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योगी आदित्यनाथ सरकार ने आगरा के जयप्रकाश सर्वोदय विद्यालय (स्वच्छकार) को दी नई पहचान

गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का माध्यम बना सर्वोदय विद्यालय शिक्षा के साथ खेल में भी नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा विद्यालय क्रिकेट, योगा, पावर लिफ्टिंग जैसे खेलों में प्रदेश, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चमक रहे विद्यार्थी योगी सरकार की नीतियों से गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को मिल रहा बेहतर भविष्य आगरा योगी आदित्यनाथ सरकार उत्तर प्रदेश में सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण की अपनी नीतियों को शिक्षा और खेल के माध्यम से जमीन पर उतार रही है। इसी कड़ी में जनपद आगरा के बरौली अहीर ब्लॉक, इटौरा ग्राम पंचायत में स्थित जयप्रकाश सर्वोदय विद्यालय (स्वच्छकार) अब केवल एक स्कूल नहीं रहा, बल्कि वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आशा की एक नई किरण बन गया है। यह विद्यालय छात्रों के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है। यह विद्यालय वर्तमान में 193 विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है। विद्यालय में सरकार द्वारा मानक अनुरूप पोषण युक्त भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि बच्चे शारीरिक रूप से स्वस्थ रहें और पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें। साथ ही सीखने और खेलने के लिए आधुनिक उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे छात्रों को अपने कौशल को निखारने का पूरा मौका मिल सके। योगी सरकार की प्रोत्साहन नीति के कारण, यह विद्यालय अब शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्टता का प्रतीक बन रहा है। राष्ट्रीय मंच पर चमके छात्र जयप्रकाश सर्वोदय विद्यालय के छात्रों ने पढ़ाई के साथ-साथ खेल के क्षेत्र में भी नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। यहां के दर्जनभर से अधिक विद्यार्थी क्रिकेट, योगा, पावर लिफ्टिंग, एथलेटिक्स और पंजा कुश्ती जैसे खेलों में प्रदेश, राष्ट्रीय और यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। हाल ही में पावर लिफ्टिंग के क्षेत्र में सर्वोदय विद्यालय के गुरु-शिष्य की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण और रजत पदक प्राप्त कर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया। विद्यालय में कक्षा 10 के छात्र सुमित ने 2024-25 में हुई नेशनल पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक प्राप्त कर नाम रोशन किया है। अपनी सफलता का श्रेय सरकार द्वारा मिली सुविधाओं को देते हुए छात्र सुमित ने कहा कि प्रदेश सरकार की वजह से हमें यहाँ अच्छा भोजन और खेलने के लिए आधुनिक उपकरण मिलते हैं। पावर लिफ्टिंग में आगे बढ़ने के लिए जरूरी डाइट और प्रशिक्षण पहले हम सोच भी नहीं सकते थे, लेकिन अब मुझे अपनी प्रतिभा निखारने का मजबूत मंच मिला है। वहीं पंजा कुश्ती में अपनी प्रतिभा दिखा रहे कक्षा 12 के छात्र अभिषेक ने कहा कि पहले हम सिर्फ स्थानीय स्तर पर खेलते थे, लेकिन अब विद्यालय से प्रोत्साहन मिलने पर मैंने राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिभाग किया है। यह विद्यालय उन गरीब बच्चों के लिए वरदान है, जिन्हें अब खेल के माध्यम से आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। समान अवसर और उज्जवल भविष्य मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए गंभीर है कि सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि चाहे जो भी हो, प्रदेश के हर बच्चे को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। सर्वोदय विद्यालय के विद्यार्थी अब न केवल बेहतर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि खेलकूद और अन्य गतिविधियों के माध्यम से एक उज्जवल भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं। समाज कल्याण अधिकारी जीआर प्रजापति ने बताया कि सर्वोदय विद्यालयों के माध्यम से सरकार समाज के उस वर्ग पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जो आर्थिक कारणों से शिक्षा और खेल सुविधाओं से वंचित रह जाता था। उन्होंने कहा कि इन बच्चों को मुख्यधारा में लाना और उनके हुनर को पहचान देना ही प्रदेश सरकार का लक्ष्य है। यह विद्यालय उन गरीब, वंचित बच्चों के लिए आशा की किरण है।

नव्य,भव्य और दिव्य श्री काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के चार सालो में श्रद्धालुओं की संख्या पहुंची 26 करोड़ के पार

विश्व धार्मिक पर्यटन के मानचित्र  पर काशी के विकास मॉडल का नक्शा तेजी से उभर रहा डबल इंजन की सरकार द्वारा धाम का विस्तार,सुविधा, सुगमता और सुरक्षा के साथ मूल-भूत सुविधाओं के साथ बेहतर कनेक्टिविटी,फ्लाईओवर का जाल ,पार्किंग, पर्यटक के लिए अन्य कई सुविधाएं 13 दिसंबर 2021 को लोकार्पित विश्वनाथ धाम ने सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन का लिखा नया अध्याय 13 दिसंबर 2025 को श्री काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के हो जाएंगे 4  साल वाराणसी, उत्तर वाहिनी गंगा के तट पर विराजमान श्री काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बाद बाबा के भक्तो की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिल रही है। 13 दिसंबर 2021 को लोकार्पित नव्य-भव्य धाम ने सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन का नया अध्याय लिखा है। चार वर्षों में लगभग 26 करोड़ से अधिक श्रद्धालु बाबा के दरबार में हाज़िरी लगा चुके हैं, यही नहीं बड़ी संख्या में विदेशी मेहमान भी बाबा विश्वनाथ धाम की आभा से खींचे चले आ रहे है। योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा काशी का चतुर्मुखी विकास,श्री काशी विश्वनाथ  धाम का विस्तार,सुविधा, सुगमता और सुरक्षा के चलते बाबा के भक्तो ने महादेव के दरबार में हाज़िरी का कीर्तिमान बना दिया है। भक्तों की सुविधा के लिए बेहतर व्यवस्था विश्वनाथ धाम के पुनरुद्धार ने न केवल मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा बढ़ाई है, बल्कि श्रद्धालुओं को सुगमता और सुविधा भी प्रदान की है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा का अच्छा प्रबंध किया गया है। ,ठंड बरसात और गर्मी में तेज धूप से बचाने के लिए जर्मन हैंगर, गर्मी में पैरों को जलन से बचाने हेतु मैट,कूलर,पीना का पानी ,सावन में वृद्धो ,दिव्यांगजनों एवं आशक्त जनों के लिए निःशुल्क व्हील चेयर ,गोल्फ कार्ट ,गर्मी के दिनों में कैनोपी,ओआरएस, चिकित्सा व्यवस्था आदि सुविधाओं ने शिव भक्तों को बाबा के चौख़ट तक पहुंचने की राह आसान कर दी है। योगी सरकार के प्रयासों से बदला काशी का स्वरूप मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों ने काशी को विश्व धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है। मुख्यमंत्री खुद बाबा दरबार में महीने मे औसतन एक या दो बार हाज़िरी लगाते रहते है और भक्तो के हर छोटी बड़ी सुविधा के लिए व्यवस्थाओं की समीक्षा करके आवशयक निर्देश देते है।  शहर का चौतरफा विकास न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए लाभकारी साबित हुआ है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही  है। 3 हज़ार से 5 लाख वर्ग फुट तक का भव्य विस्तार काशी विश्वनाथ धाम परिसर का लगभग तीन हज़ार वर्ग फुट से, लगभग पांच लाख वर्ग फुट के विशाल क्षेत्र में विस्तारित होने के बाद ,धाम में सनातनियो का दर्शन के लिए ताँता लगा रह रहा है। नव्य-भव्य श्री काशी विश्वनाथ धाम का 13 दिसम्बर 2021 के लोकार्पण होने के बाद बाबा के दरबार में हाज़िरी लगाने वाले शिव भक्तो की संख्या में कई गुना वृद्धि हो गई है। 13 दिसंबर 2021 के बाद हर वर्ष बढ़ता भक्तों का सैलाब श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र के बताया कि श्री काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण का 13 दिसंबर 2025 को चार वर्ष पूरा हो रहा है। 2 दिसंबर 2025 तक यहां दर्शन के लिए आने वालों की संख्या लगभग 26 करोड़ ,23 लाख 56 हज़ार से अधिक पहुंच गई है। अब प्रतिवर्ष औसतन लगभग 6.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु बाबा का दर्शन कर रहे हैं। धाम में भक्तों की कुल संख्या का वर्षवार संख्या 2021 (13–31 दिसंबर) — 48,42,716 2022 (जनवरी–दिसंबर) — 7,11,47,210 2023 (जनवरी–दिसंबर) — 5,73,10,104 2024 (जनवरी–दिसंबर) — 6,23,90,302 2025 (जनवरी–2 दिसंबर) — 6,66,66,511

लापरवाही पर सख्त सरकार: 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड, दो होमगार्ड और दो PRD जवानों पर होगी कार्रवाई

बरेली यूपी के बरेली शहर में नो इंट्री में घुसे ट्रक के मामले में ट्रेफिक ड्यूटी में लगे चार पुलिसकर्मी को निलंबित किया गया है। वहीं दो होमगार्ड, दो पीआरडी जवानों के खिलाफ कार्रावाई को विभागीय अधिकारियों को लिखा गया है। बता दें कि बरेली में बुधवार सुबह नो एंट्री में ट्रक घुसने से स्कूटी सवार दंपती को टक्कर लगी थी। इस हादसे में महिला की मौत हो गई। इस मामले में कार्रवाई करते हुए चार पुलिसकर्मी निलंबित किए गए है।  जानिए कैसे हुई घटना  पुलिस अधीक्षक नगर मानुष पारीक ने बताया कि बुधवार को भारी वाहन प्रतिबन्धित क्षेत्र डेलापीर तिराहा, स्टेडियम रोड पर एक ट्रक संख्या ने स्कूटी सवार दंपती को रौंद दिया था, जिसमें महिला की मौके पर हुई मृत्यु हो गयी थी। जबकि स्कूटी चालक बुजुर्ग घायल हो गए थे। इस घटना को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने संज्ञान लेते हुए पुलिस अधीक्षक यातायात की रिपोटर् के आधार पर ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर तत्काल प्रभाव से चार पुलिस कर्मी को निलम्बन की कार्यवाही करते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। इन पुलिसकर्मियों को किया निलंबित  पुलिस अधीक्षक ने बताया कि नो इंट्री में ड्यूटी पर तैनात टीएसआई सतनाम सिंह, मुख्य आरक्षी सोनू कुमार, महिला मुख्य आरक्षी अंजू रानी, और आरक्षी सौरभ को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने निलंबित कर विभागीय कार्यवाही के आदेश दिए हैं। जबकि होमगार्ड प्रभू दयाल, होमगार्ड रामरतन, पीआरडी मान सिंह, धर्मपाल के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही के लिये जिला कमाण्डेन्ट होमगार्ड व जिला युवा कल्याण व प्रादेशिक विकास दल अधिकारी, जनपद बरेली को पत्राचार किया गया।     

गोरखपुर की सड़कों पर दिखा अनुशासन, संस्कृति व विरासत के सम्मान का अद्भुत समन्वय

संस्थापक सप्ताह समारोह 'गोरक्षनगरी' में उतरा 'हिंदुस्तान' महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों ने निकाली शोभायात्रा   गोरखपुर की सड़कों पर दिखा अनुशासन, संस्कृति व विरासत के सम्मान का अद्भुत समन्वय  महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के छात्रों की शोभायात्रा, संस्कृति और जोश का अद्भुत संगम गोरखपुर  महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 में गुरुवार को गोरक्षनगरी में ‘समूचा हिंदुस्तान’ उमड़ पड़ा। एक तरफ उत्साह, उमंग से लबरेज युवाओं ने भारतीय संस्कृति, अनुशासन व विरासत के सम्मान का संदेश दिया तो दूसरी तरफ भारत के शौर्य, पराक्रम के साथ ही सम्मान के प्रतीक महापुरुषों के प्रति श्रद्धा निवेदित की। गोरखपुर की सड़कों पर युवाओं ने अनुशासन का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया। भारत की सांस्कृतिक धरोहरों, तकनीकी विकास, सुरक्षा व महापुरुषों की विचारधारा संग भारतीय वेशभूषा संग निकली शोभायात्रा ने सभी को अपनी ओर आकर्षित किया।  अतिथियों ने किया पुस्तक का विमोचन  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय की शोध पत्रिका ‘दिग्विजयम्’ और महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज, जंगल धूषड़ द्वारा ‘मिशन मंझरिया’ की संक्षिप्त रिपोर्ट का विमोचन किया। समारोह स्थल पर पहुंचने के उपरांत एनसीसी के कैडेट्स ने मुख्य अतिथि को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। मुख्य अतिथि ने पुस्तिका पर अपने विचार भी लिखे। मुख्यमंत्री व मुख्य अतिथि ने ‘विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। समारोह स्थल पर 9000 से अधिक विद्यार्थी मौजूद रहे। समारोह के शुभारंभ समारोह में महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज की छात्राओं ने सरस्वती वंदना व कुलगीत प्रस्तुत किया। युवाओं के अनुशासन की भूरि-भूरि प्रशंसा मुख्य अतिथि ने शोभायात्रा के शुभारंभ की घोषणा की। मुख्य अतिथि ने शोभायात्रा में शामिल युवाओं से मार्च पास्ट की सलामी ली। शोभायात्रा में सबसे आगे महाराणा प्रताप बालिका इंटर कॉलेज की एनसीसी कैडेट्स रहीं। उनके पीछे महाराणा प्रताप महिला पीजी कॉलेज रामदत्तपुर की एनसीसी कैडेट्स, दिग्विजयनाथ इंटर कॉलेज चौक बाजार के एनसीसी कैडेट्स, महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज एनसीसी सीनियर डिवीजन, महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज एनसीसी जूनियर डिवीजन, एनसीसी दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज व ताइक्वांडो टीम शामिल रही। ज्ञान ज्योति, सच्चिदानंद बैंड, हंस वाहिनी भी आकर्षण का केंद्र रही। शोभायात्रा में शिक्षा परिषद के संस्थाओं के विद्यार्थी शामिल रहे।  महापुरुषों के प्रति सम्मान का भाव  शोभायात्रा में मां सरस्वती, भारत माता, महायोगी गुरु गोरखनाथ, महाराणा प्रताप, महंत दिग्विजयनाथ, महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के चित्र भी रहे। शोत्रायात्रा में एक तरफ 'ऑपरेशन सिंदूर' के माध्यम से भारत के शौर्य की कहानी प्रस्तुत की जा रही थी तो वहीं राम मंदिर के जरिए विरासत का सम्मान भी युवाओं ने प्रस्तुत किया। युवाओं ने शोभायात्रा के माध्यम से विरासत, संस्कृति के प्रति सम्मान के भाव को प्रदर्शित किया। शोभायात्रा कॉलेज परिसर से निकलकर इंदिरा बाल बिहार से सीधे पोस्ट ऑफिस तिराहे से गणेश चौराहा से गोलघर होते हुए कचहरी चौराहा, फिर महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के स्वर्ण जयंती द्वार से शोभायात्रा स्थल पर पहुंची। भारतीय परिधान व विद्यालय के गणवेश में युवा सभी के आकर्षक का केंद्र बने रहे। संस्थापक-सप्ताह समारोह में शुक्रवार को होने वाली प्रतियोगिताएं महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद संस्थापक सप्ताह समारोह में शुक्रवार को गोरखवाणी प्रतियोगिता-कनिष्ठ वर्ग दिग्विजयनाथ एल.टी. प्रशिक्षण महाविद्यालय, वरिष्ठ वर्ग महाराणा प्रताप इण्टर कॉलेज (सभागार), योगासन प्रतियोगिता-प्रताप आश्रम गोलघर, चित्रकला प्रतियोगिता-दिग्विजयनाथ पी.जी.कॉलेज (कला संकाय), कबड्डी प्रतियोगिता बालक वर्ग (कनिष्ठ एवं वरिष्ठ) महाराणा प्रताप पालिटेक्निक गोरखनाथ एवं बालिका वर्ग (कनिष्ठ एवं वरिष्ठ) महाराणा प्रताप बालिका इण्टर कॉलेज सिविल लाइन्स में सम्पन्न होगी। यह जानकारी महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद संचालन समिति के सदस्य डॉ. नितीश शुक्ला ने दी।

इंडिगो फ्लाइट खराबी से पटना हवाई अड्डे पर तबाही, कल कई उड़ानें रद्द

पटना मौसम ठंढा होने की वजह से कई फ्लाइट तो प्रभावित हुए ही लेकिनएयरलाइन इंडिगो के क्रू रोस्टर और शेड्यूलिंग सॉफ्टवेयर में अचानक आई भीषण तकनीकी खराबी के कारण भी बुधवार को पूरे देश में लगभग 130 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गई थीं। पटना एयरपोर्ट पर भी यात्री काफी परेशान रहे। तकनीकी खराबी का असर पटना के जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी साफ तौर पर दिखा, जहां दिल्ली-पटना-दिल्ली सेक्टर की तीन महत्वपूर्ण जोड़ी फ्लाइट्स को रद्द करना पड़ा। बताया जाता है कि करीब एक दर्जन से अधिक उड़ानें अपने निर्धारित समय से एक से तीन घंटे की भारी देरी से संचालित हुईं। शुक्रवार सुबह की कोलकाता और दिल्ली की एक-एक फ्लाइट भी रद्द रहने की आशंका है। सॉफ्टवेयर की खामी से फंसे रहे लगभग 1000 यात्री तीन जोड़ी फ्लाइट्स रद्द होने के चलते अकेले दिल्ली और पटना में लगभग 1000 यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई यात्री शादी-विवाह जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों में शामिल होने के लिए सफर कर रहे थे। यात्रियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने 15,000 से 18,000 रुपये तक में टिकट खरीदे थे। इंडिगो ने अपने यात्रियों को राहत देने की घोषणा की हालांकि इसको लेकर इंडिगो का भी बयान सामने आया है। इस संबंध में उनका कहना है कि इस तकनीकी खराबी को एक-दो दिनों में ठीक कर लिया जाएगा। साथ ही, यात्रियों को टिकट का पूरा रिफंड दिया जाएगा या वे चाहें तो अपनी यात्रा तिथि आगे भी बढ़ा सकते हैं। फ्लाइटों में देरी और रद्दीकरण की वजह से पटना एयरपोर्ट के टर्मिनल पर दिन भर भारी भीड़ और अफरातफरी का माहौल बना रहा। हालांकि, एयरलाइन ने कुछ रद्द हुई फ्लाइटों के यात्रियों को अन्य उपलब्ध विमानों से भेजने की व्यवस्था की।

जब भी हम संकट में होते हैं तो महापुरुषों के शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते हैः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

राष्ट्र की संस्कृति समाप्त हो जाए तो वह अपनी एकात्मता व पहचान को खो देता हैः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब भी हम संकट में होते हैं तो महापुरुषों के शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते हैः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  एसडीआरएफ के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने किया महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 का शुभारंभ  महंत दिग्विजयनाथ महाराज ने 1932 में गोरखपुर में की थी महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापनाः गोरक्षपीठाधीश्वर  गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 के शुभारंभ अवसर पर स्वदेश, स्वधर्म व राष्ट्रीय स्वाभिमान का जिक्र किया और कहा कि जब भी हम संकट में होते हैं या कोई राष्ट्रीय चुनौती होती है तो महापुरुषों के चित्र, उनके शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते हैं। महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह, रानी लक्ष्मीबाई समेत सीमाओं की रक्षा करते हुए बलिदान देने वाले भारत मां के बहादुर जवान देश के लिए प्रेरणा हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्र की पहचान वहां की संस्कृति, परंपराएं और महापुरुष होते हैं, यह एक-दूसरे से जुड़े हैं। राष्ट्र की संस्कृति समाप्त हो जाए तो राष्ट्र अपनी एकात्मता व पहचान को खो देता है। संस्कृति उन राष्ट्रीय मूल्यों से बनती है, जिन्हें समय-समय पर अलग-अलग युगांतकारी घटनाओं ने संबल और शक्ति दी। जिन्हें विभिन्न पर्वों के माध्यम से पूरा भारत बिना भेदभाव के आत्मसात करता है। पर्व में मतभेदों को समाप्त करके हम ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब भी हम संकट में होते हैं तो महापुरुषों के शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते है।  महंत दिग्विजयनाथ महाराज द्वारा 1932 में गोरखपुर में स्थपित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 का शुभारंभ उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने वाले स्मृतिशेष प्रो. यूपी सिंह व अन्य दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि दी।   यह आत्ममंथन का अवसर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद अगले छह वर्ष के अंदर होने वाले शताब्दी महोत्सव के कार्यक्रम के साथ बढ़ रहा है। ऐसे में शिक्षा परिषद व संस्थाओं के सामने 100 वर्षों की इस यात्रा के आत्ममंथन का अवसर है। यह समारोह इस पर आत्मावलोकन का अवसर प्रस्तुत कर रहा है कि छात्र के सर्वांगीण विकास, समाज व राष्ट्र के प्रति हमने अपनी भूमिका का निर्वहन किस रूप में किया है। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापकों ने जो विराट लक्ष्य रखा है, वह समाज व राष्ट्र के प्रति हमारी सेवाएं-कर्तव्य के समय-समय पर मूल्यांकन का भी है। हमारे संस्थापकों ने छात्र-छात्राओं के सामने महाराणा प्रताप के रूप में आदर्श रखा।  शिक्षा के विजन के साथ ही स्वास्थ्य, कृषि आदि पर जोर दे रहा परिषद  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण, अपनी संकल्पना और भावना को बढ़ाने के लिए संस्थापकों ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। परिषद शिक्षा के विजन के साथ ही स्वास्थ्य, कृषि, महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, महाराणा प्रताप पॉलीटेक्निक आदि के जरिए तकनीक पर जोर दे रहा है तो वहीं महिलाओं की शिक्षा, अन्नदाता किसानों के प्रशिक्षण के लिए महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र या अन्न संस्थाएं दूरदराज के क्षेत्रों में नए प्रयास को बढ़ाने के साथ ही कार्य कर रही हैं।  संस्थापक समारोह का उद्देश्य- हम कर्तव्य व तैयारियों का कर सकें आत्मावलोकन  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संस्थापक समारोह का उद्देश्य है कि हम संस्थापकों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कर्तव्यों व तैयारियों का आत्मावलोकन कर सकें कि आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें खुद को कैसे तैयार करना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भावी भारत के निर्माण में अपने उत्तरदायित्वों को भी बखूबी समझना होगा। संस्थाएं जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए प्रतिवर्ष नयापन करने का प्रयास कर रही हैं।  शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं को बनना ही होगा मॉडल स्टडी का माध्यम  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंत दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज द्वारा शोध पत्रिका ‘दिग्विजयम्’ और महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज द्वारा ‘मिशन मंझरिया’ के विमोचन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक ओर शिक्षित बेरोजगारों की फौज खड़ी होती है तो दूसरी तरफ निरक्षरता की लंबी खाई दिखाई पड़ती है। महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज को इसमें योजक की भूमिका में दिखाई दिया है। यहां के शिक्षा संकाय के छात्रों द्वारा गांव को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने के लक्ष्य को बढ़ाने की दिशा में गोद लिया गया, उन्होंने इसे मॉडल स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया। सीएम योगी ने कहा कि शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं को मॉडल स्टडी का माध्यम बनना ही होगा।  समाज व राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं संस्थान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय संस्कृति में किसी भी मनुष्य के लिए अयोग्य शब्द नहीं कहा गया है। अयोग्य मतलब उसकी मनुष्यता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति अयोग्य है तो इसका मतलब कोई योजक नहीं है। उन्होंने कहा कि अयोग्यता-निरक्षरता शैक्षिक समाज पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सीएम योगी ने परिषद के सभी शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं द्वारा सेवा भाव के कार्यों का जिक्र किया। बताया कि कोई कुष्ठ सेवाश्रम तो कोई संस्थान थारू, वनटांगिया के छात्रों को गोद लेकर पढ़ा रहा है तो कोई संस्थान अन्य जिम्मेदारियों के साथ समाज व राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा है और यही राष्ट्र के प्रति हमारी सेवा भी है।  समारोह में महापौर डॉ. मंगलेश वास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, कुलपति प्रो. पूनम टंडन, प्रो. जेपी सैनी, प्रो. रविशंकर सिंह, डॉ. सुरेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, महेंद्र पाल सिंह, इंजी. सरवन निषाद, प्रदीप शुक्ला, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, रतनपाल सिंह, पूर्व महापौर अंजू चौधरी आदि मौजूद रहे।

इमानदारी से कर्तव्य पालन करना, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनना, वास्तविक देशभक्ति है – ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)

अंग्रेजी शासन के दौरान भारतीय मूल्यों और संस्कारों पर आधारित शिक्षण संस्थान की स्थापना करना, सच्ची राष्ट्रसेवा है- लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)   इमानदारी से कर्तव्य पालन करना, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनना, वास्तविक देशभक्ति है – ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)     महाराणा प्रताप शिक्षण परिषद के संस्थापक-सप्ताह उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए यूपी एडीआरएफ के उपाध्यक्ष, ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)   गोरखपुर गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी जी (से.नि.) शामिल हुए। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने छात्र-छात्राओं को महाराणा प्रताप के अनुकरणीय जीवन से प्रेरणा लेने और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अनुशासन, साहस, समर्पण, समानता और प्रतिबद्धता के मूल्यों को अपनाने लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं बल्कि इमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करना, पर्यावरण की रक्षा, लोक कल्याण और समाज का एक अच्छा नागरिक बनना भी  वास्तविक देशभक्ति है। उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के माध्यम से आप सफलता के इन मूल्यों का संस्कार प्राप्त कर रहे हैं।  महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 के उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन गोरखपुर में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने अंग्रजों के शासन और  स्वतंत्रा संघर्ष के दौरान भारतीय संस्कारों और शिक्षा मूल्यों पर आधारित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना और उसके निरंतर राष्ट्रसेवा में योगदान देने की सरहाहना की एवं शिक्षा परिषद के संस्थापकों के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब देश में अग्रेंजी शासन और अंग्रेजियत का बोलबाला था ऐसे में 1916 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी और 1932 में महाराणा प्रतापा शिक्षा परिषद की गोरखपुर में नींव रखना भारतीयता और राष्ट्र की सच्ची सेवा थी। उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक महंत दिग्विजय नाथ, राष्ट्र संत महंत अवेद्यनाथ व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं शिक्षा परिषद के सभी शिक्षकों राष्ट्रसेवा के इस संकल्प को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया।   उद्घाटन अवसर पर छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा ही महाराणा प्रताप का जीवन हम सबके लिए अनुकरणीय है किस प्रकार उन्होंने अकेले, अन्य राजपूत राजाओं के सहयोग के बिना भी शक्तिशाली मुगल साम्राज्य की अवज्ञा की और आत्मबलिदान, त्याग और समर्पण के मूल्यों की अमर गाथा हम सबके लिए ये प्रस्तुत की। यही कारण था कि 17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज हो या 19वीं, 20वीं शताब्दी के राष्ट्र के क्रांतिकारियों ने उनसे प्रेरणा प्राप्त की। महाराणा प्रताप के जीवन से हमें अनुशासन, ईमानदारी, समर्पण और प्रतिबद्धता के जिन मूल्यों की शिक्षा मिलती है वो ही आपको जीवन में सफल बनाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि महाराणा प्रताप शिक्षण संस्थान में आप इन मूल्यों और संस्कारों को प्राप्त कर रहे हैं।  अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि देशभक्ति केवल देश की सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं, इमानदारी से अपने कर्यव्यों का निर्वहन करने, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनान सच्ची देशभक्ति हैं। अपने जीवन के व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि सेना भी ऐसे नौजवानों को चुनती है जो जीवन में अनुशासन, समर्पण और कर्तव्यपालन को सर्वोपरी मानते हैं। अनुशासन ही सफलात की सीढ़ी है। उन्होंने शिक्षा परिषद की प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं को भागीदारी करने के लिए भी प्रेरित किया और कहा की हार और जीत निर्णायक नहीं है प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करना सबसे जरूरी है। असफलता से निराश होने की जरूरत नहीं है, असफलता ही हमें सफलता का मार्ग दिखाती है। उन्होंने सचिन तेंदुलकर के जीवन का प्रसंग और परिणाम की चिंता किए बगैर कर्व्यपालन करने के भागवत् गीता के श्लोक – कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन् को अनुकरणीय बताया। साथ ही उन्होंने तेजी से बदल रही तकनीकि, एआई, रोबोटिक्स के प्रति भी छात्रों को सजग रहने को कहा। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में केवल एक मजबूत चरित्र और सही तकनीक की समझ ही सफलता दिलाएगी। लेकिन हमें ये याद रखना है कि विजय मैदान में नहीं मन पर होती है, शक्ति हथियार में नहीं संस्कार में होती है।

UPPSC भर्ती 2025: 513 लेक्चरर पदों पर आवेदन शुरू, तकनीकी स्नातकों के लिए बड़ा मौका

लखनऊ उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी भर्ती की घोषणा की है। आयोग ने उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा (अध्यापन) सेवा परीक्षा-2025 के तहत पॉलीटेक्निक संस्थानों में लेक्चरर और अन्य समकक्ष पदों के लिए 513 रिक्तियों का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह एक सुनहरा मौका है। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 2 दिसंबर 2025 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार जल्द से जल्द आवेदन करके इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं। यह भर्ती कुल 513 पदों के लिए हो रही है। इन पदों में मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, कंप्यूटर, आर्किटेक्चर, फिजिक्स, केमिस्ट्री और गणित जैसे विभिन्न विषय शामिल हैं। आवेदन शुरू होने की तिथि: 2 दिसंबर 2025 आवेदन और फीस जमा करने की अंतिम तिथि: 2 जनवरी 2026 आवेदन में सुधार की अंतिम तिथि: 9 जनवरी 2026 इच्छुक उम्मीदवार अंतिम तिथि से पहले UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाकर अपना आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा इन पदों पर आवेदन करने के लिए अलग-अलग विषयों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता भी अलग-अलग निर्धारित की गई है। इंजीनियरिंग/टेक्निकल ब्रांच के लेक्चरर: उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में फर्स्ट क्लास के साथ बी.ई./बी.टेक. या समकक्ष डिग्री होनी चाहिए। कुछ पदों के लिए मास्टर डिग्री भी आवश्यक है। नॉन-इंजीनियरिंग (साइंस एवं ह्यूमैनिटीज) लेक्चरर: संबंधित विषय में फर्स्ट क्लास के साथ मास्टर डिग्री (जैसे फिजिक्स, केमिस्ट्री, अंग्रेजी, गणित)। आयु सीमा: उम्मीदवारों की आयु 1 जुलाई 2025 तक 21 वर्ष से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार ऊपरी आयु सीमा में छूट दी जाएगी। चयन प्रक्रिया और वेतन लेक्चरर के पदों पर चयन मुख्य रूप से तीन चरणों में होगा। लिखित परीक्षा : यह पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इंटरव्यू: लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को 100 अंकों के इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन: अंतिम चयन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में प्राप्त अंकों के आधार पर होगा। इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों को सातवें वेतन आयोग के तहत आकर्षक वेतनमान दिया जाएगा। शुरुआती वेतन लगभग 56,100 रुपये से 57,700 रुपये प्रति माह (पे लेवल 9A/10) तक होगा, जिसके साथ अन्य सरकारी भत्ते भी मिलेंगे। आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ें ताकि वे सभी पात्रता मानदंडों को पूरा करते हों।  

गी सरकार की कार्रवाई का असर: NRC नंबर न दिखाने पर 160 बांग्लादेशी कर्मचारियों ने काम छोड़ा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में संदिग्ध बांग्लादेशियों पर निगरानी तेज होने के साथ ही इसका बड़ा असर दिखना शुरू हो गया है। योगी सरकार की सख्ती के बाद सफाई कार्य से जुड़े संदिग्ध बांग्लादेशियों से एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर) नंबर मांगा गया तो वे नंबर दे नहीं पाए और नौकरी छोड़कर भाग खड़े हुए। एनआरसी ही हकीकत बताने का तरीका एनआरसी नंबर असम सरकार द्वारा दिया गया है, जिसमें पूर्वजों तक का जिक्र होता है, जो यह साबित करता है कि वे बांग्लादेशी घुसपैठ नहीं हैं। आधार कार्ड तो हर किसी के पास होता है, लेकिन एनआरसी उन्हीं के पास है जो लंबे समय से असम के निवासी थे। कूड़ा प्रबंधन का काम देख रही नगर निगम की तरफ से अधिकृत संस्था मेसर्स लखनऊ स्वच्छता अभियान प्रबंधन ने सफाई कर्मचारियों से जब एनआरसी नंबर मांगा, तो उनमें से 160 कर्मी नंबर दे नहीं पाए और दबाव पड़ने पर नौकरी छोड़कर चले गए। इससे स्पष्ट होता है कि उनकी असम की नागरिकता संदिग्ध है। पुलिस और खुफिया तंत्र के लिए अब यह जांच का विषय है कि आखिर ये 160 कर्मी कहाँ गए और क्या कर रहे हैं। नगर निगम में भगदड़ और जोनवार आंकड़े दरअसल, पिछले कुछ समय से सक्रिय हुई सरकार के कारण संदिग्ध बांग्लादेशियों में भगदड़ मच गई है। महापौर सुषमा खर्कवाल ने भी एक साल से संदिग्ध बांग्लादेशियों को शहर से बाहर करने का अभियान चला रखा है। पिछले साल उन्होंने इंदिरानगर में संदिग्ध बांग्लादेशियों की बस्ती को उजाड़ दिया था। पिछले दो माह से सख्ती बढ़ने के बाद पुलिस ने नगर निगम में ठेका पाई संस्थाओं से असम का निवासी बताने वाले कर्मचारियों का एनआरसी मांगा था। लखनऊ स्वच्छता अभियान में काम कर रहे ये कर्मचारी आधार कार्ड दिखाने के बावजूद एनआरसी नहीं दे पाए। कहां से कितने कर्मी काम छोड़कर भागे (नगर निगम के जोन)     जोन एक – 38     जोन चार – 70     जोन तीन – 12     जोन छह – 12     जोन सात – 36 कंपनी ने इसकी जानकारी महापौर को भी दी है। महापौर ने कंपनी से कहा है कि काम छोड़कर गए कर्मचारियों की गतिविधियां पता करने के लिए पुलिस को उनके मोबाइल नंबर और आधार कार्ड भी उपलब्ध कराए जाएं। फर्जीवाड़ा और एटीएस की कार्रवाई गौरतलब है कि हाल ही में आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) ने ठाकुरगंज के बरौरा हुसैनबाड़ी में हिंदू बनकर रह रही एक बांग्लादेशी महिला को गिरफ्तार किया था। नरगिस उर्फ जैसमीन उर्फ निर्मला नाम की यह महिला 2006 में बांग्लादेशी पति के साथ भारत में दाखिल हुई थी। वह फर्जी दस्तावेज बनवाकर निर्मला बनकर रहने और हिंदू त्योहार मनाने के साथ पूजा भी करती थी।

सीएम योगी ने बच्चों को देखकर किया औचक मुलाकात का फैसला

गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बालप्रेम जगजाहिर है। जब भी वह बच्चों को अपने आसपास देखते हैं, उन पर स्नेह और प्यार लुटाते हैं। बुधवार को गोरखपुर सर्किट हाउस परिसर में हेलिपैड से उतरते ही उनकी नजर जब समीप के पार्क के गेट पर बच्चों के समूह पर गई तो वह खुद उनसे मिलने उनके पास पहुंच गए। उन्होंने बच्चों से आत्मीयता से बात की और चॉकलेट दिया।  गोला के मदरिया सिद्धपीठ से होकर मुख्यमंत्री जब हेलीकॉप्टर से सर्किट हाउस परिसर के  हेलिपैड पर उतरे तो उस समय बगल के अंबेडकर पार्क में बच्चे ताइक्वांडो की प्रैक्टिस कर रहे थे। हेलीकाप्टर की गड़गड़ाहट सुनकर बच्चे गेट के पास आकर देखने लगे। सीएम योगी को देखते ही बच्चों ने जयकारा लगाकर उनका अभिवादन किया। बच्चों को देखकर सीएम खुद को रोक नहीं पाए और पहले पार्क के पिछले गेट की ओर गए। गेट के दूसरी ओर खड़े बच्चों से दुलारा। उनसे बात की। सीएम ने पूछा कि क्या कर रहे हो तो बच्चों ने कहा कि ताइक्वांडो की प्रैक्टिस। सीएम ने उन्हें चाकलेट भी दिया।