samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री डॉ. यादव तैयारियों की कर रहे नियमित समीक्षा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर सिंहस्थ: 2028 महापर्व आयोजन की तैयारियों को लेकर निरंतर निरीक्षण जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर शिप्रा नदी के 29 किलोमीटर क्षेत्र में नव निर्माणाधीन घाटों से 24 घंटे करोड़ों श्रद्धालुओं को शिप्रा में स्नान कराने के बाद सुरक्षा और सुविधा के साथ गंतव्य तक पहुंचाया जा सकेगा। सिंहस्थ के लिए सभी विभागों ने निर्माणाधीन विकास कार्यों की गति तेज कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नियमित रूप से सिंहस्थ तैयारियों की समीक्षा कर जानकारी प्राप्त कर आवश्यक निर्देश दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर सिंहस्थ के लिए विकास कार्य प्रगतिरत है। सिंहस्थ में विश्व भर से आने वाले श्रद्धालुओं को वाहन पार्किंग के साथ ही स्नान के लिए घाट तक पहुंचाने के लिए सुविधाजनक एप्रोच रोड का निर्माण किया जा रहा है। व्यवस्थित पार्किंग क्षेत्र और घाट तक सुविधाजनक आने जाने के मार्ग होने से आवश्यक प्रबंधन करने में सुविधा होगी। हाल ही में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने उज्जैन पहुंचकर सिंहस्थ की तैयारियों का जायजा लिया है। 18 स्थान एप्रोच रोड के लिए हुए चिन्हित सिंहस्थ: 2028 के तहत नियमित निरीक्षण में संभागायुक्त सह सिंहस्थ मेला अधिकारी  आशीष सिंह, कलेक्टर उज्जैन  रौशन कुमार सिंह ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के दल मेला क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थानों में की जाने वाली व्यव्स्थाओं का निरंतर जायजा ले रहे हैं। अधिकारी दल ने  विक्रांत भैरव मंदिर के समीप स्थित ब्रिज से निरीक्षण प्रारंभ कर करीब 5 किलोमीटर क्षेत्र में पैदल भ्रमण किया। उन्हेल रोड ब्रिज के समीप तक शिप्रा नदी पर निर्माणाधीन नवीन घाट को जोड़ने के लिए प्रस्तावित 18 स्थानों को एप्रोच रोड के लिए चिन्हित किया है। संवरने लगा है उज्जैन सिंहस्थ : 2028 महापर्व के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर विश्व भर से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुविधाजनक रूप से मोक्षदायिनी शिप्रा नदी में स्नान करवाने और श्रद्धालुओं की मेजबानी के लिए उज्जैन संवरने लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नियमित रूप से सिंहस्थ तैयारियों की जानकारी प्राप्त कर निर्देश देते है। हाल ही में प्रशासनिक अधिकारियों ने द्वितीय चरण में शिप्रा किनारे पैदल 36 किलोमीटर भ्रमण किया। अधिकारी दल ने इस दौरान शिप्रा घाट से जोड़कर बनाए जाने वाले प्रस्तावित मार्गों के लिए 140 स्थान चिन्हित कर तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री  मोदी के आह्वान पर किया अमल प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के आह्वान और मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर पेट्रोल-डीजल की मितव्ययिता के नियम का अनुसरण करते हुए अधिकारी बस में सवार होकर निरीक्षण के लिए पहुंचे। सिंहस्थ : 2028 के लिए निर्माणाधीन विकास कार्यों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रस्तावित मार्ग चिन्हित करने के लिए नियमित निरीक्षण के तहत अधिकारियों की टीम सुबह पेट्रोल-डीजल बचाने का संदेश देते हुए एक ही बस में यात्रा कर निरीक्षण स्थल पहुंचे। अधिकारी दल ने विभिन्न स्थानों का निरीक्षण किया। भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन सिंहस्थ : 2028 के अंतर्गत निर्माणाधीन नए घाट और सभी घाटों को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाले प्रस्तावित एप्रोच रोड के लिए स्थान चिन्हित किए। निरीक्षण में अधिकारियों ने लाल पुल ब्रिज के नीचे स्थित घाट क्षेत्र से निरीक्षण शुरू करते हुए गऊघाट, वेधशाला के पीछे, वाकणकर ब्रिज के समीप, जीवन खेड़ी,  शनि मंदिर के समीप पुराने और निर्माणाधीन नवीन घाट तक पहुंच मार्ग तैयार करने के लिए प्रस्तावित स्थानों को चिन्हित किया। निरीक्षण के दौरान शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर स्थान चिन्हित किए । एप्रोच रोड निर्माण के लिए शिप्रा नदी के किनारों पर निर्माणाधीन नवीन घाट और पुराने घाट भी शामिल किए गए है। घाट से 200 मीटर एरिया में जो स्थान चिन्हित किए है उन स्थानों पर श्रद्धालुओं को घाट तक आने और जाने के लिए प्रस्तावित एप्रोच रोड का निर्माण सुविधाजनक और सहज हो, इस उद्देश्य से स्थान चिन्हित किए गए हैं। पुलिस विभाग के माध्यम से इन चिन्हित स्थानों पर भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन को लेकर प्लान तैयार किया जाएगा।  

किन्नर अखाड़े में बड़ा विवाद: महामंडलेश्वर पद छीना गया, उज्जैन में मचा हड़कंप

उज्जैन इंटरनेशनल किन्नर अखाड़े में महामंडलेश्वर पद को लेकर विवाद सामने आया है। तेलंगाना की मां काली नंद गिरि ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी गुरु और अखाड़े की प्रमुख मां सतीनंद गिरि से रिश्ता तोड़ने का ऐलान किया है। इसके जवाब में मां सतीनंद गिरि ने भी वीडियो जारी कर कहा कि मां काली नंद गिरी ने गुरु-शिष्य परंपरा और अखाड़े के नियमों का उल्लंघन किया है, इसलिए उन्हें महामंडलेश्वर पद और अखाड़े की सदस्यता से बर्खास्त कर दिया गया है।  जानकारी के अनुसार मार्च 2026 में उज्जैन में इंटरनेशनल किन्नर अखाड़े की दो दिवसीय बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में देशभर से अखाड़े के पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए थे। बैठक के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के साथ कुछ लोगों को महामंडलेश्वर की उपाधि भी दी गई थी। इनमें तेलंगाना की मां काली नंद गिरि का नाम भी शामिल था। बताया जा रहा है कि मां काली नंद गिरि करीब दो महीने तक इंटरनेशनल किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर रहीं। हालांकि अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में उन्होंने कहा कि उनका मां सतीनंद गिरि से कोई संबंध नहीं है। वीडियो में उन्होंने कहा कि वे मेरी गुरु नहीं हैं। उनके गुरु अलग हैं और मेरे गुरु अलग हैं। हमने उनसे रिश्ता तोड़ दिया है और अब हमारा उनसे कोई लेना-देना नहीं है। मां काली नंद गिरि के इस बयान के बाद अखाड़े में विवाद गहरा गया। इसके बाद मां सतीनंद गिरि ने भी वीडियो जारी कर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मां काली नंद गिरि को दो महीने पहले महामंडलेश्वर बनाया गया था लेकिन उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा का पालन नहीं किया और अखाड़े के नियमों का भी उल्लंघन किया। इसी कारण उन्हें इंटरनेशनल किन्नर अखाड़े से हटा दिया गया है। मां सतीनंद गिरि ने स्पष्ट किया कि अब मां काली नंद गिरि न तो उनकी शिष्या हैं, न अखाड़े की सदस्य और न ही महामंडलेश्वर। मामले को लेकर धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। 

मंत्री टेटवाल सार्वजनिक बस से यात्रा कर अपने कार्य क्षेत्र पर पहुँचे

भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के ‘राष्ट्र प्रथम’ के आह्वान और ईंधन बचत, पर्यावरण संरक्षण तथा सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करने के संदेश से प्रेरित होकर कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गौतम टेटवाल ने गुरुवार को सारंगपुर से पचोर तक सार्वजनिक परिवहन बस सेवा से यात्रा कर अपने कार्य क्षेत्र पर पहुँचे। मंत्री  टेटवाल ने कारकेड और औपचारिक प्रोटोकॉल से अलग आम नागरिकों के बीच बस में यात्रा कर पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रहित का संदेश दिया। पेट्रोल पंप दुर्घटना से प्रभावित परिवारों से मिले मंत्री  टेटवाल ने विगत दिनों पचोर में पेट्रोल पंप पर हुई दुःखद घटना में प्रभावित परिवारों से भेंट की। उन्होंने दिवंगतों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिजनों से चर्चा की और उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुना। मंत्री  टेटवाल ने परिवारों को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। मंत्री  टेटवाल ने पचोर नगर में नागरिकों से जनसंपर्क कर विभिन्न स्थानीय समस्याओं एवं विकास कार्यों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की। उन्होंने संबंधित समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक निर्देश दिये। मंत्री  टेटवाल ने पचोर से सारंगपुर तक बस से यात्रा की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन अपनाना केवल यात्रा का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रहित से जुड़ा एक जिम्मेदार प्रयास है। इससे ईंधन की बचत, प्रदूषण में कमी और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। मंत्री  टेटवाल ने नागरिकों से भी अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन के उपयोग की अपील करते हुए कहा कि छोटे-छोटे सामूहिक प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण और देशहित के बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। 

आरक्षक पुलिस संगठन की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति – डीजीपी मकवाणा

भोपाल 25वीं वाहिनी, विशेष सशस्त्र बल, भोपाल में गुरूवार को नव आरक्षकों के दीक्षांत समारोह का आयोजन हुआ। राष्‍ट्रगीत एवं राष्‍ट्रगान के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने बतौर मुख्‍य अतिथि परेड की सलामी ली एवं निरीक्षण किया। समारोह को संबोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस का गौरवशाली इतिहास रहा है तथा आरक्षक पुलिस संगठन की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति होते हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 11 माह के कठिन प्रशिक्षण, अनुशासन एवं समर्पण के बाद तैयार हुए ये नव आरक्षक पुलिस विभाग की कार्यक्षमता को और अधिक सशक्त करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण अवधि जीवन का सबसे महत्वपूर्ण चरण होती है, जहां टीम भावना, अनुशासन, शारीरिक दक्षता एवं व्यवहारिक पुलिसिंग की सीख जीवनभर साथ रहती है। प्रशिक्षण के दौरान नवआरक्षकों को आउटडोर गतिविधियों, वेपन ट्रेनिंग, बलवा ड्रिल, कानून व्यवस्था, साइबर क्राइम, आधुनिक तकनीक एवं भीड़ नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण विषयों में प्रशिक्षित किया गया है, जो भविष्य की ड्यूटी में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। पुलिस महानिदेशक  मकवाणा ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध, कानून व्यवस्था एवं आंतरिक सुरक्षा बड़ी चुनौतियाँ हैं, जिनसे निपटने के लिए पुलिस बल को तकनीकी रूप से दक्ष और शारीरिक रूप से सक्षम होना आवश्यक है। उन्होंने विशेष सशस्त्र बल एवं मध्यप्रदेश पुलिस के जवानों द्वारा नक्सल विरोधी अभियानों,दस्‍यु उन्‍मूलन, चुनाव ड्यूटी तथा अन्य संवेदनशील परिस्थितियों में किए गए साहसिक कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ड्यूटी के दौरान तत्परता, मानवीय संवेदनशीलता एवं साहस का परिचय देते हुए पुलिस जवानों ने अनेक अवसरों पर लोगों को सीपीआर देकर जान बचाना पुलिस की जनसेवा की भावना को उजागर किया है। उन्होंने आगामी सिंहस्थ-2028 को मध्यप्रदेश पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक, ड्रोन सर्विलांस, सीसीटीवी मॉनिटरिंग एवं इंटीग्रेटेड कमांड सिस्टम जैसी व्यवस्थाओं में दक्षता भविष्य की पुलिसिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। पुलिस महानिदेशक  मकवाणा ने नव आरक्षकों को शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने, ईमानदारी, अनुशासन, संवेदनशीलता एवं संविधान के प्रति निष्ठा के साथ कार्य करने तथा लगातार जनसंवाद करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि वर्दी धारण करने के बाद पुलिसकर्मी का एकमात्र धर्म जनसेवा, कानून का पालन एवं राष्ट्रहित होता है। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि जनसुरक्षा और विश्वास से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है।। प्रत्येक पुलिसकर्मी को आमजन के प्रति संवेदनशीलता, त्वरित प्रतिक्रिया एवं निष्पक्षता के साथ कार्य करना चाहिए। जनता का विश्वास ही पुलिस की सबसे बड़ी ताकत है। समारोह के दौरान 25वीं वाहिनी, विसबल भोपाल के सेनानी  नागेंद्र सिंह द्वारा प्रशिक्षण प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया कि नव आरक्षक बुनियादी प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ 15 जून 2025 को किया गया था, जिसमें महिला एवं पुरुष नव आरक्षकों को फायरिंग, रायट ड्रिल, कानून व्यवस्था, शारीरिक दक्षता एवं कानून के मूलभूत ज्ञान सहित आधुनिक पुलिसिंग का प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक के मार्गदर्शन में पहली बार प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में साइबर क्राइम एवं सोशल मीडिया संबंधी अपराधों को शामिल किया गया, जिससे प्रशिक्षुओं को साइबर अपराधों से जुड़े “डूज़ एंड डोन्ट्स” की जानकारी भी दी गई। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में कई नव आरक्षक साइबर कमांडो के रूप में भी अपनी भूमिका निभाएंगे।  नागेन्‍द्र सिंह ने बताया कि नवआरक्षकों ने राजकोट, गुजरात में आयोजित 74वीं अखिल भारतीय पुलिस हॉकी प्रतियोगिता 2025-26 तथा जम्मू में आयोजित द्वितीय अखिल भारतीय पुलिस कबड्डी क्लस्टर प्रतियोगिता 2025-26 में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रशिक्षण संस्थान को गौरवान्वित किया।  सिंह ने कहा कि आरक्षक पुलिस विभाग की रीढ़ होते हैं तथा अनुशासन, शारीरिक दक्षता और जनसेवा की भावना के साथ प्रशिक्षित ये नव आरक्षक भविष्य में मध्यप्रदेश पुलिस के “देशभक्ति, जनसेवा” के ध्येय वाक्य को और अधिक सशक्त करेंगे। नव आरक्षकों द्वारा आकर्षक साइलेंट ड्रिल प्रदर्शन प्रस्तुत किया गया, जिसमें अनुशासन, तालमेल एवं उत्कृष्ट प्रशिक्षण दक्षता की प्रभावशाली झलक दिखाई दी। इसके साथ ही प्रशिक्षुओं ने विभिन्न योग आसनों का प्रदर्शन कर शारीरिक क्षमता, मानसिक संतुलन एवं फिटनेस के प्रति अपनी सजगता का परिचय दिया। कार्यक्रम के अंत में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नव आरक्षक  देवेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता 9वीं वाहिनी रीवा को प्रथम एवं  हर्षित कुशवाह 36वीं वाहिनी बालाघाट को द्वितीय पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही इनडोर एवं आउडडोर प्रशिक्षण में उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन करने वाले नव आरक्षकों को भी सम्‍मानित किया। उन्होंने सफल आयोजन से जुड़े सभी अधिकारियों, प्रशिक्षकों, कर्मचारियों एवं परिवारजनों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। समारोह में अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक  चंचल शेखर,पुलिस महानिरीक्षक  इरशाद वली, पुलिस आयुक्‍त  संजय कुमार सहित अन्‍य पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी, विशेष सशस्त्र बल के अधिकारी, प्रशिक्षक एवं बड़ी संख्या में नव आरक्षकों के परिजन उपस्थित रहे।  

EOW की ट्रैप कार्रवाई में SDM ऑफिस का स्टेनो पकड़ा गया, 30 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तारी

जबलपुर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की जबलपुर शाखा ने गुरुवार को नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा एसडीएम कार्यालय में बड़ी ट्रैप कार्रवाई करते हुए स्टेनो सौरभ यादव को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी पर कॉलोनी निर्माण के नक्शे की रिपोर्ट आगे बढ़ाने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप है। कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। यह है मामला ईओडब्ल्यू के अनुसार तेंदूखेड़ा निवासी संजय राय ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने कॉलोनी निर्माण के प्रस्तावित नक्शे पर स्थल निरीक्षण रिपोर्ट लगाने के लिए एसडीएम कार्यालय में आवेदन दिया था। आरोप है कि फाइल को लंबे समय से बिना कारण लंबित रखा गया और काम आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत की मांग की गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक जब उन्होंने कार्यालय में संपर्क किया तो स्टेनो सौरभ यादव ने 30 हजार रुपये देने पर फाइल आगे बढ़ाने की बात कही। शिकायत मिलने के बाद ईओडब्ल्यू ने पूरे मामले का सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया और आरोपी को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। ईओडब्ल्यू ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता ने SDM पर भी लगाए आरोप मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब शिकायतकर्ता संजय राय ने एसडीएम पूजा सोनी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि स्टेनो केवल माध्यम था और रिश्वत की मांग कथित तौर पर एसडीएम के निर्देश पर की जा रही थी। संजय राय ने आरोप लगाया कि स्टेनो ने उन्हें बताया था कि रिश्वत की राशि के अलावा एसडीएम कार्यालय के रेनोवेशन, पेंट और अन्य खर्चों के लिए भी दबाव बनाया जा रहा था। शिकायतकर्ता का कहना है कि वे कई दिनों से भीषण गर्मी में कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी।

देवास फैक्ट्री ब्लास्ट पर सरकार एक्शन में, डिप्टी CM जगदीश देवड़ा को मौके पर भेजा गया

देवास  पटाखा फैक्ट्री हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई है। वहीं, कई लोगों की स्थिति गंभीर है, जिनका अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। सीएम मोहन यादव ने देवास की घटना पर दुख जताया है। साथ ही मृतक के परिजनों को 4-4 लाख रुपए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही डेप्युटी सीएम जगदीश देवड़ा को मौके पर जाने के निर्देश दिए हैं। हादसे की जांच के निर्देश दिए दरअसल, देवास हादसे पर सीएम मोहन यादव ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के लिए 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की है। हादसे की जानकारी लगते ही सीएम ने प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को घटना स्थल जाने के निर्देश दिए। उन्होंने इस हादसे की जांच के आदेश भी दे दिए हैं। डेप्युटी सीएम जगदीश देवड़ा को भी भेजा हादसे को लेकर सीएम मोहन यादव ने कहा कि देवास जिले के टोंककला में पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में कई लोगों के हताहत होने का समाचार हृदय विदारक है। मैंने जिले के प्रभारी और उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, गृह सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों को घटना स्थल पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। घटना की जांच के आदेश भी दिए हैं। घायलों का निःशुल्क इलाज करने के लिए निर्देश दिए हैं। बाबा महाकाल से दिवंगतों की शांति, शोकाकुल परिजनों को दुःख सहन करने की शक्ति तथा दुर्घटना में घायलों को त्वरित स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं। हिरासत में फैक्ट्री मालिक वहीं, घटना के बाद फैक्ट्री मालिक अनिल मालवीय को पुलिस ने हिरासत में लिया है। अभी तक तीन मौतों की पुष्टि हुई है। वहीं, कई लोग घायल हुए हैं। 12 घायलों का इलाज देवास जिला अस्पताल, 8 का अमलतास अस्पताल, तीन का एमवॉयएच इंदौर और एक टी चोइथराम अस्पताल में इलाज चल रहा है। कुछ घायलों की स्थिति गंभीर है।

मैट्रिमोनियल साइट से शुरू हुई शादी की कहानी, भोपाल में ट्विशा शर्मा की मौत ने खड़े किए कई सवाल

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स थाना अंतर्गत बाग मुगालिया एक्सटेंशन में रहने वाली ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में तनाव बढ़ गया है. ट्विशा, सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहू थीं. उनकी मौत के दूसरे दिन 14 मई को भी शव का अंतिम संस्कार नहीं हो सका है. अभी शव भोपाल एम्स के मुर्दाघर (मोर्चरी) में रखा हुआ है. इस बीच उत्तर प्रदेश के नोएडा से भोपाल पहुंचे ट्विशा के परिजनों ने महिला थाने के बाहर जमकर हंगामा किया और निष्पक्ष जांच की मांग की।  सास और पति पर हत्या के आरोप भोपाल की कटारा हिल्स पुलिस के अनुसार, मंगलवार रात ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. प्रारंभिक शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्विशा के शरीर पर कई चोटों (मल्टीपल इंजरी) का उल्लेख है, जबकि मौत का तात्कालिक कारण फांसी बताया गया है. ट्विशा के परिजनों ने उनकी सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह पर मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना देने और हत्या करने के आरोप लगाए हैं. मामले की जांच कटारा हिल्स थाना प्रभारी (TI) दुबे कर रहे हैं. परिजनों ने साक्ष्य मिटाने और पुलिस पर दबाव बनाने की आशंका जताते हुए पूरे मामले की फॉरेंसिक जांच की मांग की है।  मैट्रिमोनियल साइट के जरिए हुई थी शादी पुलिस जांच में सामने आया है कि 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थीं. मैट्रिमोनियल साइट 'शादी डॉट कॉम' के माध्यम से उनकी जान-पहचान भोपाल के क्रिमिनल लॉयर समर्थ सिंह से हुई थी. दोनों ने 12 दिसंबर 2025 को विवाह किया था. शादी से पहले ट्विशा दिल्ली में नौकरी करती थीं. जांच में यह भी पता चला है कि दो माह पहले उनका गर्भपात (मिसकैरेज) हुआ था. पुलिस अब हर पहलू से इस मामले की तफ्तीश कर रही है।   ट्विशा शर्मा की आखिरी रात की दास्तां 12 मई 2026 ट्विशा की जिंदगी की आखिरी रात साबित हुई. उनके पिता नवनिधि शर्मा के अनुसार, मंगलवार रात करीब 10:05 बजे ट्विशा ने नोएडा में अपनी मां से फोन पर बात की थी. उसने बताया था कि उसे बहुत परेशान किया जा रहा है और अब उससे यह सब सहन नहीं हो रहा. वह बात कर ही रही थी कि तभी उसका पति कमरे में आ गया और ट्विशा ने घबराहट में कॉल काट दिया. इसके बाद मां ने उसे कई बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. रात 10:20 बजे सास गिरिबाला सिंह ने ट्विशा की मां को सूचना दी कि ट्विशा सांस नहीं ले रही है और उसे भोपाल एम्स ले जाया जा रहा है। 

मोबाइल मालिकों ने जताया पुलिस का आभार

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में आमजन की संपत्ति की सुरक्षा एवं गुम/चोरी हुए मोबाइल फोन की बरामदगी हेतु लगातार कार्यवाहियां की जा रहीं हैं। आधुनिक तकनीक, CEIR पोर्टल, साइबर विश्लेषण एवं स्थानीय आसूचना के प्रभावी उपयोग से विगत दो सप्‍ताह में मध्‍यप्रदेश पुलिस ने प्रदेश के विभिन्‍न जिलों में 1021मोबाईल फोन जिनकी कीमत लगभग 2 करोड़ 26लाख रूपए से अधिक है, नागरिको को लौटाये है। मोबाइल मालिकों ने अपने गुम हुए मोबाइल वापस मिलने पर मध्‍यप्रदेश पुलिस का हार्दिक आभार व्‍यक्‍त किया। प्रमुख कार्यवाही ग्वालियर जिले में ‘’तेरा तुझको अर्पण’’अभियान के तहत ग्वालियर कीसाइबर सेल टीम द्वारा CEIR पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्यवाही करते हुए विभिन्न राज्यों एवं शहरों से 571 गुम मोबाइल फोन जब्‍त किए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 1 करोड़ 41 लाख रूपये है। साथ ही लावारिस मिले मोबाइलों को स्वयं साइबर सेल में जमा कराने वाले जागरूक नागरिकों को पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया। सतना पुलिस द्वारा “ऑपरेशन रिंगटोन 2.0” के तहत CEIR पोर्टल की सहायता से 155 गुम मोबाइल फोन ट्रेस कर जब्‍त किए गए, जिनकी कीमत लगभग 29 लाख 31 हजार रूपये है। गुना पुलिस ने तकनीकी दक्षता एवं CEIR पोर्टल की सहायता से 64गुम मोबाइल फोन जब्‍त कर संबंधित धारकों को सुपुर्द किए हैं। जब्‍त मोबाइलों की अनुमानित कीमत लगभग 12 लाख 50 हजार रूपये है। जबलपुर जिले में साइबर सेल टीम द्वारा प्रभावी कार्यवाही करते हुए 106 गुम मोबाइल फोन (लगभग 18 लाख रूपए) जब्‍त किए गए। आगर मालवा पुलिस द्वारा “ऑपरेशन रिंगटोन” के तहत 81 गुम मोबाइल फोन जब्‍त कर उनके वास्तविक मालिकों को लौटाए गए। बरामद मोबाइलों की कुल कीमत 15 लाख रूपये से अधिक है। इस दौरान नागरिकों को साइबर सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड एवं यातायात नियमों के प्रति भी जागरूक किया गया। बुरहानपुर जिले के थाना लालबाग पुलिस ने मोबाइल शॉप में चोरी की घटना का खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्‍जे से एप्पल एवं अन्य कंपनियों के 3 मोबाइल फोन, 2 टैबलेट, 01 आईपोड एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सहित लगभग 3लाख 20 हजार रूपए से अधिक की संपत्ति जब्‍त की है। रेलवे पुलिस जीआरपी की विभिन्न इकाइयों द्वारा भी मोबाइल चोरी के मामलों में प्रभावी कार्यवाही की गई। जीआरपी कटनी ने शातिर मोबाइल चोर गिरोह का भंडाफोड़ कर 10 मोबाइल फोन सहित लगभग 3 लाख 20 हजार रूपये की संपत्ति जब्‍त की है। जीआरपी जबलपुर ने आरोपी से 67 हजार कीमत के 4 मोबाइल जप्त किए। वहीं जीआरपी-आरपीएफ उज्जैन ने मोबाइल चोरी का खुलासा कर आरोपी को गिरफ्तार करते हुए 18 मोबाइल फोन, जिनकी कीमत लगभग 1 लाख 88 हजार रूपये है, जब्‍त किए। विदिशा जिले की कोतवाली थाना पुलिस ने मोबाइल चोरी के मामले में त्वरित कार्यवाही करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर 1 लाख 50 हजार रूपए कीमत के चोरी हुए 6मोबाइल फोन जब्‍त किए। इन समस्त कार्यवाहियों में CEIR पोर्टल, सिटीजन कॉप एप एवं साइबर सेल की तकनीकी जांच का महत्वपूर्ण योगदान रहाहै। ऑनलाइन शिकायत प्रणाली के माध्यम से अब आमजन घर बैठे ही अपनी शिकायत दर्ज कर पा रहे हैं, जिससे समय कीबचत के साथ-साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो रही है। क्या है? CEIR पोर्टल सी.ई.आई.आर.पोर्टल- सीईआईआर (सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर) भारत सरकार दूरसंचार विभाग का पोर्टल है। CEIR-Sanchar Saathi की मदद से कोई भी व्यक्ति अपने चोरी अथवा गुम हुए मोबाइल का आईएमईआई नंबर ब्लांक कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिसके उपरान्त पुलिस द्वारा इस पोर्टल के माध्यम से मोबाइल को आसानी से खोजा जा सकेगा।  

सर्राफा बाजार में आग! इंदौर में सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी छलांग

इंदौर   घरेलू बुलियन बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, भारतीय तो रुपए में लगातार कमजोरी और आयात ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी के चलते सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल आया है। इंदौर बाजार में सोने की कीमतों में करीब 6 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि चांदी ने लगभग 6.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ बेहतर प्रदर्शन किया। बाजार में आरटीजीएस पर सोना 8000 रुपए महंगा होकर 1,59,000 ने रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी 9000 रुपए उछलकर न 2,78,000 रुपए प्रति किलो रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स पर सोना 4701.20 डॉलर प्रति औंस और चांदी 87.04 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई। उतार-चढ़ाव रहने की संभावना विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाना, अमरीका-ईरान संघर्ष को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और वैश्विक मुद्रास्फीति (महंगाई) की चिंताओं ने कीमती धातुओं में सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) की मांग बढ़ा दी है। बाजार के कारोबारी हाल ही में आयात शुल्क में किए गए बदलावों असर का भी आकलन कर रहे है, जिससे सोने की कीमतों को और समर्थन मिल सकता है।  टैक्स बढ़ने से तस्करी को मिल सकता बढ़ावा वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितताओं के कारण आने वाले कारोबारी सत्रों में बुलियन बाजार में उतार-चढ़ाव (वोलाटिलिटी) अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है। केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है। सरकार का उद्देश्य विदेशी खरीद कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को घटाना बताया जा रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सरकार के इस फैसले को अहम माना जा रहा है। हालांकि, सराफा कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि टैक्स बढ़ने से तस्करी को बढ़ावा मिल सकता है। उनका इस संबंध में तर्क है कि पहले जब आयात शुल्क कम किया गया था, तब सोने की स्मगलिंग में कमी आई थी। भारतीय ज्वैलरी के निर्यात को बढ़ावा देने की मांग मध्यप्रदेश सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष अविनाश शास्त्री ने कहा कि आयात ड्यूटी बढ़ोतरी से सोने की तस्करी को ड्यूटी में भारी बढ़ावा मिल सकता है। 15 प्रतिशत आयात शुल्क और 3 प्रतिशत जीएसटी मिलाकर सोने पर कुल 18 प्रतिशत का सरकार ने सोने की खरीद कम अतिरिक्त भार पड़ रहा है। करने की अपील भी की है। सरकार को भारतीय कारीगरों और ज्वैलरी उद्योग को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि बेहतर ज्वैलरी का निर्यात बढ़ सके।  

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मध्यप्रदेश में बिना TET योग्यता के शिक्षक नियुक्ति पर रोक

भोपाल   मध्यप्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षकों को देश की सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के मामले पर सुनवाई करते हुए एक स्पष्ट निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि- पात्रता परीक्षा के नियमों में जो भी ढील दी जानी थी, वह पहले ही दी जा चुकी है, ऐसे में अब बिना परीक्षा पास किए कोई भी शिक्षक नहीं बन सकता है। बता दें कि साल 1998 से 2009 के बीच नियुक्त किए गए शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट देने की मांग करते हुए याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थीं। 'बिना परीक्षा पास किए कोई टीचर नहीं बन सकता' बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मध्यप्रदेश में शिक्षकों की पात्रता परीक्षा में छूट दिए जाने की मांग को लेकर दायर की गई पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि पात्रता परीक्षा के नियमों में जो भी ढील दी जानी थी, वह पहले दी जा चुकी है। अब इसमें कोई छूट की गुंजाइश नहीं है और शिक्षक बनने के लिए टीईटी पास करना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2017 में जब नियम लागू हुए थे, उसके बाद 5 साल की रियायत दी गई थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। हालांकि इस मामले में अभी कोर्ट का अंतिम फैसला आना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट का पुराना आदेश सुप्रीम कोर्ट ने 1998-2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के TET एक्जाम को लेकर 1 सितंबर 2025 को कहा था कि 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षक जो मेरिट के आधार पर भर्ती हुए थे उनके लिए भी TET अनिवार्य है। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार और विभिन्न शिक्षक संगठनों ने पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर मांग की थी कि पुराने शिक्षकों को उनके अनुभव के आधार पर छूट दी जाए। पूर्व में कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि जो शिक्षक इस परीक्षा को पास करने में विफल रहेंगे, उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है। क्या है TET परीक्षा ? शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) एक अनिवार्य योग्यता है जिसे NCTE ने 2010 में लागू किया था। यह सुनिश्चित करता है कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों में न्यूनतम शैक्षणिक स्तर और कौशल मौजूद है। मध्य प्रदेश में वर्तमान में स्थिति यह है कि अगर कोर्ट राहत नहीं देता है, तो करीब 1.5 लाख अनुभवी शिक्षकों को फिर से छात्र बनकर परीक्षा देनी होगी। TET परीक्षा में दो पेपर होते हैं जिनमें से एक में पहली से पांचवी और दूसरे में पांचवी से आठवीं तक के लिए परीक्षा होती है। जातीय और श्रेणीवार विवरण की मांग सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार से शिक्षकों का विस्तृत डेटा मांगा है। अधिवक्ता पृथ्वीराज सिंह के अनुसार, कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पूर्व शिक्षकों की एक श्रेणीवार (Category-wise) सूची प्रस्तुत की जाए। इसमें सामान्य, ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के शिक्षकों की सटीक संख्या स्पष्ट होनी चाहिए। बता दें कि मध्य प्रदेश में लगभग 1.50 लाख शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने अब तक टीईटी पास नहीं की है, उनके भविष्य के लिए यह फैसला निर्णायक साबित होगा। सुप्रीम कोर्ट के पहले का क्या था आदेश?-सुप्रीम कोर्ट ने 1998-2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के TET एक्जाम को लेकर 1 सितंबर 2025 को कहा था कि 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षक जो मेरिट के आधार पर भर्ती हुए थे उनके लिए भी TET अनिवार्य है। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार और विभिन्न शिक्षक संगठनों ने पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर मांग की थी कि पुराने शिक्षकों को उनके अनुभव के आधार पर छूट दी जाए। पूर्व में कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि जो शिक्षक इस परीक्षा को पास करने में विफल रहेंगे, उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मध्यप्रदेश के 1.50 लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट आ गया था। गौरतलब है कि TET परीक्षा में दो पेपर होते हैं जिनमें से एक में पहली से पांचवी और दूसरे में पांचवी से आठवीं तक के लिए परीक्षा होती है।