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भिंड मामले के बाद KP यादव सतर्क, बड़ा काफिला कैंसिल; सादगी से गुना जाने का ऐलान

भोपाल/गुना  मध्य प्रदेश भाजपा में इन दिनों शक्ति प्रदर्शन और बड़े वाहन काफिलों को लेकर संगठन का रुख बेहद सख्त नजर आ रहा है। इसी सख्ती का असर अब गुना के पूर्व सांसद केपी यादव पर भी दिखाई दिया है। भोपाल में 500 से अधिक गाड़ियों के काफिले के साथ शक्ति प्रदर्शन करने के बाद अब केपी यादव ने अपना प्रस्तावित रोड शो कैंसिल कर दिया है। दरअसल, राज्य खाद्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण करने भोपाल पहुंचे केपी यादव का भव्य स्वागत हुआ था। राजधानी की सड़कों पर करीब 500 वाहनों का लंबा काफिला, जगह-जगह स्वागत मंच और समर्थकों की भारी भीड़ ने इसे एक बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया था। इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा की अंदरूनी राजनीति में भी चर्चाओं को तेज कर दिया था। लेकिन अब पार्टी के सख्त रुख के बाद केपी यादव ने खुद कदम पीछे खींच लिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि वे गुना में काफिले के साथ नहीं बल्कि एक वाहन से जाएंगे। साथ ही कार्यकर्ताओं से भी अपील की है कि सीमित संख्या में ही उनसे मिलने पहुंचें। सूत्रों की मानें तो भाजपा संगठन भिंड में हुई कार्रवाई के बाद किसी भी तरह के शक्ति प्रदर्शन को लेकर बेहद गंभीर है। दरअसल, भिंड में 100 से अधिक गाड़ियों के काफिले के साथ निकाली गई रैली के मामले में भाजपा ने किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष सज्जन सिंह यादव की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी थी। प्रदेश नेतृत्व द्वारा जारी पत्र में कहा गया था कि इस तरह के बड़े काफिले प्रधानमंत्री Narendra Modi की “ईंधन बचत और सादगीपूर्ण जीवनशैली” की अपील के विपरीत हैं। संगठन ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए सख्त कार्रवाई की थी। इतना ही नहीं, काफिले के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित होने और आम लोगों को परेशानी होने का भी उल्लेख किया गया था। अब माना जा रहा है कि उसी कार्रवाई और संगठन के कड़े संदेश को देखते हुए केपी यादव ने समय रहते अपना रोड शो रद्द कर दिया। राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा के “नो पावर शो” संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में बना हुआ है।

प्राइवेट स्कूलों को पछाड़ सरकारी स्कूल आगे, CBSE 12वीं में भोपाल रीजन देशभर में 19वें स्थान पर

भोपाल  केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) 12वीं परीक्षा 2026 के नतीजों ने मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा की वास्तविक तस्वीर सामने ला दी है। जहां सरकारी मॉडल पर संचालित जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) और केंद्रीय विद्यालय (KV) ने शानदार परिणाम देकर बेहतर शैक्षणिक योग्यता दिखाई।  खास बात यह है कि इन निजी स्कूलों की फीस आमतौर पर JNV और KV की तुलना में कहीं अधिक होती है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि निजी स्कूलों के कमजोर प्रदर्शन का असर भोपाल रीजन की रैंकिंग पर भी पड़ा है। इसी कारण मध्य प्रदेश का भोपाल रीजन देश के 22 सीबीएसई रीजन में 19वें स्थान पर पहुंच गया। वहीं हर श्रेणी में छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया और भोपाल रीजन में लड़कियां करीब पांच प्रतिशत अंकों से आगे रहीं। नवोदय विद्यालय सबसे आगे सीबीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में सबसे बेहतर प्रदर्शन जवाहर नवोदय विद्यालयों का रहा। JNV का कुल पास प्रतिशत 98.16% दर्ज किया गया। लड़कों का परिणाम 97.81% और लड़कियों का 98.73% रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, नवोदय विद्यालयों की रेजिडेंशियल व्यवस्था, अनुशासित माहौल और नियमित अकादमिक मॉनिटरिंग इसकी बड़ी वजह है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाला यह मॉडल लगातार सफल साबित हो रहा है। केंद्रीय विद्यालयों ने भी कायम रखी बढ़त केंद्रीय विद्यालयों का प्रदर्शन भी मजबूत रहा। इनका कुल पास प्रतिशत 97.90% दर्ज किया गया। लड़कों का परिणाम 97.66% और लड़कियों का 98.11% रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशिक्षित शिक्षक, राष्ट्रीय स्तर का पाठ्यक्रम और नियमित मूल्यांकन केंद्रीय विद्यालयों की सफलता का आधार हैं। यही वजह है कि इनके परिणाम लगातार राष्ट्रीय औसत से बेहतर बने रहते हैं। आदिवासी छात्रों के स्कूलों ने भी किया बेहतर प्रदर्शन एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) का कुल पास प्रतिशत 85.47% रहा। लड़कों का परिणाम 83.46% और लड़कियों का 86.89% दर्ज किया गया। सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद यह प्रदर्शन सकारात्मक माना जा रहा है। यहां भी छात्राओं ने छात्रों से बेहतर परिणाम देकर बढ़ती शैक्षणिक जागरूकता का संकेत दिया। सरकारी स्कूलों के सामने संसाधनों की चुनौती सरकारी स्कूलों का कुल पास प्रतिशत 80.60% रहा। लड़कों का रिजल्ट 79.86% और लड़कियों का 80.88% दर्ज किया गया। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षकों की कमी और बुनियादी संसाधनों की चुनौतियों के बावजूद यह प्रदर्शन संतोषजनक है। हालांकि, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल संसाधनों में सुधार से परिणाम बेहतर हो सकते हैं। सबसे ज्यादा छात्र, फिर भी सबसे कमजोर निजी स्कूल सबसे चिंताजनक तस्वीर निजी स्कूलों की रही। सीबीएसई से संबद्ध इंडिपेंडेंट स्कूलों में सबसे अधिक 61,419 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था और 61,242 छात्र परीक्षा में शामिल हुए। इसके बावजूद इन स्कूलों का कुल पास प्रतिशत केवल 76.85% रहा, जो सभी श्रेणियों में सबसे कम है। लड़कों का परिणाम 74.12% और लड़कियों का 80.02% दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक दबाव, बोर्ड परीक्षा की अपर्याप्त तैयारी और छात्रों पर बढ़ता मानसिक तनाव निजी स्कूलों के कमजोर प्रदर्शन के कारण हो सकते हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। लड़कों का पास प्रतिशत 76.87, लड़कियों का 82.19 पूरे परिणाम में एक समान ट्रेंड देखने को मिला हर श्रेणी में छात्राओं ने छात्रों को पीछे छोड़ा। भोपाल रीजन में लड़कों का पास प्रतिशत 76.87% रहा, जबकि लड़कियों का परिणाम 82.19% दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, नियमित अध्ययन, परीक्षा के प्रति गंभीरता और करियर को लेकर बढ़ती जागरूकता छात्राओं की सफलता के प्रमुख कारण हैं। 12% से ज्यादा छात्र सभी विषयों में फेल भोपाल रीजन के नतीजों में एक गंभीर तथ्य भी सामने आया। कुल परीक्षार्थियों में 12.14% छात्र ऐसे रहे, जो सभी विषयों में असफल हो गए। शिक्षा विशेषज्ञ इसे केवल छात्रों की तैयारी का नहीं, बल्कि स्कूलों की अकादमिक निगरानी और सीखने की गुणवत्ता से जुड़ा मुद्दा मानते हैं। कोविड के बाद सीखने के स्तर में आई गिरावट, डिजिटल डिस्ट्रैक्शन और नियमित पढ़ाई में कमी को भी इसकी वजह माना जा रहा है। देश का दूसरा सबसे बड़ा सीबीएसई रीजन भोपाल रीजन देश के सबसे बड़े सीबीएसई रीजन में शामिल है। यहां सीबीएसई से संबद्ध 1291 स्कूल संचालित हैं। स्कूलों की संख्या के लिहाज से यह 1483 स्कूलों वाले लुधियाना रीजन के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा रीजन है। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा संचालन और परिणाम प्रबंधन को बड़ी प्रशासनिक चुनौती माना जाता है।

मध्यप्रदेश में हीट वेव का कहर: मंदसौर में ट्रांसफॉर्मर ठंडा रखने के लिए लगाए गए कूलर

भोपाल  देश के अधिकांश राज्यों में भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। इसमें मध्य प्रदेश भी शामिल है। प्रदेश के कुछ इलाकों में पारा 45 पार तक जा रहा है। मालवा में दो दिन पहले जहां पारा 46 डिग्री से अधिक दर्ज किया गया था, वहीं अब बुंदेलखंड में सबसे अधिक पारा दर्ज किया गया है। बता दें कि लगभग पूरा प्रदेश गर्मी की चपेट में है और अधिकांश इलाकों में भीषण लू झुलसा रही है। मौसम विभाग के अनुसार यह दौरान मई से जून तक चलेगा। फिलहाल 4 दिन प्रदेश में पारा और चढ़ने व रात में भी गर्म हवाओं का दौर चलेगा। कूलर-एसी भी राहत नहीं दे पाएंगे। इंदौर, उज्जैन-धार में वॉर्म नाइट की चेतावनी है। इस दौरान गर्म हवाएं चलेंगी। झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, देवास, सीहोर, शाजापुर, आगर-मालवा और राजगढ़ में भी लू चलेगी। मंदसौर में तेज गर्मी और बढ़ते बिजली लोड के कारण ट्रांसफॉर्मरों पर दबाव बढ़ गया है। हालात ऐसे हैं कि बिजली सप्लाई सुचारू रखने के लिए बड़े ट्रांसफॉर्मरों को कूलर लगाकर ठंडा रखना पड़ रहा है। मध्य प्रदेश में 15 मई से 18 मई तक प्रदेश के कई जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है। सूरज की सीधी किरणों और पड़ोसी राज्यों से सीधी रेगिस्तानी गर्म हवाएं एमपी में आने के कारण यहां भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। आगामी दिनों में तापमान और ऊपर जाने की संभावना है। आईएमडी बुलेटिन के अनुसार अगले 4 दिन प्रदेश में मौसम इस तरह रहेगा। प्रदेश में कहां कितना तापमान     खजुराहो – 45.4°C     रतलाम – 45.2°C     धार – 45.0°C     नौगांव – 44.9°C     विदिशा – 44.8°C सबसे कम न्यूनतम तापमान     पचमढ़ी – 19.4°C     अमरकंटक – 20.7°C     मंडला – 23.2°C 15 मई को भोपाल, धार, रतलाम, उज्जैन, देवास में तीव्र लू का अलर्ट है। इसी प्रकार विदिशा, राजगढ़, रीवा, सतना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, नर्मदापुरम, हरदा, बुरहानपुर खंडवा, शिपुरी, अशोकनगर, गुना, नीमच, मंदसौर, आगर, शाजापुर, झाबुआ, श्योपुरकला, सिंगरौली, सीधी, रीवा, गवालियर, दतिया, भिंड, मुरैना सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों में हीट वेव का यलो अलर्ट है।     16 से 18 मई तक कैसे रहेंगे हाल ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड और मालवा क्षेत्र में तेज गर्म हवाओं का असर कई जिलों में तापमान 44 से 46 डिग्री तक पहुंचने की संभावना। इसमें सबसे ज्यादा गर्म क्षेत्रों में धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन सहित आसपास के इलाके में भीषण लू का अलर्ट रहेगा। वहीं पूरे प्रदेश में गर्म हवाएं और हीटवेव का असर दिखेगा।     बारिश की संभावना नहीं, तापमान बढ़ेगा मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पश्चिमी और उत्तरी हवाओं के प्रभाव से प्रदेश में शुष्क और गर्म मौसम बना हुआ है। फिलहाल बारिश की संभावना बेहद कम है, जबकि अगले कुछ दिनों तक तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है।     वार्म नाइट का इन जिलों में अलर्ट है आईएमडी बुलेटिन के अनुसार प्रदेश के धार, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, देवास और गुना में रात में भी गर्म हवाओं का प्रकोप रहेगा। यहां वार्म नाइट का अलर्ट भी दिया गया है।

दिल्ली में CM-अमित शाह बैठक से सियासी हलचल तेज, क्या होने वाला है कैबिनेट विस्तार?

भोपाल  मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की। इस मुलाकात के पहले से प्रदेश में कैबिनेट विस्तार की अटकलें लगाई जा रही है। 17 मई को मुख्यमंत्री मोहन यादव अलग-अलग मंत्रियों से चर्चा करने वाले हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश में मंत्रियों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट तैयार करने की कवायद तेह हो गई है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद भाजपा कैबिनेट विस्तार पर फैसला ले सकती है। जानकारी के अनुसार, उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कैबिनेट विस्तार के बाद अब भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व मध्यप्रदेश में भी मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी कर रहा है। इसके तहत कुछ मंत्रियों से इस्तीफा लेने की भी योजना बनाई जा रही है। बताया जा रहा है कि मंत्री विजय शाह कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए बयान के बाद विवादों में हैं, वहीं कुछ अन्य मंत्रियों का प्रदर्शन भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं माना जा रहा है। ऐसे में कैबिनेट विस्तार से पहले कुछ मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। वर्तमान में मंत्रिमंडल में सीएम समेत 31 पद भरे हुए है और चार पद खाली हैं और विस्तार से पहले चार मंत्रियों के इस्तीफे की संभावना जताई जा रही है।  राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा  जानकारी के अनुसार इस बार कैबिनेट विस्तार में कुछ वरिष्ठ नेताओं के साथ महिला विधायकों को भी मौका दिया जा सकता है। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर 17 मई को होने वाली बैठक के बाद अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मुलाकात में पश्चिम बंगाल में पार्टी की जीत पर बधाई देने के साथ ही अन्य राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर भी चर्चा करने की बात कही जा रही है। इससे पहले नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी दो दिन पहले अमित शाह से मुलाकात कर चुके हैं।   केंद्रीय मंत्रियों से भी सीएम ने की मुलाकात  दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने कई केंद्रीय मंत्रियों से भी मुलाकात की। उन्होंने केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ मध्यप्रदेश में शहरी विकास परियोजनाओं को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा की। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी से सौजन्य भेंट की। वहीं केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू से भी मुलाकात कर प्रदेश में विमानन सुविधाओं और विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री के इस दिल्ली दौरे को प्रदेश में संभावित कैबिनेट विस्तार और केंद्र-राज्य समन्वय के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। 

स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 के बीच बड़ा फैसला, MP में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 लागू

स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26: प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 प्रभावी : लापरवाही और नियमों के उल्लंघन पर होगी दंडात्मक कार्रवाई – आयुक्त भोंडवे भोपाल                  स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने सभी नगरीय निकायों को 'ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026' का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अब शहर से कचरा केवल हटाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि 'वेस्ट टू वेल्थ' की परिकल्पना को साकार करते हुए रिसायकल के लिए इसका जिम्मेदारी से प्रबंधन करना आवश्यक है। इन नवीन नियमों के तहत अब प्रत्येक घर में कचरे का अलग-अलग संग्रहण अनिवार्य किया है, अब नागरिकों को गीला, सूखा और घरेलू हानिकारक कचरा पृथक डस्टबिन में देना होगा। इस सुव्यवस्थित प्रक्रिया के माध्यम से गीले कचरे से जैविक खाद का निर्माण किया जाएगा तथा सूखे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्चक्रण होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ''स्वच्छता अब सिर्फ आदत नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जिम्मेदारी है।'' खुले में कचरा फेंकने, प्लास्टिक जलाने या सार्वजनिक स्थानों को गंदा करने जैसी गतिविधियों पर अब कड़ी कार्रवाई होगी तथा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में दंडात्मक प्रक्रिया के साथ जुर्माना भी वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त, थोक कचरा उत्पादकों (BWG) को भी अपने परिसर में ही कचरे का ऑन-साइट प्रसंस्करण करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।       स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 के अंतर्गत सुरक्षित पर्यावरण और स्वस्थ भविष्य के निर्माण के लिए राज्य के 406 नगरीय निकाय पूर्णतः कटिबद्ध हैं, जिनमें 28 नए निकाय पहली बार इस प्रतिस्पर्धा में शामिल हो रहे हैं। नागरिकों की छोटी पहल से बड़े बदलाव का लक्ष्य लेकर चल रहे इन निकायों द्वारा जमीनी स्तर पर की जा रही तैयारियों का मूल्यांकन विभिन्न श्रेणियों में किया जाएगा। सर्वेक्षण में मैदानी स्तर पर उत्कृष्ट व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा विभागीय अमले की दक्षता बढ़ाने के लिए प्रदेश में 51 क्षमता वर्धन कार्यशालाओं का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया है। इसके साथ ही, तीन वृहद राज्य स्तरीय कार्यशालाएं भी की गई। जिनके माध्यम से सभी 406 निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO), यंत्रियों और स्वच्छता नोडल अधिकारियों का प्रभावी क्षमतावर्धन किया गया है। मैदानी स्तर पर कार्य कर रहे अमले को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 874 महिला सफाई मित्रों को भी 15 विभिन्न बैचों में 'स्वास्थ्य एवं स्वच्छता' तथा 'कार्य के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों' पर विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। सुदृढ़ जन-भागीदारी और इन व्यापक प्रशासनिक तैयारियों के बल पर मध्यप्रदेश का लक्ष्य अपने शहरों को पूर्णतः स्वच्छ बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर अपना गौरव स्थापित करना है।  

ओबीसी प्रदेश स्त्री सम्मेलन अमरकंटक में. राजमणि पटेल

अनूपपुर  प्रदेश स्त्री सम्मेलन राष्ट्रीय ओबीसी संगम के आयोजन में एक दिवसीय ओबीसी का सम्मेलन अमरकंटक में आयोजित होने जा रहा है इस सम्मेलन में काफी संख्या में ओबीसी समाज के लोग पहुंचने की संभावना है प्राप्त जानकारी के अनुसार इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं पूर्व राज्यसभा सांसद राजमणि पटेल जी का आगमन होगा तथा प्रदेश के कई दिग्गज नेता इस कार्यक्रम में शिरकत लेंगे राजमणि पटेल जी से हुई वार्तालाप पर उन्होंने बताया कि यह सम्मेलन अमरकंटक के संगम में आयोजित किया जा रहा है यह कार्यक्रम 16 एवं 17 में 2026 को आयोजित होने जा रहा है जिसमें ओबीसी समाज को एकत्रित करने एवं दिशा निर्देश देने के कार्यक्रम में राजमणि पटेल रीवा से अमरकंटक पहुंचेंगे जहां ओबीसी समाज के कार्यक्रम को संबोधित करेंगे राजमणि पटेल ने कहा कि इस कार्यक्रम में ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनाने

मंत्री विश्वास सारंग ने किया श्रमदान, द्वारका नगर की बावड़ी सफाई अभियान में उतरे मैदान में

मंत्री विश्वास सारंग ने द्वारका नगर में बावड़ी की सफाई हेतु किया श्रमदान विद्युत संबंधी सेवाओं के शिविर का भी किया शुभारंभ भोपाल  सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने गुरुवार को जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत नरेला विधानसभा के द्वारका नगर स्थित प्राचीन बावड़ी की सफाई हेतु श्रमदान किया एवं स्वच्छता मित्रों को किट वितरित कर उनका सम्मान एवं उत्साहवर्धन भी किया। उन्होंने कहा कि जल ही जीवन का आधार है और जल स्रोतों का संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जलगंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत प्रदेशभर में जल स्रोतों के संरक्षण, संवर्धन एवं पुनर्जीवन हेतु व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। आगे उन्होंने कहा कि परंपरागत जल स्रोतों जैसे बावड़ी, कुएँ, तालाब एवं सरोवर हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं जिन्हें संरक्षित करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। मंत्री सारंग ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाते हुए वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों की स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाएँ। विद्युत संबंधी सेवाओं के शिविर का शुभारंभ मंत्री विश्वास सारंग ने नरेला विधानसभा के चाँदबड़ में संपर्क अभियान के तहत विद्युत संबंधी सेवा शिविर का शुभारंभ किया। इस शिविर में कनेक्शन संबंधी, बिल संबंधी, तकनीकि सेवाएं सहित मीटर व केवल सर्विस संबंधी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। मंत्री सारंग ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा की सरकार में जनता को सरकार के द्वार नहीं आना पड़ता बल्कि सरकार जनता के द्वार आकर समस्याओं का हल करती है। मंत्री सारंग ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में केवल बिजली के बिल आते थे बिजली नहीं वहीं बिजली के संकट से जूझने वाला मध्यप्रदेश आज भाजापा की सरकार में बिलजी आपूर्ति में देश के अग्रणी राज्यों में से एक है। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश के हर क्षेत्र में विकास और कल्याण सुनिश्चित किया जा रहा है। मंत्री सारंग ने जानकारी देते हुए बताया कि संपर्क अभियान के तहत प्रत्येक माह विभिन्न क्षेत्रों में 8 विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। जिनके माध्यम से नागरिकों की समस्याओं का प्रभावी निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन शिविरों के माध्यम से आमजन को सरल, सुलभ एवं पारदर्शी सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। इस दौरान उन नागरिकों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए जिनकी समस्याओं का समाधान 24 घंटे के भीतर किया गया। उक्त कार्यक्रम में भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, नगर निगम कमिश्नर श्रीमती संस्कृति जैन, स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, रहवासियों सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

सांची दूध हुआ महंगा: नई कीमतें कल से लागू, प्रति लीटर 2 रुपये की बढ़ोतरी

भोपाल   मध्य प्रदेश सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ के उत्पाद सांची ने भी दूघ के दाम में बढ़ोतरी करने का फैसला ले लिया है। अब प्रदेश के उपभोक्ताओं को दूध की सभी श्रेणियों के लिए 2 रुपए प्रति लीटर अतिरिक्त चुकाने होंगे। बता दें कि, नई कीमतें 15 मई से लागू कर दी जाएंगी। बता दें कि, नई कीमतें प्रभावी होने के बाद आज तक आप जिस आधे लीटर दूध के पैकेट को 35 रुपए में खरीद रहे हैं, वही पैकेट कल से आपको 36 रुपए में मिलेगा। जबकि 70 रुपए वाला एक लीटर दूध का पैकेट कल से 72 रुपए की दर से मिलेगा। ये है बढ़ोतरी का कारण इस संबंध में जानकारी देते हुए सांची के एमडी संजय गोवाणी का कहना है कि, उत्पादन और परिवहन लागत में लगातार बढ़ोतरी होने के कारण कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया गया है। आपको बता दें कि, इससे पहले सांची ने दूध की कीमतों में मई 2025 को बढ़ोतरी की थी। फिर आम जनता की जेब पर महंगाई का बोझ आम जनता की जेब पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। रसोई गैस और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के बीच अब दूध के दामों में भी उछाल आ गया है। प्रदेश के लोकप्रिय ब्रांड सांची ने दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला किया है, जो 15 मई 2026 से प्रभावी होंगी। उपभोक्ताओं को प्रति लीटर पर 2 रूपए बढ़े इस फैसले के बाद उपभोक्ताओं को प्रति लीटर दूध पर 2 रुपए अधिक चुकाने होंगे। अब तक 35 रुपये में मिलने वाला आधा लीटर दूध का पैकेट अब 36 रुपए का मिलेगा, जबकि 70 रुपए वाला एक लीटर दूध पैकेट अब 72 रुपए में मिलेगा। महीने के बजट पर असर सुबह की चाय से लेकर बच्चों के नाश्ते और घर की जरूरतों तक दूध हर परिवार की रोजमर्रा की जरूरत है। ऐसे में दाम बढ़ने का सीधा असर आम लोगों के मासिक बजट पर पड़ेगा। भोपाल सहित प्रदेशभर के उपभोक्ताओं में दूध के बढ़े दाम को लेकर चिंता दिखाई दे रही है। पूरा घरेलू खर्च ही बढ़ा लोगों का कहना है कि पहले से ही गैस सिलेंडर, सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों के दाम बढ़े हुए हैं, ऐसे में दूध महंगा होने से घरेलू खर्च और बढ़ जाएगा। खास बातें -सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ सांची ने एक साल होते ही फिर बढ़ाए दूध के दाम -2 रूपए प्रति लीटर की दर से सभी श्रेणियों के दूध में बढ़ोतरी का फैसला -उत्पादन और परिवहन लागत में लगातार बढ़ोतरी होने के कारण कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया गया -15 मई यानी कल से उपभोक्ताओं के चुकाने होंगे नई दरों के दाम

साइकिल यात्रा में दिखा अनोखा अंदाज: विधायक कंचन तनवे के काफिले में चली ई-कार

खंडवा  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेट्रोल और डीजल बचाने के आह्वान का असर अब जमीनी स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। खंडवा में भाजपा नेताओं ने ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर नई पहल शुरू की है। एक ओर खंडवा विधायक कंचन तनवे ने सप्ताह में दो दिन साइकिल से शहर भ्रमण करने का निर्णय लिया है, वहीं दूसरी ओर खंडवा महापौर अमृता यादव ने अपने काफिले से डीजल-पेट्रोल वाहन हटाकर इलेक्ट्रॉनिक वाहन शामिल कर लिया है। हालांकि कांग्रेस ने भाजपा नेताओं की इस पहल को ‘सिर्फ दिखावा’ बताते हुए तीखा हमला बोला है। साइकिल से भाजपा कार्यालय और दादाजी मंदिर पहुंचीं विधायक खंडवा विधायक कंचन तनवे ने बुधवार को अपने निवास से साइकिल यात्रा शुरू की। वह साइकिल से भाजपा कार्यालय और बाद में दादाजी मंदिर दरबार पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की बचत करने की अपील की गई है, जिसके बाद उन्होंने स्वयं से शुरुआत करने का निर्णय लिया है। विधायक ने बताया कि अब वह सप्ताह में कम से कम दो दिन शहर के कार्यक्रमों और भ्रमण के लिए साइकिल का उपयोग करेंगी। उनका मानना है कि इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि लोगों में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी। उन्होंने आम नागरिकों से भी छोटी दूरी के लिए साइकिल या सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील की। महापौर ने काफिले में शामिल की इलेक्ट्रॉनिक गाड़ी इधर खंडवा महापौर अमृता यादव ने भी ईंधन बचत को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने अपने काफिले से पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहन हटाकर इलेक्ट्रॉनिक वाहन शामिल किया है। महापौर का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक वाहन न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर हैं, बल्कि इससे ईंधन पर होने वाला खर्च भी कम होगा। महापौर ने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि खुद इस दिशा में कदम बढ़ाएंगे तो आम जनता भी प्रेरित होगी। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि वे भी धीरे-धीरे इलेक्ट्रॉनिक वाहनों का उपयोग बढ़ाएं ताकि प्रदूषण और ईंधन खपत दोनों में कमी लाई जा सके।     विधायक कंचन तनवे सप्ताह में दो दिन साइकिल से निकलेंगी     महापौर अमृता यादव ने डीजल गाड़ियां हटाकर इलेक्ट्रॉनिक वाहन शामिल कर लिया     ईंधन और समय बचाने महापौर अब नगर निगम की MIC बैठक ऑनलाइन करेंगी     कांग्रेस ने भाजपा की 'राजनीतिक नौटंकी' करार दिया है     कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा असली मुद्दों से ध्यान भटकाने दिखावा कर रही है MIC बैठक ऑनलाइन करने पर भी विचार महापौर अमृता यादव ने नगर निगम की MIC बैठकों को भी ऑनलाइन करने को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। उनका मानना है कि ऑनलाइन बैठकें होने से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की आवाजाही कम होगी, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत हो सकेगी। साथ ही डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। कांग्रेस ने साधा निशाना भाजपा नेताओं की इस पहल पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह सब केवल “राजनीतिक नौटंकी” है। उनका आरोप है कि भाजपा नेता जनता के बीच दिखावा करने के लिए इस तरह की गतिविधियां कर रहे हैं, जबकि वास्तविक मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। कांग्रेस का कहना है कि यदि भाजपा वास्तव में ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर है, तो उसे महंगाई, बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों और शहर की बुनियादी समस्याओं पर भी ठोस कदम उठाने चाहिए। शहर में चर्चा का विषय बनी पहल फिलहाल विधायक की साइकिल यात्रा और महापौर की इलेक्ट्रॉनिक वाहन पहल शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। कुछ लोग इसे पर्यावरण संरक्षण की सकारात्मक शुरुआत मान रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक संदेश देने की कोशिश बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पहल केवल प्रतीकात्मक रहती है या वास्तव में शहर में बड़े बदलाव की दिशा तय करती है।  

मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती पर बड़ा फैसला, 13 हजार उम्मीदवारों की मेरिट लिस्ट रद्द

जबलपुर   मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने  13 हजार 89 चयनित शिक्षकों की मेरिट लिस्ट रद्द कर दी है। प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में 5 प्रतिशत बोनस अंक विवाद पर जस्टिस विशाल धगट की बेंच ने पूरी मेरिट लिस्ट को दोबारा तैयार करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने गैर-आरसीआई अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया से बाहर करने का भी आदेश दिया है। मध्यप्रदेश के 13 हजार 89 शिक्षकों को बुधवार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 की कथित तौर पर बोनस अंक विवाद जबलपुर हाईकोर्ट तक पहुंच गया था। बुधवार को सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की बेंच ने विवादित मेरिट लिस्ट को निरस्त कर दिया। साथ ही राज्य शासन और मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल को नए सिरे से मेरिट लिस्ट बनाने को कहा है। नई मेरिट लिस्ट बनने से दोबारा प्रक्रिया होगी और इसका असर मध्यप्रदेश के 13 हजार 89 चयनित शिक्षकों पर पड़ेगा। कौन है गैर-आरसीआई अभ्यर्थी, जिन्हें करेंगे बाहर हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि जिनके पास आरसीआई (भारतीय पुनर्वास परिषद) से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा डिप्लोमा नहीं है, उन्हें 5 प्रतिशत बोनस का लाभ नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने ऐसे सभी अपात्रों को चयन प्रक्रिया से बाहर करने के निर्देश राज्य शासन और कर्मचारी चयन मंडल को दिए हैं। कोर्ट का मानना है कि यदि गलत जानकारी देकर लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों को बाद में सुधार का अवसर दिया जाएगा तो यह ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा। कोर्ट ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए लिखा है कि यदि पकड़े जाने के बाद अभ्यर्थियों को अपने अंक कम कराने या नहीं वाला विकल्प चुनने की अनुमति दी जाती है तो यह सीधे बेईमानी को बढ़ावा देने जैसा हो जाएगा। कहां से शुरू हुआ था विवाद नरसिंहपुर निवासी सोनम अगरैया और अन्य उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। जिसमें सवाल उठाते हुए कहा था कि भर्ती नियमों के मुताबिक केवल आरसीआई से मान्यता प्राप्त 'विशेष शिक्षा डिप्लोमा' धारकों को ही 5 फीसदी बोनस अंक का लाभ दिया जाना था, लेकिन मेरिट सूची में करीब 14984 अभ्यर्थियों ने स्वयं को इसी श्रेणी में दर्शाकर बोनस अंक हासिल कर लिए। जबकि आरसीआई के आंकड़े कहते हैं कि मध्यप्रदेश में केवल 2194 कार्मिक और 3077 पेशेवर ही पंजीकृत हैं। यही विवाद का कारण बना। हां लिखते ही मिल गए बोनस अंक याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में यह भी बताया कि भर्ती प्रक्रिया के वक्त अभ्यर्थियों से न तो आरसीआई रजिस्ट्रेशन नंबर मांगा गया और न ही प्रमाण-पत्र। सिर्फ ऑनलाइन आवेदन में हां लिख देने से ही साफ्टवेयर के जरिए सीधे 5 प्रतिशत बोनस अंक दे दिए गए थे। खास बात यह है कि लोक शिक्षण संचालनालय ने पांच माह पहले ही चेतावनी दे दी थी कि इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का बोनस के लिए हां लिखा जाना संदिग्ध है। हालांकि तभी कोई ठोस कदम उठा लिए जाते तो आज मेरिट लिस्ट विवादों में नहीं रहती। इस पूरे प्रकरण में याचिकाकर्ता की तरफ से आलोक वागरेचा और विशाल बघेल ने पक्ष रखा था।