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पंजाब में ड्रोन के जरिए नशे की तस्करी की कोशिश नाकाम, 5 किलो हेरोइन और अफीम जब्त

अमृतसर भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे अमृतसर क्षेत्र में बीएसएफ ने अलग-अलग कार्रवाई के दौरान 5.050 किलो अफीम और 5.012 किलो हेरोइन बरामद की है। दोनों मामलों में अज्ञात लोगों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किए गए हैं। एक कार्रवाई में पैकेट के साथ पैकिंग सामग्री भी मिली, जबकि दूसरे मामले में हेरोइन के साथ ड्रोन बरामद होने की बात सामने आई है। पहली कार्रवाई में 100 बटालियन बीएसएफ की 'ए' कंपनी के कमांडर मॉड सिंह राठौर की ओर से थाना लोपोके में शिकायत दी गई। शिकायत के अनुसार पुलमोरां बीओपी क्षेत्र में बीएसएफ को एक संदिग्ध पैकेट मिला। पैकेट को कब्जे में लेकर सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में खोला गया तो उसमें 5.050 किलो अफीम बरामद हुई। पैकेट के साथ करीब 490 ग्राम पैकिंग सामग्री भी मिली। कुल संदिग्ध पैकेट का वजन 5.540 किलो बताया गया है। इस संबंध में थाना लोपोके में एनडीपीएस एक्ट की धारा 18, 61 और 85 के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।  घरिंडा में हेरोइन के साथ ड्रोन बरामद दूसरी कार्रवाई घरिंडा थाना क्षेत्र में हुई। 181 बटालियन बीएसएफ के अधिकारी राकेश नेगी की ओर से दी गई शिकायत के अनुसार बीएसएफ की टीम गश्त पर थी। इसी दौरान एक संदिग्ध पैकेट बरामद हुआ, जिसे चौकी इंचार्ज एएसआई राजबीर सिंह के हवाले किया गया। पैकेट खोलकर जांच करने पर उसमें 5 किलो 12 ग्राम हेरोइन मिली। बरामद हेरोइन के साथ डीजे आई मैट्रिस 400 ड्रोन भी बरामद किया गया है। पुलिस ने इस संबंध में थाना घरिंडा में एनडीपीएस एक्ट की धाराओं  के तहत केस दर्ज किया है।  

बीमार दादी से बात कर सकेंगे सांसद अमृतपाल, वीडियो कॉल की मिली इजाजत

चंडीगढ़  असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह को अमृतसर की अदालत से राहत मिली है। अदालत ने उन्हें अपनी बीमार दादी से वीडियो कॉल के जरिये बातचीत करने की अनुमति दी है।  अमृतपाल सिंह की ओर से उनके वकीलों ने अदालत में इस संबंध में याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बरिंदर सिंह ने  फैसला सुनाया। अदालत के आदेश के मुताबिक, अमृतपाल सिंह आज से अगले पांच दिनों के भीतर एक बार अपनी बीमार दादी से वीडियो कॉल पर बातचीत कर सकेंगे। इस दौरान उन्हें अधिकतम 10 मिनट तक दादी का हालचाल पूछने की अनुमति होगी। अमृतपाल सिंह फिलहाल असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं।  अमृतपाल सिंह के वकीलों ने इस संबंध में कोर्ट में याचिका दायर की थी। मंगलवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बरिंदर सिंह ने यह आदेश दिया। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, अमृतपाल सिंह 7 अक्टूबर से अगले 5 दिनों के भीतर एक बार अपनी दादी से वीडियो कॉल पर बात कर सकेंगे। अमृतपाल सिंह अप्रैल 2023 से असम के डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं। अप्रैल 2026 में NSA की अवधि खत्म होने के बाद पंजाब पुलिस ने उन्हें अजनाला थाना हिंसा के आपराधिक मामले में जेल में ही औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से उन्हें डिब्रूगढ़ जेल में ही न्यायिक हिरासत में रखा गया है। क्यों जेल में बंद हैं अमृतपाल सिंह पढ़िए…     अजनाला थाने पर हमला: अमृतपाल सिंह के जेल जाने का मुख्य कारण 23 फरवरी 2023 को अमृतसर के अजनाला पुलिस स्टेशन पर हुआ हिंसक हमला है। अमृतपाल ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर पुलिस बैरिकेड्स तोड़े और हिरासत में बंद अपने एक साथी को जबरन छुड़ा लिया, जिसमें छह पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना के बाद उनके खिलाफ हत्या के प्रयास , दंगा भड़काने और आर्म्स एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई थी।     गिरफ्तारी और शुरुआती NSA: पंजाब पुलिस के बड़े सर्च ऑपरेशन के बाद 23 अप्रैल 2023 को उन्हें मोगा से गिरफ्तार किया गया। देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरा मानते हुए सरकार ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया और कानून-व्यवस्था बिगड़ने के डर से उन्हें असम की हाई-सिक्योरिटी डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल भेज दिया गया।     जेल मे रहते लोकसभा चुनाव जीता: जेल में बंद रहते हुए ही जून 2024 में अमृतपाल सिंह ने पंजाब की खडूर साहिब सीट से निर्दलीय चुनाव जीता। जुलाई 2024 में उन्हें सांसद पद की शपथ लेने के लिए कोर्ट से 4 दिनों की विशेष पैरोल मिली थी, जिसके बाद वे वापस डिब्रूगढ़ जेल भेज दिए गए।     अप्रैल 2026 में NSA की अवधि समाप्त: अमृतपाल सिंह पर लगा NSA (रासुका) अप्रैल 2026 में पूरी तरह समाप्त हो गया। पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में स्पष्ट किया कि वे उनके डिटेंशन को चौथी बार आगे नहीं बढ़ा रहे हैं। कानूनन किसी भी व्यक्ति को प्रिवेंटिव डिटेंशन के तहत बिना ट्रायल के एक निश्चित अवधि से ज्यादा नहीं रखा जा सकता, इसलिए उनका NSA हटा दिया गया।     री-अरेस्ट और न्यायिक हिरासत: जैसे ही अप्रैल 2026 में अमृतपाल का NSA हटा, पंजाब पुलिस ने उन्हें अजनाला थाना हिंसा के मुख्य आपराधिक मामले में जेल के भीतर ही फिर से औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेशानुसार, सुरक्षा कारणों से उन्हें असम की डिब्रूगढ़ जेल में ही न्यायिक हिरासत में रखा गया है और मामले की आगे की कानूनी सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चल रही है।

IPS वाई. पूर्ण कुमार केस में चंडीगढ़ पुलिस पर सवाल, एक साल बाद भी जांच नहीं हुई पूरी

चंडीगढ़  हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूर्ण कुमार की आत्महत्या को सात अक्टूबर को एक साल पूरा हो जाएगा, लेकिन मामले की जांच अभी तक अंतिम नतीजे तक नहीं पहुंची है। चंडीगढ़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी गठित करने के बाद कई स्तर पर जांच की, लेकिन अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। यहां तक कि पुलिस ने एफआइआर में किसी अधिकारी का नाम भी नहीं लिखा था। ऐसे में किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। सात अक्टूबर 2025 को 2001 बैच के 52 वर्षीय आईपीएस अधिकारी पूरण कुमार ने चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित आवास के बेसमेंट में अपनी सर्विस रिवाॅल्वर से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। अधिकारियों पर लगाए थे गंभीर आरोप घटना के बाद पुलिस को मौके से उनका अंतिम नोट मिला था। अंतिम नोट में पूर्ण कुमार ने हरियाणा के कई वरिष्ठ व सेवानिवृत्त पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों पर जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, प्रताड़ना और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। उनकी पत्नी अमनीत पी. कुमार भी भी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। उन्हीं की शिकायत के आधार पर चंडीगढ़ पुलिस ने नौ अक्टूबर को आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत एफआइआर दर्ज की। बाद में एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(वी) भी जोड़ी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में छह सदस्यीय एसआईटी गठित की गई थी। आत्महत्या के बाद हुए थे कई विरोध प्रदर्शन वाई पूर्ण कुमार की आत्महत्या के बाद चंडीगढ़ समेत हरियाणा और पंजाब में कई विरोध प्रदर्शन हुए थे। उनके परिवार, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समुदायों से जुड़े लोगों ने आरोपित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी। चंडीगढ़ में भी प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। कई जगहों पर प्रदर्शन के दौरान पूर्ण कुमार के अंतिम नोट में लगाए गए आरोपों का मुद्दा उठाया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मामले में केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि अभी तक पुलिस ने किसी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की।

PU में PhD स्कॉलर की करंट लगने से मौत, SDO समेत तीन के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश

चंडीगढ़. पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में करंट से पीएचडी स्काॅलर ज्योति की मौत केस की मजिस्ट्रियल इंक्वायरी पूरी हो गई है। जांच रिपोर्ट डीसी निशांत कुमार यादव को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में हादसे के लिए कई स्तरों पर लापरवाही का उल्लेख किया है। पीयू के इंजीनियरिंग विभाग के एसडीओ, एक जूनियर इंजीनियर और संबंधित इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथाॅरिटी (सीईए) की वर्ष 2013 की गाइडलाइंस के उल्लंघन को भी प्रमुखता से रेखांकित किया है। रिपोर्ट के अनुसार, जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी खुले तारों और विद्युत व्यवस्था की नियमित जांच करने की थी, वे अपनी ड्यूटी अपेक्षित तरीके से नहीं निभा पाए। नियमित निरीक्षण में खामियों को समय रहते दूर किया जाता तो हादसे को टाला जा सकता था।

SIR के विरोध में चंडीगढ़ में कांग्रेस का मार्च, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ भी खोला मोर्चा

चंडीगढ़. मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चंडीगढ़ कांग्रेस ने मंगलवार को इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ रोष मार्च निकाला। हाथों में तिरंगा लेकर प्रदर्शनकारी डीसी कार्यालय की ओर बढ़े। कार्यालय से कुछ दूरी पहले चंडीगढ़ पुलिस ने बैरिकेड लगाकर मार्च को रोक दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने वहीं प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयोग तथा केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदेश अध्यक्ष एचएस लक्की ने कहा कि कहा कि कांग्रेस इस अभियान को चंडीगढ़ तक सीमित नहीं रखेगी। आने वाले दिनों में शहर के प्रत्येक वार्ड, गांव और सेक्टर तक अभियान पहुंचाया जाएगा। मार्च में कांग्रेस के पार्षदों, जिला व ब्लॉक पदाधिकारियों, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, सेवादल तथा समाजवादी पार्टी सहित इंडिया गठबंधन के अन्य दलों के कार्यकर्ता शामिल हुए।

‘वारिस पंजाब दे’ पर बयान से गरमाई सियासत, अयाली और खालसा ने जताई नाराजगी

चंडीगढ़. अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताए जाने पर पार्टी के वरिष्ठ नेता सरदार मनप्रीत सिंह अयाली और सांसद भाई सरबजीत सिंह खालसा ने कड़ा एतराज जताया है। पार्टी की मान्यता और चुनाव संबंधी विवाद को लेकर हाई कोर्ट में चल रही कार्रवाई के दौरान पार्टी को सुरक्षा के लिए खतरा बताए जाने पर नेताओं ने इसे सिख कौम और उसकी राजनीतिक आवाज को लेकर गंभीर टिप्पणी करार दिया। सिख कौम ने देश की आजादी के लिए दी है कुर्बानियां दोनों नेताओं ने मंगलवार को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर पार्टी के खिलाफ की जा रही कार्रवाई रोकने की मांग की। नेताओं ने कहा कि सिख कौम ने देश की आजादी से लेकर उसकी सुरक्षा तक में बड़ी कुर्बानियां दी हैं।

वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का प्रदर्शन, दिल्ली में जुटे पंजाब के सांसद; चन्नी-रंधावा भी साथ

चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस हाईकमान ने संगठन को एकजुट करने के साथ ही केंद्र के खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाने की कवायद तेज कर दी है। मंगलवार को नई दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे पर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सांसदों के प्रदर्शन में पंजाब कांग्रेस की भी मजबूत भागीदारी दिखाई दी। पंजाब से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और गुरजीत सिंह औजला समेत अन्य नेता दिल्ली में प्रदर्शन में पहुंचे। इंडिया गठबंधन के सांसद संसद भवन से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद सांसदों ने सड़क पर धरना दिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की।

परगट सिंह की ताजपोशी 11 अक्टूबर को, पंजाब में होने वाले कार्यक्रम में सचिन पायलट भी रहेंगे मौजूद

चंडीगढ़. पंजाब कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह की औपचारिक ताजपोशी की तैयारियां तेज हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार परगट सिंह 11 अक्टूबर के आसपास चंडीगढ़ में प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार संभाल सकते हैं। इससे पहले दिल्ली में उनकी वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और सांसदों के साथ मुलाकातों का दौर जारी है। इन बैठकों के जरिए पंजाब कांग्रेस की आगामी रणनीति और संगठन को मजबूत करने पर मंथन किया जा रहा है। दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात का दौर प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने से पहले परगट सिंह दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर पंजाब के राजनीतिक हालात की जानकारी साझा कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इन बैठकों में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों, संगठनात्मक बदलाव और पार्टी नेताओं के बीच बेहतर समन्वय जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। चंडीगढ़ में होगी परगट सिंह की ताजपोशी परगट सिंह की औपचारिक ताजपोशी का कार्यक्रम चंडीगढ़ में आयोजित किए जाने की तैयारी है। कांग्रेस के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट भी अगले चार-पांच दिनों में चंडीगढ़ पहुंच सकते हैं। इसके बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में परगट सिंह को विधिवत रूप से प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार सौंपे जाने की संभावना है। राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर भी पार्टी स्तर पर चर्चा चल रही है। परगट सिंह के सामने क्या है सबसे पड़ी चुनौती? परगट सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी और अंदरूनी मतभेदों को पीछे छोड़कर नेताओं व कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाने की होगी। पार्टी में लंबे समय से चल रही खींचतान के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने परगट सिंह को ऐसे चेहरे के रूप में चुना है, जो विभिन्न धड़ों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सके। वहीं, पंजाब के विभिन्न मुद्दों पर कांग्रेस का सरकार के खिलाफ आंदोलन भी जारी है। ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष के कार्यभार संभालने के बाद पार्टी की सक्रियता और संगठनात्मक गतिविधियों को और तेज करने की तैयारी है। कांग्रेस का लक्ष्य 2027 के चुनाव से पहले संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना है।

छात्रों की मानसिक सेहत पर पंजाब सरकार का फोकस, स्कूलों में अब होगी मेंटल हेल्थ काउंसलिंग

जालंधर. कांग्रेस नेता एवं पंजाब ब्राह्मण कल्याण बोर्ड के पूर्व डायरेक्टर एडवोकेट रविश कुमार शर्मा द्वारा भेजे गए लीगल नोटिस के बाद पंजाब सरकार हरकत में आई है। रवीश शर्मा ने 18 सितंबर 2026 को पंजाब सरकार को लीगल नोटिस भेजकर सुप्रीम कोर्ट के केस सुखदेव साहा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करने की मांग की थी। स्कूलों में जरूरी है काउंसलिंग सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को स्कूलों में मेंटल हेल्थ पॉलिसी अपनाने, काउंसलर नियुक्त करने और सुसाइड प्रिवेंशन के उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं। रवीश राज शर्मा ने यह मुद्दा उठाया था कि स्कूलों में विद्यार्थियों की काउंसलिंग के लिए काउंसलर होना जरूरी है ताकि वह बच्चों की मानसिक स्थिति को समझ कर उसे हिसाब से उन्हें गाइड कर सके। उन्होंने यह मुद्दा इसलिए उठाया था कि पिछले समय के दौरान बड़ी गिनती में विद्यार्थियों ने दबाव में आत्महत्या की हैं। मेंटल हेल्थ को लेकर हरकत में आई सरकार इस लीगल नोटिस पर संज्ञान लेते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री कार्यालय ने शिक्षा विभाग को कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसके बाद पंजाब सरकार, स्कूल शिक्षा विभाग ने डायरेक्टर, स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग पंजाब, मोहाली को भेजे गए पत्र में स्पष्ट लिखा गया है कि एडवोकेट के जरिए भेजे गए रवीश शर्मा के लीगल नोटिस में दर्शाए गए मामले पर तुरंत अगली जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सीधे संबंधित एडवोकेट और रवीश राज शर्मा को सूचित करते हुए सरकार को भी भेजी जाए।

पंजाब सरकार की बड़ी चुनौती, CBI जांच के हाईकोर्ट आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

चंडीगढ़  पंजाब में अधिकारियों के तबादलों, अनुकूल नीतियां बनवाने, टेंडर और अन्य कथित अवैध गतिविधियों के लिए लेन-देन के आरोपों की जांच का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने के निर्देश दिए गए थे। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। अब इस मामले में शीर्ष अदालत में सुनवाई होगी। जानें क्या है मामला यह मामला एनफोर्समेंट डायरेकरेट (ईडी) की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को लिखी गई चिट्ठी से जुड़ा है। ईडी ने चिट्ठी के माध्यम से पंजाब में अधिकारियों के तबादलों, नीतियों को प्रभावित करने, टेंडर और अन्य कथित गतिविधियों में लेन-देन के आरोपों की जानकारी दी थी। इसी मामले की जांच को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद पंजाब सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सरकार की ओर से दायर याचिका में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत से राहत की मांग की गई है। कल ही चीमा ने दिए थे संकेत सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के संकेत सोमवार को ही वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में दे दिए थे। उन्होंने हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा था कि सरकार इस आदेश को चुनौती देने के लिए कानूनी विकल्प अपनाएगी। इसके अगले ही दिन पंजाब सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी गई। पंजाब की राजनीति में बढ़ी सियासत इस मामले को लेकर पंजाब की राजनीति में भी सियासत तेज है। विपक्षी दल हाईकोर्ट के आदेश और ईडी की चिट्ठी को आधार बनाकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, पंजाब सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश को शीर्ष अदालत के समक्ष चुनौती दी जाएगी। अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद जांच की दिशा और हाईकोर्ट के आदेश पर आगे की कार्रवाई को लेकर शीर्ष अदालत के रुख पर नजर रहेगी। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश पर क्या स्थिति रहती है और मामले की जांच आगे किस एजेंसी के माध्यम से होगी।