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बनारस में गंगा-वरुणा का प्रकोप, एक मंजिल तक जलमग्न हुए घर

वाराणसी वाराणसी में गंगा के पलट प्रवाह से वरुणा में आई बाढ़ ने हाहाकार मचा दिया है। कई घर एक मंजिल तक डूब गए हैं। हालांकि राहत की बात यही है कि कई दिनों के बाद गुरुवार की सुबह गंगा स्थिर हो गई हैं। जलस्तर चेतावनी बिंदु को तो बुधवार की सुबह ही पार कर गया था लेकिन खतरे के निशान से करीब 30 सेंटीमीटर नीचे पानी स्थिर हो गया है। इससे लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि अभी गंगा के घटने का तो कोई संकेत नहीं मिल रहा है। सरकारी बुलेटिन के अनुसार भी वाराणसी में शुक्रवार को गंगा के लेवल खतरे के निशान को पार करते हुए 71.4 मीटर तक जाने की आशंका जताई गई है। फिलहाल जलस्तर 70.92 मीटर पर स्थिर हुआ है। यहां चेतावनी बिंदु 70.262 और खतरे का निशान 71.262 है। सोमवार को दस सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा जलस्तर बुधवार को तीन सेमी तक गिर गया था। इसके बाद बुधवार की देर रात रफ्तार केवल एक सेमी प्रतिघंटे रह गई। अब स्थिर हो गया है। गंगा में वेग से वरुणा के बेसिन में बने मकान पूरी तरह से पानी में घिर गए हैं। आपदा नियंत्रण कंट्रोल रूम के मुताबिक बाढ़ राहत शिविरों में मंगलवार को वरुणा किनारे के 26 परिवारों के 108 लोग और बुधवार को 483 परिवारों के 2080 लोग पहुंचे। दो दिन में कुल 509 परिवारों के 2188 सदस्य राहत शिविरों में शिफ्ट हुए हैं। बढ़ाव के कारण गंगा का रुख अब तटवर्ती घाटों और किनारों पर बसी कॉलोनियों की ओर होने लगा था। वरुणा के पानी ने आबादी की ओर रुख करते हुए पुरानापुल इलाके के चार दर्जन घरों में बाढ़ को अपनी आगोश में ले लिया था।   वरुणा किनारे रहने वाले सैकड़ों परिवारों की मुसीबतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इस सीजन में यह तीसरी बार है जब पानी बढ़ने से लोगों को घर खाली करने पड़ रहे हैं। लोग सुरक्षित जगह पलायन कर रहे हैं। अभी अपने घरों में शिफ्ट हुए लोगों को 15 दिन भी नहीं हुए कि उन्हें फिर अपना घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को हो रही है। सिर में गठरी लेकर और गोद में बच्चों को लेकर वह सुरक्षित स्थान पर पलायन करने को मजबूर हैं। गंगा में वृद्धि से चिरईगांव के ढाब सहित किनारे बसे गांवों के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालांकि ढाब के किनारे स्थित सोता में पानी अभीं भी दोनों तटों तक सीमित है लेकिन नालों के माध्यम से निचली भूमि पर तेजी से फैल रहा है। बुधवार शाम तक ढाब क्षेत्र में रामपुर की दलित बस्ती पानी से घिर गई। राजस्व कर्मियों के साथ बीडीओ वीरेन्द्र नारायण द्विवेदी मौके पर पहुंचे और प्रभावित आठ परिवारों के 50 सदस्यों को रामपुर प्राथमिक विद्यालय में बने बाढ़ राहत शिविर में पहुंचाया। नाले के रास्ते सोता के इस पार छितौना और जाल्हूपुर के निचले हिस्से में भी पानी भरना शुरू हो गया है। गांव के प्रभावित किसान लालजी यादव, सत्येन्द्र, चन्द्र शेखर, महेंद्र,राम अशीष,कमला, जयगोविंद आदि ने बताया कि पिछली बाढ़ हटने के बाद धान की फसलों में निकल रहे कल्ले भी इस बार चौपट हो जाएंगे। उधर, रोहनिया क्षेत्र के बेटावर गांव में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे घुसने लगा है। पहले आई बाढ़ से धान की फसल खराब हो गई थी। अब इसी तरह से बढ़ाव रहा तो धान की फसल व मवेशियों के हरे चारे पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे। लेखपाल आलोक पाठक ने बताया कि अभी गांव के निचले हिस्से में पानी है रोड पर नहीं आया है लेकिन बढ़ाव तेजी से हो रहा है गांव का मौका-मुआयना किया गया है। बाढ़ के हालात पर नजर बनी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 29 अगस्त को दो दिनी दौरे पर वाराणसी आ रहे हैं। वे यहां मॉरीशस प्रधानमंत्री के आगमन की तैयारी और बाढ़ से बचाव एवं राहत कार्यों का जायजा लेंगे। मुख्यमंत्री शाम करीब 4:30 बजे प्रतापगढ़ से हेलीकॉप्टर से पुलिस लाइन आएंगे। यहां से सर्किट हाउस जाएंगे। आधे घंटे विश्राम के बाद सवा पांच बजे से मॉरीशस प्रधानमंत्री के 11 सितंबर की बनारस में प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी की समीक्षा करेंगे। बैठक के पश्चात वह काशी विश्वनाथ और कालभैरव मंदिर में दर्शन-पूजन करने जाएंगे।  

हिंदू प्रेमियों के लिए अपना धर्म छोड़ा, रुखसाना और जास्मीन की नई पहचान

लखीमपुर खीरी  यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में दो मुस्लिम बहनों ने हिंदू लड़कों से मंदिर में शादी रचा ली. हिंदू रीति-रिवाज से जास्मीन और रुखसाना बानो स्थानीय लड़कों रामप्रवेश और सर्वेश के साथ शादी के बंधन में बंध गईं. इनके बीच काफी समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था. नाम बदलकर रुखसाना अब रूबी और जास्मीन चांदनी बन गई हैं. ये शादी इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है.  दरअसल, सोमवार को पड़ुआ थाना क्षेत्र के बैरिया गांव में दो मुस्लिम बहनें जास्मीन और रुखसाना बानो अपने प्रेमियों के घर पहुंच गईं. वे दोनों रविवार देर रात से वहीं मौजूद थीं और शादी की जिद पर अड़ी थीं. दोनों का गांव के ही एक ही परिवार के दो लड़कों- रामप्रवेश और सर्वेश से प्रेम संबंध था. दोनों बहनें बालिग हैं, जिसकी पुष्टि उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों से हुई.  जानकारी के मुताबिक, रविवार की देर रात दोनों बहनें अपने घर से चुपचाप निकलीं और सीधे रामप्रवेश और सर्वेश के घर पहुंच गईं. उनके अचानक पहुंचने से पूरे गांव में सनसनी फैल गई. गांव वाले और परिवार के लोग हैरान थे कि आखिर ये कैसे हुआ. खबर फैलते ही दोनों परिवारों में हलचल मच गई और लोग इस मामले को सुलझाने के लिए इकट्ठा हुए. गांव में तनाव का माहौल बन गया था, लेकिन दोनों बहनें अपने फैसले पर अडिग थीं.  सोमवार सुबह इस मामले को सुलझाने के लिए गांव के बुजुर्गों ने पंचायत बुलाई. सभी चाहते थे कि दोनों परिवारों के बीच कोई सहमति बन जाए, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका. क्योंकि, दोनों बहनें अपनी बात पर अड़ी रहीं कि वे अपने प्रेमियों से ही शादी करेंगी. उनकी जिद के सामने पंचायत भी नाकाम रही. जब उनकी उम्र की जांच की गई तो शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर पता चला कि दोनों बहनें बालिग हैं.  जब पंचायत में कोई बात नहीं बनी, तो दोनों बहनों और उनके प्रेमियों की खुशी के लिए हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कराने का फैसला लिया गया. जास्मीन और रुखसाना ने अपना धर्म छोड़कर अपने प्यार को चुना. इस फैसले ने न सिर्फ दोनों परिवारों को बल्कि पूरे गांव को चौंका दिया है. 

सुगम्य व्यापार (प्राविधानों का संशोधन) विधेयक, 2025’ जल्द होगा पेश, 13 राज्य अधिनियमों के 99% आपराधिक कानून होंगे समाप्त: CM योगी

बड़े औद्योगिक और श्रम सुधारों की ओर बढ़ रहा उत्तर प्रदेश, आसान होगा व्यापार, श्रमिक हित होगा सुरक्षित: मुख्यमंत्री सुगम्य व्यापार (प्राविधानों का संशोधन) विधेयक, 2025’ जल्द होगा पेश, 13 राज्य अधिनियमों के 99% आपराधिक कानून होंगे समाप्त: CM योगी  कारावास की जगह आर्थिक दंड और प्रशासनिक कार्रवाई को मिलेगी वरीयता: CM योगी  देश का पहला राज्य होगा यूपी, जहां इतनी बड़ी संख्या में आपराधिक कानूनों को गैर-आपराधिक श्रेणी में बदला जाएगा श्रम कानून सरलीकरण: फैक्ट्री लाइसेंस अवधि बढ़ाने और महिलाओं को अधिक अवसर देने का प्रस्ताव शीघ्र लांच होगा ‘निवेश मित्र 3.0’, आवेदन-अनुमोदन प्रक्रिया होगी पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी लखनऊ  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म के मंत्र के अनुरूप आगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में औद्योगिक व श्रम सुधारों की दिशा में बड़े कदम बढ़ा दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य में उद्योग और व्यापार से जुड़े 13 राज्य अधिनियमों में लगभग 99 प्रतिशत आपराधिक प्रावधान समाप्त करने की तैयारी हो रही है। शीघ्र ही उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जो व्यावहारिकता के दृष्टिकोण से इतने बड़े पैमाने पर आपराधिक प्रावधानों को गैर-आपराधिक श्रेणी में परिवर्तित करेगा। गुरुवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस को और सशक्त बनाने के लिए नए कदम उठाना समय की मांग है। साथ ही यह भी उतना ही आवश्यक है कि औद्योगिक विकास के साथ श्रमिकों की सुरक्षा और सुविधा की गारंटी सुनिश्चित हो। आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘श्रमेव जयते’ के भाव को आत्मसात करते हुए हमें ऐसे सुधार करने होंगे, जो उद्यमियों और श्रमिकों; दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हों। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार शीघ्र ही ‘सुगम्य व्यापार (प्राविधानों का संशोधन) विधेयक, 2025’ लाने जा रही है। इसके अंतर्गत आबकारी अधिनियम, शीरा अधिनियम, वृक्ष संरक्षण अधिनियम, राजस्व संहिता, गन्ना अधिनियम, भूगर्भ जल अधिनियम, नगर निगम अधिनियम, प्लास्टिक कचरा अधिनियम, सिनेमा अधिनियम तथा क्षेत्र व जिला पंचायत अधिनियम सहित कई कानूनों को अधिक व्यावहारिक स्वरूप दिया जाएगा। इनमें जहाँ पहले कारावास की सज़ा का प्रावधान था, वहां अब अधिक आर्थिक दंड व प्रशासनिक कार्रवाई को वरीयता देने की योजना है। नए प्रावधानों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अनावश्यक दंडात्मक प्रावधानों को समाप्त कर, उनकी जगह पारदर्शी और न्यायसंगत व्यवस्था लागू करना समय की मांग है। बैठक में अवगत कराया गया कि इस विधेयक पर संबंधित 14 विभागों से राय ली गई है। अधिकांश विभाग सहमत हैं, जबकि कुछ ने आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि आपत्तियों और सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए विधेयक को ऐसा स्वरूप दिया जाए, जो उद्योग और श्रमिकों के हितों में संतुलित हो। बैठक में श्रम कानूनों के सरलीकरण पर भी चर्चा हुई। प्रस्तावों में फैक्ट्री लाइसेंस की अवधि बढ़ाने, दुकानों व प्रतिष्ठानों के नियमों में व्यावहारिक बदलाव करने और महिलाओं को अधिक अवसर उपलब्ध कराने जैसे कदम शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि निरीक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए स्व-सत्यापन और थर्ड पार्टी ऑडिट की प्रणाली अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से जहां उद्योगों का बोझ कम होगा, वहीं श्रमिकों का हित भी सुरक्षित होगा। सुधारों की शृंखला में ‘निवेश मित्र 3.0’ पर भी विचार-विमर्श हुआ। इसके तहत निवेशकों की आवेदन व अनुमोदन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सुगम बनाया जाएगा। कॉमन एप्लिकेशन फॉर्म, पैन-आधारित पहचान, स्मार्ट डैशबोर्ड, बहुभाषी सहायता और एआई चैटबॉट जैसी सुविधाएँ जोड़ी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सेवाओं की समयबद्ध डिलीवरी और निवेशकों की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि निवेश मित्र पोर्टल का नया संस्करण शीघ्र ही लॉन्च किया जाए, जिससे ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस को नई मजबूती मिलेगी।

उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग के अनुरोध पर केंद्र ने दी स्वीकृति

लखनऊ  योगी सरकार के मार्गदर्शन में जनहित को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग द्वारा छोटा व याद रखने में आसान हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। इस पर दूरसंचार मंत्रालय भारत सरकार ने शॉर्ट कोड “149” स्वीकृत कर लागू कर दिया है। अब परिवहन विभाग की हेल्पलाइन दोनों नंबरों—पूर्व से संचालित टोल-फ्री 1800-1800-151 और नया “149”—पर 24×7 उपलब्ध रहेगी। इसका उद्देश्य हर नागरिक को एक ही कॉल में त्वरित, विश्वसनीय और पारदर्शी सहायता दिलाना है। इन सेवाओं के लिए करें कॉल ड्राइविंग लाइसेंस (DL), पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC), परमिट, फिटनेस, रोड टैक्स, प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC), BH-सीरीज़ पंजीकरण, ई-वी सब्सिडी, आरवीएसएफ (स्क्रैप), एटीएस, एडीटीसी, ई-चालान, ई-डीएआर तथा संबंधित ऑनलाइन पोर्टलों/सेवाओं की जानकारी, स्थिति और शिकायत-निवारण “149” या 1800-1800-151 पर कर सकते हैं। नागरिक कैसे उपयोग करें     1.    डायल करें: मोबाइल/लैंडलाइन से “149” (या 1800-1800-151)।     2.    सेवा चुनें: वांछित विषय (DL/RC/परमिट/फिटनेस/टैक्स/PUC/EV/इत्यादि) चुनें और आवश्यक विवरण दें।     3.    तुरंत सहायता: संबंधित जानकारी/लिंक/स्थिति का संदेश आपके मोबाइल पर प्राप्त होगा। शिकायत दर्ज होने पर तुरंत शिकायत संख्या दे दी जाएगी।     4.    ऑनलाइन शिकायत/स्थिति: https://upgov.info/transport पर नई शिकायत दर्ज करें / शिकायत की स्थिति देखें विकल्प उपलब्ध है। सुरक्षा व भुगतान संबंधी सावधानियाँ     (1) ई-चालान अथवा अन्य राशि का भुगतान केवल अधिकृत सरकारी पोर्टलों (जैसे parivahan.gov.in) पर करें।     (2) विभाग का ब्लू-टिक सत्यापित व्हाट्सऐप चैटबॉट: 8005441222 है—इसी नंबर से जानकारी/सहायता लें।     (3) संदिग्ध लिंक/कॉल से सावधान रहें; भुगतान हेतु उपलब्ध सभी मान्य ई-भुगतान माध्यम (जैसे UPI, नेट-बैंकिंग, कार्ड, पीओएस) स्वीकार्य हैं। नागरिक सुविधा को केंद्र में रखकर छोटा और यादगार नंबर ‘149’ उपलब्ध कराने का हमने अनुरोध किया था, जिसे भारत सरकार ने स्वीकृत कर लागू कर दिया है। अब ‘149’ और 1800-1800-151 दोनों पर 24×7 सहायता मिलेगी। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—सुरक्षित सड़कें, सरल सेवाएँ और संतुष्ट नागरिक, हेल्पलाइन की नियमित समीक्षा से शिकायत-निवारण समयबद्ध और प्रभावी बनाया जाएगा। ब्रजेश नारायण सिंह परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश  

मेरठवासियों को मिली सौगात, अयोध्या-वाराणसी तक मिलेगी वंदे भारत की तेज रफ्तार सुविधा

मेरठ मेरठ से वाराणसी और अयोध्या के लिए सफर अब और आरामदायक हो गया है, जहां इस इस रूट पर अब वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू हो गई है। इस ट्रेन को लोगों को लंबे समय से इंतजार था और उनका इंतजार अब खत्म हो गया है। राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इस ट्रेन को लेकर लोगों में जबरदस्त क्रेज है, जहां 29 अगस्त के लिए इस ट्रेन की सबसे ज्यादा बुकिंग की गई है। ट्रेन नंबर 22490 वंदे भारत एक्सप्रेस बुधवार सुबह छह बजकर 35 मिनट पर मेरठ से रवाना हुई, जबकि ट्रेन नंबर 22489 वाराणसी से सुबह नौ बजकर दस मिनट पर मेरठ के लिए चली। बता दें कि पहले यह ट्रेन मेरठ से लखनऊ के लिए चलती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर वाराणसी तक बढ़ा दिया गया है।   ट्रेन को लेकर लोगों में जबरदस्त क्रेज मंगलवार की शाम तक 27 अगस्त के लिए मेरठ से अयोध्या के लिए 69 और बनारस के लिए 18 लोगों ने चेयरकार श्रेणी में सीटें रिजर्व कराईं। इसके अलावा मेरठ से बनारस के एग्जिक्यूटिव श्रेणी में तीन रिजर्वेशन हुए हैं। बता दें कि लखनऊ तक चल रही वंदे भारत एक्सप्रेस को अयोध्या और वाराणसी से जोड़ने के लिए दैनिक जागरण ने काफी प्रयास किए थे और समय-समय पर इस मांग को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद जनप्रतिनिधियों ने इस मुहिम को आगे बढ़ाया और एक महीने पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्रेन को अयोध्या और वाराणसी तक विस्तारित करने पर हरी झंडी दे दी थी। 29 अगस्त को सबसे ज्यादा बुकिंग मंगलवार की शाम तक पहले दिन ट्रेन में चेयरकार श्रेणी में कुल 478 सीटों में 281 सीटें बुक हुई हैं। एग्जिक्यूटिव श्रेणी में कुल 52 सीटों में 27 बुक हैं। 29 अगस्त के लिए ट्रेन में सबसे ज्यादा बुकिंग है, जहां चेयरकार में 291 सीटें बुक हैं। इसी दिन ट्रेन का एग्जिक्यूटिव कोच पूरी तरह बुक है, जिसमे एक वेटिंग चल रही है। भारतीय रेलवे ने ट्रेन का संशोधित टाइम टेबल भी जारी कर दिया है, जहां ट्रेन का मेरठ से चलने और लखनऊ पहुंचने के समय में कोई परिवर्तन नहीं है। लेकिन 27 अगस्त से ट्रेन लखनऊ से वर्तमान समय 2:45 की जगह 1:50 बजे मेरठ के लिए प्रस्थान करेगी।

सलीम की मौत के बाद कासगंज चंदन गुप्ता हत्याकांड में हुई बड़ी घटना

लखनऊ कासगंज के चर्चित चंदन गुप्ता हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दोषी सलीम की लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हो गई। लखनऊ जिला कारागार के जेलर ने सलीम की मौत की पुष्टि की है। सलीम को इलाज के लिए लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में भर्ती कराया गया था, जहां पुलिस सुरक्षा में उसका इलाज चल रहा था। बुधवार को उसकी हालत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। सलीम, 2018 में कासगंज में तिरंगा यात्रा के दौरान हुई हिंसा में मारे गए चंदन गुप्ता की हत्या का शामिल था। एनआईए स्पेशल कोर्ट, लखनऊ ने सलीम को अन्य 27 दोषियों के साथ इस मामले में दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। कोर्ट का फैसला आने के बाद सलीम ने अन्य दोषियों के साथ आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद से वह जेल में बंद था। गौरतलब है कि कासगंज में 26 जनवरी 2018 को तिरंगा यात्रा निकाली गई थी। चंदन गुप्ता अपने भाई विवेक गुप्ता और अन्य साथियों के साथ तिरंगा यात्रा में शामिल था। जब तिरंगा यात्रा कासगंज के तहसील रोड स्थित जीजीआईसी गेट के पास पहुंची, उसी दौरान विवाद हुआ। आरोप थे कि सलीम, वसीम और नसीम समेत कई लोगों ने रास्ता रोक लिया। जब चंदन ने आपत्ति जताई तो इससे हालात बिगड़ गए और पथराव होने लगा। तिरंगा यात्रा के दौरान गोलीबारी की भी घटना हुई। मुख्य आरोपियों में से एक, सलीम ने चंदन गुप्ता पर गोली चलाई, जिससे उसकी मौत हो गई। हिंसा के कारण शहर में अशांति फैल गई, जिसके कारण एक सप्ताह तक कर्फ्यू लगा रहा और इंटरनेट बंद रहा। मामले में करीब 6 साल की कानूनी लड़ाई के बाद चंदन के परिवार को जनवरी 2025 में न्याय मिला। एनआईए स्पेशल कोर्ट ने चंदन गुप्ता हत्याकांड में 28 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने दो लोगों को इस मामले से बरी भी कर दिया, क्योंकि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे।  

मुख्यमंत्री जी ने हादसे में कालकवलित हुए उत्तरप्रदेश के निवासी समस्त मृतक परिजनों को आर्थिक सहायता करने के दिये निर्देश

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने जम्मू कश्मीर के वैष्णो देवी यात्रा में हुए प्राकृतिक आपदा की चपेट में आये मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री जी ने कालकवलित हुए उत्तरप्रदेश के निवासी समस्त मृतक परिजनों को ₹4 लाख की आर्थिक सहायता के दिये निर्देश। मुख्यमंत्री जी ने अधिकारियों को मृतकों के शव उनके घर पहुंचाए जाने की व्यवस्था करने के भी दिये निर्देश।

गंगा के विस्तृत प्रवाह वाले प्रदेश के रूप में उत्तर प्रदेश नमामि गंगे कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र रहा

नई दिल्ली/लखनऊ,  नदियाँ और जल संसाधन सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, और इनका पुनर्जीवन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। नदी पुनर्जीवन और जल संरक्षण में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की अग्रणी पहलों ने इसे वैश्विक जल संवाद में एक प्रमुख आवाज बना दिया है। इस वर्ष स्टॉकहोम वर्ल्ड वॉटर वीक में इसकी भागीदारी भारत की बढ़ती भूमिका को उजागर करती है, जो जल संबंधी वैश्विक चुनौतियों के समाधान में अहम योगदान दे रही है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल वॉटर इंस्टीट्यूट (SIWI) द्वारा वर्ष 1991 से आयोजित यह प्रतिष्ठित आयोजन अब वैश्विक नीति निर्धारकों, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए सबसे प्रभावशाली मंच बन चुका है। गंगा के विस्तृत प्रवाह वाले प्रदेश के रूप में उत्तर प्रदेश नमामि गंगे कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र रहा है। वाराणसी में रिवरफ्रंट विकास, कानपुर में सीवेज शोधन संयंत्रों की स्थापना तथा छोटे एवं मझौले नगरों में सामुदायिक भागीदारी आधारित पहलें इस अभियान को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रही हैं। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन का केंद्र बिंदु बना "नदी शहरों की पुनर्कल्पना: जलवायु-संवेदी और बेसिन-केंद्रित शहरी विकास", जिसमें राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG), राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान (NIUA) और जर्मन विकास सहयोग (GIZ) ने मिलकर नेतृत्व किया। इस सत्र में विशेषज्ञों ने जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण की चुनौतियों के बीच, नदी-केंद्रित विकास ही शहरों को टिकाऊ और सुरक्षित बना सकता है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक श्री राजीव कुमार मित्तल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नमामि गंगे मिशन ने भारत में नदियों के पुनरुद्धार के लिए एक ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव की नींव रखी है। उन्होंने बताया कि इस मिशन के तहत अब तक 40 हजार करोड़ रुपये का भारी निवेश किया जा चुका है, जो गंगा और उसकी सहायक नदियों को उनके प्राचीन रूप में पुनः स्थापित करने की दिशा में तेज़ी से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि नमामि गंगे मिशन एक जीवित उदाहरण है, जो यह साबित करता है कि जब आधुनिक तकनीक और नवाचार का संगम होता है, तो नदियों को पुनः जीवनदायिनी बनाने में सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने बताया कि मिशन के अंतर्गत की गई पहलें, जैसे हाइब्रिड एनीटी मॉडल आधारित एसटीपी, सोलर पावर्ड ट्रीटमेंट प्लांट और मृदा जैव प्रौद्योगिकी, वैश्विक मानकों को स्थापित करने में योगदान दे रही हैं। श्री मित्तल ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस कार्यक्रम को एक विशाल जन आंदोलन में बदला गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं। वैश्विक सहयोगों की अहमियत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व बैंक, जीआईजेड, सी-गंगा, नीदरलैंड्स और डेनमार्क का सहयोग नदी विज्ञान, जल सुरक्षा और प्रबंधन में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में विशेषज्ञों ने यह स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण की समस्याओं का हल केवल नदी-बेसिनों के संरक्षण और प्रबंधन में ही छुपा है। इस संदर्भ में भारत की 'नमामि गंगे' पहल को आदर्श उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसे अन्य देशों के लिए अनुकरणीय माना गया। प्रदूषण नियंत्रण, जैविक खेती, आर्द्रभूमि संरक्षण और जलवायु-स्मार्ट शहरी विकास जैसे कदमों ने इस मिशन को वैश्विक स्तर पर प्रेरणा का स्रोत बना दिया है। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है जब शहरों को केवल उपभोक्ता के रूप में नहीं, बल्कि नदी-बेसिनों के सक्रिय संरक्षक के रूप में कार्य करना होगा। जलवायु परिवर्तन के दौर में नदियों का संरक्षण अनिवार्य बन चुका है और इसके लिए नदी-केंद्रित शहरी विकास को अपनाना होगा। सत्र के समापन में यह महत्वपूर्ण संदेश सामने आया – जब शहर मिलकर काम करेंगे और सीमा पार सोचेंगे, तो नदियों को बचाया जा सकता है और उन्हें समृद्ध भी किया जा सकता है। यही स्थिरता और समृद्धि का वास्तविक आधार होगा, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन सुनिश्चित करेगा।

बर्थडे पर अखिलेश का गिफ्ट, 100 रुपए लेते ही लाल हो गईं इकरा हसन के गाल

लखनऊ शामली से सपा सांसद इकरा हसन कल यानि 26 अगस्‍त को जन्‍मदिन था, जिसको लखनऊ के एक 5 स्टार होटल में बनाया गया। इस दौरान अखिलेश यादव भी वहां पहुंचे और उनको ऐसा बर्थडे गिफ्ट दिए कि इकरा हसन हैरान हो गईं। दरअसल, अखिलेश यादव ने 100 रूपये का गिफ्ट दिया था, जिसे लेते हुए वह काफी शर्मा रही थी। बता दें कि उनके जन्मदिन के मौके पर डिंपल यादव और जया बच्चन ने मिलकर केक कटवाया था। जन्मदिन के मौके पर अखिलेश यादव के परिवार के साथ मछली शहर से सासंद और रिंकू सिंह की होने वाली पत्नी प्रिया सरोज भी वहां पर मौजूद थीं। जैसे ही केक सामने आया, सभी सांसद एक स्वर में इकरा हसन को हैप्पी बर्थडे विश करने लगे। वहां मौजूद सांसदों ने तालियां बजाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया। इसी बीच, अखिलेश यादव ने 100 रुपए का नोट निकाला और इकरा को जन्मदिन पर गिफ्ट किया। यह देखकर वहां मौजूद सभी लोग हंसने लगे।   इकरा ने शेयर कीं तस्‍वीरें आपको बता दें कि जन्‍मदिन की तस्‍वीरें अपने X अकाउंट पर शेयर करते हुए इकरा हसन ने सभी का आभार जताया है। उन्‍होंने लिखा- 'मेरे जन्मदिवस के अवसर पर लखनऊ में माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय अखिलेश यादव एवं पार्टी के सभी सम्मानित सांसदों एवं नेताओं द्वारा जो स्नेह, आशीर्वाद और प्यार मुझे मिला, उसके लिए मैं हृदय से आभार व्यक्त करती हूं। आपका यह विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है, जो मुझे समाज और जनता की सेवा के लिए और अधिक समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। आप सभी का स्नेह और आशीर्वाद यूं ही बना रहे, मैं खुदा से यही कामना करती हूं।'

गोरखपुर में अडानी समूह और कोका कोला के प्रमुख बॉटलर ने भी उद्योग लगाने को ली जमीन

योगी सरकार में देश के दिग्गज निवेशकों को भाया गोरखपुर गोरखपुर में अडानी समूह और कोका कोला के प्रमुख बॉटलर ने भी उद्योग लगाने को ली जमीन पेप्सिको का बॉटलिंग प्लांट पहले से उत्पादनरत, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड और श्री सीमेंट्स ने भी मांगी औद्योगिक जमीन वर्तमान वित्तीय वर्ष में 54 नई यूनिट्स के लिए गीडा ने किया 182 एकड़ भूमि का रिकार्ड आवंटन गोरखपुर  दशकों तक जिस गोरखपुर में स्थानीय पूंजीपति भी औद्योगिक निवेश करने से घबराते थे, योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार की प्रोत्साहनपरक नीतियों, कारोबारी सुगमता और शानदार कनेक्टिविटी से अब वहां नामी कंपनियों के आने की होड़ सी दिखती है। निवेशकों की डिमांड के अनुरूप गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) ने न केवल लैंड बैंक समृद्ध किया है बल्कि साल दर साल औद्योगिक भूखंडों का आवंटन भी तेज हुआ है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में तो गीडा ने अब तक 54 नई यूनिट्स के लिए रिकार्ड 182 एकड़ भूमि का आवंटन किया है। इससे 5800 करोड़ रुपये के नए पूंजी निवेश के साथ 8500 लोगों के लिए रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त हुआ है।  लंबे दौर तक पहचान को जूझता रहा गोरखपुर अब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, रोड, रेल और एयर कनेक्टिविटी के मामले में मजबूत होकर औद्योगिक नक्शे पर भी चमक गया है। जिस जिले से उद्यमियों ने मुंह फेर लिया था, वहां 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से औद्योगिक प्रगति का ऐसा माहौल बनना शुरू हुआ कि देश की बड़ी-बड़ी कंपनियां, यहां तक कि मल्टीनेशनल भी इंडस्ट्री लगा रही हैं।  औद्योगिक प्रगति के नए कालखंड में सिर्फ गत पांच साल की बात करें तो इस दौरान गीडा को 9445 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले और इसके जरिये 22922 रोजगार सृजन संभव हुआ। इसमें मल्टीनेशनल ब्रांड पेप्सिको, केयान डिस्टिलरी, ज्ञान डेयरी, टेक्नोप्लास्ट और केंद्रीय भंडारण निगम, कपिला कृषि उद्योग, एपीएल अपोलो ट्यूब्स जैसे बड़े नाम शामिल हैं।  गोरखपुर में अडानी समूह ने अंबुजा ब्रांड सीमेंट फैक्ट्री की नई यूनिट और कोका कोला के प्रमुख बॉटलर अमृत बॉटलर्स ने भी यूनिट लगाने को जमीन ले ली है। यही नहीं, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड और श्री सीमेंट्स ने भी निवेश की उत्सुकता दिखाते हुए गीडा से औद्योगिक जमीन मांगी है। श्री सीमेंट्स की टीम पहले ही जमीन देखने के लिए दौरा कर चुकी है जबकि रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के प्रतिनिधि मंगलवार को विजिट पर आए थे। अपने पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्र के साथ गीडा ने गोरखपुर के दक्षिणांचल में धुरियापार इंडस्ट्रियल टाउनशिप को भी औद्योगिक हब के रूप में विकसित करना शुरू कर दिया है। गत दिनों यहां दो बड़े औद्योगिक निवेश के लिए भूमि का आवंटन किया जा चुका है। गीडा की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अनुज मलिक का कहना है कि मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में गोरखपुर में निवेश और औद्योगिक विकास का शानदार इको सिस्टम तैयार हुआ है। गीडा द्वारा निवेशकों की मांग और पसंद के अनुरूप जमीन उपलब्ध कराई जा रही है। इसका नतीजा है कि यहां औद्योगिक निवेश लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं को आवंटित जमीन से प्रस्तावित निवेश श्रेयश डिस्टिलरीज               2667 करोड़ रु. अंबुजा सीमेंट (अडानी ग्रुप)    1400 करोड़ रु. अमृत बॉटलर्स (कोका कोला)  800 करोड़ रु. केयान डिस्टिलरीज               600 करोड़ रु. विजन परेन्टल (फार्मास्युटिकल)100 करोड़ रु.   आगामी प्रस्तावित निवेश प्रस्ताव रिलायंस सीपीएल      1000 करोड़ रु. श्री सीमेंट्स                500 करोड़ रु. लाइफकेयर्स हॉस्पिटल   500 करोड़ रु. ईएसआईसी                150 करोड़ रु. डीपीएस                       50 करोड़ रु.