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सीएम योगी ने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति व्यक्त की संवेदना

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कई जिलों में बारिश और आकाशीय बिजली गिरने से हुई जनहानि के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनहानि, पशुहानि का आकलन कर पीड़ित परिवारों को 24 घंटे में मुआवजा उपलब्ध कराएं। किसी भी आवश्यकता पर शासन को तत्काल अवगत कराएं।  शनिवार को कासगंज, चंदौली, मीरजापुर, बाराबंकी जिले में वर्षा व आकाशीय बिजली गिरने से जनहानि व पशुहानि हुई। इसकी जानकारी होने पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रशासन के आलाधिकारी प्रभावित परिवारों से संवाद बनाकर उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध करवाएं। मुख्यमंत्री ने आंधी, पानी, ओलावृष्टि आदि के मद्देनजर वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड में रहकर आमजन से संवाद करने और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने को कहा।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घायलों के सम्बंध में भी जानकारी ली। आपदा पीड़ित मंडलों के आयुक्त, जनपदों के जिलाधिकारी व मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उन्होंने निर्देश दिया कि घायलों का उचित इलाज हो, उन्हें दवाएं व स्वास्थ्य सुविधाएं समय से उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री ने घायलों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।  मुख्यमंत्री ने आमजन से भी अपील की कि विपरीत मौसम में बचाव का विशेष ध्यान रखें। आंधी में होर्डिंग, ग्लोसाइन बोर्ड, बिजली के तार आदि के पास न खड़ें हों। घर के बच्चों, बुजुर्गों के साथ ही पशुओं का भी विशेष ध्यान रखें।

गो संरक्षण विशेष: अमेरिका और यूरोपीय देशों तक पहुंच रहा सीएम योगी के गो संरक्षण का प्रभाव

लखनऊ.  देश-दुनिया के लिए यूपी रोल मॉडल बनकर उभरा है। प्रदेश की देशी गायों के पंचगव्य और आयुर्वेदिक उत्पाद अब अमेरिका, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों तक पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गो संरक्षण को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की नीति उत्तर प्रदेश को देश-विदेश में नई पहचान दिला रही है। यही नहीं, गो संरक्षण में यूपी देश का पथप्रदर्शक बन चुका है। इसी का परिणाम है कि गुजरात, केरल, हरियाणा समेत 15 राज्यों के लोग यूपी से गो संरक्षण सीख रहे हैं। सात समंदर पार पहुंचे यूपी के दुग्ध उत्पाद उत्तर प्रदेश में देसी गायों के जरिए तैयार किए जा रहे करीब 200 प्रकार के उत्पाद आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं। पंचगव्य घृत, ब्राह्मी घृत, गोमूत्र अर्क, घनवटी, च्यवनप्राश, गो घृत, शतधौता घृत और आयुर्वेदिक काजल जैसे उत्पादों की मांग विदेश में लगातार बढ़ रही है। अमेरिका, कनाडा, यूएई, सिंगापुर, मलेशिया, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, जापान, सऊदी अरब और थाईलैंड समेत कई देशों में इन उत्पादों की पहुंच बनी है। प्राकृतिक जीवनशैली, आयुर्वेद और पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति के प्रति बढ़ते आकर्षण ने यूपी के गो-आधारित उत्पादों के लिए नए बाजार तैयार किए हैं। गोशाला से ग्लोबल मार्केट का सफर उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी सफलता यह है कि यहां गो संरक्षण को आर्थिक मूल्य से जोड़ा गया। अब गोबर, गोमूत्र, घी और पंचगव्य आधारित उत्पादों को व्यवस्थित उद्योग का स्वरूप दिया जा रहा है। इस बदलाव ने देसी गाय को केवल पशुधन नहीं, बल्कि ग्रामीण आय और उद्यमिता के स्रोत के रूप में स्थापित किया है। गांवों में स्वयं सहायता समूह, गोशालाएं और छोटे उद्यमी भी इस क्षेत्र से जुड़कर आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। आईटी इंजीनियर ने दिखाई नई राह गाजियाबाद के असीम रावत ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करने के बाद देसी गायों के संरक्षण और उनसे जुड़े उत्पादों के निर्माण का क्षेत्र चुना। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से शुरू हुई उनकी पहल आज 'हेता (HETHA)' के रूप में देश और विदेश के बाजारों तक पहुंच चुकी है। असीम रावत का मानना है कि यदि देसी गायों के उत्पादों को वैज्ञानिक तरीके से विकसित कर बाजार से जोड़ा जाए तो यह क्षेत्र ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभा सकता है। देशभर के लिए बना मॉडल उत्तर प्रदेश का यह मॉडल अब अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। गुजरात, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, तेलंगाना, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गोवा, ओडिशा और आंध्र प्रदेश समेत 15 से अधिक राज्यों के लोगों को यहां असीम रावत प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके माध्यम से लोगों को गो संरक्षण की बारीकियां सिखाई जाती हैं। गो संरक्षण, नस्ल सुधार और गो आधारित उत्पादों के व्यावसायिक मॉडल को समझने के लिए लगातार अन्य राज्यों के दल प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। साहीवाल, गिर, गंगातीरी और थारपारकर जैसी नस्लों के संरक्षण पर विशेष जोर : मुकेश मेश्राम पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार योगी सरकार उन्नत देसी नस्ल की गायों के पालन के लिए 50 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। साहीवाल, गिर, गंगातीरी और  थारपारकर जैसी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। योगी सरकार की विभिन्न योजनाओं ने डेयरी और गो आधारित उद्योग को नई गति दी है, जिससे किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद मिली है। आस्था के साथ अर्थव्यवस्था पर केंद्रित योजना जिस देसी गाय को कभी आर्थिक बोझ माना जाता था, वही आज सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में करोड़ों रुपये की गो इकोनॉमी की धुरी बन रही है। यही वजह है कि गो संरक्षण का यूपी मॉडल अब देश-दुनिया में चर्चा का विषय बन चुका है। गो संरक्षण को अर्थव्यवस्था से जोड़कर देखने का परिणाम है कि यूपी का मॉडल अब दूसरे राज्यों के साथ ही अन्य देशों के लिए भी मिसाल बन रहा है।

पहली बार कक्षा 6-8 के छात्र भी खेल प्रतियोगिताओं में शामिल, प्रदेशीय खेलों में बड़ा बदलाव

लखनऊ प्रदेश के विद्यालयों में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शैक्षिक सत्र 2026-27 का प्रदेशीय विद्यालयी खेलकूद कैलेंडर जारी कर दिया है। 30 जून से शुरू होकर 17 नवंबर तक चलने वाली इन प्रतियोगिताओं में 31 खेल शामिल किए गए हैं पहली बार बेसिक शिक्षा विभाग के कक्षा 6 से 8 तक के छात्र-छात्राओं को भी सभी स्तरों पर प्रतिभाग का अवसर मिलेगा, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मौका मिल सकेगा शिक्षा निदेशक माध्यमिक की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त, वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों, उच्च प्राथमिक विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) के छात्र-छात्राएं प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की छात्राओं को एक अलग यूनिट के रूप में प्रतियोगिताओं में शामिल किया जाएगा। इनके लिए जिला और मंडल स्तर पर अलग प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। अंतरमंडलीय प्रदर्शन के आधार पर प्रदेशीय टीम का चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया का निर्धारण समग्र शिक्षा के बालिका प्रकोष्ठ द्वारा किया जाएगा। हर विद्यालय के लिए दो खेलों में भागीदारी अनिवार्य प्रत्येक विद्यालय के छात्र-छात्राओं को कम से कम दो अलग-अलग खेलों में प्रतिभाग करना होगा। इनमें एक टीम गेम और एक व्यक्तिगत खेल अथवा दोनों टीम गेम हो सकते हैं। खेलों का चयन विद्यालय अपनी सुविधा के अनुसार करेंगे। स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) द्वारा सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड को अलग यूनिट की मान्यता दिए जाने के कारण इन बोर्डों से संबद्ध विद्यालयों के खिलाड़ी उत्तर प्रदेश की विद्यालयी खेल प्रतियोगिताओं में भाग नहीं ले सकेंगे। नौ नए खेल ट्रायल आधार पर जारी वुशू, मलखम्भ, गतका, कलारीपयट्टू, शतरंज, योगासन, थांगता मार्शल आर्ट और कुराश आदि को ट्रायल आधार पर इस वर्ष भी प्रतियोगिताओं में शामिल किया गया है। इसके अलावा नेटबाल, रग्बी, स्केटिंग, तलवारबाजी, साइक्लिंग, टेनिस और मॉडर्न पेंटाथलॉन में चयन ट्रायल कराकर प्रदेशीय टीमों का गठन किया जाएगा। प्रतियोगिताएं 14 वर्ष से कम (सब जूनियर), 17 वर्ष से कम (जूनियर) और 19 वर्ष से कम (सीनियर) आयु वर्ग में आयोजित की जाएंगी। प्रदर्शन के आधार पर होगा प्रदेशीय टीम चयन टीम स्पर्धाओं में खिलाड़ियों का चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। तैराकी और एथलेटिक्स जैसी व्यक्तिगत स्पर्धाओं में प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त खिलाड़ी प्रदेशीय टीम में शामिल किए जाएंगे। एथलेटिक्स की रिले टीम का चयन अलग से किया जाएगा। 25 जून तक तय करनी होगी मेजबानी शिक्षा विभाग ने सभी मंडलीय और जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अपने यहां आयोजित होने वाली प्रदेशीय प्रतियोगिताओं के स्थल और तिथि का निर्धारण कर 25 जून तक इसकी सूचना सहायक शिक्षा निदेशक खेल, लखनऊ और डॉ. भीमराव आंबेडकर राज्य विद्यालयी क्रीड़ा संस्थान, अयोध्या को उपलब्ध कराएं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि विषम परिस्थितियों को छोड़कर राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं की तिथियों में परिवर्तन नहीं किया जाएगा। प्रमुख प्रतियोगिताओं का कार्यक्रम     30 जून से तीन जुलाई : सब जूनियर व जूनियर नेहरू हाकी (झांसी)     5 से 8 अगस्त : तैराकी, डाइविंग व वाटर पोलो, अलीगढ़     17 से 20 अगस्त : तीरंदाजी (मिर्जापुर), कराटे (लखनऊ), शूटिंग (मेरठ), जिम्नास्टिक (आगरा)     21 से 25 अगस्त : हैंडबॉल (अयोध्या)     21 से 24 अगस्त : टेबल टेनिस व बैडमिंटन (कानपुर)     30 अगस्त से तीन सितंबर : फुटबॉल (वाराणसी) और कुश्ती (गोरखपुर)     नौ से 13 सितंबर : जूडो (बरेली) और बास्केटबॉल (गोरखपुर)     15 से 19 सितंबर : मलखम्भ (झांसी), हॉकी (मुरादाबाद), भारोत्तोलन (सहारनपुर), वॉलीबॉल (प्रयागराज)     19 से 21 सितंबर : कलारीपयट्टू (लखनऊ)     23 से 26 सितंबर : बॉक्सिंग (लखनऊ) और वुशू (वाराणसी)     29 सितंबर से दो अक्टूबर : कुराश (मेरठ)     एक से तीन अक्टूबर : सेपक टाकरा (बरेली)     तीन से छह अक्टूबर : गतका (अयोध्या)     नौ से 12 अक्टूबर : थांगता मार्शल आर्ट (अयोध्या) और योगासन (आजमगढ़)     15 से 18 अक्टूबर : शतरंज (आजमगढ़) और बालिका क्रिकेट (मुरादाबाद)     20 से 23 अक्टूबर : कबड्डी (आजमगढ़) और बालक क्रिकेट (कानपुर)     24 से 27 अक्टूबर : खो-खो (अयोध्या)     29 अक्टूबर से दो नवंबर : ताइक्वांडो (गोरखपुर)     13 से 17 नवंबर : एथलेटिक्स (प्रयागराज)  

लैपटॉप से लेकर निःशुल्क शिक्षा तक, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) बनी बच्चों का मजबूत सहारा

लखनऊ. कोविड महामारी में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के लिए योगी सरकार अभिभावक की भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) के तहत अनाथ और बेसहारा बच्चों को न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, बल्कि उनके बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। महिला कल्याण विभाग के द्वारा सरकार 8085 बच्चों को लैपटॉप वितरित कर उन्हें डिजिटल शिक्षा से जोड़ चुकी है। डिजिटल युग में यह पहल बच्चों के लिए ज्ञान और अवसरों के नए द्वार खोल रही है। इससे वो ऑनलाइन अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और तकनीकी दक्षता हासिल करने में सक्षम हो रहे हैं। वहीं 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 12 तक निःशुल्क प्रदान कर रही हैं। योजना के अंतर्गत प्रत्येक बच्चे को प्रतिमाह उसकी शिक्षा जारी रखने के लिए 4 हजार रुपये प्रतिमाह की सहायता भी दी जा रही है। यह पहल बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम बन रही है। निःशुल्क शिक्षा के साथ आर्थिक संबल योगी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि संसाधनों के अभाव में कोई भी बच्चा अपनी पढ़ाई अधूरी न छोड़े। योजना के अंतर्गत 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 12 तक निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही प्रत्येक पात्र बच्चे को 4 हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है। यह सहायता बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे किताबें, स्टेशनरी और अन्य जरूरी शैक्षिक संसाधन जुटाने में मदद मिलती है। सरकार का यह प्रयास सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा के समन्वित मॉडल के रूप में सामने आया है। प्रतिस्पर्धी माहौल से जुड़ रहे बच्चे लैपटॉप वितरण और आधुनिक शैक्षिक सुविधाओं के माध्यम से बच्चों को प्रतिस्पर्धी माहौल से जोड़ने की दिशा में भी प्रभावी कार्य किया जा रहा है। शिक्षा आधारित यह मॉडल बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार कर रहा है। योगी सरकार का प्रयास है कि ये बच्चे आत्मनिर्भर बनेः निदेशक योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महामारी से प्रभावित कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। निःशुल्क शिक्षा, आर्थिक सहायता और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से बच्चों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योगी सरकार का प्रयास है कि ये बच्चे आत्मनिर्भर बनें और अपने सपनों को साकार कर सकें। इसलिए प्रदेश के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के पात्र बच्चों को समय पर लाभ प्रदान करने तथा ऐसे बच्चों का नियमित फॉलोअप लेकर उनके सम्पूर्ण विकास सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सी. इंदुमती, निदेशक, महिला कल्याण विभाग

प्रधानमंत्री मोदी ने किया था देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं में शामिल जेवर एयरपोर्ट का शुभारंभ

लखनऊ/नोएडा.  उत्तर प्रदेश के विकास इतिहास में 15 जून 2026 एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से वाणिज्यिक उड़ान सेवाओं की शुरुआत होने जा रही है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े एविएशन, लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी हब के रूप में अपनी नई पहचान की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाएगा। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो 15 जून से एयरपोर्ट पर अपनी सेवाएं शुरू करेगी और इस एयरपोर्ट की पहली लॉन्च कैरियर बनेगी। उद्घाटन दिवस पर पहली उड़ान सुबह 7:05 बजे लखनऊ से रवाना होकर 8:05 बजे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचेगी। इसके बाद नोएडा से बेंगलुरु के लिए पहली नियमित वाणिज्यिक उड़ान संचालित की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने किया था उद्घाटन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना को केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित विकास मॉडल का भी प्रतीक माना जा रहा है। एयरपोर्ट के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत की कनेक्टिविटी, व्यापार और आर्थिक विकास के लिए ऐतिहासिक परियोजना बताया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि जेवर एयरपोर्ट विकसित भारत के संकल्प को गति देने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित यह परियोजना आज प्रदेश के तेजी से बदलते इंफ्रास्ट्रक्चर परिदृश्य की पहचान बन चुकी है। योगी सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल जेवर एयरपोर्ट गौतमबुद्ध नगर जिले में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में विकसित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को उत्तर प्रदेश सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल किया जाता है। एयरपोर्ट के लिए लगभग 1334 हेक्टेयर (करीब 3300 एकड़) भूमि का अधिग्रहण किया गया। परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों से आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर निर्धारित समय में निर्माण कार्य पूरा कराया। पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता एयरपोर्ट का पहला चरण पूरी तरह तैयार हो चुका है। पहले चरण में यह एयरपोर्ट प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता रखेगा। डीजीसीए द्वारा 6 मार्च 2026 को एयरपोर्ट को एयरोड्रोम लाइसेंस भी जारी किया जा चुका है। वर्तमान चरण में एक रनवे, अत्याधुनिक टर्मिनल भवन और एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर सहित सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं।  भविष्य में बनेगा दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में से एक नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है। वर्ष 2031 तक इसकी क्षमता बढ़ाकर तीन करोड़ वार्षिक यात्रियों की जाएगी। वर्ष 2036 तक यह क्षमता पांच करोड़ और वर्ष 2040 तक सात करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी। अंतिम विस्तार के बाद एयरपोर्ट पर पांच रनवे होंगे और इसकी कुल क्षमता 22.5 करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल करेगी। पश्चिमी यूपी और एनसीआर का नया एविएशन गेटवे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के तीसरे एयरपोर्ट के रूप में विकसित यह प्रोजेक्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के लाखों यात्रियों के लिए नया विकल्प बनेगा। इंडिगो चरणबद्ध तरीके से एयरपोर्ट को लखनऊ, बेंगलुरु, हैदराबाद, अमृतसर, चंडीगढ़, धर्मशाला, जयपुर, नवी मुंबई, पंतनगर और श्रीनगर सहित 16 से अधिक शहरों से जोड़ेगी। एक लाख रोजगार और निवेश का नया केंद्र राज्य सरकार के अनुसार एयरपोर्ट परियोजना से लगभग एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, हॉस्पिटैलिटी और सेवा क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। आने वाले वर्षों में जेवर क्षेत्र उत्तर भारत के सबसे बड़े औद्योगिक और सेवा क्षेत्र केंद्र के रूप में विकसित होगा।

खाद्य प्रसंस्करण में यूपी ने मारी बड़ी छलांग, महाराष्ट्र-बंगाल पीछे

लखनऊ  समृद्ध कृषि आधार और योगी आदित्यनाथ सरकार की निवेशक-अनुकूल नीतियों के दम पर उत्तर प्रदेश आज पूरे देश में 'खाद्य प्रसंस्करण महाशक्ति' (Food Processing Powerhouse) के रूप में उभर चुका है। बेहतर बुनियादी ढांचा, मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और कुशल कार्यबल की बदौलत प्रदेश में इस समय रिकॉर्ड 3,50,883 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां संचालित हो रही हैं। इस ऐतिहासिक आंकड़े के साथ ही यूपी ने इस क्षेत्र में देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है, जो राज्य की बदलती औद्योगिक तस्वीर का सबसे बड़ा प्रमाण है। 3.5 लाख इकाइयों के साथ महाराष्ट्र-बंगाल को पछाड़ा आंकड़ों पर गौर करें तो उत्तर प्रदेश ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े औद्योगिक राज्यों को मीलों पीछे छोड़ दिया है। जहां यूपी में 3,50,883 इकाइयां काम कर रही हैं, वहीं पश्चिम बंगाल (3,22,590) और महाराष्ट्र (2,29,372) काफी पीछे हैं। देश की कुल 24.59 लाख इकाइयों में अकेले उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 14 से 15 प्रतिशत है। मजबूत नीतिगत समर्थन और प्रचुर कच्चे माल की उपलब्धता ने इस सेक्टर को एक नई संजीवनी दी है। रोजगार के अवसर: 2.5 लाख से अधिक श्रमिकों को मिला काम योगी सरकार की कृषि और उद्योग हितैषी नीतियों का सीधा असर रोजगार सृजन पर भी दिख रहा है। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के इस अभूतपूर्व विस्तार से प्रदेश के 2.5 लाख से ज्यादा श्रमिकों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। चूंकि यूपी दूध, गन्ना और सब्जियों के उत्पादन में पहले से ही देश में नंबर-1 है, इसलिए इन उद्यमों को कच्चे माल की कभी कमी नहीं होती, जिससे उत्पादन और रोजगार का चक्र निर्बाध रूप से चल रहा है। कृषि प्रधान यूपी: 9 फसलों के उत्पादन में देश का 'नंबर वन' खाद्य प्रसंस्करण की इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय यूपी की उपजाऊ धरती को जाता है। आम, अमरूद, आलू, मटर, लौकी, सिंघाड़ा, तरबूज, खरबूजा और शिमला मिर्च के उत्पादन में उत्तर प्रदेश पूरे देश में पहले स्थान पर है। देश में उत्पादित होने वाले 336.21 लाख मीट्रिक टन आम में से 61.94 लाख मीट्रिक टन और 50.23 लाख मीट्रिक टन अमरूद में से 11.49 लाख मीट्रिक टन हिस्सा अकेले यूपी का है। आलू और लौकी उत्पादन में बेताज बादशाह सब्जियों के उत्पादन में यूपी का कोई सानी नहीं है। देश के कुल 598.89 लाख मीट्रिक टन आलू उत्पादन में यूपी का योगदान 250.66 लाख मीट्रिक टन है। इसी तरह, भारत में मटर के 72.38 लाख मीट्रिक टन उत्पादन में से यूपी 37.62 लाख मीट्रिक टन उगा रहा है। लौकी और सिंघाड़ा के उत्पादन में भी प्रदेश अव्वल है। राष्ट्रीय फल-सब्जी उत्पादन में यूपी का शानदार योगदान तरबूज, खरबूजा और शिमला मिर्च की खेती में भी यूपी के किसानों ने शानदार काम किया है। कुल मिलाकर, देशभर के 1214.75 लाख मीट्रिक टन फल उत्पादन में यूपी की हिस्सेदारी 14.44 प्रतिशत (175.42 लाख मीट्रिक टन) है। वहीं, देश के कुल 2210 लाख मीट्रिक टन सब्जी उत्पादन में यूपी 19.73 प्रतिशत (435.93 लाख मीट्रिक टन) का योगदान दे रहा है।  

रेलवे का बड़ा बदलाव: आलमनगर–उतरेटिया होकर चलेंगी कई ट्रेनें, यात्रियों को वैकल्पिक रूट से सफर

 लखनऊ  रेलवे भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए ) ने लखनऊ स्टेशन के एयर कानकोर्स निर्माण कार्य के लिए 14 से 23 जून तक प्लेटफार्म नंबर चार का मेगा ब्लाक लिया है। इस कारण 21 ट्रेनें 14 से 23 जून तक लखनऊ न आकर आलमनगर-ट्रांसपोर्टनगर-उतरेटिया होकर चलेंगी। इन ट्रेनों को आलमनगर और उतरेटिया स्टेशन पर पांच मिनट का ठहराव मिलेगा। यह ट्रेनें आलमनगर-ट्रांसपोर्टनगर होकर चलेंगी     14307 प्रयागराज संगम–बरेली एक्सप्रेस     14241 प्रयागराज संगम–सहारनपुर नौचंदी एक्सप्रेस     14242 सहारनपुर–प्रयागराज संगम नौचंदी एक्सप्रेस     15075 शक्तिनगर–टनकपुर त्रिवेणी एक्सप्रेस     15073 सिंगरौली–टनकपुर त्रिवेणी एक्सप्रेस     15074 टनकपुर–सिंगरौली त्रिवेणी एक्सप्रेस     15076 टनकपुर–शक्तिनगर त्रिवेणी एक्सप्रेस     13037 हावड़ा–देहरादून एक्सप्रेस     13035 हावड़ा–देहरादून एक्सप्रेस     13038 देहरादून–हावड़ा एक्सप्रेस     13036 देहरादून–हावड़ा एक्सप्रेस     13257 दानापुर–आनंद विहार टर्मिनल एक्सप्रेस     13258 आनंद विहार टर्मिनल–दानापुर एक्सप्रेस     14523 बरौनी–अम्बाला कैंट एक्सप्रेस     14524 अम्बाला कैंट–बरौनी एक्सप्रेस     15127 बनारस–नई दिल्ली काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस     15128 नई दिल्ली–बनारस काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस     15119 बनारस–देहरादून जनता एक्सप्रेस     15120 देहरादून–बनारस जनता एक्सप्रेस     14229 प्रयागराज संगम–योगनगरी ऋषिकेश एक्सप्रेस     14230 योगनगरी ऋषिकेश–प्रयागराज संगम एक्सप्रेस 15 से ऐशबाग तक चलेगी सहारनपुर वंदे भारत  सहारनपुर वंदे भारत एक्सप्रेस 15 जून से ऐशबाग से संचालित होगी। इसी तरह 55061 नकहा जंगल-डालीगंज पैसेंजर का विस्तार भी 15 जून से ऐशबाग तक होगा। 55061 नकहा जंगल-ऐशबाग पैसेंजर डालीगंज से सुबह 9:12 बजे, लखनऊ सिटी से 9:20 बजे छूटकर ऐशबाग 9:55 बजे पहुंचेगी। यह ट्रेन ऐशबाग से शाम पांच बजे छूटकर लखनऊ सिटी से 5: 11 बजे होते हुए नकहा जंगल की ओर रवाना होगी।  

नई सड़कों और पुलों को लेकर योगी सरकार की बड़ी तैयारी, बजट और टेंडर प्रक्रिया तेज

लखनऊ  अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश सरकार विकास कार्यों को रफ्तार देने में जुट गई है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंडलीय दौरा शुरू कर दिए हैं। इन दौरों में मुख्यमंत्री जन प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। जन प्रतिनिधियों से उनके विधान सभा क्षेत्र में इस वर्ष नई सड़कें व पुल-पुलियों की प्राथमिकता की जानकारी ले रहे हैं। विभाग की तैयारी जुलाई से ही नई योजनाओं के लिए बजट स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को वाराणसी मंडल में जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक मंडलीय दौरे की शुरूआत कर दी। मुख्यमंत्री रविवार को गोरखपुर में गोरखपुर मंडल के जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। मुख्यमंत्री का मंडलीय दौरा इसी महीने पूरा हो जाने की उम्मीद है। निर्माण कार्यों की प्राथमिकताएं की जा रहीं तय मंडलीय बैठकों के माध्यम से इस साल विभागीय बजट से नई सड़कें व पुल-पुलियों के निर्माण कार्यों की प्राथमिकताएं तय की जा रही हैं। जिसके आधार पर पीडब्ल्यूडी निर्माण कार्यों को तेजी से शुरू कराएगा। विभाग के प्रमुख सचिव अजय चौहान के मुताबिक जन प्रतिनिधियों के प्रस्ताव पर सभी जिलों की कार्ययोजना आ गई है। मुख्यमंत्री की मंडलीय बैठकें पूरी हो जाने के बाद चयनित कार्यों का काम तेजी से शुरू कराया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि जुलाई से ही विभाग चयनित कार्यों के लिए बजट स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया का काम शुरू कर देगा। जिससे सितंबर से धरातल पर युद्धस्तर पर काम शुरू कराया जा सके। आवंटित किए 35156 करोड़ इस वित्तीय वर्ष में पीडब्ल्यूडी को निर्माण कार्यो के लिए 35,156 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जिसमें से 11,718 करोड़ रुपये से नई सड़कें व पुल-पुलिया बनाई जाएंगी। शेष बजट पहले से चल रही योजनाओं को पूरा करने पर खर्च किया जाएगा। लगभग 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली नई सड़कें व पुल-पुलियों का काम इस वर्ष शुरू किया जाना है। विभाग ने तय किया है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद पांच करोड़ रुपये तक की लागत वाली योजनाओं को 50 प्रतिशत धनराशि तथा इससे बड़ी योजनाओं के लिए 20 से 30 प्रतिशत तक बजट जारी किया जाएगा।  

83 लाख की चोरी के खुलासे के बाद बिजली विभाग सख्त, टीमों का होगा गठन

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में बिजली विभाग की चेकिंग टीम घर-घर पहुंचेंगी। प्लान तैयार है। जिले में बिजली चोरी पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के लिए बड़े अभियान की तैयारी है। चार दिन पहले ‘हिन्दुस्तान’ अखबार ने बिजली चोरी को लेकर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद से जिम्मेदार अधिकारी हरकत में आ गए हैं। बिजली चोरी करने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए जल्द ही टीमों का गठन कर कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, पॉवर कॉरपोरेशन के आंकड़ों के अनुसार, जिले में एक दिन में दो लाख 78 हजार और एक महीने में तकरीबन 83 लाख रुपये की बिजली चोरी की जा रही है। बिजली चोरी का यह आंकड़ा चौकाने वाला है क्योंकि बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए तमाम प्रयास करने के बाद भी अगर ऐसा हो रहा है तो कहीं न कहीं व्यवस्था में सेंध लगाने जैसा है। इस मामले को ‘हिन्दुस्तान’ अखबार की ओर से ‘क्यों बत्ती गुल’ अभियान के तहत 9 जून को जिले में एक महीने में हो रही 83 लाख की बिजली चोरी शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। खबर छपने के बाद जिम्मेदारों ने बिजली चोरी को रोकने के लिए नई रणनीति बनानी शुरू कर दी है। अधीक्षण अभियंता प्रशांत कुमार के अनुसार, बिजली चोरी को लेकर महकमा पहले से काफी गंभीर है। समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है, मगर इस बार और सख्ती के साथ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कार्रवाई करने के लिए टीमों के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विशेषकर कार्रवाई का फोकस उन इलाकों में रहेगा, जहां पर अधिक बिजली चोरी के मामले सामने आ रहे हैं। बिजली चोरी के लिए चर्चित हैं शहर के ये मुख्य इलाके महकमे के आंकड़ों के अनुसार, शहर के गोड़ियाबाग, घोसी की पुलिया, दौलतबाग, नवाबपुरा, लालबाग, पुराना दसवां घाट, वारसी नगर, मुगलपुरा, बरवलान, सीतापुरी की टीचर्स कॉलोनी, मियां कॉलोनी, जयंतीपुर, रहमतनगर, पीतल बस्ती, असालतपुरा, चक्कर की मिलक हैं, जहां पर सबसे ज्यादा बिजली चोरी के मामले सामने आए हैं, मगर इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि बिजली चोरी के लिए चर्चित इतने क्षेत्र होने के बाद भी पिछले महीने कार्रवाई सिर्फ दो स्थानों पर हुई थी, इससे कहीं न कहीं जिम्मेदारों की सक्रियता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

अयोध्या में उठे सवाल, अब जांच के लिए मैदान में उतरी SIT

अयोध्या   अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी का मामला इन दिनों सुर्खियों में है. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों के बाद यह विवाद राजनीतिक रंग ले चुका है. मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी और उनके पास से लाखों रुपये बरामद होने के बाद जांच तेज कर दी गई है. उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचने के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है. ऐसे में जानिए, इस विवाद की शुरुआत कैसे हुई और अब तक क्या-क्या घटनाक्रम सामने आए हैं? ऐसे हुई विवाद की शुरुआत जून की शुरुआत में अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा किए गए ऑडिट के दौरान दानपात्र से नकदी और अन्य वस्तुओं के गायब होने की आशंका सामने आई. इसके बाद मंदिर परिसर और दानपात्र के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई. फुटेज में एक कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध दिखाई दी, जिसके आधार पर आंतरिक स्तर पर जांच शुरू की गई. शुरुआत में मामले को गोपनीय रखा गया. 7 जून को अखिलेश यादव की एंट्री से सुर्खियों में आया मामला राम मंदिर चंदा चोरी मामले में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को योगी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके का कि अयोध्या में मंदिर के चढ़ावे को लेकर जो जानकारी सामने आई है, वह गंभीर चिंता का विषय है. अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि यदि डबल इंजन सरकार की निगरानी व्यवस्था इतनी प्रभावी होती और दूरबीन व ड्रोन सही तरीके से काम कर रहे होते, तो विपक्ष को सवाल उठाने का मौका ही नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि चढ़ावे में चोरी होगी तो उसकी शिकायत भी होगी. इसके बाद अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने भी योगी सरकार पर निशाना साधा. संजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में दान राशि की कथित चोरी बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष व पारदर्शी जांच होनी चाहिए. उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए पूरे मामले की सच्चाई जनता के सामने लाने की बात कही. 10 जून को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कही जांच कराने की मांग अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी की बात बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने मानी. कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के तीन दिवसीय दौरे के दौरान पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा कि मामले की जांच सरकार करा रही है. सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह सतर्क है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं. उन्होंने कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो. राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े किसी भी मामले में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है. 13 जून को CM योगी के आदेश के बाद SIT गठित 13 जून को अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई है. अधिकारियों के मुताबिक SIT का गठन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किया गया. यह कदम 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के अनुरोध पर उठाया गया, जिसने इसे "गलत जानकारी को रोकने और सच सामने लाने" के लिए ज़रूरी बताया और आरोप लगाया कि राम मंदिर की छवि खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं. SIT में लखनऊ के डिविज़नल कमिश्नर IAS विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (IG) IPS किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं. राज्य सरकार के अनुसार मंदिर ट्रस्ट ने अयोध्या मंदिर परिसर में दान पेटियों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की थी. 13 जून को मामले में हुई 2 कर्मचारियों की गिरफ्तारी जांच के दौरान 13 जून को मंदिर में चढ़ावे की राशि गिनने वाले कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं. बताया जा रहा है कि कुछ रकम घर की आलमारी में रखी गई थी, जबकि कुछ नकदी गोबर के ढेर में दबाकर छिपाई गई थी. बरामद धनराशि के स्रोत को लेकर फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों ने इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है. मामले में एक और कर्मचारी को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है. दोनों कर्मचारियों की जिम्मेदारी मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े कार्यों की थी. बताया जा रहा है कि दोनों कर्मचारियों को प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये वेतन मिलता था, लेकिन हाल के महीनों में उनकी संपत्तियों में असामान्य वृद्धि की चर्चा जांच एजेंसियों के रडार पर है. जानकारी के मुताबिक एक कर्मचारी ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की भूमि खरीदी, जबकि दूसरे ने करीब 40 लाख रुपये का प्लॉट लिया है. 5 दिनों के भीतर दो बार अयोध्या पहुंचे नृपेंद्र मिश्र इधर, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी पांच दिनों के भीतर दूसरी बार अयोध्या पहुंचे. हालांकि उन्होंने कथित धन गबन के मामले पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल मंदिर निर्माण कार्यों की निगरानी तक सीमित है. फिलहाल राम मंदिर की दान राशि से जुड़ा यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा हुआ है. ऐसे में अब सभी की निगाहें संभावित SIT जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं.