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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान, बाढ़ में फंसे दर्जनों लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू

रायपुर  बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुए चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से बस्तर संभाग में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई है। बुधवार से जारी भारी बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं और कई प्रमुख संपर्क मार्गों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर बस्तर जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल पूरी मुस्तैदी के साथ राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है, जहां उनके भोजन, ठहरने, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। बस्तर कलेक्टर  आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। नगरनार क्षेत्र के नदी बोड़ना में बाढ़ के पानी में फंसे लगभग 40 लोगों को बचाव दल ने नावों की सहायता से सुरक्षित बाहर निकालकर ग्राम पंचायत भवन में बनाए गए अस्थायी राहत शिविर में पहुंचाया। इसी तरह तोकापाल के घाट धनोरा से 25 परिवारों को सुरक्षित निकाला गया है। ग्राम पलवा और लोहंडीगुड़ा के भेजा क्षेत्र के निचले रिहायशी इलाकों में पानी भरने के बाद प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों और पंचायत भवनों में स्थानांतरित किया गया है। 9 राहत शिविरों में 350 से अधिक प्रभावितों को सुरक्षित आश्रय बाढ़ प्रभावितों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए बस्तर जिले में कुल 9 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें अब तक 350 से अधिक लोगों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया गया है। बाढ़ का सर्वाधिक असर जगदलपुर शहर में देखने को मिला है, जहां स्थापित चार राहत शिविरों में 175 लोगों को ठहराया गया है। अकेले शहीद भगत सिंह स्कूल में 100 से अधिक प्रभावितों के भोजन और ठहरने की व्यवस्था की गई है।  इसी प्रकार जगदलपुर तहसील के नगरनार क्षेत्र अंतर्गत नदी बोड़ना राहत शिविर में लगभग 40 लोग ठहरे हुए हैं। बस्तर तहसील के भैंसगांव शिविर में 77, बकावंड विकासखंड के बेलगांव राहत केंद्र में 35 तथा लोहंडीगुड़ा के ग्राम पंचायत भेजा में बनाए गए राहत शिविर में 26 प्रभावितों को सुरक्षित आश्रय दिया गया है। प्रशासन द्वारा सभी राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए भोजन, पेयजल, ठहरने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं सहित जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने प्रभावित क्षेत्रों का किया सघन निरीक्षण बाढ़ की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर  आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक  शलभ सिन्हा ने सुबह स्वयं प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों का भ्रमण कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। दोनों अधिकारियों ने जगदलपुर शहर के गंगामुंडा पारा, महादेव घाट, खड़कघाट, मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल डिमरापाल के नजदीकी क्षेत्र तथा नगरनार-भेजापदर मार्ग पर नदी बोड़ना सहित विभिन्न जलभराव वाले स्थलों का स्थलीय निरीक्षण किया।      इस दौरान अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी स्थिति की जानकारी ली और राहत शिविरों में उपलब्ध व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने प्रभावितों के लिए भोजन, पेयजल, सुरक्षित ठहरने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। साथ ही मैदानी अमले को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने के निर्देश दिए। इंद्रावती नदी का बढ़ा जलस्तर, बांधों के गेट खुलने से निचले इलाकों में सतर्कता        लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने से तटीय और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। सुरक्षा मानकों के तहत ओडिशा में इंद्रावती नदी पर बने खातीगुड़ा बांध के तीन तथा मुरान बांध के दो गेट खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है। इसके चलते प्रशासन ने नदी के आसपास बसे गांवों और निचले इलाकों में सतर्कता एवं निगरानी बढ़ा दी है।      मन्धोता और बकावंड के बेलगांव सहित चारों ओर से पानी से घिरे क्षेत्रों में बचाव दल नावों एवं आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात हैं। प्रशासनिक अधिकारी कंट्रोल रूम, फोन नेटवर्क और मैदानी अमले के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की लगातार जानकारी प्राप्त कर रहे हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त राहत शिविर स्थापित करने और राहत सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी भी रखी गई है। प्रशासन की अपील, उफनते नदी-नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार न करें जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए पूरी सतर्कता बरतें। किसी भी प्रकार की अफवाह पर भरोसा न करें तथा उफनते नदी-नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार करने का जोखिम न उठाएं। आपात स्थिति में बाढ़ आपदा नियंत्रण कक्ष अथवा संबंधित क्षेत्र के राजस्व अधिकारियों से संपर्क कर तत्काल सूचना दें।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन दल आपसी समन्वय के साथ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार राहत एवं बचाव कार्य संचालित कर रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की है।

सरगांव में खुलेगा ट्रॉमा सेंटर, मदकू द्वीप में बनेगा इको टूरिज्म सेंटर

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज मुंगेली जिले के ग्राम मदकू में 68 करोड़ 96 लाख 96 हजार रुपये की लागत के 21 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास कर क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात दी। इस अवसर पर उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, बिजली, खेल और जनसुविधाओं के विस्तार से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। मुख्यमंत्री  साय ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित ‘आंगन मिलन सेवा, रक्तदान एवं नि:शुल्क मेगा स्वास्थ्य शिविर’ में भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि विकास की गति तेज हो और जनसेवा की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित हो। गांवों में अच्छी सड़कें हों, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों, माताओं और बच्चों को पर्याप्त पोषण मिले और गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों तक शासन की प्रत्येक योजना का लाभ सहजता से पहुंचे। इसी सोच के साथ हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को शासन के केंद्र में रखा है। उनके नेतृत्व में पिछले वर्षों में देश में विकास के साथ जनकल्याण का एक नया अध्याय लिखा गया है। छत्तीसगढ़ में भी हमारी सरकार प्रधानमंत्री जी की इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जनसेवा के संकल्प को जनभागीदारी से और मजबूत करने का माध्यम है। इसके माध्यम से स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और जनकल्याण की योजनाओं को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के साथ समाज में सेवा और सहयोग की भावना को भी विस्तार मिल रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ है कि नागरिक को अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए भटकना न पड़े, उसकी समस्या का समय पर समाधान हो और शासन की योजनाओं का लाभ उसे आसानी से मिले। इसी उद्देश्य से सरकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बना रही है। ई-ऑफिस, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और अटल डिजिटल सेवा केंद्रों जैसी पहलों के माध्यम से शासन को नागरिकों के और करीब लाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों के जीवन में बदलाव लाने का काम हो रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से गरीब परिवारों के पक्के घर का सपना साकार हो रहा है। हमारा स्पष्ट प्रयास है कि पात्रता रखने वाला कोई भी परिवार जानकारी या प्रक्रिया के अभाव में किसी योजना के लाभ से वंचित न रहे। स्वस्थ माता और सुपोषित बच्चा मजबूत समाज की नींव आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र हमारे बच्चों के पोषण और माताओं के स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। बच्चों के जीवन के शुरुआती वर्ष उनके संपूर्ण विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए उनके पोषण, स्वास्थ्य, टीकाकरण और प्रारंभिक देखभाल पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आंगन मिलन के माध्यम से परिवार, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और स्वास्थ्यकर्मी एक साथ बैठकर बच्चों के पोषण, गर्भवती माताओं की देखभाल, एनीमिया, टीकाकरण और स्वच्छता जैसे विषयों पर संवाद कर रहे हैं। यह पहल स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री ने मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की सराहना करते हुए कहा कि दूरस्थ गांवों तक स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं को पहुंचाने में इनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इनकी सेवा और समर्पण के कारण शासन की अनेक योजनाएं घर-घर तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि माताओं-बहनों का सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 68 लाख माताओं-बहनों के खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता सीधे पहुंच रही है। यह राशि महिलाओं को अपनी और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। समय पर जांच कराएं, अपने स्वास्थ्य को भी दें प्राथमिकता मुख्यमंत्री  साय ने मेगा स्वास्थ्य शिविर में उपस्थित नागरिकों से स्वास्थ्य जांच की सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि रक्तचाप, मधुमेह, एनीमिया सहित अनेक बीमारियों की समय रहते पहचान हो जाए तो उनका उपचार अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने माताओं-बहनों से विशेष रूप से आग्रह किया कि परिवार की देखभाल के साथ अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। स्वस्थ माता ही स्वस्थ परिवार की आधारशिला है और स्वस्थ परिवारों से ही स्वस्थ एवं सशक्त छत्तीसगढ़ का निर्माण होगा। रक्तदान करने वाले सेवाभावियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्तदान मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है। हमारे द्वारा दिया गया रक्त किसी अनजान जरूरतमंद को नया जीवन दे सकता है। समाज के लिए आगे बढ़कर रक्तदान करने वाले युवा और सभी सेवाभावी अभिनंदन के पात्र हैं। मदकू की विरासत को विकास और पर्यटन से जोड़ेंगे मुख्यमंत्री  साय ने मदकू द्वीप के ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत हमारी पहचान और हमारा गौरव है। इसका संरक्षण करने के साथ इसे नई पीढ़ी से जोड़ना भी हमारी जिम्मेदारी है। मदकू द्वीप में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार से इसकी विशिष्ट पहचान को और मजबूती मिलेगी तथा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी विकसित होंगे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। मदकू द्वीप जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को संरक्षित करते हुए यहां आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाएगा, ताकि प्रदेश और देश के अधिक से अधिक लोग छत्तीसगढ़ की इस समृद्ध धरोहर से परिचित हो सकें। स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और जनसुविधाओं के लिए मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण घोषणाएं मुख्यमंत्री  साय ने सरगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ट्रॉमा सेंटर प्रारंभ करने तथा पिपर डोल और लमती की प्राथमिक शालाओं को मिडिल स्कूल में उन्नत करने की घोषणा की। उन्होंने ताला महोत्सव और मदकू द्वीप उत्सव के आयोजन के लिए 15-15 लाख रुपये तथा पथरिया के अवंती बाई लोधी कॉलेज में रानी अवंती बाई लोधी की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने के लिए 25 लाख रुपये देने की घोषणा की। … Read more

धमतरी में फ्लैटेड फैक्टरी और राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 बनेगा

रायपुर मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के अंतर्गत परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की उच्च स्तरीय बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और निवेश को बढ़ावा देने धमतरी जिले के ग्राम कचना में प्लग एंड प्ले फ्लैटेड फैक्टरी कॉम्प्लेक्स के निर्माण हेतु प्रस्तावित स्थल एवं लागत और शासकीय भूमि पर फैक्टरी बिल्डिंग के निर्माण के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अंतर्गत भू-तल और मंजिला बहुमंजिला इमारतों में कुल 43,200 वर्गमीटर में निर्माण किया जाएगा। इसमें कुल 96 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाना प्रस्तावित है। यह स्थल राजधानी रायपुर से करीब 32 किमी और धमतरी जिला मुख्यालय से 41 किमी की दूरी पर पुराना धमतरी रोड से एक किलोमीटर अंदर स्थित है। इस कॉम्प्लेक्स में विद्युत, जल आपूर्ति, सड़क, सीवरेज एवं साझा जनसुविधाएं पहले से तैयार मिलेगा। इससे उद्योगपति सीधे मशीनरी स्थापित कर तुरंत उत्पादन शुरू कर सकेंगे, जिससे समय व पूंजी की बचत होगी और इज ऑफ डूइंग बिजनेस को बल मिलेगा।  बैठक में परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति का बैठक में राजनांदगांव जिले के तहसील-घुमका अंतर्गत ग्राम पटेवा में नवीन इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 की स्थापना हेतु 469 करोड़ 61़ लाख रूपए की अधोसंरचना निर्माण योजना को मंजूरी दी गई। इसमें केंद्रांश 210 करोड़ 56 लाख रूपए तथा राज्यांश 259 करोड़ 05 लाख रूपए शामिल है। इस परियोजना का प्रस्ताव भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की 12वीं प्रोजेक्ट रिव्यू कमेटी द्वारा स्वीकृत किया जा चुका है।  यह क्लस्टर कुल 306.56 एकड़ भूमि में फैला होगा, जिसमें से 150.56 एकड़ में औद्योगिक भू-खण्ड विकसित किए जाएंगे। क्लस्टर में 04 प्रमुख एंकर यूनिट्स की स्थापना भी प्रस्तावित है।    प्रस्तावित अधोसंरचनाएं में 04 नग बहुमंजिला फ्लैटेड फैक्टरी भवनों का निर्माण होगा। इनमें प्रशासनिक भवन, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स तथा कॉमन फैसिलिटी सेंटर होगा। कर्मचारियों हेतु 250 बेड क्षमता वाला हॉस्टल भवन, विद्युत अधोसंरचना के तहत 05 एमवीए क्षमता विद्युत सब-स्टेशन और सोलर स्ट्रीट लाइट और 11केव्ही एचटी लाइन नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव  मनोज कुमार पिंगुआ, लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल, इलेक्टॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग तथा आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव  अंकित आनंद, आदिम जाति विकास विभाग के सचिव  भूवनेश यादव, ऊर्जा विभाग के सचिव  सारांश मित्तर सहित वाणिज्य एवं उद्योग विभाग, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, वित्त, योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी एवं अन्य विभाग के अधिकारी शामिल हुए।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को दिलाई पद एवं गोपनीयता की शपथ

रायपुर छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक कलाकार कल्याण संघ के शपथ ग्रहण समारोह में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों एवं सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर उन्होंने लोक कलाकारों की सुविधाओं और उनकी कला को आगे बढ़ाने के लिए स्टूडियो निर्माण के संबंध में आश्वासन भी दिया। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध लोक कला, संस्कृति और परंपराओं से है। लोक कलाकार अपनी प्रतिभा और कला के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कलाकारों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि लोक कला को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए कलाकारों को बेहतर अवसर और सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कलाकारों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कलाकारों के लिए स्टूडियो निर्माण की दिशा में आवश्यक सहयोग और पहल का आश्वासन दिया। स्टूडियो उपलब्ध होने से कलाकारों को अपनी कला के अभ्यास, प्रशिक्षण, रिकॉर्डिंग और प्रस्तुतियों की तैयारी के लिए बेहतर सुविधा मिल सकेगी।  इस दौरान संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने तथा छत्तीसगढ़ की लोक कला एवं संस्कृति को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी,  मनीराम साहू, संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी, बड़ी संख्या में लोक कलाकार और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

केसकोड़ी में बना पहला बालिका शौचालय, बेटियों को मिली सुविधा

नक्सल मुक्त केसकोड़ी में वीबी-जीरामजी योजना से बना पहला बालिका शौचालय ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के तहत बेटियों को मिली स्वच्छता और सम्मान की सुविधा रायपुर कांकेर जिले के जनपद पंचायत कोयलीबेड़ा के नक्सल मुक्त ग्राम पंचायत केसकोड़ी में अब विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। कभी नक्सल समस्या से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में अब शिक्षा, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत केसकोड़ी में पहला बालिका शौचालय निर्मित किया गया है। यह निर्माण बेटियों की गरिमा, स्वच्छता और विद्यालयों में सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।        मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है। कांकेर जिले की नक्सल मुक्त पंचायत केसकोड़ी में निर्मित बालिका शौचालय इस अभियान को धरातल पर उतारने का उदाहरण है। इससे विद्यालय में अध्ययनरत बालिकाओं को स्वच्छता संबंधी आवश्यक सुविधा उपलब्ध होगी।       उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 6 अगस्त 2026 को ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान का शुभारंभ किया था। यह विशेष अभियान 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में 286.85 करोड़ रुपए की लागत से 6,671 बालिका शौचालयों का निर्माण किया जाना है। प्रत्येक शौचालय के निर्माण के लिए 4 लाख 30 हजार रुपए की राशि निर्धारित की गई है।         उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान का उद्देश्य गांव की हर बेटी को विद्यालय में सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में बालिकाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के किसी भी गांव की बेटी को ऐसी समस्या का सामना न करना पड़े। कांकेर जिले की नक्सल मुक्त पंचायत केसकोड़ी में वीबी-जी राम जी योजना से निर्मित पहला बालिका शौचालय इसी संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में कभी नक्सल समस्या के कारण विकास की गति प्रभावित रही, वहां आज बेटियों की शिक्षा, स्वच्छता और सम्मान के लिए कार्य हो रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि 26 जनवरी 2027 तक प्रदेश के सभी शासकीय विद्यालयों में 6,671 बालिका शौचालयों का निर्माण पूरा हो, ताकि हमारी बेटियां बिना किसी असुविधा के आत्मविश्वास के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।       वीबी- जीरामजी के अंतर्गत अब 375 प्रकार के विकास कार्य अनुमेय हैं। इनमें जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका संवर्धन तथा आपदा प्रबंधन से संबंधित कार्य शामिल हैं। इन कार्यों का चयन ग्राम पंचायत एवं ग्राम सभा के अनुमोदन से किया जाएगा, जिससे ग्रामीणों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता मिल सके। इसके साथ ही पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी भी प्राप्त होगी।

बिहान से प्रमिला ने लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी, खेती के साथ सिलाई और मुर्गी पालन बना आय का मजबूत आधार

सेवा की कहानी बिहान से प्रमिला ने लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी, खेती के साथ सिलाई और मुर्गी पालन बना आय का मजबूत आधार स्व-सहायता समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर बढ़ाए आजीविका के साधन गन्ना, मक्का और सब्जी उत्पादन से सालाना करीब 2 लाख रुपये की आय, सिलाई और मुर्गी पालन से 50 हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त आमदनी रायपुर  ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर गांव की महिलाएं अब आजीविका के एक नहीं, बल्कि अनेक साधन अपनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही हैं। सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड की ग्राम पंचायत सिलमा निवासी प्रमिला सिंह ने भी स्व-सहायता समूह से मिले ऋण, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन का लाभ उठाकर खेती के साथ सिलाई और मुर्गी पालन को अपनी आजीविका का आधार बनाया है। अलग-अलग गतिविधियों से हो रही आमदनी ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ाया है। फूल स्व-सहायता समूह से जुड़कर शुरू हुआ बदलाव का सफर प्रमिला सिंह वर्ष 2012 में फूल स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अन्य सदस्यों के माध्यम से शासकीय योजनाओं और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली। आजीविका बढ़ाने के लिए उन्होंने समूह के माध्यम से 50 हजार रुपये का ऋण लिया और खेती के काम को आगे बढ़ाया। दो एकड़ में विविध फसलों की खेती से बढ़ी आमदनी प्रमिला ने एक एकड़ भूमि में गन्ने की खेती तथा एक एकड़ में सब्जी, मक्का और सूरजमुखी की खेती शुरू की। मेहनत और बेहतर कृषि प्रबंधन का परिणाम उन्हें अच्छी आमदनी के रूप में मिला। प्रमिला के अनुसार गन्ने के उत्पादन से उन्हें लगभग एक लाख रुपये तथा मक्का एवं सब्जी उत्पादन से करीब एक लाख रुपये की वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। सिलाई और मुर्गी पालन ने दिया अतिरिक्त आय का सहारा प्रमिला ने अपनी आजीविका को केवल खेती तक सीमित नहीं रखा। स्व-सहायता समूह के माध्यम से सिलाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने सिलाई कार्य भी शुरू किया। इसके साथ ही मुर्गी पालन को भी अतिरिक्त आय के साधन के रूप में अपनाया। सिलाई और मुर्गी पालन से उन्हें प्रतिवर्ष 50 हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त आमदनी हो रही है। आमदनी बढ़ी तो मजबूत हुआ आत्मविश्वास खेती, सिलाई और मुर्गी पालन जैसी विभिन्न आजीविका गतिविधियों से होने वाली आय ने प्रमिला के परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती दी है। प्रमिला बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण, ऋण और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली। इससे वे अपनी आजीविका के साधनों को बढ़ा सकीं और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर करने में सफल हुईं। दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा सेवा संकल्प अभियान के तहत प्रमिला सिंह की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि स्व-सहायता समूह से मिलने वाला आर्थिक सहयोग, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन महिलाओं के जीवन में किस तरह बदलाव ला सकता है। बिहान से जुड़कर खेती के साथ आय के दूसरे साधन विकसित करने वाली प्रमिला आज अपने परिवार को आर्थिक संबल देने के साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की राह दिखा रही हैं।

मुख्यमंत्री साय ने मदकूद्वीप में समाजसेवी स्वर्गीय शांताराम को अर्पित किए श्रद्धासुमन

रायपुर   मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड स्थित ऐतिहासिक, पुरातात्विक एवं आध्यात्मिक महत्व के हरिहर क्षेत्र केदार मदकूद्वीप पहुंचे। मुख्यमंत्री  साय मदकूद्वीप की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले समाजसेवी स्वर्गीय  शांताराम के वार्षिक श्राद्ध कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने स्वर्गीय  शांताराम की स्मृति को चिरस्थायी बनाए रखने के उद्देश्य से निर्मित उद्यान का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि यह उद्यान केवल उनकी स्मृतियों को संजोने का स्थान नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उनके सेवाभाव, सामाजिक सरोकारों और अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति समर्पण से परिचित कराने का माध्यम भी बनेगा। मुख्यमंत्री  साय ने स्वर्गीय  शांताराम के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि मदकूद्वीप हमारी समृद्ध पुरातात्विक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। इस धरोहर के संरक्षण और इसके महत्व को पुनः प्रतिष्ठित करने में स्वर्गीय  शांताराम ने अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने निःस्वार्थ भाव से इस क्षेत्र की सेवा की और मदकूद्वीप के ऐतिहासिक तथा आध्यात्मिक महत्व को व्यापक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी क्षेत्र की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति, परंपराओं, इतिहास और उन लोगों से बनती है, जो इन धरोहरों को सहेजने के लिए अपना जीवन लगा देते हैं। स्वर्गीय  शांताराम ऐसे ही व्यक्तित्व थे। उनके प्रयासों के कारण मदकूद्वीप आज श्रद्धालुओं के साथ-साथ इतिहास, पुरातत्व और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों तथा शोधकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण स्थल के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। सामाजिक और धार्मिक कार्यों में भी रहा उल्लेखनीय योगदान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि स्वर्गीय  शांताराम की सेवा यात्रा केवल मदकूद्वीप तक सीमित नहीं रही। उन्होंने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। बैतलपुर में शिव मंदिर के निर्माण, चिकित्सा सेवाओं के विस्तार तथा विभिन्न सामाजिक कार्यों में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। नवागढ़ स्थित शमी गणेश मंदिर के पुनर्निर्माण में भी उन्होंने उल्लेखनीय भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के लिए किए गए निःस्वार्थ कार्य ही किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी विरासत होते हैं। स्वर्गीय  शांताराम ने अपने जीवन से सेवा, सामाजिक दायित्व और सांस्कृतिक चेतना का उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी समाज के बीच जीवंत हैं और आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों, संस्कृति और विरासत के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराते रहेंगे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी प्राचीन धरोहरें केवल अतीत की स्मृतियां नहीं हैं, बल्कि हमारी पहचान और आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि हैं। इनके संरक्षण में समाज की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वर्गीय  शांताराम जैसे समाजसेवियों ने यह दिखाया कि दृढ़ संकल्प और सेवाभाव से कोई व्यक्ति अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में कितना महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। स्वर्गीय  शांताराम की स्मृतियों और सेवाभाव को संजोए रखेगा उद्यान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि स्वर्गीय  शांताराम की स्मृति में समर्पित यह उद्यान उनके जीवन और कार्यों के प्रति समाज की कृतज्ञता का प्रतीक है। यह स्थान लोगों को प्रकृति के निकट लाने के साथ उनके द्वारा किए गए सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यों की स्मृतियों को भी जीवंत रखेगा। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय  शांताराम का जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि अपनी संस्कृति और विरासत को सहेजना केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। जब समाज स्वयं अपनी धरोहरों के संरक्षण के लिए आगे आता है, तब संस्कृति और परंपराओं का यह प्रवाह पीढ़ी-दर-पीढ़ी और मजबूत होता जाता है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत लगाया कल्पवृक्ष इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत कल्पवृक्ष का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्ष हमारी प्रकृति और जीवन का आधार हैं। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान मां के प्रति हमारे प्रेम और कृतज्ञता के भाव को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ने की सुंदर पहल है। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि पौधरोपण तभी सार्थक है, जब लगाए गए पौधों की देखभाल कर उन्हें वृक्ष बनने तक सहेजा जाए। पर्यावरण संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि मदकूद्वीप जैसे प्राकृतिक, पुरातात्विक और आध्यात्मिक महत्व के स्थलों का संरक्षण हमारी साझा जिम्मेदारी है। प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण के प्रयास साथ-साथ आगे बढ़ेंगे, तभी हम अपनी समृद्ध विरासत को उसके मूल स्वरूप में भावी पीढ़ियों तक पहुंचा सकेंगे। इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री  तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री  अरुण साव, पूर्व राज्यपाल  रमेश बैस, मंत्री  दयाल दास बघेल एवं  लखन लाल देवांगन, विधायक  धरमलाल कौशिक,  अमर अग्रवाल,  सुशांत शुक्ला एवं  पुन्नू लाल मोहले सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

गणेश झांकी चल समारोह की बदली तारीख, रायपुर में भी बदल सकती है तिथि

रायपुर. अनंत चतुर्दशी के साथ आज गणेश उत्सव का समापन हो जाएगा. राजधानी रायपुर में गणेश प्रतिमाओं की विदाई को लेकर भव्य तैयारियां की गई है. प्रतिवर्ष की इस बार भी बड़ी संख्या में प्रदेश के कोने-कोने से लोगों के रायपुर आने की उम्मीद है. इस बीच गणेश विसर्जन झांकी निकलने की तारीख में बदलाव कर दिया गया है. यानी अब रायपुर में रविवार (27 सितंबर) को निकलने वाली झांकी सोमवार को निकल सकती है. दरअसल, प्रदेश में लगातार मौसम का मिजाज बदलने से बारिश का दौर जारी है, जिसने गणेश समितियों की चिंता बढ़ा दी है. अब तक प्रशासन ने रविवार यानी 27 सितंबर की तारीख को गणेश विसर्जन झांकियों के लिए तय किया था. वहीं राजनांदगांव में 25 सितंबर को झांकियां निकलनी थी. हालांकि बारिश को देखते हुए राजनांदगांव के 35 झांकियां समिति ने सर्वसम्मति से बारिश के कारण 26 सितंबर को झांकी निकलाने का फैसला किया. इस दौरान झांकी समिति अध्यक्ष और एएसपी समेत अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहे. रायपुर में कब निकलेगी झांकी? राजधानी रायपुर में झांकी निकलने की तारीख में बदलाव हो सकता है. रविवार की जगह अब सोमवार को गणेश प्रतिमाएं जुलूस के रूप में विसर्जन घाटों तक पहुंच सकती है. इसके लिए प्रशासन और गणेश समिति के बीच बैठक जल्द होगी. इसमें सभी समितियों को विस्तृत जानकारी दी जाएगी. राजनांदगांव में 26 सितंबर को निकलेगी झांकियां राजनांदगाँव जिला पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने बताया की आज शुक्रवार को राजनांदगांव में गणेश विसर्जन झाँकियाँ निकाला जाना था. लेकिन लगातार हो रही तेज बारिश को देखते हुए झांकियां समितियों के साथ बैठक कर सर्वसम्मति से कल शनिवार को झाँकी निकालने का निर्णय लिया गया है.   रायपुर गणेश समितियों के साथ पुलिस की बैठक रायपुर कमिश्नरेट मध्य जोन डीसीपी तारकेश्वर पटेल ने बताया कि राजनांदगांव जिले में गणेश झाँकी विसर्जन की तिथि परिवर्तन की सूचना प्राप्त हुई है. रायपुर में वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया जा रहा है. रायपुर में प्रशासन को तिथि परिवर्तन की सूचना अभी नहीं है. गणेश झांकी समितियों के साथ बैठक कर चर्चा की जाएगी.

दर्रीपारा कवर्धा के आंगनबाड़ी केंद्र में ‘आंगन मिलन सेवा’ में बच्चों से घुले-मिले उप मुख्यमंत्री

फूल लेकर आए नन्हे कदम, उप मुख्यमंत्री ने बच्चों को गोद में उठाया, बच्चों की मासूमियत ने जीता दिल दर्रीपारा कवर्धा के आंगनबाड़ी केंद्र में ‘आंगन मिलन सेवा’ में बच्चों से घुले-मिले उप मुख्यमंत्री उप मुख्यमंत्री ने दर्रीपारा के आंगनबाड़ी केंद्र में ‘आंगन मिलन सेवा’ कार्यक्रम का किया शुभारंभ उत्कृष्ट कार्य करने वाली माताओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का किया सम्मान रायपुर  आंगनबाड़ी केंद्र में जब दो-तीन साल के नन्हे बच्चे फूल लेकर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के स्वागत के लिए आगे बढ़े, तो माहौल में सहज अपनापन दिखाई दिया। किसी बच्चे के हाथ में फूल था तो किसी के हाथ में अपनी बनाई हुई चित्रकारी। बच्चों ने मासूमियत से उप मुख्यमंत्री को फूल भेंट किए। शर्मा भी बच्चों के बीच पहुंचे और उनके साथ ऐसे घुल-मिल गए, जैसे परिवार के किसी बड़े के साथ बच्चे सहज होकर बातें करते हैं। उन्होंने बच्चों को गोद में उठाया, उनसे बातचीत की, तस्वीरें खिंचवाईं और उन्हें खिलौने व चॉकलेट भेंट किए।        सेवा संकल्प अभियान के तहत कबीरधाम जिले के जिला मुख्यालय कवर्धा के आंगनबाड़ी केंद्र दर्रीपारा में आयोजित ‘आंगन मिलन सेवा’ कार्यक्रम का शुभारंभ उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों और महिलाओं के बीच पहुंचे उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां आकर बिल्कुल घर जैसा माहौल महसूस हो रहा है। बच्चों की मासूमियत और उनका उत्साह देखकर मन प्रसन्न हो गया। नन्हे हाथों की चित्रकारी में दिखी बड़ी सोच        बच्चों द्वारा बनाई गई चित्रकारी ने उप मुख्यमंत्री का विशेष ध्यान खींचा। नन्हे हाथों से बनाए गए चित्रों को देखकर उन्होंने बच्चों की रचनात्मकता की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे छोटी उम्र में ही कितनी अच्छी तरह सोचकर चित्र बना रहे हैं। एक बच्चे द्वारा सैनिक, भगवान शंकर और तिरंगे से जुड़ा चित्र बनाए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चे ने जिस तरह अपने विचार को चित्र के माध्यम से व्यक्त किया, वह बहुत बड़ी बात है। बच्चों की चित्रकारी को देखते हुए उप मुख्यमंत्री ने अपने बचपन को भी याद किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को इस उम्र में इस तरह अपनी सोच को चित्रों के माध्यम से व्यक्त करते देखकर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने बच्चों, माताओं-बहनों, अभिभावकों और महिला एवं बाल विकास विभाग को शुभकामनाएं दीं। माताओं के हाथों में आई राशि से बेटियों का भविष्य संवर रहा        उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कार्यक्रम में ‘महतारी वंदन योजना’ की राशि के उपयोग की जानकारी ली। महिलाओं ने बताया कि वे योजना से मिलने वाली राशि को अपनी बेटियों के भविष्य के लिए ‘सुकन्या समृद्धि योजना’, ‘नोनी सुरक्षा योजना’ सहित अन्य जरूरतों में उपयोग कर रही हैं। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि माताओं के हाथ में राशि पहुंचती है तो उसका सदुपयोग ही होता है। कई माताएं इस राशि को अपनी बेटियों के भविष्य के लिए जमा कर रही हैं, तो कुछ परिवार की जरूरतों में इसका उपयोग कर रही हैं। यह इस बात का उदाहरण है कि महिलाओं के हाथ में पहुंची आर्थिक सहायता परिवार के भविष्य को मजबूत करने में उपयोगी साबित हो रही है। बच्चों की मुस्कान और महिलाओं की प्रतिभा बनी कार्यक्रम की पहचान      कार्यक्रम में बच्चों के लिए चित्रकला तथा महिलाओं के लिए रंगोली, मेहंदी और पारंपरिक व्यंजन प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। महिलाओं ने उत्साह के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उप मुख्यमंत्री ने रंगोली, मेहंदी और पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी का अवलोकन कर महिलाओं का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा ‘महतारी वंदन योजना’ की राशि का उपयोग उपयोगी कार्यों और भविष्य की योजनाओं में करने वाली माताओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। लाभार्थी लक्ष्मी साहू और नंद रानी साहू ने योजना से मिले सहयोग के अपने अनुभव साझा किए।

मुख्यमंत्री साय ने स्कूली बच्चों के साथ किया ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन, राष्ट्रभक्ति से गूंज उठा विद्यालय परिसर

‘वंदे मातरम्’  मां भारती की वंदना और राष्ट्रीय चेतना का स्वर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री साय ने स्कूली बच्चों के साथ किया ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन, राष्ट्रभक्ति से गूंज उठा विद्यालय परिसर सरस्वती शिशु मंदिर के विकास के लिए मुख्यमंत्री ने की 50 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा विद्यार्थियों से मुख्यमंत्री का आह्वान – बड़ा सपना देखें, लक्ष्य तय करें और पूरी लगन से उसे हासिल करने के लिए आगे बढ़ें मुख्यमंत्री ने कहा – शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति से होता है जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण दूरस्थ अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर सुविधाएं पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता रायपुर,   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के रोहिणीपुरम स्थित सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सामूहिक गायन कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने विद्यालय के छात्र-छात्राओं, आचार्यों और उपस्थित नागरिकों के साथ ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया। एक स्वर और एक लय में गूंजे ‘वंदे मातरम्’ से पूरा विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना से सराबोर हो उठा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने सरस्वती शिशु मंदिर के विकास के लिए 50 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल राष्ट्रगीत नहीं, बल्कि मां भारती की वंदना, राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना का सशक्त स्वर है। स्वतंत्रता संग्राम के कठिन दौर में इस गीत ने देशवासियों के भीतर स्वाधीनता की चेतना जगाई और असंख्य क्रांतिकारियों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने की प्रेरणा दी। ‘वंदे मातरम्’ का उद्घोष स्वतंत्रता सेनानियों के लिए राष्ट्रप्रेम, साहस और संकल्प की अभिव्यक्ति बन गया था। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने का यह अवसर हमें अपने गौरवशाली इतिहास, स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और उनके त्याग एवं बलिदान को स्मरण करने का अवसर देता है। इसके साथ ही यह नई पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का बोध कराने का भी महत्वपूर्ण अवसर है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज विद्या भारती के आह्वान पर देशभर में 25 हजार से अधिक स्थानों पर एक करोड़ से अधिक विद्यार्थियों और नागरिकों द्वारा सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में एक साथ मां भारती की वंदना राष्ट्रीय एकता और चेतना का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को ‘वंदे मातरम्’ के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका से परिचित कराने के साथ उनके भीतर राष्ट्रप्रेम एवं कर्तव्यबोध की भावना को और मजबूत करते हैं। दूरस्थ अंचलों के बच्चों को भी मिल रहे आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखा है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के हर बच्चे को, चाहे वह शहर में रहता हो या बस्तर-सरगुजा के किसी सुदूर अंचल में, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अपनी प्रतिभा को निखारने के समान अवसर मिलें। इसके लिए प्रदेशभर में शैक्षणिक सुविधाओं और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध संसाधनों का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि संसाधनों के अभाव में प्रदेश के किसी भी प्रतिभाशाली बच्चे की आगे बढ़ने की राह न रुके। मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली स्थित ट्रायबल यूथ हॉस्टल में विद्यार्थियों के लिए सीटों की संख्या बढ़ाकर 200 कर दी गई है। उन्होंने कहा कि वहां अध्ययनरत छत्तीसगढ़ के 13 विद्यार्थियों ने यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। यह उपलब्धि प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा, मेहनत और आगे बढ़ने की क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सही अवसर, मार्गदर्शन और संसाधन मिलने पर छत्तीसगढ़ के हमारे बच्चे देश के किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, चरित्र और जिम्मेदार नागरिक के निर्माण का माध्यम मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान या डिग्री प्राप्त करना नहीं है। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो ज्ञान के साथ संस्कार दे, अनुशासन सिखाए, चरित्र का निर्माण करे और बच्चों में समाज तथा राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करे। संस्कारवान और राष्ट्रभक्त युवा ही सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र की मजबूत नींव बनते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्या भारती के विद्यालय लंबे समय से शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन, सामाजिक दायित्व और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और भविष्य निर्माण में समर्पित सभी आचार्यों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षक केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि बच्चों के जीवन को सही दिशा देने का महत्वपूर्ण दायित्व भी निभाते हैं। “बड़ा सपना देखिए और आज से ही उसके लिए मेहनत शुरू कीजिए” मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि आप सभी देश और छत्तीसगढ़ का भविष्य हैं। आने वाले वर्षों में देश और समाज की जिम्मेदारी आपके कंधों पर होगी। इसलिए जीवन में बड़ा सपना देखिए, अपना लक्ष्य तय कीजिए और उसे प्राप्त करने के लिए पूरी लगन, अनुशासन और ईमानदारी से मेहनत कीजिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि कोई कलेक्टर, एसपी, डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक अथवा किसी अन्य क्षेत्र में जाकर देश और समाज की सेवा करना चाहता है तो अपने लक्ष्य को अभी से स्पष्ट करे और उसकी तैयारी शुरू कर दे। जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर परिश्रम से कठिन से कठिन लक्ष्य को भी हासिल किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी शिक्षा और व्यक्तिगत सफलता को राष्ट्र एवं समाज की प्रगति से जोड़कर देखें। अपने जीवन में जो भी दायित्व मिले, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएं तथा अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज और देश की सेवा में करें। छत्तीसगढ़ में 1500 स्थानों पर पांच लाख लोगों ने किया सामूहिक गायन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माणिक लाल साहू ने कहा कि विद्या भारती के … Read more