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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कमला पार्क स्थित शनि मंदिर में पूजा-अर्चना की

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनि जयंती के अवसर पर शनिवार को कमला पार्क स्थित शनि मंदिर में दर्शन किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनि मंदिर और हनुमान मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना की और मंदिर में आए अनके दर्शनार्थियों से भी भेंट की । उन्होंने श्रृद्धालुओं और बच्चों के साथ सेल्फी भी खिंचवाई। इस अवसर विधायक श्री भगवान दास सबनानी के अलावा श्री राहुल कोठारी और अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

फूल, कांटे, पत्ती, छिलके, बीज, छाल, जड़ सब के मिलते अच्छे दाम किसानों के लिए है वरदान

भोपाल  मध्यप्रदेश के नीमच जिले की हर्बल मंडी प्रदेश के औषधीय फसलों के उत्पादक किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। यह देश की एक मात्र मंडी है जहां कांटे, फूल, पत्ती, छिलके, बीज, छाल, जड़ सब बिकते हैं। किसानों को विभिन्न औषधीय फसलों के 500 रूपये से लेकर 2 लाख रूपये प्रति क्विंटल तक भाव मिल जाते हैं। नीमच मंडी की प्रसिद्ध‍ि देखते हुए गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान अपनी फसलें लेकर यहां आ रहे हैं। अप्रैल माह तक मंडी की भरपूर आवक बनी रहती है जो मई के आखरी सप्ताह तक कम होने लगती है। किसानों को निराश नहीं होना पड़ता। हर प्रकार की जड़ी-बूटी बिक जाती है। मुख्य मंडी प्रांगण में 16 शेड हैं। यह एक मात्र मंडी है जहां 40−50 प्रकार के औषधीय पौधों की खरीदी बोली लगाकर होती है। मसाला फसलों की खरीदी करने वाली देश की एक मात्र सबसे बड़ी मंडी है। श्री नीलेश पाटीदार नीमच के बड़े काश्तकार हैं। उनकी 45 एकड जमीन है। परिवार में 12 सदस्य हैं। वे पिछले दो-तीन सालों से मसाला फसलों की खेती कर रहे हैं। वे बताते हैं कि इसबगोल, इरानी अकरकारा, चिरायता, आजवाइन, किनोवा, चियासीड, तुलसी बीज जैसी फसलों के बहुत अच्छे दाम मिल जाते हैं। लहसून के भी अच्छे दाम मिलते हैं। नीलेश को इस बात की प्रसन्नता है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव औषधीय फसलों के उत्पादन के लिये प्रोत्साहित कर रहे हैं। वे कहते हैं कि सरकार जड़ी-बूटी की खेती के तौर-तरीकों के संबंध में अच्छी ट्रेनिंग दिलवायेगी तो अच्छे परिणाम मिलेंगे। फिलहाल सरकार की ओर से हर जरूरी सहूलियतें मिल रही हैं। मदद सरकार की और मेहनत हमारी। जड़ी-बूटी उगाने वाले किसानों के लिये नीमच मंडी एक बड़ा सहारा है। श्री प्रहलाद सिंह रतलाम जिले के आजमपुर डोडिया गांव में रहते हैं। उन्हें अश्वगंधा और अकरकारा बीज बेचने के अच्छे दाम मिले हें। मंडी में समय पर बोली लग जाती है और आसानी से फसल बिक जाती है। किसानों को जरा सी भी परेशानी नहीं होती। मंडी के सब लोगों का व्यवहार बहुत अच्छा है। सरकार ने हमारे जैसे छोटे और मझौले किसानों के लिए मंडी में अच्छी व्यवस्थाएं करा दी हैं। श्री पंचम सिंह भी इसी गांव के किसान है और आजवाइन, अश्वगंधा लेकर आते हैं। उन्हें तत्काल भुगतान हो जाता है। मंडी की व्यवस्थाएं बहुत अच्छी हो गई हैं। वे बताते हैं कि अब मंडी की प्रसिद्ध‍ि दूर-दूर तक फैल गई है। गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र , उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान लंबी दूर तय कर यहां माल जाते हैं। अच्छी तुलाई और अच्छे दाम और तत्काल भुगतान के कारण सब यहां आना पसंद करते हैं। इसबगोल, अश्वगंधा, कलौंजी, सतावारी, सफ़ेद मूसली, केसर, सर्पगंधा, अकलकारा जड, जैसी फसलों के दाम ज्यादा है और मांग भी हमेशा बनी रहती है। मंडी की विशेषताओं की चर्चा करते हुए मंडी सचिवउमेश बसेडिया शर्मा बताते हैं कि समय पर नीलामी, गुणवत्तापूर्ण तुलाई और भुगतान की व्यवस्था किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। किसानों के हित में निरंतर सुविधाएं बढाई जा रही हैं। वित्तीय प्रबंधन निरंतर सुधरा है। वर्ष 2024−25 में 64.16 लाख क्विंटल और 2025−26 में 72.40 क्विंटल आवक हुई थी। वे बताते हैं कि मंडी ने किसानों के हित की सभी व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरूस्त कर दिया है। राष्ट्रीय पादप बोर्ड ने साढे पांच करोड़ रूपये का अनुदान भी मंडी की अधोसंरचनात्मक गतिविधियों के लिये उपलब्ध कराया है। इलेक्ट्रानिक नाप-तौल और सीधे व्यापारियों के गोडाउन में पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। यह मंडी प्रांगण 10.9 हेक्टेयर में फैला है। करीब 1100 लाइसेंसधारी व्यापारी इससे जुडे हैं और 150 से ज्यादा तुलावटी उपलब्ध रहते हैं। औषधीय फसलों के उत्पादन में देश में आगे मप्र मध्यप्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश में 46 हजार 837 हैक्टेयर क्षेत्र में औषधीय फसलों ईसबगोल, सफेद मूसली, कोलियस व अन्य फसलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में लगभग सवा लाख मीट्रिक टन औषधीय फसलों का उत्पादन हुआ है। देश और विदेश में औषधीय फसलों की बढ़ती मांग से किसान इन फसलों की ओर आकर्षित हुए हैं। देश में औषधीय फसलों का 44 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश में उत्पादित होता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के साथ किसानों को अनुदान और अन्य सहूलियतें दी जा रही है। औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए 20 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक का अनुदान देती है। औषधीय पौधों की खेती और संग्रह से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। प्रदेश में प्रमुख रूप से अश्वगंधा, सफेद मूसली, गिलोय, तुलसी और कोलियस जैसी कई औषधीय फसलों का उत्पादन होता है।  

पुलिस एवं राजस्व विभाग के तीन अधिकारी तत्काल प्रभाव से निलंबित

भोपाल  देवास जिले की टोंकखुर्द तहसील के ग्राम टोंककला स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुई विस्फोट एवं आगजनी की घटना के मामले में पुलिस एवं राजस्व विभाग के तीन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार सोनकच्छ, जिला-देवास की अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस)  दीपा मांडे को निलंबित किया गया है। आयुक्त उज्जैन संभाग से प्राप्त प्रतिवेदन और पुलिस महानिदेशक की अनुशंसा के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। आदेश में उल्लेख किया गया है कि संबंधित अधिकारी द्वारा शासन स्तर से समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुरूप फैक्ट्री संचालन संबंधी निरीक्षण नहीं किए गए। वरिष्ठ कार्यालय को आवश्यक प्रतिवेदन भी प्रेषित नहीं किए गए। शासन ने इसे कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही एवं उदासीनता माना है। इसी क्रम में संभाग आयुक्तआशीष सिंह द्वारा टोंकखुर्द के एसडीएमसंजीव सक्सेना एवं टप्पा चिडावद के नायब तहसीलदाररवि शर्मा को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। जारी आदेश में कहा गया है कि विस्फोटक सामग्री से संबंधित प्रकरणों में शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रशासनिक निरीक्षण एवं निगरानी नहीं की गई। मामले में गंभीर लापरवाही पाई गई। सभी अधिकारियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि के दौरान सुश्री दीपा मांडे का मुख्यालय पुलिस मुख्यालय, भोपाल निर्धारित किया गया है।संजीव सक्सेना एवंरवि शर्मा का मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय, देवास रहेगा। सभी अधिकारियों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता रहेगी।               

नवजात शिशुओं की डिस्चार्ज दर 82.3 प्रतिशत पर पहुँची

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सशक्त एवं उन्नत बनाया जा रहा है। प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ ही उनकी सतत एवं सशक्त निगरानी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे आमजन को गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधाएं समय पर उपलब्ध हो सकें। महिला एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार द्वारा आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना, विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं एवं प्रभावी मॉनिटरिंग तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। इन प्रयासों से प्रदेश में नवजात एवं मातृ स्वास्थ्य संकेतकों में सतत सुधार दर्ज किया जा रहा है। नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों का सशक्त संचालन राज्य में जन्म के समय कम वजन वाले, समय पूर्व जन्मे एवं जन्म के समय गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के बेहतर उपचार और नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयाँ (एसएनसीयू) प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं। इन इकाइयों से नवजात शिशुओं को विशेषज्ञ उपचार, आधुनिक चिकित्सा उपकरण एवं प्रशिक्षित चिकित्सकीय देखरेख उपलब्ध कराई जा रही है। उपचार एवं डिस्चार्ज दर में उल्लेखनीय वृद्धि वर्ष 2024-25 की तुलना में वित्तीय वर्ष 2025-26 में नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों के प्रदर्शन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 24-25 में जहाँ 1 लाख 29 हजार 212 नवजात शिशुओं को उपचार प्रदान किया गया था, वहीं वर्ष 25-26 में यह संख्या बढ़कर 1 लाख 34 हजार 410 तक पहुँच गई है। साथ ही नवजात शिशुओं की सफलतापूर्वक डिस्चार्ज दर भी अब तक के सर्वोत्तम स्तर 82.3 प्रतिशत पर पहुँच गई है। राज्य में संचालित 62 एसएनसीयू में इस वर्ष 1 अप्रैल से 15 मई 2026 तक कुल 15 हजार 54 नवजात शिशुओं को उपचारित किया गया, जिनमें से 12 हजार 818 नवजात शिशुओं को सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया। एसएनसीयू में 85.2 प्रतिशत डिस्चार्ज दर राष्ट्रीय औसत से अधिक दर्ज की गई है। इसके साथ ही लामा दर मात्र 2.12 प्रतिशत, रेफरल दर 4.2 प्रतिशत एवं मृत्यु दर 8.29 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत से कम है। यह उपलब्धि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण नवजात चिकित्सा सेवाओं एवं प्रभावी उपचार प्रबंधन को दर्शाती है। बिस्तरों की संख्या में वृद्धि से उपचार क्षमता बढ़ी राज्य शासन द्वारा नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों में उपलब्ध बिस्तरों की संख्या में भी वृद्धि की गई है। वर्ष 24-25 में जहाँ कुल 1654 बिस्तर उपलब्ध थे, वह अब बढ़कर 1770 हो गए हैं। इससे अधिक संख्या में गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। आधुनिक उपकरणों एवं विशेषज्ञ उपचार की उपलब्धता राज्य सरकार गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के उपचार के लिये अत्याधुनिक एवं समर्पित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य की एसएनसीयू इकाइयों में जटिल एवं गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के उपचार के लिये वेंटिलेटर, सी-पैप, निर्बाध ऑक्सीजन, फोटोथेरेपी सहित आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। साथ ही, फैसिलिटी बेस्ड न्यूबोर्न केयर (एफबीएनसी) में प्रशिक्षित चिकित्सकों एवं नर्सिंग ऑफिसर्स द्वारा वैज्ञानिक एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान किया जा रहा है। इन इकाइयों में भर्ती नवजात शिशुओं को आवश्यकता अनुसार वेंटिलेटर सपोर्ट, सी-पैप, फोटोथेरेपी एवं ऑक्सीजन सपोर्ट उपलब्ध कराया जा रहा है तथा एंटीबायोटिक के तार्किक उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही सर्फ़ैक्टेंट एवं कैफीन साइट्रेट जैसी आधुनिक औषधियों के उपयोग से समय पूर्व जन्मे गंभीर नवजात शिशुओं का उपचार कर जीवन संरक्षित किया जा रहा है। इन इकाइयों में भर्ती लगभग 8 प्रतिशत नवजात शिशुओं को वेंटिलेटर सपोर्ट, 37 प्रतिशत को फोटोथेरेपी, 49 प्रतिशत नवजात शिशुओं को तार्किक ऑक्सीजन तथा 47 प्रतिशत नवजात शिशुओं को तार्किक एंटीबायोटिक उपचार प्रदान किया गया। एनबीएसयू के माध्यम से उप जिला स्तर पर सशक्त नवजात उपचार सेवाएं राज्य में संचालित 200 एनबीएसयू (न्यूबॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट) के माध्यम से भी नवजात शिशुओं को प्रभावी उपचार एवं स्थिरीकरण सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस वर्ष 1 अप्रैल से 15 मई 2026 तक 2 हजार 241 नवजात शिशुओं को उपचार कर सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया है। एनबीएसयू इकाइयों के माध्यम से उच्च जोखिम वाले नवजात शिशुओं को स्थिरीकरण सेवाओं के साथ-साथ ऑक्सीजन सपोर्ट एवं फोटोथेरेपी जैसी आवश्यक उपचार सुविधाएं उप जिला स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे गंभीर स्थिति वाले नवजात शिशुओं को प्रारंभिक स्तर पर ही समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल रहा है, जिससे उनकी जीवन रक्षा एवं बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित हो रहे हैं। एमएनसीयू : “जीरो सेपरेशन” अवधारणा की अभिनव पहल माँ एवं नवजात शिशु को एक साथ गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार के नवीन दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में एमएनसीयू (मदर एंड न्यू बोर्न केयर यूनिट) की अवधारणा को भी विस्तार दिया जा रहा है। यह व्यवस्था “जीरो सेपरेशन” सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें माँ और नवजात शिशु को अलग नहीं किया जाता। इससे स्तनपान, कंगारू मदर केयर तथा नवजात की समुचित देखभाल को बढ़ावा मिलता है। यह पहल विशेष रूप से कम वजन एवं समय पूर्व जन्मे शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रही है। प्रदेश में 23 एमएनसीयू संचालित प्रदेश में वर्तमान में 23 एमएनसीयू प्रारंभ किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से माताओं एवं नवजात शिशुओं को संवेदनशील, सुरक्षित एवं समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित हो तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सके। मातृ दुग्ध इकाई (सीएलएमसी) से नवजात शिशुओं को जीवनदायी पोषण प्रदेश सरकार नवजात शिशु को समय पर सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराने के लिए सतत प्रयास कर रही है। कम वजन एवं बीमार नवजात शिशुओं को बेहतर पोषण एवं सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने के लिए मातृ दुग्ध इकाई से नवजातों को जीवनदायी पोषण दिया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में इंदौर एवं भोपाल स्थित 2 क्रियाशील सीएलएमसी (कॉम्प्रहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर) इकाइयों के माध्यम से 1,031 स्वैच्छिक माताओं द्वारा 241.6 लीटर मातृ दुग्ध दान किया गया। दान किए गए इस मातृ दुग्ध को वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रूप से पाश्चुरीकृत कर 1,159 कमज़ोर एवं बीमार भर्ती नवजात शिशुओं को कुल 282.11 लीटर सुरक्षित … Read more

राजगढ़ में हैरान करने वाला मामला: नाबालिग को लेकर चली ‘झगड़ा प्रथा’, पुलिस थाने के बाहर तय हुई 20 लाख की डील

 राजगढ़ डिजिटल इंडिया के इस दौर में अगर आपको लगता है कि बाल विवाह और 'झगड़ा प्रथा' जैसी कुप्रथाएं सिर्फ इतिहास के पन्नों या दूर-दराज के जंगलों तक सीमित रह गई हैं, तो राजगढ़ जिले के खिलचीपुर से आई यह तस्वीर आपकी आंखें खोल देगी। यहाँ कानून के रखवालों की नाक के ठीक नीचे, थाने के सामने स्थित गायत्री मंदिर परिसर में घंटों तक एक ऐसी पंचायत चली, जिसका पूरा फोकस सिर्फ और सिर्फ एक 16 साल की नाबालिग लड़की का सौदा करने और 'झगड़ा' की रकम तय करने पर था। सबसे शर्मनाक बात यह कि थाने के 'जिम्मेदारों' को इसकी भनक तक नहीं लगी (या उन्होंने देखना जरूरी नहीं समझा)। फ्लैशबैक: 6 साल की उम्र में तय हो गया था 'भविष्य' मामले की जड़ें 10 साल पुरानी हैं। खिलचीपुर थाना क्षेत्र के ग्राम रघुनाथपुरा की रहने वाली इस मासूम की शादी महज 6 साल की उम्र में छीपीपुरा गांव के एक लड़के से कर दी गई थी। बचपन का वो बाल विवाह आज इस लड़की के लिए जी का जंजाल बन चुका है। एक 'फोटो' और शुरू हो गया 20 लाख का बवंडर कुछ दिन पहले लड़की के मायके में एक शादी समारोह था, जहाँ उसने अपने एक रिश्तेदार के साथ एक सामान्य फोटो खिंचवाई। यह फोटो किसी तरह लड़की के ससुराल पक्ष तक पहुंच गई और इसे 'नाक का सवाल' बना लिया गया। ससुराल पक्ष की जिद: "लड़की को तुरंत हमारे घर (ससुराल) भेजो।" मायके पक्ष की दलील: "लड़की अभी 16 साल की नाबालिग है, 18 साल पूरे होने से पहले विदाई नहीं करेंगे।" बस, इसी बात पर विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्ष शिकायत करने थाने पहुंचे। लेकिन थाने के भीतर जाने के बजाय, थाने के ठीक सामने ही पंचों ने अपनी 'अदालत' (पंचायत) लगा दी। नाबालिग के अधिकारों पर 'झगड़ा प्रथा' भारी घंटों चली इस पंचायत में न तो किसी को इस बात की चिंता थी कि बाल विवाह कानूनन अपराध है, और न ही किसी को उस 16 साल की बच्ची के भविष्य और अधिकारों की परवाह थी। पूरा फोकस इस बात पर था कि 'झगड़ा' (सहमति या अलगाव के बदले दी जाने वाली सामाजिक रकम) कैसे तय हो। लड़की के भाई ने आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष के लोग उसकी बहन को जबरन ले जाने पर अड़े हैं और ऐसा न करने के बदले 20 लाख रुपये की मोटी रकम मांग रहे हैं। अंजाम: पंचायत बेनतीजा, अब आगजनी की धमकी! जब घंटों की सिरपच्ची के बाद भी बात नहीं बनी और पंचायत बेनतीजा समाप्त हो गई, तो लड़के पक्ष के लोग कथित तौर पर कानून हाथ में लेने और आगजनी करने की धमकी देते हुए वहां से चले गए। बड़ा सवाल: थाने के ठीक सामने समाज को दीमक की तरह चाट रही कुप्रथाओं का यह तमाशा होता रहा, धमकी भरे अल्टीमेटम दिए गए, लेकिन पुलिसिया सिस्टम मूकदर्शक बना रहा। अब देखना यह है कि क्या राजगढ़ प्रशासन इस होनहार नाबालिग को इंसाफ दिला पाता है या कुप्रथाओं के आगे कानून ऐसे ही नतमस्तक रहेगा?  

लोकायुक्त का शिकंजा, घूस लेते पटवारी पकड़ा गया

रीवा लोकायुक्त संभाग रीवा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पटवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के निर्देश एवं डीआईजी मनोज सिंह के मार्गदर्शन में की गई। जानकारी के अनुसार, ग्राम खजुआ कला निवासी कमलेश पटेल ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें बताया गया कि सीमांकन कार्य में भूमि की सीमा बरकरार रखने के एवज में हल्का पटवारी मनोज पांडे द्वारा 15 हजार रुपये रिश्वत मांगी जा रही है। सत्यापन के दौरान आरोपी 10 हजार रुपये पहले ही ले चुका था और शेष 5 हजार रुपये की मांग कर रहा था। लोकायुक्त टीम ने शुक्रवार को रीवा के राजीव मार्ग निराला नगर में जाल बिछाकर आरोपी पटवारी को 5 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ ट्रैप कर लिया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई का नेतृत्व डीएसपी प्रवीण सिंह परिहार ने किया। टीम में निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया सहित 12 सदस्यीय दल शामिल रहा।

एक्शन मोड में CEO, दो पंचायत सचिवों को किया सस्पेंड

ग्वालियर मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जिला पंचायत CEO ने बड़ी कार्रवाई की है। एक साथ दो पंचायत सचिवों को निलंबित कर दिया। सरकारी कार्यों में लापरवाही एवं बिना अनुमति लंबे समय तक अनुपस्थित रहने पर यह कार्रवाई की गई है। जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत कल्याणी के सचिव रामलखन गुर्जर ने स्व. सुरेश जाटव का मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के एवज में अवैध राशि मांगने का आरोप लगा है। वहीं, ग्राम पंचायत आरोली के सचिव गौतम सिंह कौरव को लंबे समय से अनुपस्थित रहने की शिकायत पर निलंबित किया गया है। सरपंच ने उनके खिलाफ शिकायत की थी। जिला पंचायत CEO सोजान सिंह रावत ने दोनों मामलों में निलंबन आदेश जारी कर दिए हैं। इस कार्रवाई से दोनों ग्राम पंचायत में हड़कंप की स्थिती बनी है।

हाई कोर्ट फैसले के बाद Mohan Yadav बोले- अयोध्या की तर्ज पर संवारा जाएगा भोजशाला परिसर

भोपाल  लंबे समय से चल रहे धार की भोजशाला विवाद पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है वहीं कोर्ट ने इसे वाग्देवी मंदिर माना है. जहां सनातन समुदाय में इस फैसले से खुशी का माहौल है वहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस खुशी को दोगुना कर दिया है. हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री ने एक कहा है कि इस जगह पर अयोध्या की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. राज्य सरकार ने संकेत दे दिया है कि वह पूरे धार क्षेत्र को अयोध्या मॉडल पर विकसित करने की तैयारी में है।  बता दें कि भोजशाला पर शुक्रवार को दिए गए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा- हमने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर विचार किया है. ASI एक्ट के प्रावधानों के साथ-साथ अयोध्या मामले को भी आधार मानकर फैसला सुनाया है और भोजशाला को मूल चरित्र से मां सरस्वती का मंदिर माना है. इस फैसला का राज्य सरकार ने खुलकर स्वागत किया है।  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंटरव्यू में कहा है कि राजधानी भोपाल स्थित भोजशाला को अयोध्या की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट से सरकार को बड़ा सहयोग मिला है और अब सरकार भोजशाला को भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम करेगी।  उन्होंने कहा कि भोजशाला मामले में कोर्ट का फैसला आने के बाद सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ गई है. उन्होंने कहा कि जैसे अयोध्या में भगवान राम मंदिर के निर्माण के बाद वहां का विकास हुआ, उसी तरह भोजशाला क्षेत्र का भी समग्र विकास किया जाएगा. सीएम मोहन यादव ने साफ कहा कि दोनों पक्ष से बातचीत कर रास्ता निकाला जाएगा और धर्म की आड़ में माहौल बिगाड़ने वालों पर सख्ती की जाएगी।  क्या मुस्लिम पक्ष को दी जाएगी जमीन उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के हर आदेश का पालन होगा. दोनों पक्षों के धर्म गुरुओं से बात करके रास्ता निकालेंगे. अगर मुस्लिम पक्ष मस्जिद बनाने के लिए जमीन चाहेगा तो हम उस पर भी जरूर विचार करेंगे।  माता वाग्देवी की प्रतिमा को वापस कब कर लाएंगे? पीएम मोदी अब तक देश की 1200 धरोहर वापल ला चुके हैं. उनसे मिलकर आग्रह करेंगे कि ब्रिटिश म्यूजियम में रखी वाग्देवी की मूर्ति के लिए केंद्र स्तर से प्रयास हो. प्रयास करेंगे कि मूर्ति जल्दी मंदिर में स्थापित हो…

भोजशाला में बदला माहौल! HC के आदेश के बाद हुई मां वाग्देवी की पूजा, भक्त बोले- अब बिना रोक-टोक दर्शन

धार  मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित किए जाने के बाद शनिवार को यहां पूजा-अर्चना शुरू हो गई। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा भोजशाला-कमाल मौला विवाद पर फैसला सुनाए जाने के बाद हिंदू पक्ष में खुशी का माहौल है। फैसले के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला परिसर पहुंचे और विधि-विधान से पूजा की।  हाईकोर्ट के फैसले के बाद पहली बार हुई पूजा शनिवार सुबह भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों के साथ श्रद्धालु भोजशाला परिसर में एकत्र हुए। यहां पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला परिसर में यह पहली पूजा मानी जा रही है। भोजशाला परिसर में पूजा के दौरान प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए परिसर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस और प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। हाईकोर्ट ने भोजशाला को माना मंदिर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित किया और हिंदू पक्ष को वहां पूजा करने का अधिकार दिया। अदालत ने उन याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया, जिनमें भोजशाला परिसर हिंदुओं को सौंपने और परिसर में मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने से रोकने की मांग की गई थी। शुक्रवार को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने उस पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को भोजशाला परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। भोजशाला फैसले पर उषा ठाकुर का दिग्विजय सिंह पर हमला, बोलीं- तुष्टिकरण की राजनीति करते रहे धार भोजशाला को लेकर आए न्यायालय के फैसले के बाद पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह के शासनकाल में भोजशाला आंदोलन से जुड़े लोगों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हुए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय हिंदू संगठनों और आंदोलनकारियों की आवाज दबाने की कोशिश की गई थी. उषा ठाकुर ने कहा कि दिग्विजय सिंह हमेशा से तुष्टिकरण की राजनीति करते रहे हैं और अल्पसंख्यक वोट बैंक की राजनीति के कारण आज भी हाई कोर्ट के फैसले पर बयानबाजी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि भोजशाला हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और वर्षों पुराने संघर्ष के बाद अब न्यायपालिका से न्याय मिला है. पूर्व मंत्री ने कहा कि बरसों पुराना सपना अब पूरा हुआ है. मां सरस्वती और मां वाग्देवी का आशीर्वाद समाज को मिला है. उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि एक मंदिर को मंदिर कहलाने में इतना लंबा समय गुजर गया. हालांकि अब अदालत के फैसले ने सत्य को सामने ला दिया है और सत्य की जीत हुई है. उषा ठाकुर ने कहा कि दिग्विजय सिंह जैसे नेता अपने वोट बैंक की राजनीति के कारण इस तरह के बयान देते रहेंगे, लेकिन हिंदू समाज की आस्था भोजशाला से जुड़ी है और अब यहां प्रतिदिन पूजा होगी. उन्होंने कहा कि समाज लंबे समय से इस फैसले का इंतजार कर रहा था. उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं वर्षों से भोजशाला आंदोलन से जुड़ी रही हैं. आंदोलन के संघर्ष को उन्होंने बहुत करीब से देखा है और पूरे घटनाक्रम की साक्षी रही हैं. उनके मुताबिक यह फैसला केवल कानूनी जीत नहीं बल्कि आस्था और सांस्कृतिक पहचान की भी जीत है।  भोजशाला में अभी चित्र ले जाने की अनुमति नहीं, संयम में श्रद्धालु, उत्साह से किए दर्शन इंदौर हाई कोर्ट के फैसले के बाद शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार की भोजशाला पहुंचे. दर्शन करने वालों में महिलाएं और बच्चियां भी शामिल रहीं. कई श्रद्धालु अपने साथ हनुमान जी और मां सरस्वती के चित्र लेकर पहुंचे थे. श्रद्धालुओं ने धार्मिक चित्रों को परिसर के भीतर ले जाने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी. सुरक्षा कर्मियों ने श्रद्धालुओं को बताया कि उन्हें अभी तक हाई कोर्ट के नए आदेशों या प्रशासन की ओर से किसी बदलाव संबंधी निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं. ऐसे में फिलहाल पुरानी व्यवस्था और निर्धारित नियमों के तहत ही प्रवेश और सुरक्षा व्यवस्था संचालित की जा रही है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की अनुबंध एजेंसी के सुरक्षाकर्मियों ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि स्पष्ट आदेश मिलने के बाद ही किसी नई व्यवस्था को लागू किया जा सकेगा. हालांकि इसके बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी. लोग शांतिपूर्ण तरीके से दर्शन और पूजा-अर्चना करते नजर आए. परिसर में धार्मिक माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं ने मां वाग्देवी को नमन कर आशीर्वाद लिया. वहीं भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों ने भी श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने की अपील की. समिति ने कहा कि हाई कोर्ट के विस्तृत दिशा-निर्देश और आधिकारिक आदेश मिलने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी. पदाधिकारियों ने समाज से कानून और प्रशासनिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने का आग्रह किया. कोर्ट ने कहा – भोजशाला का धार्मिक स्वरूप मंदिर का अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि भोजशाला परिसर और कमाल मौला मस्जिद का विवादित क्षेत्र एक संरक्षित स्मारक है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस विवादित परिसर का धार्मिक स्वरूप भोजशाला का है, जहां देवी सरस्वती का मंदिर स्थित है। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी माना कि ऐतिहासिक साहित्य और उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित होता है कि यह स्थान देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर था। साथ ही यह जगह प्राचीन समय में संस्कृत शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में भी जानी जाती थी।  पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना शनिवार सुबह सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच श्रद्धालु और भोज उत्सव समिति के पदाधिकारी परिसर पहुंचे। इनमें संरक्षक विश्वास पांडे, भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा, श्रीश दुबे, केशव शर्मा और अशोक जैन शामिल थे। सभी ने मां वाग्देवी के स्थान और यज्ञ कुंड के पास पुष्प अर्पित कर दंडवत प्रणाम किया। श्रद्धालु बोले- भोजशाला मंदिर थी, है और रहेगी दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने कहा कि सालों बाद उन्हें बिना रोक-टोक पूजा करने का अवसर मिला है। भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा, "भोजशाला … Read more

हाईकोर्ट की सरकार को फटकार, बोला- बताइए संदीप पाठक पर FIR दर्ज हुई या नहीं

चंडीगढ़  राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक के खिलाफ आपराधिक मामले को लेकर पंजाब सरकार की चुप्पी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- आप संकोच क्यों कर रहे हैं, एफआईआर है तो बता दीजिए, नहीं है तो भी बता दीजिए। अदालत ने सुनवाई टालते हुए बिना उसकी पूर्व अनुमति पाठक पर किसी कठोर कार्रवाई पर रोक जारी रखी। यह राहत अगले सप्ताह तक रहेगी। पाठक के वरिष्ठ अधिवक्ता रणदीप राय ने पंजाब सरकार पर अदालत से लुका-छिपी खेलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य आज तक यह बताने से बच रहा है कि पाठक के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई या नहीं। पिछली सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट जवाब मांगा था, लेकिन आज भी वही स्थिति है। 8 मई को सरकार ने कहा था- जानकारी नहीं, आज फिर वही जवाब। राय ने कहा कि यह सिर्फ एक सांसद का नहीं, हर नागरिक के मौलिक अधिकारों का सवाल है। अगर किसी के खिलाफ मामला दर्ज होता है तो उसे जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज होने के 24 घंटे में उसे सार्वजनिक किया जाना अनिवार्य है। पंजाब सरकार के वकील ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मीडिया रिपोर्टों पर आधारित आशंका है। याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत का वैधानिक उपाय अपनाना चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत यह समझने में असमर्थ है कि राज्य यह बताने में क्यों हिचक रहा है कि संज्ञेय अपराध दर्ज हुआ या नहीं। कोर्ट ने साफ किया- जब तक फैसला नहीं होता, बिना अदालत की इजाजत पाठक पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।  अगली सुनवाई अगले सप्ताह संजीव अरोड़ा की दलीलों से हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं, फिलहाल नहीं दी कोई राहत कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अपनी गिरफ्तारी व रिमांड को पूर्वनियोजित, कानूनविहीन और संवैधानिक सुरक्षा के खिलाफ बताया। उन्होंने हाईकोर्ट में कहा- ईडी ने पीएमएलए की प्रक्रियाओं की अवहेलना कर गिरफ्तारी को औपचारिकता बना दिया। हाईकोर्ट ने लंबी बहस के बाद असंतुष्टि जताते हुए फिलहाल कोई राहत नहीं दी। अरोड़ा के वकीलों ने बताया कि उन्हें वास्तव में सुबह 7:15 बजे हिरासत में ले लिया गया जबकि आधिकारिक गिरफ्तारी का समय शाम 4 बजे दर्शाया गया। अदालत में कहा गया- यह स्वतंत्रता पर प्रहार है और गिरफ्तारी की पारदर्शिता व वैधानिकता पर सवाल खड़े करता है। घंटों नियंत्रण में रखकर बाद में गिरफ्तारी दिखाना कानून की मूल भावना के विपरीत है। अदालत को बताया गया कि 5 मई के ईसीआईआर और 9 मई की छापेमारी के बीच ईडी ने धारा 50 के तहत कोई समन जारी नहीं किया, न स्वतंत्र पूछताछ की, न कोई नया साक्ष्य जुटाया। बचाव पक्ष ने कहा- पुराने फेमा मामले की सामग्री को पीएमएलए गिरफ्तारी का आधार बनाना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। अरोड़ा की ओर से एक और बड़ा सवाल उठाया गया- जिस अधिकारी ने पहले फेमा में शिकायतकर्ता की भूमिका निभाई, वही पीएमएलए की धारा 19 के तहत रीजन टू बिलीव कैसे बना सकता है। इसे अपने मामले का जज बताते हुए कहा गया कि पूर्वाग्रहग्रस्त अधिकारी से निष्पक्ष संतुष्टि संभव नहीं। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद मामला सोमवार दोपहर के लिए टाल दिया। फिलहाल अरोड़ा को राहत नहीं मिली है। गौरतलब है कि अरोड़ा के खिलाफ गुरुग्राम में केस दर्ज हुआ था।