samacharsecretary.com

भूमि मामलों पर मंथन: पटना में DCLR की अहम बैठक, दाखिल-खारिज और लैंड बैंक एजेंडे में शामिल

पटना. भूमि सुधार उप समाहर्ताओं की राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक सात अप्रैल को पटना में होगी। यह जानकारी उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सोमवार को दी। उन्होंने कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में आम लोगों को त्वरित और पारदर्शी न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। दाखिल-खारिज, अपील वाद, राजस्व वसूली और लैंड बैंक से जुड़े कार्यों की नियमित समीक्षा से प्रशासनिक व्यवस्था और मजबूत होगी। अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए लंबित मामलों के तेजी से निष्पादन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हड़ताल के कारण जिन नए लोगों को चार्ज दिया गया है, उन्हें भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। लोगों के कार्य की गति बढ़ाने का दिशा निर्देश देने के साथ–साथ कोई काम बाधित नहीं हो, इसकी तैयारी की जा रही है। सिन्हा ने निर्देश दिया है कि भूमि से जुड़े मामलों में निर्धारित प्राथमिकता का हर हाल में पालन किया जाए। अनुसूचित जाति, जनजाति, विधवा, सेना में कार्यरत या सेवानिवृत्त जवान, बाहर कार्यरत सुरक्षाकर्मियों और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मामलों का तुरंत निबटारा किया जाए। विशेष श्रेणी के आवेदन को प्राथमि‍कता  उन्होंने कहा कि फि‍फो व्यवस्था स्थगित है इसलिए विशेष श्रेणी के आवेदनों को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि ऐसे आवेदकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों का चक्कर न लगाना पड़े। आवश्यक होने पर उन्हें व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देकर उनके प्रतिनिधि या अधिवक्ता के माध्यम से सुनवाई की व्यवस्था की जाए। दिनभर होगा मंथन और मूल्‍यांकन  बताया जाता है कि पुराना सचिवालय में होनेवाली बैठक दिनभर चलेगी। पहले सत्र में प्रधान सचिव सीके अनिल वित्‍तीय वर्ष के कार्यों का मूल्‍यांकन करेंगे। दूसरे सत्र में तकनीकी और कौशल विकास पर मंथन होगा। इसमें कोर्ट केस लिखने का टेस्‍ट भी डीसीएलआर देंगे। इसका उद्देश्‍य आदेश की सटीकता परखना है। सभी डीसीएलआर को लैपटॉप, डोंगल और पांच कोर्ट केस के डिटेल के साथ आने का निर्देश दिया गया है।

नीतीश कुमार जाएंगे राज्यसभा, बिहार के नए सीएम के लिए गूंजा निशांत कुमार का नाम

पटना बिहार की सियासत में एक नया नाम तेजी से उभरता दिख रहा है. वह नाम है निशांत कुमार है. अब ये सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि अब ये खुले मंच पर है. मांग उठ रही है कि निशांत कुमार को बिहार का मुख्‍यमंत्री बनाया जाए. सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब विधान परिषद के अतिथि निवास का उद्घाटन करने पहुंचे, तो वहां का माहौल अचानक सियासी संदेश में बदल गया. उनके सामने ही ‘निशांत कुमार जिंदाबाद’ और ‘बिहार के सीएम निशांत कुमार जिंदाबाद’ के नारे गूंजने लगे. सत्ता के गलियारों में नया संकेत! सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इन नारों को न तो रोका गया और न ही किसी तरह की नाराजगी दिखाई दी. खुद नीतीश कुमार शांत रहे, हाथ जोड़कर अभिवादन किया और आगे बढ़ गए. दरअसल, नीतीश कुमार के सामने ही “निशांत कुमार जिंदाबाद” और “बिहार के सीएम निशांत कुमार जिंदाबाद” के नारे गूंजने लगे. इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिल्कुल शांत नजर आए. उन्होंने लोगों को हाथ जोड़कर अभिवादन किया और आगे बढ़ते रहे. गर्म हो सकती है राजनीति जानकारों की मानें तो यह नारेबाजी भी बिहार की आगे की राजनीति को गर्म करने के लिए काफी है. दरअसल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाने वाले हैं. 10 अप्रैल को वह राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे. उसके बाद वह बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे. नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार के सीएम की कुर्सी पर बीजेपी का मुख्यमंत्री बैठेगा, ऐसा फिलहाल तय माना जा रहा है. असल में, यह नारे इसी वजह से लगाए जा रहे हैं. जेडीयू के कार्यकर्ताओं की मांग है कि बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार बैठें. ऐसे में बीजेपी और जेडीयू के कार्यकर्ताओं की यह चाह अब बिहार की राजनीति का नया अखाड़ा बनने वाली है. … पर CM कुर्सी अब भी दूर! बिहार में बीजेपी कार्यकर्ता और शीर्ष नेतृत्व लगभग 10 वर्षों से सीएम की कुर्सी पर अपना मुख्यमंत्री बनाने की कोशिश में हैं. इसी सपने को पूरा करने के लिए बिहार में नीतीश कुमार के सबसे करीबी कहे जाने वाले बीजेपी के डिप्टी सीएम स्वर्गीय सुशील कुमार मोदी को डिप्टी सीएम को रिप्‍लेस कर दिया गया. सीएम की कुर्सी की राह तैयार करने के लिए रेणु देवी और तारकिशोर प्रसाद को डिप्‍टी सीएम बनाया गया. रेणु देवी और तारकिशोर प्रसाद को भी बदलकर सीएम नीतीश को चुनौती दे सकने वाले चेहरों को आगे किया गया. विजय सिन्‍हा और सम्राट चौधरी को डिप्‍टी सीएम बनाया गया। बावजूद बीजेपी अपने इस प्रयास में सीधे-सीधे अब तक सफल नहीं हो सकी है। डिप्टी CM बदलते रहे बिहार में सीएम की कुर्सी की राह बनाने के लिए नीतीश कुमार के साथ रेणु देवी और तारकिशोर प्रसाद को डिप्टी सीएम बनाया गया. इसी कड़ी में रेणु देवी और तारकिशोर प्रसाद को हटाकर, सीएम नीतीश को चुनौती दे सकने वाले विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी को डिप्टी सीएम बनाया गया. बावजूद इसके, बीजेपी अपने इस प्रयास में सीधे-सीधे अब तक सफल नहीं हो सकी है. अब ट्रांजिशन मोड में बिहार मगर अब नीतीश कुमार 75 साल के हो गए हैं. उम्र का असर उनके स्वास्थ्य पर भी दिख रहा है. ऐसे में अब वह राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं. लेकिन इस बीच बिहार एक ट्रांजिशन मोड में है. अब देखने वाली बात यह होगी कि यह बदलाव का दौर बिहार की राजनीति पर क्या असर डालता है. राजनीतिक जानकार रमाकांत चंदन का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री की गद्दी पर निशांत को काबिज करने की मांग तेज हुई, तो यह बीजेपी और जेडीयू के रिश्तों पर असर डाल सकता है. गेमचेंजर बनेगा नारा या बिगाड़ेगा गणित? अब देखने वाली बात यह होगी कि ‘बिहार के सीएम निशांत कुमार जिंदाबाद’ का जो नारा नीतीश कुमार के सामने लगाया गया, वो गेमचेंजर साबित होता है या NDA का गणित बिगाड़ देता है. जेडीयू कार्यकर्ताओं ने आज खुलकर अपनी उस मांग को नीतीश कुमार के सामने जाहिर कर दी, इसके लिए अभी दो दिन पहले ही पार्टी कार्यालय में पोस्टर लगाए गए थे. इन पोस्टरों में निशांत कुमार को सीएम बनाने की मांग रखी गई थी. यह भी कहा गया कि बिहार के विकास को लेकर जो संकल्प है, उसे निशांत कुमार पूरा करने के लिए तैयार हैं. ऐसे में अब देखने वाली बात यह होगी कि बीजेपी और जेडीयू के कार्यकर्ताओं की यह मांग बिहार की राजनीति को किस करवट ले जाती है.

जमशेदपुर में नई पहल, बुके के बजाय किताब और पौधों से होगा स्वागत और फिजूलखर्ची पर लगेगी रोक

जमशेदपुर जमशेदपुर स्थित मानगो नगर निगम की नवनिर्वाचित मेयर सुधा गुप्ता ने पदभार ग्रहण करते ही सादगी और सेवा की अनूठी मिसाल पेश की है. सोमवार को उन्होंने नगर निगम के उप नगर आयुक्त कृष्ण कुमार को पत्र लिखकर अपनी सभी सरकारी सुविधाओं में कटौती करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि वह नगर निगम में सुविधाओं का लाभ लेने नहीं, बल्कि जनता की सेवा करने आई हैं. तत्काल प्रभाव से वापस ली जाएं गाड़ी मेयर सुधा गुप्ता ने अपने पत्र में कहा है कि उनके लिए आवंटित सरकारी गाड़ी को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए. उन्होंने घोषणा की है कि वह जनसेवा का कार्य अपने प्राइवेट गाड़ी से ही करेंगी. इसके अलावा, उन्होंने निगम के कार्यक्रमों में फिजूलखर्ची रोकने के लिए गुलदस्ता परिपाटी को खत्म करने को कहा है. अब अतिथियों का स्वागत बुके के बजाय पौधे या किताब देकर किया जाएगा. मेयर ने मानदेय का किया परित्याग मेयर पद के लिए मिलने वाले मासिक मानदेय को सुधा गुप्ता ने स्वेच्छा से त्याग दिया है. यह राशि अब मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा होगी. उन्होंने अपने पत्र में कार्यालय के लिए किसी विशेष सजावट या अतिरिक्त फंड के खर्च पर रोक लगाने की बात कही है. उन्होंने सादगीपूर्ण कार्यस्थल की इच्छा जतायी है. उन्होंने कहा है कि टैक्स पेयर्स के पैसे का दुरुपयोग किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मेयर ने निगम के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे भी इसी सेवा भाव के साथ कार्य करें और जनहित को प्राथमिकता दें. फिजूलखर्ची की निगम में जगह नहीं: सुधा गुप्ता उन्होंने कहा कि मैं इस पद पर सेवा भाव से कार्य करने आई हूं न कि सुविधाओं का लाभ लेने के लिए. जनता के पैसे का एक-एक पाई सिर्फ विकास कार्यों में खर्च होना चाहिए. दिखावे और फिजूलखर्ची की निगम में कोई जगह नहीं होगी.

बिहार में शराबबंदी को चुनौती, फाइल और ट्रेन की छतों से हो रही शराब की अनोखी तस्करी

 सोनपुर बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपनाकर कानून को चुनौती दे रहे हैं. हाल के दिनों में तस्करी के कुछ ऐसे चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं, जिसने उत्पाद विभाग और पुलिस को भी हैरान कर दिया है. तस्करों की चालाकी देखकर जांच एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं. तरबूज के अंदर छिपाई शराब, जांच में हुआ खुलासा सोनपुर रेलवे स्टेशन के पास जांच के दौरान एक अनोखा मामला सामने आया. बरौनी एक्सप्रेस में तलाशी के दौरान लावारिस हालत में रखे गए तरबूज से शराब बरामद की गई. तस्करों ने बड़ी सफाई से तरबूज को काटकर उसके अंदर शराब की बोतलें छिपा दी थीं, ताकि किसी को शक न हो. लेकिन जांच के दौरान यह चालाकी पकड़ी गई और पूरा खेल सामने आ गया. एग्जीक्यूटिव फाइल में भी छिपाकर ले जा रहे थे शराब इतना ही नहीं, एक अन्य मामले में तस्करों ने एग्जीक्यूटिव फाइल के अंदर शराब छिपाकर ले जाने की कोशिश की. फाइल के भीतर खास तरीके से जगह बनाकर बोतलें रखी गई थीं. हालांकि, उत्पाद विभाग की सतर्कता के चलते इस तस्करी का भी पर्दाफाश हो गया. इन घटनाओं से साफ है कि तस्कर हर संभव तरीका अपनाकर शराब की सप्लाई करने में जुटे हैं. ट्रेन की छत से गिरने लगी शराब की बोतलें वहीं, कुछ दिन पहले सत्याग्रह एक्सप्रेस में एक अजीबोगरीब घटना सामने आई. ट्रेन संख्या 15274 रक्सौल की ओर जा रही थी, तभी अचानक कोच की छत से शराब की बोतलें गिरने लगीं. यह घटना उत्तर प्रदेश के पिपराइच और कप्तानगंज स्टेशन के बीच हुई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्लीपर कोच S4 और S5 के बीच बाथरूम के ऊपर लगे सीलिंग पैनल से करीब 20 से अधिक बोतलें एक-एक कर नीचे गिरीं. तस्करों की नई चाल से पुलिस भी हैरान पहले तो यात्रियों को समझ नहीं आया कि आखिर हो क्या रहा है, लेकिन कुछ ही देर में मामला साफ हो गया कि यह शराब तस्करी का नया तरीका है. इस घटना ने रेलवे और पुलिस प्रशासन को भी सतर्क कर दिया है. लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के बाद उत्पाद विभाग और पुलिस ने जांच और निगरानी बढ़ा दी है. अधिकारियों का कहना है कि तस्करों के हर नए हथकंडे पर नजर रखी जा रही है और उन्हें पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है.

250 एकड़ में फैलेगा आधुनिक शिक्षा का हब, नीतीश सरकार ने 547 करोड़ के प्रोजेक्ट को दी रफ्तार

पटना बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. कैबिनेट से मंजूरी मिलने के करीब साढ़े तीन महीने बाद अब राज्य सरकार प्रस्तावित ‘एजुकेशन सिटी’ को लेकर पूरी तरह एक्टिव हो गई है. मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस महत्वाकांक्षी परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है और इसे वैश्विक स्तर के मॉडल पर विकसित करने की योजना बनाई जा रही है. जापान-सिंगापुर के मॉडल पर होगा निर्माण सरकार इस एजुकेशन सिटी को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए जापान और सिंगापुर जैसे देशों के मॉडल का अध्ययन कर रही है. साथ ही विदेशी कंसल्टेंट्स की मदद से डीपीआर को और बेहतर बनाया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार, अगले दो महीने में इसका फाइनल इंटरनेशनल मॉडल सामने आ सकता है. 250 एकड़ में बनेगा आधुनिक एजुकेशन हब यह एजुकेशन सिटी पटना के आसपास लगभग 250 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित की जाएगी. इसे ‘शेयर्ड कैंपस मॉडल’ पर बनाया जाएगा, जहां अलग-अलग विश्वविद्यालय और कॉलेज अपनी पहचान के साथ एक ही परिसर में मौजूद रहेंगे और कई सुविधाएं शेयर करेंगे. वर्ल्ड क्लास सुविधाओं से लैस होगा कैंपस इस एजुकेशन सिटी में छात्रों को अत्याधुनिक सुविधाएं देने की तैयारी है. इसमें स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, हाईटेक लैब, रिसर्च सेंटर, सेमिनार हॉल, हॉस्टल, गेस्ट हाउस, स्पोर्ट्स स्टेडियम, इंडोर स्टेडियम और ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं शामिल होंगी. साथ ही फैकल्टी और स्टाफ के लिए आवासीय परिसर भी बनाए जाएंगे. 547 करोड़ से अधिक का बजट, रोजगार के नए अवसर इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए 547 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है, हालांकि आगे यह राशि बढ़ भी सकती है. सरकार का मानना है कि यह एजुकेशन हब न केवल शिक्षा के स्तर को ऊंचा करेगा, बल्कि राज्य में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा. शेयर्ड कैंपस मॉडल से मिलेगा बड़ा फायदा शेयर्ड कैंपस मॉडल के तहत एक ही परिसर में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे छात्रों और शिक्षकों का समय बचेगा. साथ ही एक मजबूत रिसर्च और इनोवेशन इकोसिस्टम तैयार होगा. इंडस्ट्री कनेक्शन, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और विभिन्न कोर्स की उपलब्धता से यह परिसर शिक्षा का बड़ा केंद्र बन सकता है. बिहार बनेगा शिक्षा का मजबूत केंद्र सरकार की योजना है कि इस एजुकेशन सिटी के जरिए बिहार को देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल किया जाए. यहां देशभर के छात्रों को क्वालिटी एजुकेशन मिलेगी और राज्य शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाएगा.

डांस ग्रुप के खिलाफ नस्लीय आपत्ति, पटना में महिला की अनुचित हरकत वीडियो में कैद

पटना. पटना में नॉर्थ-ईस्ट से आई महिलाओं और युवतियों के साथ कथित नस्लीय टिप्पणी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो का सटीक स्थान स्पष्ट नहीं है, लेकिन आसपास के दृश्य के आधार पर इसे पटना जंक्‍शन या राजेंद्रनगर टर्मिनल का बताया जा रहा है। वीडियो में अरुणाचल प्रदेश से आई महिलाओं को ‘चिंकी’, ‘मोमो’ जैसे शब्दों से संबोधित किया जा रहा है, जिससे वे नाराज नजर आ रही हैं। खास बात यह है कि ये आपत्तिजनक टिप्पणियां किसी पुरुष ने नहीं, बल्कि स्टेशन परिसर में मौजूद एक महिला द्वारा की जा रही थीं। बताया जा रहा है कि यह घटना वॉशरूम के पास हुई, जहां किसी बात को लेकर पहले कहासुनी हुई और फिर टिप्पणीबाजी शुरू हो गई। वीडियो बना रही एक युवती कहती सुनाई देती है कि वे लोग काफी दूर से यहां आए हैं, लेकिन उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है। युवती यह भी आरोप लगाती है कि इस तरह की हरकतें देश की छवि को खराब करती हैं। विवाद के दौरान संबंधित महिला यह सफाई देती सुनी गई कि ‘मोमो’ उसका पसंदीदा भोजन है, लेकिन इसके बावजूद वह लगातार टिप्पणी करती रही। अरुणाचल की युवत‍ियों ने कहा-उन्‍हें नीचा दि‍खाने की कोश‍िश इस पर युवतियों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, शौचालय उपयोग को लेकर हुए विवाद के बाद यह मामला बढ़ा। फिलहाल, आतिथ्य सत्कार के लिए प्रसिद्ध बिहार में इस तरह की घटना की व्यापक स्तर पर निंदा हो रही है। पुलिस ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

अवैध कब्जों पर चला प्रशासन का डंडा, पश्चिमी चंपारण में 60 अतिक्रमणकारियों को अल्टीमेटम

बगहा/चंपारण. बगहा प्रखंड एक के मझौवा गांव में बेतिया राज की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए अंचल प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। प्रशासन की ओर से चिह्नित 60 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर उनसे भूमि संबंधी कागजात प्रस्तुत करने और जवाब देने को कहा गया है। अंचल प्रशासन के अनुसार, मझौवा क्षेत्र में लंबे समय से बेतिया राज की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत मिल रही थी। नोटिस मिलने के बाद गांव के लोग अंचल कार्यालय पहुंचे। प्रभारी सीओ सह बीडीओ प्रदीप कुमार ने बताया कि यदि संबंधित लोग निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब या वैध कागजात प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो कब्जे वाली जमीन को खाली कराया जाएगा। इसके लिए आवश्यक होने पर प्रशासनिक बल का भी प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले भी नोटिस जारी किया गया था, लेकिन अधिकांश लोगों ने न तो जवाब दिया और न ही कोई दस्तावेज प्रस्तुत किया। इसी को देखते हुए इस बार प्रशासन ने सख्ती बरतने का निर्णय लिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निष्पक्ष कार्रवाई से सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कर जनहित में उपयोग किया जा सकेगा। समय रहते प्रस्तुत करें कागजात वहीं, कुछ लोगों ने प्रशासन से पारदर्शिता बनाए रखने और वास्तविक पात्रों को परेशान नहीं करने की मांग की है। अंचल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे समय रहते अपने कागजात प्रस्तुत करें, ताकि अनावश्यक कार्रवाई से बचा जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

लोकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश, असम सरकार और केंद्र पर बरसे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

असम  असम सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सभा करने की अनुमति नहीं दी गयी. उन्हें असम के रोंगोनदी और चाबुआ विधानसभा में सभा करना था. पीएम के कार्यक्रम की वजह से उनके हैलीकॉप्टर को उड़ने की इजाजत नहीं दी गयी. इसके ठीक एक दिन पहले कल्पना सोरेन को तीन जगहों पर सभा करने की अनुमति नहीं दी गयी. असम में जब सभा करने नहीं दिया गया तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मोबाइल फोन से ही जनता को संबोधित किया. सीएम ने सोशल मीडिया किया पोस्ट सीएम ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि असम की वीर और क्रांतिकारी धरती पर लोकतंत्र की आवाज को दबाने की फिर कोशिशें की गयी. कल कल्पना जी को सभा करने से रोका गया, आज मुझे असम के रोंगोनदी और चाबुआ विधानसभा के अपने भाई-बहनों से मिलने नहीं दिया गया.क्या सच में विरोधियों को लगता है कि संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर ऐसे षड्यंत्र से वे तीर-धनुष की ताकत को रोक पाएंगे? असम में आदिवासी समाज को रोकने की कोशिश: हेमंत सोरेन सीएम ने कहा कि इतने वर्षों तक तो चाय बागान के मेरे लाखों शोषित, वंचित आदिवासी समाज के भाइयों बहनों को रोकने की नाकाम कोशिश की है, और कितना रोक पाओगे?इतिहास गवाह है, जब-जब आवाज दबाई गई है, वह और बुलंद होकर उभरी है. आगामी नौ अप्रैल के दिन मेरे ये लाखों भाई-बहन अपने संघर्ष का हिसाब लेकर रहेंगे. विरोधियों को चुनाव प्रचार करने से रोकते हैं: हेमंत सीएम ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि असम की क्रांतिकारी धरती ने कभी झुकना नहीं सीखा है.प्रधानमंत्री जी का कार्यक्रम बताकर आज मुझे प्रचार के लिए जाने नहीं दिया गया. हमलोगों को जहां है वहीं पर रहने का आदेश दिया गया. पीएम अपने कुर्सी व राजनीतिक ताकत के बदौलत चुनाव के अंतिम चरण में विरोधियों को प्रचार-प्रसार करने से इसी तरह रोकते हैं. ये लोग ऐन-केन प्रकारेण चुनाव जीतने का प्रयास करते हैं. कभी वोट चोरी कर जीतते हैं. झामुमो पहली बार यहां चुनाव लड़ रहा है. जय भारत पार्टी के साथ हैं. लोकतंत्र की आड़ बंद किया जायेगा: सीएम क्या लोकतंत्र अब कार्यक्रमों की आड़ में बंद किया जायेगा? और यह सब कैसे हो रहा है? संवैधानिक संस्थाओं का खुलेआम दुरुपयोग कर, एजेंसियों को हथियार बनाकर. हमारे पुरखों ने हमें झुकना नहीं, संघर्ष करना सिखाया है. हम लड़ते आए हैं और हर लड़ाई जीतकर ही आगे बढ़े हैं. अब यह समाज चुप नहीं रहेगा सीएम ने कहा कि असम का शोषित, वंचित, आदिवासी, दलित और पिछड़ा समाज अब जाग चुका है. चाय बागान में रहने वाले लोग भी अब आगे बढ़कर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं. अब यह समाज चुप नहीं रहेगा, अपने अधिकार लेकर ही रहेगा.इसलिए साथियों, हमें एकजुट होना है. हमारी एकजुटता ही विरोधियों के लिए सबसे बड़ा जवाब है, और यही एकजुटता पहले ही इनके डर का कारण बन चुकी है. 250 रुपये में जहर भी नहीं मिलता सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि चाय बगान को मजदूरों को एक दिन की मजदूरी 250 रुपये मिलती है. इतनी राशि में तो जहर भी नहीं मिलता.राज्य सरकार ने चाय बगान के मजदूरों को न जीने के लिए छोड़ा है और न ही मरने के लिए छोड़ा है. नौ अप्रैल को अत्याचार का बदला वोट से देगी जनता सीएम ने कहा कि याद रखिये, जितना हमें रोकोगे, हम उतनी ही मजबूती से आगे बढ़ेंगे क्योंकि हमारे तीर-धनुष की ताकत सिर्फ प्रतीक नहीं, यह हमारे आत्मसम्मान और संघर्ष की पहचान है.आगामी नौ अप्रैल को हमारा यह संघर्षी समाज अपने ऊपर वर्षों से हुए शोषण और अत्याचार का बदला वोट की ताकत के साथ लेकर रहेगा.

पर्यावरण और सतत विकास पर महा-संवाद, झारखंड समेत चार राज्यों की चुनौतियों पर होगा मंथन

 रांची पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में कार्यरत संस्था ‘सीड’ (CEED) आगामी 8 और 9 अप्रैल को रांची में ‘एकम डायलॉग्स संवाद से निर्माण’ नामक एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रही है. सोमवार को राजधानी में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान संस्था के सीईओ रमापति कुमार ने बताया कि इस गरिमामयी कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्र सरकार के रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ करेंगे. इस आयोजन की विशिष्टता यह है कि इसमें देश के 11 पद्मश्री सम्मान से नवाजे गए व्यक्तित्व भी अपने अनुभवों को साझा करेंगे. कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 27 ‘चेंज मेकर्स’ को ‘एकम संवाद’ सम्मान से विभूषित किया जाएगा, जिन्होंने जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव की इबारत लिखी है. 11 सत्रों में होगा मंथन: खेती से लेकर क्लाइमेट फाइनांस तक दो दिनों तक चलने वाले इस महा-संवाद में कुल 11 तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे. सीड के सीईओ ने स्पष्ट किया कि चर्चा का दायरा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें इको रिस्टोरेशन (पारिस्थितिकी बहाली), ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती के सफल प्रयोगों पर गहन विमर्श होगा. इसके अतिरिक्त, स्वच्छ उद्योगों की स्थापना, वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन, क्लाइमेट फाइनांस और नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन (Policy Implementation) जैसे जटिल विषयों पर भी शोधकर्ता और नीति-निर्माता एक साझा मंच पर विचार-विमर्श करेंगे. सामुदायिक ज्ञान और नवाचार का संगम आयोजन के मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए रमापति कुमार ने कहा कि ‘एकम डायलॉग्स’ महज एक औपचारिक चर्चा नहीं, बल्कि एक समावेशी मंच है. यहाँ नीति-निर्माताओं, उद्योगपतियों, शोधकर्ताओं और सिविल सोसाइटी के साथ-साथ महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है. इसका प्राथमिक लक्ष्य सामुदायिक पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक नवाचारों के बीच की खाई को पाटकर क्षेत्रीय विकास के व्यावहारिक समाधान खोजना है. यह पहल पूर्वी भारत के राज्यों के साझा सांस्कृतिक और पारिस्थितिक ताने-बाने को आधार बनाकर जलवायु-अनुकूल भविष्य के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी. चार राज्यों की साझा चुनौतियों पर नजर झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और ओडिशा जैसे राज्य जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं. सीड की डायरेक्टर (पॉलिसी) सृष्टि पल्लव ने बताया कि ‘एकम डायलॉग्स’ इन राज्यों की साझा भौगोलिक और पर्यावरणीय चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. सम्मेलन के निष्कर्षों को एक ‘श्वेत पत्र’ (White Paper) के रूप में संकलित किया जाएगा, जिसे भविष्य की नीतियों के निर्माण के लिए संबंधित सरकारों के साथ साझा किया जा सकता है. रांची में होने जा रहा यह आयोजन निश्चित रूप से पर्यावरण और सतत विकास के क्षेत्र में एक नई चेतना जागृत करेगा.

घर-घर पूछे जाएंगे विशेष सवाल, शादीशुदा सदस्यों की संख्या और मुखिया की जाति शामिल

आरा. भोजपुर जिले में होने वाली जनगणना 2027 कि तैयारी तेजी से पूरी की जा रही है। इस दौरान राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग कई प्रकार के निर्देश जारी किया है। 17 अप्रैल से स्वगणना शुरू होगी। इसमें क्या-क्या सवाल रहेंगे और इसके बाद होने वाले मकान सूचीकरण में क्या-क्या जानकारी लेनी है, इसकी गाइडलाइन जारी की गई है। इस बार जनगणना के दौरान परिवार की बागडोर स्त्री या पुरुष के हाथों में है, इसकी पड़ताल की जाएगी। परिवार के भोजन में मुख्य अनाज क्या है, यह भी जनगणना में दर्ज किया जाएगा। मकान सूचीकरण से पहले स्वगणना होनी है। स्वगणना 17 अप्रैल से एक मई तक होनी है। मकान सूचीकरण का काम दो मई से 31 मई तक चलेगा। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने निर्देश दिया है कि घर के फर्श, छत की सामग्री, घर का उपयोग, इन सबका ब्योरा स्वगणना के दौरान लिया जाएगा। इसके अलावा घर में कितने लोग रहते हैं, एक घर में कितने विवाहित परिवार रहते हैं, इसकी भी जानकारी जुटाई जाएगी। परिवार के मुखिया स्त्री हैं या पुरुष, इसे भी रिकॉर्ड किया जाएगा। परिवार के मुखिया की जाति को भी दर्ज करना है। वहीं, बुनियादी जरूरतों से जुड़ी 10 बिन्दुओं का रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसमें पेयजल का स्रोत, पेयजल की उपलब्धता, प्रकाश का मुख्य स्रोत, शौचालय की सुलभता, किस प्रकार का शौचालय है, गंदे पानी के निकासी की क्या व्यवस्था है, स्नानगृह की उपलब्धता क्या है, रसोई घर की उपलब्धता (एलपीजी है या पीएनजी), खाना पकाने का मुख्य साधन क्या है और परिवार के खाने का मुख्य अनाज क्या है, इन सबकी पड़ताल की जाएगी। ऑनलाइन माध्यम से होगी स्वगणना स्वगणना में लोगों को खुद ही जनगणना फॉर्म को ऑनलाइन या डिजिटल माध्यम से भरना है। इसमें डिजिटल पोर्टल पर अपनी और परिवार की जानकारी जैसे नाम, उम्र, लिंग, शिक्षा और निवास स्थान दर्ज करना है। खुद जानकारी भरने में गलती कम होगी। मकान सूचीकरण के दौरान स्वगणना की सत्यता की जांच भी फील्ड अधिकारी करेंगे। फील्ड प्रगणक एवं पर्यवेक्षकों की ट्रेनिंग 13 अप्रैल से शुरू होनी है। आठ घरेलू उपकरणों की भी जुटाई जाएगी जानकारी जनगणना के दौरान आठ घरेलू उपकरणों में से किसके पास क्या है, यह भी पता किया जाएगा। इसमें रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट सुविधा, लैपटाप-कंप्यूटर, टेलीफोन-मोबाइल-स्मार्ट फोन, साइकिल-स्कूटर-मोटरसाइकिल-मोपेड में क्या है, कार-जीप-वैन में क्या है, इसकी जानकारी भी जुई जाएगी। मोबाइल नंबर भी इसमें दर्ज किया जाएगा। स्वगणना 17 अप्रैल से शुरू होगी – जिले में तेरह अप्रैल से सभी प्रगणक एवं पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होगा। इसके लिए नया शिड्यूल्ड डीएम के द्वारा जारी किया गया है। स्वगणना इस महीने की 17 अप्रैल से शुरू होगी। सभी तैयारी डीएम के मार्गदर्शन में चल रहा है। – मदन नारायण सिंह, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी