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छत्तीसगढ़ में शिक्षकों को मिलेगा नया काम, SIR के बाद अब जनगणना की ड्यूटी

राजनांदगांव. एसआईआर की जटिल प्रक्रिया से गुजरने के बाद अब शिक्षको को जनगणना में ड्यूटी देनी होगी. जनगणना शाखा द्वारा इसके लिए जानकारी जुटाई जा रही हैं. अफसरों ने बताया कि, आगामी 31 मार्च तक मकानों की नंबरिंग किए जाने के बाद एक मई से पहले चरण की शुरूआत हो जाएगी. जिला प्रशासन द्वारा शिक्षक की जानकारी शिक्षा विभाग से भी जुटाई जा रही हैं. जनगणना-2027 को लेकर जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है. जनगणना के प्रथम चरण यानी मकान सूचीकरण की तैयारियों पर विशेष जोर दिया गया. एक मई से शुरू होने वाले जनगणना के लिए प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की सूची जल्द तैयार कर प्रस्तुत करने की तैयारी है. जिसमें 10 प्रतिशत अतिरिक्त रिजर्व स्टाफ भी शामिल किए जाने की तैयारी है. बताया जा रहा है कि, इस कार्य के लिए शासकीय प्राथमिक एवं मिडिल स्कूलों, हेडमास्टरों तथा शासकीय कॉलेजों के स्टाफ की नगरीय ड्यूटी लगाने की तैयारी है. साथ ही सभी निकायों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित शासकीय प्राथमिक एवं मिडिल स्कूलों, हेडमास्टरों तथा शासकीय कॉलेजों के स्टाफ की ड्यूटी इस कार्य में लगाया प्रगणकों विभाग द्वारा जाएगा. जनगणना और पर्यवेक्षकों की विस्तार से ली जा रही है और नियुक्ति से जुड़ी जानकारी उनके पदनाम, मोबाइल नंबर, पता सहित सभी आवश्यक विवरण शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं. अफसरों की माने तो इस प्रक्रिया में जिले का कोई भी व्यक्ति या परिवार गणना से वंचित नहीं रहना चाहिए. जनगणना-2027 दो चरणों में संपन्न होगी. पहले चरण में 1 मई से 30 मई 2026 तक मकान सूचीकरण (हाउस लिस्टिंग) किया जाएगा, जिसमें सभी भवनों और मकानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार जनगणना-2027 का अगले किया जाएगा. इसके बाद दूसरे चरण में माह से पहला चरण होगा शुरू एकत्रित की जाएगी. विग जनसंख्या से संबंधित विस्तृत जानकारी नगरनिगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा ने मकान सूचीकरण ब्लॉक का कार्य 31 मार्च तक हर हाल में पूरा करने कहा गया था.

उत्तर बस्तर कांकेर में जल संरक्षण और आजीविका पर कार्य करने वाली महिलाओं ने साझा किया अपना अनुभव

उत्तर बस्तर कांकेर : आजीविका और जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले समूह की महिलाओं ने साझा किए अनुभव संकेतकों पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले हुए सम्मानित उत्तर बस्तर कांकेर ग्रामों में जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे कार्यकर्ताओं, सामुदायिक सदस्यों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों एवं अन्य हितधारकों के अनुभवों को साझा करने शुक्रवार 20 मार्च को जिला पंचायत एवं गैर शासकीय संगठन प्रदान के संयुक्त तत्वावधान में जिला पंचायत के सभाकक्ष में "प्रेरणा से प्रगति" नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और पंचायत स्तर पर जल संरक्षण और संवर्धन पर चर्चा की गई, साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री हरेश मंडावी ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समुदाय एवं ग्राम पंचायतों को प्रेरित करने के साथ-साथ उनके कार्यों को नई दिशा मिलती है। उन्होंने पंचायत उन्नति सूचकांक (पीएआई) के महत्व, ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) की प्रभावशीलता तथा महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही यह भी बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में एक डिजिटल टूल विकसित कर ग्राम पंचायत विकास योजना की प्रक्रिया को डिजिटाइज किया गया है, जिसके माध्यम से जिले की प्रगति अब ऑनलाइन रूप से देखी जा सकती है। इस डिजिटल व्यवस्था से योजनाओं की निगरानी, पारदर्शिता एवं समयवद्ध क्रियान्वयन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों, स्व सहायता समूह की महिलाओं एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के कैडरों ने अपने अनुभव साझा किए। कई प्रतिभागियों ने बताया कि किस प्रकार जल संसाधन आधारित आजीविका गतिविधियों जैसे मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन एवं अन्य कृषि आधारित कार्यों के माध्यम से उनकी आय में वृद्धि हुई है तथा जीवन स्तर में सुधार आया है। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट कार्य करने वाले संकुल स्तरीय संघ, उच्च पंचायत उन्नति सूचकांक प्राप्त करने वाली तथा बेहतर ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करने वाली ग्राम पंचायतों एवं सक्रिय राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन कैडरों का सम्मान किया गया। विशेष रूप से आजीविका संवर्धन हेतु जल क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली दीदियों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने जल संसाधनों के प्रभावी उपयोग से न केवल अपनी आय में वृद्धि की है, बल्कि अन्य समुदाय सदस्यों के लिए भी प्रेरणा का कार्य किया है। इस अवसर पर जिला एवं जनपद पंचायतों के अधिकारी कर्मचारी और समूह की महिलाएं उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री ने सूरजपुर जिले में 185 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन

सूरजपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय आज चैत्र नवरात्रि की तृतीया तिथि के पावन अवसर पर सूरजपुर जिले के विकासखण्ड ओड़गी अंतर्गत ग्राम पंचायत कुदरगढ़ पहुंचे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी आस्था के केंद्र कुदरगढ़ धाम का भव्य विकास होगा। माता के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सूरजपुर जिले में 185 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री ने माँ कुदरगढ़ी के पावन धाम में पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व है और मैं आज माँ कुदरगढ़ी के दरबार में आया हूँ। सूरजपुर वासियों ने मुझे यह सौभाग्य दिया, इसके लिए मैं आप सभी के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ। मुख्यमंत्री ने कहा कि चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रदेश के कोने-कोने से मां कुदरगढ़ी के दर्शन के लिए पहुंचे भक्तजनों को भी मैं सादर प्रणाम करता हूँ। जब चैत्र नवरात्रि पर देवी मंदिरों में भक्तों का उत्साह देखता हूँ तो बहुत अच्छा लगता है। हमारे देवी-देवता हमारे आस्था के प्रतीक तो हैं ही, वे हमारे जीवन में उत्सव का रंग भी भरते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इस शुभ दिन सूरजपुर जिले में 185 करोड़ रुपए के 76 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया है। सूरजपुरवासियों को इसके लिए मैं हार्दिक बधाई देता हूँ। इन कार्यों में 20 करोड़ रुपए के 52 कार्यों के लोकार्पण तथा 164 करोड़ रुपए के भूमिपूजन के कार्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कार्यों में सड़क, भवन, पेयजल, शिक्षा, जलाशय एवं नगरीय अधोसंरचना से जुड़े निर्माण शामिल हैं। साथ ही कुदरगढ़ में सर्वसुविधायुक्त नवनिर्मित विश्रामगृह भवन का लोकार्पण भी किया गया है। लगभग 3 करोड़ 9 लाख 60 हजार रुपये की लागत से निर्मित इस आधुनिक भवन में अतिथियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि माता के आशीर्वाद से बस्तर क्षेत्र से नक्सलवाद समाप्त करने की दिशा में सरकार लगातार प्रयासरत है । कुदरगढ़ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शीघ्र ही रोपवे का निर्माण कराया जाएगा, जिससे दर्शन करना और अधिक सुगम हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि क्षेत्र में डोम, बिजली सहित सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि कुदरगढ़ धाम का समग्र और सुव्यवस्थित विकास सुनिश्चित किया जा सके। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने जिले में पोषण के प्रति जागरूकता के लिए सुपोषण रथ, आपराधिक जागरूकता रथ और यातायात जागरूकता रथ को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों के बेहतर पोषण के लिए जनजागरूकता बेहद आवश्यक है। स्वस्थ महिला और बच्चों से परिवार की खुशियां मजबूत होती हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि यातायात के नियमों के प्रति सभी को सजग होना चाहिए जिससे सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है और लाखों लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सूरजपुर जिले में रेडी टू ईट निर्माण कार्य के माध्यम से पोषण कार्यक्रम का संचालन बेहतर ढंग से किया जा रहा है, जिससे महिलाओं और बच्चों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने इस पहल को जिले के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पावन पर्व नई ऊर्जा और समृद्धि का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की उन्नति के लिए निरंतर कार्य कर रही है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उनकी आय बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक के आयोजन से इस क्षेत्र के खिलाड़ियों को खेल का नया अवसर मिला है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर माता रानी का आशीर्वाद सभी जिले वासियों पर बना रहे। सरकार महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करते हुए महिलाओं और बच्चो को बेहतर पोषण प्रदान करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  साय के नेतृत्व में आपके क्षेत्रों के विकास के लिए निरन्तर कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर वन विकास निगम के अध्यक्ष  राम सेवक पैंकरा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, जिले के वरिष्ठ अधिकारीगण, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री का कुदरगढ़ी माता मंदिर दौरा: पूजा कर प्रदेश की खुशहाली की प्रार्थना

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज चैत्र नवरात्रि की तृतीया तिथि के पावन अवसर पर कुदरगढ़ी माता के दर्शन करने सूरजपुर जिले स्थित कुदरगढ़ी माता मंदिर पहुंचे। कुदरगढ़ महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने मंदिर के नीचे प्रांगण स्थल पर ही हिंगुलाज माता एवं झगरा खाड़ देवता की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और  खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार चंदन लगाकर एवं चुनरी चढ़ाकर श्रद्धापूर्वक माता का नमन किया। इस दौरान स्थानीय बैगा  राम कुमार बंछोर ने पूजा-अर्चना संपन्न कराई। उनके परिवार की लगभग 10 पीढ़ियां कुदरगढ़ी माता की सेवा में निरंतर लगी हुई हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने उपस्थित श्रद्धालुओं का अभिवादन किया और सभी को कुदरगढ़ महोत्सव की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान कृषि मंत्री  रामविचार नेताम,  वन विकास निगम एवं कुदरगढ़ी मंदिर मां बागेश्वरी लोक न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष  रामसेवक पैंकरा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि जनश्रुतियों के अनुसार कुदरगढ़ी माता मंदिर की मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। इसी कारणवश जिले सहित प्रदेश एवं अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं।

वनौषधि परंपरा के संरक्षण को सरकार प्रतिबद्ध: वन मंत्री केदार कश्यप का बयान जड़ी-बूटी विरासत बचाने पर

रायपुर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप आज छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के नवनियुक्त उपाध्यक्ष  अंजय शुक्ला के पदभार ग्रहण समारोह में शामिल हुए। यह कार्यक्रम राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर, जीरो प्वाइंट, रायपुर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा , विधायक  किरण सिंह देव, विधायक  अनुज शर्मा और विधायक  इंद्रकुमार साहू अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।        वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक वन संपदा से समृद्ध राज्य है, जहां लगभग 44.21 प्रतिशत क्षेत्र में वन हैं। यहां के वनों में विभिन्न प्रकार की वनौषधियां पाई जाती हैं, जिनका उपयोग प्राचीन काल से उपचार के लिए किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने और आमजन तक इसके लाभ पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 से 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन  अंजय शुक्ला द्वारा उपाध्यक्ष का पदभार ग्रहण करना एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके अनुभव से औषधि पादप बोर्ड को मजबूती मिलेगी और यह नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।          समारोह में तकनीकी शिक्षा मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि औषधि पादप बोर्ड द्वारा वैद्य सम्मेलन, वनौषधि प्रदर्शनी और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि  शुक्ला के मार्गदर्शन में बोर्ड और बेहतर कार्य करेगा। कार्यक्रम को विधायक  किरण सिंह देव ने भी संबोधित करते हुए कहा कि  शुक्ला के अनुभव का लाभ औषधि पादप बोर्ड को मिलेगा और बोर्ड नए आयाम स्थापित करेगा। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष  विकास मरकाम ने कि राज्य सरकार वन औषधीय के पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और संवर्धन के लिए पादप बोर्ड का गठन किया है। जो लगातार बेहतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने  शुक्ला को बधाई देते हुए कहा पादप बोर्ड को उनके अनुभव का निश्चित ही लाभ मिलेगा और बोर्ड बेहतर नवाचार करेगा।      कार्यक्रम में  अपेक्स बैंक के अध्यक्ष  केदारनाथ गुप्ता, खाद्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव, अध्यक्ष अल्प संख्यक आयोग  अमरजीत सिंह छाबड़ा, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम,  लोकेश कावड़िया, अध्यक्ष, रायपुर विकास प्राधिकरण  नंदकुमार साहू , जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल, जिला पंचायत सदस्य मती स्वाती वर्मा, सतनामी समाज के धर्मगुरू गुरू बालदास,  रमेश सिंह ठाकुर,  अशोक पाण्डे,  श्याम नारंग सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  जे.ए.सी.एस. राव  सुरेन्द्र पाटनी,  अमित साहू,  आलोक साहू सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

छिना था परिवार बसाने का हक, अब लौटी खुशियां: आत्मसमर्पित माओवादियों की नई शुरुआत

जगदलपुर कभी जंगलों में बंदूक उठाने को मजबूर और जिंदगी के हर फैसले पर संगठन का पहरा, लेकिन अब वही चेहरे मुख्यधारा में लौटकर अपनी जिंदगी खुद लिख रहे हैं. बस्तर में आत्मसमर्पित माओवादियों की कहानी अब सिर्फ सरेंडर तक सीमित नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत की कहानी बन चुकी है. जहां बंदिशें टूट रही हैं, और घर-परिवार के सपने पूरे हो रहे हैं. माओवादी संगठन में शामिल होने के बाद इन लोगों की जिंदगी पूरी तरह बदल जाती थी. हर कदम पर नियम हर फैसले पर पहरा. सबसे बड़ी बंदिश होती थी परिवार बसाने की मनाही. संगठन के भीतर रिश्ते बनाने और बच्चे पैदा करने पर सख्त रोक थी. यहां तक कि कई मामलों में जबरन नसबंदी तक कर दी जाती थी, यानि एक इंसान से उसकी सबसे बुनियादी इच्छाएं तक छीन ली जाती थी. न अपना घर… न अपने बच्चे… सिर्फ संगठन और उसकी विचारधारा. लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है मुख्यधारा में लौटे इन आत्मसमर्पित माओवादियों के लिए सरकार की पुनर्वास नीति एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है सिर्फ हथियार छोड़ने तक ही सीमित नहीं, बल्कि इन्हें एक सम्मानजनक और सामान्य जीवन जीने का मौका दिया जा रहा है. इसी कड़ी में सबसे संवेदनशील पहल वैसक्टोमी रिवर्सल अब इनकी जिंदगी में नई रोशनी ला रही है. पिछले साल 56 पुनर्वासित माओवादियों का सफल ऑपरेशन किया गया, जिससे वे फिर से सामान्य पारिवारिक जीवन की ओर लौट सकें. इस पहल का असर अब साफ दिखाई देने लगा है. इन 56 में से 23 दंपतियों के घर अब बच्चों की किलकारियां गूंज चुकी हैं. जो कभी जंगलों में हथियार लेकर घूमते थे, आज वही लोग अपने बच्चों को गोद में लेकर एक नई दुनिया बसा रहे हैं. यह सिर्फ एक व्यक्तिगत खुशी नहीं, बल्कि उस दर्दनाक अतीत से बाहर निकलने का संकेत है, जहां इंसान को उसकी इंसानियत से ही दूर कर दिया जाता था. बस्तर में यह बदलाव एक बड़ी सामाजिक कहानी भी कह रहा है. जहां पहले डर, हिंसा और बंदिशों का माहौल था वहां अब भरोसा, परिवार और भविष्य की बात हो रही है. और यही वजह है कि हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले कई अन्य माओवादियों ने भी नसबंदी रिवर्सल के लिए आवेदन दिया है. सरकार और स्वास्थ्य विभाग मिलकर यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि इनकी जिंदगी में भी खुशियों की वही शुरुआत हो जो अब कई घरों में दिखाई देने लगी है. आईजी बस्तर सुंदरराज पी. बताते हैं कि पुनर्वास के तहत हम हर संभव मदद दे रहे हैं कई माओवादियों ने वैसक्टोमी रिवर्सल के लिए आवेदन किया है स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर हम कोशिश कर रहे हैं कि वे सामान्य पारिवारिक जीवन जी सकें.

ठेकेदारों को निर्माण कार्य 1 वर्ष में पूरा करने दिए निर्देश

रायपुर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने आज भोरमदेव मंदिर परिसर में भोरमदेव कॉरिडोर निर्माण से जुड़े विभागों और ठेकेदारों की मैराथन समीक्षा बैठक ली।उन्होंने प्रोजेक्ट में मुख्य मंदिर परिसर का उन्नयन, सरोवर का सौंदर्यीकरण, मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुवा, सरोदा, पार्किंग में अब तक हुए कार्यों की प्रगति की गहनता से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता और समय सीमा पर पूर्णता इन दो पैमानों पर सभी कामों की मॉनिटरिंग होगी। इसके लिए जिला स्तर पर निगरानी समिति गठित की गई है। उन्होंने सभी ठेकेदारों से कहा कि 15-15 दिन में किए जाने वाले कार्यों की टाइमलाइन दें। निगरानी समिति को हर सोमवार कार्यस्थल का मुआयना कर प्रगति की समीक्षा के निर्देश दिए। इस दौरान निर्माण कार्य में लगे सभी प्रोजेक्ट इंचार्ज और इंजीनियर्स को अनिवार्य रूप से मौजूद रहने के लिए कहा। काम में किसी भी प्रकार की लापरवाही होने पर कड़ी कार्रवाई की बात कही। उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने समीक्षा के दौरान कहा कि मुख्य मंदिर परिसर में पेड़ों के इर्द गिर्द यहां दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बैठने के लिए चबूतरे बनवाये जाएं। मंदिर परिसर में जो भी प्रवेश द्वार और खंभे बनने का रहे हैं उनमें 'फनी नागवंशी' स्थापत्य की झलक दिखे, ऐसी संरचनाएं बनाई जाएं, लकड़ी के दरवाजों में इसी के अनुसार की नक्काशी की जाए। मुख्य प्रवेश द्वार सहित सभी द्वार भव्य रूप से बनाए जाएं।       उन्होंने कहा कि सरोवर स्थल में पिचिंग और लाइनिंग का काम तकनीकी उत्कृष्टता के साथ किया जाए। उन्होंने सरोवर तट पर सीढ़ियां तथा उसके ऊपर शेड का निर्माण व्यवस्थित रूप से करने के लिए कहा ताकि श्रद्धालु वहां आराम से बैठ सकें। सरोवर के किनारे लगने वाले स्ट्रीट लाइट के पोल भी आकर्षक रूप से तैयार करवाए जाएं जो पूरे मार्ग को भव्यता प्रदान करे। उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने मंदिर परिसर में बनने वाले विश्राम स्थल में दरवाजे खिड़की इस प्रकार से लगाए जाएं जो पूरे भवन को भव्यता के साथ पर्याप्त हवा और रोशनी प्रदान करें। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में लगने वाली कलाकृतियों में स्थानीयता और लोक संस्कृति की छाप दिखनी चहिए। उन्होंने पार्किंग स्थल पर वाहनों के लिए पर्याप्त स्थान के साथ मजबूत फ्लोरिंग तैयार करने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि पार्किंग में करीब बनने वाले दुकानों को इस प्रकार से बनाया जाए जिससे पार्किंग स्थल पर वाहनों का प्रवेश और निकासी व्यवस्थित और सुचारु रूप से संचालित हो। उन्होंने पूरे कॉरिडोर में पेयजल, शौचालय जैसे जनसुविधाओं का विशेष रूप से ध्यान रखने के निर्देश दिए।     मड़वा महल में प्रवेश द्वार, बाउंड्री वाल, कलाकृतियों की स्थापना, पर्यटकों की बैठक व्यवस्था का निर्माण पूरी गुणवत्ता के साथ करने के लिए निर्देशित किया। इसी प्रकार छेरकी महल, रामचुवा में होने वाले निर्माण और उन्नयन कार्यों की प्रगति के बारे में संबंधित ठेकेदार से जानकारी ली गई। सरोदा डैम में कैफेटेरिया, डैम तक सीढ़ियों और व्यू प्वाइंट का निर्माण, सौंदर्यीकरण जैसे कार्यों को लेकर कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, उपाध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी, एमडी पर्यटन  विवेक आचार्य, कलेक्टर  गोपाल वर्मा,  नितेश अग्रवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष  विदेशीराम धुर्वे, जिला पंचायत सदस्य  रामकुमार मेरावी,  राम किंकर वर्मा, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष बोड़ला  नन्द वास,  लोकचंद साहू,   आदित्य वास्तव,  दुर्गेश दुबे सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

भ्रष्टाचार पर सख्ती: 1.19 करोड़ की गड़बड़ी उजागर, 8 पंचायत सचिव निलंबित

गौरेला. मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ने गौरेला जनपद के 8 पंचायत सचिवों द्वारा 15वें वित्त आयोग मद की कुल 1 करोड़ 19 लाख 56 हजार रुपये की अनियमित भुगतान संबंधित वेन्डर को करने पर निलंबित कर दिया है. गुरुवार को जारी अलग-अलग निलंबन आदेश में कहा गया है कि पंचायत सचिवों का यह कृत्य छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा आचरण नियम 1998 के नियम के विपरीत होने पर पंचायत सेवा अनुशासन और अपील नियम 1999 में प्रदत्त अधिकारों को प्रयोग करते हुए उन्हें निलंबित किया जाता है. निलंबित किए गए पंचायत सचिवों में ग्राम पंचायत तेन्दुमुढ़ा के सचिव उमा शंकर उपाध्याय, ग्राम पंचायत नेवरी नवापारा के सचिव भैयालाल करसायल, ग्राम पंचायत ठाड़पथरा के सचिव नान्हूदास बघेल, ग्राम पंचायत आमाडोब के सचिव ओंकार भानू, ग्राम पंचायत पूटा के सचिव रतन सिंह, ग्राम पंचायत आमगांव के सचिव राधेश्याम मरावी, ग्राम पंचायत साल्हेघोरी के सचिव राजकुमार शर्मा और ग्राम पंचायत हर्राटोला के सचिव त्रिलोक सिंह शामिल हैं. निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जनपद पंचायत गौरेला निर्धारित किया गया है. निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी. निलंबन आदेश के अनुसार ग्राम पंचायत तेन्दुमुढ़ा के सचिव द्वारा 29 लाख 98 हजार 445 रुपये का अनियमित भुगतान करने, ग्राम पंचायत नेवरी नवापाऱा के सचिव द्वारा 26 लाख 13 हजार 200 रुपये का अनियमित भुगतान करने, ग्राम पंचायत ठाड़पथरा के सचिव द्वारा 23 लाख 26 हजार 700 रुपये का अनियमित भुगतान करने, ग्राम पंचायत आमाडोब के सचिव द्वारा 10 लाख 91 हजार 400 रुपये का अनियमित भुगतान करने, ग्राम पंचायत पूटा के सचिव द्वारा 10 लाख 72 हजार 378 रुपये का अनियमित भुगतान करने, ग्राम पंचायत आमगांव के सचिव द्वारा 6 लाख 40 हजार 182 रुपये का अनियमित भुगतान करने, ग्राम पंचायत साल्हेघोरी के सचिव द्वारा 6 लाख 69 हजार रुपये और ग्राम पंचायत हर्राटोला के सचिव द्वारा 5 लाख 47 हजार 700 रुपये का अनियमित भुगतान करने संबंधित वेन्डर को किया गया है.

बड़े नशा नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा, हैदराबाद-सरगुजा कनेक्शन उजागर

मनेन्द्रगढ़ नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में चिरमिरी पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय कुख्यात रसल एक्का गैंग का भंडाफोड़ करते हुए पूरे नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। इस कार्रवाई में गिरोह के मास्टरमाइंड समेत कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। हैदराबाद से जुड़ा था कनेक्शन पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह गिरोह ATM और डिजिटल ट्रांजेक्शन के जरिए नशीले इंजेक्शनों के अवैध कारोबार का पैसा संचालित कर रहा था। इस तरीके से न सिर्फ सप्लाई चेन, बल्कि पूरे फाइनेंशियल नेटवर्क को भी छुपाया जा रहा था। जांच में सामने आया कि नशे का सामान हैदराबाद से सरगुजा संभाग तक सप्लाई किया जा रहा था। पुलिस ने पहले कार्रवाई करते हुए मास्टरमाइंड रसल एक्का को रायपुर से गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने पूरे नेटवर्क का खुलासा किया।उसकी निशानदेही पर पुलिस ने वैंदला वासु (हैदराबाद), रजत कुमार (सूरजपुर) को भी गिरफ्तार कर लिया। ATM के जरिए चलता था पूरा नेटवर्क गिरोह का तरीका बेहद शातिर था। नशीले इंजेक्शनों की बिक्री से मिली रकम को ATM ट्रांजेक्शन के जरिए अलग-अलग खातों से निकालकर नेटवर्क में बांटा जाता था, जिससे पुलिस की नजर से बचा जा सके। इस खुलासे के बाद पुलिस ने न सिर्फ तस्करी, बल्कि पूरे फाइनेंशियल ऑपरेशन को भी ट्रैक कर तोड़ दिया। चिरमिरी पुलिस की इस कार्रवाई को नशे के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता माना जा रहा है। इससे सरगुजा संभाग में सक्रिय अंतरराज्यीय नशा तस्करी की एक बड़ी चेन खत्म हो गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशे के कारोबार में शामिल अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है। आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।

81वीं जीएचआरडीएन बैठक में मानव संसाधन शिखर सम्मेलन 4.0, मैट्स विश्वविद्यालय में हुआ आयोजन

मैट्स विश्वविद्यालय में 81वीं जीएचआरडीएन बैठक के अंतर्गत मानव संसाधन शिखर सम्मेलन 4.0 का आयोजन, देशभर के प्रमुख मानव संसाधन विशेषज्ञों की भागीदारी रायपुर  मैट्स विश्वविद्यालय में जीएचआरडी मानव संसाधन शिखर सम्मेलन 4.0 का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मानव संसाधन क्षेत्र के अग्रणी नेताओं, उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षाविदों तथा पेशेवरों का एक भव्य संगम रहा, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिभागियों ने भाग लिया। यह शिखर सम्मेलन मानव संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में उभरती प्रवृत्तियों, चुनौतियों तथा नवाचारों पर विचार-विमर्श का एक प्रभावी मंच बना। इस अवसर पर माननीय कुलाधिपति श्री गजराज पगारिया, माननीय कुलपति प्रोफेसर के. पी. यादव, आदरणीय महानिदेशक श्री प्रियेश पगारिया तथा आदरणीय कुलसचिव श्री गोकुलानंद पांडा की गरिमामयी उपस्थिति एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। उन्होंने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए इस महत्वपूर्ण और प्रभावशाली कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए बधाई दी। कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री सुरेंद्र गेडाम (आईएसटीडी नागपुर) रहे। कार्यक्रम का समन्वय श्री एस. के. लाजेवर (अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ प्रकरण) तथा श्री सुरेश (सचिव, छत्तीसगढ़ प्रकरण) द्वारा किया गया। साथ ही इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. उमेश गुप्ता, प्राध्यापक एवं अधिष्ठाता, वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय ने की। इस शिखर सम्मेलन में विभिन्न उद्योगों से आए विशिष्ट अतिथि वक्ताओं तथा मानव संसाधन क्षेत्र के नेताओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। प्रमुख अतिथियों में श्री डी. के. मोहंती (समूह मानव संसाधन प्रमुख, नीको), डॉ. राज्जू कुमार (एन एक्सिडेंटल इंजीनियर), श्री अभिषेक सिंह (सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन विशेषज्ञ, यूनिसेफ), श्री श्याम वर्मा (निदेशक, मिरेकल्स) तथा श्री साइमन जॉर्ज (प्रमुख – शिक्षण एवं विकास / प्रशासन, एसआरयू) शामिल रहे। उनके विचारों और अनुभवों ने चर्चा को अत्यंत समृद्ध बनाया तथा शिक्षा जगत और उद्योग जगत से आए प्रतिभागियों को प्रेरित किया। इस शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण विभिन्न उद्योगों और कॉर्पोरेट क्षेत्रों के प्रतिष्ठित मानव संसाधन पेशेवरों के साथ आयोजित एक रोचक विचार गोष्ठी रही। इस चर्चा में समकालीन मानव संसाधन कार्यप्रणालियों, भविष्य के कार्यबल की प्रवृत्तियों, नेतृत्व विकास, डिजिटल परिवर्तन तथा बदलते व्यावसायिक वातावरण में प्रतिभा प्रबंधन की रणनीतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस चर्चा में छत्तीसगढ़ के विभिन्न उद्योगों से आए बड़ी संख्या में मानव संसाधन पेशेवरों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे यह शिखर सम्मेलन अत्यंत संवादात्मक और ज्ञानवर्धक अनुभव बन गया। अनुभवी मानव संसाधन नेताओं और उभरते पेशेवरों के बीच विचारों के आदान-प्रदान ने सीखने, संपर्क स्थापित करने तथा सहयोग का एक सशक्त मंच प्रदान किया। इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में मैट्स विश्वविद्यालय के प्रशिक्षण एवं नियुक्ति प्रकोष्ठ की समर्पित टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने कार्यक्रम की योजना बनाने और उसे सुचारू रूप से संपन्न कराने में उल्लेखनीय योगदान दिया। जीएचआरडी मानव संसाधन शिखर सम्मेलन 4.0 का समापन सभी वक्ताओं, विचार गोष्ठी के प्रतिभागियों, गणमान्य अतिथियों तथा उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए हुआ, जिन्होंने इस आयोजन को अत्यंत सफल बनाया। यह शिखर सम्मेलन उद्योग और शिक्षा जगत के मध्य सहयोग को सुदृढ़ करने तथा मानव संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में नेतृत्व और उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने के प्रति मैट्स विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करता है।