samacharsecretary.com

CGBSE D.P.Ed. Result 2026 आउट: फर्स्ट ईयर में 51% और सेकंड ईयर में छात्रों ने मारी बाजी

रायपुर. छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से आयोजित D.P.Ed. परीक्षा 2026 का रिजल्ट गुरुवार 8 मई को घोषित कर दिया गया। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा डीपीएड परीक्षा के परिणाम जारी किए गए है। परीक्षार्थी सीजीबीएसई की वेबसाइट पर जाकर अपना परिणाम देख सकते है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा आयोजित डी.पी.एड. (DPEd-) परीक्षा वर्ष 2026 का परीक्षा परिणाम आज 08 मई 2026 को घोषित कर दिया गया है। उक्त परीक्षा में प्रथम वर्ष के 51 तथा द्वितीय वर्ष के 52 परीक्षार्थी सम्मिलित हुए थे। सभी परीक्षार्थी मण्डल की आधिकारिक वेबसाइट https://www.cgbse.nic.in/ पर अपना अनुक्रमांक प्रविष्ट कर परीक्षा परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

सदस्यता अभियान के साथ युवा कांग्रेस ने बढ़ाई सक्रियता, चुनावी तैयारी भी तेज

 रायपुर  छत्तीसगढ़ में भारतीय युवा कांग्रेस के बहुप्रतीक्षित संगठनात्मक चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। प्रदेश से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक नई टीम के गठन की प्रक्रिया जल्द शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। संगठन के भीतर नए नेतृत्व, नई रणनीति और युवा चेहरों को लेकर चर्चाओं का दौर भी तेज हो चुका है। सूत्रों के मुताबिक चुनाव प्रक्रिया से पहले बड़े स्तर पर सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। इस बार संगठन का फोकस ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़कर जमीनी पकड़ मजबूत करने पर रहेगा। सदस्यता शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है, जिससे चुनावी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और संसाधनयुक्त बनाने की तैयारी मानी जा रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए होगी संचालित युवा कांग्रेस इस बार पूरी चुनाव प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित करने की तैयारी में है। सदस्यता से लेकर मतदान तक अधिकांश प्रक्रियाएं ऑनलाइन माध्यम से पूरी कराई जा सकती हैं। संगठन का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कार्यकर्ताओं की भागीदारी पहले से ज्यादा होगी। ब्लॉक स्तर तक चुनाव कराकर संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। प्रमुख दावेदारों का इंटरव्यू  जानकारी के अनुसार चुनाव दो चरणों में संपन्न होंगे। पहले चरण में मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में प्रमुख दावेदारों का इंटरव्यू लिया जाएगा। अंतिम चयन में संगठनात्मक सक्रियता, कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ और उम्र जैसे पहलुओं को अहम माना जाएगा। इधर चुनावी आहट के साथ ही प्रदेशभर में युवा नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है। जिलों में लगातार बैठकों, संपर्क अभियानों और कार्यकर्ताओं के बीच समर्थन जुटाने का सिलसिला शुरू हो चुका है।  इन नामों पर हो रही चर्चा  इस बार जिन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही। है उनमें हन्नी बगा, आदित्य भगत ,निखिल कांत साहू , सत्येंद्र चेलक, प्रशांत बोकड़े, हर्षित बघेल, संदीप वोरा समेत कई युवा नेता शामिल हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डिजिटल चुनाव प्रणाली, बढ़े हुए सदस्यता अभियान और संगठन में नई ऊर्जा की कोशिशों के चलते इस बार युवा कांग्रेस का संगठनात्मक चुनाव पहले की तुलना में ज्यादा प्रतिस्पर्धी और दिलचस्प हो सकता है। साथ ही कई नए चेहरों को भी बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

जांच एजेंसियां न जुटा पाईं सबूत, छत्तीसगढ़ में 76 CRPF जवानों की हत्या के सभी आरोपी हाईकोर्ट से बरी

रायपुर  छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2010 के ताड़मेटला माओवादी हमले मामले में सभी आरोपियों की रिहाई के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया है। इस हमले में 76 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। अदालत ने अपने फैसले में प्रत्यक्ष सबूतों की कमी और जांच में प्रक्रियागत खामियों का हवाला दिया है। जांच में गंभीर खामियां नजर आईं चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की एक खंडपीठ ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें आरोपियों को बरी कर दिया गया था। पीठ ने जांच और अभियोजन पक्ष की कार्रवाई में गंभीर खामियों की ओर भी इशारा किया है। यह आदेश पांच मई को पारित किया गया था और गुरुवार को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। सीआरपीएफ कर्मियों पर बड़ा हमला आदेश में कहा गया है कि सीआरपीएफ कर्मियों पर हुए एक बड़े हमले के मामले में आरोपियों की रिहाई को बरकरार रखा गया। ऐसा प्रत्यक्ष सबूतों की कमी कि परिस्थितिजन्य सबूतों के अधूरेपन, जांच में प्रक्रियागत खामियों और अपराध की गंभीरता के बावजूद, आरोपियों के दोष को 'उचित संदेह से परे' साबित करने में अभियोजन पक्ष की विफलता के कारण किया गया है। अप्रैल 2010 में हुआ था हमला यह मामला छह अप्रैल, 2010 को हुए माओवादी हमले से जुड़ा है। यह हमला तत्कालीन दंतेवाड़ा जिले के चिंतागुफा पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत ताड़मेटला गांव के जंगलों में हुआ था। यह जगह अब सुकमा जिले में है। सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन का एक दल, राज्य पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर इलाके में गश्त पर था। इसी दौरान भारी हथियारों से लैस माओवादियों ने कथित तौर पर उन पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। हमले में मारे गए थे 76 जवान सुरक्षाकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई की, लेकिन इस हमले में 76 सुरक्षाकर्मी मारे गए। इनमें 75 सीआरपीएफ के और एक राज्य पुलिस का जवान शामिल था। यह देश में सुरक्षा बलों पर हुए सबसे घातक माओवादी हमलों में से एक था। जांच के बाद, 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ कोंटा स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में आरोप पत्र दायर किया गया। बाद में इस मामले को दंतेवाड़ा स्थित सत्र न्यायालय को सौंप दिया गया। सभी 10 आरोपियों को कर दिया बरी सुनवाई के बाद सात जनवरी, 2013 को दंतेवाड़ा के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सभी 10 आरोपियों को बरी कर दिया। सत्र अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों पर लगाए गए आरोपों को 'उचित संदेह से परे' साबित करने में विफल रहा है। आरोपियों पर थें ये धाराएं आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों में आपराधिक षड्यंत्र, दंगा करना और हत्या के साथ डकैती डालना शामिल था। बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए, राज्य सरकार ने 2014 में उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। इस मामले के 10 आरोपियों जिन्हें सत्र अदालत द्वारा बरी कर दिया गया था, में से दो की मौत हो चुकी है। अहम सबूतों को नहीं समझ पाई अदालत हाईकोर्ट में महाधिवक्ता विवेक शर्मा और उप महाधिवक्ता सौरभ पांडे ने यह दलील दी कि निचली अदालत अहम सबूतों को ठीक से समझने में नाकाम रही। इन सबूतों में सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज एक आरोपी का इकबालिया बयान और घटनास्थल से बरामद विस्फोटक शामिल थे। कोर्ट ने गवाही की अर्जी कर दी थी खारिज राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि अदालत ने सीआरपीसी की धारा 311 के तहत दायर उस अर्जी को खारिज करके गलती की, जिसमें हमले के चश्मदीद गवाह रहे सीआरपीएफ के सात घायल जवानों की गवाही कराने की मांग की गई थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने यह कहा कि आरोपियों को हत्याओं से जोड़ने वाला कोई सीधा सबूत या चश्मदीद गवाह की गवाही मौजूद नहीं थी, और किसी भी चश्मदीद गवाह ने उन्हें अपराधी के तौर पर नहीं पहचाना था। सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दिया गया कथित इकबालिया बयान किसी भी स्वतंत्र सबूत से पुष्ट नहीं होता है। घटनास्थल से नहीं बरामद हुए हथियार वहीं, अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा जिन विस्फोटकों और हथियारों का जिक्र किया गया था, वे अपराध स्थल से बरामद हुए थे, न कि आरोपियों के कब्ज़े से, साथ ही, जब्त की गई चीजों के विस्फोटक होने की पुष्टि करने वाली फ़ॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट भी अदालत के सामने पेश नहीं की गई थी। अदालत ने की तीखी टिप्पणी  इसके साथ ही खंडपीठ ने कहा कि यह देखकर अत्यंत पीड़ा होती है कि सीआरपीएफ के 75 कर्मियों की जान जाने के बावजूद, जिसमें राज्य पुलिस का एक सदस्य भी शामिल था, कथित तौर पर नक्सलियों द्वारा किए गए एक क्रूर हमले में, अभियोजन एजेंसियां अपराध के असली अपराधियों की पहचान स्थापित करने या इस तरह के बर्बर कृत्य के लिए उन्हें न्याय के दायरे में लाने में सक्षम नहीं हुई हैं। विश्वसनीय सबूत नहीं पेश किया अदालत ने कहा कि हमें यह देखकर भी उतना ही दुख हुआ कि इतने गंभीर मामले को, जिसमें बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ और राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हुआ, अंततः इस तरह से निपटाया गया कि आरोपियों के खिलाफ कोई भी कानूनी रूप से मान्य और विश्वसनीय सबूत पेश नहीं किया जा सका। नतीजतन, निचली अदालत को उन्हें बरी करने के लिए बाध्य होना पड़ा। इन परिस्थितियों में, हमारे पास यह मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है कि निचली अदालत द्वारा पारित बरी करने के आदेश को विकृत, अनुचित या तर्क या न्यायिक औचित्य को चुनौती देने वाला नहीं कहा जा सकता। हालांकि, उच्च न्यायालय ने जांच में पाई गई कमियों पर चिंता जाहिर की और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि भविष्य में होने वाली गंभीर अपराधों की जांच में, खासकर उन मामलों में जिनमें बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ हो और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो, जांच के उच्च मानकों को सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने राज्य को यह निर्देश भी दिया कि वह जांच की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम … Read more

भू-जल संरक्षण के लिए रायपुर प्रशासन की नई पहल, वर्षा जल सहेजकर बढ़ाया जाएगा जल स्तर

रायपुर : वर्षा जल सहेजकर भू -जल स्तर बढ़ाने प्रशासन की अभिनव पहल मोर गांव,मोर पानी अभियान अंतर्गत 87 हजार से अधिक जल संचयन संरचनाएं निर्मित,राष्ट्रीय स्तर पर जिला तीसरे पायदान पर रायपुर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित करने और गिरते भू-जल स्तर को बचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई मुहिम अब धरातल पर बड़े सकारात्मक परिणाम दिखा रही है। बलौदाबाजार प्रशासन की दूरदर्शी सोच और जन-भागीदारी के समन्वय से जिले ने जल संचयन एवं संवर्धन के क्षेत्र में देश भर में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।     बलौदाबाजार जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए संचालित मोर गांव, मोर पानी अभियान 2.0 एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। इस महत्वाकांक्षी अभियान के अंतर्गत अब तक जिले के 722 गांव,517 ग्राम पंचायत, 9 नगरीय क्षेत्र में 87137 जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इनमें सोख्ता गड्ढे, चेक डैम, तालाबों का गहरीकरण और रूफ-टॉप हार्वेस्टिंग जैसे कार्य शामिल हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से बारिश के पानी को बहकर व्यर्थ जाने से रोककर सीधे जमीन के भीतर उतारा जा रहा है। प्रमुख जल संचयन संरचना निर्माण कार्य     कैच द रैन-जल शक्ति अभियान 2.0 जल शक्ति अभियान के तहत जिले में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन के कुल 87173 कार्यों का  जेएसए-सीटीआर पोर्टल में प्रविष्टि किया गया है। रैन वाटर हार्वेस्टिंग, सोक पीट 61831 कार्य,डबरी, कुंआ, तालाब, रिचार्ज पिट, डब्ल्यूएटी,एससीटी 7803 कार्य,जल संसाधन विभाग द्वारा एनीकट, स्टॉप डेम, डायवर्सन, जलाशय, नहर 21 कार्य,वन विभाग(कैम्पा) द्वारा एलबीसीडी, एससीटी, गाबिन, चेक डेम 15259 कार्य,कृषि विभाग द्वारा बोरवेल रिचार्ज,सोक पिट,ट्रेंच 1153 कार्य,अर्बन फंड द्वारा रैन वाटर हार्वेस्टिंग 1034 कार्य,सीएसआर मद द्वारा तालाब गहरीकरण, आरडब्ल्यूएच, ट्रेंच, चेक डेम 72 कार्य, अमृत सरोवर एवं नवीन तलब 51 शामिल है। राष्ट्रीय स्तर पर  उपलब्धि जल प्रबंधन के क्षेत्र में किए गए  विभिन्न संरचना निर्माण में राष्ट्रीय स्टर पर जिला वर्तमान में जिला तीसरे स्थान पर है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासन की कार्यकुशलता को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्र के किसानों आम नागरिक एवं गांव में गठित जल संचय वाहनी क़ी  सक्रिय सहयोग का भी परिणाम है। इसके साथ ही जल संचय को जन आंदोलन का स्वरुप देकर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। भू-जल स्तर में सुधार और कृषि को लाभ व्यापक स्तर पर बनी इन संरचनाओं के कारण क्षेत्र के भू-जल स्तर  में उल्लेखनीय सुधार होग़ा। इसका सीधा लाभ रबी और खरीफ दोनों फसलों के दौरान किसानों को मिलेगा। सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता बढ़ने से कृषि उत्पादकता में वृद्धि की उम्मीद है। प्रशासन का संकल्प जिला प्रशासन द्वारा जल संरक्षण की यह प्रक्रिया सतत रूप से जारी रहेगी। आगामी मानसून से पहले 1 लाख से अधिक संरचनाओं को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि जिले के प्रत्येक गांव को जल के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

रायपुर: छिंद के बीजों से तैयार हर्बल कॉफी, बस्तर की वैश्विक पहचान बनी

रायपुर : बस्तर की नई वैश्विक पहचान: जंगलों में फेंके जाने वाले छिंद के बीजों से तैयार हुई अनोखी हर्बल कॉफी युवा उद्यमी विशाल हालदार का कमाल कचरे से कंचन बनाने के नवाचार को मुख्यमंत्री ने भी सराहा रायपुर, छिंद, खजूर, पाम के बीज, के वेस्ट बीजों से अब स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट हर्बल कॉफी बनाई जा रही है। यह नवाचार न केवल बेकार बीजों का सदुपयोग करता है, बल्कि एक स्वास्थ्यवर्धक कैफीन.मुक्त पेय भी प्रदान करता है। यह कॉफी कैफीन मुक्त है, जो इसे अनिद्रा, हाई ब्लड प्रेशर और एसिडिटी के मरीजों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनाती है। यह नवाचार न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। बस्तर का नैसर्गिक सौंदर्य अब केवल अपनी हरियाली के लिए ही नहीं, बल्कि एक सुगंधित क्रांति के लिए भी जाना जाएगा। दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी युवा नवाचारी विशाल हालदार ने अपनी जड़ों से जुड़कर एक ऐसा प्रयोग किया है, जिसने बेकार समझे जाने वाले संसाधनों को बहुमूल्य बना दिया है। विशाल ने छिंद (खजूर की स्थानीय प्रजाति) के बीजों से कैफीन मुक्त हर्बल कॉफी तैयार कर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। नवाचार कचरे से कंचन तक का सफर बीकॉम और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की पढ़ाई करने वाले विशाल ने करीब दो साल के गहन शोध के बाद इस हर्बल कॉफी को विकसित किया है। बस्तर के जंगलों में प्रचुरता से मिलने वाले छिंद के बीज, जो अब तक व्यर्थ फेंक दिए जाते थे। यह कॉफी पूरी तरह कैफीन मुक्त है, जिससे स्वास्थ्य पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता। इसमें प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो इसे साधारण कॉफी से अधिक स्वास्थ्यवर्धक बनाते हैं। मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित, इनोवेशन महाकुंभ में रहे अव्वल विशाल के इस अभिनव प्रयोग को शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, जगदलपुर में आयोजित इनोवेशन महाकुंभ में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विशाल को इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया। प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी सहित प्रबुद्ध वर्ग ने भी इस कॉफी के स्वाद और सुगंध की जमकर सराहना की है। स्थानीय रोजगार और उद्यमिता का नया मॉडल         विशाल हालदार का लक्ष्य केवल उत्पाद बेचना नहीं, बल्कि बस्तर के युवाओं को स्वावलंबी बनाना है। दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के सहयोग से वे स्थानीय युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट से गांवों और जंगलों से छिंद के बीज इकट्ठा करने वाले ग्रामीणों को आय का एक नया जरिया मिलेगा। स्थानीय संसाधनों का सदुपयोग कर बस्तर के नाम को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना। यदि दृष्टि स्पष्ट हो तो स्थानीय वेस्ट को भी वैश्विक स्तर के बेस्ट उत्पाद में बदला जा सकता है। यह हर्बल कॉफी आने वाले समय में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक दुनिया के लिए बस्तर का अनूठा उपहार साबित होगी। भविष्य की योजना खजूर के बीजों में एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे फेनोलिक यौगिक और ओलिक एसिड भरपूर मात्रा में होते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य और पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद हैं। वर्तमान में यह प्रोजेक्ट टेस्टिंग और विकास के अंतिम चरणों में है। जल्द ही इसकी आधिकारिक लॉन्चिंग की जाएगी, जिसके बाद बस्तर की यह हर्बल कॉफी बाजारों में अपनी खुशबू बिखेरने के लिए तैयार होगी।

सीएम की घोषणा: 1 लाख रुपये के पुरस्कार वाले टॉपर छात्रों को सरकार दिखाएगी IPL मैच

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने 10वीं और 12वीं के बोर्ड नतीजों में मेरिट में आए छात्रों को आईपीएल 2026 का मैच दिखाने का फैसला किया है। यह छात्र 10 मई को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुर के बीच मुकाबले का लुत्फ उठाएंगे। छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी को इस संबंध में आदेश जारी किया है। साल 2026 में छत्तीसगढ़ बोर्ड में 10वीं में करीब 3 लाख 21 हजार छात्रों ने परीक्षा दी थी, जिसमें 77.15 प्रतिशत छात्र पास हुए। इनमें 42 छात्र मेरिट में आए, जिनमें 26 लड़कियां शामिल हैं। दूसरी ओर, 12वीं की परीक्षा में करीब 2.44 लाख छात्र शामिल हुए, जिनमें 83.04 प्रतिशत सफल रहे थे। 1 लाख तक मिलेगा इनाम मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम जारी होने के बाद सफल हुए सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को राज्य के शिक्षा तंत्र, शिक्षकों और अभिभावकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया था। मुख्यमंत्री साय ने इस सफलता को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया था। सरकार ने टॉपर्स को प्रतिभावान छात्र प्रोत्साहन योजना के तहत एक से डेढ़ लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा भी की है। सभी कलेक्टरों को निर्देश इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किए गए हैं। कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं मेरिट में आने वाले छात्रों को मैच दिखाने लाने के लिए व्यवस्था की जाए। जारी लेटर में कहा गया है कि मेरिट लिस्ट में आने वाले छात्रों के साथ एक शिक्षक को 10 मई तक सुबह 10 बजे रायपुर लाने की व्यवस्था करनी होगी।     मेरिट में आने वाले छात्रों को सरकार का तोहफा     छत्तीसगढ़ बोर्ड में टॉप आने वाले छात्र देखेंगे मैच     10 मई को रायपुर में होगा आईपीएल का मैच     सभी जिला कलेक्टरों को दिए गए निर्देश भूपेश सरकार ने कराई थी हेलीकॉप्टर की सैर इससे पहले भूपेश बघेल की सरकार ने मेरिट आने वाले छात्रों को हेलीकॉप्टर में यात्रा कराई थी। मेरिट आने वाले छात्रों को हर साल सरकार की तरफ से हेलीकॉप्टर की सैर कराई जाती थी।  

सामाजिक समरसता और जनकल्याण का बना भव्य उत्सव

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर सामाजिक समरसता और जनकल्याण का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 8 मई को प्रदेशभर में आयोजित भव्य सामूहिक विवाह समारोहों में 1385 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे, जहां एक साथ गूंजती शहनाइयों ने पूरे प्रदेश को उत्सवमय बना दिया। यह आयोजन सामाजिक एकता, समानता और मानवीय संवेदनाओं का विराट उत्सव बनकर सामने आया। राजधानी रायपुर से लेकर सुदूर वनांचल तक हर जिले में आयोजित इन समारोहों में हजारों परिवारों की सहभागिता देखने को मिली। पारंपरिक रीति-रिवाजों, सादगी और गरिमा के साथ सम्पन्न हुए इन विवाहों ने यह संदेश दिया कि शासन की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने नवविवाहित जोड़ों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों की वर्षों पुरानी चिंता को दूर किया है।  महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि यह योजना केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि विवाह को गरिमामय, सुव्यवस्थित और सम्मानजनक स्वरूप भी प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि सभी जिलों में प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां की गईं, जिसमें सुसज्जित विवाह स्थल, गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गईं, ताकि हर नवदंपति और उनके परिजनों को एक सुखद अनुभव मिल सके। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3200 विवाह का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें से 347 विवाह पूर्व में संपन्न हो चुके थे, जबकि 8 मई के राज्यव्यापी आयोजन में 1385 विवाह संपन्न हुए। इस प्रकार अब तक कुल 1732 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंध चुके हैं, जो लक्ष्य की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता है। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी समावेशी भावना रही। हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध सहित विशेष पिछड़ी जनजातियों के जोड़े अपने-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह सूत्र में बंधे। यह दृश्य छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक बन गया। योजना के अंतर्गत प्रत्येक नवविवाहित दंपति को 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान के साथ कर सकें। इसके साथ ही विवाह के दौरान आवश्यक सामग्री एवं अन्य व्यवस्थाएं भी शासन द्वारा सुनिश्चित की जाती हैं। उल्लेखनीय है कि 10 फरवरी 2026 को आयोजित वृहद सामूहिक विवाह समारोह में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में 6412 जोड़े विवाह बंधन में बंधे थे, जिसने सामाजिक समरसता के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए छत्तीसगढ़ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ, जो पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। प्रदेशभर में आयोजित यह आयोजन इस बात का सशक्त प्रमाण है कि संवेदनशील नेतृत्व, प्रभावी योजनाएं और जनभागीदारी मिलकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना महिला सम्मान, सामाजिक समानता और सामूहिक उत्तरदायित्व का प्रतीक बनकर छत्तीसगढ़ के विकास की नई गाथा लिख रही है।

5 वर्षों में रोपे गए 27 लाख से अधिक पौधे, 951 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला हरित आवरण

रायपुर पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र का विस्तार सतत भविष्य के लिए अनिवार्य है। इसमें वृक्षारोपण, जैव विविधता संरक्षण और जन जागरूकता प्रमुख हैं। शहरी क्षेत्रों में मियावाकी पद्धति से पौधारोपण, प्लास्टिक प्रतिबंध और जल प्रदूषण कम किया जा सकता है, जिससे स्वास्थ्य, समृद्धि और पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है। वनों की रक्षा, बंजर भूमि का पुनरुद्धार और सामुदायिक उद्यान विकसित करना है।               छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के बिलासपुर जिले के (कोटा परियोजना मंडल)  पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र के विस्तार में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विगत पांच वर्षों (2021 से 2025-26) के दौरान निगम ने जिले के विभिन्न अंचलों में योजनाबद्ध तरीके से 27 लाख 14 हजार 350 पौधों का रोपण कर 951.980 हेक्टेयर क्षेत्र को हरा-भरा कर दिया है। वृक्षारोपण के प्रमुख आंकड़े और प्रजातियां            852 हेक्टेयर के 66 कक्षों में 21.30 लाख पौधे लगाए गए, जिनमें मुख्य रूप से बेशकीमती सागौन का रोपण किया गया। सघन और त्वरित वृद्धि के लिए नीलगिरी और सागौन के उन्नत क्लोनल पौधों का रोपण किया गया। विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों में 3.16 लाख से अधिक पौधे लगाकर ग्रीन कवर बढ़ाया गया। अरपा नदी का संरक्षण- एक विशेष पहल        नदी पारिस्थितिकी को पुनर्जीवित करने के लिए वर्ष 2025-26 में अरपा नदी के तटों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत कम जगह में घने जंगल विकसित करने के लिए अरपा किनारे 3.620 हेक्टेयर में 20,300 पौधे रोपे जाएंगे। नदी के किनारों पर सघन ब्लॉक वृक्षारोपण और रामसेतु क्षेत्र में विशेष हरियाली विकसित की जाएगी, जिससे भू-क्षरण रुकेगा। दूरगामी प्रभाव वन विकास निगम के ये सतत प्रयास न केवल बिलासपुर के स्थानीय जलवायु संतुलन को बनाए रखने में मददगार साबित हो रहे हैं, बल्कि इससे भविष्य में प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता के संरक्षण का एक मजबूत आधार भी तैयार हो रहा है। निगम का यह अभियान प्रदेश की हरित छत्तीसगढ़ की संकल्पना को साकार करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत 62 जोड़ों ने लिए सात फेरे, नवदंपत्तियों को मिली शासकीय सहायता

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े के निर्देशानुसार रायपुर जिले में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजनांतर्गत आज तीन विभिन्न स्थलों पर सामूहिक विवाह कार्यक्रम गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कुल 62 जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ नए जीवन की शुरुआत की। टाऊन हॉल, आरंग में 16 जोड़ों का विवाह कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास विभाग मंत्री गुरू खुशवंत साहेब के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. संदीप जैन, जनपद अध्यक्ष  टाकेश्वरी मुरली साहू, जनपद सदस्य  पद्मिनी साहू एवं जनपद उपाध्यक्ष  रविन्द्र चंद्राकर उपस्थित रहे। डॉ. भीमराव अंबेडकर भवन, सासाहोली, तिल्दा-नेवरा में 31 जोड़ों का विवाह जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल, जनपद पंचायत अध्यक्ष  टीकेश्वर मनहरे, नगर पालिका अध्यक्ष  चंद्रकला वर्मा, जिला पंचायत सदस्य एवं महिला एवं बाल विकास सभापति  शैल महेन्द्र साहू, जनपद सदस्य एवं महिला एवं बाल विकास सभापति  सरोज मुकेश भारद्वाज, नगर पालिका उपाध्यक्ष  पलक सुखवानी एवं समस्त पार्षदगण तिल्दा की उपस्थिति में संपन्न कराया गया। मंगल भवन, धरसीवां में 15 जोड़ों का विवाह जिला पंचायत सदस्य  सरोज चंद्रवंशी एवं जनपद अध्यक्ष  शकुंतला सेन की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। शासन द्वारा सभी नवविवाहित जोड़ों को योजनांतर्गत निर्धारित सहायता प्रदान की गई। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने नवदंपत्तियों को सुखमय एवं समृद्ध वैवाहिक जीवन हेतु शुभकामनाएं दीं। महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि बेटियों का सम्मान और सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से गरीब परिवारों को संबल मिल रहा है और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिल रहा है। इस दौरान विभागीय अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ सिंचाई परियोजना मंडल की कार्यकारिणी समिति की बैठक संपन्न

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव  विकासशील ने राज्य में स्वीकृत विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कार्यों में गति लाने के सख्त निर्देश दिए हैं। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ सिंचाई परियोजना मंडल की कार्यकारिणी समिति की बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि भू-अर्जन और फारेस्ट क्लीयरेंस जैसी प्रक्रियाओं को समय-सीमा में पूर्ण किया जाए ताकि परियोजनाओं का लाभ किसानों को जल्द मिल सके। बैठक की प्रमुख उपलब्धियां और परियोजनाएं            पैरी-कोडार लिंक नहर (गरियाबंद) सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय तक पाइपलाइन लिंक नहर का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना से महानदी की सहायक पैरी नदी के अतिरिक्त जल का उपयोग पेयजल, निस्तारी और औद्योगिक कार्यों के लिए होगा। इससे गरियाबंद और महासमुंद जिले के 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में नई सिंचाई सुविधा विकसित होगी।              मोहमेला-सिरपुर बैराज (रायपुर)-आरंग विकासखंड में महानदी पर प्रस्तावित इस बैराज से 1800 हेक्टेयर क्षेत्र में उद्वहन सिंचाई सुनिश्चित होगी। यह क्षेत्र में पर्यटन, नौका विहार और सुगम आवागमन को भी बढ़ावा देगा।              मटनार बहुउद्देशीय परियोजना (बस्तर) इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित यह योजना बस्तर के लिए मील का पत्थर साबित होगी। उद्वहन प्रणाली पर आधारित होने के कारण इसमें कोई विस्थापन या पुनर्वास की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी सुरक्षित रहेगी। देउरगांव उद्वहन बैराज (बस्तर) जगदलपुर के समीप इंद्रावती नदी पर बनने वाली यह परियोजना बस्तर के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी। निविदा और प्रशासनिक अनुमोदन           बैठक में विभिन्न परियोजनाओं के निविदा प्रारूपों  पर विस्तार से चर्चा कर उन्हें अनुमोदित किया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव  राजेश सुकुमार टोप्पो, ऊर्जा सचिव  सारांश मित्तर, वित्त विभाग की विशेष सचिव मती शीतल शाश्वत वर्मा सहित विभिन्न परियोजनाओं के मुख्य अभियंता और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।