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भर्ती प्रक्रिया में सुधार की तैयारी, 5 जून तक मांगे जाएंगे सुझाव

भोपाल  राज्य सरकार प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए भर्ती करने वाली दो एजेंसियों के भर्ती नियमों में बदलाव करने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिए मप्र लोक सेवा आयोग और मप्र कर्मचारी चयन मंडल के भर्ती नियमों में बदलाव का ड्राफ्ट तैयार किया है और पांच जून से इसको लेकर प्रदेश के लोगों से सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित नियमों के अनुसार अब मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग को छोड़कर सभी सरकारी भर्तियां कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) के माध्यम से होंगी। नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे और 2013 के पुराने नियमों की जगह लेंगे। सरकार ने 5 जून 2026 तक आम जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। पात्रता परीक्षा और स्कोर कार्ड पर होगी भर्ती नियमों में बदलाव के लिए तैयार ड्राफ्ट में कहा गया है कि अब भर्ती प्रक्रिया “पात्रता परीक्षा” और “स्कोर कार्ड सिस्टम” पर आधारित होगी। ईएसबी हर साल तीन प्रकार की पात्रता परीक्षाएं आयोजित करेगा जो सामान्य पात्रता परीक्षा, तकनीकी पात्रता परीक्षा और शिक्षक पात्रता परीक्षा के रूप में होंगी। पात्रता परीक्षा में तय न्यूनतम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को ही स्कोर कार्ड जारी किया जाएगा, जिसका उपयोग विभिन्न सरकारी नौकरियों में आवेदन के लिए किया जा सकेगा। सामान्य और तकनीकी पात्रता परीक्षा का स्कोर कार्ड रिजल्ट जारी होने वाले वर्ष के बाद अगले दो वर्षों की 31 दिसंबर तक वैध रहेगा, शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवार जीवनभर पात्र माने जाएंगे, लेकिन नौकरी आवेदन के लिए उनका स्कोर कार्ड भी सीमित अवधि तक ही मान्य रहेगा। एक स्कोर से कई भर्तियों में आवेदन नई व्यवस्था के तहत अभ्यर्थियों को बार-बार प्रारंभिक परीक्षाएं नहीं देनी पड़ेंगी। एक बार अच्छा स्कोर आने पर उसी स्कोर कार्ड के आधार पर कई विभागों की भर्तियों में आवेदन किया जा सकेगा। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जिससे भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने का दावा किया गया है। ऐसा होगा परीक्षा पैटर्न सामान्य पात्रता परीक्षा में 100 प्रश्न होंगे, जिन्हें चार हिस्सों में बांटा जाएगा। इसमें सामान्य ज्ञान, करंट अफेयर्स, मध्यप्रदेश सामान्य ज्ञान एवं योजनाएं, गणित, तार्किक क्षमता, डेटा विश्लेषण और कंप्यूटर ज्ञान से प्रश्न पूछे जाएंगे। तकनीकी पात्रता परीक्षा में भी 100 प्रश्न होंगे, जिनमें 25 प्रश्न सामान्य विषयों से और 75 प्रश्न संबंधित तकनीकी विषय से होंगे। पीएससी परीक्षा के नियम तैयार, लागू करने से पहले मांगे सुझाव उधर राज्य शासन ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं को संचालित करने के लिए नए प्रारूप नियमों को तैयार किया है और इन्हें लागू करने से पहले 5 जून 2026 तक सुझाव मांगे गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने बताया कि राज्य शासन द्वारा "मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग परीक्षा नियम 2026" अधिसूचित किया जाना प्रस्तावित है। प्रस्तावित नियमों के प्रारूप विभाग की वेबसाइट gad.mp.gov.in पर उपलब्ध है। प्रस्तावित नियमों के संबंध में यदि किसी व्यक्ति, संस्था या हितधारक को कोई आपत्ति या सुझाव देना हो तो वे 5 जून 2026 तक लिखित रूप में अपने सुझाव ई-मेल sogad1@mp.gov.in पर प्रेषित कर सकते हैं। साथ ही सुझाव gad.mp.gov.in पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से भी विभाग को दिए जा सकते हैं। समयावधि के बाद प्राप्त होने वाले सुझावों पर विचार नहीं किया जाएगा।

ट्विशा मामले में जांच तेज, गिरिबाला सिंह की नियुक्ति भी जांच के घेरे में

भोपाल  देशभर में सुर्खियां बने मॉडल ट्विशा शर्मा डेथ केस में जांच लगातार तेज होती जा रही है। मुख्य आरोपी समर्थ सिंह अब भी फरार है, जबकि उसकी अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हो सकती है। दूसरी ओर, ट्विशा की सास गिरीबाला सिंह को जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। पुलिस ने जहां पति व मुख्य फरार आरोपी समर्थ की गिरफ्तारी पर इनाम बढ़ाकर 30 हजार कर दिया है, वहीं उसकी सास गिरिबाला सिंह को पद से हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश जारी प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने ट्विशा की सास गिरीबाला सिंह को भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश जारी किया है। विभागीय स्तर पर उनकी नियुक्ति की जांच की भी बात कही गई है। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई प्रशासनिक समीक्षा के बाद की गई है।     समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर कल हाईकोर्ट में सुनवाई     घटना के 9 दिन बाद भी मुख्य आरोपी पति फरार     आरोपी की तलाश में 6 पुलिस टीमें और SIT गठित     समर्थ सिंह पर इनाम 10 हजार से बढ़ाकर 30 हजार किया गया     पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में चोट के कई निशान मिलने का दावा     गिरीबाला सिंह को उपभोक्ता आयोग से हटाने की कार्रवाई शुरू     मामले की CBI जांच की मांग को लेकर अलग याचिका की तैयारी आरोपी पति ने हाईकोर्ट में लगाई याचिका दूसरी ओर मॉडल ट्विशा की मौत में मुख्य आरोपी बनाए गए अधिवक्ता समर्थ सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। संभवत: शुक्रवार को इस पर सुनवाई हो सकती है। इसके पूर्व भोपाल जिला अदालत उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुकी है। बता दें कि इसकी मामले में समर्थ की मां को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है। परिजनों के वकील ने आरोप लगाया है कि इस पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और वे जमानत रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट जा रहे हैं।

मध्यप्रदेश बना वन्य जीव संरक्षण का ग्लोबल रोल मॉडल, CM डॉ. यादव का बड़ा दावा

मध्यप्रदेश वैश्विक वन्य जीव संरक्षण का बना रोल मॉडल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव वनस्पति और वन्यजीवों की विविधता हमारी पूंजी, इसे संजोकर रखना हमारा कर्तव्य जल, जंगल और जमीन की उर्वरता बचाने में प्रदेश है देश में नम्बर वन केन्द्र सरकार ने दिया मध्यप्रदेश को चीता स्टेट बनने का अवसर जंगल और राष्ट्रीय उद्यानों के निकट ही बनाए जा रहे हैं वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केंद्रीय वन मंत्री यादव ने एबीएस एंड-टू-एंड वेब पोर्टल का किया शुभारंभ प्रकृति के संरक्षण को केवल नीति नहीं, बल्कि संस्कृति बनाएंगे : केन्द्रीय मंत्री यादव प्रचार साहित्य, नेशनल रिपोर्ट्स का विमोचन कर 5 रुपए का डाक टिकट भी किया लाँच आईआईएफएम में नव स्थापित डेटा ड्रिवन लैब का हुआ लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस पर आईआईएफएम में राज्यस्तरीय कार्यक्रम एवं चीता संरक्षण पर मीडिया वर्कशाप में की सहभागिता भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जैव-विविधता में हमारा प्रदेश, देश में एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में विकसित किया जा रहा है। हमारे पास 'टाइगर स्टेट', 'लेपर्ड स्टेट', 'चीता स्टेट', 'वल्चर स्टेट', 'घड़ियाल स्टेट', 'वुल्फ स्टेट' का टाइटल है। सालों पहले देश की धरती से चीते लुप्त हो चुके थे। हम देश की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के रूप में पहचाने जाने वाले चीतों को प्रदेश की धरती में वापस ले आये हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को चीता स्टेट बनने का गौरव देने के लिए केन्द्र सरकार का आभार जताते हुए कहा कि चीतों ने पालपुर कूनो और गांधी सागर अभयारण्य को अपना घर मान लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में अब कुल 53 चीते हैं। मध्यप्रदेश वैश्विक वन्यजीव संरक्षण का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक रोल मॉडल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस के अवसर पर भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम एवं चीता संरक्षण पर मीडिया वर्कशाप को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा मध्यप्रदेश 'मोगली लैंड' और 'सफेद शेरों की धरती' के नाम से भी जाना जाता है। लगभग 100 साल के बाद मध्यप्रदेश की धरती पर जंगली भैंसे का पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना की गई है। दुर्लभ प्रजाति के 33 कछुए और 53 घड़ियाल कूनो नदी में छोड़े गए हैं। हलाली डेम क्षेत्र में 5 लुप्तप्राय गिद्धों को उनके नैसर्गिंक वातावरण में मुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में 5 हजार से अधिक वनस्पतियां, करीब 500 पक्षियों की प्रजातियां और 180 से अधिक मछलियों की प्रजातियां मौजूद हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तो मध्यप्रदेश के जंगलों में 100 से ज्यादा हाथी भी विचरण कर रहे हैं। कार्यक्रम में केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव, मंत्रालय के केन्द्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार भी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केन्द्रीय वन मंत्री यादव ने एबीएस एंड-टू-एंड वेब पोर्टल का शुभारंभ किया। यह पोर्टल जैव-विविधता संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन एवं वन्य जीव संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता एवं जन-जागरुकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर चीता संरक्षण पर केंद्रित ब्रोशर, भारत की बायोडायवर्सिटी रिपोर्ट-2026 एवं अन्य प्रचार साहित्य का विमोचन कर अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस की स्मृति में डाक विभाग का 'माय स्टैम्प' (5 रुपए का डाक टिकट) भी लाँच किया गया। अतिथियों द्वारा आईआईएफएम में नवस्थापित डेटा संचालित प्रयोगशाला (डेटा ड्रिवन लैब) का लोकार्पण भी किया गया। साथ ही इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस (आईबीसीए) की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म, प्रदेश की जैव-विविधता विरासत स्थलों पर केंद्रित लघु फिल्म, मप्र राज्य जैव-विविधता बोर्ड द्वारा संरक्षित तपोवन भूमि स्थलों पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केंद्रीय वन मंत्री यादव ने प्रदेश के वन विभाग के मैदानी अमले के लिए न्यू बाइक्स एवं रेस्क्यू व्हीकल को हरी झंडी दिखाकर लोकार्पित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आईआईएफएम परिसर में विभिन्न राज्यों के जैव-विविधता बोर्ड द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी के विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आकर्षक स्वागत नृत्य करने वाले जनजातीय कलाकारों में प्रत्येक को इनाम स्वरूप 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस 2026 मध्यप्रदेश में मनाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज का दिन हमें जैव-विविधता के क्षेत्र में काम करने के लिए चिंतन और कार्य करने की प्रेरणा देता है। 'प्रोजेक्ट चीता' विश्व में वन्यजीवों के पुनर्स्थापन का एक चमत्कारिक उदाहरण है। श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों का पुनर्स्थापन कार्य सफलतापूर्वक संपन्न करना एक चुनौती पूर्ण कार्य था। प्रदेश के वन विभाग ने एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए मध्यप्रदेश की धरती पर चीतों का नया घर तैयार किया है। हमारा वन अमला हाथियों के प्रबंधन के लिए बुलेटिन निकालने जैसे नवाचार भी कर रहा है। चंबल और कूनो नेशनल पार्क में घड़ियालों के संरक्षण का कार्य भी तेजी से हो रहा है। मां नर्मदा का वाहन मगर है, इनके संरक्षण और पुनर्वास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। राज्य सरकार ने प्रदेश की धरती पर 100 साल बाद 8 जंगली भैंसों की वापसी कराई है। इससे हमारे कान्हा नेशनल पार्क की जैव-विविधता समृद्ध हुई है। असम सरकार के सहयोग से हमें जंगली भैंसे मिले हैं। दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों का भी संरक्षण किया गया है। भोपाल से छोड़े गए गिद्ध ने उज्बेकिस्तान तक का सफर तय कर लिया है। जल संरक्षण के लिये चलाया जा रहा महाअभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण की दिशा में भी तेजी से कार्य कर रही है। प्रदेश में गुड़ी पड़वा से लेकर गंगा दशहरा तक 3 महीने का जल संरक्षण महाभियान चल रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रदेश में बड़े पैमाने पर कार्य हो रहा है। राज्य में अब तक 3000 करोड़ रुपये की लागत से 56 हजार जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और निर्माण, 827 बावड़ी, 1200 से अधिक तालाब, 212 नदियों में साफ-सफाई के कार्य किए गए हैं। इस महाभियान में प्रदेश के 18 लाख लोगों ने अपनी भागीदारी की है। जल और जंगल के संरक्षण तथा जमीन उर्वरता बचाए रखने में मध्यप्रदेश देश में नंबर वन है। प्रदेश में 2 लाख … Read more

ट्विशा शर्मा का फिर होगा पोस्टमॉर्टम, पति समर्थ सिंह करेगा सरेंडर

भोपाल /जबलपुर जबलपुर स्थित हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा का दोबारा पोस्टमॉर्टम करने की मंजूरी दे दी है. ट्विशा के परिजनों ने शव का दोबारा पीएम कराने के लिए अर्जी दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पुलिस को यह आदेश दिया है।  शादी के पांच महीने बाद हुई ट्विशा की मौत गौरतलब है कि मॉडल ट्विशा शर्मा की मुलाकात अपने पति समर्थ सिंह से एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी. समर्थ पेशे से क्रिमिनल लॉयर है. दिसंबर 2025 में दोनों की धूमधाम से शादी हुई थी, लेकिन शादी के महज 5 महीने बाद ही 12 मई 2026 को ट्विशा की संदिग्ध मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि ट्विशा की सास और पति ने मिलकर उसकी हत्या की है. वह दोबारा शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग कर रहे हैं. इस वजह से वह एम्स से शव भी नहीं ले रहे हैं।   आरोपी समर्थ सिंह के वकील ने अग्रिम जमानत याचिका वापस लेने का फैसला लिया. इस दौरान उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनका मुवक्किल निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार है. इसके साथ ही कोर्ट का पूरा ध्यान अब दूसरे पोस्टमार्टम की याचिका पर केंद्रित हो गया है, क्योंकि न्यायाधीश ने समय की गंभीरता को देखते हुए कहा कि दूसरे पोस्टमार्टम की मांग पर सबसे पहले सुनवाई की जानी चाहिए।  कोर्ट में दूसरे पोस्टमार्टम की मांग को लेकर तीखी बहस देखने को मिली. याचिकाकर्ता की तरफ से जहां दूसरे पोस्टमार्टम की जरूरत पर जोर दिया गया, तो  वहीं दूसरी तरफ दूसरे पक्ष के वकील ने इसका कड़ा विरोध किया।  उन्होंने तर्क दिया कि AIIMS द्वारा किया गया पहला पोस्टमार्टम पर्याप्त है और दोबारा पोस्टमार्टम की मांग करना चिकित्सा बिरादरी का अपमान है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह मांग जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाने और डॉक्टरों की क्षमता पर अविश्वास जताने जैसा है. हालांकि, बहस के बाद कोर्ट ने सेकंड पोस्टमार्टम पर सहमति जता दी है।  कोर्ट में क्या दलील दी गई? ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह की तरफ से पेश होते हुए उनके वकील ने दूसरी बार पोस्टमॉर्टम कराने की मांग का विरोध किया. उन्होंने दलील दी कि AIIMS के डॉक्टरों द्वारा पोस्टमॉर्टम पहले ही किया जा चुका है और इसलिए एक और जांच की क्या ज़रूरत है, इस पर सवाल उठाया।  सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उन डॉक्टरों की ईमानदारी का बचाव किया जिन्होंने पोस्टमॉर्टम किया था, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अगर पीड़ित परिवार को लगता है कि किसी बात को नज़रअंदाज़ किया गया है, तो दूसरी राय ली जा सकती है. उन्होंने कहा, "डॉक्टरों की निष्पक्षता बेमिसाल है, लेकिन अगर पीड़ित परिवार को लगता है कि कुछ छूट गया है, तो दूसरी राय ली जा सकती है।  अंतिम संस्कार में किसी भी तरह की देरी का विरोध करते हुए, गिरिबाला सिंह के वकील ने यह भी दलील दी कि शव को सड़ने के लिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए. वकील ने कहा, "वह हमारे परिवार की बहू थी. उसका अंतिम संस्कार करना हमारा फ़र्ज़ है। 

हर पात्र बच्चे के लिए बनेगा इंडिविजुअल केयर प्लान, आयुक्त निवेदिता का बड़ा निर्देश

प्रत्येक पात्र बच्चे के लिए तैयार होगा इंडिविजुअल केयर प्लान : आयुक्त सुश्री निवेदिता मिशन वात्सल्य के राज्य स्तरीय आईसीपी प्रशिक्षण कार्यशाला हुई भोपाल  आयुक्त महिला एवं बाल विकास सुश्री निधि निवेदिता ने कहा कि इंडिविजुअल केयर प्लान (आईसीपी) केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे के जीवन, उसकी आवश्यकताओं और भविष्य की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों एवं संस्थाओं से कहा कि प्रत्येक पात्र बच्चे के लिए आईसीपी तैयार किया जाना अनिवार्य है तथा समय-समय पर उसका मूल्यांकन और अद्यतन भी किया जाना चाहिए, जिससे बच्चों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं प्रभावी बनी रहें। उन्होंने कहा कि बाल देखरेख संस्थाओं में रह रहे बच्चों के साथ समुदाय में संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए भी आईसीपी अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि हर बच्चे की परिस्थितियां, समस्याएं, क्षमताएं और पुनर्वास की जरूरतें अलग-अलग होती हैं। आयुक्त सुश्री निवेदिता महिला बाल विकास संचालनालय में मिशन वात्सल्य योजना के तहत राज्य स्तरीय इंडिविजुअल केयर प्लान विषय पर आधारित कार्यशाला को संबोधित कर रही थी। सुश्री निवेदिता ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण आईसीपी के माध्यम से बच्चों की शिक्षा, शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श, कौशल विकास, पारिवारिक पुनर्मिलन, सामाजिक पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के लिए योजनाबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जा सकती है। इससे बच्चों के सर्वोत्तम हित के सिद्धांत को व्यवहारिक रूप से लागू करने में सहायता मिलती है और बच्चों को संस्थागत देखरेख पर निर्भर रहने के बजाय परिवार एवं समुदाय आधारित देखरेख की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये अधिकारियों, बाल संरक्षण विशेषज्ञों, बाल देखरेख संस्थाओं के अधीक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभागीय अधिकारियों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण में बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप देखरेख और पुनर्वास की योजनाओं को बेहतर ढंग से तैयार करने पर विस्तार से चर्चा की गई।

25 मई से शुरू होगा नौतपा, मध्यप्रदेश में 10 दिन तक झुलसाएगी तेज लू

भोपाल  मध्यप्रदेश में नौतपा से पहले ही गर्मी ने लोगों की मुसीबत बढ़ा दी है। शुक्रवार को कई जिलों में सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं का असर देखने को मिला। मौसम विभाग ने निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना और सतना में तीव्र लू के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। इन इलाके में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की आशंका है। हालात ये हैं कि सुबह 9 बजे के बाद ही सड़कों पर गर्म हवाएं महसूस होने लगती हैं और दोपहर आते-आते बाजारों में भीड़ कम हो जाती है। भोपाल समेत कई शहरों में लोग केवल जरूरी काम के लिए ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, 25 मई से नौतपा शुरू हो रहा है और इसके बाद अगले 9 से 10 दिन गर्मी अपने चरम पर रहने की संभावना है। प्रदेश के 41 जिलों में लू के लिए चेतावनी जारी की गई है। ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, शिवपुरी, गुना, राजगढ़, विदिशा, सागर, रीवा, सीधी और सिंगरौली जैसे कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। वहीं, भोपाल, उज्जैन, सीहोर, रायसेन, जबलपुर, छिंदवाड़ा और बालाघाट समेत 20 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। यहां तापमान 43 से 45 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। इंदौर, धार, बड़वानी और नर्मदापुरम में भले ही लू की सीधी चेतावनी नहीं दी गई हो, लेकिन उमस और तेज गर्मी लोगों को परेशान कर रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले तीन दिन तक राहत मिलने की उम्मीद कम है। दोपहर 12 से 3 बजे के बीच गर्मी सबसे ज्यादा असर दिखा रही है, और इसी दौरान लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। कहीं 50 डिग्री ना पहुंच जाए?  नौतपा 25 मई से शुरू हो रहा है, लेकिन उससे पहले ही प्रदेश के कई शहरों में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है. ऐसी आशंका है कि कहीं पारा 50 डिग्री तक ना पहुंच जाए. लगातार गर्म हवाओं और सूखी पश्चिमी हवाओं के कारण प्रदेश में राहत की संभावना फिलहाल बेहद कम नजर आ रही है।  मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार नौतपा के शुरुआती 8 से 10 दिन बेहद तीखे रह सकते हैं. उत्तर भारत और मध्य भारत के बड़े हिस्से में बना हाई प्रेशर सिस्टम गर्मी को और खतरनाक बना रहा है. IMD के विस्तारित पूर्वानुमान में साफ कहा गया है कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और विदर्भ क्षेत्र में गंभीर हीटवेव की स्थिति अगले कई दिनों तक बनी रह सकती है. प्रदेश के नौगांव, खजुराहो, दतिया, छतरपुर और टीकमगढ़ जैसे इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं. मौसम विभाग के अनुसार नौगांव में तापमान 47 डिग्री तक पहुंच चुका है जबकि खजुराहो में भी पारा 46 डिग्री के करीब रिकॉर्ड किया गया. गर्म रातें भी लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं क्योंकि न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी ऊपर बना हुआ है।  चार जिलों में रेड अलर्ट, कई शहरों में ऑरेंज वार्निंग IMD और मौसम केंद्र भोपाल के ताजा अलर्ट के मुताबिक प्रदेश के कई हिस्सों में गंभीर लू चलने की आशंका है. बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित माने जा रहे हैं. दतिया, भिंड, छतरपुर और टीकमगढ़ जैसे जिलों में रेड अलर्ट जैसी स्थिति बताई जा रही है. वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर समेत कई शहरों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।  मौसम विभाग की सलाह है कि लोग लगातार पानी पीते रहें और धूप में जाने से बचें। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने और बच्चों-बुजुर्गों का खास ख्याल रखने की सलाह दी गई है। कई शहरों में दोपहर के समय सड़कें लगभग सुनसान नज़र आ रही हैं। ग्वालियर और बुंदेलखंड में गर्म हवाओं का असर अधिक है। वहीं, भोपाल और इंदौर में गर्मी के बीच कभी-कभी बादल छाने और हल्की बूंदाबांदी का भी ट्रेंड चल रहा है, लेकिन इससे उमस और बढ़ गई है। पिछले वर्षों के आंकड़ों पर ध्यान दें तो मई महीने में प्रदेश के बड़े शहरों में रिकॉर्ड तापमान दर्ज हो चुका है। ग्वालियर में पारा 48 डिग्री के पार पहुंच चुका है, जबकि भोपाल और जबलपुर में भी कई बार तापमान 46 डिग्री के आसपास रिकॉर्ड किया गया है। मौसम विभाग का कहना है कि इस बार नौतपा के दौरान प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में तेज गर्मी का लंबा दौर देखने को मिल सकता है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक बाहर निकलना खतरनाक मौसम विभाग ने साफ कहा है कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक बाहर निकलना खतरनाक हो सकता है. लगातार चल रही गर्म हवाओं ने सामान्य जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. कई शहरों में दोपहर के समय सड़कें खाली नजर आ रही हैं. अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, चक्कर और हीट एक्सॉशन के मरीज बढ़ने लगे हैं।  नौतपा में क्यों बढ़ती है गर्मी भारतीय पंचांग के अनुसार सूर्य जब रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है तब नौतपा की शुरुआत मानी जाती है. यह लगभग 9 दिनों की अवधि होती है जिसमें सूर्य की किरणें सीधे धरती पर असर डालती हैं. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान यदि तेज गर्मी पड़ती है तो मानसून सामान्य रहने की संभावना बढ़ती है. हालांकि इस बार चिंता की वजह यह है कि नौतपा शुरू होने से पहले ही तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है. वैज्ञानिकों के अनुसार शुष्क हवाएं, कम नमी और बादलों की अनुपस्थिति मिलकर गर्मी को और तीखा बना रही हैं. उत्तर भारत से आ रही गर्म हवाओं का असर सीधे मध्य प्रदेश पर पड़ रहा है।  22 शहरों में 44 डिग्री के पार पहुंचा पारा मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 22 से ज्यादा शहरों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है. नौगांव सबसे गर्म शहरों में शामिल है. खजुराहो, रीवा, सतना, सागर और ग्वालियर में भी तापमान तेजी से बढ़ा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 72 घंटे सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।  स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी भीषण गर्मी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है. डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग सबसे ज्यादा … Read more

ट्विशा केस में जांच तेज, आरोपी समर्थ की जमानत पर आज होगी सुनवाई

भोपाल  एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत की सीबीआई जांच होगी। मध्य प्रदेश सरकार ने इसके लिए सहमति दे दी है। 20 मई को जब ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा रिटायर्ड सैनिकों के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने पहुंचे थे, तब उन्होंने इसका आश्वासन दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा था कि सरकार परिवार की हर संभव मदद करेगी। अगर कोर्ट दोबारा पोस्टमॉर्टम के आदेश देता है, तो सरकार पार्थिव शरीर को दिल्ली AIIMS तक पहुंचाने की व्यवस्था भी करेगी। वहीं, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने भी मामले की जांच CBI से कराने की मांग उठाई थी। उधर, ट्विशा के पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर आज हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में सुनवाई हो रही है। इस दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने केस डायरी पेश करने के लिए मोहलत की मांग की, तो अदालत ने सुनवाई 2.30 बजे तक स्थगित कर दी है। मामले की सुनवाई जस्टिस ए.के. सिंह की समर वेकेशन बेंच में हो रही है। ट्विशा के परिजन ने जमानत याचिका पर आपत्ति लगाई है। उसके पिता नवनिधि शर्मा ने आरोप लगाए हैं कि समर्थ जुलाई 2023 से अगस्त 2025 तक मध्य प्रदेश सरकार में लीगल एडवाइजर के तौर पर काम कर चुका है। वह फरारी के दौरान केस को प्रभावित कर रहा है। ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर कटारा हिल्स थाना प्रभारी सुनील दुबे को हटाने की मांग की है। गिरिबाला सिंह को भोपाल जिला अदालत से अग्रिम जमानत मिल चुकी है। मामला हाईप्रोफाइल होने के कारण राज्य सरकार भी सक्रिय हो गई है। बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा, सेना के सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर सहित कई पूर्व अधिकारियों ने मंत्रालय में मुलाकात कर न्याय की मांग की।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परिजनों से मुलाकात के बाद कहा कि यदि परिवार चाहता है तो राज्य सरकार मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखेगी। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली एम्स में पोस्टमार्टम कराने का निर्णय अदालत करेगी। यदि कोर्ट अनुमति देता है, तो राज्य सरकार शव को सुरक्षित दिल्ली एम्स पहुंचाने की व्यवस्था करेगी। इधर, ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल को पत्र लिखकर गिरिबाला सिंह को भोपाल जिला उपभोक्ता फोरम बेंच-2 के न्यायाधीश पद से हटाने की मांग की है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि गिरिबाला सिंह पर दहेज हत्या का गंभीर मामला दर्ज है। वर्तमान में वह जिला उपभोक्ता फोरम में न्यायाधीश के पद पर कार्यरत हैं। उपभोक्ता फोरम में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति सरकार द्वारा की जाती है और नियमों के अनुसार कदाचार, गंभीर आरोप या किसी आपराधिक मामले में संलिप्तता सामने आने पर पद से हटाने का प्रावधान है। नवनिधि शर्मा ने राज्यपाल और राज्य सरकार से मांग की है कि दहेज हत्या के मामले में आरोपी बनाए जाने के बाद गिरिबाला सिंह को तत्काल पद से हटाया जाए, ताकि उनकी बेटी को न्याय मिल सके। अदालत ने ट्विशा का शव सुरक्षित रखने को कहा उधर भोपाल की एक अदालत ने बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान ट्विशा शर्मा के शव को सुरक्षित रखने का आदेश दिया। ट्विशा ने पिछले हफ्ते अपने भोपाल स्थित अपने ससुराल में कथित रूप से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। हालांकि महिला के परिजनों ने इस मामले को संदिग्ध बताते हुए उसके ससुराल वालों पर बेटी की हत्या करने का शक जताया है। उनका आरोप था कि ट्विशा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर मारपीट के निशान मिले हैं, जो कि मामले को संदिग्ध बना रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने ट्विशा के दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उनकी इस अर्जी को खारिज कर दिया। शव को सुरक्षित रखने वाली मोर्चरी का पता लगाने को कहा इस बारे में एक आदेश जारी करते हुए JMFC (न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी) अनुदिता गुप्ता ने कहा कि पुलिस को एक पत्र जारी किया जाए, जिसमें उसे निर्देश दिया जाए कि वे मध्यप्रदेश में शवों को सुरक्षित रखने की (-80 डिग्री सेल्सियस तापमान) व्यवस्था वाले मोर्चरी की तुरंत जानकारी प्राप्त करे और बिना किसी देरी के अदालत में इस संबंध में एक लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत करें। भोपाल एम्स में है शव के खराब होने का खतरा दरअसल अदालत ने ऐसा निर्देश से इस वजह से जारी किया, क्योंकि इससे कुछ घंटे पहले ही भोपाल पुलिस ने ट्विशा शर्मा के परिवार से शव के खराब होने की आशंकाओं के मद्देनजर उसे कब्जे में लेने का अनुरोध किया था। पुलिस ने इसकी वजह AIIMS भोपाल में बहुत कम तापमान पर शव को सुरक्षित रखने की सुविधाओं की कमी के कारण शव के सड़ने की आशंका बताई थी। भोपाल एम्स में नहीं है -80 डिग्री के तापमान की सुविधा न पर सुरक्षित रखा गया है। जबकि शव को खराब होने से रोकने के लिए शून्य से 80 डिग्री सेल्सियस (-80 डिग्री) नीचे का तापमान चाहिए और यह सुविधा एम्स भोपाल में नहीं है। ट्विशा के परिजनों को भोपाल में न्याय मिलने की उम्मीद नहीं बता दें कि ट्विशा 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स इलाके स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। इसके बाद पुलिस ने महिला के परिजनों की शिकायत पर मृतका के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु तथा प्रताड़ना का मामला दर्ज किया था। मृतका की सास गिरिबाला सिंह सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं और ट्विशा के परिजनों ने इसी कारणवश उन्होंने भोपाल में बेटी को न्याय नहीं मिलने की आशंका जताई है। अबतक नहीं हुआ है ट्विशा का अंतिम संस्कार इससे पहले एम्स भोपाल की प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शव पर कई चोटों के निशान होने के बारे में बताया गया था, इसी आधार पर मृतका के परिजन बेटी की हत्या होने की आशंका जता रहे हैं। साथ ही मृतका के परिजनों का यह भी आरोप है कि पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई। उनका कहना है कि जिस बेल्ट से ट्विशा के फांसी लगाने की बात कही गई, उसे जांच अधिकारी समय पर एम्स नहीं ले गए, जिसके कारण डॉक्टर उस बेल्ट और गर्दन के निशानों का वैज्ञानिक परीक्षण नहीं कर सके। इसके अलावा परिजनों ने … Read more

‘जीजा, अब क्या करना है…’ चैट से खुला राज, हनीट्रैप गैंग से जुड़ा पुलिसवाला पकड़ा गया

इंदौर मध्य प्रदेश में इंदौर के चर्चित हनीट्रैप 2026 मामले में अब जांच और भी गहरी होती जा रही है। इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने गुरुवार को इंटेलिजेंस शाखा में तैनात हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक विनोद शर्मा पर हनीट्रैप नेटवर्क की साजिश में शामिल होने और आरोपियों को रणनीतिक सलाह देने के गंभीर आरोप हैं। सूत्रों के अनुसार, आरोपी महिलाएं उसे ‘जीजा’ कहकर बुलाती थीं और कथित तौर पर आपत्तिजनक वीडियो, फोटो और चैट शेयर कर आगे की ब्लैकमेलिंग रणनीति पर सलाह लेती थीं। पुलिस अब उसके मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की फोरेंसिक जांच करवा रही है। SIT ने संभाली जांच, पांच मोबाइल जब्त डीसीपी (क्राइम) राजेश त्रिपाठी के अनुसार पूरे मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है। अब तक पांच मोबाइल फोन जब्त किए जा चुके हैं, जिनकी साइबर और फोरेंसिक एक्सपर्ट द्वारा जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क किन-किन नेताओं, कारोबारियों और अफसरों तक पहुंचा था। साथ ही रेशु चौधरी से जुड़े जमीन खरीदी-बिक्री के एक अहम कॉन्ट्रैक्ट को भी जब्त करने की कोशिश की जा रही है। विदेश में पढ़ी रेशु ने बढ़ाईं राजनीतिक नजदीकियां जांच में सामने आया है कि मकरोनिया (सागर) निवासी रेशु चौधरी विदेश में पढ़ाई कर चुकी है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान वह दिल्ली में बड़े नेताओं के संपर्क में आई और बाद में इन्हीं संपर्कों का इस्तेमाल कर मध्य प्रदेश के प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाई।बताया जा रहा है कि उसने राजनीति और हाईप्रोफाइल नेटवर्किंग के जरिये खुद को स्थापित करने की कोशिश की और धीरे-धीरे प्रॉपर्टी कारोबार से भी जुड़ गई। तीन साल में खड़ा हुआ हाईप्रोफाइल नेटवर्क पुलिस के अनुसार इस पूरे गिरोह की कथित मास्टरमाइंड अलका दीक्षित है। श्वेता जैन के साथ आने के बाद नेटवर्क तेजी से फैलता चला गया। UPSC-MPPSC प्रोफाइल से बनाई हाईप्रोफाइल पहचान रेशु सोशल मीडिया प्रोफाइल में खुद को कभी UPSC प्री क्वालिफाइड, तो कभी MPPSC प्री-2016 पास बताती थी। कुछ जगह उसने रेवेन्यू सर्विस में चयनित होने तक का दावा किया था। वर्ष 2016 में उसने “ब्रह्मपुत्र IAS एकेडमी” नाम से कोचिंग संस्थान भी शुरू किया था, जो बाद में बंद हो गया। राजनीति में एंट्री की तैयारी, लेकिन सपना अधूरा सूत्रों के मुताबिक, भोपाल के एक बड़े भाजपा नेता के संपर्क में आने के बाद रेशु ने नरयावली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी थी। उसने क्षेत्र में बड़े-बड़े होर्डिंग लगवाकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराई थी। हालांकि 2018 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रदीप लारिया को प्रत्याशी बना दिया और रेशु की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं अधूरी रह गईं। अब SIT पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस हाईप्रोफाइल हनीट्रैप मामले में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

जैविक खेती के लिये अध्ययन दल भेजे दंतेवाड़ा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनजातीय क्षेत्रों में जैविक खेती को दें प्रोत्साहन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जैविक खेती के लिये अध्ययन दल भेजे दंतेवाड़ा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय छात्रावासों में शैक्षणिक एवं आवासीय प्रबंधन करें बेहतर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव विशेष पिछड़ी जातियों के समग्र विकास के लिये करें सतत कार्य मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में की जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में जैविक खेती को प्रोत्साहन दिया जाये। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में भी जनजातीय कृषकों द्वारा जैविक खेती की जा रही है। इसका अध्ययन करने के लिए मध्यप्रदेश से दल भेजा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा बैठक में यह बात कही। बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. विजय शाह, मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित विद्यालयों, आश्रम और छात्रावासों में शिक्षा और रहन सहन की गुणवत्ता बेहतर करें। जनजातीय क्षेत्रों में परंपरागत सामाजिक मूल्यों के संरक्षण और समग्र विकास के लिए समाज सेवी संगठनों का भी सहयोग लें। जनजातीय क्षेत्र में शासन के विभिन्न विभाग मिलकर कार्य करें। कन्वर्जेंस से जन सुविधाओं का विकास सुनिश्चित किया जाये। जनजातीय समाज में पशुपालन को बढ़ावा दें और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में इनका सहयोग ले। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की विशेष पिछड़ी जनजातियों बैगा, भारिया और सहारिया के समग्र विकास के लिए सतत् कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिये आवश्यक कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया है कि हाई स्कूल एवं हायर सेकंडरी परीक्षा परिणाम 2026 में सर्वश्रेष्ठ 10 ज़िलों में से 7 जनजातीय जिले शामिल हैं। दिसम्बर 2023 से अब तक जनजातीय वर्ग के कक्षा 9 एवं 10 के कुल 3 लाख 65 हज़ार विद्यार्थियों को 137 करोड़ 52 लाख रुपये की छात्रवृत्ति का भुगतान किया गया है। इसी अवधि में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 4 लाख 28 हज़ार विद्यार्थियों को 673 करोड़ 64 लाख रुपये की राशि भुगतान की गई है। विभाग द्वारा 2671 छात्रावास और आश्रम शालाओं का संचालन किया जा रहा है। मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिला मुखिया के बैंक खाते में प्रतिमाह 15 सौ रुपये की राशि शासन की आहार अनुदान योजना में प्रदान की जा रही है। दिसम्बर 2023 से अभी तक में 2 लाख 37 हजार 550 महिलाओं को कुल 432 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं।  

मध्यप्रदेश बनेगा ‘मिल्क कैपिटल’, मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले- प्रयास ला रहे रंग

मध्यप्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने के प्रयास हो रहे फलीभूत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव दुग्ध उत्पादकों को गत वर्ष से 15 प्रतिशत अधिक हुआ भुगतान प्रतिदिन हो रहा 9.67 लाख किलोग्राम दुग्ध संकलन 11 प्रतिशत हुई वृद्धि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पशुपालन और डेयरी विभाग के कार्यों की समीक्षा की भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने के प्रयास फलीभूत होने लगे हैं। समन्वित प्रयासों से मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन बढ़ाते हुए लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार है। प्रदेश में प्रतिदिन 9.67 लाख किलोग्राम औसत दुग्ध  संकलन की उपलब्धि दर्ज हुई है।  यह गत वर्ष से 11 प्रतिशत अधिक है। इस उपलब्धि को निरंतर बढ़ाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में पशुपालन विभाग  की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में बताया गया कि गत छह माह में 11 लाख किलोग्राम से अधिक औसत प्रतिदिन दुग्ध संकलन हुआ है। दुग्ध संघों ने दुग्ध उत्पादक किसानों को गत वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत से अधिक राशि का भुगतान किया है। पशुपालन और डेयरी विकास राज्य मंत्री  (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, मुख्य सचिव अनुराग जैन और वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनू योजना, आचार्य विद्यासागर गौसंवर्धन योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम, मवेशियों के स्वास्थ्य की बेहतर देखरेख,चारा उत्पादन और उपलब्धता,पशु पोषण,स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना, क्षीरधारा ग्राम योजना,ब्रीडर एसोसिएशन,दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान, गोरस ण्ेप, राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के कार्यों और एनडीडीबी द्वारा दिए जा रहे सहयोग की विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त की।   दुग्ध उत्पादन में नम्बर वन बनाना है प्रदेश को मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरे क्रम पर है। हमारा लक्ष्य प्रथम क्रम पर आने का है। इस दिशा में प्रारंभ किए गए प्रयास सफल हो रहे हैं। प्रदेश में 1752 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है।  ग्वालियर डेयरी प्लांट के आधुनिकीकरण, शिवपुरी डेयरी प्लांट को पुनर्जीवन देने, इंदौर में 3 लाख लीटर रोजाना क्षमता वाले मिल्क पाउडर प्लांट की शुरूआत जैसे ठोस कार्य हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि  निश्चित ही इन प्रयासों से प्रदेश को दुग्ध उत्पादन और विक्रय के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में सहयोग मिला है। ये प्रयास जारी रहना चाहिए। बीते वर्ष दुग्ध उत्पादकों को किया 1609 करोड़ रूपये का भुगतान प्रदेश में श्वेत क्रांति लाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मार्गदर्शन में हुए कार्यों से वर्ष 2024-25 में 1398 करोड़ की तुलना में वर्ष 2025-26 में दुग्ध उत्पादकों को 1609 करोड़ रुपए की राशि के भुगतान (गत वर्ष से 15 प्रतिशत अधिक) में सफलता मिली है। दुग्ध उत्पादकों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के लिए अपनाई गई प्रणाली से विभिन्न दुग्ध संघों में खरीद मूल्य में 2.50 से 8.50 प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। किसानों की आय बढ़ने से उनके जीवन में समृद्धि आ रही है। सांची ब्रांड को सुदृढ़ करने में मिली कामयाबी बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में विपणन और ब्रांड सुदृढ़ीकरण के अंतर्गत सांची ब्रांड को लोकप्रिय बनाते हुए विभिन्न उत्पादों की बिक्री बढ़ाने में भी सफलता मिली है। मूल्यसंवर्धित उत्पादों में घी की बिक्री 17प्रतिशत बढ़ी है। पनीर, दही, छाछ और फ्लेवर्ड दूध की बिक्री में भी वृद्धि दर्ज हुई है। बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग के प्रयास भी किए गए। बैठक में प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।