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कोडीन के काले कारोबार पर शिकंजा: योगी सरकार ने 128 फर्मों के खिलाफ दर्ज कराई FIR

लखनऊ  योगी सरकार ने कोडीनयुक्त कफ सिरप और नॉरकोटिक दवाओं के अवैध कारोबार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रदेशभर में 128 FIR दर्ज कर लाखों की दवाएं जब्त की हैं। एएनटीएफ और एफएसडीए की संयुक्त कार्रवाई से कई ड्रग तस्कर गिरफ्तार हुए और संदिग्ध मेडिकल स्टोर्स पर बिक्री पर रोक लगाई गई।   लखनऊ में योगी सरकार प्रदेश के युवाओं को नशे की आगोश में धकेलने वाले अवैध नशे के सौदागरों के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है। सीएम योगी के निर्देश पर पूरे प्रदेश में एएनटीएफ (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा बड़ा एक्शन लिया गया है। इसी क्रम में एफएसडीए द्वारा प्रदेश भर में कोडीनयुक्त कफ सिरप और नॉरकोटिक्स श्रेणी की औषधियों के अवैध भंडारण, क्रय-विक्रय और वितरण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है। इस विशेष अभियान में अब तक प्रदेशभर में लाखों की अवैध नॉरकोटिक और कोडीनयुक्त औषधियां जब्त की गई हैं जबकि अब तक 128 एफआईआर दर्ज की गई हैं। वहीं आधा दर्जन से अधिक अवैध नशे के सौदागरों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे धकेला गया है।   नॉरकोटिक औषधियों की बिक्री पर लगाई रोक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, डॉ. रोशन जैकब ने बताया की मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में अब तक प्रतिष्ठानों पर निरीक्षण/छापेमारी की गई, लाखों की औषधियां सीज की गईं।जांच में संदिग्ध पाए गए अभिलेखों की अग्रिम विवेचना तक दो दर्जन से अधिक मेडिकल स्टोर्स पर कोडीनयुक्त सिरप एवं नॉरकोटिक औषधियों की बिक्री पर रोक लगाई गई है। प्रदेश भर में कोडीन युक्त / नॉरकोटिक्स/साईकोट्रॉपिक श्रेणी औषधियों की अवैध आवाजाही की जांच हेतु संदिग्ध मेडिकल स्टोर की सघन जांच, विशेष अभियान के रूप में जारी है। उन्होंने बताया कि अवैध रूप से नकली एवं नशे के रूप में दुरूपयोग होने वाली औषधि के भंडारण, क्रय-विक्रय अथवा आवाजाही से संबंधित सूचना विभाग द्वारा जारी व्हाट्सप्प नंबर 8756128434 पर दी जा सकती है। अवैध नॉरकोटिक औषधियों की बिक्री और भंडारण के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कई जिलों में छापेमारी की है और एनडीपीएस एक्ट में सख्त कार्रवाई की गई। इन जिलों में दर्ज की गई एफआईआर आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि अभियान के दौरान 28 जिलों में कुल 128 एफआईआर दर्ज की गई। इनमें वाराणसी में 38, जौनपुर में 16, कानपुर नगर में 8, गाजीपुर में 6, लखीमपुर खीरी 4, लखनऊ 4 और बहराइच, बिजनौर, प्रयागराज, प्रतापगढ़, सीतापुर, सोनभद्र, बलरामपुर, रायबरेली, संतकबीर नगर, हरदोई, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, उन्नाव, बस्ती, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, सहारनपुर, बरेली, सुल्तानपुर, चंदौली, मीरजापुर आदि जिलों में 52 एफआईआर दर्ज की गई।  

निवेश को मिलेगी रफ्तार: FDI बढ़ाने के लिए सीएम योगी का अधिकारियों को कड़ा आदेश

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को प्रदेश में विदेशी निवेश को नई रफ्तार देने के लिए चल रहे प्रयासों की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए साफ कहा कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ निवेश की संभावना नहीं, बल्कि निवेश के भरोसे का राज्य बन गया है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हर निवेशक के साथ संवाद लगातार बना रहना चाहिए और किसी भी स्तर पर देरी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि 'स्पीड, स्टेबिलिटी और सपोर्ट' यही नए उत्तर प्रदेश की पहचान होनी चाहिए। बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के सितंबर 2025 तक की अवधि में उत्तर प्रदेश को 683 मिलियन अमेरिकी डॉलर का विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है और राज्य का कुल संचयी विदेशी निवेश अक्टूबर 2019 से अब 2,754 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि चालू अवधि में प्रदेश को 5,963 करोड़ रुपए का विदेशी निवेश प्रवाह मिला है, जो पिछले वर्षों की तुलना में तेज वृद्धि को दर्शाता है। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि एफडीआई-एफसीआई-फॉर्च्यून 500 नीति-2023 के तहत अब तक 11 निवेश आवेदकों ने 13,610 करोड़ रुपए के प्रस्ताव दिए हैं। इसके अलावा 22 आवेदनों के माध्यम से 17,810 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और 56 हजार करोड़ रुपए के निवेश से जुड़े 29 आवेदन पाइपलाइन में हैं। यह भी बताया गया कि जापान, अमेरिका, बेल्जियम, यूनाइटेड किंगडम, पोलैंड और सिंगापुर उत्तर प्रदेश के प्रमुख निवेश साझेदार बने हुए हैं। सीएम को अवगत कराया गया कि जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, जर्मनी, फ्रांस, सिंगापुर और खाड़ी देशों के लिए बनाए गए विदेशी देश डेस्क लगातार सक्रिय हैं। दूतावासों, उच्चायोगों और व्यापार संघों से निरंतर संवाद चल रहा है। निवेशकों के साथ 100 से अधिक वन-टू-वन बैठकें हो चुकी हैं। जापान व्यापार संगठन और सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य मंडल के साथ होने वाले समझौते भी निवेश के ठोस अवसरों में बदले जा रहे हैं। खाड़ी सहयोग परिषद सेक्टर डेस्क की समीक्षा में बताया गया कि दिल्ली, नोएडा, मुंबई, लखनऊ और कानपुर में अब तक 6 गोलमेज बैठकें हो चुकी हैं, जिनसे 83 कंपनियों के साथ सीधा संवाद बना और करीब 5,000 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव सामने आए। सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और विनिर्माण क्षेत्र में सबसे अधिक रुचि दिखी, जबकि बैंकिंग, वित्त, बीमा, फार्मा, लाइफ साइंस, मीडिया और मनोरंजन क्षेत्रों को उच्च संभावनायुक्त बताया गया। मुख्यमंत्री ने ललितपुर फार्मा पार्क को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए कि इससे जुड़े अवसंरचना कार्यों में और तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि कई बड़ी दवा कंपनियों ने यहां निवेश में रुचि दिखाई है, ऐसे में उनसे लगातार संवाद बनाए रखा जाए और भूमि, बिजली, पानी जैसी सुविधाएं समय पर सुनिश्चित हों। जापान डेस्क की समीक्षा में बताया गया कि डेंसो के ब्राउनफील्ड विस्तार परियोजना पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और दस्तावेजी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। कांसाई फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री एसोसिएशन की 125 जापानी कंपनियों के साथ फॉलोअप चल रहा है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के सहयोग से ग्रीन हाइड्रोजन उत्कृष्टता केंद्र की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। टोयोटा समूह, सुमितोमो और मारुबेनी से निवेश को लेकर लगातार बातचीत जारी है। जापान डेस्क के अंतर्गत कुल 20,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। ताइवान डेस्क को लेकर मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि यहां प्रयास और तेज किए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि ताइवान के निवेशकों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा जाए, केवल रोड शो तक सीमित न रहा जाए। बैठक में बताया गया कि 40 से अधिक कंपनियां चिन्हित की गई हैं और लगभग 100 करोड़ रुपए के निवेश की पाइपलाइन तैयार है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना क्षेत्र को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां एचसीएल-फॉक्सकॉन का 3,700 करोड़ रुपए का निवेश मजबूत आधार बनेगा। कानपुर को तकनीकी वस्त्र और स्पोर्ट्सवेयर केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना भी सामने रखी गई। दक्षिण कोरिया डेस्क की समीक्षा में बताया गया कि सैमसंग, एलजी, केएच वेटेक और ड्रीमटेक जैसी कंपनियों के साथ निवेश को लेकर बातचीत आगे बढ़ चुकी है। एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स का गौतमबुद्ध नगर में करीब 850 करोड़ रुपए का विस्तार प्रस्तावित है, जबकि लोट्टे समूह का लगभग 400 करोड़ रुपए का निवेश प्रक्रियाधीन है। मुख्यमंत्री ने कोरियाई कंपनियों के लिए भी संवाद और सुविधाकरण को और मजबूत करने के निर्देश दिए। सिंगापुर डेस्क के अंतर्गत टेमासेक, सरकारी निवेश कोष, पीएसए, डीबीएस, कैपिटललैंड-असेंडास, केपेल और सेम्बकॉर्प जैसे निवेशक यूपी में लगातार रुचि दिखा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सभी विदेशी डेस्क द्वारा नियमित अंतराल पर राउंड टेबल बैठकें होती रहनी चाहिए। उन्होंने इन्वेस्ट यूपी की टीम से कहा कि हर निवेशक के साथ एकल संपर्क बिंदु तय हो, ताकि उसे प्रणाली में भटकना न पड़े। मुख्यमंत्री ने उद्योगों को गति देने के लिए ‘प्लग एंड प्ले’ मॉडल पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि निवेशक को पहले दिन से तैयार अवसंरचना मिलेगी, तो वह तेजी से काम शुरू कर सकेगा और यही मॉडल उत्तर प्रदेश को अन्य राज्यों से आगे ले जाएगा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां कंपनियों के कॉरपोरेट और मुख्यालय खोलने के लिए उन्हें प्रेरित किया जाए। मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण को लेकर यह भी निर्देश दिए कि वहां आवश्यक मानव संसाधन की कमी न रहे।

योगी सरकार का अवैध नशे पर बड़ा प्रहार, कोडीन के दुरुपयोग पर 128 फर्मों पर एफआईआर

– मुख्यमंत्री के निर्देश पर औषधि प्रशासन की ताबड़तोड़ छापेमारी में लाखों की अवैध दवाएं जब्त, आधा दर्जन से अधिक गिरफ्तार   – सबसे अधिक वाराणसी में 38, जौनपुर में 16, कानपुर नगर में 8, गाजीपुर में 6 और लखीमपुर खीरी-लखनऊ में 4-4 एफआईआर दर्ज की गई – प्रदेश के 28 जिलों में कोडीन के संगठित दुरुपयोग पर विभिन्न फर्मों पर दर्ज की गई एफआईआर लखनऊ, योगी सरकार प्रदेश के युवाओं को नशे की आगोश में धकेलने वाले अवैध नशे के सौदागरों के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है। सीएम योगी के निर्देश पर पूरे प्रदेश में एएनटीएफ (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा बड़ा एक्शन लिया गया है। इसी क्रम में एफएसडीए द्वारा प्रदेश भर में कोडीनयुक्त कफ सिरप और नॉरकोटिक्स श्रेणी की औषधियों के अवैध भंडारण, क्रय-विक्रय और वितरण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है। इस विशेष अभियान में अब तक प्रदेशभर में लाखों की अवैध नॉरकोटिक और कोडीनयुक्त औषधियां जब्त की गई हैं जबकि अब तक 128 एफआईआर दर्ज की गई हैं। वहीं आधा दर्जन से अधिक अवैध नशे के सौदागरों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे धकेला गया है। दो दर्जन से अधिक मेडिकल स्टोर्स पर कोडीनयुक्त सिरप एवं नॉरकोटिक औषधियों की बिक्री पर लगाई रोक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, डॉ. रोशन जैकब ने बताया की मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में अब तक  प्रतिष्ठानों पर निरीक्षण/छापेमारी की गई, लाखों की औषधियां सीज की गईं। जांच में संदिग्ध पाए गए अभिलेखों की अग्रिम विवेचना तक दो दर्जन से अधिक मेडिकल स्टोर्स पर कोडीनयुक्त सिरप एवं नॉरकोटिक औषधियों की बिक्री पर रोक लगाई गई है। प्रदेश भर में कोडीन युक्त / नॉरकोटिक्स/साईकोट्रॉपिक श्रेणी औषधियों की अवैध आवाजाही की जांच हेतु संदिग्ध मेडिकल स्टोर की सघन जांच, विशेष अभियान के रूप में जारी है। उन्होंने बताया कि अवैध रूप से नकली एवं नशे के रूप में दुरूपयोग होने वाली औषधि के भंडारण, क्रय-विक्रय अथवा आवाजाही से संबंधित सूचना विभाग द्वारा जारी व्हाट्सप्प नंबर 8756128434 पर दी जा सकती है। अवैध नॉरकोटिक औषधियों की बिक्री और भंडारण के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कई जिलों में छापेमारी की है और एनडीपीएस एक्ट में सख्त कार्रवाई की गई। इन जिलों में दर्ज की गई एफआईआर आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि अभियान के दौरान 28 जिलों में कुल 128 एफआईआर दर्ज की गई। इनमें वाराणसी में 38, जौनपुर में 16, कानपुर नगर में 8, गाजीपुर में 6, लखीमपुर खीरी 4, लखनऊ 4 और बहराइच, बिजनौर, प्रयागराज, प्रतापगढ़, सीतापुर, सोनभद्र, बलरामपुर, रायबरेली, संतकबीर नगर, हरदोई, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, उन्नाव, बस्ती, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, सहारनपुर, बरेली, सुल्तानपुर, चंदौली, मीरजापुर आदि जिलों में 52 एफआईआर दर्ज की गई।

उत्तर प्रदेश में नवाचार की नई परंपरा, इनक्यूबेशन सेंटर बने विकास के अग्रदूत

प्रदेश में 8 वर्षों में विकसित हुआ सशक्त इनक्यूबेशन इकोसिस्टम योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों से युवाओं को मिला रोजगार उद्यम और नवाचार का नया अवसर लखनऊ, उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले आठ वर्षों में इनक्यूबेशन आधारित नवाचार को नई पहचान दी है। आज प्रदेश में कुल 76 इनक्यूबेशन सेंटर सक्रिय हैं। ये केंद्र विद्यार्थियों और युवाओं को विचार से उद्योग तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में सहयोग देते हैं। सरकार का उद्देश्य हर जिले में ऐसा माहौल तैयार करना है जहां युवा सुरक्षित और संगठित तरीके से उद्यम शुरू कर सकें। इसी लक्ष्य के तहत वित्तीय सहायता तकनीकी मार्गदर्शन और विशेषज्ञ नेटवर्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इनक्यूबेशन सेंटर वह स्थान है, जहां नए आइडिया को विकसित कर सफल कारोबार में बदलने के लिए सभी आवश्यक संसाधन एक ही स्थान पर उपलब्ध कराए जाते हैं। यह ऐसा केंद्र है जो स्टार्टअप को उसके जन्म से लेकर उसके पांव जमाने तक मार्गदर्शन, सहायता और सुविधाएं प्रदान करता है। इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना से उद्यमियों की कई चुनौतियां सरल हो गई हैं। यहां शुरुआती चरण में जरूरी प्रशिक्षण कानूनी सलाह बाजार से जुड़ी जानकारी तकनीकी मार्गदर्शन और निवेशकों से संपर्क जैसे सभी तत्व एक ही स्थान पर उपलब्ध होते हैं। इससे किसी भी स्टार्टअप की सफलता की संभावना बढ़ जाती है। इन केंद्रों ने युवाओं में उद्यमिता की भावना को मजबूत किया है और उन्हें जोखिम लेने का आत्मविश्वास दिया है। पिछले आठ वर्षों में इन केंद्रों से जुड़े हजारों युवाओं ने अपनी पहचान बनाई है। कृषि तकनीक शिक्षा स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले कई स्टार्टअप प्रदेश के भीतर और बाहर अपनी उपयोगिता सिद्ध कर चुके हैं। इन स्टार्टअप ने रोजगार भी बढ़ाया है और स्थानीय समस्याओं के समाधान भी प्रदान किए हैं। इससे उत्तर प्रदेश के आर्थिक ढांचे को नई दिशा मिली है। स्टार्टअप विशेषज्ञ विनीत का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार स्टार्टअप को बढ़ावा देने का ठोस प्रयास कर रही है। इन्क्युबेटर्स की स्थापना से स्टार्टअप्स को बड़ी मदद मिलती है। शुरुआत में स्टार्टअप्स को बहुत दिक्कतें आती है, ऐसे में इन्क्युबेटर्स बड़े सहायक होते हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार का मानना है कि इनोवेशन और तकनीक आधारित उद्यम ही भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार तैयार करेंगे। इनक्यूबेशन सेंटर इसी सोच का विस्तार हैं। छोटे शहरों से निकलकर बड़े मंच तक पहुंचने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह परिवर्तन प्रदेश को एक मजबूत स्टार्टअप हब के रूप में स्थापित कर रहा है। कुल मिलाकर इनक्यूबेशन सेंटर उत्तर प्रदेश में विकास और अवसरों के नए द्वार खोल रहे हैं। यह नेटवर्क न केवल उद्यमिता को गति दे रहा है बल्कि प्रदेश को आत्मनिर्भर और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर भी अग्रसर कर रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार से पहले इनक्यूबेशन सेंटर मामले में स्थिति उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से पहले इनक्यूबेशन सेंटरों की संख्या लगभग 12 से 15 के बीच थी। यह केंद्र केवल चुनिंदा विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों तक सीमित थे। न इनके विस्तार की कोई स्पष्ट नीति थी और न ही स्टार्टअप इकोसिस्टम को लेकर कोई स्पष्ट संरचना। योगी आदित्यनाथ सरकार में विस्तार वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार ने स्टार्टअप नीति लागू की और पूरे राज्य में इनक्यूबेशन नेटवर्क का व्यापक विस्तार शुरू किया। परिणाम स्वरूप आज प्रदेश में 76 इनक्यूबेशन सेंटर सक्रिय हैं और कई और स्थापित किए जाने की प्रक्रिया में हैं। सरकार के प्रमुख लक्ष्य – हर जिले में कम से कम एक इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करना – उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्टार्टअप हब के रूप में विकसित करना – युवा उद्यमिता को रोजगार सृजन का प्रमुख साधन बनाना – स्टार्टअप की सफलता दर को बढ़ाना – कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल सेवाएं सुरक्षा और ई-गवर्नेंस सहित कई क्षेत्रों में नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का निर्माण करना – इनक्यूबेशन सेंटरों की संख्या 100 करने का लक्ष्य

हनुमानगढ़ी में सनसनी: संत महेश योगी को जिंदा जलाने की साजिश, बाल-बाल बचे

अयोध्या श्रीराम की नगरी अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर परिसर में ही स्थित भवन में रहने वाले संत महेश योगी को जिंदा जलाने की कोशिश की गई है। संत के अनुसार शुक्रवार की भोर में सोते समय उनके कमरे में पीछे की ओर लगी खिड़की की लोहे की जाली काटकर ज्वलनशील पदार्थ के साथ आग अंदर फेंकी गई। संयोग से आग कमरे में फैलते ही संत की आंख खुल गई और वह बाहर भाग कर अपनी जान बचाने में सफल हो गए। पुलिस और फोरेंसिक विभाग की टीम जांच में जुटी है। सीसीटीवी से सुराग की कोशिश हो रही है। थाना राम जन्मभूमि क्षेत्र में स्थित हनुमानगढ़ी परिसर में रहने वाले स्वामी महेश योगी ने बताया कि वह अपने भवन गोविंदगढ़ में रोज की तरह गुरुवार की रात सो रहे थे। शुक्रवार की भोर में लगभग साढ़े तीन बजे आश्रम के पिछले हिस्से में खिड़की में लगी लोहे की जाली काटकर कमरे को जलाने के उद्देश्य से अंदर आग का गोला फेंका गया। इससे कमरे में आग की लपटें और धुंआ निकलने लगा और उनकी आंख खुल गई। संत का आरोप है कि यह आग उन्हें मारने की साजिश के तहत लगाई गई थी। आग ज्वलनशील पदार्थ के माध्यम से लगाई गई है, क्योंकि बदबू पूरे कमरे फैल गई थी। समय रहते आग बुझा ली गई। इससे अधिक नुकसान नहीं हुआ है। संत की शिकायत पर पुलिस और फॉरेंसिक टीम जांच में जुट गई है। सीसीटीवी से संदिग्ध व्यक्ति की पहचान की जा रही है। मेरे खिलाफ कुछ संत कर रहे षड्यंत्र संत महेश योगी ने एक दूसरे संत का नाम लेते हुए कहा कि वह मेरे खिलाफ साजिश रच रहे हैं। उनकी सह पर हनुमानगढ़ी से निष्कासित कुछ संत आए दिन षड्यंत्र करते रहते हैं। यहां तक कि दुष्कर्म जैसे अपराध में भी मुझे फंसाने की साजिश पहले रच चुके हैं। कहा कि उस महंत ने दो साल से हनुमानगढ़ी से मिलने वाली सभी सहायता बंद कर दी है। यहां तक कि दान पात्र में मिले रुपए भी ले लिए हैं, जिसमें करीब दो करोड़ रुपए की धांधली की गई है। इसकी शिकायत की थी। तब आरोपी संत को फटकार भी लगी थी। इसके बावजूद षड्यंत्र जारी है। यह भी कहा कि हनुमानगढ़ी में चार पट्टियां (उज्जैनिया, बसंतिया, सागरी और हरिद्वारी) हैं। चारों महंतों के ऊपर एक गद्दीनशीन होते हैं। चारों पट्टियों में चार-चार महंत होते हैं। इन पट्टियों में 40 से 50 आश्रम हैं। प्रत्येक आश्रम के अलग-अलग महंत होते हैं। बसंतिया पट्टी के 40 आश्रम हैं, जिनमें से एक गोविंदगढ़ आश्रम का मैं महंत हूं। आश्रम की संपत्ति पर कब्जा करने के लिए मुझे मारने की साजिश रची जा रही है।  

एआई संचालित सुशासन का नया मॉडल पेश कर रहा उत्तर प्रदेश

अत्याधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल कर सुदृढ़ सुशासन दे रही योगी आदित्यनाथ सरकार   एआई संचालित सुशासन का नया मॉडल पेश कर रहा उत्तर प्रदेश त्रिनेत्र 2.0 और स्मार्ट मॉनिटरिंग से कानून व्यवस्था हुई मजबूत एआई आधारित फोरेंसिक और जेल सुरक्षा प्रणाली ने बढ़ाई जांच और निगरानी की सटीकता   लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार सुशासन के अपने मॉडल को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए तेजी से उन्नत तकनीकों को माध्यम बना रही है। कानून व्यवस्था को मजबूत करने और न्याय प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए सरकारी तंत्र में डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित समाधानों का दायरा लगातार विस्तृत और समृद्ध हो रहा है। इसका उद्देश्य अपराध नियंत्रण से लेकर न्याय की प्रक्रिया तक की दक्षता में वृद्धि करना है। गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्चीकृत क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला के उद्घाटन के दौरान कहा भी था कि “अब प्रदेश में अपराधी के बचने का कोई रास्ता नहीं बचेगा। फोरेंसिक जांच अपराध की कड़ी को मिनटों में उजागर कर देगी और हर गंभीर मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य निर्णायक भूमिका निभाएंगे”। राज्य पुलिस प्रणाली को स्मार्ट तथा अधिक सक्षम बनाने के लिए सरकार ने त्रिनेत्र 2.0 के रूप में एक नया उन्नत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया है। यह एक एआई एन्हांस्ड प्लेटफॉर्म है,  जिसमें पुलिस रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित और व्यवस्थित किया जाता है। यह सिस्टम अपराधियों की पहचान और उनके इतिहास को समझने के काम को त्वरित और सटीक बनाता है। त्रिनेत्र फेशियल रिकग्निशन वॉइस आइडेंटिफिकेशन और टेक्स्ट बेस्ड क्वेरी जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए पुलिस को संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने में मदद मिलती है। इससे क्राइम के जांच की गति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।  जुलाई 2023 से प्रदेश के समस्त जनपदों में ऑपरेशन त्रिनेत्र प्रारम्भ किया गया, जिसके अन्तर्गत महत्वपूर्ण चौराहों, संवेदनशील स्थानों, हॉटस्पॉट, बैंक, स्कूल, कॉलेज, व्यवसायिक प्रतिष्ठान, धार्मिक स्थल, मोबाइल टॉवर, पेट्रोल पम्प, ढाबा आदि स्थानों पर नागरिक स्वयंसेवी सस्थाओं के माध्यम से सीसीटीवी कैमरे लगाने की कार्यवाही प्रारम्भ की गयी थी और 2025 की शुरुआत तक ही तक प्रदेश के समस्त थानों में चिन्हित स्थलों पर 11,07,782 सीसीटीवी कैमरों का अधिष्ठापन कर दिया गया है। और इसी का परिणाम है कि 2025 की शुरुआत तक ही त्रिनेत्र के माध्यम से डकैती, लूट सहित अन्य गम्भीर कुल 5,718 घटनाओं का सफल अनावरण किया गया। जेल प्रशासन को स्मार्ट बनाने की दिशा में भी योगी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राज्य की जेलों में एआई पावर्ड वीडियो एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म लागू किया गया है जो बंदियों की गतिविधियों पर रियल टाइम नजर रखने में सक्षम है। इसके माध्यम से किसी भी संदिग्ध हरकत या संभावित जोखिम की पहचान तुरंत हो जाती है जिससे जेल सुरक्षा में प्रभावी सुधार आया है। इसके साथ ही वरिष्ठ अधिकारी विभिन्न जेलों की स्थिति को रियल टाइम में मॉनिटर कर सकते हैं और आवश्यक निर्देश तत्काल जारी कर सकते हैं। गोरखपुर में फोरेंसिक साइंस लैब के उन्नयन के बाद जांच एजेंसियों की वैज्ञानिक जांच क्षमता में भी उल्लेखनीय विकास हुआ है। अत्याधुनिक मशीनों और प्रशिक्षित विशेषज्ञों से लैस इस लैब ने अपराध जांच की गुणवत्ता को नई ऊंचाई दी है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि आधुनिक फोरेंसिक तकनीकें अपराधों की सटीक और वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित करती हैं और यही कारण है कि प्रदेश भर में फोरेंसिक और इन्वेस्टिगेटिव क्षमताओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन सभी पहल का लक्ष्य उत्तर प्रदेश में सुशासन की ऐसी प्रणाली विकसित करना है, जिसमें पारदर्शिता दक्षता और तकनीकी सशक्तिकरण केंद्र बिंदु में हो। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की यह रणनीति प्रदेश को एक सुरक्षित कानून आधारित और तकनीक संचालित राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

ओडीओपी योजना को और विस्तार देना समय की मांग, बेहतर प्रशिक्षण, ऋण सुविधा का विस्तार किया जाना आवश्यक: मुख्यमंत्री

ब्रांड यूपी की पहचान बनने के बाद अब लॉंच होगा ओडीओपी 2.0 ओडीओपी योजना को और विस्तार देना समय की मांग, बेहतर प्रशिक्षण, ऋण सुविधा का विस्तार किया जाना आवश्यक: मुख्यमंत्री अब खान-पान की परंपरा भी बनेगी ब्रांड, उत्तर प्रदेश में शुरू होगी एक जनपद-एक व्यंजन की नई पहल सभी यूनिटी मॉल और बड़े रीटेल नेटवर्क में प्रमुखता से प्रदर्शित होंगे उत्तर प्रदेश के उत्पाद डिजिटल रणनीति से बढ़ेगा निर्यात, बनेगा ओडीओपी निर्यात सहायता केंद्र स्थानीय उद्योग, निर्यात और रोज़गार को नई ऊँचाई देगा ओडीओपी 2.0: मुख्यमंत्री ओडीओपी और ओडीओसी मिलकर बनाएंगे उत्तर प्रदेश को लोकल से ग्लोबल की नई ताकत: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि ब्रांड उत्तर प्रदेश की पहचान बन चुकी 'एक जनपद- एक उत्पाद योजना' अब अपने अगले चरण ओडीओपी 2.0 टू के माध्यम से स्थानीय उद्योग, स्वरोज़गार और निर्यात को नई ऊंचाई देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक बाजार, आधुनिक मांग, तकनीकी उन्नयन, गुणवत्ता और पैकेजिंग की नई आवश्यकताओं को देखते हुए ओडीओपी को अब और अधिक व्यापक, व्यावसायिक और परिणामोन्मुखी स्वरूप में आगे बढ़ाने की जरूरत है। ओडीओपी 2.0 के माध्यम से सरकार का लक्ष्य होगा कि प्रदेश के पारंपरिक उत्पाद बड़े बाज़ार, निर्यात और स्थायी रोजगार का मजबूत आधार बनें।  शुक्रवार को इस संबंध में हुई महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जनपद की विशिष्ट खाद्य परंपरा को भी एक संगठित पहचान देने की दिशा में 'एक जनपद-एक व्यंजन' (ओडीओसी) की अवधारणा को साकार करने की भी जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि 'एक जनपद-एक व्यंजन' योजना उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा से जुड़ी हुई है। प्रदेश के हर क्षेत्र में खान-पान की कुछ न कुछ विशिष्ट परंपरा है। कहीं हलवा अच्छा है तो कहीं दालमोठ। उन्होंने कहा कि हर जिले के विशेष व्यंजनों की मैपिंग कर उनकी गुणवत्ता, स्वच्छता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन को सुदृढ़ किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'ओडीओपी' और 'ओडीओसी' मिलकर उत्तर प्रदेश को 'लोकल से ग्लोबल' की दिशा में नई गति देंगे। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2018 में प्रारंभ ओडीओपी योजना आज उत्तर प्रदेश के निर्यात और स्थानीय उद्योगों की रीढ़ बन चुकी है। अब तक 1.25 लाख से अधिक टूलकिट वितरित किए जा चुके हैं, 06 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वितरण हो चुका है और 08 हजार से अधिक उद्यमियों को प्रत्यक्ष विपणन सहायता दी गई है। प्रदेश में तीस साझा सुविधा केंद्र स्वीकृत किए गए हैं और 44 ओडीओपी उत्पादों को अब तक जियो टैग प्राप्त हो चुके हैं। ओडीओपी उत्पाद आज प्रतिष्ठित ई-कॉमर्स  प्लेटफार्म पर उपलब्ध हैं और राज्य के कुल निर्यात में इनका योगदान पचास प्रतिशत से अधिक है। ओडीओपी को लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है। मुख्यमंत्री ने ओडीओपी 2.0 को लेकर कहा कि यह अब केवल एक योजना नहीं, बल्कि स्थायी रोजगार, स्थानीय उद्यम और निर्यात को नई ऊँचाई देने का सशक्त माध्यम बने। उन्होंने कहा कि अब उन इकाइयों और उद्यमियों को आगे बढ़ाने पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है, जिन्होंने पहले चरण में उत्कृष्ट कार्य किया है, ताकि वे अपने व्यवसाय का और विस्तार कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि योजनाओं को इस तरह आगे बढ़ाया जाए कि तकनीक, पैकेजिंग, गुणवत्ता और बाजार सहित चारों मोर्चों पर उत्तर प्रदेश के उत्पाद सशक्त रूप में स्थापित हों। बैठक में यह भी बताया गया कि ओडीओपी से जुड़े कॉमन फैसिलिटी सेंटरों को अब और अधिक उपयोगी बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कॉमन फैसिलिटी सेंटरों के साथ विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि छोटे उद्यमियों को तकनीकी परामर्श, डिज़ाइन, पैकेजिंग और उत्पादन से जुड़ा पूरा सहयोग एक ही स्थान पर सुलभ हो सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि ओडीओपी उत्पादों को केवल पारंपरिक बाजारों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें बड़े रीटेल नेटवर्क और आधुनिक बाजारों से जोड़ा जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि देश के विभिन्न राज्यों में स्थापित हो रहे यूनिटी मॉल में ओडीओपी के समर्पित केंद्र बनाए जाएं। साथ ही सभी प्रतिष्ठित रीटेल नेटवर्क के साथ संवाद कर यह सुनिश्चित किया जाए कि वहां उत्तर प्रदेश के उत्पाद प्रमुख रूप से प्रदर्शित हों। बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि ओडीओपी उत्पादों की गुणवत्ता और पहचान को और सुदृढ़ करने के लिए उन्हें प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से प्रमाणन और ब्रांड मूल्य प्रदान किया जाएगा, जिससे वैश्विक बाजार में उत्तर प्रदेश के उत्पाद विशिष्ट पहचान बना सकें।

अब्दुल्ला आजम को बड़ा झटका: अदालत ने जुर्माने के साथ सुनाई सजा

रामपुर दो पैन कार्ड मामले में सात साल की सजा काट रहे पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को दो पासपोर्ट केस में भी कोर्ट ने सात साल की सजा सुनाई है। इसके अलावा उन पर 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। सुनवाई के दौरान अब्दुल्ला आजम वीडियो कांफ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए। सपा नेता आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ दो पासपोर्ट का मामला शहर विधायक आकाश सक्सेना ने सिविल लाइंस थाने में 2019 में दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि अब्दुल्ला आजम के पास दो पासपोर्ट हैं।  इसमें से एक पासपोर्ट का इस्तेमाल वह विदेश यात्रा में भी कर चुके हैं। यह मामला एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट में विचाराधीन था। इस मामले में दर्ज मुकदमे को निरस्त करने को लेकर अब्दुल्ला आजम ने सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की सुनवाई फिर से शुरू हुई। शुक्रवार को रामपुर कोर्ट ने फैसला सुनाया। सुनवाई के लिए पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को वीसी के माध्यम से कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम को दोषी करार देते हुए सात साल की सजा सुनाते हुए  50 हजार रुपये जुर्माना लगाया। क्या है मामला शहर विधायक आकाश सक्सेना की ओर से सिविल लाइंस थाने में वर्ष 2019 में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई थी। इसमें विधायक ने कहा था कि अब्दुल्ला आजम खां द्वारा असत्य व कूट रचित दस्तावेज तथा विवरण के आधार पर पासपोर्ट बनवाया है। वह इसका उपयोग कर रहे हैं। पासपोर्ट संख्या जेड4307442 दस जनवरी 2018 है। अब्दुल्ला आजम खां की जन्मतिथि शैक्षिक प्रमाण पत्रों हाईस्कूल बीटेक व एमटेक में  एक जनवरी1993 अंकित है। पासपोर्ट संख्या जेड 4307442 में जन्मतिथि  30 सितंबर 1990 अंकित है। पासपोर्ट का प्रयोग आर्थिक लाभ हेतु व्यापार व व्यवसाय संबंधी विदेश यात्राओं तथा विभिन्न संस्थाओं में पहचान पत्र  के रूप में तथा विभिन्न पदों के आवेदन में किया गया है। दूसरी ओर शैक्षिक प्रमाण पत्रों का प्रयोग भी आर्थिक लाभ हेतु शैक्षिक संस्थाओं की मान्यताओं व आईडी के लिए किया गया है। अब्दुल्ला आजम के शैक्षिक प्रमाण पत्र तथा पासपोर्ट का विवरण जन्मतिथि व जन्म स्थान विरोधाभासी है फिर भी अब्दुल्ला आजम सभी दस्तावेजों का प्रयोग जरूरत के अनुसार जानबूझकर अनुचित लाभ लेने के लिए कर रहे है। केस में आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आजम ने असत्य विवरण अंकित पासपोर्ट संख्या जेड 4307442 बनवाया है जो जिसका दुरुपयोग किया जाना भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 तथा पासपोर्ट अधिनियम की धारा -12(1) एके अन्तर्गत दंडनीय अपराध है ।  

यूपी में खेलों का नया दौर शुरू, सीएम योगी के आदेश पर सभी जिलों में अमल

 गोरखपुर  उत्तर प्रदेश में कभी सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित रहने वाली खेल सुविधाएं अब गांवों और ब्लॉकों तक पहुंचाने की योजना पर सरकार ने तेजी से काम शुरू कर दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कर दिया है कि खेलों को लेकर उनकी सरकार किसी भी स्तर पर समझौता करने को तैयार नहीं है. उन्होंने घोषणा की प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक साथ स्टेडियम और हर ब्लॉक में मिनी स्टेडियम का निर्माण तेजी से शुरू किया जा चुका है. यह घोषणा मुख्यमंत्री ने वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में 69वीं राष्ट्रीय स्कूली खेल प्रतियोगिता 2025 (ग्रीको-रोमन) कुश्ती के प्रतिभागियों और विजेताओं को सम्मानित करते हुए की. कार्यक्रम में अंडर-17 और अंडर-19 श्रेणी के पदक विजेताओं को मंच पर सम्मानित किया गया, लेकिन असली चर्चा मुख्यमंत्री की उस दूरदर्शी खेल नीति की रही, जिसकी वजह से यूपी देश के खेल नक्शे पर एक तेज़ी से उभरता हुआ राज्य बनता दिख रहा है. हमारी तैयारी उससे दो कदम आगे होगी अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत आज दुनिया में खेलों की शक्ति बनकर उभर रहा है. उन्होंने कहा, यह गर्व की बात है कि भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की प्रतिष्ठा लगातार बढ़ा रहे हैं. खेल व्यक्ति का सर्वांगीण विकास करते हैं और इसी सोच के साथ हम उत्तर प्रदेश में खेलों का मजबूत ढांचा तैयार कर रहे हैं. 75 जिलों में एक-एक स्टेडियम, हर ब्लॉक में मिनी स्टेडियम मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में सबसे बड़ा ऐलान करते हुए कहा राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि उत्तर प्रदेश के हर जिले में एक अत्याधुनिक स्टेडियम बनेगा और हर ब्लॉक में एक मिनी स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा. यह निर्णय सिर्फ घोषणा नहीं है, बल्कि कई जिलों में काम तेजी से शुरू भी हो चुका है. 18 जिलों के सरकारी कॉलेजों में मिनी स्टेडियम के निर्माण के लिए लगभग 5-5 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी जा चुकी है. गोरखपुर और महाराजगंज के सरकारी कॉलेजों में भी खेल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि योगी सरकार की मंशा साफ है अब खेल अब शहरों की सीमा में नहीं रहेंगे, खेल की संस्कृति गांव-गांव पहुंचेगी. शिक्षण संस्थानों को पहली बार मिला इतना बड़ा खेल बजट मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को खेलों से जोड़ने के लिए आवश्यक है कि खेलों को शिक्षा जितना महत्व दिया जाए. इसी उद्देश्य से सरकार ने एक नई पहल शुरू की है कि प्रत्येक कॉलेज को 25,000 रुपये, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों को 5,000 रुपये, जूनियर हाई स्कूलों को 10,000 रुपये खेल सामग्री खरीदने, कोचिंग गतिविधियां बढ़ाने और स्थानीय खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए दी जा रही है. यह पहली बार है जब राज्य में इतने व्यापक स्तर पर संस्थागत खेल बजट दिया जा रहा है. मेरठ में बनेगी अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी मुख्यमंत्री ने मेरठ में निर्माणाधीन स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय उत्तर भारत में खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा केंद्र बनेगा. उन्होंने बताया कि इसका नाम हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के नाम पर रखा जा रहा है. यह विश्वविद्यालय खेल प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, फिटनेस और कोचिंग के क्षेत्र में नई दिशा देगा. 2030 राष्ट्रमंडल खेलों पर फोकस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों का लक्ष्य लेकर तैयारी करने की प्रेरणा दी. उन्होंने कहा, कि अंडर-17 और अंडर-19 के यह युवा खिलाड़ी 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की रीढ़ बन सकते हैं. अहमदाबाद में होने वाले इस आयोजन में आपको तिरंगा लहराना है. यह लक्ष्य अभी से तय कर लें. मुख्यमंत्री ने उपविजेताओं और पदक से चूकने वाले खिलाड़ियों को भी संबोधित करते हुए कहा कि हार किसी भी खिलाड़ी की यात्रा का अंत नहीं है. उन्होंने कहा कि पहली प्रतिस्पर्धा हमेशा खुद से होती है. अपनी कमजोरियों को पहचानें, उनसे सीखें और आगे बढ़ते रहें. मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर और विकसित भारत’ के विज़न का जिक्र करते हुए कहा कि इसका मूल तत्व युवा शक्ति है. उन्होंने कहा कि स्वस्थ युवा ही सशक्त भारत की नींव बनेंगे. इसकी शुरुआत खेलों से होती है. इसलिए संस्थानों में खेलों को शिक्षा के बराबर स्थान दिया जाना चाहिए. देश की शीर्ष 3 राज्यों में शामिल होने का लक्ष्य अधिकारियों का मानना है कि जिस फोकस के साथ यूपी में खेलों की बुनियाद मजबूत की जा रही है, आने वाले वर्षों में राज्य खेलों के क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे पारंपरिक मजबूत राज्यों को कड़ी टक्कर दे सकता है. सरकारी स्तर पर जो संरचना तैयार हो रही है, वह यही संकेत देती है कि यूपी अब सिर्फ आबादी का सबसे बड़ा राज्य नहीं रहेगा, बल्कि खेलों में भी अपनी पहचान मजबूत करेगा.

दूल्हे के साले ने कार से बारातियों को रौंदा; डीजे को लेकर हुए विवाद ने ली 3 जानें

 कासगंज यूपी के कासगंज में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई आई है, जहां एक शादी समारोह खुशियों की जगह मातम में बदल गया. डीजे बजाने को लेकर हुई मामूली कहासुनी इतनी बढ़ गई कि दूल्हे के साले ने कार से पांच लोगों को रौंद दिया जिसमें तीन लोगों की जान चली गई. जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. यह पूरी घटना बीती रात गंजडुंडवारा कोतवाली क्षेत्र के जेडएस पैलेस गेस्ट हाउस की है.  दरअसल, कासगंज में सपा नेता के बेटे की शादी समारोह चल रहा था. इसी दौरान डीजे बजाने को लेकर दूल्हा पक्ष और दुल्हन पक्ष के बीच कहासुनी हो गई. पहले तो दोनों पक्षों में मामूली बहस हुई, लेकिन देखते ही देखते मामला खूनी संघर्ष में बदल गया.  आरोप है कि दुल्हन के चचेरे भाई के साथ दूल्हे पक्ष के लोगों ने मारपीट कर दी, जिससे वह युवक गुस्से से आग-बबूला हो उठा. इसी गुस्से में युवक ने अपनी कार उठाई और दूल्हे पक्ष के ताऊ, चाचा और मौसा को तेज रफ्तार कार से रौंद डाला. इस दर्दनाक हादसे में तीनों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.  घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई. शादी का माहौल चीख-पुकार और मातम में बदल गया. एक साथ तीन लोगों की मौत से पूरे परिवार में कोहराम मच गया. सूचना मिलते ही गंजडुंडवारा पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में किया.  पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. आरोपी युवक की तलाश की जा रही है. मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि कोई और अप्रिय घटना न हो. इस घटना ने परिवार को ही नहीं पूरे इलाके को झकझोर रख दिया है.  मृतक के एक रिश्तेदार बलवीर ने कहा- हमारे घर की शादी में खुशियां थीं, लेकिन एक झगड़े ने सब कुछ उजाड़ दिया. हमारे तीन लोग एक साथ चले गए. अब क्या करें समझ नहीं आ रहा. वहीं, संदीप वर्मा (क्षेत्राधिकारी पटियाली) ने बताया कि डीजे को लेकर विवाद के बाद कार से कुचलने की सूचना मिली है. तीन लोगों की मौत हुई है, दो घायल हैं. आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं.