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प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत गैस सिलेंडर रिफिल सब्सिडी की 1,500 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने होली के अवसर पर शनिवार को लोकभवन में प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत प्रदेश के 1.86 करोड़ परिवारों को गैस सिलेंडर रिफिल सब्सिडी की 1500 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के मार्गदर्शन में गरीब, अन्नदाता किसान, महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करने का कार्य जारी है। होली व दीपावली पर लाभार्थियों परिवारों को एक-एक नि:शुल्क सिलेंडर रिफिल की सुविधा दी जा रही है। उज्ज्वला योजना के तहत देश में 10 करोड़ से अधिक लोगों को गैस कनेक्शन की सुविधा प्रदान की गई है, जिसमें उत्तर प्रदेश में 1.86 करोड़ परिवारों को इसका लाभ मिला है। सीएम योगी ने इस अवसर पर दस लाभार्थी महिलाओं को स्वयं सब्सिडी राशि के प्रतीकात्मक चेक सौंपे। सबका साथ-सबका विकास ही मंत्र सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शासन की योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर गरीब, अन्नदाता किसान, महिलाओं और युवाओं से जोड़ने का कार्य किया है। प्रधानमंत्री कहते भी हैं कि देश में केवल चार जातियां हैं। ये जातियां गरीब, किसान, महिला और युवा हैं। इसमें सभी पंथ, संप्रदाय, मत और मजहब समाहित हैं। ऐसे में जब भी किसी योजना का लाभ दिया जाएगा तो उसका मंत्र केवल “सबका साथ, सबका विकास” ही होगा। कोरोना महामारी समाप्त हुए काफी समय हो चुका है, लेकिन आज भी देश के 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन की सुविधा मिल रही है। इनमें अकेले उत्तर प्रदेश के 15 करोड़ लाभार्थी शामिल हैं। यह सरकार की गरीबों के प्रति संवेदनशीलता का प्रमाण है।  जो समाज के लिए काम करेगा, सरकार उसके साथ खड़ी रहेगी मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत देश के 50 करोड़ लोगों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य गारंटी दी जा रही है। 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों को भी 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिसका लाभ देश के किसी भी सूचीबद्ध अस्पताल में लिया जा सकता है। शिक्षकों तथा बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, शिक्षामित्रों तथा अनुदेशकों को भी प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जो समाज के लिए कार्य करेगा, समाज और सरकार दोनों उसके लिए खड़े रहेंगे। ऐसा पहले नहीं था, क्योंकि पहले की सरकारों की सोच संकीर्ण थी। पहले की सरकारें जातीय खेमों में बंटी हुई थीं और समाज को लड़ाने का काम किया जाता था।  माफिया समानांतर शासन चलाते थे, अराजकता का माहौल था। उस दौरान न बेटी सुरक्षित थी और ना व्यापारी। पर्व-त्योहारों से पहले उपद्रव की घटनाएं हो जाती थीं, जिसके कारण कर्फ्यू लग जाता था और उत्साह भंग हो जाता था। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। प्रदेश में न कर्फ्यू है और न दंगे। कानून-व्यवस्था सुदृढ़ हुई है और निवेश के लिए सकारात्मक वातावरण बना है।  विभिन्न देशों से निवेश का सीधा लाभ राज्य और युवाओं को मिलेगा मुख्यमंत्री ने कहा कि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य हाल में जर्मनी से लौटे हैं, जहां उन्होंने प्रदेश में निवेश की संभावनाओं को लेकर विभिन्न बैठकों में भाग लिया। वर्ष 2017 से पहले जब उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधि विदेश जाते थे, तो प्रदेश को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, लेकिन आज देश और दुनिया का हर बड़ा निवेशक उत्तर प्रदेश आना चाहता है। उन्हें विश्वास है कि प्रदेश सरकार सुरक्षा भी दे सकती है और त्वरित निर्णय लेकर समस्याओं का समाधान भी कर सकती है। प्रदेश में जो सकारात्मक परिवर्तन आया है और जर्मनी, जापान, सिंगापुर सहित दुनिया के अन्य देशों से जो निवेश आ रहा है, उसका किसी व्यक्ति विशेष या किसी परिवार को निजी लाभ नहीं होने वाला है, बल्कि उसका सीधा लाभ उत्तर प्रदेश और यहां के युवाओं को मिलेगा। यह निवेश प्रदेश के नौजवानों को रोजगार देने और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए है। यह अवसर स्वत: नहीं मिलते। इसके लिए निरंतर परिश्रम और समन्वित प्रयास की आवश्यकता होती है।  सुबह से शाम तक काम के परिणाम से आज यूपी निवेश और रोजगार के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार एक ऐसा लिंक स्थापित करने का कार्य कर रही है, जिसके माध्यम से प्रदेश के योग्य और प्रशिक्षित युवाओं को सरकार की गारंटी के साथ विदेशों में भी रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। यदि किसी युवा को यहां 20 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं और वही युवा विदेश में जाकर 2 लाख से 2.5 लाख रुपये तक कमाने लगे, तो यह उसके और उसके परिवार के लिए सम्मानजनक जीवन की दिशा में बड़ा कदम होगा। यहां का नौजवान जरूर नौकरी और रोजगार पाएगा। सुबह से शाम तक लगातार काम करने का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश निवेश और रोजगार के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महिलाओं के प्रति संवेदना, बीमारी से मुक्ति, युवाओं को रोजगार, अन्नदाता किसान के चेहरे पर खुशहाली, बेटियों की सुरक्षा और व्यापारियों को सम्मानजनक वातावरण देने का विजन है। सरकार इसी उद्देश्य के साथ कार्य कर रही है, ताकि हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। उज्ज्वला योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा इस वर्ष 9 सिलेंडर सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रत्येक रिफिल पर 335 रुपये की सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में वापस की जाती है। कनेक्शन मुफ्त दिया गया है और जब लाभार्थी भरा हुआ सिलेंडर खरीदता है, तो सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी उसके खाते में आती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और दुरुपयोग की संभावना भी समाप्त होती है। वहीं प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि दीपावली और होली जैसे प्रमुख पर्वों से पहले प्रत्येक पात्र परिवार को एक भरा हुआ गैस सिलेंडर निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। प्रदेश भर में इस संबंध में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि त्योहारों से पहले हर परिवार सम्मानजनक ढंग से अपनी आवश्यकता की पूर्ति कर सके। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी परिवार त्योहार के समय किसी असुविधा का सामना न करे और हर घर में खुशहाली और आत्मसम्मान के साथ पर्व मनाया जा सके। सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम को वैक्सिनेशन … Read more

प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला: सभी कैंटोनमेंट अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े

लखनऊ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान कार्ड) के लाभार्थियों को बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। सरकार प्रदेश के सभी कैंटोनमेंट अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड धारकों को इलाज की सुविधा देने जा रही है। जल्द ही स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज) प्रदेश के 12 कैंटोनमेंट अस्पतालों से एमओयू साइन करने जा रही है। प्रदेश में कुल 13 कैंटोनमेंट अस्पताल हैं। प्रयागराज कैंटोनमेंट अस्पताल में पहले से ही आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान कार्ड) के लाभार्थियों को बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। सरकार प्रदेश के सभी कैंटोनमेंट अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड धारकों को इलाज की सुविधा देने जा रही है। जल्द ही स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज) प्रदेश के 12 कैंटोनमेंट अस्पतालों से एमओयू साइन करने जा रही है। प्रदेश में कुल 13 कैंटोनमेंट अस्पताल हैं। प्रयागराज कैंटोनमेंट अस्पताल में पहले से ही आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज किया जा रहा है। इसके सफल परिणाम को देखते हुए योगी सरकार ने प्रदेश के अन्य 12 कैंटोनमेंट अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड धारकों को इलाज मुहैया कराने का निर्णय लिया है। साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि जनवरी-2026 से प्रयागराज के कैंटोनमेंट अस्पताल में आयुष्मान कार्ड धारकों का निशुल्क इलाज किया जा रहा है। यहां पर मरीजों को कार्डियोलाॅजी, नेफ्रोलॉची, मेडिकल एंड सर्जिकल अनकालॉजी आदि गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधा दी जा रही है। इसके साथ ही मुफ्त ओपीडी अप्वाइंटमेंट, मुफ्त जांच व गंभीर मरीजों को मुफ्त परिवहन की सुविधा दी जा रही है, जिसके सफल परिणाम सामने आए हैं। इसी कड़ी में प्रदेश के अन्य 12 कैंटोनमेंट अस्पतालों के साथ एमओयू साइन किया जाएगा। इसके लिए स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज) द्वारा औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। एमओयू के बाद लखनऊ, कानपुर, मेरठ, बरेली, वाराणसी, अयोध्या, शाहजहांपुर, मथुरा, आगरा, फतेहपुर, झांसी और बबीना के कैंटोनमेंट अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों का इलाज सुनिश्चित किया जाएगा। इन अस्पतालों के जुड़ने से प्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत पैनल्ड अस्पतालों की संख्या और अधिक बढ़ जाएगी। साचीज की एसीईओ डॉ. पूजा यादव ने बताया कि कैंटोनमेंट अस्पतालों के साथ समन्वय से आयुष्मान कार्ड धारक को बेहतर विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध होंगी। विशेष रूप से गंभीर और जटिल बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। साथ ही, गंभीर रोगियों के लिए पिक एंड ड्रॉप की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने बताया कि सभी कैंटोनमेंट अस्पतालों में आवश्यक प्रक्रियाओं को आयुष्मान योजना के अनुरूप ढाला जा रहा है। एमओयू के बाद इन अस्पतालों को योजना के पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जिससे मरीजों के इलाज, बिलिंग और क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सकेगी। योगी सरकार की पहल से सेना क्षेत्र के अस्पतालों की आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ आम नागरिकों को भी मिलेगा। स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाला दबाव भी संतुलित होगा। कैंटोनमेंट अस्पतालों को आयुष्मान योजना से जोड़ने का निर्णय गरीब और जरूरतमंद नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।

चार दिवसीय विदेश यात्रा में उत्तर प्रदेश का भविष्य गढ़ने के लिए हर क्षण का उपयोग

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सिंगापुर और जापान का दौरा सिर्फ विदेशी दौरा भर नहीं था, बल्कि इस यात्रा ने दुनिया के सामने उनकी कर्मयोगी की छवि को और पुख्ता किया है। चार दिनों तक बिना थके, अनवरत और अदम्य ऊर्जा के साथ उद्यमियों, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और उद्योग संस्थानों में भ्रमण के साथ उन्होंने भारतीय प्रवासियों के साथ संवाद किया। यह उनकी कर्मठता, अनुशासन और अपने राज्य के विकास के प्रति प्रतिबद्धता का बेमिसाल उदाहरण है। सीएम योगी की मेहनत रंग भी लाई और उद्यमियों ने उत्तर प्रदेश में निवेश के प्रति जिस तरह उत्साह दिखाया, वह इस बात का प्रमाण है कि विश्व में यूपी को लेकर धारणा बदली है।  सीएम योगी का यह दौरा सामान्य नहीं था। सिंगापुर और जापान का समय भारत से क्रमशः ढाई और साढ़े तीन घंटे आगे है। लंबी विमान यात्रा के बाद समय के अनुकूलन की चुनौती भी थी, लेकिन मुख्यमंत्री के हाव-भाव और सक्रियता में कहीं इसका रंचमात्र भी असर देखने को नहीं मिला। सीएम योगी सुबह छह बजे सिंगापुर पहुंचे और महज ढाई घंटे बाद ही वहां भारत के राजदूत से मिले। इसके बाद बैठकों और औद्योगिक इकाइयों के भ्रमण और उद्योगपतियों से मिलने का सिलसिला शुरू हुआ, जो रात दस बजे रात्रिभोज के साथ समाप्त हुआ। दूसरे दिन भी सुबह पौने नौ बजे से ही मुख्यमंत्री सक्रिय हो गए और रात साढ़े आठ बजे तक वह ‘मिशन सिंगापुर’ पूरा कर चुके थे।  कोई और होता तो इतनी व्यस्तता के बाद शायद रात्रि विश्राम को प्राथमिकता देता, लेकिन सीएम योगी सिंगापुर से रात 10 बजे टोक्यो (जापान) के लिए रवाना हो गए। घंटों की थकाऊ यात्रा के बाद वह सुबह लगभग छह बजे टोक्यो के हानेडा हवाई अड्डे पहुंचे और 25 फरवरी को सवा नौ बजे मित्सुई कंपनी के प्रतिनिधिमंडल से मिलने के लिए तैयार थे। जापान में भी सीएम योगी ने बिना रुके, अनवरत ऊर्जा के साथ दो दिन तक दर्जनों उद्यमियों से मुलाकात की, रोड शो मे भाग लिया और फिर लंबी यात्रा के बाद 27 फरवरी को तड़के अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ लखनऊ एयरपोर्ट पर थे।  इस अथक मेहनत का परिणाम अब उत्तर प्रदेश के विकास में मील के पत्थर के रूप में सामने आया है। डेढ़ लाख करोड़ रुपये के एमओयू और ढाई लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आगे चलकर उत्तर प्रदेश का भविष्य बदलेंगे। यह इसलिए संभव हो सका क्योंकि मुख्यमंत्री ने हर क्षण को प्रदेश के विकास के लिए साधन के रूप में इस्तेमाल किया। राजनेताओं की विदेश यात्राओं में अक्सर शिष्टाचार भेंट और औपचारिकता भरे कार्यक्रम समय नष्ट कर देते हैं, लेकिन सीएम योगी के इस दौरे में हर बैठक का एजेंडा स्पष्ट था। उनके इस दौरे में कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं, किसी दर्शनीय स्थल का भ्रमण नहीं, बस मिनट टू मिनट बैठकें, रोड शो और उन औद्योगिक संस्थानों का भ्रमण रहा, जिनके सहयोग से उत्तर प्रदेश के भविष्य को गढ़ा जा सके। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनाए जा सकें अर्थात औपचारिकताओं में न्यूनतम समय और परिणामों पर अधिकतम ध्यान।  इन चार दिनों में सीएम योगी जीवंत कर्मयोग का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरे। हालांकि उनका संपूर्ण जीवन स्वअनुशासन की मिसाल है। राजधानी लखनऊ में उनकी दिनचर्या ऐसी ही नियमबद्ध होती है। तड़के उठकर समाचार पत्रों के माध्यम से प्रदेश की गतिविधियों की जानकारी, उसके बाद जनता दर्शन में आम नागरिकों की समस्याओं को सुनना, अधिकारियों को निर्देश देना और फिर दिनभर बैठकों व कार्यक्रमों का सिलसिला और रात में विभागीय कार्यों की समीक्षा। गोरखपुर प्रवास में भी गोसेवा के बाद वह जनता दर्शन और फिर लगातार कार्यक्रमों में शामिल रहते हैं। हर दिन का उपयोग, हर क्षण का उपयोग। उनका पूरा व्यक्तित्व आध्यात्मिक साधना और प्रशासनिक दक्षता का संगम है। सादगीपूर्ण जीवन शैली और विकास का आधुनिक दृष्टिकोण उन्हें विशिष्ट बनाता है।  

यूट्यूबर सलीम के मामले का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया संज्ञान, कड़ी कार्रवाई के निर्देश

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद में यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर हुए जानलेवा हमले का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश में आतंक फैलाने और कानून-व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने पुलिस प्रशासन को आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित करने और मामले की निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि शुक्रवार सुबह लोनी क्षेत्र के अल्वी नगर निवासी सलीम वास्तिक पर अली गार्डन कॉलोनी स्थित उनके कार्यालय में हमला किया गया था। जानकारी के अनुसार, बाइक सवार दो अज्ञात हमलावर सलीम के दफ्तर में घुसे और चाकुओं से उनके गले व पेट में कई वार किए। गंभीर रूप से घायल सलीम को तत्काल दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका ऑपरेशन किया गया। परिजनों के अनुसार, सलीम की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। इस मामले में सलीम के बेटे उस्मान की तहरीर पर शक के आधार पर पांच लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपियों में एआईएमआईएम नेता अजगर, अशरफ, शाहरुख, सोनू तथा भाटी बिल्डर शामिल हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दस विशेष टीमें गठित की गई हैं। इन टीमों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि फरार आरोपितों तक शीघ्र पहुंचा जा सके। बीती रात पुलिस ने चार स्थानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इनमें दो ठिकाने दिल्ली और दो गाजियाबाद में थे। छापेमारी के दौरान कुछ अहम सुराग हाथ लगे हैं, जिनके आधार पर दबिश और तेज कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हमले के पीछे संभावित रंजिश, वैचारिक मतभेद और अन्य कारणों की भी जांच की जा रही है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। प्रशासन ने क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर सतर्कता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद पुलिस कार्रवाई तेज कर दी गई है। प्रदेश सरकार ने दोहराया है कि कानून का राज सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार की हिंसा या असामाजिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  

केंद्रीय मंत्री व प्रदेश के मत्स्य मंत्री ने किया दो दिवसीय उप्र मीन महोत्सव एवं एक्वा एक्सपो का शुभारम्भ

13.3 लाख मीट्रिक टन हुआ उत्तर प्रदेश का वार्षिक मत्स्य उत्पादन  केंद्रीय मंत्री व प्रदेश के मत्स्य मंत्री ने किया दो दिवसीय उप्र मीन महोत्सव एवं एक्वा एक्सपो का शुभारम्भ  उत्तर प्रदेश में पहली बार हो रहा मीन महोत्सव  प्रदेश में मत्स्य विकास दर 115.5 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में एनएफडीबी सेंटर खोलने की दिशा पर भी किया जाएगा कार्य एक्सपो में 50 प्रतिष्ठित कंपनियों द्वारा लगाई गई औद्योगिक प्रदर्शनी एवं स्टॉल लखनऊ  उत्तर प्रदेश में पहली बार मीन महोत्सव (एक्वा एक्सपो-2026) का आयोजन किया गया है। शुक्रवार को केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और पंचायती राज राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल व प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने इसका शुभारम्भ किया। इसमें देश-प्रदेश के 1000 मत्स्य पालक उपस्थित रहे, जबकि 50 प्रतिष्ठित कंपनियों द्वारा औ‌द्योगिक प्रदर्शनी एवं स्टॉल लगाये गये। विभिन्न प्रकार के मत्स्य व्यंजनों के लिए फिश फूड कोर्ट एवं प्रोटीन जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। महोत्सव में बताया गया कि मत्स्य पालन में उत्तर प्रदेश भारत में तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। राज्य का वार्षिक मत्स्य उत्पादन गत 06 वर्षों में दोगुना होकर 13.3 लाख मीट्रिक टन हुआ है। केंद्रीय मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि किसानों की आय में वृ‌द्धि, उन्नत पशुपालन एवं उन्नत मत्स्य पालन से ही सम्भव है। उन्होंने कृषि दर पर मत्स्य पालकों को बिजली की आपूर्ति एवं उ.प्र. में एन.एफ.डी.बी के सेन्टर खोलने की दिशा में कार्य करने को भी कहा। प्रदेश के मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने बताया कि राज्य में मत्स्य विकास दर 115.5 प्रतिशत है। उन्होंने अमृत सरोवरों को मछली पालन योग्य बनाने, तालाबों के पट्टे समय से दिलाने, मत्स्य पालन में विज्ञान एवं तकनीक के उपयोग पर विशेष बल दिया। उन्होंने अनुदान के साथ-साथ तकनीकी ज्ञान देकर मत्स्य पालकों के विकास एवं सशक्तीकरण पर जोर दिया।  अपर मुख्य सचिव मत्स्य मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि प्रदेश में 6 लाख से अधिक जलक्षेत्र उपलब्ध हैं। मत्स्य पालक, विशेषज्ञ, उद्यमी एवं निवेशक एक साथ चर्चा कर प्रसंस्करण तथा मूल्य संवर्धन के माध्यम से मत्स्य उत्पादन, उत्पादकता एवं किसानों की आय में वृद्धि कर सकते हैं। पशु चिकित्सा विज्ञान विश्ववि‌द्यालय एवं गो-अनुसन्धान संस्थान (दुवासु) मथुरा में मत्स्य विज्ञान पर शोध कार्य प्रारम्भ हो गया है। महानिदेशक मत्स्य धनलक्ष्मी के. ने कहा कि मत्स्य पालन ग्रामीण आजीविका का मुख्य साधन है। मत्स्य पालन में उत्तर प्रदेश भारत में तीसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक राज्य है। राज्य का वार्षिक मत्स्य उत्पादन गत 06 वर्षों में दोगुना होकर 13.3 लाख मीट्रिक टन हुआ है। विजन-2047 में उ.प्र. अंतर्देशीय मत्स्य पालन में प्रथम राज्य बन जायेगा। इसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री जी द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट में मत्स्य विभाग के लिए बड़े उपहार की सौगात दी गयी है। मत्स्य पालन से जुड़े किसानों की आय वृ‌द्धि हेतु कुल 114.20 करोड़ की राशि राज्य सहायतित नई मांग के रूप में स्वीकृत की गयी है। इसके तहत राज्य में इंटीग्रेटेड एक्वापार्क की स्थापना एवं 03 मत्स्य मण्डी स्थापित करने के लिए 100 करोड़ रूपये बजट का प्रावधान किया गया है। राज्य में मोती की खेती को बढ़ावा देने के लिए 03 करोड़ रुपये बजट प्रावधान किया गया है। जनपद गोरखपुर में वर्ल्डफिश प्रोजेक्ट सेन्टर की स्थापना हेतु 06 करोड़ रुपये बजट प्रावधान किया गया है। यह महोत्सव राज्य में मत्स्य पालन को औ‌द्योगिक स्तर पर विकसित होने में मदद करेगा और आने वाले समय में किसानों की आय की बढ़ोतरी में मददगार होगा।  डॉ. दीपा सुमन, एन.एफ.डी.बी. ‌द्वारा केन्द्र सरकार की योजनाओं- प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना, प्रधानमंत्री किसान समृ‌द्धि योजना तथा फिशरीज एवं एक्वाकल्चर डेवलपमेन्ट फन्ड की जानकारी दी गयी। इस अवसर पर आलोक बिसवाल (डेलॉयट) द्वारा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डालर बनाने में मत्स्य की भूमिका के विषय में प्रस्तुतिकरण किया गया। रजनीश कुमार (एक्वाएक्स) द्वारा मत्स्य विकास की सम्भावनाओं पर प्रस्तुतिकरण किया गया तथा प्रोटीन की उपलब्धता एवं रोजगार सृजन में मत्स्य क्षेत्र के महत्व पर प्रकाश डाला गया। तकनीकी सत्र के प्रथम दिन डा. संजय श्रीवास्तव (मेधा हैचरी महराजगंज) द्वारा मत्स्य बीज उत्पादन, श्री राजीव रंजन सिंह (आर.एन.आर. एक्वा लखनऊ) द्वारा कैट फिश फार्मिंग, श्री मनोज शर्मा द्वारा झींगा पालन, श्री मनीष वर्मा द्वारा केज कल्चर एवं श्री शुभम सिंह द्वारा आर्नामेन्टल फिश फार्मिंग पर प्रेजेन्टेशन दिया गया। इस दौरान उ.प्र. मत्स्य विकास निगम के अध्यक्ष रमाकान्त निषाद, उ.प्र. मत्स्य जीवी सहकारी संघ के सभापति वीरू साहनी, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार के.वी. राजू, सलाहकार जी.एन. सिंह, विशेष सचिव मत्स्य सुनील कुमार वर्मा, निदेशक मत्स्य एन.एस. रहमानी, संयुक्त निदेशक मत्स्य अनिल कुमार, प्रबन्ध निदेशक एक्वाएक्स समीर पात्रा, अध्यक्ष एक्वाएक्स वीनू दन्तूलूरी समेत देश एवं प्रदेश के प्रसिद्ध वैज्ञानिक, उ‌द्यमी तथा प्रदेश के विभिन्न जनपदों से लगभग 1000 मत्स्य पालक सम्मिलित हुए।

पिछले वर्ष के सापेक्ष आबकारी से अब तक मिला 13% अधिक राजस्व

फरवरी तक उत्तर प्रदेश में हुआ ₹.1.96 लाख करोड़ से अधिक का राजस्व संग्रह पिछले वर्ष के सापेक्ष आबकारी से अब तक मिला 13% अधिक राजस्व मुख्यमंत्री ने की चालू वित्तीय वर्ष की फरवरी मासांत तक के कर-करेत्तर राजस्व प्राप्तियों की समीक्षा, कहा, लक्ष्य के सापेक्ष तेज करें प्रयास जीएसटी, वैट आबकारी, परिवहन सहित हर सेक्टर में बढ़ा राजस्व संग्रह, मुख्यमंत्री ने जताया संतोष होली पर अलर्ट रहे प्रशासन, न बने-न बिके अवैध और जहरीली शराब: मुख्यमंत्री लैंड रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन व रजिस्ट्री कार्यालयों के आधुनिकीकरण को तेज करें: मुख्यमंत्री परिवहन निगम की बसों की फिटनेस सुनिश्चित करें, नए रुट चिन्हित कर निजी क्षेत्र के सहयोग से बस सेवा शुरू करें: मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने शुक्रवार को आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के फरवरी मासांत तक के कर एवं करेत्तर राजस्व की अद्यतन स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। जीएसटी, वैट, आबकारी, स्टाम्प एवं पंजीकरण, परिवहन, ऊर्जा, भू-राजस्व तथा खनन विभागों द्वारा प्रस्तुत लक्ष्यों और उपलब्धियों का आकलन करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राजस्व वृद्धि प्रदेश में विकास कार्यों की गति को निर्धारित करती है। उन्होंने सभी विभागों को पारदर्शिता, दक्षता और नवाचार-आधारित कार्यप्रणाली के साथ लक्ष्य प्राप्ति के प्रयास तेज करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कर-राजस्व का वार्षिक लक्ष्य ₹2,95,000 करोड़ निर्धारित है, जिसके सापेक्ष फरवरी 2026 तक ₹1,96,177 करोड़ की प्राप्ति दर्ज की गई है। राज्य कर (जीएसटी + वैट) का लक्ष्य ₹1,75,725 करोड़ है, जिनके मुकाबले अभी तक ₹1,03,770 करोड़ का संग्रह प्राप्त हुआ है। इसमें जीएसटी के तहत ₹75,195 करोड़ तथा वैट के अंतर्गत ₹28,575 करोड़ की प्राप्ति शामिल है। राज्य कर विभाग ने बताया कि जीएसटी 2.0, एआई आधारित जोखिम विश्लेषण, बड़े पैमाने पर स्क्रूटनी, ई-इनवॉइसिंग और ई-वे बिल की प्रभावी निगरानी जैसे प्रयासों से कर अनुपालन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। एआई आधारित 1.59 लाख करदाताओं की जांच, 75 जनपदों में संवाद कार्यक्रम, फर्जी आईटीसी पर नियंत्रण तथा ₹3,117 करोड़ की वसूली विभाग के प्रमुख परिणाम रहे। आबकारी विभाग की ओर से बताया कि विभाग का वार्षिक लक्ष्य ₹63,000 करोड़ है, जिसके सापेक्ष फरवरी 2026 तक ₹48,501 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया जा चुका है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 13.2 प्रतिशत अधिक है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए दुकानों के नवीनीकरण की दर 93.75 प्रतिशत दर्ज की गई है। विभाग ने उपभोग आधारित रणनीति, दुकानों के नवीनीकरण, लाइसेंस शुल्क, असग्रम मांग पत्र तथा थोक एवं ब्रांड नवीनीकरण जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से मार्च में लगभग ₹9,050 करोड़ की अतिरिक्त प्राप्ति का रोडमैप प्रस्तुत किया। वर्षांत तक राजस्व लगभग ₹57,550 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग ने वर्ष 2025-26 के अपने वार्षिक लक्ष्य ₹38,150 करोड़ के सापेक्ष फरवरी तक ₹29,487 करोड़ की प्राप्ति दर्ज की। विभाग ने यमुना एक्सप्रेसवे, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, गाजियाबाद, बरेली, गोरखपुर और वाराणसी सहित विभिन्न विकास प्राधिकरणों की आगामी आवासीय एवं वाणिज्यिक परियोजनाओं से संभावित राजस्व का भी विवरण प्रस्तुत किया। खनन पट्टों के नवीनीकरण, अवशेष संपत्तियों के पंजीकरण अभियान, टोल प्लाज़ा मामलों के निस्तारण तथा सर्किल दरों के वैज्ञानिक पुनरीक्षण को राजस्व संवर्धन के प्रभावी उपायों के रूप में प्रस्तुत किया गया। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभाग का वार्षिक लक्ष्य ₹14,000 करोड़ है, जिसके मुकाबले फरवरी तक ₹11,005 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। वाहन पंजीकरण में सुधार, कर अदायगी की बेहतर व्यवस्था, तकनीक आधारित निगरानी तथा प्रवर्तन कार्यवाहियों की मजबूती से विभाग ने राजस्व वृद्धि दर्ज की है। कर वसूली शिविर, निगरानी अभियान और डिजिटल मॉनिटरिंग को आगामी अवधि में और तीव्र करने की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई। बैठक में भू-राजस्व एवं ऊर्जा विभाग ने संयुक्त रूप से फरवरी तक ₹3,414 करोड़ की उपलब्धि की जानकारी दी, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 12.6 प्रतिशत अधिक है। खनन एवं भू-तत्व विभाग ने बताया कि विभाग वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित ₹6,000 करोड़ के लक्ष्य के सापेक्ष फरवरी तक ₹3,597 करोड़ के राजस्व की प्राप्ति कर चुका है। विभाग ने बताया कि खनन क्षेत्रों की डिजिटल मैपिंग, ओवरलोडिंग की ज़ीरो पॉइंट रोकथाम, जीपीएस आधारित ट्रैकिंग, विभिन्न राज्यों के पोर्टलों से एपीआई इंटीग्रेशन तथा अंतरराज्यीय समन्वय के परिणामस्वरूप राजस्व संग्रह और अधिक सुदृढ़ हुआ है। विभाग ने मार्च में लगभग ₹600 करोड़ की संभावित प्राप्ति की जानकारी दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि बढ़ता हुआ राजस्व प्रदेश में बुनियादी ढाँचे, सामाजिक कल्याण, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को गति प्रदान करता है। उन्होंने सभी विभागों को टीम भावना, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के साथ निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री जी ने आबकारी विभाग को होली पर्व के दौरान विशेष सतर्कता बरतने तथा अवैध और जहरीली शराब के किसी भी प्रकार के उत्पादन एवं बिक्री को पूर्णतः रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग से लैंड रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन की प्रगति की जानकारी लेते हुए रजिस्ट्री कार्यालयों के आधुनिकीकरण की गति बढ़ाने को कहा। परिवहन विभाग को मुख्यमंत्री ने परिवहन निगम की बसों की फिटनेस, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने की ठोस कार्ययोजना और नए रूट चिन्हित कर निजी बस संचालकों के सहयोग से बेहतर परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री का निर्देश, जिन आंगनबाड़ी केंद्रों के खुद के भवन नहीं, उनका कराएं निर्माण

हर आंगनबाड़ी केंद्र का होगा स्वयं का भवन-मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री का निर्देश, जिन आंगनबाड़ी केंद्रों के खुद के भवन नहीं, उनका कराएं निर्माण  प्रदेश में 1.89 लाख केंद्र, 76 हजार को नए भवनों की आवश्यकता सीएसआर से सहयोग लें, राज्य सरकार भी करेगी सहयोग: मुख्यमंत्री  प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल की उपयोगिता पर करें विचार: मुख्यमंत्री   नए आंगनबाड़ी भवनों में होगा आधुनिक व समावेशी सुविधाओं का समावेश लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया है कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को उनके स्वयं के भवनों में संचालित करने हेतु विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में 03 से 06 वर्ष आयु के बच्चे आते हैं और ये केंद्र प्री-प्राइमरी के रूप में भी उपयोगी हैं। ऐसे में बच्चों की सुविधा, पठन-पाठन की उत्कृष्ट व्यवस्था तथा भवनों का आकर्षक स्वरूप सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 1.89 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें से लगभग 76 हजार केंद्र अभी अपने स्वयं के भवनों में नहीं चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन भवनों के निर्माण में कॉरपोरेट-सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) का सहयोग लिया जा सकता है और आवश्यकतानुसार राज्य सरकार भी वित्तीय सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल अपनाया जा सकता है। उन्होंने एक मानक मॉडल तैयार कर विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी कहा कि जहाँ भी संभव हो, प्राथमिक विद्यालयों के प्रांगण में ही बाल-मित्र आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण किया जाए, ताकि शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य से संबंधित एकीकृत सेवाएँ एक ही स्थान पर सहजता से उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा के दौरान कहा कि बच्चों, गर्भवती माताओं और समुदाय को सुरक्षित, स्वच्छ तथा आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल भवन नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों की बुनियाद हैं। राज्य सरकार आंगनबाड़ी ढाँचे को पूरी तरह रूपांतरित करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। यह मिशन ‘स्वस्थ बचपन-समर्थ उत्तर प्रदेश’ को नई गति देगा। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रस्तावित नए आंगनबाड़ी भवनों का मॉडल समावेशी एवं आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा। इसमें पेयजल सुविधा, विद्युत व्यवस्था, शौचालय, खेल-आधारित गतिविधियों हेतु पर्याप्त ‘प्ले एरिया’, किचन शेड, हॉट-कुक्ड मील की व्यवस्था, लो-हाइट वॉश यूनिट, बाल-मित्र शौचालय, गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु पृथक कक्ष तथा रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सहित पोषण वाटिका जैसी व्यवस्थाएँ शामिल होंगी।

SC का बड़ा फैसला: नीतीश कटारा के दोषी विकास को फर्लो, परिवार संग मना सकेगा होली

लखनऊ सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश कटारा की हत्या के जुर्म में बिना किसी छूट के 25 साल की जेल की सजा काट रहे विकास यादव को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उसे 7 मार्च तक 'फर्लो' पर जेल से रिहा करने का आदेश दिया है ताकि वह होली के दौरान अपने परिवार के साथ समय बिता सके। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने यह आदेश पारित किया है। फर्लों का आदेश देते हुए कोर्ट ने कहा कि यादव ने बिना किसी छूट के 23 साल जेल में बिताए हैं, जबकि उसे बिना किसी छूट के 25 साल जेल में बिताने हैं। कोर्ट ने ऑर्डर दिया, "अब फर्लो इस आधार पर मांगा गया है कि वह होली के दौरान समय बिताना चाहता है, तो मेरिट्स पर जाए बिना, हम पिटीशनर को 7 मार्च तक फर्लो पर रिहा करने की इजाजत देते हैं।" इस दौरान प्रतिवादी पक्ष ने यादव को फर्लो देने का पुरजोर विरोध किया लेकिन कोर्ट ने उसकी असहमति से इनकार कर दिया। इससे पहले 11 फरवरी को, दिल्ली हाई कोर्ट ने विकास यादव की तीन हफ़्ते की फरलो की अर्जी खारिज कर दी थी। आप उसे फांसी देना चाहते हैं? है ना? जस्टिस सुंदरेश ने कहा, "आप उसे फांसी देना चाहते हैं? है ना? इस मामले में आपकी सुनवाई का क्या मतलब है? 23 साल बाद, आप चीज़ों को जाने नहीं देना चाहते। हमें चीज़ों को जाने देना चाहिए। ज़िंदगी में हमारी सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह है कि हम चीज़ों को जाने नहीं देते। उसने जो किया, सो हो गया।" जज ने आगे कहा कि ऐसी राहत देने से कभी-कभी कैदी को सुधारने में मदद मिल सकती है। बार एंड बेंच के मुताबिक, जस्टिस सुंदरेश ने कहा, “मद्रास हाई कोर्ट में, मैंने उन सभी को फर्लो दिया था जिन्हें बम ब्लास्ट केस में उम्रकैद की सज़ा हुई थी। वह समय खत्म होने के बाद और जब वे जेल लौटे, तो उनका बर्ताव बदल गया था। समय के साथ, उनमें पछतावा होने लगा।” 2002 में नीतीश कटारा का अपहरण फिर मर्डर बता दें कि विकास यादव और उसके भाई विशाल यादव को 2002 में 25 साल के नीतीश कटारा को किडनैप कर उसका मर्डर करने का दोषी पाया गया था। ट्रायल के दौरान इस मामले को कटारा के विकास की बहन के साथ रिश्ते की वजह से हुई ऑनर किलिंग बताया गया था। कटारा को पहले किडनैप किया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई, उसकी जली हुई बॉडी गाजियाबाद के पास मिली थी। उच्चतम न्यायालय ने पूर्व सांसद डीपी यादव के बेटे विकास यादव और उसके रिश्तेदार विशाल यादव की भूमिका को लेकर तीन अक्टूबर 2016 को उन्हें बिना किसी छूट के 25 वर्ष की कारावास की सजा सुनाई थी।  

देशविरोधी पोस्ट पर आरोपी को बेल, हाईकोर्ट बोला- शर्त माननी होगी तभी मिलेगी राहत

प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद इंस्टाग्राम पर कथित रूप से ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार युवक फैजान को जमानत दे दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने फैजान बनाम स्टेट ऑफ यूपी मामले में पारित किया। पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट को लेकर पुलिस ने कार्रवाई की थी। एटा से फैजान की हुई थी गिरफ्तारी फैजान को मई 2025 में एटा जिले के जलेसर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया, जिनमें धारा 152 भी शामिल थी। यह धारा पूर्व में भारतीय दंड संहिता में राजद्रोह से जुड़े प्रावधान का स्थान लेती है। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपी का सोशल मीडिया पोस्ट देश की संप्रभुता और प्रतिष्ठा के खिलाफ था और इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता था। देश के खिलाफ नहीं सोशल मीडिया पोस्ट जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता एनआई जाफरी ने तर्क दिया कि आरोपी द्वारा की गई पोस्ट भले ही आपत्तिजनक प्रतीत हो, लेकिन उसमें भारत के खिलाफ कोई अपमानजनक, अवमाननापूर्ण या विद्रोह भड़काने वाला कथन नहीं था। उन्होंने कहा कि केवल किसी दुश्मन देश के समर्थन का उल्लेख करना स्वतः धारा 152 के तहत अपराध नहीं बनता। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि अधिकतम यह मामला धारा 196 बीएनएस के तहत आ सकता है, जिसकी सुनवाई मजिस्ट्रेट द्वारा की जा सकती है और जिसमें तीन से पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। कई शर्तों के साथ आरोपी को जमानत राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध किया गया। हालांकि अदालत ने अपराध की प्रकृति, उपलब्ध साक्ष्यों, आरोपी की कथित संलिप्तता, जेलों में भीड़भाड़ और निचली अदालतों में लंबित मामलों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए आरोपी को जमानत देने का निर्णय लिया। अदालत ने कड़ी शर्तें लगाते हुए कहा कि आरोपी सोशल मीडिया पर कोई भी ऐसा पोस्ट अपलोड नहीं करेगा जो देश की प्रतिष्ठा या किसी समुदाय के खिलाफ हो। साथ ही वह मामले के गवाहों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा और मुकदमे की कार्यवाही में पूरा सहयोग करेगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया गया तो उसकी जमानत को निरस्त भी जा सकता है।  

Haldiram की 112 किलो मिलावटी मिठाइयाँ होली से पहले पकड़ी, एक्सपायर्ड सामग्री भी थी शामिल

लखनऊ   नवाबों के शहर लखनऊ में होली से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. यहां मिलावट और एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थों पर कड़ा एक्‍शन लिया गया है. इस दौरान यहां एक स्टोरेज वेयरहाउस पर छापेमारी की गई तो इस दौरान 1 क्विंटल 12 किलो एक्सपायर्ड मिठाई बरामद की गईं. यहां तक की टीम ने मौके पर ही एक्सपायर्ड सोनपापड़ी और राजभोग को नष्ट कर दिया. हैं ना चौंकाने वाली बात? जी, लेकिन बात और बड़ी है.. क्‍योंकि ये मिठाइयां कहीं और नहीं, बल्कि फैजुल्लागंज स्थित हल्दीराम (Haldiram) के यहां पाई गईं. वहीं, अधिकारियों ने छापेमारी में असॉर्टेड पेड़ा, रसगुल्ला, गुलाब जामुन, पेठा और गुजिया के नमूने भी जांच के लिए सील किए हैं. पूरे शहर में चलाए गए अभियान के दौरान कुल 10,415 किलो मसाले और खोया भी सीज किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत 55.91 लाख रुपये आंकी गई है. ऐशबाग कोल्ड स्टोरेज पर भी कार्रवाई ऐशबाग स्थित स्वरूप कोल्ड स्टोरेज से 8,499 किलो काली मिर्च और 378 किलो खोया जब्त किया गया. सभी संदिग्ध खाद्य पदार्थों के कुल 15 नमूने लैब जांच के लिए भेजे गए हैं. महानगर इलाके के ग्लोब कैफे से पनीर और गुजिया के सैंपल लिए गए, जबकि 112 किलो खाद्य सामग्री (करीब 45 हजार रुपये मूल्य) को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया. खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि त्योहारों और शादियों के सीजन को देखते हुए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है, ताकि लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ मिल सकें. जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.