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तेजस्वी की उम्मीदों पर पानी फेरने को तैयार कांग्रेस? बिहार की राजनीति में बढ़ा तनाव

पटना सारा श्रृंगार किया पर ‘घेघा’ बिगाड़ दिया…बिहार के ग्रामीण अंचलों में ये कहावत काफी लोकप्रिय है. इसका उपयोग वैसे संदर्भों में किया जाता है जब ‘अज्ञानता वश’ किसी के पूरे परिश्रम पर पानी फिर जाता है. बिहार चुनाव के संदर्भ में क्या महागठबंधन के साथ यही कुछ होने जा रहा है? दरअसल, वोट चोरी और बिहार एसआईआर के मुद्दे पर जिस तरह से राहुल गांधी ने आक्रामक रूप दिखाया और एनडीए सरकार के विरुद्ध तमाम माहौल बनाया, क्या यह बिहार में फलीभूत होता हुआ दिख रहा है? 16 अगस्त से लेकर 3 सितंबर तक राहुल गांधी ने बिहार की यात्रा भी की, तेजस्वी यादव को भी साथ लिया और पूरी आक्रामकता से जदयू-भाजपा सरकार पर जोरदार प्रहार भी किए, लेकिन इसका परिणाम क्या हुआ? टाइम्स नाउ और जेवीसी की ताजा चुनावी सर्वे रिपोर्ट इसकी परतें खोलती है जो कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है! कांग्रेस की सियासी जमीन और खिसकी दरअसल कांग्रेस ने बिहार में कांग्रेस की मिट्टी पलीद हो जाने की तस्वीर इस सर्वे में दिखाई गई है. खास बात यह कि बीते 2020 के चुनाव से भी बदतर नतीजे कांग्रेस के लिए इस ताजा सर्वे में दिखाए जा रहे हैं. सर्वेक्षण से पता चलता है कि कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का ‘वोट चुराने’ का अभियान मतदाताओं को रास नहीं आया है और 52 प्रतिशत लोगों ने विशेष जांच के आरोपों को निराधार बता दिया है. खास बात तो यह है कि सीटों के आंकड़े ऐसे हैं जो कांग्रेस की सियासी जमीन ही उसके पैरों तले से खिसका देने वाली है. नीतीश-तेजस्वी की टक्कर में कांग्रेस गुम! बता दें कि बिहार चुनाव 2025 जनमत सर्वेक्षण में जेवीसी पोल के अनुसार, इस साल नवंबर में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में जनता दल (यूनाइटेड) को 53 सीटें मिलने की उम्मीद है. दूसरी ओर, भाजपा को 71 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि राजद को 74 सीटें मिलने की उम्मीद है. यानी राजद और भाजपा बराबरी की टक्कर में है और पिछले चुनाव की तुलना में जदयू भी बढ़ता हुआ दिख रहा है और 10 सीटें अधिक आने का अनुमान है. लेकिन, सवाल कांग्रेस को लेकर है कि आखिर देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी का बिहार में क्या होने वाला है? सर्वे की बड़ी तस्वीर, कांग्रेस की कमजोर नींव बता दें कि ओपिनियन पोल में सीटों की संख्या के मामले में एनडीए महागठबंधन पर मज़बूत बढ़त बनाए हुए है. जेवीसी पोल के अनुसार, एनडीए को 131-150 सीटें मिलने की उम्मीद है, जिसमें भाजपा को 66-77 सीटें, जेडी(यू) को 52-58 सीटें और एनडीए के अन्य सहयोगियों को 13-15 सीटें मिल सकती हैं. वहीं, सर्वेक्षण में महागठबंधन के लिए अनुमान लगाया गया है कि राजद को 57-71 सीटें मिल सकती हैं, उसके बाद कांग्रेस को 11-14 सीटें और अन्य को 13-18 सीटें मिल सकती हैं. इस तरह विपक्षी गठबंधन की कुल सीटों की संख्या 81-103 हो जाती है. सीएम फेस की रेस में तेजस्वी से आगे नीतीश प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को 4-6 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि एआईएमआईएम, बसपा और अन्य को 5-6 सीटें मिलने का अनुमान है. सर्वेक्षण की सबसे खास बात यह है कि ये ओपिनियन पोल नीतीश कुमार और उनकी पार्टी के लिए सकारात्मक संदेश दे रहे हैं. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी पार्टी और बिहार में अपना जनाधार खोने की अफवाहों के विपरीत, बिहार चुनाव से पहले एक नए सर्वेक्षण से पता चलता है कि जेडीयू को 2020 की तुलना में अधिक सीटें मिलने की संभावना है. नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे पसंदीदा नेता बनकर उभरे हैं. चुनावी समीकरण और वोट शेयर का गणित जेवीसी पोल के अनुसार, इस साल नवंबर में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में जनता दल (यूनाइटेड) को 53 सीटें मिलने की उम्मीद है। यह 2020 की तुलना में दस सीटें ज़्यादा है और इस साल अगस्त में किए गए सर्वेक्षण के अपने अनुमान से लगभग दोगुनी है. पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा और राजद ने क्रमशः 74 और 75 सीटें जीती थीं. वोट शेयर की बात करें तो एनडीए को 41-45 प्रतिशत वोट मिलने की उम्मीद है, जबकि महागठबंधन को 37-40 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है. बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर का एक्स-फैक्टर जेवीसी सर्वे के अनुसार, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी, जिसे कई लोग आगामी चुनावों में ‘एक्स-फैक्टर’ मानते हैं, 10-11 प्रतिशत वोट शेयर के साथ अच्छा प्रदर्शन कर सकती है. दूसरी ओर, कांग्रेस को एक और झटका लग सकता है. मुख्यमंत्री के सवाल पर, अधिकांश उत्तरदाताओं ने नीतीश को प्राथमिकता दी, 27 प्रतिशत ने उन्हें वोट दिया. राजद के तेजस्वी यादव 25 प्रतिशत वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे. इसके बाद प्रशांत किशोर (15%), चिराग पासवान (11%) और सम्राट चौधरी (8 प्रतिशत वोट) हैं. राहुल की रणनीति पर सवाल, तेजस्वी की टेंशन राहुल गांधी ने वोट चोरी और एसआईआर मुद्दे पर जमकर आक्रामकता दिखाई, लंबा दौरा किया, तेजस्वी यादव को साथ लिया और एनडीए सरकार को घेरा भी. लेकिन, सर्वे बताता है कि मतदाताओं को यह रणनीति रास नहीं आई. उल्टे, कांग्रेस की सियासी ज़मीन और खिसकती दिख रही है. राहुल गांधी की रणनीति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. सवाल यह भी कि क्या बिहार के चुनावी रण में कांग्रेस फिर वही गलती दोहराने जा रही है जो राजद और तेजस्वी यादव के लिए सेटबैक साबित होने जा रही है. जाहिर है बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर आए ताज़ा जेवीसी सर्वे ने कांग्रेस की चिंता और गहरी कर दी है.  

मोदी सरकार का फैसला: बिहार में शिक्षा को बढ़ावा, 19 नए केंद्रीय विद्यालय शुरू होंगे

पटना विधानसभा चुनाव 2025 से पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बिहार के लिए बड़ा फैसला लिया है। मोदी कैबिनेट से राज्य में 19 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने की मंजूरी मिल गई है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित ये स्कूल बिहार के 16 जिलों के विभिन्न क्षेत्रों में खोले जाएंगे। इनमें पटना, गयाजी, मुजफ्फरपुर, मुंगेर, दरभंगा, मधुबनी समेत अन्य जिले शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में बुधवार को देश भर में कुल 57 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने की मंजूरी दी गई। इसके लिए 5862 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इनमें से 19 विद्यालय बिहार में खोले जाएंगे। सरकार का कहना है कि अभी कुल 1288 केवी संचालित किए जा रहे हैं, इनमें से 3 विदेश में स्थित हैं, बाकी देश के विभिन्न राज्यों में मौजूद हैं। इन स्कूलों में 13 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। बिहार में इन जगहों पर खुलेंगे केंद्रीय विद्यालय     एसएसबी 20वीं बटालियन, पकटोला, सीतामढ़ी     आईटीबीपी कटिहार     कैमूर     झंझारपुर     मधुबनी     शेखोपुरसराय, शेखपुरा     जमौरा एवं कटनीकोल, शेखपुरा     मधेपुरा     वालमी, पटना     अरवल     पूर्णिया     आरा, भोजपुर     बेला इंडस्ट्रियल एरिया, मुजफ्फरपुर     दीघा, पटना     दरभंगा- नंबर 3     भागलपुर टाउन     बिहारशरीफ शहर     बोधगया गयाजी से सांसद एवं केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि महानवमी के दिन एक और खुशखबरी आई है। पीएम मोदी के सहयोग से बोधगया में केंद्रीय विद्यालय खुलने की दिशा में हमारा प्रयास सफल हो गया है।

सारंडा मामले में सरयू राय ने झारखंड सरकार के ढुलमुल रवैए पर लगाए गंभीर सवाल

रांची झारखंड के जमशेदपुर पश्चिम से विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय ने सारंडा वन क्षेत्र को वन्य जीव अभयारण्य घोषित करने के मामले में राज्य सरकार की टालमटोल रवैया पर गंभीर सवाल खड़े किए है। राय ने रांची के प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सारंडा सैंक्चुअरी घोषित करने के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने 17 सितम्बर को एक कड़ा आदेश जारी किया है और कहा है कि झारखण्ड सरकार 07 अक्टूबर, 2025 तक सारंडा वन्यजीव अभयारण्य घोषित करे अन्यथा राज्य के मुख्य सचिव जेल जाने के लिए तैयार रहे। सरयू राय ने कहा कि इसके पूर्व गत 29 अप्रैल, 2025 को झारखंड सरकार के वन पर्यावरण विभाग के सचिव ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष सशरीर उपस्थित हुए थे, अभयारण्य घोषित होने में देरी के लिए क्षमा याचना किया था और कहा था कि झारखण्ड सरकार 57,519.41 हेक्टेयर क्षेत्र में अभयारण्य घोषित करेगी और 13603,80 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को ससंगदा बुरू संरक्षण रिजर्व के रूप में अधिसूचित करेगी। परंतु सरकार ने यह वादा पूरा नहीं किया। ज्ञातव्य है कि बिहार सरकार ने 06 फरवरी, 1969 को सारंडा वन क्षेत्र के 314.68 वर्ग किलोमीटर इलाके को गेम सैंक्चुअरी घोषित किया था, जिसका उल्लेख सारंडा वन प्रमंडल के वर्किंग प्लान 1976 में है। उन्होंने कहा कि मैंने इस बारे में विधानसभा में 02 मार्च 2021 को प्रश्न पूछा था, जिसके उत्तर में सरकार ने कहा था कि बिहार सरकार की यह अधिसूचना सरकार के पास उपलब्ध नहीं है। वहीं राय ने बताया कि झारखण्ड सरकार की एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति सारण्डा वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने के विभिन्न पहलुओं पर अध्ययन करने के लिए सारण्डा गया है। उप समिति द्वारा मंत्रिपरिषद को दिये गये परामर्श के अनुसार ही सरकार सर्वोच्च न्यायालय में आगामी 08 अक्टूबर, 2025 को अपना पक्ष रखेगी। राय ने कहा कि सारंडा वन क्षेत्र में खनन का इतिहास काफी पुराना है। सबसे पहले बोनाई आयरन कंपनी को घाटकुरी क्षेत्र में 06 दिसम्बर, 1909 को 249.60 और 281.60 एकड़ में आयरन ओर खनन का लीज दिया गया था। इसी तरह 08 दिसम्बर, 1915 तक अंकुवा और घाटकुरी इलाका में इस कंपनी को कुल 2706.16 एकड़ क्षेत्र में आयरन ओर और मैंगनींज के खनन का लीज दिया था। इसके बाद में सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र की कतिपय कंपनियों को मिलाकर स्वतंत्रता के पूर्व 11,886 एकड़ अर्थात 4,831.71 हेक्टेयर क्षेत्र में लीज दिया गया था। राय ने बताया कि स्वतंत्रता के उपरांत सार्वजनिक क्षेत्र की कुल 12 कंपनियों को कुल 6,633.30 हेक्टेयर में और निजी क्षेत्र की कुल 30 कंपनियों को 3132.18 हेक्टेयर क्षेत्र में लीज दिया गया था। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक क्षेत्र की दो कंपनियों को 115.46 हेक्टेयर में और निजी क्षेत्र की 5 कंपनियों को 5,128.20 हेक्टेयर क्षेत्र में आयरन ओर और मैंगनींज के खनन का प्रोस्पेक्टिंग लीज दिया गया। वर्ष 2006 के बाद मधु कोड़ा की सरकार में सारंडा क्षेत्र में खनन लीज लेने वालों की बाढ़ आ गई। करीब 65,679.40 हेक्टेयर में माईिंनग लीज के आवेदन आये। इसमें प्राय: सभी आवेदन निजी क्षेत्र की कंपनियों का था। उल्लेखनीय है कि सारण्डा सघन वन का कुल क्षेत्रफल करीब 85,712 हेक्टेयर है।  

राजनीति और प्रशासन में नई एंट्री: झारखंड की निर्वाचन आयुक्त बनी IAS अलका तिवारी

रांची 1988 बैच की आइएएस अधिकारी अलका तिवारी को राज्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया गया है। वह 30 सितंबर को मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुईं हैं। उनका कार्यकाल चार वर्षों तक रहेगा। उनकी नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है।  इस खबर को लगातार अपडेट किया जा रहा है। हम अपने सभी पाठकों को पल पल की खबरों से अपडेट करते हैं। हम लेटेस्ट और ब्रेकिंग न्यूज को तुरंत ही आप तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रारंभिक रूप से प्राप्त जानकारी के माध्यम से हम इस समाचार को निरंतर अपडेट कर रहे हैं। ताजा ब्रेकिंग न्यूज़ और अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए जागरण के साथ।

बिहार में रबी सीजन की शुरुआत, सीएम नीतीश ने किसान जागरूकता वाहनों को हरी झंडी दिखाई

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को वासंतिक (रबी) महाभियान का शुभारंभ किया। सीएम नीतीश कुमार ने आज एक अणे मार्ग से वासंतिक (रबी) महाभियान (2025 – 26 ) का शुभारंभ किया। उन्होंने इस अवसर पर किसान जागरुकता वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सभी 38 जिलों के लिए एल.ई.डी युक्त प्रचार वाहनों को सभी पंचायतों में किसानों को जागरूक करने के लिए रवाना किया गया। रबी – 2025 की सफलता के लिये रबी महाभियान की शुरूआत की जा रही है। कृषि विभाग द्वारा वासंतिक (रबी) मौसम में फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिये कई कार्यक्रमों का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस महाभियान में सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिक और विभाग के सभी कृषि प्रसार कर्मी सम्मलित होंगे। इसके माध्यम से किसानों को कृषि संबंधी तकनीकी प्रशिक्षण देते हुए कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी जायेगी। साथ ही कृषि विभाग की योजनाओं का प्रचार-प्रसार तथा विभिन्न उपादानों का वितरण पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित किया जायेगा। किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे प्रमाणित बीज लाभार्थी किसान को कृषि की उन्नत तकनीक एवं विभागीय योजना अन्तर्गत अनुदान के संबंध में विशेषज्ञों द्वारा जानकारी एवं प्रशिक्षण दी जाएगी। इसके अतिरिक्त किसानों के बीच विभिन्न योजनाओं के तहत अनुदानित दर पर उपादान का वितरण भी किया जायेगा। किसानों को प्रमाणित बीज विभाग द्वारा रबी अभियान के दौरान उपलब्ध कराया जाएगा । कृषि विभाग द्वारा किसानों को तेलहन, दलहन, मक्का के साथ-साथ बागवानी फसलों, गेहूँ के बीज / उपादान मुहैया कराया जा रहा है। इसके साथ ही कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत दिया जाने वाला अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।  

प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए चिराग पासवान बोले, उनके आरोप तात्कालिक राजनीति में हैं

पटना केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मंगलवार को कहा कि जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की राजनीति की शैली आम आदमी पार्टी के संस्थापक अरविंद केजरीवाल जैसी है। यहां पत्रकारों से बात करते हुए, लोक जनशक्ति (रामविलास) के अध्यक्ष ने याद दिलाया कि केजरीवाल भी किशोर की तरह राजनीति में पैर जमाने की कोशिश में "एक के बाद एक आरोप" लगाते रहे, लेकिन "दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने के बाद चुप हो गए"। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर पिछले कुछ समय से एक के बाद एक आरोप लगा रहे हैं। केवल एक जांच ही बता सकती है कि उनके आरोप तथ्यों पर आधारित हैं या केवल बदनामी हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा, "जो भी हो, मेरा मानना ​​है कि बिहार में जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, वे अपना बचाव करने में पूरी तरह सक्षम हैं। उनमें से एक ने तो मानहानि का नोटिस भी दिया है। समय आने पर सच्चाई सामने आ जाएगी।" इशारा जेडी(यू) के राष्ट्रीय महासचिव और मंत्री अशोक चौधरी की ओर था, जिन्होंने हाल ही में किशोर को 200 करोड़ रुपये के बेनामी ज़मीन लेनदेन के आरोप में मानहानि का नोटिस भेजा था।  

ओवैसी के उम्मीदवार और एनडीए की चुनौती: अमौर सीट पर रोमांचक मुकाबला

पूर्णिया बिहार के सीमांचल क्षेत्र की अमौर विधानसभा सीट का जिला पूर्णिया और लोकसभा क्षेत्र किशनगंज लगता है। यह विधानसभा काफी पिछड़ी है जिसका प्रमुख कारण इस क्षेत्र की भौगोलिक दशा है। यह विधानसभा चारों तरफ से नदियों से घिरी है। उतर दिशा में जहां कनकई नदी, पूर्व में कनकई के साथ महानंदा नदी, दक्षिण में दास नदी, वहीं पश्चिम दिशा में परमान नदी है। इन नदियों के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण हर साल आने वाली बाढ़ एवं नदी कटाव के कारण नदियों के किनारे बसे दर्जनों गांव के लोग न चाहते हुए दोहरी मार को वर्षों से सहते आ रहे हैं। हालांकि, नदियों के जाल के बीच अब विकास ने भी चाल पकड़ ली है। दशकों के इंतजार के बाद रसेली घाट और खाड़ी पुल पर काम जोर शोर से चल रहा है। रसेली घाट पर पुल बन रहा है। जनवरी में आवागमन शुरू होने की संभावना है। खाड़ी पुल पर भी आवाजाही अगले मॉनसून से पहले शुरू हो जाएगी। अभयपुर में महानंदा ब्रिज बन रहा है। इसका फायदा लाखों लोगों को होगा। अमौर विधानसभा सीट 1951 में अस्तित्व में आई था। पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद ताहिर ने जीत हासिल की थी। 1957 में हुए चुनाव में अमौर सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार मोहम्मद इस्माइल को जनता का समर्थन मिला। 1962 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर मोहम्मद अलीजान ने विरोधियों को शिकस्त दी। 1967 और 1969 के चुनाव में यहां से प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर हसीबुर रहमान चुनाव जीते। 1972 में निर्दलीय हसीबुर रहमान ने एक बार फिर अमौर में चुनावी बाजी मारी। 1977 में अमौर सीट पर जनता पार्टी के टिकट पर चंद्रशेखर झा चुनाव जीते। 1980 में कांग्रेस से मोईजुद्दीन मिंशी ने अमौर सीट पर विरोधियों को शिकस्त दी। 1985 में अमौर सीट पर ए जलील ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की। 1990 में कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर ए जलील ने जीत का सिलसिला बरकरार रखा था। 1995 के चुनाव में समाजवादी पार्टी से मुजफ्फर हुसैन ने विरोधियों को शिकस्त दी। 2000 और 2005 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अब्दुल जलील मस्तान ने अमौर सीट पर लगातार दो बार जीत का परचम लहराया था। 2010 के विधानसभा चुनाव से भाजपा से सबा जफर ने जीत हासिल कर सबको चौंका दिया था। वहीं 2015 के चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस के टिकट पर अब्दुल जलील मस्तान ने जीत हासिल की। बिहार में AIMIM के इकलौते विधायक अमौर से 2020 में एआईएमआईएम प्रत्याशी अख्तरुल ईमान को जीत मिली। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम का राज्य में इकलौता विधायक अभी यहीं से है। वर्तमान में वह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। इस बार एआईएमआईएम के अलावा जदयू, कांग्रेस और जन सुराज के नेता इस क्षेत्र में सरगर्म हैं। चर्चा है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए से अख्तरुल ईमान को कड़ी चुनौती मिलेगी। AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान का दावा है कि अब तक की सरकारों ने सीमांचल की अनदेखी की है तो क्षेत्र में समस्या है। मगर उन्होंने अमौर समेत सीमांचल की बातों को मजबूती के साथ सदन में रखा है। अमौर विधानसभा क्षेत्र में पांच वर्षों में 800 करोड़ की योजनाओं को धरालत पर उतारकर नया अध्याय जोड़ा गया है। खाड़ी पुल, रसेली पुल, अभयपुर में ब्रिज समेत बांकी पुल-पुलिया का निर्माण हो रहा है। नदियों के कटाव को रोकने के लिए मजबूती के साथ काम करवाए गए हैं। वहीं, जेडीयू नेता सबा जफर का दावा है कि अमौर विधानसभा क्षेत्र में जो भी विकास हुआ है, वह राज्य और केंद्र सरकार की बदौलत। दोनों सरकारों के प्रयास से विधानसभा क्षेत्र में रसेली और खाड़ी में पुल का निर्माण हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि AIMIM विधायक ने अपने प्रयास से क्षेत्र के लिए कुछ नहीं किया है। यहां जो भी विकास हो रहा है, वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की देन है। क्षेत्र के लोग भी इस बात को भली भांति समझते हैं। अमौर में चाय की खेती शुरू किशनगंज के बाद पूर्णिया जिले में अमौर विधानसभा क्षेत्र पहला क्षेत्र बन गया है जहाँ चाय की खेती शुरू हो गयी है। विधानसभा क्षेत्र के चंदवार से शुरू हुई चाय की खेती आज आधा दर्जन से अधिक जगहों पर किसान करने लगे हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में अमौर का लगभग तीन सौ वर्ष पुराना माँ दुर्गा मंदिर व विष्णुपुर का माँ काली मंदिर के समीप बरगद का पेड़ सनातनियों के लिए आस्था का केंद्र है। वहीं कई मजार भी हैं जो आस्था का केंद्र है। इस विधानसभा क्षेत्र में गंगा-जमुना संस्कृति की झलक देखते ही बनती है। जहाँ हिन्दू भाई ईद,शबे बारात आदि की बधाइयां देने के लिए मुस्लिम भाइयों के घर जाकर बड़े चाव के साथ सेवई का आनंद लेते हैं। वहीं मुस्लिम लोग भी दुर्गा पूजा, दीपावली व होली पर बधाई देने घर पहुँच घर में बने स्वादिष्ट पकवान का भरपूर आनंद लेते है।  

संदीप पासवान को बांका पुलिस ने दबोचा, भेजी थीं हथियारों की तस्वीरें

बांका बांका पुलिस ने बिहार सरकार के भवन निर्माण मंत्री और अमरपुर विधायक जयंत राज कुशवाहा को फेसबुक मैसेंजर के जरिए जान से मारने की धमकी देने के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। गिरफ्तारी पंजाब के लुधियाना से हुई और धमकी भेजने में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया गया है। पंजाब से पकड़ा गया आरोपी एसपी उपेंद्र नाथ वर्मा के अनुसार, मामला 22 सितंबर का है, जब मंत्री को उनके फेसबुक अकाउंट पर जान से मारने की धमकी भरा संदेश मिला था। इस संदेश में आपत्तिजनक टिप्पणियां, हथियारों की तस्वीरें और कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े होने का दावा किया गया था। धमकी के बाद, मंत्री जयंत राज के सचिव मोहन कुमार सिंह ने बांका जिले के अमरपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। आर्म्स एक्ट और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत तुरंत मामला दर्ज किया गया। वर्मा ने कहा, "मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, हमने बांका एसडीपीओ अमर विश्वास और साइबर डीएसपी अनूपेश नारायण के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल का गठन किया। तकनीकी निगरानी और साइबर ट्रैकिंग का उपयोग करते हुए, टीम ने आरोपी को लुधियाना से गिरफ्तार कर लिया।" गिरफ्तार आरोपी संदीप पासवान बांका जिले के अमरपुर थाना क्षेत्र के सलेमपुर गांव का निवासी है। उसे आगे की पूछताछ के लिए ट्रांजिट रिमांड पर बिहार वापस लाया गया। पुलिस अधिकारी अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या पासवान का आपराधिक नेटवर्क से कोई वास्तविक संबंध था या गिरोह से जुड़ाव का दावा डराने के लिए किया गया एक झूठा दावा था।  

झारखंड प्रशासन में बड़ा बदलाव: अविनाश कुमार को मिली मुख्य सचिव की जिम्मेदारी

रांची झारखंड सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी अविनाश कुमार को राज्य का नया मुख्य सचिव बनाया है। बता दें कि झारखंड की मुख्य सचिव अलका तिवारी बीते मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गईं। अलका तिवारी के स्थान पर विकास आयुक्त और ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार को राज्य का नया मुख्य सचिव बनाया गया है। इसके साथ ही अविनाश कुमार को अपर स्थानिक आयुक्त नई दिल्ली और मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव का भी अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। राज्य के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के अवर सचिव विनोद कुमार ने इस आशय की अधिसूचना जारी की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के नए मुख्य सचिव अविनाश कुमार को पदभार ग्रहण करने पर शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अविनाश कुमार की कार्यकुशलता व अनुभव से राज्य प्रशासन को और अधिक मजबूती मिलेगी। सीएम ने उम्मीद जताई कि इससे सरकार के जनसेवा के संकल्प को भी मजबूती मिलेगी। वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त अलका तिवारी को भावभीनी विदाई दी। सीएम ने कहा कि निवर्तमान मुख्य सचिव ने अपने कार्यकाल के दौरान बेहतर प्रशासनिक क्षमता का परिचय देते हुए सरकार की नीतियों के क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। अनुभव और योगदान को देखते हुए अलका तिवारी को राज्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में नामित किया गया है। मुख्यमंत्री ने उनके सेवा काल की सराहना करते हुए कहा कि तिवारी ने सदैव ईमानदारी, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता के साथ कार्य किया। उन्होंने राज्य प्रशासन को एक नई दिशा दी और प्रशासनिक परंपराओं को मजबूती दी। उल्लेखनीय है कि अविनाश कुमार 1993 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव के रूप में भी कार्यरत हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह को विकास आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। ज्ञातव्य है कि अलका तिवारी ने एक नवंबर 2024 को झारखंड के मुख्य सचिव के रूप में कार्यभार संभाला था। उनके पति डी के तिवारी भी झारखंड के मुख्य सचिव रह चुके हैं।  

दुर्गा नवमी पर CM हेमंत ने किया संदेश साझा, मां भगवती से की सुख-समृद्धि की कामना

रांची देश भर में आज यानी बुधवार को दुर्गा नवमी मनाई जा रही है। वहीं, इस अवसर पर सीएम हेमंत सोरेन ने झारखंड वासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। सीएम हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ महानवमी के शुभ और पावन अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं और जोहार। शक्ति, श्रद्धा, आराधना और सद्भाव का अखंड प्रतीक है यह पावन पर्व। इस शुभ अवसर पर मां सभी को सुख, शांति, समृद्धि और स्वस्थ जीवन प्रदान कर, सभी की मनोकामना पूर्ण करें। जय मां जगत जननी! बता दें कि नवमी एक पर्व है जो मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण घटनाओं के उपलक्ष्य में मनाया जाता है: राम नवमी, जो हिंदू भगवान राम के जन्म का प्रतीक है और चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है, तथा अन्य कई नवमियों का अपना महत्व होता है। रामनवमी मनाने का उद्देश्य भगवान राम के प्रति भक्ति व्यक्त करना और उनके जीवन से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करना है, जिसके लिए भक्त मंदिर जाते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और पवित्र ग्रंथों का पाठ करते हैं।