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पारिवारिक संस्कृति व प्रेम, शांति, सद्भावना रथ को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिखाई हरी झण्डी

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रीवा में ब्रहृाकुमारी संस्थान द्वारा संचालित किए जा रहे पारिवारिक संस्कृति व प्रेम, शांति एवं सद्भावना रथ को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह अभियान समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे की भावना को सशक्त करेगा तथा प्रदेश में सकारात्मक परिवर्तन लाएगा। प्रेम, शांति और विश्व बंधुत्व का संदेश लेकर गांव-गांव तक भ्रमण करने वाले रथ से एकता, प्रेम, सद्भावना व नशामुक्ति का संदेश जन-जन तक पहुंचेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजागृति रथ में स्थापित 12 ज्योतिर्लिंगों के दिव्य स्वरूपों की पूजा-अर्चना की। रीवा के राजनिवास सर्किट हाउस में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने ब्रहृाकुमारी संस्थान द्वारा चलाए जा रहे जन जागरण अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पावन और आध्यात्मिक कार्य प्रदेश में विश्व बंधुत्व की भावना जागृत करने में सहायक सिद्ध होगा। ब्रहृाकुमारी संस्थान की भोपाल जोन की डायरेक्टर बीके निर्मला के निर्देशन में जन जागरण अभियान अंतर्गत ज्योतिर्लिंग रथ रीवा जिले में महाशिवरात्रि 2027 तक भ्रमण करेगा। कार्यक्रम में जिला भाजपाध्यक्ष वीरेन्द्र गुप्ता सहित ब्रम्हकुमारी संस्थान के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

राज्यपाल पटेल बोले – सशस्त्र सेना झंडा निधि में योगदान, राष्ट्र भक्ति की सशक्त अभिव्यक्ति

भोपाल.  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि करूणा और दया मानव का मूल स्वभाव है। दान अंतर्रात्मा की आवाज है। यह आत्मीय भाव से की गयी सहयोग की पहल है। इस भावना को जरूरतमंदों की सेवा में लगाने में ही जीवन की सार्थकता है। उन्होंने कहा कि सशस्त्र सेना झंडा कोष में उदार योगदान हमारे सैनिकों और उनके परिवारों का केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति की सशक्त अभिव्यक्ति है। झंडा निधि में सहयोग राष्ट्र सेवा में समर्पित वीरों के प्रति हमारे कर्तव्य पालन का अवसर है। राज्यपाल पटेल ने प्रदेशवासियों का आहवान किया कि सैनिक कल्याण के लिए अपनी क्षमता के अनुसार अधिक से अधिक दान दें। साथ ही अन्य लोगों को भी प्रेरित करें।   राज्यपाल पटेल मंगलवार को समामेलित विशेष निधि प्रबंध समिति की बैठक उपरांत लोकभवन में आयोजित सशस्त्र सेना झंडा निधि में विशेष योगदान देने वालों के अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने लक्ष्य से अधिक राशि संग्रहण के लिए संभागायुक्त जबलपुर धनंजय सिंह भदौरिया, हरदा कलेक्टर सिद्धार्थ जैन, अलीराजपुर कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर, नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा और दानदाताओं को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव गृह के.सी. गुप्ता, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, सचिव गृह विभाग श्रीमती शिल्पा गुप्ता, जी.ओ.सी. मध्यप्रदेश मेजर जनरल संजय गौतम, ब्रिगेडियर शरद नायर और विकास बत्रा सहित सैनिक कल्याण बोर्ड मध्यप्रदेश के पदाधिकारी, प्रबंध समिति के सदस्य मौजूद थे। लक्ष्यों से अधिक राशि संकलन पर दी बधाई राज्यपाल पटेल ने अभिनंदन समारोह में निर्धारित लक्ष्यों से अधिक राशि एकत्र करने वाले जिलों की सराहना की। सैनिक कल्याण प्रयासों में सहभागी सभी उपक्रमों, संगठनों और व्यक्तिगत दानदाताओं का आभार भी जताया। राष्ट्रीय सम्मेलन में विगत वर्ष सशस्त्र बलों के पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिये उत्कृष्ट योगदान के लिए मध्यप्रदेश को सम्मानित किए जाने की बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक दक्षता का परिचायक नहीं, बल्कि हमारे समाज की जागरूकता, संवेदनशीलता और देशभक्ति का प्रतीक है। इसके लिए सभी संभाग आयुक्तों, कलेक्टरों तथा प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई दी और आशा जताई कि यह प्रयास निरंतर आगे भी जारी रहेंगे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि हमारी शांति और सुरक्षा के लिए परिवार से दूर रहकर राष्ट्र धर्म का पालन करने वाले वीर सैनिकों के त्याग और बलिदान के प्रति आभारी होना हमारा सर्वोच्च मानवीय धर्म है। राष्ट्र की सीमाओं पर जब कोई सैनिक अपने प्राणों की बाज़ी लगाता है, तब वह केवल देश की रक्षा नहीं करता, बल्कि हमारे सुरक्षित वर्तमान और भविष्य की नींव को अपने रक्त से मजबूत बनाता है। उनके त्याग और बलिदान का स्मरण करते हुए उनके लिए वास्तविक सहयोग के प्रयासों में सक्रिय सहभागी बनना होगा। हमारा कर्तव्य है कि देश के इन प्रहरी सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें और उसे निभाएँ। उन्होंने कहा कि सैनिकों की निस्वार्थ सेवा, त्याग और बलिदान का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि हमारे आचरण में भी झलकना चाहिए। राज्यपाल पटेल ने युद्ध में घायल सैनिकों, शहीदों के परिजन और पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए संवेदनशीलता और समर्पण के साथ सामाजिक दायित्वों के पालन का संकल्प भी दिलाया। राज्यपाल पटेल का समारोह में पुष्प-गुच्छ भेंटकर स्वागत किया तथा स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया। दानदाताओं ने अपने अनुभव साझा किए। स्वागत उद्बोधन और आभार ब्रिगेडियर अरूण नायर ने व्यक्त किए।  कार्यों की गुणवत्ता पर दें विशेष बल : राज्यपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अभिनंदन समारोह से पूर्व समामेलित विशेष निधि प्रबंध समिति की 25वीं वार्षिक बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने प्रदेश में सैनिक कल्याण प्रयासों के संबंध में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। निर्माणाधीन कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष बल देते हुए समय सीमा में निर्माण कार्य को पूरा करने पर विशेष बल दिया।  राज्यपाल पटेल के समक्ष बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के विभिन्न व्यय प्रस्तावों की चर्चा की गई। बैठक में विगत वर्ष का पालन प्रतिवेदन, ऑडिट रिपोर्ट, व्यय प्रस्ताव सहित विभिन्न विषयों की विस्तार से समीक्षा की गई। विगत पॉच वर्षों के आय के स्त्रोत, अनुदान, सावधि जमा की ब्याज राशि आदि विभिन्न बिन्दुओं की जानकारी दी गई।   25 दानदाताओं ने किया लगभग 60 लाख का दान समारोह में बताया गया कि लक्ष्य से अधिक राशि संग्रहित करने वाले संभाग में प्रथम जबलपुर संभाग, द्वितीय उज्जैन संभाग और तृतीय स्थान शहडोल संभाग को प्राप्त हुआ है। प्रदेश के 43 जिलों ने लक्ष्य से अधिक राशि संग्रहित की है। राज्यपाल पटेल ने इस अवसर पर वर्ष 2024-25 में स्वेच्छा से 1 लाख रूपए से अधिक की राशि का दान करने वाले दान-दाताओं का अभिनंदन किया। सम्मानित दान-दाताओं में अध्यक्ष, मध्यप्रदेश भूतपूर्व सैनिक कलयाण समिति, भोपाल द्वारा 15 लाख,  आदित्य पटेल एवं वीरेन्द्र विश्वकर्मा विनर्स इन्सटीट्यूट इंदौर द्वारा 12 लाख 44 हजार 818, वल्लभ भाई पटेल एवं नवनीत पटेल, पटेल मोटर्स, इंदौर द्वारा 3 लाख 2 हजार, मनीष मठवाल एवं रवीन्द्र सिंह रावत, मुख्य कार्यालय, भारतीय स्टेट बैंक, भोपाल द्वारा 2 लाख 26 हजार 400, सूबेदार अमरजीत सिंह (से.नि.), सागर कैंट द्वारा 2 लाख, नरेन्द अहिरवार एवं डॉ. विकास मिश्रा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, भोपाल द्वारा 1 लाख 92 हजार 355, कुन्दन कुमार, क्षेत्रीय प्रमुख, क्षेत्रीय कार्यालय, सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया सागर द्वारा 1 लाख 55 हजार 905, डॉ. नरेन्द्र कुमार ओझा एवं डॉ. राजेश कुमार दीक्षित सेवानिवृत्त प्राध्यापक मंच इंदौर द्वारा 1 लाख 50 हजार, राम कुमार गुप्ता एवं 1 अन्य जिला पंजीयक भोपाल द्वारा 1 लाख 48 हजार 610, मनीश कुमार मंग्रेलिया प्रबंध निदेशक, लेजरकट टेक्नालॉजी प्र.लि. भोपाल द्वारा 1 लाख 21 हजार, चतुर सिंह यादव एवं श्रीमती सुनीता यादव निदेशक, वन आदर्श विद्या निकेतन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, इंदौर द्वारा 1 लाख 11 हजार, विभू सूरी, यूनिक एडवरटाइजिंग रीवा द्वारा 1 लाख 11 हजार, अनन्त कुमार सोनी एवं श्रीमती साधना सोनी प्रतिकुलाधिपति, ए.के.एस. विश्वविद्यालय सतना द्वारा 1 लाख 11 हजार,  राकेश अग्रवाल आर के डेवलेपर्स, उज्जैन द्वारा 1 लाख 11 हजार, वीरेन्द्र सिंह धाकड़ एवं ब्रिजेश कुमार सिंह आबकारी विभाग, भोपाल द्वारा 1 लाख 10 हजार, डॉ. राकेश अग्रवाल एवं डॉ. आलोक खन्ना इन्डियन मेडिकल एसोसिएशन म.प्र. सतना शाखा, सतना द्वारा 1 लाख 10 हजार, डॉ. सुमित अग्रवाल एवं डॉ. श्रीमती प्राप्ति गुप्ता अग्रवाल सार्थक अस्पताल, सतना द्वारा 1 लाख 5 हजार, सुनील … Read more

भोपाल में आपराधिक न्याय प्रणाली में AI के उपयोग पर राष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन

भोपाल.  भोपाल में आज पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) द्वारा एक विशेष सम्मलेन आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम केंद्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी (CAPT) और राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के सहयोग से "आपराधिक न्याय प्रणाली में एआई (AI) का उपयोग" विषय पर आधारित था।  आलोक रंजन (महानिदेशक, NCRB एवं BPR&D) के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में न्यायपालिका, पुलिस, फॉरेंसिक और जेल प्रशासन के 170 से अधिक विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इसका मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि नई तकनीक की मदद से न्याय प्रणाली को कैसे बेहतर बनाया जाए। सम्मेलन का उद्घाटन संबोधन माननीय न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस, निदेशक, राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भारत, भोपाल द्वारा किया गया, साथ ही आलोक रंजन, आईपीएस, महानिदेशक, एनसीआरबी एवं बीपीआरएंडडी, नई दिल्ली, गृह मंत्रालय द्वारा विशेष संबोधन दिया गया। सम्मेलन में आपराधिक न्याय प्रणाली के पांच प्रमुख स्तंभों—न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, फॉरेंसिक तथा सुधारात्मक प्रशासन—में एआई की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला गया तथा इसके संतुलित एवं जिम्मेदार उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया। प्रतिभागियों ने एल्गोरिदमिक पक्षपात, फॉल्स पॉजिटिव तथा स्वचालित प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भरता जैसी प्रमुख चुनौतियों पर भी विचार किया। भारत में विधिक एवं संस्थागत प्रतिक्रियाओं, जैसे उच्चतम न्यायालय की एआई पहलों तथा विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा जेनरेटिव एआई के उपयोग को विनियमित करने हेतु जारी दिशा-निर्देशों पर भी चर्चा की गई। प्रत्येक सत्र के पश्चात प्रश्नोत्तर, संवाद, सर्वोत्तम अभ्यास एवं केस स्टडी पर विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन में एआई-जनित साक्ष्यों की स्वीकार्यता, डीपफेक से संबंधित चिंताओं तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की प्रामाणिकता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। साथ ही, गोपनीयता, निगरानी एवं मानवाधिकारों से संबंधित नैतिक पहलुओं को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। सम्मेलन का निष्कर्ष यह रहा कि एआई आपराधिक न्याय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण “फोर्स मल्टीप्लायर” है, परंतु इसके प्रभावी उपयोग हेतु क्षमता निर्माण, स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) तथा मानव निगरानी आवश्यक है, ताकि पारदर्शिता, जवाबदेही एवं विधिक वैधता सुनिश्चित की जा सके। आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रत्येक स्तंभ में एआई के उपयोग के संभावित क्षेत्रों की पहचान की गई, जिससे इसके शीघ्र एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक ठोस रोडमैप तैयार किया जा सके।

मां बिरासिनी धाम बिलासपुर में शिव प्राण प्रतिष्ठा की शोभायात्रा निकाली गई

उमरिया.  उमरिया जिले के बिलासपुर तहसील अंतर्गत मां बिरासिनी धाम बिलासपुर में शिव प्राण प्रतिष्ठा की शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा शिव मंदिर बिरसिंहपुर से होते हुए बिलासपुर बस स्टैंड बोगदा चौराहा आसमानी मंदिर से होते हुए मां बिरासिनी मंदिर में शोभा यात्रा का समापन किया गया। महादेव जी की प्राण प्रतिष्ठा मां बिरासिनी मंदिर प्रांगण की जाएगी। शिव प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम 21 अप्रैल 2026 से 23 अप्रैल 2026 तक चलेगा। वही 24 अप्रैल को विशाल भंडारे का कार्यक्रम रखा गया है। कार्यक्रम मां बिरासिनी समिति एवं बोल बम की कमेटी के द्वारा किया गया है।

भोपाल में जनगणना का अपडेट: प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक, 6000 से ज्यादा घरों की जानकारी डिजिटली दर्ज

भोपाल  जनगणना 2027 के तहत जिले के चार लाख घरों की मैपिंग व रिकॉर्ड ऑनलाइन मिल जाएगा। स्व गणना के तहत अपने घर व परिवार की ऑनलाइन पोर्टल से जानकारी देने में भोपाल के नागरिक सबसे तेजी से काम कर रहे हैं। प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार बीते पांच दिन में 6000 से अधिक घरों की जानकारी डिजिटली दर्ज हो चुकी है। इसमें तेजी आ रही है। अगले 10 दिनों में चार लाख घरों की मैपिंग होने का अनुमान है। ये कुल घरों का 70 फीसदी है। यानी एक मई से प्रगणकों को घर पहुंचने पर ज्यादा मशक्कत नहीं करना होगी। सिर्फ स्व गणना का 11 डिजिट का नंबर दर्ज करने से उन्हें स्थिति पता चल जाएगी। गौरतलब है कि एक प्रगणक को 200 घरों की मैपिंग का लक्ष्य दिया गया है। मौजूदा स्थिति में भोपाल में दस दिन में प्रगणक इस लक्ष्य का प्राप्त कर सकेंगे। जनवरी 2027 से आबादी की जातिगत गणना शुरू होगी। स्वगणना अभी 74 फीसदी अभी स्वगणना के लिए सेंसस के ऑनलाइन पोर्टल पर भोपाल अभी करीब 74 फीसदी पर है। आबादी के अनुसार स्वगणना की संख्यात्मक स्थिति देखें तो भोपाल के साथ सिर्फ मंदसौर व सागर ही बेहतर कर रहे हैं। इंदौर जैसे बड़े शहर भोपाल से काफी पीछे हैं। भोपाल में वेब पोर्टल पर प्रति 90 सेकंड में एक फार्म सबमिट हो रहा है। ये संख्या शुरुआत में डेढ़ मिनट थी। अफसरों के अनुसार अगले दो दिन में ये 20 से 22 सेकंड तक पहुंचेगी तो फार्म बढ़ेंगे। बता दें कि जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि जनगणना कार्य को तय समयसीमा में पूरी सटीकता और पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाए। 32 फीसदी आवास शेड वाले स्वगणना के तहत जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उनमें जिले में 32 फीसदी आवास शेड व कच्चे सामने आ रहे हैं। यानि यहां पर आगामी समय में मकानों को लेकर बड़ा काम होगा। आवासीय उपयोग के इंफास्ट्रक्चर की बड़ी संभावना है। सरकारी स्तर पर भी आवास की बड़ी योजनाएं हैं। जर्जर व पुराने घरों को लेकर भी बड़ा आंकड़ा सामने आ रहा है। रेडियो ट्रांजिस्टर को भी शामिल किया है… मकान सूचीकरण की गणना में रेडियो ट्रांजिस्टर को भी शामिल किया है। हालांकि बदलते समय के साथ इसके लिए दिए ऑप्शन में स्मार्टफोन से एमपी रेडियो चलाने का विकल्प है। आप इसे सबमिट कर सकते हैं। स्वगणना का फार्म भरने की तकनीकी दिक्कतें खत्म हो गई है। घर की जियो टैगिंग के साथ आसानी से फार्म जमा हो रहे हैं। लोगों में काफी उत्साह है। भुवन गुप्ता, उप जिला जनगणना अधिकारी

कल तक करें आवेदन, 7 मई से शुरू होगी एमपी बोर्ड दूसरी मुख्य परीक्षा

भोपाल मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने इस साल 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए एक ऐतिहासिक और छात्र-हितैषी बदलाव किया है। अब बोर्ड परीक्षाओं में एक या दो विषयों में कम अंक आने या फेल होने पर छात्रों को 'सप्लीमेंट्री' या 'पूरक परीक्षा' का ठप्पा झेलने की जरूरत नहीं होगी। बोर्ड ने पुरानी सप्लीमेंट्री व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया है और इसकी जगह ‘दूसरी मुख्य परीक्षा’ की शुरुआत की है। इस नई व्यवस्था के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 की दूसरी मुख्य परीक्षा आगामी 7 मई 2026 से शुरू होने जा रही है। यह उन हजारों छात्र-छात्राओं के लिए एक नई उम्मीद की किरण है, जो मुख्य परीक्षा में किसी कारणवश चूक गए थे या अपने प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं हैं। सप्लीमेंट्री अब इतिहास, 'दूसरी परीक्षा' है भविष्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के सुझावों को लागू करते हुए एमपी बोर्ड ने यह कदम उठाया है। अब छात्रों की मार्कशीट पर 'सप्लीमेंट्री' जैसे शब्द नहीं लिखे होंगे, बल्कि इसे दूसरी मुख्य परीक्षा माना जाएगा। इससे छात्रों का मानसिक दबाव कम होगा और उन्हें उसी शैक्षणिक वर्ष में अपना स्कोर सुधारने का समान अवसर मिलेगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि 10वीं (हाई स्कूल) की दूसरी परीक्षा 7 मई से शुरू होकर 19 मई तक चलेगी, जबकि 12वीं (हायर सेकेंडरी) की परीक्षाएं 7 मई से 25 मई 2026 तक आयोजित की जाएंगी। सभी परीक्षाएं सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे की एक ही पाली में निर्धारित केंद्रों पर होंगी। आवेदन की अंतिम तिथि: 22 अप्रैल तक का है मौका जो छात्र इस दूसरी मुख्य परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं, उनके पास समय बहुत कम है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आवेदन करने की अंतिम तिथि 22 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है। बोर्ड के निर्देशों के अनुसार, मुख्य परीक्षा का रिजल्ट आने के 7 दिनों के भीतर छात्रों को एमपी ऑनलाइन (MP Online) पोर्टल के माध्यम से अपना फॉर्म भरना होगा। किन्हें मिलेगा मौका? फेल छात्र: वे छात्र जो मुख्य परीक्षा में एक या दो विषयों में फेल रहे हैं। अंक सुधार (इम्प्रूवमेंट): वे छात्र जो पास तो हैं, लेकिन किसी विषय में अपने नंबर बढ़ाना चाहते हैं। अनुपस्थित छात्र: वे परीक्षार्थी जो मुख्य परीक्षा के दौरान किसी वैध कारण से शामिल नहीं हो पाए थे। कैसे करें आवेदन? छात्र अपने नजदीकी एमपी ऑनलाइन कियोस्क पर जाकर या आधिकारिक वेबसाइट mpbse.mponline.gov.in के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपना रोल नंबर और मुख्य परीक्षा का रिजल्ट साथ रखना होगा। फॉर्म भरते समय संबंधित विषयों का चुनाव सावधानीपूर्वक करें और निर्धारित शुल्क का भुगतान कर रसीद जरूर प्राप्त करें। मार्कशीट की वैधता और नई व्यवस्था का लाभ इस दूसरी परीक्षा के बाद जारी होने वाली मार्कशीट की वैधता और मूल्य मुख्य परीक्षा के बराबर ही होगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि छात्र बिना अपना साल बर्बाद किए उच्च शिक्षा या अगली कक्षा में दाखिला ले सकेंगे। बोर्ड का मानना है कि इस बदलाव से छात्रों के बीच 'फेल' होने का डर कम होगा और वे अधिक आत्मविश्वास के साथ दोबारा परीक्षा दे पाएंगे।

पारिवारिक संस्कृति व प्रेम, शांति, सद्भावना रथ को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिखाई हरी झंडी

पारिवारिक संस्कृति व प्रेम, शांति, सद्भावना रथ को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिखाई हरी झण्डी प्रेम, शांति और विश्व बंधुत्व का संदेश लेकर गांव-गांव तक पहुंचेगा दिव्य रथ एक वर्ष तक चलेगा जन जागरण अभियान भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रीवा में ब्रहृाकुमारी संस्थान द्वारा संचालित किए जा रहे पारिवारिक संस्कृति व प्रेम, शांति एवं सद्भावना रथ को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह अभियान समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे की भावना को सशक्त करेगा तथा प्रदेश में सकारात्मक परिवर्तन लाएगा। प्रेम, शांति और विश्व बंधुत्व का संदेश लेकर गांव-गांव तक भ्रमण करने वाले रथ से एकता, प्रेम, सद्भावना व नशामुक्ति का संदेश जन-जन तक पहुंचेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजागृति रथ में स्थापित 12 ज्योतिर्लिंगों के दिव्य स्वरूपों की पूजा-अर्चना की। रीवा के राजनिवास सर्किट हाउस में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने ब्रहृाकुमारी संस्थान द्वारा चलाए जा रहे जन जागरण अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पावन और आध्यात्मिक कार्य प्रदेश में विश्व बंधुत्व की भावना जागृत करने में सहायक सिद्ध होगा। ब्रहृाकुमारी संस्थान की भोपाल जोन की डायरेक्टर बीके निर्मला के निर्देशन में जन जागरण अभियान अंतर्गत ज्योतिर्लिंग रथ रीवा जिले में महाशिवरात्रि 2027 तक भ्रमण करेगा। कार्यक्रम में जिला भाजपाध्यक्ष वीरेन्द्र गुप्ता सहित ब्रम्हकुमारी संस्थान के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

मध्य प्रदेश में 10 जिलों में गर्म हवाओं का कहर, 21 से 23 अप्रैल तक लू का यलो अलर्ट, खजुराहो में तापमान 43 डिग्री

भोपाल   मध्यप्रदेश में बादल और बारिश की वजह से गर्मी में भले ही थोड़ी राहत मिली हो, लेकिन एक बार फिर लोगों को जबरदस्त गर्मी का सामना करना पड़ेगा. मौसम विभाग ने भोपाल सहित 10 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है. इन जिलों के अलावा बाकी जिलों में भी अधिकतम तापमान में 3 डिग्री तक का उछाल देखने को मिल सकता है. मौसम विभाग के मुताबिक 4 दिन बाद एक बार फिर मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।  अब रात में भी नहीं मिलेगा आराम 21 अप्रेल को प्रदेश के 10 जिलों में दिन के तापमान से ज्यादा रात के तापमान में बढ़त की चेतावनी जारी की गई है. मौसम विभाग के मुताबिक भोपाल, सीहोर, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडोरी में न्यूनतम तापमान में बढ़ोत्तरी होगी. 22 अप्रेल को 16 जिलों में हीट वेव का अलर्ट जारी किया गया है. भिंड, ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, छिंदवाड़ा, पांढुर्ना, सिवनी, मंडला, बालाघाट, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है।  23 अप्रैल को इन जिलों में चलेगी लू 23 अप्रेल को भिंड, ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, छिंदवाड़ा, पांढुर्ना, सिवनी, मंडला, बालाघाट, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है. 24 अप्रैल को भिंड, ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है. इन जिलों में हीट वेव चल सकती है।  24 से फिर बदल सकता है मौसम मौसम वैज्ञानिक ई सुरेंद्रन ने बताया, '' अभी एक वेस्टर्न डिस्टनवेंस जम्मू कश्मीर और निकटवर्ती क्षेत्रों में बना हुआ है. उत्तर दक्षिण ट्रफ पूर्वी बिहार से दक्षिण पश्चिम मध्यप्रदेश तक बनी हुई है. एक नया पश्चिमी विक्षोभ 23 अप्रेल से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है. माना जा रहा है कि 24 अप्रैल के बाद एक बार फिर प्रदेश में मौसम करवट ले सकता है।  खजुराहो में 42.5 पहुंचा तापमान राजधानी भोपाल में अधिकतम तापमान 39.8 और इंदौर में 39.5 डिग्री तापमान दर्ज किया गया. उधर ग्वालियर, चंबल सहित करीबन 20 से ज्यादा जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री से अधिक बना हुआ है. सबसे अधिक तापमान में खुजराहो में 43 डिग्री रिकॉर्ड किया गया. ग्वालियर में अधिकतम तापमान 42.5 रिकॉर्ड किया गया. इसके अलावा दतिया में 42.3 डिग्री, रतलाम में 42.3, श्योपुर में 42 डिग्री, रीवा में 42 डिग्री, सीधी में 42 डिग्री, नौगांव में 41.4 डिग्री, नरसिंहपुर में 41.4, धार में 40.4, गुना में 40.6, ग्वालियर में 42.5, नर्मदापुरम में 40.9, खंडवा में 40 डिग्री, रायसेन में 41.6, दमोह में 40.4, टीकमगढ़ में 40 डिग्री, उमरिया में 40.7 तापमान रिकॉर्ड किया गया। 

चीता संरक्षण के लिए मंदसौर में ऐतिहासिक कदम, प्रभास और पावक ने हासिल किया बड़ा मील का पत्थर

मंदसौर भारत के महत्त्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट चीता' की सफलता की कहानी में एक और ऐतिहासिक पन्ना जुड़ गया है। दक्षिण अफ्रीका की धरती से आए दो चीता भाई प्रभास और पावक ने मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में अपना एक साल यानी 365 दिन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। तारीखों की नजर से देखें 3 साल का गौरवशाली सफर ​इन दोनों भाइयों का भारत में अब तक का सफर किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं रहा है: -​18 फरवरी 2023: दक्षिण अफ्रीका से उड़ान भरकर भारत की मिट्टी पर कदम रखा। -​2 साल (कूनो नेशनल पार्क): भारत की जलवायु, शिकार और वातावरण को समझने के लिए कूनो में लंबा समय बिताया। -​1 साल (गांधीसागर): आज गांधीसागर में इनका एक साल पूरा होना इस बात पर मुहर लगाता है कि यह अभयारण्य चीतों के लिए एक आदर्श और सुरक्षित घर है। भाईचारे और शिकार का अनूठा तालमेल ​​इनकी साझेदारी ही गांधीसागर में इनकी सफलता का सबसे बड़ा राज है। फील्ड टीम की निगरानी में इनके गठबंधन की कुछ ऐसी बारीकियाँ सामने आई हैं जो हैरान कर देने वाली हैं। -​शिकार की रणनीति: जब ये शिकार पर निकलते हैं तो दोनों के बीच एक मूक संवाद होता है। एक भाई शिकार का पीछा कर उसे थकाता है तो दूसरा सटीक घात लगाकर उसे दबोच लेता है। -​सुरक्षा का पहरा: भोजन करते समय ये कभी लापरवाह नहीं होते। जब एक शिकार खाता है, तो दूसरा मुस्तैद होकर चारों तरफ पहरा देता है। आराम करते समय भी दोनों अपनी पीठ जोड़कर विपरीत दिशाओं में मुँह करके बैठते हैं, ताकि 360-डिग्री सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। -संकट में साथ: टीम ने देखा है कि अगर एक भाई सुस्त महसूस करता है, तो दूसरा उसे छोड़कर ओझल नहीं होता। वह उसके इर्द-गिर्द ही रहता है, मानो उसे हिम्मत दे रहा हो। एलोग्रूमिंग (सामाजिक साफ़-सफ़ाई) उद्देश्य: यह सामाजिक संबंधों को मज़बूत करता है, विशेष रूप से नर चीतों के समूहों (भाई या करीबी नर साथी) और कभी-कभी माँ और शावकों के बीच। संदर्भ: यह अक्सर भोजन के बाद देखा जाता है, जिससे चेहरे जैसे कठिन स्थानों से खून और गंदगी को हटाने में मदद मिलती है। व्यवहार: इसमें दूसरे चीते को चाटना, कुतरना और रगड़ना शामिल है, जो एक आरामदायक और जुड़ाव भरा अनुभव हो सकता है। जुड़ी हुई आवाज़े: इन ग्रूमिंग सत्रों के दौरान अक्सर उनके 'पुर्राने' (Purring) की आवाज़ सुनी जा सकती है। ऑटोग्रूमिंग (स्वयं की साफ़-सफ़ाई) उद्देश्य: चीते अपने शरीर को साफ़ करने के लिए अपनी जीभ का उपयोग करते हैं, जो गंदगी और परजीवियों को हटाने और उनके फर (रौएं) के रखरखाव के लिए महत्वपूर्ण है। प्रक्रिया: उनकी जीभ पर विशेष 'केराटिनाइज्ड पैपिला' (छोटी, खुरदरी, कंघी जैसी संरचनाएं) होती हैं, जो एक स्क्रबर की तरह काम करती हैं और गंदगी व ढीले बालों को हटाने में मदद करती हैं। बेहद जरूरी: यह ग्रूमिंग व्यवहार चीतों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और उनके समूहों में आपसी एकता बनाए रखने के लिए बहुत आवश्यक हैं।

हाईकोर्ट का कड़ा रुख: दिव्यांग बच्चों को स्कूल से निकालने पर चीफ जस्टिस ने DEO से रिपोर्ट मांगी

जबलपुर जबलपुर के जबलपुर में दिव्यांग बच्चों को स्कूल से बाहर किए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि बच्चों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव न सिर्फ गलत है, बल्कि किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं किया जाएगा। मामला शहर के विजडम वैली स्कूल और जीडी गोयनका स्कूल से जुड़ा है। इन पर आरोप है कि स्पेशल (दिव्यांग) बच्चों को स्कूल से बाहर किया जा रहा था। शिकायत सामने आने के बाद इस मुद्दे पर जनहित याचिका दायर की गई। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की डिवीजन बेंच ने तत्काल प्रभाव से दिव्यांग बच्चों को निकाले जाने पर रोक लगा दी। साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को आदेश दिया कि जबलपुर के सभी स्कूलों में पढ़ रहे विशेष बच्चों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल तय की गई है। कानून होने के बावजूद जमीनी हकीकत कमजोर याचिकाकर्ता सौरभ सुबैया की ओर से दायर याचिका में बताया गया कि जबलपुर में करीब 50 सरकारी और 200 निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में दिव्यांग छात्र पढ़ते हैं। इनमें कई बच्चे ऐसे हैं जो न बोल सकते हैं और न ही सुन सकते हैं। ‘स्पेशल एजुकेटर’ नहीं, कानूनों का पालन अधूरा याचिका में यह भी बताया गया कि स्कूलों में आज भी विशेष शिक्षक नियुक्त नहीं हैं। जबकि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत यह अनिवार्य है। इन कानूनों का पालन न होना पूरी तरह अवैधानिक है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिवेंद्र पाण्डेय ने कोर्ट को बताया कि निजी स्कूलों द्वारा स्पेशल बच्चों को बाहर करना सीधे उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। इस पर कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए तुरंत हस्तक्षेप किया। समावेशी शिक्षा पर बड़ा संदेश याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश कई मायनों में अहम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ समावेशी शिक्षा को मजबूती मिलेगी, बल्कि निजी स्कूलों की मनमानी पर भी लगाम लगेगी। साथ ही दिव्यांग बच्चों के अधिकारों की न्यायिक सुरक्षा को लेकर एक मजबूत संदेश गया है।