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गीडा के उद्यमियों ने उठाए बिजली, मेंटेनेंस शुल्क और सीईटीपी मुद्दे; तत्काल निस्तारण का आदेश

 गोरखपुर मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक में गीडा औद्योगिक क्षेत्र में बिजली आपूर्ति में गड़बड़ी का मामला छाया रहा।उद्यमियों के द्वारा ट्रिपिंग, कटौती और बिजली संबंधी समस्याओं के दूर करने में विभाग की लापरवाही संबंधी मामला उठाने पर कमिश्नर ने सख्त रूख अपनाया। उन्होंने मुख्य अभियंता को तत्काल प्रभाव से एक्सईएन से नोडल की जिम्मेदारी हटाने और एसडीओ की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि उद्योगों की स्थापना एवं संचालन में आने वाली बाधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए तथा निवेशकों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए। गुरुवार को कमिश्नर अनिल ढींगरा की अध्यक्षता में हुई मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक आयोजित हुई। बैठक में चैंबर आफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह ने कहा कि गीडा के उद्यमी लंबे समय से बिजली संकट झेल रहे हैं। इस दौरान अन्य उद्यमियों ने बताया कि गीडा में तैनात एक्सईएन के पास नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी भी है, लेकिन बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा। एक्सईएन से संपर्क करने पर अक्सर वह शहर से बाहर या बैठक में होने की बात कहते हैं, जिससे समस्याओं का समाधान लंबित रहता है। इस पर डीएम दीपक मीणा ने भी एक्सईएन से नोडल प्रभार हटाने की जरूरत बताई, जिसे स्वीकार करते हुए विभाग ने कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस पर कमिश्नर के तत्काल प्रभाव से एक्सईएन से नोडल की जिम्मेदारी हटाने और एसडीओ की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। मुख्य अभियंता ने मौके पर ही इस आदेश का पालन करने का भरोसा दिया। एलपीजी टैंकर का मामला सुलझा, मेंटेनेंस शुल्क व सीईटीपी अटका बैठक में उद्यमियों ने गीडा क्षेत्र में सड़कों पर अवैध रूप से खड़े एलपीजी टैंकरों का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। इसे गंभीरता से लेते हुए कमिश्नर ने एसपी ट्रैफिक और आरटीओ को संयुक्त रूप से स्थलीय निरीक्षण करने और नियमों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके अलावा उद्योगों की स्थापना और संचालन में आ रही बाधाओं को लेकर भी चर्चा हुई। कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि निवेशकों को अनुकूल माहौल देने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से काम करें और समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। हालांकि, गीडा क्षेत्र में उद्यमियों की समस्याएं लगातार उठने के बावजूद समाधान नहीं निकल पा रहा है। मेंटेनेंस शुल्क का मुद्दा लगातार तीन बैठकों से लंबित है। उद्यमियों का कहना है कि गीडा एक्ट के अनुसार लैंड कास्ट का एक प्रतिशत से अधिक शुल्क नहीं लिया जा सकता, जबकि प्रशासन हर वर्ष करीब 13 प्रतिशत वसूल रहा है। इसके बावजूद इस बार भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। वहीं, कामन इफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का मामला करीब 12 बैठकों से एजेंडे में होने के बावजूद अधर में है। इसके संचालन को लेकर स्पष्ट नीति नहीं बन सकी है। निवेश मित्र पोर्टल पर लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश बैठक में निवेश मित्र पोर्टल पर लंबित स्वीकृतियों, अनापत्तियों और अनुमोदनों की समीक्षा भी की गई। कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी लंबित मामलों का शत-प्रतिशत निस्तारण तय समय सीमा के भीतर प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। इस दौरान सांख्यिकी विभाग से जुड़े मामलों में भी बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। बैठक में जिलाधिकारी दीपक मीणा, सीईओ गीडा अनुज मलिक, उद्यमी प्रवीण मोदी, भोला जायसवाल, अशोक साव, उमेश छापड़िया समेत कई अधिकारी और उद्यमी मौजूद रहे। कमिश्नर सभागार में हो गई उद्योग बंधु की बैठक बुधवार को विकास भवन स्थित सभागार में शाम पांच बजे से जिला उद्योग बंधु की बैठक आयोजित होनी थी। जबकि चार बजे से मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक। मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक में सभी अधिकारी व उद्यमी भी मौजूद रहे। इस दौरान डीएम ने मौके पर उद्यमियों से उनकी परेशानियों और मुद्दों पर चर्चा की। वहां भी बिजली के अलावा कुछ मामले उठाए गए। डीएम ने सभी मामलों पर बातचीत कर उनके तत्काल निस्तारण का भरोसा दिया।  

डॉ. बी.आर. आंबेडकर मूर्ति विकास योजना: पार्कों में नई छत्र, बाउंड्री और रोशनी का प्रावधान

फिरोजाबाद  यूपी के फिरोजाबाद सुहागनगरी में कहीं पर बगैर छतरी के आंबेडकर की प्रतिमा है तो कहीं पर पार्क की बाउंड्रीवॉल टूटी पड़ी है, लेकिन अब इनकी दशा बदलेगी। फिरोजाबाद के करीब 50 पार्कों के दिन बदलने वाले हैं। यूपी सरकार का ध्यान अब आंबेडकर पार्क की तरफ गया है तथा डॉ.बीआर आंबेडकर मूर्ति विकास योजना के तहत इन पार्कों के सौंदर्यीकरण के निर्देश दिए हैं। यूपी सरकार के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह ने सभी मंडलायुक्त को पत्र भेजा है जो जिला स्तर पर भी पहुंच गया है। पत्र में कहा है कि समाज सुधारकों एवं सांस्कृतिक विभूतियों की मूर्तियां राष्ट्री की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत है। वर्तमान में कई प्रतिमाएं स्थापित हैं, लेकिन कहीं पर छत्र नहीं है तो कहीं पर बाउंड्री। मौसम की मार के साथ अतिक्रमण भी होता है। प्रतिमाओं की गरिमा भी प्रभावित होती है। इसे देखते हुए डॉ.बीआर आंबेडकर मूर्ति विकास योजना को लागू किया है। इसके तहत इनका सौंदर्यीकरण किया जाएगा। जिले स्तर पर भी इसके तहत कार्य किया जाएगा। इसके साथ में लोगों में जनजागरूकता फैलाई जाएगी, ताकि लोगों में सामाजिक न्याय के ध्वज वाहक डॉ.आंबेडकर एवं महान विभूतियों के प्रति सम्मान की भावना विकसित हो सके। कहीं मूर्ति हुई जीर्ण-शीर्ण तो लगाएंगे नई मूर्ति योजना के तहत निर्देश दिए हैं कि अगर कहीं पर पुरानी लगी हुई मूर्ति जीर्ण शीर्ण हो गईहै तो उसके स्थान पर नई मूर्ति भी लगाई जा सकती है। हर विधानसभा में दस-दस पार्क, मिलेंगे एक करोड़ योजना के तहत हर विधानसभा में दस-दस आंबेडकर पार्क का चयन किया जाएगा। एक पार्क के सौंदर्यीकरण पर करीब दस लाख रुपये खर्च आने का अनुमान है। हालांकि जिले को अभी तक बजट करीब एक करोड़ रुपये की ही स्वीकृति हुई है। बीते दिनों विभागीय बैठक में मंत्री ने इस संबंध में निर्देश दिए। इस स्थिति में जिला प्रशासन अपने स्तर से परीक्षण करेगा कि किस पार्क में कितनी धनराशि खर्च हो। स्थल निरीक्षण के बाद होगा चयन इसके लिए पहले आवेदन मांगे जाएंगे। इसके बाद में अधिकारी पार्क में पहुंच कर स्थिति का जायजा लेंगे। स्थलीय निरीक्षण के बाद आने वाले आवेदनों में विकास संबंधी आगणन डीएम द्वारा चिन्हित कार्यदायी संस्थाओं द्वारा किया जाएगा। जिसकी मांग शासन को भेजी जाएगी। यह होंगे कार्य ● टिकाऊ एवं मौसम प्रतिरोधी छत्र का निर्माण। ● अनाधिकृत प्रवेश रोकने के लिए पांच फीट ऊंची बॉउंड्रीवाल, रेलिंग या फेसिंग। ● हरित क्षेत्र का निर्माण। ● मूर्ति के प्लेटफॉर्म का निर्माण। ● बेंच एवं पाथ वे की व्यवस्था। ● रात्रि में प्रकाश की व्यवस्था। ● मूर्ति के नाम एवं इतिहास को संक्षिप्त रूप से प्रदर्शिता करता हुआ बोर्ड। लेखक के बारे में

शोरूम में पुलिसवाले की हरकत: महिलाओं के अंडरगारमेंट्स को छूने का मामला सामने आया

लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले से एक वायरल वीडियो ने पुलिस विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया है. सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे इस वीडियो में पढ़ुआ थाने में तैनात एक हेड कांस्टेबल शॉपिंग मॉल के अंदर महिलाओं के अंडरगारमेंट्स सेक्शन में आपत्तिजनक हरकत करते नजर आ रहा है. वीडियो सामने आते ही लोगों में नाराजगी फैल गई और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे।  बताया जा रहा है कि वीडियो में दिख रहा पुलिसकर्मी हेड कांस्टेबल प्रमोद कुमार वर्मा है, जो मॉल में टंगे महिलाओं के अंडरगार्मेंट्स को छूते हुए मुस्कुराता नजर आ रहा है. शुरुआती तौर पर पुलिस विभाग ने सफाई दी कि संबंधित कर्मचारी अपने परिवार के साथ खरीदारी के लिए मॉल गया था, लेकिन जैसे-जैसे वीडियो वायरल हुआ, मामला गंभीर होता चला गया।  जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया. पुलिस को पता चला कि 27 अप्रैल 2026 को होमगार्ड भर्ती परीक्षा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात पढ़ुआ थाने के पांच पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी छोड़कर मॉल में घूमने चले गए थे. इसे कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता माना गया।  इस मामले में जिले की पुलिस अधीक्षक ख्याति गर्ग ने कड़ा रुख अपनाते हुए पांचों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया. निलंबित किए गए कर्मियों में हेड कांस्टेबल प्रमोद कुमार वर्मा, हेड कांस्टेबल राशीद चौधरी, कांस्टेबल विक्रांत चौधरी, कांस्टेबल रचित राजपूत और कांस्टेबल लोकेश पांडे शामिल हैं. पुलिस मीडिया सेल द्वारा इस कार्रवाई की जानकारी आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से साझा की गई।  हालांकि, इस पूरे मामले पर पुलिस अधिकारियों ने मीडिया के सामने कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है. सिर्फ निलंबन की सूचना जारी कर विभाग ने अपनी कार्रवाई का संकेत दिया है. इस घटना ने एक बार फिर पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी और आचरण को लेकर बहस छेड़ दी है। 

चिलुआताल में हंगामा, अपहरण केस के बाद फिर प्रेमी से मिलने पर अड़ी किशोरी

गोरखपुर गोरखपुर के चिलुआताल थाना क्षेत्र के एक गांव में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब एक किशोरी प्रेमी के घर जाने की जिद में हाईटेंशन पोल पर चढ़ गई। घटना की सूचना फैलते ही मौके पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई। पुलिसवालों ने किसी तरह से समझा-बुझाकर ढाई घंटे बाद उसे नीचे उतारवाया। इससे पहले किशोरी की मां ने युवक पर अपहरण का केस दर्ज कराया था, जिसमें पुलिस ने बेटी को बरामद कर आरोपी युवक को जेल भेज दिया था। अब किशोरी फिर उसी के साथ जाना चाहती है। जानकारी के अनुसार, गुरुवार को किशोरी चिलुआताल इलाके में स्थित हाईटेंशन बिजली पोल पर चढ़ गई। देखते ही देखते आसपास के ग्रामीणों की भीड़ लग गई। पुलिस ने किशोरी को समझाने का प्रयास शुरू किया, लेकिन वह जिद पर अड़ी रही। इससे पहले इलाके के एक गांव की रहने वाली महिला ने 26 मार्च 2026 को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि बालापार निवासी शिवम उर्फ गणेश उसकी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए किशोरी को बरामद कर परिजनों को सौंप दिया था, जबकि आरोपी को जेल भेज दिया गया था। गुरुवार को किशोरी दोबारा प्रेमी के पास जाने की जिद पर अड़ गई और हाईटेंशन पोल पर चढ़ गई। पुलिस ने काफी देर तक उसे फोन के माध्यम से समझाया, लेकिन वह नहीं मानी। करीब ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने उसे आश्वासन दिया, जिसके बाद वह नीचे उतरने को तैयार हुई। पुलिस किशोरी को थाने ले गई, जहां समझाने-बुझाने के बाद उसे उसकी मां के सुपुर्द कर दिया गया। दुष्कर्म के आरोपी प्रेमी को जेल, 24 घंटे में चार्जशीट पीपीगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में 15 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी प्रेमी विपिन विश्वकर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को पुलिस ने गुरुवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेजा गया। उधर, पुलिस ने पीड़िता का कोर्ट में बयान दर्ज कराने के साथ ही मेडिकल परीक्षण भी करा दिया है। इस प्रकरण में 24 घंटे में ही पुलिस ने चार्जशीट भी लगा दी। घटना 28 अप्रैल की है। किशोरी के परिजन एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। घर पर केवल महिलाएं थीं, जो विवाह समारोह में व्यस्त थीं। इसी दौरान कैंपियरगंज थाना क्षेत्र के ग्राम गजरहिया निवासी विपिन विश्वकर्मा ने किशोरी को बहला फुसलाकर गांव में स्थित अपने मामा के घर ले जाकर कमरे में बंद कर दुष्कर्म किया। किशोरी इसके बाद घर चली गई और बुधवार को इसकी भनक भाई को लग गई। वह किशोरी को लेकर थाने पहुंच गया और सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया। लेकिन बाद में किशोरी की मां थाने पहुंच गई और प्रेमी विपिन विश्वकर्मा पर आरोप लगाते हुए तहरीर दी। पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी को हिरासत में ले लिया था। एसओ अरुण कुमार सिंह के मुताबिक, आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भिजवा दिया गया। किशोरी का मेडिकल परीक्षण व मजिस्ट्रेट बयान दर्ज कराकर चार्जशीट लगा दिया गया। एसपी नार्थ, ज्ञानेंद्र ने कहा कि पुलिस महिला अपराध के प्रति संवेदनशील है। किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी को जेल भिजवाने के साथ ही 24 घंटे में चार्जशीट लगा दी गई। पुलिस सजा दिलाने के लिए कोर्ट में भी मजबूत पैरवी करेगी।

रामनगरी में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा, वाल्मीकि आश्रम सहित प्रमुख स्थलों का विकास

अयोध्या  रामनगरी अयोध्या और आसपास के जिलों में धार्मिक पर्यटन को एक नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। रामायणकालीन विरासत को संरक्षित करते हुए सरकार अब ऐसे व्यापक धार्मिक पर्यटन सर्किट पर काम कर रही है, जिसमें 41 पौराणिक तीर्थ स्थलों को एक साथ जोड़ा जाएगा। इस योजना का उद्देश्य न केवल श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को अधिक सुविधाजनक और अनुभवात्मक बनाना है, बल्कि लंबे समय से उपेक्षित प्राचीन स्थलों को पुनर्जीवित कर उन्हें पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाना भी है। यह सर्किट अयोध्या के साथ गोंडा, बस्ती और अंबेडकरनगर के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को आपस में जोड़ते हुए एक संगठित आध्यात्मिक मार्ग तैयार करेगा। रामायणकालीन विरासत को मिलेगा नया स्वरूप 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर स्थित इन 41 पौराणिक स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की दिशा में काम शुरू हो गया है। सरकार की मंशा है कि श्रद्धालु केवल राम मंदिर तक सीमित न रहकर पूरे रामायणकालीन भूगोल का अनुभव करें और उन स्थलों से भी जुड़ें जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित विकास से वंचित रहे हैं। 41 तीर्थ स्थलों का होगा व्यापक विकास और सौंदर्यीकरण परियोजना के तहत इन सभी स्थलों पर आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। कुंडों और पवित्र स्थलों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा, साथ ही श्रद्धालुओं के लिए शेड, पेयजल व्यवस्था, चेंजिंग रूम, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और सड़क संपर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसका उद्देश्य तीर्थ यात्रा को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और सुव्यवस्थित बनाना है। रामायण से जुड़े प्रमुख स्थलों को किया गया शामिल इस धार्मिक पर्यटन सर्किट में वाल्मीकि आश्रम, अंगी ऋषि आश्रम, विभीषण कुंड, सुग्रीव कुंड, राम कुंड, सीता कुंड, भरत कुंड, नंदीग्राम, तमसा नदी, श्रवण क्षेत्र और पाराशर आश्रम जैसे प्रमुख स्थल शामिल किए गए हैं। ये सभी स्थान रामायण काल की कथाओं और परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं और इनका ऐतिहासिक महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार यह परियोजना केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, छोटे व्यापारों को प्रोत्साहन मिलेगा और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। होटल, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। श्रद्धालुओं के लिए समग्र आध्यात्मिक अनुभव की तैयारी सरकार का लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं को एक ही यात्रा में संपूर्ण रामायणकालीन विरासत का अनुभव मिल सके। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान मिलेगी।  

मध्यम और निम्न आय वर्ग को राहत, 8 लाख रुपये से शुरू होंगे फ्लैट

लखनऊ  राजधानी लखनऊ में किफायती आवास की बढ़ती मांग को देखते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण ने मध्यम और अल्प आय वर्ग के लिए बड़ी योजना तैयार की है। इसके तहत शहर के पांच प्रमुख स्थानों पर एलआईजी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 3000 से अधिक फ्लैट बनाए जाएंगे। अधिकारियों ने इन सभी स्थानों का निरीक्षण कर जमीन को अंतिम रूप दे दिया है। अब परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इन मकानों की शुरुआती कीमत 8 लाख रुपये होगी। 30 लाख रुपये की कीमत तक के फ्लैट बनाए जाएंगे। इससे मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। आवासीय संकट से मिलेगी राहत: शहर में लगातार बढ़ती आबादी और महंगे रियल एस्टेट के कारण मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में एलडीए की यह आवासीय योजना लोगों की पहुंच में होगी। खास बात यह है कि परियोजना को ऐसी लोकेशन पर विकसित किया जा रहा है जहां बुनियादी सुविधाएं पहले से मौजूद हैं या आसानी से विकसित की जा सकती हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण की इस योजना का उद्देश्य ऐसे लोगों को राहत देना है जो सीमित आय के चलते महंगे फ्लैट खरीदने में सक्षम नहीं हैं। इन पांच स्थानों पर बनेंगे आवास 1-अनंत नगर योजना, मोहन रोड में मध्यम वर्ग के लिए आवासीय फ्लैट बनाए जाएंगे। स्थल चयन पूरा हो चुका है और निर्माण के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। 2-सीतापुर रोड शिया डिग्री कॉलेज के सामने खाली पड़ी जमीन पर भी मध्यम वर्ग के लिए फ्लैट बनाने की मंजूरी मिली। 3-वसंत कुंज योजना, सेक्टर-एच यहां भी मध्यम आय वर्ग के लिए बहुमंजिला फ्लैट बनेंगे। 4-शारदा नगर विस्तार में एलआईजी और ईडब्ल्यूएस दोनों श्रेणियों के लिए मकान बनाए जाएंगे, जिससे कमजोर वर्ग के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। 5-ऐशबाग में मदरसे के पीछे की जमीन पर भी मध्यम वर्ग के लिए एलआईजी फ्लैट बनेंगे। एलडीए इसे पहली ही मंजूरी दे चुका है। तीन योजनाओं में उपकेंद्र शहर के विस्तार के साथ एलडीए ने बिजली ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण अपनी तीन प्रमुख योजनाओं आईटी सिटी, वरुण विहार और नैमिष नगर में बड़े बिजली उपकेंद्र (सब स्टेशन) बनाने जा रहा है। इनमें सबसे बड़ा उपकेंद्र आईटी सिटी में स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए 53 एकड़ जमीन चिन्हित की जा चुकी है। ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ने जमीन को दी मंजूरी: एलडीए के प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड की मंडलीय भूमि चयन समिति ने 3 अप्रैल 2026 को आईटी सिटी क्षेत्र का निरीक्षण किया। जांच के बाद जमीन को उपयुक्त माना। अब एलडीए जल्द ही यह भूमि कॉरपोरेशन को हस्तांतरित करेगा, ताकि निर्माण शुरू हो सके। नैमिष नगर व वरुण विहार भी योजना में: नैमिष नगर में भी 9 अप्रैल 2026 को स्थलीय निरीक्षण किया गया, जहां चयन समिति ने जमीन को उपयुक्त पाया। यहां भी जल्द जमीन ट्रांसफर की जाएगी। तीसरा उपकेंद्र आगरा रोड स्थित वरुण विहार योजना में प्रस्तावित है, जो बिजली आपूर्ति को मजबूत करेगा। बिजली व्यवस्था में आएगा बड़ा सुधार एलडीए के अनुसार, इन मेगा उपकेंद्रों के बनने से क्षेत्र में बिजली की उपलब्धता व गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा। बढ़ती आबादी और औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इन्हें अगले 50 वर्ष के लोड को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जिससे शहर और ग्रामीण क्षेत्र दोनों को समान रूप से लाभ मिल सके। पहली बार इन योजना के प्रभावित गांवों को भी फायदा इस बार की योजना में खास बदलाव है। पहले एलडीए की कॉलोनियों में 24 घंटे बिजली मिलती थी, जबकि आसपास के गांवों को अलग लाइन से सीमित सप्लाई मिलती थी। पर अब बनने वाले उपकेंद्रों से न सिर्फ प्राधिकरण की कॉलोनियों बल्कि उन गांवों को भी सीधे बिजली मिलेगी, जिनकी जमीन अधिग्रहित कर योजनाएं विकसित की जा रही हैं। उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार प्रस्तावित स्थलों का निरीक्षण किया गया है। कुछ जगहों पर जमीन को अंतिम रूप दे दिया गया है। अब डीपीआर तैयार होने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जल्द ही निर्माण शुरू होगा। एलडीए हजारों परिवारों का सस्ते व अपने घर का सपना साकार करेगा।

अब 18 से 40 वर्ष तक के युवाओं को मिलेगा लाभ, 10 लाख रुपये तक लोन की तैयारी

लखनऊ  यूपी की योगी सरकार जल्द ही युवाओं को बड़ी सौगात देने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी अभियान योजना की सफलता को देखते हुए जल्द इसका विस्तार होगा। युवा उद्यमियों के लिए अच्छी खबर यह है कि आवेदन पात्रता की आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट दिए जाने की तैयारी है। इसका प्रस्ताव तैयार हो गया है। अब तक 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के 1.68 लाख युवा योजना के तहत पांच लाख रुपये तक बिना बैंक गारंटी के ब्याज मुक्त लोन हासिल कर चुके हैं। अब न्यूनतम आयु सीमा को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष किया जाएगा जबकि अधिकतम आयु सीमा 40 ही रहेगी। इसके साथ ही पांच लाख को डबल कर 10 लाख करने की भी तैयारी है। सीमा युवा उद्यमी योजना के तहत युवा सर्विस व मैनुफैक्चरिंग सेक्टर से लेकर इनोवेटिव बिजनेस में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। योजना के तहत पांच लाख रुपये तक लिए गए लोन को चार वर्ष में चुकाने के बाद दूसरे चरण में साढ़े सात लाख रुपये तक ब्याज मुक्त लोन प्रदान किए जाने की व्यवस्था है। ताकि भविष्य में पहले चरण को पूरा करने के उपरांत युवा उद्यमी अपने कारोबार को और आगे बढ़ाने के लिए बड़ी राशि हासिल कर सकें। इसके चलते राशि को दोगुना किए जाने का भी प्रस्ताव है यानी पांच लाख के स्थान पर युवा 10 लाख रुपये तक और साढ़े सात लाख रुपये के स्थान पर 15 लाख रुपये तक लोन हासिल कर सकेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर युवा उद्यमी योजना की शुरुआत 24 जनवरी 2024 को यूपी दिवस के अवसर पर हुई थी। शुरुआत में इस योजना के तहत डेढ़ लाख युवाओं को विभिन्न बैंकों के माध्यम से बिना गारंटी के ब्याज मुक्त लोन उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। आंकड़ों की नजर में योजना कुल आवेदन – 530487 – परियोजना लागत – 24964.7 करोड़ रुपये बैंक से स्वीकृत आवेदन – 180756 – परियोजना लागत – 6142.97 करोड़ रुपये बैंक द्वारा वितरित – 168516 – परियोजना लागत – 5913.15 करोड़ रुपये महिलाओं की 28 प्रतिशत भागीदारी योजना के तहत अब तक कुल लोन हासिल करने वालों में 28 प्रतिशत महिलाएं और 72 प्रतिशत पुरुष हैं। ओबीसी युवाओं की भागीदारी 50 फीसदी लोन हासिल करने वालों में सर्वाधिक 49.9 लाभार्थी ओबीसी वर्ग के हैं। इनके अलावा 34.3 प्रतिशत सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति के 15.5 और अनुसूचित जनजाति के 0.3 प्रतिशत युवाओं ने लोन लिया है। किस क्षेत्र में कितना लोन सर्विस सेक्टर – 62 प्रतिशत मैनुफैक्चरिंग सेक्टर 38 प्रतिशत

लखनऊ: गंगा एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/घंटा स्पीड लिमिट, टोल दरें तय

लखनऊ गंगा एक्सप्रेसवे पर फिलहाल वाहन बिना टोल का भुगतान किए ही दौड़ेंगे। टोल की दरें तय जरूर कर दी गई हैं पर उसकी वसूली शुरू होने में अभी लगभग दो सप्ताह का वक्त लगेगा। सूत्रों के अनुसार, लगभग 15 दिन बाद टोल की वसूली शुरू हो सकेगी। इससे पूर्व गंगा एक्सप्रेसवे के लिए निर्धारित टोल दरों के प्रस्ताव को कैबिनेट से स्वीकृत कराया जाएगा। इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों के लिए अधिकतम रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अभी गंगा एक्सप्रेसवे पर दो पहिया, तीन पहिया और पंजीकृत ट्रैक्टर के लिए टोल दर 1.28 रुपये प्रति किलोमीटर तय की गई है। ऐसे ही कार, जीप, वैन व हल्के वाहन के लिए 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर, हल्के वाणिज्यिक वाहन, हल्के माल वाहन के लिए 4.05 रुपये प्रति किलोमीटर, मिनी बस, बस व ट्रक के लिए 8.20 रुपये प्रति किलोमीटर, भारी निर्माण मशीनरी, मिट्टी हटाने वाले वाहन के लिए 12.60 रुपये प्रति किलोमीटर तथा उपकरण व बहुएक्सल वाहन, अत्यधिक बड़े वाहन (सात व अधिक एक्सेल वाले) के लिए 16.10 रुपये प्रति किलोमीटर टोल दर तय की गई है। हर मौसम के अनुकूल है डामर की परत लखनऊ।गंगा एक्सप्रेसवे पर 594 किलोमीटर लंबे सफर को आरामदेह व सुरक्षित बनाने के लिए उच्च तकनीक का उपयोग किया गया है। इस एक्सप्रेसवे पर मौसूम अनुकूल डामर परत (डीबीएम) को 100 मिलीमीटर तक की मोटाई दी गई है। यह तकनीक सड़क को भीषण गर्मी और अत्यधिक बारिश के प्रभाव से सुरक्षित रखती है। इसके लिए 3.67.022 मीट्रिक टन डामर का इस्तेमाल किया गया। यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार एक्सप्रेसवे को मजबूती देने के लिए मिट्टी की मजबूती का पैमाना अपनाया गया है। कैलिफोर्निया बेयरिंग रेशियो (सीबीआर) का प्रयोग किया गया है, जिसकी वैल्यू आठ पर रखी गई है, जो एक अत्यंत स्थिर और ठोस आधार का प्रमाण है। एक्सप्रेसवे पर 19 करोड़ घन मीटर मिट्टी, 2,78,380 मिट्रिक टन स्टील, 14.83.313 मीट्रिक टन सीमेंट व 41.88 लाख घनमीटर रेत का भी प्रयोग किया गया है। संरचनात्मक मजबूती के हर पहलू को ध्यान में रखकर कार्य को पूरा कराया गया है। 154.58 लाख घनमीटर मिट्टी सड़क की निचली और ऊपरी परतों को ठोस स्वरूप देने के लिए प्रयोग की गई है। एक्सप्रेसवे के मुख्य कैरिजवे की कुल मोटाई 485 मिलीमीटर से 500 मिलीमीटर तक रखी गई है। यह आधा मीटर मोटी बहु-स्तरीय संरचना सुनिश्चित करती है कि सड़क भारी यातायात का दबाव आसानी से झेल सके। इस एक्सप्रेसवे की क्षमता 79 से 108 मिलियन स्टैंडर्ड एक्सल (एमएसए) तक मापी गई है। अधिकारियों का दावा है कि एक्सप्रेसवे करोड़ों भारी मालवाहक वाहनों के भार को बिना किसी संरचनात्मक क्षति के सहन करने की क्षमता रखता है। 254 लाख मैन-डेज का श्रम और लाखों टन उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री एक्सप्रेसवे को सुरक्षा की दृष्टि से भरोसेमंद बनाती हैं। डिजाइन क्रस्ट तकनीक से रखरखाव की लागत में भी कमी आएगी। यात्रा को आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अत्याधुनिक स्विस सेंसर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

UP में गंगा एक्सप्रेसवे से आगे, 10 और सुपर हाईवे का निर्माण, जुड़ेंगे विंध्य, चित्रकूट और नोएडा

लखनऊ  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया. हरदोई में हुए इस लोकार्पण कार्यक्रम के बाद प्रदेश में संचालित एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की कुल लंबाई 1910 किलोमीटर हो गई है. यह एक्सप्रेसवे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है, जिससे दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं और प्रयागराज के बीच पहुंच काफी आसान हो गई है।  पीएम मोदी ने इस एक्सप्रेस वे के उद्घाटन के दौरान कहा कि आधुनिक प्रगति के इस दौर में उनके समीप से गुजरता यह एक्सप्रेस-वे यूपी के विकास की नई लाइफलाइन बनेगा. अब कुछ ही घंटों में आप प्रयागराज के संगम पहुंच सकते हैं और काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करके वापस आ सकते हैं. इसी के साथ उन्होंने उत्तर प्रदेश में आगे की आने वाली एक्सप्रेस वे परियोजनाओं की भी जानकारी दे दी।  पीएम मोदी ने भविष्य के रोडमैप का जिक्र करते हुए कहा, देश के सबसे बड़े एक्सप्रेस-वे में शुमार, यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे 5 साल के भीतर बनकर तैयार हो गया है. उन्होंने कहा- एक ओर गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण पूरा हुआ है, तो इसके विस्तार पर भी काम चल रहा है. यह मेरठ से आगे बढ़कर हरिद्वार तक पहुंचेगा. इसके और बेहतर उपयोग के लिए फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेस-वे का निर्माण करके इसे अन्य एक्सप्रेस-वे से भी जोड़ा जाएगा।  पीएम मोदी ने असल में बताया कि गंगा एक्सप्रेस वे के लोकार्पण के बाद केंद्र और प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश में 10 और एक्सप्रेस वे व लिंक एक्सप्रेस वे पर काम कर रही है.  इसमें कई छोटी दूरी के लिंक एक्सप्रेसवे भी हैं जो बड़े और प्रमुख एक्सप्रेस वे सीधे जुड़ेंगे और सुदूर गांवों तक को एक्सप्रेस वे से कनेक्ट करेंगे।  इन एक्सप्रेस वे के जरिए विंन्ध्याचल (मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी) को पूर्वांचल से, फर्रुखाबाद को पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से, जेवर को गंगा एक्सप्रेस वे से, लखनऊ और कानपुर को आपस में कनेक्ट करते हुए और चित्रकूट को भी गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है. इसके लिए 50 किमी तक के छोटे लिंक एक्सप्रेस वे बनाए जाने पर काम हो रहा है।  ये 10 एक्सप्रेस वे हैं, जिन पर काम जारी विंध्य एक्सप्रेसवे – 320 किमी मेरठ-हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे – 136 किमी झांसी लिंक एक्सप्रेसवे – 118 किमी विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे – 100 किमी फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे – 91 किमी जेवर-गंगा लिंक एक्सप्रेसवे – 74 किमी लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे – 64 किमी लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे – 50 किमी नोएडा-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे – 50 किमी चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे – 15.17 किमी बता दें कि उत्तर प्रदेश में अभी सात एक्सप्रेस वे ऐसे हैं जो ऑपरेशल हैं. ये एक्सप्रेस वे प्रदेश में एक छोर से दूसरे छोर तक अलग-अलग दूरियों में कनेक्टिविटी के लिहाज से सुविधाजनक बने हैं।  यमुना एक्सप्रेसवे – 165 किमी (ग्रेटर नोएडा से आगरा) आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे – 302 किमी (आगरा से लखनऊ) पूर्वांचल एक्सप्रेसवे – 341 किमी (लखनऊ से गाजीपुर) गंगा एक्सप्रेसवे – 594 किमी (मेरठ से प्रयागराज) बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे – 296 किमी (चित्रकूट से इटावा) दिल्ली-Meerut एक्सप्रेसवे – 82 किमी (दिल्ली से मेरठ) गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे – 91 किमी (गोरखपुर से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे) बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा एक्सप्रेसवे से कई उभरते हुए क्षेत्रों में आवासीय और वाणिज्यिक रियल एस्टेट की मांग में भारी उछाल आने की उम्मीद है. इस हाई-स्पीड कॉरिडोर के चालू होने से न केवल यात्रा के समय में भारी कमी आएगी, बल्कि यह माल और यात्रियों की आवाजाही को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाएगा. सरकार को उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय विकास को जबरदस्त बढ़ावा देगा. इसके अलावा, यह एक्सप्रेसवे किसानों के लिए अपनी उपज को बड़ी मंडियों तक तेजी से पहुंचाने में सहायक होगा। 

योगी सरकार का बड़ा फैसला, आयुष कॉलेजों में नई चिकित्सा पद्धतियों को मिलेगा स्थान

 लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब पारंपरिक और प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने जा रहा है। आयुष प्रणालियों को नई ऊंचाई देने के लिए योगी सरकार ने प्रदेश के आयुष कॉलेजों में 2500 वर्ष पुरानी तिब्बती चिकित्सा प्रणाली ‘सोवा रिग्पा’ (अमची चिकित्सा) और दक्षिण भारत की प्रसिद्ध 'सिद्ध' पद्धति की पढ़ाई शुरू करने की ऐतिहासिक तैयारी की है। इस कदम का उद्देश्य न केवल सदियों पुरानी चिकित्सा विधाओं को पुनर्जीवित करना है, बल्कि जटिल और दीर्घकालिक बीमारियों के लिए मरीजों को किफायती और प्रभावी वैकल्पिक उपचार प्रदान करना भी है। योगी सरकार की हरी झंडी: डिग्री के साथ मिलेगा रजिस्ट्रेशन का अधिकार प्रमुख सचिव आयुष, रंजन कुमार के अनुसार, योगी सरकार ने इन दोनों पद्धतियों के डिग्री कोर्स शुरू करने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी है। अब चयनित आयुष कॉलेजों में जरूरी बुनियादी ढांचे और पाठ्यक्रम का विकास किया जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन कोर्सों को पूरा करने वाले चिकित्सकों का विधिवत पंजीकरण (Registration) किया जाएगा। इससे डिग्री धारक डॉक्टर अधिकृत रूप से अपने क्लीनिक और उपचार केंद्र खोल सकेंगे, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। वाराणसी बनेगा रिसर्च और ट्रेनिंग का ग्लोबल हब सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य केंद्र भगवान शिव की नगरी वाराणसी होगी। वाराणसी को सोवा रिग्पा के प्रमुख शोध, प्रशिक्षण और उपचार केंद्र (Hub) के रूप में विकसित किया जाएगा। चूंकि काशी पहले से ही आयुर्वेद और आध्यात्मिक चिकित्सा की जननी रही है, इसलिए यहाँ सोवा रिग्पा और सिद्ध पद्धति का एकीकरण जटिल रोगों पर वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देगा। यह केंद्र विशेष रूप से उन बीमारियों के उपचार पर केंद्रित होगा जहां आधुनिक चिकित्सा के साथ पूरक उपचार (Complementary Therapy) की आवश्यकता होती है। असाध्य रोगों का रामबाण इलाज: क्या है सोवा रिग्पा और सिद्ध पद्धति? तिब्बत से निकली 'सोवा रिग्पा' पद्धति हिमालयी क्षेत्रों में अपनी प्रभावशीलता के लिए प्रसिद्ध है, जो शरीर, मन और पर्यावरण के संतुलन पर काम करती है। यह गठिया, पाचन विकार, मानसिक तनाव और कैंसर जैसे रोगों के उपचार में सहायक मानी जाती है। वहीं, दक्षिण भारत की 'सिद्ध' पद्धति वात, पित्त और कफ के दोषों को संतुलित कर जीवनशैली और प्राकृतिक औषधियों के जरिए स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती है। योगी सरकार का लक्ष्य आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी के साथ इन पद्धतियों को मुख्यधारा में लाकर उत्तर प्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं का 'वन स्टॉप डेस्टिनेशन' बनाना है।