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पिच्चेकट्टा जलाशय के कार्यों के लिए 4.85 करोड़ रुपए स्वीकृत

रायपुर  छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा कांकेर जिले के विकासखण्ड-भानुप्रतापपुर के पिच्चेकट्टा जलाशय के जीर्णाेद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 85 लाख 2 हजार रुपए स्वीकृत किए गए है। योजना के प्रस्तावित कार्यो के पूर्ण हाने पर क्षेत्र के किसानों को कुल 364 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। योजना के निर्माण कार्यों को पूर्ण कराने के लिए मुख्य अभियंता गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग जगदलपुर को प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है।

निकाय चुनाव परिणाम घोषित, 5 नगर पंचायतों में बंटी जीत, भाजपा ने 3 और कांग्रेस ने 2 सीटें जीतीं

रायपुर. छत्तीसगढ़ में 1 जून को संपन्न हुए त्रिस्तरीय पंचायत एवं नगरीय निकायों के आम और उपचुनावों के नतीजे आज घोषित किए जा रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की निगरानी में जारी मतगणना के बीच कई सीटों के परिणाम सामने आ चुके हैं। प्रदेशभर में नगर पंचायत अध्यक्ष, पार्षद, जनपद सदस्य, सरपंच और पंच समेत कुल 1310 रिक्त पदों के लिए मतदान कराया था। नगरीय निकाय चुनाव के तहत पांच नगर पंचायत अध्यक्ष पदों के लिए हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए तीन सीटों पर कब्जा जमाया है, जबकि कांग्रेस ने दो नगर पंचायतों में जीत दर्ज की है। इस चुनाव में नवगठित नगर पंचायतों घुमका, बम्हनीडीह, शिवानंदनपुर और पलारी के परिणामों पर विशेष नजर रही। इन क्षेत्रों में पहली बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों के चुनाव को लेकर मतदाताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। सहसपुर लोहारा में भाजपा की सरिता मिश्रा विजयी कवर्धा जिले की सहसपुर लोहारा नगर पंचायत में केवल अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराया गया था। यहां भाजपा की महिला प्रत्याशी सरिता संतोष मिश्रा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 754 वोटों से पराजित कर अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया। घुमका नगर पंचायत में कांग्रेस की फूलमती वर्मा की जीत राजनांदगांव जिले की नवगठित घुमका नगर पंचायत में कांग्रेस प्रत्याशी फूलमती वर्मा ने अध्यक्ष पद का चुनाव 85 मतों से जीत लिया। वहींं, 11 वार्डों में भाजपा, 3 वार्डों में कांग्रेस और 1 वार्ड में निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। बम्हनीडीह नगर पंचायत में BJP का दबदबा जांजगीर-चांपा जिले की बम्हनीडीह नगर पंचायत में भाजपा प्रत्याशी रमेश डडसेना ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की। वार्ड परिणामों में भी भाजपा का दबदबा देखने को मिला। वहींं, 11 वार्डों में भाजपा, 3 वार्डों में कांग्रेस और 1 वार्ड में निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। शिवानंदनपुर में BJP समर्थित अध्यक्ष निर्वाचित सूरजपुर जिले की शिवानंदनपुर नगर पंचायत में BJP के प्रत्याशी रितेश जायसवाल अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने में सफल रहे। वार्ड चुनावों में यहां भी मुकाबला कांटे का रहा। कुल 15 वार्डों में से 8 वार्डों में कांग्रेस और 7 वार्डों में भाजपा प्रत्याशी विजयी हुए। पलारी नगर पंचायत में कांग्रेस प्रत्याशी की जीत बालोद जिले की नवगठित पलारी नगर पंचायत में कांग्रेस प्रत्याशी यानेश कुमार ने अध्यक्ष पद का चुनाव जीत लिया है। इसके साथ ही कांग्रेस ने इस नगर पंचायत में अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया। वार्ड चुनाव परिणामों में भी कांग्रेस को बढ़त मिली है। यहां 9 वार्डों में कांग्रेस, 5 वार्डों में भाजपा के प्रत्याशी विजयी हुए हैं, जबकि 1 वार्ड में दोनों प्रत्याशियों को बराबर मत मिले हैं। इस वार्ड के विजेता का फैसला अब टॉस के जरिए किया जाएगा। अन्य वार्डों में हुए उपचुनाव के नतीजे बस्तर जिले के जगदलपुर नगर निगम के वार्ड क्रमांक-1 इंदिरा वार्ड में हुए उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रामकृष्ण तिवारी ने जीत हासिल कर नए पार्षद के रूप में निर्वाचित हुए। यह सीट पूर्व पार्षद अब्दुल रशीद के निधन के बाद रिक्त हुई थी, जिसके चलते उपचुनाव कराया गया था। बिलासपुर के संजय गांधी नगर वार्ड में कांग्रेस का कब्जा बिलासपुर नगर निगम के वार्ड क्रमांक-29 संजय गांधी नगर (तारबाहर) में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की। कांग्रेस प्रत्याशी शेख आज़म ने भाजपा उम्मीदवार वी. मधुसूदन राव को पराजित कर पार्षद पद पर कब्जा जमाया। जशपुर नगर पालिका के दो वार्डों में भाजपा की जीत जशपुर नगर पालिका में हुए उपचुनाव में भाजपा ने दोनों सीटों पर जीत दर्ज की। वार्ड क्रमांक-8 से भाजपा प्रत्याशी प्रेमलता साहू विजयी रहीं, जबकि वार्ड क्रमांक-14 से भाजपा उम्मीदवार प्रिया सिंह ने जीत हासिल की। मई में जारी हुआ था चुनाव कार्यक्रम राज्य निर्वाचन आयोग ने मई में नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था। अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन, जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद 1 जून को मतदान कराया गया, जबकि आज यानी 4 जून को मतगणना कर परिणाम घोषित किए जा रहे हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार पूरे चुनावी कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। मतदान के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त निगरानी रखी गई थी। पंचायतों में भी कई महत्वपूर्ण पदों का फैसला पंचायत चुनाव में 10 जनपद पंचायत सदस्य, 34 सरपंच और 107 पंच पदों के लिए मतदान कराया गया था। कई जगहों पर मुकाबला बेहद रोचक माना जा रहा है। स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और ग्रामीण नेतृत्व को लेकर मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था, जिसका परिणाम आज सामने आएगा। मतदान में दिखा था जबरदस्त उत्साह 1 जून को हुए मतदान में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। नगरीय निकाय चुनाव में 31,928 मतदाताओं में से 27,006 मतदाताओं ने मतदान किया, जिससे 84.58 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। वहीं पंचायत चुनाव में 1,02,797 मतदाताओं में से 79,968 लोगों ने वोट डाले और 78.61 प्रतिशत मतदान रिकॉर्ड किया गया। मतदान के लिए नगरीय निकाय क्षेत्रों में 96 और पंचायत क्षेत्रों में 274 मतदान केंद्र बनाए गए थे। राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह शांतिपूर्ण बताया था।

बिरहोर जननायक पुस्तक का विमोचन: मंत्री टंक राम वर्मा को लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने भेंट की प्रति

पद्मजागेश्वर यादव का जीवन सेवा, समर्पण और मानवता का उच्चतम आदर्श — मंत्री टंक राम वर्मा बिरहोर जननायक पुस्तक का विमोचन: मंत्री टंक राम वर्मा को लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने भेंट की प्रति ​रायपुर     राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा से लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर डॉ. पटेल ने मंत्री वर्मा को पद्मजागेश्वर यादव जी के प्रेरणादायी जीवन और संघर्षों पर आधारित अपनी नवनिर्मित पुस्तक ‘बिरहोर जननायक’ की प्रति सप्रेम भेंट की। इस गौरवमयी अवसर पर स्वयं पद्मजागेश्वर यादव जी भी उपस्थित रहे और उन्होंने मंत्री  वर्मा के साथ अपने सामाजिक जीवन के गहरे अनुभवों को साझा किया। ​पुस्तक में बिरहोर समुदाय के उत्थान की अद्भुत गाथा            मुलाकात के दौरान मंत्री टंकराम वर्मा ने पुस्तक का अवलोकन किया और इसके प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने जशपुर जिले में ‘बिरहोर के भाई’ के नाम से विख्यात पद्मजागेश्वर यादव जी द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातियों, विशेषकर बिरहोर समुदाय के उत्थान के लिए किए गए कार्यों की सराहना की। मंत्री वर्मा ने कहा कि उनका पूरा जीवन समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। पद्मजागेश्वर यादव का योगदान छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए सदैव स्मरणीय रहेगा।उनका व्यक्तित्व सेवा, करुणा, समर्पण और मानवता के उच्चतम आदर्शों का प्रतीक है। उनका जीवन समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है। ​1980 से निरंतर जारी है जागेश्वर यादव का संघर्ष      ​गौरतलब है कि पद्मजागेश्वर यादव वर्ष 1980 से ही विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, सामाजिक जागरूकता एवं मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए निरंतर धरातल पर कार्यरत हैं। उनके इन्हीं अथक प्रयासों का परिणाम है कि आज बिरहोर समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है, स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच सुनिश्चित हुई है और अनेक परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ​युवाओं और शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक बनेगी कृति       ​लेखक डॉ. लोकेश पटेल की यह कृति केवल एक जीवनी नहीं है, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता, मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक प्रेरक दस्तावेज है। यह पुस्तक पाठकों को संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, नि:स्वार्थ सेवा और समाज के प्रति समर्पण के माध्यम से बड़ा सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। यह कृति विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो उन्हें समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशील बनने तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करती है।      ​मंत्री टंक राम वर्मा ने इस महत्वपूर्ण, शोधपरक एवं प्रेरणादायी कृति के सृजन के लिए लेखक डॉ. लोकेश पटेल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक समाज के विभिन्न वर्गों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का एक महत्वपूर्ण स्रोत सिद्ध होगी।

रट्टू ज्ञान की जगह कौशल विकास पर ध्यान देने की जरूरत-उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा

​NEP के सपनों को साकार करेगी व्यावहारिक शिक्षा रट्टू ज्ञान की जगह कौशल विकास पर ध्यान देने की जरूरत-उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा नई पुस्तक 'मानचित्र निर्माण के सिद्धांत',पद्मजागेश्वर यादव भी रहे साक्षी ​रायपुर     राजस्व एवं  उच्च शिक्षा मंत्री माननीय टंक राम वर्मा ने आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अद्यतन पाठ्यक्रम पर आधारित एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं दूरगामी पुस्तक 'मानचित्र निर्माण के सिद्धांत' का विमोचन किया। उच्च शिक्षा एवं भूगोल के विद्यार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होने वाली इस बेहद उपयोगी पुस्तक का लेखन प्रदेश के सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् डॉ. राजू चंद्राकर और डॉ. लोकेश पटेल द्वारा किया गया है।     ​विमोचन के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने दोनों विद्वान लेखकों को उनके इस उत्कृष्ट अकादमिक कार्य के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उन्हें व्यावहारिक और कौशल आधारित शिक्षा प्रदान करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक विद्यार्थियों को मानचित्र कला (Cartography) जैसी महत्वपूर्ण विधा के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं को सरलता से समझने में अत्यंत सहायक और उपयोगी सिद्ध होगी।       उच्च शिक्षा विभाग की ओर से ऐसे प्रयासों की सराहना करते हुए मंत्री वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के स्तर को उन्नत बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है और मातृभाषा व सरल भाषा में ऐसी उच्च स्तरीय अकादमिक पुस्तकों का आना एक सराहनीय कदम है। ​युवा पीढ़ी को मिलेगी नई दिशा: पद्मजागेश्वर यादव    ​इस अवसर पर उपस्थित प्रख्यात समाजसेवी एवं पद्मसे सम्मानित जागेश्वर यादव  ने भी इस उत्कृष्ट अकादमिक कार्य के लिए दोनों लेखकों को अपनी आत्मीय शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लेखकों के भगीरथ प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा, ज्ञान और साहित्य के क्षेत्र में किए गए ऐसे रचनात्मक प्रयास समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी को एक नई, सकारात्मक और प्रगतिशील दिशा प्रदान करते हैं।     ​पुस्तक के लेखक डॉ. राजू चंद्राकर और डॉ. लोकेश पटेल ने इस अवसर पर बताया कि इस पुस्तक को विशेष रूप से नई शिक्षा नीति (NEP) के मापदंडों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। भूगोल और मानचित्रण के जटिल व तकनीकी सिद्धांतों को बहुत ही सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में आधुनिक मानचित्र निर्माण की तकनीकों,अक्षांश-देशांतर के व्यावहारिक उपयोग और भौगोलिक आंकड़ों के सटीक प्रस्तुतीकरण पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। ​

ब्लड की कमी बनी मौत की वजह? अस्पताल पहुंची जांच टीम, कर्मचारियों से पूछे सवाल

दुर्ग. जिला अस्पताल दुर्ग में भर्ती सिकलिन पीड़ित 22 वर्षीय युवती दीपिका गाड़ा के इलाज के दौरान सोमवार को हुई मौत को लेकर कलेक्टर अभिजीत सिंह 2 सदस्यीय टीम गठित कर दी है। जांच टीम में अपर कलेक्टर योगिता देवांगन तथा सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी शामिल है। दोनों बुधवार को सुबह 10 बजे जिला अस्पताल पहुंच गए। शाम 5.30 बजे तक उन्होंने घटना के सभी पहलुओं जांचा परखा। सिविल सर्जन के कक्ष में मामले में कथित रूप से जिम्मेदार चिकित्सक, स्टाफ नर्स तथा कर्मचारियों के बारी बारी से बयान लिए। यानी करीब 8 घंटे तक पूछताछ की गई। सभी से बयान लेने के बाद जांच टीम द्वारा रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर इस मामले को लेकर कांग्रेस ने जिला अस्पताल में प्रदर्शन करते हुए सिविल सर्जन आशीषन मिंज को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने मामले में दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परिजनों ने दीपिका की मौत के लिए जिला अस्पताल दुर्ग के चिकित्सकों तथा स्टाफ नर्स की लापरवाही बताया। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में दीपिका को ब्लड चढ़ाया जाना था, इसके उलट परिजनों को ही ब्लड का इंतजाम करने कहा गया। ब्लड का इंतजाम करने में हुई देरी की वजह से दीपिका की मौत हो गई। मामले में ब्लड बैंक के अधिकारियों ने चौंकाने वाली बात सामने रखी है कि जब परिजनों को ब्लड के लिए कहा गया, तो महिला मेडिसिन वार्ड से ब्लड सैंपल तथा मांग पत्र भेजा जाना था। ऐसा नहीं किया गया। केवल आवेदन लेकर ब्लड बैंक भेज दिया गया। वहीं दूसरी ओर लाइफ़ सेविंग की स्थिति निर्मित होती है, तो बिना डोनेटर के ब्लड उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार सिकलिन मरीजों को भी बिना देरी किए ब्लड दिया जाता है। ऐसा लगता है कि दीपिका के मामले में ब्लड इंतजाम करने के इस तरह के प्रयास ही नहीं किए गए। परिजनों की शिकायत पर जांच कमेटी मृतक दीपिका की माता नीमा बाई गाड़ा पति मन्नू राम गाड़ा का निवास एचएचसीएल कॉलोनी, वार्ड नं. 17 स्टेशन मड़ोदा भिलाई है। दीपिका की तबीयत खराब होने पर उसे 30 मई को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 1 जून को उसकी मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही पर रखने का आरोप लगाया। कलेक्टर से इसकी शिकायत की गई, जिसे संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर ने जांच करने समिति बैठाई । कलेक्टर को सौंपी जाएगी रिपोर्ट : जांच टीम के सदस्य अपर कलेक्टर योगिता देवांगन तथा सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी ने बताया कि दीपिका की मौत के मामले को लेकर अलग-अलग विभागों के चिकित्सकों तथा कर्मचारियों के बयान लिए गए हैं। इसके बाद जांच प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा, जिसे कलेक्टर को सौंपा जाएगा।

सुगंधित चावल की वैश्विक डिमांड का मिलेगा फायदा, छत्तीसगढ़ में शुरू होगी बासमती धान मिशन की पहल

किसानों की आय बढ़ाने छत्तीसगढ़ में बासमती धान मिशन की तैयारी अंतराष्ट्रीय बाजार में सुगंधित चावल की है बड़ी डिमांड कृषि मंत्री राम विचार नेताम की अध्यक्षता में  इंडियन राईस एक्सपोर्ट फेडरेशन के पदाधिकारियों के साथ बैठक, पायलट प्रोजेक्ट पर बनी सहमति     रायपुर, छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बासमती धान की खेती के विस्तार पर राज्य सरकार ने पहल शुरू कर दी है। कृषि विकास मंत्री राम विचार नेताम की अध्यक्षता में अटल नगर, नवा रायपुर स्थित उनके निवास कार्यालय में इस विषय पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कृषि संचालक राहुल देव, अनुसंधान संचालक डॉ संजय त्रिपाठी, बीज निगम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक तथा इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन  के पदाधिकारी उपस्थित थे।      बैठक में कृषि मंत्री नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ बासमती धान की खेती को प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में गंभीरता और तत्परता से कार्य करने के निर्देश दिए। नेताम ने कहा कि किसानों के हित सर्वाेपरि हैं और उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे, सरकार उन्हें प्राथमिकता के साथ लागू करेगी। सामान्य धान की खेती के फसल विविधिकरण तथा राज्य में बासमती का रकबा बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।     बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बासमती धान की खेती को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि राज्य में धान की विभिन्न किस्मों का व्यापक उत्पादन होता है, लेकिन बासमती एवं अन्य सुगंधित चावलों की अंतरराष्ट्रीय और यूरोपीय बाजारों में विशेष मांग है तथा इनके बेहतर दाम प्राप्त होते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां की जलवायु और तापमान बासमती उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। चयनित क्षेत्रों में बासमती धान का रकबा बढ़ाकर किसानों को अधिक लाभ दिलाने की योजना बनाई जाएगी।     बैठक में इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के पदाधिकारियों ने राज्य में बासमती धान के उत्पादन और रकबे में वृद्धि के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। फेडरेशन ने किसानों के लिए बायबैक व्यवस्था, विपणन सहयोग तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सुगंधित चावल के निर्यात को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई। बैठक में इस बात पर भी सहमति व्यक्त की गई कि उत्पादन से लेकर विपणन और निर्यात तक एक समन्वित व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके और छत्तीसगढ़ सुगंधित चावल उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बना सके।

मनरेगा से जल संरक्षण को मिली रफ्तार, रोजगार और आजीविका सशक्त बनाने का महाअभियान

महात्मा गांधी नरेगा से जल संरक्षण का महाअभियान, रोजगार और आजीविका को मिली नई ताकत पानी, रोजगार और समृद्धि का संगम: ‘मोर गांव-मोर पानी’ से बदल रहे गांव *मनरेगा अंतर्गत प्रदेश में प्रतिदिन 11 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार, 57 प्रतिशत महिलाएं *  1610 करोड़ रुपये से एक लाख से अधिक जल संरक्षण कार्यों का निर्माण रायपुर, जलवायु परिवर्तन और बढ़ते जल संकट के बीच छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़कर विकास का नया मॉडल प्रस्तुत किया है। 24 अप्रैल 2025 से प्रारंभ ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के माध्यम से महात्मा गांधी नरेगा के तहत प्रदेशभर में जल संरक्षण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।         अभियान के अंतर्गत लगभग 1610 करोड़ रुपये की लागत से एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन संबंधी स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जा रहा है। इन कार्यों से जहां जल सुरक्षा मजबूत हो रही है, वहीं प्रदेश में प्रतिदिन 11 लाख से अधिक ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है, जिनमें 57 प्रतिशत महिलाएं हैं। जल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का यह संगम छत्तीसगढ़ को सतत ग्रामीण विकास की दिशा में नई पहचान दे रहा है। जल संरक्षण से आजीविका का सृजन        राज्य सरकार ने जल संरक्षण को सीधे आजीविका से जोड़ते हुए कई अभिनव पहलें शुरू की हैं। वर्तमान में  समाज के संवेदनशील एवं कमजोर वर्गो की निजी भूमियों पर 13,065 आजीविका डबरियों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। इन परिसंपत्तियों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं को मत्स्य पालन, बागवानी और अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़कर अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। नवा तरिया-आय के जरिया’ के अंतर्गत विकसित हो रहे 624 सामुदायिक तालाब      इसी प्रकार ‘नवा तरिया-आय के जरिया’ पहल के अंतर्गत 624 सामुदायिक तालाब विकसित किए जा रहे हैं। क्लस्टर स्तर पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को इन जल संरचनाओं से जोड़कर स्थायी आजीविका के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। इससे जल संरक्षण केवल प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तक सीमित न रहकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने का माध्यम भी बन रहा है। 1.50 लाख से अधिक आवासों में हितग्राहियों ने स्वेच्छा से लगाए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम        इसके साथ साथ अन्य जल सरंक्षण, संवर्धन कार्य भी व्यापक सामुदायिक भागीदारी से किए जा रहे है। प्रधान मंत्री आवास ग्रामीण अंतर्गत निर्मित 1.50 लाख से अधिक आवास में हितग्राहियों द्वारा अपने खर्च पर स्वेच्छा से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है ।  तकनीक से जल संरक्षण को मिली नई दिशा         ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान की विशेषता यह है कि इसमें आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। जल संरक्षण कार्यों की वैज्ञानिक योजना और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए GIS आधारित युक्तधारा प्लानिंग, CLART एप के माध्यम से स्थल चयन तथा वाटरशेड सिद्धांतों का उपयोग किया जा रहा है। जलदूत प्रणाली से भू-जल स्तर की हो रही नियमित निगरानी       भू-जल स्तर की नियमित निगरानी के लिए जलदूत प्रणाली लागू की गई है, जिसके माध्यम से खुले कुओं के जल स्तर का मापन किया जा रहा है। ग्राम पंचायत भवनों की दीवारों पर भू-जल स्तर का लेखन कर स्थानीय स्तर पर जल बजट तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिससे जल प्रबंधन अधिक प्रभावी और समुदाय आधारित बन सके। पारदर्शिता का अभिनव मॉडल         मनरेगा के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश ने तकनीक आधारित नवाचारों को अपनाया है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में क्यूआर कोड प्रदर्शित किए गए हैं, जिनके माध्यम से ग्रामीण अपने गांव में स्वीकृत एवं पूर्ण कार्यों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही रोजगार दिवस, आवास दिवस, सामाजिक अंकेक्षण और जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से योजना में पारदर्शिता एवं जनविश्वास को और सुदृढ़ किया गया है। जनभागीदारी से “भागीदारी से साझेदारी “(Participation to Partnership) की ओर          अभियान की सबसे बड़ी सफलता इसमें समाज के सभी वर्गों की सहभागिता है। जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं, सामाजिक संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी से जल संरक्षण का यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले चुका है। व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रमों, ग्राम सभाओं और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण को लोगों के दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने का प्रयास किया गया है। जल संरक्षण, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार का अभिनव मॉडल        छत्तीसगढ़ का ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान आज ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास’ की अवधारणा को धरातल पर साकार करता दिखाई दे रहा है। जल संरक्षण, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार, पारदर्शिता और अभिसरण का यह मॉडल राज्य को भागीदारी से साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ाते हुए पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समृद्धि का नया अध्याय लिख रहा है।

छत्तीसगढ़ में बासमती धान मिशन को मिलेगा बढ़ावा, मंत्री नेताम ने अधिकारियों संग की समीक्षा बैठक

रायपुर. छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बासमती धान की खेती के विस्तार पर राज्य सरकार ने पहल शुरू कर दी है। कृषि विकास मंत्री राम विचार नेताम की अध्यक्षता में अटल नगर, नवा रायपुर स्थित उनके निवास कार्यालय में इस विषय पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कृषि संचालक राहुल देव, अनुसंधान संचालक डॉ संजय त्रिपाठी, बीज निगम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक तथा इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक में कृषि मंत्री नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ बासमती धान की खेती को प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में गंभीरता और तत्परता से कार्य करने के निर्देश दिए। नेताम ने कहा कि किसानों के हित सर्वाेपरि हैं और उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे, सरकार उन्हें प्राथमिकता के साथ लागू करेगी। सामान्य धान की खेती के फसल विविधिकरण तथा राज्य में बासमती का रकबा बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बासमती धान की खेती को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि राज्य में धान की विभिन्न किस्मों का व्यापक उत्पादन होता है, लेकिन बासमती एवं अन्य सुगंधित चावलों की अंतरराष्ट्रीय और यूरोपीय बाजारों में विशेष मांग है तथा इनके बेहतर दाम प्राप्त होते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां की जलवायु और तापमान बासमती उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। चयनित क्षेत्रों में बासमती धान का रकबा बढ़ाकर किसानों को अधिक लाभ दिलाने की योजना बनाई जाएगी। बैठक में इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के पदाधिकारियों ने राज्य में बासमती धान के उत्पादन और रकबे में वृद्धि के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। फेडरेशन ने किसानों के लिए बायबैक व्यवस्था, विपणन सहयोग तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सुगंधित चावल के निर्यात को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई। बैठक में इस बात पर भी सहमति व्यक्त की गई कि उत्पादन से लेकर विपणन और निर्यात तक एक समन्वित व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके और छत्तीसगढ़ सुगंधित चावल उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बना सके।

जैविक खेती और ड्रोन तकनीक से कृषि को नई उड़ान, मुख्यमंत्री साय ने गिनाए फायदे

रायपुर. आधुनिक तकनीकों, नवाचारों और किसान हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और सम्मानजनक बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज रायपुर में आयोजित ‘मुख्यमंत्री किसान संवाद’ में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसानों के साथ आत्मीय चर्चा करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने खेती-किसानी से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए तथा किसानों के प्रश्नों और सुझावों पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और कम उम्र में ही खेती-किसानी तथा परिवार की जिम्मेदारियां संभालने का अवसर मिला। इसी कारण वे किसानों की जरूरतों, चुनौतियों और उनके संघर्ष को निकटता से समझते हैं। उन्होंने कहा कि पहले खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थी, आधुनिक तकनीकों और सुविधाओं का अभाव था, लेकिन आज कृषि क्षेत्र में बड़े परिवर्तन आए हैं। मशीनों, वैज्ञानिक पद्धतियों और नई तकनीकों के उपयोग से उत्पादकता बढ़ी है तथा किसानों के लिए नई संभावनाएं खुली हैं। कृषि योजनाओं से किसानों को मिल रहा आर्थिक संबल उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण, उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाएं तथा कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं ने किसानों को आर्थिक संबल प्रदान किया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान गांवों में किसानों से सीधे संवाद के दौरान यह अनुभव हुआ है कि विभिन्न योजनाओं का लाभ किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के चेहरे पर दिखाई देने वाला आत्मविश्वास ही सरकार की योजनाओं की वास्तविक सफलता है। ड्रोन तकनीक से खेती होगी और आधुनिक कार्यक्रम में शामिल ड्रोन दीदियों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक की उपयोगिता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ड्रोन के माध्यम से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का छिड़काव कम समय, कम लागत और अधिक प्रभावशीलता के साथ किया जा सकता है। इससे खेती आधुनिक, वैज्ञानिक और लाभकारी बन रही है तथा महिलाओं के लिए भी रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। जैविक खेती और नैनो उर्वरकों पर जोर मुख्यमंत्री ने नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और जैविक खेती को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इनके उपयोग से लागत कम होती है, उत्पादन क्षमता बढ़ती है तथा मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने का आह्वान किया। किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। राज्य और केंद्र सरकार द्वारा आगामी खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है तथा कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त निगरानी की जा रही है। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों ने अमरूद, ड्रैगन फ्रूट, मौसंबी, पपीता और आम जैसी फसलों की उन्नत खेती के अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है तथा बदलते समय के अनुरूप किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ बागवानी, प्राकृतिक कृषि, जैविक खेती और अन्य नवाचारों को अपनाना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का युवा खेती को केवल परंपरा नहीं बल्कि आधुनिक उद्यम के रूप में देख रहा है। यह परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए अत्यंत सकारात्मक है। राज्य सरकार कृषि आधारित कौशल विकास, ड्रोन संचालन, कृषि मशीनरी, जैविक खेती और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित कर रही है। नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाने में संकोच न करें – मुख्यमंत्री कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने किसानों से आह्वान किया कि वे नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाने में संकोच न करें। समय के साथ बदलती तकनीकों को अपनाकर सीमित लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, वैज्ञानिक सोच और आधुनिक तकनीक ही किसानों की समृद्धि का आधार बनेंगे।

सरकारी जमीन पर मचा बवाल, प्रभारी मंत्री ने दिए 52 साल पुरानी रजिस्ट्री की जांच के आदेश

खैरागढ़. शहर के बहुचर्चित एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क और नजूल भूमि विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। करीब 85 हजार वर्गफीट जमीन और 40 करोड़ रुपए से अधिक की अनुमानित कीमत से जुड़े इस मामले में 52 साल पुरानी रजिस्ट्री, सरकारी रिकॉर्ड और कथित प्लॉटिंग को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विवाद बढ़ने के बाद अब प्रभारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने भी मामले की जांच के संकेत दिए हैं। 1974 की रजिस्ट्री से शुरू हुआ विवाद सामने आए दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 1974 में प्लॉट क्रमांक 114 और 115 की रजिस्ट्री अवयस्क स्मृति सिंह के नाम की गई थी। रजिस्ट्री में इन भूखंडों का उल्लेख “एडवर्ड पार्क” और “बाड़ी एडवर्ड पार्क” के रूप में दर्ज है। दस्तावेज में तत्कालीन राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह विक्रेता के रूप में दर्ज हैं, जबकि आम मुख्तियार के रूप में रविंद्र बहादुर सिंह के हस्ताक्षर हैं। क्रेता पक्ष में अवयस्क स्मृति सिंह की ओर से उनकी माता एवं संरक्षिका रश्मि देवी सिंह का नाम दर्ज है। उस समय जमीन का विक्रय मूल्य मात्र 3 हजार रुपए दर्शाया गया था। विवाद इसलिए भी गहरा गया है क्योंकि रजिस्ट्री में शामिल प्रमुख नाम एक ही राजपरिवार से जुड़े बताए जा रहे हैं। सरकारी रिकॉर्ड में पार्क और सार्वजनिक भूमि का उल्लेख मामले में सबसे बड़ा सवाल सरकारी अभिलेखों को लेकर उठ रहा है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार खसरा नंबर 167, 169 और 170 में सड़क, रास्ता, घास भूमि और छोटे झाड़ का जंगल दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। वहीं नजूल मेंटेनेंस खसरे में प्लॉट नंबर 114 को “एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क” और प्लॉट नंबर 115 को “बाड़ी एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क” के रूप में दर्ज बताया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि यह भूमि सार्वजनिक उपयोग या पार्क की श्रेणी में थी, तो इसका भूमि उपयोग परिवर्तन कब और किस प्रक्रिया के तहत हुआ? अब तक इससे संबंधित कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। 22 हिस्सों में हुई प्लॉटिंग, 40 करोड़ से अधिक कीमत संयुक्त जांच प्रतिवेदन के अनुसार लगभग 85,627 वर्गफीट भूमि विभिन्न लोगों को विक्रय किए जाने का उल्लेख है। जानकारी के मुताबिक इस जमीन को 22 हिस्सों में बांटकर प्लॉटिंग की गई। वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर इसकी कीमत 40 करोड़ रुपए से अधिक आंकी जा रही है। यही कारण है कि मामला अब केवल जमीन की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सार्वजनिक महत्व की बहुमूल्य भूमि से जुड़े बड़े विवाद का रूप ले चुका है। पहले भी विधानसभा तक पहुंच चुका है मामला यह विवाद पहली बार सामने नहीं आया है। वर्ष 2020 में तत्कालीन विधायक और खैरागढ़ राजपरिवार के सदस्य स्वर्गीय देवव्रत सिंह ने विधानसभा में क्षेत्र में चल रही कथित अवैध प्लॉटिंग का मुद्दा उठाया था। इसके बाद प्रशासनिक जांच भी हुई थी और कई भूखंडों को अवैध प्लॉटिंग की श्रेणी में चिन्हित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। कुछ मामलों में रजिस्ट्रियों पर रोक लगाने की कार्रवाई भी की गई थी। छोटे अतिक्रमणों पर कार्रवाई, बड़े मामलों में चुप्पी क्यों? इस पूरे विवाद ने प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर सरकारी जमीन पर छोटे अतिक्रमण की शिकायत मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो जाता है। सड़क किनारे बनी झोपड़ियों, गुमटियों और छोटे निर्माणों पर बुलडोजर चलाने में देर नहीं लगाई जाती। लेकिन अब लोगों के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि राजस्व रिकॉर्ड, जांच प्रतिवेदन और अन्य दस्तावेज करोड़ों रुपए मूल्य की इस जमीन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं, तो अब तक कोई बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? लोगों का मानना है कि नियमों की सख्ती कमजोर और गरीब लोगों के लिए अलग दिखाई देती है, जबकि प्रभावशाली लोगों से जुड़े मामलों में कार्रवाई की गति धीमी पड़ जाती है। भूमिस्वामी पक्ष ने रखा अपना पक्ष भूमिस्वामी पक्ष के प्रतिनिधि रजत भार्गव ने कहा कि उनके पास वर्ष 1974 की विधिवत पंजीकृत रजिस्ट्री, सीमांकन प्रतिवेदन और राजस्व अभिलेख उपलब्ध हैं। उनके अनुसार यह भूमि वर्षों से उनकी पत्नी स्मृति भार्गव के नाम दर्ज है और समय-समय पर उसका सीमांकन भी किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि शासन या प्रशासन किसी भी प्रकार की जानकारी मांगता है तो सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे। बिना सभी रिकॉर्ड और तथ्यों की जांच किए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। प्रभारी मंत्री ने दिए जांच के संकेत मामले को लेकर खैरागढ़ जिले के प्रभारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि वह कलेक्टर से चर्चा करेंगे और उपलब्ध दस्तावेजों तथा जांच प्रतिवेदन का परीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने कहा, “यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।” जांच पर टिकी सबकी नजर एक तरफ 52 साल पुरानी रजिस्ट्री है तो दूसरी तरफ सरकारी रिकॉर्ड में पार्क और सार्वजनिक उपयोग की भूमि का उल्लेख। एक ओर निजी स्वामित्व का दावा है, तो दूसरी ओर करोड़ों रुपए की प्लॉटिंग और सरकारी जमीन के कथित उपयोग को लेकर उठ रहे सवाल। अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और शासन के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह विवाद सिर्फ जमीन के मालिकाना हक तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा, सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और कानून के समान अनुपालन की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।