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देवघर एयरपोर्ट से गुवाहाटी, हैदराबाद और सूरत के लिए नई उड़ानें जल्द

 देवघर  गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने गुरुवार को देवघर में कहा कि अक्टूबर-नवंबर में देवघर में बिहार-झारखंड का पहला वीजा फेसिलटी सेंटर शुरू होगा। अभी तक लोग वीजा बनवाने दिल्ली या कोलकाता जाते थे। अब यह सुविधा देवघर में मिलेगी। जानकारी हो कि मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ में भी यह सुविधा नहीं है। अभी छोटे देश जाने के लिए वीजा बनना शुरू होगा। पर्यटन या पढ़ाई के लिए सिंगापुर, दुबई, थाइलैंड, मलेशिया, बैंकॉक जाने वालों को देवघर वीजा केंद्र से वह सुविधा मिलने लगेगी। देवघर एक बड़ा केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि दो न्यूक्लियर प्लांट भी इस क्षेत्र को मिल रहा है। एक देवघर के पुनासी डैम और दूसरा बिहार के बांका में होगा। देवघर से हैदराबाद, गुवाहाटी, सूरत की चलेगी फ्लाइट सांसद ने बताया किया कि देवघर एयरपोर्ट का विस्तार होगा। जिसके लिए 450 करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुका है। शीघ्र ही निविदा होगी। जल्द ही देवघर एयरपोर्ट से नई उड़ान शुरू होगी। देवघर से गुवाहाटी, हैदराबाद और सूरत की विमान सेवा शुरू होगी। वहीं, मुंबई और कोलकाता के लिए अब प्रतिदिन फ्लाइट हो जाएगी। जानकारी हो कि अभी दिल्ली, बेंगलुर की प्रतिदिन यात्री विमान है। मुंबई के लिए सप्ताह में तीन दिन है। जो प्रतिदिन हो जाएगी। गोड्डा से गुजरात और कोटा की सीधी ट्रेन देवघर और गोड्डा से लगातार नई ट्रेन नए गंतव्य के लिए चल रही है। एक नहीं कई ट्रेनें हो गई हैं। इस बीच सांसद ने एलान किया कि जल्द ही गोड्डा से गुजरात और कोटा की सीधी ट्रेन चलेगी। दिसंबर 2027 तक गोड्डा-महगामा रेल लाइन का काम पूरा हो जाएगा और महगामा तक ट्रेन चलने लगेगी। वहीं, 28 जून 2028 तक देवघर से पीरपैंती रेल लाइन पूरी हो जाएगी। उसके बाद सीधी ट्रेन चलेगी। गोड्डा-पाकुड़ के बीच भी रेल लाइन बिछेगी। यह पीपीपी मोड पर होगा। साहिबगंज-पाकुड़ को मिलेगी वंदे भारत डॉ. निशिकांत ने कहा कि भागलपुर से कोलकाता के बीच एक वंदे भारत जल्द शुरू होगी। इससे साहिबगंज और पाकुड़ के लोगों को फायदा होगा। साहिबगंज और पाकुड़ में इसका ठहराव होगा। वंदे भारत सुबह भागलपुर से चलेगी और शाम में कोलकाता से भागलपुर के लिए वापस होगी। यह वाया साहिबगंज और पाकुड़ होगी। बता दें कि पाकुड़ सबसे अधिक राजस्व देने वाला इलाका है।  

2819 अभ्यर्थियों को राहत नहीं, 8 और 9 मई को होगी पेपर-2 की परीक्षा

 रांची झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद में महत्वपूर्ण सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रार्थी और अन्य सभी 2819 अभ्यर्थी अगर चाहें तो 8 और 9 मई को होने वाली पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। अदालत ने फिलहाल पुनर्परीक्षा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट में माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद से संबंधित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई के दौरान प्रार्थियों ने पुनर्परीक्षा पर रोक लगाने का आग्रह किया था। लेकिन अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत नहीं दी। अदालत ने कहा कि परीक्षार्थी चाहें तो उक्त परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में अब प्रार्थियों सहित सभी 2819 अभ्यर्थी आठ और नौ मई को प्रस्तावित पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल होना होगा। सुनवाई के दौरान सरकार और जेएसएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि परीक्षा में 24 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए, यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित थी। 2819 अभ्यर्थी के आइपी एड्रेस में हैकिंग पाई गई थी, जिसके कारण जेएसएससी ने इनकी पुनर्परीक्षा आठ व नौ मई को लिए जाने का निर्देश दिया। इन सभी अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड भी जारी कर दिया गया। अदालत ने प्रार्थियों के पुनर्परीक्षा पर रोक से संबंधित मांग को अस्वीकार करते हुए प्रार्थियों को निर्देश दिया कि वह चाहें तो पुनर्परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। अदालत ने राज्य सरकार और जेएसएससी को इस वर्ष जून माह तक परिणाम जारी करने का निर्देश भी दिया है। इस संबंध में अर्चना कुमारी और अन्य की ओर से मामले में याचिका दायर की है। जिसमें जेएसएससी को माडल आंसर दिखाने का आदेश देने का मूल आग्रह किया है ताकि वह माडल आंसर के विरुद्ध आपत्ति दे सकें। लेकिन संशोधन याचिका के माध्यम से प्रार्थियों ने जेएसएससी द्वारा जारी 23 अप्रैल 2026 को जारी नोटिस को चुनौती दी है। नोटिस के जरिए जेएसएससी ने 2819 अभ्यर्थियों, जिनमें 20 प्रार्थी भी शामिल हैं, को आठ मई 2026 को प्रस्तावित पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया है। उनकी ओर से कोर्ट को बताया गया था कि बिना परीक्षा केंद्र के अधिकृत व्यक्तियों की पहचान किए और बिना दोषी अभ्यर्थियों को चिह्नित किए सभी 2819 अभ्यर्थियों को एक साथ पुनर्परीक्षा के लिए बाध्य करना अवैध और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। प्रार्थी किसी भी प्रकार के अनुचित साधनों में शामिल नहीं रहे हैं, लेकिन उन्हें भी दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है। आयोग को पहले कथित अनियमितताओं में शामिल परीक्षा केंद्र के अधिकृत व्यक्तियों और संबंधित अभ्यर्थियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, न कि सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से परेशान करना चाहिए

निशांत को मिला स्वास्थ्य मंत्रालय, विजय सिन्हा के विभाग में बदलाव

पटना  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कैबिनेट विस्तार के बाद बिहार सरकार के सभी मंत्रियों के बीच मंत्रालयों और विभागों का बंटवारा कर दिया है। सीएम सम्राट चौधरी ने गृह विभाग अपने पास रखा है। पूर्व सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को पहली बार मंत्री बनने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय मिला है। पिछली सरकार में डिप्टी सीएम रहे विजय कुमार सिन्हा का विभाग बदल दिया गया है। अब विजय सिन्हा कृषि मंत्रालय के मंत्री बनाए गए हैं। पिछली कैबिनेट में उनके पास राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की जिम्मेदारी थी। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल अब राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री होंगे। वह पहले भी यह विभाग संभाल चुके हैं। दोनों डिप्टी सीएम के पास कौन–से विभाग सम्राट सरकार में जदयू कोटे से पहले डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी के पास जल संसाधन और संसदीय कार्य विभाग की जिम्मेदारी रहेगी। दूसरे डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव भी वित्त एवं वाणिज्य कर विभाग के मंत्री बने रहेंगे, हालांकि उनसे ऊर्जा विभाग ले लिया गया है। पहली बार मंत्री बने बुलो मंडल को नया ऊर्जा मंत्री बनाया गया है। मिथिलेश तिवारी बिहार के नए शिक्षा मंत्री जदयू कोटे के मंत्री सुनील कुमार का विभाग बदल दिया गया है। शिक्षा विभाग भाजपा के पास चला गया है। मिथिलेश तिवारी बिहार के नए शिक्षा मंत्री बनाए गए हैं। इसके बदले स्वास्थ्य विभाग जदयू को मिला है, जिसकी कमान निशांत को सौंपी गई है। नाम पार्टी विभाग सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री भाजपा मुख्यमंत्री सचिवालय गृह विभाग निगरानी सभी अनावंटित विभाग विजय चौधरी, डिप्टी सीएम जदयू जल संसाधन संसदीय कार्य बिजेंद्र यादव, डिप्टी सीएम जदयू वित्त एवं वाणिज्य कर विजय सिन्हा, मंत्री भाजपा कृषि विभाग रामकृपाल यादव, मंत्री भाजपा   नीतीश मिश्रा, मंत्री भाजपा नगर विकास एवं आवास विभाग केदार गुप्ता, मंत्री भाजपा   दिलीप जायसवाल, मंत्री भाजपा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग मिथिलेश तिवारी, मंत्री भाजपा शिक्षा विभाग रमा निषाद, मंत्री भाजपा   प्रमोद चंद्रवंशी, मंत्री भाजपा   लखेंद्र पासवान, मंत्री भाजपा   संजय सिंह टाइगर, मंत्री भाजपा उच्च शिक्षा विभाग कुमार शैलेंद्र, मंत्री भाजपा पथ निर्माण विभाग नंदकिशोर राम, मंत्री भाजपा   रामचंद्र प्रसाद, मंत्री भाजपा   अरुण शंकर प्रसाद, मंत्री भाजपा श्रम संसाधन श्रेयसी सिंह, मंत्री भाजपा   श्रवण कुमार, मंत्री जदयू   निशांत कुमार, मंत्री जदयू स्वास्थ्य विभाग अशोक चौधरी, मंत्री जदयू   लेशी सिंह, मंत्री जदयू   मदन सहनी, मंत्री जदयू   सुनील कुमार, मंत्री जदयू   जमा खान, मंत्री जदयू   शीला मंडल, मंत्री जदयू   रत्नेश सदा, मंत्री जदयू   भगवान कुशवाहा, मंत्री जदयू   दामोदर रावत, मंत्री जदयू   शैलेश– बुलो मंडल, मंत्री जदयू ऊर्जा विभाग श्वेता गुप्ता, मंत्री जदयू   संजय पासवान, मंत्री लोजपा–आर   संजय सिंह, मंत्री लोजपा–आर   संतोष सुमन, मंत्री हम   दीपक प्रकाश, मंत्री रालोमो    

जिस मंत्री के जवाब से नाराज थीं मैथिली ठाकुर, सम्राट कैबिनेट से पत्ता साफ

पटना  बिहार में सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली सरकार के मंत्रिमंडल का गुरुवार को विस्तार हो गया है. नीतीश कुमार के बेटे सहित 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली है. बीजेपी कोटे से 15 मंत्री बनाए गए हैं तो जेडीयू से 13 मंत्री बने हैं. इसके अलावा चिराग पासवान की पार्टी से दो, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से एक-एक मंत्री बने हैं।  सम्राट सरकार में ज्यादातर नीतीश कैबिनेट में रहने वाले मंत्रियों को ही जगह मिली है. ऐसे में बीजेपी के एक ऐसे दिग्गज मंत्री का पत्ता सम्राट कैबिनेट से कट गया है, उनका नाम मंगल पांडेय है. बीजेपी ने तीन पुराने मंत्रियों को सम्राट सरकार में जगह नहीं दी है।  मंगल पांडेय सीवान से विधायक हैं और बीजेपी के दिग्गज नेता हैं. नीतीश कुमार की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं. इसी साल फरवरी में बजट सत्र के दौरान मशहूर लोक गायिका और बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर ने अपने विधानसभा क्षेत्र के अस्पताल की बदहाली का मुद्दा उठाया था. इस पर स्वास्थ्य मंत्री के द्वारा दिए जवाब से संतुष्ट नहीं थी और उसी मंत्री मंगल पांडेय का पत्ता कट गया है।  मंगल पांडेय का मंत्री पद से पत्ता कटा बिहार बीजेपी के दिग्गज नेता मंगल पांडेय को सम्राट चौधरी के अगुवाई वाली सरकार में जगह नहीं मिल सकी. बीजेपी ने उन्हें इस बार मंत्री नहीं बनाया है जबकि इससे पहले वाली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री जैसा विभाग संभाल रहे थे. मंगल पांडेय 2017 से लेकर 2022 तक स्वास्थ्य मंत्री रहे. तब मंगल पांडेय को पहली बार कैबिनेट में शामिल किया गया था।   मंगल पांडेय 2024 से लेकर 2025 तक दूसरी बार मंत्री बने. इस बार स्वास्थ्य मंत्री और कृषि मंत्री की जिम्मेदारी संभाली. साल 2025 में जब एनडीए की सरकार बनी तो फिर से मंत्री बने और उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय का जिम्मा मिला, लेकिन सम्राट चौधरी के अगुवाई वाले मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी।  स्वास्थ्य मंत्री से मैथिली ठाकुर ने किया सवाल 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर मशहूर लोक गायिका मैथिली ठाकुर बीजेपी से विधायक चुनी गई. मैथिली ठाकुर ने बजट सत्र के दौरान अपने निर्वाचन क्षेत्र में अस्पताल की इमारत की हालत का मुद्दा उठाया था और कहा था कि यह इतनी जर्जर है कि एक बड़ी दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा है.उन्होंने कहा था कि छत से प्लास्टर लगातार गिर रहा है, दीवारों में गहरी दरारें हैं और बरसात के मौसम में वार्डों में पानी रिसता है, जो लोगों की जिंदगी लिए सीधा खतरा है।  मैथिली ठाकुर ने सवाल उठाया था कि बिहार सरकार द्वारा हर साल स्वास्थ्य बजट बढ़ाने के बाद अस्पतालों की इमारतें इतनी खराब हालत में क्यों हैं? उन्होंने कहा Le कि डॉक्टरों और दवाओं की कमी एक समस्या है,लेकिन इससे भी बड़ा खतरा जर्जर इमारतें हैं, जो कभी भी गिर सकती हैं. क्या सरकार नए भवनों के निर्माण से पहले किसी बड़ी दुर्घटना के होने का इंतजार कर रही है।  मंगल पांडेय के जवाब से संतुष्ट नहीं मैथिली बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर के सवालों का जवाब देते हुए तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा था कि राज्य सरकार अस्पतालों की इमारतों को लेकर गंभीर है. कई अस्पतालों के लिए नई बिल्डिंग को मंजूरी दे दी गई है और कुछ जगह पर काम जारी है. हालांकि, मंत्री के जवाब से मैथिली ठाकुर संतुष्ट नहीं हुईं।  उन्होंने सदन में ही तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा कि उनके इलाके का अस्पताल कई सालों से लिस्ट में है, लेकिन आज तक न मरम्मत का काम शुरू हुआ है और न ही नई इमारत बनी है. उन्होंने कहा था कि कागजों पर जो 'सब ठीक' बताया जा रहा है, धरातल पर सच्चाई उसके ठीक उलट है।  मैथिली ठाकुर ने कहा था कि हर साल सिर्फ योजना बनाने और मंजूरी देने की बात होती है, लेकिन जमीनी हकीकत वही रहती है. उन्होंने यह भी कहा कि मरीज और उनके परिवार डर के साये में इलाज कराने के लिए मजबूर हैं. मैथिली ठाकुर के बार-बार पूछे गए सवालों के बाद सदन का माहौल कुछ देर के लिए गरमा गया था. तीन महीने के बाद ही बिहार में सत्ता परिवर्तन हुआ और सम्राट चौधरी के अगुवाई में कैबिनेट गठन किया तो मंगल पांडेय को जगह नहीं मिली।  बिहार में तीन पुराने मंत्रियों का पत्ता कटा नीतीश कुमार के अगुवाई वाली सरकार में जितने भी मंत्री थे, उनमें से तीन मंत्री को छोड़कर बाकी मंत्रियों को सम्राट कैबिनेट में जगह मिल गई है. सम्राट कैबिनेट में मंगल पांडे को जगह नहीं मिली. इसके अलावा नारायण प्रसाद और सुरेंद्र मेहता को भी जगह नहीं मिली. नीतीश सरकार में नारायण प्रसाद आपदा प्रबंधन मंत्री थे और इससे पहले पर्यटन मंत्री रह चुके हैं. सुरेंद्र मेहता पूर्व की नीतीश सरकार में पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री थे, लेकिन इस बार उन्हें कैबिनेट में जगह नहीं मिली है। 

पटना में भव्य शपथ ग्रहण, सम्राट चौधरी सरकार में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार बने मंत्री

 पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज अपने मंत्रिपरिषद का विस्तार किया। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में पहला विस्तार किया गया, जिसमें 32 नये मंत्रियों को शामिल किया गया। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का भी नाम शामिल है। आज से करीब 22 से दिन पहले जब सम्राट चौधरी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया तब भी निशांत कुमार के उपमुख्यमंत्री बनने की चर्चा हुई थी। जेडीयू के तमाम बड़े नेताओं ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने पहले बिहार घूमने की बात कहकर डिप्टी सीएम बनने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद जेडीयू ने विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव सरीखे वरिष्ठ नेताओं को यह जिम्मेदारी सौंपी। सम्राट चौधरी कैबिनेट के विस्तार के वक्त जेडीयू के वरिष्ठ नेता संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने निशांत कुमार को समझाया और बिहार सरकार में शामिल होने के लिए तैयार किया। अब सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि आखिर निशांत कुमार को कौन सा विभाग मिलता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, निशांत कुमार के खाते में वही विभाग आएंगे जो फिलहाल अभी जेडीयू के खाते यानी कि विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव के पास है। आपको बता दें कि जब निशांत कुमार मंत्री पद के लिए तैयार नहीं दिख रहे थे तब उनके साथ नजर आ रहे युवा विधायकों की कोर टीम में से किसी एक को मंत्री बनाने की चर्चा थी। जेडीयू के उन युवा विधायकों में रुहैल रंजन, अतिरेक कुमार, चेतन आनंद, कोमल सिंह, ऋतुराज कुमार, नचिकेता मंडल वगैरह का नाम शामिल था। भाजपा ने इन्हें बनाया मंत्री भाजपा कोटे से विजय कुमार सिन्हा, रामकृपाल यादव, केदार गुप्ता, नीतीश मिश्रा, मिथिलेश तिवारी, रमा निषाद,दिलीप जायसवाल, श्रेयसी सिंह,प्रमोद चंद्रवंशी, लखविंदर पासवान, संजय टाइगर, इंजीनियर कुमार शैलेन्द्र, नंद किशोर राम, रामचंद्र प्रसाद और अरुण शंकर प्रसाद को मंत्री बनाया गया है। जेडीयू कोटे से कौन-कौन जेडीयू कोटे से निशांत कुमार, श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, रत्नेश सदा, मदन सहनी, लेसी सिंह, श्वेता गुप्ता, बुलो मंडल, दामोदर रावत, भगवान सिंह कुशवाहा, सुनील कुमार, शीला मंडल और जमा खान को मंत्री बनाया गया है। विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव पहले से मंत्री हैं। कुशवाहा के बेटे फिर बने मंत्री चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) से संजय सिंह व संजय पासवान, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हम से संतोष सुमन और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो से दीपक प्रकाश मंत्री बने हैं।

वन भूमि पर जल संरक्षण का बड़ा कदम, भूजल रिचार्ज के लिए बनाए जाएंगे चेकडैम

 रांची  वन भूमि पर जल स्तर बरकरार रखने के लिए करीब छह हजार कच्चे चेकडैम बनाए जाएंगे। पहाड़ियों से उतरने वाली नलिकाओं को जगह-जगह बांधकर ये चेकडैम तैयार किए जाएंगे। इससे भूमि के ऊपर तो जल मौजूद रहेगा ही, भूगर्भ जल भी रिचार्ज होगा। बांधवगढ़ वन क्षेत्र में यह प्रयोग करने वाले केंद्रीय पर्यावरण विशेषज्ञ दिनेश त्रिवेदी ने बताया कि गर्मी में वन्यजीवों के लिए यह आसानी से उपलब्ध होने वाला जलस्रोत होगा। मिट्टी में नमी रहने से हरियाली बढ़ेगी और राज्य के जंगलों में बायोमास की वृद्धि दर्ज की जाएगी। बरसात से पहले ये चेकडैम तैयार कर लिए जाएंगे। त्रिवेदी ने बताया कि राज्य के वन क्षेत्र में पहले से हजारों की संख्या में ऐसे चेकडैम बने हुए हैं। इनकी पहचान कर मरम्मत भी कराई जाएगी। एक लाख मिलियन जल भंडार बढ़ेगा पर्यावरणविद और रांची विश्वविद्यालय में भूगर्भ शास्त्र के अध्यापक नीतिश प्रियदर्शी ने बताया कि राज्य में इस तरह के प्रयोग से एक लाख मिलियन लीटर जल की उपलब्धता बढ़ेगी। वाटर रिचार्ज की वजह से यह जल स्थायी तौर पर जमीन के ऊपर मौजूद रहेगा। नीतिश प्रियदर्शी ने कहा कि जंगलों की प्राकृतिक वाटर रिचार्ज संरचना अतिक्रमण या वृक्ष कटाई की वजह से नष्ट हो गई है। नए तरीके से कच्चे चेकडैम बनाकर इस कमी को पूरा किया जा सकता है। आजीविका का भी बनेगा साधन जंगलों में बने ये वाटर रिचार्ज पिट मछली पालन के लिए भी उपयोगी होंगे। इससे ग्राम समितियों को जोड़कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। वन क्षेत्र में पहले से बड़े बांध बने हुए हैं और वहां मछली पालन हो रहा है। अब कच्चे चेकडैम में भी जल्द विकसित होने वाली मछली की प्रजाति डाली जाएगी।  

आलमगीर आलम कमीशन घोटाला: ईडी ने इंजीनियरों पर कसा शिकंजा, संपत्ति जांच तेज

रांची  ग्रामीण कार्य विभाग के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम से जुड़े टेंडर आवंटन में कमीशन घोटाला केस में ईडी अब मार्च महीने में चार्जशीटेड इंजीनियरों की भी चल-अचल संपत्ति जब्त करेगी। इनपर ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर आवंटन के बदले में कमीशन वसूलने व उस राशि के बंटवारे में शामिल होने का आरोप है। आरोपितों में सेवानिवृत्त मुख्य इंजीनियर, कार्यपालक अभियंता व सहायक अभियंता स्तर के इंजीनियर शामिल हैं। पीएमएल अधिनियम के तहत जांच में ईडी ने जानकारी जुटाई है कि इंजीनियरों ने कमीशन की वसूली कर अपने से ऊपर के अधिकारियों व विभागीय मंत्री तक पहुंचाया। ये टेंडर झारखंड सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग, ग्रामीण विकास विशेष क्षेत्र व झारखंड राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण से संबंधित थे, जिससे ये सभी इंजीनियर जुड़े हुए थे ईडी ने इन 14 इंजीनियर, पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके आप्त सचिव संजीव लाल, पूर्व मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम सहित कुल 36 आरोपितों के विरुद्ध अब तक चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। एसीबी जमशेदपुर में 2019 में दर्ज कांड के आधार पर ईडी ने ईसीआइआर किया था। पूरा मामला जूनियर इंजीनियर सुरेश प्रसाद वर्मा की दस हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार होने से संबंधित था। इसके बाद एसीबी जमशेदपुर ने ही तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम के ठिकाने से 2.67 करोड़ रुपये की नकदी की बरामदगी की थी। ईडी ने उक्त केस में ईसीआइआर करने के बाद वीरेंद्र राम को गिरफ्तार किया और टेंडर आवंटन में कमीशन घोटाले के एक बड़े रैकेट का खुलासा किया। जांच के क्रम में तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम व उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल सहित अन्य आरोपित पकड़े गए थे। पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल सहित कई आरोपित अब भी जेल में हैं। ईडी अब तक 44 करोड़ रुपये की संपत्ति व 38 करोड़ रुपये नकदी जब्त कर चुकी है। अब इंजीनियरों की संपत्ति जब्ती की तैयारी है। ये हैं 14 इंजीनियर, जिनकी चल-अचल संपत्ति खंगाल रही है ईडी सेवानिवृत्त मुख्य इंजीनियर सिंगराई टुटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार व प्रमोद कुमार, कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राज कुमार टोप्पो, अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार व अनिल कुमार (सेवानिवृत्त), सहायक अभियंता राम पुकार राम व रमेश ओझा (दोनों सेवानिवृत्त) और पूर्व अधीक्षण अभियंता/मुख्य अभियंता उमेश कुमार (सेवानिवृत्त)। कमीशन की राशि से अर्जित की है संपत्ति ईडी ने जांच में पाया है कि ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ी इकाइयों में कमीशन व रिश्वत का एक संगठित गिरोह सक्रिय था। इसमें ठेका लेने वाले ठेकेदारों को कुल टेंडर मूल्य का तीन प्रतिशत कमीशन देना पड़ता था। इस कमीशन का बंटवारा भी होता था, जिसमें 1.35 प्रतिशत राशि तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम तक उनके निजी सचिव संजीव लाल के माध्यम से जाता था। वहीं, 0.65 प्रतिशत से एक प्रतिशत राशि विभागीय सचिव व शेष राशि मुख्य इंजीनियरों तथा उनके नीचे के अभियंताओं तक पहुंचती थी।

स्कूल में खाना खाते ही बिगड़ी बच्चों की तबीयत, स्वास्थ्य केंद्र में मचा हड़कंप

 सहरसा बिहार के सहरसा जिले में गुरुवार को एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिले के महिषी प्रखंड स्थित राजकीय मध्य विद्यालय बलुआहा में मिड-डे मील खाने के बाद 250 से अधिक बच्चे अचानक बीमार पड़ गए। खाना खाने के कुछ देर बाद ही बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी, चक्कर और बेचैनी की शिकायत की, जिसके बाद स्कूल परिसर में भारी हड़कंप मच गया। आनन-फानन में सभी बीमार बच्चों को इलाज के लिए महिषी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बीमार बच्चों के पहुंचने से स्वास्थ्य केंद्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और भीड़ जमा हो गई। डॉक्टरों की टीम लगातार बच्चों की जांच और उपचार में जुटी हुई है। छात्रों ने बताई आपबीती पांचवीं कक्षा के छात्र रोहित कुमार ने बताया कि सुबह करीब 10 बजे स्कूल में भोजन में चावल-दाल दिया गया था। इसे खाने के कुछ ही देर बाद तबीयत खराब होने लगी। पेट में तेज दर्द के साथ उल्टी और चक्कर आने लगे। वहीं, सातवीं कक्षा की छात्रा शिवानी ने भी बताया कि भोजन के तुरंत बाद एक-एक कर कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी थी। कई बच्चे सदर अस्पताल रेफर घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। सहरसा के सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम के साथ तुरंत महिषी पहुंचे और बच्चों के इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया। सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह फूड प्वाइजनिंग का मामला लग रहा है। सभी बच्चों का तुरंत इलाज किया जा रहा है। एहतियात के तौर पर जिन बच्चों की तबीयत ज्यादा खराब थी, उन्हें सहरसा सदर अस्पताल रेफर किया गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल सभी बच्चों का उपचार जारी है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं। घबराने की कोई बात नहीं है। लैब भेजे जाएंगे खाने के नमूने इस घटना के बाद से स्कूली बच्चों के अभिभावकों में प्रशासन और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ काफी आक्रोश देखा जा रहा है। जिला प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि मिड-डे मील के भोजन के नमूने इकट्ठा कर लिए गए हैं और उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सीसीटीवी से खुला रेलवे मोबाइल चोरी गैंग का राज, 9 साल के बच्चे ने बताया पूरा नेटवर्क

 रांची  रांची रेलवे स्टेशन पर सक्रिय एक अंतरराज्यीय मोबाइल चोर गिरोह का खुलासा करते हुए आरपीएफ ने बड़ी कार्रवाई की है। इस गिरोह में शामिल 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 4 नाबालिग भी शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह रही कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश एक 9 साल के बच्चे से हुआ, जिसे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पकड़ा गया। मंगलवार को राहुल कुमार नामक यात्री ने जीआरपीएस रांची में मोबाइल चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलते ही आरपीएफ हरकत में आई और स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू की गई। फुटेज में साफ दिखा कि एक नाबालिग लड़का लगेज स्कैनर के पास खड़ा होकर बड़ी सफाई से यात्री की जेब से मोबाइल निकालकर भाग गया। प्लेटफार्म से पकड़ा गया बच्चा, पूछताछ में उगला पूरा नेटवर्क सीसीटीवी के आधार पर संदिग्ध नाबालिग को प्लेटफार्म नंबर 3 से हिरासत में लिया गया। जब उसे फुटेज दिखाया गया, तो उसने न सिर्फ चोरी की बात कबूल की, बल्कि पूरे गिरोह का खुलासा कर दिया। उसने बताया कि वह अकेला नहीं है, बल्कि संगठित तरीके से 8–10 लोगों के गैंग में काम करता है। ये लोग झारखंड के साहिबगंज (तीन पहाड़ क्षेत्र) और अन्य इलाकों से रांची आते हैं। एक टीम में 4–5 लोग स्टेशन पर सक्रिय रहते हैं, जिनमें छोटे बच्चे भी शामिल होते हैं ताकि किसी को शक न हो। ऐसे करते थे चोरी गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था। नाबालिग बच्चों को आगे कर भीड़भाड़ वाले स्थानों जैसे लगेज स्कैनर, टिकट काउंटर और प्लेटफार्म पर लगाया जाता था। ये बच्चे यात्रियों के पास खड़े होकर मौका मिलते ही मोबाइल निकाल लेते थे। चोरी के बाद मोबाइल तुरंत गैंग के बड़े सदस्यों को दे दिया जाता था, जो उसे सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाते थे। इसके बाद इन मोबाइल को झारखंड के तीन पहाड़ इलाके और पश्चिम बंगाल के आसनसोल में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता था। पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह का एक सदस्य विकास कुमार चोरी के मोबाइल खरीदने और खपाने का काम करता था, हालांकि उसका वर्तमान ठिकाना पता नहीं चल सका है। न्यू पुंदाग और कठल मोड़ में छापेमारी, रातभर चली कार्रवाई नाबालिग के खुलासे के बाद आरपीएफ ने तुरंत जाल बिछाया। सीआईबी रांची की टीम के साथ मिलकर न्यू पुंदाग और कठल मोड़ इलाके में छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में कुल 8 लोगों को पकड़ा गया, जिनमें 4 नाबालिग शामिल हैं। इनके पास से 9 मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी कुल कीमत करीब 3.40 लाख रुपये आंकी गई है। बरामद मोबाइल में इनफिनिक्स, वनप्लस, वीवो, रियलमी, ओप्पो, रेडमी और आईफोन जैसे ब्रांड शामिल हैं। दो मई को ही रांची पहुंचा था नया गैंग, पहले भी कर चुके हैं वारदात जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह 2 मई को ही रांची पहुंचा था और लगातार स्टेशन व आसपास के इलाकों में सक्रिय था। इससे पहले भी ये कई यात्रियों को निशाना बना चुके हैं। पुलिस के अनुसार, ऐसे कई और गैंग सक्रिय हैं, जो अलग-अलग राज्यों से आकर रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में चोरी की घटनाओं को अंजाम देते हैं। केस दर्ज, सभी आरोपित जीआरपी को सौंपे गए पूरी कार्रवाई के बाद सभी गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए आरोपितों को जीआरपीएस रांची को सौंप दिया गया है। इस मामले में कांड संख्या 23/26, दिनांक 6 मई 2026 के तहत बीएनएस की धारा 303(2) और 317(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरपीएफ की इस कार्रवाई में एसआई सूरज पांडेय के नेतृत्व में पूरी टीम ने अहम भूमिका निभाई। लगातार सक्रिय हैं गिरोह, आरपीएफ की सख्ती जारी इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि रेलवे स्टेशन पर मोबाइल चोर गिरोह सुनियोजित तरीके से सक्रिय हैं। हालांकि, सीसीटीवी और सतर्कता के चलते ऐसे गिरोह अब लगातार पकड़े जा रहे हैं। आरपीएफ ने संकेत दिया है कि आगे भी इसी तरह अभियान जारी रहेगा और अन्य सक्रिय गैंगों पर भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।

झारखंड यूनिवर्सिटी भर्ती नियमों में बड़ा बदलाव, नियुक्ति के साथ 1 साल की ट्रेनिंग जरूरी

 रांची  राज्य के सभी विश्वविद्यालयों व अंगीभूत कालेजों में नियुक्त होनेवाले शिक्षकों के लिए 12 माह का प्रशिक्षण अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं, यह प्रशिक्षण की अनिवार्यता शिक्षकेत्तर कर्मियों पर भी लागू होगी। शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों की नियुक्ति के साथ ही उन्हें यह अनिवार्य प्रशिक्षण नवगठित झारखंड स्टेट फैकल्टी डवलपमेंट एकेडमी में दिया जाएगा। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग इसका माड्यूल तैयार कर रहा है। राज्य सरकार द्वारा पिछले दिनाें लागू झारखंड विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 में जहां विश्वविद्यालयों एवं कालेजों में शिक्षकों व कर्मियों की नियुक्ति के लिए झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग के गठन का प्रविधान किया है, वहीं इनके प्रशिक्षण को लेकर भी नियम तय किए गए हैं। इसमें 12 माह के अनिवार्य प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। इसके लिए अलग से परिनियम भी तैयार किए जाएंगे। अभी तक विश्वविद्यालय एवं कालेजों में शिक्षकों की नियुक्ति झारखंड लाेक सेवा आयोग से होती थी, जबकि तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्ति विश्वविद्यालय स्तर पर होती थी। नए अधिनियम में इस प्रक्रिया में व्यापक बदलाव किया गया है। इसमें यह भी प्रविधान किया गया है कि विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कालेजों में पदों का सृजन राज्य सरकार करेगी, लेकिन संबद्ध कालेजों को पद सृजन की स्वतंत्रता होगी। इसे लेकर भी विभाग द्वारा अलग से परिनियम तैयार किए जाएंगे। अधिनियम में यह भी प्रविधान किया गया है कि विश्वविद्यालयों व कालेजों में शिक्षकों की नियुक्ति पदों की रिक्तता के अनुसार प्रत्येक वर्ष जनवरी से जुलाई के बीच की जाएगी, जबकि शिक्षकेत्तर कर्मियों की नियुक्ति जुलाई से दिसंबर के बीच होगी।