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पत्थर जैसी बन रही बच्ची का होगा इलाज, बाल आयोग ने मामले में दिखाई सक्रियता

पत्थर शरीर वाली बच्ची के उपचार को लेकर बाल आयोग सक्रिय डॉ. वर्णिका शर्मा के निर्देश पर बच्ची के बेहतर उपचार की दिशा में बड़ा कदम आयोग की पहल पर बच्ची को मिली उसके नाम पर जुटाई गई सहायता राशि रायपुर  छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा द्वारा सोशल मीडिया में प्रसारित समाचार एवं आयोग को प्राप्त आवेदन पत्र का संज्ञान लेते हुए बीजापुर जिले के नेलसनार क्षेत्र अंतर्गत बेंगोफर पारा, कौरगांव निवासी गंभीर रूप से बीमार नाबालिग बच्ची के उपचार हेतु प्राप्त दान एवं सहायता राशि के संबंध में जांच की कार्यवाही कराई जा रही है। प्राप्त आवेदन में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ब्रजराज रजक एवं दीपक ध्रुवे द्वारा बच्ची के उपचार के लिए सार्वजनिक सहयोग राशि एकत्रित किए जाने तथा भुगतान संबंधी विवरणों पर प्रश्न उठाए गए थे, जिस पर डॉ. वर्णिका शर्मा द्वारा संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए गए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दीपक ध्रुवे द्वारा जांच प्रारंभ होने से पूर्व बच्ची के परिवार को ₹39,000 की राशि प्रदान की गई थी तथा जांच के दौरान अतिरिक्त ₹22,400 की राशि बच्ची की माता एवं उसके भाई की उपस्थिति में तथा पुलिस के समक्ष प्रस्तुत की गई। इसके अतिरिक्त ₹5,000 की राशि संबंधित बैंक खाता होल्ड होने के कारण बच्ची के चाचा के खाते में जमा कराई गई थी, जिसे बाद में उनके चाचा द्वारा बच्ची की माता को प्रदान किया गया। जांच में यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ब्रजराज रजक द्वारा बच्ची के उपचार हेतु वीडियो प्रसारित कर स्वयं का क्यूआर कोड साझा किया गया था। प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया कि ब्रजराज रजक द्वारा जांच से पूर्व भी कुछ राशि बच्ची के उपचार हेतु परिवार को प्रदान की जा चुकी थी। वहीं पूछताछ के दौरान यह जानकारी प्राप्त हुई कि ₹18,000 की शेष राशि उनके पास उपलब्ध थी, जिसे जांच उपरांत बच्ची के परिवार को प्रदान कर दिया गया। इस प्रकार अब तक कुल ₹84,400 की राशि बच्ची के उपचार हेतु उपलब्ध कराए जाने की जानकारी सामने आई है। डॉ. वर्णिका शर्मा द्वारा निर्देशित किया गया है कि प्रकरण से संबंधित सभी वित्तीय लेन-देन, प्राप्त दान राशि, बैंक खातों एवं भुगतान विवरणों की तथ्यात्मक एवं कंडिकावार जांच सुनिश्चित करते हुए संपूर्ण प्रतिवेदन आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता अथवा दोष पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक एवं दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी।

स्पीड पोस्ट से लेट पहुंचा आवेदन, उपभोक्ता आयोग ने डाक विभाग को ठहराया जिम्मेदार

बलौदा बाजार. स्पीड पोस्ट से भेजे गए संविदा नौकरी के एक नहीं बल्कि तीन-तीन आवेदनों को डाक विभाग समय पर नहीं पहुंचा सका. हताश-परेशान आवेदक ने उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अर्जी दाखिल की. आयोग ने पूरा मामला सुनने के बाद डाक विभाग को सेवा में कमी का दोषी मान डाक शुल्क के साथ परिवादी को मानसिक क्षति पूर्ति राशि देने का आदेश दिया है. लवन निवासी परिवादिनी पूनम चौहान ने तीन अलग-अलग पदों पर संविदा नियुक्ति हेतु आवेदन पत्र लवन डाकघर से स्पीड पोस्ट के जरिए 12 मार्च 2025 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला बलौदाबाजार -भाटापारा को भेजा था. आवेदन पत्र पहुंचने की अंतिम तिथि 17 मई 2025 थी, लेकिन समयावधि बीतने के बाद 19 मई को बंद लिफाफे में प्राप्त आवेदनों को सीएमएचओ कार्यालय ने लेने से इंकार करने हुए वापस भेज दिया. डाक विभाग की लापरवाही से परिवादिनी उक्त संविदा पदों में से एक पद में भर्ती होने का अवसर चूक गई. इस पर परिवादिनी ने समयावधि में डाक नहीं पहुंचने तथा डाक विभाग की लापरवाही के कारण मानसिक पीड़ा की क्षतिपूर्ति राशि के लिए बलौदाबाजार जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया था. आयोग के अध्यक्ष रंजना दत्ता एवं सदस्यगण हरजीत सिंह चावला व शारदा सोनी ने पेश दस्तावेजों एवं संबंधित नियम आदि का सूक्ष्मता से अध्ययन कर पाया कि विरोधी पक्षकार द्वारा अनेक कारणों से डाक को तय समय पर नहीं पहुंचाया गया, जो विरोधी पक्षकार का उक्त तर्क मान्य करने योग्य नहीं है. विरोधी पक्षकार की ओर से समुचित साधनों का उपयोग न कर सेवा में कमी प्रमाणित किया है. इस पर आयोग ने उप डाकपाल लवन तथा मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल, रायपुर को सेवा में कमी का आंशिक दोषी मानते हुए डाक के एवज में लिए शुल्क के तौर पर परिवादिनी को 123 रुपए एवं मानसिक एवं आर्थिक क्षतिपूर्ति के लिए 10,000 रुपए और वाद-व्यय के लिए 3000 रुपए प्रदाय करने का आदेश दिया है.

आरंग नगर पालिका में आरोप-प्रत्यारोप तेज, अध्यक्ष ने कलेक्टर से की शिकायत

आरंग/रायपुर. नगर पालिका परिषद आरंग में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी अब एक बड़े राजनैतिक-प्रशासनिक विवाद के रूप में सामने आई है। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. संदीप जैन ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए रायपुर कलेक्टर को पत्र लिखकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। वहीं दूसरी ओर सीएमओ शीतल चंद्रवंशी ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए धरातल पर काम होने का दावा किया है। इस खींचतान के बाद आरंग की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. संदीप जैन ने कलेक्टर को सौंपे गए पत्र में सीएमओ पर शासन के निर्देशों की अनदेखी और निर्वाचित परिषद को दरकिनार करने के कई गंभीर आरोप लगाए हैं। अध्यक्ष का कहना है कि 08 मई को ‘सुशासन तिहार’ के तहत आयोजित समाधान शिविर में कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने वार्ड क्रमांक 13 में अधूरे पड़े मिनी माता स्मृति भवन की समीक्षा की थी। मंत्री ने मंच से निर्देश दिए थे कि यदि ठेकेदार 2 दिनों में काम शुरू नहीं करता तो टेंडर निरस्त कर नया टेंडर जारी किया जाए। डॉ. जैन का आरोप है कि कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी न काम शुरू हुआ और न ठेकेदार पर कार्रवाई की गई, जिससे जनता में शासन की छवि धूमिल हो रही है। बजट प्रस्तुतिकरण में देरी नियमानुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट 31 मार्च 2026 तक प्रस्तुत होना था, जिसके लिए उन्होंने 16 मार्च को ही लिखित निर्देश दिए थे, परंतु प्रशासन की ढिलाई के कारण यह बजट देरी से 27 अप्रैल की सामान्य सभा में पेश हो सका। आवास आवंटन में प्रोटोकॉल का उल्लंघन अध्यक्ष का आरोप है कि एएचपी (अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप) योजना के तहत आवास आवंटन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को उनकी अनुपस्थिति में पूरा किया गया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रोटोकॉल के लिहाज से अनुचित है। आरोप पूरी तरह निराधार, काम धरातल पर जारी है : शीतल चंद्रवंशी इस पूरे विवाद पर जब मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) शीतल चंद्रवंशी से बात की गई तो उन्होंने अध्यक्ष के तेवरों और आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए प्रशासनिक व तकनीकी पक्ष सामने रखा। सीएमओ शीतल चंद्रवंशी ने साफ किया कि मिनीमाता स्मृति भवन को लेकर लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत है। धरातल पर निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है और वर्तमान में वहां सेप्टिक टैंक का स्लैब डालने का कार्य भी पूरा होने जा रहा है। वैधानिक प्रक्रियाओं की बाध्यता प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, किसी भी चालू ठेके को अचानक निरस्त करने की एक लंबी कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया होती है। इसमें एस्टीमेट का पुनर्मूल्यांकन और नियमानुसार नोटिस अवधि देना अनिवार्य होता है, ताकि मामला अदालती दांव-पेच में न फंसे। प्रशासन ने नियमों के दायरे में रहकर ठेकेदार से काम शुरू करवाया है। बजट और आवास आवंटन जैसे बड़े कार्यों में विभागीय स्वीकृतियों, कड़े सरकारी नियमों, स्क्रूटनी (दस्तावेजों की जांच) और प्रशासनिक व्यस्तताओं के चलते कई बार समय-सीमा में व्यावहारिक बदलाव आ जाते हैं। इसमें किसी भी जनप्रतिनिधि की उपेक्षा करने का कोई उद्देश्य नहीं था, बल्कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ पूरी की गई है। अब जिला प्रशासन के फैसले पर टिकी नजरें आरंग नगर पालिका का यह विवाद यह साफ करता है कि जहां एक तरफ जनप्रतिनिधि जनता के प्रति जवाबदेही के कारण कार्यों में तेजी चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारी नियमों और वैधानिक प्रक्रियाओं की सीमाओं से बंधे होते हैं। विकास कार्यों को गति देने के लिए इन दोनों स्तंभों के बीच समन्वय होना अनिवार्य है। अब देखना होगा कि कलेक्टर इस शिकायत के बाद दोनों पक्षों के बीच के इस गतिरोध को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाते हैं। नगर पालिका में चल रहे गतिरोध से नगर के मूलभूत कार्य जरूर प्रभावित हो सकते हैं।

बहसबाजी पड़ी भारी, पीएम आवास योजना राशि मामले में जनपद CEO निलंबित

दुर्ग. सरल लेकिन सख्त मुख्यमंत्री विष्णु देव के सुशासन में एक बार फिर से कड़ा एक्शन देखने को मिला है. दुर्ग जिले के सुशासन तिहार में भाजपा नेता के साथ ‘तेरे को जो करना है कर ले’ कहते हुए बहसबाजी करने वाले जनपद सीईओ पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. मामला संज्ञान में आने के बाद मुख्यमंत्री साय ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे. जनपद सीईओ रूपेश पांडे को जारी नोटिस का जवाब असंतोष पाए जाने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. महेंद्र कुमार जांगड़े को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ जनपद पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. जानकारी के मुताबिक, थनौद गांव में सुशासन तिहार 2026 के जनसमस्या समाधान शिविर में सामुदायिक भवन की राशि जारी जारी करने को लेकर भाजपा नेता पहुंचे थे. उनका कहना था कि पूर्व सरपंच के कार्यक्रम में सामुदायिक भवन का निर्माण किया जा रहा था, जिसपर भाजपा नेता ने स्टे लगाया था. ऐसे में वर्तमान सरपंच की कार्यकाल में राशि क्यों जारी की गई. हालांकि इस मामले में सीईओ का कहना था कि स्टे हटने चुका था, जिस कारण राशि जारी की. सुशासन तिहार में भाजपा के दुर्ग ग्रामीण मंडल महामंत्री पुराण देशमुख और जनपद सीईओ रूपेश पांडे के बीच बहस शुरू हुई. देखते ही देखते तीखी बहस होने लगी. इस दौरान जनपद सीईओ ने भाजपा कार्यकर्ता को उंगली दिखाते हुए कहा कि, “तेरे को जो करना है कर ले”. हैरानी की बात रही कि पूरा घटनाक्रम विवाद दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर के सामने हुआ. मामले में जनपद सीईओ को नोटिस जारी किया गया था. हालांकि जवाब समाधानकारक नहीं पाए जाने पर दुर्ग संभाग आयुक्त ने एक्शन लेते हुए निलंबन की कार्रवाई की है.  जनता जनार्दन सर्वोपरि : मुख्यमंत्री साय इस कार्रवाई से मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनता जनार्दन सर्वोपरि है. जनता के सम्मान और अधिकारों से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा.

डिजिटल सरकार अब गाँव के द्वार, बड़ेकनेरा का ‘सेवा सेतु’ मॉडल बना सुशासन की नई मिसाल : सीएम विष्णुदेव साय

गाँव के द्वार पहुँची डिजिटल सरकार : बड़ेकनेरा का ‘सेवा सेतु’ मॉडल बना ग्रामीण सुशासन की नई मिसाल – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री ने अटल डिजिटल सुविधा केंद्र का किया निरीक्षण, ग्रामीणों से लिया योजनाओं के प्रभाव का फीडबैक अब प्रमाण पत्र से लेकर बैंकिंग, बीमा, पेंशन और ऑनलाइन सेवाएं गांव में ही उपलब्ध रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कोंडागांव जिले के ग्राम पंचायत बड़ेकनेरा में स्थापित अटल डिजिटल सुविधा केंद्र का निरीक्षण कर ग्रामीण डिजिटल सुशासन के अभिनव मॉडल ‘सेवा सेतु’ की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे संवाद कर योजनाओं की पहुंच, पारदर्शिता और प्रभाव के संबंध में जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ ग्रामीणों को उनके गांव में ही सहज, सरल और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि ‘सेवा सेतु’ अभियान और अटल डिजिटल सुविधा केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं, जिनसे आमजन को सरकारी दफ्तरों के अनावश्यक चक्कर लगाने से मुक्ति मिल रही है। मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान ग्राम की हितग्राही श्रीमती कौशल्या मानिकपुरी ने बताया कि उन्हें नियमित रूप से महतारी वंदन योजना की राशि प्राप्त हो रही है, जिससे घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिलती है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से खेती-किसानी संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत मिली है। इसी प्रकार श्रीमती सुमति मानिकपुरी, श्रीमती अमिल मानिकपुरी तथा श्रीमती पचमती बघेल ने मुख्यमंत्री को बताया कि महतारी वंदन योजना ने उन्हें आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाया है और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहारा दिया है। वृद्धावस्था पेंशन और महतारी वंदन योजना का लाभ प्राप्त कर रही श्रीमती वेंकटरमणा जंगम ने भी योजनाओं की नियमित उपलब्धता पर संतोष व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने उनसे चर्चा करते हुए कहा कि सरकार प्रत्येक गरीब, किसान और महिला तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। ‘गाँव के द्वार, डिजिटल सरकार’ का साकार हो रहा संकल्प ग्राम पंचायत बड़ेकनेरा में संचालित ‘सेवा सेतु’ अभियान शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं को ग्रामीणों तक त्वरित, सरल और सुलभ तरीके से पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। इस पहल के माध्यम से ग्रामीणों को एक ही स्थान पर अनेक शासकीय, वित्तीय और डिजिटल सेवाओं का लाभ मिल रहा है, जिससे सुशासन की अवधारणा जमीनी स्तर पर साकार होती दिखाई दे रही है। एक ही छत के नीचे मिल रही दर्जनों डिजिटल और शासकीय सेवाएं अटल डिजिटल सुविधा केंद्र में आवेदन प्रेषण के लिए मात्र 30 रुपये तथा प्रिंट आउट के लिए 5 रुपये प्रति पृष्ठ की दर से सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। केंद्र के माध्यम से आय, जाति, मूल निवासी प्रमाण पत्र, जन्म एवं मृत्यु पंजीयन, विवाह पंजीयन तथा भवन निर्माण अनुज्ञा जैसी सेवाएं ग्रामीणों को गांव में ही मिल रही हैं। इसके अतिरिक्त नगद आहरण, फंड ट्रांसफर, पेंशन सेवाएं, जीवन, सामान्य एवं कृषि बीमा, पैन कार्ड एवं पासपोर्ट आवेदन, बिजली बिल भुगतान, यात्रा टिकट बुकिंग तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं का ऑनलाइन पंजीयन भी इसी केंद्र के माध्यम से किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों का समय, श्रम और आर्थिक व्यय उल्लेखनीय रूप से कम हुआ है। हर माह 15 से 20 लाख रुपये का डिजिटल लेन-देन, स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा अटल डिजिटल सुविधा केंद्र में ‘सेवा सेतु मैनेजर’ के रूप में कार्यरत संजय मिश्रा ने मुख्यमंत्री को जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 15 से 20 लाख रुपये का डिजिटल ट्रांजेक्शन किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस पहल ने न केवल ग्रामीणों को सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित किए हैं, जिससे युवाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। ग्रामीणों के समय, श्रम और धन की बचत का माध्यम बना सेवा सेतु बड़ेकनेरा के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को बताया कि अब विभिन्न शासकीय सेवाओं और योजनाओं का लाभ गांव में ही उपलब्ध हो जाने से उन्हें दूरस्थ कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। इससे समय, श्रम और धन की बचत हो रही है तथा शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। बड़ेकनेरा का ‘सेवा सेतु’ मॉडल अब ग्रामीण डिजिटल सशक्तिकरण, पारदर्शी सेवा वितरण और सुशासन की नई मिसाल के रूप में उभर रहा है।

विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों को मिल रहा राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों से तैराकी का गुर

पहाड़ों और जंगलों से तरणताल तक- बैगा बच्चों के सपनों को नई उड़ान दे रहा ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों को मिल रहा राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों से तैराकी का गुर छत्तीसगढ़ सरकार की जनजातीय हितैषी नीतियों से निखर रही वनांचल की खेल प्रतिभाएं रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार की जनजातीय हितैषी नीतियों और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश के दूरस्थ अंचलों के बच्चों की प्रतिभा निखारने के लिए निरंतर सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में आयोजित जिला स्तरीय ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के बच्चों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। जंगलों और पहाड़ों के बीच जीवन व्यतीत करने वाले बैगा बालक-बालिकाएं आज तरणताल (स्वीमिंग पूल) में तैराकी के आधुनिक खेल कौशल सीखकर अपने सपनों को नई दिशा दे रहे हैं।             नगर पालिका परिषद पेण्ड्रा के तरणताल में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा इस विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया है। इसमें आकांक्षी विकासखंड गौरेला के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले बैगा समुदाय के बच्चों को प्राथमिकता से शामिल किया गया है। जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों ने स्वयं गांवों तक पहुंचकर बैगा परिवारों को प्रेरित किया और बच्चों को इस शिविर से जोड़ा। अवसर मिलने से बढ़ा आत्मविश्वास           प्राकृतिक जलस्रोतों, नदी-नालों और जंगलों के बीच जीवन बिताने वाले इन बच्चों के लिए तरणताल का यह अनुभव बिल्कुल नया है। यहाँ वे केवल तैरना ही नहीं सीख रहे, बल्कि खेल अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धी खेल संस्कृति को भी आत्मसात कर रहे हैं। प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बच्चों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इतने बड़े स्वीमिंग पूल में अभ्यास नहीं किया था। वे तैराकी के तकनीकी पहलुओं को सीखकर बेहद उत्साहित हैं और भविष्य में बड़े खिलाड़ी बनने का सपना देख रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों से मिल रहा मार्गदर्शन          इस ग्रीष्मकालीन शिविर में राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों द्वारा बच्चों को तैराकी की बारीकियाँ सिखाई जा रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान खिलाड़ियों को फ्री-स्टाइल, बैक-स्ट्रोक, बटरफ्लाई-स्ट्रोक, ब्रेस्ट-स्ट्रोक तथा मेडले जैसी प्रतिस्पर्धी विधाओं का कड़ा अभ्यास कराया जा रहा है। सुबह और शाम, दो पालियों में संचालित इन सत्रों के माध्यम से बच्चों की शारीरिक क्षमता, तकनीकी दक्षता और खेल कौशल को लगातार विकसित किया जा रहा है। प्रशिक्षकों का मानना है कि बैगा बच्चों में स्वाभाविक शारीरिक क्षमता, साहस और सीखने की तीव्र इच्छा है, जो उन्हें भविष्य का उत्कृष्ट खिलाड़ी बना सकती है। जनजातीय सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम          विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के बच्चे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में पलने के कारण अद्भुत सहनशक्ति और बेजोड़ शारीरिक क्षमता के धनी होते हैं। यदि उन्हें उचित मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराए जाएं, तो वे राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। जिला प्रशासन द्वारा इन बच्चों को खेल की मुख्यधारा से जोड़ने का यह प्रयास न केवल खेल विकास की दिशा में एक मील का पत्थर है, बल्कि सामाजिक समावेशन और जनजातीय सशक्तिकरण का भी एक जीवंत उदाहरण है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल जनजातीय युवा          मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, खेल, स्वास्थ्य और कौशल विकास के अवसरों का विस्तार कर रही है। सरकार का संकल्प है कि दूरस्थ अंचलों का कोई भी प्रतिभाशाली बच्चा संसाधनों के अभाव में पीछे न छूटे। बैगा समुदाय के बच्चों को खेल गतिविधियों से जोड़ना सरकार की समावेशी विकास नीति का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिससे न केवल बच्चों के व्यक्तित्व का विकास हो रहा है, बल्कि उनमें बड़े लक्ष्य हासिल करने का आत्मविश्वास भी जागृत हो रहा है। सपनों की नई लहर           कभी जंगलों और पहाड़ियों तक सीमित रहने वाले बैगा बच्चे आज तरणताल में पूरे आत्मविश्वास के साथ लहरों से मुकाबला कर रहे हैं। यह सकारात्मक परिवर्तन केवल एक खेल प्रशिक्षण का परिणाम नहीं है, बल्कि सरकार की संवेदनशील सोच, जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता और बच्चों की कड़ी मेहनत का प्रतिफल है।           यह ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर बैगा बच्चों के लिए एक ऐसे सुनहरे अवसर के रूप में उभरा है, जो उनके जीवन की दिशा बदल सकता है। आने वाले वर्षों में यही बच्चे राज्य और देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर छत्तीसगढ़ और पूरे भारत का गौरव बढ़ाएंगे, यही इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है।

बस्तर में जल्द दस्तक दे सकता है मानसून, मौसम विभाग ने हवाओं को बताया अहम फैक्टर

जगदलपुर. भीषण गर्मी के बीच बस्तरवासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। इस बार मानसून के बस्तर में सामान्य तिथि से पहले पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, मौसम विभाग का कहना है कि मानसून की वास्तविक गति उसके आगे बढ़ने की स्थिति पर निर्भर करेगी। मौसम विभाग के अनुसार, बस्तर में मानसून पहुंचने की सामान्य तिथि 13 जून मानी जाती है। पिछले 15 से 20 वर्षों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो मानसून लगभग इसी अवधि में पहुंचता रहा है. हालांकि, दो से चार दिनों का अंतर सामान्य माना जाता है। इस वर्ष केरल में मानसून की जल्द एंट्री को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि बस्तर में भी मानसून तय समय से थोड़ा पहले पहुंच सकता है। विभाग का कहना है कि यदि मानसूनी हवाएं मजबूत रहीं तो इसका असर बस्तर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में देखने को मिल सकता है। मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा ने बताया कि मानसून के आगमन की तिथि पूरी तरह उसकी गति और हवाओं की मजबूती पर निर्भर करती है। यदि हवाएं कमजोर पड़ती हैं तो मानसून की रफ्तार थम सकती है, जबकि हवाएं प्रबल होने पर यह तेजी से अधिक क्षेत्रों को कवर करते हुए पहले पहुंच सकता है। फिलहाल, मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि बस्तर में मानसून की दस्तक सामान्य तिथि के आसपास ही रहेगी, लेकिन परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो इस बार बारिश का इंतजार थोड़ा पहले खत्म हो सकता है। ऐसे में किसानों समेत आम लोगों की नजरें अब मानसून की अगली गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया अवलोकन, कहा – प्राचीन ज्ञान परंपरा हमारी सांस्कृतिक अस्मिता की अमूल्य धरोहर

ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत बड़े कनेरा में मिलीं 150 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया अवलोकन, कहा – प्राचीन ज्ञान परंपरा हमारी सांस्कृतिक अस्मिता की अमूल्य धरोहर उड़िया भाषा में लिखित पंजी, पुराण, पंचांग सहित कई महत्वपूर्ण ग्रंथ पीढ़ियों से परिवारों में सुरक्षित रायपुर   छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा से जुड़े अमूल्य विरासत संरक्षण के प्रयासों को नई प्रेरणा देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के अंतर्गत कोंडागांव जिले के ग्राम बड़े कनेरा का दौरा किया। यहां उन्होंने ज्ञान भारतम् अभियान के तहत संरक्षित लगभग 150 वर्ष पुरानी उड़िया भाषा में लिखित प्राचीन पांडुलिपियों का अवलोकन किया और उनके संरक्षण में जुटे परिवारों की सराहना की। मुख्यमंत्री साय ने ग्राम निवासी रामूराम यादव से मुलाकात कर उनके पास सुरक्षित रखी गई आठ प्राचीन पांडुलिपियों को देखा तथा उनके इतिहास, उपयोग और संरक्षण के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि ऐसी ऐतिहासिक धरोहरें केवल पुस्तकीय विरासत नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान प्रणाली की जीवंत पहचान हैं। इन्हें संरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। मुख्यमंत्री ने पीढ़ियों से इन पांडुलिपियों को सहेजकर रखने वाले परिवारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि समाज की भागीदारी के बिना सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण संभव नहीं है। जिन परिवारों ने दशकों तक इन धरोहरों को सुरक्षित रखा है, वे वास्तव में हमारी ज्ञान-संपदा के संरक्षक हैं। इस अवसर पर बड़े कनेरा के हरदू कश्यप, परमेश्वर मानिकपुरी, अमरावती के त्रिलोचन मानिकपुरी, पुरसोती राम मौर्य तथा कोपरा ग्राम के चमरू नाग ने भी मुख्यमंत्री से चर्चा की। उन्होंने बताया कि ये पांडुलिपियां उनके दादा-परदादाओं के समय से परिवारों में संरक्षित हैं और आज भी अत्यंत सावधानीपूर्वक सुरक्षित रखी जाती हैं। संरक्षकों ने मुख्यमंत्री को बताया कि इन पांडुलिपियों में पंजीयार, पंजी, पुराण, पंचांग तथा चक्रकूट पंचांग जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ शामिल हैं, जिनका उपयोग परंपरागत ज्ञान, धार्मिक अनुष्ठानों, सामाजिक व्यवस्थाओं तथा ज्योतिषीय गणनाओं में किया जाता रहा है। इन ग्रंथों में स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं, धार्मिक विधानों और समय गणना की विशिष्ट प्रणालियों का भी उल्लेख मिलता है। मुख्यमंत्री साय ने पांडुलिपियों के अध्ययन की प्रक्रिया, उन्हें पढ़ने-समझने की पारंपरिक पद्धतियों तथा वर्तमान समय में उनके संरक्षण की व्यवस्था के संबंध में भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में प्राचीन ज्ञान-संपदा के संरक्षण, डिजिटलीकरण और व्यवस्थित दस्तावेजीकरण की दिशा में सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा से जुड़ी रह सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संचालित ज्ञान भारतम् अभियान देश की प्राचीन पांडुलिपियों, ज्ञान परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान भारत की बौद्धिक विरासत को सुरक्षित रखने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी ऐतिहासिक जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।

पीडब्ल्यू सचिव सख्त, मंजूर कार्यों की टेंडर प्रक्रिया 30 जून तक पूरी करने के आदेश

रायपुर. लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने आज सभी मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण अभियंताओं और कार्यपालन अभियंताओं की बैठक लेकर विभागीय कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विभागीय मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में आयोजित बैठक में अधिकारियों को मार्च-2026 तक स्वीकृत कार्यों के 30 जून तक निविदा आमंत्रित कर 31 जुलाई तक कार्यादेश जारी करने के निर्देश दिए, ताकि वर्षा ऋतु के तुरंत बाद ये काम शुरू किए जा सकें। उन्होंने छत्तीसगढ़ से गुजर रहे भारतमाला परियोजनाओं की सड़कों से राज्य की सड़कों को जोड़ने फोरलेन सड़कों के निर्माण की कार्ययोजना बनाने को कहा, ताकि भारतमाला सड़कों का पूरा लाभ राज्य को भी मिल सके। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी और अपर सचिव एस.एन. श्रीवास्तव भी बैठक में मौजूद थे। विभाग के सभी संभागों के कार्यपालन अभियंता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक में शामिल हुए। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में शामिल प्रदेशभर की 36 द्रुतगामी सड़कों के साथ ही दूरस्थ अंचलों के पहुंचविहीन गांवों के लिए भी प्राथमिकता से सड़कों व पुलों की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने वर्तमान वित्तीय वर्ष और पिछले वित्तीय वर्ष के बजट में शामिल कार्यों की प्राथमिकता सूची तैयार कर 10 जून तक भेजने को कहा। उन्होंने 31 जुलाई तक इनके प्राक्कलन भी भेजने के निर्देश दिए। बंसल ने नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में आरसीपीएलडब्लूईए (Road Connectivity Project in Left Wing Extremism Areas) के कार्यों को हर हाल में 31 मार्च 2027 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक के बाद अधिकारियों को जिओ-टैगिंग और एसएनए का ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दिया गया। बंसल ने ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों का परीक्षण कर समय पर उनका भुगतान करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न आयोजनों और कार्यक्रमों के देयकों का भुगतान एक माह के भीतर करने को कहा। उन्होंने भुगतान के पहले सभी कार्यों का कड़ाई से सत्यापन भी करने के निर्देश दिए। उन्होंने 31 मार्च 2026 तक किए गए कार्यों के पूर्णता प्रमाण पत्र और फाइनल बिल समीक्षा के लिए भेजने को कहा। बंसल ने सभी परिक्षेत्रों के मुख्य अभियंताओं और अधीक्षण अभियंताओं को हर तीन महीने में राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक कर राष्ट्रीय राजमार्गों के कार्यों की प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। विभागीय सचिव ने निर्माण एजेंसियों एवं ठेकेदारों से अच्छा समन्वय रखकर निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा में कार्य पूर्णता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को डामरीकरण एवं अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के दौरान खुद फील्ड में मौजूद रहकर कड़ी निगरानी रखने को कहा। उन्होंने सभी अधिकारियों को हर मंगलवार को अपने कार्यालय में ही रहने के निर्देश दिए। उन्होंने काम में ढिलाई एवं लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों पर नियमानुसार कार्यवाही करने को भी कहा। उन्होंने भू-अर्जन के मामलों में मिशन मोड में काम करते हुए आगामी तीन से छह माह के भीतर सभी प्रकरणों को निराकृत करने के निर्देश दिए। उन्होंने बरसात को देखते हुए सड़कों की मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर पूर्ण करने को कहा।  बंसल ने कार्यों में सुविधा और प्रशासनिक कसावट के लिए विभाग के विभिन्न अनुविभागीय कार्यालयों के स्थानांतरण एवं पुनर्गठन की कार्यवाही जून कर लेने के निर्देश दिए। उन्होंने बैठक में लोक विर्माण विभाग की परिसंपत्तियों के डिजिटाइजेशन, एसडीओ से लेकर प्रमुख अभियंता कार्यालय तक ई-ऑफिस से कार्य संपादित करने, कार्यालयों को सुव्यस्थित रखने, गति शक्ति पोर्टल पर कार्यों की प्रगति की जानकारी समय पर अपडेट करने, न्यायालयीन प्रकरणों में जवाब समय पर दाखिल करने, प्रशासकीय स्वीकृति के बाद तकनीकी स्वीकृति, निविदा आमंत्रण और कार्यादेश जारी करने की प्रक्रियाएं दो से तीन माह में पूर्ण करने तथा चालू वित्तीय वर्ष के बजट में शामिल कार्यों को प्राथमिकता से स्वीकृत कराने के भी निर्देश दिए।

किसानों को जागरूक करने बड़ा अभियान शुरू, जैविक खेती और उत्पादों पर रहेगा फोकस

रायपुर. रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से प्रभावित हो रहे मृदा स्वास्थ्य, घटती भूमि उर्वरता और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा 1 से 30 जून तक देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जाएगा. अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में भी व्यापक स्तर पर जनजागरूकता और कृषक उन्मुख गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा. अभियान के दौरान ग्राम पंचायत, विकासखंड और जिला स्तर पर कृषक संगोष्ठियां, कृषि चौपाल, जनजागरूकता कार्यक्रम और जैविक उत्पाद प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी. कृषि वैज्ञानिक किसानों को रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव, प्राकृतिक खेती के लाभ, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा खेती की लागत कम करने के उपायों की जानकारी देंगे. साथ ही मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन और फसल की आवश्यकता के अनुरूप उर्वरकों के उपयोग के संबंध में भी मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा. प्रदेशभर में अधिक आवागमन वाले क्षेत्रों में दीवार लेखन के माध्यम से मृदा संरक्षण और प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी. किसानों और नागरिकों को प्राकृतिक खेती अपनाने की शपथ भी दिलाई जाएगी. पंचायत स्तर पर आयोजित कृषि चौपालों में किसानों और जनप्रतिनिधियों को अपनी कम से कम 25 प्रतिशत कृषि भूमि पर स्वेच्छा से प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा.