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लखनऊ मंडल में रिकॉर्ड 1.72 करोड़ लाभार्थी: जन-जन तक सरकारी गारंटी पहुंचाने में अव्वल

प्रदेश में 3.67 करोड़ से अधिक परिवारों की दहलीज तक निरंतर पहुंच रहा राशन, बिना किसी भेदभाव पहुंचा योजनाओं का लाभ तकनीक और ईमानदारी से खुला हक का ताला: ई-पॉस और बायोमेट्रिक से बिचौलियों का खेल पूरी तरह समाप्त लखनऊ उत्तर प्रदेश में अंत्योदय और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार निरंतर और समर्पित भाव से कार्य कर रही है। भुखमरी और कुपोषण को समाप्त कर हर नागरिक के लिए गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने के संकल्प का ही नतीजा है कि प्रदेश का सार्वजनिक वितरण तंत्र आज देश के सबसे विश्वसनीय मॉडल के रूप में स्थापित हो चुका है। खाद्य एवं रसद विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, प्रदेशभर में कुल 3,67,52,818 कार्डधारक परिवारों के 14,71,04,181  लाभार्थियों तक नियमित और पारदर्शी रूप से खाद्यान्न पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के संवेदनशील विजन के चलते बिना किसी जाति, वर्ग या क्षेत्रीय भेदभाव के राशन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, जिससे करोड़ों वंचित परिवारों को सुरक्षा और आत्मसम्मान दोनों प्राप्त हुए हैं। लखनऊ मंडल में रिकॉर्ड 1.72 करोड़ लाभार्थी: जन-जन तक सरकारी गारंटी पहुंचाने में अव्वल प्रदेश के सभी 18 प्रशासनिक मंडलों में लखनऊ मंडल खाद्यान्न सुरक्षा के कुशल क्रियान्वयन में शीर्ष स्थान पर उभरा है। मंडल के छह जनपदों में कुल 45,24,479 राशन कार्ड धारक परिवारों के 1,72,13,915 सदस्यों को पोषण सुरक्षा का सीधा और नियमित लाभ मिल रहा है।  सीतापुर: 9,25,642 राशन कार्डधारक 34,66,349 लाभार्थी  लखीमपुर खीरी: 8,67,320 राशन कार्डधारक 31,20,657 लाभार्थी  हरदोई: 8,00,618 राशन कार्डधारक 31,06,086 लाभार्थी  लखनऊ: 7,56,120 राशन कार्डधारक 30,23,717 लाभार्थी  उन्नाव: 6,14,246 राशन कार्डधारक 23,11,523 लाभार्थी  रायबरेली: 5,60,533 राशन कार्डधारक 21,85,583 लाभार्थी सीतापुर, लखीमपुर खीरी और हरदोई जैसे विशाल ग्रामीण क्षेत्रों में 31 से 34 लाख से अधिक नागरिकों का यह शत-प्रतिशत कवरेज प्रमाणित करता है कि योगी सरकार की प्रशासनिक मशीनरी दूरदराज के गांवों तक निरंतर सक्रियता से काम कर रही है। तकनीक और ईमानदारी से खुला हक का ताला: ई-पॉस और बायोमेट्रिक से बिचौलियों का खेल पूरी तरह समाप्त पूर्ववर्ती सरकारों में राशन वितरण के दौरान घटतौली, अपात्रों के कार्ड और कालाबाजारी की जो समस्याएं दशकों से बनी हुई थीं, योगी सरकार ने 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत उन्हें पूरी तरह जड़ से समाप्त कर दिया है। प्रदेश की प्रत्येक उचित दर दुकान पर ई-पॉस मशीनों की स्थापना और बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य बनाकर वितरण को पूर्णतः पारदर्शी कर दिया गया है। तकनीक के इस सटीक समन्वय से फर्जीवाड़े पर विराम लगा है और यह सुनिश्चित हुआ है कि गोदाम से निकलने वाले अनाज का एक-एक दाना केवल और केवल असली जरूरतमंद की थाली तक ही पहुंचे। एक देश, एक राशन कार्ड से मिली नई मजबूती: कामगारों का पलायन भी नहीं रोक पाएगा निवाला रोजी-रोटी और रोजगार के सिलसिले में अपने गृह जनपद या राज्य से बाहर जाने वाले गरीब कामगारों व प्रवासी श्रमिकों के लिए यह व्यवस्था वरदान साबित हुई है। योगी सरकार ने केंद्र की राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा नीति के साथ कदमताल करते हुए राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी को इतने सरल और सुगम तरीके से लागू किया है कि कोई भी लाभार्थी राज्य के किसी भी जिले या देश के किसी भी कोने से अपने हिस्से का राशन प्राप्त कर सकता है। इस पहल ने श्रमिकों को घर-परिवार से दूर रहने पर भी खाद्य सुरक्षा का अटूट भरोसा दिया है। अंत्योदय से आत्मनिर्भरता की डगर: कमजोर तबकों को मजबूत सहारा, राशन बना बराबरी का आधार योजना के अंतर्गत अंत्योदय परिवारों को प्रति कार्ड 35 किलोग्राम और पात्र गृहस्थी परिवारों को प्रति यूनिट 5 किलोग्राम अनाज का नियमित आवंटन सामाजिक विषमता की खाई को पाटने का सशक्त माध्यम बना है। अनाज की चिंता से मुक्त होकर गरीब परिवार अब अपनी बचत को बच्चों की बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के नए साधनों में लगा रहे हैं। निरंतर नीतिगत सुधारों, जमीनी निगरानी और जनहितैषी प्राथमिकताओं के बल पर योगी सरकार का यह कल्याणकारी मॉडल आज प्रदेश के 14 करोड़ से अधिक नागरिकों के विश्वास और सम्मान का सबसे मजबूत आधार बन चुका है।

सपाई गिरगिट की तरह बदलते हैं रंग, सत्ता में वापसी की उम्मीद खत्म इसलिए कर रहे मनमाने वादे : मुख्यमंत्री योगी

परिवार और धनकुबेरों तक सिमटी सपा की राजनीति : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   गोरखपुर में भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी के समर्थन में शिक्षक सम्मेलन को मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित   राज्यसभा चुनाव में एक प्रत्याशी परिवार से, दूसरा मुंबई का धनाढ्य व्यक्ति, पीडीए का मतलब परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी   सपाई गिरगिट की तरह बदलते हैं रंग, सत्ता में वापसी की उम्मीद खत्म इसलिए कर रहे मनमाने वादे : मुख्यमंत्री योगी   शांति और सुरक्षा का सपा का भरोसा मगरमच्छ के नदी पार कराने के वादे जैसा, ये नाव पार नहीं लगाते, डुबाते हैं   रामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाले अब कालनेमि की तरह जप रहे राम नाम, अयोध्या में फैला रहे दुष्प्रचार   शिक्षकों को पांच लाख की कैशलेस चिकित्सा सुविधा, बिना वेतन कटौती 1.20 करोड़ तक दुर्घटना बीमा कवर   सपा राज में सैफई सिंडिकेट तय करता था नियुक्तियां, भाजपा सरकार ने सभी 75 जिलों के युवाओं को दिया अवसर गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के पीडीए पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सपा की राजनीति में परिवार और धनकुबेरों के अलावा किसी और के लिए जगह नहीं है। राज्यसभा चुनाव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सपा ने एक प्रत्याशी अपने परिवार से और दूसरा मुंबई के धनाढ्य व्यक्ति को बनाया। पीडीए को उन्होंने परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी और भाजपा कार्यकर्ताओं ने पराया धन अपना बताया था। मुख्यमंत्री योगी ने तंज कसा कि गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले सपाई सत्ता में वापसी की उम्मीद खो चुके हैं, इसलिए अब मनमाने वादे कर रहे हैं।   सोमवार को गोरखपुर में गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी के समर्थन में आयोजित शिक्षक सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि शिक्षकों की आवाज उठाने के कारण पिछली बार भाजपा ने उनके लिए सीट खाली छोड़ी थी। इस बार माध्यमिक शिक्षक संघ की सहमति से उन्हें अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया है। उन्होंने 23 अक्टूबर को मतदान के लिए शिक्षक मतदाताओं को अवकाश देने की बात कही और जनप्रतिनिधियों से प्रत्येक शिक्षक मतदाता तक पहुंचने का आह्वान किया।   सपा का भरोसा मगरमच्छ के वादे जैसा मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सपा का शांति और सुरक्षा का भरोसा देना वैसा ही है, जैसे मगरमच्छ नदी किनारे आकर शिकार छोड़ने और लोगों को नदी पार कराने का वादा करे। ये नाव पार लगाने वाले नहीं, डुबाने वाले लोग हैं। उन्होंने अखिलेश यादव की अयोध्या यात्रा पर निशाना साधते हुए कहा कि रामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाले अब कालनेमि की तरह राम नाम जप रहे हैं। राम मंदिर का विरोध करने वाले अयोध्या में दुष्प्रचार कर रहे हैं।   सपा और शिक्षा नदी के दो किनारे मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी और शिक्षा नदी के दो किनारे हैं, जो कभी मिल नहीं सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों में नकल और अराजकता को संरक्षण मिला। दंगाइयों को मुख्यमंत्री आवास बुलाकर सम्मानित किया जाता था। शिक्षकों और बेटियों की सुरक्षा संकट में थी। अब किसी शिक्षक को परेशान करने वाले को जेल या जहन्नुम में से एक रास्ता चुनना पड़ेगा।   नई पेंशन योजना लागू की, खाते तक नहीं खोले मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2005 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने नई पेंशन योजना लागू की, लेकिन कर्मचारियों के खाते खोलकर अंशदान जमा नहीं कराया। वर्ष 2018 में कमेटी गठित कराई गई और 2019 की शुरुआत में 10 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध कराकर 14 लाख कर्मचारियों के खाते खुलवाए गए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और शिक्षकों के हित में बेहतर कदम उठाने से सरकार पीछे नहीं हटेगी।   कैशलेस इलाज और दुर्घटना बीमा का लाभ मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि शिक्षामित्रों, अनुदेशकों से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के शिक्षकों और उनके परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये की कैशलेस चिकित्सा सुविधा दी गई है। राजकीय, सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित संस्थानों के साथ रसोइयों तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी जोड़ा गया है। बिना वेतन कटौती विभिन्न श्रेणियों में 40 लाख से 1.20 करोड़ रुपये तक दुर्घटना बीमा कवर की व्यवस्था की गई है।   सभी 75 जिलों से शिक्षकों का निष्पक्ष चयन मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि सपा सरकार में आयोगों पर सैफई सिंडिकेट का कब्जा था। नियुक्तियों में रिश्तेदारों को प्राथमिकता और पैसे लेकर चयन किया जाता था। वर्ष 2017 में डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों के पद खाली थे। भाजपा सरकार ने सभी 75 जिलों से निष्पक्ष चयन किया। शिक्षामित्रों का मानदेय तीन हजार से बढ़ाकर 18 हजार और अनुदेशकों का नौ हजार से 17 हजार रुपये किया गया। ऑपरेशन कायाकल्प और प्रोजेक्ट अलंकार के तहत 2300 माध्यमिक विद्यालयों को धनराशि दी गई। स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब और डिजिटल लाइब्रेरी विकसित की जा रही हैं।   दंगों से पहचान का संकट, अब विकास से सम्मान मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले दंगों, उपद्रव और अराजकता के कारण उत्तर प्रदेश के लोगों के सामने पहचान का संकट था। निवेश और रोजगार के अवसर भी प्रभावित थे। अब प्रदेश बीमारू नहीं, राजस्व अधिशेष वाला राज्य है। विकास, विरासत, निवेश और रोजगार से उत्तर प्रदेश की नई पहचान बनी है।   गुरु परंपरा को नमन, पूर्व शिक्षक नेताओं को किया याद मुख्यमंत्री योगी ने महर्षि वशिष्ठ, संदीपनी और चाणक्य का उदाहरण देकर शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। उन्होंने दिवंगत शिक्षक नेताओं ओम प्रकाश शर्मा, पंचानन राय और डॉ. वाईडी सिंह को श्रद्धांजलि दी। कहा कि ध्रुव त्रिपाठी उनकी परंपरा आगे बढ़ा रहे हैं।   ध्रुव त्रिपाठी बोले- वर्षों पुरानी मांगें पूरी हुईं भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षकों की कैशलेस चिकित्सा की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई है। एक अप्रैल 2005 से पहले विज्ञापित पदों से संबंधित शिक्षकों को पुरानी पेंशन का लाभ मिला। पदोन्नति जिला विद्यालय निरीक्षक स्तर पर सुगम हुई है। ग्रेच्युटी सीमा 20 से 25 लाख रुपये हुई। वित्तविहीन शिक्षकों की सेवा नियमावली अंतिम चरण में है।   सूर्य प्रताप शाही बोले- शिक्षा का कायाकल्प हुआ कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि ध्रुव त्रिपाठी विधान परिषद में शिक्षकों के कठिन सवाल उठाते हैं। योगी सरकार ने प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों का कायाकल्प किया है। प्रोजेक्ट अलंकार से भवन, शौचालय और पुस्तकालय की सुविधाएं बढ़ीं। शिक्षकों को बिना आंदोलन … Read more

चुनाव जीतने पर अपना पुरुषार्थ और हारने पर ईवीएम व चुनाव आयोग को दोषी ठहराना कांग्रेस की आदत-मुख्यमंत्री योगी

अराजकता से बाज आए कांग्रेस, वरना जो बचा है वह भी गंवा देगी : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के राजनीतिक आचरण पर उठाए सवाल, बोले- देश में अराजकता का पर्याय बन चुकी है सबसे पुरानी पार्टी   अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा कर रही कांग्रेस   मुख्यमंत्री योगी बोले- 41 वर्ष पहले यूपी की जनता ने कांग्रेस को कर दिया था विदा, दूसरे राज्यों में भी जनता का हो चुका मोहभंग   चुनाव जीतने पर अपना पुरुषार्थ और हारने पर ईवीएम व चुनाव आयोग को दोषी ठहराना कांग्रेस की आदत   कांग्रेस नेतृत्व को नसीहत, जनता और युवाओं को गुमराह करने के बजाय अपनी विफलताओं पर करे आत्ममंथन   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए उसे देश में अराजकता का पर्याय बताया है। उन्होंने चेताया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए देश में अराजकता फैलाने से बाज नहीं आई तो जनता उसका बचा-खुचा राजनीतिक अस्तित्व भी समाप्त कर देगी। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी अपनी गलतियों से सबक लेने के बजाय लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर रही है। जनता का विश्वास खो चुकी कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि देश उसे बार-बार क्यों ठुकरा रहा है। भारत की जनता लोकतांत्रिक दृष्टि से जागरूक है। वह अराजक और अलोकतांत्रिक आचरण को अधिक समय तक बर्दाश्त नहीं करेगी।   सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस ने गैर-जिम्मेदार राजनीतिक आचरण से देश में अराजकता का वातावरण पैदा किया है। पहले देश के भीतर पहचान का संकट खड़ा किया और फिर अपने भ्रष्ट मंसूबों के कारण जनता का विश्वास खो दिया। इसके बावजूद कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का रवैया नहीं बदला। जनता से लगातार मिल रही अस्वीकृति के कारणों पर विचार करने के बजाय कांग्रेस चुनी हुई सरकारों के खिलाफ अस्थिरता पैदा करने में जुटी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को अपनी राजनीतिक विफलताओं के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय स्वयं के आचरण पर विचार करना चाहिए।   41 वर्ष पहले यूपी की जनता ने कांग्रेस को कर दिया था विदा मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के सिमटते जनाधार का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने 41 वर्ष पहले ही कांग्रेस को सत्ता से विदा कर दिया था। वर्ष 1985 के बाद कांग्रेस प्रदेश में दोबारा सत्ता में नहीं लौट सकी। देश के अन्य राज्यों में भी एक-एक कर जनता का कांग्रेस से मोहभंग होता गया। इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व यह समझने को तैयार नहीं है कि जनता उसे लगातार क्यों नकार रही है। अपनी विफलताओं को स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ अस्थिरता का माहौल पैदा करने पर उतारू है।   दिल्ली में अराजकता फैलाकर आम लोगों को परेशान कर रही कांग्रेस मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पिछले कई दिनों से देश की राजधानी दिल्ली में कांग्रेस लगातार अव्यवस्था पैदा कर रही है। आम नागरिकों को परेशान किया जा रहा है। संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का कुत्सित प्रयास हो रहा है। कांग्रेस का यह आचरण बताता है कि वह राजनीतिक विरोध और अराजकता के बीच का अंतर भी भूल चुकी है। लोकतंत्र में असहमति और विरोध का स्थान है, लेकिन उसके नाम पर जनता को परेशान करना और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।   जीत गए तो पुरुषार्थ, हार गए तो ईवीएम और चुनाव आयोग दोषी मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीत जाएं तो अपना पुरुषार्थ बताते हैं और हार जाएं तो ईवीएम तथा चुनाव आयोग को दोषी ठहराने लगते हैं। न्यायालय मेरिट के आधार पर फैसला दे तो न्यायपालिका को भी कटघरे में खड़ा करने और धमकाने का प्रयास किया जाता है। अन्य संवैधानिक संस्थाओं के प्रति भी कांग्रेस का यही रवैया है। गाली-गलौज करना, संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना और अव्यवस्था फैलाना उसकी राजनीतिक प्रवृत्ति बन गई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं के प्रति इस प्रकार का आचरण उचित नहीं है।   कांग्रेस को बदलना चाहिए अपना नेतृत्व मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस के लोगों को अपने नेतृत्व की अकर्मण्यता और भ्रष्ट आचरण पर विचार करना चाहिए। जिस नेतृत्व पर जनता का विश्वास नहीं रह गया है, उसे बदलने की आवश्यकता है। अपनी राजनीतिक असफलताओं का ठीकरा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर फोड़ने से कांग्रेस का खोया जनाधार वापस नहीं आएगा। उन्होंने कांग्रेस को देश में अराजकता फैलाने और जनता तथा युवाओं को गुमराह करने से बाज आने की नसीहत दी।   अराजकता जारी रही तो बचा-खुचा भी गंवाना पड़ेगा मुख्यमंत्री योगी ने चेताया कि कांग्रेस को देश की जनता की लोकतांत्रिक चेतना को कम करके नहीं आंकना चाहिए। जनता अराजकता और असंवैधानिक कृत्यों को अधिक दिनों तक सहन नहीं करेगी। कांग्रेस ने अपना रवैया नहीं बदला और इसी प्रकार अलोकतांत्रिक तरीकों से अस्थिरता पैदा करती रही तो राजनीतिक रूप से जो कुछ बचा है, वह भी गंवाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अराजकता छोड़कर मुद्दों और मेरिट के आधार पर चर्चा करनी चाहिए। स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बनना ही उसके लिए उचित होगा। यही देश के लोकतंत्र और जनता के हित में भी है।

कांग्रेस पर बरसे सीएम योगी, ईवीएम से लेकर चुनाव आयोग तक पर सवाल उठाने को लेकर साधा निशाना

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए उसे देश में अराजकता का पर्याय बताया है। उन्होंने चेताया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए देश में अराजकता फैलाने से बाज नहीं आई तो जनता उसका बचा-खुचा राजनीतिक अस्तित्व भी समाप्त कर देगी। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी अपनी गलतियों से सबक लेने के बजाय लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर रही है। जनता का विश्वास खो चुकी कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि देश उसे बार-बार क्यों ठुकरा रहा है। भारत की जनता लोकतांत्रिक दृष्टि से जागरूक है। वह अराजक और अलोकतांत्रिक आचरण को अधिक समय तक बर्दाश्त नहीं करेगी। सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस ने गैर-जिम्मेदार राजनीतिक आचरण से देश में अराजकता का वातावरण पैदा किया है। पहले देश के भीतर पहचान का संकट खड़ा किया और फिर अपने भ्रष्ट मंसूबों के कारण जनता का विश्वास खो दिया। इसके बावजूद कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का रवैया नहीं बदला। जनता से लगातार मिल रही अस्वीकृति के कारणों पर विचार करने के बजाय कांग्रेस चुनी हुई सरकारों के खिलाफ अस्थिरता पैदा करने में जुटी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को अपनी राजनीतिक विफलताओं के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय स्वयं के आचरण पर विचार करना चाहिए। 41 वर्ष पहले यूपी की जनता ने कांग्रेस को कर दिया था विदा मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के सिमटते जनाधार का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने 41 वर्ष पहले ही कांग्रेस को सत्ता से विदा कर दिया था। वर्ष 1985 के बाद कांग्रेस प्रदेश में दोबारा सत्ता में नहीं लौट सकी। देश के अन्य राज्यों में भी एक-एक कर जनता का कांग्रेस से मोहभंग होता गया। इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व यह समझने को तैयार नहीं है कि जनता उसे लगातार क्यों नकार रही है। अपनी विफलताओं को स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ अस्थिरता का माहौल पैदा करने पर उतारू है। दिल्ली में अराजकता फैलाकर आम लोगों को परेशान कर रही कांग्रेस मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पिछले कई दिनों से देश की राजधानी दिल्ली में कांग्रेस लगातार अव्यवस्था पैदा कर रही है। आम नागरिकों को परेशान किया जा रहा है। संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का कुत्सित प्रयास हो रहा है। कांग्रेस का यह आचरण बताता है कि वह राजनीतिक विरोध और अराजकता के बीच का अंतर भी भूल चुकी है। लोकतंत्र में असहमति और विरोध का स्थान है, लेकिन उसके नाम पर जनता को परेशान करना और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं हो सकता। जीत गए तो पुरुषार्थ, हार गए तो ईवीएम और चुनाव आयोग दोषी मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीत जाएं तो अपना पुरुषार्थ बताते हैं और हार जाएं तो ईवीएम तथा चुनाव आयोग को दोषी ठहराने लगते हैं। न्यायालय मेरिट के आधार पर फैसला दे तो न्यायपालिका को भी कटघरे में खड़ा करने और धमकाने का प्रयास किया जाता है। अन्य संवैधानिक संस्थाओं के प्रति भी कांग्रेस का यही रवैया है। गाली-गलौज करना, संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना और अव्यवस्था फैलाना उसकी राजनीतिक प्रवृत्ति बन गई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं के प्रति इस प्रकार का आचरण उचित नहीं है। कांग्रेस को बदलना चाहिए अपना नेतृत्व मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस के लोगों को अपने नेतृत्व की अकर्मण्यता और भ्रष्ट आचरण पर विचार करना चाहिए। जिस नेतृत्व पर जनता का विश्वास नहीं रह गया है, उसे बदलने की आवश्यकता है। अपनी राजनीतिक असफलताओं का ठीकरा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर फोड़ने से कांग्रेस का खोया जनाधार वापस नहीं आएगा। उन्होंने कांग्रेस को देश में अराजकता फैलाने और जनता तथा युवाओं को गुमराह करने से बाज आने की नसीहत दी। अराजकता जारी रही तो बचा-खुचा भी गंवाना पड़ेगा मुख्यमंत्री योगी ने चेताया कि कांग्रेस को देश की जनता की लोकतांत्रिक चेतना को कम करके नहीं आंकना चाहिए। जनता अराजकता और असंवैधानिक कृत्यों को अधिक दिनों तक सहन नहीं करेगी। कांग्रेस ने अपना रवैया नहीं बदला और इसी प्रकार अलोकतांत्रिक तरीकों से अस्थिरता पैदा करती रही तो राजनीतिक रूप से जो कुछ बचा है, वह भी गंवाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अराजकता छोड़कर मुद्दों और मेरिट के आधार पर चर्चा करनी चाहिए। स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बनना ही उसके लिए उचित होगा। यही देश के लोकतंत्र और जनता के हित में भी है।

UP Tourism: महर्षि भृगु की तपोभूमि को संवार रही योगी सरकार, श्रद्धालुओं के लिए विकसित होंगी नई सुविधाएं

योगी सरकार संवार रही महर्षि भृगु की तपोभूमि, धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया विस्तार  महर्षि भृगु आश्रम को पर्यटन सुविधाओं से सुसज्जित कर भव्य स्वरूप देने की तैयारी, खर्च होंगे 8.74 करोड़ रुपये  आध्यात्मिक और पौराणिक विरासत को मिल रहा सम्मान, धरातल पर शुरू हुआ पर्यटन विकास कार्य  …जहां रची गई भृगु संहिता, अब वहां लिखी जाएगी पर्यटन विकास की नई कहानी भृगु आश्रम का विकास पौराणिक विरासत को सम्मान- जयवीर सिंह लखनऊ/बलिया  योगी सरकार ने बलिया जनपद की आध्यात्मिक और पौराणिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। आस्था के प्रमुख केंद्र महर्षि भृगु आश्रम को अब पर्यटन सुविधाओं से सुसज्जित कर भव्य स्वरूप देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास योजना के तहत इस परियोजना पर 8.74 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मान्यता है कि बलिया स्थित इसी तपोस्थली पर सप्तऋषियों में प्रमुख स्थान रखने वाले महर्षि भृगु ने तपस्या की थी और यहीं भृगु संहिता की रचना की।  मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में भृगु आश्रम  उल्लेखनीय है कि महर्षि भृगु आश्रम का कायाकल्प मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। मुख्यमंत्री ने बलिया में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर महर्षि भृगु कॉरिडोर विकसित करने की बात कही है। ऐसे में पर्यटन विकास की दिशा में शुरू हुई यह पहल उस संकल्प को धरातल पर उतारने की ओर बढ़ता कदम मानी जा रही है। प्रदेश सरकार की योजना है कि आस्था और अध्यात्म केंद्रों के साथ पौराणिक एवं ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाए। इससे न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, अपितु देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी महर्षि भृगु की तपोभूमि और बलिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का किया जा रहा विकास  आश्रम विकास के तहत परिसर को आधुनिक सुविधाओं और आकर्षक सांस्कृतिक स्वरूप से संवारा जाएगा। यहां भव्य स्वागत द्वार, दो मंजिला मल्टीपर्पज हॉल, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यात्री शेड, आकर्षक वाल आर्ट और म्यूरल आर्ट, आधुनिक साइनेज तथा महर्षि भृगु की गौरवशाली पौराणिक विरासत को जीवंत करने वाला लाइट एंड साउंड शो विकसित किया जाएगा। पर्यटकों की मूलभूत सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। आगंतुकों को महर्षि भृगु से जुड़े इतिहास और पौराणिक महत्व से परिचित कराने के लिए आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। गौरवशाली इतिहास वाला बलिया जिला अब पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा  प्राचीन विरासत और गौरवशाली इतिहास वाला बलिया जिला अब पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। बिहार सीमा से सटे इस जनपद का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी खास है। वाराणसी से करीब 130 किलोमीटर दूर स्थित बलिया पर्यटन की दृष्टि से भी खास पहचान रखता है। मान्यता है कि रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि ने भी यहां प्रवास किया था। आजादी की लड़ाई में भी बलिया क्रांतिकारियों की धरती के रूप में जाना गया। प्रदेश सरकार के पर्यटन विकास के प्रयासों से जिले की पहचान तेजी से बदल रही है। वर्ष 2025 में 10.31 लाख से अधिक पर्यटकों का पहुंचना इसकी बढ़ती पर्यटन संभावनाओं का प्रमाण है। धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को नई दिशा दे रही सरकार पर्यटन/संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को नई दिशा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में हजारों वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र रहे महर्षि भृगु की तपोभूमि को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है। महर्षि भृगु आश्रम केवल धार्मिक आस्था का स्थल नहीं, बल्कि प्रदेश की समृद्ध प्राचीन सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। प्राचीन आश्रम के समग्र पर्यटन विकास की दिशा में धरातल पर कार्य शुरू हो चुका है।' महर्षि भृगु की विरासत से जुड़ेंगे आगंतुक- अमृत अभिजात  अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने कहा कि प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास योजना सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व के स्थलों के विकास को प्राथमिकता दे रही है। बलिया स्थित महर्षि भृगु आश्रम का विकास श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनेगा। प्रदेश के 12 पर्यटन सर्किट अंतर्गत स्थलों के साथ महर्षि भृगु आश्रम को विकसित करने से इसकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता को व्यापक पहचान मिलेगी तथा क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

सुरक्षा से सशक्तीकरण की यात्रा ‘सशक्त नारी, समृद्ध-उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को कर रही साकार: मुख्यमंत्री

कभी नारी सुरक्षा के सवालों से घिरा यूपी अब बना सामर्थ्य की नई पहचान: सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'एक्स' पर किया पोस्ट- मां ब्रह्मचारिणी के तप और संकल्प से सिद्धि का मंत्र सिखाता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी किए जा सकते हैं सिद्ध सुरक्षा से सशक्तीकरण की यात्रा ‘सशक्त नारी, समृद्ध-उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को कर रही साकार: मुख्यमंत्री 20 प्रतिशत आरक्षण के साथ उत्तर प्रदेश महिला पुलिस कार्यबल 10,000 से बढ़कर 44,000 से अधिक हुआ: सीएम योगी लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शारदीय नवरात्रि की द्वितीया पर मां ब्रह्मचारिणी के स्वरूप की पूजा की। उन्होंने प्रदेशवासियों से इसके महत्व पर चर्चा की। कहा कि मां ब्रह्मचारिणी के तप और संकल्प से सिद्धि का मंत्र हमें सिखाता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी सिद्ध किए जा सकते हैं। सीएम ने 2017 से पहले और बाद के यूपी की दिखाई तस्वीर मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर 2017 से पहले और इसके बाद के उत्तर प्रदेश की तुलना की। कहा कि वर्ष 2017 से पहले महिला सुरक्षा को लेकर सवालों से घिरा रहने वाला उत्तर प्रदेश आज नारी सुरक्षा और सामर्थ्य की नई पहचान बना है। विगत 9.5 वर्षों में अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति, तकनीक आधारित निगरानी, पुलिस की त्वरित कार्रवाई और जन-जागरूकता अभियानों ने प्रदेश में महिलाओं के लिए भयमुक्त वातावरण के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई है। महिला सुरक्षा तंत्र को किया सुदृढ़ सीएम योगी ने कहा कि मिशन शक्ति के पांच चरणों, सेफ सिटी परियोजना, मिशन शक्ति केंद्रों और महिला बीट पुलिसिंग जैसी पहलों ने महिला सुरक्षा तंत्र को व्यापक और सुदृढ़ आधार प्रदान किया है। यूपी पुलिस में 44,000 से अधिक हुआ महिला कार्यबल मुख्यमंत्री ने पुलिस कार्यबल में महिलाओं के योगदान का भी जिक्र किया। कहा कि 20 प्रतिशत आरक्षण के साथ उत्तर प्रदेश महिला पुलिस कार्यबल 10,000 से बढ़कर 44,000 से अधिक हुआ है। इसके साथ ही लखनऊ में वीरांगना ऊदा देवी पासी, गोरखपुर में वीरांगना झलकारी बाई कोरी और बदायूं में वीरांगना अवंतीबाई लोधी के नाम पर 3 महिला पीएसी बटालियनों का भी गठन हुआ है। ‘सशक्त नारी-समृद्ध उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को साकार कर रही सरकार मुख्यमंत्री ने नागरिकों को आश्वस्त किया कि प्रदेश की डबल इंजन सरकार की नारी सुरक्षा से सशक्तीकरण की यह अहर्निश यात्रा ‘सशक्त नारी-समृद्ध उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को साकार कर रही है।

UP ITI Admission 2026: योगी सरकार ने शुरू की पांचवें चरण की प्रवेश प्रक्रिया, युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर

राजकीय आईटीआई में पंचम चरण की प्रवेश प्रक्रिया शुरू युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जोड़कर रोजगार के नए अवसर सृजित कर रही योगी सरकार 13 से 15 अक्टूबर तक नोडल संस्थानों में जमा होंगे रैंक कार्ड, 16 अक्टूबर तक पूरी होगी चयन प्रक्रिया लखनऊ,  प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाने की दिशा में योगी सरकार निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में सत्र 2026-27 के लिए रिक्त सीटों पर प्रवेश का पंचम चरण शुरू कर दिया गया है। चतुर्थ चरण के बाद रिक्त रह गई सीटों के लिए पूर्व पंजीकृत गैर-चयनित अभ्यर्थियों के साथ-साथ नवीन ऑनलाइन आवेदकों को भी प्रवेश का अवसर दिया जाएगा। व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के विशेष सचिव एवं राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी) के अधिशासी निदेशक अभिषेक सिंह ने पंचम चरण की प्रवेश प्रक्रिया को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि रिक्त सीटों के सापेक्ष अभ्यर्थियों की शैक्षिक अर्हता के आधार पर तैयार मेरिट सूची संबंधित राजकीय आईटीआई को उपलब्ध करा दी गई है। प्रवेश प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा में पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। 13 से 15 अक्टूबर तक जमा करना होगा रैंक कार्ड प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थी एससीवीटी की आधिकारिक वेबसाइट www.scvtup.in पर जाकर ‘पंचम चरण के लिए रैंक’ लिंक पर क्लिक कर अपना रैंक कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए पूर्व पंजीकृत अथवा नवीन आवेदनकर्ता के विकल्प का चयन कर पंजीकरण संख्या एवं जन्मतिथि दर्ज करनी होगी। रैंक कार्ड प्राप्त करने के बाद उसका प्रिंट निकालकर उस पर हस्ताक्षर करना होगा। हस्ताक्षरित रैंक कार्ड 13 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2026 के बीच संबंधित जनपद के किसी भी राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में, विशेष रूप से नोडल राजकीय आईटीआई में, अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। पूर्व पंजीकृत अभ्यर्थियों को मिलेगा प्राथमिक अवसर पंचम चरण में सीट आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। सबसे पहले चतुर्थ चरण तक पंजीकृत लेकिन चयन से वंचित रहे अभ्यर्थियों को उपलब्ध रिक्त सीटों पर प्रवेश का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद शेष रिक्त सीटों पर नवीन ऑनलाइन आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की मेरिट के आधार पर ट्रेड एवं व्यवसाय का आवंटन किया जाएगा। जनपद स्तर पर गठित चयन समिति द्वारा पूरी प्रक्रिया संपन्न कर 16 अक्टूबर 2026 तक चयनित अभ्यर्थियों की अनुमोदित सूची तैयार की जाएगी। चयन सूची को संबंधित संस्थान के सूचना पट्ट पर भी प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया की जानकारी समय से मिल सके। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही मिलेगा प्रवेश संस्थानों के प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया है कि अभ्यर्थियों को प्रवेश देने से पूर्व उनके मूल अभिलेखों का गहनता से सत्यापन सुनिश्चित करें। शैक्षिक योग्यता, जाति प्रमाण पत्र एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद ही प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के साथ ही पात्र अभ्यर्थियों को उनका उचित अवसर सुनिश्चित किया जा सकेगा। 17 अक्टूबर तक पोर्टल पर अपलोड होगा प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों का डाटा राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेने वाले सभी अभ्यर्थियों का विवरण एससीवीटी पोर्टल पर अपलोड एवं सत्यापित करने की प्रक्रिया भी निर्धारित समयसीमा में पूरी की जाएगी। संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि 17 अक्टूबर 2026 की रात्रि 12 बजे तक सभी प्रवेशित अभ्यर्थियों का डाटा पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड एवं सत्यापित कर दिया जाए। कौशल से रोजगार और रोजगार से आत्मनिर्भरता योगी सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के युवाओं को ‘कौशल से रोजगार और रोजगार से आत्मनिर्भरता’ की दिशा में आगे बढ़ाना है। राजकीय आईटीआई के माध्यम से युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे बदलते रोजगार बाजार में अपनी दक्षता के अनुरूप बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें। रिक्त सीटों पर प्रवेश के इस अतिरिक्त चरण से अधिक से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जुड़ने का अवसर मिलेगा और प्रदेश की युवा शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के सरकार के प्रयासों को और गति मिलेगी।

UP Mandi News: मंडियों के प्रबंधन में होगा बदलाव, आयकर, पंचायती राज और रक्षा सेवाओं के अनुभवी अधिकारियों की तैनाती

राजस्व, पंचायती राज, आयकर और रक्षा सेवाओं के अनुभवी अब संभालेंगे यूपी की मंडियों की कमान मंडियों में नई पारी, किसानों के हितों की रक्षा की होगी जिम्मेदारी लखनऊ के आईआईसीएमआरटी में नवनियुक्त मंडी सचिवों का 45 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शुरू अखिल भारतीय अध्ययन भ्रमण में जानेंगे विभिन्न राज्यों की मंडियों की कार्यप्रणाली हर दूसरे नए मंडी सचिव के पास पूर्व सेवा का अनुभव, 126 चयनितों में 84 विज्ञान स्नातक लखनऊ प्रदेश की कृषि मंडियों में आधुनिक, पारदर्शी और किसान केंद्रित प्रबंधन व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से सोमवार को नवनियुक्त मंडी सचिवों का 45 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की ओर से लखनऊ स्थित आईआईसीएमआरटी में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। प्रशिक्षण के दौरान सचिवों को अखिल भारतीय अध्ययन भ्रमण पर भी भेजा जाएगा, जहां वे देश की प्रमुख मंडियों और आधुनिक कृषि विपणन केंद्रों की कार्यप्रणाली का अध्ययन करेंगे। प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए प्रमुख सचिव कृषि डॉ. एम.के.एस. सुंदरम ने कहा कि प्रदेश सरकार कृषि विपणन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और किसान हितैषी बनाने के लिए निरंतर सुधार कर रही है। इन सुधारों का लाभ किसानों तक पहुंचाने में मंडी सचिवों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने नवचयनित सचिवों से पारदर्शिता, जवाबदेही और किसान हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य करने का आह्वान किया। मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि परिषद को विविध शैक्षणिक योग्यता और पूर्व सेवा अनुभव वाला नया कैडर मिला है। प्रशिक्षण का उद्देश्य इनकी दक्षता को मंडी प्रबंधन की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों की मंडियों का अध्ययन भ्रमण सचिवों को कृषि विपणन की विविध कार्यप्रणालियों से परिचित कराएगा, जिसका लाभ प्रदेश की मंडियों और किसानों को मिलेगा। भारत सरकार के विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय (डीएमआई) के विशेषज्ञों के सहयोग से आयोजित 45 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में मंडी अधिनियम, वित्तीय प्रबंधन, ई-नाम और अन्य डिजिटल व्यवस्थाओं की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण के अंतर्गत नवचयनित सचिव देश के विभिन्न राज्यों की प्रमुख मंडियों एवं आधुनिक कृषि विपणन केंद्रों का अध्ययन भ्रमण भी करेंगे। इस दौरान वे कृषि उपज की आवक, नीलामी एवं मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया, किसानों और व्यापारियों को उपलब्ध सुविधाओं, उपज की ग्रेडिंग, भंडारण, परिवहन तथा डिजिटल विपणन व्यवस्थाओं का अवलोकन करेंगे। प्रशिक्षण में केस स्टडी और व्यावहारिक कार्ययोजनाओं को भी शामिल किया गया है। राजस्व से रक्षा सेवाओं तक का अनुभव लेकर आए नए मंडी सचिव कार्यभार ग्रहण कर चुके 116 नवचयनित मंडी सचिवों में 59 यानी लगभग 51 प्रतिशत को पूर्व सेवा का अनुभव है। उपलब्ध विभागवार विवरण के अनुसार सर्वाधिक 23 सचिव राजस्व विभाग में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा वित्त, लेखा, कर एवं सहकारिता क्षेत्र से सात, पंचायती राज और जिला न्यायालय से छह-छह, रक्षा सेवाओं से पांच, रेलवे और पुलिस से तीन-तीन तथा बैंकिंग और वन विभाग से दो-दो सचिव शामिल हैं। शेष दो नवचयनित मंडी सचिव अन्य विभागों से संबंधित हैं। विभिन्न विभागों में कार्य कर चुके इन युवाओं के प्रशासनिक और व्यावहारिक अनुभव का लाभ मंडियों के संचालन एवं प्रबंधन में मिलेगा। 126 चयनित मंडी सचिवों में 84 विज्ञान स्नातक, 42 अन्य विषयों से स्नातक नवचयनित मंडी सचिवों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी विविधता लिए हुए है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार कुल 126 चयनित अभ्यर्थियों में 84 विज्ञान स्नातक हैं, जबकि शेष 42 ने अन्य विषयों से स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। इनमें परास्नातक, बीएड, डीएलएड तथा अन्य अतिरिक्त शैक्षणिक योग्यताएं रखने वाले अभ्यर्थी भी शामिल हैं। रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस में पीजी डिप्लोमा तथा सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा जैसी तकनीकी योग्यता वाले युवा भी इस नए कैडर का हिस्सा हैं। कुल 126 चयनित अभ्यर्थियों में से अब तक 116 ने मंडी सचिव के पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया है। योगी सरकार के सुधारों से भर्ती में पारदर्शिता, योग्यता को मिला सम्मान पहले मंडी परिषद एवं मंडी समितियों में भर्ती परिषद की सेवा विनियमावली के तहत परिषद स्तर से की जाती थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने भर्ती व्यवस्था में सुधार करते हुए स्वतंत्र चयन आयोगों के माध्यम से निष्पक्ष, पारदर्शी और योग्यता आधारित चयन की प्रक्रिया अपनाई। उच्च श्रेणी के मंडी सचिवों की भर्ती उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से होती है, जबकि वर्तमान नवनियुक्त सचिवों का चयन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की प्रतिस्पर्धी परीक्षा से हुआ है। इस बदलाव से प्रतिभाशाली युवाओं को अपनी योग्यता के बल पर आगे बढ़ने का अवसर मिला है।

UP News: लाउडस्पीकर की आवाज तय मानकों से ज्यादा मिलने पर एक्शन, मस्जिद से माइक-एम्पलीफायर जब्त

बिजनौर बिजनौर के नजीबाबाद में मस्जिद में अजान के दौरान लाउडस्पीकर की तेज आवाज सुनाई देने पर मामला गरमा गया. राजकीय इंटर कॉलेज के पास स्थित नजीबुद्दौला मस्जिद में अजान की आवाज सड़क तक पहुंच रही थी. इसी दौरान नजीबाबाद थाने पहुंचे एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने आवाज सुनी तो पुलिस को मस्जिद में जांच करने के निर्देश दिए. इसके बाद पुलिस ने मस्जिद में अजान देने वाले मोहम्मद फैजान को गिरफ्तार कर लिया. मामले में मुकदमा दर्ज कर लाउडस्पीकर, एम्पलीफायर और माइक भी कब्जे में ले लिए गए।  यह कार्रवाई  दोपहर करीब एक बजे की बताई जा रही है. पुलिस के अनुसार, मोहम्मद फैजान नजीबाबाद के मोहल्ला मकबरा का रहने वाला है और मस्जिद में अजान देता है. पुलिस का कहना है कि लाउडस्पीकर की आवाज तय मानकों से अधिक थी, जिससे आसपास से गुजरने वाले लोगों को परेशानी हो रही थी।  सड़क तक पहुंच रही थी लाउडस्पीकर की आवाज  जानकारी के मुताबिक, शनिवार को नजीबाबाद में थाना समाधान दिवस के सिलसिले में पहुंचे एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई को राजकीय इंटर कॉलेज के पास स्थित मस्जिद से अजान की तेज आवाज सुनाई दी. इसके बाद उन्होंने पुलिस को जांच के निर्देश दिए।  मौके पर पहुंचे उपनिरीक्षक सौरभ सिंह और कांस्टेबल रोहित ने मस्जिद में जांच की. पुलिस के मुताबिक, वहां लाउडस्पीकर, एम्पलीफायर और माइक मिले. पुलिस का आरोप है कि लाउडस्पीकर से निकलने वाली आवाज निर्धारित सीमा से अधिक थी. कार्रवाई के दौरान मोहम्मद फैजान मौके से फरार हो गया. इसके बाद पुलिस ने उपकरण कब्जे में लेकर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।  सिपाही पर भी गिरी गाज  इस मामले में कार्रवाई केवल मोअज्जन तक सीमित नहीं रही. धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर हटाने और उनकी आवाज तय मानकों के अनुसार रखने के संबंध में गलत रिपोर्ट देने के मामले में एसपी ने नजीबाबाद थाने में तैनात सिपाही ललित कुमार को निलंबित कर दिया।  बताया गया है कि जिले में पहले धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज तय मानकों के अनुसार रखने और नियमों के विपरीत लगे लाउडस्पीकर हटाने के लिए अभियान चलाया गया था. इसी अभियान से जुड़ी रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलने के बाद सिपाही के खिलाफ कार्रवाई की गई।  सितंबर में हटाए गए थे 2509 धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर  बिजनौर जिले में सितंबर महीने में धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकर हटाने के लिए अभियान चलाया गया था. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान 1323 मस्जिदों, 1116 मंदिरों और 70 गुरुद्वारों से लाउडस्पीकर हटाए गए थे. इसके अलावा जिन धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर लगे रहने दिए गए, वहां भी आवाज निर्धारित मानकों के अनुसार रखने की हिदायत दी गई थी।  अब नजीबाबाद में सामने आए इस मामले के बाद एसपी ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि धार्मिक स्थलों पर लगे ध्वनि विस्तारक यंत्रों की आवाज तय मानकों के अनुसार ही रखी जाए. साथ ही, इस संबंध में मिलने वाली रिपोर्ट की सही तरीके से जांच की जाए, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।  एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि निर्धारित मानकों से अधिक आवाज में लाउडस्पीकर बजाने के मामले में कार्रवाई की गई है. मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया की जा रही है. फिलहाल, मामला प्रदेश भर में चर्चा का विषय बन गया है। 

Noida School Threat: एपीजे, स्टेप बाय स्टेप और DPS GBN समेत कई स्कूलों को धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

नोएडा स्कूल में बच्चों की पढ़ाई चल रही हो और अचानक बम से उड़ाने की धमकी मिलने की खबर आ जाए, तो अभिभावकों की चिंता बढ़ना लाजिमी है. नोएडा में ऐसा ही मामला सामने आया है. करीब एक दर्जन स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है. इनमें सेक्टर-16 स्थित एपीजे स्कूल, स्टेप बाय स्टेप और डीपीएस जीबीएन समेत कई स्कूल शामिल हैं. सूचना मिलते ही पुलिस, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और फायर विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं।  कई स्कूलों को मिली धमकी शुरुआती जानकारी के मुताबिक, नोएडा के करीब एक दर्जन स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है. इस लिस्ट में एपीजे, स्टेप बाय स्टेप और डीपीएस जीबीएन जैसे स्कूलों के नाम शामिल हैं. एक साथ कई स्कूलों को निशाना बनाकर धमकी दिए जाने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि सभी स्कूलों को धमकी किस माध्यम से मिली और इसके पीछे किसका हाथ है. इस मामले में पुलिस जांच कर रही है।  पुलिस, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड मौके पर धमकी की सूचना मिलने के बाद पुलिस के साथ बम निरोधक दस्ते, डॉग स्क्वॉड और फायर विभाग की टीमें मौके पर मौजूद हैं.सुरक्षा एजेंसियां स्थिति का जायजा ले रही हैं और धमकी से जुड़ी जानकारी की जांच में जुटी हुई है।   धमकी के स्रोत का पता लगाने में जुटी पुलिस पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि धमकी कहां से भेजी गई और क्या यह वास्तविक खतरा है या किसी ने दहशत फैलाने के लिए ऐसा किया है. फिलहाल, किसी स्कूल में बम मिलने या धमकी के पीछे जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान होने की पुष्टि नहीं हुई है।