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पर्यावरण संरक्षण, जैव संवर्धन तथा वनवासियों की आजीविका को मजबूत करने सरकार प्रतिबद्ध: मंत्री कश्यप

मंत्री  केदार कश्यप के विभागों के लिए 3 हजार 622 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित पर्यावरण संरक्षण, जैव संवर्धन तथा वनवासियों की आजीविका को मजबूत करने सरकार प्रतिबद्ध: मंत्री  कश्यप वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को ई-कुबेर योजना हेतु मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार  वन आवरण के मामले में राज्य देश में तीसरे स्थान पर वन्यप्राणी संरक्षण एवं संवर्धन तथा उनके रहवास विकास हेतु 320 करोड़ रूपए का प्रावधान  ग्रामीण बस योजना, ई-मॉनिटरिंग और किसानों को ब्याज मुक्त ऋण  80 मार्गों पर लगभग 560 गांवों को पहली बार सुगम आवागमन की सुविधा  रायपुर  वन एवं जलवायु परिवर्तन, सहकारिता, परिवहन तथा संसदीय कार्य मंत्री  केदार कश्यप के विभागों से संबंधित 3 हजार 622 करोड़ 86 लाख 35 हजार रूपए की अनुदान मांगे विधानसभा में पारित की गई। इसमें वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग लिए 2 हजार 867 करोड़ 30 लाख रूपए, सहकारिता विभाग के लिए 389 करोड़ 40 लाख 85 हजार रूपए, परिवहन विभाग के लिए 243 करोड़ 50 लाख 50 हजार रूपए और राज्य विधानमंडल के लिए 122 करोड़ 65 लाख रूपए शामिल हैं।  मंत्री  कश्यप ने अनुदान मांगों की चर्चा के जवाब में कहा कि हमारी सरकार पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा वनवासियों की आजीविका को मजबूत करने पर विशेष जोर दे रही है। राज्य में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के लिए आगामी वर्षा ऋतु में लगभग 3.50 करोड़ पौधे रोपने और वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही बिगड़े बांस वनों के पुनरोद्धार के लिए 80 करोड़ रुपये और बिगड़े वनों के सुधार के लिए 310 करोड़ रुपये का प्रावधान बजट में किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 की परिकल्पना की है, जिसका उद्देश्य प्रदेश को पूर्ण विकसित एवं समृद्ध राज्य बनाना है।  इसी तरह नदी तटों पर भू-क्षरण रोकने के लिए 7 करोड़ रुपये तथा भू-जल संरक्षण योजना के लिए 120 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। इसके अलावा राष्ट्रीय और राज्य मार्गों के किनारे वृक्षारोपण के लिए भी 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने सदन में कहा कि वन्यजीव संरक्षण के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसके लिए 320.58 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि बाघ संरक्षण के लिए ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ योजना के तहत 23.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मंत्री  कश्यप ने बताया कि दूरस्थ अंचलों में निवासरत वनवासियों को बारहमासी आवागमन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए वन मार्गों में रपटा पुल-पुलिया का निर्माण किया जा रहा है। इस योजनांतर्गत इस वर्ष 5 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। साथ ही सड़कें तथा मकान निर्माण के लिए 11 करोड़ रूपए का बजट प्रास्तावित है। इसी तरह काष्ठ एवं बांस कूपों के विदोहन के उपरांत प्राकृतिक पुनरोत्पादन को बढ़ावा देने इस योजना के लिए 300 करोड़ रूपए का बजट रखा गया है। वहीं ए.एन.आर. योजनांतर्गत भी 300 करोड़ रूपए का प्रावधान है। इसी तरह वनवासियों को उनके मालिकाना हक की भूमि में ईमारती  लकड़ी के विदोहन के लिए 183 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। मंत्री  कश्यप ने बताया कि वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को ई-कुबेर योजना हेतु मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इसी तरह कांगेर वैली नेशनल पार्क को यूनेस्को से विश्व विरासत स्थल के रूप में चिन्हांकन हेतु चयनित किया गया है। वहीं वन विभाग में मानव संसाधन में वृद्धि करने के लिए वनरक्षकों 1484 एवं सहायक ग्रेड-3 के 50 पदों पर भर्ती की जा रही है।   मंत्री  कश्यप ने बताया कि राज्य सरकार तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में चरणपादुका वितरण योजना को फिर से शुरू किया गया है। इस योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की सामाजिक सुरक्षा के लिए राजमोहिनी देवी तेंदूपत्ता सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत 50 करोड़ रुपये रखे गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 44.25 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है और भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार वन आवरण के मामले में राज्य देश में तीसरे स्थान पर है।  मंत्री  कश्यप ने बताया कि राज्य में जैव विविधता संरक्षण और वेटलैंड विकास को बढ़ावा देने के लिए भी कई पहल की जा रही हैं। बिलासपुर जिले के कोपरा जलाशय को रामसर सचिवालय द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य का पहला एवं भारत वर्ष का 96वाँ रामसर स्थल अधिसूचित किया गया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि से राज्य की जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण और जल जीवन के प्रति हमारे सरकार की प्रतिबद्धता मजबूत हुई है। इसी प्रकार छत्तीसगढ अंजोर विजन-2047 के ज्ञमल डपसमेजवदमे ठल 2030 के अनुरूप वर्ष 2030 तक 20 वेटलैण्ड्स को रामसर स्थल के रूप में नामित करने के लक्ष्य को प्राप्त किया जाएगा। इसी परिप्रेक्ष्य में बेमेतरा जिले के गिधवा-परसदा वेटलैण्ड कॉम्पलेक्स को रामसर स्थल अधिसूचित करने का प्रस्ताव भारत सरकार को प्रेषित किया गया है। परिवहन-सहकारिता-संसदीय कार्य   मंत्री  कश्यप ने सदन में परिवहन, सहाकारिता और संसदीय कार्य विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा में कहा कि ग्रामीण परिवहन व्यवस्था, सहकारिता क्षेत्र और प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने के लिए हमारी सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिसके तहत परिवहन विभाग के लिए 243.50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। सरकार ने दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने के लिए “मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना” को विस्तार देने की घोषणा की है। योजना के तहत बस संचालकों को तीन वर्षों तक मासिक कर में पूर्ण छूट और अधिकतम 26 रुपये प्रति किलोमीटर की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। वर्तमान में वनांचल के 80 मार्गों पर 81 बसें संचालित हो रही हैं, जिससे लगभग 560 गांवों को पहली बार सुगम आवागमन की सुविधा मिल रही है। परिवहन मंत्री  कश्यप ने बताया कि सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत एएनपीआर और रडार कैमरे लगाए जा रहे हैं। इसके लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया को आधुनिक बनाने के लिए आठ नए जिलों में ई-ट्रैक केंद्र स्थापित करने हेतु 15 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने … Read more

जगदलपुर: बस्तर की बेटियों के लिए सुरक्षा कवच, एचपीवी टीकाकरण अभियान का भव्य आगाज

जगदलपुर : बस्तर की बेटियों के लिए सुरक्षा कवच : जगदलपुर में एचपीवी टीकाकरण अभियान का भव्य आगाज़ ​जगदलपुर बस्तर जिले की बेटियों को भविष्य की गंभीर बीमारियों से सुरक्षित करने की दिशा में सोमवार को एक ऐतिहासिक और आधुनिक अध्याय जुड़ गया। जिला चिकित्सालय महारानी अस्पताल में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी टीकाकरण अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया। शहर के प्रथम नागरिक और महापौर  संजय पांडेय ने मुख्य अतिथि के रूप में इस अभियान की शुरुआत की, जहाँ कलेक्टर  आकाश छिकारा के कुशल मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम ने इस मिशन को धरातल पर क्रियान्वयन शुरू किया। यह अभियान न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि तकनीकी रूप से भी बेहद उन्नत है, क्योंकि इसमें यू-विन पोर्टल का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। ​इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह और किशोरियों को संबोधित करते हुए महापौर  संजय पांडेय ने कहा कि यह दिन बस्तर की बेटियों के उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि सर्वाइकल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव का यह टीका बाजार में महंगा है, इसके बावजूद बेटियों के अनमोल स्वास्थ्य की रक्षा हेतु शासन द्वारा इसे पूरी तरह से निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि यह टीका हमारी बेटियों के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच है क्योंकि सरकार और प्रशासन का लक्ष्य केवल इलाज करना नहीं, बल्कि बीमारी को जड़ से रोकना है। महापौर ने सभी अभिभावकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे अपनी 14 से 15 वर्ष की बेटियों का टीकाकरण अवश्य कराएं, क्योंकि यह न केवल एक स्वास्थ्य अभियान है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक डिजिटल क्रांति भी है, जहाँ टीकाकरण के तुरंत बाद उन्हें ई-सर्टिफिकेट प्राप्त हो रहा है। उन्होंने शासन के इस महत्वपूर्ण योजना की जानकारी घर-घर तक उपलब्ध कराने पर जोर दिया।          ​शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान किशोरियों का सफलतापूर्वक टीकाकरण किया गया, जिसमें पूरी प्रक्रिया का डिजिटल प्रबंधन यू-विन पोर्टल के माध्यम से किया गया। पंजीकरण से लेकर टीकाकरण के पश्चात डिजिटल ई-सर्टिफिकेट प्रदान करने तक की पारदर्शी व्यवस्था ने इस अभियान को और भी प्रभावी बना दिया है। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति ने इस मिशन की गंभीरता को और पुख्ता किया। कार्यक्रम में नगर निगम सभापति  खेमसिंह देवांगन, महापौर परिषद के सदस्य  निर्मल पाणीग्राही, पार्षद स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. महेश सांडिया, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक, सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जिला कार्यक्रम प्रबंधक सु रीना लक्ष्मी, शहरी स्वास्थ्य मिशन के पीडी बस्तिया मौजूद रहे। साथ ही अन्य समर्पित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं पैरामेडिकल कर्मचारियों की देखरेख में टीकाकरण प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हुई। प्रशासन का अब यह साझा संकल्प है कि जिले की हर पात्र किशोरी तक इस जीवन रक्षक और बहुमूल्य टीके को पहुँचाकर बस्तर की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर मुक्त बनाया जाए।

इलेक्ट्रानिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम पर दो दिवसीय राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ

डिजिटल सुशासन और शासकीय खरीद में पारदर्शिता की ओर सशक्त कदम इलेक्ट्रानिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम पर दो दिवसीय राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ डिजिटल सुशासन को सशक्त बनाने हेतु शासन की नवीन पहल रायपुर राजधानी रायपुर के सिविल लाइन्स स्थित न्यू सर्किट हाउस में सूचना विज्ञान केंद्र (एन.आई.सी.) द्वारा विकसित इलेक्ट्रानिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। चिप्स एवं एन.आई.सी. के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में शासकीय खरीद में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए राज्य के समस्त विभागों को नवीन प्रोक्योरमेंट प्रणाली का प्रशिक्षण दिया जाना है। कार्यशाला के प्रथम दिन लोक कल्याण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, जल संसाधन विभाग, गृहनिर्माण विभाग,पर्यटन विभाग सहित 50 विभागों के नोडल अधिकारी शामिल हुए, जिन्हें एन.आई.सी. नई दिल्ली से श्रीमती उषा सक्सेना, उप-महासंचालक के नेतृत्व में आये पांच सदस्यी दल द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा।     कार्यशाला का शुभारम्भ करते हुए चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रभात मलिक ने बताया वर्तमान ई-खरीद प्रणाली दस वर्षों से कार्यशील है, वर्तमान प्रोक्योरमेंट प्रणाली से एन.आई.सी. द्वारा विकसित नवीन जेपनिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम की ओर माइग्रेशन प्रदेश के लिए एक नई और सशक्त शुरुआत है। श्री मलिक ने इस प्रशिक्षण कार्यशाला में उपस्थित विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जेपनिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम के माध्यम से डिजिटल सुशासन को सशक्त बनाने हेतु योगदान के लिए प्रोत्साहित किया। राज्य के विभिन्न विभागों के प्रोक्योरममेंट से सम्बन्धित नोडल अधिकारीयों को नवीन प्रणाली का प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली की उप-महासंचालक एवं ई-प्रोक्योरमेंट ग्रुप प्रमुख श्रीमती उषा सक्सेना ने अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की डिजिटल सुशासन नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि टेंडर में सबसे ज़रूरी तत्व पारदर्शिता, दक्षता और समानता हैं, यानि टेंडर प्रक्रिया में सभी के लिए समान अवसर उपलब्ध रहना। एन.आई.सी. का जेपनिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम इन सभी ज़रूरी मानकों को पूर्ण करता है। श्रीमती उषा सक्सेना ने बताया कि जेपनिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम के माध्यम से प्रतिदिन 5-6 हज़ार निविदाएं हैंडल की जा रही हैं। इस राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला के द्वितीय प्रशिक्षण सत्र में ई-खरीद से संबंधित शासकीय नीतियों, बेस्ट प्रैक्टिस, सॉफ्टवेयर फीचर के विषय में विस्तार से बताया जायेगा। अपने स्वागत उद्बोधन में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी श्री टी. एन. सिंह ने कहा कि जेपनिक प्रोक्योरमेंट प्रणाली ई-सुशासन की दिशा में नया कदम है, यह एक कॉम्प्रेहेंसिव ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली है। इस स्केलेबल प्रणाली को राज्य की ज़रूरतों के अनुरूप री-स्ट्रक्चर और कस्टमाइज़ किया गया है। विभिन्न सुरक्षा फीचरों से सुसज्जित यह सिस्टम शासन की हर ज़रूरतों और चुनौतियों को कवर करता है। उल्लेखनीय है कि जेपनिक ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम शासकीय खरीद के लिए विकसित एक केंद्रीय ई-खरीद प्रणाली है जिससे देश के 31 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश जुड़े हुए हैं। इस कार्यशाला में दो दिनों तक नवीन ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली से संबद्ध डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेशन, कॉन्फिगरेबल फंक्शनलिटी, ई-ऑक्शन, टेंडर प्रिपरेशन, प्राइस बिड सहित विभिन्न फीचरों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही इंडियन ऑयल कॉर्पाेरेशन, मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस, मेट्रो रेल आदि की केस स्टडी के माध्यम से ई-प्रोक्योरमेंट बेस्ट प्रैक्टिस के बारे में बताया जायेगा। साथ ही जेपनिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम पर प्रश्नोत्तरी के दौरान उपस्थिति अधिकारियों की जिज्ञासा का समाधान किया।     कार्यशाला में चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रभात मलिक के साथ-साथ श्री पी. रामाराव, एनआईसी, चिप्स के संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अनुपम आशीष टोप्पो, एस.ई.एम.टी. हेड श्री आशीष जायसवाल सहित लोक कल्याण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, जल संसाधन विभाग, गृह निर्माण विभाग, पर्यटन विभाग आदि 50 से अधिक विभागों के 130 से अधिक नोडल अधिकारी शामिल हुए।

छत्तीसगढ़ के 29 लाख उपभोक्ताओं को मिलेगा राहत, 758 करोड़ का बकाया बिजली बिल होगा माफ

रायपुर  मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना छत्तीसगढ़ के आर्थिक रूप से कमजोर उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आई है। इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ के लगभग 29 लाख उपभोक्ताओं को 758 करोड़ रुपये की सीधी छूट दी जाएगी। योजना मुख्य रूप से निम्नदाब घरेलू, बीपीएल और कृषि उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसके तहत 31 मार्च 2023 तक की बकाया राशि को आधार माना गया है। सरचार्ज को भी माफ किया जाएगा पात्र उपभोक्ताओं को न केवल मूल राशि में रियायत मिलेगी, बल्कि बकाया पर लगने वाले भारी-भरकम अधिभार (सरचार्ज) को भी माफ किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण के दौरान लॉकडाउन और प्रोटोकाल के कारण महीनों तक मीटर रीडिंग नहीं हो सकी थी। इसके बाद जब एकमुश्त भारी बिल आए, तो आर्थिक तंगी के चलते लाखों परिवार इन्हें चुकाने में असमर्थ रहे। अब सरकार की इस पहल का उद्देश्य इन्हीं परिवारों को कर्ज के चक्रव्यूह से बाहर निकालना है। ऐसे उठाएं योजना का लाभ उपभोक्ता मोर बिजली एप या नजदीकी बिजली वितरण केंद्र पर जाकर पंजीयन करा सकते हैं। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगी। गांव-गांव में विशेष शिविर लगाकर अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाया जाएगा। वितरण केंद्र के अधिकारियों से संपर्क करें बिल भुगतान के पश्चात पात्र उपभोक्ता एम-ऊर्जा योजना का लाभ लेने के लिए भी पात्र हो जाएंगे। बिजली कंपनी ने अपील की है कि किसी भी संशय की स्थिति में वितरण केंद्र के अधिकारियों से तुरंत संपर्क करें। 

मनेन्द्रगढ़ में 23 मार्च को आयोजित होगा रोजगार मेला, युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी का बड़ा मौका

एमसीबी जिले के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र मनेन्द्रगढ़ के तत्वावधान में 23 मार्च 2026 को रोजगार मेला एवं प्लेसमेंट कैंप का आयोजन किया जाएगा। यह प्लेसमेंट कैंप जिला रोजगार कार्यालय मनेन्द्रगढ़ में सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक आयोजित होगा, जहां निजी क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनियों के माध्यम से युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इस रोजगार मेले में परिशराम ह्यूमन रिसोर्सेस प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम (हरियाणा) द्वारा आईटीआई उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के लिए मीटर इंस्टॉलेशन के 50 पदों पर भर्ती की जाएगी। चयनित अभ्यर्थियों को 15 हजार से 20 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन प्रदान किया जाएगा तथा उनका कार्यक्षेत्र छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में रहेगा। इस पहल से जिले के आईटीआई योग्य युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार प्राप्त करने का एक बेहतर और सशक्त अवसर मिलेगा। जिला रोजगार कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह रोजगार मेला पूरी तरह निःशुल्क है। इसमें भाग लेने के इच्छुक आवेदकों के लिए ई-रोजगार पोर्टल https://erojgar.cg.gov.in/ अथवा गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध  ÞCG Rojgar पंजीयन ऐप” के माध्यम से पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। केवल पंजीकृत आवेदकों को ही प्लेसमेंट कैंप में शामिल होने की पात्रता प्रदान की जाएगी। जिला प्रशासन ने जिले के योग्य और इच्छुक युवाओं से अपील की है कि वे इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाते हुए रोजगार मेले में सहभागिता करें और निजी क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार संभावनाओं का लाभ प्राप्त कर अपने भविष्य को सशक्त बनाएं।

फास्टैग वार्षिक पास की कीमत एक अप्रैल से बढ़ेगी, छत्तीसगढ़ के हाईवे यात्रियों को होगा नुकसान

रायपुर  राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले वाहन चालकों को एक अप्रैल से फास्टैग वार्षिक पास के लिए अधिक भुगतान करना होगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए फास्टैग वार्षिक पास शुल्क 3,000 रुपये से बढ़ाकर 3,075 रुपये कर दिया है। यह नई दर एक अप्रैल से लागू होगी। इसका असर छत्तीसगढ़ से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर नियमित सफर करने वाले हजारों वाहन चालकों पर भी पड़ेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अनुसार शुल्क में यह बढ़ोतरी राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क निर्धारण एवं संग्रहण नियम 2008 के प्रविधानों के तहत की गई है। लगभग 1,150 टोल प्लाजा पर यात्रा की सुविधा फास्टैग वार्षिक पास गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए उपलब्ध है और इसके जरिये राष्ट्रीय राजमार्गों तथा एक्सप्रेसवे के लगभग 1,150 टोल प्लाजा पर यात्रा की सुविधा मिलती है। छत्तीसगढ़ में रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़ और धमतरी से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर कई टोल प्लाजा संचालित हैं। इन मार्गों पर नियमित आवाजाही करने वाले निजी वाहन चालक इस वार्षिक पास का उपयोग कर रहे हैं। पास लेने के बाद बार-बार टोल भुगतान की जरूरत नहीं होती, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होती है। 31 मार्च तक पुराने दाम पर मौका जो वाहन चालक नियमित रूप से हाईवे पर सफर करते हैं, वे 31 मार्च तक 3,000 रुपये में वार्षिक पास खरीद या रिचार्ज करा सकते हैं। एक अप्रैल से नई दर 3,075 रुपये लागू हो जाएगी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के मुताबिक यह वार्षिक पास एक वर्ष की वैधता या 200 टोल क्रॉसिंग तक मान्य रहता है। पास खरीदने के बाद यह दो घंटे के भीतर वाहन के मौजूदा फास्टैग से लिंक होकर सक्रिय हो जाता है। इसके लिए एकमुश्त शुल्क का भुगतान मोबाइल एप या वेबसाइट के माध्यम से किया जा सकता है। किन वाहनों को मिलेगी सुविधा फास्टैग वार्षिक पास केवल गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए मान्य है। निजी कार और अन्य निजी उपयोग के वाहन इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। फास्टैग वार्षिक पास योजना की शुरुआत 15 अगस्त 2025 को की गई थी। देशभर में इसे अच्छा प्रतिसाद मिला है और अब तक 56 लाख से अधिक निजी वाहन मालिक इस सुविधा से जुड़ चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था राष्ट्रीय राजमार्गों पर कैशलेस और सुगम यात्रा को बढ़ावा देने में मदद कर रही है। ऐसे होगा पास सक्रिय एकमुश्त शुल्क का भुगतान करने के बाद वार्षिक पास दो घंटे के भीतर वाहन के मौजूदा फास्टैग से लिंक होकर सक्रिय हो जाता है। इसके लिए राजमार्ग यात्रा मोबाइल एप या आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भुगतान किया जा सकता है। 

श्रम निरीक्षक लक्ष्मण सिंह मरकाम निलंबित

निर्माण श्रमिक पंजीयन में अनियमितता के आरोप में निलंबित रायपुर,  मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना से जुड़े प्रकरण में प्रथम दृष्टया अनियमितता पाए जाने पर जिला जांजगीर-चांपा के श्रम निरीक्षक लक्ष्मण सिंह मरकाम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला पंचायत उपाध्यक्ष, जिला जांजगीर-चांपा द्वारा 02 मार्च 2026 को कलेक्टर को शिकायत भेजी गई थी। इस संबंध में विधानसभा सदस्य बालेश्वर साहू द्वारा विधानसभा में ध्यानाकर्षण के जरिए मुद्दा उठाया गया। इसके बाद कलेक्टर जांजगीर-चांपा द्वारा कराई गई प्राथमिक जांच में निर्माण श्रमिक के पंजीयन में प्रथम दृष्टया अनियमितता परिलक्षित हुई। जांच में पंजीयन आवेदन स्वीकृत करने वाले क्षेत्रीय श्रम निरीक्षक लक्ष्मण सिंह मरकाम, कार्यालय श्रम पदाधिकारी जिला जांजगीर- चांपा की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय जांच संस्थित की गई है।        निलंबित श्रम निरीक्षक   मरकाम के निलंबन अवधि के दौरान मुख्यालय कार्यालय सहायक श्रमायुक्त, जिला बिलासपुर निर्धारित किया गया है। साथ ही उन्हें निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। यह आदेश श्रमायुक्त के अनुमोदन से अपर श्रमायुक्त (स्थापना), कार्यालय श्रमायुक्त, छत्तीसगढ़, नवा रायपुर, अटल नगर द्वारा आज सोमवार को जारी किया गया है।  

छात्रावास की छात्राओं के संबंध में प्रसारित खबर भ्रामक एवं तथ्यहीन

जांच में स्पष्ट हुए तथ्य, विधानसभा में स्कूल शिक्षा मंत्री ने दिया स्पष्टीकरण रायपुर  पोर्टा केबिन हाई स्कूल छात्रावास की तीन छात्राएँ गर्भवती हैं। इस संबंध में शिक्षा विभाग द्वारा मामले की तथ्यात्मक जांच कराई गई, जिसमें उक्त खबर भ्रामक एवं निराधार पाई गई है। उक्त मामले में आज विधानसभा के सदन में सरकार की ओर से स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने भी स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि मामले में प्रस्तुत तथ्यों की विस्तृत जांच की गई है। मंत्री ने कहा कि जिन तीन छात्राओं का उल्लेख किया जा रहा है, उनमें से दो छात्राएँ पोर्टा केबिन हाई स्कूल छात्रावास की निवासी नहीं हैं। वे स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम विद्यालय, गंगालूर में अध्ययनरत हैं और अपने घर से ही विद्यालय आना-जाना करती हैं। मंत्री ने आगे बताया कि समाचार में उल्लेखित तीसरी छात्रा पूर्व में पोर्टा केबिन हाई स्कूल छात्रावास में अध्ययनरत थी, लेकिन 18 अक्टूबर 2025 को दीपावली अवकाश में घर जाने के बाद से वह छात्रावास वापस नहीं आई। इसके बाद 6 नवंबर 2025 को छात्रा ने छात्रावास में उपस्थित होकर स्वेच्छा से घर से आना-जाना करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। तब से वह छात्रावास में निवास नहीं कर रही है। मंत्री के अनुसार छात्रा को छात्रावास से निष्कासित नहीं किया गया है, बल्कि उसने स्वयं छात्रावास छोड़कर अन्यत्र रहकर पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि संबंधित छात्राओं एवं उनके अभिभावकों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।  

स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा, छात्र स्टार्टअप एवं नवाचार नीति के लिए 5 करोड़ का प्रावधान

  नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा का विस्तार, जगरगुंडा और ओरछा में नए आईटीआई 145 शासकीय आईटीआई में आधुनिक मशीन और उपकरणों के लिए 25 करोड़ रुपये 35 आईटीआई में भवन निर्माण और मरम्मत कार्यों के लिए 25 करोड़ का प्रावधान लाईवलीहुड कॉलेज योजना के लिए 33 करोड़, युवाओं को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण नवा रायपुर में बनेगा अंतर्राष्ट्रीय स्तर का लाईवलीहुड सेंटर ऑफ एक्सीलेंसी, छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण को 38 करोड़ का बजट रायपुर,   छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र फरवरी-मार्च 2026 में कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने विभागीय बजट प्रस्तुत किया। मंत्री ने कहा कि राज्य के आर्थिक विकास के लिए कृषि, उद्योग, शिक्षा, सेवाएं और प्रौद्योगिकी प्रमुख क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों के विकास के लिए कुशल इंजीनियरों और तकनीकी कौशल से युक्त मानव संसाधन का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। राज्य सरकार तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के समुचित विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। तकनीकी शिक्षा के विस्तार और अधोसंरचना विकास पर जोर   मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने बताया कि प्रदेश के 33 जिलों में वर्तमान में 4 छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, 2 शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय, 1 सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी रायपुर, 1 विश्वविद्यालय शिक्षण विभाग (छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई) तथा 20 निजी इंजीनियरिंग महाविद्यालय संचालित हैं। वहीं पॉलीटेक्निक क्षेत्र में 3 सीजीआईटी (पॉलीटेक्निक), 35 शासकीय पॉलीटेक्निक, 1 विश्वविद्यालय शिक्षण विभाग तथा 14 निजी पॉलीटेक्निक संस्थान संचालित हैं। इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में 11 हजार 528 तथा पॉलीटेक्निक संस्थानों में 8,408 सीटें उपलब्ध हैं। तकनीकी शिक्षा विभाग का बजट वर्ष 2018 में 265.49 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर वर्ष 2026-27 में 372.35 करोड़ रुपये हो गया है।          मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने बताया कि राज्य में विश्वस्तरीय तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने के उद्देश्य से रायगढ़, जगदलपुर, कबीरधाम, जशपुर, रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की स्थापना के लिए 12.02 करोड़ रुपये तथा मशीन और उपकरणों की खरीद के लिए 98 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि सीजीआईटी रायगढ़ में अतिरिक्त कक्ष निर्माण और ऑडिटोरियम जीर्णाेद्धार के लिए 2.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।           नया रायपुर स्थित अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के लिए स्थापना अनुदान के रूप में 15 करोड़ रुपये तथा 18 नए पदों के सृजन के लिए 50 लाख  रुपये का प्रावधान किया गया है। गुरु खुशवंत साहेब ने बताया कि छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई के अधोसंरचना विकास हेतु 41.90 करोड़ रुपये की परियोजना में से वर्ष 2026-27 में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त मशीन एवं उपकरण क्रय के लिए 10 करोड़ रुपये तथा स्थापना अनुदान के लिए 20 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। शासकीय पॉलीटेक्निक संस्थान रायपुर (कन्या), दुर्ग, रायगढ़ और धमतरी में मशीन एवं उपकरणों की खरीद के लिए 2 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। शासकीय कन्या पॉलीटेक्निक रायपुर में 150 सीटर छात्रावास और वाहन स्टैंड निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। विद्यार्थियों के लिए योजनाएं और नवाचार          मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को 4 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण पर ब्याज में राहत प्रदान की जाएगी। इसके लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। छात्र स्टार्टअप और नवाचार नीति के क्रियान्वयन के लिए 5 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिससे छात्रों को स्टार्टअप और नवाचार गतिविधियों में सहायता मिलेगी। छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल रायपुर के स्थापना अनुदान एवं परीक्षा प्रतिपूर्ति के लिए 30 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आईटीआई प्रशिक्षण और रोजगार अवसरों का विस्तार          राज्य में वर्तमान में 201 शासकीय तथा 113 निजी आईटीआई संचालित हैं, जिनमें लगभग 61 हजार प्रशिक्षण सीटें उपलब्ध हैं। वर्ष 2025-26 में आईटीआई में प्रवेश के लिए लगभग 76 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिससे युवाओं में व्यावसायिक प्रशिक्षण के प्रति बढ़ती रुचि स्पष्ट होती है। नक्सल प्रभावित ओरछा विकासखंड में नवीन आईटीआई की स्थापना की गई है, जिससे अब राज्य के सभी विकासखंडों में आईटीआई संचालित हो रहे हैं। आईटीआई में मैकेनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर टेक्नीशियन तथा ड्रोन टेक्नीशियन जैसे आधुनिक और रोजगारोन्मुख कोर्स शुरू किए जा रहे हैं।              जगरगुंडा (सुकमा) और ओरछा (नारायणपुर) में एजुकेशन सिटी के अंतर्गत नवीन आईटीआई स्थापना, पद सृजन, छात्रावास एवं भवन निर्माण के लिए 3 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा 145 शासकीय आईटीआई में मशीन, औजार और उपकरणों की व्यवस्था के लिए 25 करोड़ रुपये तथा 35 आईटीआई में भवन निर्माण एवं विशेष मरम्मत कार्यों के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।             मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने बताया कि प्रदेश के 33 जिलों में जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र संचालित हैं। वर्ष 2025-26 में 372 प्लेसमेंट कैम्प आयोजित कर 9 हजार 756 युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए। वर्ष 2026-27 में रोजगार मेलों के आयोजन के लिए 3 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कौशल विकास को मिलेगा नया प्रोत्साहन           छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण के लिए वर्ष 2026-27 में 38 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत अब तक 4 लाख 91 हजार 543 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से 2 लाख 72 हजार 754 युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ है। वर्तमान में 366 संस्थाएं कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रही हैं, जिनमें 212 लघु अवधि के कोर्स संचालित हैं। युवाओं को आधुनिक क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण देने के लिए महिंद्रा एंड महिंद्रा, साइरोनिक्स टेक्नोलॉजी, नांदी फाउंडेशन, द लॉन्ड्री बैग तथा सत्य साई हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ अनुबंध किए गए हैं।          राज्य परियोजना लाईवलीहुड कॉलेज सोसायटी के लिए वर्ष 2026-27 में 33 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना के तहत अब तक 67 हजार 118 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। नवा रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कौशल प्रशिक्षण संस्थान के रूप में लाईवलीहुड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी, जिसके लिए भूमि लीज अनुबंध हेतु 2 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।          मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि राज्य सरकार तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास … Read more

समानता के मार्ग पर सरकार, “मनखे-मनखे एक समान” हमारा मूल मंत्र : मंत्री गुरु खुशवंत साहेब

अनुसूचित जाति विकास विभाग के लिए 573 करोड़ रूपए की अनुदान मांग पारित अनुसूचित जाति उपयोजना में 12 हजार 970 करोड़ का प्रावधान, छात्रों और आजीविका पर जोर सीजी एसीई, यूपीएससी, सीजीपीएससी सहित बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उड़ान, शिखर और मंजिल’ से मिलेगा युवाओं को विशेष अवसर छात्रावास नहीं मिलने वाले विद्यार्थियों के लिए मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना: ढाई करोड़ रूपए का प्रावधान विभिन्न जिलों में छात्रावास भवनों के लिए 25 करोड़ का प्रावधान सतनाम पंथ के तीर्थ स्थलों का होगा विकास, गिरौदपुरी-भण्डारपुरी क्षेत्र में नई सुविधाएं रायपुर अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के विभाग के लिए 12 हजार 970 करोड़ रूपए की अनुदान मांगें विधानसभा में आज पारित कर दी गई है।            मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने विधानसभा में वर्ष 2026-27 के लिए अनुसूचित जाति विकास विभाग के अनुदान मांगों पर चर्चा के जवाब में कहा कि हमारी सरकार समाज के अंतिम छोर पर खड़े अनुसूचित जाति वर्गों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हमारी सरकार प्रातः स्मरणीय, विश्ववंदनीय परम् पूज्य बाबा गुरु घासीदास बाबा जी के मनखे-मनखे एक समान के संदेश पर चल रही है। इसी कड़ी में सरकार अनुसूचित जातियों की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करते हुए उनके समग्र विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है।            मंत्री साहेब  ने बताया कि अनुसूचित जाति कल्याण हेतु 7 करोड़ 15 लाख 39 हजार रुपये तथा अनुसूचित जाति उपयोजना हेतु 565 करोड़ 89 लाख 8 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार कुल बजट 573 करोड़ 4 लाख 47 हजार रुपये बजट का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष के मुख्य बजट 531 करोड़ 17 लाख 64 हजार रुपये की तुलना में 7.88 प्रतिशत अधिक है। अनुसूचित जाति उपयोजना में बड़ा प्रावधान            मंत्री गुरू खुशवंत साहेब ने बताया कि राज्य के मुख्य बजट में अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत विभिन्न विभागों के माध्यम से 12,970 करोड़ 2 लाख 45 हजार रुपए का समेकित बजट प्रावधान किया गया है।  यह राशि विकास और अधोसंरचना से जुड़ी योजनाओं पर खर्च की जाएगी। नई योजनाओं पर विशेष ध्यान देते हुए          गुरु खुशवंत साहेब ने सदन में बताया कि बजट में कई नई योजनाओं के लिए प्रावधान किया गया है। इनमें अनुसूचित जाति विकास संचालनालय की स्थापना के लिए 30 नए पदों के सृजन हेतु 2 करोड़ 26 लाख 4 हजार रुपये का प्रावधान शामिल है। परंपरागत चर्म शिल्प व्यवसाय से जुड़े लोगों की आजीविका सुधारने के लिए प्रशिक्षण और सामग्री उपलब्ध कराने हेतु 2 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। छात्रावास और शैक्षणिक सुविधाओं का विस्तार         मंत्री ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए 342 प्री-मैट्रिक छात्रावास, 92 पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास और 51 आश्रम संचालित हैं, जिनमें कुल 25 हजार 927 सीटें स्वीकृत हैं। उन्होंने बताया कि भवन विहीन संस्थाओं के लिए नए भवनों के निर्माण हेतु 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत बिलासपुर, मुंगेली, रायपुर, जशपुर और बेमेतरा जिलों में छात्रावास, क्रीड़ा परिसर और आवासीय विद्यालय बनाए जाएंगे। प्रदेश के बड़े शहरों छात्रावासों में प्रवेश नहीं मिल पाने पर विद्यार्थियों को सहायता देने के लिए मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना के अंतर्गत 2 करोड़ 50 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही विद्यार्थियों के शैक्षणिक अध्ययन भ्रमण के लिए एक करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नई योजना के तहत            अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को उच्च प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने हेतु सीजी-अस्सिटेंस फॉर कम्पेटीटिव एक्जामिनेशन योजना शुरू किया जाएगा। इसके तीन घटक क्रमशः ‘उड़ान’, ‘शिखर’ और ‘मंजिल’ के लिए कुल 7 करोड़ 47 लाख 70 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के माध्यम से इंजीनियरिंग, मेडिकल, यूपीएससी, सीजीपीएससी, एसएससी, रेलवे और बैंकिंग परीक्षाओं की तैयारी हमारे युवा प्रतिभागी कर सकेंगे। धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों का विकास          मंत्री साहेब ने बताया कि सतनाम पंथ के प्रवर्तक गुरु  घासीदास से जुड़े तीर्थ स्थलों के विकास के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है। गिरौदपुरी-भण्डारपुरी क्षेत्र में सोलर स्ट्रीट लाइट, सतनाम मार्ग के विकास और सामुदायिक भवन निर्माण के लिए राशि का प्रावधान की गई है। इसके लिए कुल 2.50 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण को बढ़ी राशि सरकार ने अनुसूचित जाति बाहुल्य जिलों के विकास के लिए गठित प्राधिकरण के बजट में 25 करोड़ रुपये की वृद्धि करते हुए इसे 75 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है।  मंत्री साहेब  ने कहा कि सामाजिक समरसता के संदेश “मनखे-मनखे एक समान” को आधार बनाकर सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के उत्थान और विकास के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।