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रायपुर : सोलर पैनल अपनाकर देवश्री साहू बनीं आत्मनिर्भर, बिजली बिल से मिली पूर्ण मुक्ति

रायपुर : सोलर पैनल अपनाकर देवश्री साहू बनीं आत्मनिर्भर, बिजली बिल से मिली पूर्ण मुक्ति रायपुर पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से न केवल बिजली बिल से राहत मिल रही है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी भागीदारी का अवसर दे  रहा है। सोलर पैनल अपनाकर लोग आत्मनिर्भर बन रहे हैं।बलौदाबाजार की शिक्षिका देवश्री साहू ने भी योजना के तहत अपने मकान के छत पर सोलर पैनल लगवाया जिससे अब मुफ्त बिजली का लाभ मिल रहा है।  ग्राम खैरघटा निवासी और पेशे से शिक्षिका  देवश्री साहू  ने बताया कि सोलर पैनल लगाने की प्रेरणा उन्हें अपने भाई के घर से मिली, जहाँ उन्होंने पहली बार इस तकनीक को देखा और इसके फायदों के बारे में विस्तार से समझा। शासन की इस लोक-कल्याणकारी योजना से प्रभावित होकर उन्होंने जून 2025 में अपने घर की छत पर 3 किलोवाट का सोलर पैनल स्थापित करवाया। सोलर पैनल लगने के बाद देवश्री के घर की बिजली व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आया है। उन्होंने हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि पहले जिस बिजली बिल के भुगतान की चिंता बनी रहती थी, वह अब लगभग शून्य हो गया है। साथ ही इसे लगाने पर केंद्र और राज्य सरकार से सब्सिडी भी मिली है। एक शिक्षिका होने के नाते वे समाज में जागरूकता के महत्व को समझती हैं और अब वे अपने आस-पड़ोस के लोगों को भी सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।आज क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।   देवश्री ने अपनी इस आर्थिक बचत और सहूलियत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का हृदय से आभार व्यक्त किया है। उनका मानना है कि यह योजना न केवल पर्यावरण संरक्षण में मददगार है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और उन्हें बिजली के खर्चों से मुक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में 'पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना' का क्रियान्वयन जिस तेजी से हो रहा है, उसका सीधा लाभ देवश्री जैसे मध्यमवर्गीय परिवारों को मिल रहा है।

अबूझमाड़ की पारुल को मिली नई ज़िंदगी, प्रोजेक्ट धड़कन बनी नन्ही धड़कनों का सहारा

सफलता की कहानी  अबूझमाड़ की पारुल को मिली नई ज़िंदगी : प्रोजेक्ट धड़कन बनी नन्ही धड़कनों का सहारा  रायपुर नारायणपुर जिले के दूरस्थ ब्रेहबेड़ा गांव की 2 वर्षीय पारूल दुग्गा अब फिर से मुस्कुरा रही है। कुछ समय पहले तक यह नन्हीं बच्ची जल्दी थक जाती थी, सामान्य बच्चों की तरह खेल नहीं पाती थी और परिवार उसकी सेहत को लेकर लगातार चिंतित रहता था। गांव के सीमित संसाधनों के बीच माता-पिता को यह भी पता नहीं था कि उनकी बच्ची के हृदय में गंभीर समस्या है। लेकिन जिले में शुरू किए गए “प्रोजेक्ट धड़कन” ने न केवल बीमारी की समय पर पहचान की, बल्कि पारूल को नया जीवन भी दे दिया। नारायणपुर जिले में बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण के उद्देश्य से फरवरी 2026 में “प्रोजेक्ट धड़कन” की शुरुआत की गई थी। इस विशेष अभियान का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों की हृदय संबंधी जांच कर गंभीर मामलों की शुरुआती अवस्था में पहचान करना है, ताकि समय रहते उनका उपचार कराया जा सके। खास बात यह है कि यह पहल उन सुदूर क्षेत्रों तक पहुंची, जहां पहले विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहद सीमित थी। अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव-गांव जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग की। प्रथम चरण में 3000 से अधिक बच्चों की जांच की गई। इस दौरान तीन बच्चों में हृदय रोग के संभावित लक्षण पाए गए। इनमें ब्रेहबेड़ा की पारूल दुग्गा भी शामिल थी। जब पारूल के परिवार को बच्ची की बीमारी की जानकारी मिली तो चिंता बढ़ गई, लेकिन पहली बार उम्मीद भी जगी। प्रशासन ने तुरंत बेहतर इलाज की व्यवस्था की। प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इन बच्चों को रायपुर स्थित श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के लिए रवाना किया और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। रायपुर पहुंचने पर श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पारूल की विस्तृत जांच की। जांच में उसके हृदय में गंभीर समस्या की पुष्टि हुई, जिसके लिए ऑपरेशन आवश्यक बताया गया। परिवार के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय था, लेकिन जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा विशेषज्ञों के समन्वय से उपचार की पूरी प्रक्रिया सुनिश्चित की गई। 10 अप्रैल 2026 को श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल, रायपुर में पारूल की सफल हृदय सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की निगरानी में उसकी लगातार देखभाल की गई।  आज पारूल अपने घर लौट चुकी है। वह  खेल रही है, मुस्कुरा रही है और परिवार की गोद में नई ऊर्जा के साथ पल रही है। वही अब परिवार के चेहरे पर सबसे बड़ी मुस्कान बन गई है। कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा कि “प्रोजेक्ट धड़कन” का उद्देश्य केवल बीमारी की पहचान करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद बच्चों को समय पर जीवनरक्षक उपचार दिलाना है। उन्होंने कहा कि जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले किसी भी बच्चे को स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में कठिनाई न झेलनी पड़े, इसके लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है।            उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम, चिकित्सकों, मैदानी कर्मचारियों और अभियान से जुड़े सभी अधिकारियों-कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल जिले में बाल स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है। आने वाले समय में और अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग कर संभावित मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। पारूल की कहानी सिर्फ एक सफल ऑपरेशन की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है, जहां जंगलों और पहाड़ों के बीच बसे गांवों तक संवेदनशील शासन पहुंच रहा है। यह उस भरोसे की कहानी है, जिसमें दूरस्थ परिवारों को भी विश्वास है कि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।           “प्रोजेक्ट धड़कन” अब नारायणपुर में एक योजना भर नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद का नाम बन चुका है, जिनके लिए हर नन्हीं धड़कन सबसे कीमती है।

Car Buyers के लिए राहत: डीलर अब जबरन एसेसरीज और इंश्योरेंस नहीं थोप सकेंगे

रायपुर. नए वाहन की खरीदी के दौरान अब ग्राहकों पर वाहन डीलर  बीमा और एसेसरीज क्रय करने के लिए अनावश्यक दबाव नहीं डाल पाएंगे. छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग ने सभी पंजीयन प्राधारिकारियों को निर्देश हैं, जिसके तहत बीमा, एसेसरीज के लिए दबाव डालने की शिकायत पर संबिधत डीलर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. केन्द्रीय मोटरयान नियम, 1989 के नियम 34 से 44 तक के प्रावधानों में कार्रवाई हो सकती है. जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में कई वाहन डीलर उनके शोरूम से गाड़ी खरीदने पर ग्राहकों से बीमा, एसेसरीज लेने के लिए दबाव बनाते हैं. दवा व्यापारी संजय कुमार रावत ने इसे लेकर मुख्यमंत्री से शिकायत की थी. मामला मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचने के बाद परिवहन विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए. परिवहन विभाग ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी वाहन खरीदार को इंश्योरेंस, एसेसरीज किसी विशेष डीलर या स्रोत से लेने बाध्य नहीं किया जा सकता. यह अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है, जो विधि सम्मत नहीं है. ग्राहकों पर किसी प्रकार का दबाव या अनिवार्यता नहीं थोपने के लिए सभी अधिकृत वाहन विक्रेताओं को निर्देशित किया गया है. यह भी उल्लेखित किया गया कि अगर कोई शिकायत मिलती है तो संबंधित डीलरों के खिलाफ मोटरयान नियमों के अंतर्गत कठोर कार्रवाई की जाएगी. आदेश में कहा गया है कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा-39 के अनुसार बिना वैध पंजीयन के कोई भी वाहन सार्वजनिक स्थान पर उपयोग नहीं किया जा सकता है, लेकिन  पंजीयन के लिए एसेसरीज क्रय करने की कोई अनिवार्यता निर्धारित नहीं की गई है. केन्द्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 और छत्तीसगढ़ मोटरयान नियम, 1994 के अंतर्गत केवल निर्धारित सुरक्षा एवं मानक उपकरणों का प्रावधान किया गया है. अतिरिक्त एसेसरीज (जैसे सीट कवर, म्यूजिक सिस्टम, क्रैश गार्ड, फुट रेस्ट, साड़ी गार्ड, वाटर गार्ड, पंचर सुधारने, टायरों में हवा भरने की किट आदि) वैकल्पिक प्रकृति की हैं. उनका क्रय पूर्णतः वाहन खरीदार के विवेक पर निर्भर है कि वह अपने वाहन से संबंधित आवश्यक एक्सेसरीज शोरूम से खरीदे या स्थानीय बाजार से. भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा-निदेर्शों के अनुसार बीमा पॉलिसी का क्रय पूर्णतः ग्राहक की स्वयं की पसंद पर आधारित है और किसी भी बीमा उत्पाद को अन्य उत्पाद, सेवा के साथ अनिवार्य से जोड़ना या बाध्य करना अनुमति नहीं है.

संवेदनशील नेतृत्व का प्रभाव: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर वृद्ध हितग्राही को मिली तत्काल राहत

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संवेदनशील, सजग और जनकेंद्रित नेतृत्व का एक और सशक्त उदाहरण सामने आया है, जहाँ एक वृद्ध हितग्राही की समस्या पर त्वरित संज्ञान लेते हुए शासन ने तुरंत राहत सुनिश्चित की। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश पर गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर विकासखण्ड के ग्राम पथर्री निवासी भीखलु राम ध्रुव को जिला प्रशासन की सक्रियता से बड़ी राहत मिली है। मीडिया के माध्यम से प्रसारित एक खबर में यह जानकारी सामने आई थी कि भीखलु राम ध्रुव लंबे समय से पेंशन और राशन जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित थे। इस खबर को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिना विलंब किए तत्काल संज्ञान लिया और जिला प्रशासन को निर्देशित किया कि संबंधित हितग्राही को शीघ्र लाभ उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया और प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप कलेक्टर बीएस उइके ने स्वयं मामले की जानकारी ली और संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जांच में यह तथ्य सामने आया कि भीखलु राम ध्रुव का ई-केवाईसी किसी कारणवश लंबित था, जिसके कारण उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। प्रशासन द्वारा तत्काल ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूर्ण कराई गई, जिससे उन्हें पुनः शासकीय योजनाओं का लाभ मिलना प्रारंभ हो गया है। प्रशासन की तत्परता का परिणाम यह रहा कि भीखलु राम ध्रुव को तीन माह की लंबित वृद्धावस्था पेंशन एकमुश्त प्रदान की गई।  वहीं खाद्य विभाग द्वारा भी संवेदनशीलता दिखाते हुए उनके घर पहुंचकर 01 क्विंटल चावल उपलब्ध कराया गया है। अब उन्हें नियमित रूप से उचित मूल्य की दुकान से राशन मिलना सुनिश्चित किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के इस मानवीय और तत्पर हस्तक्षेप से राहत प्राप्त करने पर भीखलु राम ध्रुव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पेंशन और राशन मिल जाने से मेरे जीवन में बड़ी राहत आई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की यह संवेदनशीलता मेरे लिए बहुत मायने रखती है। अब मुझे भरोसा है कि सरकार हमारी चिंता करती है।  उल्लखेनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शासन केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रत्येक जरूरतमंद तक उनका लाभ समय पर पहुंचे, इसके लिए निरंतर सजग और प्रतिबद्ध है।

नक्सलमुक्त बस्तर में अब हो रहा है तेजी से अधोसंरचना निर्माण

रायपुर. नक्सलमुक्त आबूझमाड़ क्षेत्र में अब बुनियादी सुविधाओं का निर्माण कार्य तेजी से किये जा रहे हैं । अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में सड़क, जल निकासी, ओवरहेड टैंक, लघु सिंचाई योजना सहित अन्य कार्यो ने जोर पकड़ लिया है । पिछले दिनों नक्सलमुक्त आबूझमाड़ में सीटीई की टीम ने विभिन्न निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया । टीम ने नारायणपुर के हरिमार्कटोला, सड़क का निरीक्षण किया। टीम ने देखा कि निर्मित सड़कों मोटाई और चौड़ाई को सही मानक स्तर की है, इसी तरह ग्राम दूरस्थ ओरछा ब्लाक में निर्मित शेड की निरीक्षण किया गया । जिले के ग्राम पालकी में निर्मित ओवरहेड टैंक की टीम ने निरीक्षण किया। इसी तरह से जल संसाधन विभाग के अंतर्गत बैनूर रिजर्वायर के नवीनीकरण कार्य का निरीक्षण किया गया। टीम ने निर्माण कार्यों में लगे अधिकारियों से निर्माण कार्यों की विस्तार से जानकारी ली एवं अधिकारियों को जरूरी मार्गदर्शन भी दिया। नक्सलमुक्त बस्तर में अब विभिन्न निर्माण कार्यों के निरीक्षण करने जांच एजेन्सीयों के दल आसानी से पहुंच रहे हैं। तकनीकी टीमों द्वारा निर्माण कार्यों को कराने स्थानीय अधिकारियों को उचित मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है, जिससे अब सुदूर अबूझमाड़ में निर्माण कार्य गुणवत्ता पूर्ण तेजी से किए जाने लगे हैं।

बस्तर के गांवों तक बिजली पहुँचने से अंधकार और भय कम हुआ जीवन में आई रोशनी

रायपुर. नक्सल समस्या के दूर होने के साथ बस्तर क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। पहली बार दूरस्थ गांवों तक बिजली पहुँचने से अंधकार और भय कम हुआ है, जीवन स्तर में सुधार आया है और विकास को नई गति मिली है, जो बस्तर के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की ओर संकेत करता है। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिला का अबूझमाड़ क्षेत्र का ग्राम ईरपानार दशकों के अंधेरे के बाद पहली बार बिजली की रौशनी से जगमगा उठा है। यह विकास राज्य सरकार की नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत संभव हुआ है, जिसका उद्देश्य बस्तर के दूरस्थ और संवेदनशील इलाकों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना है। बिजली आने से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। अब वे मोबाइल चार्ज कर सकेंगे, पंखे चला सकेंगे और रात के समय सांप-बिच्छू के डर से मुक्त होकर सुरक्षित महसूस करेंगे। कभी नक्शे पर नाम भर रह गया ईरपानार आज उम्मीदों की नई पहचान बन गया है। अबूझमाड़ के गहरे जंगलों, ऊंचे पहाड़ों और दुर्गम पगडंडियों के बीच बसे इस छोटे से गांव में पहली बार बिजली पहुँची है। वर्षों तक अंधेरे में जीवन गुजारने वाले ग्रामीणों के घरों में जब पहली बार बल्ब जले, तो गांव ने सिर्फ उजाला नहीं देखा, बल्कि विकास को महसूस किया। ईरपानार के अलावा, बस्तर संभाग के अन्य नक्सल प्रभावित इलाकों जैसे बीजापुर के चिल्कापल्ली (जनवरी 2025) और तेमिनार (मार्च 2025) में भी पिछले कुछ समय में बिजली पहुंची है, जो विकास के नए अध्याय की शुरुआत है। इन क्षेत्रों में श्नियद नेल्ला नारश् (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत तेजी से बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। ईरपानार नारायणपुर जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी स्थित है, लेकिन यह दूरी सामान्य रास्ते जैसी नहीं है। यहां तक पहुंचने के लिए कच्चे मार्ग, पहाड़ी चढ़ाई, घने वन क्षेत्र और कई स्थानों पर पैदल सफर करना पड़ता है। बरसात के मौसम में संपर्क और भी कठिन हो जाता है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, नारायणपुर संभाग ने इस चुनौतीपूर्ण कार्य को प्राथमिकता से पूरा किया। कार्यपालन अभियंता सहित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद मिशन मोड में काम कर सफलता हासिल की। घने जंगलों के बीच चला विकास अभियान कलेक्टर नाराणपुर ने बताया कि ईरपानार तक बिजली पहुंचाना सामान्य तकनीकी कार्य नहीं था। कई हिस्सों में बिजली खंभे, तार और सामग्री पहुंचाने के लिए कठिन श्रम करना पड़ा। टीम को ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों, जंगलों और सीमित संसाधनों के बीच काम करना पड़ा। कई स्थानों पर मशीनों की बजाय मानव श्रम और स्थानीय सहयोग से सामग्री पहुंचाई गई।बिजली लाइन विस्तार, पोल स्थापना और कनेक्शन कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा कर विभागीय टीम ने मिसाल पेश की है। 56.11 लाख की लागत लेकिन असर पीढ़ियों तक ग्राम ईरपानार के विद्युतीकरण कार्य पर कुल 56.11 लाख रूपए की लागत आई। इस परियोजना के तहत गांव के परिवारों को पहली बार विद्युत कनेक्शन प्रदान किया गया एवं उस सोच का प्रतीक ह,ै जिसमें अंतिम छोर पर बसे परिवार को भी विकास का समान अधिकार दिया जा रहा है। अब बच्चों के सपनों को मिलेगा उजाला बिजली आने से अब गांव के बच्चों को रात में पढ़ाई के लिए रोशनी मिलेगी। मोबाइल चार्जिंग जैसी सामान्य सुविधा, जो शहरों में सहज है, अब यहां भी उपलब्ध होगी। पंखे, लाइट और छोटे घरेलू उपकरणों से जीवन आसान होगा। भविष्य में डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, संचार सुविधाओं और छोटे व्यवसायों के अवसर भी विकसित हो सकते हैं। ग्रामीणों की आंखों में दिखी खुशी जब पहली बार गांव में बल्ब जले, तो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर चेहरे पर उत्साह दिखाई दिया। कई ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने अपने घरों में पहली बार स्थायी रोशनी देखी है। वर्षों से लालटेन, लकड़ी और सीमित साधनों पर निर्भर जीवन अब बदलने लगा है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और बिजली विभाग की टीम के प्रति आभार जताया। लोगों ने इसे गांव के लिए ऐतिहासिक दिन बताया। अबूझमाड़ में बदलाव की नई शुरुआत ईरपानार के अबुझमाड़ के ही हांदावाड़ा गांव में भी हाल के महीनों में पहली बार बिजली पहुंची है, जो बस्तर में एक नए अध्याय की शुरुआत है। ईरपानार जैसे अन्य दूरस्थ गांवों को भी प्राथमिकता के आधार पर बिजली, सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है।

अरुण साव बोले – खेलों में समग्र विकास के लिए छत्तीसगढ़ तैयार

रायपुर.  राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के खेल मंत्रियों का दो दिवसीय चिंतन शिविर आज श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर (Sher-i-Kashmir International Conference Centre) में प्रारंभ हुआ। इस राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण आयोजन में केंद्रीय युवा कार्य और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे, विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खेल मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं।  छत्तीसगढ़ की ओर से उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार इस चिंतन शिविर में भागीदारी कर रहे हैं। उप मुख्यमंत्री साव ने इस मौके पर कहा कि छत्तीसगढ़ खेलों के क्षेत्र में समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। छत्तीसगढ़ पूरे देश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ेगा।  साव ने बताया कि आज शिविर के पहले दिन केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के साथ देश में खेलों को नई दिशा देने पर मंथन किया गया। यह पहल न केवल नीतियों को मजबूत करेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को आगे लाने का मार्ग भी प्रशस्त करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के अनुरूप 2047 तक भारत को खेल महाशक्ति बनाने केंद्र सरकार और राज्य सरकारें एकजुट होकर कार्य कर रही हैं। छत्तीसगढ़ के हर गांव और हर शहर से नए खिलाड़ी उभरें और देश-विदेश के खेल मंचों पर अपना परचम लहराएं, यह हमारा लक्ष्य है। 26 अप्रैल तक चलने वाला यह शिविर देश में खेलों के समग्र विकास, नीति सुधार, वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लक्ष्य को हासिल करने और भारत को खेल शक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्रालय द्वारा लगातार दूसरे वर्ष इस चिंतन शिविर का आयोजन किया गया है।  चिंतन शिविर के पहले दिन के प्रमुख सत्रों में ‘मेडल स्ट्रेटजी – खेलो इंडिया’ पर गहन मंथन किया गया। विभिन्न राज्यों से प्राप्त सुझावों के आधार पर खेल प्रशिक्षकों के पोटेंशियल को विकसित करने पर सर्वसम्मति बनी। साथ ही वर्ष 2048 तक भारत को ओलंपिक पदक तालिका में शीर्ष 5 देशों में शामिल करने के रोडमैप पर व्यापक चर्चा हुई। इसमें स्पोर्ट्स साइंस के विस्तार एवं उसके प्रभावी उपयोग को खेल विकास का महत्वपूर्ण आधार माना गया। खेल मंत्रालय द्वारा इस पर निरंतर कार्य किया जा रहा है। द्वितीय सत्र ‘खेलो भारत नीति – केंद्र एवं राज्य समन्वय को सुदृढ़ करना’ विषय पर आयोजित हुआ। इस सत्र में विभिन्न राज्यों के बेस्ट प्रेक्टिसेस को साझा किया गया। खिलाड़ियों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के प्रभावी उपयोग, प्रतिभा पहचान (Talent Identification) तथा खेल अकादमियों के मानकीकरण पर विशेष बल दिया गया। सत्र के दौरान विद्यालय स्तर पर खेलों को सशक्त बनाने के लिए शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य रूप से जोड़ने, खेल शिक्षकों की भर्ती एवं उन्हें उन्नत प्रशिक्षण प्रदान करने पर सहमति बनी। साथ ही खिलाड़ियों का समग्र डॉटा-बेस तैयार करने पर राज्यों एवं केंद्र द्वारा संयुक्त रूप से कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया, ताकि प्रतिभाओं की सही पहचान सुनिश्चित हो सके। इस सत्र में यह भी रेखांकित किया गया कि खिलाड़ियों को केवल नौकरी प्राप्त करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि देश के लिए पदक जीतने के लक्ष्य के साथ समर्पित होकर खेलना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अधिक अवसर, सम्मान एवं आर्थिक लाभ प्राप्त होते हैं। साथ ही इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि खिलाड़ियों के लिए ऐसी व्यवस्था (मॉडल) विकसित की जाए, जिससे वे नौकरी प्राप्त करने के बाद भी खेल जारी रखें और अपने खेल करियर को बीच में न छोड़ें। ग्रामीण क्षेत्रों में खेल संस्कृति विकसित करने, जमीनी स्तर पर सुविधाओं के विस्तार तथा बच्चों को अधिक समय खेल गतिविधियों में देने पर भी विशेष जोर दिया गया। साथ ही खेल अधोसंरचना के निर्माण में विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई। तीसरे सत्र में डोपिंग एवं खेल नैतिकता पर गंभीर चर्चा हुई। खेलों में प्रतिबंधित  दवाईयों के उपयोग पर कड़े नियम बनाने तथा डोपिंग को अपराध की श्रेणी में लाने के विषय पर केंद्र सरकार एवं खेल मंत्रालय की सख्त नीति को दोहराया गया। इस सत्र में ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने खेलों में सुरक्षित एवं पेशेवर वातावरण सुनिश्चित करने तथा खिलाड़ियों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से सेफ गॉर्डिंग ऑफिसर्स (Safe Guarding Officers) की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया।

हाफा मोड़ पर सकरी पुलिस की बड़ी दबिश: 335 नग अंग्रेजी शराब के साथ दो तस्कर गिरफ्तार, 40 हजार की खेप जब्त

सकरी. अवैध शराब के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सकरी पुलिस ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए हाफा मोड़ पर घेराबंदी कर दो आरोपियों को भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब के साथ गिरफ्तार किया है। मुखबिर की सटीक सूचना पर की गई इस कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, हाफा मोड़ क्षेत्र में अवैध शराब परिवहन की सूचना मिलते ही टीम ने तत्काल घेराबंदी कर संदिग्धों को रोककर तलाशी ली। इस दौरान घिरधौना निवासी योगेन्द्र यादव (24 वर्ष), पिता बोधराम यादव के पास से 2 सफेद बोरियों में 185 नग अंग्रेजी शराब बरामद की गई। वहीं, दूसरे आरोपी जरौंधा निवासी रवि वर्मा, पिता अरुण वर्मा के कब्जे से 2 सफेद बोरियों में 150 नग अंग्रेजी शराब जब्त की गई। दोनों के पास से कुल 335 नग अंग्रेजी शराब बरामद हुई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 40 हजार रुपए बताई जा रही है। पुलिस ने मौके पर ही दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उनके खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। सख्ती के मूड में पुलिस, तस्करों में दहशत सकरी पुलिस की इस कार्रवाई से साफ संकेत मिल रहा है कि अवैध शराब कारोबार पर अब कड़ा प्रहार जारी रहेगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है और किसी भी प्रकार के अवैध कारोबार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुखबिर तंत्र हुआ मजबूत इस कार्रवाई में मुखबिर की भूमिका अहम रही, जिसकी सूचना पर पुलिस ने सटीक समय पर दबिश देकर बड़ी खेप पकड़ने में सफलता हासिल की। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि पुलिस का खुफिया नेटवर्क अब पहले से अधिक सक्रिय और मजबूत हो गया है। जनता ने की सराहना इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस की तत्परता और सक्रियता की सराहना की है। लोगों का कहना है कि इस तरह की लगातार कार्रवाई से क्षेत्र में अपराध और अवैध गतिविधियों पर निश्चित रूप से अंकुश लगेगा।

घरेलू विवाद ने लिया खौफनाक मोड़: आरक्षक की दूसरी पत्नी के हमले में मां-बेटे की मौत

दुर्ग. दुर्ग के एसटीएफ कॉलोनी में शनिवार सुबह महिला ने आरक्षक ललितेश यादव के घर घुसकर परिवारवालों पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया. हमले में आरक्षक की पत्नी और 9 वर्षीय बेटे की मौके पर मौत हो गई, वहीं एक बेटी गंभीर घायल हो गई. एक बेटी ने बाथरुम में छिपकर अपनी जान बचाने में कामयाब रही. पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी महिला सरोजनी भारद्वाज और बीजापुर में पदस्थ आरक्षक ललितेश यादव के बीच संबंध थे. बताया जा रहा है कि महिला एक दिन पहले भी आरक्षक के घर पहुंची थी, इस दौरान उसे समझाकर वापस भेज दिया गया था. लेकिन महिला ने आज फिर से घर में घुसकर खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया. महिला द्वारा चाकू से किए गए हमले में आरक्षक की पत्नी रीना यादव और 9 वर्षीय बेटे आदित्य यादव की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, वहीं हमले में गंभीर रूप से घायल आरक्षक की बेटी तानिया यादव को उपचार के लिए अस्पताल के आईसीयू में रखा है. घटना के दौरान दूसरी बेटी नैना यादव ने बाथरूम में छिपकर किसी तरह से अपनी जान बचाई. घटना के बाद पूरे कॉलोनी में सनसनी फैल गई है. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. घटना के संबंध में सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने बताया कि आरोपी महिला ने घर में घुसकर महिला और बच्चों पर हमला किया है, जिसमें दो की मौत हो गई और एक बच्ची का इलाज जारी है. फिलहाल, आरोपी से पूछताछ कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है. फेसबुक में दोस्ती, फिर की शादी! घटना को लेकर जो जानकारी सामने आ रही है, उसके अनुसार बीजापुर में पदस्थ आरक्षक ललितेश यादव और जांजगीर-चांपा में रहने वाली आरोपी महिला सरोजनी भारद्वाज के बीच फेसबुक के जरिए दोस्ती हुई थी, जो जल्द ही प्यार में बदल गया. बताया जा रहा है कि आरक्षक ने कथित तौर पर महिला से दूसरी शादी भी कर ली थी. अब पुलिस कथित दूसरी पत्नी के आरक्षक की पहली पत्नी और बच्चों पर हमले के पीछे की वजह जानने में जुटी हुई है.

Old Pension Scheme लागू: Chhattisgarh High Court का बड़ा फैसला, संवर्ग शिक्षकों को फायदा

बस्तर. प्रदेश के 1998-99 संवर्ग शिक्षकों को बड़ी कानूनी जीत मिली है. उच्च न्यायालय ने उनके पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. नियुक्ति की वास्तविक तिथि से पुरानी पेंशन का रास्ता साफ हुआ. राज्य शासन की चुनौती को कोर्ट ने खारिज कर दिया. पहले सिंगल बेंच ने 120 दिनों में लाभ देने कहा था. अब डिवीजन बेंच ने भी उस आदेश को बरकरार रखा है. इस फैसले से हजारों शिक्षकों को राहत मिलेगी. लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई का अंत माना जा रहा है. शिक्षक संगठन इसे न्याय की जीत बता रहे हैं. राजधानी में महापंचायत बुलाकर अगली रणनीति बनेगी. सरकार से जल्द आदेश जारी करने की मांग तेज हो गई है. हजारों परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद है. शिक्षक वर्ग में फैसले के बाद उत्साह का माहौल है.