samacharsecretary.com

रेलवे ने मंजूरी दी 15 समर स्पेशल ट्रेनों को, भोपाल, जबलपुर और कोटा डिवीजन में बढ़ेगा यात्री लाभ

भोपाल  गर्मियों के मौसम में बढ़ने वाली यात्रियों की भीड़ को देखते हुए पश्चिम मध्य रेलवे ने इस बार पहले से व्यापक तैयारी की है। 15 अप्रैल से 15 जुलाई तक चलने वाले समर स्पेशल ट्रेनों के प्लान के तहत यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी। रेलवे का उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना और लंबी दूरी की यात्रा को अधिक सुगम बनाना है। रेलवे द्वारा तैयार योजना के अनुसार कुल 15 समर स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी, जिनके जरिए 288 ट्रिप्स संचालित होंगे। इनमें से पांच ट्रेनों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 10 नई ट्रेनों का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। भोपाल, जबलपुर और कोटा को बड़ा फायदा इस योजना का सबसे अधिक लाभ भोपाल, जबलपुर और कोटा डिवीजन के यात्रियों को मिलेगा। इन शहरों से देश के प्रमुख महानगरों और पर्यटन स्थलों के लिए सीधी कनेक्टिविटी बेहतर होगी। दक्षिण भारत के मैसूर और कोयंबटूर जैसे शहरों के लिए सीधी ट्रेन सुविधा मिलने से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। हर दिन हजारों यात्रियों को राहत रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस व्यवस्था से प्रतिदिन करीब पांच से सात हजार यात्रियों को लाभ मिलेगा। गर्मियों में उत्तर भारत से महाराष्ट्र, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर क्षेत्रों की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या अधिक रहती है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह योजना बनाई गई है। 10 नई ट्रेनों का प्रस्ताव तैयार रेलवे ने 10 नई समर स्पेशल ट्रेनों का प्रस्ताव भी तैयार किया है, जिनके जरिए 158 अतिरिक्त ट्रिप्स संचालित करने की योजना है। इनमें रानी कमलापति से मैसूर, जबलपुर से येलहंका और कोटा से मथुरा व धनबाद के लिए ट्रेनें शामिल हैं। कुछ ट्रेनें साप्ताहिक होंगी, जबकि कुछ सप्ताह में दो बार चलाई जाएंगी। यात्रा होगी आसान और सुविधाजनक रेलवे का मानना है कि इन अतिरिक्त ट्रेनों से यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने में आसानी होगी और वेटिंग की समस्या कम होगी। इससे सफर अधिक आरामदायक और व्यवस्थित बन सकेगा।

मध्य प्रदेश में आईपीएस तबादलों का दौर शुरू, मुख्यमंत्री कार्यालय से आदेश जारी होने की उम्मीद, प्रशासनिक हलचल

भोपाल  IAS अधिकारियों के तबादलों के बाद मध्य प्रदेश में IPS अफसरों की ट्रांसफर घड़ी बिल्कुल पास आ चुकी है। अब किसी भी समय ऐलान हो सकता है। काफी समय से ये तबादला लिस्ट तैयार है।   दरअसल मध्य प्रदेश में मोहन सरकार पुलिस विभाग में बड़ी सर्जरी करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय पुलिस सेवा के लगभग 25 अधिकारियों के तबादले की सूची लगभग तैयार है। इस फेरबदल की खास बता ये है कि करीब 20 जिलों के पुलिस अधीक्षकों के बदलने पर सहमति बन चुकी है। वहीं जानकारी सामने आ रही है कि  इस बार तबादलों का आधार कई पहलू हैं , इनमें परफॉर्मेंस से लेकर फीडबैक जैसे अहम फैक्टर्स भी भूमिका निभाएंगे। मतलब की अधिकारियों की परफार्मेंस पर नजर है और यही आधार अगली पोस्टिंग के लिए कारगर होगा। जानकारी ये है कि करीब 8 जिलों के कप्तानों का काम मुख्यमंत्री मोहन यादव की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। वही 6 जिलों के पुलिस अधीक्षकों के खिलाफ से शिकायतें मिलने की सूचना है। वहीं इसके अलावा 5 जिलों में तैनात आईपीएस अधिकारियों का प्रमोशन हो चुका है, जिसके चलते उन्हें नई जिम्मेदारी मिलेगी। जानकारी के मुताबिक शाजापुर, शिवपुरी, डिंडौरी, मंडला, छतरपुर, बुरहानपुर, निवाड़ी और नीमच के एसपी को हटाने पर काम हो चुका है। वही दमोह, सिवनी, आगर मालवा, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर जैसे जिलों के लिए प्रभावशाली चेहरों की जरुरत है। जिनके नाम फाइनल होने वाले हैं। प्रशासनिक गलियारों में हलचल तबादलों की आहट ने पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों तक बेचैनी बढ़ गई है। ये सूची किसी भी वक्त मुख्यमंत्री कार्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद जारी हो सकती है। लिहाजा हलचल तेज है।  

मध्यप्रदेश में ‘इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी’ लागू, 6 जिलों और 2510 गांवों को मिलेगा लाभ

भोपाल  मेट्रोपॉलिटन रीजन प्रोजेक्ट का सबसे ज्यादा फोकस रोजगार और औद्योगीकरण को बढ़ावा देना है। इसके तहत नर्मदापुरम रोड नया आर्थिक क्षेत्र, एमपी नगर मोबाइल असेंबली इंडस्ट्री, पचमढी-रातापानी में टूरिज्म इंडस्ट्री जैसे प्लान शामिल किए जा रहे हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने भोपाल विकास प्राधिकरण को भोपाल सहित विदिशा, सीहोर, रायसेन, नर्मदापुरम एवं राजगढ़ में ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित करने का काम सौंपा जहां नए उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। प्रारंभिक सर्वे में भोपाल शहर की नर्मदापुरम रोड पर नए आर्थिक क्षेत्र विकसित करने एवं एमपी नगर में मोबाइल असेंबली इंडस्ट्री बनाने और नर्मदापुरम, रायसेन के पचमढ़ी, रातापानी जैसे पर्यटक स्थलों पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के बिंदु को शामिल किया गया है। भोपाल सहित अन्य जिलों में तेजी से हो रहे डेवलपमेंट के पैटर्न को समझने के बाद विकास की रूपरेखा तय होगी। इन क्षेत्रों पर फोकस रहवासी विकास: सिंगल विंडो के जरिए रेसीडेंशियल अनुमतियां मिल सकेंगी। अभी चार से पांच विभाग के चक्कर काटने होते हैं। औद्योगिक विकास: मंडीदीप, गोविंदपुरा, अचारपुरा, पीलूखेड़ी, कोकता, बंगरसिया के बाद अब नॉलेज हब, मोबाइल हब, स्टार्टअप हब बनाने की योजना है। धार्मिक पर्यटन: सलकनपुर, कंकाली माता मंदिर, नर्मदा नदी धर्म स्थल, सिहोर गणेश मंदिर सहित अन्य प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों का सर्किट बनाया जाएगा। वन्य पर्यटन: रातापानी, पचमढ़ी, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, वन विहार, केरवा, कलियासोत के जंगलों तक सफारी का दायरा बढ़ाकर नए टूरिस्ट सुविधा वाले उपक्रम स्थापित होंगे। परिवहन सुविधा: मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को सिहोर, मंडीदीप, विदिशा से नर्मदापुरम से कनेक्ट करने, 200 ई बसों को चलाने, रेलवे की मेमू ट्रेन चलाने की प्लानिंग डेटा एनालिसिस का हिस्सा है। शामिल होंगे 2510 गांव भोपाल के मेट्रोपॉलिटन एरिया का दायरा 12, 098 वर्ग किलोमीटर का होगा। इसमें 6 जिलों के 2510 गांवों को शामिल किया गया है। भूमि के सबसे कम क्षेत्रफल की बात करें तो इसमें सबसे कम हिस्सा नर्मदापुरम जिले से लिया गया है, जबकि बड़ा हिस्सा यहां तक की भोपाल से अधिक सीहोर और राजगढ़ का क्षेत्र से लिया गया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग की ओर से इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन की अधिसूचना जारी होने के साथ ही, अब प्रतिनियुक्ति पर अधिकारी और कर्मचारियों को लिया जाएगा। 6 जिलों में तहसीलवार गांवों की जारी की गई अधिसूचना में भोपाल जिले में बैरसिया तहसील के 210 गांव, हुजूर तहसील के 257 गांव और कोलार तहसील के 60 गांव शामिल किए गए हैं। इसी तरह सीहोर जिले की 8 तहसीले आष्टा, बुधनी, दोराहा, इच्छावर, जावर, श्यामपुर, रेहटी और सीहोर रहेंगी।

54 बाघों की मौत के बाद सिस्टम में हड़कंप, रिजर्व के बाहर मिलेगा स्पेशल प्रोटेक्शन, जानें नई TOTR स्कीम

भोपाल  मध्य प्रदेश में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीव प्रेमियों और सरकार की नींद उड़ा दी है। साल 2025 में रिकॉर्ड 54 बाघों की मौत के मामले में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल किया है। इसमें बाघों को बचाने के लिए एक नई और हाईटेक सुरक्षा नीति का खुलासा किया गया है, जो अब रिजर्व की सीमाओं से बाहर भी लागू होगी। रिजर्व के बाहर भी टाइगर की सुरक्षा NTCA ने कोर्ट को बताया कि अब केवल टाइगर रिजर्व ही नहीं, बल्कि उनसे सटे जंगलों, गलियारों और क्षेत्रीय डिवीजनों में भी वही सुरक्षा मिलेगी जो रिजर्व के अंदर उपलब्ध होती है। इसके लिए टाइगर आउटसाइड टाइगर रिजर्व योजना शुरू की गई है। सबसे अहम बात यह है कि साल 2025-26 के पहले चरण के लिए मध्य प्रदेश के 8 फॉरेस्ट डिविजन को चुना गया है। AI और आधुनिक हथियारों से होगी घेराबंदी बाघों के अंगों की तस्करी और शिकार रोकने के लिए अब पुराने तरीके नहीं चलेंगे। NTCA ने राज्यों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम और वायरलेस संचार को मजबूत करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, इंटेलिजेंस गैदरिंग, स्ट्राइक फोर्स की तैनाती और अपराध का पता लगाने के लिए आधुनिक हथियारों के उपयोग पर जोर दिया गया है। इन्वायलेट रहेगा कोर एरिया हाईकोर्ट में दायर हलफनामे में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 38 V (4)(i) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया कि नेशनल पार्क और अभयारण्यों के कोर क्षेत्रों को इन्वायलेट रखा जाना अनिवार्य है। यानी बाघों के संरक्षण के लिए इन क्षेत्रों में मानवीय हस्तक्षेप पूरी तरह वर्जित रहेगा। प्रोजेक्ट टाइगर के तहत हम अब उन इलाकों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जहां बाघ रिजर्व से बाहर निकलकर जा रहे हैं। इन कॉरिडोर क्षेत्रों में सुरक्षा को अभेद्य बनाना और AI का उपयोग करना हमारी प्राथमिकता है। नंदकिशोर काले, सहायक महानिरीक्षक (वन), NTCA गौरतलब है कि भारत फिलहाल दुनिया में बाघों का सबसे बड़ा गढ़ है, जहां 3,682 बाघ मौजूद हैं। एमपी में बाघों की संख्या 6% सालाना की दर से बढ़ रही है, लेकिन हालिया 54 मौतों ने सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया है।  

लोक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए नवाचार जरूरी : मंत्री काश्यप

भोपाल.  सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने कहा है कि लोकहित कार्यों के बेहतर परिणामों के लिए लोक सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार होते रहना चाहिए। जिन्होने लोक सेवा का संकल्प लिया है उन्हें गहन चिंतन और निरंतर आत्मविश्लेषण की आवश्यकता होती है। मंत्री काश्यप मंगलवार को आसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में आयोजित सिविल सेवा दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। मंत्री काश्यप ने कहा कि लोक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए नवाचार की आवश्यकता होती है। लोक महत्व की सेवाओं तक सभी हितग्राही लोगों की पहुंच आसान होना चाहिए। उन्होने भारतीय सिविल सेवा की स्थापना में सरदार वल्लभ भाई पटेल के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में सिविल सेवा की स्थापना एक अभूतपूर्व कार्य था। उन्होने कहा कि भारत की सिविल सेवा हर प्रकार से मजबूत है। वास्तविक अर्थ में इसका स्टील फ्रेम है। उन्होने कहा कि कोरोना संकट में कई देशों में प्रशासनिक सेवाओं के तंत्र चरमरा गये थे लेकिन भारत में पूरी दक्षता और क्षमता से सिविल सेवा तंत्र ने काम किया और सेवाएं दी। उन्होने कहा कि योग्यता, संस्कार और समर्पण के संगम से यह संभव हो पाया। मंत्री काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व और मार्गदर्शन में विकसित भारत के निर्माण में मध्यप्रदेश निरंतर अपना योगदान देने के लिए तैयार है। आज मध्यप्रदेश बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर आकर विकासशील प्रदेश बन चुका है और तेजी से विकास कर रहा है। उन्होने कहा कि जन सुनवाई जैसी प्रशासनिक व्यवस्थाएं प्रभावी सिद्ध हुई हैं। मंत्री काश्यप ने वर्ष 2024-25 के लिए नागरिक सेवा, शिक्षा एवं मानव संसाधन, सामाजिक समावेश और स्वास्थ्य एवं पोषण सेवा श्रेणियों में नवाचार और उत्कृष्ट सेवाओं के लिये नौ विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और मार्गदर्शी लोकसेवकों को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने लोक सेवकों को बधाई देते हुए कहा कि लोक सेवा दिवस आत्मपरीक्षण कर नये संकल्पों के साथ आगे बढ़ने का अवसर है। उन्होने कहा कि साढे नौ लाख अधिकारी-कर्मचारी "आई गाट पोर्टल" पर रजिस्टर हुए यह अत्यंत सराहनीय है। उन्होने कहा कि भूमिका आधारित प्रशासन प्रभावी होगा। मध्यप्रदेश 490 कोर्स के साथ अन्य प्रदेशों से आगे है। उन्होंने सभी अधिकारी-कर्मचारी को बधाई दी। लोक सेवाओं के प्रदाय की गारंटी जैसी मध्यप्रदेश की पहल को अन्य प्रदेशों ने लागू किया। प्रदेश में नीति निर्माण प्रक्रिया में प्रशासन तंत्र की भूमिका सहयोगकर्ता की है। मुख्य सचिव जैन ने कहा कि प्रशासनिक नियमों और नीतियों के क्रियान्वयन में नवाचारी पहल से प्रभावी परिणाम मिलते हैं। समस्याओं के प्रभावी समाधान मिलते हैं जो लंबे समय तक प्रभावी रहते हैं। उन्होने लोक सेवकों से आग्रह किया कि वे अपने कार्यव्यवहार में लोकहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। मप्र बना मॉडल क्षमता विकास आयोग के पूर्व अध्यक्ष आदिल जैनुलभाई ने 'कर्मचारी से कर्मयोगी' विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि अधिकारियों-कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाने और क्षमता निर्माण में मध्यप्रदेश ने देश में प्रशंसनीय कार्य किया है। उन्होने कहा कि 50 से ज्यादा विभागों की क्षमता निर्माण कार्ययोजनाएं बन चुकी हैं और 490 से ज्यादा हिन्दी में कोर्स आईगाट पोर्टल पर उपलब्ध है। अब अन्य राज्य भी मध्यप्रदेश में ऑनलइन ट्रेनिंग मॉडल अपना रहे हैं। उन्होने कहा कि लोक सेवकों को निरंतर सीखते रहने की आवश्यकता है। उन्होने कहा कि टेक्नॉलाजी के आने और निरंतर परिवर्तनशील होने से कार्य की गति भी बढ़ गई है। इसके लिये एआई टूल्स का उपयोग अब जरूरी हो गया है। मंत्री काश्यप ने कहा कि कि अब कार्य की आवश्यकता अनुसार प्रशिक्षण पाठयक्रम तैयार किए जा सकते हैं। इस प्रकार सीखने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। विकसित भारत के लिए सीखना जरूरी हो गया है। उन्होने कहा कि सभी शासकीय अधिकारी-कर्मचारी को रोजाना 15 मिनट आईगाट पोर्टल का उपयोग करना चाहिए। नवाचारों के लिए मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार नवाचारों के लिए मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार में प्रत्येक को एक लाख रूपये की राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किये गये। नागरिक सेवा प्रदाय सूचना प्रौदयोगिकी एवं सुशासन श्रेणी में गैर वन भूमि एवं जंगल से दूरी के प्रमाण पत्र ऑनलाईन जारी करने हेतु सॉफ्टवेयर का विकास, नवीनीकृत राजस्व अभिलेखागार एवं डिजिटल रिकॉर्ड लोकेशन प्रणाली, सामुदायिक पुलिसिंग को सशक्त बनाने हेतु "पुलिस चौपाल अभियान, बजट साहित्य के साथ नवाचार के रूप में वित्त विभाग द्वारा "मेरा बजट पुस्तिका" का प्रकाशन को पुरस्कृत किया गया। शिक्षा एवं मानव संसाधन विकास श्रेणी में रोचक सहायक अधिगम सामग्री के माध्यम से शिक्षण कार्य, सामाजिक समावेश एवं सशक्तीकरण श्रेणी में शक्ति दीदी योजना अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को रोजगार दिलाने का कार्य, श्रम संबंधी अर्धन्यायिक प्रकरणों के निराकरण के लिये लेबर केसेस मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल, सुपर-100 योजना में विदयार्थियों का वृहद स्तर पर जेईई और नीट में चयन, स्वास्थ्य एवं पोषण श्रेणी में मातृ-मृत्यु एवं शिशु मृत्यु दर करने में परिणाममूलक कार्य के लिये पुरस्कार दिये गये । साधना सप्ताह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विभागों को सम्मान कार्यक्रम में साधना सप्ताह के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विभागों को पुरस्कृत किया गया। दस हजार से अधिक लोकसेवकों की श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन में प्रथम स्थान पर जनजातीय कार्य विभाग, द्वितीय स्थान पर उच्च शिक्षा विभाग और तृतीय स्थान पर स्कूल शिक्षा विभाग को पुरस्कृत किया गया। एक हजार से 10000 लोकसेवकों की श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये प्रथम स्थान पर आयुष विभाग, द्वितीय स्थान पर तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग और तृतीय स्थान पर जेल विभाग को पुरस्कृत किया गया। एक हजार से कम लोकसेवकों की श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन में प्रथम स्थान पर पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, द्वितीय स्थान पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग और तृतीय स्थान पर जनसंपर्क विभाग को पुरस्कृत किया गया। अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन संजय दुबे ने सिविल सेवा दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर प्रशासन अकादमी के महानिदेशक सचिन सिन्हा और बड़ी संख्या में लोक सेवक उपस्थित थे। उप सचिव, मुख्यमंत्री सुधीर कोचर ने कार्यक्रम का संचालन किया। संचालक प्रशासन अकादमी मुजीबुर्रहमान खान ने आभार व्यक्त किया।  

वैश्विक पहचान बना रहा संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क : मंत्री टेटवाल

भोपाल.  संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क में मध्यप्रदेश के कौशल विकास मॉडल की व्यापक और प्रभावी प्रस्तुति उस समय देखने को मिली, जब फिलीपींस की तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास प्राधिकरण के 24 सदस्यीय उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान का विस्तृत भ्रमण कर इसकी कार्यप्रणाली, प्रशिक्षण व्यवस्था और उद्योग-आधारित दृष्टिकोण को गहराई से समझा। यह दौरा प्रदेश में विकसित हो रहे कौशल तंत्र की वैश्विक स्वीकार्यता और बढ़ती विश्वसनीयता का स्पष्ट संकेत बना। कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य युवाओं को ऐसी आधुनिक और रोजगारोन्मुखी कौशल से जोड़ना है, जिससे वे सीधे रोजगार प्राप्त कर सकें। उन्होंने बताया कि संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क देश का पहला पूर्णतः संचालित बहु-कौशल प्रशिक्षण केंद्र है, जो अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। मंत्री टेटवाल एवं प्रतिनिधि मण्डल के बीच स्मृति चिन्हों का आदान-प्रदान हुआ। मंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि यह संस्थान आज एशिया स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है और विभिन्न देशों के प्रतिनिधि यहाँ आकर इसकी कार्यप्रणाली को समझ रहे हैं तथा अपने देशों में इस प्रकार के संस्थान स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहाँ प्रशिक्षित युवा देश और विदेश में रोजगार प्राप्त कर रहे हैं, जो इस मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में 1200 क्षमता वाले छात्रावास की सुविधा उपलब्ध है तथा बढ़ती मांग को देखते हुए समान क्षमता के नए छात्रावास का विस्तार किया जा रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत संत शिरोमणि रविदास जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने से हुई, जिसके बाद प्रतिनिधिमण्डल एवं संस्थान के कोर्स हेड एवं प्रिंसिपल हेड द्वारा एक-दूसरे को पद और भूमिका का परिचय दिया गया। सीईओ गिरीश शर्मा द्वारा संस्थान की उपलब्धियों और संरचना के संबंध में जानकारी दी गयी। प्रतिनिधि मण्डल को ऑडियो-विजुअल के माध्यम से संस्थान की विकास यात्रा और उपलब्धियों से अवगत कराया गया। प्रतिनिधिमण्डल ने मुख्य परिसर एवं सिटी परिसर की विभिन्न अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, ऑडिटोरियम, मीडिया कक्ष, पुस्तकालय और जीवन कौशल क्लब का भ्रमण किया गया। प्रतिनिधियों ने लाइव प्रदर्शन देखे और विद्यार्थियों से संवाद करते हुए प्रशिक्षण की व्यावहारिकता एवं गुणवत्ता की सराहना की। इस दौरान करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ का शुभारंभ किया गया। साथ ही लीडरशिप मास्टर क्लास में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र एवं प्रोत्साहन वाउचर प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसी क्रम में अंकित प्रजापति को इंडिया स्किल्स प्रतियोगिता 2025-26 में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने सिटी परिसर में प्रिसिजन इंजीनियरिंग से संबंधित सीएनसी एवं पारंपरिक प्रयोगशालाओं का गहन अवलोकन किया। हब एवं स्पोक मॉडल के अंतर्गत विभिन्न औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों द्वारा प्रस्तुति दी गई, जिसमें विकेन्द्रीकृत प्रशिक्षण प्रणाली को स्थानीय उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप संचालित किए जाने की जानकारी साझा की गई। संवाद सत्र में प्रशिक्षण प्रक्रियाओं, पाठ्यक्रम संरचना, उद्योग सहभागिता और प्लेसमेंट व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई। संस्थान के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. गिरीश शर्मा ने आगामी वैकल्पिक पाठ्यक्रमों की जानकारी साझा की, वहीं प्रतिनिधिमंडल ने भी अपने क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क को प्रस्तुत किया, जिससे दोनों पक्षों के बीच ज्ञान और श्रेष्ठ प्रथाओं का आदान-प्रदान हुआ। इस अवसर पर उन्नत नेटवर्किंग एवं प्रणाली प्रशासन पाठ्यक्रम के अंतर्गत सिस्को नेटवर्किंग अकादमी का शुभारंभ किया गया, जो वैश्विक स्तर की प्रशिक्षण सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागृह में आयोजित दोपहर भोज के दौरान प्रतिनिधिमंडल और अधिकारियों के बीच सार्थक संवाद हुआ। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझा और विशेष रुचि दिखाई। कार्यक्रम के अंत में प्रतिनिधिमंडल द्वारा वृक्षारोपण किया गया, जो सहयोग और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के प्रमुख सचिव मनीष सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल में तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास प्राधिकरण के निदेशक गिल्बर्ट एम. कास्त्रो, स्टीफन आई. सीज़र, एशियन विकास बैंक की शिक्षा क्षेत्र की प्रधान परियोजना अधिकारी श्रीमती पूनम शर्मा भाम्बरी तथा आईपीई ग्लोबल के सदस्य सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे।  

देवास पुलिस की नवाचार पहल “पुलिस चौपाल” को सीएम एक्सीलेंस अवार्ड

भोपाल.  मध्यप्रदेश पुलिस के लिए यह एक महत्वपूर्ण एवं गौरवपूर्ण उपलब्धि है कि जिला देवास पुलिस द्वारा संचालित सामुदायिक पुलिसिंग आधारित नवाचार पहल “पुलिस चौपाल” को वर्ष 2025 के लिए सीएम एक्सीलेंस (इनोवेशन) अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान आज 21 अप्रैल को आयोजित सिविल सेवा दिवस के अवसर पर आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में प्रदान किया गया। कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही मुख्य सचिव अनुराग जैन, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा, अपर मुख्य सचिव (सामान्य प्रशासन विभाग), प्रशासन अकादमी के वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न सेवाओं के वरिष्ठ आईएएस, आईपीएस एवं आईएफएस अधिकारी उपस्थित रहे। “सीएम एक्‍सीलेंस अवार्ड” के अंतर्गत विभिन्न विभागों के उत्कृष्ट नवाचारों को सम्मानित किया गया। इसी क्रम में देवास पुलिस की पहल “सामुदायिक पुलिसिंग को सशक्त बनाने हेतु ‘पुलिस चौपाल’ अभियान” को नागरिक सेवा प्रदाय, सूचना प्रौद्योगिकी एवं सुशासन श्रेणी में चयनित किया गया। इस उपलब्धि के लिए पुलिस अधीक्षक देवास पुनीत गेहलोत एवं प्रधान आरक्षक शिवप्रताप सिंह सेंगर (क्रमांक 770) को संयुक्त रूप से 1 एक लाख रूपए की राशि, प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। देवास पुलिस की “पुलिस चौपाल” पहल जन सहभागिता आधारित स्मार्ट पुलिसिंग का एक प्रभावी मॉडल है, जिसने न केवल अपराध नियंत्रण में उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं, बल्कि पुलिस एवं जनता के बीच विश्वास, समन्वय एवं सहभागिता को भी सुदृढ़ किया है। “पुलिस चौपाल” पहल के अंतर्गत 01 नवम्बर 2024 से 28 फरवरी 2026 की अवधि में देवास पुलिस द्वारा व्यापक जनसंपर्क एवं जागरूकता अभियान संचालित किया गया, जिसके तहत कुल 2807 पुलिस चौपालों का आयोजन कर लगभग 94 हजार 393 नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से जागरूक किया गया। “ऑपरेशन त्रिनेत्रम” के माध्यम से लगभग 10 हजार CCTV कैमरों की स्थापना कर 46 ग्राम पंचायत एवं 2 नगर पंचायतों को पूर्ण CCTV कवरेज में लाया गया, जिससे सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ किया गया। सायबर अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में भी इस पहल के उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं। पुलिस चौपालों के माध्यम से सायबर जागरूकता अभियान चलाकर 214 संभावित डिजिटल अरेस्ट की घटनाओं को रोका गया तथा सायबर फ्रॉड में खोई हुई राशि में से लगभग 2 करोड़ 14 लाख रूपए की वापसी सुनिश्चित की गई। इसके साथ ही डिजिटल कम्युनिटी नेटवर्क को सशक्त करते हुए प्रत्येक ग्राम स्तर पर लगभग 1100 व्हाट्सएप समूहों का गठन किया गया, जिनसे लगभग 22 हजार युवाओं को जोड़ा गया, जिससे अपराधों के त्वरित अनावरण में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई। “पुलिस चौपाल” पहल के सकारात्मक प्रभाव से जिले में हत्या, हत्या के प्रयास, छेड़छाड़ तथा महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इसके साथ ही चोरी के मामलों में भी गिरावट आई है, जबकि संपत्ति संबंधी अपराधों में रिकवरी दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। समारोह का समापन मध्यप्रदेश पुलिस बैंड द्वारा राष्ट्रगान की गरिमामयी प्रस्तुति के साथ हुआ।  

देश में मध्यप्रदेश तेजी से उभरता प्रदेश – मुख्य सचिव जैन

भोपाल.  मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा है कि देश में मध्यप्रदेश तेजी से उभरता दूसरा राज्य है। मुख्य सचिव जैन मंत्रालय में मंगलवार को भारतीय विदेश सेवा के अधिकारियों के साथ चर्चा कर रहे थे। अधिकारियों का यह दल अध्ययन के लिए मध्यप्रदेश आया हैं। प्रशासन अकादमी के संचालक मुजीबुर्रहमान खान भी इस अवसर पर मौजूद थे। मुख्य सचिव जैन ने बताया कि मध्यप्रदेश हर क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहा है। यहां 24×7 उद्योगों के लिए बिजली उपलब्ध है और इस मामले में प्रदेश सर-प्लस इलेक्ट्रिीसिटी वाला है। उन्होंने बताया कि सिंचाई भी अब 55 लाख हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में हो रही है, जो रिकार्ड है। उन्होंने कृषि उत्पादन में भी मध्यप्रदेश के दलहन-तिलहन उत्पादन आदि में अग्रणी होने की जानकारी दी। मुख्य सचिव जैन ने बताया कि मध्यप्रदेश की प्रति व्यक्ति आय में भी काफी बढ़ात्तरी हुई है। मुख्य सचिव जैन ने गत वर्ष उद्योग एवं निवेश तथा इस वर्ष को कृषि वर्ष मनाने की मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए मध्यप्रदेश में अधोसरंचना के विकास और आईटी सहित विभिन्न क्षेत्रों में आ रहे निवेश की जानकारी दी। उन्होंने ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट के दौरान 18 नीतियों में हुए सकारात्मक बदलाव और उससे बदले औद्योगिक परिवेश की जानकारी दी। मुख्य सचिव जैन ने प्रदेश के विभिन्न अंचलों की विविधता, वहां की बोली-खानपान आदि की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के नेशनल पार्क हों, विभिन्न धार्मिक और पर्यटन स्थलों आदि के विकास से अब करोड़ो पर्यटक यहां आते हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश की समृद्ध परम्परागत कला, हस्तकला आदि की भी चर्चा की। मुख्य सचिव जैन से भेंट करने वालों में टोक्यो की भारत एबेंसी से सुउदिता गौरव, सिंगापुर हाई कमीशन में पदस्थ अनिकेत चंद्रहास पाटकर, काउंसलेट जनरल ऑफ इंडिया न्यून्यार्क से सुश्रुति पांडे और एस.एस आई एफ से ऋृषभ चौधरी शामिल थे।  

ग्वालियर की बेटी अनुष्का शर्मा बनी मध्यप्रदेश की नारी शक्ति की वैश्विक प्रतीक

भोपाल.  कहते हैं कि जब अटूट संकल्प और सही मार्गदर्शन से प्रतिभा हासिल होती है, तो इतिहास रचा जाता है। ग्वालियर की गलियों से निकलकर दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान तक का सफर तय करने वाली अनुष्का शर्मा की कहानी आज देश की हर उस बेटी के लिए मिसाल है, जो अपनी आंखों में बड़े सपने संजोती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया स्नेहिल स्वागत, कहा बेटियां बनें प्रेरणास्त्रोत अनुष्का की सफलता के सफर में एक अविस्मरणीय और गौरवशाली पल तब जुड़ा जब दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर टी-20 सीरीज खेलने जा रही भारतीय महिला टीम में उनके चयन की घोषणा हुई। संयोगवश उसी दिन ग्वालियर प्रवास पर आए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर एयरपोर्ट पर अनुष्का और उनके पिता श्री बृजमोहन शर्मा का आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने अनुष्का का मुँह मीठा कराया और स्नेहिल बधाई व शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आप मध्यप्रदेश और देश का नाम रोशन कर अन्य बालिकाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनें। मुख्यमंत्री के ये शब्द उस समय हकीकत में बदल गए जब अनुष्का ने दक्षिण अफ्रीका की धरती पर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैदान में कदम रखा। अतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 'डेब्यू': कप्तान हरमनप्रीत ने सौंपी नीली कैप प्रदेश सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण को समर्पित “नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा” मनाया जा रहा है। इसी पावन पखवाड़े के दौरान अनुष्का ने मध्यप्रदेश का मान पूरे विश्व में बढ़ा दिया। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी-20 सीरीज के पहले ही मुकाबले में उन्हें भारतीय टीम की 'प्लेइंग इलेवन' में शामिल किया गया। मैदान पर एक भावुक और गर्व भरे पल के बीच, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की दिग्गज कप्तान हरमनप्रीत कौर ने अनुष्का को 'टीम इंडिया' की कैप पहनाकर उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण (डेब्यू) कराया। नीली जर्सी और सिर पर भारतीय कैप पहने अनुष्का का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैदान पर उतरना प्रदेश की नारी शक्ति के बढ़ते कदमों का वैश्विक प्रतीक बन गया। इस गौरवमयी क्षण के साथ ही ग्वालियर की अनुष्का वह चमकती सितारा बन गईं, जिसकी गूंज अब पूरी दुनिया सुनेगी। मध्यप्रदेश क्रिकेट एकेडमी ने तराशा है अनुष्का की प्रतिभा को अनुष्का के भीतर छुपी क्रिकेट की धार को तराशने में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शिवपुरी में संचालित महिला क्रिकेट एकेडमी का अमूल्य योगदान है। भारत की इस एकमात्र सरकारी महिला एकेडमी के अनुशासित प्रशिक्षण और सुविधाओं ने अनुष्का को वह मंच प्रदान किया, जहाँ से उन्होंने घरेलू क्रिकेट से लेकर डब्ल्यूपीएल (वूमेंस प्रीमियर लीग) तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। मध्यप्रदेश की इस क्रिकेट अकादमी की अनुष्का सहित तीन खिलाड़ी इस साल डब्ल्यूपीएल में चुनी गईं हैं। जब छत बनी 'कुरुक्षेत्र' और पिता बने सारथी अनुष्का का यह सफर आसान नहीं था। कोरोना काल में जब मैदानों पर ताले लटके थे, तब उनके पिता श्री ब्रजमोहन शर्मा ने अपनी बेटी के सपनों को टूटने नहीं दिया। उन्होंने ग्वालियर के माधवनगर में स्थित अपने घर की छत पर ही प्रेक्टिस के लिये नेट लगवा दिया। साथ ही एक हिस्से को जिम में बदल दिया। तपती धूप और अनिश्चितता के बीच अनुष्का की 'फिरकी' और 'बल्ले' की गूंज उसी छत से शुरू होकर आज अंतरराष्ट्रीय स्टेडियमों तक जा पहुंची है। अनुष्का का क्रिकेट के प्रति रुझान अपने भाई को क्रिकेट खेलते देखकर पैदा हुआ और ठान लिया कि मुझे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर बनना है। कठिन दृढ़ इच्छाशक्ति की बदौलत पाई सफलता वर्ष 2022 में मैदान पर खेलते समय बेहोश होने और डेंगू जैसी बीमारी को मात देने वाली अनुष्का ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। डब्ल्यूपीएल 2026 में गुजरात जायंट्स की ओर से 45 लाख रुपये की सबसे महंगी अनकेप्ड खिलाड़ी बनना हो या मध्य प्रदेश को सीनियर वनडे ट्रॉफी में चैंपियन बनाना, अनुष्का ने हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है। अनुष्का शर्मा का भारतीय टीम तक का सफर केवल एक खिलाड़ी की जीत भर नहीं है, बल्कि यह उस पिता के विश्वास, एकेडमी के समर्पण और खुद अनुष्का के आत्म-अनुशासन की सामूहिक जीत है। आज पूरा ग्वालियर व मध्यप्रदेश अपनी इस 'क्रिकेट क्वीन' पर गर्व कर रहा है। अनुष्का की उपलब्धियों के मुख्य पड़ाव इंटरनेशनल डेब्यू: दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टी-20 मैच में भारतीय टीम का हिस्सा बनीं। डब्ल्यूपीएल स्टार: गुजरात जायंट्स के लिए डेब्यू मैच में ही 30 गेंदों में 44 रनों की साहसी पारी। एमपीएल 2025: 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' सहित सर्वाधिक व्यक्तिगत पुरस्कारों की विजेता। नेतृत्व क्षमता: मध्य प्रदेश अंडर-19 और सीनियर टीम की कप्तान व उपकप्तान के रूप में शानदार रिकॉर्ड।  

जबलपुर में खराब रिजल्ट पर 33 शिक्षकों को नोटिस, तीन दिन का अल्टीमेटम दिया, जनशिक्षकों ने किया विरोध

 जबलपुर  कक्षा पांचवीं और आठवीं के हाल ही में घोषित परीक्षा परिणामों को लेकर जिले में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी क्रम में 33 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें 14 जनशिक्षक और 19 प्राथमिक शिक्षक शामिल हैं। नोटिस में क्या कहा गया जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षकों को पहले ही पाठ्यक्रम समय पर पूरा करने, छात्रों से नियमित अभ्यास कराने और बेहतर परीक्षा परिणाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कई स्कूलों के परिणाम जिले में सबसे कमजोर पाए गए। प्रशासन का मानना है कि इस लापरवाही के कारण जबलपुर जिला राज्य स्तर पर पिछड़े जिलों की श्रेणी में आ गया है, जो चिंता का विषय है। इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित शिक्षकों से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। लापरवाही पर सख्त रुख शिक्षा विभाग ने इसे केवल सामान्य चूक नहीं, बल्कि जिम्मेदारी में कमी माना है। अधिकारियों के अनुसार, छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। इसलिए कमजोर प्रदर्शन वाले स्कूलों और उनसे जुड़े शिक्षकों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जनशिक्षकों का विरोध, निर्णय पर सवाल दूसरी ओर, इस कार्रवाई को लेकर जनशिक्षकों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि अभी घोषित परीक्षा परिणाम अंतिम नहीं हैं। वर्तमान में री-टोटलिंग और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है, जिससे कई छात्रों के अंक बढ़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि कई विद्यार्थी मात्र एक-एक अंक से असफल हुए हैं, ऐसे में पुनर्मूल्यांकन के बाद परिणाम में सुधार संभव है। इसके अलावा 15 जून के बाद आयोजित होने वाली द्वितीय परीक्षा को भी अंतिम परिणाम में शामिल किया जाना चाहिए, तभी वास्तविक स्थिति सामने आएगी। कार्रवाई पर उठे सवाल जनशिक्षकों ने यह भी सवाल उठाया है कि कार्रवाई केवल जनशिक्षकों और कुछ प्राथमिक शिक्षकों तक ही सीमित क्यों रखी गई है। उनका कहना है कि ब्लॉक रिसोर्स सेंटर (BRC) और संकुल प्राचार्य स्तर के अधिकारियों को इस दायरे से बाहर रखा गया है, जबकि शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सामूहिक होती है। शिक्षकों का तर्क है कि यदि जवाबदेही तय करनी है तो सभी संबंधित स्तरों पर समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। अतिरिक्त कार्यों से प्रभावित हुई पढ़ाई शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछले चार महीनों के दौरान उन्हें एसआइआर जैसे प्रशासनिक कार्यों में प्रतिदिन 10 से 12 घंटे तक व्यस्त रखा गया। इससे नियमित कक्षा शिक्षण प्रभावित हुआ। उनका कहना है कि जब शिक्षक कक्षा में पर्याप्त समय नहीं दे पाएंगे, तो छात्रों के प्रदर्शन पर असर पड़ना स्वाभाविक है। फिलहाल शिक्षा विभाग पूरे मामले की समीक्षा कर रहा है। शिक्षकों के जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि छात्रों के हित में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।