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राजनांदगांव में मार्च की शुरुआत में 38° पारा, अगले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी, मौसम रहेगा ड्राई

रायपुर  छत्तीसगढ़ में मार्च के पहले सप्ताह से ही गर्मी का असर तेज होने लगा है। दिन में तेज धूप और साफ मौसम के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है। शनिवार को प्रदेश के कई जिलों में अधिकतम तापमान सामान्य से करीब दो डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। बढ़ती गर्मी के कारण अब कई घरों में एसी और कूलर भी चालू होने लगे हैं।  मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को पूरे प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहा और कहीं भी बारिश दर्ज नहीं की गई। इस दौरान सबसे अधिक अधिकतम तापमान राजनांदगांव में 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में लगभग 15 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। मौसम एक्सपर्ट के अनुसार उड़ीसा और उसके आसपास के क्षेत्र में लगभग 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसी क्षेत्र से एक द्रोणिका उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश तक उत्तर छत्तीसगढ़ से होते हुए लगभग 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैली हुई है। हालांकि इन मौसमी परिस्थितियों का प्रदेश के मौसम पर फिलहाल कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ रहा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले चार दिनों तक प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहेगा और अधिकतम तथा न्यूनतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। हालांकि मार्च के दूसरे सप्ताह में गर्मी का असर धीरे-धीरे और बढ़ सकता है। राजधानी रायपुर में रविवार सुबह हल्की धुंध देखने को मिल सकती है। इसके बाद दिन में आसमान साफ रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार आज अधिकतम तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। रायपुर में आज हल्की धुंध के आसार राजधानी के लिए जारी स्थानीय पूर्वानुमान के मुताबिक आज (8 मार्च) को शहर में हल्की धुंध (हेज) रहने की संभावना है। यहां अधिकतम तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 22 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। अगले दो दिन भी मौसम रहेगा शुष्क मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में फिलहाल कोई सिनोप्टिक सिस्टम सक्रिय नहीं है। इसी कारण अगले दो दिनों तक पूरे प्रदेश में मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है। साथ ही कहीं भी बारिश या मौसम से जुड़ी कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।. फरवरी में ठंड कम रही रायपुर की बात करें तो जनवरी की तरह फरवरी महीने में भी आसमान आमतौर पर साफ बना रहता है और सतही हवाएं हल्की रहती हैं। हालांकि उत्तर भारत से गुजरने वाले वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर से कभी-कभार मौसम में बदलाव देखने को मिलता है। फरवरी के आखिरी में मौसम में बदलाव देखने को मिला, दो-तीन दिन कहीं-कहीं बारिश की स्थिति बनी रही। इस दौरान बादल छाने के साथ गरज-चमक और बारिश की स्थिति बनती हैं। कुछ मौकों पर आंधी, ओलावृष्टि और तेज हवाएं भी चलती हैं। सर्दियों का असर कम होते ही न्यूनतम तापमान धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। कुछ स्थितियों में न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस से नीचे भी चला जाता है। इसके साथ ही कुछ वर्षों में फरवरी महीने में अच्छी बारिश भी रिकॉर्ड की गई है। रायपुर में 1893 को पड़ी थी सबसे ज्यादा ठंड रायपुर में फरवरी महीने में अब तक की सबसे ज्यादा ठंड 9 फरवरी 1893 को पड़ी थी। उस दिन तापमान सिर्फ 5 डिग्री तक गिर गया था। वहीं सबसे ज्यादा गर्म दिन 28 फरवरी 2009 रहा, जब तापमान 38 डिग्री तक पहुंच गया था। यानी फरवरी में भी कभी-कभी मई जैसी गर्मी पड़ सकती है। 4 फरवरी 1917 को सिर्फ 24 घंटे में 57.4 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। यह फरवरी के लिहाज से बहुत ज्यादा बारिश मानी जाती है। इसके अलावा 1901 में फरवरी महीने के दौरान कुल 118.9 मिमी बारिश हुई थी। दिन में तेज धूप से बढ़ रही गर्मी मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय दिन में धूप तेज हो रही है, जबकि रात का तापमान अपेक्षाकृत कम है। यही कारण है कि सुबह और रात में हल्की ठंडक महसूस हो रही है, लेकिन दोपहर के समय गर्मी बढ़ने लगी है। मौसम विभाग के अनुसार मार्च के मध्य तक प्रदेश में तापमान और बढ़ सकता है, जिससे गर्मी का असर और स्पष्ट होने की संभावना है। 

बिलासपुर में खामेनेई की मौत पर जश्न, मिठाइयां बांटी, हिंदू संगठन के नेता ने की आपत्तिजनक टिप्पणी

बिलासपुर  बीते 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयत उल्लाह अली खामेनेई शहीद हो गए. खामेनेई की मौत के बाद दुनियाभर के कई देशों इसकी खूब आलोचना की. वहीं, भारत में दक्षिणपंथी संगठन लगातार उनकी मौत की खबर सामने आने के बाद जश्न मना रहे हैं. इसी तरह का एक मामला छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से सामने आया है और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया। मामला बिलासपुर जिले का है, जहां हिंदू संगठन से जुड़े ठाकुर राम सिंह के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में पुलिस के जरिये एफआईआर दर्ज किया गया है. बताया जा रहा है कि आरोपी ठाकुर राम सिंह ने मुस्लिम धर्मगुरु और ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयत उल्लाह अली खामेनेई को लेकर सोशल मीडिया पर एक विवादित टिप्पणी पोस्ट की थी. इतना ही नहीं, उसने आयत उल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर सुनकर जश्न मनाते हुए मिठाई बांटी। आरोपी राम सिंह ने एक वीडियो भी अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट की है, जिसमें वह आयत उल्लाह अली खामेनेई की मौत पर मातम मनाने वालों को अपशब्द कहता हुआ दिखाई पड़ रहा है. राम सिंह इस वीडियो में बहुसंख्यक समुदाय को मुसलमानों के खिलाफ उकसाते हुए कहा कि "हिंदूओं जागों और इन लोगों को पहचानों जो भारत में रहकर, भारत को खोखला करने की कोशिश कर रहे हैं." आरोपी ने वीडियो में भारतीय मुसलमानों को देशद्रोही बताते हुए गालियां दी और उन्हें पीएम मोदी से मुस्लिम बहुल देश में भेजने की मांग की है। इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद मुस्लिम समुदाय के साथ इंसाफ पसंद लोगों में भारी आक्रोश फैल गया. समुदाय के लोगों ने इस पूरे मामले को लेकर आपत्ति जताई और इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया. ईरान को उन्होंने भारत का मित्र देश बताया है. बता दें, हालिया दिनों ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत पर भारत ने दुख जताया है. भारत सरकार की ओर से ईरान के प्रति संवेदना व्यक्त की गई है. विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने गुरुवार (5 मार्च) को नई दिल्ली में ईरान के राजदूत से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने ईरानी दूतावास पहुंचकर खामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त किया और शोक-पुस्तिका (कंडोलेंस बुक) में अपनी संवेदना दर्ज की।  भारत सरकार के जरिये ईरान को मित्र देश बताते हुए शोक व्यक्त करने और दूसरी तरफ हिंदूवादी संगठनों के जरिये खामेनेई की मौत पर जश्न मनाने की घटना के बाद समुदाय के प्रतिनिधियों ने पुलिस के पास पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की संवेदनशीलत और गंभीरता को देखते हुए पुलिस हरकत में आ गई। बिलासपुर जिले की सरकंडा थाना पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद आरोपी ठाकुर राम सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 और धारा 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की बारीकी से जांच की जा रही है. सोशल मीडिया पोस्ट और उससे जुड़े अन्य पहलुओं को भी जांच के दायरे में लिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पूरे प्रकरण की सूक्ष्मता से जांच कर रही है. पुलिस का कहना है कि इस मामले में आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी, ताकि क्षेत्र में शांति और सौहार्द बनाए रखा जा सके।

दुर्ग के फार्महाउस में 5 एकड़ अफीम की खेती, बाउंसर्स थे तैनात; भाजपा नेता ने डिजिटल सर्वे में किया गेहूं-मक्का का दावा

दुर्ग  छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में ग्राम समोदा में शिवनाथ नदी किनारे मक्के की फसल की आड़ में बड़े पैमाने पर अवैध अफीम की खेती की जा रही थी। मामले का खुलासा होते ही हड़कंप मच गया है। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू कर दी। ड्रोन कैमरे की मदद से पूरे क्षेत्र का सर्वे किया गया, जिसमें खेत में लहलहाती अफीम की फसल देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। आरोप है कि जिस खेत में अफीम लगाई गई थी वह खेत बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार का है। फसल को नष्ट कर रही है टीम एएसपी मणिशंकर चंद्रा के नेतृत्व में की गई इस रेड कार्रवाई में करीब 5 से 6 एकड़ जमीन में अवैध अफीम की खेती होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने मौके से एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है और खेत में लगी फसल को नष्ट करने की कार्रवाई जारी है।इस मामले में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार सहित दो अन्य लोगों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस अवैध खेती में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। वहीं इस पूरे मामले के सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भी मौके पर पहुंचे हैं। अफीम के खेत में पहुंच गए पूर्व सीएम दुर्ग जिले में अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद पूर्व सीएम भूपेश बघेल मौके पर पहुंचे। भूपेश बघेल ने बीजेपी सरकार पर हमला बोला है। भूपेश बघेल ने कहा कि यह खेत भाजपा नेता विनायक ताम्रकार का है। जो दुर्ग के ग्राम समोदा में स्थित है। उन्होंने कहा कि कमल के फूल वाली पार्टी के नेता अपने 10 एकड़ खेत में अब अफीम के पौधे और फूल उगा रहे हैं। दावा- बड़े नेताओं से संपर्क भूपेश बघेल ने दावा किया है कि भाजपा किसान मोर्चा के नेता विनायक ताम्रकार दुर्ग जिले के ग्राम समोदा में 10 एकड़ खेत में अफीम की खेती कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विनायक ताम्रकार बहुत रसूख़दार आदमी बताया जा रहा है। उसका उठना बैठना बड़े अधिकारियों, मंत्रियों के साथ है। मुख्यमंत्री निवास में भी आने जाने की सूचना है। सवाल यह है कि यह प्रोजेक्ट भाजपा किसान मोर्चा का है या मंत्रियों का है? बीजेपी ने पार्टी से किया सस्पेंड भाजपा नेता के खेत में अफीम की अवैध खेती पकड़े जाने के बाद भाजपा नेता विनायक ताम्रकर को पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं, इस मामले में विनायक ताम्रकार ने कहा कि जिस खेत में अफीम पकड़ी गई है वह मेरा खेत नहीं है। मुझे पुरानी रंजिश के कारण फंसाया गया है। बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीण अफीम की खेती की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में लोग खेत में पहुंचने लगे। पुलिस ने लोगों को रोकने की कोशिश की लेकिन भीड़ बेकाबू हो गई। इस दौरान पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। शनिवार को कलेक्टर अभिजीत सिंह ने मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस मामले में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार, उसके सहयोगी विकास बिश्नोई और फार्महाउस के मुंशी मनीष ठाकुर को गिरफ्तार किया है। दो आरोपी आंचला राम और श्रवण बिश्नोई फरार हैं। उनकी तलाश में पुलिस टीम राजस्थान भेजी गई है। अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच चल रही है। शनिवार शाम आरोपियों की गिरफ्तारी से पहले न्यायिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस के जवान खेत पहुंचे। वहां लगे अफीम के पौधों को उखाड़कर जब्त किया गया। जांच में करीब 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में अफीम की खेती मिली। अब जब्त पौधों को नष्ट करने की तैयारी की जा रही है। 2 महिलाओं के नाम पर खेत, दोनों से होगी पूछताछ कलेक्टर ने बताया कि जमीन का रिकॉर्ड मुधमति बाला और प्रीति बाला के नाम दर्ज है। मामले में दोनों महिलाओं की भूमिका की भी जांच होगी। पुलिस उनसे पूछताछ करेगी। संलिप्तता मिलने पर उन्हें भी आरोपी बनाया जा सकता है। राजस्थान के मजदूर कर रहे थे खेती का काम शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले कुछ सालों से अफीम की खेती कर रहा था। इसके लिए राजस्थान के जयपुर क्षेत्र से मजदूर बुलाए गए थे। विकास बिश्नोई और उसका भाई श्रवण बिश्नोई पहले यहां कपास की खेती करने आए थे। बाद में अफीम की खेती शुरू की गई। पूछताछ में विकास ने बताया कि वह पिछले चार साल से विनायक ताम्रकार के संरक्षण में यह काम कर रहा था।  

पूर्व छत्तीसगढ़ DGP विश्वरंजन का निधन, पटना के अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद आखिरी सांसें लीं

रायपुर  छत्तीसगढ़ पुलिस (Chhattisgarh Police) महकमे से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) विश्वरंजन का निधन हो गया है। कार्डियक (दिल से जुड़ी) समस्या के चलते पिछले करीब एक महीने से पटना के मेदांता अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। एक दिन पहले ही क्रिटिकल कंडीशन को देखते हुए उन्हें डायलिसिस पर रखा गया था। उनके निधन से पूरे छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक और पुलिस अमले में शोक की लहर दौड़ गई है। 1973 बैच के IPS, 4 साल तक संभाली CG पुलिस की कमान विश्वरंजन 1973 बैच के बेहद तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी थे। मध्य प्रदेश के विभाजन के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला था। जुलाई 2007 में उन्हें छत्तीसगढ़ का छठवां DGP बनाया गया था। जुलाई 2011 तक करीब 4 साल उन्होंने इस अहम जिम्मेदारी को संभाला। नक्सल प्रभावित (Naxal-hit) इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में उनका बड़ा रोल रहा। इससे पहले वह लंबे समय तक इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर रहे और एडिशनल डायरेक्टर जैसे अहम पदों पर भी सेवाएं दीं। पूर्व डीजीपी विश्वरंजन की तबीयत पिछले महीने अचानक बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की निगरानी में उनका इलाज किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि उन्हें गंभीर कार्डियक (हृदय) संबंधी समस्या हुई थी। इसी वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इलाज के दौरान उनकी हालत गंभीर बनी रही और उन्होंने अस्पताल में ही अंतिम सांस ली। छत्तीसगढ़ के छठवें डीजीपी रहे विश्वरंजन विश्वरंजन छत्तीसगढ़ के छठवें डीजीपी रहे हैं। 2007 में तत्कालीन डीजीपी ओपी राठौर के निधन के बाद राज्य सरकार ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी थी। वे लगभग चार वर्षों तक इस पद पर रहे और अपने कार्यकाल के दौरान पुलिस प्रशासन में कई अहम सुधार किए। उनके नेतृत्व में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। आईबी में भी रहे लंबे समय तक 1973 बैच के आईपीएस अधिकारी विश्वरंजन का प्रशासनिक अनुभव काफी व्यापक रहा है। मध्यप्रदेश के विभाजन के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला था, हालांकि 2007 से पहले वे कभी छत्तीसगढ़ में पदस्थ नहीं रहे थे। वे लंबे समय तक इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में प्रतिनियुक्ति पर रहे और एडिशनल डायरेक्टर जैसे अहम पद भी संभाले।

बस्तर के 125 नक्सलियों ने तेलंगाना में दिए हथियार, 4.18 करोड़ का पुनर्वास पैकेज मिलेगा; IG का खुलासा

जगदलपुर नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षाबल के जवानों को बड़ी सफलता मिली है। शनिवार को तेलंगाना में 130 माओवादियों ने हथियारों के साथ सरेंडर कर दिया है। सरेंडर करने वाले ज्यादातर नक्सली छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। तेलंगाना के डीजीपी के सामने आत्मसमर्पण करने वाले 130 माओवादियों में से 125 छत्तीसगढ़ के, 4 तेलंगाना के और एक आंध्र प्रदेश का रहने वाला है। तेलंगाना में सरेंडर करने वाले नक्सली सीपीआई (माओवादी), दंडकारण्य विशेष जोनल कमेटी और तेलंगाना राज्य कमेटी क्षेत्र के मेंबर हैं। इनमें से ज्यादातर नक्सली बस्तर इलाके में एक्टिव थे। हथियार भी सुरक्षाबलों को सौंपे हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा में लौटे इन कैडरों ने 124 हथियारों के साथ बड़ी मात्रा में गोला-बारूद भी सुरक्षा बलों के सामने जमा कराया, जो माओवादी संगठन को लगे बड़े झटके को दर्शाता है। अधिकारियों ने कहा कि यह घटनाक्रम पिछले कई महीनों से छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड तथा अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों में संचालित लगातार और समन्वित सुरक्षा अभियानों का परिणाम है। अभियान के कारण पड़ा असर बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा-लगातार चलाए जा रहे अभियान, सुरक्षा तंत्र के विस्तार, फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस की स्थापना से माओवादी कैडरों की आवाजाही पर प्रभाव पड़ा है। बस्तर क्षेत्र और उससे सटे वन क्षेत्रों में सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे सतत और केंद्रित अभियानों ने माओवादी गढ़ों को धीरे-धीरे ध्वस्त किया है तथा उनके संगठनात्मक नेटवर्क को बाधित किया है, जिससे कैडरों पर हिंसा का मार्ग छोड़ने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। सरेंडर के बाद मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy ने कहा कि Mahatma Gandhi के देश में हिंसक और सशस्त्र आंदोलन किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि जो लोग मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए सरकार पुनर्वास और बेहतर जीवन की व्यवस्था कर रही है. केंद्र सरकार ने देश से नक्सलवाद खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 तक की समय सीमा तय की है. जैसे-जैसे यह तारीख करीब आ रही है, वैसे-वैसे नक्सलियों के सरेंडर की घटनाएं भी तेजी से सामने आ रही हैं. हाल ही में नक्सल संगठन के टॉप नेताओं में शामिल देवजी के आत्मसमर्पण की खबर भी सामने आई थी. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अब संगठन के गिने-चुने नेता ही बचे हैं, जो लगातार दबाव के चलते इधर-उधर छिपते फिर रहे हैं. जीवन में बदलाव से आया परिवर्तन उन्होंने कहा कि भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार ने सुरक्षा प्रयासों के साथ-साथ दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं को लागू कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा, आजीविका के अवसरों तथा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर दिए गए विशेष ध्यान के कारण पहले से अलग-थलग पड़े गांवों तक धीरे-धीरे शासन की पहुंच बढ़ी है। इन प्रयासों ने स्थानीय समुदायों का लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत किया है तथा जनसामान्य के बीच माओवादी प्रचार के प्रभाव को कम किया है। देवजी की टीम के माओवादी भी शामिल इन 130 माओवादी कैडर्स में नक्सल संगठन के कई अहम सदस्य भी शामिल हैं। हाल ही में आत्मसमर्पण कर चुके माओवादी संगठन के चीफ देवजी की PLGA कमांडर टीम के सदस्य भी इस सरेंडर में शामिल हैं। ICCC सेंटर में हुआ कार्यक्रम माओवादियों ने यह आत्मसमर्पण 7 मार्च को हैदराबाद के बंजारा हिल्स स्थित ICCC सेंटर में किया। कार्यक्रम में तेलंगाना सरकार के सीनियर अधिकारी और पुलिस विभाग के उच्च अधिकारी भी मौजूद रहे। सुरक्षाबलों के दबाव के कारण सरेंडर जारी सुरक्षाबलों के लगातार दबाव और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण माओवादी कैडरों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। बड़ी संख्या में हुए इस सामूहिक आत्मसमर्पण को सुरक्षा एजेंसियां माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका मान रही हैं। सरकार ने कहा है कि जो भी उग्रवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए पुनर्वास और नई शुरुआत के सभी रास्ते खुले हैं। क्या कहा बस्तर रेंज के आईजी ने बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि नक्सलियों का सरेंडर दूरस्थ क्षेत्रों में शासन की बढ़ती पहुंच तथा सुरक्षा बलों के लगातार चलाए जा रहे अभियानों के प्रयास को दिखाता है। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों से माओवादी संगठनात्मक ढांचा काफी कमजोर हुआ है। उनके संचालन क्षेत्र में उल्लेखनीय कमी आई है। जैसे-जैसे विकास और कल्याणकारी योजनाएं आंतरिक गांवों तक पहुँचती जाएंगी, वैसे-वैसे क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास का मार्ग और सुदृढ़ होगा।  

अस्पतालों में हीट स्ट्रोक प्रबंधन कक्ष, दवाइयों और ORS की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश

रायपुर अस्पतालों में हीट स्ट्रोक प्रबंधन कक्ष, दवाइयों और ORS की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश राज्य में बढ़ते तापमान और संभावित हीटवेव की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को सजग रखने की दिशा में आवश्यक तैयारियाँ तेज कर दी गई हैं। संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएँ, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार जिला अस्पतालों सहित सभी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्मी से होने वाली बीमारियों के प्रबंधन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं। जारी निर्देशों के अनुसार जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में हीट स्ट्रोक प्रबंधन कक्ष सक्रिय रखे जाएंगे। इन केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में ओआरएस, आईवी फ्लूड, आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयों तथा शीतलन संबंधी व्यवस्थाएँ उपलब्ध रखने को कहा गया है, ताकि गर्मी से प्रभावित मरीजों को तत्काल उपचार मिल सके। समुचित सुविधाओं से युक्त ऊष्मा आघात कक्ष रायपुर और दुर्ग जिला अस्पताल मे बनाये जा चुके हैं साथ hi अन्य सभी जिलों मे भी इस प्रकार के कक्ष बनाएं जाने निर्देश दिए गए हैं.  एम्बुलेंस सेवाओं को भी अलर्ट मोड में रखने और जरूरत पड़ने पर त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्यकम की राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ स्मृति देवांगन ने बताया की अत्यधिक तापमान के संपर्क में आने से शरीर में हीट स्ट्रेस की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे हीट रैश, मांसपेशियों में ऐंठन, चक्कर आना, सिरदर्द, अत्यधिक प्यास और उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर अवस्था में शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाने पर हीट स्ट्रोक की स्थिति बन जाती है, जो चिकित्सकीय आपातकाल मानी जाती है।  हीट वेव से बचाव के लिए आवश्यक है की गर्मी के मौसम में पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें, हल्के व ढीले सूती कपड़े पहनें तथा दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें। घर से बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखना, नींबू पानी, छाछ और मौसमी फलों का सेवन करना शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायक होता है।  बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और खुले में काम करने वाले श्रमिकों को गर्मी से अधिक जोखिम माना गया है। ऐसे में इन वर्गों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। यदि किसी व्यक्ति में तेज बुखार, बेहोशी, भ्रम, अत्यधिक कमजोरी या पसीना आना बंद होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत ठंडी जगह पर ले जाकर आपातकालीन सेवा 108 के माध्यम से चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। गर्मी से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए समय पर सावधानी और जागरूकता को सबसे प्रभावी उपाय माना गया है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार संबंधी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आम नागरिकों को बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है.

लखपति दीदी अभियान से छत्तीसगढ़ की महिलाएं लिख रही समृद्धि की नई कहानी – मुख्यमंत्री साय

रायपुर लखपति दीदी अभियान से छत्तीसगढ़ की महिलाएं लिख रही समृद्धि की नई कहानी – मुख्यमंत्री  साय छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता, मेहनत और नवाचार के बल पर नई पहचान बना रही हैं और हमारी सरकार उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘लखपति दीदी संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। कार्यक्रम में प्रदेश भर से आई स्व-सहायता समूह की हजारों महिलाएं और लखपति दीदियां उत्साहपूर्वक शामिल हुईं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है और जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का निवास होता है। उन्होंने कहा कि पहले महिलाएं घरों तक सीमित रहती थीं, लेकिन आज प्रदेश की महिलाएं स्व सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि शासन का लक्ष्य लखपति दीदियों को और अधिक सशक्त बनाकर गांव की प्रत्येक महिला को लखपति बनाना और भविष्य में लखपति ग्राम का निर्माण करना है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के आह्वान पर छत्तीसगढ़ में 10 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से वर्तमान में लगभग 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में 10 लाख से अधिक लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गांवों के लोगों के लिए 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कर चुकी है और इनके निर्माण में बिहान की दीदियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा महतारी वंदन योजना प्रारंभ की गई है, जिसके तहत  लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को 24 किश्तों में 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है तथा इस वर्ष के बजट में इसके लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि लखपति दीदी योजना से प्रदेश की 5 लाख से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और अब लखपति दीदी भ्रमण योजना शुरू कर उन्हें देश-प्रदेश के व्यावसायिक केंद्रों और शक्ति पीठों का भ्रमण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि पंचायत विभाग द्वारा 250 महतारी सदनों का निर्माण, आंगनबाड़ी संचालन और पोषण योजनाओं के लिए भी इस वर्ष के बजट में प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए रानी दुर्गावती योजना शुरू की जाएगी, जिसके तहत 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर 1.5 लाख रुपये दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी लखपति दीदियों से पूरे प्रदेश की माताओं-बहनों को प्रेरणा मिल रही है और अब हमारा लक्ष्य लखपति दीदियों को करोड़पति दीदी बनाना है। उन्होंने कहा कि आज शुरू हुई बकरी पालन क्लस्टर परियोजना से प्रदेश में बकरी पालन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना और आईआईएम रायपुर के साथ एमओयू से स्व-सहायता समूहों की आमदनी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में माताओं-बहनों की बड़ी भूमिका होगी। आज महिलाएं गांवों में सेंट्रिंग प्लेट उपलब्ध कराने से लेकर ड्रोन उड़ाने तक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवताओं का वास होता है। एक नारी शिक्षित होती है तो दो परिवार और पूरा समाज शिक्षित होता है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने लखपति दीदी आधारित कॉफी टेबल बुक तथा छत्तीसकला आधारित ब्रांड बुक का विमोचन किया और लखपति दीदी ग्राम पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायतों का मूल्यांकन कर उन्हें लखपति दीदी ग्राम घोषित किया जाएगा। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्व-सहायता समूह की महिलाओं, कैडर्स और लखपति दीदियों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले लोग कहते थे कि महिलाओं को लखपति बनाना संभव नहीं है, लेकिन आज प्रदेश में 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में ये महिलाएं लखपति से करोड़पति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगी।  कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई महिलाओं ने अपनी प्रेरक कहानियां साझा कीं। बस्तर जिले के दरभा ब्लॉक की लखपति दीदी  राजकुमारी कश्यप ने बताया कि एक समय ऐसा था जब उनके क्षेत्र में बाइक से आना-जाना भी कठिन था, लेकिन आज वह लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उनका परिवार खेती पर निर्भर है और मुर्गीपालन से उन्हें सालाना 6–7 लाख रुपये की आय हो रही है। बालोद जिले की भुनेश्वरी साहू ने बताया कि उन्होंने 20 हजार रुपये का ऋण लेकर सिलाई मशीन से काम शुरू किया और बाद में उन्हें सरकार की पहल से ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग मिली। आज वह अपने क्षेत्र में ड्रोन दीदी के नाम से जानी जाती हैं। जशपुर जिले की लखपति दीदी  अनिता साहू ने बताया कि वह ईंट निर्माण का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि एक समय था जब समूह की साप्ताहिक बैठक में 10 रुपये जमा करने के लिए भी दूसरों पर निर्भर होना पड़ता था, लेकिन आज वह लखपति बन चुकी हैं। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव  निहारिका बारीक ने बताया कि छत्तीसगढ़ में 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जिनमें से लगभग एक लाख महिलाएं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 10 लाख 26 हजार स्व-सहायता समूहों से जुड़कर 30 लाख 85 हजार महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं। इस अवसर पर राजस्व मंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री  टंकराम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े, कौशल विकास मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, विधायक  सुनील सोनी, सचिव  भीम सिंह, रायपुर संभाग के आयुक्त  महादेव कावड़े, कलेक्टर  गौरव सिंह, मिशन संचालक  अश्वनी देवांगन  सहित बड़ी संख्या में लखपति दीदियां और स्व-सहायता समूह की महिलाएं उपस्थित थी।

कांग्रेस का बड़ा प्लान: 2028 चुनाव में नए चेहरों को मिलेगा मौका, नेता के बयान से बढ़ी हलचल

सरगुजा छत्तीसगढ़ की राजनीति में कभी “जय-वीरू” के नाम से चर्चित भूपेश बघेल और टी.एस. सिंहदेव की जोड़ी अब पुराने अंदाज में शायद नजर न आए। पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने इशारों-इशारों में कहा है कि राजनीति की नई फिल्म में नए किरदार भी सामने आ सकते हैं। दरअसल 2018 के विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव की जोड़ी को कांग्रेस की जीत का बड़ा कारण माना गया था। उस समय दोनों नेताओं को “जय-वीरू” की जोड़ी कहा जाता था। अब सिंहदेव ने इस पर बयान देते हुए कहा कि एक फिल्म हिट होने के बाद उसी तरह की फिल्म बार-बार नहीं बनती। जैसे शोले एक सुपरहिट फिल्म थी, लेकिन उसकी कई सीक्वल नहीं बनीं। आगे नई फिल्म बनेगी, जिसमें पुराने कलाकार भी हो सकते हैं और नए चेहरे भी नजर आ सकते हैं। सिंहदेव ने यह भी कहा कि उस समय सिर्फ दो नाम ज्यादा चर्चा में थे क्योंकि भूपेश बघेल पीसीसी अध्यक्ष थे और वे नेता प्रतिपक्ष थे, लेकिन असल में पूरी टीम ने मिलकर काम किया था। सिंहदेव के इस बयान को कांग्रेस के भीतर बदलते सियासी समीकरणों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि यह किसी मतभेद की वजह से नहीं बल्कि समय और परिस्थितियों के बदलने की वजह से है। अब 2028 के चुनावी मैदान में कांग्रेस की “नई फिल्म” में मुख्य किरदार कौन निभाएगा, इसका फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा।

बस्तर का युवा अब विश्व के पटल पर आगे बढ़ रहा है – उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर बीजापुर जिले के भैरमगढ़ विकासखंड के छोटे से ग्राम गुदमा के युवा अंकित सकनी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 816वीं रैंक प्राप्त कर पूरे बस्तर संभाग सहित प्रदेश का मान बढ़ाया है। उनकी इस उपलब्धि पर उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने अंकित सकनी और उनके पिता  चंद्रैया सकनी से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत कर उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।       इस दौरान उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने अंकित से आत्मीय संवाद करते हुए उनकी मेहनत, लगन और संघर्ष की सराहना की। उन्होंने कहा कि बीजापुर जैसे दूरस्थ और आदिवासी अंचल के छोटे से गांव गुदमा से निकलकर यूपीएससी जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करना अत्यंत प्रेरणादायी उपलब्धि है। यह उपलब्धि न केवल अंकित के परिवार बल्कि पूरे बस्तर और प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।         उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने अंकित से बातचीत के दौरान कहा कि आपने पूरे देश की उम्मीद को जगा दिया है, लोग मुझसे पुछते थे जब नक्सलवाद खत्म होगा तो क्या होगा?… आपकी सफलता इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि जब नक्सलवाद खत्म होगा तो   बस्तर में शांति और विकास का वातावरण बनेगा तो यहां के युवा अपनी प्रतिभा के बल पर देश ही नहीं बल्कि विश्व के पटल पर आगे बढ़कर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।   उन्होंने आगे कहा कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त कर अंकित जैसे युवा देश की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और समाज तथा राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देंगे। अंकित की उपलब्धि बस्तर के युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद भी दृढ़ संकल्प और मेहनत से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।           इस अवसर पर अंकित के पिता  चंद्रैया सकनी के द्वारा बीजापुर में उनसे हुई आत्मीय भेंट की याद भी साझा की। उनके पिता ने भी अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि बेटे की इस सफलता से परिवार और गांव का नाम रोशन हुआ है। वहीं अंकित सकनी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को देते हुए कहा कि उनका सपना देश की सेवा करना है। उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने इसे बस्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि बताते हुए अंकित को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

शोर पर लगाम: अब रात 10 बजे के बाद नहीं बजेगा DJ-धुमाल

रायपुर विवाह सीजन के दौरान डीजे और धुमाल को लेकर होने वाली शिकायतों और विवादों को देखते हुए प्रदेश में पहली बार पुलिस अधिकारियों और डीजे-धुमाल संचालकों की प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में डीजे और धुमाल संचालकों ने स्वयं पहल करते हुए पुलिस अधिकारियों से चर्चा की और नियमों का पालन करने का आश्वासन दिया। बैठक में डीजे-धुमाल संचालकों ने स्पष्ट कहा कि वे प्रशासन द्वारा तय सभी नियमों का पालन करेंगे, ताकि विवाह और अन्य कार्यक्रमों के दौरान किसी प्रकार की परेशानी या विवाद की स्थिति न बने। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि रात 10 बजे के बाद किसी भी कार्यक्रम में डीजे या धुमाल नहीं बजाया जाएगा। संचालकों ने कहा कि वे समय सीमा और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन करेंगे। अपने साथ जुड़े अन्य संचालकों को भी इसके लिए जागरूक करेंगे। वहीं पुलिस अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया कि विवाह सीजन में लोगों की सुविधा और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है। यदि कोई संचालक नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में यह भी तय किया गया कि कार्यक्रमों के दौरान पुलिस और डीजे संचालकों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाएगा, ताकि अनावश्यक विवाद और शिकायतों से बचा जा सके। इस पहल को विवाह सीजन में व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। कोर्ट की सख्त गाइडलान का पालन करने के निर्देश होली पर्व समाप्त होने के बाद नवरात्रि, रामनवमी के बाद 27 मार्च से शादी सीजन शुरू हो जाएगा। शादी का सीजन शुरू होने के साथ ही रामनवमी में डीजे, धुमाल की डिमांड बढ़ जाती है। डीजे, धुमाल को लेकर हाईकोर्ट के साथ सुप्रीम कोर्ट की सख्त गाइड लाइन है। ऐसी स्थिति में नियमों की अनदेखी करने पर डीजे, धुमाल वालों के साथ पुलिस कार्रवाई करती है। इस स्थिति से बचाव के लिए शुक्रवार को डीजे संचालकों का रायपुर में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। डीजे संचालकों की सम्मेलन में विशेष रूप से रायपुर सेंट्रल के एडीसीपी तारकेश्वर पटेल, एसीपी सेंट्रल रमाकांत साहू के साथ एसीपी ट्रैफिक सतीश ठाकुर उपस्थित रहे। पुलिस अफसरों ने नियम कानून की दी जानकारी डीजे संचालकों के सम्मेलन में पुलिस अफसरों ने रायपुर के साथ दूसरे जिलों से आए डीजे संचालकों को परेशानी से बचने नियमों का कैसे पालन करना है, इस संबंध में विस्तार से नियम कानूनों के बारे में जानकारी दी। डीजे संचालकों ने अपने सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि उन लोगों द्वारा आगामी वैवाहिक सीजन व अन्य समारोह में तय मानक के आधार पर निर्धारीत डेसिबल में डीजे, धुमाल बजाएंगे। रात 10 बजे के बाद डीजे, धुमाल बंद कर दिया जाएगा। रायपुर के डीजे संचालकों ने कहा कि जो डीजे संचालक नियमों का पालन नहीं करेंगे उनके खिलाफ वे स्वयं जुर्माने की कार्रवाई करेंगे।