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डबल डॉक्यूमेंट विवाद: दो पासपोर्ट मामले में अब्दुल्ला का फैसला कल, सात साल की सज़ा बना असर का कारण

रामपुर सपा नेता आजम खान व उनके परिवार पर दो जन्म प्रमाण पत्र और दो पैन कार्ड के बाद अब दो पासपोर्ट के मामले पर लोगों की नजर है। इस मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है और न्यायालय ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। शुक्रवार को फैसला सुनाया जाएगा। पासपोर्ट के मामले में अब्दुल्ला अकेले आरोपित हैं। इससे पहले दो जन्म प्रमाण पत्र में आजम खां, उनकी पत्नी और अब्दुल्ला को सजा हुई थी, जबकि दो पैन कार्ड मामले में आजम खां और अब्दुल्ला को सजा हुई थी। दो पैन कार्ड मामले में आजम खां और अब्दुल्ला जेल में बंद हैं। सपा नेता आजम खान के बेटे अब्दुल्ला का राजनीतिक जीवन शुरू होते ही विवादों में घिर गया। वह दो बार विधायक बने, लेकिन दोनों बार विधायकी चली गई। वर्ष 2017 से राजनीति में कदम रखने के बाद वह ज्यादा दिन सत्ता का सुख हासिल नहीं कर पाए। अब तक तीन मुकदमों में सजा हो चुकी है। दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में 17 माह जेल में भी बिताने पड़े। जमानत पर बाहर आए तो 17 नवंबर को दो पैन कार्ड मामले में सजा हो गई। अब फिर से वह पिता के साथ जेल में बंद हैं। पिता की तरह ही अब्दुल्ला पर भी ताबड़तोड़ मुकदमे दर्ज हुए। सपा सरकार जाने के बाद वर्ष 2019 में जिले में 42 मुकदमे दर्ज हुए। साथ ही पुराने मुकदमों की फाइल भी खुल गई। इनमें एक मुकदमा मुरादाबाद के थाना छजलैट में वर्ष 2008 में दर्ज हुआ था। इस तरह अब्दुल्ला को 43 मुकदमों का सामना करना पड़ा। वर्तमान में भी उनके खिलाफ 41 मुकदमे न्यायालय में विचाराधीन हैं। इनमें दो पासपोर्ट का मामला भी है, जिसमें शुक्रवार को फैसला आना है। इस फैसले को जानने के लिए सभी उत्सुक हैं। पासपोर्ट मामले में अकेले अब्दुल्ला के आरोपित होने पर सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संदीप सक्सेना का कहना है कि अब्दुल्ला ने अपने पिता मोहम्मद आजम खां के साथ सुनियोजित षड्यंत्र के अन्तर्गत चुनाव नामांकन में आयु संबंधी अयोग्यता छिपाने के लिए कूटरचित मिथ्या विवरण व दस्तावेज प्रस्तुत कर पैन कार्ड संख्या DWAPK7513R जन्म तिथि 30 सितंबर 1990 का बनवाया और नामांकन पत्र में आयु संबंधी अयोग्यता पूर्ण कर अवैध लाभ प्राप्त करने के लिए प्रयोग में लाया गया। इस कारण पैन कार्ड मामले में आजम खां और अब्दुल्ला दोनों मुलजिम बनाए गए थे, जबकि अलग-अलग जन्मतिथि से बने दोनों पासपोर्ट का प्रयोग अब्दुल्ला ने अकेले किया था। उनके द्वारा विदेश यात्राएं की गईं, जिसके कारण वह अकेले आरोपित बनाए गए।  

वाराणसी और सीमावर्ती जिलों में उद्योग, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन से विकास की बयार

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पूर्वांचल में विकास और समृद्धि का जो अभियान शुरू हुआ था, अब वह जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है। वाराणसी और आसपास के जिलों में धार्मिक-पर्यटन के साथ-साथ औद्योगिक और लॉजिस्टिक क्षेत्रों में भी तेज प्रगति हो रही है। उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने में पूर्वांचल की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है। 2017 से पहले पूर्वांचल को माफियाओं और पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था लेकिन मुख्यमंत्री योगी की नीतियों ने इसे विकास का रोल मॉडल बना दिया है।    पूर्वांचल लिख रहा है विकास की महागाथा पूर्वांचल आजादी के बाद से ही विकास के मामले में उपेक्षित रहा है। 2017 में उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद सीएम योगी ने पूर्वांचल में विकास के लिए व्यापक रणनीति बनाई। प्रदेश सरकार के अनुसार वर्तमान समय में वाराणसी में 48 चालू परियोजनाएं क्रियान्वित हैं। इसमें से 1,180.95 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। इन परियोजनाओं से 3,472 युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है। आगे 48 नई औद्योगिक परियोजनाएं और स्वीकृत की गई हैं जिनमें 5,702.18 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं से 12,110 रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इस प्रकार कुल मिलाकर 15 हजार से अधिक रोजगार बनने का आधार तैयार हो चुका है।  विकास परियोजनाओं से पूर्वांचल के उद्योगपति उत्साहित  वाराणसी और पूर्वांचल क्षेत्र में औद्योगिक विकास की गति तेज हो गई है, जिससे इस क्षेत्र के लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वाराणसी एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आर के चौधरी ने सीएम योगी की तारीफ करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। इसमें निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नीतियों और सुविधाओं का विकास शामिल है। प्रदेश सरकार वाराणसी और पूर्वांचल क्षेत्र को देश का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यहां के लोग और उद्योगपति सरकार के प्रयासों से प्रसन्न हैं। औद्योगिक विकास में रोड, ट्रेन और एयर कनेक्टिविटी का सीधा लाभ मिल रहा है।  निवेश बढ़ने से उद्योग और लॉजिस्टिक्स का मजबूत ढांचा तैयार वाराणसी और पूर्वांचल के जिलों में उद्योग, लॉजिस्टिक्स और भंडारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। औद्योगिक इकाइयों, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र-उद्योग, घरेलू उत्पादों और हस्तकला आधारित इकाइयों को बढ़ावा दिया गया है। प्रदेश सरकार द्वारा उद्योगों को भूमि, विद्युत, परिवहन और अनुमति प्रक्रियाओं में सरलता देने से निवेशकों का झुकाव पूर्वांचल की ओर बढ़ा है। भंडारण और परिवहन सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय कृषि-उत्पाद, दूध, सब्जियां, अनाज और फल अब क्षेत्रीय बाजारों के साथ-साथ बड़े शहरों तक पहुंच पा रहे हैं। अकेले वाराणसी में 2017 से अब तक, 35,705.07 लाख रुपये की 79 परियोजनाओं के माध्यम से विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है।  एग्री-लॉजिस्टिक्स और ग्रामीण भंडारण से मजबूत हो रही आपूर्ति श्रृंखला पूर्वांचल में कृषि-आधारित उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। वाराणसी सहित आसपास के जिलों में कृषि-उत्पादों के संग्रहण, छंटाई, पैकिंग और भंडारण की सुविधा बढ़ाई गई है। गोरखपुर के धुरियापार इंडस्ट्रियल टाऊनशिप योजना को रेल और सड़क दोनों से कनेक्ट किया जा रहा है। इसे लगभग 5500 एकड़ में विकसित किया जा रहा है। यह टाउनशिप 17 गांवों में फैली है। इससे कृषि आधारति उद्योगों को यातायात और कनेक्टिविटी में बहुत सहूलियत होगी। स्थानीय स्तर पर बने बड़े भंडारण केन्द्रों और आपूर्ति-श्रृंखला इकाइयों ने किसानों और छोटे व्यापारियों की आय को सुरक्षित किया है। इसके साथ ही, ग्रामीण स्तर पर बन रहे गोदामों और शीत-भंडारण केन्द्रों से खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को कच्चा माल पास में ही उपलब्ध हो रहा है, जिससे उत्पादन लागत कम हो रही है।

खेल समय बर्बाद करने का नहीं, हमारे जीवन के सर्वांगीण विकास का माध्यम हैं : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत का संकल्प पूरा करने में खेलों की अहम भूमिका है : सीएम योगी आदित्यनाथ   मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में आयोजित 69वीं राष्ट्रीय विद्यालयीय खेल प्रतियोगिता- 2025 के (ग्रीको रोमन) कुश्ती के विजेताओं को पुरस्कृत किया  गोरखपुर   वीर बहादुर सिंह स्पोर्टस कालेज, गोरखपुर में आयोजित 69वीं राष्ट्रीय विद्यालयीय खेल प्रतियोगिता- 2025 के (ग्रीको रोमन) कुश्ती के विजेताओं को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुरस्कृत किया। इस अवसर पर उन्होंने 17 एवं 19 आयु वर्ग के विजेताओं को पदक व पुरस्कार देकर सम्मानित किया और प्रतियोगियों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल-कूद, हमारे जीवन के सर्वांगीण विकास का माध्यम है और जिस तरह से विश्व खेल मानचित्र पर हमारे खिलाड़ी देश का मान बढ़ा रहे हैं ये हम सभी के लिए गौरव का विषय है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार ने प्रदेश में खेल सुविधाओं को कमिश्नरी से जनपद और जनपद से ब्लाक स्तर व प्रत्येक स्कूल-कॉलेजों में विकसित करने के जरूरी कदम उठाये हैं। साथ ही उन्होंने वर्ष 2030 में देश में आयोजित होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स की पदक तालिका में अपना नाम दर्ज करने के लिए खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया।     स्कूलों में शिक्षा के साथ खेलों को भी महत्व देना जरूरी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 69वीं राष्ट्रीय विद्यालयीय खेल प्रतियोगिता- 2025 के अवसर पर विजेताओं को शुभकामानएं दी और कहा कि खेल कूद वर्तमान में समय बर्बाद करने का नहीं बल्कि जीवन का सर्वांगीण विकास करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारतीय मनीषा हमेशा से मानती रही है कि शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् …अर्थात स्वस्थ्य शरीर से ही सभी धर्म पूरे किये जा सकते हैं। यही नहीं खेल कूद अपने अपने आप में विकास की एक नई धारा को प्रसारित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जी ने आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत का जो संकल्प हम सबके सामने प्रस्तुत किया है, उसके लिए भारतवासियों, देश के नौजवानों का स्वस्थ्य होना बहुत जरूरी है। यह संभव होगा जब हम स्कूल-कॉलेजों में शिक्षा के साथ खेलों को भी समान रूप से महत्व देंगे। हमारी सरकार ने इस दिशा में कई जरूरी कदम उठाए हैं।      हर जनपद में एक स्टेडियम और हर ब्लॉक पर एक मिनी स्टेडियम का हो रहा है निर्माण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि हमारी सरकार ने प्रदेश में खेलों के विकास के लिए हर जनपद में एक स्टेडियम और हर ब्लॉक पर एक मिनी स्टेडियम का निर्माण करने का निर्णय लिया है। वर्तमान में 18 जनपदों के राजकीय कॉलेजों में मिनी स्टेडियम का निर्माण कराया जा रहा है, जिसके लिए प्रत्येक कॉलेज को लगभग 5 करोड़ रुपए उपलब्ध कराया जा रहा हैं। इसी क्रम में गोरखपुर मंडल में गोरखपुर और महाराजगंज के राजकीय कॉलेजो में भी मिनी स्टेडियम का निर्माण हो रहा है। साथ ही स्कूल कॉलेज में खेलों को प्रोत्साहित करने के उद्देंश्य प्रत्येक कॉलेज को 25000 रुपए, बेसिक शिक्षा और माध्यमिक विद्यालयों को ₹5000 और जूनियर हाई स्कूल को 10000 रुपये प्रदान किया जा रहा है। हमारा बच्चा खेलेगा तभी तो खिलेगा और अपनी प्रतिभा का लाभ देश को दे पाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार के प्रयास से हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जी के नाम से मेरठ में स्पोर्टस् युनिवर्सिटी का निर्माण भी किया जा रहा है।  आत्मबल और आत्मविश्वास हमें किसी भी प्रतियोगिता में दिलाते हैं विजय- सीएम योगी आदित्यनाथ सीएम योगी आदित्यनाथ ने खेल प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वर्ष 2030 में अहमदाबाद में कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन किया जा रहा है, जो खिलाड़ी आज अंडर 17 और 19 आयु वर्ग में खेल रहे हैं, उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स की पदक तालिका में अपना नाम दर्ज करना है। उन्होंने प्रतियोगिता के उपविजेताओं और हार गये प्रतिभागियों को निराश हुए बिना अपनी कमियों पर परिश्रम कर, दृढ़ संकल्प से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि हमारी सबसे पहली प्रतियोगिता स्वंय से होती है, जब हम आत्मबल और आत्मविश्वास के साथ किसी भी प्रतियोगिता में भाग लेते हैं तो विजय मिलना जरूरी है। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता के 17 व 19 आयुवर्ग की कुश्ती का फाइनल मैच भी देखा और विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किये।

मुरादाबाद,रामपुर,अमरोहा, संभल में धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, स्रजित होंगे रोजगार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से पर्यटन मंत्री की उपस्थिति में हुये भव्य कार्यक्रम बरेली मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और नये रोजगार विकसित करने के उद्देश्य से मुरादाबाद मंडल में गुरुवार और शुक्रवार को भव्य कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की मौजूदगी में मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा और सम्भल जनपदों में कुल 26 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया जाएगा। इन परियोजनाओं पर योगी सरकार 26.11 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। चारों जिलों में धार्मिक स्थलों के व्यापक विकास, आधुनिक सुविधाओं और सौंदर्यीकरण से न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिलेगी बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार व पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उपनिदेशक पर्यटन बरेली रविंद्र कुमार ने बताया कि इन परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर रोजगार, हस्तशिल्प, परिवहन और होटल उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी। योगी सरकार धार्मिक आध्यात्मिक विरासत को सहेजने के साथ-साथ आधुनिक सुविधाओं से जोड़ते हुए नए पर्यटन मॉडल को गति दे रही है। चारों जिलों में होने वाले कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। अमरोहा में 4.62 करोड़ के लोकार्पण, 1.39 करोड़ के शिलान्यास अमरोहा में वर्ष 2023-24 के तहत 4 परियोजनाओं के लोकार्पण में 4.62 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इनमें धनौरा, हसनपुर, नौगवां सादात और अमरोहा सदर क्षेत्र के प्राचीन शिव एवं वासुदेव मंदिरों पर मल्टीपरपज सेंटर, यात्री हाल, टॉयलेट ब्लॉक, प्रकाश व्यवस्था और सौंदर्यीकरण का कार्य शामिल है। वहीं 1.39 करोड़ की 2 नई परियोजनाओं का शिलान्यास किया जाएगा। इसके अलावा वासुदेव मंदिर पर 4.59 करोड़ की पूर्व परियोजना पूरी हो चुकी है। आगे 2025-26 के लिए 3.17 करोड़ की 4 नई परियोजनाओं का प्रस्ताव भी भेजा गया है। मुरादाबाद में लोकार्पण में 4.72 करोड़, कई बड़े मंदिरों का कायाकल्प मुरादाबाद में 2023-24 की 4 परियोजनाओं का लोकार्पण 4.72 करोड़ रुपये की लागत से होगा। इनमें कामेश्वर महादेव, पौड़ाखेड़ा मंदिर, रतुपुरा शिव मंदिर और हनुमान समाधि आश्रम में आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। वर्ष 2025-26 में 3 परियोजनाओं के शिलान्यास हेतु 3.33 करोड़ स्वीकृत हैं, जिनमें कुंदरकी महादेव मंदिर, द्वारिकाधीश मंदिर और विश्नोई मंदिर शामिल हैं। चंद्रदेव महाराज मंदिर और गायत्री नगर के शिव मंदिर की परियोजनाएं भी तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। रामपुर में 3.31 करोड़ के कार्य पूर्ण, 98 लाख की नई परियोजना रामपुर में 2023-24 की 3 परियोजनाओं के लोकार्पण में 3.31 करोड़ खर्च किए गए हैं। नवाबगंज, मदारपुर और रूपापुर के प्राचीन शिव मंदिरों का विकास पूर्ण हो चुका है। वहीं 2024-25 में 98 लाख की नई परियोजना का शिलान्यास होगा। इसके साथ ही 2025-26 के लिए 4.56 करोड़ की 4 नई योजनाओं का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। सम्भल में 3.37 करोड़ का लोकार्पण, 6.05 करोड़ की सबसे बड़ी सौगात सम्भल जिले में 2023-24 की 3 परियोजनाओं का लोकार्पण 3.37 करोड़ रुपये से किया गया है। इनमें कल्कि मंदिर परिसर, हरिबाबा धाम आश्रम और कैलादेवी मंदिर का समग्र विकास शामिल है। साल 2025-26 में जिले को सबसे बड़ी सौगात 6.05 करोड़ की 3 मेगा परियोजनाओं कुरुक्षेत्र तीर्थ, नैमिषारण्य तथा मनोकामना तीर्थ के विकास कार्यों के रूप में मिलेगी। इसके पहले जिले में सूर्यकुंड, चंद्रेश्वर महादेव और अन्य प्रमुख मंदिरों पर 4.11 करोड़ की योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। दो नई परियोजनाओं के लिए 1.83 करोड़ का प्रस्ताव भी भेजा गया है।

जालौन में जल क्रांति : योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों से सुधरा भूजल और किसानों का भविष्य

जिले में दो मीटर तक बढ़ा भूजल स्तर, बदली खेतों की तस्वीर पानी की उपलब्धता से कृषि चक्र हुआ स्थिर, पलायन में आई भारी कमी लखनऊ  कभी सूखे खेतों और गहराते जल संकट के लिए पहचाने जाने वाला जालौन आज उत्तर प्रदेश में जल संरक्षण की एक मजबूत मिसाल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों और निरंतर प्रयासों ने इस जिले की भाग्य रेखा को बदलने का काम किया है। जो जालौन कभी एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करता था आज वहीं कई ब्लॉकों में भूजल स्तर 2 मीटर बढ़ा है और कहीं- कहीं तो अधिक सुधर चुका है। यह परिवर्तन एक दिन में नहीं आया। पिछले कुछ वर्षों में जिले में हजारों जल संरक्षण संरचनाएं बनी हैं। चेक डैमों से लेकर पुनर्जीवित तालाबों तक खेतों में बनाए गए फार्म पॉन्ड्स तक इन सबने जालौन में जल पुनर्भरण के मजबूत ढांचे का निर्माण किया है। बारिश का पानी अब इकट्ठा होकर जमीन में जाने लगा है, इससे भूजल वाटर लगातार रिचार्ज हो रहा है। जालौन के कई हिस्सों में किसान आवश्यकता के समय सिंचाई के लिए भूजल नहीं प्राप्त कर पाते थे। लेकिन आज बेहतर वाटर टेबल की वजह से कई ब्लॉकों में ट्यूबवेल पंपिंग के घंटे 1 से 5 गुना तक बढ़ गए हैं। बिजली आपूर्ति में सुधार और भूजल स्तर बढ़ने से किसान अब 2 से 3 अतिरिक्त घंटे पानी निकाल पा रहे हैं। इससे सिंचाई लागत कम हुई है और कृषि चक्र स्थिर हुए हैं। जालौन जिले के अंतर्गत गांव सैद नगर की निवासी महिला विद्या का कहना है कि योगी जी की सरकार ने पानी के मामले में अत्यंत सराहनीय काम किया है। खेती किसानी के लिए जहां सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त हुई है वही हम महिलाओं को अब दूर से पानी लेने नहीं जाना पड़ता है। सरकार ने बहुत बड़ा काम किया है इसके लिए हम सभी सरकार के अत्यंत आभारी हैं। पानी की उपलब्धता ने कृषि को नई दिशा दी है। खरीफ में धान और बाजरा जैसे फसलों के क्षेत्रफल और पैदावार में तेज वृद्धि दर्ज की गई है जबकि रबी उत्पादन भी बेहतर हुआ है। बुंदेलखंड पैकेज के तहत दालों और तिलहनी फसलों के उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है जिससे किसानों को स्थिर और भरोसेमंद आय का स्रोत मिला है। कृषि से आगे बढ़कर सामाजिक स्तर पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है। कभी बुंदेलखंड के अन्य इलाकों की तरह जालौन भी मौसमी पलायन की समस्या से जूझता था। पानी की उपलब्धता बढ़ने फसल स्थिर होने और अनिश्चितता घटने से अब पलायन में भारी कमी आई है। किसानों में यह विश्वास लौट आया है कि उनकी जमीन खरीफ और रबी दोनों मौसमों में उन्हें संभालेगी। इस सफलता में आम जनता की भागीदारी ने भी अहम भूमिका निभाई है। जल पंचायतों और पानी पाठशालाओं जैसे कार्यक्रमों ने स्थानीय स्वामित्व की भावना बढ़ाई है और जल संरक्षण को सरकारी योजना के बजाय सामुदायिक आंदोलन का रूप दिया है। यह सामूहिक उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर तब सम्मानित हुई जब जालौन को राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 में उत्तर क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ जिला चुना गया। कमी से समृद्धि की यात्रा में यह एक गौरवशाली उपलब्धि है। जालौन की यह कहानी बताती है कि लगातार नीति समुदाय की साझेदारी और दृढ़ संकल्पित शासन क्या बदलाव ला सकते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और बुंदेलखंड क्षेत्र के लोगों के प्रति उनकी संवेदना ने जल क्रांति के मामले में ऐतिहासिक मिसाल कायम की है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंच प्रण को बताया शाश्वत मंत्र

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 के शुभारंभ अवसर पर आत्मनिर्भर व विकसित भारत का भी जिक्र किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए पंच प्रण को शाश्वत मंत्र बताया। सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी ने आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान देशवासियों के सामने लक्ष्य रखा कि 2047 में देश जब आजादी का शताब्दी महोत्सव मना रहा होगा, तब हमें आत्मनिर्भऱ, विकसित भारत चाहिए। जहां हर व्यक्ति खुशहाल और परस्पर सौहार्द के साथ मिलकर दुनिया की महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहा हो। वहां जाति, भाषा, क्षेत्र का विवाद और अभाव न हो। कोई नागरिक आपदा का शिकार न हो। हर व्यक्ति आत्मनिर्भर व स्वावलंबन का जीवन व्यतीत करते हुए राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन कर सके। सीएम ने कहा कि भारत विकसित तब हो सकता है, जब हर व्यक्ति पंच प्रण पर ध्यान दे।  एसडीआरएफ के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 का शुभारंभ किया।  सीएम ने पंच प्रण को बताया शाश्वत मंत्र  सीएम ने पंच प्रण को शाश्वत मंत्र बताया और कहा कि यह हर नागरिक पर समान रूप में लागू होते हैं।  पहला प्रणः विरासत पर गौरव की अनुभूति यानी पूर्वजों की थाती। हर भारतवासी को पूर्वजों, संस्कृति, महापुरुषों पर गौरव की अनुभूति करनी चाहिए। महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह महाराज, छत्रपति शिवाजी महाराज, रानी लक्ष्मीबाई, पं. रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रोशन सिंह उसी परंपरा के नायक हैं, जिसे हर भारतवासी विरासत कहता है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण व धर्मध्वजा का आरोहण विरासत की श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी है।  दूसरा प्रणः गुलामी के अंशों को पूरी तरह समाप्त करना- सीएम ने कहा कि बीच के कालखंड में हर देशवासी भूल गया कि जब दुनिया अंधकार में थी, तब भारत बड़ी ताकत था। दो हजार वर्ष पहले दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का हिस्सा 46 फीसदी और चार सौ वर्ष पहले भारत की भागीदारी का हिस्सा 26 फीसदी था। देश जब आजाद हुआ, तब दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का हिस्सा महज डेढ़ फीसदी रह गया था। अंग्रेज व विदेशी आक्रांता जब भारत को लूटकर ले गए थे, उसकी कीमत उस समय लगभग 32-35 ट्रिलियन डॉलर के बराबर थी। आज भारत की अर्थव्यवस्था मात्र चार ट्रिलियन डॉलर की है। अब भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित हुआ है। हाल के सर्वे के मुताबिक दुनिया ने माना है कि भारत सबसे तेज गति के साथ बढ़ने वाला राष्ट्र बन गया है। भारत की यात्रा शानदार इसलिए है, क्योंकि हमने विरासत पर गौरव की अनुभूति की और गुलामी के अंशों को समाप्त किया।  तीसरा प्रणः सैन्य बलों का सम्मानः सैनिक, यूनिफॉर्म धारी फोर्स (सेना, अर्धसेना, पुलिस बल) का सम्मान करना है। उनके बलिदान व सेवाओं के प्रति सम्मान व कृतज्ञता होनी चाहिए।  चौथे प्रण की चर्चा कर सीएम योगी ने कहा कि विदेशी आक्रांता इसलिए सफल हुए, क्योंकि हम विभाजित थे, जाति-क्षेत्र, भाषा के नाम पर बंटे थे। पड़ोस में आग लगी है और हम निश्चिंत बैठे हैं तो देर-सवेर आग आप तक भी पहुंचेगी। सामाजिक विद्वेष की खाई को चौड़ा होने से रोकना होगा। हमारी पहचान राष्ट्रीयता के आधार पर होनी चाहिए। सामाजिक भेदभाव की खाई को दूर करना, राष्ट्रीय एकता के लिए प्राण प्रण से जुड़ना होगा।  पांचवें प्रण के रूप में नागरिकों कर्तव्यों का निर्वहन का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि दूसरों के ऊपर कानून लागू होगा और हमारे ऊपर नहीं होगा। यही प्रवृत्ति ही सारी समस्याओं की जड़ है। कानून दूसरों के लिए है तो मेरे लिए भी होना चाहिए। सीएम ने कहा कि छात्र, शिक्षक, व्यापारी, जनप्रतिनिधि समेत हर नागरिक अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करता है तो पंच प्रण आत्मनिर्भर व विकसित भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाने में सहायक बनेगा। यदि देश एक दिशा में कार्य करने लग जाएगा तो 2047 आते-आते भारत विकसित होगा।  समारोह में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, कुलपति प्रो. पूनम टंडन, प्रो. जेपी सैनी, प्रो. रविशंकर सिंह, डॉ. सुरेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, महेंद्र पाल सिंह, इंजी. सरवन निषाद, प्रदीप शुक्ला, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, रतनपाल सिंह, पूर्व महापौर अंजू चौधरी आदि मौजूद रहे।

माता पिता नहीं, बीमारी या गरीबी का बोझ, अब अकेले नहीं लड़ेंगे बच्चे, योगी सरकार देगी 1200 रुपये तक हर माह

बरेली, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना के तहत कामकाजी बच्चों को आर्थिक सहयोग और शिक्षा से जोड़ने के लिए श्रम विभाग ने स्पष्ट श्रेणीवार प्राथमिकता तय कर दी है। ऐसे बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जो परिवार की मजबूरी में ढाबों, होटलों, फैक्टरियों या अन्य प्रतिष्ठानों पर काम करते हैं। योजना के पहले चरण में प्रदेश के 20 जिलों जिसमें बरेली भी शामिल है-को चुना गया है। प्रत्येक जिले में 100 बच्चों को लाभ देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सहायक श्रमायुक्त बाल गोविंद ने बताया कि बरेली में अब तक इस योजना से 500 बच्चों को लाभान्वित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि योजना का मुख्य उद्देश्य है कि किसी भी बच्चे को मजबूरी में मजदूरी न करनी पड़े और उसे शिक्षा व सुरक्षा दोनों मिल सके। सबसे पहले मदद उन बच्चों को-जिनके माता-पिता नहीं, आय का एकमात्र सहारा वही योजना में बच्चों के चयन के लिए शासन ने नौ प्राथमिकता श्रेणियां तय की हैं। सबसे पहले प्राथमिकता उन बच्चों को दी जाएगी। जिनके माता-पिता दोनों नहीं रहे। परिवार की पूरी आय उन्हीं के काम पर निर्भर है। श्रम विभाग के सर्वे में उन्हें कामकाजी बच्चा चिन्हित किया गया है। ऐसे बच्चे जिनके पिता की मृत्यु, माता-पिता स्थायी दिव्यांग, माता-पिता गंभीर रोग से ग्रसित, परिवार की मुखिया विधवा/तलाकशुदा महिला, माता की मृत्यु या गंभीर बीमारी और भूमिहीन परिवारों के बच्चे शामिल किए गए हैं। सभी श्रेणियों में ऐसे बच्चे को चिन्हित किया गया है तो सर्वेक्षण में कामकाजी निकला हो। 20 जिलों में पहले चरण का संचालन, कुल 2000 बच्चों को लाभ का लक्ष्य उत्तर प्रदेश में पहले चरण में आगरा, प्रयागराज, कानपुर नगर, बलिया, लखनऊ, बाराबंकी, बरेली, बदायूं, गाजियाबाद, गोरखपुर, गोंडा, श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, मुरादाबाद, सोनभद्र, मिर्जापुर, जौनपुर, वाराणसी और गाजीपुर। इन 20 जिलों में प्रति जिले 100 लाभार्थी, यानी कुल 2000 बच्चों को सहायता दी जानी है। इसमें बच्चों को हर महीने आर्थिक सहायता-बालक 1000 रुपये, बालिका 1200 रुपये दिये जा रहे हैं। लाभार्थी बच्चा लगातार पढ़ता रहता है तो कक्षा 8, 9 और 10 उत्तीर्ण करने पर हर कक्षा पास होने पर 6000 रुपये प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी को दो लाख, पूर्वोत्तर रेलवे को एक लाख का चेक, ट्रॉफी व खिलाड़ियों को दिया मेडल

यूपी विजेता, पूर्वोत्तर रेलवे उपविजेता गोरखपुर  उत्तर प्रदेश की टीम ने ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज सप्तम् अखिल भारतीय प्राइजमनी पुरुष कबड्डी प्रतियोगिता-2025 का खिताब अपने नाम किया। पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर की टीम उपविजेता बनी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टीमों व खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विजेता उत्तर प्रदेश की टीम को दो लाख रुपये का चेक, ट्रॉफी व खिलाड़ियों को मेडल प्रदान किया। उपविजेता पूर्वोत्तर रेलवे को ट्रॉफी व एक लाख का चेक प्रदान किया। साथ ही खिलाड़ियों को भी मेडल प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने तीसरे स्थान पर रहने वाली हरियाणा व आंध्र प्रदेश की टीम के खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया। साथ ही ट्रॉफी व 50-50 हजार रुपये का चेक दिया। मुख्यमंत्री ने विजेता, उपविजेता व हरियाणा-आंध्र प्रदेश की टीम के खिलाड़ियों के साथ सामूहिक फोटो भी खिंचवाई।  इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, महेंद्र पाल सिंह, प्रदीप शुक्ला, भाजपा जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, डॉ. विभ्राट चंद कौशिक, पूर्व महापौर डॉ. सत्या पांडेय, कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार, खेल निदेशक डॉ. आरपी सिंह आदि मौजूद रहे।

अयोध्या मंडल में ग्रामीण पर्यटन से बदली तस्वीर, होमस्टे मॉडल से गांवों में आय और रोजगार में वृद्धि

  योगी सरकार के ग्रामीण पर्यटन मॉडल से अयोध्या में आर्थिक गतिविधियों में तीव्र वृद्धि महिलाओं, किसानों और कारीगर परिवारों की आमदनी में वृद्धि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान लखनऊ, : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ग्रामीण पर्यटन नीति से अयोध्या मंडल के गांवों में आर्थिक गतिविधियों की नई धारा बह रही है। प्रदेश सरकार ने धार्मिक पर्यटन को ग्रामीण जीवन व लोक संस्कृति से जोड़ते हुए ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिससे गांवों की आमदनी के नए दरवाजे खुल गए हैं। अयोध्या मंडल में 19 गांवों को विशेष रूप से होमस्टे विकास के लिए चयनित किया गया है। यह पहल न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती दे रही है, बल्कि हजारों ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। गांवों में होमस्टे बनाने से रोजगार के नए अवसर योगी सरकार ने अयोध्या धाम आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को गांवों की जीवनशैली, संस्कृति और परंपरा से जोड़ने के लिए ग्रामीण पर्यटन की व्यापक योजना तैयार की है। रिपोर्ट के अनुसार पहले चरण में प्रदेश के 93 गांवों को होमस्टे विकास के लिए चयनित किया गया है। इसमें अकेले अयोध्या मंडल के 19 गांव शामिल हैं। अयोध्या जिले में अमौनी, शेरवाघाट, अबानपुर सरोहा, गौराघाट, रामपुरवा गांवों में 50 होम स्टे पर काम चल रहा है। इसमें से ज्यादातर होम स्टे ठहरने की सुविधा उपलब्ध करवा रहे हैं। जिले में 292 होटल और 1186 होम स्टे रजिस्टर्ड हैं जो पर्यटकों को ठहरने के लिए उचित रेट पर आवास उपलब्ध करा रहे हैं। इन गांवों में बुनियादी ढांचे, पर्यटक सुविधा केंद्रों, ग्रामीण आवास, सांस्कृतिक अनुभव और स्थानीय भोजन व्यवस्था को उन्नत किया गया है। इससे ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और कारीगरों के लिए स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर बने हैं। होमस्टे पंजीकरण बढ़ने से आमदनी में वृद्धि अयोध्या में प्रारंभ में होमस्टे की औसत मासिक आय 40,000 से 50,000 थी, जो अब बढ़कर 2 लाख तक पहुंच गई है। दिव्य अयोध्या ऐप के माध्यम से फरवरी 2025 तक 69 लाख से अधिक बुकिंग हो चुकी हैं। होमस्टे का किराया औसतन 1500 से 2500 प्रति कमरा प्रतिदिन है। है। योगी सरकार द्वारा लागू होमस्टे नीति 2025 के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में होमस्टे पंजीकरण की संख्या तेजी से बढ़ी है। इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने से ग्रामीण क्षेत्रों में होमस्टे संचालकों की मासिक आय में 40 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। ग्रामीण परिवार अब खेती के साथ-साथ पर्यटन आधारित सेवाएं देकर एक स्थिर आय अर्जित कर रहे हैं। अयोध्या में गेस्ट हाउस चला रहे अंशुमान तिवारी का कहना है कि इससे अयोध्यावासियों को काफी फायदा हुआ है। राम मंदिर बनने के बाद स्थानीय निवासियों को होम स्टे बनाने की अनुमति मिलने से लोगों की आय में वृद्धि हुई है। लोग 2-3 कमरों का होम स्टे चलाकर धनार्जन कर रहे हैं। साधारण होम स्टे चलाने वाले भी महीने में 50000 से 100000 रुपये तक कमा रहे हैं। इन्होंने कहा कि योगी सरकार की नीतियों की वजह से अयोध्या का चहुंमुखी विकास हो रहा है। हस्तशिल्प, लोककला और महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि राम मंदिर निर्माण के बाद स्थानीय हस्तशिल्पकारों की संख्या में 25% से अधिक की वृद्धि हुई है। होमस्टे मॉडल ने अयोध्या के पारंपरिक कारीगरों, हस्तशिल्पियों और लोक कलाकारों को भी नई पहचान दी है। पर्यटन विभाग द्वारा गठित ग्रामीण सांस्कृतिक अनुभव समूहों में अयोध्या मंडल की महिलाओं को भोजन व्यवस्था, लोक व्यंजन, घरेलू उत्पाद, साफ-सफाई और मेहमाननवाजी से जोड़कर रोजगार दिया गया है। महिलाओं की आय में औसतन 5,000-12,000 रुपये प्रति माह की वृद्धि हुई है। योगी सरकार ने पर्यटन से गांवों को बनाया आत्मनिर्भर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि अयोध्या केवल मंदिरों और धार्मिक स्थलों से नहीं, बल्कि गांवों की आत्मा, लोक संस्कृति और परंपरा से भी पहचानी जानी चाहिए। अयोध्या के गांवों में होमस्टे, सांस्कृतिक भ्रमण, ग्रामीण भोजन, खेती अनुभव, नदी किनारे गतिविधियां और हस्तशिल्प बाजार विकसित करके सरकार ने एक समग्र आर्थिक ढांचा तैयार किया है। यह मॉडल आने वाले वर्षों में लाखों ग्रामीण परिवारों की आय का स्थायी स्रोत बनेगा और उत्तर प्रदेश को ग्रामीण पर्यटन के राष्ट्रीय लीडर के रूप में स्थापित करेगा।

सरकारी नौकरी प्राप्त करने वाले खिलाड़ी को अभ्यास के लिए भी मिलेगा पूरा अवसरः मुख्यमंत्री

  गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नौजवानों का आह्वान किया और कहा कि पीएम मोदी ने देश के हर नौजवान से अपेक्षा की है कि वह किसी न किसी खेल के साथ अवश्य जुड़े, क्योंकि खेलोगे तो खिलोगे। सीएम ने कबड्डी का जिक्र करते हुए कहा कि इस खेल में स्फूर्ति और व्यक्ति के मन में टीम भावना के साथ कार्य करने का जज्बा भी है। हर खेल व खेल संस्कृति टीम वर्क के रूप में कार्य करने की प्रेरणा देती है। भारत के अंदर प्राचीन काल से ही खेल व खेलकूद की प्रतियोगिताओं के प्रति व्यापक जागरूकता रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रीजनल स्टेडियम में ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज सप्तम् अखिल भारतीय प्राइजमनी पुरुष कबड्डी प्रतियोगिता-2025 के विजेताओं को पुरस्कृत किया। जब व्यक्ति शारीरिक फिटनेस पर ध्यान देगा तो काया निरोगी होगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धर्म के जितने भी साधन हैं, उन सभी की पूर्ति स्वस्थ शरीर से ही संभव है। स्वस्थ शरीर, निरोगी काया तभी प्राप्त हो सकती है, जब व्यक्ति शारीरिक फिटनेस पर ध्यान दे। उन्होंने कहा कि 11 वर्ष में सभी ने बदलते हुए भारत और पीएम मोदी की प्रेरणा से खेल व खेल संस्कृति के प्रति आम भारतीयों के मन में जो भाव पैदा हुए हैं, उसे मूर्त रूप लेते हुए देखा है। इसके कारण भारत की प्रतिभाएं ओलंपियन, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ, विश्व चैंपियनशिप में अच्छा पुरस्कार ले रही हैं। खेल व प्रतियोगिताओं के प्रति नई जागरूकता पैदा हुई है। सांसद-विधायक खेलकूद प्रतियोगिताएं हो रही हैं। खेलो इंडिया खेलो के माध्यम से हर स्तर पर केंद्र स्थापित हो रहे हैं। प्रदेश में बढ़ती दिखाई दे रहीं खेलकूद की गतिविधियां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी के अंदर पहले से तीन स्पोट्रस कॉलेज हैं। हमारी सरकार ने तय किया है कि हर कमिश्नरी मुख्यालय पर स्पोट्रस कॉलेज होना चाहिए। हर जिला मुख्यालय पर स्टेडियम और ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियम का निर्माण होना चाहिए। इन सुविधाओं को सरकार बढ़ा रही है। गांव-गांव में खेल मैदान, ओपन जिम का निर्माण हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार का जो पैसा वित्त आयोग के माध्यम से पंचायतों को जाता है, उसकी प्राथमिकता में खेल मैदान, ओपन जिम, खेलकूद की गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में खेलकूद की गतिविधियां प्रत्येक स्तर पर बढ़ती दिखाई दी हैं। मेरठ में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर खेल विश्वविद्यालय बन रहा है। इस वर्ष से पहला सत्र प्रारंभ भी हो चुका है। स्टेडियम, इनडोर स्टेडियम, विश्वविद्यालय भवन समेत अन्य बुनियादी सुविधाएं ओलंपिक, एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स के स्टैंडर्ड को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही हैं। 2030 का कॉमनवेल्थ गेम्स भारत के अहमदाबाद में होने जा रहा है। 12 टीमों के 168 खिलाड़ियों ने किया प्रतिभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सात वर्ष से लगातार इस प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा है। इस बार 12 टीमों के 168 खिलाड़ी व 24 कोच-मैनेजर ने प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया है। इस बार राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, विदर्भ, मध्य प्रदेश, पूर्वोत्तर रेलवे, भारतीय सेना, जेबी एकेडमी व यूपी की टीम शामिल हैं। सीएम ने विजेता उत्तर प्रदेश की टीम को दी बधाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विजेता उत्तर प्रदेश व उपविजेता पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यूपी की टीम इसलिए विजयी हुई, क्योंकि हमने गारंटी दे दी है कि जो भी खिलाड़ी ओलंपिक, एशियन, कॉमनवेल्थ, विश्व चैंपियन में मेडल लेकर आएगा, उसे सीधे सरकारी नौकरी उपलब्ध कराएंगे। खिलाड़ियों को डिप्टी एसपी, तहसीलदार व अलग-अलग विभागों में अन्य महत्वपूर्ण स्थान भी दिए गए हैं। हमारी सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि कोई खिलाड़ी प्रतियोगिता में जाता है तो उस दौरान उसे सर्विस का पार्ट माना जाएगा। सरकारी नौकरी प्राप्त करने वाले खिलाड़ी को अभ्यास के लिए पूरा अवसर भी मिलेगा। अब तक 500 से अधिक खिलाड़ियों को यूपी सरकार के विभिन्न पदों पर सरकारी नौकरी में समायोजित कर लिया गया है। खिलाड़ियों के लिए प्रदेश में प्रोत्साहन के अच्छे कार्यक्रम भी चल रहे हैं। ओलंपिक, एशियन, कॉमनवेल्थ, विश्व चैंपियनशिप में खिलाड़ी, टीम, प्रतिभाग व मेडल पर भी पुरस्कार की अलग-अलग राशि घोषित की गई है। खेल से विकसित होता है सहयोग, अनुशासन व जिम्मेदारी का भाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब कबड्डी लीग भी हो रहे हैं। लोगों ने इसे काफी लोकप्रिय माना है। खेलकूद से पूरी टीम जुड़ती है। कबड्डी में हर खिलाड़ी के रेड, टेकल व बोनस प्वाइंट केवल खेल नहीं, बल्कि नए भारत की ऊर्जा का प्रतीक होता है। वह देश की जिस टीम का प्रतिनिधित्व करता है, उसकी ऊर्जा का प्रतीक होता है। हर खेल युवाओं की स्फूर्ति, अटेंशन, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता व आत्मविश्वास को भी विकसित करता है। खेल बताता है कि सफलता सामूहिक प्रयास से मिलती है। खेल से खिलाड़ियों में सहयोग, अनुशासन व जिम्मेदारी का भाव विकसित होता है। इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, महेंद्र पाल सिंह, प्रदीप शुक्ला, भाजपा जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, डॉ. विभ्राट चंद कौशिक, पूर्व महापौर डॉ. सत्या पांडेय, कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार, खेल निदेशक डॉ. आरपी सिंह आदि मौजूद रहे।