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27,746 करोड़ के पैकेज से आय बढ़ेगी और घटेगी लागत

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को "कृषक कल्याण वर्ष" के रूप में मिशन मोड में लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस पूरे वर्ष किसानों को उनका वैभव लौटाने का संकल्प लिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आमदनी बढ़ाना, कृषि लागत को कम करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है। इसके लिए 16 विभाग एक साथ समन्वय से काम कर रहे हैं। विगत दिनों बड़वानी में हुई कृषि कैबिनेट में 27,746 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी गई है। कृषक कल्याण वर्ष 2026 के 4 बड़े लक्ष्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना सिर्फ फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी। आय में वृद्धि के लिए दूध, फल, सब्जी और मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ अन्य स्रोतों से भी कमाई के अवसर मिलेंगे। लागत में कमी लाने के लिए जैविक और प्राकृतिक खेती पर विशेष जोर दिया जाएगा और मिट्टी परीक्षण के जरिए संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देकर अनावश्यक खर्च घटाया जाएगा। तकनीक और विपणन के क्षेत्र में किसानों को अंकीय सेवा, कृषि प्रसंस्करण, कृषि-तकनीक, ड्रोन सेवा और किसान उत्पादक संगठन प्रबंधन से जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण युवाओं के लिए जल-कृषि जैसे आधुनिक क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। सिंचाई क्षमता को विस्तार देने के लिए वर्तमान में 65 लाख हेक्टेयर के सिंचित क्षेत्र को वर्ष 2028-29 तक 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। 16 विभागों की संयुक्त कार्ययोजना कृषक कल्याण वर्ष 2026 में कृषि विभाग 3,502.48 करोड़ रुपये की 20 परियोजनाओं को 31 मार्च 2031 तक चलाएगा। इसके तहत उन्नत बीज, प्राकृतिक खेती और फसल प्रदर्शन योजनाएं संचालित होंगी। मूंग की जगह उड़द उत्पादन पर किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा और सरसों को भावांतर योजना में शामिल किया जाएगा। रोटावेटर आधी कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा। पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग 9,508 करोड़ रुपये की 4 योजनाओं से दूध संकलन 25 प्रतिशत तक बढ़ाएगा। पशुपालकों को मोबाइल ऐप से सेवाएं मिलेंगी और पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए 610.51 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग 4,263.94 करोड़ रुपये की 3 योजनाओं पर काम करेगा। राष्ट्रीय उ‌द्यानिकी मिशन के लिए 1150 करोड़ रुपये और पौधशाला उ‌द्यान के लिए 1,739 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिससे उच्च गुणवत्ता की पौध और बीज रियायती दरों पर मिलेंगे। सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के लिए 1,375 करोड़ रुपये से नई खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां लगाई जाएंगी। मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग 218.50 करोड़ रुपये की 2 योजनाएं चलाएगा। मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026 से 3 वर्षों में 3 हजार करोड़ का निवेश और 20 हजार रोजगार सृजित होंगे। एक लाख पिंजरे स्थापित किए जाएंगे और मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के लिए 200 करोड़ रुपये दिए गए हैं। सहकारिता विभाग 8,186 करोड़ रुपये की 4 योजनाओं से किसानों को मजबूती देगा। सहकारी बैंकों के अंश पूंजी सहायता योजना के लिए 1,975 करोड़ रुपये और अल्पकालीन ऋण पर ब्याज अनुदान योजना के लिए 3,909 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिससे 3 लाख तक शून्य प्रतिशत दर पर फसल ऋण मिलेगा। नर्मदा घाटी विकास विभाग 2,067.97 करोड़ रुपये के 2 प्रस्तावों पर काम करेगा। बरला उद्वहन सूक्ष्म सिंचाई परियोजना से 33 गांव के 15,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। जल संसाधन विभाग प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत प्रति बूंद अधिक फसल में 2400 करोड़ रुपये से ड्रिप और फव्वारा सिंचाई पर अनुदान देगा। नई सिंचाई परियोजनाओं से खेती का रकबा बढ़ेगा। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग समर्थन मूल्य पर उपज खरीदी सुनिश्चित करेगा। चने के लिए 6.49 लाख मीट्रिक टन एवं मसूर के लिए 6.01 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का प्रस्ताव है। तुअर के लिए 1.31 लाख मीट्रिक टन का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। किसानों को खाद की घर पहुंच सेवा दी जाएगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 2010 करोड़ रुपये से ग्रामीण स्तर पर समूह आधारित विकास को बढ़ावा देगा, जिससे खेती के साथ जुड़े अन्य संसाधनों से भी आय के अवसर मिलेंगे। वन विभाग कृषि वानिकी पर उप-मिशन चलाएगा। “हर मेढ़ पर पेड़” के तहत फसलों के साथ वृक्षारोपण को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय होगी। ऊर्जा विभाग अगले तीन साल में 30 लाख से अधिक किसानों को सौर ऊर्जा पम्प देगा। हर साल 10 लाख किसानों को सौर पम्प देकर अन्नदाता से आत्मनिर्भर ऊर्जादाता बनाया जाएगा। उद्योग विभाग कृषि आधारित उद्योगों में किसानों की भागीदारी बढ़ाएगा। ऐसे उद्योग लगाने वालों को सरकार अनुदान देगी और आलू, टमाटर जैसी फसलों के लिए खाद्य प्रसंस्करण इकाई शुरू की जाएंगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग अंकीय कृषि मिशन लागू करेगा। कृषि ढांचा पोर्टल और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद पैकेज को एकीकृत किया जाएगा और कृषि पद्धतियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग बढ़ेगा। बीज की गुणवत्ता के लिए नई प्रयोगशालाएं खोली जाएंगी। ग्रामीण आजीविका मिशन राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के लिए 1010 करोड़ रुपये खर्च करेगा। यह 15,000 ग्राम पंचायत समूहों में लागू होगा और 1 करोड़ किसानों तक पहुंचेगा। 10,000 जैव-निवेश संसाधन केंद्र स्थापित होंगे। बीज प्रमाणीकरण विभाग प्रमाणित बीज की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। कोदो-कुटकी और मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए बोनस और प्रोत्साहन दिया जाएगा। राजस्व विभाग जिला स्तर पर कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी को मजबूत करेगा। फसल विविधीकरण कार्यक्रम चलाया जाएगा, जिससे पानी की अधिक खपत वाली फसलों की जगह दलहन, तिलहन और मोटे अनाज को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य की आबादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इन 16 विभागों के अंतर्गत आता है। किसानों को नई तकनीक और योजनाओं की जानकारी देने के लिए विधायक अपने क्षेत्र में 4 से 5 कृषि सम्मेलन करेंगे। इसके लिए प्रति विधानसभा क्षेत्र 5 लाख रुपये दिए जाएंगे। सरकार का संकल्प है कि ‘समृद्ध किसान ही विकसित भारत 2047’ के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।  

मुरैना में भय का माहौल: वन आरक्षक की हत्या और पुलिस की सुस्ती पर उठे सवाल

मुरैना  मुरैना की जनता लंबे समय से कानून व्यवस्था को लेकर चिंतित थी। बढ़ते अपराध और वन आरक्षक की हत्या जैसी गंभीर घटनाओं ने लोगों में भय का माहौल बना दिया था।इस समस्या का बड़ा कारण पुलिस अधीक्षक की अनदेखी अनसुनी सुस्त कार्य प्रणाली रही है।  पुलिस अधीक्षक की लापरवाह कार्य प्रणाली के बारे मे भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नागेंद्र तिवारी ने निरन्तर प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के सामने प्रमुखता से रखा था,आवश्यक होने पर आंदोलन की बात भी कही। माननीय मुख्य मंत्री महोदय अंतत श्री तिवारी की बात को गंभीरता से लिया और आज एसपी का परिवर्तन कर नए एसपी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह  मुरैना जिले के हर कार्यकर्ता और आमजन की जीत है। इसके लिए श्री ……………ने श्री नागेंद्र तिवारी को बधाई धन्यवाद देते हुए माननीय मुख्य मंत्री महोदय सरकार और संगठन का हृदय से आभार व्यक्त किया है, व आशा व्यक्त की है कि नव पदस्थ पुलिस अधीक्षक श्री मीणा जी के निर्देश मे  जिले मे अपराधो पर नियंत्रण होकर शान्ति सुरक्षा कायम होगी।

एम्स का कमाल: 7 माह से पैरालिसिस झेल रही महिला फिर हुई सक्रिय, स्पाइनल ट्रीटमेंट से मिला राहत

भोपाल भोपाल एम्स में एक महिला को मानो नया जीवन दिया गया है। ललितपुर (उत्तर प्रदेश) की 65 वर्षीय यह महिला पिछले सात महीनों से न चैन से बैठ पा रही थी और न ही सो पा रही थी। रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण वह 'स्पास्टिक पैराप्लेजिया' जैसी गंभीर स्थिति का शिकार थीं, जिसमें मांसपेशियां अनियंत्रित रूप से जकड़ जाती हैं। वह लकवे जैसी लाचारी और असहनीय पीड़ा जूझ रही थी। ल्बे समय से चल रहे उपचार व दवाओं के हैवी डोज के बावजूद कोई राहत नहीं मिल रही थी, जिससे पूरा परिवार मानसिक रूप से टूट चुका था। ऐसे में एम्स भोपाल दर्द चिकित्सा यूनिट (एनेस्थेसियोलॉजी) और न्यूरोसर्जरी विभाग की टीमें आगे आईं। डॉक्टर्स ने आइटीबी तकनीक अपनाकर महिला की दिक्कत दूर कर दी। इतना ही नहीं, प्राइवेट अस्पतालों में लगनेवाला लाखों का खर्च भी बचा दिया। वरदान बनी आइटीबी तकनीक महिला कई माह से परेशान थीं। आखिरकार एम्स भोपाल के दर्द चिकित्सा यूनिट (एनेस्थेसियोलॉजी) और न्यूरोसर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने इस जटिल चुनौती को स्वीकार किया। डॉ. अनुज जैन और डॉ. सुमित राज के नेतृत्व में डॉक्टरों ने 'इंट्राथीकल बैक्लोफेन थेरेपी' (आइटीबी) अपनाने का निर्णय लिया। यह तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान है जिन पर सामान्य दवाएं बेअसर हो जाती हैं। इसमें दवा को सीधे रीढ़ की हड्डी के तरल (सेरेब्रोस्पाइनल क्लुइड) में पहुंचाया जाता है, जिससे कम खुराक में ही अधिकतम लाभ मिलता है और दुष्प्रभाव कम होते हैं। उपचार की प्रक्रिया में सबसे पहले मरीज को ट्रायल इंजेक्शन दिया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम मिलते ही डॉक्टरों ने त्वचा के नीचे एक छोटा 'प्रोग्रामेबल ड्रग डिलीवरी पंप' प्रत्यारोपित कर दिया। यह डिवाइस निरंतर दवा की नियंत्रित मात्रा शरीर को पहुंचाता रहता है। प्रत्यारोपण के बाद मरीज अब पूरी तरह दर्दमुक्त है और सामान्य नींद ले पा रही है। एम्स में महज 7 लाख रुपए में उपचार: कम से कम 3 लाख रुपए बचाए निजी अस्पतालों में 10 लाख रुपए से अधिक में होने वाला यह उपचार एम्स में मात्र 7 लाख रुपए में संभव हुआ। डॉ. जैन ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा के दौर में किसी भी मरीज को लंबे समय तक दर्द सहने की जरूरत नहीं है। डॉ. सुमित राज ने इसे टीम वर्क की जीत बताया।

बड़ी राहत का ऐलान: आउटसोर्स कर्मचारियों को ₹26 हजार वेतन और स्थायी नौकरी का वादा, तारीख पर सस्पेंस

भोपाल बीते दिन मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में बड़ी संख्या में प्रदेशभर के अस्थाई, ठेका और आउटसोर्स कर्मचारियों ने मांगों को लेकर 'महासंग्राम आंदोलन' किया गया। अस्थाई, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में कर्मचारियों ने सरकार से मुफ्त में काम कराने की आदत बदलने और न्यूनतम 26,000 रुपये वेतन व नौकरी की सुरक्षा देने की मांग की। न्यूनतम वेतन सिर्फ कागजों पर, हकीकत में शोषण आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में न्यूनतम मजदूरी 12,425 से 16,769 रुपये घोषित है, लेकिन धरातल पर पंचायत चौकीदारों, पंप ऑपरेटरों और अंशकालीन कर्मियों को 3 से 5 हजार रुपये थमाए जा रहे हैं। 2003 के बाद से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की स्थायी नौकरियां खत्म कर दी गई हैं, जिससे गरीब, दलित और पिछड़ा वर्ग के युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया है। लोकल यूथ सर्वेयर महासंघ के अध्यक्ष वीरेंद्र गोस्वामी ने कहा कि ६ जुलाई को हाईकोर्ट के सामने आंदोलने करेंगे। प्रशासन की सख्ती और पाबंदियों के बीच आंदोलन कर्मचारियों ने पहले भाजपा कार्यालय के घेराव और 'सामूहिक आत्मदाह' का ऐलान किया था, लेकिन प्रशासन की तीन दिनों की खींचतान और पाबंदियों के बाद शर्तों के साथ नीलम पार्क में प्रदर्शन की अनुमति मिली। आंदोलन में डॉ. अमित सिंह, राजभान रावत, उमाशंकर पाठक और विपिन पांडे सहित कई संगठनों के नेता शामिल हुए। कर्मचारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी उग्र रूप लेगा। प्रदर्शनकारियों का हुआ बुरा हाल प्रदर्शनकारियों तेज गर्मी के चलेत काफी परेशान हुए। कुछ लोगों की तबीयत भी बिगड़ गई। एक महिला गर्मी की वजह से बेहोश भी हो गई। इस दौरान महिला पुलिस उन्हें संभालती नजर आई। कर्मचारियों का कहना है कि यदि हमारी मांगे पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन को और तेज करेंगे। पूरे प्रदेश के 1 लाख कर्मचारी भोपाल में डेरा डालेंगे। ये है वेतन का सच (प्रति माह) लोकल यूथ सर्वेयर: 1,000 पंचायत चौकीदार/पंप ऑपरेटर: 3,000 से 4,000 मध्यान्ह भोजन कार्यकर्ता, पेशा मोबिलाइजर: 4,000 स्वास्थ्य आउटसोर्स कर्मचारी: 7,000 से 8,000 (वेतन रुपए में) कौन होते हैं आउटसोर्स कर्मचारी जानकारी के लिए बता दें कि आउटसोर्स कर्मचारी वे श्रमिक होते हैं जिन्हें कोई कंपनी या सरकारी विभाग सीधे तौर पर नियुक्त न करके, किसी तीसरी निजी एजेंसी या ठेकेदार के माध्यम से काम पर रखती है। ये कर्मचारी मुख्य संस्थान के कर्मचारी नहीं माने जाते, बल्कि एजेंसी के पेरोल पर होते हैं और उन्हें आमतौर पर संविदा या अल्पकालिक (Temporary) आधार पर काम पर रखा जाता है। इनकी नियुक्ति और वेतन का प्रबंधन ठेकेदार या आउटसोर्सिंग कंपनी करती है। ये कर्मचारी स्थायी नहीं होते और उनकी नौकरी अक्सर टेंडर या ठेके की अवधि (जैसे 1-3 साल) तक ही सीमित होती है।

यात्रियों के लिए राहत भरी खबर: इंदौर-मुंबई के बीच 4 मई से शुरू होगी स्पेशल ट्रेन

इंदौर गर्मी की छुट्टियों में इंदौर से मुंबई और मुंबई से इंदौर के लिए आवागमन करने वाले यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर है। यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को ध्यान में रखते हुए पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल ने मुंबई सेंट्रल और इंदौर जंक्शन के बीच एसी सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। इस ट्रेन के शुरू होने से इंदौर-मुंबई अवंतिका एक्सप्रेस, इंदौर-दौंड एक्सप्रेस और सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन में यात्रियों का दबाव काफी कम हो जाएगा और यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। यह विशेष ट्रेन चार मई से 29 जून 2026 तक संचालित रहेगी। दोनों दिशाओं में कुल दूरी तय 826 किमी तय करेगी। कुल 17-17 फेरे दोनों दिशाओं में लगाए जाएंगे। ट्रेन मुंबई सेंट्रल-इंदौर के बीच प्रत्येक रविवार एवं मंगलवार को प्रस्थान रात 11:20 बजे होगी। इसी प्रकार इंदौर-मुंबई सेंट्रल के लिए प्रत्येक सोमवार एवं बुधवार को शाम 05:00 बजे प्रस्थान करेंगी। इंदौर-मुंबई के बीच प्रमुख ठहराव इंदौर से शाम 05:00 बजे चलकर उज्जैन, रतलाम, दाहोद, वडोदरा, सूरत, वापी, बोरीवली, मुंबई सेंट्रल सुबह 07:10 पर पहुंचेगी। इसी प्रकार मुंबई सेंट्रल से रात 11:20 बजे चलकर बोरीवली, वापी, सूरत, वडोदरा, रतलाम, उज्जैन, इंदौर अगले दिन दोपहर 01:00 बजे पहुंचेगी। पहले से चल रही सुपरफास्ट स्पेशल इंदौर से मुंबई के बीच पहले से ही एक सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन चल रही है। मुंबई सेंट्रल-इंदौर सुपरफास्ट स्पेशल 20 अप्रैल से 29 मई तक मुंबई सेंट्रल से प्रत्येक सोमवार एवं शुक्रवार को 11.20 बजे प्रस्थान करती है और अगले दिन दोपहर 01.00 बजे इंदौर पहुंचती है। इसी प्रकार इंदौर-मुंबई सेंट्रल सुपरफास्ट स्पेशल 21 अप्रैल से 30 मई तक इंदौर से प्रत्येक मंगलवार एवं शनिवार को इंदौर से शाम 05.00 बजे प्रस्थान करती है और अगले दिन सुबह 07.10 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचती है।  

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर में 5 साल में 20 हजार करोड़ का निवेश, विकास की नई दिशा

इंदौर इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमिपूजन रविवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव के हाथों होने जा रहा है। 20 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में अगले पाँच वर्षों में 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा। इस इंडस्ट्रियल जोन को बैंकिंग, बीमा, फाइनेंस जैसे अन्य सेक्टरों के लिए डिजाइन किया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए पहले चरण में दो हजार करोड़ रुपये की राशि मंजूर हुई है, जिसमें से 327 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।  कॉरिडोर के जरिए आईटी, लॉजिस्टिक्स, फिनटेक, एरोसिटी और ग्रीन इंडस्ट्री जैसे सेक्टर विकसित किए जाएंगे, जिससे बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इस कॉरिडोर से एक लाख से अधिक रोजगार मिलने की संभावना है। इंदौर के नैनोद से पीथमपुर के बीच बनने वाले इस कॉरिडोर की एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। सरकार की कोशिश है कि यहां परंपरागत उद्योगों के बजाय ऐसे उद्योग विकसित हों, जो भारी मशीनों पर निर्भर न हों। इसी कारण डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसी उन्नत इंडस्ट्री के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।   इस कॉरिडोर के लिए सबसे बड़ी चुनौती किसानों से जमीन अधिग्रहण की है। लगभग 60 प्रतिशत किसान अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हुए हैं। 60 से 70 मीटर चौड़ाई में इस कॉरिडोर को विकसित किया जाएगा, जिससे इंदौर से पीथमपुर के बीच की दूरी 10 किलोमीटर तक कम हो जाएगी और आवागमन भी आसान होगा।   कॉरिडोर के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में उद्योगों के लिए सरकार जमीन उपलब्ध कराएगी। यह इकोनॉमिक कॉरिडोर सुपर कॉरिडोर से भी जुड़ा होगा, जिसे इंदौर विकास प्राधिकरण ने लगभग दस वर्ष पहले विकसित किया था। यहां टीसीएस, इंफोसिस जैसी कंपनियों के स्पेशल इकोनॉमिक जोन हैं और तीन बड़े शैक्षणिक संस्थान भी स्थित हैं।

‘खादी’ और ‘ग्रामोद्योग उत्पाद’ अब ऑनलाइन, विदेशों में भी पहुंचाए जाएंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश की खादी और उसके उत्पाद अब ग्लोबल होने की ओर बढ़ रहे हैं। मध्यप्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के ब्रांड्स की अब पूरे देश के साथ ग्लोबल ब्रांडिंग और ऑनलाइन खरीदी-बिक्री शुरू करने की तैयारी हो गई है। इसके लिए एक ई-कॉमर्स प्लेटफार्म तैयार कराया जा रहा है, इसके साथ इसे केंद्र के ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स से भी जोड़ा जाएगा। इसके तहत एक ई-कॉमर्स पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार किया जाएगा। इससे प्रदेश की खादी पूरे देश के साथ विदेशों में रहने वालों के लिए भी उपलब्ध हो जाएगी। लोगों में काफी प्रिय हैं ये उत्पाद बोर्ड इसके लिए निजी कंपनियों की मदद लेने जा रहा है। इसे ई-कॉमर्स पोर्टल विकसित करने, उसे ओएनडीसी से जोड़ने सहित उसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी। बोर्ड के कबीरा खादी और विंध्या वैले ब्रांड के उत्पाद प्रदेश में काफी लोकप्रिय हैं, इसलिए इनके क्षेत्र के विस्तार के लिए प्रयास शुरू किए गए हैं।  इसके तहत प्रदेश के खादी वस्त्रों के साथ हैंडीक्राफ्ट्स, कुटीर उद्योगों के सामान, हस्तनिर्मित साज-सज्जा के सामान को देश भर में पहुंचाया जाएगा। अभी बोर्ड द्वारा कई उत्पादन केन्द्र और बिक्री आउटलेट खोले गए हैं लेकिन इनकी पहुंच सीमित है। यह होंगे काम -खादी के सभी उत्पादों का एक कैटालॉग तैयार किया जाएगा। -बोर्ड के अधिकारियों के साथ विक्रय केंद्रों और अन्य संबद्ध लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। -संबंधित कंपनी पोर्टल शुरू होने के बाद तकनीकी सपोर्ट और समस्या आने पर उसका निराकरण भी करेगी। -स्टॉक मैनेजमेंट संबंधी काम भी किया जाएगा। -कस्टमर मैनेजमेंट किया जाएगा, उनके आर्डर से लेकिन एक्सचेंज, ऑर्डर रद्द करना आदि काम ऑनलाइन होंगे। -बिक्री का एनालिसिस भी आसानी से हो सकेगा। कम बिक्री वाले क्षेत्र को बढ़ाने के प्रयास होंगे। ग्लोबल होने की राह पर ये कदम बीते कई सालों में मध्यप्रदेश के कई उत्पादों को सिंगापुर, न्यूयॉर्क, मिलान, वैंकूवर, जापान, बहरीन और कुवैत जैसे देशों में प्रदर्शनियों में शामिल किया गया है। ओडीओपी के तहत राज्य के 38 उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है, और म.प्र. के ODOP उत्पादों का निर्यात सालाना लगभग 15% की दर से बढ़ रहा है। प्रदेश के इंदौर जैसे शहरों से अब सीधे अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक ई-कॉमर्स के माध्यम से खादी उत्पादों की पहुंच बन रही है। विन्ध्या वैली और कबीरा ब्रांड: म.प्र. खादी ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा गुणवत्ता के प्रतीक के रूप में इन ब्रांड्स को स्थापित किया गया है। प्रदेश में दूध उत्पादन के मामले में, सांची ब्रांड ने पहले ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना ली है।

विभागों ने नियमों में संशोधन शुरू, संविदा कर्मियों के लिए बढ़े अवसर

भोपाल मध्य प्रदेश के डेढ़ लाख से अधिक संविदा कर्मियों की लंबे समय से चली आ रही सीधी भर्ती के रिक्त पदों पर नियुक्ति में 50 प्रतिशत कोटा देने की मांग धीरे-धीरे ही सही मगर पूरी होने जा रही है। इसके लिए सभी विभागों के सेवा भर्ती नियम में संशोधन करके उक्त प्रविधान किया जा रहा है। यानी अब इनमें सीधी भर्ती के रिक्त पदों में से 50 प्रतिशत संविदा कर्मियों से भरे जाएंगे। वर्ष 2023 की संविदा नीति और कार्यान्वयन में देरी यह प्रविधान संविदा नीति में तो पहले ही कर दिया गया था लेकिन विभागों ने भर्ती नियमों में संशोधन नहीं किया। अब नियम संशोधित कर लागू किए जा रहे हैं। संविदा नीति में संशोधन वर्ष 2023 में किया गया। इसमें ही यह प्रविधान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर किया गया था। विधानसभा चुनाव के बाद इस नियम को लागू करने में अधिकारियों ने रुचि नहीं दिखाई। इसके कारण मामला टलता गया और कर्मचारियों में रोष बढ़ता गया।  

संत और सनातन संस्कृति ही समाज को दिखाते हैं सही दिशा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसी देवस्थान की प्राण प्रतिष्ठा और संतों का सान्निध्य कई जन्मों के पुण्य के बाद ही प्राप्त होता है। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की अमर धरोहर बताते हुए कहा कि ईश्वर संतों के माध्यम से ही समाज को मार्ग भटकने से बचाते हैं। उन्होंने जैन धर्म के "जियो और जीने दो" के मूल मंत्र और अहिंसा के मार्ग पर विशेष बल दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति हमें सिखाती है कि जीवन का प्रत्येक क्षण और व्यवस्था का प्रत्येक कण लोक-कल्याण के लिए सदुपयोग में आना चाहिए। मानवता और जीव मात्र के प्रति करुणा भाव रखना ही हमारी संस्कृति का आधार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर में जैन समाज के 'प्रतिष्ठा महोत्सव' एवं 'लाभार्थी बहुमान समारोह' में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। मुख्यमंत्री द्वारा गच्छाधिपति आचार्यदेव मद्विजय हितेश्चन्द्रसूरीश्वरजी महाराज साहिब का भावपूर्ण पूजन-वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मोहनखेड़ा तीर्थ से अपने आत्मीय और गहरे जुड़ाव को भी साझा किया। उन्होंने रोचक ढंग से उल्लेख किया कि आचार्य  ने इस पावन तीर्थ का नाम उनके नाम (मोहन) पर ही रखा है, जो उनके लिए व्यक्तिगत रूप से अत्यंत आनंद और गौरव का विषय है। उन्होंने मोहनखेड़ा तीर्थ को न केवल प्रदेश, बल्कि पूरे देश और दुनिया के लिए श्रद्धा एवं आस्था का एक प्रमुख केंद्र बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और समरसता का संचार होता है। मुख्यमंत्री ने सफल आयोजन के लिए समस्त ट्रस्टी परिवार और आयोजन समितियों को बधाई दी और आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यों में हर संभव सहयोग प्रदान करती रहेगी। आचार्य  हितेश्चन्द्रसूरीश्वरजी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सरल स्वभाव और धर्म के प्रति उनकी अटूट निष्ठा की प्रशंसा की। आचार्य  ने कहा कि जब शासन और साधना का समन्वय होता है, तभी राष्ट्र उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री को आशीर्वाद देते हुए कहा कि जिस प्रकार वे जनसेवा के कार्यों में संलग्न हैं, उसी प्रकार धर्म और संस्कृति के संरक्षण में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण है। आचार्य  ने प्रतिष्ठा महोत्सव के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ऐसे आयोजन आत्मा की शुद्धि और समाज में सद्भावना बढ़ाने का कार्य करते हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को धर्म के मार्ग पर अडिग रहने और जीव मात्र के प्रति करुणा भाव रखने की प्रेरणा दी।    

राज्यमंत्री गौर ने ढाई लाख और दो लाख लीटर की क्षमता वाली टंकियों का किया भूमिपूजन

भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने रविवार को गोविंदपुरा क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 2 पानी की टंकियों के निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। राज्यमंत्री  गौर की इस पहल से मिसरोद स्थित फॉर्च्यून डिवाइन सिटी के पास 2.5 लाख लीटर क्षमता तथा प्रताप नगर, बरखेड़ा पठानी के पास 2 लाख लीटर क्षमता की पानी की टंकियों की स्थापना होगी। 2 करोड़ 70 लाख रूपये की लागत से इन टंकियों का निर्माण कार्य किया जाएगा। राज्यमंत्री  कृष्णा गौर ने कहा कि इससे क्षेत्रवासियों को नर्मदा जल की नियमित आपूर्ति हो सकेगी। उन्होंने कहा कि प्यासे को पानी पिलाना हमारी संस्कृति में पुण्य का कार्य माना गया है और इसी भावना के साथ क्षेत्र के नागरिकों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के लिए यह पहल की गई है। राज्यमंत्री  गौर ने बताया कि बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए नई पानी की टंकियों का निर्माण आवश्यक हो गया था। अमृत फेस-2 योजना के अंतर्गत क्षेत्र में कुल 18 टंकियों का निर्माण प्रस्तावित है, जिससे भविष्य में जल संकट की समस्या से राहत मिलेगी। राज्यमंत्री  गौर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य 18 माह के भीतर गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि गोविंदपुरा क्षेत्र में विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी और आगे भी नागरिकों को ऐसी महत्वपूर्ण सौगातें मिलती रहेंगी। कार्यक्रम में  मोनिका ठाकुर, श्री रामबाबू पाटीदार, श्री प्रताप वारे, श्री जितेंद्र शुक्ला, श्री भागीरथ पाटीदार, श्री नीरज सिंह, श्री प्रताप सिंह बेस,  सरिता सिंह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।