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नामकुम में नशा तस्करों पर स्ट्राइक, बोलेरो के साथ पकड़ा गया मादक पदार्थों का जखीरा, पुलिस की बड़ी कामयाबी

रांची झारखंड की राजधानी रांची में नशे के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. नामकुम थाना क्षेत्र के बुदरी गांव में गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी कर भारी मात्रा में प्रतिबंधित डोडा और अफीम बरामद किया. नामकुम पुलिस ने इसके किंगपिन को गिरफ्तार भी किया है. इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया है और नशा कारोबारियों में डर का माहौल देखा जा रहा है. घर से मिला भारी मात्रा में मादक पदार्थ पुलिस की छापेमारी के दौरान एक घर से करीब 6 क्विंटल डोडा और लगभग आधा किलो अफीम बरामद किया गया. इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ की बरामदगी इस बात की ओर इशारा करती है कि यह कोई संगठित गिरोह का हिस्सा हो सकता है. पुलिस ने मौके से कई अहम सुराग भी जुटाए हैं. मुख्य आरोपी मनीष तिर्की गिरफ्तार इस मामले में पुलिस ने घर के मालिक मनीष तिर्की को गिरफ्तार कर लिया है. बताया जा रहा है कि वह अवैध रूप से डोडा और अफीम का भंडारण कर रहा था. पुलिस ने आरोपी की बोलेरो गाड़ी भी जब्त कर ली है, जिसका इस्तेमाल इस अवैध कारोबार में किया जा रहा था. आरोपी से पूछताछ जारी है और उससे कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की उम्मीद है. वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में कार्रवाई मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले की सूचना वरीय पुलिस अधीक्षक को मिली थी. इसके बाद पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के निर्देशन में पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय प्रथम) और नामकुम थाना प्रभारी इंस्पेक्टर रामनारायण सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया. टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी कर इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया. पुलिस ने साधी चुप्पी हालांकि इतनी बड़ी बरामदगी के बावजूद पुलिस फिलहाल पूरे मामले पर ज्यादा जानकारी देने से बच रही है. संभावना जताई जा रही है कि पुलिस जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे नेटवर्क और अन्य आरोपियों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा करेगी. नशा कारोबार पर सख्त कार्रवाई के संकेत इस कार्रवाई को नशे के खिलाफ पुलिस की बड़ी मुहिम के रूप में देखा जा रहा है. लगातार हो रही छापेमारी से यह साफ संकेत मिल रहा है कि प्रशासन अवैध नशा कारोबार के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है.

सावधान, अब चूहे मारने वाली दवा बेचना पड़ेगा महंगा, बिहार सरकार ने लगाया कड़ा प्रतिबंध

पटना बिहार में चूहे, गिलहरी समेत खेतों में फसलों को बचाने के लिए अन्य जीव-जंतुओं को मारने के लिए उपयोग की जाने वाली दवा Ratol Paste पर पूर्णतया प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से ऑनलाइन ऑर्डर भी नहीं कर सकेंगे। बिहार में चूहे, गिलहरी आदि को मारने वाली दवा रेटॉल पेस्ट (Ratol Paste) पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसकी ऑफलाइन और ऑनलाइन किसी तभी तरह की बिक्री नहीं हो सकेगी। साथ ही आम लोगों को भी इसका उपयोग नहीं करने की अपील की गई है। खेतों में अक्सर चूहे, गिलहरी और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले अन्य जीव-जंतुओं को मारने के लिए इस दवा का इस्तेमाल किया जाता है। बिहार के कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए इसकी बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया। भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा फॉस्फोरस से संबंधित कठोर सुरक्षा संहिता के प्रकाशन के बाद बिहार के कृषि विभाग ने यह रोक लगाई है। कृषि निदेशक ने बताया कि बिहार में कार्यरत अमेजन मीशो, जोमैटो जैसे सभी ई कॉमर्स प्लेटफार्म और अन्य खुदरा विक्रेताओं को निर्देश दिया गया है कि तत्काल प्रभाव से इस आदेश का पालन करें। आदेश में कहा गया है कि अगर किसी विक्रेता द्वारा रेटॉल पेस्ट (कृंतकनाशक) की बिक्री करते हुए पाया जाता है, तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित जिला स्तरीय सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण को उपलब्ध कराई जाए। ऐसे दुकानदारों और विक्रेताओं के खिलाफ कानून की सुसंगत धाराओं एवं नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। क्या है रेटॉल पेस्ट यह एक चिपचिपा, गाढ़ा पेस्ट या पाउडर‑आधारित उत्पाद होता है। यह जहरीला होता है। चूहे, गिलहरी आदि जीव-जंतु खाना समझकर खाते हैं और बाद में जहर के असर से मर जाते हैं। रेटॉल पेस्ट में आमतौर पर येलो-व्हाइट फास्फोरस नाम का बेहद खतरनाक पदार्थ होता है। यह एक प्रोटोप्लाज्मिक पॉइजन होता है। इसे खाने के बाद जीव-जंतुओं की कुछ देर में ही मौत हो जाती है। यह सीधे जीवित कोशिकाओं पर प्रहार करता है। घरों और दुकानों में भी होता है इस्तेमाल इस दवा का इस्तेमाल सिर्फ खेतों में ही नहीं, बल्कि घर, किराना दुकानें और अनाज-दाल आदि के गोदामों में भी इस्तेमाल किया जाता है। लोग अक्सर चूहों को भगाने (मारने) के लिए अपने घर-गोदाम में यह दवा रखते हैं। इंसान के लिए भी जानलेवा है यह दवा सिर्फ जीव-जंतुओं नहीं, बल्कि इंसानों के लिए भी जानलेवा होती है। रेटॉल पेस्ट की थोड़ी मात्रा भी इंसानों के शरीर में लिवर को नुकसान पहुंचा सकती है। ब्लड प्रेशर बढ़ना, खून का जमना, आंतरिक रक्तस्राव जैसी समस्या हो सकती है। सेवन के 48 घंटे के भीतर इसका असर दिखने लगता है। ज्यादा मात्रा में सेवन करने या उचित उपचार न मिलने पर इंसान की जान भी जा सकती है।

बिहारशरीफ में मातम, मां शीतला मंदिर में मची अफरा-तफरी, सीएम नीतीश ने किया मुआवजे का ऐलान

नालंदा नालंदा जिले के बिहारशरीफ स्थित प्रसिद्ध मां शीतला मंदिर (मघड़ा) में मंगलवार की सुबह उस वक्त मातम में बदल गई जब भीड़ के बीच अचानक भगदड़ मच गई. मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी, लेकिन अचानक मची अफरा-तफरी में लोग एक-दूसरे को रौंदते हुए भागने लगे. इस भगदड़ में 9 महिलाओं की मौत हो गई है, जबकि कई लोग जख्मी हो गए हैं. उन्हें इलाज के लिए मॉडल अस्पताल बिहार शरीफ भेजा गया है. घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंच गए हैं. CM नीतीश कुमार ने किया मुआवजे का ऐलान हादसे की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है. मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस घटना से अत्यंत मर्माहत हैं और उन्होंने तुरंत राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं. नीतीश कुमार ने मृतकों के आश्रितों के लिए कुल 6 लाख रुपये के अनुग्रह अनुदान की घोषणा की है, जिसमें 4 लाख रुपये आपदा प्रबंधन विभाग और 2 लाख रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष से दिए जाएंगे. मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन के वरीय अधिकारी घटनास्थल पर कैंप कर रहे हैं और घायलों के समुचित इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है. सरकार ने साफ किया है कि इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवारों की हर संभव सहायता की जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया गहरा शोक नालंदा में हुई भगदड़ की घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि यह हादसा अत्यंत दुखद है और इसमें अपनों को खोने वाले परिवारों के प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं. सम्राट चौधरी डॉ. प्रेम कुमार और तेजस्वी यादव की संवेदना इस हादसे पर बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विधान सभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने भी शोक प्रकट किया है. सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर दुख जताते हुए कहा कि सरकार घायलों के बेहतर उपचार के लिए प्रतिबद्ध है और पीड़ितों को संबल प्रदान करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं. नालंदा स्थित माता शीतला मंदिर में भगदड़ की दुखद घटना अत्यंत ही पीड़ादायक है। इस हादसे में जान गंवाने वाले और घायल हुए सभी श्रद्धालुओं के परिवारजनों के प्रति अपनी संवेदनाएँ प्रकट करता हूँ। सरकार द्वारा पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता और राहत प्रदान की जा रही है। घायलों के…      वहीं, विधान सभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है. नालंदा के मघड़ा स्थित शीतला मंदिर में भगदड़ की घटना पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने गहरा दुख जताया है. तेजस्वी यादव ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की. साथ ही शोकाकुल परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की. राहत और बचाव कार्य में जुटा प्रशासन घटना के बाद प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीम मौके पर पहुंच गई है. वरिष्ठ अधिकारियों को घटनास्थल पर तैनात किया गया है और राहत व बचाव कार्य तेजी से चल रहा है. घायलों को अस्पताल में भर्ती कर उनका इलाज कराया जा रहा है. इस हादसे के बाद मंदिरों और भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं. ऐसे आयोजनों में बेहतर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा इंतजाम जरूरी हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके.

आरजेडी के कोर वोट बैंक पर कांग्रेस की नजर, 10 यादव और 10 ब्राह्मणों को बनाया जिला अध्यक्ष

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में सियासी मात खाने के बाद कांग्रेस अब दोबारा से खड़े होने की कवायद में जुट गई है. कांग्रेस ने सूबे में अपने संगठन को फिर से मजबूत और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुान खरगे की मंजूरी के बाद राज्य में संगठनात्मक जिलों के पुनर्गठन के प्रस्ताव को स्वीकृति के बाद सोमवार देर शाम बिहार के 53 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति का ऐलान कर दिया है. कांग्रेस ने लंबे इंतजार के बाद सोमवार को आखिरकार बिहार में सभी 53 संगठनात्मक जिलों में नए अध्यक्ष नियुक्त कर दिए हैं. बिहार जिला अध्यक्ष की जो 53 नेताओं की सूची जारी की है  उसमें 43 नए चेहरों को मौका दिया है तो 10 पुराने जिलाध्यक्षों पर भरोसा जताया है. बिहार में बीते साल नवंबर में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था. कांग्रेस को बिहार की केवल 6 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल हुई थी, जिसके बाद पार्टी के अंदर अंदरूनी कलह भी देखने को मिली थी. बिहार के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम को गंभीर आरोप भी झेलने पड़े. अब चार महीने के बाद कांग्रेस दोबारा से खड़े होने की दिशा में कदम बढ़ाया है, जिसके लिए संगठन को नए तरीके से खड़े करने की स्टैटेजी अपनाई है. बिहार में कांग्रेस ने फिर बदली चाल विधानसभा चुनाव के चार महीने बाद अब कांग्रेस ने बिहार में पार्टी संगठन को फिर से खड़ा करने और इसके लिए जिलाध्यक्षों के चेहरे से सामाजिक समीकरण को साधने की राजनीति को अमलीजामा पहनाया है. हालांकि, कांग्रेस जिलाध्यक्षों के जरिए कांग्रेस किस सामाजिक वर्ग को साधना चाहती है इसे लेकर स्थिति कमोबेश ऊहापोह वाली ही नजर आती है. बिहार जिला अध्यक्षों की सूची देखें तो मोटे तौर कर कहा जा सकता है कि कांग्रेस ने अपने उस दलित कार्ड वाले प्लान से अपने सियासी कदम पीछे खींच लिए हैं, जिसे उसने राजेश राम की प्रदेश की कमान देने में साथ एग्जीक्यूट किया था. कांग्रेस ने जिलाध्यक्षों की लिस्ट में दलित चेहरों के अलावा सवर्णों को भी तरजीह दी है. सवर्णों को प्रतिनिधित्व बताता है कि कांग्रेस अपने पुराने वोट बैंक को फिर से साधना चाहती है. कांग्रेस का सवर्ण और यादव पर भरोसा कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की लिस्ट में यादव जाति से आने वाले चेहरे इस बात का भी संकेत माना जा सकता है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस आरजेडी से दूरी बनाकर अकेले बिहार में आगे बढ़ने का प्रयास कर सकती है. यादव जाति को बिहार में आरजेडी का आधार वोट माना जाता है लेकिन इसी यादव समाज से 10 जिलाध्यक्ष बनाया जाना इसी तौर पर देखा जा रहा है. कांग्रेस जिलाध्यक्षों की लिस्ट में सबसे अधिक ब्राह्मण और यादव जाति के नेताओं को 10-10 जिलों की कमान मिली है. बिहार के 53 जिला अध्यक्षों में 7 मुस्लिम, 7 दलित, 7 भूमिहार और 5 राजपूत नेताओं को जिलों की कमान मिली है. कुल मिलाकर 53 संगठनात्मक जिलों में से 38 जिलों की कमान सवर्ण, दलित और मुसलमान नेताओं हाथों में दी गई है. पटना जिले में दो सवर्ण नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है. पटना ग्रामीण-1 की कमान भूमिहार जाति से आने वाले चंदन कुमार को तो पटना ग्रामीण-2 की कमान सिख समुदाय से आने वाले गुरजीत सिंह को दी गई है. पटना शहरी की कमान कायस्थ वर्ग से आन वाले कुमार आशीष को दी गई है. कांग्रेस फिर सवर्ण राजनीति पर लौटी कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की सूची को गौर से देखें तो जाहिर होता है कि बिहार में पार्टी की नजर ब्राह्मण और यादव वोट बैंक पर है. यूजीसी को लेकर ब्राह्मणों के साथ साथ अगड़ी जाति भारतीय जनता पार्टी से खफा है.शायद इसी को भुनाने के लिए कांग्रेस ने 53 में 10 जिलाध्यक्ष ब्राह्मण समुदाय से बनाए हैं. गौर करने वाली बात यह है कि इतने ही यादव समुदाय के नेताओं को जिलाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई है. यादव समुदाय राष्ट्रीय जनता दल कोर वोट बैंक है. ऐसे में यादवों को कांग्रेस की ओर से लुभाना राष्ट्रीय जनता दल को अखर सकता है.बिहार कांग्रेस में पहले 40 संगठन जिला इकाई थी, जिसे अब बढ़ाकर 53 कर दिया गया है. पार्टी ने जिलाध्यक्षों की तैनाती से पहले संगठन सृजन अभियान चलाया था और सभी जिलों में पर्यवेक्षक तैनात किए थे. जिलाध्यक्ष पद के दावेदारों के इंटरव्यू भी लिए गए थे और उसके बाद आलाकमान को रिपोर्ट सौंपी गई थी. इस आधार पर ही पार्टी आलाकमान ने जिलाध्यक्षों के नामों पर मुहर लगाई है.  

पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: दुलारचंद मर्डर केस में अनंत सिंह के भतीजों को मिली अग्रिम जमानत

पटना  दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाई कोर्ट (Patna High Court) से जेडीयू विधायक अनंत सिंह के भतीजे राजवीर सिंह और करमवीर सिंह को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली है। न्यायाधीश प्रभात कुमार सिंह की एकलपीठ ने वरीय अधिवक्ता नरेश दीक्षित और अधिवक्ता कुमार हर्षवर्दन को सुनते हुए उक्त आदेश पारित किया। इससे पहले, इसी मामले में 19 मार्च को अनंत सिंह को भी हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिल चुकी है। वह 2 नवंबर 2025 से बेऊर जेल में बंद थे और करीब साढ़े चार महीने बाद उन्हें राहत मिली थी। मामला 30 अक्टूबर 2025 का है। मोकामा के घोसवरी थाना क्षेत्र के बसावनचक गांव में चुनाव प्रचार के दौरान जन सुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। राजवीर और कर्मवीर पर क्या आरोप हैं? राजवीर सिंह और कर्मवीर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने जबरदस्ती दुलारचन्द को गाड़ी से खींच लिया और अनंत सिंह ने जान मारने की नियत से उनके बाएं पैर पर चला दी थी, इसके पश्चात दुलारचंद की मृत्यु हो गई थी। प्राथमिकी में अनंत सिंह, उनके भतीजे राजवीर और करमवीर सिंह समेत अन्य को नामजद किया गया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि दोनों को राजनीतिक द्वेषवश फंसाया गया है और उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए आरोपों की गंभीरता का हवाला दिया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अदालत नेपी दोनों को अग्रिम जमानत दे दी। अदालत ने निर्देश दिया कि अभियुक्त जांच में सहयोग करेंगे।  

रेल यात्रियों को राहत: गया-सासाराम से सीधे बक्सर पहुंचेंगी ट्रेनें, बनेगा नया डीडीयू बाईपास लिंक

बक्सर. पूर्व मध्य रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) जंक्शन पर ट्रेनों के बढ़ते दबाव को कम करने और परिचालन को सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। डीडीयू बाईपास लाइन को सुदृढ़ करने के लिए डीडीयू-दानापुर रेलखंड के ईस्ट आउटर केबिन (ईओसी) से डीडीयू-गया लाइन के फ्लाईओवर केबिन (एफओसी) तक नई ब्राड गेज (बीजी) रेल लाइन निर्माण के लिए ई-टेंडर जारी कर दिया गया है। यह परियोजना बक्सर से भभुआ रोड और सासाराम के रास्ते गया तक निर्बाध रेल संपर्कता प्रदान करेगी। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बक्सर ताप बिजली घर को सुगम परिवहन के माध्यम से कोयले की आपूर्ति करना है। इसके जरिए गढ़वा या गया की तरफ से आने वाली मालगाड़ियां बिना डीडीयू जंक्शन के यार्ड में प्रवेश किए बाहर से ही बक्सर की तरफ निकल सकेंगी। इससे इंजन रिवर्सल की समस्या भी नहीं रहेगी। ट्रेन गंज ख्वाजा स्टेशन से सीधे कुछमन पहुंचेगी। परियोजना की मुख्य विशेषताएं और लागत रेलवे द्वारा जारी टेंडर के अनुसार, इस नई रेल लाइन की कुल लंबाई 2.666 किलोमीटर होगी। इस महत्वपूर्ण परियोजना की अनुमानित लागत 11.58 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। चयनित एजेंसी को काम शुरू होने के छह महीने के भीतर निर्माण कार्य पूरा करना होगा। इस प्रोजेक्ट के तहत व्यापक स्तर पर तकनीकी कार्य किए जाएंगे, जिनमें भारी पैमाने पर मिट्टी भराई (अर्थवर्क), पुलों के सब-स्ट्रक्चर और सुपर-स्ट्रक्चर का निर्माण, रेल ट्रैक बिछाना, बैलास्टिंग और वेल्डिंग, सीमेंट, स्टील की आपूर्ति और ट्रैक फिटिंग शामिल है। बक्सर थर्मल पावर प्लांट को होगा सीधा लाभ इस बाईपास लाइन के निर्माण का सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ बक्सर (चौसा) स्थित थर्मल पावर प्लांट को मिलेगा। धनबाद की ओर से आने वाली कोयला लदी मालगाड़ियों को अब डीडीयू जंक्शन के मुख्य यार्ड में आने की आवश्यकता नहीं होगी। ये ट्रेनें बाईपास के जरिए सीधे डीडीयू-पटना रेलखंड पर चौसा के पास स्थित पावर प्लांट तक पहुंच सकेंगी, जिससे कोयला आपूर्ति की प्रक्रिया तेज और निर्बाध हो जाएगी। आपको बता दें कि बक्सर ताप बिजली घर को निर्बाध कोयला आपूर्ति के लिए एक ऐसी ही व्यवस्था आरा जंक्शन के पास डीडीयू-पटना रेलखंड के जगजीवन हाल्ट और आरा-सासाराम रेलखंड के उदवंतनगर के बीच भी की जा रही है। वहां भी बाईपास लाइन के जरिए ऐसी व्यवस्था की जा रही है, जिससे सासाराम से आने वाली ट्रेन बिना आरा जंक्शन जाए और बिना इंजन रिवर्स किए बक्सर की तरफ जा सके। परिचालन में सुधार और दबाव में कमी वर्तमान में डीडीयू जंक्शन पर प्रतिदिन लगभग 175 यात्री ट्रेनों और 150 मालगाड़ियों का आवागमन होता है। इस नई लाइन के शुरू होने से डीडीयू जंक्शन परिसर की मुख्य लाइन पर दबाव कम होगा। इससे एक वैकल्पिक मार्ग विकसित होगा और किसी भी आपात स्थिति में ट्रेनों को बाईपास के जरिए पटना और गया रेलखंड की ओर मोड़ा जा सकेगा। बिजली घर की तीसरी यूनिट जल्दी ही शुरू होने की उम्मीद बक्सर ताप बिजली घर 1320 मेगावाट की कोयला आधारित बिजली परियोजना है। यहां 660-660 मेगावाट की दो बिजली उत्पादन यूनिट की स्थापना होनी है। इनमें से एक यूनिट बीते नवंबर महीने में औपचारिक रूप से कार्यशील हो चुकी है। इसका उद्घाटन बीते 22 अगस्त को ही गयाजी में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था। परियोजना की दूसरी यूनिट का निर्माण भी लगभग पूरा हो चला है। जल्दी ही इससे भी उत्पादन शुरू करने की तैयारी है। इसे कार्यशील करने के लिए निर्बाध तरीके से कोयले की आपूर्ति आवश्यक होगी। इसमें प्रतिदिन दो रैक कोयले की खपत का अनुमान है। बक्सर-सासाराम-गया-बिहटा-आरा-बक्सर ट्रेन की बनेगी गुंजाइश यह नई बाईपास रेल लाइन परियोजना शाहाबाद और मगध क्षेत्र के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है। फिलहाल बक्सर और आरा जिले के लोगों के लिए जहानाबाद, गया की सीधी ट्रेन सेवा नहीं है। बक्सर के लिए तो सासाराम और कैमूर की भी सीधी ट्रेन सेवा नहीं है। डीडीयू बाईपास और बिहटा-दनियांवा रेल लाइन के माध्यम से यह समस्या दूर हो सकती है। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. महेंद्र प्रसाद, शिक्षाविद निर्मल सिंह, सरोज सिंह आदि का कहना है कि बक्सर-कुछमन-चंदौली-सासाराम-गया-जहानाबाद-जट डुमरी-बिहटा-आरा-बक्सर होते हुए इस क्षेत्र में लोकल ट्रेनें चलाना संभव हो सकेगा। इससे सात से आठ जिले को लोगों को लाभ मिल सकेगा।

नालंदा के शीतला माता मंदिर में भगदड़, 8 श्रद्धालुओं की मौत, कई लोग घायल

नालंदा बिहार के नालंदा जिले के मघड़ा गांव में स्थित मां शीतला माता मंदिर में पूजा के दौरान मंगलवार (31 मार्च) को भगदड़ मच गई। भगदड़ जैसी स्थिति पैदा होने से कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई। जबकि कई अन्य घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि यह घटना तब हुई जब मंदिर में भारी भीड़ जमा हो गई। अधिकारियों ने बताया कि चैत्र महीने का आखिरी मंगलवार होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में इकट्ठा हुए थे। भीड़ की आवाजाही में अचानक हुई बढ़ोतरी के कारण कथित तौर पर भगदड़ मच गई, जिससे 8 भक्तों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मृतकों में ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं।  जानकारी के अनुसार, आधे दर्जन से अधिक घायल श्रद्धालुओं को इलाज के लिए बिहार शरीफ के मॉडल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल, मौके पर आलाधिकारी पहुंच गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि मामले में बचाव-कार्य जारी है। लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। बताया जा रहा है कि करीब दर्जनों लोग इस दुखद हादसे में घायल हैं। सभी घायलों का स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा है। ममता देवी नाम की एक श्रद्धालु ने बताया, "मंगलवार को यहां हमेशा भीड़ रहती है। लोग शीतला माता के दर्शन के लिए आते हैं। हमलोग भी पटना से दर्शन के लिए आए हैं। लेकिन अचानक भगदड़ मच गई और लोगों की जान चली गई। यह सब कुप्रबंधन की वजह से हुआ। यहां बहुत अधिक भीड़ है। प्रशासन का कोई भी व्यक्ति यहां मौजूद नहीं है।" घटनास्थल से सामने आए वीडियो में देखा गया कि मंदिर परिसर में सैकड़ों लोग जमा है। हादसे में प्रभावित लोगों को एम्बुलेंस से ले जाया जा रहा है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने X पर इस घटना का जिक्र करते हुए नालंदा के माता शीतला मंदिर में हुई भगदड़ की घटना को बेहद दिल दहला देने वाला बताया। उन्होंने कहा, "मैं इस दुर्घटना में अपनी जान गंवाने वाले और घायल हुए सभी श्रद्धालुओं के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। सरकार प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता और राहत प्रदान कर रही है। घायलों के उचित इलाज के लिए इंतजाम किए गए हैं।" वहीं, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने लिखा, "नालंदा स्थित माता शीतला मंदिर में भगदड़ की दुखद घटना अत्यंत ही पीड़ादायक है। इस हादसे में जान गंवाने वाले और घायल हुए सभी श्रद्धालुओं के परिवारजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करता हूं।" चौधरी ने आगे कहा, "सरकार द्वारा पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता और राहत प्रदान की जा रही है। घायलों के समुचित उपचार की व्यवस्था की गई है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति दें तथा शोकाकुल परिवारों को इस दुःख की घड़ी में संबल प्रदान करें। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।" यह घटना राज्य के पूर्वी चंपारण में आध्यात्मिक गुरु अनिरुद्धाचार्य के एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर भगदड़ जैसी स्थिति पैदा होने के एक महीने बाद हुई है। रक्सौल में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान मची अफरा-तफरी में तीन लोग घायल हो गए थे।

कोयल नदी पुल की मरम्मत पूरी होने से यात्रियों को मिली बड़ी राहत

रांची रांची-लोहरदगा रेललाइन पर शनिवार से परिचालन सामान्य हो जाएगा। पहली ट्रेन रांची-लोहरदगा-टोरी पैसेंजर सुबह 5.15 बजे रवाना होगी। शुक्रवार को इस लाइन में लाइट इंजन ट्रेन चलाई गई। गौरतलब है कि रांची रेल मंडल के रांची-लोहरदगा-टोरी खंड पर नागजुआ व लोहरदगा स्टेशनों के मध्य कोयल नदी पर स्थित क्षतिग्रस्त पुल संख्या-115 की मरम्मत चल रही थी। इस कारण इरगांव से लोहरदगा के बीच ट्रेनों का परिचालन बंद था। हजारों यात्रियों को हो रही थी दिक्कत इस मार्ग के बाधित रहने से कई ट्रेनों को बदले मार्ग से चलाया जा रहा था। वहीं पुलिया में दरार की सूचना के बाद कुछ ट्रेनों को आंशिक समापन के जरिए भी चलाया गया था। इससे इस रूट में सफर करने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना भी करना पड़ा रहा था। रेलवे ने की थी वैकल्पिक व्यवस्था वहीं, रेलवे ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नई दिल्ली-रांची राजधानी एक्सप्रेस तय मार्ग टोरी-लोहरदगा-रांची के स्थान पर टोरी-बरकाकाना-मेसरा-टाटीसिलवे-रांची होकर चल रही थी। रांची-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस के अलावा रांची-चोपन-रांची एक्सप्रेस, सासाराम-रांची-सासाराम एक्सप्रेस व अजमेर-सांतरागाछी-अजमेर एक्सप्रेस भी परिवर्तित मार्ग से चल रही थी। आस-पास के इलाकों के लिए है लाइफलाइन बता दें कि रांची-लोहरदगा-टोरी रेलखंड लोहरदगा और आसपास के इलाकों के लिए लाइफलाइन माना जाता है। पुलिया में दरार की वजह से इस मार्ग से जनवरी से परिचालन ठप था। इस रूट पर चलने वाली लोहरदगा-रांची और रांची-लोहरदगा मेमू पैसेंजर ट्रेनों से हर दिन लगभग आठ हजार यात्री सफर करते हैं। इसके अलावे सासाराम एक्सप्रेस और राजधानी का लाभ यात्रियों को मिलता है। ट्रेन परिचालन ठप होने के बाद इन यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अचानक ट्रेन रुकने की सूचना मिलते ही लोहरदगा स्टेशन और आसपास के इलाकों में यात्रियों के बीच हड़कंप मच गया। मजबूरी में लोग बसों और अन्य निजी वाहनों की ओर दौड़ पड़े, जिससे बस स्टैंड और सड़कों पर भीड़ उमड़ पड़ी। लोहरदगा रेलवे स्टेशन पर सन्नाटा पसर गया।

झारखंड में 103 प्रशासनिक पदों पर भर्ती के लिए जेपीएससी ने जारी किया नोटिस जानें परीक्षा का नया शेड्यूल

 झारखंड झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) ने स्टेट पीसीएस प्रीलिम्स परीक्षा 2026 की नई तारीख घोषित कर दी है. इस परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले हजारों उम्मीदवार काफी समय से एग्जाम डेट (JPSC Pre Exam Date) का इंतजार कर रहे थे. अब उनका इंतजार खत्म हो गया है. आयोग की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक JPSC प्रीलिम्स परीक्षा अब 19 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी. इससे पहले परीक्षा की तारीख 12 अप्रैल तय की गई थी, लेकिन बाद में इसे बदलकर नई तारीख घोषित कर दी गई. JPSC Pre Exam से 103 पदों पर होगी भर्ती इस भर्ती अभियान के जरिए झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 103 पदों को भरा जाएगा. इसमें कई अहम प्रशासनिक पद शामिल हैं. डिप्टी कलेक्टर के 28 पद, डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस यानी DSP के 42 पद और डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर के 2 पद शामिल हैं. इसके अलावा असिस्टेंट रजिस्ट्रार के 2 पद, असिस्टेंट म्यूनिसिपल कमिश्नर या एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के 10 पद और जेल सुपरिटेंडेंट के 2 पद भी इस भर्ती में शामिल हैं. साथ ही असिस्टेंट डायरेक्टर-कम-डिस्ट्रिक्ट पब्लिक रिलेशन ऑफिसर के 10 पद, प्रोबेशन ऑफिसर के 4 पद और असिस्टेंट डायरेक्टर के 3 पद भी भरे जाएंगे. चयन प्रक्रिया JPSC PCS भर्ती प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है. सबसे पहले उम्मीदवारों को प्रीलिम्स परीक्षा देनी होती है. जो उम्मीदवार इस चरण में सफल होते हैं, उन्हें मेन्स परीक्षा के लिए बुलाया जाता है. इसके बाद मेन्स में सफल उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है. इन तीनों चरणों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवारों का फाइनल सेलेक्शन किया जाता है. इसके बाद उन्हें झारखंड राज्य की अलग-अलग प्रशासनिक सेवाओं में नियुक्ति दी जाती है.

राजधानी रांची में पीएनजी सप्लाई की रफ्तार हुई धीमी 78 हजार घरों में ढांचा तैयार पर हजारों उपभोक्ता अब भी परेशान

रांची झारखंड की राजधानी रांची के कई इलाकों में पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) की पाइपलाइन बिछ चुकी है, लेकिन हजारों उपभोक्ता आज भी कनेक्शन के इंतजार में हैं. कहीं तकनीकी बाधाएं हैं, तो कहीं मैनपावर की कमी है. शहर में अब तक लगभग 78,000 घरों के लिए घरेलू पीएनजी (डीपीएनजी) का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो चुका है. इनमें से कुल 54,000 घरों में पीएनजी पहुंचाना अभी बाकी है. अलग-अलग विभागों से अनुमति नहीं मिलने के कारण गैस पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं. कई घरों के किचन में पाइपलाइन लग चुकी है, लेकिन गैस सप्लाई नहीं होने से कनेक्शन चालू नहीं हो पा रहा है. किचन तक पहुंची पाइपलाइन, पर गैस नहीं रांची के सुरेंद्रनाथ सेंटेनरी स्कूल के सामने हेरिटेज गार्डन निवासी कुमुद झा बताती हैं कि तीन साल से अधिक समय हो गए हैं. किचन तक पाइपलाइन लग चुकी है. मुख्य सड़कों तक भी पाइपलाइन बिछ गई है, लेकिन अब तक गैस सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है. 24,000 घरों में गैस आपूर्ति शुरू खबर यह भी है कि पेट्रोलियम कंपनी गेल ने रांची शहर में लगभग 24,000 घरों तक गैस आपूर्ति शुरू कर दी है. इनमें लगभग 18,000 उपभोक्ता ही पीएनजी का नियमित इस्तेमाल कर रहे हैं. वहीं, 6,000 घरों में उपभोक्ताओं ने अब तक पीएनजी चालू नहीं कराया है. इनमें कई लोग किरायेदार हैं, तो कई लोग इन घरों में नहीं रह रहे हैं. रोजाना दिए जा रहे 60-75 घरेलू पीएनजी कनेक्शन इस समय रांची में रोजाना औसतन लगभग 60-75 घरेलू पीएनजी कनेक्शन दिए जा रहे हैं. पिछले 15 दिनों में लगभग 900 घरेलू पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं. वहीं, हर दिन औसतन लगभग 100 नए उपभोक्ता रजिस्ट्रेशन और सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा कर रहे हैं. कनेक्शन देने के लिए 20 एजेंसियों को लगाया गया है, लेकिन काम की गति धीमी है. इनसे हर दिन लगभग 60-75 कनेक्शन हो पा रहे हैं, जबकि लक्ष्य हर दिन 200-300 कनेक्शन देने का है. इसके लिए लगभग 150 लोगों की जरूरत है. सेल सिटी में 1808 फ्लैट, लेकिन पीएनजी कनेक्शन नहीं रांची की सेल सिटी में रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटी है. यहां कुल 1808 फ्लैट हैं, लेकिन अब तक पीएनजी कनेक्शन की सुविधा नहीं है. इसी तरह बोड़ेया रोड स्थित बैंक कॉलोनी के एसोटेक हिल्स के कई फ्लैटों में भी यह सुविधा शुरू नहीं हुई है. इन इलाकों में अधूरा है पीएनजी कनेक्शन रांची में पुलिस लाइन कांके, लालपुर, टाटीसिल्वे, किशोरगंज, कांटाटोली से बूटी मोड़ रोड, बोड़ेया रोड सहित कई इलाकों में पीएनजी कनेक्शन अधूरा है. इन इलाकों में पीएनजी चालू होने से कनेक्शन की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो सकती है. कई क्षेत्रों में पीएनजी नेटवर्क चार्ज गेल अधिकारियों ने बताया कि रांची के कई क्षेत्रों में पीएनजी नेटवर्क चार्ज किया जा चुका है. इनमें बरियातू, हरमू, अशोक नगर, मेकन कॉलोनी, अरगोड़ा, पुंदाग, हटिया, धुर्वा, तुपुदाना, पटेल नगर, प्रेम नगर, दिनकर नगर, नामकुम, अमेठिया नगर, खेलगांव, टाटीसिल्वे, चायबागान, काली नगर, खरसीदाग और कांके शामिल हैं. लालपुर क्षेत्र के कुछ हिस्सों में भी गैस आपूर्ति शुरू हो चुकी है. बाकी क्षेत्रों में कार्य प्रगति पर है. कटहल मोड़ से अरगोड़ा तक, चेशायर होम रोड में कई अपार्टमेंट हैं. किरायेदार होने या अपार्टमेंट खाली होने के कारण कनेक्शन नहीं हो पा रहा है, जबकि इन इलाकों में पीएनजी सप्लाई चालू है. रजिस्ट्रेशन के समय सिक्योरिटी डिपॉजिट जरूरी घरेलू पीएनजी कनेक्शन का रजिस्ट्रेशन कराते समय केवल 500 रुपये या 4500 रुपये (विभिन्न योजनाओं के अनुसार) का सिक्योरिटी डिपॉजिट देना होता है. यह भुगतान ऑनलाइन, पीओएस मशीन या चेक से किया जा सकता है. गेल नकद भुगतान स्वीकार नहीं करता है. यदि कोई नकद मांग करता है, तो उपभोक्ता टोल फ्री नंबर 1800123121111 पर संपर्क कर सकते हैं. कई क्षेत्रों में पाइपलाइन के लिए अनुमति मिली गेल को फिरायालाल चौक, सुजाता चौक से सिरमटोली होते हुए स्टेशन रोड, जेल मोड़ से लालपुर चौक तक और करमटोली चौक से जेल मोड़ तक पाइपलाइन बिछाने की पथ निर्माण विभाग से अनुमति मिली है. इस क्षेत्र में काम होने से 10 हजार से अधिक लोगों को कनेक्शन मिल सकेगा. रातू रोड तक पीएनजी पहुंच चुका है, लेकिन बजरा, पिस्का मोड़, पंडरा और कमड़े तक पाइपलाइन पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं. गेल झिरी रिंग रोड के पीछे-पीछे पाइपलाइन बिछाने पर विचार कर रहा है.