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नारायणपुर में पीएम-जनमन से कच्चे मकानों से पक्के आशियाने तक का सफर

रायपुर        ​सरकार के ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत विशेष रूप से कमजोर एवं पात्र जनजातीय परिवारों के जीवन में एक नया सबेरा देखने को मिल रहा है। नारायणपुर जिले की ग्राम पंचायत कोहकामेटा के दूरस्थ क्षेत्रों में प्रधानमंत्री जनमन (पीएम-जनमन) आवास योजना जरूरतमंद परिवारों के सपनों को साकार कर उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन दे रही है।    ​ वर्षों से मिट्टी के कच्चे घरों में रह रहे परिवारों के लिए मौसम की हर मार—चाहे वह मूसलाधार बारिश हो या तेज हवाएं—एक बड़ी चुनौती हुआ करती थी। आर्थिक तंगी के कारण पक्का मकान बनाना इन ग्रामीण परिवारों के लिए एक दूर की कौड़ी जैसा था।वर्षाकाल में टपकती छतों और ढहती दीवारों की चिंता से मुक्त होकर अब ग्राम कोहकामेटा की श्रीमती मोडडे बाई पति श्री मसीया राम और ग्राम किहकाड़ की श्रीमती गंगाबती पति श्री सुकालू का परिवार अपने मजबूत, ढलाई वाले पक्के मकानों में सुरक्षित जीवन व्यतीत कर रहा है।  ​मोडडे बाई बताती हैं कि मिट्टी के कच्चे घर में बारिश के दिनों में हर समय डर बना रहता था, लेकिन योजना के तहत आवास स्वीकृति मिलने के बाद अब मजबूत छत वाला घर बनकर तैयार है। यह नया घर केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि उनके परिवार के लिए स्थायित्व और सम्मानजनक जीवन का आधार बन गया है। ठीक इसी तरह ग्राम किहकाड़ की गंगाबती के लिए भी यह पक्का आशियाना एक बड़े बदलाव की शुरुआत लेकर आया है। कच्चे घर की जगह अब मजबूत ढलाई वाली पक्की छत तैयार हो चुकी है, जिससे उनका परिवार हर मौसम में पूरी तरह सुरक्षित है।   ​प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) को मूलभूत सुविधाओं से जोड़कर उनके जीवनस्तर में सुधार लाना है। नारायणपुर जिले में यह योजना केवल पक्के मकान ही नहीं दे रही, बल्कि इन परिवारों के मन में सुरक्षा और बेहतर भविष्य की उम्मीद को भी मजबूत कर रही है। पक्का आवास मिलने पर दोनों परिवारों ने शासन-प्रशासन के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है। यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि विकास की मुख्यधारा से दूर रह रहे परिवारों तक जब योजनाएं पहुँचती हैं, तो उनके जीवन में वास्तविक और स्थायी बदलाव आता है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को दिलाई पद एवं गोपनीयता की शपथ

रायपुर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को दिलाई पद एवं गोपनीयता की शपथ छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक कलाकार कल्याण संघ के शपथ ग्रहण समारोह में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों एवं सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर उन्होंने लोक कलाकारों की सुविधाओं और उनकी कला को आगे बढ़ाने के लिए स्टूडियो निर्माण के संबंध में आश्वासन भी दिया।   उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध लोक कला, संस्कृति और परंपराओं से है। लोक कलाकार अपनी प्रतिभा और कला के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कलाकारों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि लोक कला को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए कलाकारों को बेहतर अवसर और सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कलाकारों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कलाकारों के लिए स्टूडियो निर्माण की दिशा में आवश्यक सहयोग और पहल का आश्वासन दिया। स्टूडियो उपलब्ध होने से कलाकारों को अपनी कला के अभ्यास, प्रशिक्षण, रिकॉर्डिंग और प्रस्तुतियों की तैयारी के लिए बेहतर सुविधा मिल सकेगी।   इस दौरान संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने तथा छत्तीसगढ़ की लोक कला एवं संस्कृति को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी,  मनीराम साहू, संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी, बड़ी संख्या में लोक कलाकार और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

436 रुपए के सुरक्षा कवच से मिला 2 लाख रूपए का सहारा

​रायपुर  ​विपरीत परिस्थितियों में एक छोटी-सी बचत किस तरह किसी परिवार के लिए बड़ा संबल बन सकती है, इसकी बानगी छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में देखने को मिली है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ('बिहान') से जुड़कर महिलाओं में आई वित्तीय साक्षरता का ही सुखद परिणाम है कि आज ग्रामीण परिवार आकस्मिक संकट के समय आर्थिक रूप से खुद को सुरक्षित पा रहे हैं।       ​ धमतरी जिले के ग्राम अर्जुनी की रहने वाली स्वर्गीय सगनी बाई ध्रुव 'ठाकुर देव स्व-सहायता समूह' की एक सक्रिय सदस्य थीं। बिहान के माध्यम से चलाए जा रहे सामाजिक सुरक्षा अभियानों से प्रेरित होकर उन्होंने मात्र 436 रुपए के वार्षिक प्रीमियम पर प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के तहत अपना बीमा कराया था।दुर्भाग्यवश, उनके असमय निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन ऐसे कठिन समय में बिहान कैडर की मुस्तैदी और योजना की दूरदर्शिता परिवार के लिए एक आर्थिक ढाल बनकर सामने आई।         ​इस पूरे प्रकरण में जमीनी स्तर पर काम कर रहीं बैंक सखी कामिनी विश्वकर्मा और बीमा सखी प्रतिमा साहू ने आगे बढ़कर परिजनों को ढांढस बंधाया और क्लेम से जुड़े आवश्यक दस्तावेज तैयार कराए। इसके बाद आश्रय महिला क्लस्टर संगठन (देमार) के जरिए बैंक के साथ त्वरित समन्वय स्थापित किया गया, जिससे बीमा दावा प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के पूरी हो सकी। ​परिणामस्वरूप, सगनी बाई के पति श्री कानतु राम ध्रुव के बैंक खाते में 2 लाख रुपए की बीमा दावा राशि हस्तांतरित कर दी गई। कानतु राम के लिए यह राशि केवल एक वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि कठिन घड़ी में मिला एक मजबूत सामाजिक सहारा है, जिससे वे अपने परिवार की दैनिक प्राथमिकताओं और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो सके हैं।        ​ सगनी बाई ध्रुव का यह उदाहरण यह सिद्ध करता है कि समय रहते सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ना कितना आवश्यक है। मात्र 436 रुपए का यह छोटा-सा वार्षिक निवेश संकट की घड़ी में किसी भी परिवार को 2 लाख रूपए की आर्थिक सुरक्षा दे सकता है। आज बिहान के स्व-सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को केवल आजीविका गतिविधियों तक सीमित न रखकर बैंकिंग, बचत, पेंशन और बीमा जैसी दूरगामी योजनाओं से जोड़ रहे हैं। प्रदेश के गांव-गांव तक पहुंचाई जा रही ये सामाजिक सुरक्षा योजनाएं अनिश्चितताओं के दौर में ग्रामीण परिवारों के लिए आत्मनिर्भरता और सुरक्षा की एक मजबूत गारंटी बनकर उभर रही हैं।

बलौदाबाजार में राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने दिव्यांगजनों को बांटे सहायक उपकरण

​रायपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा काल के 25 वर्ष पूरे होने पर 17 सितंबर से प्रारंभ होकर 17 अक्टूबर तक चलने वाले एक माह के 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत शुक्रवार को बलौदाबाजार स्थित नगर भवन में दिव्यांगजनों के लिए विशेष चिन्हांकन, प्रमाणीकरण एवं 'ऑन द स्पॉट' कृत्रिम अंग, कैलिपर्स व स्प्लिंट वितरण शिविर का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में प्रदेश के राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।        ​शिविर के दौरान राजस्व मंत्री  वर्मा ने मौके पर ही निर्मित कृत्रिम अंग और कैलिपर्स 29 दिव्यांगजनों को वितरित किए। तत्पश्चात उन्होंने सहायक उपकरण प्राप्त करने वाले दिव्यांगों से आत्मीय मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना और उनके अनुभव सुने। उन्होंने सभी को आश्वस्त करते हुए कहा कि शिविर में पंजीकृत प्रत्येक पात्र दिव्यांगजन को उसकी आवश्यकता के अनुसार निःशुल्क सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।        ​समारोह को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि यह सेवा संकल्प अभियान सीधे जनता से जुड़ने और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आधुनिक भारत का निर्माता बताते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित, स्वस्थ और आत्मनिर्भर बनाने का जो विजन उन्होंने दिया है, उसे साकार करने के लिए हम सभी प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश को विकसित और समृद्ध बनाने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है।      ​ गौरतलब है कि 21 सितंबर से 25 सितंबर तक जिले के सभी 5 विकासखंडों में दिव्यांगजन चिन्हांकन सह वितरण शिविरों का आयोजन किया गया था। इन 5 दिनों में कुल 775 दिव्यांगजनों का पंजीयन किया गया, जिनमें से 199 पात्र लाभार्थियों को निःशुल्क सहायक उपकरण प्रदान किए जा चुके हैं।       ​इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष, कलेक्टर, नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जैन, जनपद अध्यक्ष सुलोचना यादव, भारत स्काउट एवं गाइड के राज्य उपाध्यक्ष विजय केशरवानी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष पवन साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, नगरवासी और बड़ी संख्या में दिव्यांगजन उपस्थित रहे।

राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से की भेंट

रायपुर छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य और राजभाषा के विकास को समर्पित दो दिवसीय प्रांतीय राजभाषा सम्मेलन का आयोजन 26 एवं 27 सितंबर को जिला बेमेतरा में किया जाएगा। सम्मेलन में प्रदेशभर के साहित्यकारों, विद्वानों, भाषा विशेषज्ञों और राजभाषा से जुड़े प्रतिनिधियों की सहभागिता होगी। सम्मेलन के माध्यम से छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ प्रदेश की समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष एवं राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त  प्रभात मिश्रा ने आज मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से सौजन्य भेंट की। उन्होंने मुख्यमंत्री  साय को बेमेतरा में आयोजित होने वाले प्रांतीय राजभाषा सम्मेलन में शामिल होने के लिए सादर आमंत्रित किया। इस दौरान  मिश्रा ने सम्मेलन के उद्देश्यों, आयोजन की तैयारियों और कार्यक्रम की रूपरेखा से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रांतीय राजभाषा सम्मेलन के आयोजन के लिए  प्रभात मिश्रा एवं छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सम्मेलन की सफलता के लिए अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए आयोजन के सफल एवं गरिमामय आयोजन की कामना की। भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण पर होगा संवाद बेमेतरा में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य से जुड़े रचनाकारों, साहित्यकारों तथा विद्वानों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। सम्मेलन में छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन, साहित्य के विकास, राजभाषा के प्रभावी उपयोग तथा नई पीढ़ी में छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने जैसे विषयों पर संवाद और विचार-विमर्श होगा। साथ ही प्रदेश की लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जुड़े विषयों पर भी विचार साझा किए जाएंगे। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को मिलेगा विस्तार छत्तीसगढ़ी भाषा प्रदेश की लोक संस्कृति, परंपराओं, लोकगीतों, लोककथाओं और जनजीवन की अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य को नई पीढ़ी से जोड़ने तथा इसके व्यापक प्रचार-प्रसार को गति देने का अवसर मिलता है। सम्मेलन में छत्तीसगढ़ की माटी, भाषा और संस्कृति की विशिष्ट पहचान को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में भी विचार-विमर्श किया जाएगा। प्रदेशभर से साहित्यकार और भाषा प्रेमी होंगे शामिल दो दिवसीय प्रांतीय राजभाषा सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से साहित्यकार, लेखक, कवि, विद्वान, भाषा प्रेमी और राजभाषा से जुड़े प्रतिनिधि शामिल होंगे। सम्मेलन के माध्यम से छत्तीसगढ़ी भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में कार्य कर रहे रचनाकारों और संस्थाओं के बीच संवाद एवं समन्वय को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा आयोजित यह सम्मेलन भाषा और साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय लोगों के लिए विचारों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। सम्मेलन के माध्यम से छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े प्रयासों को नई दिशा और गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही प्रदेश की माटी, भाषा और संस्कृति के गौरव को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक सहभागिता को प्रोत्साहन मिलेगा।

बारिश-बाढ़ से बिगड़े हालात: छत्तीसगढ़ के 7 जिलों में स्कूल बंद, 300+ गांवों का संपर्क कटा

जगदलपुर बंगाल की खाड़ी में बने गहरे अवदाब के प्रभाव से पिछले तीन दिनों से बस्तर संभाग में त्राहि-त्राहि मच गई है। इंद्रावती, शबरी सहित सभी नदियां उफान पर हैं और खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। पड़ोसी राज्य ओडिशा में इंद्रावती नदी स्थित खातीगुड़ा और इसकी सहायक नदी मुरान के बांध के गेट खोलने से स्थिति बिगड़ गई है। तीन सौ से अधिक गांव बाढ़ से घिरकर टापू बन गए हैं। नगरनार क्षेत्र के भेजापदर, तोकापाल के घाट धनोरा आदि एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ में फंसे ग्रामीणों को एसडीआरएफ की टीम द्वारा रेस्क्यू कर सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में भेजा गया है। प्रारंभिक सूचना के अनुसार सौ से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। रेल, सड़क और हवाई यातायात बुरी तरह ठप राष्ट्रीय राजमार्ग-30 रायपुर-कोटा और राष्ट्रीय राजमार्ग-63 जगदलपुर-बीजापुर-भोपालपटनम कई जगहों पर बाधित हो गया है। किरंदुल-कोत्तावालसा रेललाइन कोरापुट रेलखंड में चार जगहों पर भू-स्खलन के कारण क्षतिग्रस्त हो गई है। इससे ट्रेनें बंद हो गई हैं। सड़क परिवहन पहले से ही बाधित है। हैदराबाद-जगदलपुर-रायपुर फ्लाइट दो दिनों से बंद है। रेलमार्ग बहाल होने में तीन से चार दिन का समय लग सकता है। सभी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। 50 से अधिक राहत शिविर, संभाग के सभी जिलों में छुट्टी घोषित बाढ़ आपदा को देखते हुए संभाग के सभी सातों जिलों में शुक्रवार को छुट्टी कर दी गई। दक्षिण में कोंटा नगर से लेकर यहां जगदलपुर में निचली बस्तियों में पानी भरने से कई मकान डूब गए हैं। सभी जिलों में प्रशासन द्वारा युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया है। संभाग में 50 से अधिक राहत शिविर बनाए गए हैं। सर्वाधिक नुकसान सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिले में देखा जा रहा है। सांसद महेश कश्यप बाढ़ प्रभावित टापू बने गांव भेजापदर अधिकारियों के साथ स्वयं मोटरबोट से पहुंचे थे।  

पीडब्लूडी तैयार लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माणाधीन और अप्रारंभ कार्यों को द्रुत गति से शुरू करने तैयारियों की समीक्षा की

रायपुर लोक निर्माण विभाग बरसात के बाद सडकों, पुल-पुलियों और भवनों के निर्माण को रफ्तार देने की तैयारी में है। लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल ने आज वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों और सभी परिक्षेत्रों के मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण अभियंताओं एवं कार्यपालन अभियंताओं की बैठक लेकर फील्ड में कार्यों को गति देने की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने ठेकेदारों के साथ भी बैठक कर निर्माण सामग्री, मशीनरी और मानव संसाधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने नवा रायपुर स्थित निर्माण भवन में आयोजित बैठक में अक्टूबर से निर्माणाधीन कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने और अप्रारंभ कामों को शुरू कराने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को कार्यस्थलों की समस्याओं का तत्परता से निराकरण कर ठेकेदारों को बाधामुक्त कार्यस्थल उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों से नियमित संवाद और अच्छा समन्वय रखते हुए टाइमलाइन के अनुसार कार्यों की प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने को कहा।  बंसल ने सभी कार्यपालन अभियंताओं को हर दो महीने में अनुविभागीय अधिकारियों, सहायक अभियंताओं, उप अभियंताओं और ठेकेदारों के साथ बैठक कर प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभाग के सिविल और विद्युत-यांत्रिकी शाखा के अभियंताओं को आपसी तालमेल से काम करने को कहा। दोनों शाखाओं के बीच समन्वय की कमी से कार्यों की प्रगति प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने एनआईटी तैयार करते समय कार्य पूरा करने की अवधि को व्यावहारिक रखने के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे कार्यों का मूल्याकंन कर हर महीने भुगतान करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के सचिव  बंसल ने ठेकेदारों के साथ भी बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने निर्माण कार्यों में तेजी लाने और विभिन्न प्रक्रियाओं में लगने वाले समय को कम करने विभागीय दिशा-निर्देशों, भुगतान प्रक्रिया, समय-सीमा निर्धारण और ठेकेदारों से जुड़े नीतिगत विषयों पर सुझाव भी मांगे। विभागीय सचिव ने कहा कि लोक निर्माण विभाग के कार्यों में ठेकेदारों की अहम भूमिका है। उन्होंने ठेकेदारों को 1 अक्टूबर से शुरू हो रहे नए टेंडर सिस्टम में नामांकन कराने और इसके लिए विभाग द्वारा दिए जा रहे प्रशिक्षण में भाग लेने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों को अपने पास उपलब्ध संसाधनों और क्षमता के अनुसार काम लेने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे कार्यों की गति बढ़ाने और गुणवत्ता पर भी जोर दिया। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी, अपर सचिव  एस.एन. वास्तव और सीजीआरआईडीसी के अतिरिक्त प्रबंध संचालक  शशांक पाण्डेय भी बैठक में मौजूद थे।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने 25 वरिष्ठजनों को वितरित किए वस्त्र एवं फल, आत्मीय संवाद कर जाना कुशलक्षेम

रायपुर सेवा संकल्प अभियान के तहत सेवा, संवेदना और जनभागीदारी की भावना को आगे बढ़ाते हुए अजीरमा, अंबिकापुर स्थित आस्था निकुंज वृद्धाश्रम में वरिष्ठजनों के सम्मान एवं सेवा का कार्यक्रम आयोजित किया गया। समाज कल्याण विभाग से अनुदान सहायता प्राप्त स्वसहायता समूह रॉबर्ट कानन बाला स्मृति सेवा संस्थान द्वारा वर्ष 1993 से संचालित इस वृद्धाश्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल तथा नगरपालिक निगम महापौर मती मंजूषा भगत ने 25 वरिष्ठजनों को वस्त्र एवं फल वितरित किए। वरिष्ठजनों से आत्मीय संवाद, जाना कुशलक्षेम कार्यक्रम के दौरान मंत्री  राजेश अग्रवाल ने वृद्धाश्रम में निवासरत वरिष्ठजनों से आत्मीयता के साथ संवाद किया और उनके स्वास्थ्य एवं कुशलक्षेम की जानकारी ली। उन्होंने अपने हाथों से वरिष्ठजनों को वस्त्र एवं फल प्रदान किए तथा उनके साथ समय बिताकर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि वरिष्ठजन हमारे मार्गदर्शक और पथप्रदर्शक हैं। उनके जीवन का अनुभव, संघर्ष और जीवन मूल्य समाज तथा नई पीढ़ी के लिए अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठजनों का सम्मान, उनकी सेवा और उनके साथ आत्मीयता से समय बिताना केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारी मानवीय और नैतिक जिम्मेदारी भी है। सेवा संकल्प अभियान सेवा और संवेदना को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान का उद्देश्य सेवा और संवेदना की भावना को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना तथा जनभागीदारी के माध्यम से जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। अभियान के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में सेवा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सेवा का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होता है, जब उसमें अपनत्व और संवेदना जुड़ी हो। समाज के वरिष्ठजनों के साथ समय बिताना, उनकी आवश्यकताओं को समझना और उन्हें सम्मान देना भी सेवा का महत्वपूर्ण स्वरूप है। ऐसे कार्यक्रम समाज में पारस्परिक सहयोग, सम्मान और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करते हैं। वस्त्र एवं फल वितरण से बढ़ी आत्मीयता सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठजनों के लिए वस्त्र दान किया गया। मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि वरिष्ठजनों को अपने हाथों से वस्त्र प्रदान करते हुए मन भावुक हो गया। उनके साथ कुछ पल बिताना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना आत्मीय अनुभव रहा। वरिष्ठजनों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें फल भी वितरित किए गए। इस दौरान वृद्धाश्रम में मौजूद वरिष्ठजनों के चेहरों पर मुस्कान दिखाई दी और उनके स्नेह ने पूरे वातावरण को भावनात्मक एवं आत्मीय बना दिया। सेवा कार्यों में जनभागीदारी का आह्वान मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार सेवा कार्यों में योगदान देना चाहिए। छोटे-छोटे सेवा कार्य भी किसी के जीवन में बड़ी खुशी ला सकते हैं। उन्होंने युवाओं और सामाजिक संगठनों से भी वरिष्ठजनों, जरूरतमंदों और समाज के वंचित वर्गों की सहायता के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प अभियान केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में सेवा, सहयोग और संवेदना की भावना को निरंतर मजबूत करने का संकल्प है। सामूहिक प्रयासों से ही ऐसे अभियान व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप ले सकते हैं। आस्था निकुंज वृद्धाश्रम में लंबे समय से मिल रहा आश्रय और सहयोग अजीरमा स्थित आस्था निकुंज वृद्धाश्रम का संचालन रॉबर्ट कानन बाला स्मृति सेवा संस्थान द्वारा वर्ष 1993 से किया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग से अनुदान सहायता प्राप्त इस संस्था के माध्यम से वरिष्ठजनों को आश्रय एवं आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम ने वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान, अपनत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को और मजबूत किया। इस अवसर पर कलेक्टर  अजीत वसंत, जिला पंचायत सीईओ मती रोमा वास्तव, उपसंचालक समाज कल्याण, आश्रम के प्रबंधक सहित जिले के अधिकारी-कर्मचारी एवं जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

पीडीएस के तहत सितंबर माह के खाद्यान्न का भंडारण पूर्ण, वितरण जारी

पीडीएस के तहत सितंबर माह के खाद्यान्न का भंडारण पूर्ण, वितरण जारी 24 सितंबर तक लगभग 60 लाख राशनकार्डधारियों ने लगभग 19.58 लाख  क्विंटल चावल का किया उठाव रायपुर,  सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत राज्य में सितंबर एवं अक्टूबर 2026 माह के लिए खाद्यान्न का आबंटन 14,186 उचित मूल्य दुकानों को जारी किया गया है। सितंबर माह के लिए आबंटित खाद्यान्न का सभी उचित मूल्य दुकानों में भंडारण पूर्ण हो चुका है तथा राशनकार्डधारियों को खाद्यान्न वितरण की कार्यवाही निरंतर जारी है। 24 सितंबर 2026 तक राज्य में लगभग 60 लाख राशनकार्डधारियों द्वारा सितंबर माह के खाद्यान्न का उठाव किया जा चुका है। इस दौरान कुल 19 लाख 57 हजार 880 क्विंटल चावल का उठाव हुआ है। शेष राशनकार्डधारियों को भी निर्धारित पात्रता के अनुसार खाद्यान्न का वितरण उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से किया जा रहा है। राज्य के सभी जिलों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत खाद्यान्न वितरण का कार्य प्रचलित है। राज्य शासन द्वारा खाद्यान्न के भंडारण एवं वितरण की नियमित निगरानी और मानिटरिंग की जा रही है, ताकि पात्र राशनकार्डधारियों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न समय पर उपलब्ध कराया जा सके। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सुचारू संचालन तथा राशनकार्डधारियों को खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक निगरानी बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

भू-अर्जन मुआवजे का ऑनलाइन भुगतान बना किसानों के लिए बड़ी सहूलियत

भू-अर्जन मुआवजे का ऑनलाइन भुगतान बना किसानों के लिए बड़ी सहूलियत एक साल में 901 किसानों के खातों में डीबीटी से पहुंचे 30.34 करोड़ रुपये चेक और बैंक के चक्कर से मिली राहत, मुआवजा, पुनर्वास और बोनस की राशि सीधे खाते में रायपुर,  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में राज्य शासन द्वारा सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए शासकीय सेवाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लगातार सरल बनाया जा रहा है। इसी दिशा में रायगढ़ जिले में भू-अर्जन से प्रभावित किसानों को मुआवजा, पुनर्वास एवं बोनस की राशि सीधे उनके बैंक खातों में ऑनलाइन अंतरित करने की व्यवस्था किसानों के लिए बड़ी सहूलियत साबित हो रही है। बीते एक वर्ष में रायगढ़ अनुविभाग के 901 किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 30 करोड़ 34 लाख 77 हजार 902 रुपये अंतरित किए जा चुके हैं।  रायगढ़ अनुविभाग में 26 सितम्बर 2025 से भू-अर्जन से संबंधित भुगतान ऑनलाइन करने की व्यवस्था लागू की गई। इसके बाद किसानों को चेक जारी करने के स्थान पर स्वीकृत राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है। 21 सितम्बर 2026 तक इस व्यवस्था के माध्यम से 901 किसानों को 30 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भू-अर्जन मुआवजे के रूप में 391 किसानों के खातों में 20 करोड़ 67 लाख 53 हजार 163 रुपये अंतरित किए गए हैं। इसी तरह पुनर्वास एवं बोनस के तहत 510 किसानों को 9 करोड़ 67 लाख 24 हजार 739 रुपये का भुगतान किया गया है। इस प्रकार दोनों मदों में कुल 901 किसानों को 30 करोड़ 34 लाख 77 हजार 902 रुपये सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त हुए हैं। चेक से सीधे खाते तक, आसान हुई भुगतान प्रक्रिया पूर्व में भू-अर्जन से प्रभावित किसानों को मुआवजा राशि का भुगतान चेक के माध्यम से किया जाता था। चेक प्राप्त करने के बाद किसानों को उसे बैंक में जमा कराने और भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ता था। कई बार इसके लिए कार्यालय और बैंक के चक्कर भी लगाने पड़ते थे। ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों को इस प्रक्रिया से राहत मिली है। अब स्वीकृत मुआवजा, पुनर्वास एवं बोनस की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में पहुंच रही है। इससे किसानों के समय और श्रम की बचत होने के साथ भुगतान प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी हुई है। किसानों ने कहा—बिना परेशानी सीधे खाते में मिल रही राशि ग्राम कोतासुरा के किसान श्री टंकधर मालाकार ने बताया कि भू-अर्जन मुआवजा वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था किसानों के लिए काफी सुविधाजनक है। पहले की तुलना में अब मुआवजा राशि आसानी से प्राप्त हो रही है। ग्राम दनौट की श्रीमती चम्पाबाई अगरिया ने कहा कि ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था से किसानों को काफी लाभ मिला है। अब बिना किसी परेशानी के मुआवजे की राशि सीधे बैंक खाते में प्राप्त हो रही है। ग्राम मुरालीपाली के श्री हनुमान प्रसाद शर्मा ने बताया कि पहले भू-अर्जन की राशि प्राप्त करने के लिए चेक मिलने के बाद बैंक जाना पड़ता था। अब मुआवजा एवं पुनर्वास की राशि सीधे बैंक खाते में जमा हो रही है, जिससे किसानों को काफी सुविधा मिली है। भू-अर्जन मुआवजे की ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था ने किसानों के लिए पूरी प्रक्रिया को सरल बनाया है। डीबीटी के माध्यम से राशि सीधे बैंक खातों में पहुंचने से एक ओर किसानों को कार्यालय और बैंक के अनावश्यक चक्कर से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता और सुविधा भी बढ़ी है।