samacharsecretary.com

शरजील इमाम-उमर खालिद को नहीं मिली राहत, दिल्ली कोर्ट ने बेल अर्जी की खारिज

 नई दिल्ली दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम और उमर खालिद को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की एक अदालत ने उनकी जमानत याचका खारिज कर दी हैष शनिवार को दोनों ओर से दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। शाम को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी की अदालत ने दोनों आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट में उमर की ओर से अधिवक्ता त्रिदीप पेस और शरजील की ओर से अधिवक्ता मुस्तफा ने दलीलें पेश की थीं। जमानत के लिए क्या दी गई दलील? उमर खालिद और शरजील इमाम ने जमानत याचिकाओं में दलील दी कि मुकदमे की सुनवाई शुरू हुए बिना उन्हें लगातार हिरासत में रखना स्वतंत्रता के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। उनकी याचिका में इस बात पर जोर दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से फैसले के 6 महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद, मुकदमे की कार्यवाही में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है और आरोपों पर बहस अभी भी अधूरी है। उन्होंने दलील दी कि वे इस मामले में लगभग 6 साल से जेल में हैं। खालिद की याचिका में यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने भले ही उनकी पिछली जमानत याचिका खारिज कर दी थी लेकिन उसके बाद हुए न्यायिक घटनाक्रम से परिस्थितियों में बदलाव आया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नई याचिका की थी दायर उन्होंने मई में एक अन्य मामले में अदालत की उस टिप्पणी का जिक्र किया, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया था कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत भी जमानत नियम है। सुप्रीम कोर्ट ने पांच जनवरी को यूएपीए मामले में दोनों को जमानत देने से इनकार कर दिया था जिसके बाद ये नई याचिकाएं दायर की गई थीं। उमर खालिद, शरजील इमाम और कई अन्य लोगों पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के पीछे कथित व्यापक साजिश का हिस्सा होने के आरोप में आतंकवाद-रोधी कानून यूएपीए और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

ऐप से ई-रिक्शा लॉक होने का दावा कितना सच? साइबर एक्सपर्ट ने बताई हकीकत

नई दिल्ली  एक वायरल वीडियो से ईवी की बैटरी सुरक्षा को सस्ती लिथियम बैटरी वाले ई-रिक्शा में लग सकता है 'रिमोट ब्रेक' लेकर सवाल उठ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें ई-रिक्शा को चलते चलते एक ऐप(BAT/BMS) से लॉक होने की बात कही जा रही है। बैटरियों में नहीं होती ब्लूटूथ की सुविधा साइबर एक्सपर्ट शौर्य कौशिक ने बताया कि वायरल वीडियो में जो दावा किया जा रहा है, वैसा कमजोर बैटरी वाले ई-रिक्शा में हो सकता है। भारत में लिथियम बैटरी वाले कई ई-रिक्शा निर्माता अपनी अलग-अलग बैटरी मैनेजमेंट तकनीक और अलग मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करते है। इन्हें इस ऐप से कनेक्ट नहीं किया जा सकता। लेड एसिड बैटरियों पर चल रहे हैं ई-रिक्शा साथ ही कई ई-रिक्शा पारंपरिक लेड एसिड बैटरियों पर चल रहे हैं। इन बैटरियों में भी ब्लूटूथ की सुविधा नहीं होती। उन्होंने साफ कहा कि यह साइबर सुरक्षा में सेंध या साइबर हमला नहीं है, बल्कि कुछ बैटरी सिस्टम में मौजूद कमजोर सुरक्षा व्यवस्था की समस्या है। 'सभी ई-रिक्शा नहीं हो सकते ऐप से ऑफ' एनबीटी रिपोर्टर ने इस ऐप को डाउनलोड कर हकीकत जानने की कोशिश की। ई-रिक्शा स्टैंड के बाहर जब इस ऐप को ऑन किया तो इस पर कुछ ब्लूटूथ डिवाइस कनेक्ट हुए, लेकिन इन्हें कनेक्ट करने पर भी बैटरी को बंद करने का विकल्प ऐप पर नही दिखा। द्वारका के ई-रिक्शा डीलर सुमित अग्रवाल ने बताया कि यह ऐप बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम के लिए है। यह सिर्फ उन्हीं बैटरियों के साथ काम करता है, जिनमें संबंधित बीएमसी और ब्लूटूथ मॉड्यूल मौजूद होता है। ऐसे ई-रिक्शा को उस ऐप से कट्रोल करना संभव है।

दिल्ली की नई ईवी पॉलिसी में सब्सिडी, रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क से बड़ी राहत

नई दिल्ली मुख्यमंत्रीा रेखा गुप्ता का कहना है कि नई ईवी पॉलिसी 2026 सिर्फ प्रदूषण कम करने की योजना नहीं, बल्कि आम लोगों के पैसे बचाने वाली नीति भी है। सीएम रेखा गुप्ता के मुताबिक, ईवी खरीदारों को इलेक्ट्रिक टू वीलर पर 50 हजार रुपये, ई-ऑटो पर 75 हजार और कमर्शल एन-1 गुड्स कैरियर पर 1.50 लाख रुपये तक की शुरुआती बचत हो सकती है। रेखा गुप्ता का कहना है कि इस नीति का मकसद ईवी की शुरुआती खरीद लागत के साथ-साथ उनके पूरे जीवनकाल में होने वाले खर्च को कम करना है ताकि  अधिक से अधिक लोग ईवी अपनाने के लिए प्रेरित हों। सरकार देती है प्रोत्साहन राशि, आजीवन रोड टैक्स में छूट मुख्यमंत्री ने दावा किया कि नई ईवी पॉलिसी नई गाड़ी खरीदने के लिए प्रोत्साहित करता है, प्रदूषण वाली पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने पर प्रोत्साहन राशि देता है, आजीवन रोड टैक्स में छूट है, रजिस्ट्रेशन शुल्क में माफी और पेट्रोल व डीजल गाड़ियों की तुलना में इसे चलाने में कम खर्च और रखरखाव भी सस्ता है। यही कारण है कि ईवी अब घरों, व्यावसायिक चालकों और छोटे-बड़े व्यवसायों के लिए सबसे समझदारी भरा आर्थिक विकल्प बन रहे हैं। इलेक्ट्रिक दोपहिया पर सब्सिडी     सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि इलेक्ट्रिक दोपहिया पर 30,000 रुपये तक की सब्सिडी, स्क्रैपिंग पर 10,000 रुपये की छूट, गाड़ी के पूरे जीवनकाल के लिए रोड टैक्स में छूट, रजिस्ट्रेशन शुल्क में पूरी माफी मिलेगी।     इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा (एल-5) खरीदने वाले को 50,000 रुपये तक की छूट नया ऑटो खरीदने पर मिलेगी। 25,000 रुपये स्क्रैपिंग के एवज में मिलेगे।     इलेक्ट्रिक ग्रामीण सेवा गाड़ी खरीदने वालो को पुरानी गाड़ियो को स्क्रैप कराने पर 15,000 रुपये, इलेक्ट्रिक एन-1 गुड्स कैरियर को 1 लाख रुपये तक नई गाड़ी खरीदने पर मिलेंगे, इन्हें 50,000 रुपये स्क्रैपिंग पर मिलेगा। पॉलिसी में कई वित्तीय फायदे जोड़े सीएम ने बताया कि खरीद प्रोत्साहन, स्क्रैपिंग प्रोत्साहन, आजीवन रोड टैक्स छूट और एकमुश्त रजिस्ट्रेशन शुल्क माफी का लाभ लेकर गाड़ी की वास्तविक खरीद लागत को काफी कम कर सकते है। इससे ईवी खरीदने के लिए दिल्ली देश के सबसे आकर्षक राज्यों में से एक बन गई है। रोड टैक्स की छूट सबसे अहम     सीएम ने कहा कि इस नीति के तहत रोड टैक्स से मिलने वाली छूट केवल नीति की अवधि तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गाड़ी के पूरे जीवन काल तक लागू रहेगी। साथ ही गाड़ी खरीदते समय रजिस्ट्रेशन शुल्क में भी पूरी छूट मिलेगी।     प्राइवेट इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर प्रोत्साहन का प्रावधान नहीं है। लेकिन पारंपरिक ईंधन वाली कार को स्क्रैप कर इलेक्ट्रिक कार खरीदता है तो एक लाख रुपये तक की राशि मिलेगी।

पुरानी मतदाता सूची से मैपिंग न होने से मतदाताओं की बढ़ी परेशानी

नई दिल्ली  स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया जारी है। घर-घर पहुंच रहे बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को अब नई समस्या का सामना करना पड़ रहा है। लोग 2002 की मतदाता सूची से अपना मिलान नहीं कर पा रहे हैं। कई लोग ऐसे हैं जो 2002 में ही मतदाता बनने के लिए एजिलिबल हो गए थे, लेकिन उन्होंने अपने वोटर कार्ड नहीं बनवाए। ऐसे लोगों के नाम नहीं मिल रहे हैं। तकनीकी दिक्कतों से माता-पिता से नाम की मैपिंग नहीं करा पा रहे हैं। सूची से मैपिंग कराने में करना पड़ रहा दिक्कतों का सामना पुरानी मतदाता सूची से मैपिंग कराने में लोगों को सर्वाधिक दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग ऐसे हैं जो 2002 में 18 वर्ष के हो गए थे। लेकिन उन्होंने अपना मतदाता पहचान पत्र 2005 या उसके बाद बनवाया। इससे उनका नाम सूची में नहीं मिल रहा है। चुनाव आयोग ने व्यवस्था की है कि जो 2002 की सूची में नहीं है वह अपने माता-पिता या दादा-दादी के नाम के साथ मैपिंग कर सकते हैं। अब समस्या आ रही है कि उनकी मैपिंग माता-पिता के नाम के साथ नहीं हो पा रही है। कुछ ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं जिनमें माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है। दादा-दादी के बारे में भी जानकारी नहीं है। 2002 में वे मतदाता नहीं थे और अब मैपिंग में अपना नाम नहीं दिखा पा रहे हैं। कई मामलो में माता-पिता की मौत हो चुकी पटपड़गंज इलाके में एन्युमरेशन फॉर्म भरवा रहे BLO अरुण कुमार ने बताया कि ऐसे कई मामले सामने आ रहे है, जिनमें 2002 में एलिजिबल होकर भी मतदाता पहचान पत्र नहीं बनवाया, अब उनके नाम नहीं मिल रहे हैं। कई मामलो में माता-पिता की मौत हो चुकी है। उनके नाम की मैपिंग करना चुनौतीभरा साबित हो रहा है। उत्तर भारत पहुंचा मॉनसून, दिल्ली-यूपी-बिहार से लेकर पंजाब-हरियाणा तक कैसी होगी बरसात? हम उनको समझा रहे हैं कि अगर आपका नाम 5 अगस्त को प्रकाशित होने वाले ड्राफ्ट रोल में नहीं आता है, तो उनके पास दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका है। इसके बाद जरूरी 12 दस्तावेज में से कोई भी एक पेश करके वह अपना नाम जुड़वा सकते हैं। लेकिन, लोगों में डर का माहौल है कि उनका नाम कट जाएगा तो वापस नहीं जुड़ेगा। ऐसे में लोगों को समझाने में काफी मुश्किल हो रही है। चुनाव आयोग के मुताबिक 2002 में एलिजिबल होकर भी मतदाता पहचान पत्र नहीं बनवा सके तो माता-पिता से अपनी मैपिंग करा सकते हैं। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। 3 दिनों में बांटे 21 लाख से ज्यादा फॉर्म SIR के तीसरे दिन बीएलओ ने घर-घर जाकर एन्युमरेशन फॉर्म बांटे। गुरुवार की रात 8 बजे तक दिल्ली में कुल 21 लाख 2 हजार 79 चुनावी फॉर्म वांटे जा चुके है, जो कि कुल मतदाताओं का 14.49 प्रतिशत है। हालांकि, बांटे गए फॉर्मों को डिजिटल प्लैटफॉर्म पर दर्ज करने यानी डिजिटाइजेशन की रफ्तार अभी काफी धीमी है। अब तक केवल 63 हजार 620 फॉर्मों का ही डिजिटाइजेशन हो पाया है।

Delhi HC की ध्रुव राठी को फटकार, अदालत बोली- भावनाएं आहत करने वाला कंटेंट नहीं चलेगा

नई दिल्ली यूट्यूबर ध्रुव राठी के एक विवादित वीडियो को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने सरकार की शिकायत अपीलीय समिति (Grievance Appellate Committee-GAC) को आदेश दिया है कि वह वीडियो हटाने की मांग वाली अपील पर 15 दिनों के भीतर फैसला सुनाए. कोर्ट ने यह भी कहा कि उसके आदेश की किसी भी तरह की अनदेखी को गंभीरता से लिया जाएगा।  यह मामला ध्रुव राठी के इसी साल 21 मार्च को अपलोड किए गए यूट्यूब वीडियो 'क्या हिंदू बीफ खा सकते हैं? केरल स्टोरी 2 का पर्दाफाश' से जुड़ा है. याचिकाकर्ता वकील अमिता सचदेवा का आरोप है कि इस वीडियो में भगवान राम, माता सीता और भगवान कृष्ण के बारे में कथित तौर पर कहा गया कि वे मांस और शराब का सेवन करते थे, जिससे करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।  सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने कहा कि यूट्यूब जैसे इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म को उचित सावधानी बरतनी चाहिए थी. उनका तर्क था कि आपत्तिजनक और नफरत फैलाने वाले कंटेंट को तुरंत हटाया जाना चाहिए था. उन्होंने अदालत से कहा कि ध्रुव राठी का वीडियो नुकसान पहुंचाने वाला है और समाज में फूट डालने वाला कंटेंट है।  या तो गूगल वीडियो हटाए, या कोर्ट दे आदेश! एएसजी ने यह भी कहा कि या तो गूगल खुद वीडियो हटाने का फैसला करे या फिर अदालत इस मामले में उचित आदेश पारित करे. उन्होंने कहा कि ऐसे कंटेंट को मंच नहीं मिलना चाहिए, जो बहुसंख्यक समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता हो।  15 दिनों के भीतर GAC को देना होगा फैसला- कोर्ट वहीं गूगल की तरफ से पेश वकील ने अदालत को बताया कि कंपनी अपना जवाब याचिकाकर्ता को दे चुकी है और इस मामले में GAC के सामने अपील भी दायर कर दी गई है. इसके बाद जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने GAC को 15 दिनों के भीतर अपील पर फैसला लेने का निर्देश दिया।  फिलहाल हाईकोर्ट ने वीडियो हटाने पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है. अब सभी की नजर GAC के फैसले पर टिकी है, जिसे अदालत के निर्देश के मुताबिक अगले 15 दिनों के भीतर अपना फैसला देना होगा। 

पति ने तलाक के साथ भेजीं पत्नी की प्राइवेट तस्वीरें, हाई कोर्ट की टिप्पणी से छिड़ी बहस

नई दिल्ली  दिल्ली हाई कोर्ट में एक अजीब मामला सामने आया है। एक शख्स ने दिल्ली हाई कोर्ट में तलाक की अर्जी के साथ पत्नी की प्राइवेट तस्वीरें भी भेज दी। अदालत ने व्यक्ति के इस कदम पर हैरानी जताई। हालांकिइसके बावजूद पति और उसके वकील के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह कृत्य गंभीर चूक की श्रेणी में आता है। लेकिन प्रतिवादी पति व वकील ने माफी मांग ली है। इसलिए उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई उचित नहीं है। हाई कोर्ट यह भी कहा कि इस तरह से संवेदनशील दस्तावेजों को सीलबंद लिफाफे में सबमिट करना चाहिए। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ ने की। अदालत ने अपने फैसले में माना कि हालांकि इस तरह के कृत्य को खुली मंजूरी नहीं दी जा सकती। लेकिन इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि वैवाहिक विवाद के मामलों में इस तरह की गलतियां अकसर हो जाती हैं। इन्हें सुधारा जाना चाहिए। इस मामले में वर्ष 2015 के दिल्ली हाई कोर्ट के एक पूर्व फैसले के उल्लंघन का आरोप लगाया गया। अदालत ने कहा- दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में पेश होने चाहिए उस फैसले में निर्देश दिया गया था कि संवेदनशील या निजी प्रकृति के दस्तावेजों को पहले अदालत की अनुमति लेकर सीलबंद लिफाफे में पेश किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता महिला का तर्क था कि प्रतिवादियों ने फैमिली कोर्ट में दायर तलाक की अर्जी के साथ बिना किसी बदलाव के निजी तस्वीरें लगाकर उन निर्देशों का उल्लंघन किया। हालांकि हाई कोर्ट की पीठ ने गौर किया कि प्रतिवादियों का दावा है कि उन्हें उन निर्देशों की जानकारी नहीं थी। पीठ ने कहा कि इसके अलावा जब प्रतिवादी पति व उसके वकीलों से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपने कार्यों को सही ठहराने की कोशिश नहीं की, बल्कि बिना शर्त माफी मांगी है। उन्होंने फैमिली कोर्ट में उन तस्वीरों को सीलबंद लिफाफे में रखने के लिए एक अर्जी दाखिल की है। पीठ ने कहा कि इसे गंभीर चूक माना जा सकता है। लेकिन अवमानना की कार्रवाई शुरु करना उचित नहीं है। अदालत ने पति को चेतावनी दी पीठ ने साथ ही यह चेतावनी भी दी कि महिला से संबंधित मामलों में इस तरह की भविष्य में गलती नहीं होनी चाहिए। अवमानना ​​याचिका का निपटारा करते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता महिला को अपनी पहचान छिपाने व संबंधित सामग्री की सुरक्षा के लिए फैमिली कोर्ट में जाने की छूट दी। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट से यह भी अनुरोध किया कि वे तस्वीरों को खुले रिकॉर्ड से हटा दें। उन्हें सीलबंद लिफाफे में रखें।

स्पेशल सेल की बड़ी कार्रवाई, दिल्ली में फायरिंग की साजिश रच रहे चार गिरफ्तार

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने राष्ट्रीय राजधानी में बड़े आतंकी हमले की साजिश को नाकाम करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक ये सभी पाकिस्तान स्थित ISI हैंडलर शाहजाद भट्टी के संपर्क में थे और उसके निर्देश पर दिल्ली में फायरिंग जैसी आतंकी वारदात को अंजाम देने की तैयारी कर रहे थे। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी विदेशी फोन नंबरों और एन्क्रिप्टेड माध्यमों से अपने पाकिस्तानी आकाओं के संपर्क में रहते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शुभदीप सिंह (23), गुरजंत सिंह (22), साजन सिंह (28) और गगनप्रीत (24) के रूप में हुई है। इनमें तीन आरोपी पंजाब के और एक दिल्ली से पकड़ा गया है। पुलिस ने इनके कब्जे से दो विदेशी पिस्तौल, नौ जिंदा कारतूस और पांच मोबाइल फोन बरामद किए हैं। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है। क्या-क्या बरामद हुआ?     दो विदेशी निर्मित पिस्तौल।     नौ जिंदा कारतूस।     पांच मोबाइल फोन, जिनमें अहम डिजिटल सबूत मिलने की संभावना है। ड्रोन से पहुंचते थे हथियार और नशा     पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि हथियार और मादक पदार्थ पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए पंजाब सीमा पर भेजे जाते थे।     इसके बाद इन्हें अलग-अलग राज्यों में पहुंचाने का काम किया जाता था। दिल्ली में की थी रेकी     पुलिस के अनुसार आरोपी गगनप्रीत ने दिल्ली के कई पुलिस थानों और धार्मिक स्थलों की रेकी की थी।     उसे राजधानी में फायरिंग की घटना को अंजाम देने की जिम्मेदारी दी गई थी। जांच का दायरा बढ़ा     स्पेशल सेल अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।     जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इस मॉड्यूल के देश के अन्य राज्यों में भी संपर्क थे या नहीं। हाल के महीनों में शाहजाद भट्टी से जुड़े कई मॉड्यूल के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है, जिससे संकेत मिलता है कि सुरक्षा एजेंसियां ऐसे नेटवर्क पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

सीएम रेखा गुप्ता ने शुरू किया ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान, रिज वन पुनरुद्धार को मिलेगा बल

नई दिल्ली  सीएम रेखा गुप्ता ने बुधवार को ग्रीन ड्राइव पोर्टल (greendrive.delhivanmahotsav.in) का शुभारंभ किया। यह पोर्टल आगामी 'रिज वन पुनरुद्धार कार्यक्रम' ' एक पेड़ मां के नाम ' अभियान को जन आंदोलन के रूप में शुरू करने की पहल है। सीएम ने सभी लोगों से अपील की कि वह इस महाअभियान में हिस्सा लें। इस कार्यक्रम में दिल्ली ग्रीन वॉरियर्स भी शामिल हुए। सीएम ने कहा कि राजधानी को हरा भरा और साफ बनाने का यह अभियान सरकार के साथ-साथ जनभागीदारी से ही सफल होगा। उन्होंने कहा कि यह पोर्टल सिर्फ एक डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि जनभागीदारी का सशक्त माध्यम है। अब कोई भी व्यक्ति घर बैठे अपने मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए सीधे इस अभियान से जुड़ सकता है। सीएम ने कहा कि यह दिल्ली के हर नागरिक का अभियान है। लोग एक पेड़ मां के नाम जरूर लगाएं। इससे वे आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा और हरित पर्यावरण का उपहार दे सकते हैं। पोर्टल पर मिलने वाली सुविधाएं     पौधारोपण स्लॉट बुकिंग- लोग अपनी सुविधा के मुताबिक इस पोर्टल पर स्थान और समय का चयन कर पौधारोपण का ऑनलाइन स्लॉट बुक करवा सकते हैं।     वृक्ष रथ सुविधा- यदि किसी व्यक्ति, स्कूल, कार्यालय, आरडब्ल्यूए या आवासीय सोसायटी के पास पौधारोपण के लिए पर्याप्त स्थान है, तो दिल्ली सरकार निशुल्क पौधे सीधे उनके परिसर तक पहुंचाएगी।     नर्सरी लोकेटर- इस फीचर की मदद से नागरिक अपने पास की सरकारी नर्सरी की लोकेशन जानकर वहां से सीधे निशुल्क पौधे ले सकता है।     एनवायरमेंट सेवियर- इसके जरिए लोग दिल्ली सरकार के पर्यावरण अभियानों से सीधे जुड़कर एक जिम्मेदार 'ग्रीन वॉरियर' के रूप में अपना स्थायी योगदान दे सकेंगे। क्या है विशेष     जुलाई में गृह मंत्री अमित शाह रिज वन पुनरुद्धार कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन करेंगे।     70 लाख पौधे पूरी दिल्ली में लगाए जाएंगे।     300 नई इलेक्ट्रिक बसों और नए अंतरराज्यीय मार्गों की बसों को हरी झंडी दिखाई जाएगी।     रिज में देसी और दीर्घायु प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जाएगा।

Delhi New Rules: बाहरी वाहनों पर रोक, बिना PUC पेट्रोल-डीजल नहीं, 4 महीने सख्त रहेगा सिस्टम

नई दिल्ली सर्दियों में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत 1 नवंबर से सरकारी और निजी दफ्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति को सीमित किया जाएगा। नए नियमों के अनुसार, दफ्तरों में एक समय पर केवल 50 % कर्मचारी ही काम करेंगे, जबकि बाकी कर्मचारी घर से काम यानी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। यह व्यवस्था प्रदूषण के स्तर को कम करने और सड़कों पर वाहनों की संख्या घटाने के उद्देश्य से लागू की जाएगी। इसके साथ ही दिल्ली में वाहनों की पार्किंग दरों को दोगुना करने का फैसला लिया गया है। सरकार का मानना है कि पार्किंग शुल्क बढ़ने से लोग निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करेंगे और सार्वजनिक परिवहन की ओर बढ़ेंगे। सरकार ने सर्दियों के दौरान लागू होने वाले ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) की पाबंदियों को अब पूरे सीजन के लिए लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत GRAP के अलग-अलग चरणों में लगने वाले प्रतिबंध हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक स्वत: प्रभावी रहेंगे। दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए लागू किए गए नए दिशा-निर्देशों को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि इन नियमों में पुराने सभी आदेशों को एकीकृत कर एक स्पष्ट, सरल और सख्त व्यवस्था तैयार की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नई व्यवस्था से सरकारी विभागों, संस्थानों और आम लोगों के लिए नियमों का पालन करना आसान होगा। उन्होंने कहा कि अधिसूचना तैयार करते समय पिछले वर्षों के प्रदूषण स्तर, अनुभवों और वायु गुणवत्ता से जुड़े आंकड़ों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। उन्होंने कहा कि नए दिशा-निर्देशों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की ओर से जारी संशोधित ग्रैप और सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के निर्देशों को भी शामिल किया गया है। रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में हर साल नवंबर से फरवरी के बीच प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। इसी चुनौती को देखते हुए सरकार ने ऐसी स्थायी व्यवस्था लागू की है, जिससे हर साल अलग-अलग आदेश जारी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकारी ऑफिसों की बदलेगी टाइमिंग दिल्‍ली में पिछले कई सालों में देखा गया है कि वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण व्‍हीकल्‍स से निकालने वाला धुआं होता है. इसमें निजी वाहनों की भूमिका सबसे ज्‍यादा होती है. इस समस्‍या से निपटने के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' सबसे बेहतर उपाय है. ऐसे में दिल्‍ली सरकार ने नवंबर से फरवरी तक पाबंदियों के दिनों में यातायात का दबाव कम करने के लिए ऑफिसों के अलग-अलग समय और घर से काम करने की व्यवस्था भी लागू की गई है. सर्दियों के दौरान, दिल्ली नगर निगम के तहत आने वाले कार्यालयों में सुबह 8:30 बजे से शाम पांच बजे तक काम होगा, जबकि दिल्ली सरकार के कार्यालयों में एक नवंबर से 28 फरवरी के बीच सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक काम होगा।  वायु प्रदूषण के दिनों में कुछ ऐसी होती है दिल्‍ली की स्थिति प्राइवेट ऑफिसों के लिए 50% वर्क फ्रॉम होम दिल्‍ली सरकार के मुताबिक, एक नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली सरकार और प्राइवेट ऑफिसों में 50 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी मौजूद नहीं रहेंगे, बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉर्म होम करेंगे. इससे सड़कों पर वाहनों की संख्‍या काफी कम होने की उम्‍मीद है. हालांकि, जरूरी और इमरजेंसी सर्विस (जैसे अस्पताल, सार्वजनिक यातायात, बिजली, पानी की आपूर्ति, साफ-सफाई, आपदा प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण करने वाली एजेंसियों) को इससे छूट दी गई है।      PUC सर्टिफिकेट दिखाने पर ही मिले पेट्रोल-डीजल  रेखा गुप्‍ता सरकार के अनुसार, दिल्ली में सभी पेट्रोल, डीजल और सीएनजी/एलपीजी खुदरा दुकानें पूरे साल सिर्फ वैध पीयूसीसी दिखाने पर ही पेट्रोल और डीजल देंगे. बिना वैध प्रमाणपत्र के ईंधन लेते पाए जाने पर वाहनों पर जुर्माना लगाया जा सकता है. इसकी जांच फिजिकल सर्टिफिकेट, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) प्रणाली और 'वाहन' जैसे इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस के जरिए की जाएगी।  PUC के बिना ईंधन नहीं मिलेगा अब पूरे वर्ष पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और LPG पंपों पर केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन दिया जाएगा, जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) होगा। सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन वाहनों के पास वैध PUC प्रमाणपत्र नहीं होगा, उन्हें ईंधन नहीं दिया जाएगा। साथ ही ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई भी की जाएगी। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नियंत्रण के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है। बाहरी वाहनों के प्रवेश पर रोक नए दिशा-निर्देशों के तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-6 से कम मानक वाले वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर रोक रहेगी। इसका उद्देश्य पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना है। हालांकि, इस प्रतिबंध से कुछ आवश्यक वाहनों को छूट दी गई है। CNG वाहन, इलेक्ट्रिक वाहन, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस वाहनों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति रहेगी। निर्माण गतिविधियां पर रहेगा प्रतिबंध नए दिशा-निर्देशों के तहत निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल पर नियंत्रण रखा जाएगा। इसके लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाली तोड़-फोड़ और खुले में होने वाली निर्माण गतिविधियों पर रोक रहेगी। सरकार का उद्देश्य निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल के कारण बढ़ने वाले प्रदूषण को कम करना है। सर्दियों के महीनों में हवा की गति कम होने और प्रदूषक तत्वों के जमा होने से दिल्ली की वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है। दफ्तरों में 50% उपस्थिति दिल्ली सरकार ने सरकारी और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सरकारी और निजी कार्यालयों में एक समय में केवल 50 % कर्मचारी ही कार्यालय से काम करेंगे, जबकि बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। यह व्यवस्था प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने और कार्यालय आने-जाने वाले वाहनों की संख्या कम करने के उद्देश्य से लागू की जाएगी। हालांकि, विभागाध्यक्षों और जरूरी सेवाओं से जुड़े अधिकारियों को नियमित रूप से कार्यालय आना होगा। आवश्यक सेवाओं के संचालन में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए ऐसे कर्मचारियों को इस नियम से अलग रखा गया है। पार्किंग शुल्क होगा दोगुना नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अधिकृत पार्किंग स्थलों पर अब … Read more

अब जानवरों के और करीब होंगे विजिटर्स, दिल्ली जू में ग्लास वॉल एनक्लोजर और आधुनिक सुविधाएं

नई दिल्ली  दिल्ली के चिड़ियाघर में आने वाले लोगों का अनुभव जल्द ही पूरी तरह बदलने वाला है। अब कई वन्यजीवों को दूर से देखने की बजाय विजिटर्स और जानवरों के बीच सिर्फ मजबूत ग्लास की दीवार जितनी दूरी होगी। इसके लिए एरिना (जहां दर्शकों के लिए वन्यजीव लाए जाते हैं) की डिजाइन बदली जाएगी, ताकि लोग उन्हें पहले से ज्यादा करीब और सुरक्षित तरीके से देख सकें। इसी बदलाव के साथ चिड़ियाघर के बड़े हिस्से के कायाकल्प का काम शुरू हो गया है। योजना को लेकर केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की 400 करोड़ रुपये की मंजूरी दे चुका है। रेप्टाइल हाउस का होगा निर्माण     केंद्र सरकार के डेलीगेटेड इन्वेस्टमेंट बोर्ड (DIB) से मंजूरी मिलने के बाद परियोजना अब जमीन पर पर काम शुरू हो गया है।     सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) के अधिकारियों के मुताबिक, डिजाइन की डीपीआर और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग कंसल्टेंट (PMC) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वन्यजीवों के बाड़ों का निर्माण नए सिरे से शुरू होगा।     अभी एरिना (जहां विजिटर्स के देखने के लिए वन्य जीव लाए जाते हैं) में विजिटर्स वन्यजीवों को काफी दूर से देख पाते हैं। एरिना की बनावट को ठीक किया जाएगा।     इसके तहत कई बाड़ों में वन्य जीव और लोगों के बीच सिर्फ ग्लास की दीवार होगी।     वहीं नाइट शेल्टर भी आधुनिक मानकों के अनुसार बनाए जाएंगे। इसके अलावा नए रेप्टाइल हाउस का भी निर्माण होगा। फिलहाल चिड़ियाघर में 72 बाड़ों में वन्यजीव रखे गए हैं। अत्याधुनिक अस्पताल और रेस्क्यू सेंटर भी बनेंगे वन्यजीवों के इलाज की व्यवस्था को भी आधुनिक बनाया जाएगा। मौजूदा अस्पताल का विस्तार कर करीब दो एकड़ में अत्याधुनिक हॉस्पिटल बनाया जाएगा, जिसमें ऑपरेशन थियेटर, पोस्टमार्टम रूम, लैब और जच्चा-बच्चा वार्ड जैसी सुविधाएं होंगी। इसके अलावा चार एकड़ में रेस्क्यू सेंटर और एक एजुकेशन सेंटर भी डिवेलप किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस चरण का काम पूरा होने के बाद 'वेलकम जू गेट' परिसर को भी नए रूप में डिवेलप किया जाएगा। यहां पिक-एंड-ड्रॉप ज़ोन, सरफेस पार्किंग और मल्टीलेवल पार्किंग जैसी सुविधाएं तैयार की जाएंगी।