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डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ में बोले सीएम योगी, उत्तर प्रदेश पहचान के संकट से निकलकर देश की टॉप-3 इकोनॉमी में शामिल

लखनऊ/नोएडा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से सोमवार को वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन शुरू हो गया। इसके साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर को एक नया और आधुनिक एयरपोर्ट मिल गया है। उल्लेखनीय है कि एयरपोर्ट से पहली वाणिज्यिक उड़ान इंडिगो एयरलाइंस की रही। सुबह लखनऊ से आई पहली फ्लाइट का स्वागत किया गया, जबकि इसके बाद बेंगलुरु के लिए पहली उड़ान रवाना हुई। इंडिगो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सेवाएं शुरू करने वाली पहली एयरलाइन बन गई है। पहली उड़ान के साथ शुरू हुआ नया अध्याय नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की शुरुआत इंडिगो की उद्घाटन उड़ान से हुई। सोमवार सुबह लखनऊ से उड़ान भरकर पहली फ्लाइट जेवर एयरपोर्ट पहुंची, जबकि इसके बाद पहली प्रस्थान उड़ान बेंगलुरु के लिए रवाना हुई। इस ऐतिहासिक शुरुआत के साथ एयरपोर्ट ने नियमित वाणिज्यिक सेवाओं के नए दौर में प्रवेश कर लिया। इंडिगो ने घोषणा की है कि वह चरणबद्ध तरीके से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को देश के 16 से अधिक प्रमुख शहरों से जोड़ेगी। इनमें लखनऊ, बेंगलुरु, हैदराबाद, जयपुर, अमृतसर, चंडीगढ़, श्रीनगर, धर्मशाला और पंतनगर जैसे महत्वपूर्ण शहर शामिल हैं। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को बेहतर और सुविधाजनक हवाई सेवाएं मिलेंगी। जल्द शुरू होंगी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें एयरपोर्ट से फिलहाल घरेलू उड़ानों का संचालन शुरू किया गया है, जबकि आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाएं भी शुरू करने की योजना है। इससे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट वैश्विक कनेक्टिविटी का नया केंद्र बनकर उभरेगा और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को भी सीधा लाभ मिलेगा। यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है। यहां यात्रियों को डिजीयात्रा, सेल्फ चेक-इन, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और बेहतर यात्री सुविधाएं उपलब्ध होंगी। एयरपोर्ट का डिजाइन उत्तर प्रदेश की संस्कृति और परंपरा से प्रेरित है। टर्मिनल परिसर में वाराणसी के घाटों और भारतीय स्थापत्य कला की झलक देखने को मिलेगी। प्राकृतिक रोशनी और खुले स्थान यात्रियों को बेहतर अनुभव देंगे। यात्रियों के लिए मजबूत मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को विभिन्न परिवहन सेवाओं से जोड़ा गया है। यहां एयरपोर्ट टैक्सी, ऐप-आधारित कैब सेवाएं और दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के प्रमुख शहरों को जोड़ने वाली बस सेवाएं उपलब्ध हैं। भविष्य में रेल और रैपिड ट्रांजिट नेटवर्क से भी इसकी कनेक्टिविटी को और मजबूत किया जाएगा। कार्गो हब से व्यापार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को यात्री सेवाओं के साथ-साथ एक बड़े कार्गो हब के रूप में भी विकसित किया गया है। एयर इंडिया सैट्स द्वारा विकसित कार्गो सुविधा की शुरुआती क्षमता दो लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 15 लाख मीट्रिक टन तक किया जाएगा। इससे ई-कॉमर्स, निर्यात और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को नई गति मिलेगी। 1.2 करोड़ यात्रियों की वार्षिक क्षमता एयरपोर्ट के प्रथम चरण को प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता के साथ तैयार किया गया है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल सुविधाओं और विस्तार की संभावनाओं के साथ विकसित यह एयरपोर्ट भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यात्री अनुभव को बनाया गया खास नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के वाइस चेयरमैन क्रिस्टोफ श्नेलमैन ने कहा कि यह केवल एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास और बेहतर यात्री अनुभव की नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि यात्रियों को सुरक्षित, सुगम और विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि हर यात्री को आधुनिक और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिल सके। योगी सरकार के विकास मॉडल का अहम हिस्सा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी विकास योजनाओं में शामिल है। एक्सप्रेसवे, मेट्रो, डिफेंस कॉरिडोर और औद्योगिक परियोजनाओं के साथ यह एयरपोर्ट प्रदेश की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को नई गति देगा। सरकार का मानना है कि एयरपोर्ट के संचालन से निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह दिल्ली एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करने में भी मदद करेगा।

उन्नाव और कानपुर में विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे मुख्यमंत्री योगी

 कानपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को उन्नाव और कानपुर के दौरे पर रहेंगे। मुख्यमंत्री पहले उन्नाव में जनसभा को संबोधित करेंगे, इसके बाद कानपुर पहुंचकर विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री कानपुर में सबसे पहले चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में आयोजित प्राकृतिक खेती सम्मेलन में प्रतिभाग करेंगे। सम्मेलन में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने और रसायन मुक्त कृषि को लेकर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री किसानों से संवाद भी कर सकते हैं। कृषि विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पीडब्ल्यूडी में करेंगे समीक्षा बैठक इसके बाद मुख्यमंत्री लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की समीक्षा बैठक करेंगे। बैठक में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही सड़क, पुल और अन्य आधारभूत ढांचे से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली जाएगी। मुख्यमंत्री अधिकारियों को विकास कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दे सकते हैं। गोविंद नगर और कल्याणपुर क्षेत्र की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास मुख्यमंत्री गोविंद नगर और कल्याणपुर क्षेत्र की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास भी करेंगे। इन परियोजनाओं से यातायात व्यवस्था, जल निकासी और अन्य नागरिक सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय अधिकारियों की मौजूदगी रहेगी। डीएम ने की तैयारियों की समीक्षा मुख्यमंत्री का कार्यक्रम अचानक तय होने से प्रशासनिक अमले में हलचल बढ़ गई है। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने देर शाम विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, कार्यक्रम स्थलों की व्यवस्थाओं और विकास कार्यों की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मुख्यमंत्री के दौरे से जुड़े सभी इंतजाम समय से पूरे कर लिए जाएं।  

मोहर्रम को लेकर बरेली पुलिस अलर्ट, गांव-गांव ताजियों की ऊंचाई की जांच जारी

लखनऊ मोहर्रम के दौरान इस बार 12 फीट से अधिक ऊंचाई का कोई भी ताजिया नहीं निकलेगा। इसकी निगरानी के लिए यूपी के बरेली में पुलिस फास्ट हो गई है। पुलिसकर्मी गांव-गांव जाकर ताजियों की ऊंचाई नाप रहे हैं और ताजियादारों से संपर्क कर नियमों का पालन करने की अपील कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार मोहर्रम में जिले भर में 1033 ताजिया निकाले जाएंगे। इनमें सबसे अधिक 93 ताजिया नवाबगंज क्षेत्र में निकलेंगे। इसके बाद बहेड़ी में 81, हाफिजगंज में 79, भोजीपुरा व सीबीगंज में 60-60, शाही में 55, फतेहगंज पश्चिमी में 50, शेरगढ़ में 49, देवरनिया में 48, शीशगढ़ में 47, इज्जतनगर में 39, बारादरी में 36, किला व आंवला में 30-30 ताजिया निकाले जाएंगे। सिरौली में 28, क्योलड़िया, मीरगंज व भमोरा में 26-26, कैंट में 25, बिथरी में 24, अलीगंज में 23, भुता में 20, फतेहगंज पूर्व में 19, फरीदपुर में 17, प्रेमनगर में 10 और कोतवाली में तीन ताजिया निकलेंगे। एसएसपी ने इन सभी ताजियों की जांच और निगरानी के लिए एक-एक सिपाही को नोडल अधिकारी नामित किया है। संबंधित थाना प्रभारी इन पुलिसकर्मियों के साथ क्षेत्र में पहुंचकर ताजियों की ऊंचाई का सत्यापन कर रहे हैं। इसके पीछे कारण केवल इतना है कि कोई हादसा न हो। माहर्रम से पहले तैयारी पूरी करने के निर्देश एसएसपी ने त्योहार को सकुशल संपन्न कराने के लिए मोहर्रम से पहले सारी तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इनमें पीस कमेटी की मीटिंग, पुराने विवाद की समीक्षा, रूट का निरीक्षण, फोर्स की तैनाती समेत कई बिंदु शामिल हैं। सभी थाना प्रभारियों के साथ ही सीओ को भी रूट का भ्रमण करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही निर्धारित प्रारूप में ताजियादार, गांव समेत अन्य सारी जानकारियां दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। पिछले साल 23 फीट के ताजिया में लगी थी आग अधिकारियों का कहना है कि ताजियों की अधिक ऊंचाई होने पर बिजली लाइनों और अन्य अवरोधों से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसी वजह से 12 फीट की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है। पिछले साल फरीदपुर में गौसगंज के पास 23 फीट का ताजिया निकाला गया था, जो हाइटेंशन लाइन से टकरा गया और उसमें आग लग गई। इस मामले में ताजियादारों पर रिपोर्ट हुई थी और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई थी। आज नजर आएगा मुहर्रम का चांद बरेली। मुहर्रम का चांद मंगलवार शाम को देखा जाएगा। चांद के दीदार के साथ से इस्लामी साल की शुरुआत होगी। यौमे आशूरा (10 मुहर्रम) को मनाया जाएगा। दरगाह आला हजरत के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है। माहे मुहर्रम का चांद 16 जून की शाम को देखा जाएगा। चांद नजर आने के बाद आगाज होगा। दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने कहा कि मुहर्रम मुसलमानों को सब्र और इंसानियत की सीख देता है। एसएसपी अनुराग आर्य के अनुसार मोहर्रम को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सभी ताजियों की ऊंचाई निर्धारित मानक के अनुरूप सुनिश्चित कराई जा रही है। जुलूस मार्गों का निरीक्षण किया जा रहा है और आयोजकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। ताजियादारों से भी लगातार संवाद कर सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।

लखनऊ में सीएम योगी का सख्त संदेश—माफियाओं का अंत तय, 2017 के बाद यूपी में बड़ा बदलाव

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ में आयोजित डी-3 त्रिवेणी कार्यक्रम में बड़ा बयान दिया। उन्होंने दौरान सभा को संबोधित करते हुए कहा, माफिया का सफाया करना ही मेरा प्रिय विषय है। आगे भी माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करते रहूंगा। एक समय था जब उत्तर प्रदेश में माफियाओं का बोलबाला था और वे समानांतर सरकार चलाते थे, लेकिन आज स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। हमारी सरकार ने पहले दिन से ही यह तय कर दिया था कि जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। अब यूपी का नाम सुनकर लोग दूरी नहीं, गले लगाते हैं मुख्यमंत्री ने कहा, वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में दंगे, उपद्रव और असुरक्षा का माहौल था। त्योहारों में व्यवधान डाले जाते थे, व्यापारी और बेटियां सुरक्षित नहीं थीं तथा सत्ता में बैठे लोग दंगाइयों को संरक्षण देते थे। अब स्थिति बदल चुकी है। जो भी त्योहारों में खलल डालने की कोशिश करेगा, उसका वर्तमान और भविष्य दोनों समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि अयोध्या में 500 वर्षों के इंतजार के बाद राम मंदिर निर्माण डबल इंजन सरकार की बड़ी उपलब्धि है। पहले रामभक्तों पर लाठियां और गोलियां चलती थीं, अब अयोध्या विश्वस्तरीय धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में विकसित हो रही है।  

लखनऊ मेट्रो सेकंड फेज शुरू, पीजीआई से बाराबंकी तक पहुंचेगा नेटवर्क, 40 लाख लोगों को फायदा

लखनऊ  लखनऊ मेट्रो का महाविस्तार होने जा रहा है। मेट्रो के सेकंड फेज के लिए काम शुरू हो गया है। टेंडर होने के बाद जुलाई से निर्माण कार्य शुरू करने की योजना है। बताया जा रहा है कि लखनऊ में मेट्रो का नेटवर्क रेलवे से भी बड़ा हो जाएगा इसमें शहर के आसपास के इलाकों को भी कवर किया जाएगा। आगे के चरणों में पीजीआई, बख्शी का तालाब, बाराबंकी तक मेट्रो की सुविधा मिलेगी। इसके तहत 150 किमी का नया मेट्रो ट्रैक बिछाया जाएगा। दस नए कॉरिडोर बनेंगे। मेट्रो कॉरिडोर के विस्तार के लिए मंजूरी इसमें शहर में तकरीबन दस नए मेट्रो कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इस रिपोर्ट को शासन को भेजी गई थी। सरकार ने मेट्रो कॉरिडोर के विस्तार के लिए मंजूरी भी दे दी है। अब मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की ओर से विस्तृत कार्ययोजना (डीपीआर) बनाई जा रही है। इस मामले निगरानी मुख्य सचिव के जरिये खुद मुख्यमंत्री कर रहे हैं। 35 से 40 लाख की आबादी को लाभ मिलेगा सूत्र बताते हैं कि अयोध्या रोड पर बाराबंकी तक, सीतापुर रोड पर इटौंजा तक, कानपुर रोड पर उन्नाव तक, हरदोई रोड पर संडीला तक के अतिरिक्त इसका पीजीआई और मोहनलालगंज तक विस्तार किया जाएगा। एयरपोर्ट से मुंशी पुलिया वाली मेट्रो लाइन को आगे तक बढ़ाया जाएगा। अनुमान के मुताबिक मेट्रो विस्तार होने से लखनऊ की 35 से 40 लाख की आबादी को इसका लाभ मिलेगा। करीब 10 वर्ष में पूरा होगा प्रोजेक्ट प्राप्त जानकारी के अनुसार बाराबंकी, संडीला, उन्नाव, इटौंजा, मोहनलालगंज तक कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी। प्रोजेक्ट करीब 10 वर्ष में पूरा होगा। इस पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मेट्रो का विस्तार 150 किलोमीटर तक होने जा रहा है। मेट्रो की ओर से कराए गए सर्वे के आधार पर नेटवर्क विस्तार का प्रस्ताव तैयार किया गया है।     मेट्रो प्रशासन की ओर से तैयार कराए जा रहे डीपीआर में सभी मेट्रो स्टेशनों पर पार्किंग सुविधाओं को विकसित किया जाएगा।     यहां ई साइकिल, ई-बाइक जैसी ई-व्हीकल सेवाएं भी यात्रियों को मिलेंगी।     पीजीआई, मोहनलालगंज, गोसाईंगंज, बंथरा, राजाजीपुरम, काकोरी, दुबग्गा, मलिहाबाद, रहीमाबाद, कमता, चिनहट, मटियारी, बीबीडी, तिवारीगंज, सफेदाबाद, मड़ियांव, केशवनगर, आईआईएम, बृज की रसोई, बख्शी का तालाब, इटौंजा, जानकीपुरम आदि इलाकों को कवर करने की योजना है।

कोर्ट केस और नोटिस के बाद आगरा प्रशासन ने मजार शिफ्टिंग का लिया फैसला

आगरा आगरा पुलिस प्रशासन ने एमजी रोड पर आगरा कॉलेज के सामने बीच सड़क स्थित विवादित मजार को हटाने की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है. यातायात बाधित होने और हादसों की आशंका के कारण इस मजार को हटाने की मांग लंबे समय से हो रही थी. प्रशासन और संबंधित पक्षों के बीच कई दौर की चर्चा के बाद सहमति बनी, जिसके तहत अब कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच पुलिस बल की निगरानी में मजार को शिफ्ट किया जा रहा है. इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर एमजी रोड के इस रास्ते को रोक दिया गया है. हिंदूवादी नेता ने दायर किया था कोर्ट में वाद इस मजार को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद भी चल रहा था. हिंदूवादी नेता कुंवर अजय तोमर ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से दोनों मजारों के ध्वस्तीकरण की मांग को लेकर अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में वाद दायर किया था. वादी का आरोप था कि यह मजार और दरगाह सरकारी भूमि पर बनी हैं. अधिकारियों को जारी हुआ था समन इससे पहले कुंवर अजय तोमर ने 19 जनवरी 2026 को धारा 80 सीपीसी के तहत नोटिस भेजकर कार्रवाई की मांग की थी. अधिकारियों द्वारा समय सीमा में जवाब न देने पर उन्होंने कोर्ट का रुख किया. इसके बाद न्यायाधीश श्वेत्शा चंद्रा की अदालत ने वाद स्वीकार करते हुए आगरा के जिलाधिकारी, नगर आयुक्त और पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता को समन जारी किए थे. आखिरकार अब सहमति से शिफ्टिंग की कार्रवाई की जा रही है. पक्षकार का बयान योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष और ताजमहल-तेजोमहालय केस के पक्षकार हिंदूवादी नेता कुंवर अजय तोमर लगातार इसके लिए लड़ रहे थे. कुंवर अजय तोमर ने मजार के ध्वस्तीकरण के लिए 19 जनवरी 2026 को आगरा नगर निगम के नगर आयुक्त, पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता और डीएम को धारा 80 सीपीसी का नोटिस भेजा था जिस पर अधिकारियों ने ना कोई संज्ञान लिया और ना कोई कार्रवाई की थी, जिसके बाद उन्होंने 10 अप्रैल 2026 को अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में वाद दाखिल किया था. जिसमें अभी अगले महीने 21 जुलाई को सुनवाई भी होनी है लेकिन उससे पहले ही अब प्रशासन ने मजार पर कार्रवाई कर दी है. यह मामला डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य तक भी पहुंचा था और उन्होंने भी अधिकारियों को कार्रवाई के आदेश दिए थे. वहीं, कुंवर अजय तोमर ने पूरी कार्रवाई पर प्रशासन का आभार जताया है और इस कार्रवाई को अपनी बड़ी जीत बताया है उन्होंने कहा कि यह आगरा वासियों के लिए  राहत भरी खबर है इससे कहीं ना कहीं अब जाम की समस्या से राहत मिलेगी, यातायात बाधित नहीं होगा. तोमर ने कहा कि हमारी लड़ाई यही नहीं रुकेगी सामने नागरी प्रचारिणी के बराबर में बनीं दरगाह का भी आधा हिस्सा अवैध है उस पर भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होनी चाहिए. अजय तोमर का कहना है कि कोर्ट में हमने जो वाद दाखिल किया है उसमें एमजी रोड वाली मजार और सामने बनी दरगाह दोनों शामिल है. बता दें कि कुंवर अजय तोमर ने इसके अलावा 27 मस्जिदों मजारों और दरगाहों पर कार्रवाई के लिए एक और धारा 80 सीपीसी का नोटिस नगर निगम के नगर आयुक्त, पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता, आगरा के डीएम और छावनी परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भेजा है.

एक ही पेड़ पर बौर, कच्चे और पके आम एक साथ, हैरान कर रही वैरायटी

सहारनपुर  मीठे-मीठे आमों का सीजन चल रहा है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जिला पूरे देश में आम की बेहतरीन किस्मों के लिए मशहूर है। इस बार यहां आम की एक ऐसी अनोखी वैरायटी हुई है, जो हर तरफ चर्चा में है। आमतौर पर आम के पेड़ पर साल में एक बार बौर आती है और फिर निश्चित समय पर फल तैयार होते हैं। लेकिन, इस वैरायटी की खासियत यह है कि ये केवल मौसम विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे साल फल देने की क्षमता रखता है। आम की इस दुर्लभ किस्म को 'सदाबहार' नाम दिया गया है। सदाबहार 'आम' के पेड़ की सबसे खास बात यह है कि इसके ऊपर एक साथ बौर, छोटे फल और पकने के लिए तैयार आम दिखाई देते हैं। यानी पेड़ पर हर समय किसी न किसी अवस्था में फल मौजूद रहता है। यही वजह है कि इसे देखने के लिए दूर-दराज के इलाकों से लोग सहारनपुर पहुंच रहे हैं। खासकर वो लोग, जिन्होंने आम के बड़े-बड़े बाग लगा रखे हैं। नई बोर के साथ छोटे फल और पके फल आम की अनोखी किस्म को संरक्षित और विकसित करने का काम कर रहे किसान राजेंद्र अटल बताते हैं कि उनके पास कई दुर्लभ और विशेष पौधों का संरक्षण किया जा रहा है। सदाबहार आम का यह पेड़ अब अपने तीसरे साल में प्रवेश कर चुका है और लगातार बेहतर फल दे रहा है। पिछले साल भी इस पेड़ ने सालभर फल दिए थे और इस समय भी नई बौर के साथ छोटे और पकने के लिए तैयार फल एक साथ मौजूद हैं। दूसरे आम से कितना अलग है सदाबहार राजेंद्र अटल बताते हैं कि इस किस्म की एक और विशेषता इसका आकार है। अन्य आम के पेड़ों के मुकाबले यह छोटा रहता है, जिससे इसकी देखभाल और फल तोड़ने का काम आसान हो जाता है। साइज में छोटा होने के बावजूद इसकी उत्पादकता काफी अच्छी मानी जाती है। ये आम बेहद मीठे और खुशबूदार होते हैं। यही कारण है कि एक बार इसका स्वाद चखने वाले लोग इसकी तारीफ किए बिना नहीं रहते। जैविक तरीके से उगाया जाता है सदाबहार आम एक और खास बात यह भी है कि इस वैरायटी की खेती पूरी तरह जैविक तरीके से की जा रही है। राजेंद्र अटल बताते हैं कि इसके उत्पादन में किसी प्रकार की रासायनिक खाद या केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। प्राकृतिक तरीकों से तैयार होने के बावजूद यह पेड़ लगातार फल देने में सक्षम है, जो इसे अन्य किस्मों से अलग बनाता है। फिलहाल राजेंद्र अटल के पास सदाबहार आम के करीब 20 पेड़ हैं। साथ ही कलम विधि के जरिए नए पौधे भी तैयार किए जा रहे हैं।  

रामायण वाटिका उद्घाटन समेत 1088 विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास करेंगे योगी

बरेली मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित बरेली दौरे को लेकर लोकार्पण और शिलान्यास के कार्यक्रमों की सूची लगभग फाइनल हो चुकी है। सीएम के हाथों करीब चार हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण कराया जाएगा। इसमें 3530.75 करोड़ के 1,013 कामों का शिलान्यास और 534.49 करोड़ के 75 कामों का लोकार्पण शामिल है। दौर की तिथि अभी निश्चित नहीं हुई है, लेकिन 20 जून के आसपास उनके आने की संभावना है। जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री मुरादाबाद में जनसभा को संबोधित करने के बाद बरेली आ सकते हैं। सर्किट हाउस में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ मंडलीय समीक्षा बैठक के बाद वह बरेली कॉलेज में जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद शाम को रामायण वाटिका का उद्घाटन करेंगे। वहां लेजर शो के बीच वाटिका का भ्रमण करेंगे। जिले में रात्रि विश्राम के बाद सुबह वह शाहजहांपुर जा सकते हैं। वहां भी जनसभा प्रस्तावित है। रामगंगा नगर में रामायण वाटिका का विकास बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) की ओर से कराया गया है। 33 हजार वर्गमीटर में बनी इस वाटिका पर बीडीए ने 46 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। दौरे को देखते हुए बीडीए ने रामगंगानगर के ट्री-गार्डों को भगवा रंग में रंग दिया है। सोमवार को भी रामायण वाटिका में बीडीए की टीम लगी रही। नगर निगम की ओर से सड़कों की मरम्मत भी शुरू करा दी गई है। पीलीभीत बाइपास के गड्ढों को भरा जा रहा है। प्रमुख सचिव ने परखीं तैयारियां मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे से पहले सोमवार को प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास एवं ग्रामीण अभियंत्रण विभाग व नोडल अधिकारी सौरभ बाबू ने अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों को परखा। कलक्ट्रेट सभागार में हुई समीक्षा बैठक में विभिन्न योजनाओं और राजस्व से जुड़े कार्यों की जानकारी ली।  कहा कि जिन परियोजनाओं पर काम चल रहा है और 90 फीसदी से ज्यादा निर्माण हो चुका है उसे जल्दी पूरा कराएं। जो परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, उन्हें हस्तांतरित किया जाए।   छात्रवृत्ति, निराश्रित महिला पेंशन, दिव्यांग पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन योजना की समीक्षा कर पात्रों को इसके दायरे में लाने के निर्देश दिए। बिजली निगम की समीक्षा में बताया गया कि ट्रांसफार्मरों के खराब होने की शिकायत मिलने पर शहर में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र में 72 घंटे में उन्हें बदला जा रहा है। निर्देश दिए कि पात्रों को ही आवास योजनाओं का लाभ दिया जाए। जल जीवन मिशन, फैमिली आईडी की भी समीक्षा की। बैठक में डीएम अविनाश सिंह, सीडीओ देवयानी, नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य व अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के बाद उन्होंने सीबीगंज में निर्माणाधीन आईटी पार्क का निरीक्षण किया। कार्यदायी संस्था को शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण कार्य कराने की हिदायत दी। मीरगंज के सिधौली में निर्माणाधीन आईटीआई परिसर का जायजा लिया। झुमका चौराहा के पास स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला और लोक निर्माण विभाग की ओर से निर्मित 19.5 किलोमीटर लंबे मीरगंज-सहोड़ा वाया सिहोर मार्ग का भी जायजा लिया।  

150 साल पुराना बलरामपुर का स्वयंसिद्ध हनुमान मंदिर, नेपाल तक है आस्था

बलरामपुर जहाँ एक तरफ गहरी नीरवता है और दूसरी तरफ सरोवर का अनंत विस्तार, ठीक उन दोनों के बीच एक पीपल की छांव तले विराजते हैं संकटमोचन हनुमान। न भव्य शिखर, न विशाल प्रांगण, फिर भी डेढ़ सदी से यहाँ आस्था का जो दीप जल रहा है, वह आज नेपाल की सीमाओं तक अपनी रोशनी बिखेर रहा है। यही है बलरामपुर के रानी तालाब स्थित वह हनुमान मंदिर, जिसे लोग चमत्कारी भी कहते हैं और स्वयंसिद्ध भी, क्योंकि यहाँ जो माँगा जाता है, वह मिलता जरूर है। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर को छोटी काशी यूं ही नहीं कहा जाता। इस प्राचीन नगर की गलियों में इतिहास सांस लेता है। नीलबाग महल हो, राजा की ड्योढ़ी हो या सदियों पुराने शिवालय, हर ओर गौरवशाली अतीत की छाप है। लेकिन इन सबके बीच रानी तालाब का हनुमान मंदिर अपनी एक अलग ही पहचान रखता है, जहाँ धर्म, प्रकृति और आस्था का अनूठा त्रिभुज बनता है। स्वयंसिद्ध है यह धाम मंदिर की भौगोलिक स्थिति ही इसे असाधारण बनाती है। पूरब में एकांत भूमि, पश्चिम में शांत सरोवर और उन दोनों के मध्य एक विशाल पीपल वृक्ष, जिसके नीचे युगों से बजरंगबली विराजमान हैं। शास्त्रों और लोक परंपराओं के अनुसार ऐसा संयोग जहाँ भी बनता है, वह स्थान स्वयंसिद्ध हो जाता है। यानी वहाँ स्थापित देवता साक्षात जागृत अवस्था में होते हैं और भक्तों की पुकार सीधे उन तक पहुँचती है। रानी तालाब का यह मंदिर उसी दिव्य श्रेणी में आता है। डेढ़ सदी की अटूट विरासत मंदिर का इतिहास लगभग 150 वर्ष पुराना है। इसकी स्थापना स्थानीय निवासी शंभू नाथ ने की थी। शुरुआत में यह केवल पीपल के नीचे स्थापित एक मूर्ति थी, कोई दीवार नहीं, कोई छत नहीं। लेकिन जब भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने लगीं तो मंदिर की महिमा स्वयं फैलती गई। लोग स्वेच्छा से जुड़ते गए, जनसहयोग से निर्माण होता गया और आज उसी स्थान पर एक सुंदर एवं सुव्यवस्थित मंदिर खड़ा है। भले ही वह केवल 100 वर्ग गज में समाया हो, पर उसकी आस्था का कोई आयाम नहीं। दशकों से इस मंदिर की सेवा और देखरेख पंडित रामदुलारे और उनका परिवार निःस्वार्थ भाव से करता आ रहा है। पाँच मंगलवार की मन्नत और बाबा का वचन मंदिर के पुजारी राम दुलारे के अनुसार यहाँ हनुमान जी को बेसन के लड्डू और सिंदूर अर्पित करने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि जो भक्त लगातार पाँच मंगलवार पूर्ण श्रद्धाभाव से यह प्रसाद चढ़ाते हुए मन्नत माँगता है, बाबा उसे कभी खाली हाथ नहीं लौटाते। कहते हैं कि उसकी नैया बजरंगी अवश्य पार लगाते हैं। मंदिर के ठीक सामने शिवलिंग स्थापित है और उसके पीछे पेड़ की ओट में शनिदेव की मूर्ति विराजमान है। तीनों देवशक्तियों का यह संगम इस स्थान को और भी पवित्र बनाता है। प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को यहाँ भजन कीर्तन और सुंदरकांड का पाठ होता है, जो पूरे परिसर को एक अलौकिक ऊर्जा से भर देता है। नेपाल तक फैली आस्था की लहर इस मंदिर की ख्याति केवल बलरामपुर तक सीमित नहीं है। गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती, बस्ती, सिद्धार्थनगर जैसे जिलों से हजारों श्रद्धालु यहाँ नियमित रूप से आते हैं। यहाँ तक कि पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी भक्त मन्नत लेकर इस द्वार पर पहुँचते हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर वे पुनः आभार व्यक्त करने लौटते हैं। यही इस मंदिर की सबसे बड़ी गवाही है। बड़े मंगल पर उमड़ता है जनसैलाब ज्येष्ठ मास के बड़े मंगल पर इस मंदिर का दृश्य अविस्मरणीय होता है। दूर-दूर से आए भक्त प्रसाद और ध्वजा लेकर उमड़ पड़ते हैं। हनुमान जयंती पर भव्य आयोजन होते हैं और पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठता है। यह नजारा देखकर सहज ही अनुभव होता है कि रानी तालाब का यह हनुमान मंदिर महज एक धार्मिक स्थल नहीं, यह लाखों लोगों की श्रद्धा, आस्था और विश्वास की जीवंत त्रिवेणी है, जो डेढ़ सदी से बह रही है और आने वाली पीढ़ियों तक बहती रहेगी।

‘माफिया खत्म होंगे तो प्रदेश आगे बढ़ेगा’, योगी आदित्यनाथ ने बताया अपना सबसे प्रिय विषय

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 9 वर्षों में पहली बार सार्वजनिक रूप से अपने सबसे प्रिय विषय का जिक्र किया. सोमवार को आयोजित डी-3 त्रिवेणी कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा कि माफिया का सफाया करना ही उनका सबसे प्रिय विषय है. आगे भी वह इसी तरह माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करते रहेंगे।  कार्यक्रम के दौरान सीएम ने बताया कि लखनऊ में पुलिस विभाग की एक जमीन पर माफिया का कब्जा था. इस मामले को लेकर डीजीपी उनके पास पहुंचे और पूरी जानकारी दी. डीजीपी ने बताया कि संबंधित जमीन पर माफिया ने अवैध कब्जा कर रखा है. ऐसे में मुख्यमंत्री के निर्देश पर माफिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।  एफआईआर के अगले ही दिन अवैध कब्जा हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी गई. प्रशासन ने माफिया से जमीन खाली करवा ली. खाली कराई गई जमीन पर बाद में फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट का निर्माण कराया गया. सीएम ने इस घटना को कानून-व्यवस्था और माफिया के खिलाफ सरकार की सख्त नीति का उदाहरण बताया।  बच्चों के प्रति अपने लगाव का भी किया जिक्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों से अपने जुड़ाव का अनुभव भी साझा किया. उन्होंने कहा कि जब वे किसी गांव या सार्वजनिक कार्यक्रम में जाते हैं तो वहां माताएं अपने छोटे बच्चों का अन्नप्राशन कराने के लिए उत्सुकता से खड़ी रहती हैं. यह दृश्य उनके लिए बेहद आत्मीय और भावनात्मक होता है।  उन्होंने बताया कि उन्हें बच्चों का अन्नप्राशन कराना बहुत अच्छा लगता है. कई बार बच्चे अपने माता-पिता या दादा-दादी की गोद में रोते रहते हैं, लेकिन जैसे ही वे उनकी गोद में आते हैं, तो तुरंत मुस्कुरा देते हैं. सीएम ने इसे बच्चों की सहज भावना और विश्वास का प्रतीक बताया. उनके अनुसार यह दिखाता है कि बच्चे किस व्यक्ति के प्रति खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं।   मु्ख्यमंत्री योगी ने कहा कि समाज में बच्चों के लिए सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण बनाना बेहद जरूरी है, ताकि उनका सही विकास हो सके. मेरी सरकार आने के बाद राज्य में अच्छा वातावरण तैयार हुआ है।