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मुख्यमंत्री साय ने किया “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” के पोस्टर का विमोचन

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने  राजधानी स्थित निवास कार्यालय में "इनोवेशन महाकुंभ 1.0" के पोस्टर का विमोचन किया। इस अवसर पर शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर के कुलपति  मनोज वास्तव और स्वावलंबी भारत अभियान के प्रांत समन्वयक  जगदीश पटेल भी उपस्थित रहे। बस्तर के युवाओं में नवाचार,उद्यमिता और स्वरोजगार में तकनीक आधारित विकास हेतु “ इनोवेशन महाकुंभ 1.0 का आयोजन आगामी 4 एवं 5 मई को किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर और स्वावलंबी भारत अभियान, पीएम ऊषा एवं इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल के साथ किया जाएगा। जिसमें एनआईटी रायपुर,आईआईएम रायपुर,आईआईटी भिलाई, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् की भी सहभागिता होगी।

TET रिजल्ट ने बढ़ाई टेंशन: छत्तीसगढ़ के हजारों शिक्षकों की नौकरी पर खतरा

रायपुर. शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET 2026) के परिणाम से शिक्षा विभाग और शिक्षकों में उथल-पुथल मची है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद राज्य के सरकारी स्कूलों में वर्षों से सेवाएं दे रहे हजारों शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। अनिवार्य की गई टीईटी के हालिया नतीजों ने विभाग और शिक्षक संगठनों की नींद उड़ा दी है। दरअसल, एक फरवरी 2026 को आयोजित परीक्षा में बगैर टीईटी के लगभग 80 हजार शिक्षकों में केवल आठ प्रतिशत शिक्षक (लगभग पांच हजार) ही सफल हो सके हैं। लगभग 75 हजार शिक्षक बिना टीईटी योग्यता वाले वर्तमान में राज्य में लगभग 75 हजार शिक्षक बिना टीईटी योग्यता वाले हैं। टीईटी में प्राथमिक स्तर (कक्षा पहली से पांचवीं) में कुल 1,02,506 परीक्षार्थियों में से केवल 19,292 ही उत्तीर्ण हुए हैं। जबकि 83,214 अभ्यर्थी असफल रहे। इस स्तर पर कुल पात्रता प्रतिशत 18.82 प्रतिशत रहा। उच्च प्राथमिक स्तर 36,377 अभ्यर्थी सफल वहीं उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा छठवीं से आठवीं) में 1,82,384 परीक्षार्थियों में से 36,377 अभ्यर्थी सफल हुए हैं, जबकि 1,46,007 असफल रहे। इस स्तर पर पात्रता प्रतिशत 19.94 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इनमें शिक्षक और अन्य अभ्यर्थी दोनों ही शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट का कड़ा आदेश और वर्तमान स्थिति उच्चतम न्यायालय ने एक सितंबर 2025 को एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया था कि देश के सभी सरकारी और गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों (अल्पसंख्यक संस्थानों को छोड़कर) में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। बिना इस पात्रता के न तो नौकरी सुरक्षित रहेगी और न ही भविष्य में पदोन्नति (प्रमोशन) मिल सकेगी। इसी आदेश के अनुपालन में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने व्यापमं के माध्यम से परीक्षा आयोजित की थी। अब शिक्षक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है विभागीय परीक्षा और पाठ्यक्रम में ढील की मांग परीक्षा के कठिन स्तर और निराशाजनक परिणाम को देखते हुए अब शिक्षक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और डीपीआइ को पत्र लिखकर मांग की है कि सेवारत शिक्षकों के लिए एक 'सीमित विभागीय टीईटी' आयोजित की जाए। संगठनों का तर्क है कि वर्तमान टीईटी का पाठ्यक्रम बहुत कठिन है, जिससे अनुभवी शिक्षकों को परेशानी हो रही है। यदि पाठ्यक्रम में शिथिलता प्रदान करते हुए विभागीय परीक्षा ली जाती है, तो शिक्षकों की नौकरी का संकट भी टलेगा और अदालती आदेश का पालन भी सुनिश्चित होगा। डीपीआइ ने शुरू की कवायद, मांगा डेटा शिक्षक संगठनों के दबाव के बाद लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआइ) एक्शन मोड में आ गया है। 13 मार्च 2026 को जारी एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से सभी संयुक्त संचालकों (जेडी) और जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) से शिक्षकों का आयुवार और श्रेणीवार डेटा मांगा गया है। विभाग अब इस जानकारी के आधार पर एक नई कार्ययोजना तैयार कर रहा है, जिससे बीच का कोई रास्ता निकाला जा सके। दिल्ली में प्रदर्शन की चेतावनी शिक्षकों के सब्र का बांध अब टूटता नजर आ रहा है। प्रदेश शिक्षक महासंघ के अध्यक्ष राजनारायण द्विवेदी ने दोटूक कहा है कि यदि नियमों में रियायत नहीं दी गई, तो प्रदेश के हजारों शिक्षक चार अप्रैल को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन करेंगे। शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से पढ़ा रहे हैं, ऐसे में अचानक उन पर कठिन परीक्षा थोपना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।  

जड़ी-बूटी विरासत बचाने की दिशा में बड़ा कदम, केदार कश्यप बोले—सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध

रायपुर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप आज छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के नवनियुक्त उपाध्यक्ष  अंजय शुक्ला के पदभार ग्रहण समारोह में शामिल हुए। यह कार्यक्रम राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर, जीरो प्वाइंट, रायपुर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा , विधायक  किरण सिंह देव, विधायक  अनुज शर्मा और विधायक  इंद्रकुमार साहू अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।           वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक वन संपदा से समृद्ध राज्य है, जहां लगभग 44.21 प्रतिशत क्षेत्र में वन हैं। यहां के वनों में विभिन्न प्रकार की वनौषधियां पाई जाती हैं, जिनका उपयोग प्राचीन काल से उपचार के लिए किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने और आमजन तक इसके लाभ पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 से 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन  अंजय शुक्ला द्वारा उपाध्यक्ष का पदभार ग्रहण करना एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके अनुभव से औषधि पादप बोर्ड को मजबूती मिलेगी और यह नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।           समारोह में तकनीकी शिक्षा मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि औषधि पादप बोर्ड द्वारा वैद्य सम्मेलन, वनौषधि प्रदर्शनी और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि  शुक्ला के मार्गदर्शन में बोर्ड और बेहतर कार्य करेगा। कार्यक्रम को विधायक  किरण सिंह देव ने भी संबोधित करते हुए कहा कि  शुक्ला के अनुभव का लाभ औषधि पादप बोर्ड को मिलेगा और बोर्ड नए आयाम स्थापित करेगा। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष  विकास मरकाम ने कि राज्य सरकार वन औषधीय के पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और संवर्धन के लिए पादप बोर्ड का गठन किया है। जो लगातार बेहतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने  शुक्ला को बधाई देते हुए कहा पादप बोर्ड को उनके अनुभव का निश्चित ही लाभ मिलेगा और बोर्ड बेहतर नवाचार करेगा।         कार्यक्रम में अपेक्स बैंक के अध्यक्ष  केदारनाथ गुप्ता, खाद्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव, अध्यक्ष अल्प संख्यक आयोग  अमरजीत सिंह छाबड़ा, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम,  लोकेश कावड़िया, अध्यक्ष, रायपुर विकास प्राधिकरण  नंदकुमार साहू , , जिला पंचायत सदस्य मती स्वाती वर्मा, सतनामी समाज के धर्मगुरू गुरू बालदास,  रमेश सिंह ठाकुर, मान उपकार चंद्राकर , अंजिनेश शुक्ल पिंटू साहू   श्याम नारंग सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  जे.ए.सी.एस. राव  सुरेन्द्र पाटनी,  अमित साहू,  आलोक साहू सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

CM साय का सख्त रुख: रोप-वे हादसे की जांच के बाद जिम्मेदारों पर गिरेगी गाज

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महासमुंद जिला स्थित प्रसिद्ध खल्लारी मंदिर में आज सुबह हुए रोप-वे हादसे को दुखद बताया. उन्होंने कहा कि घटना की जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज कवर्धा और बलौदाबाजार जिले के दौर पर रवाना होने से पहले मीडिया से चर्चा की. उन्होंने बताया कि कवर्धा में लोधी समाज द्वारा अवंति बाई की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें शामिल होंगे. इसके अलावा बलौदाबाजार में गोंडवाना समाज की ओर से आयोजित आदर्श विवाह समारोह में शामिल होंगे. वहीं शाम को केरल के दौरे को लेकर कहा कि कल (केरल विधानसभा चुनाव के लिए) बीजेपी प्रत्याशियों का नामांकन है. उसमें शामिल होने जा रहे हैं. विधानसभा में पारित धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को लेकर मिल रही लोगों से बधाई पर कहा कि कल हम सरगुजा गए थे, वहां अनुसूचित जनजाति मोर्चा ने मुलाकात के दौरान विधेयक का स्वागत किया. रायपुर में भी सीएम हाउस पहुंचे लोगों ने धन्यवाद दिया.  एक मौत, 17 श्रद्धालु घायल हादसे में एक महिला की मौत हो गई है जबकि 17 श्रद्धालु घायल हुए हैं। नीचे वाली ट्राली में 9 लोग और ऊपर वाली ट्राली में 8 लोग सवार थे। मौके पर मौजूद लोगों और मंदिर प्रबंधन व पुलिस ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल महासमुंद भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है। रोप-वे सेवा को तत्काल बंद कर दिया गया घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। एहतियात के तौर पर रोप-वे सेवा को तत्काल बंद कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच में तकनीकी खराबी को हादसे का कारण माना जा रहा है, हालांकि विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं। स्थानीय लोगों ने लापरवाही का आरोप लगाया स्थानीय लोगों ने रोप-वे की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही का आरोप लगाया है। प्रशासन ने मामले में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ज्ञात हो कि नवरात्र जारी है और मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ है।

केला उत्पादन से बढ़ी आमदनी, उद्यानिकी खेती से मिला नया सहारा

बिलासपुर कहते हैं खेती में नई तकनीक और सही फैसले किसान की तकदीर बदल देते हैं, और इसे सच कर दिखाया है तखतपुर विकासखण्ड के ग्राम कपसिया कला के किसान  हेतराम मनहर ने। पारंपरिक धान की खेती छोड़कर केला उत्पादन अपनाने वाले  मनहर आज लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।      उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के अंतर्गत केला (जी-9 किस्म) की खेती शुरू की। विभाग से प्राप्त तकनीकी सहयोग, उन्नत पौध सामग्री एवं वैज्ञानिक पद्धतियों के उपयोग से उन्होंने लगभग 0.900 हेक्टेयर क्षेत्र में केला फसल का रोपण किया। उचित देखभाल और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उन्हें लगभग 510 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस फसल में करीब 1.70 लाख रुपये की लागत आई, जबकि 4 से 5 लाख रुपये तक की आय अर्जित हुई, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक है।        केला उत्पादन से हुई अतिरिक्त आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। अब वे परिवार की जरूरतों के साथ बच्चों की शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं पर भी बेहतर ध्यान दे पा रहे हैं।  हेतराम मनहर की यह सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है और यह दर्शाती है कि फसल परिवर्तन एवं आधुनिक खेती अपनाकर बेहतर आय अर्जित की जा सकती है।

स्टील घोटाले पर बड़ा एक्शन: CBI ने महारत्न कंपनी SAIL पर कसा शिकंजा

भिलाई. देश की प्रतिष्ठित महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी सेल में सामने आई कथित स्टील आपूर्ति अनियमितता अब बड़े घोटाले का रूप ले चुकी है। लोकपाल के स्पष्ट निर्देश के बाद सीबीआइ ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है, जिससे अब कंपनी के शीर्ष प्रबंधन और पूर्व निदेशकों तक जांच की आंच पहुंच गई है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में सेल को लगभग 300 से 350 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बीएसपी में तैयार टीएमटी स्टील की बड़ी मात्रा भी कथित तौर पर फर्जी या गैर-पात्र प्रोजेक्ट कंपनियों को सप्लाई की गई। इससे संकेत मिलता है कि अनियमितता केवल एक इकाई तक सीमित न रहकर पूरे नेटवर्क में फैली हुई थी। 1.5 लाख टन स्टील से खुला घोटाले का राज जांच की शुरुआत तब हुई जब यह सामने आया कि वेंकटेश इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को प्रोजेक्ट वर्क्स स्कीम के तहत 1.5 लाख टन से अधिक स्टील की आपूर्ति की गई, जबकि कंपनी इस योजना के लिए पात्र ही नहीं थी। लोकपाल ने 10 जनवरी 2024 को सीबीआइ जांच के आदेश दिए, जिसके बाद एजेंसी ने 10 अक्टूबर 2024 को एफआइआर दर्ज कर मामले की औपचारिक जांच शुरू की। 29 वरिष्ठ अधिकारी निलंबित, फिर बहाली पर उठे सवाल लोकपाल के आदेश के बाद सेल प्रबंधन ने 29 वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किया था, जिनमें निदेशक स्तर के दो अधिकारी भी शामिल थे। हालांकि, 28 जून 2024 को जांच में देरी का हवाला देकर सभी अधिकारियों की बहाली कर दी गई। इस निर्णय ने पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 35 निजी कंपनियां जांच के घेरे में जांच में यह भी सामने आया है कि वेंकटेश इंफ्रा के अलावा 35 से अधिक निजी कंपनियों को नियमों को दरकिनार कर स्टील सप्लाई की गई। इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और गैर-प्रोजेक्ट सेक्टर की कंपनियां शामिल हैं, जिन्हें इस स्कीम का लाभ मिलना ही नहीं चाहिए था। इन कंपनियों में कई नाम शामिल हैं, जैसे ब्रिक टू वाल इंफ्राटेक, ओएफबी टेक, लैंडसिएर्ज स्टेट, नोबेल टेक इंडस्ट्रीज, आर्टिस्टी इंफ्राकॉन, स्ट्राइक इंफ्राकान, जारैली प्रोजेक्ट्स, श्री सिद्धबाली इस्पात, एसएमडब्ल्यू इस्पात, रुद्रनाथ इंफ्रा, रेनबो वाणिज्य, सिल्वर वाटर मेटल एंड मिनरल्स, पीवीवी इंफ्रा लिमिटेड सहित अन्य। व्हिसलब्लोअर को ही चुकानी पड़ी कीमत इस पूरे मामले को उजागर करने वाले व्हिसलब्लोअर राजीव भाटिया बताए जा रहे हैं। उन्होंने पहले भी स्टील आपूर्ति में गड़बड़ी को लेकर उच्च स्तर पर शिकायत की थी। लेकिन कार्रवाई भ्रष्टाचार पर होने के बजाय, उन्हें 11 फरवरी 2025 को सीसीएस नियम 56(जे) के तहत समयपूर्व सेवानिवृत्त कर दिया गया। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, भाटिया को एक ईमानदार और निर्भीक अधिकारी माना जाता था। उनकी बर्खास्तगी को लेकर उच्च स्तर तक असंतोष की चर्चाएं हैं। सीएमडी पर भी उठे सवाल, इस्तीफे की अटकलें जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि सेल के वर्तमान सीएमडी अमरेंदु प्रकाश भी जांच के दायरे में हैं। आरोप है कि अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद कई कंपनियों को स्टील आपूर्ति की अनुमति दी गई। प्रशासनिक हलकों में उनके इस्तीफे को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सरकारी धन से कानूनी खर्च पर विवाद एक और बड़ा विवाद इस बात को लेकर खड़ा हुआ है कि सीबीआइ जांच का सामना कर रहे अधिकारियों की कानूनी लड़ाई के लिए सेल द्वारा करीब 70 लाख रुपये अधिवक्ताओं की फीस में खर्च किए गए। अब मांग उठ रही है कि यह राशि संबंधित अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से वसूली जाए। सबसे बड़ा सवाल, क्या होगी कार्रवाई? पूरे मामले ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि क्या इस कथित स्टील घोटाले में जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर मामला अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाता है।

फर्जीवाड़े का जाल टूटा: रायपुर में करोड़ों के हाउसिंग लोन स्कैम का पर्दाफाश

रायपुर. राजधानी रायपुर में अविभाजित मध्य प्रदेश के दौरान हुए एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है, जिसने सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) की कार्रवाई में आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति के अध्यक्ष थावर दास माधवानी और तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक बसंत साहू की 26 वर्षों बाद पिछले दिनों हुई गिरफ्तारी के बाद इस घोटाले की गहरी साजिश का राजफाश हुआ है। 186 लोगों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए मुख्य आरोपित थावर दास ने अपने परिचितों और रिश्तेदारों को मोहरा बनाकर 186 लोगों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और मध्य प्रदेश सहकारी आवास संघ से प्रति व्यक्ति एक लाख रुपये के हिसाब से कुल 1.86 करोड़ रुपये का लोन स्वीकृत कराया। अन्य शहरों में निवासरत पीड़ितों के बयान दर्ज किए जब इस मामले की शिकायत और जांच शुरू हुई, तब यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। ईओडब्ल्यू की टीम ने दोनों आरोपितों को 25 मार्च तक रिमांड पर लेकर पूछताछ की और रायपुर, भाटापारा सहित अन्य शहरों में निवासरत पीड़ितों के बयान दर्ज किए। वास्तविकता में समिति के पास एक इंच भी जमीन नहीं थी थावर दास ने पंडरी में अपनी कपड़ा दुकान के माध्यम से रायपुरा, बोरियाकला, राखी और पंडरी-कांपा जैसे क्षेत्रों में 80 एकड़ जमीन होने का दावा किया, लेकिन ईओडब्ल्यू की जांच में यह सामने आया कि वास्तविकता में समिति के पास एक इंच भी जमीन नहीं थी। कागजों पर मकानों का निर्माण कार्य भी दिखाया जाता रहा हैरानी की बात यह है कि आवास संघ के तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से कागजों पर मकानों का निर्माण कार्य भी दिखाया जाता रहा। दिवंगत क्षेत्रीय अधिकारी एई ग्रेबियल और पर्यवेक्षक बसंत साहू ने बिना किसी भौतिक सत्यापन के आवास निर्माण पूर्ण होने के प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए। वर्षों तक पता नहीं चला कि उनके नाम पर लाखों का कर्ज लिया गया जब ईओडब्ल्यू की टीम पीड़ितों के घर पहुंची, तो कई लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई। लक्ष्मीचंद चिमनानी, दिलीप बलानी, त्रिजुगी नारायण, मोहनलाल अग्रवाल, नरेंद्र कश्यप, अशोक नाग और लक्ष्मीचंद ललवानी जैसे पीड़ितों ने बताया कि उन्हें वर्षों तक इस बात का पता नहीं चला कि उनके नाम पर लाखों का कर्ज लिया गया है। थावर दास पर उनका इतना भरोसा था कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह उनके नाम का उपयोग कर इतना बड़ा घोटाला कर देगा। जब अधिकारियों ने लोन के कागजात दिखाए, तब उन्हें एहसास हुआ कि वे बिना मकान के ही कर्जदार बना दिए गए हैं। फर्जी प्रमाण पत्रों का सहारा लिया गया कई पीड़ितों ने कहा कि उनसे न तो कभी हस्ताक्षर लिए गए और न ही उन्हें समिति का सदस्य बनाने की जानकारी दी गई। यह पूरी तरह से एक संगठित आपराधिक षड्यंत्र था, जिसमें फर्जी प्रमाण पत्रों का सहारा लिया गया। मुख्य आरोपित थावर दास ने अपने करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों को इस ठगी का औजार बनाया। 186 जरूरतमंदों के नाम पर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए 1995 से 1998 के बीच, तत्कालीन मध्य प्रदेश सरकार की शहरी आवास योजना के तहत 186 जरूरतमंदों के नाम पर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए। इन फर्जी सदस्यों के नाम पर मध्य प्रदेश सहकारी आवास संघ से प्रति व्यक्ति एक लाख रुपये का लोन स्वीकृत कराया गया। विभागीय अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद रखी थीं ईओडब्ल्यू के जांच अधिकारियों ने बताया कि इस घोटाले की जड़ें आवास संघ के भीतर तक फैली थीं। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि विभागीय अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद रखी थीं। उपयोगिता प्रमाण पत्र से लेकर निर्माण के विभिन्न चरणों की रिपोर्ट तक, सब कुछ दफ्तर में बैठकर तैयार किया गया। ईओडब्ल्यू अब इस मामले में अन्य कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

मंदिर में अफरा-तफरी: खल्लारी रोप-वे केबल टूटने से 8 लोग जख्मी

महासमुंद. खल्लारी स्थित प्रसिद्ध खल्लारी मंदिर में रविवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। मंदिर में संचालित रोप-वे का केबल अचानक टूट गया। घटना के समय रोप-वे में श्रद्धालु सवार थे, जिससे अफरा-तफरी मच गई। केबल टूटते ही ट्रॉली झटके के साथ नीचे की ओर आई, जिससे उसमें बैठे लोग घायल हो गए। हादसे में कुल 8 श्रद्धालु घायल हादसे में कुल 8 श्रद्धालु घायल हुए हैं, जिनमें कुछ को गंभीर चोटें आई हैं। मौके पर मौजूद लोगों और मंदिर प्रबंधन व पुलिस ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल महासमुंद भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है। रोप-वे सेवा को तत्काल बंद कर दिया गया घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। एहतियात के तौर पर रोप-वे सेवा को तत्काल बंद कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच में तकनीकी खराबी को हादसे का कारण माना जा रहा है, हालांकि विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं। स्थानीय लोगों ने लापरवाही का आरोप लगाया स्थानीय लोगों ने रोप-वे की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही का आरोप लगाया है। प्रशासन ने मामले में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ज्ञात हो कि नवरात्र जारी है और मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ है। अप्रैल 2024 से शुरू है रोप-वे सेवा महासमुंद जिले के प्रसिद्ध खल्लारी माता मंदिर में रोप-वे की सुविधा अप्रैल 2024 चैत्र नवरात्रि से पूरी तरह से संचालित है, जिससे श्रद्धालुओं को 842-981 सीढ़ियां चढ़ने की थकान से मुक्ति मिल गई है। रोप-वे का भूमिपूजन 2021 में किया गया था। इसका निर्माण कोलकाता की कंपनी "रोपवे एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने किया। रोप-वे का संचालन मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से नियमित रूप से भक्तों के लिए किया जा रहा है। चैत्र नवरात्र में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी हुई है। पहाड़ी की 130 मीटर की ऊंचाई को कवर करता है इस रोप-वे परियोजना का निर्माण मंदिर ट्रस्ट और कोलकाता की इस निजी कंपनी ने मिलकर किया है। इस रोप-वे में कुल चार ट्रॉली लगाई गई हैं, जिसमें प्रत्येक ट्रॉली में 4 व्यक्ति बैठ सकते हैं। यह प्रणाली एक घंटे में लगभग 200 लोगों को दर्शन कराने की क्षमता रखती है। यह रोप-वे लगभग 300-350 मीटर लंबा है और पहाड़ी की 130 मीटर की ऊंचाई को कवर करता है।

तेज रफ्तार ट्रेन में नशे का खेल: वंदे भारत से 24 किलो गांजा बरामद, दो महिलाएं पकड़ी गईं

रायपुर. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने रायपुर रेलवे स्टेशन पर रात घेराबंदी कर वंदे भारत एक्सप्रेस से दो युवतियों को पकड़ा। आरोपित युवतियों से 24 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया है, जिसे वे सूटकेस में छिपाकर ले जा रही थीं। एनसीबी को पहले ही सूचना मिली थी कि विशाखापत्तनम की ओर से दो युवतियां मादक पदार्थ लेकर लौट रही हैं। सूचना के आधार पर टीम ने शुक्रवार रात करीब 10:30 बजे रायपुर स्टेशन पर जाल बिछाया। बिलासपुर के तिफरा की रहने वाली हैं आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही संदिग्ध युवतियां वीआइपी गेट से बाहर निकल रही थीं, तभी टीम ने दबोच लिया। तलाशी में सूटकेस से गांजा बरामद हुआ। गिरफ्तार की गई आरोपित युवतियां बिलासपुर के तिफरा की रहने वाली हैं। इनमें नीलम राठौर (23) और रीना वर्मा (21) शामिल हैं। लग्जरी सफर का लिया सहारा जांच में यह बात सामने आई कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए तस्करों ने वंदे भारत एक्सप्रेस के सेकंड एसी कोच का सहारा लिया। सामान्यतः प्रीमियम ट्रेनों में कड़ी जांच की संभावना कम मानकर तस्कर इस तरह के लग्जरी कोच का उपयोग कर रहे हैं। रायगढ़ में दो करोड़ के पौधे व अफीम जब्त वहीं, आमाघाट में अफीम की खेती का राजफाश होने के बाद जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। फल में चीरा लगाकर 3.02 किलोग्राम अफीम तैयार कर ली गई थी, जिसे आरोपित के घर से बरामद किया गया है। इसके साथ ही खेत से 60,326 अफीम के पौधे जब्त किए गए हैं, जिनका कुल वजन 2,877 किलोग्राम है। अफीम और पौधों की कीमत करीब दो करोड़ रुपये है। 20 मार्च को अफीम की खेती का राजफाश किया था रिकॉर्ड के अनुसार, जिस भूमि पर खेती की जा रही थी, वह पांच खसरा भागों में 70 डिसमिल है। 20 मार्च को पुलिस-प्रशासन की टीम ने आमाघाट क्षेत्र में अफीम की खेती का राजफाश किया था। कार्रवाई के दौरान खेत में काम कर रहे दो व्यक्ति मौके से फरार हो गए, जबकि एक व्यक्ति मार्शल संगा को गिरफ्तार किया गया। वह झारखंड के खूंटी का निवासी है और आमाघाट में घर जमाई बनकर रह रहा था। मार्शल संगा ने घर में छिपा रखी थी 15 लाख की अफीम पूछताछ में मार्शल संगा ने बताया कि उसके पास इस खेती से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं। उसने खूंटी से ही इमानवेल भेंगरा और सीप्रियन भेंगरा को अपने साथ लाने की बात भी स्वीकार की। राजस्व विभाग की टीम ने पुष्टि की कि फसल लगी जमीन पांच खसरा में विभाजित है। मार्शल संगा ने यह भी बताया कि उसने फसल से निकाली गई अफीम को अपने घर में छिपाकर रखा था। उसके निवास पर जाकर जांच करने पर एक प्लास्टिक में 3.02 किलोग्राम अफीम बरामद की गई, जिसकी कीमत 15 लाख 10 हजार रुपये है। पुलिस ने मार्शल संगा, इमानवेल भेंगरा और सीप्रियन भेंगरा के खिलाफ धारा 8 (बी) और 18 एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस टीम फरार आरोपितों की तलाश में झारखंड और अन्य संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

स्कूल हॉस्टल में बड़ा मामला: 10वीं की छात्रा प्रेग्नेंट, कलेक्टर का सख्त एक्शन

सुकमा. जिले के एक शासकीय विद्यालय में कक्षा 10वीं की छात्रा के गर्भवती पाए जाने के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है. जांच में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद छात्रावास अधीक्षिका को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. दरअसल, 17 मार्च को विद्यालय में निवासरत छात्रा के स्वास्थ्य संबंधी सूचना मिलने पर मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था. जांच दल ने 20 मार्च को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें अधीक्षिका द्वारा अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही की पुष्टि की गई. जांच में सामने आया कि छात्रा के गर्भवती होने की जानकारी अधीक्षिका को होने के बावजूद इसे उच्चाधिकारियों से साझा नहीं किया गया. साथ ही, छात्रावास के संचालन में भी खामियां पाई गईं और छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक उजागर हुई. मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर अमित कुमार ने माहेश्वरी निषाद (मूल पद: प्रधान पाठक, प्राथमिक शाला ओडडीन गुड़ा) को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत निलंबित कर दिया है. निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कोंटा निर्धारित किया गया है. विद्यालय के संचालन की जिम्मेदारी आगामी आदेश तक सहायक अधीक्षिका को सौंप दी गई है. जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा और अनुशासन से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी.