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रायपुर: डिजिटल व्यवस्था और धान के बेहतर मूल्य से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत

रायपुर : डिजिटल व्यवस्था और धान के सर्वाधिक मूल्य से किसान हो रहे समृद्ध किसान तुहंर टोकन ऐप से 24×7 टोकन काटने की सुविधा खेत में बोर कराकर सिंचाई का मिला साधन, अन्य फसलों की खेती से बढ़ी आमदनी रायपुर प्रदेश में धान खरीदी तिहार किसानों के लिए खुशहाली लेकर आया है। राज्य सरकार द्वारा धान का सर्वाधिक समर्थन मूल्य तथा पारदर्शी और तकनीक आधारित खरीदी व्यवस्था से किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। धान उपार्जन केन्द्रों में लागू डिजिटल टोकन प्रणाली एवं सरल प्रक्रियाओं ने धान विक्रय को सुगम, सरल और आसान बना दिया है। सरगुजा जिले के अंबिकापुर विकासखंड अंतर्गत मेंड्राकला धान उपार्जन केन्द्र में धान विक्रय के लिए पहुंचे ग्राम पंचायत भिट्ठी कला के रहने वाले लघु किसान श्री श्याम लाल ने बताया कि उनके पास कुल 111.80 क्विंटल धान का रकबा है। उन्होंने बताया कि पहले उन्होंने धान उपार्जन समिति के माध्यम से टोकन कटवाया था, जहां किसानों की अधिक भीड़ के कारण समय अधिक लगा। इसके बाद उन्होंने किसान तुहंर टोकन ऐप का उपयोग कर घर बैठे ही 22.80 क्विंटल का अपना टोकन काटा लिया। किसान श्री श्याम लाल ने बताया कि डिजिटल टोकन सुविधा से टोकन काटना बेहद आसान हो गया है। अब समिति केन्द्र के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ते, जिससे समय, श्रम और खर्च की बचत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था किसानों को सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि धान उपार्जन केन्द्र पहुंचते ही नमी परीक्षण सहित सभी आवश्यक प्रक्रियाएं त्वरित रूप से पूर्ण की गईं तथा समय पर बारदाना उपलब्ध कराया गया। तौल की प्रक्रिया भी पूरी तरह सुव्यवस्थित रही और धान विक्रय में किसी प्रकार की समस्या नहीं आई। कृषक श्री श्याम लाल ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान का सर्वाधिक मूल्य दिया जा रहा है, जिससे किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष धान विक्रय से प्राप्त आय से उन्होंने खेत में बोर कराया, जिससे सिंचाई की साधन उपलब्ध हुआ। वर्तमान में वे खेती का विस्तार करते हुए गेहूं, दलहन, तिलहन एवं सब्जी की खेती भी कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है। कृषक श्री श्याम लाल ने धान खरीदी की पारदर्शी और किसान हितैषी व्यवस्था की सराहना करते हुए शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि डिजिटल व्यवस्था ने किसानों के लिए धान विक्रय करना आसान बनाया है।

श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की पहल से रायपुर में 33 सड़क परियोजनाओं को स्वीकृति

रायपुर : श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से 33 सड़कों को मिली प्रशासनिक स्वीकृति 150.56 करोड़ की लागत से होंगे निर्माण कार्य, ग्रामीण कनेक्टिविटी होगी और अधिक सशक्त रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य में आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण की दिशा में सरकार निरंतर ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री एवं भटगांव विधायक श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के सतत प्रयासों से वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 150.56 करोड़ रुपये की लागत से 33 सड़क निर्माण एवं उन्नयन कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इस महत्वपूर्ण निर्णय से भैयाथान एवं ओड़गी विकासखंड के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा में उल्लेखनीय सुधार होगा। निर्माण एवं उन्नयन विभाग द्वारा जारी स्वीकृति के अनुसार, जिन सड़कों को मंजूरी दी गई है, वे लंबे समय से क्षेत्रवासियों की प्रमुख मांग में शामिल थीं। इन मार्गों के निर्माण से सुदूर एवं पिछड़े ग्रामों की मुख्य सड़कों से सीधी और सुगम कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, व्यापार तथा अन्य सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को नया प्रोत्साहन मिलेगा। स्वीकृत कार्यों में 28.99 करोड़ रुपये की लागत से ओड़गी नवाटोला रोड (8.20 किमी से धुईडीह पंडोपारा) का निर्माण प्रमुख है। इसके अतिरिक्त भवरखोह से जमड़ी मार्ग (9.50 करोड़ रुपये), खोंड नवापारा से केसर मार्ग (8.73 करोड़ रुपये), माड़र से भाड़ी नवापारा मार्ग (8.38 करोड़ रुपये) तथा भैयाथान विकासखंड अंतर्गत भौराही देवालय से शिवपुर मार्ग सहित अन्य महत्वपूर्ण सड़कों का निर्माण एवं उन्नयन किया जाएगा। इन सड़कों के निर्माण से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा, बल्कि किसानों को कृषि उपज के परिवहन में सुविधा मिलेगी, विद्यार्थियों को शिक्षा संस्थानों तक पहुंच आसान होगी तथा आम नागरिकों को दैनिक जीवन में राहत प्राप्त होगी। साथ ही, सड़क नेटवर्क के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। सड़क निर्माण कार्यों की स्वीकृति पर महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि 150.56 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत ये सड़कें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाएंगी और क्षेत्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि सभी निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तथा निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएंगे। इन स्वीकृतियों से क्षेत्रवासियों में उत्साह और सकारात्मक वातावरण बना है तथा यह विश्वास व्यक्त किया जा रहा है कि मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में शीघ्र ही निर्माण कार्य प्रारंभ होकर क्षेत्र के विकास को नई गति और दिशा प्रदान करेंगे।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बैंक एकाउंट एवं क्यूआर कोड का किया विमोचन

रायपुर : पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर उन्नयन महा अभियान का शुभारंभ पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर उन्नयन महा अभियान का शुभारंभ उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बैंक एकाउंट एवं क्यूआर कोड का किया विमोचन पहले ही दिन दान दाताओं से एकत्र हुई 75 लाख रूपए से अधिक की राशि रायपुर पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर के समग्र उन्नयन, सौंदर्यीकरण एवं भव्य मंदिर निर्माण के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर उन्नयन महा अभियान का आज उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने मंदिर उन्नयन अभियान के लिए खोले गए बैंक एकाउंट एवं क्यूआर कोड का भी विमोचन किया। इस डिजिटल सुविधा के माध्यम से अब जिलेवासी, श्रद्धालु एवं दानदाता कहीं से भी सहज रूप से ऑनलाइन दान कर मंदिर के विकास एवं उन्नयन कार्यों में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे। इस अवसर पर सांसद संतोष पाण्डेय, पूर्व संसदीय सचिव डाॅ. सियाराम साहू, पूर्व विधायक योगेश्वर राज सिंह, अशोक साहू, जिला पंचायत सभापति डाॅ. बीरेन्द्र साहू, नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, उपाध्यक्ष पवन जायसवाल, जनपद उपाध्यक्ष गणेश तिवारी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विदेशी राम धुर्वे, श्रीमती विजयलक्ष्मी तिवारी, श्रीमती सतविंदर पाहुजा सहित समस्त पार्षद, जनप्रतिनिधि, पंचमुखी बूढ़ा महादेव सेवा समिति के सदस्य उपस्थित थे।  उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह महाअभियान जनसहभागिता, आस्था एवं श्रद्धा का प्रतीक है, जिसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है। उन्होने कहा कि क्यूआर कोड से जिले के नागरिक अधिक से अधिक सहयोग कर इस पुण्य कार्य से जुड़ सकेंगे। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे इस महाअभियान में सहभागी बनकर भगवान पंचमुखी बूढ़ा महादेव के भव्य मंदिर निर्माण के संकल्प को साकार करें। आज ही इस महाअभियान के शुभारंभ अवसर पर कवर्धा शहर के नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक बढ़-चढ़कर दान कर अपनी श्रद्धा और सहभागिता का परिचय दिया। सभी नागरिकों ने पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर के उन्नयन एवं भव्य निर्माण के लिए हर संभव सहयोग देने का संकल्प लिया। नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी ने कहा कि पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर उन्नयन महाअभियान कवर्धा नगर के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। क्यूआर कोड एवं बैंक एकाउंट के माध्यम से आम नागरिक भी अब सरलता से इस पुण्य कार्य में सहभागी बन सकेंगे। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि इस महाअभियान में समाज के हर वर्ग को सहभागी बनना चाहिए, ताकि भगवान बूढ़ा महादेव की कृपा से यह कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो सके। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पंचमुखी बूढ़ा महादेव सेवा समिति के पदाधिकारियों को 5 लाख रूपए का सहयोग किया तथा इसके अतिरिक्त आगे 5 लाख रुपये और देने की घोषणा भी की।       कार्यक्रम में पूर्व विधायक योगेश्वर राज सिंह ने मंच पर ही 1 लाख 11 हजार 1100 रुपये पंचमुखी बूढ़ा महादेव सेवा समिति को भेंट किए। वहीं सांसद संतोष पाण्डेय एवं पूर्व संसदीय सचिव डॉ. सियाराम साहू ने 1 लाख 11 हजार 1100 रूपए, नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी ने 1 लाख रूपए तथा जनपद पंचायत उपाध्यक्ष गणेश तिवारी ने 2 लाख 21 हजार रूपए प्रदान करने की घोषणा की। इसके साथ ही कवर्धा शहर के नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर दान देकर इस महाअभियान को स्वरूप प्रदान किया।  कार्यक्रम के दौरान कवर्धा नगर पालिका के 21 पार्षदों ने अपना एक-एक माह का वेतन तथा पार्षद निधि से एक-एक लाख रुपये देने की घोषणा की। पहले ही दिन शहर के दान दाताओं से 75 लाख रूपये से अधिक राशि संग्रहित हुई। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सभी जनप्रतिनिधियों, दानदाताओं, सेवा समिति एवं नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनसहयोग से ही धार्मिक स्थलों का भव्य स्वरूप साकार होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर उन्नयन महा अभियान के माध्यम से यह पावन स्थल देश-प्रदेश में एक नई पहचान स्थापित करेगा।

रायपुर में दिव्यांग नेमी सिंह को उपमुख्यमंत्री शर्मा ने भेंट की पेट्रोल स्कूटी

रायपुर : दिव्यांग नेमी सिंह को उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने प्रदान की पेट्रोल चलित स्कूटी रायपुर उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा की संवेदनशील पहल से एक बार फिर दिव्यांगजन को आत्मनिर्भरता की राह मिली है। विकासखंड बोड़ला के ग्राम सरेखा निवासी एक पैर से दिव्यांग श्री नेमीसिंह साहू को आज विधायक कार्यालय कवर्धा में पेट्रोल चलित स्कूटी प्रदान की गई। एक कृषक परिवार से आने वाले श्री नेमीसिंह साहू ने लगभग बारह वर्ष पूर्व एक सड़क दुर्घटना में अपना एक पैर खो दिया था। दिव्यांगता के कारण उन्हें दैनिक आवागमन और जीवनयापन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। अपने प्रतिदिन के कार्यों के लिए आना-जाना उनके लिए अत्यंत मुश्किल हो गया था। अपनी समस्या को लेकर श्री साहू ने उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा को आवेदन दिया था। उनकी आवश्यकता और सामाजिक – आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने तुरंत सहायता दिलाने के निर्देश दिए थे। जिसके तहत आज उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने खुद उन्हें उनके वाहन की चाभी भेंट की। स्कूटी पाकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। नेमीसिंह ने वर्षों से कोई वाहन नहीं चलाया था तो जैसे ही उन्होंने स्कूटी चालू की और स्कूटी डगमगाई उपमुख्यमंत्री ने उन्हें थाम लिया और अपने सामने उनसे स्कूटी चालन की प्रैक्टिस भी कराई। स्कूटी पाकर भावुक नेमी सिंह साहू ने कहा कि अब उन्हें रोजमर्रा के कामों के लिए अब दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यह स्कूटी उनके लिए केवल एक साधन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने इस सहयोग के लिए उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहायता उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी। उल्लेखनीय है कि उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के प्रयासों से कवर्धा विधानसभा क्षेत्र में 100 से अधिक दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा चुके हैं।

धमतरी: नगरी क्षेत्र में नई संजीवनी, फुटहामुड़ा नहर परियोजना से सुधरेगा ग्रामीण सिंचाई परिदृश्य

 धमतरी : नगरी क्षेत्र को सिंचाई में नई संजीवनीः फुटहामुड़ा नहर परियोजना से बदलेगा ग्रामीण परिदृश्य धमतरी धमतरी जिले के नगरी विकासखंड में बहुप्रतीक्षित फुटहामुड़ा नहर निर्माण परियोजना अब तेज गति से आगे बढ़ रही है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है, जिससे किसानों के जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है। फुटहामुड़ा नहर परियोजना से बदलेगा ग्रामीण परिदृश्य       फुटहामुड़ा नहर का निर्माण गंगरेल जलाशय के सैंडल डैम, ग्राम फुटहामुड़ा से प्रारंभ होकर लगभग 19.74 किलोमीटर लंबाई में किया जा रहा है। परियोजना के पूर्ण होने पर नगरी विकासखंड के 22 ग्रामों के लगभग 1940 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सुनिश्चित सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इससे खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों का रकबा भी बढ़ेगा और किसानों की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।       परियोजना के क्रियान्वयन में प्रशासनिक स्तर पर भी आवश्यक प्रगति हो चुकी है। मुख्य नहर से प्रभावित 10 ग्रामों में कुल 14.33 हेक्टेयर भूमि का भू-अर्जन पूर्ण कर लिया गया है। वहीं वन प्रकरण से प्रभावित 24.42 हेक्टेयर भूमि की अंतिम चरण की स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है। इसके साथ ही निर्माण कार्य में आने वाली सभी प्रमुख प्रशासनिक बाधाएं दूर हो गई हैं, जिससे कार्य अब निर्बाध गति से आगे बढ़ रहा है।        जिला प्रशासन एवं जल संसाधन विभाग द्वारा बताया गया कि यह परियोजना केवल सिंचाई सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। सिंचाई सुनिश्चित होने से किसानों की आय बढ़ेगी, कृषि आधारित रोजगार के अवसर सृजित होंगे और पलायन पर भी प्रभावी रोक लगेगी।       कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने परियोजना को नगरी क्षेत्र के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा, “फुटहामुड़ा नहर परियोजना नगरी विकासखंड के किसानों के लिए दीर्घकालीन लाभ देने वाली योजना है। प्रशासन की प्राथमिकता है कि निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ तय समयसीमा में पूर्ण हो। यह परियोजना कृषि समृद्धि के साथ-साथ क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा देगी।”        उल्लेखनीय है कि पिछले माह उच्च स्तरीय अधिकारियों द्वारा स्थल का दौरा कर निर्माण प्रगति, तकनीकी पक्षों एवं आवश्यक संसाधनों का गहन निरीक्षण किया गया था। अधिकारियों के मार्गदर्शन में अब कार्य को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है। फुटहामुड़ा नहर परियोजना नगरी अंचल में हरित क्रांति की नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।

अंबिकापुर में शासकीय उचित मूल्य दुकान संचालन हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 12 जनवरी

अंबिकापुर खाद्य अधिकारी ने बताया कि नगर पालिक निगम अम्बिकापुर के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान संचालन हेतु पात्र संस्था/एजेन्सी को आबंटित किया जाना है। जिसमें शासकीय उचित मूल्य दुकान नमनाकला वार्ड क्र. 14 आई.डी. 391001048, मंगल पाण्डेय वार्ड क्र. 13 आई.डी. 391001005, डॉ. भीमराव अम्बेडकर वार्ड क्र. 45 आई.डी. 391001072, महारानी लक्ष्मीबाई वार्ड क्र. 04, आई.डी. 391001004, स्वामी विवेकानंद वार्ड क्र. 35, आई.डी. 391001010, शीतला वार्ड क्र. 32 आई.डी. 391001030, पटपरिया वार्ड क्र. 11 आई.डी. 391001037, एवं लरंग साय वार्ड क्र. 24 आई.डी. 391001071 संचालन हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इन शासकीय उचित मूल्य दुकानों के नवीन आबंटन के संचालन हेतु इ़च्छुक पात्र एजेन्सी अपना आवेदन पत्र विहित प्रारूप में सम्पूर्ण विवरण एवं दस्तावेज की सत्यापित छायाप्रति के साथ 12 जनवरी 2026 तक कार्यालय कलेक्टर खाद्य शाखा में जमा कर सकते हैं। समय-सीमा के बाद आवेदन पत्रों पर विचार नहीं किया जाएगा।  

डबरी से समृद्धि तकः धमतरी की महिलाओं ने मखाना खेती में देखी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह

धमतरी : धान से आगे सोच : मखाना खेती से बदलेगी धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर डबरी से समृद्धि तकः धमतरी की महिलाओं ने मखाना खेती में देखी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह 40 महिला किसान समूह ने मखाना प्रोसेसिंग एवं आधुनिक खेती तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया धमतरी कृषि विविधीकरण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में धमतरी जिले ने एक और ठोस कदम बढ़ाया है। विकासखंड नगरी के ग्राम सांकरा से 40 इच्छुक महिला किसान समूह का एक दल रायपुर जिले के विकासखंड आरंग अंतर्गत ग्राम लिंगाडीह पहुंचा, जहाँ उन्होंने मखाना प्रोसेसिंग एवं आधुनिक खेती तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस अध्ययन भ्रमण एवं प्रशिक्षण की संपूर्ण व्यवस्था जिला उद्यानिकी विभाग, धमतरी द्वारा की गई।  डबरी से समृद्धि तकः धमतरी की महिलाओं ने मखाना खेती में देखी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह ख़ास कर कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा मखाना खेती को बढ़ावा देने और किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी को लेकर रुचि ले रहे है। अब जल्द ही धान से आगे सोच से मखाना खेती से धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी।  छोटी-छोटी डबरी से समृद्धि तक धमतरी की महिलाओं को मखाना खेती में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह दिखायी दे रही है । शासकीय प्रयासों का प्रतिफल है कि मखाना खेती से धमतरी में आर्थिक सशक्तिकरण होगा ।          कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा के सतत प्रयासों से धमतरी जिले के ग्राम राखी, पीपरछेड़ी, दंडेसरा, राँकाडोह एवं सांकरा में लगभग 90 एकड़ क्षेत्र में डबरी चिन्हांकन कर मखाना खेती की शुरुआत हो चुकी है। महिला किसानों ने स्थानीय ओजस फार्म का भ्रमण करते हुए मखाना की खेती, कटाई, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी संपूर्ण श्रृंखला को नजदीक से समझा। फार्म प्रबंधक श्री संजय नामदेव ने किसानों को बताया कि मखाना की खेती के लिए जलभराव वाली डबरी, तालाब या जल संरचनाएं उपयुक्त होती हैं। उन्होंने तकनीकी पहलुओं, बीज चयन, उत्पादन लागत और बाजार संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी तथा यह भी बताया कि उचित प्रशिक्षण एवं सरकारी सहयोग से यह फसल किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।       इस अवसर पर श्री शिव साहू ने मखाना खेती के व्यावसायिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह फसल कम जोखिम वाली है और इससे स्थायी आय का मजबूत स्रोत विकसित किया जा सकता है। महिला किसानों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मखाना खेती से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का नया अवसर दिखाई दे रहा है।       बिहार के दरभंगा निवासी मखाना प्रोसेसिंग विशेषज्ञ श्री रोहित साहनी फोड़ी ने प्रसंस्करण की बारीकियां समझाते हुए बताया कि 1 किलो मखाना बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप तैयार होता है, जिसकी बाजार कीमत ₹700 से ₹1000 प्रति किलो तक होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसान स्वयं उत्पादन के साथ प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग करें, तो प्रति एकड़ लाभ में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।      इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रमुख वैज्ञानिक ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जानकारी देते हुए बताया कि प्रति एकड़ लगभग 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है और औसत उत्पादन 10 किं्वटल तक प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि छह माह की अवधि वाली इस फसल में कीट-व्याधि का प्रकोप नगण्य होता है तथा चोरी जैसी समस्याएं भी नहीं होतीं, जिससे यह किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प बनती है।      उप संचालक उद्यानिकी, धमतरी  डॉ.पूजा कश्यप साहू के मार्गदर्शन में ग्रामीण उद्यानिकी अधिकारी श्री चंद्रप्रकाश साहू एवं बीटीएम श्री पीताम्बर भुआर्य के साथ आए किसानों ने मखाना बोर्ड एवं राज्य शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। डॉ.पूजा ने बताया कि मखाना की खेती को प्रोत्साहन देने हेतु प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता एवं सब्सिडी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।         उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम व्यावसायिक मखाना उत्पादन आरंग विकासखंड के ग्राम लिंगाडीह में स्वर्गीय श्री कृष्ण कुमार चंद्राकर द्वारा प्रारंभ किया गया था, जहाँ राज्य का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र भी स्थापित हुआ।       आज मखाना उत्पादन छत्तीसगढ़ की नई कृषि पहचान बन रहा है। धमतरी की महिला किसानों का यह प्रयास न केवल कृषि नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन,प्रशिक्षण और प्रशासनिक संकल्प से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।

उत्तर बस्तर कांकेर: किसानों ने अब तक 2.21 लाख मेट्रिक टन से अधिक धान बेचा

उत्तर बस्तर कांकेर खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत जिले के सभी 149 उपार्जन केंद्रों तथा 70 सहकारी समितियों में किसानों के द्वारा धान बेचा जा रहा है। खाद्य शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में अब तक कुल 2 लाख 21 हजार 386 मेट्रिक टन धान किसानों द्वारा बेचा जा चुका है। इसमें 2 लाख 19 हजार 187 मेट्रिक टन मोटा धान तथा 2 हजार 073 मेट्रिक टन पतला और 126 मेट्रिक टन सरना वैरायटी का धान सम्मिलित है। इस संबंध में बताया गया कि ’टोकन तुंहर हाथ’ एप के जरिए सभी किसानों को अब सप्ताह के सातों दिन और 24 घण्टे ऑनलाइन माध्यम से तथा उपार्जन केन्द्र में पहुंचकर टोकन प्राप्त करने की सुविधा प्रारंभ हो गई है। उल्लेखनीय है कि कांकेर जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए केन्द्र प्रभारी तथा पर्यवेक्षण व निगरानी के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है। साथ ही कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के निर्देशानुसार धान के परिवहन, भण्डारण तथा विक्रय की अवैध गतिविधियों को रोकने गठित टीमों के द्वारा सतत् निगरानी की जा रही है।

मखाना खेती से बदलेगी धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर

डबरी से समृद्धि तक महिलाओं ने मखाना खेती में देखी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह  40 महिला किसान समूह ने मखाना प्रोसेसिंग एवं आधुनिक खेती तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया  रायपुर कृषि विविधीकरण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में धमतरी जिले ने एक और ठोस कदम बढ़ाया है। विकासखंड नगरी के ग्राम सांकरा से 40 इच्छुक महिला किसान समूह का एक दल रायपुर जिले के विकासखंड आरंग अंतर्गत ग्राम लिंगाडीह पहुंचा, जहाँ उन्होंने मखाना प्रोसेसिंग एवं आधुनिक खेती तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस अध्ययन भ्रमण एवं प्रशिक्षण की संपूर्ण व्यवस्था जिला उद्यानिकी विभाग, धमतरी द्वारा की गई। ख़ास कर कलेक्टर धमतरी ने मखाना खेती को बढ़ावा देने और किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी को लेकर रुचि ले रहे हैं ।  ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी अब जल्द ही धान से आगे सोच से मखाना खेती से धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी ।  छोटी छोटी डबरी से समृद्धि तक धमतरी की महिलाओं को मखाना खेती में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह दिखायी दे रही है । शासकीय प्रयासों का प्रतिफल है कि मखाना खेती से धमतरी में आर्थिक सशक्तिकरण होगा । मखाना का उत्पादन लागत और बाजार संभावनाओं पर विस्तार से दी जानकारी कलेक्टर के सतत प्रयासों से धमतरी जिले के ग्राम राखी, पीपरछेड़ी, दंडेसरा, राँकाडोह एवं सांकरा में लगभग 90 एकड़ क्षेत्र में डबरी चिन्हांकन कर मखाना खेती की शुरुआत हो चुकी है। महिला किसानों ने  स्थानीय ओजस फार्म का भ्रमण करते हुए मखाना की खेती, कटाई, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी संपूर्ण श्रृंखला को नजदीक से समझा। फार्म प्रबंधक श्री संजय नामदेव ने किसानों को बताया कि मखाना की खेती के लिए जलभराव वाली डबरी, तालाब या जल संरचनाएं उपयुक्त होती हैं। उन्होंने तकनीकी पहलुओं, बीज चयन, उत्पादन लागत और बाजार संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी तथा यह भी बताया कि उचित प्रशिक्षण एवं सरकारी सहयोग से यह फसल किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है। स्थायी आय का मजबूत स्रोत विकसित इस अवसर पर श्री शिव साहू ने मखाना खेती के व्यावसायिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह फसल कम जोखिम वाली है और इससे स्थायी आय का मजबूत स्रोत विकसित किया जा सकता है। महिला किसानों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मखाना खेती से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का नया अवसर दिखाई दे रहा है।   एक किलो मखाना बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप तैयार बिहार के दरभंगा निवासी मखाना प्रोसेसिंग विशेषज्ञ श्री रोहित साहनी फोड़ी ने प्रसंस्करण की बारीकियां समझाते हुए बताया कि 1 किलो मखाना बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप तैयार होता है, जिसकी बाजार कीमत 700 रुपये से 1000 रुपए प्रति किलो तक होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसान स्वयं उत्पादन के साथ प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग करें, तो प्रति एकड़ लाभ में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। औसत उत्पादन 10 क्विंटल तक प्राप्त इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रमुख वैज्ञानिक ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जानकारी देते हुए बताया कि प्रति एकड़ लगभग 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है और औसत उत्पादन 10 क्विंटल तक प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि छह माह की अवधि वाली इस फसल में कीट-व्याधि का प्रकोप नगण्य होता है तथा चोरी जैसी समस्याएं भी नहीं होतीं, जिससे यह किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प बनती है। किसानों ने मखाना बोर्ड एवं राज्य शासन की योजनाओं की दी गई जानकारी उप संचालक उद्यानिकी, धमतरी  डॉ.पूजा कश्यप साहू के मार्गदर्शन में ग्रामीण उद्यानिकी अधिकारी श्री चंद्रप्रकाश साहू एवं बीटीएम श्री पीताम्बर भुआर्य के साथ आए किसानों ने मखाना बोर्ड एवं राज्य शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। डॉ.पूजा ने बताया कि मखाना की खेती को प्रोत्साहन देने हेतु प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता एवं सब्सिडी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।      राज्य का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र भी स्थापित उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम व्यावसायिक मखाना उत्पादन आरंग विकासखंड के ग्राम लिंगाडीह में स्वर्गीय श्री कृष्ण कुमार चंद्राकर द्वारा प्रारंभ किया गया था, जहाँ राज्य का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र भी स्थापित हुआ। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा आज मखाना उत्पादन छत्तीसगढ़ की नई कृषि पहचान बन रहा है। धमतरी की महिला किसानों का यह प्रयास न केवल कृषि नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन,प्रशिक्षण और प्रशासनिक संकल्प से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।

नगरी अंचल में हरित क्रांति की नींवः फुटहामुड़ा नहर से 22 गांवों को मिलेगी स्थायी सिंचाई

रायपुर  धमतरी जिले के नगरी विकासखंड में बहुप्रतीक्षित फुटहामुड़ा नहर निर्माण परियोजना अब तेज़ी से मूर्त रूप ले रही है। यह महत्वाकांक्षी योजना क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों के जीवन में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है। गंगरेल जलाशय के सैंडल डैम, ग्राम फुटहामुड़ा से प्रारंभ होकर लगभग 19.74 किलोमीटर लंबी यह नहर परियोजना नगरी विकासखंड के 22 ग्रामों के लगभग 1940 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सुनिश्चित सिंचाई सुविधा प्रदान करेगी। परियोजना के पूर्ण होने से खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों का रकबा बढ़ेगा, जिससे किसानों की उत्पादन क्षमता और आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। परियोजना के सुचारु क्रियान्वयन हेतु प्रशासनिक स्तर पर भी सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण कर ली गई हैं। मुख्य नहर से प्रभावित 10 ग्रामों में 14.33 हेक्टेयर भूमि का भू-अर्जन पूरा हो चुका है, वहीं वन प्रकरण से प्रभावित 24.42 हेक्टेयर भूमि की अंतिम स्वीकृति भी प्राप्त हो गई है। इन स्वीकृतियों के बाद निर्माण कार्य में आने वाली सभी प्रमुख बाधाएं समाप्त हो गई हैं और कार्य अब निर्बाध गति से आगे बढ़ रहा है। जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अनुसार, यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। सिंचाई सुविधा सुनिश्चित होने से कृषि आधारित रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, किसानों की आय में वृद्धि होगी और क्षेत्र से होने वाले पलायन पर भी प्रभावी रोक लगेगी। ज्ञात हो कि फुटहामुड़ा नहर परियोजना नगरी विकासखंड के किसानों को दीर्घकालीन लाभ देने वाली योजना है। प्रशासन की प्राथमिकता है कि निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समयसीमा में पूर्ण हो, ताकि यह परियोजना कृषि समृद्धि के साथ-साथ क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा दे सके। उल्लेखनीय है कि हाल ही में उच्च स्तरीय अधिकारियों द्वारा परियोजना स्थल का निरीक्षण कर निर्माण की प्रगति, तकनीकी पहलुओं और आवश्यक संसाधनों की समीक्षा की गई थी। अधिकारियों के मार्गदर्शन में अब कार्य को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है। फुटहामुड़ा नहर परियोजना को नगरी अंचल में हरित क्रांति की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।