनशिप पूरी करने का पूरा मौका दिया गया। शासन को इसके बाद भी जानकारी मिल रही है कि कुछ बिल्डर इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं और रुकी हुई योजनाओं को पूरा करने व डीपीआर देने में हीला हवाली कर रहे हैं। पिछले दिनों बुलंदशहर-खुर्जा विकास प्राधिकरण द्वारा नोएडा में टाउनशिप लाने के लिए उत्तम स्टील्स एंड एसोसिट का लाइसेंस निरस्त किया गया है। लाइसेंस निरस्त करने का कारण बताया गया कि कंपनी ने परियोजना की स्वीकृति के लगभग 17 वर्ष बाद टाउनशिप स्थल पर केवल 10 प्रतिशत ही विकास कार्य कराया। इसीलिए उच्च स्तर पर प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों से रिपोर्ट मांगी गई है। उनसे पूछा गया है कि उनके द्वारा हाईटेक टाउनशिप लाइसेंस लेकर कितने बिल्डरों ने काम कराया है। विस्तार करने या फिर संशोधित डीपीआर देने की क्या स्थिति है। इसके आधार पर गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है। बताया जाता है कि हाईटेक टाउनशिप नीति के तहत निजी बिल्डरों को बड़े भूखंडों पर अत्याधुनिक सुविधाएं देने के लिए लाइसेंस दिए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। शासन के संज्ञान में आया है कि कई बिल्डरों ने टाउनशिप के क्षेत्रफल को 1500 एकड़ तक बढ़ाने की सुविधा तो ली, लेकिन इसके लिए आवश्यक संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) अब तक जमा नहीं की है। बुलंदशहर में उत्तम स्टील्स एंड एसोसिएट्स का लाइसेंस रद्द होना एक बड़ी चेतावनी है, क्योंकि इस कंपनी ने 17 साल में केवल 10 प्रतिशत काम किया था।

उत्तर प्रदेश में आंधी-बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, कई इलाकों में बिजली गुल

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज लगातार बिगड़ा हुआ है और आंधी-बारिश का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा। राजधानी लखनऊ में सोमवार सुबह करीब 8:30 बजे अचानक मौसम ने करवट ली और तेज तूफान के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। हालात ऐसे हो गए कि दिन में ही रात जैसा अंधेरा छा गया। आसमान में घने काले बादल छा गए, तेज गर्जना के साथ बिजली कड़कती रही, जिससे लोगों में डर और दहशत का माहौल बन गया। तेज हवाओं का असर शहर के कई हिस्सों में साफ दिखाई दे रहा है। सैकड़ों पेड़ उखड़ गए हैं, जिससे कई जगहों पर सड़कें अवरुद्ध हो गईं और यातायात प्रभावित हुआ। लखनऊ में अचानक बदला मौसम, सुबह होते अंधेरा इसके अलावा कई बिजली के पोल भी गिर गए, जिसके चलते शहर के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। बिजली कटौती के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम के इस अचानक बदले रुख ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। दफ्तर जाने वाले लोग रास्ते में फंस गए, वहीं स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र भी प्रभावित हुए। कई जगहों पर जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। मौसम जारी किया था अलर्ट मौसम विभाग ने पहले ही आंधी और बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया था। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमीय सिस्टम के सक्रिय होने की वजह से यह स्थिति बनी हुई है। आने वाले कुछ घंटों में भी मौसम इसी तरह खराब रहने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बिना जरूरत घरों से बाहर न निकलें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। साथ ही बिजली के खंभों और पेड़ों से दूर रहने की सलाह दी गई है, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके। रविवार को भी बिगड़ा था मौसम, कई इलाकों की बिजली हुई थी गुल इससे पहले आंधी और बारिश के कारण रविवार को भी लखनऊ की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो गई। कहीं पेड़ गिरने से तार टूट गए, तो कहीं अंडरग्राउंड केबल में फाल्ट आ गया। इससे गोमतीनगर, चिनहट, बीकेटी और रहीमाबाद जैसे बड़े इलाकों को अंधेरे में डूब गए। आंधी इतनी तेज थी कि कई स्थानों पर पोल उखड़ गए और भारी पेड़ बिजली की लाइनों पर गिर पड़े। बिजली गुल होने का सुबह के समय घरों में पानी न आने से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज लोगों ने उपकेंद्रों पर हंगामा किया। निगोहां में बाधित रही बिजली निगोहां के दयालपुर फीडर अंतर्गत बरवालिया टी-ऑफ के पास रविवार को एक कौए के हाईटेंशन लाइन से टकराने के कारण आपूर्ति बाधित हो गई। मौके पर ही कौए की मौत हो गई। विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और पेट्रोलिंग कर फॉल्ट का पता लगाया। कर्मचारियों ने आपस में चिपके तारों को अलग कर लाइन को दुरुस्त किया, जिसके बाद आपूर्ति बहाल की जा सकी। इस दौरान दयालपुर फीडर से जुड़े क्षेत्रों में करीब 1 घंटा 50 मिनट तक बिजली आपूर्ति ठप रही। मलिहाबाद में आम की फसल को नुकसान हुआ मलिहाबाद में रविवार तड़के आई आंधी से फलपट्टी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में आम की फसल को नुकसान हुआ। तेज हवाओं के कारण बड़ी संख्या में कच्चे आम (कैरियां) टूटकर कर असमय गिर गए। कई बागों में तो आम जमीन पर बिछ गया। आंधी का असर रहीमाबाद और माल क्षेत्र में अधिक देखा गया। माल क्षेत्र के बागवान सर्वेश ने बताया कि आंधी से क्षेत्र में लाखों रुपये का आम टूट कर गिर गया है। बाग में बड़े आकार का आम गिर जाने से काफी नुकसान हो गया है। रहीमाबाद क्षेत्र में भी तेज हवाओं ने बागों को नुकसान पहुंचाया।

तेज रफ्तार कार ने अंबेडकरनगर में मचाई तबाही, 8 लोगों की मौत

 अंबेडकरनगर अंबेडकरनगर में मानवता दिखाने पहुंचे लोगों पर तेज रफ्तार कार काल बनकर टूटी. जलालपुर-अकबरपुर मार्ग पर घायल बाइक सवारों की मदद कर रहे ग्रामीणों को अनियंत्रित कार ने कुचल दिया. इस हादसे में कुल 8 लोगों की जान चली गई है, जिससे पूरे इलाके में मातम पसरा है।  अशरफपुर भुआ गांव के पास  यूपी के अंबेडकरनगर जिले के जलालपुर कोतवाली क्षेत्र में जलालपुर-अकबरपुर मार्ग पर भीषण सड़क दुर्घटना हुई. दो बाइकों की टक्कर में घायल हुए लोगों की मदद करने के लिए स्थानीय लोग मौके पर जमा हुए थे. तभी जलालपुर की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार स्विफ्ट डिजायर कार ने अनियंत्रित होकर भीड़ को रौंद दिया।  हादसे में मौके पर और इलाज के दौरान कुल 8 लोगों की मौत हो गई. पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया है।  मदद के दौरान बरपा काल जलालपुर में अकबरपुर मार्ग पर स्थित अशरफपुर भुआ भट्ठे के पास पहले दो मोटरसाइकिलों की आपस में भिड़ंत हुई थी. इस भिड़ंत में दो लोग गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े. आसपास के लोग तुरंत घायलों को अस्पताल भेजने और उनकी मदद करने के लिए सड़क पर इकट्ठा हुए. इसी मानवीय मदद के दौरान पीछे से आ रही कार ने लोगों को अपनी चपेट में ले लिया।  अस्पताल में तोड़ा दम हादसे के बाद पुलिस ने घायलों को तत्काल सीएचसी नगपुर पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने 6 लोगों को मृत घोषित कर दिया. वहीं, दो अन्य गंभीर घायलों को पहले जिला अस्पताल और फिर टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया. हालांकि, इलाज के दौरान इन दोनों ने भी दम तोड़ दिया. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को परिजनों की हर संभव सहायता के निर्देश दिए हैं। 

मुख्यमंत्री का आह्वान, हर विद्यार्थी एक पौधा जरूर लगाए, हर आंगनबाड़ी केंद्र 05 सहजन के पौधे रोपे जाएं

एक दिन में 35 करोड़ से अधिक पौधरोपण कर यूपी फिर बनाएगा रिकॉर्ड: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का आह्वान, हर विद्यार्थी एक पौधा जरूर लगाए, हर आंगनबाड़ी केंद्र 05 सहजन के पौधे रोपे जाएं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की वृहद पौधरोपण अभियान- 2026 की तैयारियों की समीक्षा, कहा पौधे लगाएं भी-बचाएं भी जनभागीदारी से सफल होंगे हरित क्रांति के प्रयास: मुख्यमंत्री विगत 09 वर्ष में वन एवं वृक्ष आवरण में 3 लाख 38 हजार एकड़ की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई वर्तमान में हरित आवरण 9.96%, वर्ष 2030 तक 15% और 2047 तक 20% हरित आवरण का लक्ष्य: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का निर्देश, इस वर्ष गंगा एक्सप्रेस-वे के दोनों किनारों पर हो वृहद पौधरोपण हरित उत्तर प्रदेश की दिशा में बड़ा कदम: नदियों के किनारे 4.35 करोड़ पौधरोपण की तैयारी रिकॉर्ड वृक्षारोपण के बाद अब फोकस जीवितता पर, टेक्नोलॉजी से होगी हर पौधे की निगरानी लखनऊ ख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस वर्ष एक दिन में 35 करोड़ पौधरोपण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा है कि विगत वर्षों में जनभागीदारी से प्रदेश ने वृक्षारोपण में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और अब इसे जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। रविवार को वृहद पौधरोपण अभियान-2026 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में न्यूनतम 05 सहजन के पौधे लगाए जाएं, जबकि स्कूल-कॉलेजों में हर छात्र कम से कम एक पौधा लगाए। मुख्यमंत्री ने गंगा एक्सप्रेस-वे के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सतत जन-अभियान के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में पिछले वर्षों में वृक्षारोपण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्ष 2009 से 2016 के बीच जहां 51.48 करोड़ पौधे लगाए गए थे, वहीं वर्ष 2017 से 2025 के बीच यह संख्या बढ़कर 242.13 करोड़ हो गई। इसी अवधि में वन एवं वृक्ष आवरण में 3 लाख 38 हजार एकड़ की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है और हरित आवरण लगभग 9.96 प्रतिशत तक पहुंच गया है। कार्बन स्टॉक में वृद्धि के मामले में भी प्रदेश राष्ट्रीय औसत (1.13 प्रतिशत) से आगे है और 2.46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को हरित क्रांति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2030 तक 15 प्रतिशत और 2047 तक 20 प्रतिशत हरित आवरण का लक्ष्य हर हाल में हासिल करना है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वर्ष 2026 के अभियान को पूरी तरह वैज्ञानिक, योजनाबद्ध और परिणामोन्मुख बनाया जाए। उन्होंने माइक्रो प्लानिंग को अभियान की आधारशिला बताते हुए ग्रामीण और शहरी स्तर पर तैयार सभी माइक्रो प्लानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा।  मुख्यमंत्री ने पौधों की गुणवत्ता और उपलब्धता पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिए कि सभी विभागों को वन विभाग की नर्सरियों से निःशुल्क एवं उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराए जाएं। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 1935 विभागीय नर्सरियां संचालित हैं और 50 करोड़ से अधिक पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, जिसके लिए 34 नई नर्सरियों की स्थापना भी की गई है। उद्यान, रेशम और निजी क्षेत्र की नर्सरियों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण के साथ-साथ पौधों की सुरक्षा और उनकी जीवितता सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने आधुनिक तकनीक के माध्यम से सतत मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि ‘हरीतिमा’ ऐप, जीआईएस मैपिंग, क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग तथा प्लांटेशन मॉनीटरिंग सिस्टम (पीएमएस) और नर्सरी मैनेजमेंट सिस्टम (एमएमएस) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वृक्षारोपण की निगरानी की जा रही है। वर्ष 2025 के विशेष सर्वेक्षण में वन विभाग द्वारा लगाए गए पौधों की जीवितता 80 प्रतिशत दर्ज की गई। मुख्यमंत्री ने शहीदों, स्वाधीनता संग्राम सेनानियों व अन्य हुतात्माओं के नाम पर वन/वाटिका के स्थापित करने पर बल दिया, नदियों के किनारे, हाइवे आदि के किनारे भी पौधे लगाए जाएं। मुख्यमंत्री ने इस वर्ष अयोध्या में रामायणकालीन पौधे लगाने पर जोर दिया।  मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि 30 मई तक अपनी-अपनी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर लें और निर्धारित समयबद्ध कार्यक्रम के अनुसार वृक्षारोपण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।  बैठक के दौरान वन एवं पर्यावरण विभाग की ओर से मुख्यमंत्री को 'शेखा झील पक्षी विहार, अलीगढ़' के रामसर साइट घोषित किए जाने का प्रमाण पत्र भी सौंपा गया। बता दें कि उत्तर प्रदेश में कुल 12 रामसर स्थल नामित किए जा चुके हैं, जो कुल 38,992.25 हेक्टेयर क्षेत्रफल आच्छादित करते हैं। शेखा झील पक्षी विहार रामसर स्थल 40.309 हेक्टेयर क्षेत्रफल के साथ प्रदेश का सबसे छोटा रामसर स्थल है। 2016 में इसे पक्षी विहार के रूप में अधिसूचित किया गया था।

घर बैठे प्लॉट की बकाया, लोकेशन और डिटेल्स देख सकेंगे खरीदार और निवेशक

नोएडा उत्तर प्रदेश के हाईटेक शहर नोएडा में प्रॉपर्टी से जुड़े लेनदेन को पारदर्शी और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। अब यहां किसी भी प्लॉट या संपत्ति की पूरी जानकारी जैसे बकाया राशि, आवंटन की तारीख, क्षेत्रफल, लोकेशन और विभागीय देनदारियां घर बैठे एक क्लिक पर उपलब्ध होगी। नोएडा प्राधिकरण ने जियोग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम (GIS) आधारित यह प्लेटफॉर्म तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही वेबसाइट पर लाइव किया जाएगा। इस नई व्यवस्था से न केवल आम खरीदारों और विक्रेताओं को राहत मिलेगी, बल्कि निवेशकों के लिए भी नोएडा में निवेश करना अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बन जाएगा। GIS सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता और सुविधा नोएडा प्राधिकरण द्वारा तैयार किया गया GIS सिस्टम शहर की संपत्तियों का डिजिटल डेटा एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराएगा। इसमें यूजर प्लॉट नंबर डालते ही संबंधित प्लॉट का प्रकार, सेक्टर, क्षेत्रफल और अन्य जरूरी जानकारियां आसानी से देख सकेगा। इससे प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने से पहले पूरी जानकारी हासिल करना आसान होगा और किसी भी तरह की अनिश्चितता कम होगी। बकाया और NOC से जुड़े झंझट होंगे आसान नोएडा में अधिकतर संपत्तियां लीज पर होती हैं और उनके ट्रांसफर के लिए ट्रांसफर ऑफ मेमोरेंडम (TM) प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसमें प्रॉपर्टी ट्रांसफर तभी संभव होता है, जब मूल आवंटी का पूरा बकाया साफ हो और उसे एनओसी जारी हो। GIS सिस्टम के जरिए अब प्रॉपर्टी पर बकाया राशि और अन्य देनदारियों की जानकारी पहले से उपलब्ध होगी, जिससे खरीदार धोखाधड़ी से बच सकेंगे और ट्रांसफर प्रक्रिया भी तेज होगी। रियल टाइम डेटा से निवेशकों को मिलेगा भरोसा प्राधिकरण के अनुसार, इस सिस्टम में रेसिडेंशियल, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल प्रॉपर्टी का डेटा रियल टाइम में अपडेट किया जा रहा है। इससे निवेशकों को सटीक और ताजा जानकारी मिलेगी, जो निवेश के फैसलों को अधिक सुरक्षित बनाएगी। हालांकि, ग्रुप हाउसिंग प्रॉपर्टी को अभी पूरी तरह रियल टाइम नहीं किया जा सका है, क्योंकि कई सोसाइटियों में रजिस्ट्री प्रक्रिया अधूरी है। इसे भी जल्द सिस्टम में शामिल करने की तैयारी है। सैटेलाइट मैप से दिखेगी शहर की पूरी तस्वीर GIS प्लेटफॉर्म में सैटेलाइट मैपिंग की सुविधा भी दी गई है, जिससे यूजर शहर की भौगोलिक स्थिति को समझ सकेगा। फिलहाल इसमें वर्ष 2022 तक का डेटा उपलब्ध है, जिसे लगातार अपडेट किया जा रहा है। यूजर्स बिना किसी रजिस्ट्रेशन के नोएडा प्राधिकरण की वेबसाइट पर जाकर GIS लिंक के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। रियल एस्टेट और निवेश को मिलेगा बढ़ावा नोएडा प्रदेश के राजस्व में बड़ी हिस्सेदारी रखता है। ऐसे में यह सिस्टम विदेशी और घरेलू निवेशकों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। पारदर्शी डेटा उपलब्ध होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और रियल एस्टेट सेक्टर को नई गति मिलेगी।