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झारखंड में माओवादी नेटवर्क पर ड्रोन ‘नेत्रा’ और ‘स्विच’ से सुरक्षा बलों को मिली निर्णायक बढ़त

रांची झारखंड में माओवादियों के विरुद्ध अभियान में हाल के वर्षों में मिली सफलता के पीछे उन्नत तकनीक, हाई रिजॉल्यूशन कैमरे से लैस नेत्रा की भूमिका भी सराहनीय है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के इस हाईटेक ड्रोन की नजर से माओवादी लाख कोशिश के बावजूद नहीं बच पा रहे हैं। बोकारो व हजारीबाग के वन क्षेत्र में एक-एक करोड़ के इनामी कई बड़े माओवादियों के विरुद्ध सफल अभियान की बात हो या फिर सारंडा में एक साथ 17 माओवादियों को मुठभेड़ में मार गिराने का वीरता पूर्ण कार्य हो, माओवादियों के विरुद्ध अभियान में शामिल जवानों के साथ नेत्रा कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। नेत्रा हाईटेक है। यह सीआरपीएफ के लगभग सभी कैंप में है। यह पांच किलोमीटर तक का चक्कर लगाने में सक्षम है। घने जंगल क्षेत्र में सूक्ष्म गतिविधियों तक को देखने में सक्षम है। अगर कोई छुप जाए तो नहीं दिखेगा, लेकिन वह कब तक छुपेगा। सीआरपीएफ का यह नेत्रा दिनभर उड़ता रहता है। कहीं भी हल्की भी हलचल दिखती है तो उसे यह नेत्रा अपने कैमरे में कैद कर लेता है। देता है सटीक लोकेशन, सुरक्षा कैंपों की भी करता है निगरानी किसी भी कैंप की सुरक्षा में संतरी ड्यूटी लगाई जाती है। जंगल में सुरक्षा बलों के कैंप के बीच में अगर 10 किलोमीटर की भी दूरी है तो नेत्रा उस दूरी को नाप देता है। दोनों सुरक्षा कैंपों के बीच से कोई गुजरेगा तो यह हाईटेक ड्रोन उसे आसानी से अपने कैमरे में कैद कर सुरक्षा बलों को इसकी सूचना दे देगा। यह सटीक लोकेशन देता है। अगर माओवादी कहीं दिखे तो उनके लॉन्गीट्यूड व लेटीट्यूड के साथ लोकेशन मिलने पर अभियान में शामिल सुरक्षा बल आसानी से उनकी घेराबंदी कर लेते हैं, जिससे उनके बचकर भागने की संभावना नहीं के बराबर हो जाती है। यह घने जंगल में भी इंसान की मौजूदगी की जानकारी ले लेता है। रात व कम रोशनी में भी यह बेहद प्रभावी है। स्विच ड्रोन भी है बेहद कारगर माओवादियों के विरुद्ध अभियान में सुरक्षा बलों के पास एक अन्य ड्रोन भी है, जिसका नाम स्विच है। यह बिना आवाज के कम ऊचाई पर उड़ान भरता है और माओवादियों के क्षेत्र में कारगर साबित हो रहा है। दुश्मन के ठिकानों का पता लगाने के लिए इसमें भी लंबी दूरी तक उड़ान भरने की क्षमता है। एक साल के भीतर मिली बड़ी सफलताएं     21 अप्रैल 2025 : बोकारो जिले के ललपनिया स्थित लुगू पहाड़ी पर सुरक्षा बलों व पुलिस के साथ मुठभेड़ में एक करोड़ के इनामी प्रयाग मांझी उर्फ विवेक सहित आठ बड़े माओवादी मारे गए।     16 जुलाई 2025 : बोकारो जिले के गोमिया थाना क्षेत्र के बिरहोरडेरा जंगल में सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में पांच लाख रुपये का इनामी माओवादी कुंवर मांझी ढेर। इस मुठभेड़ में सीआरपीएफ के एक जवान परनेश्वर कोच बलिदान हो गए थे।     15 सितंबर 2025 : हजारीबाग जिले के गोरहर थाना क्षेत्र के पनतीतरी जंगल में सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में एक करोड़ का इनामी सहदेव सोरेन, 25 लाख का इनामी रघुनाथ हेम्ब्रम व दस लाख का इनामी बीरसेन गंझू मारा गया।     17 अप्रैल 2026 : हजारीबाग जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने आपरेशन कोतीनीर चलाया, जिसमें 15 लाख का इनामी सहदेव महतो उर्फ अनुज महतो सहित चार माओवादी ढेर हो गए।     22 जनवरी 2026 : पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में एक करोड़ के इनामी अनल दा सहित 17 माओवादी ढेर। आपरेशन मेगाबुरू में मिली यह सफलता।     माओवादियों के विरुद्ध अभियान में सुरक्षा बलों का ड्रोन कैमरा बेहद कारगर साबित हो रहे हैं। इनकी बदौलत बेहतर तरीके से अभियान चल रहा है। – साकेत कुमार सिंह, आईजी सीआरपीएफ, झारखंड चैप्टर  

CCL ने दी बड़ी सौगात: दामोदर नदी पर गिद्दी-भुरकुंडा पुल का होगा पुनर्निर्माण

 गिद्दी (रामगढ़)  हजारीबाग और रामगढ़ जिलों को जोड़ने वाली गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर नदी पर स्थित जर्जर पुल को लेकर लंबे समय से चल रही मांग आखिरकार रंग लाई है। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) बोर्ड की बीते 23 अप्रैल को हुई बैठक में इस महत्वपूर्ण पुल की मरम्मत और नए पुल के निर्माण के लिए 19 करोड़ 44 लाख 64 हजार 400 रुपये की स्वीकृति दे दी गई है। इस फैसले से गिद्दी और भुरकुंडा समेत आसपास के क्षेत्रों के लोगों में खुशी की लहर है। यह फैसला न सिर्फ दो जिलों, बल्कि हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। दो जिलों की धड़कन, अब मिलेगी नई सांस गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर पुल हजारीबाग और रामगढ़ जिलों के साथ-साथ मांडू और बड़कागांव को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। प्रतिदिन हजारों भारी वाहन, स्कूली बच्चे, मजदूर और व्यापारी इसी पुल से गुजरते हैं। ऐसे में इसकी जर्जर हालत लंबे समय से खतरे की घंटी बनी हुई थी। प्रतिदिन हजारों लोग और भारी वाहन इस पुल से गुजरते हैं, जिससे इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है। गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर पुल का मरम्मत भी, नया पुल भी बनेगाः जीएम सीसीएल अरगडा जीएम सत्यजीत कुमार ने बताया कि बीते 23 अप्रैल को बोर्ड की बैठक में गिद्दी-दामोदर नद की जर्जर पुल की मरम्मत व नए पुल निर्माण को ले राशि की स्वीकृति मिल गई है। बताया कि 19 करोड़ 44 लाख 64 हजार 400 रुपये की लागत से राज्य सरकार द्वारा पुराने पुल की तत्काल मरम्मत की जाएगी। साथ ही इसके समानांतर नया आधुनिक पुल बनाया जाएगा। कुल स्वीकृत राशि का 25 प्रतिशत करीब 4 करोड़ 75 लाख शुरुआती चरण में राज्य सरकार को दिया जाएगा। हालांकि अभी बोर्ड मीटिंग के आधिकारिक मिनट्स आने बाकी हैं। प्रबंधन ने मुख्यालय से इसकी मांग की है। इसके बाद ही फंड ट्रांसफर और कार्य प्रक्रिया स्पष्ट होगी। खतरे की जद में था पुल गौरतलब है कि गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर पुल की स्थिति पिछले कई वर्षों से काफी जर्जर बनी हुई थी। तकनीकी जांच में पुल के एक पिलर को कमजोर पाया गया था। विशेषज्ञों ने भारी वाहनों के संचालन पर सावधानी बरतने की सलाह दी थी। इसके बाद अरगडा-बरकासयाल प्रबंधन ने पुल के दोनो ओर एक बोर्ड लगाया था। जिसमें एक बार में एक तरफ से एक ही भारी वाहन पुल से गुजरने का संदेश अंकित था। साथ ही इसके अनुपालन के लिए दोनों ओर सुरक्षा कर्मी की ड्यूटी लगा दी थी। परंतु रिभर साइड भुरकुंडा की ओर पुल पर तैनात सूरक्षा कर्मी पुल पर एक समय में एक बाड़ी पार कराने के प्रति उतनी संजीदगी नहीं दिखती थाी। जिससे कई बाद पुल के बीच में दोनों ओर से भारी वाहन प्रवेश कर जाने पर पुल पर घंटो जाम लग जाता था। पुल के जर्जर होने से पुल पर कंपन भी महसुस होता है। इसके बावजूद मजबूरी में लोग हर दिन जोखिम उठाकर इसी पुल से गुजर रहे थे। श्रेय लेने की लगी है होड़ गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर पुल निर्माण के लिए बोर्ड द्वारा राशि स्वीकृत करने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा इसे अपनी उपलब्धि बताने का सिलसिला शुरू हो गया है। क्षेत्र में बयानबाजी और सोशल मीडिया के माध्यम से श्रेय लेने की कोशिशें देखी जा रही हैं। हालांकि, आम लोगों का कहना है कि पुल का निर्माण जल्द शुरू होना चाहिए, ताकि आवागमन सुरक्षित हो सके। शुरुआत में निर्माण एजेंसी को लेकर असमंजस थाः एसओसी गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर पुल निर्माण एजेंसी को लेकर असमंजस की स्थिति थाी। यह बाते अरगडा एसओसी नोसिर तौहिद ने कही। कहा कि जनहित से जूड़ा सवाल होने के कारण अरगडा महाप्रबंधक सत्यजीत कुमार व अरगडा के तत्कालित जीएम एसके झा ने पुल निर्माण को लेकर काफी गंभीरता दिखाया। बाद में असैनिक विभाग ने सीसीएल हेडक्वार्टर रांची व झारखंड सरकार के बीच सामांजस बनाकर मामले की जमीन लाने का कार्य किया है। अब जाकर यह तय हो गया है कि सीसीएल राशि उपलब्ध कराएगा, जबकि झारखंड सरकार पुल का निर्माण कार्य कराएगी। पुल मरम्मत व नए पुल निर्माण होने से आवागमन होगा सुगम गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर नद की जर्जर पूराने पुल की मरम्मत व नए पुल के निर्माण होने से क्षेत्र में आवागमन सुगम होने के साथ-साथ व्यापार, परिवहन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। फिलहाल लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि निर्माण कार्य कब शुरू होता है। अब आगे क्या? अब सबकी नजर इस बात पर है कि बोर्ड मीटिंग के मिनट्स कब आते हैं और टेंडर प्रक्रिया कब शुरू होती है। साथ ही गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर नद पर पूराने पुल की मरम्मत व नए पुल निर्माण कार्य जमीन पर कब दिखता है। पुल निर्माण व मरम्मत की राशि स्वीकृत होने पर लोगों में जो पुल कभी डर का कारण था, वही अब विकास की नई पहचान बनने जा रहा है। लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और निर्माण कार्य कब शुरू होता है। अगर सब कुछ तय समय पर हुआ, तो जल्द ही यह क्षेत्र एक सुरक्षित और आधुनिक पुल की सौगात पा सकता है।  

जहानाबाद में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई, 46 शिक्षकों का वेतन रोका गया

जहानाबाद बिहार के जहानाबाद जिले में मैट्रिक और इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंटल परीक्षा के दौरान ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने 46 शिक्षकों का वेतन अस्थायी रूप से रोक दिया है और तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। इस कदम से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। क्या है पूरा मामला जानकारी के अनुसार, इन शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति परीक्षा कार्य के लिए विभिन्न केंद्रों पर की गई थी। केंद्राधीक्षकों की रिपोर्ट में सामने आया कि कई शिक्षक बिना किसी पूर्व सूचना के अपने निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर अनुपस्थित रहे। इतना ही नहीं, उन्होंने इस संबंध में कोई अनुमति भी नहीं ली। जिला शिक्षा कार्यालय ने इस मामले को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए कड़ी कार्रवाई की है। जारी आदेश में कहा गया है कि यह कृत्य उच्च अधिकारियों के आदेश की अवहेलना, स्वेच्छाचारिता, लापरवाही और अनाधिकृत अनुपस्थिति की श्रेणी में आता है। किसका कितना वेतन रोका गया इंटर कम्पार्टमेंटल परीक्षा में ड्यूटी पर लगाए गए 27 शिक्षकों का वेतन 30 अप्रैल से 11 मई तक रोक दिया गया है। वहीं मैट्रिक कम्पार्टमेंटल परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले 19 शिक्षकों का वेतन 30 अप्रैल से 6 मई तक स्थगित किया गया है। तीन दिन में देना होगा जवाब शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित शिक्षकों को तीन दिनों के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण देना होगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनकी सेवा पुस्तिका में प्रविष्टि करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बिहार विद्यालय परीक्षा संचालन अधिनियम 1981 के तहत भी विधिसम्मत कार्रवाई शुरू की जा सकती है। इस कार्रवाई के दायरे में सहायक शिक्षक से लेकर प्रधानाध्यापक तक शामिल हैं, जो विभिन्न प्राथमिक, मध्य और उच्च विद्यालयों में कार्यरत हैं। क्या बोले अधिकारी अधिकारियों ने साफ कहा है कि परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में ‘नो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। शिक्षा विभाग की इस सख्ती को परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।  

बिहार से सकारात्मक संदेश, सम्राट चौधरी ने जनादेश का किया स्वागत

पटना चार राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा ने इसे ‘तुष्टिकरण की राजनीति के अंत’ का संकेत बताया। वहीं बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल की जनता को ऐतिहासिक जनादेश के लिए बधाई दी। सम्राट चौधरी ने कही ये बात बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “जहां पैदा हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी, वो बंगाल हमारा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को ऐतिहासिक जनादेश देने के लिए बंगाल की जागरूक और राष्ट्रनिष्ठ जनता का हृदय से कोटि-कोटि अभिनंदन। भारत माता की जय!” ऋतुराज सिन्हा का बड़ा बयान बीजेपी के राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा ने पश्चिम बंगाल समेत चार राज्यों के चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत की राजनीति से अब ‘वोट बैंक’ और ‘तुष्टिकरण’ का दौर हमेशा के लिए खत्म हो चुका है। ममता बनर्जी पर हमला उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की सत्ता से विदाई इस बात का प्रमाण है कि जनता अब उस मॉडल को स्वीकार नहीं करेगी, जहां अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के नाम पर बहुसंख्यक समाज के साथ दोहरा व्यवहार किया जाता है। ऋतुराज सिन्हा ने कहा कि बंगाल की माताओं-बहनों ने अपनी असुरक्षा और युवाओं ने अपने भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ का हिसाब ‘वोट की चोट’ से चुका दिया है। उन्होंने तमिलनाडु और केरल का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग ‘सनातन धर्म’ और भारतीय संस्कृति का अपमान कर अपनी राजनीति कर रहे थे, उन्हें जनता ने कड़ा सबक सिखाया है। उनके अनुसार दक्षिण भारत अब परिवारवाद और छद्म धर्मनिरपेक्षता से बाहर निकलकर राष्ट्रवाद की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। इंडी गठबंधन पर प्रहार ऋतुराज सिन्हा ने कहा कि यह प्रचंड जनादेश ‘इंडी गठबंधन’ के उन दलों के लिए करारा जवाब है, जो जाति और धर्म के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति करते रहे हैं। सुशासन बनाम विभाजनकारी राजनीति उन्होंने कहा कि देश की जनता ने साफ संदेश दिया है कि उन्हें विभाजनकारी राजनीति नहीं, बल्कि सुरक्षित माहौल और सुशासन चाहिए। ऋतुराज सिन्हा ने कहा कि जो दल ‘वोट जिहाद’ जैसे हथकंडों पर भरोसा कर रहे हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि अब देश में वही टिकेगा जो “सबका साथ, सबका विकास” के रास्ते पर चलेगा। उन्होंने अंत में कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति का अध्याय अब इस देश में हमेशा के लिए बंद हो चुका है।  

बिहार TRE-3: 10 उम्मीदवारों का रिजल्ट जारी, कई जिलों में मिली पोस्टिंग

पटना Bihar Public Service Commission ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। पटना हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में परिणाम जारी किए गए। टीआरई-3 के 10 अभ्यर्थियों का रिजल्ट घोषित हुआ। लंबे समय से लंबित मामला अब आगे बढ़ा है। किन-किन अभ्यर्थियों का हुआ चयन जारी परिणाम में वर्ग 1 से 5 के 8 अभ्यर्थी शामिल हैं। वर्ग 6 से 8 सामाजिक विज्ञान के 2 अभ्यर्थी भी सफल हुए। ये सभी अभ्यर्थी पहले से रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे। अब इनके चयन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। इन जिलों में मिली नियुक्ति चयनित अभ्यर्थियों को अलग-अलग जिलों में पोस्टिंग दी गई है। नवादा, समस्तीपुर, खगड़िया और कैमूर शामिल हैं। इसके अलावा शेखपुरा, मुंगेर, बांका और अररिया में भी नियुक्ति हुई। शिक्षा विभाग को अनुशंसा भेजी जा चुकी है। TRE 3.0 परीक्षा से जुड़ा मामला यह पूरा मामला विज्ञापन संख्या 22/2024 से संबंधित है। विद्यालय अध्यापक प्रतियोगिता परीक्षा (TRE 3.0) के तहत चयन हुआ। सभी विषयों के रिजल्ट पहले ही जारी किए जा चुके थे। सफल अभ्यर्थियों की सूची विभाग को भेजी गई थी। आर्थिक अपराध इकाई की जांच का असर Economic Offences Unit Bihar ने परीक्षा में गड़बड़ी का मामला दर्ज किया था। कांड संख्या 06/2024 के तहत जांच शुरू हुई थी। कुछ अभ्यर्थियों को इस मामले में आरोपी बनाया गया। इस कारण उनका रिजल्ट रोक दिया गया था। सील्ड कवर में रखे गए थे रिजल्ट जिन अभ्यर्थियों पर आरोप थे, उनके परिणाम सील्ड कवर में रखे गए। आयोग ने हाईकोर्ट में लंबित मामले का हवाला दिया था। अन्य अभ्यर्थियों का रिजल्ट जारी कर दिया गया था। विवादित अभ्यर्थियों का मामला अलग रखा गया। अब आगे क्या होगा? हाईकोर्ट में मामले के निष्पादन के बाद ही आगे फैसला होगा। सील्ड कवर वाले रिजल्ट तभी सार्वजनिक किए जाएंगे। फिलहाल 10 अभ्यर्थियों को राहत मिली है। आयोग ने प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। उम्मीदवारों के लिए अहम संदेश इस फैसले से अन्य अभ्यर्थियों को भी उम्मीद मिली है। लंबित मामलों में धीरे-धीरे समाधान निकल रहा है। पारदर्शिता बनाए रखने पर आयोग का जोर है। आने वाले समय में और अपडेट संभव हैं।  

संजय सरावगी की नई टीम में महिलाओं को मिलेगा अधिक प्रतिनिधित्व, जमीनी कार्यकर्ताओं पर जोर

पटना  सम्राट कैबिनेट विस्तार के उपरांत बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की प्रदेश संगठन की घोषणा का खाका भी तैयार है। पार्टी की ओर से पहली बार प्रदेश संगठन में 33 प्रतिशत महिलाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने की पहल की जा रही है। अहम यह है कि महिलाओं में किसी सांसद, विधायक या विधान पार्षद की जगह कार्यकर्ता को प्राथमिकता देने की नीति पर पार्टी का विशेष बल है। ऐसे में यह संभावना प्रबल हो गई है कि वर्तमान प्रदेश संगठन में कार्यरत आठ से बढ़कर महिलाओं का प्रतिनिधित्व 12 से 14 हो जाएगा। नेतृत्व की ओर से पार्टी संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी अंतिम चरण में है। संगठन की नई टीम की घोषणा को लेकर गहन मंथन चल रहा है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता को संगठनात्मक ढांचे में भी उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसी सोच के तहत सरावगी टीम में महिला कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की नीति पर जोर दिया जा रहा है। यह भी स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि महिला प्रतिनिधित्व के मामले में केवल सांसद, विधायक या विधान पार्षद जैसे जनप्रतिनिधियों तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे लाया जाएगा। बड़े बदलाव की पहल संगठन के अंदर यह पहल एक बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है। अब तक प्रदेश स्तर पर महिलाओं की सहभागिता सीमित मानी जाती रही है, लेकिन नए प्रयोग के जरिए पार्टी महिला नेतृत्व को मजबूत आधार देने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इससे न केवल संगठन का विस्तार होगा, बल्कि बूथ स्तर तक महिला कार्यकर्ताओं की सक्रियता भी बढ़ेगी।वरिष्ठ नेताओं की मानें तो सरावगी की टीम में युवा एवं अनुभवी नेताओं का संतुलन भी देखने को मिलेगा। लगभग 50 प्रतिशत नए चेहरों को मौका देने की तैयारी है, जिससे संगठन में नई ऊर्जा का संचार हो सके। इसके साथ ही जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है, ताकि सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो। महिला मतदाताओं के बीच मजबूत पकड़ की कोशिश महिलाओं को संगठन में अधिक भागीदारी देने से भाजपा सामाजिक समीकरणों को साधने के साथ-साथ महिला मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। अब सबकी नजरें सरावगी कैबिनेट और प्रदेश संगठन की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि यह टीम भाजपा के लिए आगामी चुनावी चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभाएगी और संगठन को नई दिशा देने का काम करेगी। वर्तमान में किस पद पर कौन महिला प्रदेश में संगठन में वर्तमान में छह महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं। इसमें प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर चार महिलाएं हैं। इसमें सबसे वरिष्ठ अमृता भूषण के अतिरिक्त धर्मशीला गुप्ता, ललिता कुशवाहा एवं अनामिका पासवान नाम है। जबकि प्रदेश महामंत्री पद पर लाजवंती झा हैं। इसके अतिरिक्त मंत्री का दायित्व रीता शर्मा, शोभा सिंह एवं पूनम रविदास संभाल रही हैं।

पटना में गैस संकट का असर, लिट्टी-चाय से लेकर समोसा तक हुआ महंगा

 पटना व्यावसायिक एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में 994 रुपये की भारी बढ़ोतरी का असर अब राजधानी के बाजार में साफ दिखने लगा है। होटल-रेस्टोरेंट से लेकर चाय-नाश्ते की दुकानों और स्ट्रीट फूड तक, हर जगह लागत बढ़ने का दबाव महसूस किया जा रहा है। स्थिति यह है कि लिट्टी, चाय एवं समोसा के कीमत भी बढ़े है। गैस आपूर्ति में कमी और कीमतों में उछाल ने कारोबारियों को वैकल्पिक ईंधन कोयला और लकड़ी की ओर धकेल दिया है, इससे खान-पान की कीमतों में बढ़ोतरी होने लगे है। स्ट्रीट फूड की कीमतों में पांच से 10 रुपये तक बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। 40-45 रुपये मिलने वाला एग राल 50-60 रुपये, 12 रुपये का समोसा 15-18 रुपये मिलने लगा है। 10 रुपये ग्लास वाली चाय की कीमत 12 से 15 रुपये तक पहुंच गई है। बाजार में मार्च के पहले सप्ताह से ही व्यावसायिक सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित है। पहले जहां शहर में हर दिन करीब पांच हजार सिलेंडर आपूर्ति दिए जाते थे, यह आंकड़ा तीन हजार के पास पहुंची है। अभी लग्न या कार्यक्रम को लेकर कार्ड के साथ आवेदन देने पड़ रहे है। कमर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति में करीब 30 प्रतिशत की कमी के चलते होटल-रेस्टोरेंट को लकड़ी-कोयले की भट्टी या इंडक्शन जैसे विकल्प अपनाने पड़ रहे हैं। लेकिन यह विकल्प भी सस्ता नहीं पड़ रहा। कोयला का दाम 20 रुपये बढ़ा कोयले की कीमतों में अचानक उछाल आया है। पहले 18 से 20 रुपये किलो मिलने वाला कोयला अब 30 से 40 रुपये किलो बिक रहा है, जबकि अच्छी गुणवत्ता वाले कोयले के दाम इससे भी ज्यादा हैं। लकड़ी के कोयले की कीमत 40 से 50 रुपये किलो तक पहुंच चुकी है। राजीवनगर के दुकानदार संजय ने बताया कि अब कोयला का आर्डर भी पहले देना पड़ रहा है। इसके बाद थोक व्यापारियों की ओर से आपूर्ति किया जाता है। कैटरिंग कारोबारी जैनेंद्र सिंह बताते है कि पहले कोयला वाला चूल्हा का उपयोग शाही या अन्य कार्यक्रम में नहीं होते थे, लेकिन इसकी उपयोगिता अब बढ़ी है। इसके दाम भी बढ़ने से आयोजन का बजट भी बढ़ने लगा है। एक सप्ताह में कीमतों को तेजी से दिखेगी वृद्धि बिहार राज्य व्यावसायिक संघ के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने बताया कि कमर्शियल गैस में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी बीते वर्षों की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। इसका सीधा असर खान-पान की वस्तुओं पर पड़ेगा। आने वाले एक सप्ताह में खाद्य सामग्री की कीमतों में और तेजी देखने को मिलेगा। खाने-पीने की चीजों की कीमतें कम से कम 10 से 12 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। यह इजाफा खासकर मिठाइयों, रेस्टोरेंट के मेन्यू, हास्टल मेस और स्ट्रीट फूड हर जगह कीमतों में इजाफा दिख सकता है। हालांकि कई कारोबारियों ने फिलहाल कीमतें स्थिर रखी हैं, लेकिन वे भी मानते हैं कि लंबे समय तक ऐसा संभव नहीं होगा। इसका असर सभी सेक्टर पर देखने को मिलेगा।

रांची समेत कई जिलों में उपभोक्ता फोरम खाली, ऑनलाइन सुनवाई बनी सहारा

 रांची  झारखंड में अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे उपभोक्ताओं को न्याय मिलने में लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। वर्तमान में झारखंड उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में करीब छह हजार मामले लंबित हैं। विडंबना यह है कि पूरे राज्य के मामलों के निष्पादन का जिम्मा केवल अध्यक्ष बसंत कुमार गोस्वामी के कंधों पर है। रांची, देवघर, बोकारो और धनबाद जैसे महत्वपूर्ण जिलों के फोरम में सदस्यों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। क्यों अटकी हैं नियुक्तियां? जानकारी के अनुसार, रांची फोरम में जनवरी 2025 से ही एक भी अधिकारी मौजूद नहीं है। हालांकि इन पदों पर नियुक्ति राज्य सरकार को करनी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नया कानून बनाने का निर्देश दिया है। ऑनलाइन सुनवाई बना सहारा कोर्ट के आदेशानुसार, नए नियमों के गठन के बाद ही नियुक्तियां संभव हो पाएंगी, जिसके कारण वर्तमान में सरकार के हाथ बंधे हुए हैं। पदों के अभाव और बढ़ते बोझ के बीच अध्यक्ष बसंत कुमार गोस्वामी ऑनलाइन माध्यम से मामलों का निपटारा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आयोग के पास सबसे अधिक मामले गाड़ी इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस और बैंक लोन से जुड़े आते हैं। उपभोक्ताओं को त्वरित न्याय देने के लिए ऑनलाइन सुनवाई को प्राथमिकता दी जा रही है। घर बैठे ऐसे दर्ज करें शिकायत उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए आयोग ने हर जिले को ऑनलाइन प्रणाली से जोड़ दिया है। अब शिकायतकर्ता को कार्यालय के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। शिकायत दर्ज करने के लिए तीन प्रमुख विकल्प उपलब्ध हैं:         CP Grams (सीओपी ग्राम): सबसे पहले यहां शिकायत दर्ज करनी चाहिए।         हेल्पलाइन नंबर 1915: यदि पहले स्तर पर समाधान न मिले तो इस नंबर पर संपर्क करें।         ई-जागृति पोर्टल: उपभोक्ता सीधे इस पोर्टल के माध्यम से भी अपनी कानूनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। हालिया सफलताएं: उपभोक्ताओं को मिला हक संसाधनों की कमी के बावजूद आयोग ने इस वर्ष कई महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं:         हजरत अली मामला: दुर्घटना के एक मामले में बीमा कंपनी की आनाकानी के बाद आयोग ने पीड़ित को 2 लाख 96 हजार रुपये का भुगतान सुनिश्चित कराया।         महावीर महतो केस: उपभोक्ता को 9 लाख रुपये का हर्जाना दिलवाया गया।         मोहन कुमार केस: ऑटो चोरी होने के बाद बीमा राशि नहीं मिल रही थी, आयोग ने सुनवाई कर 3 लाख रुपये से अधिक की राशि दिलवाई।     सीमित साधनों में काम करना पड़ रहा है। रांची जिला उपभोक्ता फोरम में कोई अधिकारी नहीं है। हमारे यहां भी सदस्य नहीं है। अकेले ही काम करना पड़ रहा है। इसलिए, हमने आनलाइन सेवा शुरू की और लोग इसका लाभ उठा रहे हैं -बसंत कुमार गोस्वामी, अध्यक्ष, झारखंड उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग  

रांची प्रशासन का बड़ा फैसला, बोटिंग के दौरान लाइफ जैकेट अनिवार्य और सुरक्षा जांच सख्त

 रांची  मध्यप्रदेश के जबलपुर में हुए क्रूज हादसे (jabalpur cruise accident) के बाद झारखंड में प्रशासन सतर्क हो गया है। रांची जिले के सभी डैम एवं जलाशयों में बोटिंग के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य बोटिंग गतिविधियों के दौरान होने वाली संभावित दुर्घटनाओं को रोकना और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। बैठक में जिला स्तर पर वाटर ट्रांसपोर्ट एक्शन ग्रुप गठित करने का निर्देश दिया गया, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सके। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। सभी पर्यटकों और यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य किया गया है। बिना लाइफ जैकेट के बोटिंग कराने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, मौसम की स्थिति पर विशेष नजर रखने और खराब मौसम में बोटिंग पूरी तरह बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। सभी नौकाओं के लिए वैध फिटनेस प्रमाण-पत्र अनिवार्य किया गया है। बिना फिटनेस सर्टिफिकेट वाली नावों को संचालन की अनुमति नहीं मिलेगी। साथ ही, सभी बोटिंग स्थलों पर हेल्पलाइन नंबर के साथ सूचना पट्ट लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासन ने बोटिंग स्थलों पर नशापान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, बोट को निर्धारित गति सीमा में चलाने और किसी भी प्रकार की स्टंटबाजी या जोखिम भरे संचालन पर सख्त रोक लगाई गई है। मानकों का होगा कड़ाई से पालन जिला दंडाधिकारी भजन्त्री ने कहा कि पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। प्रशासन ने खासकर बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों से अपील की है कि वे बोटिंग के दौरान बच्चों को सही तरीके से लाइफ जैकेट पहनाएं और उसकी बेल्ट अच्छी तरह कसकर बांधें। बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अभिभावकों की होगी। बैठक में पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) गौरव गोस्वामी, अनुमंडल पदाधिकारी कुमार रजत, जिला परिवहन पदाधिकारी अखिलेश कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज, जिला खेल पदाधिकारी शिवेंद्र सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बैठक में लिए गए निर्णयों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि बोटिंग गतिविधियां सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संचालित हो सकें।

एग्जाम फ्रॉड पर बड़ी कार्रवाई: NEET सॉल्वर गिरोह पकड़ा, MBBS छात्र सहित 3 अरेस्ट

नालंदा. नीट परीक्षा में सॉल्वर बैठाने वाले एक अंतरजिला गिरोह का नालंदा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने एमबीबीएस के एक छात्र सहित तीन जालसाजों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई नीट परीक्षा के मद्देनजर चलाए जा रहे विशेष ‘रोको-टोको’ एवं वाहन चेकिंग अभियान के दौरान की गई। राजगीर डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि 2 मई की रात करीब 1:45 बजे पावापुरी मोड़ के पास वाहन चेकिंग के दौरान दो संदिग्ध गाड़ियां पुलिस को देखकर भागने लगीं। घेराबंदी कर दोनों वाहनों को पकड़ा गया। स्कॉर्पियो चला रहे व्यक्ति की पहचान मुजफ्फरपुर निवासी अवधेश कुमार (31) के रूप में हुई, जो विम्स कॉलेज में एमबीबीएस द्वितीय सत्र का छात्र है। कैश और डिजिटल सबूत बरामद तलाशी के दौरान स्कॉर्पियो के डैशबोर्ड के नीचे से 2 लाख 95 हजार रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा तीन मोबाइल फोन और दो लग्जरी गाड़ियां (स्कॉर्पियो व ब्रेजा) भी जब्त की गईं। शुरू में आरोपियों ने पैसों के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दिया, लेकिन मोबाइल जांच में बड़ा खुलासा हुआ। फोन से नीट, एईओ और बीएसएनएल समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, अभ्यर्थियों के साथ चैट और लेन-देन के ठोस सबूत मिले। गिरफ्तार आरोपित और मास्टरमाइंड गिरफ्तार आरोपियों में मुजफ्फरपुर के अवधेश कुमार, मोतिहारी के अमन कुमार सिंह और मुजफ्फरपुर के ही पंकज कुमार साह शामिल हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह का मास्टरमाइंड उज्जवल उर्फ राजा बाबू है, जो पावापुरी मेडिकल कॉलेज के 2022 बैच का छात्र है। डीएसपी के अनुसार उज्जवल पर पहले भी सीबीआई के केस दर्ज हैं और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। बड़ी साजिश नाकाम पुलिस की मुस्तैदी के कारण सॉल्वर परीक्षा केंद्रों तक नहीं पहुंच सके, जिससे एक बड़ी साजिश विफल हो गई। अब पुलिस उन अभ्यर्थियों और अभिभावकों की भी जांच कर रही है, जिनके एडमिट कार्ड और कॉल डिटेल्स आरोपियों के मोबाइल से मिले हैं। जांच तेज, केस दर्ज इस मामले में पावापुरी थाना में कांड दर्ज कर लिया गया है और अनुसंधान तेज कर दिया गया है। पूरी कार्रवाई राजगीर एसडीपीओ सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में गिरियक, राजगीर, पावापुरी और कतरीसराय थानों की संयुक्त टीम ने की। पहले भी जुड़ चुका है नालंदा का नाम गौरतलब है कि नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले में भी नालंदा के संजीव मुखिया का नाम सामने आ चुका है। वह कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों में आरोपी रहा और जेल भी जा चुका है।