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10 ठिकानों पर छापेमारी, मानव तस्करी केस में 1.48 करोड़ कैश बरामद

महासमुंद. छत्तीसगढ़ की महासमुंद पुलिस ने मानव तस्करी के एक बड़े और संगठित नेटवर्क का खुलासा किया है। यह सिंडिकेट छत्तीसगढ़ और पड़ोसी ओडिशा समेत अन्य राज्यों में सक्रिय था। पुलिस टीम ने नेटवर्क से जुड़े 10 ठिकानों पर एक साथ दबिश देकर करीब 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपये नगद बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, मामले की शुरुआत एक नाबालिग से जुड़े प्रकरण की जांच से हुई। 21 सितंबर को अस्पताल से मिले मेमो के आधार पर जांच शुरू की गई, जिसमें नाबालिग के शारीरिक शोषण और गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। प्रारंभिक जांच में पुलिस को मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी से जुड़े संगठित नेटवर्क के सुराग मिले। लुभावने वादे कर मजदूरों को ले जाने का आरोप पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और मजदूरों को एडवांस रकम देकर अपने जाल में फंसाते थे। इसके बाद उन्हें दूसरे राज्यों में ईंट भट्ठों और अन्य स्थानों पर मजदूरी के लिए भेजा जाता था। पुलिस ने दावा किया है कि कुछ मामलों में डर, दबाव और धमकी का इस्तेमाल भी किया गया। जांच में मिले दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने दावा किया है कि गिरोह से जुड़े लोगों से बड़ी संख्या में मजदूरों को अलग-अलग राज्यों में भेजा जाता था। पुलिस के मुताबिक प्रत्येक आरोपी के नेटवर्क में हजारों मजदूरों के रिकॉर्ड मिले हैं और इनमें बंधुआ मजदूरी के भी दस्तावेजी साक्ष्य मिले हैं। मोबाइल, बैंक दस्तावेज और रजिस्टर जब्त छापेमारी के दौरान पुलिस ने मजदूर पलायन से संबंधित रजिस्टर और डायरी, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मॉर्गेज से जुड़े दस्तावेज और नोट गिनने की मशीन समेत कई महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की है। पुलिस इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है। पांच मुख्य आरोपी गिरफ्तार पुलिस ने इस मामले में मुकेश चंद्राकर, लता सवर, नंदू मोहंती, पीयूष अग्रवाल और मनीष गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक मुकेश चंद्राकर को इस पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि मजदूरों को एडवांस रकम देकर दूसरे राज्यों में भेजा जाता था। पुलिस ने आरोप लगाया है कि मजदूरों से कठिन परिस्थितियों में काम कराया जाता था और उनकी आवाजाही पर भी नियंत्रण रखा जाता था। नाबालिगों और महिलाओं की तस्करी की भी जांच पुलिस का कहना है कि गिरोह पर मानव तस्करी, नाबालिगों की तस्करी, बाल मजदूरी और महिलाओं एवं नाबालिग बालिकाओं के शोषण से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है। बरामद मोबाइल और बैंक खातों की जांच के बाद नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है। BNS की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज – इस मामले में थाना खल्लारी में अपराध क्रमांक 104/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने BNS की धारा 143(2), 143(3), 143(4), 3(5) तथा संगठित अपराध से संबंधित धारा 111 के तहत कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जब्त सामग्री – 1,48,54,750 नकद मजदूर पलायन से संबंधित रजिस्टर और डायरी कई मोबाइल फोन बैंक पासबुक और चेकबुक एटीएम कार्ड मॉर्गेज संबंधी दस्तावेज नोट गिनने की मशीन पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग जुड़े हैं और अलग-अलग राज्यों में कितने मजदूरों को इसके जरिए भेजा गया।

धान खरीदी की तैयारियां तेज, खाद्य मंत्री बघेल ने दिए समय पर व्यवस्था पूरी करने के निर्देश

खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी व्यवस्था समय पर हो पूरा: खाद्य मंत्री बघेल मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी एवं कस्टम मिलिंग की तैयारियों की हुई विस्तृत समीक्षा किसानों की सुविधा के लिए प्रदेश में 360 नवीन धान खरीदी केंद्र, सभी केंद्रों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश बारदानों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर  3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की व्यवस्था कर रहा विपणन संघ अब तक 1.14 लाख गठान नए जूट बारदाने प्राप्त, शेष बारदानों की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने में तेजी लाने के निर्देश रायपुर,  आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए राज्य शासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयाल दास बघेल की अध्यक्षता में गुरूवार 24 सितंबर को आयोजित मंत्रिमंडलीय उप समिति की बैठक में धान खरीदी एवं कस्टम मिलिंग से जुड़ी तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में किसानों की सुविधा, धान उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था, जूट बारदानों की उपलब्धता तथा कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने की प्रगति पर की गई। बैठक में कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल तथा वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी शामिल हुए। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि धान खरीदी प्रारंभ होने से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूरी कर ली जाएं, ताकि किसानों को धान बेचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। 360 नए धान खरीदी केंद्रों से किसानों को मिलेगी सुविधा बैठक में बताया गया कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 360 नवीन धान खरीदी केंद्र खोले गए हैं। इन नए केंद्रों में धान खरीदी से संबंधित सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने नवीन खरीदी केंद्रों में धान उपार्जन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी जरूरी संसाधनों एवं व्यवस्थाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उप समिति ने कहा कि धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया किसान-केंद्रित हो तथा खरीदी केंद्रों पर किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। 3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की व्यवस्था धान उपार्जन के लिए बारदानों की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए मंत्रिमंडलीय उप समिति ने आवश्यक नए एवं पुराने जूट बारदानों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि विपणन संघ द्वारा जूट कमिश्नर, कोलकाता के माध्यम से 3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की व्यवस्था की जा रही है। अब तक विपणन संघ को 1.14 लाख गठान नए जूट बारदाने प्राप्त हो चुके हैं। उप समिति ने शेष आवश्यक बारदानों की उपलब्धता भी समयबद्ध रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि धान खरीदी के दौरान बारदानों की कमी के कारण उपार्जन व्यवस्था प्रभावित न हो। कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने की गति बढ़ाने के निर्देश बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत कस्टम मिलिंग की स्थिति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि कस्टम मिलिंग के अंतर्गत कुल 89 लाख टन चावल जमा करने का लक्ष्य है। इसमें से अब तक 37.50 लाख टन चावल जमा किया जा चुका है, जबकि मिलरों द्वारा 51.50 लाख टन चावल जमा किया जाना शेष है। कस्टम मिलिंग का चावल जमा करने के लिए 31 मार्च 2027 तक की समय-सीमा निर्धारित है। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने शेष चावल की मात्रा को देखते हुए कस्टम मिलिंग एवं चावल जमा करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। संबंधित अधिकारियों से इसकी नियमित समीक्षा करने तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर चावल जमा कराना सुनिश्चित करने को कहा गया। बैठक में खाद्य विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ के प्रबंध संचालक जितेन्द्र शुक्ला, नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक विलास भोसकर, वित्त विभाग के विशेष सचिव चंदन कुमार एवं सहकारी संस्थाओं के पंजीयक रमेश कुमार शर्मा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

छत पर सोलर प्लांट लगने से घर में आई खुशियों की रोशनी

छत पर सोलर प्लांट लगने से घर में आई खुशियों की रोशनी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की सोच से बदली त्रिलोक मिश्रा के घर की तस्वीर  पीएम सूर्यघर योजना का दिख रहा जमीनी असर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में बढ़ रहा सौर ऊर्जा का उपयोग रायपुर,  कभी हर महीने आने वाला 3 से 3.5 हजार रुपये का बिजली बिल घरेलू बजट पर बोझ बनता था। बिजली की खपत बढ़ने पर बिल बढ़ने की चिंता रहती थी। आज गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के गुरुकुल परिसर पेंड्रारोड निवासी त्रिलोक मिश्रा के घर की छत ही बिजली उत्पादन का माध्यम बन गई है। 3 किलोवाट का सोलर प्लांट लगने के बाद उनके घर में केवल बिजली की बचत नहीं हुई, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की एक नई शुरुआत हुई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और आम परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ त्रिलोक मिश्रा को भी मिला है। योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये की सब्सिडी मिली, जो सीधे उनके बैंक खाते में जमा हुई। मिश्रा इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और उपभोक्ता हितैषी बताते हैं। छत बनी बिजली का स्रोत, घटा घरेलू खर्च सोलर प्लांट लगने से पहले त्रिलोक मिश्रा के घर का मासिक बिजली बिल लगभग 3 हजार से 3 हजार 500 रुपये तक आता था। हर महीने बिजली बिल के लिए अलग से राशि की व्यवस्था करनी पड़ती थी। सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित होने के बाद उनके घरेलू बिजली खर्च की तस्वीर बदल गई। मिश्रा बताते हैं कि अब उनके घर की जरूरत की बिजली का एक बड़ा हिस्सा उनकी अपनी छत से ही तैयार हो रहा है। सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन शुरू होने के बाद उन्हें माइनस बिल भी प्राप्त हुए। अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दिए जाने पर उसकी राशि बिजली बिल में समायोजित होती रही। इससे उन्हें बिजली खर्च में राहत के साथ-साथ अपनी छत पर उत्पादित ऊर्जा का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिला। मिश्रा कहते हैं कि अब हमें बिजली बिल की चिंता नहीं रहती। हमारी जरूरत की बिजली हमारी अपनी छत से बन रही है। यह अनुभव उनके लिए केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं है। उनके घर की छत अब स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का केंद्र बन गई है। इससे उन्हें यह भरोसा भी मिला है कि घर-परिवार की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सौर ऊर्जा एक उपयोगी और स्थायी विकल्प बन सकती है। 78 हजार रुपये की सब्सिडी ने आसान किया सौर ऊर्जा का सफर त्रिलोक मिश्रा के लिए सोलर प्लांट लगाने का निर्णय इसलिए भी आसान हुआ क्योंकि योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचने से प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बना रहा। मिश्रा बताते हैं कि सोलर प्लांट लगाने की प्रक्रिया उनके लिए सहज रही। उनके अनुसार, योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने सौर ऊर्जा को अपनाने के निर्णय को और आसान बनाया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता का विजन पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर परिवारों को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सौर ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से अब आम परिवार भी अपनी छत को ऊर्जा उत्पादन के माध्यम के रूप में देख रहे हैं। त्रिलोक मिश्रा का अनुभव इसी बदलाव की एक स्थानीय तस्वीर है। जहां पहले उनकी छत केवल घर का हिस्सा थी, वहीं अब वही छत बिजली पैदा कर रही है। इससे एक ओर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है, वहीं दूसरी ओर परिवार के बिजली खर्च में भी राहत महसूस हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बढ़ रहा सौर ऊर्जा का उपयोग छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम सूर्यघर योजना के माध्यम से जिले के परिवारों को अपने घरों की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का अवसर मिल रहा है। त्रिलोक मिश्रा की कहानी बताती है कि जब किसी जनकल्याणकारी योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचता है, तो उसका प्रभाव सीधे परिवार के जीवन में दिखाई देता है। सौर ऊर्जा के माध्यम से उन्हें बिजली खर्च में राहत मिली है और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिला है। पर्यावरण के साथ घरेलू बजट के लिए भी राहत सौर ऊर्जा का लाभ केवल बिजली बिल में कमी तक सीमित नहीं है। यह स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा का माध्यम भी है। मिश्रा के घर में सौर ऊर्जा का उपयोग शुरू होने से उन्हें आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने का संतोष भी मिल रहा है। वे मानते हैं कि यदि अधिक से अधिक परिवार अपनी छतों पर सोलर प्लांट लगाएं, तो इससे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण तैयार करने में मदद मिलेगी। त्रिलोक मिश्रा की छत बनी दूसरों के लिए प्रेरणा त्रिलोक मिश्रा की कहानी अब आसपास के लोगों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। उनका अनुभव बताता है कि सौर ऊर्जा केवल बड़े संस्थानों या उद्योगों तक सीमित नहीं है। सामान्य परिवार भी अपनी जरूरत के अनुसार सोलर प्लांट लगाकर बिजली की जरूरत पूरी करने और घरेलू खर्च को कम करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। एक समय बिजली के बढ़ते बिल की चिंता करने वाले त्रिलोक मिश्रा आज अपनी छत पर बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। उनकी यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता के विजन से जुड़ते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जनकल्याणकारी योजनाओं के जमीनी प्रभाव की एक सकारात्मक मिसाल प्रस्तुत करती है। उनके घर की छत से निकल रही सौर ऊर्जा केवल बिजली नहीं बना रही, बल्कि आत्मनिर्भरता, बचत और स्वच्छ भविष्य की नई उम्मीद भी रोशन कर … Read more

सेवा की कहानी : उन्नत नस्ल की गाय ने खोली अतिरिक्त आय की राह, आत्मनिर्भर बने सन्ना के ओम प्रकाश

सेवा संकल्प अभियान 2026 सेवा की कहानी : उन्नत नस्ल की गाय ने खोली अतिरिक्त आय की राह, आत्मनिर्भर बने सन्ना के ओम प्रकाश प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 से मिली 56 हजार रुपये की सहायता, दूध बेचकर अब तक कमाए 40 हजार रुपये से अधिक प्रतिदिन हो रहा 6 से 8 लीटर दूध उत्पादन, गोबर से जैविक खाद मिलने से खेती की लागत भी हुई कम रायपुर, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत आजीविका गतिविधियों से जुड़ी सहायता ग्रामीण किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन रही है। जशपुर जिले के बगीचा विकासखण्ड के ग्राम सन्ना निवासी श्री ओम प्रकाश यादव ने योजना से मिली सहायता से उन्नत नस्ल की गाय खरीदकर अपने पारंपरिक पशुपालन को आय के साधन में बदल दिया है। दूध के विक्रय से उन्हें अब तक 40 हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय हो चुकी है। ओम प्रकाश यादव पहले से गाय पालन करते थे, लेकिन उन्नत नस्ल की गाय नहीं होने के कारण दूध का उत्पादन सीमित था। दूध का अधिकांश उपयोग परिवार की जरूरतों के लिए ही हो जाता था। ऐसे में पशुपालन से नियमित अतिरिक्त आय नहीं हो पाती थी। 56 हजार रुपये की सहायता से खरीदी उन्नत नस्ल की गाय कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत उत्पादन प्रणाली मद में ओम प्रकाश यादव को गाय पालन के लिए 56 हजार रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की गई। इस राशि से उन्होंने उन्नत नस्ल की गाय खरीदी और पशुपालन को व्यवस्थित आजीविका गतिविधि के रूप में आगे बढ़ाया। उन्नत नस्ल की गाय आने के बाद अब उन्हें प्रतिदिन 6 से 8 लीटर दूध मिल रहा है। परिवार की आवश्यकता पूरी होने के बाद अतिरिक्त दूध का विक्रय किया जा रहा है। इससे उन्हें अब तक 40 हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो चुकी है। दूध से आमदनी, जैविक खाद से खेती में बचत पशुपालन से ओम प्रकाश को दोहरा लाभ मिल रहा है। दूध की बिक्री से नियमित अतिरिक्त आय हो रही है, वहीं गाय के गोबर से मिलने वाली जैविक खाद का उपयोग खेती में किया जा रहा है। इससे खेती में बाहरी खाद पर होने वाले खर्च में भी कमी आई है। अतिरिक्त आमदनी और खेती की लागत में बचत से परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है। “अब हर महीने हो रही अतिरिक्त कमाई” ओम प्रकाश यादव बताते हैं, “पहले देशी गाय से मिलने वाला दूध केवल घर के उपयोग में ही आ जाता था। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 से 56 हजार रुपये की सहायता मिलने पर मैंने उन्नत नस्ल की गाय खरीदी। अब प्रतिदिन 6 से 8 लीटर दूध मिल रहा है और हर महीने अतिरिक्त कमाई हो रही है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं।” पारंपरिक पशुपालन बना स्थायी आय का माध्यम प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के माध्यम से कृषि के साथ पशुपालन जैसी आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर तैयार हो रहे हैं। ओम प्रकाश यादव की सफलता बताती है कि योजनाबद्ध सहायता और सही संसाधनों के उपयोग से पारंपरिक पशुपालन को नियमित आय के साधन में बदला जा सकता है।

बालोद सड़क दुर्घटना पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जताया गहरा शोक

बालोद सड़क दुर्घटना पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जताया गहरा शोक शोकाकुल परिवारों के प्रति व्यक्त की संवेदना, घायलों के समुचित उपचार के दिए निर्देश रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बालोद जिले के मरकाटोला घाट में हुई भीषण सड़क दुर्घटना में कई लोगों के असामयिक निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस हृदयविदारक घटना में अपने प्रियजनों को खोने वाले शोकाकुल परिवारों के प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति तथा घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की है। मुख्यमंत्री श्री साय ने घायलों के समुचित उपचार के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि दुःख की इस घड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है।

गणेश विसर्जन झांकी के दौरान भारी वाहनों पर प्रतिबंध

राजनांदगांव. गणेश विसर्जन झांकी के दौरान शहर में शुक्रवार को भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। इस संबंध में यातायात पुलिस ने ट्रेफिक एडवाइजरी जारी की है। ज्ञात हो कि 25 सितंबर को शहर में गणेश विसर्जन झांकी एवं 25 एवं 26 को गणेश प्रतिमाओं का मोहारा कुण्ड में विसर्जन किया जाना है। इस दौरान शहर में श्रद्धालुओं एवं आम नागरिकों की बड़ी संख्या में आवाजाही को देखते हुए यातायात पुलिस राजनांदगांव द्वारा 25 सितंबर के दोपहर 2 बजे से 26 सितंबर के सुबह 10 बजे तक विशेष यातायात व्यवस्था की गई है। इस दौरान फरहद चौक, ट्रांसपोर्ट नगर, मोहारा बायपास, गठुला एवं सीआईटी बायपास से राजनांदगांव शहर की ओर आने वाले सभी हल्के एवं भारी चारपहिया वाहनों का आवागमन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। गणेश पंडालों में चोरी : चोरों ने भगवान के पंडाल को भी नहीं छोड़ा गणेश उत्सव के बीच खैरागढ़ थाना क्षेत्र में चोरों ने अब भगवान के पंडालों को भी | निशाना बनाना शुरू कर दिया है। थाना क्षेत्र के सरागोंदी, आमदनी और भोरामपुर गांव में अलग-अलग गणेश पंडालों से कलश, थाली समेत अन्य पूजन सामग्री चोरी होने का मामला सामने आया है। एक साथ तीन गांवों में हुई चोरी की घटनाओं से गणेश उत्सव समितियों और ग्रामीणों में हड़कंप मच गया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद गणेश उत्सव समितियों के पदाधिकारी और ग्रामीण खैरागढ़ थाना पहुंचे। उन्होंने पुलिस को लिखित आवेदन सौंपकर अज्ञात चोरों का पता लगाने और मामले की जांच की मांग की है। ग्रामीणों के मुताबिक गणेश उत्सव के दौरान पंडालों में देर रात तक श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद पंडालों से पूजन सामग्री चोरी होने से श्रद्धालु सकते में है।

विकसित ग्राम पंचायत योजना को लेकर राज्य स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित

विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करने राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण आयोजित  आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा की अध्यक्षता में सभी जिलों के सहायक परियोजना अधिकारियों एवं प्रोग्रामरों को दिया गया प्रशिक्षण 2 अक्टूबर से ग्राम सभाओं में शुरू होगी योजना निर्माण की प्रक्रिया, ग्रामीणों की भागीदारी से तय होंगी विकास की प्राथमिकताएं रायपुर,  विकसित भारत -जीरामजी योजना के अंतर्गत प्रदेश की ग्राम पंचायतों में विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी) तैयार करने के लिए आज ठाकुर प्यारेलाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान, निमोरा में राज्य स्तरीय जिला मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। विकसित भारत-जीरामजी के आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित प्रशिक्षण में प्रदेश के सभी जिलों के सहायक परियोजना अधिकारियों एवं प्रोग्रामरों ने भाग लिया।     आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा ने सभी प्रशिक्षार्थियों से कहा कि विकसित ग्राम पंचायत योजना प्रक्रिया में ग्रामीणों एवं पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा में  प्रत्येक गांव की जरूरतों और प्राथमिकताओं पर खुलकर संवाद किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बस्ती एवं वार्ड स्तर तक पहुंचकर अधिक से अधिक ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए।     प्रशिक्षण में ग्राम पंचायत स्तर पर ग्रामीणों की सहभागिता से विकास योजना तैयार करने, डिजिटल मैपिंग, परिसंपत्तियों के सत्यापन और योजनाओं के समेकन की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य जिला मास्टर ट्रेनर्स को योजना निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया से अवगत कराना है, ताकि ग्राम पंचायत स्तर पर निर्धारित समय-सीमा में योजनाएं तैयार की जा सकें।        प्रशिक्षण में बताया गया कि 2 अक्टूबर से प्रदेश की ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाओं के माध्यम से विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। ग्राम सभाओं में ग्रामीणों को गांव के आधारभूत आंकड़ों, उपलब्ध संसाधनों, मानचित्रों और प्रस्तावित विकास कार्यों की जानकारी दी जाएगी। ग्रामीण स्वयं अपने गांव की जरूरतों, समस्याओं और विकास की प्राथमिकताओं को तय करने में भागीदारी निभाएंगे। ग्राम सभाओं में प्राप्त सुझावों के आधार पर ग्राम पंचायतों की आगामी विकास कार्ययोजना तैयार की जाएगी। अक्टूबर-नवंबर में सीधा संवाद और दिसंबर में होगा योजना का अनुमोदन       प्रशिक्षण में जानकारी दी गई कि अक्टूबर और नवंबर माह में बस्ती एवं वार्ड स्तर पर ग्रामीणों के साथ बैठकें आयोजित कर सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन किया जाएगा। इन बैठकों में ग्रामीणों से गांव की समस्याओं, आवश्यक सुविधाओं, उपलब्ध संसाधनों और प्रस्तावित विकास कार्यों के संबंध में सुझाव प्राप्त किए जाएंगे।       इस दौरान गांवों में मौजूद परिसंपत्तियों का स्थल सत्यापन भी किया जाएगा। ऐसी परिसंपत्तियां, जो भौतिक रूप से उपलब्ध हैं लेकिन डिजिटल अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं, उन्हें युक्तधारा पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर प्रस्तावित विकास कार्यों के संभावित स्थानों को डिजिटल मानचित्र पर चिह्नित किया जाएगा।       दिसंबर माह में तैयार विकसित ग्राम पंचायत योजना का प्रारूप ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। ग्रामीणों के सुझावों और आवश्यक विचार-विमर्श के आधार पर योजना में संशोधन कर उसे अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद ग्राम सभा से औपचारिक अनुमोदन प्राप्त कर योजना को विकासखंड स्तर पर भेजा जाएगा। ग्राम पंचायतों से प्राप्त योजनाओं का विकासखंड एवं जिला स्तर पर समेकन 15 जनवरी तक पूरा किया जाएगा। जल सुरक्षा, आजीविका और ग्रामीण अधोसंरचना पर विशेष ध्यान       विकसित ग्राम पंचायत योजना में जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका से संबंधित अधोसंरचना और प्रतिकूल मौसमीय घटनाओं के प्रभाव को कम करने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। योजना निर्माण के दौरान गांवों में उपलब्ध प्राकृतिक एवं भौतिक संसाधनों का आकलन किया जाएगा। इस प्रशिक्षण में संयुक्त आयुक्त , वीबी – जी राम जी रामाधन श्रीवास, दीपक शर्मा, अधीक्षण अभियंता विनय गुप्ता, सहायक आयुक्त यशवत चंद्राकर,  राज्य एमआईएस नोडल अधिकारी मजहर शामी, वीबी जी राम जी संकाय सदस्य आनंद रघुवंशी ने शामिल होकर विकसित ग्राम पंचायत योजना निर्माण की प्रक्रिया एवं तकनीकी बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण दिया ।

‘अंत्योदय और एकात्म मानव दर्शन के विचार राष्ट्र के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे’—वित्त मंत्री चौधरी

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया श्रद्धापूर्वक नमन नवा रायपुर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण ‘अंत्योदय और एकात्म मानव दर्शन के विचार राष्ट्र के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे’—वित्त मंत्री चौधरी रायपुर अंत्योदय और एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने आज नवा रायपुर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस अवसर पर मंत्री गुरु खुशवंत साहेब सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। वित्त मंत्री चौधरी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के राष्ट्र निर्माण में योगदान और उनके विचारों का स्मरण करते हुए कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को केंद्र में रखने वाला ‘अंत्योदय’ का उनका विचार आज भी प्रासंगिक और प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानव दर्शन के माध्यम से समाज और राष्ट्र के समग्र विकास की अवधारणा प्रस्तुत की। उनका चिंतन समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने की प्रेरणा देता है। चौधरी ने कहा कि ‘अंत्योदय’ जैसे कालजयी विचार के सूत्रधार पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार और आदर्श राष्ट्र के लिए सतत प्रेरणा बने रहेंगे।

विकसित राज्य @2047: शिक्षा और युवा शक्ति से बनेगा नया भारत

विशेष लेख "सेवा_संकल्प_अभियान" विकसित राज्य @2047: शिक्षा, नवाचार और युवा शक्ति से गढ़ी जा रही स्वर्णिम भारत की नई गाथा ज्ञान और युवा शक्ति: विकास का मूल आधार  रायपुर                   ​किसी भी समृद्ध और सर्वसुविधायुक्त राज्य का निर्माण केवल भौतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि उसके युवाओं की बौद्धिक क्षमता और कार्यकुशलता से संभव होता है। इसी दूरदर्शी सोच के साथ प्रदेश के विकास मॉडल के केंद्र में 'GYAN' यानी गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी को रखा गया है। युवाओं को आर्थिक और सामाजिक उन्नति का मुख्य आधार मानते हुए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक व्यापक और परिणामोन्मुख कायाकल्प की शुरुआत की जा चुकी है। अब शिक्षा को केवल औपचारिक डिग्रियों तक सीमित न रखकर आधुनिक उद्योगों की माँग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और व्यावसायिक बनाया जा रहा है। उच्च शिक्षा में मिशन मोड: उपलब्धियां और लक्ष्य          ​राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत उच्च शिक्षा विभाग पूरी तरह से 'मिशन मोड' में कार्य कर रहा है। 'उच्च शिक्षा मिशन योजना' के सतत प्रयासों का ही परिणाम है कि प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात (GER) वर्ष 2021-22 के 19.6 प्रतिशत से उल्लेखनीय बढ़त हासिल करते हुए वर्तमान में 27.5 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जिसे वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण और समावेशी विकास को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक सर्वसुविधायुक्त 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' महाविद्यालय की स्थापना की जा रही है। इसके साथ ही, शोध और अनुसंधान की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'राज्य रिसर्च एवं इनोवेशन योजना' का खाका तैयार किया गया है। शिक्षा को जड़ों से जोड़ने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान के साथ-साथ पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणाली को भी विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रमों में प्रमुखता से शामिल किया गया है। गुणवत्ता, अवसंरचना और रोजगार के नए अवसर          ​शिक्षा में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नैक (NAAC) मूल्यांकन पर विशेष बल दिया जा रहा है, जिसके तहत पात्र 254 शासकीय महाविद्यालयों में से 200 तथा 09 में से 05 विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन सफलता से पूर्ण हो चुका है। भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए शैक्षणिक अवसंरचना का भी तेज़ी से विस्तार किया जा रहा है; वर्ष 2025–26 में 08 नए शासकीय महाविद्यालय, 05 नए निजी महाविद्यालय और 03 नए निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। संस्थाओं में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए प्राध्यापकों, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल व क्रीड़ाधिकारी के पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे ये समन्वित प्रयास वर्ष 2047 के स्वर्णिम और विकसित प्रदेश की एक सुदृढ़ नींव रख रहे हैं। विष्णु प्रसाद वर्मा सहायक संचालक

स्वच्छ माहौल और अनुशासित जीवन, बच्चियों की दिनचर्या ने खींचा ध्यान

कांकेर  छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने गुरुवार, 24 सितंबर को कांकेर प्रवास के दौरान प्रयास कन्या छात्रावास एवं आदिवासी आवासीय विद्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने छात्राओं के साथ आत्मीय संवाद करते हुए उनके रहन-सहन, पढ़ाई और विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। छात्राओं ने भी सहजता के साथ अपनी आवश्यकताओं और समस्याओं को आयोग अध्यक्ष के समक्ष रखा। निरीक्षण के दौरान छात्राओं ने बताया कि छात्रावास में वेंडिंग मशीन उपलब्ध है, लेकिन पैड डिस्पोजल मशीन की सुविधा नहीं है। साथ ही बिजली की समस्या के कारण पढ़ाई प्रभावित होती है। छात्राओं ने बिजली की समस्या के स्थायी समाधान के लिए सोलर पैनल तथा आपातकालीन लाइट की व्यवस्था की आवश्यकता बताई। इसके अलावा बेहतर डिजिटल शिक्षा के लिए कंप्यूटर और स्मार्ट क्लास हेतु स्मार्ट बोर्ड उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। डॉ. वर्णिका शर्मा ने छात्राओं की बातों को गंभीरता और संवेदनशीलता से सुना तथा आवश्यक सुविधाओं के लिए उचित स्तर पर पहल करने का आश्वासन दिया। छात्राओं ने सूर्यकिरण में रहने की इच्छा भी व्यक्त की, जिस पर उन्होंने उनके लिए उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया। छात्राओं ने मुख्यमंत्री से मिलने की इच्छा भी जताई। आयोग अध्यक्ष ने छात्रावास में स्वच्छता, अनुशासन और व्यवस्थित वातावरण की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों की आवश्यकताओं को समझने और उनकी बातों को सीधे सुनने से ही बाल अधिकारों की वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। निरीक्षण के दौरान डॉ. वर्णिका शर्मा के साथ छात्राओं का आत्मीय एवं  मातृत्वपूर्ण व्यवहार रहा, जिससे छात्राएं भी सहज और उत्साहित नजर आईं। डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों को केवल शिक्षा उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित, स्वच्छ, सम्मानजनक और सुविधायुक्त वातावरण देना भी हमारी जिम्मेदारी है। बच्चों की छोटी-छोटी आवश्यकताओं को समय पर पूरा करना उनके बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और आयोग हमेशा उनके लिए तत्पर है।