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गोरखपुर में BJP नेता हत्याकांड में प्रमुख आरोपी की गिरफ्तारी, गोली मारने के बाद चाकुओं से हमला

गोरखपुर गोरखपुर में पूर्व पार्षद और भाजपा नेता राजकुमार चौहान के हत्यारों को पुलिस ने महज़ कुछ ही घंटों में ढूंढ लिया है. पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने भतीजे से हुई लड़ाई का बदला लेने के लिए उनकी हत्या की थी. मॉर्निंग वॉक पर निकले राजकुमार चौहान को आरोपियों ने पहले गोली मारी और फिर चाकू से गोद डाला. यह घटना मंगलवार सुबह 5 बजे के आसपास हुई. जिससे इलाके में दहशत फैल गई थी। राजकुमार के भतीजे से हुई लड़ाई से क्षुब्ध होकर 18 वर्षीय राज चौहान ने अपने दोस्त विपिन यादव के साथ मिलकर चाचा राजकुमार चौहान की बेरहमी से हत्या कर दी. पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में राजकुमार के शरीर पर कुल 11 जगह घाव मिले हैं. हत्याकांड को लेकर राजकुमार के परिवार ने 8 लोगों को नामजद किया था. लेकिन पुलिस का कहना है कि घटना के पीछे गिरफ्तार दो आरोपियों की ही संलिप्तता पाई गई है। प्रशासन करेगा बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था कड़ाई से पूछताछ करने पर दोनों ने सच उगल दिया. वहीं भाजपा नेता की मौत के बाद गोरखपुर जिला प्रशासन ने उदारता दिखाते हुए परिवार की मदद को आगे हाथ बढ़ाया है. जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि मृतक के परिवार ने सुरक्षा की मांग थी. जिसे तत्काल मुहैया कराया गया है. कुछ आर्थिक मदद की बात की गई थी, जिसे प्रशासन को अवगत करा दिया गया है। मृतक की दो छोटी बेटी और एक बेटे की पढ़ाई की व्यवस्था भी कराई जाएगी. साथ ही कोई योग्य परिवार का सदस्य जो नौकरी करना चाहता हो उसकी भी व्यवस्था की जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय का लिया जायजा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय का किया निरीक्षण  31 मई तक पूरा करें विश्वविद्यालय का निर्माणः मुख्यमंत्री ऐसा पाठ्यक्रम चलाएं, जो मीरजापुर-सोनभद्र समेत आसपास के युवाओं के लिए रोजगारपरक, नवाचार व कौशलयुक्त होः मुख्यमंत्री   सीएम योगी ने विश्वविद्यालय परिसर में लगाया मौलिश्री का पौधा, वर्षाकाल में वन विभाग के साथ वृहद पौधरोपण अभियान चलाने का निर्देश  लखनऊ/मीरजापुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने परिसर में मौलिश्री का पौधा रोपित किया और विश्वविद्यालय के अकादमिक व प्रशासनिक ब्लॉक का निरीक्षण भी किया। मुख्यमंत्री ने 31 मई तक विश्वविद्यालय का निर्माण पूरा करने, विश्वविद्यालय के अंदर सड़कों का निर्माण करने और परिसर में पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भी निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को निर्देशित किया कि गुणवत्ता और समयबद्धता का हर हाल में पालन होना चाहिए।  ऐसा पाठ्यक्रम चलाएं, जो युवाओं को कौशल विकास के साथ ही रोजगार से भी जोड़े मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कहा कि यहां ऐसा पाठ्यक्रम चलाएं, जो युवाओं को कौशल विकास के साथ ही रोजगार से भी जोड़े। इसका लाभ मीरजापुर, सोनभद्र समेत आसपास के युवाओं को प्राप्त हो। विश्वविद्यालय प्रशासन ने तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए अधियाचन भेजा है। मुख्यमंत्री ने शासन स्तर से इस पर कार्यवाही का निर्देश दिया।  निर्माण कार्य में हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं  मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय के अकादमिक व प्रशासनिक ब्लॉक का निरीक्षण किया। निर्माण कार्यों का अवलोकन करने के उपरांत मुख्यमंत्री ने निर्माण एजेंसी को समयबद्धता व गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा का मंदिर है। हमारी सरकार ने मां विंध्यवासिनी के नाम पर मीरजापुर के युवाओं के लिए विश्वविद्यालय देकर बहुप्रतीक्षित मांग को पूरा किया है। इसके निर्माण में हीलाहवाली कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  वर्षाकाल में वन विभाग से समन्वय स्थापित कर वृहद पौधरोपण अभियान चलाएं  मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रांगण में मौलिश्री का पौधा रोपा और विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया कि आगामी वर्षाकाल में वन विभाग से समन्वय स्थापित करते हुए बड़ी संख्या में पौधे प्राप्त करें। शिक्षकों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों को साथ लेकर विश्वविद्यालय परिसर व आसपास के क्षेत्रों में वृहद पौधरोपण अभियान चलाएं। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन से हरियाली बढ़ाने को कहा। मुख्यमंत्री के आगमन पर कुलपति प्रो. शोभा गौड़ ने पुष्पगुच्छ व स्मृति चिह्न देकर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल, मड़िहान विधायक रमाशंकर पटेल, प्रमुख सचिव (उच्च शिक्षा) महेंद्र अग्रवाल, आयुक्त राजेश प्रकाश, जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार, वित्त अधिकारी गिरीश कुमार, कुलसचिव श्री राम नारायण, परीक्षा नियंत्रक महेंद्र कुमार, डिप्टी रजिस्ट्रार सुनील कुमार सरोज आदि मौजूद रहे।

योगी सरकार का बेहतरीन मॉडल, टैक्स से सीधे जनहित तक हर रुपये का उद्देश्य तय

उत्तर प्रदेश की नई वित्तीय नीति: जनता के काम में सीधे खर्च हो रहा पैसा योगी सरकार का बेहतरीन मॉडल, टैक्स से सीधे जनहित तक हर रुपये का उद्देश्य तय कहां से पैसा आया और कहां खर्च हुआ, अब सब कुछ है स्पष्ट गो कल्याण, सड़क, खेती और विरासत को मिल रहा सीधा लाभ लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक वित्त के क्षेत्र में एक स्पष्ट और व्यावहारिक बदलाव किया है। अब टैक्स को केवल राजस्व इकट्ठा करने का माध्यम नहीं माना जा रहा, बल्कि उसे सीधे किसी खास उद्देश्य से जोड़कर खर्च किया जा रहा है। सरल शब्दों में समझें तो कौन सा पैसा कहां से आया और कहां खर्च हुआ, यह अब स्पष्ट दिख रहा है। यह मॉडल इसलिए खास है क्योंकि आम नागरिक अब आसानी से समझ सकता है कि उसका दिया हुआ टैक्स किस काम में लग रहा है। इस पूरी नीति का सीधा मतलब है कि टैक्स अब सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि विकास का साधन बन चुका है। उत्तर प्रदेश ने दिखाया है कि अगर योजना स्पष्ट हो, तो हर रुपये का सही उपयोग करके समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति तीनों को एक साथ मजबूत किया जा सकता है। गो कल्याण सेस: छोटा टैक्स, बड़ा असर राज्य सरकार ने आबकारी से जुड़े राजस्व पर 0.5% का गो कल्याण सेस लगाया है। यह टैक्स शराब की बिक्री से जुड़ा है। आम उपभोक्ता पर इसका बहुत कम असर पड़ता है, लेकिन पूरे राज्य से यह मिलकर सैकड़ों करोड़ रुपये जुटाता है। इस पैसे को सीधे आवारा गोवंश की देखभाल में खर्च किया जाता है। प्रदेश में बने गोवंश आश्रय स्थल में हजारों पशुओं को रहने, खाने और इलाज की सुविधा मिल रही है। दरअसल, कृषि में मशीनों के बढ़ते उपयोग के कारण किसानों की पशुओं पर निर्भरता कम हुई है, जिससे आवारा पशुओं की समस्या बढ़ी। अब इस सेस के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान तैयार किया गया है। हर सेक्टर का पैसा उसी सेक्टर में लग रहा उत्तर प्रदेश ने एक और स्पष्ट नीति अपनाई है और वो ये कि जिस सेक्टर से राजस्व आता है, उसी सेक्टर के विकास में उसका उपयोग किया जाता है। इसे आसान भाषा में ऐसे समझें: 1. रियल एस्टेट: धार्मिक और पर्यटन विकास संपत्ति की खरीद-फरोख्त से मिलने वाली स्टाम्प ड्यूटी का उपयोग काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट में किया जा रहा है। इससे पर्यटन बढ़ रहा है, रोजगार मिल रहा है और विरासत सुरक्षित हो रही है। 2. खनन: सिंचाई और पानी की व्यवस्था खनन से मिलने वाला पैसा गांवों में सिंचाई और जल प्रबंधन सुधारने में लगाया जा रहा है, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है। 3. एक्सप्रेसवे: गांवों तक सड़क कनेक्टिविटी पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से मिलने वाला टोल छोटी सड़कों (फीडर रोड) के निर्माण में खर्च हो रहा है, जिससे दूर-दराज के गांव भी मुख्य सड़कों से जुड़ रहे हैं। 4. मंडी शुल्क: किसानों की सुरक्षा मंडी से मिलने वाली फीस का उपयोग फसल सुरक्षा और किसान योजनाओं में किया जा रहा है। अब टैक्स का उपयोग साफ दिख रहा इस नई नीति की सबसे बड़ी ताकत है, स्पष्टता। अब लोगों को साफ दिखता है कि शराब की बिक्री से मिला पैसा गो कल्याण में लग रहा है। टोल टैक्स का पैसा सड़क और कनेक्टिविटी में, प्रॉपर्टी टैक्स का पैसा धार्मिक और पर्यटन विकास में निवेश हो रहा है। इससे सरकार पर भरोसा बढ़ता है, क्योंकि टैक्स अब “कहां गया” का सवाल नहीं, बल्कि “यहीं लगा” का जवाब देता है। तेजी से विकास की मजबूत तैयारी उत्तर प्रदेश का लक्ष्य है 2029-30 तक $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाना है। इसके लिए सरकार लगातार सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई और खेती, लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्री, पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही है। राज्य के बजट में पूंजीगत खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे रोजगार, व्यापार और कनेक्टिविटी तीनों में तेजी आ रही है। दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण उत्तर प्रदेश का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक स्पष्ट रास्ता दिखाता है। मतलब साफ है कि जो राज्य जिस क्षेत्र में मजबूत है, वह उसी से मिलने वाले टैक्स को उसी क्षेत्र के विकास में लगा सकता है। जैसे, जहां पर्यटन ज्यादा है, वहां पर्यटन से मिलने वाले टैक्स को पर्यटन सुविधाएं बेहतर करने में खर्च किया जा सकता है। औद्योगिक राज्यों में उद्योगों से जुड़े शुल्क को पर्यावरण सुधार पर लगाया जा सकता है। वहीं कृषि प्रधान राज्यों में मंडी से मिलने वाली फीस को खेती और किसानों को मजबूत बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो, हर राज्य अपनी जरूरत और स्थिति के अनुसार टैक्स को विकास से जोड़कर ज्यादा प्रभावी परिणाम हासिल कर सकता है।

यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में निवेश की गति तेज, तीन कंपनियों को मिली भूमि आवंटन

यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में बड़े निवेश की रफ्तार तेज, तीन कंपनियों को भूमि आवंटन योगी सरकार की औद्योगिक नीति का असर, तीनों कंपनियों से आएगा 3,400 करोड़ रुपये से अधिक निवेश ट्रैक्टर, कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट और ड्राई फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट लगेंगी, सृजित होंगे 5,700 से ज्यादा रोजगार के अवसर लखनऊ/नोएडा  उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार लगातार सक्रिय है। इसी क्रम में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में तीन बड़ी कंपनियों को भूमि आवंटित की गई है। यह आवंटन इन्वेस्ट यूपी की संस्तुति पर किया गया है, जिससे प्रदेश में निवेश का माहौल और मजबूत हुआ है। इन परियोजनाओं से कुल 3,400 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आएगा और लगभग 5,700 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा। एस्कॉर्ट्स कुबोटा से मिलेगा बड़ा निवेश और रोजगार एस्कॉर्ट्स कुबोटा लि. (M/s Escorts Kubota Limited) को सेक्टर-10 में 154 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। कंपनी यहां ट्रैक्टर और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट निर्माण इकाई स्थापित करेगी। इस परियोजना में लगभग 2,029 करोड़ रुपये का निवेश होगा और करीब 4,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। यह यूनिट प्रदेश में कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को नई मजबूती देगी। सीएनएच इंडस्ट्रियल से कृषि मशीनरी सेक्टर को बढ़ावा सीएनएच इंडस्ट्रियल इंडिया प्रा लि (M/s CNH Industrial India Pvt. Ltd.) को सेक्टर-8डी में 100 एकड़ भूमि दी गई है। कंपनी यहां ट्रैक्टर निर्माण यूनिट स्थापित करेगी, जिसमें 1,219.81 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इस प्रोजेक्ट से लगभग 1,200 लोगों को रोजगार मिलेगा। यह निवेश उत्तर प्रदेश को कृषि मशीनरी निर्माण का एक प्रमुख केंद्र बनाने में मदद करेगा। सन ऑर्गेनिक से फूड प्रोसेसिंग सेक्टर मजबूत सन ऑर्गेनिक इंडस्ट्रीज प्रा लि (M/s Sun Organic Industries Pvt. Ltd.) को सेक्टर-8डी में 30,000 वर्गमीटर भूमि आवंटित की गई है। कंपनी यहां ड्राई फ्रूट प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट लगाएगी। इस परियोजना में करीब 225.16 करोड़ रुपये का निवेश होगा और 569 लोगों को रोजगार मिलेगा। इससे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बनेंगे। योगी सरकार की नीतियों से बढ़ा निवेश का भरोसा प्रदेश में बढ़ते निवेश को योगी सरकार की उद्योग अनुकूल नीतियों, सिंगल विंडो सिस्टम और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का परिणाम माना जा रहा है। यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र तेजी से एक औद्योगिक हब के रूप में विकसित हो रहा है, जहां बड़ी कंपनियां निवेश के लिए आगे आ रही हैं। इन सभी परियोजनाओं के शुरू होने से न केवल हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी, जिससे प्रदेश के समग्र विकास को बल मिलेगा। उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य राज्य को $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाना है। यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में हो रहा यह निवेश उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

समरसता का संदेश देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने होली मिलन समारोह में भाग लिया

मुख्यमंत्री युवा योजना से बदली तकदीर, लखनऊ की खुशी बनीं महिला उद्यमिता की नई पहचान ब्याज मुक्त और गारंटी मुक्त ऋण से युवाओं को मिल रहा स्वरोजगार का अवसर ‘ग्लैम हाउस’ के जरिए ब्यूटी बिजनेस में बनाई अलग पहचान   यूनिसेक्स सैलून और एकेडमी से अन्य महिलाओं को भी दे रहीं रोजगार लखनऊ 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान' के माध्यम से योगी सरकार ब्याज मुक्त और गारंटी मुक्त ऋण प्रदान कर युवाओं के स्वरोजगार के सपनों को नए पंख देने का काम कर रही है। इसी योजना का लाभ लेकर योगी सरकार के ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को लखनऊ की रहने वाली खुशी गुप्ता ने धरातल पर उतारकर उद्यमी बनने का सपना साकार किया है। उन्होंने न सिर्फ ब्यूटी बिजनेस में अपनी अलग पहचान बनाई, बल्कि वे अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन चुकीं हैं। लखनऊ की खुशी बनीं महिला उद्यमिता की नई पहचान खुशी गुप्ता ने बताया कि वे लखनऊ में बीए एलएलबी की पढ़ाई कर रहीं हैं। उनकी मेकअप और ब्यूटी पार्लर में रुचि है। इसके लिए उन्होंने प्रोफेशनल कोर्स भी किया। उनको 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान' योजना के बारे में जानकारी मिली। जिसके बाद उन्होंने बैंक जाकर योजना की जानकारी ली और एक हफ्ते का उद्यमिता प्रशिक्षण भी लिया। इस योजना के तहत उनको 4.5 लाख रुपए का ऋण प्राप्त हुआ। यह पूरी तरह ब्याज मुक्त और गारंटी मुक्त था। मुख्यमंत्री युवा योजना के तहत मिली वित्तीय सहायता से उन्होंने से सैलून का इंटीरियर और वेंडर्स का भुगतान किया। लखनऊ के खुर्रम नगर इलाके में 2025 में ‘ग्लैम हाउस’ के नाम से यूनिसेक्स सैलून, स्टूडियो और एकेडमी की शुरुआत की। खुशी आज न सिर्फ हर महीने लाखों रुपए कमा रहीं है, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रहीं हैं।   ब्याज मुक्त और गारंटी मुक्त ऋण से प्रदेश के युवा बन रहे उद्यमी  योगी सरकार 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान' के तहत प्रदेश के 21 से 40 वर्ष तक के युवाओं को व्यापार जगत में मुख्यधारा से जोड़ रही है। योजना के तहत ब्याज मुक्त और गारंटी मुक्त 5 लाख रुपए तक का ऋण उपलब्ध करवाती है। आज खुशी जैसी प्रदेश की हजारों महिलाएं सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के माध्यम से उत्तर प्रदेश की जीडीपी में अपना योगदान दे रहीं हैं। खुशी की कहानी उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपनी पहचान बनाना चाहती हैं।

चैत्र नवरात्रि से पहले गोरक्षपीठाधीश्वर ने मां के चरणों में लगाई हाजिरी

मुख्यमंत्री ने किए मां विंध्यवासिनी के दर्शन चैत्र नवरात्रि से पहले गोरक्षपीठाधीश्वर ने मां के चरणों में लगाई हाजिरी  सीएम ने की स्वस्थ-समृद्ध उत्तर प्रदेश की कामना कॉरिडोर का किया अवलोकन, बच्चों को दी चॉकलेट लखनऊ/मीरजापुर गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  मां विंध्यवासिनी के दर्शन किए। मां की आरती उतारी और सुखी, स्वस्थ व समृद्ध उत्तर प्रदेश की कामना की। मुख्यमंत्री ने मां को लाल चुनरी अर्पित कर श्रद्धा निवेदित की और मंदिर की परिक्रमा भी की। मुख्यमंत्री ने चैत्र नवरात्रि की तैयारियों का जायजा लिया, प्रशासन को चैत्र नवरात्रि व रामनवमी में आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने और मंदिर प्रांगण के साथ ही आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।  इसके बाद मुख्यमंत्री ने विंध्यवासिनी कॉरिडोर का अवलोकन और स्टालों का निरीक्षण किया। उन्होंने श्रद्धालुओं का अभिवादन भी किया। इस दौरान मुख्यमंत्री को बच्चे भी दिखाई दिए। उन्होंने बच्चों के पास पहुंचकर उनसे संवाद किया, उनका हालचाल पूछा और पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने बच्चों को मोबाइल का प्रयोग कम से कम करने की सीख दी और उन्हें चॉकलेट भी दी।  इस दौरान कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल, विधायक रत्नाकर मिश्र, विधान परिषद सदस्य विनीत सिंह समेत स्थानीय जनप्रतिनिधि आदि मौजूद रहे।

बहुगुणा जी ने उत्तर प्रदेश के विकास को प्रदान की नई ऊंचाइयां: सीएम योगी

पूर्व सीएम हेमवती नंदन बहुगुणा की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए मुख्यमंत्री  बहुगुणा जी ने उत्तर प्रदेश के विकास को प्रदान की नई ऊंचाइयां: सीएम योगी  लोकप्रिय राजनेता व कुशल प्रशासक थे हेमवती नंदन बहुगुणाः मुख्यमंत्री  समाज के हर तबके व देश की समृद्धि के लिए अनेक कार्य किए बहुगुणा जी ने: सीएम योगी  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूर्व सीएम हेमवती नंदन बहुगुणा की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धा निवेदित की। सीएम योगी ने स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा को लोकप्रिय राजनेता, कुशल प्रशासक व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बताया। सीएम ने कहा कि बहुगुणा जी ने उत्तर प्रदेश के विकास को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं। सामाजिक जन-जागरूकता व राष्ट्रीय चेतना को प्रखर रूप से बढ़ाने के निरंतर प्रयास किए बहुगुणा जी ने सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा का जन्म तत्कालीन उत्तर प्रदेश (वर्तमान उत्तराखंड) के जनपद पौढ़ी के एक छोटे से गांव में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही अर्जित की। आगे की शिक्षा के लिए उन्होंने प्रयागराज की भूमि को चुना। वहीं उच्च शिक्षा ग्रहण करने के दौरान वह छात्रनेता के रूप में देश के स्वाधीनता आंदोलन से जुड़े। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के साथ ही सामाजिक जन-जागरूकता व राष्ट्रीय चेतना को प्रखर रूप से बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए।  समाज के प्रत्येक तबके, देश की समृद्धि व आमजन के कल्याण के लिए किए अनेक कार्य मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज में 1942 में छात्रनेता के रूप में उनकी गिरफ्तारी हुई। स्वतंत्र भारत में जनप्रतिनिधि, प्रदेश सरकार के मंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने अनेक उल्लेखनीय कार्य किए। उत्तर प्रदेश के विकास को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं। उन्होंने प्रयागराज को नई पहचान दी। हेमवती नंदन बहुगुणा द्वारा जनप्रतिनिधि के रूप में जो भी कार्य किए गए, वे समाज के प्रत्येक तबके, देश की समृद्धि व आमजन के कल्याण के लिए थे।  इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, विधायक जय देवी, विधान परिषद सदस्य रामचंद्र प्रधान, डॉ. अम्मार रिजवी, पूर्व सांसद रीता बहुगुणा जोशी, पूर्व महापौर संयुक्ता भाटिया आदि ने भी स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

कालाबाजारी में संलिप्त 12 एलपीजी वितरकों एवं 74 अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज

कालाबाजारी पर मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर कड़ी कार्रवाई, 5813 जगहों पर पड़े छापे कालाबाजारी में संलिप्त 12 एलपीजी वितरकों एवं 74 अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कार्रवाई के दौरान 11 गिरफ्तार एवं 85 व्यक्तियों के खिलाफ हुई अभियोजन की कार्रवाई सरकार की इस सख्ती के बीच आपूर्ति व्यवस्था भी नियंत्रण में खाद्यायुक्त कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम 24 घंटे संचालित लखनऊ  प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के साथ-साथ कालाबाजारी और अवैध बिक्री पर कड़ी नजर रखी जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर 12 से 17 मार्च तक पूरे प्रदेश में 5813 निरीक्षण और छापेमारी की गई है। इस दौरान एलपीजी वितरकों के खिलाफ 12 एफआईआर दर्ज कराई गईं, जबकि कालाबाजारी में संलिप्त अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध 74 एफआईआर दर्ज हुई हैं। कार्रवाई के दौरान 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 85 व्यक्तियों के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई की गई है। यह अभियान लगातार जारी है और स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को सक्रिय रहकर निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार की इस सख्ती के बीच आपूर्ति व्यवस्था भी नियंत्रण में है। प्रदेश के 4108 एलपीजी गैस वितरकों के यहां बुकिंग के सापेक्ष उपभोक्ताओं को समय पर रिफिल की डिलीवरी सुनिश्चित कराई जा रही है। वितरकों के पास गैस सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और आवश्यकता के अनुसार घरेलू एलपीजी रिफिल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वाणिज्यिक सिलेंडरों के लिए भारत सरकार द्वारा कुल खपत के 20 प्रतिशत आवंटन की अनुमति भी दी गई है, जिससे बाजार में संतुलन बनाए रखने में मदद मिल रही है। पूरी व्यवस्था की निगरानी के लिए खाद्यायुक्त कार्यालय में 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। यहां पेट्रोलियम पदार्थों के वितरण से संबंधित सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है और सामने आ रही समस्याओं का तत्काल निस्तारण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त होम कंट्रोल में भी खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है। जनपद स्तर पर भी कंट्रोल रूम स्थापित कर उन्हें सक्रिय रखा गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर स्थिति पर लगातार नजर बनी रहे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला पूर्ति अधिकारी और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी लगातार फील्ड में भ्रमण कर रहे हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कहीं भी कृत्रिम कमी की स्थिति न बनने पाए और उपभोक्ताओं को समय से आवश्यक ईंधन उपलब्ध होता रहे। प्रशासनिक स्तर पर की जा रही यह सतत निगरानी प्रदेश में आपूर्ति व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही है।

‘चोर’ बंदरों से बचाने के लिए राष्ट्रपति मुर्मू का चश्मा, वृंदावन में लगाए जाएंगे लंगूरों के कटआउट

 मथुरा उत्तर प्रदेश में मथुरा के वृंदावन में बंदरों की शरारतें लंबे समय से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है. देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए प्रशासन के सामने इन ‘चश्मा चोर’ बंदरों से निपटना बड़ी चुनौती बन गया है। झपट्टा मारकर चश्मा छीन लेते हैं बंदर वृंदावन के बाजारों और मंदिरों के आसपास सक्रिय बंदर खासतौर पर चश्मा पहनने वाले लोगों को निशाना बनाते हैं. वे झपट्टा मारकर चश्मा छीन लेते हैं और फिर उसे लौटाने के बदले खाने-पीने की चीजें, खासकर फ्रूटी जैसे पैकेट की मांग करते हैं. यह अनोखी सी डील यहां आम बात बन चुका है। बंदरों की हरकतों पर कंट्रोल जरूरी राष्ट्रपति के 19 मार्च से शुरू हो रहे तीन दिवसीय दौरे के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की असुविधा से बचना चाहती हैं. कार्यक्रम के तहत राष्ट्रपति वृंदावन के प्रमुख स्थलों- उड़िया बाबा आश्रम, रामकृष्ण मिशन सेवा चैरिटेबल अस्पताल का दौरा करेंगी और 21 मार्च को गोवर्धन की परिक्रमा भी प्रस्तावित है. ऐसे में बंदरों की हरकतों पर नियंत्रण जरूरी हो गया है। सुरक्षा में लंगूरों को लाना संभव नहीं, तो… पहले ऐसे मौकों पर बंदरों को भगाने के लिए प्रशिक्षित लंगूरों को तैनात किया जाता था, लेकिन अब वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत ऐसा करना संभव नहीं है. इसी वजह से इस बार प्रशासन ने एक नया तरीका अपनाया है- लंगूरों के कटआउट. माना जाता है कि बंदर लंगूरों से डरते हैं, इसलिए उनके जैसे दिखने वाले कटआउट लगाकर उन्हें दूर रखने की कोशिश की जा रही है। गुलेल, लाठी-डंडों और लेजर लाइट इसके अलावा वन विभाग की करीब 30 सदस्यीय टीम को भी तैनात किया गया है. ये कर्मचारी गुलेल, लाठी-डंडों और लेजर लाइट जैसे साधनों के साथ संवेदनशील इलाकों में निगरानी करेंगे. बंदरों की अधिक मौजूदगी वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त स्टाफ लगाया जाएगा, ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके. प्रशासन को उम्मीद है कि इन उपायों से राष्ट्रपति के दौरे के दौरान कोई अप्रिय स्थिति नहीं बनेगी।  

अब यूपी में अंडों पर अनिवार्य होगी एक्सपायरी डेट, सरकार ने जारी किया आदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने उपभोक्ताओं की सेहत की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब 1 अप्रैल से राज्य में हर अंडे पर उत्पादन तिथि (लेड डेट) और एक्सपायरी डेट की मुहर लगाना जरूरी हो जाएगा. इसका मतलब है कि अब दुकानदार "ताजा अंडा" कहकर पुराने या खराब अंडे नहीं बेच सकेंगे. ग्राहक खुद डेट देखकर समझ सकते हैं कि अंडा कितना पुराना है और कब तक सुरक्षित है। यह नियम पशुपालन विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग के निर्देश पर लागू किया जा रहा है. मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि अंडे सीधे इंसान के स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं. पहले कई जगहों पर पुराने अंडे बेचे जाते थे और ग्राहकों को इसकी जानकारी नहीं होती थी. अब यह नियम लागू होने से पारदर्शिता आएगी और लोगों को सुरक्षित अंडे मिलेंगे। अंडे कितने दिन तक सुरक्षित रहते हैं? सामान्य तापमान (लगभग 30 डिग्री सेल्सियस) पर अंडे सिर्फ 2 हफ्ते तक अच्छे रहते हैं. अगर इन्हें ठंडे स्थान पर (2 से 8 डिग्री सेल्सियस) रखा जाए, तो 5 हफ्ते तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं. लेकिन कई दुकानदार और व्यापारी ठंडे स्टोरेज का सही इस्तेमाल नहीं करते थे. अब मुहर से ग्राहक आसानी से चेक कर सकेंगे। नियम तोड़ने पर क्या होगा? अगर कोई व्यापारी या दुकानदार नियम नहीं मानता, तो उसके अंडे जब्त कर लिए जाएंगे. या तो उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा या उन पर साफ लिख दिया जाएगा कि यह मानव उपभोग के लिए सुरक्षित नहीं है. विभाग सख्ती से जांच करेगा और कार्रवाई करेगा। कोल्ड स्टोरेज की स्थिति यूपी जैसे बड़े राज्य में अभी सिर्फ दो मुख्य कोल्ड स्टोरेज हैं. एक आगरा में और एक झांसी में. खाद्य सुरक्षा के नियमों के अनुसार, अंडों को सब्जियों के साथ एक ही कोल्ड स्टोरेज में नहीं रखा जा सकता, क्योंकि दोनों की तापमान जरूरत अलग होती है. व्यवस्था अभी सीमित है, लेकिन सरकार का कहना है कि बहाने अब नहीं चलेंगे. सभी को नियम मानने होंगे। उपभोक्ताओं के लिए फायदा पहले ग्राहक को अंदाजा लगाना पड़ता था कि अंडा कितना पुराना है. कई बार पुराने अंडे खाने से सेहत को नुकसान होता था. अब अंडा खुद अपनी "जन्म तिथि" और "एक्सपायरी" बताएगा. इससे लोग बेहतर चुनाव कर सकेंगे और सुरक्षित खाना खा सकेंगे. पशुपालन विभाग के अधिकारी कहते हैं कि यह फैसला सिर्फ एक आदेश नहीं है, बल्कि उपभोक्ता सुरक्षा की मजबूत कड़ी है। जल्द ही इस नियम का पूरे राज्य में सख्ती से पालन कराया जाएगा. दुकानदारों और उत्पादकों को पहले से तैयारी करने की सलाह दी गई है. यह कदम उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।