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प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के अंतर्गत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भिखमपुरा पहुंचकर स्वामी शिवानंद विद्यापीठ एवं गौसेवा आश्रम परिसर स्थित  पंचमुखी दक्षिणाभिमुख सिद्ध हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य और राज्य की निरंतर प्रगति की कामना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्धि, जनकल्याण और सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय इन दिनों सुशासन तिहार के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों का सतत दौरा कर रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से वे सीधे आमजन से संवाद स्थापित कर शासन की योजनाओं और सेवाओं के जमीनी क्रियान्वयन की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं तथा समस्याओं के त्वरित निराकरण की दिशा में आवश्यक निर्देश भी दे रहे हैं। भिखमपुरा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने गौसेवा आश्रम परिसर में आयोजित चौपाल में ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं, सुझाव और अपेक्षाएं सुनीं तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से उन्हें मिल रहे लाभों की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार शासन और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसके जरिए प्रशासन सीधे लोगों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रहा है। इस अवसर पर वित्त मंत्री  ओ पी चौधरी  सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, स्थानीय नागरिक, आश्रम से जुड़े सदस्य तथा जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।

ड्रोन निगरानी, स्मार्ट मॉनिटरिंग और हरित विकास की दिशा में छत्तीसगढ़ की नई पहल

विश्व पर्यावरण दिवस विशेष तकनीकी नवाचार से सशक्त हो रहा पर्यावरण संरक्षण ड्रोन निगरानी, स्मार्ट मॉनिटरिंग और हरित विकास की दिशा में छत्तीसगढ़ की नई पहल विज्ञान, तकनीक और जनभागीदारी के समन्वय से आकार ले रहा है स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य प्रकृति का संरक्षण: वर्तमान की आवश्यकता, भविष्य की जिम्मेदारी रायपुर, धरती केवल हमारे रहने का स्थान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर है। स्वच्छ हवा, निर्मल जल, हरे-भरे वन और समृद्ध जैव विविधता ही मानव सभ्यता के अस्तित्व का आधार हैं। लेकिन आज जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन ने पूरी दुनिया के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विकास की दौड़ में प्रकृति की अनदेखी अंततः मानव जीवन के लिए ही खतरा बन सकती है। इसलिए आज आवश्यकता ऐसी विकास नीति की है जो समृद्धि के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी सुरक्षित रखे।          मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार इसी संतुलित विकास की अवधारणा को आगे बढ़ा रही है। राज्य में पर्यावरणीय शासन को आधुनिक तकनीकों से जोड़ते हुए प्रदूषण नियंत्रण, संसाधन संरक्षण और सतत विकास की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। पर्यावरण संरक्षण में तकनीकी क्रांति:  ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली          21वीं सदी में तकनीक केवल सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि सुशासन और संसाधन संरक्षण का प्रभावी उपकरण बन चुकी है। पर्यावरणीय निगरानी के क्षेत्र में ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम इसी परिवर्तन का प्रतीक है। पहले जिन क्षेत्रों तक पहुँचना कठिन था, जहाँ प्रदूषण के स्रोतों की सटीक पहचान में समय लगता था, वहाँ अब अत्याधुनिक सेंसरों से लैस ड्रोन कुछ ही मिनटों में विस्तृत जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं। ड्रोन तकनीक के माध्यम से-           ड्रोन तकनीक के माध्यम से PM2.5 एवं PM10 जैसे सूक्ष्म कणों की निगरानी, सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) एवं नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) जैसे गैसीय प्रदूषकों का विश्लेषण, औद्योगिक चिमनियों से निकलने वाले उत्सर्जन की ऊँचाई पर निगरानी, नदियों एवं जलाशयों की जल गुणवत्ता का परीक्षण, अवैध अपशिष्ट निस्तारण की पहचान तथा प्रदूषण प्रभावित हॉटस्पॉट क्षेत्रों की सटीक मैपिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावी ढंग से किए जा रहे हैं। इससे प्रदूषण स्रोतों की शीघ्र पहचान, वैज्ञानिक विश्लेषण तथा त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई संभव हो रही है। स्मार्ट पर्यावरणीय शासन की दिशा में अग्रसर छत्तीसगढ़            पर्यावरणीय चुनौतियाँ लगातार बदल रही हैं। ऐसे में पारंपरिक निगरानी व्यवस्था को आधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाना समय की मांग है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इसी दृष्टिकोण के साथ तकनीक आधारित पर्यावरणीय शासन को प्राथमिकता दी है। 24 घंटे वायु गुणवत्ता पर निगरानी           राज्य में कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम (CAAQMS) का विस्तार किया जा रहा है। यह प्रणाली चौबीसों घंटे वायु की गुणवत्ता का विश्लेषण कर वास्तविक समय में आंकड़े उपलब्ध कराती है। इससे प्रदूषण की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन संभव हो रहा है तथा नागरिकों को भी वायु गुणवत्ता संबंधी जानकारी प्राप्त हो रही है। उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण को मिली नई मजबूती           औद्योगिक विकास राज्य की आर्थिक प्रगति का आधार है, लेकिन यह पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप हो, यह सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से उद्योगों में कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (CEMS) लागू किया गया है। यह प्रणाली उद्योगों के उत्सर्जन की निरंतर निगरानी करती है और किसी भी मानक उल्लंघन की स्थिति में तत्काल जानकारी उपलब्ध कराती है। इससे प्रदूषण नियंत्रण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनी है। GPS ट्रैकिंग से खतरनाक अपशिष्टों पर नियंत्रण          औद्योगिक अपशिष्टों का वैज्ञानिक प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण की महत्वपूर्ण कड़ी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने खतरनाक अपशिष्टों के परिवहन एवं निपटान की निगरानी के लिए GPS आधारित ट्रैकिंग प्रणाली लागू की है। इस व्यवस्था से अपशिष्ट के उत्पन्न होने से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक की सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध रहती है। इससे अवैध डंपिंग और पर्यावरणीय क्षति की संभावनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। अत्याधुनिक पर्यावरण प्रयोगशालाएँ : वैज्ञानिक निर्णयों का आधार          सटीक आंकड़े और वैज्ञानिक विश्लेषण किसी भी प्रभावी पर्यावरणीय नीति की आधारशिला होते हैं। राज्य में स्थापित अत्याधुनिक केंद्रीय पर्यावरण प्रयोगशाला वायु, जल, मिट्टी और अपशिष्ट नमूनों का उच्च स्तरीय परीक्षण कर रही है। इसके अतिरिक्त मोबाइल पर्यावरण प्रयोगशालाएँ भी आकस्मिक निरीक्षण और त्वरित परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन सुविधाओं के माध्यम से प्रदूषण की घटनाओं का शीघ्र पता लगाया जा सकता है और आवश्यक कार्रवाई समय पर सुनिश्चित की जा सकती है। पर्यावरण संरक्षण और उद्योगों के बीच संतुलन         प्रदेश सरकार ने पर्यावरणीय मानकों से समझौता किए बिना उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाया है।स्थापना अनुमति (CTE) और संचालन अनुमति (CTO) की प्रक्रियाओं को समयबद्ध एवं डिजिटल बनाया गया है। अनेक श्रेणियों में स्व-प्रमाणन आधारित नवीनीकरण की सुविधा प्रदान कर उद्योगों को राहत दी गई है। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं। जनभागीदारी: हरित भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति           पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। यह तब सफल होगा जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति इसकी जिम्मेदारी को समझे और निभाए। इसी उद्देश्य से राज्य में ईको-क्लब कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। विद्यालयों और महाविद्यालयों के हजारों विद्यार्थी वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त अभियान, स्वच्छता कार्यक्रम तथा जैव विविधता संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। युवा पीढ़ी में पर्यावरणीय चेतना का विकास भविष्य के हरित भारत की मजबूत नींव तैयार कर रहा है। भविष्य की दृष्टि 2030ः हरित विकास का रोडमैप            आने वाले वर्षों में पर्यावरणीय शासन पूरी तरह डेटा-आधारित, पारदर्शी और तकनीक-संचालित होगा। "भविष्य की दृष्टि 2030" के अंतर्गत राज्य में स्मार्ट मॉनिटरिंग, डिजिटल पर्यावरणीय प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण की उन्नत प्रणालियाँ तथा जनसहभागिता आधारित संरक्षण मॉडल विकसित किए जा रहे हैं। यह दृष्टिकोण केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य, स्वच्छ पर्यावरण और उच्च जीवन गुणवत्ता … Read more

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक सम्पन्न

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सम्पन्न रायपुर मुख्य सचिव विकासशील ने एसएलबीसी के बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हितग्राहियों को उनके हिस्से की राशि के लिए ऋण देने की प्रक्रिया का सरलीकरण करें, जिससे हितग्राही आवास शीघ्रता से बना सकें। मुख्य सचिव ने नगरीय-प्रशासन विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिए है कि प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के अंतर्गत जिन हितग्राहियों को आवास स्वीकृत हुए हैं, उनके लिए एक विशेष शिविर लगाकर बैंकर्स से ऋण दिलवाये। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केन्द्रांश एवं राज्यांश की राशि हितग्राहियों को दी जाती है।           मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 तथा प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के लाभार्थी आधारित निर्माण (बीएलसी) घटक के अंतर्गत परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इसी तरह से प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के घटक भागीदारी में किफायती आवास निर्माण के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं में भारत सरकार के एमआईएस पोर्टल पर दर्ज हितग्राहियों की प्रविष्टी में आवश्यक संशोधन की स्वीकृति के संबंध में भी विस्तार से चर्चा हुई।            बैठक में अधिकारियों ने बताया कि योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को आवास निर्माण हेतु भौतिक प्रगति अनुसार केन्द्रांश राशि एक लाख 50 हजार रूपए तथा अनिवार्य राज्यांश की राशि एक लाख रूपए दी जाती है। हितग्राही द्वारा निर्धारित समयावधि में आवास पूर्ण करते हुए गृह प्रवेश करने पर राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान योजना के अंतर्गत प्रति आवास 32 हजार 850 रूपए पृथक से हितग्राही के खाते में हस्तांतरित की जायेगी। प्रति आवास डीपीआर और पीएमसी शुल्क की राशि 6 हजार 150 रूपए राज्य शासन द्वारा दिया जाता है।           अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के लाभार्थी आधारित निर्माण घटक अंतर्गत 10 हजार 549 हितग्राही हेतु नवीन आवास निर्माण के लिए केन्द्रांश राशि 158 करोड़ 23 लाख 50 हजार रूपए तथा राज्यांश 146 करोड़ 63 लाख 11 हजार रूपए एवं हितग्राही अंशदान राशि 105 करोड़ 49 लाख शामिल करते हुए 144 नगरीय निकायों में 410 करोड़ 35 लाख 61 हजार रूपए की लागत की 114 परियोजनाओं को स्वीकृत करने हेतु प्रस्तावित किया गया है। जिस पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव श्रीमती आर.शंगीता, आयुक्त नगर तथा ग्राम निवेश अवनीश कुमार शरण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की विशेष सचिव सुईफ्फत आरा सहित वित्त, आवास एवं पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, गृह निर्माण मंडल, हुडको एवं राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक शामिल हुए।

लंबे समय से एक ही जगह तैनात 80 पुलिसकर्मी बदले गए, जांजगीर-चांपा में तबादला सूची जारी

जांजगीर-चांपा. जिले में कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय (IPS) ने व्यापक स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किया है। जारी आदेश के अनुसार कुल 80 प्रधान आरक्षक एवं आरक्षकों का स्थानांतरण किया गया है। स्थानांतरण आदेश के तहत ऐसे पुलिस कर्मचारियों का प्राथमिकता से तबादला किया गया है, जो तीन वर्ष अथवा उससे अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ थे। इस कदम का उद्देश्य कार्य में पारदर्शिता, दक्षता एवं प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना है। यातायात शाखा के कर्मचारियों की थानों में हुई पदस्थापना पुलिस अधीक्षक ने यातायात शाखा में पदस्थ कर्मचारियों को विभिन्न थानों में पदस्थ किया है। इससे थाना स्तर पर पुलिस बल की उपलब्धता बढ़ेगी तथा कानून- व्यवस्था संबंधी कार्यों में और अधिक मजबूती आएगी। वहीं थाना चौकी में पदस्थ कर्मचारियों को यातायात शाखा में पदस्थ किया गया है। करही में पुलिस सहायता के लिए अलग से व्यवस्था ग्राम करही में 05 जून को पुलिस सहायता केंद्र का शुभारंभ किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्राम करही में पृथक रूप से पुलिस कर्मचारियों की पदस्थापना की गई है। इससे क्षेत्र के नागरिकों को त्वरित पुलिस सहायता एवं सुरक्षा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

अतिक्रमणकारियों पर सख्त एक्शन, वन क्षेत्र में बने 34 अवैध मकान किए गए ध्वस्त

बलरामपुर. जिले में वन भूमि पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया। संयुक्त टीम ने अभियान चलाकर वन भूमि पर बने 34 अवैध मकानों को ध्वस्त कर अतिक्रमण हटाया। कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन की इस कार्रवाई को वन भूमि संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, वन भूमि पर वर्षों से अवैध कब्जे की शिकायतें मिल रही थी। प्रशासन द्वारा पहले संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर भूमि खाली करने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित समय सीमा के बाद भी कब्जा नहीं हटाए जाने पर वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। अधिकारियों की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर 34 मकानों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति रही। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी और वन भूमि पर किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।अधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अतिक्रमण के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आशा, संतोष और आत्मसम्मान से बदली जिंदगी, वर्षों बाद पूरी हुई बड़ी तमन्ना

बरसों का सपना हुआ पूरा अब मन में भविष्य की चिंता नहीं, आशा, संतोष और आत्मसम्मान रायपुर  एक सुरक्षित और पक्का घर हर परिवार का सपना होता है। यह सपना केवल चार दीवारों का नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का भी होता है। दुर्ग नगर निगम के उरला वार्ड की श्रीमती कुंती जगने के मन में भी वर्षों से खुद के पक्के घर का सपना पल रहा था, जो अब प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 से साकार हो गया है। श्रीमती कुंती जगने मजदूर हैं। उनके पति श्री प्रभुदास जगने मोची का काम करते हैं। सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करना ही उनके लिए बड़ी चुनौती थी। ऐसे में घर बनाना उनके लिए दूर की कौड़ी थी। कई वर्षों तक उनका परिवार किराये के मकान में रहा, जहां उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बरसात में मकान की छत से पानी टपकता था, जिससे परिवार की चिंता और परेशानी बढ़ जाती थी। बच्चों की सुरक्षा के लिए रातभर जागना पड़ता था। गर्मियों में कमरा इतना गर्म हो जाता था कि आराम से रहना और सोना भी मुश्किल हो जाता था। इन परिस्थितियों के बीच उनका परिवार हमेशा एक ऐसे घर का सपना देखता था, जहां वे सुरक्षित और सम्मानपूर्वक रह सकें। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत आवास की स्वीकृति के साथ कुंती के खुद के आशियाने के सपने को पंख मिला। दुर्ग नगर निगम के सहयोग और योजना से मिली राशि से आवास निर्माण का काम शुरू हुआ और उनके बरसों पुराने सपने को नई उड़ान मिली। मकान पूर्ण होते ही कुंती का सपना हकीकत में बदल गया। आज कुंती अपने परिवार के साथ अपने नए पक्के घर में सुखपूर्वक रह रही हैं। खुद का घर, सुरक्षित वातावरण और स्थायित्व के अहसास ने उन्हें नया आत्मविश्वास दिया है। मन में हमेशा रहने वाली भविष्य की चिंता की जगह अब आशा, संतोष और आत्मसम्मान ने ले ली है। कुंती कहती हैं, “यह केवल ईंट, सीमेंट और दीवारों से बना मकान नहीं है, बल्कि उनके संघर्ष, मेहनत और सपनों का साकार रूप है। प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके परिवार को न केवल पक्का घर दिया है, बल्कि सम्मान और सुरक्षित जीवन भी सुनिश्चित किया है।“ कुंती के सपने का हकीकत में बदलना प्रमाण है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं और स्थानीय निकायों द्वारा उसका प्रभावी क्रियान्वयन गरीब परिवारों के जीवन में किस तरह सकारात्मक बदलाव ला सकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) ने कुंती की ही तरह अनेक परिवारों के खुद के पक्के घर के सपने को साकार कर बेहतर, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन दिया है।

नैनो उर्वरकों से बढ़ रहा किसानों का मुनाफा, कम लागत में बेहतर उत्पादन का नया मॉडल

नैनो उर्वरकों से खेती बन रही अधिक लाभकारी, किसान अपना रहे ‘कम लागत, अधिक मुनाफा’ का मॉडल नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से बढ़ रही उत्पादन क्षमता, मिट्टी की सेहत को भी मिल रहा संरक्षण रायपुर छत्तीसगढ़ में आधुनिक कृषि तकनीकों और नवाचार आधारित खेती को बढ़ावा मिलने से किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की दिशा में सफल कदम बढ़ा रहे हैं। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरकों का उपयोग किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इससे खेती की लागत में कमी आने के साथ-साथ फसलों को बेहतर पोषण और मिट्टी की गुणवत्ता के संरक्षण में भी मदद मिल रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसान नैनो उर्वरकों के सकारात्मक परिणामों का अनुभव कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो तकनीक आधारित उर्वरक पौधों तक पोषक तत्वों की प्रभावी आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं, जिससे उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ती है और फसलों का विकास बेहतर होता है। साथ ही पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में इनके परिवहन, भंडारण और उपयोग में भी अधिक सुविधा होती है। सरगुजा जिले के प्रगतिशील किसान श्री सत्यम कुमार ने पिछले तीन वर्षों से अपनी कृषि भूमि में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग कर सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए हैं। उनके अनुभव बताते हैं कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई है तथा खेती की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई है। धान, गेहूं, सब्जियों और बाड़ी फसलों सहित विभिन्न कृषि गतिविधियों में इन उर्वरकों का सफल उपयोग किया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नैनो उर्वरकों का छिड़काव सीधे पौधों पर किया जाता है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण अधिक प्रभावी ढंग से होता है। इससे उर्वरकों की बर्बादी कम होती है और फसल को आवश्यक पोषण समय पर उपलब्ध होता है। यही कारण है कि किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। नैनो उर्वरकों का उपयोग पर्यावरणीय दृष्टि से भी लाभकारी माना जा रहा है। इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायता मिलती है तथा रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है। इससे टिकाऊ एवं संतुलित कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिल रहा है। राज्य सरकार और कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। प्रशिक्षण, प्रदर्शन एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग और उनके लाभों की जानकारी दी जा रही है। इसका परिणाम है कि प्रदेश में अधिक से अधिक किसान आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

दुर्ग पुलिस में बड़ा एक्शन, NDPS मामले में रिश्वत मांगने पर दो सब-इंस्पेक्टर सस्पेंड

दुर्ग. जिले में रिश्वत मांगने के आरोप में दो पुलिस अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में आरोपी पक्ष से कथित रूप से पैसों की मांग करने के आरोप में दो सब इंस्पेक्टरों को निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में पुरानी भिलाई थाना में पदस्थ एसआई तुलसीराम साहू और खुर्सीपार थाना में पदस्थ एसआई देव लाल साहू शामिल हैं। दोनों को निलंबित कर रक्षित केंद्र दुर्ग अटैच किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने छावनी सीएसपी प्रशांत पैकरा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें तीन दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। महिला को छोड़ने के बदले मांगे थे 50 हजार रुपए जानकारी के अनुसार पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र में एसआई तुलसीराम साहू ने रज्जी कौर नामक महिला को 5.80 ग्राम चिट्टा (मादक पदार्थ) के साथ गिरफ्तार किया था। आरोप है कि महिला को छोड़ने के एवज में उसकी बेटी से 50 हजार रुपए की मांग की गई थी। महिला की बेटी जसबीर का आरोप है कि उसने पहली बार में 20 हजार रुपए देने की बात स्वीकार की थी और राशि भी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद उसकी मां को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद भी पैसों की मांग जारी रही। इसी दौरान हुई बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड हो गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ऑडियो वायरल होने के बाद हुई कार्रवाई ऑडियो वायरल होने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जांच में ऑडियो को गंभीर मानते हुए एसएसपी विजय अग्रवाल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एसआई तुलसीराम साहू और उनके सहयोगी बताए जा रहे खुर्सीपार थाना में पदस्थ एसआई देव लाल साहू को निलंबित कर दिया। दुर्ग शहर एएसपी सुखनंद राठौर ने बताया कि पुरानी भिलाई थाना में दर्ज एनडीपीएस प्रकरण से जुड़े मामले में आरोपी पक्ष से कथित रूप से पैसों की मांग का ऑडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। शुरुआती जांच में वायरल ऑडियो के आधार पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विभागीय नियमों के विपरीत आचरण पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई की गई। साइबर क्राइम कर्मियों पर भी लगाए आरोप आरोपी महिला की बेटी जसबीर ने यह भी आरोप लगाया है कि साइबर क्राइम से जुड़े कुछ लोगों ने भी उससे 2 लाख रुपए की मांग की थी। उसने दावा किया कि एसआई के साथ हुई बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग उसके पास सुरक्षित है। जसबीर ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि जब्ती, गिरफ्तारी और पूछताछ से जुड़े सभी स्थानों के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए। उसका आरोप है कि बरामद किए गए चिट्टे की मात्रा वास्तविक मात्रा से अधिक दर्शाई गई है। तीन दिन में सौंपी जाएगी जांच रिपोर्ट दुर्ग पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। छावनी नगर पुलिस अधीक्षक प्रशांत पैकरा को तीन दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जनभागीदारी के दम पर हरियाली की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़, पर्यावरण संरक्षण को मिली नई दिशा

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी से पर्यावरणीय समृद्धि की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ रायपुर,    प्रकृति केवल हमारे जीवन का आधार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और भविष्य की संरक्षक भी है। स्वच्छ वायु, निर्मल जल, घने वन और समृद्ध जैव विविधता किसी भी सभ्य समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के इस दौर में पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। इसी उद्देश्य से प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, जो हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है। प्राकृतिक संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य के विशाल वन क्षेत्र, समृद्ध जैव विविधता और जल संसाधन इसकी पर्यावरणीय पहचान हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर अनेक योजनाओं का सफल संचालन कर रही है। हरियाली से समृद्धि की ओर छत्तीसगढ़ में वृक्षारोपण को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय से भी जोड़ा गया है। ’हरियाली प्रसार योजना’ और ’किसान वृक्ष मित्र योजना’ के माध्यम से किसानों को कृषि वानिकी के लिए पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा उन्हें अपनी भूमि पर वृक्ष लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे एक ओर हरित क्षेत्र का विस्तार हो रहा है तो दूसरी ओर किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संचालित ”एक पेड़ मां के नाम“ अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जनभावनाओं से जोड़ने का कार्य किया है। इस अभियान के माध्यम से लाखों नागरिक अपनी मां के सम्मान में पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। यह पहल पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप प्रदान कर रही है। शहरों को मिल रही हरित पहचान तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। इस दिशा में ’ऑक्सीवन योजना’ के तहत शहरों में ऑक्सीजन पार्क और हरित क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। वहीं पर्यावरण वानिकी योजना’ के माध्यम से सड़क किनारे वृक्षारोपण, पर्यावरण पार्कों का निर्माण तथा सार्वजनिक स्थलों का हरित विकास किया जा रहा है। ये प्रयास न केवल प्रदूषण नियंत्रण में सहायक हैं, बल्कि नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता भी प्रदान कर रहे हैं। जल संरक्षण बना जनआंदोलन जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए जल संरक्षण आज सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस दिशा में कई अभिनव पहलें की हैं। ’मोर गांव मोर पानी’ और ’मोर गांव मोर तरिया’ जैसे अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण की नई चेतना पैदा कर रहे हैं। परंपरागत तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, चेक डैम निर्माण और जल पुनर्भरण संरचनाओं के विकास से भूजल स्तर में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में ’भूजल एवं जल संरक्षण कार्यक्रमों’ के तहत जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष बल दिया जा रहा है। जल सुरक्षा की यह सोच आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य की नींव रख रही है। नदियों और आर्द्रभूमियों का संरक्षण प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए ’नदी तट वृक्षारोपण योजना’ के अंतर्गत नदी किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है। इससे मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण, भूजल संवर्धन और जैव विविधता संरक्षण में मदद मिल रही है। इसी प्रकार आर्द्र भूमि (वेटलैंड) जलवायु अनुकूलन परियोजना के तहत महानदी जलग्रहण क्षेत्र में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। यह पहल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और प्राकृतिक जल तंत्र को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नई पीढ़ी को पर्यावरण का प्रहरी बनाने की पहल पर्यावरण संरक्षण की सफलता जन-जागरूकता और जनभागीदारी पर निर्भर करती है। इसी उद्देश्य से ’राष्ट्रीय हरित कोर योजना (नेशनल ग्रीन कॉर्प्स)’ तथा ’ईको-क्लब कार्यक्रमों’ के माध्यम से स्कूलों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को पर्यावरणीय गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण संबंधी कार्यक्रमों के जरिए बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जा रही है। पर्यावरण संरक्षण : सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। एक पौधा लगाना, जल की बचत करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना और स्वच्छता बनाए रखना ऐसे छोटे-छोटे कदम हैं जो बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं। विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह संदेश देता है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। छत्तीसगढ़ आज हरियाली, जल संरक्षण और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल के माध्यम से इसी संतुलित दृष्टिकोण को साकार कर रहा है। यदि हम सभी प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझें और पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पृथ्वी सौंप सकेंगे। धरती हमें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि हमने इसे आने वाली पीढ़ियों से उधार लिया है। इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है। •  डॉ. दानेश्वरी संभाकर     उपसंचालक, जनसंपर्क  

सुशासन तिहार में जनता की बड़ी भागीदारी, 1210 आवेदन प्राप्त, 50 लोगों को मिला लाभ

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशन में आयोजित ‘सुशासन तिहार 2026’ के अंतर्गत सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम बेलदगी में जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में क्लस्टर की 20 ग्राम पंचायतों से बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करते हुए अपनी मांगों एवं शिकायतों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। ग्रामीणों से सीधे संवाद कर सुनी समस्याएं शिविर में लुण्ड्रा विधायक श्री प्रबोध मिंज ने सहभागिता करते हुए ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। उन्होंने आमजन की मांगों, समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से सुना तथा संबंधित अधिकारियों को प्राप्त आवेदनों का समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित कर आवेदकों को सूचना देने के निर्देश दिए। विधायक श्री मिंज ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर आयोजित सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन और जनता के बीच की दूरी को समाप्त करना है। उन्होंने ग्रामीणों से अपनी समस्याएं और आवश्यकताएं खुलकर रखने का आग्रह करते हुए कहा कि प्रशासन उनके समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। जनहित के मुद्दों पर दिया गया विशेष जोर जिला पंचायत सीईओ श्री विनय कुमार अग्रवाल ने बताया कि सुशासन तिहार के अंतर्गत 15 से 25 गांवों के समूहों में समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिविरों में प्राप्त आवेदनों का त्वरित निराकरण किया जाएगा तथा आवश्यक प्रकरण शासन स्तर पर भेजे जाएंगे। उन्होंने राजस्व विभाग को शिकायतों के निराकरण में विशेष संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा एचपीवी टीकाकरण अभियान की जानकारी देते हुए पात्र बालिकाओं का टीकाकरण सुनिश्चित करने की अपील की गई। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने जल संरक्षण, तालाब गहरीकरण, कुओं एवं अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही नल-जल योजनाओं के बेहतर संचालन एवं रखरखाव के लिए ग्राम पंचायतों को जलकर संग्रहण करने की सलाह दी। 1210 आवेदन प्राप्त, 50 हितग्राही लाभान्वित शिविर में कुल 1210 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 1151 मांग संबंधी तथा 59 शिकायत संबंधी आवेदन शामिल रहे। शिविर में लगभग 26 विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई तथा पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। आधार कार्ड एवं आयुष्मान कार्ड निर्माण के लिए विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी मुक्त सरगुजा अभियान के तहत स्वास्थ्य परीक्षण एवं टीबी स्क्रीनिंग की गई। वहीं, बिहान बाजार के माध्यम से स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों का प्रदर्शन कर ग्रामीण आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहित किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गोदभराई एवं अन्नप्राशन कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। शिविर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की चाबी, किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, आयुष्मान कार्ड, स्वास्थ्य कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड तथा राशन कार्ड सहित विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 50 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य मोनिका पैकरा, जनपद पंचायत अध्यक्ष शशिकला सिंह, उपाध्यक्ष कामेश्वर राजवाड़े, जनपद सदस्यगण, सभी ग्राम पंचायतों के सरपंच, एसडीएम रामराज सिंह, जनपद पंचायत सीईओ, जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।