samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री ने दो दिवसीय राज्य स्तरीय तिलहन किसान मेले का किया शुभारंभ

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र में दो दिवसीय राज्य स्तरीय तिलहन किसान मेले का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर किसानों को दी जा रही आधुनिक कृषि तकनीकों और तिलहन उत्पादन बढ़ाने के उपायों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर महाविद्यालय परिसर में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत साल का पौधा रोपित किया और पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण करने की अपील की।      कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, जहां लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों से धान की खरीदी 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से 3100 रुपये में कर रही है तथा अंतर की राशि का भुगतान भी एकमुश्त किया जा रहा है।  साय ने कहा कि पिछले 2 वर्षों से हमारी सरकार किसानों से किया हर एक वादा पूरा कर रही है। उन्होंने किसानों से संवाद कर होली के पूर्व धान के अंतर की राशि का भुगतान तथा योजनाओं का लाभ मिलने की जानकारी भी ली।        मुख्यमंत्री ने कहा कि देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुका है, लेकिन तिलहन उत्पादन में अभी भी कमी है। वर्तमान में देश अपनी आवश्यकता का लगभग 57 प्रतिशत ही तिलहन उत्पादन कर पा रहा है, शेष 43 प्रतिशत आयात करना पड़ता है। इस कमी को दूर करने के लिए तिलहन विकास परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे वैज्ञानिकों के सुझावों को अपनाकर तिलहन उत्पादन बढ़ाएं। उन्होंने जानकारी दी कि कृषक उन्नति योजना की तर्ज पर तिलहन फसलों के लिए प्रति एकड़ 11 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे सहायक व्यवसायों को अपनाकर आय बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि जीएसटी में सुधार के बाद कृषि यंत्रों की कीमतों में कमी आई है, जिससे किसानों को लाभ मिल रहा है। कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है। उन्होंने किसानों से दलहन एवं तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया।          कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने तिलहन विकास कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि किसानों को विश्वविद्यालय के माध्यम से उन्नत बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राज्य में संचालित 28 कृषि महाविद्यालयों, 27 कृषि विज्ञान केंद्रों एवं अनुसंधान संस्थानों के जरिए हर वर्ष लगभग 50 हजार किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस अवसर पर मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद  चिंतामणि महाराज, विधायक  प्रबोध मिंज, विधायक  रामकुमार टोप्पो, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष  विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर  मंजूषा भगत, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष  राम किशुन सिंह, सभापति  हरविंदर सिंह,  राम लखन पैंकरा, संभाग आयुक्त  नरेंद्र कुमार दुग्गा, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

नगर निगम अपर आयुक्त विनोद पाण्डेय ने जोन 8 में राजस्व वसूली की गहन समीक्षा की

नगर निगम अपर आयुक्त विनोद पाण्डेय ने जोन 8 में राजस्व वसूली की गहन समीक्षा की सभी एआरआई जोन 8 के सभी 7 वार्डों के घर – घर, दुकान – दुकान जाकर फील्ड में उतरकर राजस्व वसूली करें, कोई भी घर, कोई भी  दुकान 31 मार्च 2026 तक राजस्व वसूली से छूटने ना पाए रायपुर  आज रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त विश्वदीप के आदेशानुसार नगर निगम अपर आयुक्त विनोद पाण्डेय ने नगर निगम जोन 8 महोबा बाजार पहुंचकर जोन 8 के सभी 7 वार्डों में राजस्व वसूली अभियान की गहन समीक्षा नगर निगम जोन 8 जोन कमिश्नर श्रीमती राजेश्वरी पटेल और जोन सहायक राजस्व अधिकारी महादेव रक्सेल एवं सभी राजस्व निरीक्षकों और सहायक राजस्व निरीक्षकों की उपस्थिति में की. अपर आयुक्त विनोद पाण्डेय ने दिए गए निर्धारित लक्ष्य अनुसार 31 मार्च 2026 तक शत – प्रतिशत राजस्व वसूली करना नगर निगम हित में सर्वोच्च प्राथमिकता से हर हाल में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. अपर आयुक्त ने जोन 8 के अंतर्गत सभी 7 वार्डों के प्रत्येक घर और प्रत्येक दुकान में जाकर घर – घर और दुकान – दुकान फील्ड में उतरकर नगर निगम जोन 8 राजस्व विभाग के लिए राजस्व वसूली करने सभी सहायक राजस्व निरीक्षकों को निर्देशित किया. अपर आयुक्त ने निर्देश दिए कि 31 मार्च तक जोन 8 अंतर्गत किसी भी वार्ड में कोई भी घर और कोई भी दुकान राजस्व वसूली से छूटने ना पाए , यह सभी सहायक राजस्व निरीक्षक हर हाल में नगर निगम हित में सुनिश्चित करें.

रोमांच का महासंग्राम: गंगरेल में होगी महानदी रिवर बोट चैंपियनशिप, 52 टीमें करेंगी मुकाबला

धमतरी छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के लिए कल का दिन ऐतिहासिक बनने जा रहा है. पहली बार गंगरेल बांध की शांत जलधारा पर ‘गंगरेल नौकायान उत्सव’ के अंतर्गत भव्य महानदी रिवर बोट चैंपियनशिप का आयोजन किया जा रहा है. यह रोमांचक प्रतियोगिता, 22 मार्च रविवार को दोपहर 3:00 बजे से प्रारंभ होगी, जिसका जिलेवासियों को बेसब्री से इंतजार है. आयोजन स्थल पर उत्साह और उमंग का माहौल देखते ही बन रहा है. प्रतियोगिता में 52 टीमें होंगी शामिल जानकारी के अनुसार इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में धमतरी सहित आस पास के जिलों की कुल 52 टीमें हिस्सा ले रही हैं. प्रतियोगिता की शुरुआत मचान हाट प्वाइंट से शुरू होगी और गंगरेल ब्लू एडकेचर स्पोर्टस प्वाइंट में समाप्त की जाएगी. सभी टीमें 1000 मीटर की चुनौतीपूर्ण दूरी में अपनी क्षमता और तालमेल का प्रदर्शन करेंगी. तैयारियां लगभग अंतिम दौर में है. मुख्य अतिथि लोकसभा सांसद महासमुंद रूपकुमारी चौधरी होंगी. महिला शक्ति की सशक्त भागीदारी बनी आकर्षण का केंद्र इस आयोजन की सबसे विशेष और प्रेरणादायक बात यह है कि ग्रामीण अंचल की तीन महिला टीमें भी पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रतियोगिता में भाग ले रही हैं. ग्राम लिर्रा, जिला धमतरी की चयन बाई, सुमन और दिनेश्वरी निधार अपनी पारंपरिक लकड़ी की नाव के साथ इस प्रतियोगिता में शामिल होकर न केवल प्रतिस्पर्धा को रोचक बनाएंगी, बल्कि महिला सशक्तिकरण का भी सशक्त संदेश देती नजर आएंगी. सीमित संसाधनों के बावजूद उनका यह साहस और जज्बा सभी के लिए प्रेरणास्रोत है. पर्यटन और स्थानीय प्रतिभा को मिलेगा मंच इस अनूठे आयोजन का उद्देश्य गंगरेल बांध को प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में स्थापित करना, जल पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना है. प्रतियोगिता के माध्यम से जिले की प्राकृतिक सुंदरता और संभावनाओं को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है. आकर्षक पुरस्कारों से बढ़ेगा उत्साह प्रतियोगिता में विजेताओं के लिए आकर्षक नगद पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं. प्रथम पुरस्कार : 1,00,000 रुपये द्वितीय पुरस्कार : 50,000 रुपये तृतीय पुरस्कार : 25,000 रुपये इसके अतिरिक्त बोट सजावट और वेशभूषा प्रतियोगिता के लिए 11,000 रुपये का विशेष पुरस्कार भी रखा गया है, जिससे प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा. कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने इस ऐतिहासिक अवसर पर जिले के समस्त अधिकारियों, कर्मचारियों, युवाओं, खेल प्रेमियों और आमजन से अधिक से अधिक संख्या में आयोजन स्थल पर पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है. उन्होंने कहा कि गंगरेल नौकायान उत्सव धमतरी की नई पहचान बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का माध्यम है. विशेष रूप से महिला टीमों की भागीदारी इस आयोजन को और अधिक गौरवपूर्ण बनाती है. सभी नागरिकों से आग्रह है कि वे पूरे उत्साह के साथ इस आयोजन का हिस्सा बनें और सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए इसे सफल बनाएं. धमतरी की पहचान बनेगा यह आयोजन‘महानदी रिवर बोट चैंपियनशिप’ केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि धमतरी जिले के पर्यटन, संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का उत्सव है. गंगरेल बांध की लहरों पर आज रोमांच, प्रतिस्पर्धा और उत्सव का अनूठा संगम देखने को मिलेगा, जो निश्चित रूप से जिले की पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा.

नौकरी का सुनहरा मौका: रायपुर प्लेसमेंट कैंप में अर्बन प्रमोटर-टेक्नीशियन के पदों पर भर्ती

रायपुर. नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए बड़ा मौका है। जिला रोजगार कार्यालय रायपुर द्वारा 23 मार्च को सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक प्लेसमेंट कैंप आयोजित किया जाएगा, जिसमें 100 से अधिक पदों पर भर्ती की जाएगी। इस जॉब फेयर में 10वीं पास सहित 12वीं, स्नातक और स्नातकोत्तर अभ्यर्थी भी शामिल हो सकते हैं। इस प्लेसमेंट कैंप में निजी क्षेत्र की कंपनी वोडाफोन आइडिया लिमिटेड द्वारा अर्बन प्रमोटर के 100 पदों पर भर्ती की जाएगी, जिसमें महिला और पुरुष दोनों आवेदन कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों को 10,000 से 20,000 रुपये तक मासिक वेतन दिया जाएगा। इसके अलावा पेस्ट कंट्रोल टेक्नीशियन के 5 पदों पर भी भर्ती होगी, जिसके लिए न्यूनतम योग्यता 8वीं पास निर्धारित है। 14,000 रुपये प्रतिमाह मिलेगा वेतन इन पदों के लिए 10,000 से 14,000 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलेगा। इच्छुक अभ्यर्थी अपने बायोडाटा, आधार कार्ड और शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की छायाप्रति के साथ निर्धारित समय पर कैंप में पहुंच सकते हैं। साथ ही इस जॉब फेयर में भाग लेने के लिए छत्तीसगढ़ ई-रोजगार पोर्टल e-rojgar.cg.gov.in पर पंजीयन अनिवार्य किया गया है।

सीएम विष्णु देव साय बस्तर में करेंगे राज्य की सबसे बड़ी हेरिटेज मैराथन की शुरुआत

सीएम विष्णु देव साय बस्तर में देंगे राज्य की सबसे बड़े ‘हेरिटेज मैराथन’ की सौगात बस्तर दौड़ेगा, देश जुड़ेगा’ की थीम पर 22 मार्च को होगा राज्य का सबसे बड़ा स्पोर्ट्स इवेंट फिटनेस और विरासत का उत्सव- बस्तर को ग्लोबल टूरिज्म मैप पर लाने की बड़ी तैयारी बस्तर को देश का प्रमुख टूरिज्म और स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन बनाना हमारा संकल्प-  साय रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में खेल, पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026’ का आयोजन रविवार 22 मार्च को करने जा रही है। यह राज्य का अब तक का सबसे बड़ा रनिंग इवेंट होगा, जिसकी शुरुआत जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान से होगी और समापन विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात पर होगा। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर इस रूट पर दौड़ते हुए प्रतिभागियों को बस्तर की अद्भुत वादियों और सांस्कृतिक पहचान का अनूठा अनुभव मिलेगा।            मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस आयोजन को छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि बस्तर हेरिटेज मैराथन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राज्य की समृद्ध परंपरा, प्राकृतिक संपदा और जनभागीदारी का उत्सव है। उन्होंने कहा कि ‘बस्तर दौड़ेगा, देश जुड़ेगा’ के संदेश के साथ यह आयोजन न केवल फिटनेस को बढ़ावा देगा, बल्कि बस्तर को राष्ट्रीय और अंतरर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को अवसर देना, रोजगार सृजन को बढ़ावा देना और क्षेत्रीय विकास को गति देना है।           मैराथन में 42 किलोमीटर (फुल मैराथन), 21 किलोमीटर (हाफ मैराथन), 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर (फन रन) की श्रेणियां रखी गई हैं, ताकि हर आयु वर्ग और फिटनेस स्तर के लोग इसमें भाग ले सकें। प्रतिभागियों के लिए कुल 25 लाख रुपये की आकर्षक पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है। पंजीकरण शुल्क मात्र 299 रुपये रखा गया है, जबकि बस्तर संभाग के सातों जिलों के प्रतिभागियों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है, जिससे स्थानीय स्तर पर अधिकतम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।           प्रतिभागियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मैराथन मार्ग पर व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। पूरे रूट पर नियमित अंतराल पर रिफ्रेशमेंट पॉइंट्स (आरपीएन) स्थापित किए जाएंगे, जहां एनर्जी ड्रिंक्स और पानी की उपलब्धता रहेगी। इसके अलावा मेडिकल सपोर्ट, इमरजेंसी सेवाएं और सुव्यवस्थित रूट मैनेजमेंट भी सुनिश्चित किया गया है ताकि प्रतिभागियों को सुरक्षित और सुगम अनुभव मिल सके। इस आयोजन को और यादगार बनाने के लिए प्रत्येक प्रतिभागी को फिनिशर मेडल, ई-सर्टिफिकेट और प्रोफेशनल रनिंग फोटोग्राफ्स प्रदान किए जाएंगे। साथ ही जुम्बा सेशन और लाइव डीजे जैसे आकर्षक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रतिभागियों में उत्साह और ऊर्जा बनी रहे।          ‘रन फॉर नेचर, रन फॉर कल्चर’ (प्रकृति के लिए दौड़ो, संस्कृति के लिए दौड़ो) की थीम पर आधारित यह मैराथन बस्तर की प्राकृतिक धरोहर और जनजातीय संस्कृति को देशभर के सामने प्रस्तुत करने का एक सशक्त माध्यम बनेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने देशभर के खिलाड़ियों, फिटनेस प्रेमियों और पर्यटकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि यह अवसर न केवल दौड़ने का है, बल्कि बस्तर को करीब से जानने और उसकी विरासत को महसूस करने का भी है। इच्छुक प्रतिभागी https://www.bastarheritage. run/registration लिंक के माध्यम से या आधिकारिक पोस्टर में दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर अपना पंजीकरण करा सकते हैं।            मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘फिट इंडिया’, ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ और देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के विजन से प्रेरित है। प्रधानमंत्री ने हमेशा भारत की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर दिया है। बस्तर हेरिटेज मैराथन उसी सोच को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है, जहां खेल, संस्कृति और प्रकृति एक साथ जुड़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार बस्तर को देश के प्रमुख पर्यटन और स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस तरह के आयोजनों से न केवल युवाओं में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। बस्तर के कारीगरों, कलाकारों और छोटे-छोटे व्यवसायों को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।          मुख्यमंत्री श्री साय ने देशभर के खिलाड़ियों, फिटनेस प्रेमियों और पर्यटकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह देश के हर कोने से युवाओं और नागरिकों को आमंत्रित करते हैं कि वे बस्तर आएं, यहां की प्रकृति, संस्कृति और ऊर्जा को महसूस करें और इस ऐतिहासिक मैराथन का हिस्सा बनें।

मासूम ने उठाया खौफनाक कदम: 10 साल की बच्ची की मौत के पीछे क्या है सच्चाई?

दुर्ग छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के जामुल थाना क्षेत्र से एक दुखद घटना सामने आई है, जहां गणेश नगर वार्ड-5 में रहने वाली 10 वर्षीय बच्ची गुरप्रीत कौर ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। जानकारी के अनुसार, गुरुवार 19 मार्च की शाम को खुशी का अपने बड़े भाई से किसी बात पर विवाद हुआ था। भाई की डांट से तनाव में आकर चौथी कक्षा की इस छात्रा ने कमरे में जाकर आत्मघाती कदम उठा लिया। ​घटना के समय घर में कोई बड़ा सदस्य मौजूद नहीं था। पिता पेशे से ड्राइवर हैं और मां ब्यूटी पार्लर गई हुई थी। शोर सुनकर जब पड़ोसी और परिजन पहुंचे तो बच्ची को तुरंत भिलाई के बीएम शाह अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जानकारी के मुताबिक, खुशी स्वामी आत्मानंद स्कूल जामुल की छात्रा थी। शुक्रवार को गमगीन माहौल में बच्ची का अंतिम संस्कार किया गया। फिलहाल जामुल पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

प्रॉपर्टी खरीदारों को राहत: 0.60% सेस हटाया, सरकार को 460 करोड़ का नुकसान

रायपुर. छत्तीसगढ़ में अपना घर बनाने या जमीन खरीदने का सपना देख रहे मध्यमवर्गीय परिवारों और किसानों के लिए साथ सरकार ने बड़ी राहत दी है. शुक्रवार को विधानसभा ने ‘छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया. अब अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगने वाला 0.60% सेस को खत्म कर दिया गया है. वाणिज्यिक कर मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि इस फैसले से जनता पर पड़ने वाला सालाना 460 करोड़ का बोझ कम होगा. 2023 में पूर्व कांग्रेस सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन’ और ‘राजीव गांधी मितान क्लब’ के संचालन के लिए स्टाम्प शुल्क पर 0.60% सेस लगाया था. चूंकि अब ‘मितान क्लब’ अस्तित्व में नहीं है और रोजगार योजनाओं का खर्च सामान्य बजट से दिया जा रहा है, इसलिए जनता पर यह “अनावश्यक बोझ लादे रखने का कोई औचित्य नहीं था. राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में वर्गमीटर आधारित मूल्यांकन को खत्म कर फिर से हेक्टेयर दर लागू कर दी है. इससे छोटे जमीन मालिकों को 300 से 400 करोड़ रुपए का लाभ होगा. साथ ही, कृषि भूमि पर ढाई गुना मूल्यांकन और पेड़ों के अलग से मूल्यांकन जैसे जटिल नियमों को भी विदा कर दिया गया है. जमीन-मकान की रजिस्ट्री अधिक किफायती होगी. आम जनता को मिलेगी राहत-चौधरी ओपी चौधरी ने बताया कि आम जनता को इससे बड़ी राहत मिलेगी. पंजीयन विभाग को अब ‘वीजा ऑफिस’ की तर्ज पर स्मार्ट बनाया जा रहा है. अब रजिस्ट्री होते ही बिना भटकते अपने आप नामांतरण हो जाएगा. अब तक 1.5 लाख लोगों को लाभ मिला. सुगम एप के जरिए लोकेशन और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए आधार आधारित सत्यापन अनिवार्य हो गया है. इसी तरह 10 कार्यालयों को पीपीपी मोड पर वातानुकूलित और वाई-फाई युक्त बनाया जा रहा है. विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई ऊर्जा – साय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आम नागरिक, किसान और मध्यमवर्गीय परिवारों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े. यह निर्णय केवल कर में राहत नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों के सपनों को सम्मान देने की दिशा में एक सार्थक पहल है, जो अपनी मेहनत की कमाई से घर और जमीन खरीदते हैं. इस कदम से संपत्ति के पंजीयन में वृद्धि होगी, आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई ऊर्जा प्राप्त होगी.

नवरात्रि पर मुख्यमंत्री ने मां महामाया की धरा से सरगुजा ओलंपिक का किया उद्घाटन

मुख्यमंत्री ने नवरात्रि की पावन बेला पर मां महामाया की धरा से सरगुजा ओलंपिक का किया शुभारंभ 3 लाख 49 हजार खिलाड़ियों की स्वस्फूर्त सहभागिता खेल के प्रति उनके प्रेम और समर्पण को दिखाता है : मुख्यमंत्री साय बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक के वार्षिक आयोजन हेतु बजट में 10 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान सरगुजा ओलंपिक में बेटियों की बड़ी संख्या में भागीदारी देखना सुखद, बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करें युवा : श्रीमती गीता फोगाट सरगुजा के पंडरापाठ में 20 करोड़ रुपए की लागत से बनेगी आर्चरी अकादमी खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने शासन की अनूठी पहल से जुड़ रहे है लोग रायपुर  नवरात्रि के पावन बेला में मां महामाया की धरा से यह शुभ शुरुआत हुई है। मां महामाया के आशीर्वाद पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक का आयोजन हो रहा है और आज सरगुजा अंचल के साथियों को ओलंपिक के जरिए अपनी हुनर दिखाने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित पी जी कॉलेज ग्राउंड में सरगुजा ओलंपिक का शुभारंभ किया और कार्यक्रम का शुभारंभ कर अंचल वासियों को शुभकामनाएं दी। साय को इस दौरान संभाग के सभी जिलों से पहुँचे खिलाड़ियों ने मार्च पास्ट का सलामी दी। मुख्यमंत्री ने मुख्य मंच से सभी खिलाड़ियों का अभिवादन स्वीकारा और खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की।  मुख्यमंत्री साय ने मां महामाया का स्मरण करते हुए प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक की सफलता के बाद अब सरगुजा में भी इस आयोजन की शुरुआत की गई है, जिससे यहां के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि बस्तर ओलंपिक में पहले वर्ष 1.65 लाख और इस वर्ष 3.91 लाख प्रतिभागियों ने भाग लिया, जबकि सरगुजा ओलंपिक में इस बार लगभग 3.49 लाख खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। इनमें से 2000 से अधिक खिलाड़ी संभाग स्तरीय तीन दिवसीय प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 3 लाख 49 हजार खिलाड़ियों की स्वस्फूर्त सहभागिता खेल के प्रति उनके प्रेम और समर्पण को दिखाता है।             मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए बजट में बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक के वार्षिक आयोजन हेतु 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को 21 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जबकि स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक विजेताओं को क्रमशः 3 करोड़, 2 करोड़ और 1 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।           इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद उन्मूलन के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र अब तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। नक्सल मुक्ति का संकल्प हमारे जवानों के अदम्य साहस से पूरा होने की कगार पर है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर ओलंपिक में आत्म समर्पित नक्सलियों की टीम ने जोआ बाट के नाम से हिस्सा लिया, जिसमें लगभग 700 आत्म समर्पित नक्सली शामिल हुए।         मुख्यमंत्री ने बताया कि खेलों के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है और बस्तर व सरगुजा अंचल खेल अधोसंरचनाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरगुजा के पंडरापाठ में 20 करोड़ रुपए की लागत से आर्चरी अकादमी स्थापित की जा रही है, जिससे क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा।          मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवा एथलीट अनिमेष कुजूर का उल्लेख करते हुए उनकी उपलब्धियों की सराहना की और कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। प्रदेश सरकार खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। उन्होंने जानकारी दी कि पहली बार खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स का आयोजन छत्तीसगढ़ में होगा, जिसका शुभारंभ 25 मार्च को केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित हुए धर्म स्वातंत्र्य विधेयक तथा कर्मचारी चयन मंडल के स्थापना के संबंध में भी जानकारी दी। शुभारंभ सत्र के अंत में मुख्यमंत्री सह अतिथियों ने सरगुजा ओलंपिक का मशाल प्रज्ज्वलित किया और सफल आयोजन के लिए बधाई दी।               कार्यक्रम में राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता गीता फोगाट ने भी खिलाड़ियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक में बड़ी संख्या में बेटियों की भागीदारी देखना सुखद है। उन्होंने युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करने का संदेश दिया, साथ ही नशे और गलत आदतों से दूर रहने की अपील की।             पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि सरगुजा ओलंपिक में 6 जिलों से कुल 3.49 लाख प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया है, जिनमें 1.59 लाख पुरुष और 1.89 लाख महिलाएं शामिल हैं। तीन दिवसीय इस आयोजन में 11 से अधिक खेल विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं।            कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने इसे सरगुजा वासियों के लिए बड़ी सौगात बताते हुए कहा कि इस मंच से स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।           इस अवसर पर मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद चिंतामणि महाराज, विधायक प्रबोध मिंज, विधायक रामकुमार टोप्पो, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर श्रीमती मंजूषा भगत, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष राम किशुन सिंह, सभापति हरविंदर सिंह, राम लखन पैंकरा खेल विभाग के सचिव यशवंत कुमार, संभाग आयुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

ई-चालान भुगतान में बड़ा बदलाव: 1 अप्रैल से OTC सिस्टम लागू, ऑनलाइन ट्रांसफर होगा डेटा

राजनांदगांव. जिला कोषालय अधिकारी से प्राप्त जानकारी अनुसार भौतिक चालानों की व्यवस्था समाप्त कर अब ई-चालान को बढ़ावा देने के लिए ओटीसी सुविधा 1 अप्रैल 2026 से लागू की जाएगी. नई व्यवस्था के तहत सभी चालान अब केवल ऑनलाईन माध्यम से जमा के किए जाएंगे. इस संबंध में जिले सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को चालान जमाकर्ताओं को ई-चालान प्रक्रिया से अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं. ओटीसी सुविधा अंतर्गत ई-चालान पोर्टल पर चालान भरते समय उसका डेटा सीधे बैंक को ऑनलाईन ट्रांसफर हो जाएगा, जिससे बैंक स्तर पर दोबारा डेटा प्रविष्टि की आवश्यकता नहीं रहेगी. बैंक काउंटर पर केवल ऑनलाईन जनरेटेड चालान, जिसमें ट्रेजरी रेफरेंस नंबर दर्ज होगा. इसके माध्यम से राशि जमा की जाएगी. एमआईएस के माध्यम से कोषालय में इसके बाद बैंक द्वारा यह जानकारी ऑनलाईन प्रस्तुत की जाएगी. इस नई व्यवस्था से डेटा प्रविष्टि में होने वाली त्रुटियों में कमी जाएगी और लेखांकन प्रक्रिया अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनेगी. ई-चालान पोर्टल के सर्च प्लान विकल्प के माध्यम से जमाकर्ता आसानी से चालान का प्रिंट निकाल सकेंगे. यह पहले भौतिक चालान में संभव नहीं था .

बारिश का कहर: बिलासपुर डैम का गेट टूटा, हाईवे बना नदी, फसलें डूबीं

रायगढ़. रायगढ़ जिले के भूपदेवपुर क्षेत्र में स्थित बिलासपुर जलाशय का पुराना और जर्जर गेट अचानक टूट गया, जिससे बांध का पानी uncontrolled तरीके से बाहर निकलने लगा। इस घटना के कारण पास से गुजरने वाले रायगढ़-खरसिया राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-49) पर पानी की भारी भरमार हो गई और सड़क पर लगभग घुटनों तक पानी भर गया। इसके चलते हाईवे पर गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई, और सड़क का दृश्य किसी तेज बहते दरिया जैसा प्रतीत हो रहा है। जलाशय के गेट टूटने से पानी का तेज बहाव आसपास के खेतों में भी फैल गया है, जिससे किसानों की फसल को काफी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। मौके पर भूपदेवपुर पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम तुरंत पहुंच गई है और जलाशय के गेट से हो रहे रिसाव को रोकने के लिए काम कर रही है। प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और पानी के तेज बहाव के पास न जाने की चेतावनी दी है। बिलासपुर जलाशय का महत्व बिलासपुर जलाशय रायगढ़ जिले में कृषि और पेयजल की आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण संरचना है। यह क्षेत्रीय किसानों और आसपास के गांवों को सिंचाई सुविधा प्रदान करता है। हालांकि, यह जलाशय काफी पुराना है और कई हिस्सों में संरचनात्मक कमजोरी देखी जा चुकी है। पुराने गेट और जर्जर स्थिति स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग पहले भी जलाशय के गेट की मरम्मत और सुरक्षा उपायों की सिफारिश कर चुके हैं, लेकिन जर्जर स्थिति और पर्याप्त रखरखाव के अभाव के कारण यह घटना हुई। पुराने बांधों में नियमित निगरानी और रखरखाव की कमी अक्सर ऐसी आपात स्थितियों का कारण बनती है। पहले के उदाहरण छत्तीसगढ़ में पिछले वर्षों में कई जलाशयों और बांधों के जर्जर गेट टूटने की घटनाएं सामने आई हैं। इनमें कभी-कभी बड़े पैमाने पर सड़क अवरुद्ध होना, फसलों का नुकसान, और स्थानीय निवासियों के घरों में पानी का प्रवेश शामिल रहा है। 2018 में सरगुजा जिले के जलाशय में गेट टूटने से कई गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हुआ। 2021 में कोण्डागांव जिले के एक पुराने बांध में रिसाव की वजह से आसपास के खेत और सड़क प्रभावित हुए। भूपदेवपुर घटना की गंभीरता इस घटना की गंभीरता इस बात से स्पष्ट है कि NH-49 जैसे व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर पानी भरने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। साथ ही, तेज बहाव से आसपास के खेतों और कृषि उत्पादन को नुकसान होने का खतरा है। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिए हैं। सावधानियाँ और उपाय स्थानीय प्रशासन ने सड़क किनारे और पानी के तेज बहाव वाले क्षेत्रों से लोगों को दूर रहने की चेतावनी जारी की है। पुलिस और राजस्व विभाग की टीम लगातार जलाशय के गेट और आसपास के क्षेत्र की निगरानी कर रही है। किसानों को चेतावनी दी गई है कि वह अपने खेतों और घरों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएँ। यह घटना रायगढ़ जिले में जलाशयों की पुरानी संरचनाओं के रखरखाव और समय पर मरम्मत की आवश्यकता को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संरचनात्मक जांच और सुधार नहीं किए गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं का जोखिम लगातार बढ़ता रहेगा।