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बड़ाकरौंजा में 23 मई को लगेगा सुशासन तिहार जनशिविर

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार प्रदेशभर में “सुशासन तिहार 2026” के अंतर्गत जनसमस्या निवारण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में जशपुर जिले के जनपद पंचायत जशपुर अंतर्गत ग्राम बड़ाकरौंजा में 23 मई 2026 को शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर के माध्यम से ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी एवं लाभ भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस शिविर में बड़ाकरौंजा, नीमगांव, रातामाटी, पैकू, पीड़ी, बघिमा, गलौण्डा, टेकूल, तुरीलोदाम, झरगांव, गिरांग, घोलेंग, देवीडड़गांव, जशपुर एवं जुरगुम सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के नागरिक अपनी मांगों एवं समस्याओं से संबंधित आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे। सुशासन तिहार के तहत नागरिकों से लिखित आवेदन प्राप्त कर उनका प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा शिविरों को शासन और आमजन के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम बनाया जा रहा है, ताकि लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दूरस्थ कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। कलेक्टर रोहित व्यास ने शिविर के सुचारू संचालन के लिए नोडल एवं विभागीय अधिकारियों को अपने दायित्वों का गंभीरता एवं निष्ठा के साथ निर्वहन करने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन ने संबंधित क्षेत्रों के नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में शिविर में पहुंचकर शासन की योजनाओं का लाभ उठाने और अपनी समस्याओं के समाधान हेतु आवेदन प्रस्तुत करने की अपील की है।

छत्तीसगढ़ के किसान की बदली किस्मत, सागौन खेती से कमाए 9.69 लाख रुपए

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए एग्रोफॉरेस्ट्री (कृषि-वानिकी) एवं निजी भूमि पर वृक्षारोपण को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार की इसी दूरगामी पहल का एक बेहद सफल और प्रेरणादायी परिणाम बालोद जिले के किसान अनिल जाजू की सफलता के रूप में सामने आया है। नवा रायपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने ग्राम पलारी (तहसील गुरूर) निवासी कृषक अनिल जाजू को उनकी निजी भूमि पर तैयार किए गए सागौन वृक्षों के एवज में 9.69 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि का चेक प्रदान किया।  एग्रोफॉरेस्ट्री और जनभागीदारी से हरित छत्तीसगढ़ का संकल्प इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को पारंपरिक खेती के जोखिमों से उबारने के लिए वृक्ष आधारित कृषि प्रणाली अपनाने हेतु प्रेरित कर रही है।  उन्होंने कहा कि एग्रोफॉरेस्ट्री किसानों के लिए दीर्घकालिक आय का मजबूत माध्यम बन रही है। साथ ही एक पेड़ माँ के नाम अभियान के जरिए जनभागीदारी से हरित छत्तीसगढ़ निर्माण को भी गति मिल रही है। 'एक पेड़ माँ के नाम अभियान वन मंत्री ने कहा कि इस अभियान के माध्यम से अब जनभागीदारी से पूरे प्रदेश को हरा-भरा बनाने की मुहिम को एक नई और अभूतपूर्व गति मिल रही है। 24 वर्षों की मेहनत का  फल मीठा मिला, किसान अनिल जाजू की यह सफलता अन्य किसानों के लिए एक बेहतरीन केस-स्टडी है। वर्ष 2001 में अपनी 3.35 हेक्टेयर निजी भूमि पर सागौन के पौधे लगाए थे। लगभग 24 वर्षों तक देखरेख और संरक्षण के बाद वर्ष 2025 में उन्होंने वृक्ष कटाई नियम 2022 के तहत अनुमति लेकर सागौन वृक्षों की कटाई कराई। वन विभाग की देखरेख में कुल 173 सागौन वृक्षों की कटाई की गई, जिससे 949 नग लकड़ी प्राप्त हुई। इसका कुल आयतन 33.24 घनमीटर दर्ज किया गया। वन विभाग द्वारा निर्धारित दर पर लकड़ी का क्रय किया गया और इसके बदले लगभग 9.69 लाख रूपए की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में जमा कराई गई। ’पर्यावरण और आर्थिक समृद्धि का अनूठा संगम’ जाजू की यह शानदार सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से वृक्षारोपण किया जाए, तो यह किसानों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह काम करता है। इससे न केवल किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनते हैं, बल्कि प्रदेश के हरित आवरण में भारी वृद्धि होती है। जलवायु परिवर्तन के खतरों से लड़ने में मदद मिलती है। स्थानीय स्तर पर जैव विविधता का संरक्षण होता है। किसानों को वन विभाग का निरंतर सहयोग मिलता है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा निजी भूमि पर व्यावसायिक वृक्षारोपण करने वाले इच्छुक किसानों को पौधों के चयन से लेकर तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशासनिक प्रोत्साहन और आवश्यक सहायता लगातार मुहैया कराई जा रही है। शासन का मुख्य ध्येय यही है कि अधिक से अधिक किसान एग्रोफॉरेस्ट्री मॉडल को अपनाएं और अपनी बंजर या खाली जमीनों को मुनाफे के जंगल में बदल सकें।

सुशासन तिहार 2026: बालोद के राहुद में जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हुए हजारों हितग्राही, 1428 आवेदन निपटाए गए

रायपुर सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम राहुद में गुरुवार को शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में ग्राम पंचायत राहुद सहित राहुद कलस्टर में शामिल आसपास के 18 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को शासन के विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित किया गया।  इसके अंतर्गत गुण्डरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर, पूर्व विधायक वीरेन्द्र साहू, जनपद अध्यक्ष पुरूषोत्तम चंद्राकर, जनपद उपाध्यक्ष नीतेश मोंटी यादव, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती कांति सोेनेश्वर सहित अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इस अवसर पर हितग्राहियों को कृषि विभाग अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य कार्ड, मत्स्य पालन प्रसार योजना अंतर्गत जाल एवं आईस बॉक्स का वितरण किया गया। इसी तरह समाज कल्याण विभाग अंतर्गत श्रवण यंत्र एवं छड़ी, स्वामित्व योजना अंतर्गत अधिकार अभिलेख पत्र का वितरण किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास निर्माण पूर्णता प्रमाण पत्र एवं केसीसी कार्ड का वितरण किया। इसके अलावा शिविर में राज्य शासन के निर्देशानुसार दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने हेतु मेडिकल बोर्ड लगाया गया था। इस दौरान मेडिकल बोर्ड में शामिल विशेषज्ञ चिकित्सकों के द्वारा शिविर में दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने पहुँचे दिव्यांगजनों का दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी बनाया गया। शिविर में अतिथियों के द्वारा नन्हें-मुन्हें बच्चों को स्वादिष्ट खीर खिलाकर उनका अन्नप्राशन संस्कार कराया गया। इसके अलावा गर्भवती माताओं को सुपोषण किट भेंटकर उनके गोदभराई के रस्म को पूरा किया गया। ग्राम राहुद में आयोजित शिविर में आज विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 1838 आवेदन प्राप्त हुए थे जिसमें से 1428 आवेदनों को मौके पर निराकरण सुनिश्चित किया गया।  शिविर को संबोधित करते हुए विधायक कुंवर सिंह निषाद ने विभिन्न विभाग के अधिकारियों को सुशासन तिहार के दौरान आम जनता से प्राप्त आवेदनों का समुचित निराकरण सुनिश्चित करने को कहा। जिससे सुशासन तिहार का आयोजन सार्थक हो सके। उन्होंने शिविर में उपस्थित लोगों को बाल विवाह के दुष्प्रभावों के संबंध में जानकारी देते हुए इसके रोकथाम के कार्य में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने की शपथ भी दिलाई। बालोद जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर ने आम नागरिकों को सुशासन तिहार के उद्देश्यों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केेन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। सुशासन तिहार के दौरान शासन-प्रशासन के लोग आम जनता के बीच पहुँचकर इनके वास्तविक समस्याओं का पड़ताल कर रहे हैं।  शिविर में अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी सुशासन तिहार के उद्देश्यों के संबंध में सभी विभाग के अधिकारियों को पूरी संवेदनशीलता के साथ आम जनता से प्राप्त आवेदनों का समुचित निराकरण भी सुनिश्चित करने को कहा। इस मौके पर विभिन्न विभागों के द्वारा शिविर में आज अपने-अपने विभागों से संबंधित कुल आवेदन एवं उनके निराकरण की स्थिति के अलावा आम नागरिकों को शासन के जनकल्याणकारी योजनाओं के संबंध में जानकारी दी। शिविर में आज ग्रामीण महिलाओं द्वारा नीर चेतना अभियान के अंतर्गत पानी के महत्व के संबंध में आम जनता को जानकारी प्रदान करने हेतु नुक्कड़ नाटक की भी प्रस्तुति दी।

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से उपभोक्ताओं को मिली बड़ी राहत

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत सुशासन तिहार 2026 के समाधान शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हितग्राहियों से किया सीधा संवाद रायपुर सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत बलौदबाजार जिले के करहीबाजार में आयोजित समाधान शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों से संवाद कर योजनाओं से मिल रहे लाभों की जानकारी ली। शिविर में मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 के तहत अनेक उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत प्रदान की गई। हितग्राहियों ने बताया कि योजना से उन्हें आर्थिक राहत मिली है और लंबित बिजली बिल की चिंता काफी हद तक कम हुई है। बालोदबाजार जिले के ग्राम बिटकुली निवासी आशाराम को 11 हजार 625 रुपये, बाबूलाल को 14 हजार 922 रुपये, जगदीश को 9 हजार 832 रुपये, श्रीमती बुधयारिन को 8 हजार 467 रुपये तथा चोवाराम को 13 हजार 325 रुपये की छूट प्राप्त हुई। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान बताया कि पहले बढ़े हुए बिजली बिल के कारण आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता था, लेकिन मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से उन्हें बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि अब वे बिना किसी अतिरिक्त बोझ के नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य आम जनता को राहत पहुंचाना और उनकी समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान करना है। उन्होंने कहा कि सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक सहायता पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी सहायता साबित हो रही है।

मंत्री टंक राम वर्मा का सख्त निर्देश, कॉलेज स्टाफ समय पर पहुंचे महाविद्यालय

शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ अनिवार्य रूप से निर्धारित समय पर महाविद्यालय में उपस्थित रहें-मंत्री टंक राम वर्मा ​उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा का औचक निरीक्षण  व्यवस्था सुधारने के कड़े निर्देश, छात्रों के लिए बनेगा ‘हेल्प डेस्क’ ​रायपुर       राज्य में उच्च शिक्षा के स्तर को सुधारने और आगामी शिक्षा सत्र से पहले व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने के लिए सरकार पूरी तरह मुस्तैद है। इसी कड़ी में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने मोपका निपनिया महाविद्यालय का औचक निरीक्षण किया। मंत्री  के इस कदम से जहां लापरवाह कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है, वहीं छात्र हित में सरकार की संवेदनशीलता एक बार फिर खुलकर सामने आई है। ​लापरवाही पर बरती जाएगी 'जीरो टॉलरेंस' की नीति     ​निरीक्षण के दौरान महाविद्यालय की प्राचार्य अनुपस्थित पाई गईं। साथ ही, स्टाफ की उपस्थिति में भी भारी कमी देखने को मिली; वहां केवल 03 सहायक प्राध्यापक और कार्यालयीन स्टाफ के महज 02 कर्मचारी ही उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त, मौके पर महाविद्यालय के वित्तीय लेखा-जोखा (एकाउंट्स) की जानकारी भी उपलब्ध नहीं हो सकी, जिस पर  मंत्री वर्मा ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ​सरकार का साफ संदेश है  शासकीय संस्थाओं में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक शिथिलता या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ​साफ-सफाई और अनुशासन पर कड़े निर्देश     ​महाविद्यालय परिसर में स्वच्छता का अभाव दिखने पर मंत्री टंक राम वर्मा ने अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़े शब्दों में फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ अनिवार्य रूप से निर्धारित समय पर महाविद्यालय में उपस्थित रहें। इसके साथ ही छात्र-छात्राओं को एक स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण मिले, इसके लिए साफ-सफाई की व्यवस्था तुरंत दुरुस्त की जाए। ​नए सत्र से पहले छात्र-सुविधाएं होंगी सर्वोपरि: बनेगा ‘हेल्प डेस्क’   ​ नवीन शिक्षा सत्र जल्द ही प्रारंभ होने वाला है, इसलिए सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि नए प्रवेश लेने वाले और पुराने छात्रों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। कॉलेज में आने वाले छात्र-छात्राओं की समस्याओं के त्वरित निराकरण और मार्गदर्शन के लिए तत्काल एक 'हेल्प डेस्क' (Help Desk) स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। ​इसके साथ ही, उन्होंने आगामी सत्र के मद्देनजर कॉलेज में पेयजल, बैठक व्यवस्था और अन्य सभी आवश्यक छात्र-सुविधाओं को समय सीमा के भीतर पूर्ण करने की कड़ी हिदायत दी है। ​जनता और छात्रों के प्रति सजग सरकार    ​उच्च शिक्षा मंत्री का यह औचक निरीक्षण  केवल कागजी दावों पर नहीं, बल्कि धरातल पर उतरकर काम करने में विश्वास रखती है। सरकार का संकल्प है कि प्रदेश के सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों के महाविद्यालयों में भी शहरी क्षेत्रों की तरह उच्च स्तरीय सुविधाएं और कड़ा प्रशासनिक अनुशासन सुनिश्चित किया जाए, ताकि छत्तीसगढ़ के युवाओं का भविष्य उज्ज्वल हो सके।

खेत की मेड़ पर करें सतावर की खेती, कम लागत में बढ़ेगी किसानों की आय

“खेतों की मेड़ पर पैसों का पेड़” योजना से छत्तीसगढ़ के किसानों को मिला अतिरिक्त आमदनी का नया अवसर रायपुर छत्तीसगढ़ में पारंपरिक कृषि के साथ-साथ किसानों को औषधीय खेती से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की एक अभिनव पहल शुरू की गई है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार, छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा “खेतों की मेड़ पर पैसों का पेड़” नामक नवाचार योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत किसानों को सतावर के पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे अपने खेतों की खाली पड़ी मेड़ और सुरक्षा बाड़ का उपयोग अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में कर सकें। एक पौधा, दोहरे फायदे खेतों की सुरक्षा भी और बंपर कमाई भी सतावर एक कांटेदार लता प्रजाति का औषधीय पौधा है, जो किसानों को दोहरा लाभ पहुंचाता है। सतावर कांटेदार होने के कारण इसे खेत की मेड़ पर लगाने से मवेशियों और आवारा पशुओं से फसलों की चौतरफा सुरक्षा होती है। मेड़ की खाली जगह का कोई उपयोग नहीं होता था, वहां सतावर उगाकर किसान लाखों रुपये की अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। औषधि उद्योगों में भारी मांग और औषधीय गुण सतावर के कंद में अद्भुत औषधीय गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण आयुर्वेदिक और हर्बल दवा उद्योगों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इसका मुख्य उपयोग दवाओं के निर्माण में होता है। शारीरिक कमजोरी दूर करने और ताकत बढ़ाने में, स्तनपान कराने वाली माताओं में दुग्धवर्धन के लिए, शरीर की सूजन, दर्द और मानसिक तनाव को कम करने में किया जाता है।  योजना की मुख्य विशेषताएं और सरकारी सहायता किसानों को बढ़ावा देने के लिए औषधि पादप बोर्ड द्वारा हर स्तर पर मदद दी जा रही है। किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सतावर के पौधे पूरी तरह मुफ्त (निःशुल्क पौधे) दिए जा रहे हैं, इसके लिए उन्हें केवल औषधि पादप बोर्ड से संपर्क करना होगा। पौधरोपण से लेकर फसल की कटाई और कंद तैयार होने तक की पूरी तकनीक का प्रशिक्षण बोर्ड द्वारा दिया जाएगा। किसानों को फसल बेचने के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए बोर्ड ने पहले से ही अनुबंधित क्रेताओं (अनुभवी खरीदारों) की व्यवस्था की है, जो सीधे किसानों से उपज खरीदेंगे। सतावर की फसल लगभग 16 महीने में तैयार हो जाती है। एक बार फसल तैयार होने के बाद यह कई वर्षों तक किसानों के लिए नियमित और सुनिश्चित आय का माध्यम बनी रहती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने इस योजना को किसानों के लिए “दुधारू गाय” के समान लाभकारी बताया है। वहीं बोर्ड के उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला का कहना है कि यह योजना किसानों की सुनिश्चित आय की चिंता को दूर करने में मील का पत्थर साबित होगी। “खेतों की मेड़ पर पैसों का पेड़” योजना न केवल छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में औषधीय पौधों के संरक्षण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि पारंपरिक खेती की लागत के बीच किसानों के लिए मुनाफे का एक नया और सुरक्षित रास्ता खोल रही है।

छत्तीसगढ़ के उसूर ब्लॉक ने बढ़ाया प्रदेश का मान, नीति आयोग रैंकिंग में मिला दूसरा स्थान

वन मंत्री केदार कश्यप ने दी बीजापुरवासियों को बधाई, मुख्यमंत्री साय बोले – यह सुशासन का प्रमाण रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के 'सुशासन' और जन- कल्याणकारी नीतियों का असर अब राज्य के सबसे दूरस्थ अंचलों में दिखने लगा है। इसी कड़ी में बीजापुर जिले से एक गौरवशाली खबर सामने आई है। नीति आयोग द्वारा जारी देश के आकांक्षी ब्लॉकों की 'चैंपियंस ऑफ द क्वार्टर' (अक्टूबर- दिसंबर 2025) की रिपोर्ट में बीजापुर के उसूर ब्लॉक ने सेंट्रल जोन में पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री साय ने दी बधाई, कहा – यह जनता के भरोसे की जीत है   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर उसूर ब्लॉक और बीजापुर जिले के नागरिकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं जिला प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा, "उसूर ब्लॉक का राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त करना हमारे सुशासन और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष प्रमाण है। बस्तर के सुदूर गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है। उसूर ने कठिन परिस्थितियों में जो कर दिखाया है, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा है। यह सफलता जमीनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, मितानिन बहनों, एएनएम और डॉक्टरों के समर्पण का परिणाम है। हमारा लक्ष्य अब देश में प्रथम स्थान हासिल करना है।" मंत्री कश्यप ने जताया हर्ष, बढ़ाया हौसला   वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में उसूर ब्लॉक की यह राष्ट्रीय सफलता बेहद गौरवशाली है। उन्होंने कहा, "यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि हमारी सरकार की नीतियां प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पूरी प्रामाणिकता के साथ पहुंच रही हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों और जिला प्रशासन ने जो समर्पण दिखाया है, वह सराहनीय है। हमारा संकल्प बस्तर के हर गांव तक विकास की रोशनी पहुंचाना है।" मंत्री कश्यप कहा कि कभी बुनियादी सुविधाओं से दूर माना जाने वाला उसूर ब्लॉक आज देश के लिए विकास का मॉडल बन गया है। इस सफलता का श्रेय जमीनी डॉक्टरों, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिन बहनों की दिन-रात की मेहनत को जाता है। विकास की नई इबारत: कड़े मानकों पर खरा उतरा उसूर   नीति आयोग ने स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेतकों के आधार पर मूल्यांकन किया था, जिसमें उसूर ब्लॉक ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया : 1. संचारी रोगों पर नियंत्रण: मलेरिया, डेंगी और अन्य संचारी रोगों की रोकथाम के लिए सुदूर गांवों तक प्रभावी अभियान चलाया गया। 2. सुरक्षित मातृत्व: संस्थागत प्रसव की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई, जिससे शिशु और मातृ मृत्यु दर में भारी कमी आई। 3. सशक्त टीकाकरण कवच: बच्चों और गर्भवती महिलाओं के नियमित टीकाकरण के साथ एचपीवी टीकाकरण को जमीनी स्तर पर सफल बनाया गया। 4. गंभीर बीमारियों की जांच: बीपी, शुगर और कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों की मुफ्त जांच व उपचार की सुविधा गांव-गांव तक पहुंचाई गई। अगला संकल्प: देश में हासिल करना है प्रथम स्थान  कलेक्टर विश्वदीप और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय गौरव पूरे जिले के लिए बड़ी प्रेरणा है। शासन और प्रशासन का अगला लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और निखारते हुए आगामी तिमाहियों में देश में पहला स्थान हासिल करना है, जिसके लिए काम तेज कर दिया गया है।

बाल विवाह रोकने के लिए छत्तीसगढ़ में जागरूकता अभियान तेज, महिलाओं को दी गई अहम जानकारी

पॉक्सो एक्ट, बाल विवाह प्रतिषेध कानून और हेल्पलाइन सेवाओं की दी गई जानकारी रायपुर प्रदेश में संचालित बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ एवं बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत प्रदेश में लगातार जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी के मार्गदर्शन में बाल विवाह रोकथाम, महिला सुरक्षा और बाल संरक्षण को लेकर व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 21 मई को मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला के जिला बाल संरक्षण इकाई एवं चाइल्डलाइन की संयुक्त टीम द्वारा वैभव संकुल संगठन दनगढ़ में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को पॉक्सो एक्ट एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। कार्यक्रम में बताया गया कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का हनन करने के साथ ही उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। महिलाओं को जागरूक करते हुए बताया गया कि बालिकाओं की वैधानिक विवाह आयु 18 वर्ष तथा बालकों की 21 वर्ष पूर्ण होने के बाद ही विवाह किया जाना कानूनन मान्य है। इस दौरान चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181 एवं आपातकालीन सेवा 112 की जानकारी देते हुए किसी भी आपात स्थिति या बाल संरक्षण से जुड़ी समस्या की सूचना तत्काल देने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही समाज से बाल विवाह जैसी कुरीति को समाप्त करने में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया गया। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को बाल अधिकारों, महिला सुरक्षा और कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

सुशासन तिहार में भावुक पल: मुख्यमंत्री से मिलकर बच्चों और अभिभावकों की आंखों में छलकी खुशी

चिरायु योजना से मिली नई जिंदगी: समीरा और नितिन ने मुख्यमंत्री को थैंक यू कार्ड देकर जताया आभार सुशासन तिहार में भावुक पल: मुख्यमंत्री से मिलकर बच्चों और अभिभावकों की आंखों में छलकी खुशी गरीब परिवारों के लिए वरदान बनी चिरायु योजना: निःशुल्क उपचार से बच्चों को मिला नया जीवन रायपुर   सुशासन तिहार के दौरान आज बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम करहीबाजार में एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब चिरायु योजना से लाभान्वित बच्चों समीरा जांगड़े और नितिन पटेल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आत्मीय मुलाकात कर उन्हें थैंक यू कार्ड भेंट किया। बच्चों और उनके परिजनों ने निःशुल्क उपचार के लिए मुख्यमंत्री साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके परिवार को नई उम्मीद और बच्चों को नई जिंदगी दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दोनों बच्चों से स्नेहपूर्वक बातचीत की, उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक संवेदनशीलता के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और जरूरी सुविधाएं पहुंचाना है, ताकि कोई भी परिवार आर्थिक अभाव के कारण उपचार से वंचित न रहे।  मुख्यमंत्री साय ने बच्चों को स्वस्थ जीवन और बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित करते हुए उनके परिवारजनों का भी उत्साहवर्धन किया। उल्लेखनीय है कि विकासखंड बलौदाबाजार के ग्राम पंडरिया निवासी 6 वर्षीय नितिन पटेल तथा ग्राम लच्छनपुर निवासी 9 वर्षीय समीरा जांगड़े ने अपने माता-पिता के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उपचार के बाद जीवन में आए सकारात्मक बदलाव साझा किए। समीरा के पिता जीवन लाल जांगड़े ने बताया कि इलाज से पहले समीरा अत्यंत कमजोर रहती थी और स्कूल आने-जाने में भी सांस फूलने लगती थी। शिक्षकों की सलाह पर चिरायु टीम से संपर्क किया गया। टीम ने घर पहुंचकर जांच की और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की। इसके बाद 14 मई 2025 को रायपुर में सफल ऑपरेशन हुआ। इसी प्रकार नितिन पटेल का उपचार चिरायु योजना के माध्यम से 22 नवंबर 2025 को रायपुर में हुआ।  परिजनों ने बताया कि जिस इलाज की कल्पना लाखों रुपये खर्च होने के कारण संभव नहीं लगती थी, वह चिरायु योजना के माध्यम से निःशुल्क और सहज रूप से संभव हो सका। उन्होंने कहा कि यह योजना गरीब परिवारों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा आमजन से सीधे संवाद, योजनाओं के हितग्राहियों से मुलाकात और उनके जीवन में आए बदलावों को जानने की पहल शासन की संवेदनशीलता और जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, विशेष सचिव रजत बंसल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

हादसे से टूटा नहीं हौसला, सरकारी योजनाओं ने बदली नर्मदा प्रसाद की जिंदगी

हादसे की हार, हौसले की जीत: नर्मदा प्रसाद को मिला शासन की योजनाओं का संबल आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम ​  ​    रायपुर        नर्मदा प्रसाद यादव कभी एक प्लास्टिक कंपनी में काम कर पूरे सम्मान के साथ अपने परिवार की आजीविका चला रहे थे। वे अपने परिवार की उम्मीदों का मुख्य आधार थे। लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण दिन, कार्यस्थल पर काम करने के दौरान वे एक भीषण विद्युत दुर्घटना (तगड़ा करंट लगने) का शिकार हो गए। इस हादसे ने न केवल उन्हें गंभीर रूप से शारीरिक क्षति पहुँचाई, बल्कि उनके जीवन में पूर्ण विकलांगता की स्थिति उत्पन्न कर दी।    नर्मदा जी का चलना-फिरना पूरी तरह बंद हो गया। इस हादसे के बाद मानो उनके पूरे परिवार पर अंधकार छा गया और अचानक आए इस गंभीर आर्थिक व मानसिक संकट से पूरा परिवार हताश हो गया। अचानक उनके जीवन की रफ्तार थम गई। ​संकट के समय सहारा बनीं शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं     ​जब नर्मदा जी और उनका परिवार भविष्य को लेकर पूरी तरह चिंतित और असहाय महसूस कर रहा था, तब शासन की संवेदनशीलता और जनकल्याणकारी योजनाएं उनके जीवन में एक नई सुबह बनकर आईं। शासन का मूल मंत्र ही अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति की मदद करना है, और यही संबल नर्मदा जी को भी मिला। ​     निराशा के दौर से उबरने के लिए नर्मदा प्रसाद ने शासन की योजना के तहत ग्राम पंचायत में ट्राई साइकिल के लिए आवेदन किया। शासन के संवेदनशील प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए पूरी तत्परता दिखाई और बिना किसी कागजी देरी के नर्मदा जी को तुरंत एक ट्राई साइकिल प्रदान की। ​आत्मनिर्भरता की नई उड़ान      इस ट्राई साइकिल ने नर्मदा जी के जीवन की रुकी हुई रफ्तार को दोबारा पटरी पर ला दिया। अब उन्हें अपनी दैनिक गतिविधियों या कहीं आने-जाने के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। शासन के इस छोटे से सहयोग ने उनके भीतर खोए हुए आत्मविश्वास को दोबारा जगा दिया है। ​     इसके साथ ही, परिवार को स्थाई आर्थिक मजबूती देने के लिए विभाग द्वारा उनकी विकलांगता पेंशन के आवेदन को भी त्वरित गति से आगे बढ़ाया गया है। यह प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है और बहुत जल्द उनके बैंक खाते में पेंशन की राशि नियमित रूप से आने लगेगी, जिससे उनके घर का खर्च आसानी से चल सकेगा।      ​नर्मदा प्रसाद ने कहा कि ये सिर्फ योजना नहीं, जीवन जीने की नई उम्मीद है। हादसे के बाद मुझे लगा था कि अब मेरी जिंदगी दूसरों के भरोसे ही कटेगी। लेकिन शासन की योजनाओं ने मुझे फिर से अपने पैरों पर खड़ा होने की हिम्मत दी है। ट्राई साइकिल मिलने से मैं अब खुद कहीं भी आ-जा सकता हूँ और पेंशन शुरू होने से मेरे परिवार का आर्थिक बोझ भी कम हो जाएगा। संकट के इस समय में हमारे साथ खड़े रहने के लिए मैं शासन और प्रशासन का सहृदय आभार व्यक्त करता हूँ। ​