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कानपुर अस्पताल में हादसा: नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही से नवजात की मौत, डॉक्टरों का भागना

 कानपुर कानपुर के बिठूर इलाके में स्थित राजा नर्सिंग होम में शाम अरुण निषाद की नवजात बच्ची की वार्मर मशीन में जलने से मौत हो गई. शालू नाम की महिला ने शाम करीब 4-5 बजे एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया था. अस्पताल की नर्सों ने बच्ची को ठंड से बचाने के लिए उसे आईसीयू की वार्मर मशीन पर रखा था. नर्सिंग स्टाफ मशीन चलाकर उसकी निगरानी करना भूल गया, जिससे मशीन का तापमान अत्यधिक बढ़ गया. इस तकनीकी और मानवीय लापरवाही के कारण मासूम का शरीर काला पड़ गया और उसकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई. परिजनों का हंगामा, डॉक्टर फरार  बच्ची के जन्म के बाद परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन लापरवाही ने इसे मातम में बदल दिया. जब परिजनों ने बच्ची को देखने की जिद की, तो नर्सों ने उन्हें टाल दिया. शक होने पर परिजन जबरन आईसीयू में घुसे तो देखा कि मासूम का सिर और हाथ बुरी तरह जल चुके थे. इस घटना के बाद अस्पताल में भारी हंगामा मच गया. स्थिति बिगड़ती देख डॉक्टर विवेक मिश्रा और पूरा स्टाफ अस्पताल छोड़कर मौके से फरार हो गया. पुलिस की कार्रवाई   सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला. डीसीपी एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और अस्पताल के आईसीयू को सील कर दिया गया है.स्वास्थ्य विभाग को भी इस संबंध में सूचित किया गया है. पुलिस का कहना है कि परिजनों की तहरीर के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. उधर, अस्पताल संचालक ने इसे महज एक 'हादसा' करार दिया है. पीड़ित परिवार का बुरा हाल यह अरुण की पहली संतान थी, जिसकी मौत ने परिवार को तोड़कर रख दिया है. बच्ची की दादी प्रेमा और अन्य रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है. सबसे दुखद पहलू यह है कि अभी तक बच्ची की मां शालू को उसकी मौत की खबर नहीं दी गई है. परिजनों की मांग है कि इस आपराधिक लापरवाही के जिम्मेदार लोगों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और अस्पताल का लाइसेंस रद्द हो.

गांव की महिलाओं को अब पानी के लिए नहीं तलाश करने पड़ते कुंए

सिर्फ आधार कार्ड दिया और कनैक्शन हो गया, सार्वजनिक नल भी लगे लखनऊ, बुंदेलखंड के लोगों के लिए यह किसी सपने से कम नहीं कि आज उन्हें उनके घर में ही पानी मिल रहा है। इस क्षेत्र में पानी की किल्लत से भुखमरी और गरीबी की जाने कितनी कहानियां हैं। सिर पर घड़ा रखकर दूरदराज से पानी लाती एक महिला की तस्वीर ही यहां के जिलों की पहचान बन गई थी। सालों साल तक यहां की महिलाओं ने पानी का संकट भुगता है। दूरदराज के कुंओं तक जाकर पानी खींचने के साथ ही हैंडपंप पर पानी के लिए लाइनें लगाई हैं। लेकिन अब यह सब अतीत की बातें हैं। अब सड़कों पर दूर से ही दिखनेवाली पानी की टंकियां उम्मीदों की जलधारा हैं। बात महोबा की करें तो यहां के लोगों ने पानी की किल्लत से लंबे समय तक दुर्दिन भरे दिन देखे हैं। कभी यहां वाटर ट्रेन से पानी पहुंचाने की नौबत आ गई थी। लोग घड़ा भर पानी के लिए जाने कहां-कहां तक भटकते थे। अब यहां दूर से ही दिखाई देने वाले वाटर टैंक नई कहानी कहते हैं। इस जिले में जल जीवन मिशन के तहत पांच परियोजनाओं के सहारे एक लाख 12 हजार से अधिक घरों को पाइपलाइन की कनेक्टिविटी दी जा चुकी है। हालांकि इसके लिए 1131 किलोमीटर सड़कों को क्षतिग्रस्त किया गया। क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के दौरान लोगों को थोड़ी परेशानी का सामना अवश्य करना पड़ा। महोबा के अरशद कहते हैं कि कोई योजना शुरू होने पर थोड़ी-बहुत परेशानी तो होती ही है। लेकिन, अब हर घर नल यहां के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद है। चित्रकूट में सिलौटा ग्राम मुस्तकिल समूह योजना की बात करें तो इससे जुड़े विकास खंड पहाड़ी, रामनगर और मानिकपुर में सवा लाख लोगों के लिए पानी की समस्या खत्म हो गई है। मानिकपुर के उन लोगों का दर्द महसूस कीजिए जो कभी लगभग एक किमी दूर से पानी लाया करते थे।…और इस समस्या की वजह से वहां लोग अपनी बेटियां ब्याहने को आसानी से तैयार नहीं होते थे। उनके लिए यह पानी जिंदगी है, बच्चों का भविष्य है। योजना के तहत पूरे क्षेत्र में 576 किमी की पाइप लाइन बिछाई जानी है, जिसमें 572 किमी बिछा दी गई है। 17 ओवरहेड टैंक हैं जहां वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से रोज पानी लाया जा रहा। यमुना नदी से पानी लाकर इस प्लांट में संशोधित करके टैंकों में चढ़ाकर लोगों के घरों तक पहुंचाया जा रहा। बरहट की ग्राम प्रधान श्रीमती रज्जन देवी इस योजना का चर्चा करते हुए भावुक हो जाती हैं। कहती हैं कि हम योगी-मोदी सरकार के कृतज्ञ हैं कि उन्होंने हमारे बच्चों को बीमारियों से बचाने का इंतजाम कर दिया। हमारे बच्चे अब नहो-धोकर स्कूल जाते हैं। उनमें स्वच्छता का भाव स्वतः ही आने लगा है। चित्रकूट में सिलौटा के साथ ही रैपुरा, चांदी बांगर ग्राम समूह पेयजल योजनाएं चल रही हैं और यह सारी योजनाएं उम्मीद की वह धारा हैं जिसके बारे में लोगों ने सोचा तक नहीं था। रैपुरा ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत 19570 परिवारों को नल से पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इन सभी घरों में नल लग गए हैं और 60 राजस्व ग्रामों में जलापूर्ति शुरू कर दी गई है। योजना के तहत आच्छादित मदना गांव के निवासी चुनबाद यादव बताते हैं कि हमारी बड़ी समस्या दूर हुई है। अपने लिए पानी का इंतजाम मुश्किल था, जानवरों की तो बात ही दूर। अब हमें परेशान नहीं होना पड़ रहा। लोगों के लिए यह सिर्फ एक नल की बात हो सकती है लेकिन बुंदेलखंड के लिए यह वरदान है। यह वस्तुतः उस संकल्प की सिद्धि है, जिसे मोदी-योगी सरकार ने साधना के रूप में लिया। झांसी के बडा गांव, चिरगांव और बंगरा में अंतिम छोर के गांव तक जल जीवन मिशन की पाइप लाइन बिछ गई है। झासी जिले के बंगरा विकासखंड में स्थित गैरहा ग्राम पंचायत के 65 साल के कामता प्रसाद भावुक हो गए। बोले कि यह दिन देखने के लिए आंखें तरस गईं थीं। जिला मुख्यालय से दूर बसे इस गांव की विवाहिता शगुन बताती हैं कि उन्हें पहले गांव से आधा किमी दूर पानी लेना जाना पड़ता था और बारिश के समय बड़ी मुश्किल होती थी। झांसी जिले के बंगरा ब्लाक की ग्राम पंचायत पचवारा में बहू बन कर जब रागिनी आईं तो उन्हें सरकारी हैंड पंप से पानी ले जाना पडता था। अब वे टोंटी खोलते हुए दिखाती हैं कि देखिये कितना साफ पानी है। गरीब परिवार की बहू खुश है कि मजदूरी करने वाले उनके पति मुकेश कुमार को एक पैसा तक नहीं देना पड़ा और नल का कनेक्शन हो गया। ग्राम पंचायत प्रधान अखिलेश रावत बताते हैं कि उनके गांव में एक हजार कनेक्शन हुए हैं। दलित बाहुल्य गांव में योगी सरकार में बनाए गए आरोग्य मंदिर में भी जल जीवन मिशन के तहत नल लगा है, जहां मरीजों, तीमारदारों के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध है। सरकारी स्कूलों में भी बच्चे स्वच्छ पानी पी रहे हैं। जल जीवन मिशन के अधिशाषी अभियंता रणविजय सिंह बताते हैं कि इस स्कीम के तहत 42 गांव आच्छादित हैं और इन गांवों में 11 हजार 437 कनेक्शन हुए हैं। बांदा का नाम आते ही सूखा, पानी की कमी और प्यास आदि शब्द अपने आप दिमाग में कौंधने लगते थे। अब यहां अमलीकौर पेयजल परियोजना और खटान पेयजल परियोजना से 544 गावों में पानी पहुंचा है। 82266 घरों में कनेक्शन किए जा चुके हैं। बड़ोखर खुर्द ब्लाक के बांधा पुरवा गांव के रहने वाले परदेशी ने बताया कि पहले हमें पानी के लिए पहले परेशान होना पड़ता था। वहीं अब हमको हमारे घरों में ही स्वच्छ पानी मिल रहा है। जल निगम के अधिशासी अभियंता विमल कुमार वर्मा ने बताया कि पाइपलाइन डालने के लिए जिन सड़कों को खोदा गया था। उनको भी ठीक कर दिया गया है। हमीरपुर में भी दो पेयजल परियोजनाएं चल रही हैं जहां 322 में से 320 गांवों में घरों तक नल से पानी पहुंचाया जा रहा है। यहां के लोगों की जिंदगी में यह योजना बहुत महत्वपूर्ण होने जा रही है।

7500 गोशालाएं बनेंगी कैटल फूड सिक्योरिटी हब

हर गोशाला से जुड़ेंगे 50-100 किसान, संरक्षण केंद्र के साथ गोशालाओं को हरा चारा उत्पादन का बेहतर स्रोत बनाएगी योगी सरकार गोशालाओं में बड़े पैमाने पर लगाए जाएंगे सहजन के पौधे व नेपियर घास, किसानों की आमदनी व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती लखनऊ, प्रदेश की गोशालाओं को अब केवल गोवंश संरक्षण तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें कैटल फूड सिक्योरिटी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। योगी सरकार की इस दूरदर्शी पहल के तहत प्रदेश की 7500 गोशालाओं और उनके आसपास के क्षेत्र को हरा चारा उत्पादन का सशक्त केंद्र बनाया जाएगा, जिससे गोवंश संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आमदनी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। संरक्षण से उत्पादन की ओर गोशालाएं उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि “मिशन फॉडर” के नाम से शुरू हो रहे इस प्रदेशव्यापी अभियान का उद्देश्य गोशालाओं को आत्मनिर्भर इकाइयों के रूप में विकसित करना है। इसके तहत हर गोशाला को 50 से 100 किसानों के नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, ताकि चारा उत्पादन, विपणन और उचित मूल्य की व्यवस्थित श्रृंखला तैयार हो सके। इससे किसान भी आत्मनिर्भर बनेंगे और गोशालाओं को सतत रूप से पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध होगा। मोरिंगा-नेपियर से बदलेगी तस्वीर मिशन फॉडर के अंतर्गत गोशालाओं की उपलब्ध भूमि का अधिकतम उपयोग करते हुए मोरिंगा (सहजन) और नेपियर घास का बड़े पैमाने पर रोपण कराया जाएगा। इसमें गन्ना घास, सुबबूल, ढैंचा और मौसमी चारे जैसे लोबिया, मक्का, ज्वार, बाजरा, बरसीम आदि को भी शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश की जलवायु में लगभग 50 प्रकार के पशु चारे सहज रूप से उगाए जा सकते हैं, जिनमें एकदलीय और बहुदलीय दोनों प्रकार के चारे शामिल हैं। यही विविधता इस मिशन की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। दीर्घकालिक समाधान, कम लागत मोरिंगा पौधे लगभग 12–15 वर्षों और नेपियर घास 7–8 वर्षों तक लगातार हरा चारा उपलब्ध कराने में सक्षम हैं। मोरिंगा न केवल उच्च प्रोटीन और खनिज तत्वों से भरपूर है, बल्कि गोशालाओं में प्राकृतिक छाया और जैविक फेंसिंग का भी काम करेगा। वहीं नेपियर घास अपनी उच्च उत्पादन क्षमता और नियमित कटिंग के कारण सतत चारा स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण है। हर गोवंश को पर्याप्त हरा चारा योजना के अनुसार गोशालाओं में संरक्षित प्रत्येक गोवंश को पर्याप्त हरा चारा प्रतिदिन उपलब्ध कराया जाएगा। हरा चारा पोषण की दृष्टि से सूखे चारे की तुलना में अधिक लाभकारी है। इससे गोवंश के स्वास्थ्य तथा दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही चारा उत्पादन में आत्मनिर्भरता से बाहरी निर्भरता घटेगी और गोशालाओं की संचालन लागत में कमी आएगी। हरित आवरण बढ़ेगा, भूमि की उर्वरता सुधरेगी श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में तैयार इस समग्र कार्ययोजना के केंद्र में गोवंश संरक्षण, पोषण सुरक्षा, प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण-शहरी सहभागिता को रखा गया है। मिशन फॉडर के माध्यम से न केवल गोशालाओं का दीर्घकालिक संचालन मजबूत होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर हरित आवरण बढ़ेगा और भूमि की उर्वरता सुधरेगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी योजना प्रदेश सरकार के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा। यह पहल आत्मनिर्भर गोशाला, प्राकृतिक खेती और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उस विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में निर्णायक कदम मानी जा रही है, जिसकी नींव योगी सरकार ने रखी है।

मायावती का सख्त फैसला: बसपा संगठन में बड़े पदों पर चली कैंची

लखनऊ विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए बूथ और सेक्टर स्तर तक संगठन को नए सिरे से खड़ा करने का फैसला लिया है। इसके तहत संगठन में 50 प्रतिशत युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पार्टी प्रमुख ने दो-दो जिला प्रभारियों की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है और उन्हें विधानसभा प्रभारी बनाया गया है। अब विधानसभा अध्यक्ष, महासचिव और प्रभारी अपने-अपने क्षेत्रों में बूथ और सेक्टर गठन की जिम्मेदारी संभालेंगे। 15 हजार नए बूथों पर संगठन का गठन अभी नहीं हुआ निर्वाचन आयोग द्वारा प्रति बूथ मतदाताओं की संख्या 1500 से घटाकर 1200 किए जाने के बाद प्रदेश में बूथों की संख्या 1.62 लाख से बढ़कर 1.77 लाख हो गई है। इसके चलते पहले से गठित बूथ और सेक्टर स्तर के संगठन प्रभावी नहीं रह गए हैं। लगभग 15 हजार नए बूथों पर संगठन का गठन अभी नहीं हुआ है।   एक सेक्टर में औसतन 10 बूथ होते हैं पार्टी के अनुसार एक सेक्टर में औसतन 10 बूथ होते हैं, ऐसे में पूरे प्रदेश में नए सिरे से संगठन खड़ा करने में लगभग तीन माह का समय लग सकता है। जिलाध्यक्षों और मंडल प्रभारियों को इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। कांशीराम और आंबेडकर जयंती धूमधाम से मनाने के निर्देश बसपा प्रमुख ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि पार्टी संस्थापक कांशीराम की जयंती 15 मार्च को लखनऊ और नोएडा में भव्य रूप से मनाई जाए। वहीं 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती भी पूरे उत्साह के साथ मनाने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि 12 मंडलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता लखनऊ में, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह मंडलों के कार्यकर्ता नोएडा स्थित स्मारक पर पहुंचेंगे। संगठन मजबूत करने के लिए जिलों में उतरेंगे शीर्ष नेता एसआईआर और बूथ-सेक्टर गठन का कार्य पूरा होने के बाद पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद, राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र, प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल, विधायक उमा शंकर सिंह और मंडल स्तरीय मुस्लिम भाईचारा प्रभारियों द्वारा जिलों का दौरा किया जाएगा। सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे बैठक में मायावती ने कहा कि अगले वर्ष सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में बसपा ने अकेले दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। हालांकि इसके बाद पार्टी का जनाधार कमजोर हुआ है और वर्तमान में विधानसभा में बसपा का केवल एक विधायक है। पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका था।

काशी, प्रयागराज ही नहीं, मथुरा, प्रतापगढ़, औरया व बदायूं में भी राही टूरिस्ट लॉज का निर्माण व रेनोवेशन

एटा के पटना पक्षी विहार, हरदोई की सांडी झील और बुलंदशहर के नरौरा में भी बनेंगे लॉज लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप प्रदेश में धार्मिक, सांस्कृतिक और इको टूरिज्म को नई पहचान मिली है। प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों काशी, मथुरा, आगरा, अयोध्या, प्रयागराज में पिछले कुछ सालों से देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इसे देखते हुए योगी सरकार राज्य में छोटे शहरों में भी पर्यटन अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) प्रदेश के विभिन्न जनपदों में राही टूरिस्ट लॉज का निर्माण करा रहा है। इसके साथ ही वर्तमान में मौजूद लॉजों का रेनोवेशन व सौंदर्यीकरण भी कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ-साथ नये विकसित किये जा रहे धार्मिक, सांस्कृतिक और इको टूरिज्म स्थलों पर टूरिस्टों को बेहतर आवासीय  व खानपान की सुविधा उपलब्ध कराना है। विभिन्न जनपदों में 11 राही टूरिस्ट लॉजों/बंगलों का निर्माण   पर्यटन विभाग विभिन्न जनपदों में 11 राही टूरिस्ट लॉजों/बंगलों का निर्माण करा रहा है। इन्हें पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। मथुरा के गोकुलगांव, आगरा के बटेश्वर, कासगंज के सोरों और सीतापुर में राही टूरिस्ट बंगलों का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही प्राकृतिक पर्यावासों के समीप एटा के पटना पक्षी विहार, हरदोई की सांडी झील, बुलंदशहर के नरौरा में राही टूरिस्ट लॉजों का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अलावा प्रतापगढ़ के भूपियामऊ, औरैया के देवकली, बदायूं के कछला घाट और शामली के कांधला में भी टूरिस्ट लॉजों का निर्माण कराया जा रहा है। योगी सरकार का उद्देश्य इन परिसंपत्तियों के माध्यम से पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है। यूपीएसटीडीसी के ‘राही’ टूरिस्ट बंगले न केवल प्रदेश में पर्यटन अवसंरचना को मजबूती प्रदान करेंगे,  बल्कि यूपी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगें। प्रयागराज, वाराणसी और चित्रकूट में टूरिस्ट होटलों का रेनोवेशन महाकुम्भ और माघ मेले जैसे भव्य आयोजनों के समय प्रयागराज में सर्वाधिक पर्यटकों का आगमन होता है। इसे देखते हुए यूपीएसटीडीसी की ओर से प्रयागराज में यमुना नदी के किनारे होटल राही त्रिवेणी दर्शन में नए भवन का निर्माण कराया गया है। इससे पर्यटकों की आवसीय क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। साथ ही प्रयागराज में यूपीएसटीडीसी के होटल राही इलावर्त में इंटीरियर डेकोरेशन का कार्य भी पूरा किया जा चुका है। इसी क्रम में वाराणसी के सारनाथ में स्थित राही टूरिस्ट लॉज में सुविधाओं का विकास और नवीनीकरण का कार्य किया जा रहा है। जबकि धार्मिक स्थल चित्रकूट में स्थित राही टूरिस्ट लॉज के पार्ट-ए और पार्ट-बी के नवीनीकरण का कार्य भी पूरा किया जा चुका है। बलरामपुर में भी टूरिस्ट लॉज के नवीनीकरण का कार्य तेज गति से चल रहा है।

योगी सरकार की औद्योगिक नीति को रफ्तार, यमुना एक्सप्रेसवे पर अपैरल पार्क बन रहा रोजगार और निर्यात का नया हब

  175 एकड़ में विकसित हो रहा आधुनिक अपैरल पार्क 173 औद्योगिक भूखंडों में अब तक 156 भूखंडों का किया गया आवंटन 106 इकाइयों के पक्ष में लीज डीड निष्पादित, 89 निवेशकों को मिला कब्जा लखनऊ/ग्रेटर नोएडा  उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख टेक्सटाइल और अपैरल एक्सपोर्ट हब बनाने की दिशा में योगी सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी कड़ी में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक क्षेत्र में विकसित किया जा रहा अपैरल पार्क राज्य के औद्योगिक परिदृश्य में मील का पत्थर साबित हो रहा है। यह परियोजना न केवल निवेश को आकर्षित कर रही है, बल्कि युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित कर रही है। प्राधिकरण द्वारा यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक क्षेत्र में 175 एकड़ भूमि पर अपैरल पार्क विकसित किया जा रहा है। इसमें विभिन्न आकार के कुल 173 औद्योगिक भूखंड नियोजित किए गए हैं, जिन्हें अपैरल एवं टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़ी इकाइयों को आवंटित किया जा रहा है। आवंटन में तेजी, निवेशकों का बढ़ता भरोसा 22 जनवरी 2026 तक की स्थिति के अनुसार, अपैरल पार्क योजना के तहत अब तक 156 भूखंडों का आवंटन किया जा चुका है, जबकि केवल 17 भूखंड रिक्त हैं। 106 इकाइयों के पक्ष में अब तक लीज डीड निष्पादित हो चुकी है तो 89 निवेशकों को कब्जा भी सौंपा जा चुका है। यह आंकड़े साफ तौर पर दर्शाते हैं कि योगी सरकार के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस मॉडल पर निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। निर्माण प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार अपैरल पार्क में अब परियोजनाएं तेजी से जमीन पर उतरने लगी हैं। योजना के तहत अब तक 118 इकाइयों को चेकलिस्ट जारी की जा चुकी है, जबकि 39 इकाइयों के भवन मानचित्र स्वीकृत हो चुके हैं। वहीं, 15 इकाइयों में निर्माण कार्य शुरू हो गया है। सरकार द्वारा सभी आवंटियों से डीपीआर के अनुरूप एक्शन प्लान मांगा गया है, ताकि परियोजनाएं तय समय-सीमा में धरातल पर उतर सकें। रोजगार और निर्यात पर योगी सरकार का फोकस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन है कि उत्तर प्रदेश को वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) और टेक्सटाइल नीति के माध्यम से वैश्विक निर्यात मानचित्र पर मजबूत स्थान दिलाया जाए। अपैरल पार्क से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार, रेडीमेड गारमेंट्स और टेक्सटाइल निर्यात में वृद्धि, एमएसएमई और स्टार्टअप्स को नया प्लेटफॉर्म जैसे लाभ मिलने की उम्मीद है। शेष भूखंडों के लिए भूमि क्रय प्रक्रिया जारी अपैरल पार्क के अंतर्गत 33.5 एकड़ क्षेत्रफल के 17 भूखंड अभी आवंटन हेतु शेष हैं। आंशिक भूमि उपलब्ध न होने के कारण भूमि क्रय की कार्यवाही प्रगति पर है, जिसे शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। यमुना एक्सप्रेसवे, अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, बेहतर कनेक्टिविटी और उद्योग-हितैषी नीतियों के चलते उत्तर प्रदेश आज निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभर रहा है। अपैरल पार्क इसकी एक मजबूत मिसाल है, जो योगी सरकार के विकास, रोजगार और निर्यात आधारित विजन को जमीन पर साकार करता दिख रहा है।

काशी में भक्तिभाव का संगम: शिव–पार्वती विवाह हेतु माता वैष्णो देवी का दिव्य उपहार

वाराणसी महाशिवरात्रि के दिव्य पर्व पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में सनातन परंपरा को समृद्ध करने वाला एक शुभ और भावपूर्ण नवाचार इस वर्ष साकार हो रहा है. इस वर्ष महाशिवरात्रि पर्व के नवाचार में कई प्रसिद्ध देवालयों और देवी देवताओं द्वारा भगवान विश्वनाथ के इस महापर्व पर शुभेच्छपूर्वक उपहार प्रेषित किए जाने का विहंगम प्रयोग है. इसी श्रृंखला में महाशिवरात्रि उत्सव के दृष्टिगत 7 फरवरी को श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड  की ओर से भगवान श्री विश्वेश्वर (श्री काशी विश्वनाथ महादेव) के लिए उपहार और प्रसाद श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास कार्यालय में प्राप्त हुआ. इस पावन भेंट के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास मां वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के प्रति आभार व्यक्त करता है. यह नवाचार महाशिवरात्रि पर्व के महोत्सव को और ज्यादा आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान करने वाली है. माता वैष्णो देवी शक्ति स्वरूप की ओर से काशी में स्थित भगवान विश्वनाथ को अर्पित यह पावन उपहार शाश्वत शक्ति–शिव संबंध का सजीव प्रतीक है. महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर प्राप्त यह उपहार श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक अनुभूति का विशेष माध्यम बनेगा और सनातन संस्कृति की मूल भावना को जनमानस के समक्ष सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगा. श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास, महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान श्री विश्वेश्वर के लिए यह पावन उपहार प्रेषित करने के लिए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के प्रति हार्दिक धन्यवाद और कृतज्ञता ज्ञापित करता है. श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास मां वैष्णो देवी के प्रधान उत्सव पर भगवान विश्वनाथ की ओर से मां वैष्णो देवी को भी उपहार प्रेषित कर सनातन आस्था के केंद्रों के मध्य स्थाई पुण्य संबंधों को सशक्त करने के प्रति संकल्पित है. चेलेंग और गसोमा’ धारण करेंगे बाबा विश्वनाथ और मइया पार्वती इसके अलावा अन्य जगहों से भी बाबा विश्वनाथ और गौरा मइया के लिए उपहार आ रहे हैं. इस बार महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ और माता गौरा को जो परिधान धारण कराए जाएंगे, वह असम के ऐतिहासिक नगर शिवसागर से विशेष रूप से मंगाए गए हैं. बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा को असमिया पुरुष परिधान ‘चेलेंग और गसोमा’ धारण कराया जाएगा. इस परिधान में बाबा का स्वरूप अत्यंत राजसी और दिव्य दिखाई देगा, जो शिव-विवाह की गरिमा को और भी भव्य बनाएगा.

उत्तर प्रदेश विधान मंडल का बजट सत्र सोमवार से

माननीय राज्यपाल के अभिभाषण से होगी शुरुआत 11 फरवरी (बुधवार) को वित्तमंत्री सुरेश खन्ना पेश करेंगे वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट लखनऊ,  उत्तर प्रदेश विधान मंडल का बजट सत्र 2026-27 9 फरवरी से प्रारंभ होगा। सत्र के प्रथम दिन सोमवार को विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा व विधान परिषद) के समक्ष माननीय राज्यपाल आनंदी बेन पटेल का अभिभाषण होगा। 10 फरवरी को सदन के वर्तमान व पूर्व सदस्यों के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की जाएगी। सदन की कार्यवाही 20 फरवरी तक प्रस्तावित है। 11 फरवरी (बुधवार) को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया जाएगा। इसके पश्चात राज्यपाल के अभिभाषण (धन्यवाद प्रस्ताव) पर चर्चा होगी। 13 फरवरी तक सदन नियमित तौर पर चलेगा। 14 व 15 फरवरी को क्रमशः शनिवार व रविवार होने के कारण सदन की बैठक स्थगित रहेगी। 16 फरवरी से पुनः सदन की कार्यवाही प्रारंभ होगी। विधानसभा अध्य़क्ष सतीश महाना ने सभी सदस्यों से सदन के सफल संचालन का अनुरोध किया है। वहीं नेता सदन (मुख्यमंत्री) योगी आदित्यनाथ ने सभी सदस्यों से जनता के मुद्दों को सदन में रखने और स्वस्थ चर्चा कर प्रदेश के विकास को गति प्रदान करने के लिए सरकार का सहयोग करने का आग्रह किया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधान भवन में सर्वदलीय बैठक को किया संबोधित

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक 9 फरवरी (सोमवार) से प्रारंभ होगा विधान मंडल  का बजट सत्र लखनऊ विधान मंडल का बजट सत्र 9 फरवरी (सोमवार) से प्रारंभ होगा। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की अध्यक्षता में रविवार को सर्वदलीय बैठक हुई। इसमें मुख्यमंत्री व नेता सदन योगी आदित्यनाथ ने भी हिस्सा लिया। सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने का अनुरोध करते हुए उन्होंने विपक्षी दलों के नेताओं से कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में रखें और इस पर स्वस्थ चर्चा कर प्रदेश में विकास को गति प्रदान करने के लिए सरकार का सहयोग करें। विधानसभा सत्र संचालन के संबंध में विधान भवन में आयोजित इस सर्वदलीय बैठक में नेता सदन योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सदन में स्वस्थ चर्चा होनी चाहिए। स्वस्थ चर्चा से प्रदेश का विकास और जनता की समस्याओं का समाधान होता है। जनप्रतिनिधि के रूप में जनता के हित से जुड़े हर मुद्दों पर सदन में सुचारु रूप से चर्चा करनी चाहिए। सदन के संचालन में किसी प्रकार की बाधाएं न आएं, इसका ध्यान सभी सदस्यों को रखना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी सदन के सुचारु संचालन के लिए सभी सदस्यों का सहयोग मांगा। बैठक में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर, निषाद पार्टी के अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद, कांग्रेस की आराधना मिश्रा ‘मोना’, निषाद पार्टी के रमेश सिंह, लोकदल के राजपाल बालियान, अपना दल के रामनिवास वर्मा आदि मौजूद रहे।

यूपी के लखीमपुर खीरी में भीषण सड़क दुर्घटना, टेंपो पलटने से चार की जान गई

लखीमपुर खीरी लखीमपुर खीरी के धौरहरा थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। बसंतापुर पुलिया के समीप सवारियों से भरा टेंपो अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में तीन मासूम बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि टेंपो चालक ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। पांच लोग घायल हुए हैं। घायलों का उपचार चल रहा है। ये सभी लोग रात करीब 12:45 बजे धौरहरा से धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होकर लोग टेंपो से अपने गांव ऊंचगांव (थाना खमरिया) वापस लौट रहे थे। इसी दौरान घने कोहरे के चलते बसंतापुर पुलिया के पास टेंपो पलट गया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) धौरहरा भेजा। इन बच्चों की हुई मौत सीएचसी में चिकित्सकों ने खुशबू (12 वर्ष), अबू तालिब (5 वर्ष) और अजरा (2 वर्ष) को मृत घोषित कर दिया। घायलों में किस्मतुन (45 वर्ष), साकिया (20 वर्ष), सादिया (22 वर्ष), निदा (10 वर्ष), अकील (18 वर्ष) निवासी ऊंचगांव थाना खमरिया तथा टेंपो चालक इसराइल उर्फ जीशान (30 वर्ष) निवासी ग्राम रसूलपुर थाना खमरिया शामिल हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला चिकित्सालय लखीमपुर खीरी रेफर कर दिया गया। जहां जीशान की भी मौत हो गई है। हादसे के बाद मृतकों के परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। घटना की जांच शुरू कर दी है।