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20 फरवरी के बाद झारखंड में ‘मई जैसी’ तपिश, पारा 34°C तक चढ़ने का अनुमान

रांची झारखंड में अब मौसम तेजी से बदल रहा है। दिन में तेज धूप लोगों को परेशान कर रही है, तो शाम होते ही ठंड का अहसास होने लगता है। राज्य के कई जिलों में दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर देखा जा रहा है, जिससे लोगों को सेहत को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। तापमान 30 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान झारखंड में धीरे-धीरे गर्मी बढ़ने लगी है। खासकर दोपहर के समय कड़ी धूप निकल रही है, जिससे गर्मी महसूस हो रही है, लेकिन जैसे ही शाम होती है, मौसम अचानक ठंडा हो जाता है। कई जगहों पर तो लोगों को सुबह-शाम अब भी स्वेटर पहनना पड़ रहा है। रांची, खूंटी, लोहरदगा, पलामू और राज्य के मध्य व पश्चिमी हिस्सों में ऐसा मौसम ज्यादा देखने को मिल रहा है। उत्तर-पूर्वी झारखंड के देवघर, धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में तापमान में हल्की बढ़ोतरी हो रही है। इन इलाकों में अधिकतम तापमान 30 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। गोड्डा और पाकुड़ में 20 फरवरी तक तापमान 34 डिग्री तक पहुंच सकता है। वहीं, न्यूनतम तापमान 12 से 16 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। सुबह के समय हल्का कुहासा छाए रहने की संभावना है, जिससे दृश्यता पर असर पड़ सकता है। उत्तर-पश्चिमी जिलों में दिन-रात के तापमान में बड़ा अंतर पलामू, कोडरमा, गढ़वा, लातेहार और लोहरदगा में दिन का तापमान 30 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। जबकि रात में तापमान 10 से 12 डिग्री तक गिर सकता है। दिन और रात के तापमान में ज्यादा अंतर होने के कारण लोगों को सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इस बदलाव से सर्दी-जुकाम या अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। दक्षिणी जिलों में गर्मी का असर ज्यादा जमशेदपुर, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस या उससे थोड़ा ज्यादा रह सकता है। यहां के लोगों को अभी से गर्मी का एहसास होने लगा है। हालांकि शाम के समय हल्की ठंड राहत दे रही है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दो-तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ोतरी हो सकती है।  

संवेदनशील फैसला: हाथियों के झुंड के कारण रोकी गईं 6 ट्रेनें, बड़ा हादसा टला

चक्रधरपुर हावड़ा–मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर रेलवे ने एक सराहनीय कदम उठाते हुए हाथियों की जान बचाने के लिए देर रात ट्रेनों का परिचालन रोक दिया। चक्रधरपुर रेल मंडल की सतर्कता से एक हाथी के बच्चे समेत पूरे झुंड को सुरक्षित जंगल की ओर जाने का मौका मिला। मंगलवार देर रात चक्रधरपुर रेल मंडल ने बड़ा और संवेदनशील फैसला लेते हुए हावड़ा–मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर ट्रेनों का परिचालन करीब आधे घंटे के लिए पूरी तरह रोक दिया। जानकारी के अनुसार, भालूलता–जरायकेला रेलखंड के महपानी गेट (किमी 389/5-7) के पास रेलवे ट्रैक पर पांच हाथियों का झुंड घूमता हुआ देखा गया। इस झुंड में एक छोटा बच्चा भी शामिल था। रात करीब 2:50 बजे ट्रैक पर हाथियों की सूचना मिलते ही रेलवे ने तुरंत कार्रवाई की। मुंबई मेल, हावड़ा मेल, बिलासपुर–टाटानगर एक्सप्रेस समेत छह मालगाड़ियों को रोक दिया गया। इससे किसी भी बड़े हादसे को टाल दिया गया। पेट्रोलमैन की सतर्कता से बची जान रेल मंडल के एलीफेंट जोन में तैनात कोल्ड वेदर ट्रैक पेट्रोलमैन नियमित गश्त पर थे। गश्त के दौरान उन्होंने ट्रैक पर हाथियों को देखा और तुरंत वरीय अनुभाग अभियंता को सूचना दी। सूचना मिलते ही ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया। पेट्रोलमैन की सतर्कता के कारण हाथियों, खासकर बच्चे की जान बच सकी। हालांकि अचानक ट्रैक पर हाथियों के आने से ट्रैकमेंटनर, गेटमैन और की-मैन में डर का माहौल है। रेलकर्मियों ने रात में ड्यूटी के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है। चार घंटे तक धीमी रफ्तार से चली ट्रेनें हाथियों के ट्रैक से हटने के बाद भी एहतियात के तौर पर रेलवे ने कॉशन ऑर्डर जारी किया। रात 12:20 बजे से सुबह 4:00 बजे तक इस रेलखंड पर सभी ट्रेनों को 20 किमी प्रति घंटे की धीमी रफ्तार से चलाया गया। लोको पायलट लगातार हॉर्न बजाते हुए और सतर्क नजर रखते हुए ट्रेनें चलाते रहे। हाथियों की मौजूदगी के कारण महपानी गेट को रात में बंद कर दिया गया, जिससे सड़क यातायात भी प्रभावित रहा। गेट पर तैनात रेलकर्मी भी सुरक्षित स्थानों पर चले गए। सुबह होते-होते हाथियों का झुंड पास के जंगल में चला गया। रेलवे की इस मानवीय पहल की स्थानीय लोगों ने सराहना की है। यह घटना दिखाती है कि रेल परिचालन और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है।  

रेलवे कर्मचारी की बेरहमी से हत्या: छुट्टी पर घर लौटते ही बदमाशों ने बरसाईं गोलियां

रांची बिहार में अपराधियों के बढ़ते मनोबल ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा मामला लखीसराय जिले के पीरी बाजार थाना अंतर्गत घोंघी गांव का है, जहां बुधवार शाम बेखौफ बदमाशों ने रेलवे के एक कर्मचारी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल व्याप्त है। छुट्टी पर गांव आए रेलकर्मी को बनाया निशाना मृतक की पहचान 35 वर्षीय संतोष कुमार के रूप में हुई है, जो पश्चिम बंगाल के अंडाल में रेलवे ग्रुप डी विभाग में कार्यरत थे। संतोष इन दिनों छुट्टी लेकर अपने गांव आए हुए थे। घटना के समय वे अपने खेत में सरसों की फसल की कटाई की देखरेख कर रहे थे। इसी बीच घात लगाए अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। अस्पताल ले जाते समय तोड़ा दम परिजनों और ग्रामीणों ने लहूलुहान स्थिति में संतोष को तुरंत सदर अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन घाव गहरे होने के कारण उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। हत्या को अंजाम देने के बाद अपराधी मौके से फरार होने में सफल रहे।    

BPSC TRE-4 शिक्षक भर्ती 2026 में आवेदन से पहले रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

पटना. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने चौथी चरण की शिक्षक भर्ती TRE-4 2026 का कार्यक्रम घोषित कर दिया है, जिसमें कुल 46,595 रिक्तियों पर शिक्षकों की बहाली की योजना है। यह भर्ती कक्षा 1 से 12वीं तक के सरकारी स्कूलों में शिक्षक पदों के लिए होगी। बीपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर परीक्षा का शेड्यूल भी जारी किया गया है। परीक्षा 22 से 27 सितंबर 2026 के बीच आयोजित होने की संभावना है। आधिकारिक नोटिफिकेशन जल्द जारी होगा, जिसके बाद आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। वेदन से पहले उम्मीदवारों के लिए रजिस्ट्रेशन पोर्टल खोला जाएगा। आवेदन से पहले रजिस्ट्रेशन अनिवार्य बीपीएससी ने इस बार आवेदन प्रक्रिया में एक अहम बदलाव किया है। आवेदन करने से पहले अभ्यर्थियों को आयोग के रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद ही वे मुख्य आवेदन फॉर्म भर पाएंगे। इस बदलाव का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को और सुव्यवस्थित करना है। पिछली भर्तियों की तरह इस बार भी लाखों उम्मीदवारों के आवेदन करने की उम्मीद है। उम्मीदवारों को सलाह दी जा रही है कि वे सभी डाक्यूमेंट तैयार रखें। तीन प्रमुख बदलाव भर्ती प्रक्रिया में बीपीएससी TRE-4 में इस बार तीन महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पहला बदलाव यह है कि डोमिसाइल नीति लागू की जाएगी, जिसमें अधिकांश सीटें बिहार के मूल निवासियों के लिए आरक्षित होंगी। दूसरा बदलाव-महिलाओं को 35% आरक्षण मिलेगा, जो राज्य के मूल निवासियों के हित में है। तीसरा और बड़ा बदलाव यह है कि एक अभ्यर्थी को सिर्फ एक ही रिजल्ट मिलेगा। इसका मतलब है कि एक उम्मीदवार को एक से अधिक पदों के लिए अलग-अलग मेरिट सूची में नाम नहीं मिलेगा। यह नया नियम लंबे समय से चर्चा में रहा है और उम्मीदवारों को एक साफ-सुथरा रिजल्ट देगा। परीक्षा तिथि और कार्यक्रम बीपीएससी TRE-4 परीक्षा 22 से 27 सितंबर 2026 तक आयोजित होने की घोषणा कर दी गई है। इस परीक्षा में प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक शिक्षक पदों का चयन होगा। परीक्षा के बाद परिणाम नवंबर 2026 में जारी होने के संकेत हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक नोटिफिकेशन और पात्रता नियमों का ध्यानपूर्वक पालन करें। आवेदन प्रक्रिया के फॉर्म और तिथियों की घोषणा आयोग की वेबसाइट पर अपडेट होगी। आधिकारिक नोटिफिकेशन के बाद ही आवेदन शुल्क, आयु सीमा और परीक्षा पैटर्न भी स्पष्ट होंगे। लाखों युवाओं के लिए सुनहरा अवसर TRE-4 भर्ती बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को काफी हद तक पूरा करने में मदद करेगी। पिछले तीन चरणों में पहले से लाखों शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है। इस भर्ती के माध्यम से करोड़ों युवा अपने सपने की सरकारी नौकरी पा सकते हैं।

राज्यसभा सीट को लेकर चर्चाएं तेज, पवन सिंह का नाम आगे… क्या मुश्किल में उपेंद्र कुशवाहा?

पटना  राज्यसभा चुनाव की तारीख सामने आ गई है. अगले महीने 16 मार्च को चुनाव होंगे. 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव होने हैं. इस चुनाव से सदन में बीजेपी का आंकड़ा तो बढ़ेगा ही, साथ ही यह कई दिग्गजों का भविष्य भी तय करेगा. कई बड़े नेता नंबर के फेर में फंसकर सियासी रूप से पैदल हो सकते हैं. वहीं, कई नेताओं की लॉटरी भी लग सकती है. राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव की तारीख जारी होने के साथ ही सियासी गलियारों में कई चर्चित चेहरों के भविष्य को लेकर चर्चा अब होने लगी है. माना जा रहा है कि सबसे दिलचस्प बिहार का चुनाव रहने वाला है. क्योंकि यहां राज्यसभा की जिन 5 सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से 2 आरजेडी की सीटें हैं. मौजूदा नंबर के हिसाब से तेजस्वी यादव किसी को भेज नहीं पाएंगे.  पवन सिंह जाएंगे राज्यसभा! ऐसे में बीजेपी के खाते में 2 सीटें जा सकती हैं. राजनीतिक गलियारों में जो चर्चा है उसके मुताबिक नितिन नबीन विधायक बने रहेंगे. ऐसे में एक नाम जो रेस में है वो भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह का है. विधानसभा चुनाव के वक्त पवन सिंह ने खूब प्रचार किया था. इस दौरान माना गया था कि राज्यसभा की ही डील हुई थी. लटक सकता है उपेंद्र कुशवाहा का भविष्य आंकड़ों के हिसाब से जेडीयू अपने दोनों सदस्यों को फिर से रिपीट कर सकती है. क्योंकि हरिवंश नारायण सिंह का राज्यसभा में बड़ा कद है और रामनाथ ठाकुर मंत्री हैं. रही बात पांचवीं सीट की तो नंबर के हिसाब से चिराग पासवान का दावा बनेगा. लिहाजा उपेंद्र कुशवाहा का भविष्य लटक सकता है.  26 फरवरी से शुरू होगी राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया बता दें कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 26 फरवरी 2026 को शुरू होगी. नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 5 मार्च रखी गई है. नामांकनों की जांच 6 मार्च को होगी और उम्मीदवार 9 मार्च तक नाम वापस ले सकते हैं.

आज से रमजान की शुरुआत, मंत्री इरफान अंसारी ने झारखंड वासियों को दीं शुभकामनाएं

रांची  पवित्र माह-ए-रमजान की शुरुआत के अवसर पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने प्रदेशवासियों को हार्दिक मुबारकबाद दी है। उन्होंने राज्य में अमन-चैन, खुशहाली और तरक्की की दुआ की। मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि रमजान बरकत, रहमत और मगफिरत (माफी) का महीना है। इस महीने में लोग रोजा रखकर अपने देश, राज्य और परिवार की सलामती के लिए दुआ करते हैं। उन्होंने कहा कि रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह सब्र, परहेजगारी और खुद को बेहतर बनाने का संदेश देता है।मंत्री ने आगे कहा कि तरावीह की नमाज के जरिए लोग अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और सच्चे दिल से की गई दुआ जरूर कबूल होती है। रमजान को उन्होंने इम्तेहान का महीना बताया, लेकिन साथ ही कहा कि यह रहमतों और नेमतों से भरा हुआ समय भी है। मंत्री ने समाज के लोगों से अपील की कि इस पवित्र महीने में ज्यादा से ज्यादा जकात और खैरात दें तथा जरूरतमंदों की मदद करें, ताकि समाज में प्यार, भाईचारा और हमदर्दी बनी रहे। अंत में उन्होंने सभी प्रदेशवासियों को माह-ए-रमजान की दिली मुबारकबाद दी।

बिहार में राज्यसभा चुनाव की चुनौती: एनडीए का क्लीन स्वीप मुश्किल, राजनीतिक समीकरण ने बढ़ाई जटिलता

पटना बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव की घोषणा हो गई है. भारत निर्वाचन आय़ोग की तरफ से जारी शेड्यूल के अनुसार 10 राज्यों में होने वाले चुनाव के तहत बिहार की इन सीटों के लिए 26 फरवरी 2026 को अधिसूचना जारी होगी. मतदान 16 मार्च को कराया जाएगा. बता दें कि बिहार में जिन पांच सीटों पर चुनाव होना है, वे फिलहाल अमरेंद्र धारी सिंह (Amarendra Dhari Singh), प्रेम चंद गुप्ता (Prem Gupta), उपेन्द्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha), हरिवंश नारायण सिंह, (Harivansh Narayan Singh) और रामनाथ ठाकुर ( Ram Nath Thakur) के पास हैं . इन सदस्यों का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है . चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 5 मार्च तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे, 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 मार्च तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे . राज्यसभा चुनाव में संख्याबल की सियासत राजनीति के जानकारों की नजर में बिहार की इन पांच सीटों के लिए होने वाला चुनाव बिहार की सियासत में नई गणित और नई रणनीतियों को जन्म देगा. बता दें कि  आगामी 9 अप्रैल को मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, ऐसे में सभी दलों की नजर टिकट वितरण और संख्याबल की स्थिति पर टिकी है.  ऐसे देखना दिलचस्प होगा कि कौन दल अपने प्रत्याशियों को राज्यसभा भेजने में सफल रहता है. इसके सियासी गुणा-गणित पर हम बात करेंगे, लेकिन पहले आइए जानते हैं कि चुनाव के लिए महत्वपूर्ण तारीखें कौन -कौन सी हैं. चुनाव कार्यक्रम की प्रमुख तिथियां     अधिसूचना जारी होगी- 26 फरवरी 2026     नामांकन की अंतिम तिथि- 5 मार्च 2026     नामांकन पत्रों की जांच- 6 मार्च 2026     नाम वापस लेने की अंतिम तिथि-9 मार्च 2026     मतदान-16 मार्च 2026 सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक     मतगणना-16 मार्च 2026 शाम 5 बजे से     चुनाव प्रक्रिया पूर्ण- 20 मार्च 2026 एनडीए के भीतर फंसा सीट बंटवारे में पेच! बता दें कि बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए करीब 42 वोट की जरूरत है. 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को 202 सीटें मिली थीं. इसमें बीजेपी 89, जदयू 85, लोजपा रामविलास 19, हम 5 और आरएलएम 4 सीटों के साथ शामिल हैं . इस आंकड़े के आधार पर एनडीए आराम से चार सीटें जीत सकता है और पांचवीं पर भी मजबूत दावेदारी रखता है. लेकिन पेच यहीं से शुरू होता है. बीजेपी अब विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के पास भी बड़ी ताकत है. दोनों दल दो दो सीटों की मांग कर सकते हैं. जदयू से हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है. संख्या एनडीए के पास, बीजेपी बड़ी पार्टी दूसरी ओर बीजेपी अपनी बढ़ती ताकत के आधार पर ज्यादा हिस्सेदारी चाह सकती है. वहीं, छोटे दल भी दबाव में हैं. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के पास सीमित विधायक हैं, लेकिन वे अपनी सीट बचाना चाहेंगे. लोजपा रामविलास भी अपने 19 विधायकों के आधार पर एक सीट की मांग कर सकती है. ऐसे में सीट बंटवारा ही सबसे बड़ा राजनीतिक गणित बन गया है. क्या एक सीट भी बचा पाएगा विपक्ष? वहीं महागठबंधन की स्थिति कमजोर है. आरजेडी, कांग्रेस और वाम दल मिलाकर कुल 35 विधायक ही हैं. यह आंकड़ा एक सीट के लिए जरूरी कोटा से कम है. ऐसे में विपक्ष को या तो अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा या फिर क्रॉस वोटिंग की उम्मीद करनी होगी. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सामने राज्यसभा में अपनी मौजूदगी बचाने की चुनौती है . राज्यसभा चुनाव में कौन जीतेगा बाजी? कुल मिलाकर बिहार में राज्यसभा चुनाव का गणित एनडीए के पक्ष में है, लेकिन राजनीति का असली इम्तिहान गठबंधन के भीतर है . कौन कितनी सीट पाएगा, किसे दोबारा मौका मिलेगा और किसे इंतजार करना होगा, यह तय करेगा कि बहुमत की यह ताकत एकजुट रहती है या भीतर से खींचतान शुरू होती है. विपक्ष के लिए यह चुनाव अस्तित्व बचाने जैसा है, जबकि एनडीए के लिए संतुलन साधने की परीक्षा .

नीतीश द्विवेदी ने खुद का संगठन लॉन्च किया, 19 महीने में पूरे बिहार में करेंगे यात्रा

पटना  मुकेश सहनी के करीबी माने जाने वाले नीतीश कुमार द्विवेदी ने अब अपनी नई राह चुन ली है. उन्होंने ‘नौजवानों की आवाज’ नाम से एक सामाजिक संगठन बनाने की घोषणा की है. इसी के साथ उन्होंने युवाओं के मुद्दों पर सड़क पर उतरने का ऐलान किया है. पहली बैठक में तय हुई रूपरेखा नई संगठन की पहली बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार द्विवेदी ने की. इस दौरान संगठन के विस्तार और मजबूती पर चर्चा हुई. बैठक में चार अलग-अलग प्रकोष्ठ बनाने का फैसला लिया गया. इसका मकसद युवाओं से जुड़े मुद्दों पर व्यवस्थित तरीके से काम करना है. संगठन शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास जैसे विषयों पर फोकस करेगा. 19 महीने में करेंगे 38 जिलों की यात्रा नीतीश कुमार द्विवेदी ने घोषणा की कि वह बिहार के 38 जिलों में 19 महीने की यात्रा पर निकलेंगे. इस दौरान वे युवाओं से सीधे संवाद करेंगे. उनकी समस्याएं सुनेंगे और समाधान के लिए पहल करेंगे. उन्होंने कहा कि चुनाव के समय भी वह लगातार जनता के बीच रहे. करीब एक लाख लोगों से सीधे मुलाकात की. कई बार 10 दिन तक घर नहीं गए. जहां जगह मिली, वहीं रुक गए. पहले भी दिखा चुके हैं बागी तेवर नीतीश कुमार द्विवेदी विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के राष्ट्रीय सचिव रह चुके हैं. वह पहले भी पार्टी से बागी होकर महराजगंज से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं. अब वह अपने संगठन के जरिए युवाओं की आवाज बनने का दावा कर रहे हैं. युवाओं की बात प्रशासन तक पहुंचाने का दावा उन्होंने कहा कि उनकी टीम गांव-गांव और जिले-जिले जाएगी. युवाओं से सीधा फीडबैक लिया जाएगा. फिर संबंधित विभागों और प्रशासन तक उनकी बात पहुंचाई जाएगी. 

तेजस्वी यादव का बड़ा बयान: नीतीश कुमार पर साधा निशाना, कहा- बिहार को मिला ‘कठपुतली’ मुख्यमंत्री

पटना राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने मंगलवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 'अचेत' और 'कठपुतली' सीएम बताते हुए कहा कि यह बिहार का दुर्भाग्य है कि उसे ऐसा नेतृत्व मिला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज प्रदेश को मुख्यमंत्री नहीं बल्कि कुछ चुनिंदा भ्रष्ट अधिकारी चला रहे हैं। तेजस्वी यादव ने मंगलवार को जननायक कर्पूरी ठाकुर की पुण्यतिथि समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी कर्पूरी ठाकुर के अनुयायी हैं। हम सभी का फर्ज बनता है कि उनके सपनों को पूरा करें, लेकिन आज देश की स्थिति बदली हुई है। आज लोकतंत्र और संविधान को मिटाया जा रहा है, संवैधानिक संस्थाओं को समाप्त किया जा रहा है, और तानाशाही चरम पर है। ऐसे में हमारी लड़ाई का रास्ता इतना सरल नहीं है। उन्होंने राज्य में बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार पर सरकार को घेरते हुए कहा कि बिहार में विकास के नाम पर केवल जनता की आंखों में धूल झोंकी जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि पिछले 100 दिनों के शासन में बिहार में कितने नए कारखाने खुले और कितने युवाओं को रोजगार मिला। उन्होंने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को लेकर भी कहा कि क्या महिलाओं को 1.90 लाख रुपए मिल गए? उन्होंने राजद के कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि राजद कमजोर नहीं है, समय कमजोर है। तेजस्वी ने प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये पर कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में पुलिस और प्रशासन द्वारा राजद कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान मतदाताओं को डराने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि जब हम लोगों का समय आएगा तो ऐसे लोगों को जवाब दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पार्टी का जनाधार लगातार बढ़ रहा है और राजद का वोट शेयर 23-24 प्रतिशत से बढ़कर अब 40 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि होली के बाद बिहार के सभी जिलों में कार्यक्रम होगा और संगठन को विस्तार और मजबूत करने का कार्य किया जाएगा। यह कार्यक्रम अन्य राज्यों में भी चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजद को राष्ट्रीय पार्टी बनाने के लिए अन्य प्रदेशों में भी हमें मजबूत बनना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वे झुकने वाले नहीं हैं और हर अत्याचार के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे।

अमृत भारत स्टेशन योजना से बिहार में बदल रहा रेलवे का चेहरा

कटिहार. भारतीय रेलवे द्वारा शुरू की गई अमृत भारत स्टेशन योजना देशभर में रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण का नया अध्याय लिख रही है। इस संबंध में सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि एनएफ रेल अंतर्गत बिहार, असम सहित पूरे पूर्वोत्तर में जहां बड़े पैमाने पर स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है, वहीं बिहार के सीमावर्ती स्टेशन भी इस परिवर्तन यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं। रेल मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत चयनित स्टेशनों के लिए विस्तृत मास्टर प्लान तैयार कर चरणबद्ध तरीके से यात्री सुविधाओं और आधारभूत संरचना का विकास किया जा रहा है। स्टेशन पहुंच मार्ग, सर्कुलेटिंग एरिया, आधुनिक प्रतीक्षालय, स्वच्छ शौचालय, लिफ्ट-एस्केलेटर, फ्री वाई-फाई, अत्याधुनिक यात्री सूचना प्रणाली और आकर्षक स्टेशन भवन इसके प्रमुख घटक हैं। वन स्टेशन वन प्रोडक्ट कियोस्क के माध्यम से स्थानीय उत्पादों और उद्यमिता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। पूर्वोत्तर में 60 स्टेशनों के पुनर्विकास का कार्य जारी है, जिनमें असम के 50 स्टेशन शामिल हैं। हैवर गांव रेलवे स्टेशन असम का पहला अमृत भारत स्टेशन बनकर आधुनिक सुविधाओं और असमिया विरासत के समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत कर चुका है। इसी कड़ी में बिहार के कटिहार और किशनगंज सहित अन्य रेलवे स्टेशन को भी अमृत भारत योजना के तहत विकसित किया जा रहा है। सीमावर्ती और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ये दोनों स्टेशन पूर्वोत्तर और बिहार को जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। इनके पुनर्विकास से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा स्थानीय व्यापार, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को नया आयाम मिलेगा। अमृत भारत स्टेशन योजना न केवल रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बना रही है, बल्कि स्टेशनों को सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों के सशक्त केंद्र के रूप में भी स्थापित कर रही है। बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाओं के साथ यह पहल असम, पूर्वोत्तर और बिहार में विकास की नई रफ्तार का प्रतीक बनती जा रही है। जो अत्याधुनिक तकनीकों और सुख सुविधाओं से सज्जित होगा। जिससे यात्रियों को रेलवे स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसा सुखद अनुभव मिलेगी।