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लखनऊ में युवती से दुष्कर्म और ब्लैकमेल का आरोप, पुलिस पर भी लापरवाही के आरोप

लखनऊ यूपी के लखनऊ में चिनहट इलाके में शादीशुदा मुस्लिम युवक आमिर ने अपना नाम राजू बताकर हिन्दू युवती को प्रेमजाल में फंसाया। उसे शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करता रहा। अश्लील वीडियो बना लिया। आरोपी के धर्म का पता चलने पर पीड़िता ने दूरी बना ली। इस पर आरोपी ने वीडियो वायरल करने धमकी देकर उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। धर्म बदलकर शादी करने का दबाव बनाया। जब युवती नहीं मानी तो वीडियो डिलीट करने के एवज में घर बुलाकर 25 हजार रुपए वसूले । चिनहट निवासी युवती (20) के मुताबिक कुछ समय पहले उसकी मुलाकात एक युवक से हुई। उसने खुद का नाम राजू बताया था। युवती के मुताबिक राजू हाथ में कलावा पहनता, तिलक भी लगाता था। राजू ने युवती को प्रेमजाल में फंसाया और शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया। इसी बीच अश्लील वीडियो भी चोरी छिपे बना लिए। कुछ दिन बाद पीड़िता को पता चला कि राजू मुस्लिम है। उसका नाम राजू नहीं, बल्कि आमिर है। इस पर पीड़िता ने उससे दूरी बना ली। दूरी बनाने पर आरोपी आमिर ने युवती के चुपके से बनाए अश्लील वीडियो वॉयरल करने की धमकी दी। ब्लैकमेल करते हुए युवती पर फिर से यौन शोषण का दबाव बनाया। यही नहीं पीड़िता से धर्म परिवर्तन कर निकाह करने की बात कही। पीड़िता ने उसे साफतौर पर मना कर दिया। वीडियो डिलीट करने के लिए घर बुलाकर पीटा आरोपी आमिर ने पीड़िता को अश्लील वीडियो, फोटो डिलीट करने की बात कह 10 मई को अपने घर बुलाया। वीडियो डिलीट करने के एवज में 25 हजार रुपए भी वसूल लिए। रुपए देने के बाद पीड़िता ने जब वीडियो डिलीट करने की बात कही तो आमिर ने उसे घर में पीटा। शोर होने पर आरोपी के माता, पिता, भाई और बहन भी आ गए। आरोप है कि उन लोगों ने भी आमिर के साथ मिलकर उसे पीटा, जिससे उसे काफी चोट आई है। आरोपी आमिर की पहले ही शादी हो चुकी है। तकरोही चौकी पर पुलिस वालों ने नहीं की कार्रवाई आरोपियों के चंगुल से किसी तरह से छूटकर पीड़िता चिनहट थाने के तहत तकरोही पुलिस चौकी पहुंची। चौकी पर पुलिस वालों को पूरा मामला बताया। अपनी शिकायत दर्ज करने को कहा। पीड़िता का आरोप है कि तकरोही चौकी के पुलिस वालों ने कार्रवाई करने के बजाए उसे टरका दिया। पीड़िता चौकी से निकल गई। बाद में वह किसी तरह से डीसीपी पूर्वी दीक्षा शर्मा से मिली। डीसीपी पूर्वी ने चिनहट पुलिस को फटकार लगाई। तुरंत एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर तेज रफ्तार का कहर, दंपती समेत 5 लोगों ने गंवाई जान

आजमगढ़  आजमगढ़ के कंधरापुर थाना क्षेत्र में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर शनिवार शाम एक भीषण सड़क हादसे में दंपती समेत पांच लोगों की जान चली गई। हादसा सियरहा गांव के पास माइलस्टोन 238 के निकट हुआ, जहां तेज रफ्तार कार आगे चल रहे कंटेनर में पीछे से जा घुसी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कार में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया घटना की सूचना मिलते ही कंधरापुर और कोतवाली पुलिस के साथ यूपीडा की राहत टीम मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद कार में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक पांचों की मौत हो चुकी थी। हादसे के बाद कुछ देर तक एक्सप्रेस-वे पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और राहत-बचाव कार्य के चलते अन्य वाहनों को भी रोका गया।  

NEET Paper Leak: बिवाल परिवार कनेक्शन से IMS-BHU तक जांच का दायरा बढ़ा

बनारस नीट पेपर लीक प्रकरण में आईएमएस बीएचयू के दो और छात्रों पर शक की सुई घूम रही है। ये दोनों छात्र सीकर के उसी कोचिंग से जुड़े बताए जा रहे हैं, जहां कथित तौर पर बिवाल परिवार के बच्चों ने भी तैयारी की थी। इन्होंने सत्र 2025-26 में आईएमएस बीएचयू में प्रवेश लिया है। इनमें एक छात्र एमबीबीएस, जबकि छात्रा बीएएमएस कर रही है। केंद्र सरकार ने आईएमएस बीएचयू समेत मेडिकल कॉलेजों से संदिग्ध छात्रों की जानकारी भी मांगी है। सूत्रों के अनुसार बिवाल परिवार के छात्र जिस कोचिंग सेंटर में पढ़ते थे, उसने अपने प्रचार में यह दावा किया था कि छात्र का चयन नहीं हुआ तो फीस वापस होगी। इसी कोचिंग सेंटर से जुड़ी दो छात्राओं और एक छात्र का दाखिला पिछले साल आईएमएस बीएचयू में हुआ है। सीबीआई की कार्रवाई से आईएमएस-बीएचयू सतर्क नीट पेपर लीक प्रकरण में सीबीआई की संभावित कार्रवाई को देखते हुए आईएमएस-बीएचयू प्रशासन भी सतर्क हो गया है। बताया जा रहा है कि संस्थान ने संदिग्ध छात्रों की प्रवेश संबंधी फाइलें और दस्तावेज अलग से निकाल लिए हैं, ताकि जांच एजेंसियों के मांगने पर उन्हें तुरंत उपलब्ध कराया जा सके। हालांकि विवि की ओर से अब तक इस बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियां अब केवल कथित पेपर लीक तक सीमित न रहकर उन शैक्षणिक नेटवर्कों की भी जांच कर रही हैं। क्या है पूरा मामला सीबीआई ने जयपुर के बिवाल परिवार के दो भाइयों और भतीजे को नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार कर लिया है। इनके परिवार के पांच बच्चों का दाखिला पिछले साल अलग-अलग सरकारी मेडिकल कॉलेज में हुआ है। इसमें एक आरोपी दिनेश की बेटी का दाखिला आईएमएस बीएचयू के आयुर्वेद संकाय में हुआ था। अभी ये छात्रा यहां पर पढ़ाई कर रही है। परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोग निकले सरगना सीबीआई की जांच में सामने आया है कि केमिस्ट्री-बायोलॉजी पर्चा लीक का स्रोत परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोग ही थे। सीबीआई ने देशभर के छह और स्थानों पर छापेमारी की है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, लैपटॉप, बैंक स्टेटमेंट और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच जारी है। अब तक मामले में कुल नौ गिरफ्तारी हुई है। एनटीए में चार नए अफसरों की नियुक्ति एनटीए में शनिवार को दो संयुक्त सचिवों व दो संयुक्त निदेशकों की नियुक्ति की गई। आईएसएस 1998 बैच की अधिकारी अनुजा बापट और आईआरएस 2004 बैच की अधिकारी रुचिता विज संयुक्त सचिवों होंगी।

वर्दी में रील बनाने वाले पुलिसकर्मियों पर गिरेगी गाज, DGP मुख्यालय का सख्त आदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश पुलिस में वर्दी पहनकर सोशल मीडिया पर रील्स बनाने और आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने वाले पुलिसकर्मियों पर अब पुलिस मुख्यालय ने पूरी तरह शिकंजा कस दिया है. डीजीपी मुख्यालय की मंजूरी के बाद अपर पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) अमिताभ यश ने एक बेहद कड़ा और महत्वपूर्ण आधिकारिक पत्र जारी किया है. इस आदेश के तहत, सोशल मीडिया पॉलिसी-2023 का उल्लंघन करने वाले सेवारत और प्रशिक्षु (ट्रेनी) पुलिसकर्मियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ तत्काल कड़ी विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं. अपर पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) अमिताभ यश द्वारा जारी किए गए पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि पूर्व में जारी की गई 'सोशल मीडिया पॉलिसी-2023' के बावजूद कई पुलिसकर्मियों द्वारा लगातार इसका उल्लंघन किया जा रहा है.  पत्र में कहा गया है, "यह देखने में आ रहा है कि कई सेवारत एवं प्रशिक्षु पुलिस कर्मियों द्वारा सोशल मीडिया पर रील इत्यादि के माध्यम से आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की जा रही है. इससे न केवल शासकीय कार्य प्रभावित हो रहा है, अपितु उत्तर प्रदेश पुलिस की गरिमा एवं छवि भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रही है." हर महीने भेजी जाएगी रिपोर्ट, URL का भी रखा जाएगा रिकॉर्ड इस अनुशासनहीनता को रोकने के लिए पुलिस मुख्यालय ने एक फुल-प्रूफ प्लान तैयार किया है. सभी विभागाध्यक्षों और कार्यालय प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने अधीन जिलों और इकाइयों में सोशल मीडिया पॉलिसी का उल्लंघन करने वाले पुलिसकर्मियों को तुरंत चिन्हित किया जाए. चिन्हित किए गए कर्मियों के खिलाफ बिना किसी ढिलाई के तत्काल आवश्यक विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. इसके अलावा प्रत्येक माह निर्धारित प्रोफॉर्मा के अनुसार, उल्लंघन करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट अधोहस्ताक्षरी (मुख्यालय) को भेजी जाए. तत्काल प्रभाव से लागू हुआ आदेश सख्त निगरानी के आदेश में कहा गया है कि संबंधित आपत्तिजनक पोस्ट या वायरल रील के URL लिंक सहित पूरा रिकॉर्ड साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखा जाए. यह कड़ा पत्र पुलिस महानिदेशक (DGP) उत्तर प्रदेश के अनुमोदन के बाद 15 मई 2026 को आधिकारिक रूप से निर्गत किया गया है. अधिकारियों को साफ कर दिया गया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली फोर्स में इस तरह की अनुशासनहीनता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इस आदेश के बाद अब सोशल मीडिया पर 'स्टारडम' चमकाने वाले पुलिसकर्मियों में हड़कंप मचना तय माना जा रहा है.

हाई कोर्ट आदेश पर विवाद: 72 की जगह 240 वकील चैंबर तोड़े जाने का आरोप

लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ में प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है. यहां सिविल कोर्ट के बाहर वकीलों के चैंबरों पर बुलडोजर चला दिया गया. दूसरी तरफ इस दौरान वकील विरोध में खड़े थे. वकीलों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की. यहां नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची थी और कई चैंबरों को हटाना शुरू कर दिया. मामला पुराने हाई कोर्ट और स्वास्थ्य भवन चौराहे के बाहर बने वकीलों के चैंबरों का है. सुबह नगर निगम और पुलिस की टीम अचानक मौके पर पहुंची. कुछ ही देर में बुलडोजर ने सड़क किनारे बने चैंबरों को तोड़ना शुरू कर दिया. प्रशासन का कहना था कि ये निर्माण अवैध थे और अतिक्रमण हटाने के तहत कार्रवाई की जा रही है. लेकिन जैसे-जैसे बुलडोजर आगे बढ़ा, विरोध भी तेज हो गया. मौके पर पहुंचे वकीलों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने हाई कोर्ट के आदेश का गलत इस्तेमाल किया. अधिवक्ताओं का कहना है कि अदालत ने केवल 72 चैंबर हटाने का निर्देश दिया था, लेकिन नगर निगम और पुलिस ने उसी आदेश की आड़ में करीब 240 चैंबर गिरा दिए. पुराने हाई कोर्ट परिसर के बाहर वर्षों से वकीलों के छोटे-छोटे चेंबर बने हुए थे. इन्हीं में बैठकर अधिवक्ता अपने मुवक्किलों से मिलते और केस से जुड़ा कामकाज करते थे. वकीलों का कहना है कि अचानक कार्रवाई से उनके काम पर असर पड़ा है. बुलडोजर चलने के दौरान कई वकील विरोध जताने लगे, नारेबाजी हुई, प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन हुआ और कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण बन गया. हालात को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया. नगर निगम अधिकारियों ने दावा किया कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और अवैध कब्जा हटाना जरूरी था. लेकिन अधिवक्ताओं का सवाल है कि अगर कोर्ट ने 72 चैंबर हटाने को कहा था, तो उससे तीन गुना ज्यादा ढांचे क्यों गिराए गए? लखनऊ में यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब शहर में अतिक्रमण हटाने के नाम पर कई जगह बुलडोजर अभियान चल रहा है. फिलहाल कार्रवाई को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है. अधिवक्ताओं ने कहा है कि वे इस कार्रवाई के खिलाफ आगे भी आवाज उठाएंगे. दूसरी तरफ प्रशासन अपनी कार्रवाई को सही बता रहा है. इस कार्रवाई के बाद कोर्ट परिसर के आसपास माहौल तनावपूर्ण बना रहा. वकीलों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा. पुलिस ने मौके पर अतिरिक्त बल तैनात रखा.

गंगा एक्सप्रेसवे पर मुफ्त यात्रा खत्म, बाइक सवारों को देना होगा इतना टोल

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे पर अब यात्रियों को सफर के लिए टोल टैक्स देना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले महीने उद्घाटन किए गए इस एक्सप्रेसवे पर शुरुआती दिनों में लोगों को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई थी, लेकिन अब यह छूट खत्म हो गई है। करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाता है और प्रदेश के कई बड़े जिलों को जोड़ता है। एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद 15 मई तक वाहनों से कोई शुल्क नहीं लिया गया, लेकिन अब यूपीडा (UPEDA) की ओर से टोल दरें लागू कर दी गई हैं। जारी दरों के मुताबिक, दोपहिया वाहन, तीन पहिया और ट्रैक्टर चालकों को प्रति किलोमीटर 1.28 रुपये टोल देना होगा। वहीं कार, जीप, वैन और अन्य हल्के मोटर वाहनों के लिए यह शुल्क 2.50 रुपये प्रति किलोमीटर तय किया गया है। सरकार का दावा है कि गंगा एक्सप्रेसवे से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा का समय काफी कम होगा और व्यापार, पर्यटन व परिवहन को नई रफ्तार मिलेगी। हालांकि टोल लागू होने के बाद अब यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ भी बढ़ेगा। गौरतलब है कि मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के 12 जनपदों को जोड़ता है और इसे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। 15 दिन की टोल छूट दी गई थी। अब इस जाने वाले को टोल देना होगा।

लखनऊ बनेगा सबसे बड़ा इंटरचेंज, 32 हजार करोड़ की रैपिड रेल परियोजना को मिली रफ्तार

लखनऊ उत्तर प्रदेश कैपिटल रीजन (यूपीएससीआर) का प्रस्ताव अब आकार लेने लगा है। लखनऊ, उन्नाव, बाराबंकी, सीतापुर हरदोई तथा रायबरेली को जोड़कर बनाए जा रहे एससीआर में परिवहन की अत्याधुनिक सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। इसके लिए कानपुर, उन्नाव लखनऊ और अयोध्या को जोड़ने के लिए एससीआर में हाई-स्पीड रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम परियोजना का प्रस्ताव दिया गया है। 14 मई को यूपी एससीआर का प्रस्ताव तैयार करने वाली संस्था ने एलडीए में इसका प्रजेंटेशन किया। उसने शहरों की बेहतर कनेक्टिविटी के लिए हाई स्पीड रैपिड रेल का प्रस्ताव किया गया है। 187 किमी लम्बा होगा कॉरिडोर, कानपुर से अयोध्या 90 मिनट में पहुंचाएगी चारों शहरों के बीच प्रस्तावित रैपिड रेल कानपुर के नया गंज से शुरू होगी। जो उन्नाव लखनऊ, रायबरेली होते हुए अयोध्या तक जाएगी। कॉरिडोर की कुल लम्बाई 187 किलोमीटर है। यह मात्र 90 मिनट में ही कानपुर से अध्योध्या पहुंचा देगी। कुल 12 स्टेशन बनाए जाएंगे। औद्योगिक और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देगा करीब 187 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में पहले चरण में नयागंज से अमौसी तक लगभग 67 किमी का नमो भारत सेक्शन विकसित होगा। दूसरे चरण में इसे अमौसी से अयोध्या तक जोड़ा जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना का उद्देश्य केवल तेज यात्रा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में आर्थिक, औद्योगिक और पर्यटन गतिविधियों को नई गति देना भी है। इससे राजधानी क्षेत्र में रोजाना आने-जाने वाले लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। परियोजना पर खर्च होंगे 32 हजार करोड़ रुपये इस परियोजना के विकास पर कुल 32 हजार करोड़ रुपये खर्च होगा। परियोजना को एनसीआरटीसी और उत्तर प्रदेश सरकार मिलकर विकसित करेंगे। प्रस्ताव यूपी एससीआर के तहत तैयार किया गया है। 14 मई को एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार की अध्यक्षता में हुई एससीआर की बैठक में प्रस्ताव तैयार करने वाली कंपनी एईकॉम ने इसका विस्तृत प्रेजेंटेशन किया। इन स्थानों पर बनाए जाएंगे 12 स्टेशन परियोजना के नक्शे के अनुसार कॉरिडोर के स्टेशन नयागंज, उन्नाव, बशीरतगंज, नवाबगंज, बंथरा, अमौसी, सुशांत गोल्फ सिटी, जुग्गौर, बरेल, सफदरगंज, भिटारिया और अयोध्या में बनेंगे। जुग्गौर को इंस्टीट्यूशनल डिस्ट्रिक्ट, गोल्फ सिटी को प्रीमियम नेबरहुड, नयागंज व बंथरा को लॉजिस्टिक डिस्ट्रिक्ट, अमौसी को एयरो-हब डिस्ट्रिक्ट, नवाबगंज व अयोध्या को पर्यटन हब, सफदरगंज को कृषि आधारित इंडस्ट्रियल डिस्ट्रिक्ट के रूप में विकसित करने की तैयारी है। लखनऊ बनेगा सबसे बड़ा इंटरचेंज इस परियोजना में लखनऊ को सबसे महत्वपूर्ण रीजनल इंटरचेंज के रूप में विकसित करने की तैयारी है। राजधानी से कानपुर, बाराबंकी और अयोध्या की कनेक्टिविटी अत्यधिक तेज हो जाएगी। इससे नौकरी, व्यापार, शिक्षा और पर्यटन के लिए यात्रा करने वालों को बड़ा लाभ मिलने की बात रिपोर्ट में कही गई है। बैठक में एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बेहतर मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी, स्टेशन क्षेत्रों के सुव्यवस्थित विकास को लेकर अतिरिक्त सुझाव भी दिए।

अंशकालिक अनुदेशकों के लिए खुशखबरी, सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री करेंगे मानदेय बढ़ोतरी का ऐलान

अंशकालिक अनुदेशकों का सम्मान समारोह आज , मुख्यमंत्री करेंगे बढ़े मानदेय वितरण का शुभारंभ लोकभवन से सीएम योगी करेंगे कार्यक्रम की अध्यक्षता, सभी जिलों में होगा लाइव प्रसारण प्रत्येक जनपद में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में वितरित होंगे चेक राज्यस्तरीय समारोह के साथ ही जिलाधिकारियों को भव्य आयोजन और प्रचार-प्रसार करने के निर्देश लखनऊ  प्रदेश सरकार अंशकालिक अनुदेशकों के सम्मान और उनके बढ़े हुए मानदेय वितरण को लेकर रविवार 17 मई को पूरे उत्तर प्रदेश में भव्य कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है। राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अंशकालिक अनुदेशकों के सम्मान एवं बढ़े हुए मानदेय वितरण कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम सायं 4 बजे से आयोजित होगा। सरकार द्वारा पूर्व में जारी शासनादेश के तहत अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि का निर्णय लिया गया था। बढ़ा हुआ मानदेय 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी किया गया है। इसी के तहत अब प्रदेशभर में प्रतीकात्मक चेक वितरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस संबंध में बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। निर्देशों में कहा गया है कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाले कार्यक्रम के समानांतर सभी जिलों में भी भव्य आयोजन सुनिश्चित किए जाएं। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री, सांसद, विधायक, अन्य जनप्रतिनिधि, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जिला स्तरीय अधिकारियों की सहभागिता रहेगी। जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए। जिला स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में शिक्षकों, अंशकालिक अनुदेशकों और आमजन की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्यक्रम के समापन के बाद जिलों में जनप्रतिनिधियों द्वारा अंशकालिक अनुदेशकों को बढ़े हुए मानदेय के प्रतीकात्मक चेक वितरित किए जाएंगे। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम और जनप्रतिनिधियों के संबोधन भी आयोजित होंगे।

आयुष्मान कार्ड न होने पर भी नहीं रुकेगा इलाज, सीएम योगी का बड़ा भरोसा

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान शनिवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। सीएम योगी ने गंभीर बीमारियों के इलाज में मदद की गुहार लेकर आए लोगों को उन्होंने आश्वस्त किया और इलाज कराने के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से धनराशि देने की बात कही। सीएम योगी ने कहा, जिन लोगों के आयुष्मान कार्ड नहीं बने होंगे उनके कार्ड बनवाए जाएंगे गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित जनता दर्शन के दौरान सीएम योगी करीब 200 लोगों से मिले। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगो तक जाकर उनकी समस्याओं को सुना। उनके प्रार्थना पत्र लिए और पास में खड़े अधिकारियों को समस्या समाधान हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अलग-अलग मामलों से जुड़ी समस्याओं के निस्तारण के लिए उन्होंने संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र संदर्भित कर निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और संतोषप्रद होना चाहिए। जरूरतमंदों का आयुष्मान कार्ड बनवाने के निर्देश जनता दर्शन में कई लोग गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद का अनुरोध करने आए थे। एक महिला ने अपने बच्चे के इलाज में आर्थिक दिक्कत और आयुष्मान कार्ड न होने की समस्या बताई। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि चिंता मत करिए। बच्चे का इलाज जरूर होगा। आयुष्मान कार्ड बनवाएंगे और विवेकाधीन कोष से इलाज में आर्थिक सहायता देंगे। एक अन्य महिला को भी उन्होंने इन्हीं शब्द भावों का आत्मीय संबल दिया। इस्टीमेट शासन को उपलब्ध कराएं अफसर इलाज संबंधी प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए सीएम योगी ने कहा कि इस्टीमेट की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कर शासन को उपलब्ध करा दें। अपराध व जमीन कब्जा किए जाने से संबंधी शिकायतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस अधिकारियों को अपराधियों व भू माफिया के खिलाफ सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए। जनता दर्शन में कुछ महिलाएं अपने बच्चों को लेकर आई थीं। मुख्यमंत्री ने इन बच्चों को खूब दुलारा और चॉकलेट के साथ आशीर्वाद दिया।

जल संरक्षण एवं कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम, किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही ‘खेत तालाब योजना

किसानों की समृद्धि का आधार बनी योगी सरकार की योजना, डिजिटल पारदर्शी व्यवस्था से किसानों को सीधा लाभ जल संरक्षण एवं कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम, किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही  ‘खेत तालाब योजना योजना के तहत सरकार दे रही ₹52,500 का अनुदान, ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग के आधार पर किसानों का चयन    खेत तालाब से किसान कर रहे मत्स्य पालन, मोती, सिंघाड़ा उत्पादन एवं अन्य जलीय खेती ‘खेत तालाब योजना’ से जल संरक्षण को मिला बढ़ावा, किसानों को मिल रहे सिंचाई के साथ अतिरिक्त आय के स्रोत  लखनऊ  योगी आदित्यनाथ  के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए महत्वकांक्षी योजनाएं चला रही है। सरकार का प्रयास है कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि समृद्ध और आत्मनिर्भर उद्यमी भी बनें। साथ ही योगी सरकार किसान को खेती तक सीमित नहीं, बल्कि उनको आधुनिक तकनीक, जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं और अतिरिक्त आय के स्रोतों से भी जोड़ रही है। इसी क्रम में ‘खेत तालाब योजना’ किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। यह योजना जल संरक्षण और कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। ‘खेत तालाब योजना’ से जल संरक्षण को मिल रहा बढ़ावा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत संचालित ‘खेत तालाब योजना’ का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का संचयन कर किसानों को सिंचाई के लिए स्थायी सुविधा उपलब्ध कराना है। आज के समय में भूगर्भ जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, ऐसे में खेत तालाब योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। खेतों में बनाए जाने वाले तालाब वर्षा के पानी को संरक्षित करते हैं, जिससे सूखे के समय भी किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहता है। आधी लागत सरकार वहन कर रही  इस योजना के तहत 22 मीटर × 20 मीटर × 3 मीटर आकार का तालाब बनाया जाता है। इसकी कुल लागत ₹1,05,000 निर्धारित की गई है, जिसमें सरकार द्वारा ₹52,500 का अनुदान दिया जाता है। यानी किसान को आधी लागत सरकार वहन कर रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी इस योजना का लाभ आसानी से मिल पा रहा है। सिंचाई के साथ अतिरिक्त आय के अवसर यह योजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय के नए अवसर भी प्रदान कर रही है। खेत तालाब में किसान मत्स्य पालन, मोती उत्पादन, सिंघाड़ा उत्पादन और अन्य जलीय खेती कर सकते हैं। इससे किसानों की आय के कई स्रोत विकसित हो रहे हैं। प्रदेश सरकार आधुनिक सिंचाई व्यवस्था को भी बढ़ावा दे रही है। योजना के अंतर्गत स्प्रिंकलर सेट पर 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। वहीं पम्पसेट पर ₹15,000 अथवा 50 प्रतिशत तक की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसानों की सिंचाई लागत कम हो रही है और जल का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो रहा है। पारदर्शी व्यवस्था से किसानों को सीधा लाभ सरकार ने इस योजना में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की है। किसानों का चयन ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग के आधार पर ‘प्रथम आवक प्रथम पावक’ यानी पहले आओ-पहले पाओ के सिद्धांत पर किया जाएगा। इससे किसी प्रकार की सिफारिश या भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त हो रही है और पात्र किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। इससे किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से उन्हें सुविधा मिल रही है। आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में बड़ा कदम- आर.पी. कुशवाहा कानपुर नगर के भूमि संरक्षण अधिकारी, आर.पी. कुशवाहा ने बताया कि प्रदेश सरकार कृषि को आत्मनिर्भर और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। जल संरक्षण के माध्यम से खेती को सुरक्षित बनाना, किसानों को आधुनिक सिंचाई प्रणाली से जोड़ना और खेती के साथ मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देना सरकार की दूरदर्शी नीति को दर्शाता है। आज प्रदेश के हजारों किसान इस योजना का लाभ लेकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। खेत तालाब बनने से फसलों की उत्पादकता बढ़ रही है और किसानों को मौसम पर निर्भरता कम करनी पड़ रही है।  अनुदान दो चरणों में मिलेगाः 1. पहली किस्तः तालाब की खुदाई का काम पूरा होने पर। 2. दूसरी किस्तः पानी आने का रास्ता (इनलेट) और डिस्प्ले बोर्ड लगने के बाद। 3. जरूरी दस्तावेज: आवेदन के लिए किसान की 'फार्मर रजिस्ट्री होना अनिवार्य है। 4. टोकन मनीः ऑनलाइन आवेदन के साथ 1000 रुपये की टोकन राशि जमा करनी होगी, जो वापस मिलेगी। 5. वेबसाइटः इच्छुक किसान कृषि विभाग के पोर्टल Agri darshan पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। 6. समय सीमाः बुकिंग के 15 दिन के भीतर सत्यापन होगा और 30 दिन के भीतर तालाब तैयार करना होगा।