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JoSAA काउंसिलिंग प्रक्रिया जारी, IIT-NIT की पहली सीट अलॉटमेंट लिस्ट 13 जून को आएगी

पटना. देश के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों आइआइटी, एनआइटी और अन्य में प्रवेश के लिए जाइंट सीट एलोकेशन अथारिटी (जोसा) ने काउंसिलिंग का कार्यक्रम जारी कर दिए हैं। मंगलवार की सुबह 10 बजे से जोसा काउंसिलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन और च्‍वाइस फिलिंग की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। आर्किटेक्चर एप्टीट्यूड टेस्ट (एएटी) में सफल होने वाले अभ्यर्थी सात जून से अपनी विशेष चाॅइस भर सकेंगे। उम्मीदवारों की सुविधा और सीट के अनुमान के लिए आठ जून और 10 जून को माक सीट एलोकेशन एक और दो के परिणाम प्रदर्शित किए जाएंगे। 11 जून की शाम तक रजिस्‍ट्रेशन छात्र 11 जून की शाम पांच बजे तक रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे, जिसके बाद भरी गई च्‍वाइस सिस्टम द्वारा स्वतः लाक हो जाएगी। इसके बाद सीट आवंटन की प्रक्रिया मुख्य रूप से पांच राउंड में आयोजित की जाएगी। पहले राउंड 13 जून को सुबह 10 बजे सीट एलोकेशन लिस्ट जारी होगी। चयनित छात्रों को आनलाइन रिपोर्टिंग, डाक्युमेंट अपलोड और 26 जून 2026 तक फीस का भुगतान करना होगा। दूसरे राउंड में 30 जून को शाम पांच बजे घोषित किया जाएगा, जिसके लिए फीस भुगतान की अंतिम तिथि तीन जुलाई है। 8 जुलाई तक फीस भुगतान तीसरा राउंड का परिणाम छह जुलाई को जारी होगा। इसके लिए फीस भुगतान आठ जुलाई तक किया जा सकता है। चौथा राउंड का कटआफ 10 जुलाई को जारी होगा। इसके लिए फीस भुगतान की अंतिम तिथि 13 जुलाई है। पांचवें और अंतिम राउंड का सीट आवंटन 16 जुलाई को किया जाएगा। यह राउंड आइआइटी और आइआइएससी के लिए फाइनल होगा। एनआईटी प्लस सिस्टम के लिए आंशिक प्रवेश शुल्क का आनलाइन भुगतान 22 से 24 जुलाई के बीच होगा। छात्र अपनी आवंटित सीट से नाम वापस लेने की प्रक्रिया भी राउंड दो, तीन और चार के दौरान कर सकते हैं।

बिहार में शराबबंदी के बीच अंतरराष्ट्रीय तस्करी का नया नेटवर्क उजागर

मुजफ्फरपुर बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद धंधेबाजों का नेटवर्क तेजी से पैर पसार रहा है। अब तस्करों का दायरा सिर्फ दूसरे राज्यों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वे सीधे विदेशों से भी शराब की खेप मंगवाने से नहीं डर रहे हैं। मुजफ्फरपुर में भूटान से तस्करी कर लाई गई विदेशी शराब की एक बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद पुलिस और उत्पाद विभाग की नींद उड़ गई है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह नया ट्रेंड एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। भूटान से बंगाल सीमा पार कर मुजफ्फरपुर पहुंची खेप उत्पाद विभाग ने मुजफ्फरपुर में छापेमारी कर भूटान निर्मित शराब के 115 कार्टन जब्त किए हैं। शुरुआती जांच में यह खुलासा हुआ है कि धंधेबाज भूटान से चोरी-छिपे सीमा पार कर पहले पश्चिम बंगाल में दाखिल हुए थे। इसके बाद किशनगंज, फारबिसगंज, पूर्णिया, मधुबनी और दरभंगा फोरलेन के रास्ते होते हुए इस बड़ी खेप को मुजफ्फरपुर लाकर स्टॉक किया गया था। जांच टीम अब उस गाड़ी और उसके मालिक की पहचान करने में जुटी है, जिसके जरिए इतनी लंबी दूरी तय कर शराब यहाँ पहुँचाई गई। तीन बड़े धंधेबाज फरार, छापेमारी इस अंतरराष्ट्रीय तस्करी के पीछे स्थानीय नेटवर्क का हाथ सामने आया है। मामले में अहियापुर थाना क्षेत्र के रहने वाले तीन कुख्यात धंधेबाजों—लखपत पासवान, सुशील झा और निखिल कुमार के नाम उजागर हुए हैं। शनिवार को जांच टीम ने इन फरार आरोपियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की, हालांकि फिलहाल तीनों पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। उत्पाद इंस्पेक्टर दीपक कुमार सिंह ने बताया कि तीनों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और गिरफ्तारी के लिए तलाश जारी है। 150 की बोतल को 1200 में बेचने का खेल पकड़े गए नेटवर्क से शराब तस्करी का एक बेहद खतरनाक तरीका सामने आया है। उत्पाद इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने बताया कि भूटान जैसे टैक्स-फ्री देश से महज 150 रुपये मूल्य की 750 एमएल शराब मंगवाई जाती थी। इसके बाद धंधेबाज इसमें पानी, रंग और जानलेवा स्पिरिट मिलाकर इसकी मात्रा को सवा से डेढ़ लीटर (यानी एक से दो बोतल) तक बढ़ा देते थे। इस मिलावटी शराब को असली दिखाने के लिए बोतलों पर रॉयल चैलेंज (Royal Challenge), रॉयल स्टैग (Royal Stag) और मैकडॉवेल नंबर वन (McDowells No. 1) जैसे नामी ब्रांड्स के नकली रैपर और स्टिकर चिपका दिए जाते थे। इसके बाद इस मिलावटी और जानलेवा शराब को बाजारों में 1200 रुपये प्रति बोतल तक की ऊंची कीमत पर बेचा जाता था। टैक्स-फ्री राज्य और देश निशाने पर उत्पाद विभाग के अनुसार, अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करों का एक बहुत बड़ा सिंडिकेट बिहार में सक्रिय है। हाल के दिनों में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के तस्करों की गिरफ्तारियों से पता चला है कि अब शराब की बोतलों से बारकोड को खरोंचकर भेजा जा रहा है, ताकि जांच में उस दुकान का पता न चल सके जहाँ से शराब खरीदी गई। इसके अलावा, मुनाफे को अधिकतम करने के लिए धंधेबाज अब चंडीगढ़, अरुणाचल प्रदेश, दमन और दीव जैसे टैक्स-फ्री राज्यों को निशाना बना रहे हैं, जहां शराब बेहद सस्ती मिलती है। भूटान से शराब की खेप पकड़े जाने का बिहार में यह पहला मामला है, जो इसी रणनीति का हिस्सा है। अंधापन और मौत दे रही यह शराब शराब की मात्रा बढ़ाने के लिए धंधेबाजों द्वारा धड़ल्ले से इस्तेमाल की जा रही स्पिरिट मानव शरीर के लिए बेहद घातक है। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के रसायनशास्त्र विशेषज्ञ सह इंस्पेक्टर ऑफ कॉलेजेज साइंस, प्रो. अरविंद कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि शराब में मिलाई जाने वाली स्पिरिट काफी घातक होती है। जब इसे मात्रा बढ़ाने के लिए डायलूट किया जाता है, तो यह 'मिथाइल अल्कोहल' का रूप ले लेती है। इसके सेवन से व्यक्ति हमेशा के लिए अंधा हो सकता है। यदि स्पिरिट की मात्रा थोड़ी भी अधिक हो जाए, तो व्यक्ति की मौके पर ही जान जाने का पूरा खतरा रहता है। भूटान से लाई गई शराब को डायलूट कर एक से दो बोतल बनाने का धंधा किया जा रहा था। तीन धंधेबाजों का नाम सामने आया है। जिनके विरुद्ध अभियोग दर्ज कर गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी की जा रही है। दीपक कुमार सिंह, उत्पाद इंस्पेक्टर

बिजली चोरी पर सख्ती: ट्रांसफार्मर-स्तरीय डेटा से होगी खपत और बिलिंग की निगरानी

पटना  बिहार में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाली कंपनियों को अब अगले एक दशक तक ऊर्जा लेखांकन (इनर्जी अकाउंटिंग) का कार्य भी करना होगा। इसके लिए कंपनियां क्षेत्रवार निगरानी करेंगी और बिजली वितरण तथा खपत के आंकड़ों का विश्लेषण करेंगी। बिजली कंपनियों ने इसे अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य तकनीकी माध्यमों से बिजली चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाना है। कैसे होती है इनर्जी अकाउंटिंग? बिजली कंपनियों ने प्रत्येक क्षेत्र में स्थापित पावर डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मरों पर सिम आधारित विशेष उपकरण लगाए हैं। इन उपकरणों के माध्यम से ट्रांसफार्मर से वितरित होने वाली बिजली की जानकारी सीधे बिजली कंपनी के सर्वर तक पहुंचती है। किसी क्षेत्र में मौजूद सभी ट्रांसफार्मरों से आपूर्ति की जा रही बिजली का नियमित डाटा उपलब्ध रहता है। इसके बाद उपभोक्ताओं की वास्तविक बिजली खपत और बिलिंग के आंकड़ों का मिलान किया जाता है। इसी प्रक्रिया को इनर्जी अकाउंटिंग कहा जाता है। इससे यह पता लगाया जाता है कि वितरित बिजली और बिलिंग के बीच कितना अंतर है। स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियों को मिली जिम्मेदारी जिस क्षेत्र में जिस कंपनी ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए हैं, उसी कंपनी को वहां इनर्जी अकाउंटिंग की जिम्मेदारी भी दी गई है। संबंधित कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी ट्रांसफार्मर से जितनी बिजली वितरित हो रही है, उसके अनुरूप बिलिंग क्यों नहीं हो रही है। कंपनी ट्रांसफार्मर से जुड़े प्रत्येक उपभोक्ता के बिल और बिजली खपत का सूक्ष्म विश्लेषण करेगी। इसके आधार पर वह बिजली कंपनी को रिपोर्ट सौंपेगी कि बिलिंग में कमी या असंगति कहां से उत्पन्न हो रही है। इस प्रक्रिया के जरिए बिजली चोरी में संलिप्त उपभोक्ताओं की पहचान करना आसान होगा। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि किसी उपभोक्ता के यहां स्वीकृत या वास्तविक लोड अधिक होने के बावजूद उसका बिजली बिल अपेक्षित स्तर पर क्यों नहीं है। बिहार में 90 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगे बिहार में वर्तमान में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या करीब 2.22 करोड़ है। इनमें से लगभग 90 लाख उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान लगातार जारी है और यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाली कंपनियों के जिम्मे इनर्जी अकाउंटिंग का दायरा भी लगातार बढ़ता जाएगा। बिजली कंपनियों का मानना है कि इससे बिजली चोरी पर लगाम लगाने के साथ-साथ वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

झारखंड में ITI नामांकन प्रक्रिया शुरू, 10 से 30 ट्रेड और संस्थानों का विकल्प मिलेगा

 रांची  राज्य के सरकारी, गैर सरकारी तथा पीपीपी मोड पर संचालित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में नामांकन के लिए अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन में न्यूनतम 10 और अधिकतम 30 ट्रेड और संस्थानों का विकल्प दे सकेंगे। संस्थानों की शत-प्रतिशत सीटें भरने के लिए यह निर्णय लिया गया है ताकि अभ्यर्थियों के पास पर्याप्त विकल्प हो। श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-28 में नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया सोमवार को शुरू होगी। 25 जून तक ऑनलाइन आवेदन होगा, जबकि नामांकन के लिए 29 जून को पहली मेधा सूची प्रकाशित होगी। इसी आवेदन प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी एवं गैर सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के अलावा झारखंड गवर्नमेंट टूल रूम-आइटीआइ, गोला, रामगढ़ में भी नामांकन होगा। अधिकतम आयु 40 वर्ष कुछ ट्रेड में नामांकन के लिए आवश्यक योग्यता 10वीं तथा कुछ ट्रेड के लिए आठवीं उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। नामांकन के लिए एक अगस्त 2026 को न्यूनतम आयु 14 वर्ष तथा अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। बता दें कि राज्य के आइटीआई में नामांकन के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की जाती है। नामांकन के लिए मेधा सूची अर्हता कक्षा के प्राप्तांकों के आधार पर तैयार की जाती है। सभी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी की जाती है। नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया www.iti.jharkhand.gov.in पोर्टल के माध्यम से की जा सकती है। बताते चलें कि राज्य के कई औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में कई सीटें रिक्त रह जाती है। संस्थानों की अधिक से अधिक सीटें भर सकें, इसके लिए कई चरणों की काउंसिलिंग आयोजित की जाती है। इसके बाद भी सीटें रिक्त रह जाती हैं। इससे निपटने के लिए ही अधिक विकल्प भरने की व्यवस्था की गई है।

बिहार में विकास योजनाओं के साथ वैचारिक एजेंडे के समन्वय की नई रणनीति

पटना  बिहार में सत्ता की बागडोर संभालने के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भाजपा के आस्था और अध्यात्म के कोर एजेंडा को सर्वोपरि मान योजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने गंगा पर जेपी सेतु के समानांतर निर्माणाधीन पुल का नामकरण गंगा-अंबिका पथ करने की घोषणा की है। भाजपा के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की राह पर अग्रसर हाेते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरस्वती शिशु मंदिर की तर्ज पर सरस्वती विद्या निकेतन स्कूल खोलने मन बनाए हैं सरस्‍वती विद्या निकेतन बनेगा मॉडल स्‍कूल इन विद्यालयाें में आधुनिक दौर के निजी स्कूलों से बेहतर व्यवस्था होगी। एक तरह से ये माॅडल स्कूल होंगे। दरअसल, भाजपा एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लंबे समय से भारतीय सांस्कृतिक विरासत, आस्था और शिक्षा के क्षेत्र में वैचारिक हस्तक्षेप को अपने प्रमुख एजेंडे के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं। ऐसे में सम्राट चौधरी की हालिया पहलें इसी व्यापक राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोण का हिस्सा मानी जा रही हैं। मुख्यमंत्री द्वारा गंगा पर जेपी सेतु के समानांतर निर्माणाधीन नए पुल का नाम गंगा-अंबिका पथ रखने की घोषणा को केवल नामकरण भर नहीं माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बिहार के सार्वजनिक स्थलों और अधोसंरचना परियोजनाओं को सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान से जोड़ने की कोशिश का हिस्सा है। भाजपा लंबे समय से विकास एवं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के समन्वय की राजनीति करती रही है और सम्राट चौधरी उसी सूत्र को बिहार में आगे बढ़ाते दिखाई दे रहे हैं। इसी क्रम में सरकार की ओर से सरस्वती विद्या निकेतन नाम से नए विद्यालयों की स्थापना की तैयारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि इन विद्यालयों की अवधारणा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से संचालित सरस्वती शिशु मंदिरों के माॅडल से प्रभावित होगी। आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे मॉडल स्‍कूल हालांकि इन्हें आधुनिक शिक्षा, अत्याधुनिक संसाधनों और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं से लैस करने की योजना है, ताकि ये निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठित विद्यालयों को भी चुनौती दे सकें। स्वयं मुख्यमंत्री यह घोषणा कर चुके हैं कि स्कूल ऐसे होंगे कि अधिकारी एवं प्रतिष्ठित लोग अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए सिफारिश करेंगे। सरकार की सोच है कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्ति का माध्यम न होकर भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक दायित्वों से भी जुड़ी हो। इसी कारण इन प्रस्तावित विद्यालयों में आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कार आधारित शिक्षा तथा स्थानीय सांस्कृतिक विरासत पर विशेष बल दिए जाने की संभावना है। राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो सम्राट चौधरी का यह कदम भाजपा के परंपरागत समर्थक वर्ग को मजबूत संदेश देने वाला माना जा रहा है। बिहार में भाजपा लंबे समय से सांस्कृतिक और वैचारिक मुद्दों को विकास के एजेंडे के साथ जोड़ने की कोशिश करती रही है। सावरकर पर पाठ्यक्रम लागू करने की घोषणा मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी इन प्रयासों को सरकारी योजनाओं और संस्थागत ढांचे के माध्यम से नई गति देना चाहते हैं। वीर विनायक दामोदर सावरकर पर शोध उपरांत पाठ्यक्रम में लागू करने, आदिवासी क्षेत्र में मैराथन कराने के साथ विजेताओं को एक लाख रुपये, 75 हजार रुपये एवं 50 हजार रुपये देने की घोषणा दूरगामी रणनीति है। विपक्ष इस तरह की घोषणाओं को वैचारिक एजेंडे के विस्तार के रूप में देख सकता है, लेकिन भाजपा इसे भारतीय परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में आवश्यक कदम बता रही है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि देश के विभिन्न राज्यों में स्थानीय संस्कृति एवं परंपराओं के अनुरूप संस्थानों और परियोजनाओं का नामकरण होते रहे हैं, इसलिए बिहार में भी ऐसी पहल स्वाभाविक है। मुख्यमंत्री के कदम इस बात का संकेत दे रहे हैं कि वे बिहार में केवल प्रशासनिक उपलब्धियों के आधार पर ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक पहचान के माध्यम से भी अपनी अलग राजनीतिक छाप छोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।  

पाकुड़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 13 मामलों में वांछित अमन अंसारी दबोचा गया

 पाकुड़  कहते हैं कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन नगर थाना क्षेत्र में सक्रिय शातिर दिमाग अपराधी अमन अंसारी ने इन हाथों को बार-बार बौना साबित करने की कोशिश की है। अमन आज पाकुड़ शहर और आसपास के इलाकों में खौफ, चोरी और नशे के काले कारोबार का दूसरा नाम बन चुका है। हैरान करने वाली बात यह है कि अमन किसी अंतर-प्रांतीय गैंग का हिस्सा नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही इतना सक्रिय है कि सिर्फ नगर थाना क्षेत्र में उसके खिलाफ 13 संगीन मामले दर्ज हैं। एक ही थाने की डायरी में किसी एक अपराधी का नाम बार-बार आना यह साफ बयां करता है कि वह पुलिस के लिए एक बड़ा सिरदर्द और आम अवाम के सुकून के लिए नासूर बन चुका है। अपराधी अमन अंसारी का अपराध की दुनिया का इतिहास आज का नहीं, बल्कि पूरे 11 साल पुराना है। पुलिस रिकार्ड के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि उसने साल 2015 में अपराध की दुनिया में कदम रखा था। शुरुआती दौर वर्ष 2015 में अमन के विरुद्ध पाकुड़ नगर थाना क्षेत्र में चोरी और सेंधमारी करने का पहला मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद अमन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अमन के अपराध के रिकार्ड ने यह साबित कर दिया है कि वह मामूली चोर नहीं, बल्कि एक आदतन अपराधी बन चुका है। अमन अंसारी का यह पूरा क्रिमिनल ग्राफ दिखाता है कि वह हर बार जेल जाता है, जमानत पर बाहर आता है और फिर से उसी दुस्साहस के साथ पाकुड़ नगर थाना क्षेत्र को अपनी आपराधिक गतिविधियों का केंद्र बना लेता है। सेंधमारी से लेकर नशा तस्करी का फैलाया जाल समय के अनुसार अमन अंसारी का हौंसला बुलंद होता चला गया। उसने सिर्फ घरों में ताले चटकाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि शहर के युवाओं को खोखला करने वाले नशीले पदार्थों के धंधे में भी पैर पसार लिया। वर्ष 2019 में पाकुड़ नगर थाना में उसके खिलाफ एनडीपीएस के तहत मामला दर्ज है। यह इस बात का सबूत है कि अमन अब न सिर्फ संपत्ति संबंधी अपराध कर रहा था, बल्कि नशीली दवाओं की तस्करी के सिंडिकेट से भी जुड़ चुका था। रोनी शेख भी हैं चर्चित पुलिस के हत्थे चढ़ा मौलाना चौक निवासी रोनी शेख का भी अपराधिक रिकार्ड रहा है। यह भी शातिर अपराधी है। रोनी के विरुद्ध पाकुड़ नगर थाना में दो मामले दर्ज हैं, जबकि एक मामला पाकुड़ आरपीएफ में है। नलपोखर निवासी बजीर भी इसके पूर्व जेल की हवा खा चुका है। इन अपराधियों को गिरफ्तार कर पुलिस ने राहत की सांस ली है। पुलिस ने राहत की सांस लॉकडाउन के समय यानी वर्ष 2020 में भी वह काफी सक्रिय रहा। उस समय भी अमन ने सूनी सड़कों और बंद दुकानों को अपना निशाना बना रहा था। वर्ष 2021, वर्ष 2022 में अमन सक्रिय रहा। पुलिस के लिए वह सिरदर्द बन गया था। हाल ही में शहर में हुई कई चोरी की घटनाओं में शामिल है। अमन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली है।  

पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में सत्तू और जर्दालु आम का किया जिक्र, बिहार में खुशी

पटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम के 134वें एपिसोड में वैसे तो कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस दौरान पीएम मोदी ने बिहार के मशहूर पेय पदार्थ सत्तू का भी जिक्र किया। ‘मन की बात’ में पीएम ने बिहार के जर्दुालु आम के बारे में भी चर्चा की है। पीएम मोदी द्वारा सत्तू और जर्दालु आम का उल्लेख किए जाने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी काफी गदगद नजर आए। सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि इससे बिहार की इन चीजों को देश-विदेश में पहचान मिलेगी। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में बिहार का विशेष उल्लेख किए जाने पर उनके प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। पीएम के 'मन की बात' को सुनने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की भिन्न-भिन्न खासियतों एवं पहलुओं पर देशवासियों से सीधे संवाद कर उन्हें प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'मन की बात' कार्यक्रम में बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय उत्पादों और जनजीवन से जुड़े विषयों का उल्लेख किया जाना राज्यवासियों के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। सम्राट चौधरी ने कहा कि विशेष रूप से भीषण गर्मी से बचाव के लिए बिहार के पारंपरिक और पौष्टिक पेय सत्तू का उल्लेख तथा राज्य के प्रसिद्ध जर्दालु आम की चर्चा बिहार की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का यह उल्लेख बिहार के किसानों, उद्यमियों और आम नागरिकों के परिश्रम तथा राज्य की समृद्ध कृषि एवं खाद्य परंपरा का सम्मान है। उन्होंने कहा कि इससे बिहार के स्थानीय उत्पादों को देश-विदेश में नई पहचान मिलेगी तथा किसान भी प्रोत्साहित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार अपनी सांस्कृतिक धरोहर, कृषि उत्पादों और लोक परंपराओं के माध्यम से देश की समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा इन विशेषताओं को राष्ट्रीय मंच पर स्थान दिए जाने से राज्य के लोगों का उत्साह और बढ़ा है। बता दें कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी ने प्रचंड गर्मी का जिक्र करते हुए देशवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी। इस दौरान पीएम मोदी ने सत्तू का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी तो बात ही क्या है। पेट भी भरे और ताकत भी देता है। प्रधानमंत्री ने फलों के राजा आम का भी उल्लेख करते हुए कहा कि गर्मी के मौसम में शायद ही कोई घर हो, जहां आम की चर्चा न होती हो। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र का अपना आम और उसकी अपनी सुगंध होती है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र का हापुस या अल्फांसो, गुजरात का केसर- ये तो आमरस की जान हैं। उत्तर प्रदेश का दशहरी और मेरी काशी का लंगड़ा। पीएम नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि बिहार का जर्दालू जिसकी खुशबू दूर से पहचान में आ जाए। चौसा, मालदा…हर नाम के साथ लोगों की यादें जुड़ी हुई हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कोई दक्षिण भारत जाए तो उसे बंगनपल्ली, तोतापुरी, नीलम, मलगोवा, पश्चिम बंगाल के हिमसागर, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के सुवर्णरखा जैसी अन्य किस्में मिलेंगी। उन्होंने कहा कि जगह बदलती है और साथ ही आम का रूप-रंग एवं उसका स्वाद भी बदल जाता है। आम की यह यात्रा अब गांवों से वैश्विक बाजार तक भी पहुंच रही है।

पटना में बंगला विवाद गरमाया: राबड़ी देवी से सरकारी आवास खाली कराने की कार्रवाई तेज

पटना बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राजद नेता राबड़ी देवी को पटना जिला प्रशासन ने 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने के लिए 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। प्रशासन की ओर से जारी सूचना में कहा गया है कि निर्धारित अवधि के भीतर आवास खाली कर 39 हार्डिंग रोड स्थित आवंटित सरकारी आवास में स्थानांतरित होना होगा। जिला प्रशासन का कहना है कि पूर्व सीएम राबड़ी देवी को 39 हार्डिंग रोड में शिफ्ट होने का अनुरोध किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 15 दिनों के भीतर आवास खाली नहीं किए जाने की स्थिति में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, शनिवार शाम को पटना पुलिस राबड़ी देवी के आवास पर पहुंची थी। सचिवालय एसडीपीओ अनु कुमारी ने राबड़ी देवी से मुलाकात कर प्रशासन का पत्र और निर्देश सौंपा। मुलाकात के दौरान आवास खाली करने और नए आवास में स्थानांतरित होने को लेकर प्रशासन की ओर से औपचारिक जानकारी दी गई थी। इसके बाद सियासत गरमा गई। राजद और भाजपा नेताओं ने एक दूसरे पर जमकर हमला बोला। जानिए भवन निर्माण ने क्या कहा? भवन निर्माण विभाग की ओर से जानकारी दी गई है कि 25 नवंबर 2025 को जारी आदेश के तहत नेता प्रतिपक्ष के लिए हार्डिंग रोड स्थित आवास संख्या-39 आवंटित किया गया था। विभाग का कहना है कि नया आवास उपलब्ध कराए जाने के बावजूद राबड़ी देवी ने अब तक सर्कुलर रोड स्थित आवास संख्या-10 खाली नहीं किया है। राबड़ी आवास मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित विभागीय पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि 27 मई 2026 को जारी आदेश के तहत उक्त आवास डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया जा चुका है। ऐसे में नए आवंटन को प्रभावी बनाने के लिए आवास संख्या-10 को शीघ्र खाली कराना आवश्यक है। संयुक्त सचिव-सह-भू-संपदा पदाधिकारी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि इस प्रस्ताव को सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति प्राप्त है। विभाग ने नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी से अनुरोध किया है कि आवास खाली कराने की कार्रवाई जल्द सुनिश्चित की जाए। राबड़ी देवी के किस बयान मचा दिया था बवाल शनिवार दोपहर पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान राबड़ी देवी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हम तो चाहते हैं कि फोर्स बुलाकर खाली करा लें। अगर सरकार को जगह खाली करानी है तो प्रशासन और फोर्स का इस्तेमाल करे, लेकिन हम अपनी जगह खाली नहीं करेंगे। बता दें कि लालू प्रसाद अपने परिवार के साथ फिलहाल सर्कुलर रोड स्थित आवास संख्या-10 में रहते हैं

झारखंड में झटका: डीजल-टोल बढ़ते ही बस किराया बढ़ा, झुमरीतिलैया से यात्रा हुई महंगी

कोडरमा आगामी एक जून से बस में सफर करना महंगा हो जाएगा। विभिन्न जगहों के लिए 15 से 30 प्रतिशत तक मूल्य में वृद्धि की गयी है। कोडरमा जिला बस ऑनर्स एसोसिएशन की शनिवार को हुई बैठक में उक्त निर्णय लिया गया। झुमरीतिलैया स्थित बस स्टैंड के समीप हुई बैठक की अध्यक्षता धर्मेंद्र उर्फ बंशी यादव ने जबकि संचालन सचिव संजय यादव ने किया। बैठक में मोहन यादव, गोरेलाल यादव, बैजू लाला, संतोष यादव समेत कई अन्य मौजूद थे। बैठक के बाद अध्यक्ष धर्मेंद्र यादव ने बताया कि इस महीने में डीजल के दर में चार बार वृद्धि के साथ ही मोटर पार्ट्स के सा, टायर, टोल टैक्स में वृद्धि हुई है, इससे किराया बढ़ाना हम लोगों की मजबूरी हो गई है। झुमरीतिलैया से खुलने वाली लगभग 55 बसों जिनमें 15 एसी और 30 नॉन एसी से यात्रा करने वाले लोगों का सफर महंगा होगा। झुमरीतिलैया से चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, रांची, गिरिडीह तथा बिहार के नवादा रजौली के लिए यात्रियों को लाने ले जाने एसी में 50 रूपया और नॉन एसी में 30 रूपया तक की वृद्धि एक जून से प्रभावी होगी। इस तरह यात्रियों को 15 से 30 प्रतिशत तक अतिरिक्त भाड़ा देना होगा। इसके पूर्व 5 साल पहले किराए में बढ़ोतरी की गई थी। लिए गये निर्णय अनुसार, झुमरीतिलैया से रांची के लिए एसी में 350 की जगह 400, नॉन एसी में 300 की जगह 350, हजारीबाग के लिए एसी में 120 की जगह 150 और नॉन एसी में 120 की जगह 140, रामगढ़ के लिए एसी में 200 की जगह 250 और नॉन एसी में 200 की जगह 220, गिरिडीह के लिए नान एसी में 200 की जगह 250, नवादा के लिए एसी में 170 की जगह 200 और नॉन एसी में 150 की जगह 180 जबकि चतरा के लिए नॉन एसी में 200 की जगह 220 रुपए देने होंगे। इधर, ट्रांसपोर्टिंग किराया के भी बढ़ने से सामानों के मूल्य में वृद्धि होने वाली है जिसका आम से खास लोगों की जेब पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

RS चुनाव बना सियासी रण: JMM-कांग्रेस में खींचतान, BJP की भी एंट्री से मुकाबला दिलचस्प

 धनबाद Jharkhand Rajya Sabha Election झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाला चुनाव इस बार राजनीतिक रूप से बेहद दिलचस्प होता जा रहा है। एक जून से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो रही है, लेकिन उससे ठीक पहले सत्ताधारी महागठबंधन के भीतर उम्मीदवारों को लेकर सहमति नहीं बन सकी है। JMM, Congress, RJD & CPI ML माले के बीच सीट बंटवारे को लेकर लगातार मंथन चल रहा है। इसी बीच भाकपा माले ने भी खुलकर राज्यसभा की एक सीट पर अपना दावा पेश कर दिया है। इससे महागठबंधन के भीतर राजनीतिक समीकरण और जटिल हो गए हैं। महागठबंधन के सामने माले की नई चुनौती भाकपा माले ने राज्यसभा चुनाव में पूर्व विधायक विनोद सिंह को उम्मीदवार बनाने की मांग उठाई है। पार्टी का कहना है कि 2024 के विधानसभा चुनाव में उसने महागठबंधन का मजबूत सहयोगी बनकर भूमिका निभाई थी और सरकार गठन में भी समर्थन दिया था। माले के प्रदेश सचिव मनोज भक्त और विधायक अरूप चटर्जी ने स्पष्ट किया है कि पार्टी ने सत्ता में भागीदारी नहीं मांगी थी, लेकिन अब राज्यसभा में प्रतिनिधित्व चाहती है। माले के दो विधायक हैं और पार्टी इसे अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी के रूप में देख रही है। ऐसे में गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर दबाव बढ़ गया है। झामुमो में अंजनी सोरेन सबसे आगे, परिवार से ही होगा एक उम्मीदवार राज्यसभा की दोनों सीटों पर झामुमो की नजर है, हालांकि कांग्रेस भी एक सीट की दावेदार बनी हुई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बड़ी बहन अंजनी सोरेन का नाम सबसे आगे चल रहा है। झामुमो के भीतर यह तर्क दिया जा रहा है कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन से रिक्त हुई सीट पर उनके परिवार के किसी सदस्य को भेजा जाना चाहिए। अंजनी सोरेन लंबे समय तक ओडिशा की राजनीति में सक्रिय रही हैं। हालांकि पार्टी के भीतर कल्पना सोरेन और लता सोरेन के नामों पर भी चर्चा जारी है। कल्पना सोरेन को प्रभावी वक्ता माना जाता है, लेकिन पार्टी का एक वर्ग उन्हें राज्य की राजनीति से दूर भेजने के पक्ष में नहीं है। नाथवाणी की सक्रियता और कांग्रेस की दावेदारी ने बढ़ाई सियासी हलचल राज्यसभा चुनाव को लेकर उद्योगपति परिमल नाथवाणी का नाम भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि वह एक बार फिर झारखंड से राज्यसभा जाने के प्रयास में हैं और झामुमो नेतृत्व से संपर्क साध रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस भी गठबंधन धर्म का हवाला देकर एक सीट की मांग पर अड़ी हुई है। यदि कांग्रेस को एक सीट मिलती है तो झामुमो के हिस्से में केवल एक सीट आएगी। ऐसे में उम्मीदवार चयन और सहयोगी दलों की संतुष्टि, दोनों ही सत्ताधारी गठबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व की बैठक के बाद ही सामने आएगा। भाजपा बहुमत से दूर, फिर भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी विपक्षी NDA के पास फिलहाल 24 विधायक हैं, जबकि एक सीट जीतने के लिए 28 मतों की जरूरत है। इसके बावजूद BJP चुनावी मुकाबले से पीछे हटने के मूड में नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और धनबाद के उद्योगपति नंदलाल अग्रवाल के नाम संभावित उम्मीदवारों के रूप में चर्चा में हैं। धनबाद के नंदलाल अग्रवाल उर्फ नंदू अग्रवाल बड़े उद्योगपति हैं। वह चुनाव को मैनेज करने की क्षमता रखते हैं। भाजपा को उम्मीद है कि राजनीतिक परिस्थितियां उसके पक्ष में बन सकती हैं। वहीं जेएलकेएम विधायक जयराम महतो का एक वोट भी दूसरी सीट के समीकरण में अहम माना जा रहा है। ऐसे में क्रॉस वोटिंग, रणनीतिक समर्थन और अंतिम समय के राजनीतिक समीकरण राज्यसभा चुनाव को रोमांचक बना सकते हैं। फिलहाल संख्या बल महागठबंधन के पक्ष में है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन और सीट बंटवारे पर मचा घमासान चुनाव को पूरी तरह राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई बना चुका है। राज्यसभा चुनाव में पैसे का भी जमकर खेल होता है। झामुमो गठबंधन इसे लेकर अभी से आशंकित है।