samacharsecretary.com

योगी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, प्रधानों को बनाया जाएगा ग्राम पंचायतों का प्रशासक

योगी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, प्रधानों को बनाया जाएगा ग्राम पंचायतों का प्रशासक नई पंचायतों के गठन अथवा छह माह की अधिकतम अवधि तक निवर्तमान प्रधान होंगे प्रशासक सीएम योगी के निर्देशानुसार सभी जिलाधिकारियों को आदेश जारी, 26 मई को खत्म हो रहा पंचायतों का कार्यकाल लखनऊ  प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। इसके दृष्टिगत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके साथ ही स्पष्ट किया गया है कि नई ग्राम पंचायतों के गठन अथवा अधिकतम छह माह की अवधि तक निवर्तमान प्रधान ही पंचायतों का सामान्य प्रशासनिक कार्य संभालेंगे। सीएम योगी के निर्देश पर निवर्तमान प्रधानों को ग्राम पंचायतों में बतौर प्रशासक नामित किए जाने के लिए सभी जिलाधिकारियों को प्राधिकृत किया गया है, जिसके अनुसार 27 मई 2026 से निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे। प्रशासकों को केवल सामान्य और रूटीन कार्यों के निर्वहन की अनुमति होगी। उनके द्वारा कोई नीतिगत निर्णय पर नहीं लिया जा सकेगा। विशेष परिस्थितियों में लेंगे डीएम से स्वीकृति इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि अत्यावश्यक अथवा किसी विशेष परिस्थिति में नीतिगत निर्णय लेने की आवश्यकता पड़ती है तो उस प्रस्ताव को जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी के समक्ष रखा जाएगा और उनकी स्वीकृति के बाद ही निर्णय लिया जा सकेगा। ज्ञात है कि ग्राम पंचायत का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई पंचायतों के गठन तक राज्य सरकार को प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार है।

2027 मिशन के लिए BJP-RSS की सियासी कवायद तेज, भागवत का दौरा क्यों अहम?

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत रविवार की शाम तीन दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचे. संघ प्रमुख आरएसएस भले ही पूर्वी क्षेत्र के प्रशिक्षण वर्ग में शामिल होने के लिए आए हों, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले उनके इस दौरे के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।  मोहन भागवत के तीन के लखनऊ प्रवास को विशुद्ध रूप से आरएसएस के कार्यक्रम से जुड़ा बताया जा रहा है. प्रशिक्षण वर्ग में बौद्धिक निर्देशन के साथ ही संघ के शताब्दी वर्ष और विभिन्न अभियानों की समीक्षा करेंगे, लेकिन संघ प्रमुख की इस यात्रा ने प्रदेश की सियासी सरगर्मी को बढ़ा दी है।  उत्तर प्रदेश को देश की 'सत्ता का प्रवेश द्वार' कहा जाता है. यूपी की सियासत में आरएसएस की भूमिका हमेशा से एक 'साइलेंट किंगमेकर' और 'ग्राउंड इंजीनियर' की रही है. भले ही संघ खुद को एक सांस्कृतिक संगठन कहता है, लेकिन बीजेपी के लिए जनसंघ के दौर से ही सियासी रण में वो मददगार बनता रहा है. 2017 और 2022 में बीजेपी को मिली जीत में संघ का रोल काफी अहम रहा है. ऐसे में 2027 से पहले मोहन भागवत एक बार फिर से यूपी पहुंचे हैं।  लखनऊ के दौरे पर मोहन भागवत संघ प्रमुख मोहन भागवत तीन दिन के लखनऊ दौरे पर हैं और निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में ठहरे हैं. वो मंगलवार तक लखनऊ में रहेंगे. लखनऊ में संघ का अवध, गोरक्ष, काशी और कानपुर प्रांत के स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण वर्ग चल रहा है. इस दौरान मोहन भागवत  प्रशिक्षण वर्ग में बौद्धिक निर्देशन के साथ ही संघ के शताब्दी वर्ष और विभिन्न अभियानों की समीक्षा करेंगे।  मोहन भागवत पूर्वी क्षेत्र के पदाधिकारियों के साथ बैठकों में वह शताब्दी वर्ष के तहत चल रहे गृह संपर्क अभियान, हिंदू सम्मेलनों सहित विभिन्न अभियानों के अलावा शाखा विस्तार पर चर्चा करेंगे और आगे के अभियानों और कार्यक्रमों को लेकर निर्देश देंगे. हालांकि संघ प्रमुख अपने प्रवास के दौरान किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे, लेकिन आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बीजेपी के प्रमुख पदाधिकारियों, सरकार के प्रतिनिधियों और संघ के प्रशिक्षण वर्ग में शामिल हो सकते हैं।  सीएम से डिप्टीसीएम से होगी मुलाकात? संघ प्रमुख मोहन भागवत से  लखनऊ प्रवास के दौरान सरकार और बीजेपी नेता मुलाकात करने से भी पहुंच सकते हैं. सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर डिप्टीसीएम केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक सहित यूपी सरकार के कई बड़े मंत्री मुलाकात कर सकते हैं. इसके अलावा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पकंज चौधरी भी दिल्ली से लखनऊ पहुंच गए हैं. सरकार और बीजेपी संगठन के तमाम अहम लोग  संघ प्रमुख से मिलने के लिए निराला नगर जा सकते हैं।  उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव है. ऐसे में सरकार के कामकाज और 2027 विधानसभा चुनाव तैयारियों को लेकर भी चर्चा हो सकती है. ऐसे में वह प्रदेश के राजनीतिक हालात की भी जानकारी ले सकते हैं और जमीनी हकीकत को समझने की कोशिश करेंगे. इससे पहले भी देखा गया है कि संघ प्रमुख लखनऊ पहुंचे हैं तो सरकार से लेकर संगठन तक के लोग उनसे मिलने पहुंचते रहे हैं।  ट्रिपल एस मॉडल' से सत्ता की हैट्रिक यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से संघ प्रमुख मोहन भागवत प्रचारकों और प्रमुख पदाधिकारियों से प्रदेश की समाजिक और राजनीतिक स्थितियों के संबंध में भी फीडबैक लेंगे. बीजेपी संगठन और सरकार के प्रमुख पदाधिकारियों से मुलाकात में संगठन और सरकार के बीच समन्वय के मुद्दों पर भी बात हो सकती है. इसे ट्रिपल एस मॉडल के रूप में देखा जाता है. यह मॉडल पूरी तरह सरकार, संगठन और संघ के तीन स्तंभों पर आधारित माना जाता है।  संघ विचारधारा और अनुशासित कैडर नेटवर्क देता है. बीजेपी का संगठन चुनावी लामबंदी और राजनीतिक रणनीति संभालता है. जबकि सरकार अपने कामकाज और योजनाओं के आधार पर जनता के बीच संदेश पहुंचाती है. ये तीनों जब एक ही दिशा में काम करते हैं तो बीजेपी की चुनावी मशीनरी काफी प्रभावी मानी जाती है.  2014 के बाद बीजेपी की चुनावी जीत में इस मॉडल की भूमिका को लेकर चर्चा होती रही है।  2027 की चुनावी जंग जीतने का प्लान 2027 चुनाव से पहले फिर के एक बार ट्रिपल एस के बीच तालमेल बैठकर सत्ता की हैट्रिक लगाने का प्लान है. इसीलिए होली के बाद से यूपी के अलग-अलग क्षेत्रों में संघ और बीजेपी के बीच समन्वय बैठकों की एक पूरी श्रृंखला चली. इन बैठकों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और पार्टी के प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह हिस्सा लिए थे, जबकि संघ के क्षेत्रीय और प्रांत स्तर के प्रचारक भी बैठक में शिरकत करते थे।  राजनीतिक विश्लेषक इन बैठकों को सिर्फ नियमित संगठनात्मक संवाद नहीं मानते, बल्कि 2027 के चुनावों से पहले बीजेपी की चुनावी रणनीति का शुरुआती खाका खींचने की कवायद बताते हैं. हालांकि, यह है कि बीजेपी और संघ के बीच इस तरह की समन्वय बैठकें नई नहीं हैं.  2019 के लोकसभा चुनाव से एक साल पहले भी इसी तरह का संवाद अभियान चलाया गया था. इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले जमीन पर सियासी माहौल बनाने के लिए यह रणनीति अपनाई गई थी. संघ और बीजेपी के सियासी तालेमल से ही चुनावी जंग जीतने में सफल रही है।  यूपी संघ-BJP की सियासी प्रयोगशाला उत्तर प्रदेश संघ की सियासी प्रयोगशाला रही है. 1984 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी पूरे देश में महज 2 सीटों पर सिमट गई थी. इसके बाद संघ के तत्कालीन सरसंघचालक बालासाहब देवरस की रणनीति के तहत संघ परिवार (विशेषकर विश्व हिंदू परिषद) ने राम मंदिर आंदोलन की कमान संभाली. संघ ने इस आंदोलन के जरिए उत्तर प्रदेश के बिखरे हुए हिंदू समाज को एक वैचारिक सूत्र में पिरोया।  संघ के कार्यकर्ता 'शिला पूजन' और गांवों में 'राम ज्योति' यात्राओं के जरिए घर-घर दस्तक दी. इस वैचारिक जमीन का राजनीतिक फायदा बीजेपी को मिला, लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा और कल्याण सिंह के उभार के साथ 1991 में पहली बार हबयूपी में सरकार बनी. 2002 से 2012 के बीच यूपी में भाजपा लगातार कमजोर हो रही थी और तीसरे-चौथे नंबर की पार्टी बन चुकी थी। इसके बाद 2014 के … Read more

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित होगा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित होगा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री प्रदेश में शीघ्र लागू होगी आयुष हेल्थ एंड वेलनेस नीति, मुख्यमंत्री ने दिए दिशा-निर्देश प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास वेलनेस और हीलिंग आधारित पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं: मुख्यमंत्री आयुष संस्थानों को समग्र वेलनेस, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता: मुख्यमंत्री पीपीपी मॉडल पर विकसित होंगे आधुनिक आयुष वेलनेस सेंटर, 100 शैय्या वाले एकीकृत आयुष चिकित्सा एवं प्रशिक्षण केंद्र मीरजापुर, गोंडा, मेरठ, आगरा एवं बस्ती मंडलों में होगी एकीकृत आयुष महाविद्यालयों की स्थापना लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को आयुष विभाग की समीक्षा बैठक में प्रदेश में ‘आयुष हेल्थ एंड वेलनेस नीति-2026’ को लागू करने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को केवल उपचार आधारित व्यवस्था तक सीमित न रखते हुए आयुष, योग, पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा और वेलनेस सेवाओं के समन्वय से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि आयुष सेवाओं को आधुनिक प्रबंधन, गुणवत्ता मानकों और पर्यटन से जोड़ते हुए ऐसा मॉडल तैयार किया जाना चाहिए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं के साथ रोजगार और निवेश को भी नई गति मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत, आयुर्वेद एवं योग की परंपरा तथा धार्मिक पर्यटन सर्किट को आयुष वेलनेस सेक्टर से जोड़ा जाए। वाराणसी, अयोध्या और मथुरा जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास वेलनेस और हीलिंग आधारित पर्यटन विकसित किए जाने की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि आयुष संस्थानों को उपचार केंद्रों के साथ-साथ वेलनेस, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 3,953 आयुष स्वास्थ्य इकाइयां, 1,034 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 225 योग वेलनेस सेंटर और 19 आयुष चिकित्सा महाविद्यालय संचालित हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आयुष सेवाओं का विस्तार गुणवत्तापूर्ण और मानकीकृत स्वरूप में किया जाए। इसके लिए पीपीपी मॉडल के माध्यम से आधुनिक आयुष वेलनेस सेंटर, 100 शैय्या वाले एकीकृत आयुष चिकित्सा एवं प्रशिक्षण केंद्र तथा आयुष कॉलेजों के उन्नयन की दिशा में चरणबद्ध कार्रवाई की जाए। बैठक में प्रस्तावित नीति के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। नीति के अंतर्गत एकीकृत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आयुष वेलनेस एवं चिकित्सा केंद्र, प्रशिक्षण युक्त एकीकृत संस्थान तथा आयुष कॉलेज आधारित मॉडल विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। इन केंद्रों में पंचकर्म, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, डिजिटल हेल्थ सेवाएं तथा अनुसंधान एवं नवाचार गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष आधारित वेलनेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने निवेशकों को एकल खिड़की प्रणाली के माध्यम से त्वरित स्वीकृतियां उपलब्ध कराने तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रस्तावित नीति में निवेश आधारित सब्सिडी, संचालन संबंधी प्रोत्साहन, ब्याज सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में छूट तथा रोजगार सृजन आधारित प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। आयुष शोध, नवाचार तथा पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं के लिए भी विशेष प्रोत्साहन प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री ने मीरजापुर, गोंडा, मेरठ, आगरा एवं बस्ती मंडलों में एकीकृत आयुष महाविद्यालयों की स्थापना की दिशा में तेजी से कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों को आधुनिक आयुष चिकित्सा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के उत्कृष्ट केंद्रों के रूप में विकसित किया जाए। विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने आयुष चिकित्सा संस्थानों में ओपीडी सेवाओं को बेहतर बनाने, दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा पंचकर्म जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयुष सेवाओं को जनविश्वास और गुणवत्ता से जोड़ते हुए मरीजों को बेहतर उपचार एवं वेलनेस सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।  मुख्यमंत्री ने महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर में शोध एवं नवाचार गतिविधियों को गति देने पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय में स्थायी फैकल्टी की नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने तथा आयुष की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के क्षेत्र में विश्वविद्यालय को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बड़ी सौगात : खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद और नए अवसरों का बनेगा नया केंद्र

अलीगढ़ बनेगा यूपी का नया स्पोर्ट्स पावर हाउस, सीएम योगी सौंपेंगे ओलंपिक स्टैंडर्ड कॉम्प्लेक्स पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बड़ी सौगात : खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद और नए अवसरों का बनेगा नया केंद्र अब छोटे शहरों से चमकेंगे बड़े सितारे, अलीगढ़ में 13,000 स्क्वायर मीटर में तैयार विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्विमिंग पूल से मल्टीपर्पज हॉल तक, अलीगढ़ को खेल सुविधाओं की सबसे बड़ी सौगात लखनऊ उत्तर प्रदेश में खेल क्रांति को नई गति देते हुए योगी सरकार अलीगढ़ मंडल को एक ऐसी सौगात देने जा रही है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश की खेल प्रतिभाओं की दिशा बदल देगी। 13,000 स्क्वायर मीटर में बना 57 करोड़ से अधिक की लागत से ओलंपिक स्टैंडर्ड इन्डोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स अब बनकर पूरी तरह  तैयार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जल्द ही इसे जनता को समर्पित करेंगे। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह परिसर अलीगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद और नए अवसरों का केंद्र बनने जा रहा है। नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि यह मंडल का पहला ऐसा विश्वस्तरीय इन्डोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स है, जहां राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खेल सुविधाएं विकसित की गई हैं। योगी सरकार की मंशा केवल स्टेडियम बनाना नहीं, बल्कि गांव, कस्बों और छोटे शहरों की प्रतिभाओं को ऐसा मंच देना है, जहां से वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकें। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार विश्वस्तरीय सुविधाएं इस विशाल खेल परिसर की सबसे बड़ी खासियत इसका राष्ट्रीय स्तर का स्विमिंग पूल है। अत्याधुनिक तकनीक से तैयार यह पूल भविष्य में राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के आयोजन का केंद्र बन सकता है। अब तक बड़े शहरों पर निर्भर रहने वाले अलीगढ़ मंडल के तैराकों को अपने ही शहर में उच्च स्तरीय अभ्यास और प्रतियोगिताओं का अवसर मिलेगा। कॉम्प्लेक्स में आधुनिक मल्टीपर्पज हॉल भी बनाया गया है, जहां विभिन्न इनडोर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जा सकेंगी। बैडमिंटन और बास्केटबॉल कोर्ट को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसके साथ ही बिलियर्ड्स रूम और हाईटेक जिम की सुविधा भी खिलाड़ियों को उपलब्ध कराई गई है। पेशेवर प्रशिक्षण और फिटनेस को ध्यान में रखते हुए तैयार यह परिसर खिलाड़ियों को बड़े शहरों जैसी सुविधाएं देगा। खिलाड़ियों से लेकर दर्शकों तक हर सुविधा का रखा गया ध्यान स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को केवल अभ्यास केंद्र नहीं, बल्कि बड़े खेल आयोजनों के लिए एक सम्पूर्ण स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित किया गया है। दर्शकों की सुविधा के लिए अत्याधुनिक स्पेक्टेटर गैलरी बनाई गई है, जहां बड़ी संख्या में लोग बैठकर प्रतियोगिताओं का आनंद ले सकेंगे। इसके अलावा वीआईपी रूम, मीडिया रूम और आधुनिक लाउंज क्षेत्र भी तैयार किए गए हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर के आयोजन आसानी से कराए जा सकेंगे। इससे अलीगढ़ भविष्य में बड़े खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए भी तैयार माना जा रहा है। अब छोटे शहरों से निकलेंगी बड़ी प्रतिभाएं नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि इस कॉम्प्लेक्स के शुरू होने के बाद अलीगढ़ और आसपास के जिलों के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए दिल्ली, नोएडा या लखनऊ जैसे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। अब स्थानीय प्रतिभाओं को अपने क्षेत्र में ही विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सबसे बड़ा लाभ मिलेगा। आने वाले समय में यह परिसर अलीगढ़ को उत्तर प्रदेश के प्रमुख स्पोर्ट्स सेंटर के रूप में स्थापित करेगा। यहां नियमित प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के आयोजन से राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार होने की संभावना बढ़ेगी। 'खेलेगा यूपी, खिलेगा यूपी’ विजन को मिल रही नई ताकत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार मजबूत किया जा रहा है। गांवों में मिनी स्टेडियम, जिलों में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं के निर्माण के जरिए सरकार युवाओं को खेलों से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। अलीगढ़ का यह स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स उसी विजन का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। खेल प्रेमियों में उत्साह, अलीगढ़ को नई पहचान मिलने की उम्मीद कॉम्प्लेक्स के तैयार होने से खेल प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में उत्साह है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह परियोजना आने वाले समय में अलीगढ़ के लिए गेम चेंजर साबित होगी। जिस अलीगढ़ की पहचान अब तक ताला उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ी रही, वहीं अब यह शहर खेल प्रतिभाओं के नए केंद्र के रूप में भी उभर सकता है। वहीं, स्थानीय खिलाड़ियों का कहना है कि विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ अभ्यास का मौका मिलने से अब उनके सपनों को नई उड़ान मिलेगी। खेल जगत को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में अलीगढ़ से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ी निकलेंगे और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

आईजीआरएस और सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री

हर विकास खंड में लगेगी साप्ताहिक चौपाल, जन समस्याओं का होगा मौके पर समाधान आईजीआरएस और सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री बकरीद पर सार्वजनिक स्थलों पर कुर्बानी की अनुमति नहीं, प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पर जीरो टॉलरेंस: मुख्यमंत्री अधिकारियों को मुख्यमंत्री की दो टूक, सड़क जाम कर नमाज की अनुमति नहीं, परंपरागत स्थलों पर ही हो आयोजन अवैध स्लॉटर हाउस और खुले में मांस विक्रय पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश अवैध खनन और भू-माफियाओं के खिलाफ चलाया जाए विशेष अभियान: मुख्यमंत्री लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता की विभिन्न शिकायतों के समाधान के लिए प्रत्येक विकास खंड स्तर पर साप्ताहिक चौपाल लगाने का निर्णय लिया है। इन चौपालों में राजस्व वाद, घरेलू हिंसा, अवैध वसूली तथा स्थानीय स्तर पर दर्ज न होने वाली पुलिस शिकायतों जैसी आमजन से जुड़ी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाएगा। साथ ही सरकारी लाभार्थीपरक योजनाओं से वंचित पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ भी इन चौपालों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित कानून-व्यवस्था एवं प्रशासनिक समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की प्राथमिकता जनता की समस्याओं का समयबद्ध, पारदर्शी और संतुष्टिपरक समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने निर्देश दिए कि इन चौपालों के संचालन के लिए शासन स्तर से विस्तृत एसओपी जारी की जाएगी तथा प्रत्येक आवेदन और शिकायत का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। जनपद स्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति इन चौपालों में अनिवार्य रहेगी। मुख्यमंत्री ने आईजीआरएस और सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त होने वाली शिकायतों को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि हर शिकायत को पूरी गंभीरता से लिया जाए। केवल औपचारिक निस्तारण नहीं, बल्कि पीड़ित को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए। बैठक में मुख्यमंत्री ने आगामी गंगा दशहरा और बकरीद पर्व को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बकरीद के अवसर पर सार्वजनिक स्थलों पर पशुओं की कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी तथा प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। कुर्बानी केवल पूर्व निर्धारित स्थलों पर ही की जाएगी और किसी भी नई परंपरा को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नमाज केवल परंपरागत स्थलों पर ही अदा की जाए तथा सड़क मार्ग अवरुद्ध कर नमाज की अनुमति किसी भी स्थिति में न दी जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में कुर्बानी के बाद अपशिष्ट निस्तारण की सुनियोजित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। खुले में मांस विक्रय प्रतिबंधित रहे तथा अवैध स्लॉटर हाउस किसी भी दशा में संचालित न हों। वैध स्लॉटर हाउस में भी निर्धारित क्षमता से अधिक पशु न रखे जाएं। उन्होंने पर्वों के दौरान बिजली आपूर्ति, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। संवेदनशील क्षेत्रों में पर्व से पूर्व फ्लैग मार्च किया जाए तथा धार्मिक स्थलों के आसपास पुलिस बल की सतत पैदल गश्त सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने अलीगढ़, बिजनौर, सहारनपुर, रामपुर और संभल सहित संवेदनशील जनपदों के जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों से संवाद करते हुए कहा कि विगत वर्षों की घटनाओं का अध्ययन कर संभावित अराजक तत्वों की सूची तैयार की जाए तथा आवश्यकतानुसार निषेधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सभी थाना, तहसील और जनपद स्तर पर पीस कमेटियों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने के भी निर्देश दिए गए। गंगा दशहरा की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रयागराज, वाराणसी, अयोध्या, चित्रकूट, हापुड़, मुजफ्फरनगर और अमरोहा सहित विभिन्न जनपदों में गंगा घाटों की साफ-सफाई, बैरिकेडिंग, एम्बुलेंस तैनाती, छायादार व्यवस्था तथा पार्किंग प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तेज गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। बैठक में सड़क सुरक्षा और अवैध खनन पर भी मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने बिना नम्बर प्लेट वाले वाहनों के विरुद्ध अभियान चलाने तथा अवैध खनन के खिलाफ टास्क फोर्स गठित कर कठोरतम कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि किसी भी दबाव या सिफारिश में आए बिना जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई की जाए, लेकिन जांच के नाम पर आम नागरिकों का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने भू-माफियाओं के विरुद्ध कार्रवाई को और तेज करने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति का वैध अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए। साथ ही जिन जिलों में मुख्य चिकित्सा अधिकारी की तैनाती नहीं है, वहां तत्काल नियुक्ति सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में मुख्य सचिव ने ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत प्रदेश में अब तक 12 लाख पांडुलिपियों के चिन्हांकन की जानकारी दी। पुलिस महानिदेशक ने आगामी पर्वों और परीक्षाओं को लेकर पुलिस की तैयारियों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक सहित शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बिजली संकट से राहत की दिशा में बड़ा कदम, ऊंचाहार प्लांट में जुड़ेगी नई NTPC यूनिट

 रायबरेली  बिजली उत्पादन बढ़ेगा एनटीपीसी में नई यूनिट लगाने तैयारी जारी हो गई है। 800 मेगावाट की नई यूनिट लगाई जाने से बिजली की मांग को पूरा करने में आसानी होगी। ऊंचाहार एनटीपीसी परियोजना में बिजली उत्पादन बढ़ाने की तैयारी है। यहां पर 800 मेगावाट की नई यूनिट लगाई जाएगी। उच्च स्तर पर इसके कवायद शुरू हो गई है। ऊंचाहार परियोजना में यह सबसे बड़ी यूनिट होगी। इसके बनने से बिजली की मांग को पूरा करने में आसानी होगी। बिजली की मांग दिनों दिन बढ़ रही है। इस मांग को पूरा करने के लिए तमाम प्रयास हो रहे हैं इसके लिए उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। एनटीपीसी परियोजना की अभी 1550 मेगावाट क्षमता है। इसकी क्षमता में और वृद्धि की जाएगी। उच्च स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। यहां 800 मेगावाट की इकाई लगाई जाएगी नई इकाई लगाने के लिए परियोजना में पर्याप्त जगह है। नई यूनिट लगने के यहां पर सारे पैरामीटर भी दुरुस्त आए नई इकाई लगाने के लिए जल्द ही प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इन यूनिट के लगने से बिजली उत्पादन और बढ़ जाएगा लोगों को बेहतर बिजली मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। अभी 6 यूनिट कर रही हैं काम वर्तमान में एनटीपीसी परियोजना में 6 इकाइयां हैं। इसमें यूनिट संख्या 1 से लेकर 5 तक प्रत्येक के उत्पादन क्षमता 210- 210 मेगावाट है। छठवीं यूनिट का उत्पादन क्षमता 500 मेगावाट है। इस परियोजना से 1550 मेगावाट बिजली उत्पादन होता है। अब इसकी क्षमता में वृद्धि की तैयारी है। नौ राज्यों को मिलती है बिजली ऊंचाहार एनटीपीसी परियोजना में विद्युत आपूर्ति उत्तरी ग्रिड के माध्यम से की जाती है। इस परियोजना में से 9 राज्यों दिल्ली हरियाणा ,उत्तराखंड ,उत्तर प्रदेश, राजस्थान ,पंजाब, जम्मू- कश्मीर हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ को बिजली मिलती है। इन राज्यों में भी बिजली की मांग दिनों दिन बढ़ रही है ।क्षमता बढ़ाने से मांग को काम किया जा सकेगा। ऊंचाहार एनटीपीसी परियोजना के मानव संसाधन विभाग के अपर महाप्रबंधक पंकज कुमार का कहना है कि ऊंचाहार एनटीपीसी परियोजना की क्षमता बढ़ेगी अब जहां भी नहीं यूनिट लगती है। उसकी क्षमता 800 मेगावाट की होती है। यहां भी 800 मेगावाट की यूनिट लगेगी अभी कर योजना प्रारंभिक स्तर पर चल रहा है।

तकनीकी समस्या दूर, आयुष्मान योजना के अस्पतालों को फिर शुरू हुआ भुगतान

तकनीकी समस्या दूर, आयुष्मान योजना के अस्पतालों को फिर शुरू हुआ भुगतान – योगी सरकार की तत्परता से सुलझी बैंकिंग की तकनीकी समस्या, 14 मई से रुक गया था भुगतान  – तकनीकी समस्या के कारण रुक गया था अस्पतालों का 600 करोड़  रुपये का भुगतान  – 23 मई को जारी हुए 100 करोड़, अगले एक-दो दिन में 500 करोड़ रूपये का हो जाएगा भुगतान  लखनऊ  योगी सरकार द्वारा प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (ABPMJAY)को और अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। योजना के तहत आयुष्मान कार्ड धारकों को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना योगी सरकार की प्राथमिकता है। इसी का नतीजा है कि योजना के शुरू होने के बाद अब तक 50 लाख से अधिक मरीजों ने 91 लाख से अधिक बार अस्पतालों में अपना इलाज कराया। इसके लिए योगी सरकार द्वारा 15 हजार करोड़ से अधिक अस्पतालों को भुगतान किया जा चुका है। वहीं 14 मई से 22 मई तक बैंक में तकनीकी समस्या से अस्पतालों का भुगतान रुक गया था, जिसे ठीक करके 23 मई से दोबारा शुरू कर दिया गया है।  23 मई को अस्पतालों को किया गया 100 करोड़ रु. का भुगतान साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि 14 मई को नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) और संबंधित बैंकों के बीच भुगतान फाइलों के आदान-प्रदान के दौरान तकनीकी समस्या उत्पन्न हो गई थी। इसके चलते लगभग 633 करोड़ रुपये की राशि होल्ड पर चली गई थी। भुगतान प्रक्रिया बाधित होने के कारण योजना से जुड़े अस्पतालों को क्लेम राशि मिलने में देरी हो रही थी, जबकि अधिकांश दावों को राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा पहले ही स्वीकृति प्रदान की जा चुकी थी। तकनीकी बाधा के चलते अस्पतालों को समय से भुगतान नहीं मिल पा रहा था, जिससे निजी और सरकारी सूचीबद्ध अस्पतालों में चिंता की स्थिति बनी हुई थी। हालांकि प्रदेश सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान की दिशा में कार्रवाई शुरू की। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने एनएचए और संबंधित बैंकों के साथ कई दौर की बैठकें कर समस्या के समाधान के लिए लगातार समन्वय बनाए रखा। उन्होंने बताया कि 22 मई को बैंक स्तर पर आई तकनीकी समस्या का सफलतापूर्वक समाधान कर लिया गया। इसके बाद 23 मई को अस्पतालों को 100 करोड़ रुपये का भुगतान जारी कर दिया गया है। वहीं, अधिकारियों के अनुसार अगले एक से दो दिनों के भीतर शेष लगभग 500 करोड़ रुपये का भुगतान भी संबंधित अस्पतालों को कर दिया जाएगा। लगातार नए अस्पतालों को योजना से जोड़ा जा रहा साचीज की सीईओ ने बताया कि तकनीकी समस्या पूरी तरह दूर होने के बाद भुगतान प्रक्रिया सामान्य रूप से शुरू कर दी गई है। अब सूचीबद्ध अस्पतालों को चरणबद्ध तरीके से भुगतान भेजा जा रहा है ताकि मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं पर किसी प्रकार का असर न पड़े। उन्होंने बताया कि योगी सरकार लगातार नए अस्पतालों को योजना से जोड़ रही है ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी बेहतर इलाज की सुविधा मिल सके। इसके अलावा गोल्डन कार्ड वितरण अभियान, ई-केवाईसी, हेल्प डेस्क और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है। अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग अमित घोष ने भी योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों के भुगतान में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो। साथ ही तकनीकी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की समस्याओं की पुनरावृत्ति न हो।

गो संरक्षण विशेष : यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया समेत 10 से अधिक देशों में बजा यूपी का डंका

गो संरक्षण विशेष : यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया समेत 10 से अधिक देशों में बजा यूपी का डंका एक हजार से ज्यादा देशी गायों के सहारे 10 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार का एथिकल डेयरी मॉडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की है इस मॉडल से संरक्षित साहीवाल गाय की आरती और गोपूजन सीएम योगी की प्रेरणा से अमेरिकी सॉफ्टवेयर इंजीनियर समेत टीम 100 ने संभाला देशी गायों के संरक्षण का जिम्मा देशी गायों से बने A2 दूध, बिलौना घी, ब्राह्मी घृत, शतधौत घृत, कुकीज, लड्डू, हर्बल चाय समेत 150 प्रकार के प्रोडक्ट की दुनिया में धूम लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘गो संरक्षण से समृद्धि’ मॉडल अब जमीन से उठकर ग्लोबल मंच पर अपनी ताकत दिखा रहा है। उत्तर प्रदेश में देशी गायों के सहारे न सिर्फ 10 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार खड़ा हुआ है, बल्कि यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया समेत 10 से अधिक देशों में ‘मेड इन यूपी’ गो उत्पादों की धूम मच गई है। यह मॉडल सिर्फ गोसेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक सशक्त आर्थिक ताकत में बदल दिया गया है। ‘हेता’ (HETHA) के जरिए 1000 से ज्यादा देशी गायों पर आधारित एथिकल डेयरी सिस्टम खड़ा किया गया है, जिसने देशी नस्लों को बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा लिख दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मॉडल से संरक्षित साहीवाल गाय की आरती और गोपूजन कर चुके हैं। सीएम योगी की प्रेरणा से सिकंदरपुर, गाजियाबाद के असीम रावत ने इस अभियान की शुरुआत की। असीम 14 साल तक लगातार अमेरिका समेत दुनिया के तमाम देशों की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनियों में इंजीनियर रहे। फिर इन्होंने गो संरक्षण की राह चुनी। आज 100 लोगों की एक स्पेशल टीम के साथ वे इस मिशन को न सिर्फ चला रहे हैं, बल्कि इसे ग्लोबल ब्रांड बना दिया है। हेता का मॉडल देशी गायों के समग्र उपयोग पर आधारित है। यहां दूध से लेकर पंचगव्य, आयुर्वेदिक उत्पाद, ऑर्गेनिक फूड और वेलनेस प्रोडक्ट्स तक करीब 150 प्रकार के प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं। A2 दूध, बिलौना घी, ब्राह्मी घृत, शतधौत घृत, कुकीज, लड्डू, हर्बल चाय, स्किन-हेयर केयर और गोमूत्र अर्क जैसे उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप, सिंगापुर, दुबई तक यूपी की पहचान इस मॉडल की सबसे खास बात यह है कि यहां वृद्ध गोवंश को भी बोझ नहीं, बल्कि जिम्मेदारी माना गया है। उन्हें छोड़ा नहीं जाता, बल्कि संरक्षण का अभिन्न हिस्सा बनाया जाता है। हेता के उत्पाद आज भारत के अलावा अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप, सिंगापुर, दुबई और अन्य मध्य-पूर्व व एशियाई देशों तक पहुंच रहे हैं, जिससे यूपी की पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रही है। डेयरी मास्टर प्लान के तहत लाखों रुपये अनुदान पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार योगी सरकार इस मॉडल को व्यापक बनाने के लिए बड़े स्तर पर नीतिगत समर्थन भी दे रही है। ‘ऑपरेशन-4’ के तहत स्वदेशी गायों के पालन पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। डेयरी मास्टर प्लान के तहत 2 से 25 गायों तक पशु पालकों को लाखों रुपये का अनुदान मिल रहा है। योजना में 15 प्रतिशत स्वयं निवेश, 35 प्रतिशत बैंक ऋण और 50 प्रतिशत सब्सिडी का स्पष्ट फार्मूला लागू किया गया है।  ‘गो-इकोनॉमी’ मॉडल उत्तर प्रदेश को वैश्विक डेयरी शक्ति बनाने की दिशा में बड़ा कदम साहीवाल, गिर, गंगातीरी और सिंधी जैसी उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और विस्तार पर सरकार का विशेष फोकस है। प्रदेश में लागू चार बड़ी योजनाएं मिलकर डेयरी सेक्टर को नई रफ्तार दे रही हैं। इसका नतीजा यह है कि अब किसान देशी गायों के सहारे करोड़ों की आय अर्जित कर रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नया उछाल देखने को मिल रहा है। योगी सरकार का यह ‘गो-इकोनॉमी’ मॉडल अब सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश को वैश्विक डेयरी शक्ति बनाने की दिशा में बड़ा कदम बन चुका है।

पेपर लीक गैंग की अफवाहबाजी फेल, लखनऊ में फैलाई गई पेपर लीक की झूठी सूचना जांच में निकली पूरी तरह फर्जी

पेपर लीक गैंग की अफवाहबाजी फेल, लखनऊ में फैलाई गई पेपर लीक की झूठी सूचना जांच में निकली पूरी तरह फर्जी जांच में साफ हुआ कि प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट पूरी तरह सीलबंद और सुरक्षित योगी सरकार की सख्ती और प्रशासन व यूपीएसएसएससी की सतर्कता से शांतिपूर्वक संपन्न हुई थी लेखपाल मुख्य परीक्षा एआई, बायोमैट्रिक और हाईटेक निगरानी ने नकल माफियाओं की तोड़ी कमर, 44 जिलों में सकुशल हुई परीक्षा लखनऊ, उत्तर प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं को लेकर वर्षों तक सक्रिय रहे पेपर लीक और नकल माफियाओं के नेटवर्क पर योगी सरकार की सख्ती लगातार भारी पड़ रही है। इसका बड़ा उदाहरण विगत दिनों आयोजित लेखपाल मुख्य परीक्षा-2025 में देखने को मिला, जहां सोशल मीडिया के जरिए पेपर लीक की अफवाह फैलाने की कोशिश हुई, लेकिन प्रशासन और आयोग की सतर्कता के आगे यह साजिश पूरी तरह नाकाम साबित हुई। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) द्वारा आयोजित यह परीक्षा प्रदेश के 44 जिलों के 861 केंद्रों पर शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई गई। कुल 3,66,712 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 3,01,756 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया। उपस्थिति प्रतिशत 82.29 रहा, जो अभ्यर्थियों के भरोसे को भी दर्शाता है। पेपर लीक का शोर, लेकिन हकीकत में निकली अफवाह परीक्षा शुरू होते ही लखनऊ के ऐशबाग स्थित गोपीनाथ लक्ष्मणदास रस्तोगी इंटर कॉलेज को लेकर कुछ लोगों ने पेपर लीक की अफवाह फैलाने की कोशिश की। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, आयोग और निगरानी टीमों ने तत्काल जांच शुरू की। जांच में साफ हुआ कि प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट पूरी तरह सीलबंद और सुरक्षित थीं। दरअसल, एक कक्ष के कुछ अभ्यर्थी भ्रम की स्थिति में बाहर आ गए थे, जिसे कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर पेपर लीक का रंग देने की कोशिश की। अधिकारियों ने मौके पर स्थिति स्पष्ट की, जिसके बाद अभ्यर्थी वापस परीक्षा कक्ष में पहुंचे और परीक्षा शांतिपूर्वक जारी रही। योगी सरकार का हाईटेक एग्जाम मॉडल बना ढाल इस बार परीक्षा की निगरानी पूरी तरह तकनीक आधारित रही। आयोग मुख्यालय से लेकर सभी परीक्षा केंद्रों तक कंट्रोल कमांड रूम के जरिए लाइव मॉनिटरिंग की गई। पूरे प्रदेश में 18,883 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इसके अलावा 7,683 बायोमैट्रिक ऑपरेटर और 6,297 फ्रिस्किंग गार्ड तैनात किए गए थे। एआई आधारित पहचान प्रणाली के जरिए प्रतिरूपण और फर्जीवाड़े पर नजर रखी गई। यही कारण रहा कि बुलंदशहर में एक संदिग्ध अभ्यर्थी तुरंत पकड़ लिया गया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। नकल माफिया पर लगातार कड़ा प्रहार उत्तर प्रदेश में एक समय भर्ती परीक्षाएं पेपर लीक और सॉल्वर गैंग के कारण सवालों में रहती थीं, लेकिन योगी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह बदलने की दिशा में सख्त कदम उठाए हैं। हाईटेक निगरानी, बायोमैट्रिक सत्यापन, एआई ट्रैकिंग और प्रशासनिक जवाबदेही ने नकल माफियाओं की कमर तोड़ दी है। लेखपाल मुख्य परीक्षा-2025 का शांतिपूर्ण आयोजन इस बात का संकेत है कि अब प्रदेश में भर्ती परीक्षाएं पारदर्शिता और सख्ती के नए मॉडल पर आगे बढ़ रही हैं।

प्रदेशवासियों की सुरक्षा और जनसमस्याओं के समाधान के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री

जनता दर्शन  प्रदेशवासियों की सुरक्षा और जनसमस्याओं के लिए सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री ‘जनता दर्शन’ में आए हर फरियादी से मिल मुख्यमंत्री ने सुनीं समस्याएं   पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा आदि से जुड़े प्रकरणों का लिया संज्ञान, बोले-हम कराएंगे समस्याओं का समाधान  लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए फरियादियों से मिलकर सभी की समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों की सुरक्षा, सम्मान पर सरकार का पूरा जोर है। सरकार जनसमस्याओं के उचित समाधान के लिए प्रतिबद्ध भी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तय समयसीमा के भीतर समस्याओं के निस्तारण का भी निर्देश दिया।  शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकार का विशेष जोर 'जनता दर्शन' में शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कुछ मामले आए। मुख्यमंत्री ने सभी को आश्वस्त किया कि शिक्षा व स्वास्थ्य पर सरकार का विशेष जोर है। प्रदेश का हर व्यक्ति शिक्षित हो और हर जरूरतमंद को स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, इसके लिए सरकार कृतसंकल्पित है। इन विभागों से जुड़े सभी मामले  संवेदनशीलता से हल किए जाएंगे।  बिना भेदभाव सभी को मिले न्याय मुख्यमंत्री ने कहा कि हर जरूरतमंद की समस्या का समाधान हमारी सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने अफसरों को निर्देशित किया कि पूरी संवेदनशीलता से सुनिश्चित करें कि बिना भेदभाव सभी को न्याय मिले। हर पात्र को योजनाओं का लाभ मिले, जरूरतमंदों के समुचित इलाज की व्यवस्था हो। मुख्यमंत्री ने राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों के भी शीघ्रता से निस्तारण के निर्देश दिए। महिलाओं से बोले मुख्यमंत्री- गर्मी में अपना और परिवार का विशेष ध्यान रखिए मुख्यमंत्री ने 'जनता दर्शन' में आईं महिलाओं की समस्याएं सुनीं, उनका हालचाल जाना, फिर उनसे संवाद भी किया। उन्होंने महिलाओं से कहा कि गर्मी बहुत पड़ रही है। ऐसे में अपना और परिवार के बुजुर्गों, बच्चों, पुरुषों का ध्यान रखें। इस समय अकारण बाहर निकलने से बचें और खानपान पर विशेष ध्यान दें।