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लखनऊ में अप्रैल में हुआ नवंबर जैसी सर्दी का अहसास, पारा गिरकर 27 डिग्री पर पहुंचा, जानें मौसम विभाग का नया अपडेट

लखनऊ प्रदेश में जारी बेमौसम वर्षा, तड़ित झंझावत और ओलावृष्टि के दौर से बृहस्पतिवार से राहत मिलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार से पूरे प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क हो जाएगा। यह मौसमी बदलाव एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और निचले क्षोभमंडल में बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण हो रहा था, जिसने पूरे प्रदेश को प्रभावित किया है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ मध्य एवं ऊपरी क्षोभमंडल में बना हुआ था। यह उत्तरी पाकिस्तान और संलग्न जम्मू-कश्मीर के आसपास एक चक्रवाती परिसंचरण के रूप में केंद्रित था। एक और चक्रवाती परिसंचरण मौजूद इसके अतिरिक्त, निचले क्षोभमंडल में प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी भाग पर एक और चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है। यह परिसंचरण मणिपुर तक एक द्रोणी के रूप में फैला हुआ है, जिससे राज्य के विभिन्न हिस्सों में बारिश और ओलावृष्टि हुई। बुधवार को प्रदेश के ऊपरी क्षोभमंडल से इन मौसमी प्रणालियों में प्रभावी कमी आने की संभावना है। इस कमी के बाद बृहस्पतिवार से मौसम में धीरे-धीरे सुधार शुरू हो जाएगा। शुक्रवार से मौसम पूर्णतया शुष्क होने की संभावना है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। तापमान में उतार-चढ़ाव का अनुमान मौसम में सुधार के साथ ही प्रदेश के अधिकतम तापमान में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा। आगामी चौबीस घंटों के दौरान अधिकतम तापमान में छह से आठ डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है। यह गिरावट हल्की ठंडक का अनुभव कराएगी। हालांकि, उसके बाद के दिनों में तापमान में आठ से दस डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने की संभावना है। यह बढ़ोतरी मौसम को सामान्य स्थिति में लाएगी और गर्मी का अनुभव कराएगी। नवंबर जैसी सर्दी का अहसास मात्र 24 घंटे में मौसम के बदले मिजाज ने राजधानी में अप्रैल के महीने में नवंबर जैसा अहसास करा दिया। सुबह से शुरु हुई रिमझिम बारिश दिन में रुक-रुककर होती रही। हालांकि इस दौरान धूप भी निकली और बादलों की आवाजाही भी लगी रही। इस बदलाव से अधिकतम तापमान पर पारा 7.5 डिग्री का गोता लगाते हुए 34.5 डिग्री से 27 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। मंगलवार रात की बारिश 5.3 मिमी दर्ज की गई जबकि बुधवार को शाम तक तीन मिमी बारिश हुई। आमतौर पर अप्रैल का महीना गर्म होता है, लेकिन इस बार लखनऊ में स्थिति भिन्न रही। बारिश के कारण तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई। दिन के समय भी मौसम में ठंडक बनी रही। रात में ठंड का अहसास इतना बढ़ गया कि लोगों को नवंबर के मौसम की याद आ गई। पश्चिमी विक्षोभ के असर से मंगलवार शाम में ही तेज हवा के साथ बारिश देखने को मिली। रात में रुक-रुककर बारिश होती रही। बुधवार को भी सुबह में हल्की बारिश ने ठंड का अहसास कराया। शाम को भी बूंदाबांदी हुई। देर शाम मौसम काफी सुहाना हो गया।  

गैस संकट के कारण टलने लगीं शादियां, कैटरर्स ने चाट और डोसा के काउंटर घटाए, एडीएम से मिले व्यापारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश आदर्श टेंट, कैटरिंग एवं डेकोरेशन व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने एडीएम सिविल सप्लाई ज्योति गौतम से उनके कार्यालय में मुलाकात की। पदाधिकारियों ने कैटरिंग क्षेत्र के व्यवसायियों की समस्याओं को उनके सामने रखा। एडीएम ने कहा कि शादी का कार्ड दिखाने पर सिलिंडर मिल सकेगा। उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष संजय गुप्ता ने बताया कि 15 अप्रैल से सहालगों की शुरुआत हो रही है। इससे कैटरिंग क्षेत्र के व्यापारियों के सामने व्यावसायिक सिलिंडरों की बड़ी चुनौती आ रही है। कैटरिंग व्यापारियों को सहालग में सुगमता से व्यावसायिक सिलिंडर मिलने चाहिए। अपर जिलाधिकारी खाद्य एवं अपूर्ति ज्योति गौतम ने व्यापारियों को भरोसा दिया कि कोई समस्या नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि शादी के कार्ड और प्री ऑर्डर बुकिंग के प्रपत्र के साथ जिला आपूर्ति कार्यालय या मेरे कार्यालय में जमा करा दें। कैटरर्स या शादी वाले घरों के लोग पत्र देकर व्यावसायिक गैस सिलेंडर की मांग कर सकते हैं। संबंधित गैस एजेंसी को व्यापारियों की मांग भेज कर व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। प्रतिनिधि मंडल में उत्तर प्रदेश आदर्श टेंट, कैटरिंग एवं डेकोरेशन व्यापार मंडल के अध्यक्ष राघवेंद्र चौधरी, संतोष गुप्ता, उपाध्यक्ष मोहम्मद रिजवान, आयुष पांडेय, संजीव सिंह मौजूद रहे। रिश्तेदारों की मेहमान नवाजी बड़ी समस्या उत्तर प्रदेश टेंट कैटरर्स एंड डेकोरेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कुमार बताते हैं कि गैस की किल्लत की वजह से लोग शादी टाल रहे हैं। घर आने वाले रिश्तेदारों के खाने-पीने की व्यवस्था कैसे होगी, इसकी चिंता बढ़ती जा रही है। बताया कि मेरे परिचित के पांच परिवारों ने नवंबर तक के लिए शादियां टाल दी हैं। मार्च में टाली थी शादी, नहीं मिली राहत: उत्तर प्रदेश आदर्श टेंट कैटरिंग एंड डेकोरेशन व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष संतोष गुप्ता ने बताया कि इंदिरानगर और चिनहट के दो परिवारों ने मार्च में आयोजित अपने घरों की शादियां गैस किल्लत को देखते हुए एक महीने के लिए टाल दी थीं। अब वह अप्रैल के अंत में शादी के लिए हिम्मत जुटा रहे हैं। हालांकि, उन्हें अब भी डर है कि कहीं सिलिंडर नहीं मिला तो मेहमानों को कैसे खिलाएंगे। व्यंजन भी हुए कम, काउंटर घटाए गए कारोबारी बताते हैं कि व्यावसायिक सिलिंडर न मिलने पर हम हर जगह लकड़ी और कोयला नहीं जला सकते। धुआं होने के कारण मैरिज लॉन वाले ऐसे चूल्हे पर आपत्ति करते हैं। ऐसे में हम लोगों ने शादियों में चाट, पावभाजी, डोसा आदि के काउंटर कम किए गए हैं। इन काउंटर पर लगातार गैस की जरूरत पड़ती है।  

पांच अग्रणी राज्य देश के कुल दूध का करते हैं 54 फीसदी उत्पादन, इसमें अकेले यूपी की हिस्सेदारी 16 फीसदी

ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने संभाली कमान, पांच कंपनियों के जरिए जुड़ीं चार लाख महिला किसान सीएम योगी के कार्यकाल में पहली बार इतनी सशक्त हुईं महिलाएं लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में पहले की तुलना में 40 प्रतिशत दुग्ध उत्पादन बढ़ गया है। यही नहीं, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों को पीछे छोड़ते हुए यूपी सबसे सशक्त बनकर उभरा है। देश के कुल दुग्ध उत्पादन में पांच अग्रणी राज्यों की 54 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसमें अकेले उत्तर प्रदेश का योगदान 16 फीसदी तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा प्रदेश की बढ़ती ताकत और मजबूत डेयरी संरचना का स्पष्ट उदाहरण है। सीएम योगी के कार्यकाल में दुग्ध उत्पादन में जबरदस्त उछाल दर्ज हुआ है। वर्ष 2016-17 में जहां उत्पादन 277 लाख मीट्रिक टन था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 388 लाख मीट्रिक टन के पार पहुंच गया है।  सीएम योगी के जमीनी स्तर पर किए प्रयासों का परिणाम : मुकेश मेश्राम पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि करीब 40 प्रतिशत की यह वृद्धि प्रदेश में योजनाबद्ध विकास और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जमीनी स्तर पर किए गए ठोस प्रयासों का परिणाम है। बड़ी ताकत बनीं ग्रामीण महिलाएं इस दुग्ध क्रांति की बड़ी ताकत ग्रामीण महिलाएं बनीं हैं। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से लाखों महिलाएं डेयरी गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। प्रदेश के 31 जिलों में महिला समूह प्रतिदिन करीब 10 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर रहे हैं और करीब 5000 करोड़ रुपये का कारोबार कर चुके हैं। प्रदेश में पांच प्रमुख दुग्ध उत्पादक कंपनियों के जरिए करीब चार लाख महिला किसान जुड़ीं हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। फरवरी 2026 तक इन कंपनियों का कुल कारोबार पांच हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। बुंदेलखंड क्षेत्र में ‘बलिनी एमपीसीएल’, पूर्वांचल में ‘काशी एमपीसीएल’, अवध क्षेत्र में सामर्थ्य एमपीसीएल, गोरखपुर मंडल में ‘श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीसीएल, तराई क्षेत्र में सृजन एमपीसीएल’ से जुड़कर महिलाएं रिकॉर्ड बना रही हैं। उत्तर प्रदेश की बदल रही तस्वीर पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि योगी सरकार के कार्यकाल में पहली बार महिलाओं को इतने बड़े पैमाने पर आर्थिक मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सशक्त बनाया गया है। दुग्ध उत्पादन में यह रिकॉर्ड वृद्धि न केवल आर्थिक मजबूती का संकेत है, बल्कि उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर का भी प्रतीक बन गई है।

बलिया में बनेगा मेडिकल कॉलेज, योगी सरकार ने निर्माण कार्य को दी हरी झंडी

लखनऊ  हर जिले में मेडिकल कालेज खोलने की योजना पर अमल करते हुए प्रदेश सरकार ने मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में अहम निर्णय लिया। बलिया में स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए 437 करोड़ रुपये का बजट को स्वीकृति प्रदान कर दी। नया स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए बलिया जिला कारागार की कुल 14.05 एकड़ जमीन दस मार्च 2025 को चिकित्सा शिक्षा विभाग के पक्ष में हस्तांतरित की थी। संस्थान के लिए गठित सोसायटी का मेमोरेंडम व बाइलाज यथावत रखा गया। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने बताया कि स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज बलिया का व्यय 200 करोड़ रुपये से अधिक होने कारण व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत 437 करोड़ रुपये का प्रस्ताव मंगलवार को कैबिनेट के सामने रखा गया, जिसे स्वीकृति मिल गई। कहा कि मेडिकल कालेज के निर्माण से जनसामान्य को बेहतर इलाज मिलेगा। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रदेशभर में चिकित्सा सेवाओं का विस्तार हो रहा है, जिसका लक्ष्य समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक उच्चीकृत चिकित्सा पहुंचाई जा सके। वहीं, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि बलिया मेडिकल कालेज का निर्माण बहुप्रतीक्षित है। कैबिनेट का निर्णय बलिया के लोगों को राहत पहुंचाने वाला है। प्रदेश में अब 82 मेडिकल कालेज हो गए हैं। प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने इस बाबत कहा कि जिले के लिए यह बहुत बड़ी परियोजना है जिसे मुख्यमंत्री ने हरी झंडी देकर साधुवाद का काम किया है। मेडिकल कालेज कुल 14 एकड़ में बनेगा जिसमें जेल परिसर के ढाई एकड़ एरिया में अमर सेनानी चित्तू पांडेय स्मारक के निर्माण का भी प्रावधान किया गया है। ऐसे में मेडिकल कालेज के साथ इसका भी निर्माण जिले के सेनानियों के गरिमानुरुप कराया जाएगा। कहा कि मेडिकल कालेज के शिलान्यास की तिथि जल्द तय की जाएगी। इसमें प्रयास है कि इसका शिलान्यास मुख्यमंत्री से ही कराया जाए। परिवहन विभाग के मंगलकारी हुआ मंगलवार परिवहन मंत्री ने कहा मंगलवार का दिन परिवहन विभाग के लिए भी काफी महत्वपूर्ण और मंगलकारी रहा। कैबिनेट में मंगलवार को परिवहन विभाग के कुल तीन प्रस्ताव स्वीकृत हुए जिसमें पीपीपी मॉडल पर बनने वाले 49 बस अड्डे भी शामिल हैं। इन 49 बस अड्डों में बलिया के रसड़ा व बिल्थरारोड का भी बस अड्डा शामिल है जो पीपीपी मोड पर विकसित किया जाएगा। यह परियोजना भी बलिया के लिए काफी बड़ी है। कहा बलिया विकास के मामले में किसी भी दृष्टिकोण से पीछे नहीं रहेगा। चुनाव से पूर्व जो भी वादे किए गए हैं वो सभी पूरे किए जाएंगे।  

बेमौसम बारिश ने किसानों का चैन छीना, संबल के रूप में खड़ी है सरकार: सीएम योगी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के कई जनपदों में निरंतर हो रही बारिश पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मौसम विपरीत है, ऐसे में प्रशासनिक अधिकारी निरंतर किसानों के सम्पर्क में रहें। बेमौसम बारिश ने किसानों का चैन छीन लिया है, लेकिन सरकार संबल के रूप में खड़ी है। उन्हें परेशानी नहीं होने दी जाएगी।  सीएम ने मंगलवार को फिर हुई असमय बारिश से किसानों को होने वाली परेशानी के बारे में जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी स्वयं किसानों के पास पहुंचें और मातहतों को भी फील्ड में रखें। फसलों के नुकसान का आकलन कराने के साथ समयबद्ध ढंग से मुआवजा दिलाएं। हर हाल में प्रयास करें कि आपदा का असर किसानों पर न्यूनतम हो। जनहानि, पशुहानि, घायलों व प्रभावितों को निश्चित समय में मुआवजा दिलाना सुनिश्चित करें। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व, कृषि विभाग व बीमा कंपनी फसल नुकसान का तत्काल संयुक्त सर्वे कराकर शासन को अवगत कराएं, जिससे किसानों को तत्काल मुआवजा दिलाया जा सके।  मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि निरंतर फील्ड में रहें, वस्तुस्थिति का जायजा लें और प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान का वास्तविक आकलन कराएं, जिससे किसानों को समय पर उचित सहायता मिल सके। मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव (कृषि) व राहत आयुक्त को निर्देश दिया कि फील्ड में कार्यरत अधिकारियों से सीधा संपर्क करें और समन्वय बनाएं। सभी सूचनाएं समय पर एकत्र कर शासन को उपलब्ध कराई जाए, जिससे राहत कार्य भी समय से हो सके।

विद्युत विभाग को झटका, बस्ती उपभोक्ता आयोग ने 3 दिन में कनेक्शन जोड़ने का दिया आदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक उपभोक्ता को उपभोक्ता आयोग से बड़ी राहत मिली है। बस्ती जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश अमरजीत वर्मा, सदस्य अजय प्रकाश सिंह की पीठ ने विद्युत विभाग के एक मामले में आदेश देते हुए कहा है कि बिना उपभोक्ता की सहमति से स्मार्ट मीटर नहीं लगाया जा सकता है। न्यायाधीश ने मैनेजिंग डायरेक्टर उत्तर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन को पत्र लिख कर उपभोक्ता आयोग में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने को कहा है। न्यायालय के समक्ष रामगोपाल बनाम उपखंड अधिकारी विद्युत का मामला सुनवाई के लिए प्रस्तुत हुआ। इस मामले में परिवाद दाखिल करते समय ही रामगोपाल की तरफ से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 38 उप धारा 8 के तहत स्थगन प्रार्थना पत्र दिया गया था। आयोग ने अपने शक्तियों का प्रयोग कर स्थगन आदेश जारी किया था। दौरान मुकदमा उपभोक्ता का कनेक्शन न काटे जाने का भी आदेश दिया गया था। परंतु 27 मार्च को मनमाने तरीके से कनेक्शन काट दिया गया। अदालत में उपस्थित होकर विद्युत विभाग की तरफ से कहा गया कि परिवादी के घर पर स्मार्ट मीटर लगाया गया था। बैलेंस नहीं होने पर स्मार्ट मीटर में बिजली स्वतः कट जाती है। तीन दिनों में कनेक्शन जोड़कर कोर्ट को सूचित करने का आदेश न्यायालय ने दोनों पक्ष की सुनने के बाद कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47 की उप धारा 5 में जो व्यवस्था दी गई है। उसके अनुसार उपभोक्ता की सहमति के बिना उसके परिसर में स्मार्ट मीटर नहीं लगाया जा सकता है। आयोग ने तीन दिनों में विद्युत कनेक्शन जोड़कर अदालत को सूचित करने का आदेश दिया है। सोमवार को नियामक ने प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं का जारी किया था गाइडलाइन बता दें कि इससे पहले उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने सोमवार को कानपुर में महत्वपूर्ण गाइडलाइन की है। नियामक आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य है, लेकिन मीटर को प्रीपेड करने से पहले उपभोक्ता की सहमति जरूरी है। आयोग ने यह भी कहा है कि अगर उपभोक्ता प्रीपेड मीटर नहीं लगवाना चाहता है तो उसका स्मार्ट मीटर पोस्टपेड ही रहने दिया जाए। इसके लिए उन्होंने भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के मीटरिंग रेग्युलेशन में एक अप्रैल 2026 को हुए संशोधन का हवाला दिया। नियामक आयोग सोमवार को बृजेंद्र स्वरूप पार्क स्थित द स्पोर्ट्स हब (टीएसएच) में बिजली कंपनियों की टैरिफ दरों में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर जनसुनवाई कर रहा था। आयोग ने कहा कि सभी डिस्कॉम की जनसुनवाई पूरी होने के बाद दरों में बदलाव के प्रस्ताव पर फैसला लिया जाएगा।  

जनता से अपील- घबराकर खरीदारी न करें और न ही ईंधन का अनावश्यक भंडारण करें: मुख्यमंत्री योगी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कालाबाजारी के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। 12 मार्च 2026 से अब तक पूरे प्रदेश में 23,250 छापेमारी/निरीक्षण किए गए हैं, जिनमें 238 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें 27 मामले एलपीजी वितरकों और 211 अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुए हैं, जबकि 22 लोगों को मौके से गिरफ्तार कर 249 के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और किसी प्रकार की कमी नहीं है। राज्य में 12,888 पेट्रोल पंप संचालित हैं, जिनके माध्यम से प्रतिदिन हजारों किलोलीटर ईंधन की बिक्री हो रही है। वर्तमान में प्रदेश में 92,000 किलोलीटर पेट्रोल और 1.22 लाख किलोलीटर डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। ऐसे में आम जनता से अपील की गई है कि घबराकर ईंधन का अनावश्यक भंडारण न करें। एलपीजी आपूर्ति को लेकर भी सरकार पूरी तरह सक्रिय है। प्रदेश के 4,107 गैस एजेंसियों के माध्यम से उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर की डिलीवरी सुनिश्चित कराई जा रही है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। साथ ही केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का विस्तार करते हुए घरेलू उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। अब तक प्रदेश में 15.94 लाख पीएनजी कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं। औद्योगिक और व्यावसायिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वाणिज्यिक एलपीजी की 70 प्रतिशत तक सशर्त आपूर्ति की अनुमति दी है। इसमें होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, डेयरी, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल जैसी श्रम-आधारित उद्योगों को प्राथमिकता दी जा रही है। स्थिति की सतत निगरानी के लिए खाद्य आयुक्त कार्यालय सहित सभी जिलों में 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। साथ ही अधिकारियों को फील्ड में लगातार निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आम जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

किसानों के नुकसान का निष्पक्ष आकलन कर शीघ्र सहायता दें: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

असमय वर्षा-ओलावृष्टि से हुए नुकसान पर सरकार संवेदनशील, तत्काल सर्वे व भुगतान के निर्देश आपदा की घड़ी में अन्नदाताओं के साथ सरकार, 24 घंटे में राहत पहुंचाने के निर्देश राहत कार्यों में लापरवाही अक्षम्य, हर किसान तक सहायता पहुंचाना प्राथमिकता: मुख्यमंत्री जिन परिवारों के घर क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास उपलब्ध कराया जाए: मुख्यमंत्री लखनऊ असमय वर्षा, ओलावृष्टि तथा कुछ स्थानों पर आगजनी की घटनाओं से रबी फसलों को हुए नुकसान पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए अधिकारियों को त्वरित, पारदर्शी एवं संवेदनशील कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। बुधवार प्रातः इस संबंध में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विपरीत परिस्थिति में अन्नदाता का चिंतित होना स्वाभाविक है और राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ किसानों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक प्रभावित किसान एवं बटाईदार के नुकसान का सटीक, निष्पक्ष एवं समयबद्ध आकलन कर तत्काल क्षतिपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जनपद स्तर पर राजस्व, कृषि एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करते हुए शीघ्र सर्वेक्षण कर रिपोर्ट शासन को प्रेषित की जाए, ताकि राहत वितरण में किसी प्रकार का विलंब न हो। मुख्यमंत्री ने बीमा कंपनियों के साथ सक्रिय समन्वय स्थापित कर फसल बीमा दावों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी स्वयं किसानों से संपर्क कर उन्हें बीमा योजनाओं का लाभ दिलाना सुनिश्चित करें, जिससे अधिकतम राहत उपलब्ध हो सके। राजस्व विभाग को निर्देशित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आपदा राहत कोष से प्रत्येक जनपद को पर्याप्त धनराशि तत्काल उपलब्ध कराई जाए। जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि प्रभावित किसानों को त्वरित एवं पारदर्शी ढंग से सहायता प्रदान की जाए। जहां आवश्यकता हो, वहां राहत शिविर स्थापित किए जाएं तथा मंडी समितियों के माध्यम से भी किसानों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाए। अग्निकांड की घटनाओं पर विशेष संवेदनशीलता बरतते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जनहानि एवं पशुहानि की स्थिति में 24 घंटे के भीतर राहत राशि उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, पात्र लाभार्थियों को कृषक दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत शीघ्र लाभान्वित किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देशित किया कि जिन परिवारों के घर क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कहा कि राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अक्षम्य होगी और इसके लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार इस आपदा की घड़ी में प्रत्येक किसान, कृषक परिवार एवं बटाईदार के साथ पूरी संवेदनशीलता, तत्परता एवं प्रतिबद्धता के साथ खड़ी है और उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

गाजियाबाद, छोटे सिलिंडरों की भारी कमी और एजेंसियों पर ताला लगने से उपभोक्ता परेशान

 गाजियाबाद गैस किल्लत दूर करने के लिए प्रशासन एजेंसियों में छोटे सिलिंडर पहुंचाने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत ठीक उलट है। इस कारण जिले में रह रहे चार लाख से ज्यादा श्रमिकों, छात्र-छात्राओं और किरायेदारों के सामने इन दिनों घरेलू गैस का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। स्थिति यह है कि लोगों को बाहर से 400 रुपये प्रति किलो तक गैस खरीदकर खाना पकाना पड़ रहा है। 700 रुपये दिहाड़ी कमाने वाले मजदूरों के लिए इतनी महंगी गैस खरीदना संभव नहीं है। इसके चलते उनके सामने पलायन की नौबत आ गई है। कुटी रोड स्थित गंगा विहार कॉलोनी में साथी छोटेलाल के साथ रहने वाले कुशीनगर के बाबूलाल बताते हैं कि एक माह से हालात बेहद खराब हैं। दोनों घरों में रंगाई-पुताई करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं।  बाबूलाल के मुताबिक, पहले पांच किलो वाला घरेलू गैस सिलिंडर 110 रुपये प्रति किलो में भर जाता था। अब गैस का भाव 400 रुपये प्रति किलो हो गया है। उन्होंने बताया कि एक किलो गैस दो दिन भी नहीं चलती, जबकि एक दिन की दिहाड़ी 700 रुपये मिलती है।   एजेंसियों पर पांच किलो वाला सिलिंडर मिल नहीं रहा है। ऐसे में गांव लौटने का ही विकल्प बचा है। इस बारे में जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी ने बताया कि एजेंसी संचालकों से इस संबंध में वार्ता की गई है। कालाबाजारी के लिए कैसे मिल रही गैस जिले में छोटे-बड़े डेढ़ लाख से ज्यादा उद्योग संचालित हैं। इनमें बड़ी संख्या में श्रमिक कार्यरत हैं। इसके अलावा 50 हजार के करीब छात्र, किरायेदार भी हैं। इनके पास गैस कनेक्शन नहीं है। बीते दिनों अधिकारियों ने पांच किलो का सिलिंडर आसानी से उपलब्ध होने का दावा किया तो इन लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन जमीनी स्थिति विपरीत है। नंदग्राम में किराये पर रहने वाले कपिल ने बताया कि एजेंसियों पर सिलिंडर उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कालाबाजारी करने वालों को गैस कैसे मिल रही है।  गोदाम पर लटका ताला सिलिंडर के लिए कतार सिलिंडर के लिए लोग घंटों लाइन में लगकर बैरंग लौट रहे हैं। हैप्पी होम गैस एजेंसी के गोदाम पर मंगलवार सुबह से ताला लगा रहा। लोग सिलिंडर के लिए घंटों लाइन में लगे रहे और बाद में उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।   आदर्शनगर कॉलोनी निवासी राजेश कुमार ने बताया कि सिलिंडर लेने के लिए सुबह छह बजे ही गोदाम पर पहुंच गए थे। चौकीदार ने बताया कि दो दिन से गैस सिलिंडर का ट्रक नहीं आया है। लगभग तीन घंटे इंतजार करने के बाद घर लौट गए। अन्य उपभोक्ता भी इसी तरह परेशान हुए।   पांच किलो में कॉमर्शियल सिलिंडर है, घरेलू नहीं नेहरूनगर स्थित कमला गैस एजेंसी में मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे तीन श्रमिक रोजी, मोहन व सुनील पांच किलो का घरेलू सिलिंडर लेने गए तो निराशा हाथ लगी। उनको बताया गया कि पांच किलो का कॉमर्शियल सिलिंडर उपलब्ध है, लेकिन पांच किलो में घरेलू सिलिंडर नहीं पहुंचा है।  पांच किलो का घरेलू सिलिंडर 344 रुपये, जबकि कॉमर्शियल की कीमत 649 रुपये है। ऐसे में कॉमर्शियल सिलिंडर ले पाना सबके बस की बात नहीं है। इसी तरह मसूरी स्थित चौधरी इंडेन गैस एजेंसी में भी पांच किलो का सिलिंडर लेने पहुंचे 8-10 श्रमिकों को कर्मचारियों ने खाली हाथ लौटा दिया। डासना स्थित इंडेन गैस एजेंसी के प्रबंधक ने बताया कि उनके यहां बेहद कम संख्या में पांच किलो के सिलिंडर आए हैं, इसलिए अधिकांश लोगों को बैरंग लौटाना पड़ रहा है। एजेंसी संचालकों पर लगाया कालाबाजारी का आरोप भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के बैनर तले मंगलवार को बड़ी संख्या में किसान कलक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने एडीएम को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि मुरादनगर के महाजनान मोहल्ला स्थित नमन गैस एजेंसी और मेन रोड स्थित भारत गैस एजेंसी में कालाबाजारी की जा रही है। इस मौके मनोज नागर, प्रमोद त्यागी, शील कुमार त्यागी, रिंकू प्रधान, सलीम अली, जान मोहम्मद, बाली त्यागी आदि अनेक लोग मौजूद रहे।    

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश कृषि वैज्ञानिक सम्मान योजना के तहत 15 वैज्ञानिकों को किया सम्मानित

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को छठे उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘उत्तर प्रदेश कृषि वैज्ञानिक सम्मान योजना 2025-26’ के अंतर्गत 15 वैज्ञानिकों का सम्मान भी किया। वहीं, वर्ष 2025 में उत्कृष्ट कार्य करने वाले उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान अकादमी के 30 वैज्ञानिकों को भी सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक एवं नवाचार पर विचार-विमर्श भी हुआ। मुख्यमंत्री ने इस दौरान कई पुस्तिकों का विमोचन भी किया। विभिन्न पुरस्कार वर्गों में चयनित वैज्ञानिक… लाइफ टाइम एचीवमेंट पुरस्कार: डॉ. सत्य प्रकाश, प्राध्यापक एवं अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान विभाग, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ विशिष्ट वैज्ञानिक पुरस्कार कृषि विज्ञान: डॉ. लोकेश कुमार गंगवार, प्राध्यापक, आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ सब्जी एवं उद्यान विज्ञान: डॉ. अखिलेश चन्द्र मिश्रा, प्राध्यापक, सब्जी विज्ञान विभाग, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा पशुपालन, पशुचिकित्सा विज्ञान एवं मत्स्य विज्ञान: प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार गंगवार, अध्यक्ष, पशु शल्य चिकित्सा एवं विकिरण विज्ञान विभाग, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या जैव प्रौद्योगिकी: डॉ. वैशाली, प्राध्यापक एवं अध्यक्ष, कृषि जैव प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ सामाजिक विज्ञान (कृषि प्रसार शिक्षा, कृषि अर्थशास्त्र, गृह विज्ञान, कृषि सांख्यिकी): डॉ. कृष्ण कुमार सिंह, प्रभारी एवं विषय वस्तु विशेषज्ञ / सहायक प्राध्यापक (पादप प्रजनन), सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्र, नगीना, बिजनौर विशिष्ट महिला वैज्ञानिक पुरस्कार डॉ. श्वेता, सहायक प्राध्यापक, आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग, चन्द्र शेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर युवा वैज्ञानिक पुरस्कार कृषि विज्ञान: डॉ. अरविंद कुमार गुप्ता, सहायक प्राध्यापक, प्राकृतिक संसाधन प्रबन्धन विभाग, वानिकी महाविद्यालय, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा सब्जी एवं उद्यान विज्ञान: डॉ. मनीष पांडेय, विषय वस्तु विशेषज्ञ (उद्यान विज्ञान), आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्र, कल्लीपुर, वाराणसी पशुपालन, पशुचिकित्सा विज्ञान एवं मत्स्य विज्ञान: डॉ. प्रमिला उमराव, सहायक प्राध्यापक, पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ जैव प्रौद्योगिकी: डॉ. विशाल चुग, सहायक प्राध्यापक, मौलिक एवं सामाजिक विज्ञान विभाग, उद्यान महाविद्यालय, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा सामाजिक विज्ञान (कृषि प्रसार शिक्षा, कृषि अर्थशास्त्र, गृह विज्ञान, सांख्यिकी): डॉ. रूपन रघुवंशी, विषय वस्तु विशेषज्ञ (कृषि प्रसार), आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्र, बाराबंकी उत्कृष्ट पीएच.डी. थीसिस पुरस्कार कृषि विज्ञान: डॉ. उत्कर्ष सिंह, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या सब्जी एवं उद्यान विज्ञान: डॉ. निमित सिंह, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या  सामाजिक विज्ञान (कृषि प्रसार शिक्षा, कृषि अर्थशास्त्र, गृह विज्ञान, कृषि सांख्यिकी): डॉ. संदीप कुमार, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक कृषि विश्वविद्यालय, अयोध्या  इन वैज्ञानिक, संस्थान एवं स्टार्टअप को भी मिला पुरस्कार लैंडस्केप रीस्टोरेशन लीडरशिप अवॉर्ड: डॉ रमेश सिंह, थीम लीडर, इक्रीसेट, हैदराबाद को झांसी जिले के टहरौली क्लस्टर में उपकार के साथ उत्कृष्ट कार्य के लिए मिला पुरस्कार  उत्कृष्ट कृषि पुरस्कार विज्ञान संस्थान / कृषि विश्वविद्यालय पुरस्कार: रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी  यूपी एग्री स्टार्टअप पुरस्कार ड्रोनटेक लैब, नोएडा गरिमा डी-हाईड्रेटेड फूड एल.एल.पी., मेरठ ग्रीनॉक्स फूड प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा श्रीदेश आर्गेनिक फार्म, बागपत वेलविद इण्डिया प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा उत्कृष्टता प्रणामपत्रः सुरेश कुमार गुप्ता को मिला। इनकी हापुड़ में 121 वर्ष पुरानी गोशाला है। वहां यह उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं।