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पटना पीएमसीएच में डिजिटल क्रांति, हाई-स्पीड इंटरनेट से बदलेगी इलाज की व्यवस्था

 पटना पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) अब पूरी तरह डिजिटल और हाई-टेक अस्पताल बनाने की कवायद आरंभ हुई है। नए भवन में इंटरनेट की परेशानी को देखते हुए अब यहां लीज लाइन लगाने की कवायद हो गई है। मई के दूसरे सप्ताह से नए भवन में हाई-स्पीड इंटरनेट और ऑनलाइन सुविधाएं शुरू होने जा रही हैं, इससे इलाज की व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। करीब 40 लाख रुपये की लागत से भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) पूरे परिसर में लीज लाइन (BSNL Lease Line in PMCH) बिछा रहा है। इसके तहत हर फ्लोर को हाई-स्पीड वाई-फाई से जोड़ा जाएगा। इससे डाक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों का डेटा तुरंत उपलब्ध हो सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने योजना स्वीकृत कर पीएमसीएच को पत्र भेज दिया है। रियल-टाइम डेटा से बेहतर निगरानी पीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि डिजिटल सिस्टम (PMCH Patna Digital Hospital) का सबसे अधिक असर स्त्री एवं प्रसूति और शिशु रोग विभाग में दिखेगा। जन्म और मृत्यु से जुड़ी जानकारी रियल-टाइम में सीधे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनिसेफ, भारत सरकार और बिहार सरकार को भेजी जा सकेगी। इससे स्वास्थ्य निगरानी और नीति निर्माण में सटीकता बढ़ेगी। पेपरलेस सिस्टम: रिपोर्ट सीधे स्क्रीन पर अस्पताल को पूरी तरह पेपरलेस (Paperless Treatment in PMCH) बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया जा रहा है। एक्स-रे, पैथोलाजी और अन्य जांच की रिपोर्ट सीधे डॉक्टर के कंप्यूटर पर उपलब्ध होगी। मरीजों को रिपोर्ट के लिए लाइन में लगने या भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डिजिटल रिकार्ड से फाइल खोने की समस्या खत्म होगी और इलाज तेज व पारदर्शी बनेगा। नेटवर्क समस्या होगी खत्म नए भवन में लंबे समय से बनी नेटवर्क की समस्या भी इस पहल से समाप्त हो जाएगी। डाक्टरों को मरीजों का डेटा एक्सेस करने और कर्मचारियों को प्रशासनिक कार्य निपटाने में अब कोई बाधा नहीं होगी। साथ ही, मेडिकल छात्रों के लिए डिजिटल सेमिनार और अध्ययन भी आसान होगा। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन से खत्म होगी भीड़ भीड़ नियंत्रण के लिए ऑनलाइन अपाइंटमेंट सिस्टम (PMCH Online Registration System) लागू करने की तैयारी है। मरीज घर बैठे रजिस्ट्रेशन कर नंबर ले सकेंगे। इससे उन्हें तय समय पर डाक्टर से मिलने की सुविधा मिलेगी और ओपीडी में लंबी कतारों से राहत मिलेगी। नंबर में हेराफेरी की आशंका भी खत्म होगी। स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल को आधुनिक बनाने के लिए कनेक्टिविटी को मजबूत करना पहला कदम है। लक्ष्य है कि मरीज को केवल इलाज के लिए अस्पताल आना पड़े, न कि रिपोर्ट या नंबर के लिए लाइन में लगना पड़े। यह डिजिटल पहल न सिर्फ मरीजों को बेहतर सुविधा देगी, बल्कि पीएमसीएच को वैश्विक स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं के करीब ले जाने में भी अहम भूमिका निभाएगी। फाइव-जी लीज लाइन लगने के बाद     मरीजों का डेटा तेजी से ऑनलाइन अपडेट हो सकेगा     डाक्टरों को डिजिटल रिपोर्ट और इमेजिंग तुरंत उपलब्ध होगी     टेलीमेडिसिन और ई-हेल्थ सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा     अस्पताल की प्रशासनिक कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी  

चुनावी नतीजों से पहले पप्पू यादव का ऐलान: BJP जीती तो राजनीति से पीछे हटेंगे

पटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए दो चरणों में मतदान संपन्न हो चुका है और अब सभी को नतीजों का इंतजार है। लेकिन इससे पहले सियासी सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। इसी बीच बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पप्पू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए ऐलान किया कि अगर बंगाल चुनाव में BJP की जीत होती है, तो वह अपना संघर्ष छोड़ देंगे। पप्पू यादव का ऐलान सांसद पप्पू यादव ने एग्जिट पोल के उन अनुमानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है जिनमें बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने की संभावना जताई गई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'अगर बंगाल में बीजेपी जीत जाती है तो हम सेवा, मदद और इंसाफ के लिए संघर्ष छोड़ देंगे।' हालांकि, उन्होंने इसके साथ ही अपना अटूट विश्वास भी प्रकट किया और कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि बंगाल की जनता ने बीजेपी का पूरी तरह सफाया कर दिया है। तेजस्वी यादव का ममता को समर्थन और बीजेपी पर प्रहार पप्पू यादव के अलावा बिहार के कई अन्य नेताओं णे भी बंगाल चुनाव ओर अपनी प्रकातिक्रिया दी है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बंगाल चुनाव को लेकर दावा किया है कि इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की जीत तय है। उन्होंने कहा कि जनता ममता बनर्जी को फिर से मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है और टीएमसी को भारी जनसमर्थन मिल रहा है। तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए यहाँ तक कह दिया कि भाजपा की हार में ही देश की जीत है। दो चरणों में संपन्न हुआ मतदान, अब 4 मई का इंतजार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार मतदान दो चरणों में आयोजित किया गया है। पहले चरण की वोटिंग के बाद, दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। अब सभी राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम (EVM) में कैद हो गई है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे।

JMM-कांग्रेस में दूरी बढ़ने के संकेत, राज्यसभा चुनाव पर असर की आशंका

रांची  झारखंड में अगले कुछ दिनों बाद होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गयी है। दो सीटों पर होने वाले इस चुनाव में सत्ता पक्ष यानी इंडिया गठबंधन फिलहाल मजबूत स्थिति में दिख रहा है, लेकिन विपक्षी एनडीए भी बिहार मॉडल की तर्ज पर एक सीट के लिए समीकरण साधने में जुटा है। जेएमएम का रुख कांग्रेस के साथ अब सहज नहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के कुछ महीनों में झारखंड मुक्ति मोर्चा का रुख सहयोगी दल कांग्रेस के साथ पूरी तरह से सहज नहीं दिख रहा है। जिस तरह से असम विधानसभा में जेएमएम के कांग्रेस के कोई तालमेल किए बगैर अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया, उससे कांग्रेस नेतृत्व को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। असम में हेमंत सोरेन ने एक सप्ताह से अधिक समय तक कैंप कर दर्जनों चुनावी सभाएं की, जिससे वहां गैर भाजपा मतों में बंटवारे की संभावना जताई जा रही है। असम में हेमंत सोरेन के साथ कल्पना सोरेन ने चाय बगान में रहने वाले झारखंडी मूल के मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी जेएमएम ने कांग्रेस की जगह ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के पक्ष में कई चुनावी सभाओं को संबोधित किया। इससे भी कांग्रेस और जेएमएम के बीच दूरियां बढ़ने के संकेत मिले। लेकिन झारखंड में अब भी हेमंत सोरेन सरकार में कांग्रेस और आरजेडी शामिल है। असम और पश्चिम बंगाल की सियासत का झारखंड में भी दिखेगा असर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि असम और पश्चिम बंगाल में झामुमो की अलग राह का सीधा असर झारखंड की सियासत पर भी पड़ सकता है। असम में जेएमएम और कांग्रेस के बीच बढ़ी दूरी ने विपक्षी एकता पर सवाल खड़े किये हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ झुकाव से भी झारखंड में दोनों दलों के रिश्तों में खटास की आशंका बढ़ गई। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के दौरान अंदरूनी असंतोष या रणनीतिक दूरी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। एक सीट जीतने के लिए 27-28 विधायकों के वोटों की आवश्यकता झारखंड में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए आम तौर पर 27-28 विधायकों के वोटों की आवश्यकता होती है। यह संख्या झारखंड विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 81 के आधार पर तय होती है। जहां प्रथम और द्वितीय वरीयता के मतों से एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा चुनाव होता है। सीट बंटवारे को लेकर पेच फंसने की आशंका 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास 56 विधायक का समर्थन प्राप्त है, जो दोनों सीटों पर कब्जा करने के लिए पर्याप्त है। लेकिन जिस तरह से जेएमएम की ओर से कांग्रेस की अनदेखी की जा रही है। इसके कारण सीट बंटवारे को लेकर पेच फंस सकता है। जेएमएम अपने बल पर एक सीट निकालने में सक्षम है, जबकि दूसरी सीट पर जीत के लिए कांग्रेस विधायकों का समर्थन जरूरी है। इन परिस्थितियों में जेएमएम की ओर से दूसरी सीट के लिए किसी ऐसे राजनेता या उद्योगपति को प्रत्याशी बनाया जा सकता है या समर्थन दिया जा सकता है, जो अपने बलबूते कई विधायकों का समर्थन हासिल कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स में झारखंड के एक पूर्व सांसद के नाम की भी चर्चा हो रही है।  

पटना में शराब तस्करी का नेटवर्क, होम डिलीवरी से लेकर ‘निंजा तकनीक’ तक का खुलासा

पटना राजधानी के पॉश इलाके कंकड़बाग में 'प्योर मिल्क' (शुद्ध दूध) का मतलब पाश्चुरीकृत दूध का कोई पैकेट नहीं है। ये महंगी ब्लेंडेड स्कॉच व्हिस्की का एक कोड वर्ड है, जो जासूसी नजरों से बचने के लिए टेट्रा पैक में आती है। सूखे बिहार (शराबबंदी) में जहां पिछले 10 वर्षों से शराबबंदी ने 'सोनपापड़ी' को महंगी शराब (जो झारखंड, यूपी और बंगाल से तस्करी कर लाई जाती है) के कोड में बदल दिया है। यहां, ये अवैध कारोबार न केवल जीवित है, बल्कि चूहे-बिल्ली के खेल की तरह फल-फूल रहा है। कई जिलों, कस्बों और राजधानी पटना में 'समोसेवाला', 'ग्रॉसरीवाला' और 'संन्यासी बाबा' उन युवाओं के लिए कोड वर्ड हैं, जो समय पर विदेशी शराब (IMFL) की होम डिलीवरी सुनिश्चित करते हैं। 'सर, मैं खुशियां पहुंचाता हूं' बिहार अप्रैल 2016 से 'ड्राई' है, लेकिन यह केवल कागजों पर है। वास्तव में ये एक बेहद प्यासी भूमि है, जहां अधिकांश पिज्जा डिलीवरी से भी तेज एक सटीक होम-डिलीवरी सिस्टम काम कर रहा है। शराबबंदी ने एक फलता-फूलता काला बाजार बना दिया है, जहां युवा एजेंटों द्वारा शराब दरवाजे तक पहुंचाई जाती है। विपक्षी नेताओं के अनुसार, ये एजेंट एक सक्रिय अवैध सप्लाई चेन की साइलेंट समझ के साथ काम करते हैं। शराब पर पूर्ण प्रतिबंध के एक दशक बाद भी शराब की मांग खत्म नहीं हुई है। ये बस पर्दे के पीछे चली गई है। पटना के कई पॉश इलाकों में होम डिलीवरी के धंधे में शामिल 'ट्यूशन मैम', 'नर्स मैम' और 'पार्लरवाली' उन युवतियों के कोड हैं, जो शराब की डिलीवरी करती हैं। पटना में होम-डिलीवरी एजेंट मुन्ना से मुलाकात हुई। वो फॉर्मल शर्ट पहनता है। स्कूटर चलाता है और लैपटॉप बैग ले जाता है। उसने टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) संवाददाता से कहा, 'सर, मैं खुशियां पहुंचाता हूं।' साथ ही जोड़ा कि वो 'खुशी' यूपी या झारखंड से तस्करी कर लाई गई प्रीमियम विदेशी शराब होती है। मुन्ना की सबसे बेहतरीन तरकीब ब्रांडेड कंपनियों के खाने के खाली डिब्बों के अंदर छिपी बोतलें पहुंचाना है। वो 'किराना-वाला' बनकर घरों में जाता है। 5 मिनट में 'संन्यासी बाबा' की डिलिवरी पटना के मोहल्लों में शराबबंदी ने पार्टियों को नहीं रोका। बस, उन्हें गुप्त बना दिया। 'संन्यासी बाबा' से भी मुलाकात हुई, जो एक स्थानीय होम-डिलीवरी नेटवर्क के अनौपचारिक सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) हैं। जहां प्रमुख ऐप्स 10 मिनट में किराना सामान पहुंचाते हैं, वहीं 'संन्यासी' का नेटवर्क पांच मिनट में डिलीवरी करता है, बेशक अतिरिक्त शुल्क के साथ। यहां ब्रांड के आधार पर 180 मिलीलीटर के पैक की कीमत 200 रुपये से बढ़कर 600 रुपये तक हो जाती है। ये सिस्टम लगभग अचूक है। कोई दुकान या साइनबोर्ड नहीं है। बस 'हेल्थ एंड फिटनेस' नाम का एक व्हाट्सएप ग्रुप है। एक मैसेज 'दो प्रोटीन शेक' और 'दो प्योर मिल्'क चाहिए। कुछ ही मिनटों में एक 'दूधवाला' भारी दूध के केन लेकर मोटरसाइकिल पर आ जाता है। विवादित सामाजिक प्रयोगों में से एक बिहार की शराबबंदी नीति भारत के सबसे विवादित सामाजिक प्रयोगों में से एक बनी हुई है, जो मापने योग्य सामाजिक लाभों, भारी राजकोषीय लागतों और प्रवर्तन की लगातार विफलताओं से चिह्नित है। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार न बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद शुल्क अधिनियम, 2016 के जरिए से शुरू किया गया ये प्रतिबंध शराबखोरी, गरीबी और घरेलू हिंसा को कम करने के लिए महिलाओं की मांगों के जवाब के रूप में पेश किया गया था। एक दशक बाद, इसका रिकॉर्ड एक तरफ घरेलू कल्याण और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार, तो दूसरी तरफ राजस्व का पतन, काले बाजार का विस्तार और न्यायिक बोझ के बीच बुरी तरह विभाजित है। कानूनी बाजार के गायब होने से मांग खत्म नहीं हुई। इसके बजाय, इसने एक विशाल अवैध व्यापार के लिए जगह बना दी। अनुमान बताते हैं कि बिहार में अब 25,000 करोड़ रुपये से 30,000 करोड़ रुपये की समानांतर शराब अर्थव्यवस्था चल रही है। इसके अलावा, दशक भर की शराबबंदी ने आम नागरिकों को 'आविष्कारशील' तस्करों में बदल दिया है, जिनकी इंजीनियरिंग की महारत बड़े-बड़े मैकेनिकों को मात दे सकती है। बिहार में शराब तस्करी का 'निंजा तकनीक' तस्करों ने हाल ही में वो अपनाया है जिसे पुलिस 'निंजा तकनीक' कहती है। फरवरी में एक व्यक्ति को अपनी मोटरसाइकिल से बंधी खोखली प्लास्टिक की कुर्सियों के अंदर छिपाई गई दर्जनों बोतलों के साथ पकड़ा गया था। ब्लॉकबस्टर फिल्म 'पुष्पा' से प्रेरणा लेते हुए, किशनगंज जिले में ताजे टमाटर और गोभी के नीचे छिपाई गई 862 लीटर विदेशी शराब ले जाते हुए तस्करों को पकड़ा गया। मुजफ्फरपुर जाने वाला एक साधारण सब्जी का ट्रक लग रहा था, लेकिन आखिरकार व्हिस्की की गंध सब्जियों की खुशबू पर भारी पड़ गई और भेद खुल गया। नवादा में पुलिस ने एक ऐसी मोटरसाइकिल बरामद की जिसका ईंधन टैंक पूरी तरह से शराब के लिए इस्तेमाल किया गया था। बाइक को चालू रखने के लिए तस्करों ने सीट के नीचे एक छोटा सा अलग पेट्रोल बॉक्स लगाया था। शराब के पाउच या बोतलें कटे हुए गैस सिलेंडरों, पानी के टैंकरों और एम्बुलेंस के अंदर भी ठूंस दी जाती हैं। सारण में 'स्वच्छ भारत अभियान' और 'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ' जैसे सरकारी नारों वाला एक टैंकर हरियाणा निर्मित व्हिस्की के 330 कार्टन से भरा पाया गया। शराब तस्करी में इस्तेमाल कोडवर्ड का मतलब बिहार में शराब तस्करी के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कोड वर्ड्स और उनके असली मतलब जानें।     प्योर मिल्क: पॉश इलाकों में 'महंगी स्कॉच व्हिस्की' के लिए इस्तेमाल होने वाला कोड।     सोनपापड़ी: पड़ोसी राज्यों से तस्करी कर लाई गई 'महंगी शराब' का गुप्त नाम।     प्रोटीन शेक: वाट्सऐप ग्रुप्स पर 'शराब की बोतलों' के ऑर्डर के लिए कोड।     संन्यासी बाबा: स्थानीय शराब नेटवर्क के 'मुख्य संचालक या मास्टरमाइंड' का नाम।     समोसेवाला/ग्रॉसरीवाला: घर पर शराब पहुंचाने वाले 'युवा डिलीवरी एजेंटों' की पहचान।     हेल्थ एंड फिटनेस: शराब के शौकीनों के लिए बना गुप्त 'वाट्सऐप सप्लाई ग्रुप'।     ट्यूशन मैम/नर्स मैम/पार्लरवाली: होम डिलीवरी करने वाली 'महिला एजेंटों' के कोड।     खुशियां: डिलीवरी एजेंटों की ओर से प्रीमियम 'विदेशी शराब' के लिए संबोधन।     निंजा तकनीक: खाली कुर्सियों या सब्जियों के नीचे 'शराब छिपाने' का तरीका।     दूधवाला: मोटरसाइकिल पर दूध के केन में 'शराब की खेप' ढोने वाला। सूखे नशे की चपेट में … Read more

CID की बड़ी कार्रवाई, करोड़ों के घोटाले में नकदी और संपत्ति बरामद

 रांची झारखंड के जिला कोषागारों से अवैध तरीके से वेतन निकासी के करोड़ों रुपये के घोटाले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की विशेष जांच टीम (SIT) ने कार्रवाई की। SIT ने गुरुवार को बोकारो के एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में तैनात सिपाही काजल मंडल को गिरफ्तार किया है। आरोपित के घर से नकदी की बरामदगी   यह इस घोटाले में अब तक की चौथी गिरफ्तारी है। गिरफ्तार सिपाही काजल मंडल बोकारो स्टील सिटी का निवासी है। पुलिस की पूछताछ और उसकी निशानदेही पर SIT ने बोकारो स्थित उसके आवास पर छापेमारी की, जहां से 8.75 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह राशि अवैध तरीके से सरकारी खजाने से निकाली गई थी। मुख्य आरोपित के साथ साठगांठ जांच में यह खुलासा हुआ है कि काजल मंडल इस घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड और लेखापाल (Accountant) कौशल कुमार पांडेय का सक्रिय सहयोगी था। कौशल पांडेय ने यात्रा मद (Travel Allowance) और अन्य मदों से प्राप्त अवैध राशि काजल मंडल के बैंक खाते में ट्रांसफर की थी। सिपाही ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में इस राशि को घर में छिपाने की बात स्वीकार की है। इस मामले में SIT पूर्व में ही तीन अन्य आरोपितों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है:         कौशल कुमार पांडेय: मुख्य आरोपित, लेखापाल (एसपी कार्यालय)।         सतीश कुमार उर्फ सतीश कुमार सिंह: सहयोगी गृह रक्षक।         अशोक कुमार भंडारी: एएसआई (ASI) और सहयोगी। ये तीनों वर्तमान में रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद हैं। अब काजल मंडल सहित सभी चारों आरोपितों को रिमांड पर लेकर अन्य साथियों और नेटवर्क के बारे में पूछताछ की जाएगी। जब्त संपत्तियों का विवरण SIT ने इस घोटाले की जांच के दौरान अब तक करोड़ों की संपत्ति और दस्तावेज जब्त किए हैं :         भूमि व मकान: बोकारो के तेलीडीह में 4.08 डिसमिल और 4.98 डिसमिल भूमि के दस्तावेज। साथ ही, उक्त भूमि पर निर्मित तीन मंजिला आलीशान मकान।         फिक्स्ड डिपॉजिट: विभिन्न बैंकों में जमा 1.93 करोड़ रुपये और 18 लाख रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट को फ्रीज (Seize) कर दिया गया है।         नकद: ताजा कार्रवाई में जब्त 8.75 लाख रुपये। राज्य सरकार के आदेश पर SIT की पैनी नजर झारखंड सरकार के कड़े रुख के बाद CID की विशेष टीम बोकारो, हजारीबाग और चाईबासा में दर्ज अवैध निकासी के मामलों की जांच कर रही है। SIT ने इन सभी मामलों को टेकओवर करते हुए रांची के CID थाने में प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों का मानना है कि रिमांड पर पूछताछ के बाद इस सिंडिकेट में शामिल कई अन्य बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। कार्रवाई को लेकर पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।  

सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, नक्सलियों की साजिश नाकाम

 चाईबासा झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में कोबरा 209 बटालियन के नेतृत्व में चल रहे अभियान में अब फॉलो-अप कार्रवाई के दौरान बड़ी बरामदगी सामने आई है। सारंडा और टोंटो-गोइलकेरा क्षेत्र के रूटुगुटू जंगल में मुठभेड़ के बाद चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन में भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री जब्त की गई है सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, घटनास्थल से एक SLR राइफल, मैगजीन और जिंदा कारतूस, करीब 182 राउंड SLR गोली, खाली कारतूस और एक कार्बाइन हथियार बरामद हुआ है। इसके अलावा एक AK-47 का खाली केस भी मिला है। सबसे अहम बरामदगी विस्फोटक सामग्री की है। कोबरा 209 और अन्य सुरक्षाबलों ने कुल 4 पैकेट जिलेटिन (करीब 5 किलो), डेटोनेटर, कॉर्टेक्स वायर और अन्य विस्फोटक उपकरण बरामद किए हैं। इससे संकेत मिलता है कि नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे। बरामद सामानों में पिट्ठू, बैग, पाउच, पानी की बोतलें, बैटरी, टेप, धागा, पिन, कैंची, मल्टीपर्पज चाकू, प्लेट, छाता, सिरिंज, नीडल, सिरिंज बोतलें, हेडफोन और डेटा केबल जैसे दैनिक उपयोग और संचार से जुड़े उपकरण भी शामिल हैं। यह दर्शाता है कि नक्सली लंबे समय तक जंगल में ठहरने की तैयारी में थे। अभी भी फंसे हैं कुछ नक्सली इधर, मुठभेड़ में मारे गए नक्सली अमृत उर्फ इजरायल पूर्ति का पोस्टमार्टम पूरा कर लिया गया है। सुरक्षा कारणों से शव को 48 घंटे बाद शुक्रवार को चाईबासा लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उसका पोस्टमार्टम किया। बताया जा रहा है कि वह करीब 14 साल की उम्र से माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था और अजय महतो दस्ते का सक्रिय सदस्य था। सूत्रों के मुताबिक, इलाके में अभी भी कुछ नक्सलियों के फंसे होने की आशंका है। इसी को ध्यान में रखते हुए कोबरा 209 और अन्य सुरक्षाबलों ने पूरे जंगल क्षेत्र की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन और तेज कर दिया है। बीच-बीच में रुक-रुक कर फायरिंग की भी सूचना है, हालांकि अब स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। पूरे इलाके में हाई अलर्ट सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह दस्ता हाल ही में सारंडा जंगल से निकलकर इस इलाके में सक्रिय हुआ था और कुख्यात नक्सली नेता मिसिर बेसरा तथा अजय महतो समूह से जुड़ा हुआ था। फिलहाल पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी है और अभियान लगातार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री की जांच से माओवादी नेटवर्क और उनकी भविष्य की योजनाओं को लेकर अहम सुराग मिल सकते हैं।

बिहार म्यूजियम की लोकप्रियता बढ़ी, 10 साल में पहली बार टूटा विज़िटर्स का रिकॉर्ड

पटना राजधानी पटना में स्थित बिहार म्यूजियम ने इस साल पर्यटकों की संख्या के मामले में एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। म्यूजियम के उद्घाटन के बाद बीते 10 सालों में यह पहला मौका है, जब महज एक साल के भीतर 5 लाख से अधिक पर्यटकों ने यहां का भ्रमण किया है। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि अपनी आधुनिक सुविधाओं और बेहतरीन प्रदर्शनी के कारण यह म्यूजियम लोगों की पसंद बनता जा रहा है। पर्यटकों की इस बढ़ती संख्या से राज्य में पर्यटन को भी सकारात्मक बढ़ावा मिल रहा है। कुल आंकड़ा 7 लाख के करीब पहुंचा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में 5 लाख से अधिक आम लोगों ने टिकट लेकर बिहार म्यूजियम का दौरा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर इस 5 लाख की संख्या में वीआईपी (VIP) मेहमानों के विशेष दौरे और म्यूजियम परिसर में आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने वाले लोगों की भीड़ को भी शामिल कर लिया जाए, तो कुल पर्यटकों का यह आंकड़ा 5 लाख से 7 लाख के बीच पहुंच जाता है। यह पर्यटकों की संख्या पिछले सभी सालों के मुकाबले सबसे अधिक है। प्राचीन कलाकृतियां बनीं मुख्य आकर्षण बिहार राज्य हमेशा से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से काफी समृद्ध रहा है। देश के अन्य राज्यों और विदेश से आने वाले पर्यटक यहां की प्राचीन संस्कृति, सभ्यता और इतिहास को करीब से समझने की इच्छा रखते हैं। बिहार म्यूजियम में बौद्ध धर्म, जैन धर्म, हिंदू धर्म और सिख धर्म से जुड़ी कई प्राचीन और दुर्लभ कलाकृतियां बड़े पैमाने पर मौजूद हैं। आधुनिक तरीके से सुरक्षित रखी गई इन ऐतिहासिक धरोहरों को देखने और अपने इतिहास को जानने के लिए ही पर्यटक इतनी बड़ी संख्या में पटना आ रहे हैं। अपर निदेशक ने बताया बड़ी उपलब्धि इस नई उपलब्धि पर बिहार म्यूजियम के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने बताया कि यह बिहार म्यूजियम के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है कि 10 सालों में पहली बार 5 लाख का आंकड़ा पार हुआ है। उन्होंने कहा कि बिहार ऐतिहासिक दृष्टिकोण से हमेशा से समृद्ध रहा है और यहां मौजूद प्राचीन कलाकृतियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक आ रहे हैं। इसी का नतीजा है कि इस साल पर्यटकों का आंकड़ा 5 लाख के पार हो गया है। आधुनिक सुविधाओं ने आम लोगों की दिलचस्पी को काफी बढ़ा दिया है।

बिहार कैबिनेट विस्तार पर मंथन: सम्राट चौधरी की अमित शाह से अहम बैठक आज

पटना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शनिवार देर शाम दिल्ली के लिए रवाना हो गए। उनके इस दौरे को लेकर बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है और मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें जोर पकड़ने लगी हैं। दिल्ली में अमित शाह से होगी मुलाकात दिल्ली पहुंचकर मुख्यमंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में बिहार कैबिनेट विस्तार को लेकर अहम चर्चा हो सकती है। रवाना होने से पहले नीतीश से मुलाकात दिल्ली जाने से पहले सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके सात सर्कुलर रोड स्थित आवास पर मुलाकात की। दोनों के बीच करीब आधे घंटे तक बातचीत हुई। कैबिनेट विस्तार पर बनी सहमति के संकेत सूत्रों के मुताबिक, जदयू कोटे के मंत्रियों के नाम पर इस मुलाकात में सहमति बन चुकी है। अब भाजपा कोटे के नामों पर दिल्ली में अंतिम चर्चा होने की संभावना है। दो-तीन दिनों में हो सकता है विस्तार राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री के पटना लौटने के बाद दो से तीन दिनों के भीतर मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है। इसको लेकर तैयारियां लगभग पूरी मानी जा रही हैं। जदयू और भाजपा से नए चेहरे संभव बताया जा रहा है कि जदयू कोटे से तीन नए मंत्री शामिल हो सकते हैं, जबकि कई पुराने चेहरों की वापसी भी संभव है। भाजपा की ओर से भी कुछ नए नामों को मौका मिलने की चर्चा है। सहयोगी दलों की भूमिका भी अहम एनडीए के अन्य घटक दलों को भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलेगा। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के कोटे से मंत्री के नाम पर भी जल्द फैसला हो सकता है। राजनीतिक पारा चढ़ा, सबकी नजर फैसले पर मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के बाद बिहार की राजनीति में सरगर्मी बढ़ गई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि नई कैबिनेट में किन चेहरों को जगह मिलती है।

JPSC परीक्षाओं में गड़बड़ी से हड़कंप, जिम्मेदारी तय करने के निर्देश

 रांची  राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा हाल में आयोजित परीक्षाओं में व्यापक त्रुटियों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा तथा सहायक वन संरक्षक नियुक्ति मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्रों में व्यापक त्रुटियों पर चिंता प्रकट करते हुए इसकी जांच का आदेश आयोग को दिया है। साथ ही उक्त प्रकरणों की समुचित जांच कर जिम्मेदारी निर्धारित करने तथा दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। राज्यपाल के निर्देश पर इस संबंध में लोक भवन द्वारा आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखा गया है, जिसमें उक्त परीक्षाओं में हुई त्रुटियों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया गया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि सहायक वन संरक्षक की मुख्य परीक्षा तथा सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्न-पत्रों में त्रुटियों एवं प्रारंभिक रूप से जारी उत्तर-कुंजी में गलत उत्तरों के संबंध में विभिन्न माध्यमों से तथ्य प्रकाश में आए हैं। इस प्रकार की त्रुटियां न केवल अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न करती हैं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। ऐसे मामले आयोग की साख पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हैं, जो कि अत्यंत ही चिंताजनक है। न हो ऐसी त्रुटियों की पुनरावृत्ति राज्यपाल ने निदेशित किया है कि उक्त प्रकरणों की समुचित जांच कर जिम्मेदारी निर्धारित की जाए तथा दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी त्रुटियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा प्रक्रिया में आवश्यक सुधारात्मक एवं सतर्कतापूर्ण उपाय अपनाए जाने पर भी बल दिया है। राज्यपाल ने अपेक्षा व्यक्त की है कि आयोग पारदर्शिता, शुचिता एवं उच्च मानकों को बनाए रखते हुए परीक्षाओं का संचालन सुनिश्चित करे, जिससे अभ्यर्थियों का विश्वास सुदृढ़ हो सके। क्या है मामला पिछले माह संपन्न सहायक वन संरक्षक मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र में शाब्दिक और भाषाई अशुद्धियों की भरमार थी। गलतियां ऐसी थीं, जैसे ऐसा लग रहा था कि प्रश्न तैयार करनेवालों ने आंखें मूंदकर प्रश्नों को तैयार किया हो। प्रश्न तैयार करने में ऐसी-ऐसी अशुद्धियां हुईं, जितनी तीसरी और चौथी कक्षा के छात्र भी नहीं करते। महापुरुषों के नाम भी गलत लिखे गए थे। इसी तरह, 19 अप्रैल को संपन्न सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नपत्रों में कई शाब्दिक त्रुटियां तो थी हीं, उपस्थिति पत्रक में भी त्रुटि थी। इस परीक्षा के प्रश्नपत्र के बुकलेट नंबर और ओएमआर शीट के नंबर सात अंक में दिए गए थे। दूसरी तरफ उपस्थिति पत्रक में इन नंबरों को दर्ज करने के लिए छह ही बाक्स बने थे। परीक्षा में अभ्यर्थियों ने स्वयं एक अतिरिक्त बाक्स बनाकर उन नंबरों को दर्ज किया। वहीं, झारखंड पात्रता परीक्षा में रांची के जिला स्कूल स्थित केंद्र पर उड़िया विषय के प्रश्नपत्र पठनीय ही नहीं थे। इसी तरह, तथा बोकारो के सरदार पटेल उच्च विद्यालय स्थित केंद्र पर शिक्षा विषय के प्रश्नपत्र पर्याप्त संख्या में नहीं पहुंचे। इस कारण आयोग को दोनों विषयों की परीक्षा रद करनी पड़ी।

साहिबगंज फायरिंग केस में दो गिरफ्तार, तीन देसी कट्टा और जिंदा कारतूस बरामद

 साहिबगंज झारखंड के साहिबगंज जिले के जिरवाबाड़ी थाना क्षेत्र के अंबाडिया पंचायत के पोलमा गांव में युवक को गोली मारने के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है. पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस घटना में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. मामला सुलझने के बाद डीएसपी हेडक्वार्टर विजय कुमार कुशवाहा ने थाना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटना और गिरफ्तारी की पूरी जानकारी दी. कैसे हुई घटना ? डीएसपी ने बताया कि 27 अप्रैल की रात करीब 7:30 बजे अनिल बेसरा (26 वर्ष), पिता स्व. नाबू बेसरा, पोलमा गांव निवासी, किसी काम से लौट रहा था. इसी दौरान पहले से घात लगाए तीन-चार अपराधियों ने पीछे से उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. इस हमले में उसकी पीठ में दो गोली लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. वारदात के बाद अपराधी उसका सामान और मोबाइल लेकर फरार हो गए. इलाज जारी, हालत गंभीर घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत घायल अनिल को सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज चल रहा है. फिलहाल उसकी हालत गंभीर बनी हुई है. एसआईटी का गठन और त्वरित कार्रवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम (SIT) बनाई गई. इस टीम में पुलिस निरीक्षक सह नगर थाना प्रभारी अमित कुमार गुप्ता, जिरवाबाड़ी थाना प्रभारी शशि सिंह, सब-इंस्पेक्टर पंकज वर्मा और अन्य पुलिस अधिकारी शामिल थे. टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए छापेमारी शुरू कर दी. दो आरोपी गिरफ्तार, हथियार बरामद छापेमारी के दौरान पुलिस ने इस मामले में शामिल किशुन हांसदा (55 वर्ष) और भीम हांसदा (लगभग 30 वर्ष), दोनों पोलमा गांव के निवासी को गिरफ्तार कर लिया. उनकी निशानदेही पर पुलिस ने तीन देसी कट्टा, नौ जिंदा गोली और दो खोखा भी बरामद किए हैं. जमीनी विवाद में रिश्तेदारों ने ही रची साजिश पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि यह हमला जमीनी विवाद को लेकर किया गया था. चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी कोई बाहरी नहीं, बल्कि पीड़ित के अपने ही रिश्तेदार निकले. पुलिस अब इस पारिवारिक रंजिश के पूरे पहलू को खंगाल रही है. हथियार सप्लाई और मास्टरमाइंड की जांच जारी डीएसपी विजय कुमार कुशवाहा ने बताया कि पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों को हथियार कहां से मिला और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस घटना में कोई और साजिशकर्ता या मास्टरमाइंड तो नहीं है. अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी तेज पुलिस ने दोनों गिरफ्तार आरोपियों को जेल भेज दिया है. बाकी फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी जारी है. डीएसपी ने कहा कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा. जल्द ही पूरे मामले का खुलासा कर दिया जाएगा.