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CM योगी आज रामपुर और बरेली दौरे पर, करोड़ों की विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात

सीएम योगी मंगलवार को रामपुर व बरेली के दौरे पर, विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात रामपुर में 690 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 102 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे सीएम योगी इंटरमीडिएट-हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को करेंगे सम्मानित बरेली में मंडल के विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था की करेंगे समीक्षा लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार 30 जून को रामपुर व बरेली के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री मुरादाबाद से सीधे रामपुर पहुंचेंगे, जहां शाहाबाद में वह रामपुर के मिलक एवं बिलासपुर विधानसभा क्षेत्रों में 690 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 102 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। यहां वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे।  कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी इंटरमीडिएट/हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्राओं को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र देंगे। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लाभार्थियों को लैपटॉप, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के लाभार्थियों को चेक वितरित करेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के पात्र परिजनों को अनुदान राशि देंगे। मुख्यमंत्री सामाजिक विकास में विशेष योगदान देने वाले व्यापारियों का सम्मान भी करेंगे।  रामपुर के बाद मुख्यमंत्री बरेली पहुंचेंगे, जहां वह सर्किट हाउस में बरेली मंडल के लोक निर्माण विभाग के पुराने कार्यों की समीक्षा और नए कार्यों की कार्ययोजना के संबंध में बैठक करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री बरेली के विकास कार्यों एवं कानून व्यवस्था की समीक्षा करेंगे।

बाबा साहेब के अस्थिकलश का स्थानांतरण नहीं

बाबा साहेब के अस्थिकलश का स्थानांतरण नहीं लखनऊ  बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के अस्थिकलश को कहीं स्थानांतरित नहीं किया जा रहा है। यह जानकारी  बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर महासभा के महामंत्री अमरनाथ प्रजापति ने दी। इस संबंध में मीडिया में जारी अटकलों पर विराम लगाते हुए अमरनाथ प्रजापति ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि लखनऊ में विधानसभा मार्ग स्थित आंबेडकर महासभा में माई साहेब डॉ. सविता आंबेडकर द्वारा स्थापित इस अस्थिकलश को कहीं अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। महासभा परिसर में स्थापित बाबा साहेब का अस्थिकलश यथावत रहेगा।

IMD Weather Update: मानसून की धमाकेदार एंट्री, 48 घंटे तक भारी बारिश और तेज तूफान की चेतावनी

लखनऊ  भीषण गर्मी, चिलचिलाती धूप और उमस से उत्तर प्रदेश के लोगों को राहत मिलने की बारी आ गई है. मौसम का मिजाज करवट बदलने जा रहा है. मौसम विभाग की ताजा बुलेटिन के अनुसार, मानसूनी हवाओं ने उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर दस्तक दे दी हैं, जिससे अगले दो दिनों के भीतर प्रदेश का मौसम पूरी तरह सुहावना हो जाएगा।  आधिकारिक मौसम विभाग की बुलेटिन के अनुसार, अगले 24 से 48 घंटों के भीतर मानसून उत्तर प्रदेश में पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा. 30 जून से ही राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मानसूनी बारिश शुरू हो जाएगा. जुलाई के पहले सप्ताह तक मानसून की रफ्तार इतनी तेज होगी कि यह पूरे उत्तर प्रदेश को अपनी आगोश में ले लेगा और झमाझम बारिश से सूबे को सराबोर कर देगा।  तापमान 10 डिग्री तक की भारी गिरावट मौसम विभाग का कहना है कि मानसून के सक्रिय होते ही उमस भरी गर्मी से राहत मिली. अधिकतम तापमान में भी 7 से 10 डिग्री सेल्सियस तक की बड़ी गिरावट दर्ज होने की संभावना है. हालांकि, सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली जैसे सुदूर दक्षिणी जिलों के निवासियों को अभी अगले दो दिनों तक थोड़ी तपिश और गर्मी का सामना करना पड़ सकता है, जिसके बाद वहां भी मौसम साफ और ठंडा हो जाएगा।  66 जिलों में गरज-चमक और बिजली गिरने का अलर्ट मौसम के बदलते रुख को देखते हुए विभाग ने उत्तर प्रदेश के 66 जिलों में विशेष चेतावनी जारी की है. इन जिलों में तेज हवाएं चलने, गरज-चमक होने और अचानक वज्रपात (आकाशीय बिजली गिरने) की आशंका जताई गई है. खासकर तराई के इलाकों (नेपाल सीमा से सटे जिलों) में भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है, जिसके लिए स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने को कहा गया है।  पश्चिमी विक्षोभ भी बढ़ाएगा बारिश की रफ्तार मौसम वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश ने विशेष जानकारी देते हुए बताया कि पिछले कई दिनों से शुष्क और भीषण गर्मी का जो दौर चल रहा था, वह अब खत्म होने की कगार पर है क्योंकि ‘मॉनसूनल फ्लो’ (मानसूनी हवाओं का प्रवाह) काफी मजबूत हो चुका है. इसके साथ ही, आगामी 2 जुलाई को एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय होने जा रहा है. इन दोनों मौसमी प्रणालियों के एक साथ मिलने के कारण उत्तर प्रदेश में मानसून के आगमन के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हो चुकी हैं और बारिश का यह दौर लंबा खिंचेगा। 

रोजगार बढ़ाने की बड़ी पहल: उद्योगों की जरूरत के अनुरूप मिलेगा प्रशिक्षण, तय हुए कड़े मानक

लखनऊ प्रदेश में युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित कर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए कौशल विकास व्यवस्था का विस्तार किया गया है। प्रदेश में 800 से अधिक प्रशिक्षण साझेदारों को जोड़ा गया है, जिनके माध्यम से युवाओं को नई तकनीक, आधुनिक उद्योगों और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण मिलेगा। प्रशिक्षण व्यवस्था में निजी संस्थानों के साथ बड़े औद्योगिक समूहों, सरकारी संस्थानों और स्टार्टअप को भी शामिल किया गया है। सभी श्रेणियों के प्रशिक्षण साझेदारों के लिए कड़े पात्रता मानक तय किए गए हैं, ताकि प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोजगार सुनिश्चित किया जा सके। नई तकनीक और भविष्य की जरूरतों वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने के लिए न्यू एज ट्रेनिंग पार्टनर्स (एनटीपी) को शामिल किया गया है। इनके लिए कम से कम तीन वर्ष पुराना पंजीकरण, एक करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार, 500 प्रशिक्षित अभ्यर्थी, 50 प्रतिशत प्लेसमेंट और कम से कम दो संचालित प्रशिक्षण केंद्र होना अनिवार्य किया गया है। प्राइवेट ट्रेनिंग पार्टनर्स (पीटीपी) के तहत 500 से अधिक संस्थानों को पैनल में शामिल किया गया है। इनके लिए तीन वर्ष का अनुभव, पिछले तीन वर्षों में औसतन दो करोड़ रुपये का कारोबार, कम से कम 2,000 युवाओं को प्रशिक्षण और 1,000 को रोजगार दिलाने का अनुभव जरूरी है। इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग पार्टनर्स (आइटीपी) के रूप में 35 प्रतिष्ठित औद्योगिक समूहों को फ्लेक्सी एमओयू के माध्यम से जोड़ा गया है। इनमें रेमंड, काफी डे ग्लोबल लिमिटेड, मारुति इंडिया लिमिटेड और फ्यूचर शार्प स्किल्स लिमिटेड जैसी कंपनियां शामिल हैं। इनके लिए 100 करोड़ रुपये का औसत कारोबार, हर वर्ष कम से कम 500 युवाओं को प्रशिक्षण, न्यूनतम तीन वर्ष का अनुबंध और 80 प्रतिशत प्लेसमेंट सुनिश्चित करना अनिवार्य है। इसके अलावा 300 से अधिक सरकारी ट्रेनिंग पार्टनर्स (जीटीपी) भी इस अभियान से जुड़े हैं। वहीं, स्टार्टअप ट्रेनिंग पार्टनर्स (एसटीपी) के माध्यम से नवाचार आधारित प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा। इनके लिए वैध पंजीकरण, कम से कम 25 लाख रुपये का कारोबार, पर्याप्त प्रशिक्षण ढांचा, प्रशिक्षित प्रशिक्षक, ब्लैकलिस्ट न होने व राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप पाठ्यक्रम संचालित करने जैसी शर्तें निर्धारित की गई हैं।

लवकुश की कमाई सिर्फ ₹12 हजार, फिर भी VIP एरिया में बन रहा घर, तस्वीरों ने बढ़ाए सवाल

 अयोध्या  राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संपत्तियों को लेकर अब नए खुलासे हो रहे हैं. आजतक की टीम मामले में गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा द्वारा खरीदी गई एक ऐसी ही प्रॉपर्टी तक पहुंची. यह मकान अयोध्या-लखनऊ हाईवे के किनारे स्थित बनबीरपुर गांव में बन रहा है और स्थानीय लोगों का दावा है कि यह घर लवकुश मिश्रा का ही है।  आजतक को मिली जानकारी के मुताबिक, लवकुश मिश्रा ने राम मंदिर में नौकरी के दौरान अपनी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर यह जमीन खरीदी थी. दस्तावेजों के मुताबिक, यह जमीन सोहावल तहसील के मंगसी परगना इलाके में कमल स्वरूप सिंह से 8 लाख 80 हजार रुपये में खरीदी गई थी. वर्तमान में इस प्रॉपर्टी की कीमत करीब 25 लाख रुपये बताई जा रही है. आजतक को इस जमीन से जुड़े दाखिल-खारिज के दस्तावेज भी मिले हैं।  दस्तावेजों के मुताबिक, जमीन का दाखिल-खारिज 6 मार्च 2026 को सुप्रिया मिश्रा, निवासी मीनापुर भगोली, तहसील रुदौली, जिला अयोध्या के नाम पर किया गया. पड़ोस में रहने वाले राजकुमार पांडे ने लवकुश मिश्रा की तस्वीर देखकर पहचान की और कहा कि यही व्यक्ति इस निर्माणाधीन मकान का मालिक है. उन्होंने बताया कि फरवरी महीने से यहां मकान का निर्माण कार्य चल रहा था और दो दिन पहले तक मजदूर काम कर रहे थे. हालांकि, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला सामने आने के बाद से परिवार दिखाई नहीं दे रहा है और रविवार से यहां काम भी बंद हो गया है।  अयोध्या के वकील नहीं करेंगे आरोपियों की पैरवी इस  बीच फैजाबाद बार एसोसिएशन ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा फैसला लेते हुए आरोपियों की पैरवी नहीं करने का ऐलान किया है. बार एसोसिएशन की सोमवार को हुई सामान्य सभा की बैठक में यह निर्णय लिया गया. बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि कोई वकील आरोपियों की ओर से केस लड़ता है तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।  बैठक के दौरान वकीलों ने यह भी मांग की कि मामले से जुड़े चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को तीन दिनों के भीतर अयोध्या छोड़ देना चाहिए. वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो शहर की नाकेबंदी की जाएगी. चंपत राय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव थे और अनिल मिश्रा ट्रस्ट के सदस्य थे. दोनों ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया है।  फैजाबाद बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने कहा, 'मंदिर के चढ़ावे की चोरी से हमारी भावनाएं आहत हुई हैं. फैजाबाद के सभी वकीलों ने गिरफ्तार आरोपियों का बचाव नहीं करने पर सहमति जताई है.' इस फैसले के बाद फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा का एक वीडियो भी वायरल हुआ. वीडियो में वह कहते सुनाई दे रहे हैं, 'कोई भी वकील इस मामले में आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा. अगर कोई ऐसा करता है तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. हम मामले की सीबीआई जांच की भी मांग करते हैं।  यह घटनाक्रम अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम की निगरानी में चल रही जांच के बीच सामने आया है. अब तक इस मामले में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिन्हें सोमवार को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. वहीं चंपत राय का बयान भी दर्ज किया गया है. इस मामले में जिन 8 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, उनमें- रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडे, रामा शंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव शामिल हैं।  अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोप क्या हैं? राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप इस महीने तब सामने आए जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया कि 7 से 7.5 करोड़ रुपये के चढ़ावे का गबन हुआ है. इसके बाद विपक्ष के कई नेताओं ने इससे भी बड़े दावे किए. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या दौरे के दौरान कहा था कि भगवान राम को चढ़ाए गए हीरे-जवाहरात तक चोरी हो गए. उन्होंने आरोप लगाया, 'भक्तों द्वारा चढ़ाए गए हीरे और कीमती पत्थर चोरी हो गए, 200 करोड़ रुपये नकद चोरी हो गए और 200 किलो चांदी भी गायब हो गई.' इसी तरह अन्य विपक्षी नेताओं ने भी 70 किलो चांदी, 1250 किलो सोना और 200 करोड़ रुपये नकद चोरी होने के आरोप लगाए और सरकार से जवाबदेही की मांग की।  हालांकि, राम मंदिर ट्रस्ट ने एक प्रेस रिलीज जारी करके इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ावे के रूप में दिए गए सोने चांदी के आभूषण और अन्य जेवरात पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका पूरा हिसाब मौजूद है. ट्रस्ट ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सामने आई घटनाओं से वह 'स्तब्ध, आहत और बेहद दुखी' है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इन आरोपों की जांच की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया और कहा कि मामले की सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद की जाएगी। 

जलापूर्ति व्यवस्था जांचने गांव-गांव जाएंगे जलशक्ति मंत्री, ग्रामीणों से लेंगे सीधा फीडबैक

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार जल जीवन मिशन को केवल योजनाओं तक सीमित न रखकर उसकी जमीनी गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में भी लगातार सक्रिय है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए अब जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह स्वयं गांवों में जाकर नल से जलापूर्ति व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करेंगे। 15 से 25 जुलाई के बीच प्रस्तावित इस विशेष अभियान के तहत जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह एक दर्जन से अधिक जिलों के गांवों का दौरा करेंगे। इस दौरान वे न केवल पेयजल आपूर्ति और पानी की गुणवत्ता की जांच करेंगे, बल्कि ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं और सुझाव भी जानेंगे। इस अभियान में नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उनके साथ रहेंगे। जलशक्ति मंत्री और विभागीय अधिकारी गांवों में रात्रि विश्राम भी करेंगे। इस दौरान ग्रामीणों से सीधे संवाद स्थापित किया जाएगा और योजनाओं की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष आकलन होगा। निरीक्षण के दौरान गांवों में 'जल अर्पण' कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिनमें ग्रामीणों को जलापूर्ति व्यवस्था के संरक्षण और संचालन में सहभागी बनाया जाएगा। जिलों के दौरे के साथ ग्रामीणों से लिया जाएगा फीडबैक 15 और 16 जुलाई को जलशक्ति मंत्री ललितपुर, झांसी और जालौन के गांवों का औचक निरीक्षण करेंगे। इसके बाद 18 और 19 जुलाई को सुल्तानपुर, जौनपुर, मिर्जापुर और सोनभद्र के ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर जलापूर्ति व्यवस्था का जायजा लेंगे। इन सभी स्थानों पर वे ग्रामीणों से सीधा फीडबैक लेकर योजनाओं के प्रभाव का मूल्यांकन करेंगे। यमुना की सफाई के लिए संतों और ग्रामीणों से संवाद 24 जुलाई को जलशक्ति मंत्री मथुरा में संतों के साथ विशेष संवाद करेंगे। इस बैठक में यमुना नदी की स्वच्छता और संरक्षण को लेकर सुझाव लिए जाएंगे। साथ ही यमुना तटवर्ती ग्रामीणों को भी इस अभियान से जोड़कर नदी सफाई के प्रति जागरूक किया जाएगा। जलापूर्ति में लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन मुख्यालय में सोमवार को आयोजित समीक्षा बैठक में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि किसी जिले से जलापूर्ति संबंधी शिकायत प्राप्त होती है तो संबंधित चीफ इंजीनियर और अधीक्षण अभियंता के विरुद्ध जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी चीफ इंजीनियरों को प्रत्येक परियोजना की व्यक्तिगत समीक्षा करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी चीफ इंजीनियर अपने स्तर पर भी गांवों में जल अर्पण कार्यक्रम का आयोजन करें। इन आयोजनों में ग्रामवासियों को जलापूर्ति की व्यवस्था सौंपने के साथ-साथ ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति भी सचेत किया जाए।

टीएलपीएस रिपोर्ट-2025 से उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधारों की नई रणनीति बनेगी

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा सुधारों को योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ साक्ष्य आधारित नीति निर्माण, प्रभावी कक्षा-कक्षीय शिक्षण और सीखने के परिणामों में सतत सुधार को नई दिशा देने की रणनीति पर तेजी से कार्य कर रही है। मंगलवार को बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के संयुक्त तत्वावधान में 'टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (टीएलपीएस) रिपोर्ट-2025, उत्तर प्रदेश' पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय संवाद एवं सेमिनार आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का मुख्य विषय 'नीति से व्यवहार तक संवाद' रखा गया है, जिसका उद्देश्य साक्ष्यों को क्रियान्वयन में बदलते हुए शिक्षा सुधारों को सीधे कक्षा-कक्ष तक पहुंचाना है।  अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा करेंगे। इसमें शिक्षा नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, शैक्षिक विशेषज्ञों, एसआरजी, एआरपी, बीईओ, शिक्षकों तथा सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग लेंगे। राज्य स्तर पर प्रभावी शिक्षण पद्धतियों, अधिगम सुधार और भविष्य की शैक्षणिक रणनीतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। टीएलपीएस रिपोर्ट-2025 का होगा विमोचन सेमिनार का प्रमुख आकर्षण टीएलपीएस उत्तर प्रदेश राज्य रिपोर्ट-2025 का विमोचन होगा। एलएलएफ द्वारा प्रदेश में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) के अंतर्गत किए गए राज्यव्यापी अध्ययन के निष्कर्ष, प्रमुख अंतर्दृष्टियां और अनुशंसाएं प्रस्तुत की जाएंगी। इन निष्कर्षों के आधार पर विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को और प्रभावी बनाने की दिशा तय की जाएगी। प्रभावी शिक्षण और कैच-अप रणनीतियों पर होगा मंथन सेमिनार में प्रभावी शिक्षण के 10 प्रमुख शिक्षण अभ्यासों पर संवाद होगा। साथ ही अधिगम अंतर (लर्निंग गैप) को कम करने के लिए कैच-अप रणनीतियों, परख के निष्कर्षों पर आधारित शैक्षणिक सुधारों तथा साक्ष्य आधारित निर्णय प्रणाली पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके अतिरिक्त निपुण उत्तर प्रदेश 2.0 की दिशा में भविष्य की रणनीतियों पर भी विचार किया जाएगा। जमीनी अनुभवों से मिलेगा शिक्षा सुधारों को बल राज्य स्तरीय सेमिनार में राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक अपने नवाचारी शिक्षण अनुभव साझा करेंगे। इसके अलावा एसआरजी, एआरपी, बीईओ तथा अन्य शैक्षणिक नेतृत्वकर्ताओं के अनुभवों के साथ कक्षा-कक्ष से उभरती वास्तविक सफलता की कहानियों को भी मंच मिलेगा। इन अनुभवों के आधार पर शिक्षण की प्रभावी पद्धतियों को व्यापक स्तर पर लागू करने की रणनीति तैयार की जाएगी। कक्षा-कक्ष तक पहुंचेगा शिक्षा सुधारों का लाभ प्रदेश में निपुण भारत मिशन, शिक्षक क्षमता संवर्धन, गतिविधि आधारित शिक्षण, डिजिटल संसाधनों के उपयोग और विद्यालयी गुणवत्ता सुधार के लिए चल रहे प्रयासों के बीच यह राज्य स्तरीय संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साक्ष्य आधारित नीति, प्रभावी शिक्षण अभ्यास और जमीनी अनुभवों के समन्वय से तैयार होने वाली रणनीतियां शिक्षा सुधारों को नई गति देंगी तथा उत्तर प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण, परिणामोन्मुख और बाल-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करेंगी।

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा, योगी सरकार ने इको क्लब्स के लिए ₹65.64 करोड़ की राशि जारी की

पर्यावरण संरक्षण को नई गति, योगी सरकार ने इको क्लब्स के लिए जारी की ₹65.64 करोड़ की लिमिट – प्रत्येक परिषदीय विद्यालय को ₹5,000 की दर से उपलब्ध कराई गई लिमिट – इको क्लब्स के गठन, कार्य एवं दायित्व, मासिक गतिविधि कैलेंडर और सुझावात्मक गतिविधियां भी जारी – जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, ई-वेस्ट प्रबंधन और सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त अभियान पर रहेगा विशेष फोकस लखनऊ,   योगी सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को नई गति देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में समग्र शिक्षा अंतर्गत 'इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ' की गतिविधियों के क्रियान्वयन हेतु लगभग ₹65.64 करोड़ (₹6563.95 लाख) की लिमिट जारी कर दी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों को ₹5,000 प्रति विद्यालय की दर से लिमिट उपलब्ध कराई जाएगी। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों, सहायक लेखा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों एवं जिला समन्वयकों को निर्देश दिए हैं कि जारी की गई लिमिट का तीन दिन के भीतर विद्यालयों को हस्तांतरण सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही इको क्लब्स के उद्देश्य, गठन, अधिसूचना, कार्य एवं दायित्व, मासिक गतिविधि कैलेंडर तथा सुझावात्मक गतिविधियों के अनुरूप समयबद्ध क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जाए।  निर्धारित मदों में होगा लिमिट का उपयोग प्रत्येक विद्यालय को उपलब्ध कराई गई ₹5,000 की लिमिट का उपयोग निर्धारित मदों में किया जाएगा। इसमें इको क्लब की गतिविधियां, जागरूकता कार्यक्रम, पौधरोपण, कम्पोस्ट निर्माण, आवश्यक शिक्षण सामग्री, स्टेशनरी तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अन्य गतिविधियां शामिल हैं। विद्यालयों को निर्धारित वित्तीय मानकों का पालन करते हुए व्यय करना होगा तथा सभी खर्च के अभिलेख सुरक्षित रखना होगा। अभिभावकों, स्थानीय निकायों तथा समुदाय की भागीदारी पर विशेष बल योगी सरकार ने विद्यालय प्रबंधन समिति, अभिभावकों, स्थानीय निकायों तथा समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों को विद्यालय परिसर से बाहर समाज तक पहुंचाने का भी लक्ष्य रखा गया है। सभी विद्यालयों को इको क्लब गठन, गतिविधियों, फोटो, वीडियो तथा प्रगति रिपोर्ट निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी एवं जिला स्तर के अधिकारी नियमित समीक्षा करेंगे। प्रत्येक विद्यालय में गठित होगा इको क्लब निर्देशों के अनुसार सभी पात्र प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ का गठन किया जाएगा। प्रधानाध्यापक क्लब के संरक्षक होंगे, जबकि एक शिक्षक को प्रभारी बनाया जाएगा। विभिन्न कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को क्लब से जोड़कर उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। क्लब की अधिसूचना जारी होगी, उसका पंजीकरण निर्धारित पोर्टल पर कराया जाएगा तथा विद्यालय स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी। प्रत्येक गतिविधि का अभिलेखीकरण और समय-समय पर उसकी समीक्षा भी की जाएगी। मिशन लाइफ के सात विषयों पर होगा विशेष फोकस इको क्लब्स के माध्यम से विद्यार्थियों को लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (मिशन लाइफ) के सात प्रमुख विषयों से जोड़ा जाएगा। इनमें स्वस्थ एवं सतत जीवनशैली अपनाना, टिकाऊ खाद्य प्रणाली को बढ़ावा देना, जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, कचरा कम करना एवं पुनर्चक्रण, ई-वेस्ट प्रबंधन तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाना शामिल है। उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल व्यवहार को बढ़ावा देना है। मासिक कैलेंडर के अनुसार चलेंगी गतिविधियां आदेश के साथ जुलाई से मार्च तक का विस्तृत गतिविधि कैलेंडर भी साझा किया गया है। जुलाई में पौधरोपण एवं हरित परिसर, अगस्त में किचन गार्डन और कम्पोस्ट निर्माण, सितंबर में ई-वेस्ट प्रबंधन, अक्टूबर में कचरा पृथक्करण एवं पुनर्चक्रण, नवंबर में ऊर्जा संरक्षण, दिसंबर में जल संरक्षण, जनवरी में सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त अभियान तथा फरवरी और मार्च में स्वच्छता, जैव विविधता संरक्षण एवं विश्व जल दिवस से संबंधित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त पोस्टर, निबंध, चित्रकला, प्रश्नोत्तरी, रैली, शपथ, प्रदर्शनी और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों तथा समुदाय को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। विद्यालय स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अतिरिक्त गतिविधियां भी आयोजित कर सकेंगे।

ओबीसी छात्रों के लिए मुफ्त कंप्यूटर प्रशिक्षण, 10 जुलाई तक करें ऑनलाइन आवेदन

 लखनऊ   उत्तर प्रदेश की योगी सरकार युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगारपरक योजनाओं को नई दिशा मिली है। इसी क्रम में पिछड़ा वर्ग के युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई ओ लेवल एवं सीसीसी कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना युवाओं के लिए बड़ी सौगात बनकर सामने आई है। योगी सरकार ने इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दिया है। इच्छुक छात्र-छात्राएं 10 जुलाई 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट http://obccomputertraining.upsdc.gov.in पर आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 1 अगस्त 2026 से प्रशिक्षण शुरू हो जाएगा। नीलिट से मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से कराया जाता है प्रशिक्षण पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित इस योजना के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के युवक-युवतियों को 'ओ' लेवल और 'सीसीसी' कंप्यूटर प्रशिक्षण निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना का लाभ उन्हीं ओबीसी छात्र-छात्राओं को मिलेगा, जिन्होंने इंटरमीडिएट उत्तीर्ण किया हो। साथ ही उनके माता-पिता या अभिभावक की वार्षिक आय 1 लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए। इसके अलावा लाभार्थी किसी अन्य शिक्षण संस्थान से छात्रवृत्ति प्राप्त नहीं कर रहा हो। विशेष बात यह है कि प्रशिक्षण भारत सरकार की नीलिट से मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से कराया जाता है।  तीन महीने में पूरा होता है सीसीसी कोर्स 'ओ' लेवल कंप्यूटर प्रशिक्षण की अवधि एक वर्ष निर्धारित है,  जबकि 'सीसीसी' कोर्स तीन महीने में पूरा होता है। दोनों ही पाठ्यक्रम रोजगार की दृष्टि से बेहद उपयोगी माने जाते हैं। इस योजना के तहत 'ओ' लेवल प्रशिक्षण के लिए प्रति छात्र 15,000 रुपये की राशि सरकार द्वारा वहन की जाती है। वहीं 'सीसीसी' प्रशिक्षण के लिए प्रति छात्र 3,500 रुपये का भुगतान सीधे विभाग द्वारा किया जाता है। इससे छात्रों पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ता है और वे पूरी तरह निःशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त कर पाते हैं। पिछले वर्ष हजारों छात्रों ने प्रशिक्षण किया प्राप्त वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत कुल 29,191 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें 22,407 छात्रों ने 'ओ' लेवल और 6,784 छात्रों ने 'सीसीसी' कोर्स पूरा किया है। प्रदेश में वर्तमान समय में कुल 299 संस्थाएं इस योजना के तहत चयनित हैं। इनमें 52 संस्थान केवल ओ लेवल, 43 संस्थान केवल सीसीसी और 204 संस्थान दोनों कोर्स संचालित कर रहे हैं।  पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने सभी पात्र छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे 10 जुलाई 2026 तक विभाग की ओर से जारी आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन जरूर करें। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण न केवल युवाओं को डिजिटल रूप से दक्ष बनाएगा, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और रोजगार के लिए सक्षम बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

योगी सरकार की पहल से उत्तर प्रदेश में आर्द्रभूमियों का संरक्षण तेज, पर्यावरण संरक्षण को मिली नई दिशा

योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में तेजी से हो रहा आर्द्रभूमियों का संरक्षण 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियां हो चुकी हैं अधिसूचित, 36 जिलों से नए प्रस्ताव मिले जल संरक्षण, पर्यावरण और जैव विविधता को बचाने के लिए सरकार चला रही विशेष अभियान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) के संरक्षण और विकास पर लगातार काम कर रही है। वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत प्रदेशभर में आर्द्रभूमियों की पहचान, सीमांकन और अधिसूचना की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है।      मुख्य सचिव के समक्ष हुए प्रस्तुतीकरण के अनुसार, प्रदेश के 75 जिलों में से 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियों को अब तक अधिसूचित किया जा चुका है। इनमें कानपुर नगर सहित गोरखपुर, बाराबंकी, महाराजगंज, प्रयागराज, आगरा, सहारनपुर, कुशीनगर, उन्नाव और अन्य जिले शामिल हैं। इन आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 2750 हेक्टेयर है। वहीं 36 जिलों से 44 नई आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने के प्रस्ताव भी सरकार को प्राप्त हुए हैं। इसलिए जरूरी हैं आर्द्रभूमियां आर्द्रभूमियां केवल तालाब या झील नहीं होतीं, बल्कि ये प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने, भूजल स्तर बनाए रखने, सिंचाई में मदद करने, बाढ़ और सूखे के प्रभाव को कम करने, मछली पालन और अन्य आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के सुरक्षित आवास के रूप में भी काम करती हैं। इसके अलावा ये पर्यावरण को संतुलित रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। सीमांकन और संरक्षण पर विशेष जोर योगी सरकार आर्द्रभूमियों की सीमाओं का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण भी करा रही है ताकि उन पर अतिक्रमण न हो और उनका संरक्षण बेहतर ढंग से किया जा सके। प्रदेश के सभी 75 जिलों में 14,562 स्थानों पर सीमा निर्धारण का कार्य पूरा किया जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी सरकार राज्य की प्रमुख आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी प्रयास कर रही है। इसके लिए रामसर साइट के मानकों के अनुरूप आवश्यक दस्तावेज, मानचित्र, फोटोग्राफ और अन्य तकनीकी जानकारी तैयार की जा रही है, ताकि उत्तर प्रदेश की अधिक से अधिक आर्द्रभूमियां वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।