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पंजाब में 30 अप्रैल से जनगणना की शुरुआत, 15 मई से 67000 एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर करेंगे सर्वे

चंडीगढ़  जनगणना का पहला चरण 15 मई से 13 जून के बीच आयोजित किया जाएगा। इस कार्य के लिए तरनतारन जिला प्रशासन द्वारा लगभग 2500 गणनाकर्ताओं और पर्यवेक्षकों को तैनात किया गया है। डिप्टी कमिश्नर सह-प्रधान जनगणना अधिकारी राहुल ने बताया कि जनगणना कार्य में लगे कर्मियों का प्रशिक्षण विभिन्न स्तरों पर शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा, “जनगणना के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही बरतने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत कार्रवाई की जाएगी।”उन्होंने यह भी बताया कि पूरी प्रक्रिया को ‘डिजिटल मोड’ के जरिए हाई-टेक तरीके से पूरा किया जाएगा। इस योजना के तहत, स्वयं-गणना (सेल्फ-एन्यूमरेशन) के लिए ऑनलाइन पोर्टल 30 अप्रैल से 14 मई तक खुला रहेगा, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकता है। इसके बाद 15 मई से 13 जून तक गणनाकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर सर्वे किया जाएगा। वास्तविक जनसंख्या की गिनती का दूसरा चरण नौ फरवरी 2027 में होगा, जिसमें हर व्यक्ति का डेटा दर्ज किया जाएगा। इसके लिए विभाग की तरफ से कुल 67 हजार मुलाजिम तैनात किए जाएंगे। लोकल बॉडी विभाग के सचिव मनजीत सिंह बराड़ व निदेशक जनगणना नवजोत खोसा ने यह जानकारी शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस में दी। मोबाइल ऐप से होगी पूरी प्रक्रिया यह देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। इसमें डेटा जुटाने के लिए मोबाइल ऐप और डिजिटल मैपिंग का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया तेज और सटीक बनेगी। कर्मचारी घर की स्थिति, दीवार और छत के मटेरियल, बिजली-पानी जैसी सुविधाओं के साथ-साथ टीवी, वाहन जैसे संसाधनों की जानकारी भी जुटाएंगे। कुल 33 सवालों का जवाब देना होगा। 67000 एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर नियुक्त राज्य में जनगणना 2027 की तैयारियों के तहत लगभग 51,561 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB) बनाए जा चुके हैं। इस कार्य के लिए करीब 67,000 एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं, जिनमें लगभग 56,544 एन्यूमरेटर और 10,368 सुपरवाइजर शामिल हैं। इन नियुक्तियों में स्कूल शिक्षक, क्लर्क तथा राज्य सरकार और स्थानीय निकायों के अधिकारी भी शामिल हैं। प्रत्येक एन्यूमरेटर को लगभग 700 से 800 लोगों का डेटा एकत्र करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। वहीं, एक सुपरवाइजर के अधीन करीब 6 एन्यूमरेटर काम करेंगे और उनकी निगरानी करेंगे। स्वगणना के लिए केंद्र सरकार के पोर्टल पर जाना है। जिसमें लॉगिन कर 16 भाषाओं में जवाब दे पाएंगे। पोर्टल सुबह छह से 12 बजे तक एक्टिव रहेगा स्व गणना के लिए किसी ऐसे मोबाइल नंबर का इस्तेमाल न करें जो पहले से किसी अन्य परिवार द्वारा इस्तेमाल किया गया हो। परिवार के मुखिया के लिए नकली या अस्थायी नाम न डालें, क्योंकि बाद में इसे बदला नहीं जा सकता। अपना लॉगिन OTP किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें, चाहे वह खुद को सेंसस अफसर ही क्यों न बताए। आधार, पैन या बैंक डिटेल जैसे संवेदनशील दस्तावेज अपलोड या साझा न करें (इनकी आवश्यकता नहीं है)। उन परिवार के सदस्यों को शामिल न करें जो स्थायी रूप से कहीं और जा चुके हैं या काम/पढ़ाई के लिए बाहर रह रहे हैं। मैप पर अपनी लोकेशन गलत तरीके से न चुनें; यह आपकी असली रहने की जगह होनी चाहिए। कोई भी सवाल खाली न छोड़ें; सिस्टम आमतौर पर आगे बढ़ने नहीं देता। यह न मानें कि प्रक्रिया पूरी हो गई है, जब तक आपको SE ID के साथ सफलता स्क्रीन न दिख जाए। रात 12 बजे के बाद पोर्टल का उपयोग न करें, क्योंकि यह केवल सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक ही सक्रिय रहता है। जानकारी भरते हुए पब्लिक आईडी का प्रयोग न करे फाइनल सबमिशन के बाद डेटा एडिट करने की कोशिश न करें। सुरक्षा के लिए यह लॉक हो जाता है। ऑनलाइन सबमिट करने के बाद आने वाले एन्यूमरेटर (गणनाकर्मी) को नजरअंदाज न करें, उनकी विजिट सत्यापन के लिए होती है। अगर आपका SE ID खो जाए तो घबराएं नहीं। आप इसे अपने मोबाइल नंबर से पोर्टल पर दोबारा प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे मेहमानों की जानकारी न दें जो केवल कुछ दिनों के लिए आए हुए हैं। निजी जानकारी भरते समय पब्लिक या असुरक्षित Wi-Fi (जैसे कैफे में) का उपयोग न करें। घर में रहने वाले सभी विवाहित जोड़ों का अलग-अलग उल्लेख करना न भूलें। आखिरी दिन (14 मई) तक सबमिट करने का इंतजार न करें, क्योंकि उस समय सर्वर पर ज्यादा लोड हो सकता है। डॉटा भरने के बाद एक 21 अंकों का नंबर आएगा। इसे संभाल कर रखना है। पंजाब में 30 अप्रैल से शुरू होगी हेल्पलाइन जनगणना 2027 के लिए हेल्पलाइन लोगों की मदद के लिए 30 अप्रैल से शुरू होगी। अगर आपको खुद जानकारी भरने (सेल्फ-एन्यूमरेशन) या घर की जानकारी देने (हाउस लिस्टिंग) में कोई दिक्कत हो, तो आप यहां सवाल पूछ सकते हैं। शिकायत कर सकते हैं या अधिकारी से बात भी कर सकते हैं। इसे लिए 1855 नंबर पर कॉल करनी होगी। यह सेवा 24 घंटे चालू रहेगी और 16 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगी। जरूरत पड़ने पर आपकी कॉल सीधे जनगणना विभाग के अधिकारी तक पहुंचाई जा सकती है। यह सुविधा सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक सोमवार से शनिवार उपलब्ध रहेगी। एन्यूमरेटर और लोगों की यह जिम्मेदारी तय एन्यूमरेटर जो व्यक्ति घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करता है। लोगों से आराम से और साफ तरीके से सवाल पूछेगा। फॉर्म जमा करने से पहले सब कुछ चेक करेगा कि सही है या नहीं। आपकी दी गई जानकारी को गोपनीय रखेगा। दूसरा जिसके घर जनगणना वाले उसकी जिम्मेदारी है उसे दूसरा सही और पूरी जानकारी देनी है। अगर कोई बात समझ न आए तो पूछ लेना है। पंजाब में पहली ड्रग जनगणना भी पंजाब सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से भारत की पहली व्यापक 'ड्रग और सामाजिक-आर्थिक जनगणना' शुरू की है, जिसका उद्देश्य 65 लाख परिवारों का सर्वेक्षण कर नशे के खिलाफ 'डेटा-आधारित' पुनर्वास नीतियां बनाना है। लगभग 28,000 सरकारी कर्मचारियों द्वारा तीन महीने में पूरी की जाने वाली इस ₹150 करोड़ की पहल का लक्ष्य नशा मुक्ति के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना है। अलग-अलग नगर निगमों में HLBs (हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स) की संख्या पठानकोट – 344 बटाला – 285 अमृतसर – 2324 कपूरथला – 142 फगवाड़ा – 225 जालंधर – 1689 होशियारपुर – 263 साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली) – 674 … Read more

अमृतसर में पुलिस और BSF ने किया बड़ा पकड़, सीमा से 980 ग्राम हेरोइन बरामद, तस्करों का नेटवर्क भी निशाने पर

अमृतसर  पंजाब के अमृतसर जिले में नशा तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जहां थाना भिंडी सैदां की पुलिस ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाया। इस ऑपरेशन में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित क्षेत्र से 980 ग्राम हेरोइन बरामद की गई। यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें तस्करों द्वारा सीमा के रास्ते नशीले पदार्थों की खेप भेजे जाने की जानकारी मिली थी। फिलहाल इस मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई हैं। गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई पुलिस अधिकारियों के अनुसार उन्हें पहले से इनपुट मिला था कि कुछ तस्कर सीमा क्षेत्र का इस्तेमाल कर हेरोइन की खेप पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी सूचना के आधार पर थाना भिंडी सैदां की टीम और BSF के जवानों ने संयुक्त रूप से इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। तलाशी के दौरान एक संदिग्ध स्थान से 980 ग्राम हेरोइन बरामद की गई। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई योजनाबद्ध तरीके से की गई थी। बरामद हेरोइन की कीमत करोड़ों में बरामद की गई 980 ग्राम हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। हालांकि अभी तक किसी तस्कर की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस मामले में शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें पकड़ा जाएगा। इस बरामदगी को सीमा पार से होने वाली तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। तस्करी नेटवर्क की जांच तेज पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और आगे की जांच शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह हेरोइन कहां से आई और इसे कहां भेजा जाना था। इसके साथ ही सीमा पार के तस्करी नेटवर्क से जुड़े कनेक्शन को भी खंगाला जा रहा है, ताकि पूरे गिरोह को पकड़ा जा सके। सीमा क्षेत्र में बढ़ेगी निगरानी पुलिस और BSF अधिकारियों ने कहा है कि अमृतसर के सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। आने वाले समय में भी इस तरह के संयुक्त अभियान जारी रहेंगे, ताकि नशा तस्करी पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

लुधियाना: 44 शिक्षकों को BLO ड्यूटी जॉइन करने का आदेश, गैरहाजिर रहने पर सैलरी पर असर और FIR की धमकी

लुधियाना लुधियाना में नगर निगम (लुधियाना ईस्ट) ने 44 शिक्षकों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें 24 अप्रैल को हर हाल में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ड्यूटी पर रिपोर्ट करने के आदेश जारी किए हैं। आदेश में साफ कहा गया है कि ड्यूटी पर हाजिर न होने की स्थिति में वेतन रोक के आदेश।  स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत BLO ड्यूटी के लिए हैं नियुक्त अधिकारियों के मुताबिक, ये सभी शिक्षक पहले से ही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत BLO ड्यूटी के लिए नियुक्त किए जा चुके हैं, लेकिन बार-बार निर्देशों के बावजूद कई शिक्षक ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। इसके चलते प्रशासन ने अब सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि गैरहाजिरी को सर्विस रूल्स का उल्लंघन माना जाएगा और किसी भी तरह का बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। शिक्षकों में नाराजगी, कहा- पहले ही काम का बोझ ज्यादा इस फैसले के बाद शिक्षकों में नाराजगी देखने को मिल रही है। शिक्षकों का कहना है कि वे पहले से ही कई तरह की ड्यूटी में लगे हुए हैं। जमालपुर अवाना के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने बताया कि वे इस समय ब्लॉक स्तर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। साथ ही 24 अप्रैल को साहनेवाल में होने वाले ‘सिख्या क्रांति’ कार्यक्रम के लिए कोऑर्डिनेटर भी बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि हमने कई बार लिखित में अपनी स्थिति बताई है, लेकिन फिर भी नई-नई ड्यूटी दी जा रही है। मातृत्व अवकाश पर शिक्षिका को भी लगाया ड्यूटी पर एक और मामले में उसी स्कूल की एक शिक्षिका, जो मातृत्व अवकाश (गर्भावस्था) पर हैं, उन्हें भी BLO ड्यूटी के लिए तैनात कर दिया गया है। इससे शिक्षकों में रोष और बढ़ गया है। एडमिशन सीजन में बढ़ी परेशानी शिक्षकों का कहना है कि इस समय स्कूलों में दाखिले का पीक सीजन चल रहा है। इसके अलावा कई शिक्षक पहले से जनगणना और चुनावी कार्यों में लगे हुए हैं, जिससे स्कूलों का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। अधिकारियों का पक्ष: चुनावी ड्यूटी जरूरी डिप्टी डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर (एलीमेंट्री) मनोज कुमार ने मीडिया से शिक्षकों की परेशानी को स्वीकार करते हुए कहा कि BLO और जनगणना ड्यूटी बेहद जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि ब्लॉक प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर्स को निर्देश दिए गए हैं कि शिक्षकों को स्कूलों से रिलीव कर इन ड्यूटी पर भेजा जाए। वहीं, नगर निगम (लुधियाना ईस्ट) के जॉइंट कमिश्नर अमनप्रीत सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका पक्ष सामने नहीं आ सका।  

‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ वेब सीरीज पर बैन, पंजाब पुलिस और परिवार ने किया विरोध, माहौल बिगड़ने का दिया था हवाला

चंडीगढ़  गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई (Lawrence Bishnoi) की लाइफ पर बेस्ड सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ इन दिनों काफी चर्चा में बनी हुई है। जी5 (Zee5) की इस सीरीज को लेकर एक के बाद एक अपडेट सामने आ रहे हैं। अभी हाल ही में सीरीज लॉरेंस ऑफ पंजाब का ट्रेलर रिलीज हुआ था। सीरीज का ट्रेलर रिलीज होते ही विवाद खड़ा हो गया। सीरीज लॉरेंस ऑफ पंजाब को बैन करने की मांग उठने लगी। पंजाब पुलिस, कांग्रेस नेता और फिर लॉरेंस के घरवालों ने भी इस सीरीज को बैन करने के लिए कहा। लेकिन इसके बाद भी मेकर्स अपने कदम पीछे हटाने के लिए तैयार नहीं थे। अब इन सब के बीच सीरीज लॉरेंस ऑफ पंजाब की रिलीज को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' की रिलीज पर लगी रोक जी5 की सीरीज लॉरेंस ऑफ पंजाब एक बार फिर से खबरों में आ गई है। सीरीज लॉरेंस ऑफ पंजाब की रिलीज को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। सीरीज लॉरेंस ऑफ पंजाब को बैन करने की मांग उठ रही थी। अब लॉरेंस ऑफ पंजाब वेब सीरिज अब OTT प्लेटफार्म Zee 5 पर रिलीज नहीं होगी, भारत सरकार ने इसकी रिलीज पर रोक लगा दी है। आज पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भारत सरकार की तरफ से ये जानकारी दी गई। 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' को प्रसारित न किए जाने के केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ही Zee 5 को निर्देश दिए है।  चचेरे भाई ने कही थी बात हाल ही में लॉरेंस बिश्नोई के चचेरे भाई रमेश बिश्नोई ने भी इस सीरीज पर बैन लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि इस सीरीज के लिए परिवार से कोई अनुमति नहीं ली गई है। ANI से बात करते हुए रमेश बिश्नोई ने कहा 'न परिवार से अनुमति ली गई है, न सरकार से। ऐसे बनाकर वे क्या साबित करना चाहते हैं?' चर्चा में रहता है गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई खबरों में बना रहता है। अभी हाल ही में डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर हुई फायरिंग के मामले में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम सामने आया था। इससे पहले सलमान खान के घर पर भी गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की गैंग ने हमला किया था। पंजाब पुलिस चाहती है डॉक्यू सीरीज पर रोक पंजाब पुलिस ने भी औपचारिक रूप से सूचना और प्रसारण मंत्रालय से आग्रह किया है। वह ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ डॉक्यूमेंट्री सीरीज पर रोक चाहते हैं। यह सीरीज 27 अप्रैल को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज होने वाली है। स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (साइबर क्राइम) वी. नीरजा द्वारा भेजे गए एक आधिकारिक संदेश में कहा गया, ‘स्टेट पुलिस ने डॉक्यूमेंट्री के कंटेंट पर गंभीर चिंता जताई है। बताया जा रहा है कि यह डॉक्यूमेंट्री गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन और उसके आपराधिक सफर को दिखाती है। कहा जा रहा है कि इस सीरीज में हाई-प्रोफाइल अपराधों के नाटकीय चित्रण और असल जिंदगी के संदर्भ शामिल हैं। इसमें पंजाबी गायक सिद्धू मूसे वाला की हत्या और अन्य हिंसक घटनाएं भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार डॉक्यू सीरीज अपराध का महिमामंडन करती है  पंजाब पुलिस के अनुसार यह डॉक्यूमेंट्री सीरीज संगठित अपराध का महिमामंडन और उसे आसान बनाकर पेश कर सकती है। जिससे युवा दर्शकों पर बुरा असर पड़ सकता है और वे आपराधिक गतिविधियों को सामान्य समझने लगेंगे। पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि इस तरह का कंटेंट अपराध कम करने प्रयासों को कमजोर करता है।  पंजाब पुलिस ने विशेष रूप से ओटीटी प्लेटफॉर्म को कहा है कि वे इस डॉक्यूमेंट्री सीरीज को स्ट्रीम न करें। इसके ट्रेलर को भी लोगों की पहुंच से हटा दें।  मेकर्स ने रखा अपना पक्ष  इस पूरे विवाद के बीच डॉक्यू सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ के मेकर्स ने कहा, ‘यह सीरीज दिखाती है कि कैसे महत्वाकांक्षा, सत्ता और लोगों की सोच मिलकर एक नए जमाने का डिजिटल सिंडिकेट तैयार करती है। इस पूरे माहौल में लॉरेंस बिश्नोई को एक केस स्टडी के तौर पर लिया गया है। लेकिन यह कहानी एक व्यक्ति तक सीमित न रहकर, उससे आगे बढ़कर बड़े सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भों की पड़ताल करती है। उनके नतीजों पर रोशनी डालती है।’  

डिप्टी कमिश्नर अमृतसर ने किसान जागरूकता वैन को हरी झंडी दिखाई

अमृतसर.  डिप्टी कमिश्नर दलविंदरजीत सिंह ने गेहूं के डंठल जलाने से रोकने के लिए जागरूकता अभियान के तहत, अमृतसर के डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेटिव कॉम्प्लेक्स से जागरूकता वैन को हरी झंडी दिखाई। अमृतसर जिले में गेहूं की कटाई चल रही है, जिसके बाद ये वैन गांव लेवल पर किसानों को अलग-अलग तरीकों से गेहूं के डंठल को बिना जलाए मैनेज करने के बारे में जागरूक करेंगी। डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है, मिट्टी की सेहत खराब होती है, दोस्त कीड़े मर जाते हैं और कीमती पोषक तत्व और ऑर्गेनिक चीजें नष्ट हो जाती हैं। इस मौके पर, अमृतसर के एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल) रोहित गुप्ता ने कहा कि कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने किसानों द्वारा गेहूं के डंठल जलाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। उन्होंने जिले के सभी किसानों से अपील की कि वे गेहूं के डंठल को बिना आग लगाए ठीक से मैनेज करें। अमृतसर के चीफ एग्रीकल्चर ऑफिसर डॉ. गुरसाहिब सिंह ने कहा कि एग्रीकल्चर और किसान कल्याण विभाग, जिला अमृतसर गांव और ब्लॉक लेवल पर कैंप लगाकर, गांव लेवल पर धार्मिक जगहों से अनाउंसमेंट करके, गांव लेवल पर नाटक दिखाकर और प्रोग्रेसिव किसानों और गांवों के जाने-माने प्रतिनिधियों जैसे सरपंच, नंबरदार वगैरह के साथ ब्लॉक लेवल पर मीटिंग करके गेहूं के डंठलों के सही मैनेजमेंट के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए एक खास कैंपेन चला रहा है। अमृतसर जिले के सभी किसानों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि गेहूं के डंठलों से भूसा बनाने के बाद, बचे हुए हिस्से को बिना आग लगाए अगली फसल के लिए तैयार करें। चूंकि किसानों के पास गेहूं की कटाई और धान की बुआई के बीच काफी समय होता है, इसलिए इस दौरान किसान जंतर को हरी खाद के तौर पर लगाकर जमीन की सेहत सुधारने के लिए सही कदम उठा सकते हैं। इस मौके पर SDM अलका कालिया, एग्रीकल्चर ऑफिसर गुरप्रीत सिंह, नवतेज सिंह और गुरजोत सिंह, जगदीप कौर DPD (Atma), मनबीर कौर, एग्रीकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर (रिक्लेमेशन), हरगुरनाड सिंह, एग्रीकल्चर एक्सटेंशन ऑफिसर, सविता चौहान सीनियर असिस्टेंट और एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट से रजनी बिष्ट, शरणजीत कौर, जोरावर सिंह, रणजीत सिंह वगैरह मौजूद थे।

तरुणप्रीत सिंह बोले – पंजाब लेबर वेलफेयर बोर्ड ने इंडस्ट्रियल वर्कर्स को Rs. 17.11 करोड़ के फायदे बांटे

चंडीगढ़. पंजाब लेबर वेलफेयर बोर्ड ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में अलग-अलग वेलफेयर स्कीम के तहत 7831 बेनिफिशियरी को Rs. 17.11 करोड़ की फाइनेंशियल मदद बांटी। बोर्ड की चल रही एक्टिविटी और प्रोग्रेस का असेसमेंट करने के लिए एक रिव्यू मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए, पंजाब के लेबर मिनिस्टर एस. तरुणप्रीत सिंह सौंद ने इन कोशिशों को और मजबूत करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को अवेयरनेस कैंपेन तेज़ करने का निर्देश दिया ताकि बड़ी संख्या में एलिजिबल वर्कर्स वेलफेयर स्कीम का फायदा उठा सकें। मिनिस्टर ने ज़ोर देकर कहा कि अवेयरनेस की कमी अक्सर वर्कर्स को उनके लिए उपलब्ध वेलफेयर स्कीम का फायदा उठाने से रोकती है। स्कीम के स्कोप के बारे में बताते हुए, मिनिस्टर ने कहा कि पंजाब लेबर वेलफेयर फंड एक्ट, 1965 के तहत आने वाली जगहों में काम करने वाले इंडस्ट्रियल वर्कर्स बोर्ड द्वारा दिए जाने वाले फायदों का फायदा उठाने के एलिजिबल हैं। उन्होंने आगे कहा कि ये पहलें वर्कर्स और उनके परिवारों को हेल्थ, एजुकेशन और सोशल सिक्योरिटी समेत ज़िंदगी के अलग-अलग पहलुओं में मदद करने के लिए शुरू की गई हैं। बोर्ड द्वारा शुरू की गई स्कीमों में मेडिकल ट्रीटमेंट और जनरल सर्जरी के लिए फाइनेंशियल मदद, एक्स-ग्रेटिया ग्रांट, अंतिम संस्कार का खर्च, LTC, मैटरनिटी बेनिफिट और मेंटल या फिजिकल डिसेबिलिटी वाले वर्कर्स के लिए मदद शामिल है। इसके अलावा, वर्कर्स दूसरी स्कीमों का भी फायदा उठा सकते हैं, जिनमें शगुन स्कीम, चश्मे, डेंटल केयर और हियरिंग एड के लिए मदद के साथ-साथ एजुकेशन और डिसेबिलिटी कम्पेनसेशन के लिए स्कॉलरशिप स्कीम शामिल हैं। मंत्री ने सरकार की इस कमिटमेंट को दोहराया कि वेलफेयर स्कीमें हर एलिजिबल वर्कर तक पहुंचेंगी ताकि उनके जीवन स्तर में सुधार हो और ज़रूरत के समय उन्हें सिक्योरिटी मिल सके। उन्होंने अधिकारियों से इन स्कीमों की पहुंच और असर को और बढ़ाने के लिए अवेयरनेस कैंप और आसान एप्लीकेशन प्रोसेस जैसे प्रोएक्टिव कदम उठाने की अपील की। पंजाब सरकार लेबर वेलफेयर को अपने डेवलपमेंट एजेंडा के एक अहम हिस्से के तौर पर प्रायोरिटी दे रही है, और यह पक्का किया जा रहा है कि इंडस्ट्रियल वर्कर्स को ज़रूरी मदद और सही सम्मान दिया जाए। इस मौके पर लेबर डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी मनवेश सिंह सिद्धू, इंडस्ट्रीज़ एंड कॉमर्स डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी महिंदर पाल, लेबर कमिश्नर-कम-वेलफेयर कमिश्नर, पंजाब राजीव कुमार गुप्ता, मेंबर बलदेव बलखंडी और कई दूसरे बड़े लोग भी मौजूद थे।

हरजोत सिंह बैंस बोले – प्राइवेट स्कूलों के स्टूडेंट्स को किताबें देगा बोर्ड

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने प्राइवेट स्कूलों के लिए टेक्स्टबुक्स के डिस्ट्रीब्यूशन में एक सुधार किया है। साल 2026-27 के एकेडमिक सेशन से, बोर्ड पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड (PSEB) से जुड़े प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले क्लास I से XII तक के स्टूडेंट्स को सीधे किताबें देगा। इस पहल से न सिर्फ ऑथराइज्ड एजेंसियों और बुक सेलिंग शॉप्स की मोनोपॉली खत्म होगी, बल्कि स्टूडेंट्स के पेरेंट्स को भी राहत मिलेगी। इस नए सुधार की घोषणा करते हुए, एजुकेशन मिनिस्टर हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि इस फैसले से ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी, परिवारों का खर्च कम होगा और बिचौलियों पर डिपेंडेंस कम होगी, साथ ही टेक्स्टबुक्स समय पर मिलेंगी। हरजोत सिंह बैंस ने नए सिस्टम के बारे में डिटेल में बताते हुए कहा, “स्कूल इस बात का पूरा ध्यान रखेंगे कि प्रिंटेड कीमत से ज़्यादा पैसे न लिए जाएं। यह सिर्फ़ किताबें बांटने की सुविधा होगी, रेवेन्यू बढ़ाने का कोई तरीका नहीं। इससे प्राइवेट स्कूलों के 10 लाख से ज़्यादा स्टूडेंट्स को फ़ायदा होगा।” पंजाब सरकार की आसान और सस्ती शिक्षा पर ध्यान देने की पहल के बारे में बताते हुए, शिक्षा मंत्री ने कहा कि 15% की छूट, जो पहले किताब बेचने वालों को मिलती थी, अब सीधे स्कूलों के ज़रिए स्टूडेंट्स को दी जाएगी। इस कदम से परिवारों पर पैसे का बोझ कम होने के साथ-साथ सिस्टम में ज़्यादा जवाबदेही आने की उम्मीद है। इसके बारे में डिटेल में बताते हुए, मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि PSEB ने इस प्रोसेस को आसान बनाने के लिए एक खास ई-कॉमर्स पोर्टल भी बनाया है। स्टूडेंट्स मोबाइल एप्लीकेशन या ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए टेक्स्टबुक्स की मांग कर सकेंगे, जबकि स्कूल क्लास-वाइज़ और सब्जेक्ट-वाइज़ ज़रूरतें डिजिटली अपलोड कर सकेंगे। उन्होंने आगे कहा, “हर स्टूडेंट को अलग-अलग लॉगिन क्रेडेंशियल दिए जाएंगे ताकि माता-पिता जब भी ज़रूरत हो, सीधे ऑर्डर बुक कर सकें।” बोर्ड चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह ने कहा कि पोर्टल को एक सिक्योर ऑनलाइन पेमेंट गेटवे से जोड़ा गया है ताकि आसान, ट्रांसपेरेंट और अच्छे ट्रांज़ैक्शन हो सकें। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम खास तौर पर इसलिए डिज़ाइन किया गया है ताकि ज़्यादा पैसे लेने की कोई गुंजाइश न रहे और पूरे प्रोसेस में पूरी ट्रांसपेरेंसी बनी रहे। उन्होंने बताया कि मिले ऑर्डर के आधार पर, बोर्ड के रीजनल ऑफिस टेक्स्टबुक्स के बंडल तैयार करेंगे ताकि स्कूलों और स्टूडेंट्स को समय पर डिलीवरी हो सके। स्कूलों को एक अंडरटेकिंग देनी होगी कि तय कीमत से ज़्यादा पैसे नहीं लिए जाएंगे, जिससे नई पॉलिसी का सख्ती से पालन हो सके।

गांव ओइंड को बड़ी सौगात: मंत्री बरिंदर गोयल ने लिफ्ट इरिगेशन स्कीम का किया शुभारंभ

श्री चमकौर साहिब. पंजाब के कैबिनेट मंत्री, बरिंदर कुमार गोयल ने ओइंड गांव में लिफ्ट इरिगेशन स्कीम का उद्घाटन किया। यह प्रोजेक्ट श्री चमकौर साहिब तहसील के उन गांवों के लिए एक अहम कदम साबित होगा जो अभी भी नहर के पानी से वंचित हैं और जहां ग्राउंडवाटर लगातार गहरा होता जा रहा है। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए, कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि श्री चमकौर साहिब एक ऐतिहासिक शहर है और इस इलाके से मुख्य नहरें – सरहिंद नहर और भाखड़ा मेन लाइन नहर गुजरने के बावजूद, कई गांवों को अब तक नहर के पानी की सुविधा नहीं मिल रही थी, जिसके कारण छोटे किसान मोटर कनेक्शन न होने के कारण पानी के लिए दूसरे ज़मीन मालिकों पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए और नहरी सिंचाई के तहत ज़्यादा से ज़्यादा एरिया लाने के सरकार के लक्ष्य को पूरा करने के लिए यह लिफ्ट सिंचाई स्कीम तैयार की गई है और पूरे राज्य में इसे सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है। इससे किसानों को आत्मनिर्भर बनने में भी मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि इस स्कीम के तहत, गांव ओइंड के पास भाखड़ा मेन लाइन नहर के समराला मेजर सिस्टम से पानी लिफ्ट करके लगभग 900 mm (लगभग 3 फीट) डायमीटर वाले मेन राइजर पाइप के ज़रिए गांव गग्गों में बनने वाले D-टैंक तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद, चार अलग-अलग डिस्ट्रीब्यूशन स्कीमों के ज़रिए आस-पास के गांवों में पानी की सप्लाई पक्की की जाएगी। बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि इस प्रोजेक्ट पर लगभग 44.83 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इससे लगभग 4500 एकड़ खेती लायक ज़मीन को नहरी पानी की सुविधा मिलेगी। इस स्कीम से श्री चमकौर साहिब, सालोमाजरा, गग्गोन, गढ़राम खुर्द, गढ़राम कलां, पीपलमाजरा, रुड़की, तालापुर, दुगरी, कोटली, कमालपुर, रामपुर बेट समेत कई गांवों को फायदा होगा। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ खेती की पैदावार बढ़ेगी बल्कि किसानों की इनकम भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए पूरी तरह तैयार है और आने वाले समय में भी ऐसे जनहित के प्रोजेक्ट लागू किए जाएंगे। श्री चमकौर साहिब हलके के MLA डॉ. चरणजीत सिंह ने इस खास प्रोजेक्ट के लिए कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल का शुक्रिया अदा किया। उद्घाटन समारोह में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार ने लोगों से किए सभी वादे पूरे किए हैं और राज्य के लोगों को जनहित की स्कीमों का ज़्यादा से ज़्यादा फायदा पहुंचाया है। इस मौके पर असिस्टेंट कमिश्नर (जी) कम एसडीएम श्री चमकौर साहिब प्रदीप सिंह बैंस, डीएसपी श्री चमकौर साहिब मनजीत सिंह औलाख, एसई गगनदीप सिंह गिल, ईएक्स गुरशरण सिंह विर्क, एसडीओ कुलविंदर सिंह, प्रो. बिरदेविंदर सिंह बल्लां, एनपी राणा, सिकंदर सिंह सहेरी, अमनदीप सिंह मांगट, हरनेक सिंह भूरा, जगदेव भटोआ, अमृतपाल कौर नागरा, जगतार सिंह घड़ूआं व अन्य उच्च अधिकारी व गणमान्य मौजूद थे।

अवैध निर्माण पर कड़ा वार: Punjab में कॉलोनियों पर चला बुलडोज़र, प्रशासन अलर्ट

गुरदासपुर. पंजाब सरकार की गाइडलाइन और एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल) गुरसिमरन सिंह ढिल्लों के आदेशों के बाद, PAPRA एक्ट 1995 के तहत समय-समय पर अनधिकृत कॉलोनियों को नोटिस जारी किए गए और उन्हें समय-समय पर डिमोलिश किया गया। आज एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल) गुरसिमरन सिंह ढिल्लों के आदेशों के बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट रूपिंदर कौर की देखरेख में डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर रितेश गोयनका, असिस्टेंट टाउन प्लानर पुनीत डिगरा, असिस्टेंट टाउन प्लानर प्रभजोत सिंह और जिला प्रशासन/रेगुलेटरी टीम की ओर से बड़ी कार्रवाई करते हुए गांव राजूवाल में PAPRA एक्ट 1995 का उल्लंघन करके बनाई गई अनधिकृत कॉलोनी को डिमोलिश किया गया। इस बारे में जानकारी देते हुए एडिशनल डिप्टी कमिश्नर गुरसिमरन सिंह ढिल्लों ने बताया कि भविष्य में होने वाले डेवलपमेंट को कंट्रोल करने के लिए, गांव राजूवाल में बनी अनधिकृत कॉलोनियों को PAPRA एक्ट-1995 के तहत नोटिस जारी कर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई है, क्योंकि अनधिकृत कॉलोनियों के मालिक सरकारी निर्देशों को नजरअंदाज़ करके सरकारी नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि PAPRA एक्ट-1995 के अमेंडमेंट 2024 के अनुसार, अनधिकृत कॉलोनी काटने वाले व्यक्ति को 5 से 10 साल की जेल और 25 लाख से 5 करोड़ तक का जुर्माना हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा रेगुलेटरी विंग समय-समय पर गुरदासपुर जिले में बन रही अनधिकृत कॉलोनियों और कंस्ट्रक्शन की जांच कर रहा है। इसके साथ ही काम रोकने के लिए संबंधित एक्ट के तहत नोटिस जारी कर रहा है और संबंधित पुलिस स्टेशन अफसर को आगे की कानूनी कार्रवाई करने के लिए कह रहा है। इस मौके पर उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे ऐसी गैर-कानूनी कॉलोनियों में प्लॉट न खरीदें जो सरकार से मंजूर न हों और किसी भी कॉलोनी में प्लॉट खरीदने से पहले सरकार की मंजूरी जरूर लें ताकि प्रॉपर्टी को नुकसान न हो और उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। इसके अलावा उन्होंने कहा कि PUDA एरिया में 19 मार्च 2018 से पहले जो भी अनधिकृत कॉलोनियां अप्लाई की गई हैं, वे कॉलोनाइजर जरूरी डॉक्यूमेंट जमा करके तुरंत अपनी कॉलोनियों को रेगुलर करवा लें, नहीं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी कॉलोनाइजर/प्रमोटर डिपार्टमेंट की मंजूरी लिए बिना कोई कंस्ट्रक्शन करता है, तो उसके खिलाफ नियमों के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बच्चों के लिए सरकार का बड़ा फैसला: Punjab में 2.36 लाख से अधिक को फायदा, करोड़ों रुपये रिलीज

चंडीगढ़. सोशल सिक्योरिटी, महिला और बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि पंजाब सरकार आश्रित और आश्रित बच्चों के कल्याण और सर्वांगीण विकास को खास प्राथमिकता दे रही है। इसी सिलसिले में, पंजाब सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के दौरान मार्च महीने के लिए 35.50 करोड़ रुपये की फाइनेंशियल मदद जारी की है, जिससे राज्य भर के 2.36 लाख से ज़्यादा ज़रूरतमंद बच्चों को इस स्कीम का सीधा फायदा मिला है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने इस स्कीम को असरदार तरीके से लागू करने के लिए फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के दौरान 432.78 करोड़ रुपये का बजट भी रखा है, ताकि राज्य के ज़्यादा से ज़्यादा आश्रित बच्चों को लगातार फाइनेंशियल मदद दी जा सके। इस बारे में और जानकारी देते हुए डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि इस स्कीम के तहत लाखों आश्रित बच्चों को फायदा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इस फाइनेंशियल मदद का मकसद बच्चों की पढ़ाई, सेहत और पूरा विकास पक्का करना है ताकि कोई भी बच्चा पैसे की तंगी की वजह से अपने भविष्य से दूर न रहे। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की लीडरशिप में पंजाब सरकार लोगों के हक में और इंसानियत वाली स्कीमें लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि आश्रित बच्चों को फाइनेंशियल मदद देना सिर्फ एक भलाई की स्कीम नहीं है, बल्कि इन बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने की दिशा में एक सेंसिटिव और ज़रूरी कदम है। उन्होंने आगे कहा कि इस स्कीम के तहत वे बच्चे कवर होते हैं जिनकी उम्र 21 साल से कम है और जिनके माता-पिता गुज़र चुके हैं, लापता हैं या परिवार की देखभाल करने में शारीरिक या मानसिक रूप से असमर्थ हैं। इस स्कीम के तहत दी जा रही फाइनेंशियल मदद ऐसे बच्चों की पढ़ाई जारी रखने और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मदद करती है। डॉ. बलजीत कौर ने दोहराया कि पंजाब सरकार सोशल सिक्योरिटी स्कीमों को और मज़बूत करने और समाज के कमज़ोर तबके के हर बच्चे की देखभाल, सुरक्षा और पूरे विकास को पक्का करने के लिए कमिटेड है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार का मकसद एक सुरक्षित, सबको साथ लेकर चलने वाला और आगे बढ़ने वाला पंजाब बनाना है, जहाँ हर बच्चे को आगे बढ़ने और अपना भविष्य बनाने के बराबर मौके मिलें।