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दिल्ली में नया रूल: NO PUC, NO Fuel! पेट्रोल-डीजल और CNG की मिलेगी कमी

 नई दिल्ली  दिल्ली की सड़कों पर गाड़ी चलाते हैं तो अब यह खबर सीधे आपसे जुड़ी है. क्योंकि सरकार ने साफ कर दिया है कि अब पेट्रोल-डीजल लेने से पहले आपकी गाड़ी का ‘हेल्थ रिपोर्ट’ यानी PUC सर्टिफिकेट देखी जाएगी. नहीं है तो सीधा मना. कोई बहाना नहीं, कोई राहत नहीं. प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए सरकार अब सीधे आम लोगों की जिम्मेदारी तय कर रही है।  दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर अब सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ निर्देश दिए हैं कि अब बिना वैलिड पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUC) के किसी भी वाहन को पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेगा. सरकार का कहना है कि यह कदम एयर क्वॉलिटी सुधारने के लिए बेहद जरूरी है और अब इसमें किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  ‘No PUC, No Fuel’ नियम पर सख्ती बुधवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ‘No PUC, No Fuel’ नियम को सख्ती से लागू किया जाए. दरअसल, यह नियम पिछले साल दिसंबर में शुरू की गई थी, लेकिन अब भी कई वाहन बिना वैलिड पीयूसी सर्टिफिकेट के सड़कों पर चल रहे हैं. सरकार का मानना है कि ऐसे वाहन प्रदूषण को तेजी से बढ़ा रहे हैं. नए आदेश के मुताबिक अब पेट्रोल पंप और गैस स्टेशनों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल उन्हीं वाहनों को फ्यूल दें जिनके पास वैलिड PUC सर्टिफिकेट हो. सभी पंपों को इस नियम का सख्ती से पालन करने को कहा गया है ताकि प्रदूषण पर लगाम लगाई जा सके।  पेट्रोल पंपों पर जाम की स्थिति दिल्ली के कई पेट्रोल पंपों पर इस नए नियम की सख्ती का असर साफ तौर पर देखने को मिलने लगा है. पेट्रोल पंप बिना वैलिड पीयूसी के फ्यूल देने से इंकार कर रहे हैं, ऐसे में कई पेट्रोल पंपों पर वाहनों की भारी भीड़ जमा होते देखी गई है. हालांकि सरकार ने इसकी तैयारी कर रखी है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में मामले को तत्काल निपटाया जा सके।  इस नियम को सख्ती से लागू कराने के लिए फूड एंड सप्लाई विभाग, ट्रांसपोर्ट विभाग, नगर निगम और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को जिम्मेदारी दी गई है. अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि किसी भी तरह की लापरवाही या ढिलाई पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि इस नियम के पालन में किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं होगी. नियम तोड़ने वालों के खिलाफ वाहन जब्त करने और अधिकतम जुर्माना लगाने जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे. सभी एजेंसियों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है ताकि इस नियम का पूरी सख्ती से पालन हो।  रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है. इसमें वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है. उन्होंने दिल्ली के लोगों से अपील की है कि वे अपने PUC सर्टिफिकेट को समय-समय पर अपडेट रखें और स्वच्छ और स्वस्थ दिल्ली बनाने में सहयोग करें।  क्या बोलीं CM राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए हमारी सरकार ने सख्त निर्णय लेते हुए यह फैसला लिया है कि दिल्ली में अब बिना वैध पीयूसी प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा. सभी पेट्रोल पंपों और एजेंसियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें. अब बिना वैध ‘पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल’ प्रमाणपत्र वाले किसी भी वाहन को दिल्ली के फ्यूल स्टेशंस पर पेट्रोल, डीजल, सीएनजी या एलपीजी जैसे ईंधन उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे. वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए कड़े और प्रभावी कदम उठाना समय की आवश्यकता है और हमारी सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है। 

सीमा सुरक्षा बल की पेंशन अदालत 29 अप्रैल को, सेवानिवृत्त कर्मियों की शिकायतों का होगा समाधान

सीमा सुरक्षा बल की पेंशन अदालत 29 अप्रैल को, सेवानिवृत्त कर्मियों की शिकायतों का होगा समाधान नई दिल्ली   Border Security Force की 25वीं वाहिनी द्वारा सेवानिवृत्त कर्मियों और उनके परिवारों की पेंशन संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष पेंशन अदालत का आयोजन किया जा रहा है। यह अदालत 29 अप्रैल 2026 को New Delhi स्थित छावला शिविर में आयोजित होगी। यह आयोजन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा। इसमें दिल्ली क्षेत्र, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से जुड़े सीमा सुरक्षा बल के सेवानिवृत्त कर्मी और उनके परिवार भाग ले सकेंगे। अदालत का उद्देश्य लंबित पेंशन शिकायतों का निस्तारण करना और संबंधित मामलों में सहायता प्रदान करना है। जिन लोगों को पेंशन से जुड़ी किसी प्रकार की परेशानी है, वे निर्धारित तिथि पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अधिकारियों द्वारा मौके पर मामलों की जांच कर समाधान का प्रयास किया जाएगा। पेंशन अदालत में आने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे पहचान पत्र, पेंशन अभिलेख और अन्य आवश्यक कागजात साथ लेकर आएं, ताकि प्रक्रिया में सुविधा हो सके। अधिक जानकारी और सहायता के लिए 011-20895035 पर संपर्क किया जा सकता है। यह आयोजन Border Security Force मुख्यालय के निर्देशानुसार किया जा रहा है।

अरविंद केजरीवाल मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का बड़ा बयान: ‘गरिमा को चुनौती दी गई थी’

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य लोगों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली आबकारी नीति मामले से उन्हें हटाने की मांग की गई थी। एक कड़े फैसले में जस्टिस शर्मा ने अपने ऊपर लगे पक्षपात के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अविश्वास के बीज बोने के लिए दरवाजे नहीं खोले जा सकते। जस्टिस शर्मा ने कहा कि मुझे पता है कि मुझे कितना और क्या करना है। अगर मैं बिना सुने अलग हो जाती तो मैं अपना कर्तव्य त्याग देती। याचिकाएं न्यायपालिका को ही कटघरे में खड़ा करने जैसा बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि जज के निष्पक्ष होने की एक धारणा होती है। जो पक्षकार जज को हटाने की मांग करता है उसे इस निष्पक्षता की धारणा को गलत साबित करना होता है। जस्टिस शर्मा ने फैसला सुनाया कि केजरीवाल और अन्य लोगों द्वारा दायर की गई याचिकाएं न्यायपालिका को ही कटघरे में खड़ा करने जैसा था। उन्होंने कहा कि मुकदमा लड़ने वाले ने न्यायपालिका संस्था को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। मैंने विवाद को सुलझाने का रास्ता चुना है। न्यायपालिका की ताकत उसके आरोपों पर फैसला करने के पक्के इरादे में निहित है। मैंने बिना किसी चीज से प्रभावित हुए यह आदेश लिखा है। जजों के बच्चों को वकालत करने से नहीं रोका जा सकता इस दलील के संबंध में कि जज के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल वकील हैं और उनके द्वारा इस मामले की सुनवाई करने में हितों का टकराव होगा, जस्टिस शर्मा ने कहा कि इस तरह का टकराव इस विशेष मामले में स्पष्ट रूप से दिखाया जाना चाहिए। जज शर्मा ने कहा कि अगर किसी राजनेता की पत्नी राजनेता बन सकती है, अगर किसी राजनेता के बच्चे राजनेता बन सकते हैं, तो यह कैसे कहा जा सकता है कि किसी जज के बच्चे कानून के पेशे में नहीं आ सकते? इसका मतलब होगा कि जजों के परिवार के मौलिक अधिकार छीन लिए जाएं। झूठ को कई बार दोहराने से वह सच नहीं हो जाता उन्होंने आगे कहा कि उनके बच्चों में से कोई भी आबकारी नीति मामले से जुड़ा हुआ नहीं है। जज ने आगे कहा कि सच अपनी ताकत सिर्फ इसलिए नहीं खो देता कि झूठ को कई बार दोहराया गया हो। इस अदालत के एक अधिकारी के तौर पर मुझे इस बात का पूरा एहसास है कि झूठ, चाहे अदालत में या सोशल मीडिया पर हजार बार भी दोहराया जाए, सच नहीं बन जाता। वह झूठा ही रहता है। संस्था की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता जज ने कहा कि सिर्फ यह कह देना कि कोर्ट से राहत नहीं मिलेगी, जज को केस से हटाने की मांग करने का आधार नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जज खुद को केस से हटा लेते हैं तो इससे लोगों को यह लगने लगेगा कि जज किसी खास राजनीतिक पार्टी या विचारधारा से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि मामले से स्वयं को अलग रखने के निर्णय के संविधान पर गंभीर प्रभाव पड़ेंगे और संस्था की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ेगा। न्यायालय आरोपों और इशारों से प्रभावित नहीं हो सकता जज शर्मा ने कहा कि आवेदनों में दिए गए विवरण अनुमानों पर आधारित थे। अगर मैं उन्हें स्वीकार कर लेती हूं तो यह एक चिंताजनक मिसाल कायम करेगा। मैंने अपने समक्ष सभी प्रश्नों का निडरता से निर्णय लिया है। यह न्यायालय आरोपों और इशारों से प्रभावित नहीं हो सकता। यह न्यायालय तब तक पीछे नहीं हटेगा जब तक ऐसा करने से संस्था की विश्वसनीयता पर ही असर पड़ेगा। यह न्याय का प्रशासन नहीं बल्कि न्याय का प्रबंधन होगा। फैसले में कहा गया है कि आवेदकों की व्यक्तिगत आशंका पूर्वाग्रह की उचित आशंका की कसौटी पर खरी नहीं उतरी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बर्खास्तगी की याचिका सबूतों के साथ नहीं, बल्कि संकेतों के साथ दायर की गई थी। याचिका सबूतों के साथ नहीं आई थी जज ने कहा कि अंत में मैं यह स्पष्ट करना चाहूंगी कि बर्खास्तगी की याचिका सबूतों के साथ नहीं आई थी। यह मेरे पास मेरी सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और तटस्थता पर लांछन, संकेतों और संदेहों के साथ आई थी। जज ने कहा कि गहरी चिंता की बात यह है कि मीडिया द्वारा निर्मित कथा को कार्यवाही से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें जवाबदेही के बिना मानहानि के उदाहरण भी शामिल हैं। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि बर्खास्तगी विवेक नहीं, बल्कि कर्तव्य का त्याग और आत्मसमर्पण का कार्य होगा। सवाल जज की निष्पक्षता के बारे में था अपने फैसले में जस्टिस शर्मा ने कहा कि इस मामले में बहस एक जज की निष्पक्षता और खुद संस्था के बारे में थी। जब मैंने यह फैसला लिखना शुरू किया तो कोर्टरूम में सन्नाटा छा गया था। जो बचा था, वह था एक जज होने का शांत बोझ। एक ऐसा जज जिसने भारत के संविधान की शपथ ली थी। मुझे एहसास हुआ कि एक जज के तौर पर मेरी चुप्पी ही असल में कसौटी पर थी और अब सवाल जज की निष्पक्षता और खुद संस्था के बारे में था। मेरी निष्पक्षता और गरिमा पर सवाल उठाए गए थे उन्होंने कहा कि केजरीवाल और अन्य लोगों की तरफ से दी गई खुद को मामले से अलग करने की अर्जियों ने उनकी निष्पक्षता और गरिमा को चुनौती दी थी। यह बात साफ थी कि मुझे खुद को इस मामले से अलग कर लेना चाहिए या नहीं। मेरी निष्पक्षता और गरिमा पर सवाल उठाए गए थे। आसान रास्ता यही होता कि मैं अर्जी पर सुनवाई किए बिना ही खुद को अलग कर लेता। लेकिन मैंने अर्जी पर फैसला करने का निर्णय लिया, क्योंकि यह एक संस्था का मामला था। मैंने तय किया कि मैं इन आरोपों से प्रभावित हुए बिना ही इस पर फैसला करूंगी। केजरीवाल के तर्कों में विरोधाभास था उन्होंने इस बात की ओर इशारा किया कि केजरीवाल द्वारा दिए गए तर्कों में विरोधाभास था। कहा कि जिस बात ने इस काम को मुश्किल बना दिया है, वह यह है कि बहस के दौरान विरोधाभासी रुख अपनाए गए हैं। उन्होंने … Read more

केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से कहा जस्टिस का मिसकैरिज होगा, जज ने नियम का हवाला देते हुए टाला फैसला

नई दिल्ली जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को कथित शराब घोटाले से जुड़े केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लेना चाहिए, इसके लिए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सोमवार को एक बार फिर हाई कोर्ट में पेश हुए और सीबीआई के लिखित जवाब को लेकर अपना रिजॉइंडर स्वीकार किए जाने की गुजारिश की। अदालत ने केजरीवाल को प्रक्रिया की याद दिलाई पर उनके जवाब को स्वीकार कर लिया है और फैसले को दो घंटे के लिए टाल दिया। केजरीवाल ने कहा, ‘आपने अनुमति दी थी मैम की रिजॉइंडर फाइल कर दो। रजिस्ट्री स्वीकार नहीं कर रही है। वह आदेश में नहीं आया। अगर हमारे रिजॉइंटर को रिकॉर्ड पर नहीं लिया गया। ’मिसकैरिज ऑफ जस्टिस' हो जाएगा।' जज ने इस पर आपत्ति जाहिर करते हुए कहा, 'बार बार ये नहीं बोलना चाहिए कि 'मिसकैरिज ऑफ जस्टिस' हो जाएगा, क्योंकि अदालत ने प्रक्रिया से बाहर जाकर आपका हलफनामा रिकॉर्ड पर लिया। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल को नियमों की याद दिलाते हुए कहा, 'रजिस्ट्री आपकी याचिका इसलिए स्वीकार नहीं करती क्योंकि खुद आप अपनी पैरवी कर रहे हैं। इसलिए आपको ही पेश होना पड़ेगा। रिजस्ट्री का एक नियम है और आपको फॉलो करना पड़ेगा। आपको पहले यहां से मंजूरी लेनी पड़ेगी। यह कोई असाधारण केस नहीं है। हमने आपको लिखित जवाब की कॉपी दी। रिजॉइंडर कभी उसका फाइल नहीं होता है। जिस दिन आप कोर्ट से गए थे अनुमति लेकर गए थे। आपने कहा कि आप मेरा सम्मान करते हैं। मैं हर वादी का सम्मान करती हूं। मैं इसे लिखित जवाब के रूप में रिकॉर्ड पर लूंगी। चूंकि फैसला 2:30 तक सुरक्षित है, मैं उसमें विचार करूंगी।' दो घंटे के लिए टला फैसला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा, 'मैं इसे लिखित दलीलों के रूप में रिकॉर्ड पर ले रही हूं। केजरीवाल द्वारा पक्षपात का आरोप लगाने के कारण उन्हें यह छूट दी जा रही है। चूंकि फैसला 2:30 बजे सुनाया जाना है, और उनके द्वारा हलफनामा दिए जाने के मद्देनजर, फैसला अब 4:30 बजे सुनाया जाएगा।' केजरीवाल ने रिजॉइंडर में क्या कहा है? अरविंद केजरीवाल ने सीबीआई की ओर से दाखिल जवाब के प्रत्युत्तर (रिजॉइंडर) में कहा है कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने अटकलों, डर फैलने वाले बयानों और अपमानजनक आरोपों का सहारा लिया लेकिन जस्टिस शर्मा के बच्चों के सरकारी पैनल में होने को लेकर पक्षपात के आरोपों पर कुछ नहीं कहा है। उन्होंने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीबीआई इस मामले की सुनवाई केवल एक माननीय जज से करवाकर पूरी न्यायपालिका को बदनाम करना चाहती है।' केजरीवाल ने सीबीआई के उन आरोपों का विरोध किया कि वह 'दबाव बनाना चाहते हैं' और 'मामलों को लंबित रखना चाहते हैं' और 'बदनाम करने के लिए कैंपेन चला रहे हैं।'उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताया है। केजरीवाल ने अपने रिजॉइंडर में कहा है कि सीबीआई ने खुद स्वीकार किया है कि केंद्र सरकार की कानूनी व्यवस्था और जस्टिस शर्मा के परिवार के बीच सक्रिय व्यावसायिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि खुद सीबीआई के मुताबिक, जस्टिस शर्मा के बच्चे पैनल में निष्क्रिय नाम नहीं है बल्कि सरकार से कानूनी काम हासिल कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने सीबीआई की उन दलीलों का भी विरोध किया कि जिसमें एजेंसी ने कहा कि केजरीवाल की दलीलों के आधार पर तो 'सभी जज अयोग्य हो जाएंगे।' उन्होंने कहा, 'तथ्यों पर जवाब देने के बजाय सीबीआई ने कहा कि 'देश के सभी जज अयोग्य हो जाएंगे' यह विवाद को बढ़ाने और पूरी न्यायपालिका को घसीटने की कोशिश है।'

केजरीवाल दिल्ली HC में फिर होंगे पेश, जज को हटाने की उठाई थी मांग

  नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में एक बार फिर वर्चुअल रूप से पेश होंगे. केजरीवाल दिल्ली आबकारी नीति मामले में निचली अदालत द्वारा उन्हें और अन्य आरोपियों को डिस्चार्ज करने के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के दौरान हितों के टकराव (conflict of interest) का मुद्दा एक बार फिर उठाएंगे।  केजरीवाल ने सीबीआई के हलफनामे पर अपना जवाबी हलफनामा पहले ही दाखिल कर दिया है. इसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के साथ हितों के टकराव के मुद्दा फिर से उठाया है।  केजरीवाल का तर्क है कि इस मामले की सुनवाई कर रहीं जज के बच्चे (बेटा ईशान शर्मा और बेटी शंभवी शर्मा) केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में शामिल हैं और उन्हें सरकारी काम मिलता है. उन्होंने इसे हितों का टकराव बताया है।  'जजों को बदनाम करने की कोशिश' वहीं, सीबीआई ने केजरीवाल के इस अतिरिक्त हलफनामे का तीखा विरोध किया है. CBI ने इसे अनावश्यक, जजों को बदनाम करने का प्रयास और न्यायिक इतिहास तथा भविष्य के लिए खतरनाक मिसाल (Dangerous Precedent) करार दिया है।  सीबीआई का कहना है कि अगर केजरीवाल की इस दलील को स्वीकार कर लिया गया तो केंद्र सरकार से जुड़े किसी भी मामले में लगभग कोई भी जज सुनवाई नहीं कर पाएगा, क्योंकि जजों के रिश्तेदार अक्सर सरकारी पैनल में वकील होते हैं. CBI ने इसे न्यायपालिका पर अनुचित हमला बताया है।  हालांकि, कोर्ट ने पिछला जवाब रिकॉर्ड लेने से इनकार किया था. अब केजरीवाल सोमवार को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के इजलास में पेश होकर अपना जवाब रिकॉर्ड पर लेने के लिए अपील करेंगे।  दरअसल, केजरीवाल ने 14 अप्रैल के अपने अतिरिक्त हलफनामे में दावा किया है कि जस्टिस शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में वकील हैं. आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जज के बेटे को साल 2023 में 2487, साल 2024 में 1784 और साल 2025 में 1633 केस आवंटित किए गए. केजरीवाल का तर्क है कि ये सीधा हितों का टकराव है, क्योंकि सॉलिसिटर जनरल इस मामले में सीबीआई की ओर से पेश हो रहे हैं।  AAP ने किया विरोध वहीं, अदालत के बाहर आम आदमी पार्टी ने भी इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया दी. पार्टी ने सवाल उठाया है कि आखिर उनके नेता का जवाब बार-बार रिकॉर्ड पर क्यों नहीं लिया जा रहा है. केजरीवाल ने 13 अप्रैल को भी जज के सुनवाई करने पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि जस्टिस शर्मा ने पहले उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका और मनीष सिसोदिया व के कविता की जमानत अर्जियां खारिज कर दी थीं।  क्या है मामला आपको बता दें कि ये पूरा कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने दिल्ली शराब नीति मामले में केजरीवाल और सिसोदिया को डिस्चार्ज कर दिया था. निचली अदालत ने कहा था कि सीबीआई का मामला न्यायिक जांच में टिकने के लायक नहीं है और पूरी तरह से बदनाम हो चुका है. इसी आदेश के खिलाफ सीबीआई ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिस पर आज सुनवाई होनी है। 

26 साल बाद न्याय, कोर्ट ने CBI के जॉइंट डायरेक्टर और रिटायर्ड DP एसीपी को दोषी करार दिया

नई दिल्ली दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 26 साल बाद दो बड़े अधिकारियों को एक मामले में दोषी ठहराया है। इनमें सीबीआई के मौजूदा जॉइंट डायरेक्टर और दिल्ली पुलिस के एक रिटायर्ड एसीपी शामिल हैं। दोनों को मारपीट, आपराधिक घुसपैठ और शरारत के मामलों में दोषी ठहराया गया है। कोर्ट ने सजा पर दलीलें सुनने के लिए मामले को 27 अप्रैल को सूचीबद्ध किया है। ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों द्वारा शक्तियों के दुरुपयोग से जुड़े एक अहम फैसले में तीस हजारी कोर्ट ने शनिवार को सीबीआई के मौजूदा जॉइंट डायरेक्टर और दिल्ली पुलिस के एक रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर (एसीपी) को मारपीट, आपराधिक घुसपैठ और शरारत के मामलों में दोषी ठहराया। यह मामला लगभग 26 साल पहले पूर्व आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल के खिलाफ तड़के की गई एक छापेमारी से जुड़ा है। कोर्ट ने इसे न्यायिक आदेशों को दरकिनार करने की एक बदनीयत कोशिश बताया। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर रामनीश और दिल्ली पुलिस के एक रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर वीके पांडे को मारपीट, आपराधिक घुसपैठ और शरारत के एक मामले में दोषी ठहराया। यह मामला साल 2000 में किए गए अपराध से जुड़ा है। सजा पर 27 को होगी बहस प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट शशांक नंदन भट्ट ने रामनीश (वर्तमान में सीबीआई में संयुक्त निदेशक के पद पर कार्यरत हैं) और वीके पांडे (दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड एसीपी) को भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 427, 448 और 34 के तहत हमला, आपराधिक घुसपैठ और शरारत करने के अपराध में दोषी ठहराया है। रामनीश साल 2000 में सीबीआई में पुलिस उपाधीक्षक और वीके पांडे सीबीआई में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे। कोर्ट ने सजा पर दलीलें सुनने के लिए इस मामले को 27 अप्रैल को सूचीबद्ध किया है। शिकायतकर्ता भी आईआरएस अधिकारी शिकायतकर्ता अशोक कुमार अग्रवाल 1985 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं। उस समय वह ईडी में दिल्ली जोन के उप निदेशक के पद पर कार्यरत थे। कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रहे सीबीआई के दोनों मामलों से बरी कर दिया। आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कोर्ट ने माना कि 19 अक्तूबर 2000 को की गई तलाशी और गिरफ्तारी की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण तरीके से की गई थी। इसका एकमात्र उद्देश्य 28 सितंबर 2000 के कैट के उस आदेश को निष्प्रभावी करना था, जिसमें शिकायतकर्ता के 'मानित निलंबन' (डीम्ड सस्पेंशन) की चार सप्ताह के भीतर समीक्षा करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने शक्तियों का घोर उल्लंघन बताया कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपियों ने कानून द्वारा उन्हें प्रदत्त शक्तियों का घोर उल्लंघन किया। उनके कृत्य सरकारी कर्तव्य के निर्वहन के दायरे में नहीं आते हैं। इसलिए वे सीआरपीसी की धारा 197 या दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 140 के तहत मिलने वाली सुरक्षा के हकदार नहीं हैं। कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने शिकायतकर्ता के घर का मुख्य स्लाइडिंग दरवाजा तोड़ दिया था जो कि नुकसान पहुंचाने और आपराधिक घुसपैठ का मामला बनता है। इस बात की पुष्टि तो आरोपी द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट में पेश की गई अपनी खुद की सर्च लिस्ट से भी होती है। छापेमारी के दौरान शिकायतकर्ता के दाहिने हाथ में चोट लगी थी। इस बात की पुष्टि प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही, शिकायतकर्ता की एमएलसी रिपोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में आरोपी वीके पांडे द्वारा दायर किए गए जवाबी हलफनामे से भी होती है। सीबीआई अधिकारियों ने गुप्त बैठक की कोर्ट ने यह भी पाया कि कैट के निर्देशानुसार 18 अक्तूबर 2000 तक इनकम टैक्स विजिलेंस डायरेक्टोरेट को जरूरी जवाब भेजने के बजाय सीबीआई अधिकारी ने 18 अक्टूबर 2000 की शाम को एक गुप्त बैठक की और ठीक अगली सुबह ही शिकायतकर्ता के घर पर छापा मारने और उसे गिरफ्तार करने का फैसला कर लिया। मिलीभगत करके शिकायत दर्ज कराई शिकायतकर्ता की ओर से पेश एडवोकेट शुभम आसरी ने दलील दी कि प्रभावशाली लोगों से जुड़े संवेदनशील फेरा मामलों की जांच करते समय उन्हें अपने वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से लगातार दबाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने 1998 और 1999 के बीच अपनी जांच में हो रहे हस्तक्षेप के संबंध में राजस्व सचिव को सात बार अपनी बात रखी। वकील ने दलील दी कि कथित बदले की भावना से अभिषेक वर्मा नाम के एक व्यक्ति ने (जिसकी जांच शिकायतकर्ता कर रहे थे) सीबीआई अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। बाउंड्री वॉल फांदकर घर में घुसे आरोप लगाया गया था कि 19 अक्टूबर 2000 को सुबह लगभग 5 बजे सीबीआई अधिकारियों की एक टीम शिकायतकर्ता के घर पहुंची। जब सुरक्षा गार्ड ने पहचान का सबूत मांगा तो उसे पीटा गया। टीम ने बाउंड्री वॉल फांदकर घर में प्रवेश किया, मुख्य स्लाइडिंग दरवाजा तोड़ दिया, परिवार के सदस्यों को एक कमरे में बंद कर दिया और शिकायतकर्ता को उसके बेडरूम से उसके अंतर्वस्त्रों में ही घसीटकर बाहर निकाल लिया। सीढ़ियों पर धक्का दिया गया यह भी आरोप लगाया गया था कि शिकायतकर्ता के साथ जोर-जबरदस्ती की गई और उसे सीढ़ियों पर धक्का दिया गया, जिससे उसकी दाहिनी बांह में चोटें आईं। उसे सुबह 8:45 बजे डीडीयू अस्पताल में पेश किए जाने से पहले पीरागढ़ी चौक के पास किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया था। उसे धमकी दी गई थी कि यदि उसने सीबीआई कोर्ट के समक्ष यह मुद्दा उठाया तो उसके परिवार के सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। बचाव पक्ष की दलीलें खारिज कीं आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को विरोधाभासों से भरा बताते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी की अपनी तलाशी सूची (जो दिल्ली हाई कोर्ट में दायर की गई थी) से यह पुष्टि हुई कि मुख्य दरवाजा टूटा हुआ था। जबकि ट्रायल के दौरान बचाव पक्ष के गवाहों ने दावा किया था कि सिर्फ एक कुंडी अपनी जगह से हट गई थी। कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि मेडिको-लीगल केस साबित नहीं हुआ था। कोर्ट ने कहा कि आरोपी वीके पांडे ने खुद इसे स्वीकार किया था और यह दिल्ली हाई कोर्ट में उनके अपने हलफनामे का हिस्सा था। इसमें शिकायतकर्ता के शरीर पर मामूली चोटों का जिक्र था। शिकायत दर्ज करने में हुई देरी के मामले में कोर्ट ने कहा कि शिकायत दर्ज करने … Read more

बड़ी कार्रवाई: नोएडा हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता तमिलनाडु से पकड़ा गया, STF ने की ताबड़तोड़ रेड

नोएडा नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिक हिंसा मामले में पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस और एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद को गिरफ्तार कर लिया है। नोएडा पुलिस के अनुसार, आरोपी को तमिलनाडु के त्रिचपल्ली से गिरफ्तार किया गया, जहां वह छिपकर रह रहा था। हिंसा की घटना के बाद से ही आदित्य आनंद फरार था और उसकी गिरफ्तारी के लिए नोएडा पुलिस ने एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। जानकारी के अनुसार, आदित्य आनंद इस पूरे श्रमिक हिंसा कांड का मास्टर माइंड है और उसकी गिरफ्तारी से मामले में कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है। फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हिंसा की साजिश कैसे रची गई और इसमें किन-किन लोगों की संलिप्तता रही। दूसरी तरफ, हिंसा मामले में एसटीएफ नोएडा यूनिट और पुलिस ने संयुक्त रूप से व्यापक स्तर पर छापेमारी अभियान भी शुरू किया है। यह कार्रवाई श्रमिक आंदोलन के नाम पर हिंसा, आगजनी और उपद्रव फैलाने वालों के खिलाफ की जा रही है। एसटीएफ के मुताबिक, अर्बन नक्सल से जुड़े संदिग्ध लोगों के ठिकानों पर भी छापेमारी की जा रही है। दिल्ली और नोएडा के अलग-अलग इलाकों में यह अभियान लगातार जारी है। नोएडा के अरुण विहार, दिल्ली के आदर्श नगर और शाहबाद डेरी समेत कई स्थानों पर दबिश दी गई है। इस कार्रवाई के दौरान एसटीएफ अब तक करीब आधा दर्जन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। श्रमिक आंदोलन की आड़ में साजिश रचने आगजनी उपद्रव मचाने वालो की तलाश में छापेमारी जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह घटनाएं केवल अचानक भड़की हिंसा नहीं थीं, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश की आशंका भी जताई जा रही है। इसी कड़ी में पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए षडयंत्र के एंगल पर भी गहन पड़ताल शुरू कर दी है। जांच टीमों द्वारा विभिन्न स्थानों से सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जब्त की गई है, जिनके आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।

नोएडा बवाल के बाद सख्ती: 203 ठेकेदारों पर गिरी गाज, लाइसेंस निरस्तीकरण और 1.16 करोड़ की पेनल्टी नोटिस

नोएडा नोएडा में हुए बवाल, आगजनी और तोड़फोड़ के पीछे साजिश की आशंका है। पुलिस के साथ एसटीएफ ने जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, त्रिपुरा समेत कई राज्यों के युवकों के शामिल होने का शक है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वाले 24 कारखानों से जुड़े 203 ठेकेदारों के लाइसेंस निरस्त करने, राशि की वसूली करने और एजेंसियों को काली सूची में डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अपर श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी ने बताया कि श्रमिकों के उपद्रव में कई ठेकेदारों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। वहीं, श्रम कानूनों का पालन नहीं करने पर ठेकेदारों के खिलाफ 1.16 करोड़ रुपये की पेनल्टी के नोटिस जारी किए गए हैं। अन्य ठेकेदारों की भी जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की बताया गौतमबुद्धनगर व गाजियाबाद में 74 अनुसूचित नियोजनों के श्रमिकों के वेतन में 21 फीसदी की वृद्धि की गई है। कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ और ईएसआई के अतिरिक्त कोई अन्य कटौती का मामला सामने आता है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। वेतन भुगतान में देरी या कम भुगतान पर ठेकेदारों की भी जवाबदेही तय की जाएगी। नोएडा बवाल की साजिश में शहर के चार युवकों पर शक की सुई नोएडा में हुए बवाल, आगजनी और तोड़फोड़ के पीछे साजिश की आशंका है। पुलिस के साथ एसटीएफ ने जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, त्रिपुरा समेत कई राज्यों के युवकों के शामिल होने का शक है। सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और घटना के दौरान बनाए गए वीडियो खंगाले जा रहे हैं। शहर के चार से पांच युवकों पर भी शक है। शुक्रवार को नौबस्ता और बादशाहीनाका क्षेत्र से कुछ लोगों को इसी सिलसिले में उठाया गया है।   नोएडा और ग्रेटर नोएडा की फैक्टि्रयों में तोड़फोड़, आगजनी, पुलिस व अन्य सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाने की घटना हुई थी। पुलिस ने बवाल करने वालों को मशक्कत कर शांत कराया। अलग-अलग इकाइयों में एकदम से भीड़ उग्र हुई और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस के साथ प्रतिष्ठानों पर पथराव हुआ। पुलिस और प्रशासन ने खुफिया, इंटेलीजेंस, एलआईयू आदि से जांच कराई जिनकी प्रारंभिक जांच में बवाल के पीछे साजिश की आशंका जताई गई।   सूत्रों के मुताबिक कुछ प्रतिष्ठानों में फेस रिकग्नाइजेशन (चेहरे पहचानने वाले) कैमरे लगे हुए हैं। उनमें संदिग्धों के वीडियो मिले हैं। कुछ युवक पत्थर, तेल के गैलन, सब्बल लिए नजर आ रहे हैं। उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। कानपुर के चार से पांच युवकों पर भी शक है। इनमें से दो वहां रहने के साथ सब्जी व फल का कारोबार करते हैं। उनके बारे में नौबस्ता और बादशाहीनाका क्षेत्र से जानकारी जुटाई गई है। कुछ लोगों को उठाया गया है। अब तक किसी जांच एजेंसी ने कोई संपर्क नहीं किया है। एसटीएफ अपने स्तर पर जांच कर रही है। अगर जांच में कोई सहयोग मांगा जाता है तो कमिश्नरी पुलिस उनकी मदद करेगी।   श्रमिक आंदोलन को लेकर शुक्रवार को भी क्षेत्र में पुलिस अलर्ट पर रही। वहीं, सुरक्षा के मद्देनजर बड़ी कंपनियों में पुलिस फोर्स के जवान भी तैनात रहे। यमुना सिटी के सेक्टर-24ए स्थित वीवो कंपनी में बृहस्पतिवार सुबह वेतन को लेकर कंपनी कर्मियों ने हंगामा किया था। इस दौरान कर्मचरियों ने वेतन बढ़ाने की मांग करते हुए कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की थी। पुलिस फोर्स ने मौके पर पहुंचकर कर्मियों को समझाया था।  

सिलेंडर की मारामारी, शादी समारोहों का मेन्यू तक घटा

नई दिल्ली शादियों का सीजन शुरू होते ही गैस सिलेंडर को लेकर मारामारी शुरू हो गई है। जिन घरों में विवाह समारोह हैं उनके लिए सिलेंडर का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है। एजेंसियों के चक्कर लगाने के बाद भी लोगों को व्यावसायिक सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। परेशान लोग पेट्रोलियम मंत्रालय तक शिकायत कर रहे हैं। ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने से पहले एलपीजी की किल्लत नहीं थी। शादी या अन्य समारोह के लिए लोगों को व्यावसायिक सिलेंडर आसानी से मिल रहे थे। गैस एजेंसी संचालकों ने बताया कि लोग आकर शादी का कार्ड दिखाते थे और जरूरत के अनुसार व्यावसायिक सिलेंडर ले जाते थे। अब गैस कंपनियों की ओर से सख्ती कर दी गई है। मौजूदा समय में कनेक्शन धारकों को भी उनकी जरुरत का सत्यापन करने के बाद सिलेंडर दिए जा रहे हैं। किसी कनेक्शन धारक की औसत खपत अगर महीने में 10 सिलेंडर की है, तो उसे महज 6-7 सिलेंडर ही दिए जा रहे हैं। गैस एजेंसी संचालकों ने बताया कि शादी-समारोह के लिए व्यावसायिक गैस सिलेंडर सिर्फ शादी के कार्ड के आधार पर उपलब्ध करा पाना अब संभव नहीं हो पा रहा है। सोशल मीडिया के जरिये मंत्रालय को बता रहे समस्या सिलेंडर नहीं मिलने से परेशान लोग सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिये अपनी शिकायतें गैस कंपनियों और मंत्रालय तक पहुंचा रहे हैं। किरण नाम के एक्स हैंडल से की गई शिकायत में बताया गया कि घर में शादी है, लेकिन गैस नहीं मिल रही है। ऐसे ही कई अन्य यूजर्स ने अपनी शिकायतें साझा की हैं। इन सभी शिकायतों पर उत्तर दिया गया है और गैस सिलेंडर दिलाने का प्रयास किया गया है। शादी के लिए सिलेंडर लेने के लिए लोग जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भी मदद ले रहे हैं। छापेमारी में 2027 सिलेंडर जब्त कालाबाजारी को रोकने के लिए दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों ने अब तक 540 स्थानों पर छापेमारी की है। इसमें 2027 से ज्यादा सिलेंडर जब्त किए गए हैं और 44 एफआईआर दर्ज की गई हैं। उपभोक्ताओं की शिकायतों के निवारण के लिए विकास भवन स्थित खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में केंद्रीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। यहां पर शिकायत मिलने के बाद जांच के बाद कार्रवाई की जा रही है। पुलिस की टीमें भी गैस की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सक्रिय हैं। सगाई-शादी में व्यंजनों की संख्या को कम करना पड़ा गैस सिलेंडर मिलने में हो रही परेशानी का असर अब शादी-विवाह जैसे बड़े आयोजनों पर साफ नजर आने लगा है। गैस की कमी के चलते लोगों को अपने कार्यक्रमों में व्यंजनों की संख्या कम करनी पड़ रही है। जिससे आयोजनों का स्वाद और रंग दोनों फीके पड़ते जा रहे हैं। ज्योति नगर निवासी महेश शर्मा ने बताया कि उनके बड़े बेटे आलोक की शादी 23 अप्रैल को तय है। 21 अप्रैल को सगाई का कार्यक्रम रखा गया है। उन्होंने बताया कि पहले सगाई के लिए करीब 25 व्यंजनों का मेन्यू तय किया गया था, लेकिन गैस की किल्लत के चलते अब इसमें कटौती करनी पड़ी है। महेश ने बताया कि इस बदलाव के लिए वधू पक्ष से भी सहमति ली गई, जिसके बाद उन्होंने भी शादी के मुख्य कार्यक्रम में सात-आठ व्यंजन कम करने का फैसला किया है। दिल्ली के बजाय गांव से करना पड़ रहा आयोजन राजधानी में रहने वाले उत्तराखंड के कुछ लोग शादी समारोह को एलपीजी संकट की वजह से गांव से करने का मन बना चुके हैं। उनका कहना है कि गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण कैटरिंग संचालक अधिक रुपये की मांग कर रहे हैं। इससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। आरके पुरम निवासी मोहित सिंह ने बताया कि उनकी बहन की शादी इस माह के आखिरी सप्ताह में है। काफी कोशिश के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि जैसे ही एलपीजी का संकट शुरू हुआ, वैसे ही कैटरिंग संचालक ने अधिक रुपये की मांग कर दी। साथ ही मेन्यू में भी कटौती की बात की थी। ऐसे में उन्होंने बीते माह ही शादी समारोह का आयोजन अपने गांव में करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि गांव में लकड़ी से खाना बनेगा, जिससे कोई परेशानी नहीं होगी। समारोह के लिए ऐसे मिल सकता है गैस सिलेंडर दिल्ली की एलपीजी डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश ने बताया कि शादी के लिए व्यावसायिक गैस सिलेंडर लेने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब सिलेंडर तभी मिल पाएगा, जब डीलर्स के पास उपलब्धता होगी। सिलेंडर पाने के लिए शादी का कार्ड लेकर नजदीकी एलपीजी डीलर के कार्यालय जाकर वहां अस्थायी कनेक्शन लेना होगा। इसके बाद प्रत्येक सिलेंडर के लिए तय करीब 2500 रुपये सिक्योरिटी मनी जमा करानी होगी। गैस की कीमत अलग से देनी होगी। अगर डीलर के पास व्यावसायिक सिलेंडर उपलब्ध है, तो वे कार्ड के आधार पर ही सिलेंडर दे देंगे। सिलेंडर लौटाने पर सिक्योरिटी की रकम वापस हो जाएगी।

स्पाइसजेट और आकासा एयर के विमान भिड़े, दोनों को नुकसान

नई दिल्ली दिल्ली एयरपोर्ट पर गुरुवार को दो विमान की आपस में टक्कर हो गई। इस घटना में एक विमान के दाहिने विंगलेट तो दूसरे विमान के बाएं हॉरिजॉन्टल स्टेबलाइजर को नुकसान पहुंचा है। स्पाइसजेट के प्रवक्ता के अनुसार, विमान को फिलहाल दिल्ली में ही रोक दिया गया है। स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने कहा ‘16 अप्रैल को दिल्ली एयरपोर्ट पर टैक्सींग के दौरान स्पाइसजेट का एक विमान (Boeing 737-700) दूसरे विमान से टकरा गया। इस हादसे में स्पाइसजेट के विमान के दाहिने विंगलेट (पंख) और दूसरी एयरलाइन के विमान के पिछले हिस्से (हॉरिजॉन्टल स्टेबलाइजर) को नुकसान पहुंचा है। उस विमान को फिलहाल दिल्ली में ही रोक दिया गया है।’ वहीं आकासा एयर के मुताबिक, आकासा का विमान अपनी जगह खड़ा था, तभी दूसरी एयरलाइन के विमान ने उसे टक्कर मार दी। सभी यात्री और क्रू मेंबर्स पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें विमान से उतार लिया गया। आकासा की फ्लाइट (QP 1406) दिल्ली से हैदराबाद जा रही थी मगर टक्कर के बाद उसे वापस पार्किंग में खड़ा करना पड़ा। बहरहाल फिलहाल इस पूरे की मामले की जांच की जा रही है। आकासा एयर के प्रवक्ता ने बताया कि 'उनकी फ्लाइट (QP 1406), जो दिल्ली से हैदराबाद जा रही थी, उसे वापस पार्किंग एरिया में वापस लाना पड़ा। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आकासा का विमान अपनी जगह खड़ा था, तभी दूसरी एयरलाइन के विमान ने उसे टक्कर मार दी। सभी यात्रियों और क्रू को सुरक्षित उतार लिया गया और हमारी ग्राउंड टीमें यात्रियों को जल्द से जल्द हैदराबाद पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर रही है।'