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प्रधानों की नियुक्ति बनाम अदालत का सवाल: पंचायत व्यवस्था पर असमंजस गहराया

जौनपुर ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के सरकार के निर्णय पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद की शुक्रवार को आई सख्त टिप्पणी के बाद प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों की धड़कन बढ़ गई हैं। अदालत ने इस व्यवस्था को असंवैधानिक बताते हुए सरकार से चुनाव की स्पष्ट समय सीमा पूछे जाने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार ने यह निर्णय पर्याप्त कानूनी और संवैधानिक विचार-विमर्श के बाद लिया था। यदि सरकार का फैसला न्यायिक कसौटी पर नहीं टिक पाया तो पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों, नई योजनाओं की स्वीकृति और प्रशासनिक निर्णयों पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर भी असमंजस की स्थिति है। अब सबकी नजर 13 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है। बहरहाल इस मुद्दे पर जब प्रधानों से उनकी राय ली गई तो अलग-अलग मत सामने आए।     सरकार का निर्णय बिल्कुल ठीक था। प्रशासन को प्रशासक बनाए जाने के बाद उनकी जिम्मेदारी जनता के प्रति नहीं होती। हमारी समझ से जब तक सरकार पूरी चुनावी तैयारी नहीं कर लेती है, चुनाव का कोई औचित्य नहीं है। -विजय सिंह, प्रधान गैरवाह।     यह सरकार और कोर्ट के बीच गतिरोध में प्रधान व आम जनता परेशान है। अब इसे सरकार की तय करे कि उसे करना क्या है। हम चुनाव के लिए तब भी तैयार थे और अब भी हैं। -राम प्रकाश दुबे, अध्यक्ष प्रधान संघ, सुइथाकलां।     सरकार के समक्ष व्यावहारिक कठिनाई थी जिसके चलते यह निर्णय लेना पड़ा। सरकार ने जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक बनाया। अब कोर्ट के निर्णय पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है। -बलराम बिंद, प्रधान, ईशापुर।     पिछड़ा वर्ग आरक्षण तय न होने से सरकार को मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा, जो जनता के हित मे था। अब कोर्ट का क्या रुख है और उस पर सरकार क्या निर्णय लेती है इसे देखना होगा। -राम सकल वर्मा, प्रधान, सारी जहांगीर पट्टी।     सरकार का निर्णय आम जनता के हित में था। विकास कार्यों की गति प्रभावित न हो इसलिए सरकार द्वारा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किया गया, रही बात कोर्ट की तो उसका जवाब सरकार ही दे सकती है। -राजन यादव, प्रधान, समसुद्दीनपुर।  

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बड़ा घटनाक्रम, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की पुष्टि

 अयोध्या उत्तर प्रदेश के अयोध्या में प्रभु श्री राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद ने अब तक का सबसे बड़ा रूप ले लिया है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास (ट्रस्ट) के महामंत्री चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है. पिछले कई दिनों से चल रही सियासी और धार्मिक बयानबाजी के बीच, ट्रस्ट ने खुद आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इन दोनों बड़े पदाधिकारियों के इस्तीफे प्राप्त होने की पुष्टि की है।  आगामी बैठक में होगा इस्तीफे पर अंतिम फैसला ट्रस्ट की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पिछले कुछ दिनों से राम मंदिर परिसर में सुनी जा रही अप्रिय और दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से पूरा न्यास स्तब्ध, आहत और अत्यंत दुखी है. समस्त रामभक्तों और रामसेवकों के प्रतिनिधि के रूप में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. न्यास ने स्पष्ट किया है कि महामंत्री चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्र से त्यागपत्र प्राप्त हो चुका है, जिस पर न्यास अपनी आगामी बैठक में विचार कर अंतिम निर्णय लेगा।  चांदी की ईंटें और आभूषण सुरक्षित अफवाहों पर विराम लगाते हुए और देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं को आश्वस्त करते हुए ट्रस्ट ने कहा कि जिन भक्तों ने प्रभु श्री राम की सेवा में चांदी की ईंटें, सोने के आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तुएं न्यास के अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से सौंपी थीं, वे सभी वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका एक-एक पैसे का पूरा हिसाब उपलब्ध है।  दानपात्र चोरी मामले में FIR दर्ज वहीं, मंदिर के दानपात्रों से राशि गायब होने की घटना को लेकर ट्रस्ट ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन के विशेष जांच दल (SIT) से एक अंतरिम प्रतिवेदन (प्रारंभिक रिपोर्ट) प्राप्त हुई है. इस रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट के निवेदन पर पुलिस प्रशासन की ओर से आधिकारिक FIR दर्ज कर ली गई है और दोषियों के खिलाफ वैधानिक व कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी है।  भ्रामक अफवाहों से बचने की अपील प्रेस विज्ञप्ति के अंत में ट्रस्ट ने बेहद कड़े शब्दों में कहा है कि कुछ असामाजिक, अधार्मिक और स्वार्थी तत्व इस पूरे विवाद की आड़ में सनातन धर्म पर लांछन लगाने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा।  ट्रस्ट ने सभी रामभक्तों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर प्रसारित की जा रही भ्रामक और निराधार अफवाहों से स्वयं बचें और समाज के अन्य लोगों को भी इसका शिकार होने से बचाएं. ट्रस्ट को पूरा विश्वास है कि विवाद के ये बादल जल्द छटेंगे और सत्य का प्रकाश सबके सामने आएगा। 

लखनऊ में बिजली की अधिकतम मांग 32,673 मेगावाट तक पहुंची, खपत के सारे रिकॉर्ड टूटे

 लखनऊ प्रदेश में भीषण गर्मी से बिजली की खपत और अधिकतम मांग के पिछले सारे रिकार्ड टूटते जा रहे हैं। गुरुवार को बिजली की रिकार्ड खपत 693.46 मिलियन (69.35 करोड़) यूनिट रही। इससे पहले बुधवार को 67.84 करोड़ और 21 जून को 67.66 करोड़ यूनिट बिजली की खपत रही थी। पारा न गिरने से बुधवार रात 9.51 बजे 32,673 मेगावाट बिजली की अधिकतम मांग का भी नया रिकार्ड बना है। मानसून के विलंबित होने के कारण अब तक वर्षा न होने से इनदिनों रात और दिन के तापमान में बहुत अंतर न होने से न्यूनतम बिजली की मांग भी 23-24 हजार मेगावाट से नीचे नहीं जा रही है। वर्षा न होन से बिजली की मांग के 34 हजार मेगावाट के भी पार जाने का अनुमान है। इस बीच विभिन्न कारणों से तापीय परियोजनाओं की तीन यूनिटें घाटमपुर की 660-660 मेगावाट की दो व पारीछा की 250 मेगावाट की एक यूनिट के ठप होने से लगभग डेढ़ हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन घट गया है। हालांकि, पावर कारपोरेशन प्रबंधन का दावा है कि प्रदेशवासियों को तय शेड्यूल से कहीं अधिक बिजली की आपूर्ति की जा रही है दावा है कि शहरों को 24 घंटे बिजली देने के साथ ही गांवों में भी 18 के बजाय 21 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। पावर एक्सचेंज से पर्याप्त बिजली न मिलने से गांवों में जरूर रात के समय दो-तीन घंटे बिजली की कटौती की जा रही हैं लेकिन उसकी भरपाई दिन में कहीं ज्यादा बिजली देकर की जा रही है।

मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय ने बदला पाठ्यक्रम, 174 कॉलेजों के छात्रों को मिलेगा नया अध्ययन

 बलरामपुर उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में स्थित मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय ने एक ऐतिहासिक और साहसिक शैक्षणिक कदम उठाते हुए अपने हिंदी पाठ्यक्रम में हनुमान चालीसा और सुंदरकांड को शामिल कर लिया है। यह निर्णय न केवल बलरामपुर, बल्कि पूरे देश की शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बन गया है। 174 महाविद्यालयों के छात्रों पर पड़ेगा सीधा प्रभाव छात्रों पर प्रभाव देवी पाटन मंडल के अंतर्गत आने वाले 174 महाविद्यालयों के हजारों विद्यार्थी अब हिंदी साहित्य के पाठ्यक्रम के तहत इन पवित्र और काव्यात्मक रचनाओं का अध्ययन करेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह बदलाव शिक्षा को संस्कृति, आध्यात्म और स्थानीय परंपरा से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। बलरामपुर के तुलसीदास की है यह रचना, विश्वविद्यालय का दावा विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण तथ्य को भी सामने रखा है जो अब तक व्यापक रूप से चर्चित नहीं था। विश्वविद्यालय के अनुसार, हनुमान चालीसा की यह विशेष रचना गोस्वामी तुलसीदास (काशी) की नहीं, बल्कि बलरामपुर के तुलसीपुर क्षेत्र के भोजपुर निवासी संत तुलसीदास की है, जिन्होंने इसे इसी पवित्र आध्यात्मिक भूमि पर अपने साधना काल में रचा था। प्रोफेसर शैलेंद्र नाथ मिश्र के अनुसार, ये संत तुलसीदास स्वयं को गोस्वामी तुलसीदास का अवतार मानते थे। इस तथ्य का उल्लेख 1940 के दशक में प्रकाशित कल्याण पत्रिका में विनायक के लेख में मिलता है। इसके अलावा अखिल भारतीय विक्रम परिषद, काशी द्वारा प्रकाशित तुलसी ग्रंथावली में भी इसकी पुष्टि की गई है। बाद में ये संत भवनियापुर में बस गए और तुलसीपुर नगर की स्थापना की। कक्षावार पाठ्यक्रम में क्या-क्या बदला बीए प्रथम वर्ष के हिंदी पाठ्यक्रम में अब अयोध्याकांड (दोहा 28 से 41) और रामलला नहछू शामिल की गई हैं। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा गोंडा क्षेत्र की अवधी बोली में रचित यह बाललीला काव्य है, जिसमें बालक राम के स्नेहपूर्ण बाल स्वरूप का जीवंत और मनोरम चित्रण है। विश्वविद्यालय स्तर पर यह पहला अवसर है जब स्थानीय अवधी रूप को इस तरह औपचारिक सम्मान दिया गया है। विश्वविद्यालय ने पहली बार हनुमान चालीसा को स्नातक पाठ्यक्रम में शामिल किया है। यह रचना न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से, बल्कि काव्य-सौंदर्य, भाषा-शक्ति और भक्ति भाव की दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध है। एमए प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम में सुंदरकांड को जोड़ा गया है, जिससे छात्रों को तुलसीदास के काव्य कौशल, भाषा-सौंदर्य और भक्ति दर्शन की गहराई समझने का अवसर मिलेगा। कुलपति का दृष्टिकोण मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रविशंकर सिंह ने कहा कि हमारा उद्देश्य शिक्षा को अपनी संस्कृति से जोड़ना है। जब विद्यार्थी अपनी भाषा और परंपरा को जानेंगे, तभी शिक्षा का वास्तविक अर्थ साकार होगा। उनके नेतृत्व में हिंदी विभाग के पाठ्यक्रम को स्थानीयता से वैश्विकता की दृष्टि से नया रूप दिया गया है। सितंबर 2025 में यह पाठ्यक्रम में शामिल करने की स्वीकृति दे दी गई थी। इस वर्ष से नए सत्र में पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। विश्वविद्यालय वित्त समिति के सदस्य सर्वेश सिंह ने कहा कि यह निर्णय केवल पाठ्यक्रम को समृद्ध नहीं करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश भी देगा कि अपनी जड़ों से जुड़कर ही ज्ञान का वृक्ष फलता-फूलता है। हिंदी पाठ्यक्रम समिति के पूर्व संयोजक प्रो. शैलेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि आधुनिक शिक्षा तभी पूर्ण है, जब उसमें संस्कृति, लोकभाषा और आध्यात्मिक चेतना का समावेश हो।

बेसिक शिक्षा परिषद ने बीएसए से प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच और एक्सेल डेटा मांगा

लखनऊ परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के विशेष परिस्थितियों में होने वाले अंतरजनपदीय स्थानांतरण की प्रक्रिया फिलहाल दस्तावेजों की जांच में उलझ गई है। अधिकांश आवेदनों के साथ लगाए गए प्रमाणपत्र स्पष्ट नहीं होने के कारण उन्हें पढ़ने और सत्यापित करने में दिक्कत आ रही है। इसे देखते हुए बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव ने संबंधित जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) से प्रमाणपत्रों की प्रमाणित प्रतियां दोबारा भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी जरूरी जानकारी एक्सेल शीट के माध्यम से भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।विशेष परिस्थितियों में अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए प्रदेशभर से करीब 7000 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें शिक्षक दंपती, दिव्यांग, कैंसर से पीड़ित व डायलिसिस करा रहे शिक्षकों के आवेदन शामिल हैं। इन सभी आवेदनों की स्क्रूटनी (जांच) की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कई प्रमाणपत्र अस्पष्ट होने के कारण जांच पूरी करने में समय लग रहा है। स्थानांतरण प्रक्रिया में देरी होने की संभावना ऐसे में स्थानांतरण प्रक्रिया में देरी होने की संभावना है। इस बीच परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है। ऐसे में परिषद शिक्षक-छात्र अनुपात (पीटीआर) के आधार पर आवेदन के आधार पर इन शिक्षकों का स्थानांतरण करना चाहती है, ताकि जिन जिलों में शिक्षकों की कमी है वहां संतुलन बनाया जा सके। प्रदेश में 1.11 लाख से अधिक परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें 93.91 लाख विद्यार्थी और 3.03 लाख शिक्षक हैं। पूरे प्रदेश का औसत पीटीआर 31 है, लेकिन जिलों के बीच इसमें बड़ा अंतर है। इटावा में एक शिक्षक पर औसतन 17 विद्यार्थी हैं। वहीं श्रावस्ती में सबसे अधिक 71 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक है। विद्यार्थियों की संख्या के लिहाज से सीतापुर सबसे बड़ा जिला है, जहां 3.26 लाख विद्यार्थी, 10,275 शिक्षक और 2,970 विद्यालय हैं। इसके बाद बहराइच में 3.23 लाख और लखीमपुर खीरी में 3.02 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यालयों की संख्या हरदोई में 2,825 और लखीमपुर खीरी में 2700 है। परिषद का प्रयास है कि स्थानांतरण के बाद जिलों के बीच शिक्षक-छात्र अनुपात को अधिक संतुलित बनाया जा सके।

योगी सरकार का बड़ा फैसला, टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से 149 ITI में शुरू होंगे आधुनिक कोर्स

योगी सरकार का बड़ा फैसला: टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से 149 आईटीआई और स्टाफ ट्रेनिंग सेंटर में चलेंगे आधुनिक कोर्सेज 1065 पदों पर आउटसोर्सिंग से होगी भर्ती, जेम पोर्टल से होगा  चयन  ईवी मैकेनिक, रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग, आई ओटी समेत 9 आधुनिक कोर्सेज में मिलेगी ट्रेनिंग लखनऊ, उत्तर प्रदेश की योगी  सरकार ने प्रदेश के युवाओं को वैश्विक स्तर पर रोजगार के नए अवसर प्रदान करने और उन्हें उन्नत तकनीकी शिक्षा से लैस करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'कौशल विकास से आत्मनिर्भरता' के विजन को धरातल पर उतारते हुए राज्य सरकार ने टाटा टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (टीटीएल) के सहयोग से प्रदेश के 149 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और 01 प्रादेशिक स्टाफ प्रशिक्षण एवं शोध केन्द्र, अलीगंज-लखनऊ में अत्याधुनिक कोर्सेज के संचालन को हरी झंडी दे दी है। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश की तकनीकी शिक्षा को अपग्रेड किया जा रहा है। इसी क्रम में राज्यपाल की ओर से टाटा द्वारा विकसित किए गए आधुनिक व्यवसायों के सुचारु संचालन के लिए कुल 1,065 पदों की मैनपावर को आउटसोर्सिंग के माध्यम से रखने की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इसके तहत प्रदेश भर में 171 कार्यदेशक (वर्कशॉप इंस्ट्रक्टर) और 894 प्रशिक्षकों (इंस्ट्रक्टर्स) की सेवाएं ली जाएंगी। मंत्री ने कहा  कि योगी सरकार युवाओं को रोजगार देने और व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इन सभी 1,065 सेवाओं को 'आउटसोर्सिंग ऑफ सर्विस' (जॉब आउटसोर्सिंग) के आधार पर 'जेम पोर्टल' के माध्यम से क्रय किया जाएगा। सेवा प्रदाता एजेंसी का चयन पूरी तरह से स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी रीति से कार्मिक विभाग, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम विभाग तथा श्रम विभाग के शासनादेशों के प्रावधानों और सुसंगत नियमों के आलोक में किया जाएगा। इन पदों हेतु शैक्षिक योग्यता आदि का निर्धारण प्रशिक्षण निदेशालय द्वारा तय कर शासन से अनुमोदित कराया जाएगा। यह आदेश वित्त विभाग की सहमति के बाद जारी कर दिया गया है। टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से प्रदेश के युवाओं को अब पारंपरिक कोर्सेज से इतर चौथी औद्योगिक क्रांति (इंडस्ट्री 4.0) के मांग वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जाएगा। इन संस्थानों में इलेक्ट्रिक व्हीकल मैकेनिक, इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स एंड डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग तकनीशियन, एडवांस्ड सीएनसी मशीनिंग तकनीशियन, मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस कंट्रोल एंड ऑटोमेशन, इंडस्ट्रियल इंटरनेट ऑफ थिंग्स तकनीशियन, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तकनीशियन/3डी प्रिंटिंग, सीएएम प्रोग्रामर, बेसिक डिजाइनर एंड वर्चुअल वेरिफायर-मैकेनिकल तथा आर्टिसन यूजिंग एडवांस्ड टूल जैसे 9 अत्याधुनिक कोर्सेज संचालित किए जा रहे हैं। टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से संचालित होने वाले ये कोर्सेज प्रदेश के युवाओं को वैश्विक कंपनियों की जरूरत के मुताबिक तैयार करेंगे। आईटीआई से पास होने वाले छात्रों को न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी बेहतरीन पैकेज पर रोजगार मिल सकेगा। योगी सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा 'स्किल हब' बनाना है और यह कदम उसी दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

यूपी में बिजली दरों को लेकर फैसला टलता रहा, अब नियामक आयोग की तैयारियां अंतिम चरण में

लखनऊ  बिजली बिलों की नई दरों को लागू करने को लेकर पिछले कई दिनों से चल रही उठक-बैठक अब खत्म होने वाली है। जल्द ही नियामक आयोग नई दरों को लेकर ऐलान कर सकता है। माना जा रहा है कि इस बार नई नदरों में बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।कभी भी नई दरों का ऐलान हो सकता है। बिजली की नई दरों के ऐलान की उलटी गिनती अब शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक नियामक आयोग की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इस बार लगातार सातवें साल बिजली की दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद बेहद कम है। अगर ऐसा हुआ तो यह नया रिकॉर्ड होगा। बिजली की नई दरों पर सभी बिजली कंपनियों के प्रस्ताव पर नियामक आयोग ने मार्च और अप्रैल में सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की थी। इसके बाद राज्य सलाहकार समिति की बैठक भी हो चुकी है। नियम के मुताबिक नियामक आयोग को पांच जून के पहले ही दरें घोषित कर देनी चाहिए थीं। हालांकि, अब देर से ही सही, जल्द ही ये जारी हो सकती हैं। 16,448 करोड़ रुपये के अंतर को माना आधार पावर कॉरपोरेशन और बिजली वितरण कंपनियों ने वर्ष 2024-25 के ट्रू-अप में लगभग 3,995 करोड़ रुपये और वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 12,453 करोड़ रुपये के राजस्व का अंतर बताया है। उन्होंने लगभग 16,448 करोड़ रुपये के अंतर को आधार बनाकर बिजली दरों में इजाफे की मांग की है। इसके अलावा स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग योजना के तहत लगभग 3,838 करोड़ रुपये के खर्च को उपभोक्ता बिलों में शामिल करने का भी प्रस्ताव पावर कॉरपोरेशन ने दिया है। बिजली दरों में सुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट मीटर के दाम उपभोक्ताओं पर डाले जाने को भी गलत बताते हुए इसे नियम विरुद्ध बताया है। नोएडा पावर कंपनी के उपभोक्ताओं को मिल रही 10 प्रतिशत रियायत बरकरार रहे इसके लिए भी पैरवी की गई है। केवल दरें ही नहीं और भी फैसले आएंगे टैरिफ आदेश में केवल बिजली दरें ही नहीं तय होंगी बल्कि और भी फैसले आएंगे। इनमें बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले उपभोक्ताओं को साझा क्षेत्र में बिजली खर्च का ब्योरा मिलने, घरों में छोटी दुकान करने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू कनेक्शन ही इस्तेमाल करने की छूट और स्मार्ट मीटर के दाम उपभोक्ताओं से न लिए जाने समेत अन्य मसले शामिल हैं। बिजली बिल में पुराना बकाया नहीं जोड़ सकेगा पावर कॉरपोरेशन पावर कॉरपोरेशन अब पुराने बकाया भुगतान की रकम बिजली बिलों में नहीं वसूल सकेगा। जून में हो रही 10 प्रतिशत अतिरिक्त वसूली मामले में नियामक आयोग ने अपने फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है। आयोग ने कहा है कि नियम पुराना बकाया जोड़ने की इजाजत नहीं देते हैं। बीते साल अप्रैल से हर महीने उपभोक्ताओं के बिजली बिल में ईंधन अधिभार के एवज में अतिरिक्त शुल्क लगता रहा है। बीते 14 महीने में पावर कॉरपोरेशन ने इस तरह से करीब 2800 करोड़ रुपये की वसूली की। इस बीच 600 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं के अलग-अलग महीनों में कम भी किए गए। इस साल जून में जब अधिकतम ईंधन अधिभार शुल्क के तौर पर 10 प्रतिशत लिए जाने लगे तो इसी गणना को लेकर सवाल उठने लगे। हर महीने बिल में जोड़ा जा रहा था अधिभार शुल्क मामला नियामक आयोग पहुंचा तो पावर कॉरपोरेशन ने जवाब दिया कि उसने बकाया भुगतान की रकम को भी जोड़कर अधिभार शुल्क लगाया है। साथ ही यह भी कहा कि ऐसा पहली बार नहीं बल्कि हर महीने किया गया है। नियामक आयोग ने अपने फैसले में बकाया भुगतान की रकम को ईंधन अधिभार शुल्क में जोड़ना गलत बता दिया। ऐसे में अब सभी 14 महीनों में हुई वसूली की समीक्षा होगी, जिसके बाद अतिरिक्त वसूली गई रकम पर फैसला होगा। वहीं, आयोग ने अब पहली बार यह भी साफ कर दिया है कि इस तरह की रकम पर फैसला सालाना तौर पर बिजली दरें तय करते वक्त लिया जाएगा। आयोग के इस फैसले तक बकाया भुगतान की रकम के समायोजन तक स्थिति स्पष्ट नहीं थी। आयोग ने आदेश में कहा है कि केवल तय महीने में वास्तिवक ईंधन, ऊर्जा खरीद और ट्रांसमिशन पर खर्च की रकम के एवज में ही अधिभार शुल्क लगाया जाएगा।

हनुमानगढ़ी महंत संतराम दास के निधन से संत समाज में शोक, सरयू तट पर होगा अंतिम संस्कार

अयोध्या अयोध्या के सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ महंत संतराम दास (85) का शनिवार सुबह निधन हो गया। उन्होंने सुबह करीब 11 बजे अपने आश्रम में अंतिम सांस ली। उनके निधन से संत समाज और श्रद्धालुओं में शोक की लहर है। महंत संतरामदास सीएम योगी के करीबी महंतों में से थे। बताया गया कि महंत संतराम दास उच्च रक्तचाप और मधुमेह से पीड़ित थे तथा पिछले करीब आठ माह से उनका उपचार चल रहा था। हाल ही में उनका इलाज मेदांता अस्पताल में हुआ था। इलाज के बाद वह तीन दिन पहले ही अयोध्या लौटे थे। महंत के पार्थिव शरीर के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ने लगी है। महंत संतराम दास की अंतिम यात्रा शनिवार शाम 4 बजे हनुमानगढ़ी से निकलेगी। इसके बाद सरयू तट पर पूरे वैदिक रीति-रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। महंत संतराम दास का अयोध्या के संत समाज में विशेष सम्मान था। सीएम योगी आदित्यनाथ भी अयोध्या प्रवास के दौरान समय-समय पर उनके आश्रम पहुंचकर उनका आशीर्वाद लेते रहे थे और उन्हें गदा व रामनामा भेंट कर सम्मानित करते रहे थे। हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास उन्हीं के शिष्य हैं। उज्जैनिया पट्टी के महंत संतराम दास के निधन को अयोध्या के संत समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। राजू दास ने सोशल मीडिया एक्स पर दी जानकारी हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने सोशल मीडिया एक्स पर महंत संतराम दास जी के निधन की सूचना दी। उन्होंने अस्पताल की फोटो साझा करके लिखा, हमारे पूज्य गुरुदेव भगवान श्री श्री 1008 श्री महंत संतराम दास जी महाराज पंचांग पट्टी उज्जैनिया हनुमानगढ़ी,अयोध्या जी का गोलोकवास अभी हो गया है। अभी सायं 3 बजे शोभा यात्रा निकाली जाएगी। दाह संस्कार आज (शाम 4 बजे ) नया घाट सरयू तट (कच्चा घाट) पर किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर महंत के निधन को लेकर सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देने का क्रम शुरू हो गया। आचार्य संतोष अवस्थी ने लिखा, हनुमानगढ़ी उज्जैनिया पट्टी के पूज्य महंत श्री संतरामदास जी महाराज का सांकेतवास श्री अवध की नागातीत संत परम्परा की अपूरणीय क्षति है। भावभीनी श्रद्धांजलि। श्री हनुमन्तलाल जी महाराज पुण्यात्मा को शाश्वत शांति प्रदान करें। अनुयायियों के प्रति हार्दिक संवेदना।

श्रीराम के अस्तित्व को नकारने और रामभक्तों पर गोली चलाने वाले लोग कर रहे हैं आस्था की बात: सीएम

आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री श्रीराम मंदिर तीर्थ क्षेत्र दान प्रकरण में पहली एफआईआर के बाद सीएम योगी ने कहा- एसआईटी रिपोर्ट आते ही शुरू हो गई कार्रवाई मुख्यमंत्री ने दोहराया- मैंने कहा था कि दूध का दूध और पानी का पानी होकर रहेगा, एसआईटी की संस्तुतियों के अनुरूप कार्रवाई को आगे बढ़ा रही सरकार रामभक्तों से सीएम योगी की अपील- अयोध्या पर आक्षेप मत करें, श्रीराम की मर्यादा का पालन करें श्रीराम के अस्तित्व को नकारने और रामभक्तों पर गोली चलाने वाले लोग कर रहे हैं आस्था की बात: सीएम देवरिया, श्रीराम मंदिर तीर्थ क्षेत्र दान प्रकरण में पहली एफआईआर दर्ज होने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि आस्था के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। एसआईटी की रिपोर्ट आते ही तत्काल कार्रवाई प्रारंभ हो गई। मैं आश्वस्त करता हूं और मैंने कहा भी था कि हम दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेंगे। जन आस्था के साथ जो भी खिलवाड़ करेगा, वह उसका भुक्तभोगी होगा। यह छूट किसी को भी नहीं दी जा सकती। देवरिया में शुक्रवार को विकास परियोजनाओं के शिलान्यास/लोकार्पण अवसर पर जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं 19 जून को अयोध्या दौरे पर था। मैंने तब भी कहा था कि अयोध्या हम सबकी आस्था की प्रतीक है, भारत के सनातन धर्म की प्रतीक है। अयोध्या पर आक्षेप न करो, प्रभु श्रीराम की मर्यादा का पालन करना सीखो। अयोध्या के बारे में जो समाचार मिल रहे थे, उस पर मैंने कहा था कि एसआईटी की रिपोर्ट आने के साथ ही हमारी कार्रवाई भी प्रारंभ हो जाएगी। आक्षेप लगाने वालों की मंशा अच्छी नहीं मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों व रामभक्तों से कहा कि जो लोग आज आक्षेप लगाने का प्रयास कर रहे हैं, उनकी मंशा अच्छी नहीं है। ये वो लोग हैं जो भगवान राम को नकार चुके थे, भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर चुके थे। कांग्रेस व सपा को आड़े हाथ लेते हुए सीएम ने कहा कि एक पार्टी कहती थी कि राम हुए ही नहीं, यानी वे लोग अयोध्या को भी नहीं मानना चाहते थे। वे लगातार न्यायालय में मुकदमा लड़ते रहे, वकीलों की फौज खड़ी करते रहे। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और मंदिर निर्माण के खिलाफ खड़े रहे। वहीं दूसरा पक्ष उन लोगों का है, जो भगवान राम का नाम लेने वालों पर गोली चलाता था और आज वही लोग कहते हैं कि आस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा है। ये लोग बताएंगे हमें आस्था ! रामनवमी पर दंगा करवाते थे, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को बैन करते थे, कांवड़ यात्रा नहीं निकलने देते थे, दुर्गा पूजा में दंगा करवाते थे। लार का दंगा तो सबको याद ही है। और, ये लोग कहते हैं कि आस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा है ! एसआईटी की सिफारिश के अनुरूप कार्रवाई को आगे बढ़ा रही सरकार मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दलों के काले कारनामों का काला चिट्ठा है। कांग्रेस ने देश को लूटा ही नहीं, बल्कि बेईमानी व भ्रष्टाचार के कीर्तिमान स्थापित किए थे। वही लोग आज अयोध्या पर आक्षेप लगा रहे हैं। डबल इंजन सरकार ने सपा की डकैती रोकी इसीलिए वह छटपटाहट रही है। जब उसे कुछ नहीं मिला तो जन आस्था के साथ खिलवाड़, रामभक्तों पर आक्षेप और अयोध्या को बदनाम करने में जुट गई। यह स्वीकार्य नहीं है। सरकार की मंशा पहले दिन से स्पष्ट है। मैं फिर अपील करूंगा कि रामभक्तों की अग्निपरीक्षा मत लो। रामभक्तों और उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ करना बंद करो। अगर पुष्ट प्रमाण नहीं हैं तो आरोप-प्रत्यारोप बंद करो और अगर प्रमाण हैं तो प्रस्तुत करो, एसआईटी का सहयोग करो। एसआईटी की सिफारिश के अनुरूप सरकार कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है। जब वरिष्ठ अधिकारियों की टीम काम कर रही है तो फिर राजनीतिक बयानबाजी बंद होनी चाहिए।

योगी सरकार की शादी अनुदान योजना से OBC परिवारों को बड़ी राहत, 5 हजार से ज्यादा बेटियों को मिला लाभ

योगी सरकार की शादी अनुदान योजना से ओबीसी परिवारों को बड़ी राहत, 5 हजार से अधिक बेटियां लाभान्वित 2026-27 में 1.05 लाख लाभार्थियों को योजना से जोड़ने का लक्ष्य प्रत्येक पात्र परिवार को बेटी की शादी के लिए 20 हजार रुपये की सहायता गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में सहारा बनी शादी अनुदान योजना विकलांग, विधवा और भूमिहीन परिवारों को आवेदन में प्राथमिकता लखनऊ   उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के लिए राहत का मजबूत आधार बनती जा रही हैं। खासतौर पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के गरीब परिवारों के लिए संचालित शादी अनुदान योजना बेटियों की शादी में आर्थिक सहारा बनकर उभरी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत से ही इस योजना का सकारात्मक असर साफ दिखाई दे रहा है। अब तक 5 हजार से ज्यादा ओबीसी बेटियों को शादी अनुदान योजना का लाभ मिल चुका है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि सरकार की योजनाएं तेजी से जमीनी स्तर पर पहुंच रही हैं और जरूरतमंद परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध हो रही है। 2026-27 में 1 लाख से अधिक लोगों को लाभ देने का लक्ष्य दरअसल गरीब परिवारों के लिए बेटी की शादी हमेशा एक बड़ी जिम्मेदारी और चुनौती रही है। ऐसे में योगी सरकार की शादी अनुदान योजना गरीब परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 लाख 5 हजार लोगों को योजना का लाभ देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिसमें शुरुआती महीनों में ही 5032 लोगों को लाभान्वित किया जा चुका है। कुल आवेदकों में 4178 ऐसे भी शामिल हैं, जिन्होंने मार्च में शादी की थी और उसी माह आवेदन किया था। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1 लाख 16 हजार से अधिक आवेदकों को इस योजना के तहत सहायता प्रदान की गई थी। बेटी की शादी के लिए 20 हजार रुपये की आर्थिक मदद इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को बेटी की शादी के लिए 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है। योजना का लाभ उन्हीं परिवारों को दिया जाता है, जिनकी वार्षिक आय 1 लाख रुपये तक है। साथ ही योजना के लिए यह भी अनिवार्य है कि लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष हो। योगी सरकार ने योजना के क्रियान्वयन में संवेदनशील वर्गों को प्राथमिकता देने का भी सराहनीय कार्य किया है। विकलांग, विधवा, दैवीय आपदा से प्रभावित और भूमिहीन परिवारों को आवेदन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाती है।  लाभार्थियों को समय पर मिल रही धनराशि पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह ने शादी अनुदान योजना की सफलता पर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि यह योजना अन्य पिछड़ा वर्ग के जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत बन रही है। आवेदक को 20 हजार रुपये की सहायता सीधे बैंक खाते में भेजी जा रही है, जिससे पारदर्शिता बनी है और लाभार्थियों को समय पर मदद मिल रही है। प्रमुख सचिव ने बताया कि यह योजना गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में आर्थिक सहयोग देकर बड़ी सहायता कर रही है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार पिछड़े वर्ग के उत्थान और विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।